ओलिंपिक के बिच, ऐसे हो रहा प्रॉस्टिट्यूशन.

prostituion 1ब्राजील के रियो डे जेनेरियो में ओलिंपिक के दौरान प्रॉस्टिट्यूशन में बच्चे भी शामिल हैं। वेन्यू के नजदीक बीच पर आठ साल तक की बच्चियां भी प्रॉस्टिट्यूशन कर रही हैं। एक्सपर्ट्स और चाइल्ड वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन्स के मुताबिक, हजारों बच्चे इस काम में शामिल हैं।

– प्रॉस्टिट्यूशन रिंग में फंसी ऐसी ही एक लड़की का नाम है एना गैब्रिएला। उसकी उम्र 15 साल है।
– 2014 वर्ल्ड कप के दौरान स्नैक बार में में काम दिलवाने के बहाने से एक महिला उसे रियो ले आई थी।
– लेकिन उसे रियो के मशहूर कोपाकबाना पैलेस होटल के सामने स्थित स्लम में जबरदस्ती रखा गया।
– एना से प्रॉस्टिट्यूशन करवाया जाता है। कई बार उसे एक दिन में आठ-आठ कस्टमर्स के साथ सोना पड़ता है।
– एक चैरिटी के मुताबिक, ब्राजील में चाइल्ड प्रॉस्टिट्यूशन के एवज में बच्चों को 1000 रुपए तक दिए जाते हैं। इनमें से ज्यादातर बच्चियों की फैमिली ही उनसे ये काम करवाती है।
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कहां से आती हैं ये लड़कियां?
– हालांकि, हर प्रॉस्टि्यूशन के हर मामले में शामिल लड़की की कहानी अलग है। लेकिन इसमें शामिल सभी लड़कियां गरीब और छोटे घरों की हैं, जिन्हें रियो में नौकरी दिलवाने के नाम पर लाया जाता है।
– यूनाइटेड नेशन ऑफिस ऑन क्राइम और ड्रग के मुताबिक, प्रॉस्टिट्यूशन में 10-11 साल की लड़कियां भी शामिल हैं।
– इनमें से कई लड़कियां ऐसी हैं जो घर पर सेक्शुअल अब्यूज और हिंसा का शिकार हुई होती हैं।
इनकी लाइफ कैसी है?
– 15 साल की मारिया रियो के स्लम में रहती है। उसे धमकाया और पीटा जाता है। उसे कम खाना दिया जाता है और हर रात ज्यादा पैसे कमाने का दबाव डाला जाता है।
– इन लड़कियों के वेलफेयर के लिए काम करने वाले एक शख्स ने बताया कि प्रॉस्टिट्यूशन के दौरान लड़कियों को ड्रग भी दिया जाता है। कई बार इन्हें इतना पीटा जाता है कि ये ठीक से चल तक नहीं पाती।
– 12 साल की लीलाह भी प्रॉस्टिट्यूशन करती है और रियो के नजदीक से गुजरने वाले बिजी हाईवे BR116 पर प्रॉस्टिट्यूशन करती है। उसके ज्यादातर कस्टमर्स ट्रक ड्राइवर्स होते हैं।
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कौन हैं ट्रैफिकर्स
– लड़कियों की ट्रैफिकिंग करने वालों में ज्यादातर लोकल क्रिमिनल्स हैं। इनमें महिलाएं भी शामिल हैं।
– ये ट्रैफिकिंग के अलावा ड्रग का भी अवैध कारोबार करते हैं।
– ट्रैफिकर्स में ज्यादातर पुरुष हैं, लेकिन 43% महिलाएं भी हैं।
– यूनाइटेड नेशन्स ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में प्रॉस्टिट्यूशन ट्रैफिकिंग रैकेट चलाने वाले महिलाओं की संख्या में 41 फीसदी इजाफा हुआ है।
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लड़कियां ट्रैफिकर्स के कब्जे से निकल क्यों नहीं पाती?
– जब इन लड़कियों को बड़े शहरों में लाया जाता है, तो इनमें से कई वापस अपने घर नहीं जा पातीं।
– इन्हें जबरन रखा जाता है और दूसरे से तीसरे कस्टमर को बेचा जाता है। कई बार इन्हें दूसरे देशों में भी बेचा जाता है।
– लंदन के वेश्यालयों में काम करने वाली कई लड़कियां ब्राजील की हैं, जिनमें से कई जबरदस्ती यहां लाई गई होती हैं।
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