गृहमंत्री के निकटतम रिश्तेदार पार्षद अतुल चंडालिया पर महिला से छेडछाड का मामला दर्ज।

उदयपुर। बोहरा समुदाय की एक महिला ने राज्य के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के निकटतम रिश्तेदार व् वार्ड एक के पार्षद अतुल चंडालिया व् उसके साथियों पर छेड़छाड़ व् अश्लील हरकते करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करवाया है। महिला ने कोर्ट में इस्तगासा दायर कर मामला दर्ज करवाया है।
जानकारी के मुताबिक़ पीड़ित महिला ने बताया कि ४ अक्टूबर को वह मोपेड पर पुत्री को स्कूल से लेकर लौट रही थी। रास्ते में बाइक पर पार्षद अतुल चंडालिया, सावरिया डेयरी संचालक देवाली निवासी राजेन्द्रसिंह, तुषार मेहता, कमलेश नाई,राजु नाई बीच रास्ते देवाली रोड पर बाइक पर आए और उसका पिछा कर रोक अश्लील हरकते करना शुरू कर दिया। इस पर महिला दौड कर अपने पति की दुकान पर पहुंची तो पिछा कर रहे आरोपी वहां भी आ पहुंचे जहां राजेन्द्र ने हाथ पकड कर मेरे से दोस्ती करने की बात कही। इनकार करने पर आरोपी मुझे दुकान के अंदर ले गए जहां मेरे साथ अश्लील हरकते की तथा गाली गलोज की। इसका विरोध कर चिल्लाने पर क्षैत्रवासियों की भीड इकठ्ठा होने पर धमकाते हुए आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है। गौरतलब है कि आरोपी अतुल चंडालिया गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के निकट रिश्तेदार है, भाजपा आंबेडकर मंडल के अध्यक्ष और वार्ड एक के पार्षद है। बताया जा रहा है कि महिला पहले थाणे में रिपोर्ट दर्ज करवाने गयी लेकिन गृहमंत्री के समधी के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज करने से हाथ खिंच लिए तब महिला को कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। कोर्ट में इस्तगासा दायर किया कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए है।

गुंडा पहले नाबालिग लड़की को उठा ले गया,अब परिजनों को धमका रहा है – पुलिस डेड महीने से सिर्फ जांच कर रही है।

उदयपुर। शहर में पुलिस के सुस्त रवैये के चलते एक नाबालिग अगवा लड़की का डेढ माह बाद भी पता नहीं लगाया जा सका। आरोपी के हौंसले इतने बुलंद है कि पीड़ित परिवार को आए दिन फोन पर धमकियां दे रहा है, लेकिन पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की। इसी वजह से पीड़ित परिवार को बुधवार जिला पुलिस अधीक्षक की शरण लेनी पड़ी। मामला शहर के प्रतापनगर थाने का है। जहां खेमपुरा में रहने वाले एक मुस्लिम परिवार की 14 साल बेटी को इलाके का ही बदमाश देवराज हरिजन डेढ माह पूर्व उठाकर ले गया। इस मामले में पीड़िता के पिता की ओर से थाने में एफआईआर भी दर्ज करवाई गई लेकिन पुलिस की ओर से युवती को ढुण्ढने का कोई भी प्रयास नहीं किया गया। वहीं दूसरी तरफ आरोपी आए दिन युवती की माता और पिता को फोन करके है भद्दी भद्दी गालियां देते हुए बेटी के उसके पास होने की बात भी कह रहा है। वहीं गुण्डे देवराज के साथियों ने युवती के मामा के साथ भी पिछले दिनों मारपीट की थी, लेकिन उसकी भी कोई सुनवाई नहीं हो पाई। बुधवार को पीड़ित परिवार के साथ मुस्लिम महासंघ के पदाधिकारी जिला पुलिस अधीक्षक,जिला कलेक्टर और जिला पुलिस महानिरीक्षक से मिले और उचित कार्रवाई की मांग की। इस दौरान मुस्लिम महासंघ संस्थापक हाजी मोहम्म्ेद बक्स, ईरफान मुल्तानी, के.आर.सिद्धीकी, शफी इंजीनियर, नासिर सहित समाज के कई मोतबिर लोग मौजूद थे। पीड़ित परिवार के साथ षहर के आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भी मौजूद थे जिन्होंने जिला कलेक्टर बिश्णुचरण मल्लिक से भी मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई।

हथियारों के फर्जी लाइसेंस बनवाने के मामले में शहर के एक और रसूखदार को एटीएस ने किया गिरफ्तार

उदयपुर. जम्मू कश्मीर से हथियारों के फर्जी लाइसेंस बनाने के मामले में एटीएस ने आज फिर बड़ी कारवाई करते हुए फर्जी लाईसेंस बनाकर अवैध हथियार रखने के मामले के एक बड़े रसूखदार को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि यह हाईप्रोफाईल रसूखदार मल्लाह तलाई क्षेत्र में रहता है और शहर में इसका लम्बा चैड़ा कारोबार भी है। भूपालपुरा थाना क्षेत्र में स्थित होटेल अमृत महल में भी इसकी साझेदारी बताई जा रही है। एटीएस सूत्रों की माने तो उदयपुर निवासी अजमल खान को बुधवार को गिरफ्तार किया है। जिसके पास से फर्जी लाईसेंस और अवैध हथियार भी जब्त कर लिया गया हैं गौरतलब है कि जम्मू कष्मीर से लाईसेंस बनाने के मामले में अब तक दर्जनों लोग गिरफ्तार हो चुके है जो अभी जमानत पर बाहर घुम रहे है, लेकिन इस मामले में इन लोगों पर फर्जीवाड़ा, 420, अवैध तरीके से हथियार रखने के साथ देषद्रोह का मुकदमा चलने की संभावनाएं भी जताई जा रही है। खैर अब एटीएस गिरफ्तार अजमल खान से इस पूरे मामले में गहनता से पूछताछ कर रही है।

रीट 11 फरवरी को, 70 प्रतिशत अंक जुड़ेंगे, 6 से शुरू होंगे आवेदन

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न्यूज़ पोस्ट .माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर बीएसटीसी एवं बीएड डिग्रीधारियों के लिए प्रदेश में चौथी बार शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन करेगा। परीक्षा अगले साल 11 फरवरी को होगी। 6 नंवबर से ऑनलाइन आवेदन भरे जाएंगे।
इस बार होने वाली पात्रता परीक्षा के 70 प्रतिशत अंक ग्रेड थर्ड शिक्षक भर्ती में जुड़ेंगे। इसलिए कंपीटिशन बढ़ जाएगा। एनसीटीई की ओर से जारी गाइडलाइन में शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए है। पिछले वर्षों में आयोजित की गई पात्रता परीक्षा में न्यूनतम अंकों में छूट देने के कारण विवाद बढ़े थे और मामला हाईकोर्ट होते सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इस बार रीट परीक्षा में न्यूनतम अंक 60 प्रतिशत निर्धारित किए है। इस बार होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा में प्रदेश के करीब 8 लाख बीएसटीसी एवं बीएड अभ्यर्थियों के शामिल होने की उम्मीद है। पिछली बार 2015 में आयोजित हुई रीट परीक्षा में करीब 5 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। लेकिन, इस बार यह परीक्षा दो वर्ष के अंतराल में होने से संख्या बढ़ेगी।
वहीं, अभ्यर्थियों को आवेदन में ज्यादा शुल्क भी चुकाना होगा। बोर्ड ने स्तर प्रथम अथवा स्तर द्वितीय (केवल एक परीक्षा) के लिए 400 से शुल्क बढ़ाकर 550 रुपए कर दिया है। साथ ही स्तर प्रथम एवं स्तर द्वितीय (दोनों परीक्षाओं) के लिए 600 से बढ़ाकर 750 रुपए कर दिया है। इसमें भी 150 रुपए शुल्क की वृद्धि की गई है। साल 2011 2013 में आरटेट और इसके बाद 2015 में रीट का परीक्षा शुल्क समान था। केवल एक स्तर की परीक्षा दे रहा था तो उसके लिए 400 रुपए शुल्क तय किया था।

दो स्तर के लिए होगी परीक्षा
-यह परीक्षा दो स्तर के लिए कराई जाएगी। स्तर प्रथम कक्षा 1 से 5वीं तक के लिए और स्तर द्वितीय कक्षा 6 से 8वीं तक के लिए शिक्षकों की पात्रता के लिए होगी।
– दोनों स्तरों की परीक्षा 11 फरवरी 2018 को होगी। प्रथम पारी सुबह 10 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक, द्वितीय की परीक्षा और द्वितीय पारी दोपहर 12.30 बजे से शाम 5 बजे तक होगी।
– अभ्यर्थी को रीट परीक्षा परिणाम की घोषणा दिनांक तक न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता उत्तीर्ण होना आवश्यक है। रीट 2017 की पात्रता परीक्षा में उत्तीर्ण सभी अभ्यर्थियों को रीट कार्यालय द्वारा प्रमाण पत्र जारी होगा, जिसकी वैधता परीक्षा परिणाम जारी होने की तिथि से 3 वर्ष की होगी।
– पूर्व में आरटेट और रीट उत्तीर्ण परीक्षार्थी चाहे तो रीट 2017 के लिए आवेदन कर सकते है।
– गजट नोटिफिकेशन के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों के अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 36 प्रतिशत उत्तीर्णांक अर्जित करना अनिवार्य है।

कॉलेज छात्रों के लिए छात्रवृत्ति के ऑनलाइन आवेदन शुरू

न्यूज़ पोस्ट. कॉलेजोंमें पढ़ रहे छात्र-छात्राओं के मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति योजना के साथ चार अन्य योजनाओं के आवेदन पत्र भरना शुरू हो गए हैं। आवेदन इस बार 9 नवंबर तक ऑनलाइन भरे जाएंगे। इसके लिए ऑनलाइन स्कॉलरशिप पोर्टल चालू कर दिया गया है।
आवेदन के लिए भामाशाह कार्ड एसएसओ आईडी होना अनिवार्य होगा। कॉलेज शिक्षा विभाग की ओर से सीएम स्कॉलरशिप सहित मेधावी छात्रा स्कूटी योजना, देवनारायण छात्रा स्कूटी वितरण और प्रोत्साहन राशि योजना, विधवा परित्यक्ता मुख्यमंत्री (बीएड) संबल योजना के तहत आवेदन मांगे गए हैं। कॉलेज शिक्षा में इन योजनाओं के आवेदन पहली बार ऑनलाइन हो रहे हैं, इसलिए गाइडलाइन जारी की गई है। ये आवेदन सरकारी, निजी तकनीकी शिक्षा कॉलेजों के विद्यार्थियों द्वारा किए जा सकेंगे। इसके लिए 12वीं इसी वर्ष राजस्थान बोर्ड से 60 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण होना, राजस्थान का मूल निवासी होना और वार्षिक आय 2.50 लाख से कम होना पात्रता है।
छात्रवृति आवेदन के लिए पोर्टल पर पंजीकरण करने पर छात्र को यूजर आईडी पासवर्ड मिलेगा। इससे वह कभी भी अपने आवेदन की स्थिति जानकर आगे किसी पाठ्यक्रम में छात्रवृति के लिए आवेदन कर सकेगा। पासवर्ड हासिल करने के बाद ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिसमें वांछित जानकारी अनिवार्य रूप से भरनी होगी। फिर सभी जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन छात्रवृति पोर्टल पर अपलोड करके आवेदन पत्र सेव करना होगा। यदि विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक संस्थान का नाम पोर्टल पर दिखाई नहीं देता है तो उन्हें अपने कॉलेज में संपर्क करना होगा।

पहले अपडेट करनी होगी एसएसओ प्रोफाइल 
विद्यार्थियोंको अपना छात्रवृत्ति प्रोफाइल पंजीकृत करने से पहले अपनी एसएसओ आईडी प्रोफाइल अपडेट करनी होगी। इसमें अपनी जन्म दिनांक, मोबाइल नंबर, भामाशाह आईडी, आधार नंबर आदि सूचना अंकित करनी होगी। एसएसओ आईडी एवं छात्रवृत्ति प्रोफाइल केवल एक बार ही तैयार करनी होगी। इसके आधार पर ही विद्यार्थी सरकार की अन्य योजनाओं में आवेदन कर सकेंगे।

इन दस्तावेजों की जानकारी जरूरी 

-आधार संख्या या आधार पंजीकरण संख्या रसीद सहित।
– भामाशाह आईडी अथवा भामाशाह पंजीकरण संख्या रसीद सहित।
– अपनी बैंक खाता संख्या, आईएफएससी कोड, एमआईसीआर कोड, बैंक शाखा का नाम।
– शैक्षणिक संस्थान का नाम, जहां विद्यार्थी अध्ययनरत है।
– अपने पाठ्यक्रम का नाम।
-वर्तमान शैक्षणिक सत्र में प्रवेश की दिनांक।
– स्वयं का ई-मेल आईडी।
– गत अंतिम परीक्षा की अंकतालिका।
– अन्य छात्रवृति नहीं लेने का शपथ पत्र (नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर)
– आय का घोषणा पत्र।
-मूल निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, 10वीं की अंकतालिका।
-विवाहित या तलाकशुदा महिला की स्थिति में संबंधित प्रमाण पत्र।
-मदवार फीस की रसीद संख्या, दिनांक एवं मदवार राशि का विवरण।

जनता विकास को तरसती रही विधायकों का पैसा खातों से बाहर ही नहीं निकला – काम तो किया नहीं लाखों का फर्जी भुगतान उठाया

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सीएजी की रिपोर्ट में खुलासा | 2011 से 16 तक एमएलए लेड का एक हजार करोड़ रुपया जिला परिषदों के खातों में ही पड़ा रहा 

न्यूज़ पोस्ट. जनतासे जुड़े विकास कार्यों के लिए विधायकों को मिलने वाला फंड का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हो पा रहा। जो पैसा खर्च हो भी रहा है उसमें भी भारी गड़बड़ियां सामने रही हैं। मंगलवार को विधानसभा में पेश की गई स्थानीय निकाय की वार्षिक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया कि 2011 से मार्च 2016 तक एमएलए लेड की 21 प्रतिशत राशि ही खर्च की जा सकी। मार्च 2016 के आखिर में एमएलए लेड में 1093 करोड़ रुपए जिला परिषद के खातों में अनुपयोगी पड़ी थी। सीएजी ने एमएलए लेड को लेकर पांच जिलों की सेंपल ऑडिट की। इसमें बीकानेर, हनुमानगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर राजसमंद शामिल हैं। इन पांचों जिलों में 2011 से 2016 तक एमएलए लेड का कुल 23 प्रतिशत फंड ही इस्तेमाल किया जा सका 122 करोड़ रुपए जिला परिषदों के खातों में अनुपयोगी पड़े रहे। इसमें बांसवाड़ा में 26 करोड़, बीकानेर में 30 करोड़, डूंगरपुर में 20 करोड़, हनुमानगढ़ में 17 करोड़ रुपए खर्च नहीं किए गए।

काम हुआ ही नहीं लाखों का भुगतान उठा लिया
बांसवाड़ा,बीकानेर राजसमंद में एमएलए लेड से करवाए गए कामों में भारी गड़बडिय़ां मिलीं। इसमें 28 लाख के भुगतान फर्जी पाए गए। जांच में पता चला कि जिन कामों का हवाला देते हुए यह भुगतान उठाया गया वह हुए ही नहीं। कई काम ऐसे किए गए जो एमएलए लेड में स्वीकृत ही नहीं थे। बांसवाड़ा राजसमंद में करीब 92 लाख रुपए सीमेंट की सड़कों के निर्माण के लिए खर्च किए गए। जांच में पता चला कि इनमें 20 लाख का फर्जी भुगतान किया गया।

रेलवे की लूट – रोजाना 10 लोगों की जेब काट रहा है

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न्यूज़ पोस्ट. रेलवे रोजाना अपने 10 लाख यात्रियों को चूना लगा रहा है। रेलवे ट्रेनों के अंदर खानपान की वस्तुओं पर राउंड ऑफ फॉर्मूला लगा कर प्रति यात्री 5 रुपए तक अतिरिक्त वसूल रहा है। खानपान की वस्तुओं का मूल्य 5 रुपए के गुणक यानि 5, 10, 15 20 के हिसाब से वसूला जा रहा है। दैनिक भास्कर में छापी खबर के अनुसार रेलवे ने टिकट बुकिंग के बाद अब ट्रेन में सफर के दौरान खानपान की वस्तुओं पर जीएसटी लगाकर जो टैक्स पहले 8.66% था उसको बढ़ाकर 18% कर दिया और उसके बाद राउंडिंग ऑफ से दोहरी मार दे रही है। राउंडिंग ऑफ यह ऐसा खेल है, कि जिसमें अगर आपकी वस्तु 5 रु से 10 पैसे भी अधिक होती है तो ट्रेन में कैटरिंग कॉन्ट्रेक्टर आपसे सीधा 10 रुपए तक वसूलेगा। आरटीआई के जवाब में रेलवे ने राउंडिंग ऑफ फॉर्मूले के जरिए वस्तु के वास्तविक मूल्य से अधिक वसूलने की बात को स्वीकार किया है। आरटीआई एक्टिविस्ट सुजीत स्वामी ने रेलवे मंत्रालय से राउंडिंग ऑफ फॉर्मूले को लागू करने का कारण पूछा था। जवाब में रेलवे ने यह तर्क दिया कि यह बताना लोक सूचना की श्रेणी में नहीं आता है। राजस्थान के सुजीत स्वामी ने रेल मंत्रालय से यह जानकारी आरटीआई में मांगी थी। जिसके बाद मंत्रालय ने यह जानकारी दी थी। सुजीत ने बताया कि नोट बंदी के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने से राउंडिंग ऑफ और दुकानदारों द्वारा खुल्ले पैसों की जगह टॉफी इत्यादि देने पर विरोध करने की अपील की थी।

यह है सर्कुलर : सर्कुलरमें 1 जुलाई के बाद से रेलवे ने वास्तविक मूल्य पर 18% जीएसटी और राउंडिंग ऑफ के नाम पर 19.6 से 53.8 फीसदी की वृद्वि की है। जैसे यदि आप जयपुर से मुंबई दुरंतो में सफर कर रहे हैं। इस दौरान अगर आप ब्रेकफास्ट करते हैं। तो 34 रुपए के ब्रेकफास्ट के लिए आपको 32.3 फीसदी यानि 45 रुपए चुकाने होंगे, जबकि 18 फीसदी जीएसटी के साथ यह कीमत सिर्फ 40.12 रुपए होती है।

सोहराबुद्दिन-तुलसी एनकाउंटर केस : सीबीआई ने जबरन करवाया चार्ज फ्रेम, बहुत सी एप्लीकेशन हैं पेंडिंग

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न्यूज़ पोस्ट . सोहराबुद्दिन-तुलसी एनकाउंटर केस में मंगलवार को मुम्बई सेशन कोर्ट में रूटीन डेट पर ही सीबीआई ने जबरन ड्राफ्ट चार्ज देकर चार्ज फ्रेम की प्रक्रिया शुरू करवा दी। जबकि इस तारीख पर मामले में आरोपी बनाए गए कुछ अधीनस्थ पुलिस कर्मी मौजूद भी नही थे तथा कुछ अधीनस्थ पुलिस कर्मियों की हाई कोर्ट और ट्रॉयल कोर्ट में याचिकाएं पेंडिंग चल रही है। अधीनस्थ पुलिस कर्मियों के विरोध करने के बावजूद सीबीआई ने उनकी एक नही सुनी गई , चार्ज फ्रेम करवा दिया।
मंगलवार कोसोहराबुद्दिन-तुलसी एनकाउंटर केस में मुम्बई सेशन कोर्ट में तारीख थी। आरोपी बनाए गए कुछ अधीनस्थ पुलिस कर्मियों को छोड़कर बाकी सभी अधीनस्थ पुलिस कर्मी और अन्य आरोपी कोर्ट में मौजूद थे। तभी अचानक से सीबीआई ने डरा-धमका कर मामले में बरी हो चुके रसूखदार बीजेपी नेता औऱ आईपीएस अधिकारियों के दबाव में कुछ पुलिस कर्मियों को जबरन ड्राफ्ट चार्ज पकड़ा दिया और कोर्ट को यह कह दिया कि ड्राफ्ट चार्ज सभी अभियुक्तों को दे दिया है और सभी ने स्वीकार कर लिए हैं ऐसे में चार्ज फ्रेम की कार्रवाई शुरू कर सकते हैं। इस पर
कोर्ट में मौजूद कुछ अधिनस्थ पुलिस कर्मी जिनकी डिस्चार्ज एप्लीकेशन हाई कोर्ट में पेंडिंग हैं, उन्होंने चार्ज फ्रेम का विरोध किया और कोर्ट से प्रार्थना की कि उनके एप्लीकेशन हाई कोर्ट में पेंडिंग है इस पर कोर्ट ने उन्हें चार्ज फ्रेम की कार्रवाई से अलग रखकर बाकि आरोपी अधीनस्थ पुलिस कर्मियों के चार्ज फ्रेम कर दिए।

बिना चार्जशीट की कॉपी दिए कर दिए चार्ज फ्रेम, ट्रायल कोर्ट में याचिका लंबित
मामले में आरोपी बनाए कई अधीनस्थ पुलिस कर्मियों की ट्रायल कोर्ट में ही याचिका पेंडिंग चल रही है। अधीनस्थ पुलिस कर्मियों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में ट्रायल कोर्ट में याचिका लगाकर निवेदन किया था कि मामले की सी आई डी द्वारा पेश की गई 2 मुख्य चार्जशीट सहित कुल 5 चार्जशीट गुजराती भाषा मे है। इसकी अंग्रेजी/मराठी भाषा मे अनुवादित कॉपी उन्हें उपलब्ध करवाई जाए। ये सभी याचिकाएं लंबित होने के बावजूद आरोपी बनाए गए पुलिसकर्मियों को चार्जशीट की कॉपी दिए बगैर ही चार्ज फ्रेम कर दिए गए। इसके अलावा तत्कालीन इस्पेक्टर बाल कृष्ण चौबे और आईपीएस विपुल अग्रवाल की डिस्चार्ज एप्लीकेशन तो ट्रायल कोर्ट में ही पेंडिंग है।

वकील तक नहीं हैं -इन अधिनस्थ पुलिस कर्मियों के पास
कोर्ट में जिन अधिनस्थ पुलिस कर्मियों पर चार्ज फ्रेम किया गया उनके इतनी स्थिति भी नही है कि वे मुम्बई जैसे मंहगे शहर में रहकर एक वकील खड़ा कर ट्रायल कार्रवाई का सामना कर सकें। अधिकतर पुलिस कर्मियों के पास वकील भी नही है। सीबीआई ने डरा धमका कर रसूखदार नेता अफसरों के दबाव में चार्ज फ्रेम तो करवा दिए लेकिन बिना वकील के इस केस में ट्रायल लड़ना अधीनस्थ पुलिस कर्मियों के साथ नैसर्गिक न्याय के विपरीत होगा।

चार्ज शीट में नाम नही फिर भी हो गया चार्ज फ्रेम-
आकाओं को नुकसान न पहुँचे इसलिए सीबीआई ने उन दो कांस्टेबलो के भी चार्ज फ्रेम करवा दिए जिनक सीबीआईे चार्जशीट में नाम तक नही थे। मामले में बरी हो चुके आईपीएस राजकुमार पांड्यन के गनमैन संतराम और असिस्टेन्ट कांस्टेबल अजय परमार को सीबीआई ने चार्जशीट में आरोपी नही माना था और चार्जशीट में उनके खिलाफ कोई चार्ज नही थे। लेकिन बरी हो चुके आकाओं को बचाने उनके दबाव में सीबीआई ने मंगलवार को हांथो हाँथ दोनों कांस्टेबलों को चार्जशीट के कुछ सेलेक्टेड डाक्यूमेंट्स दिए औऱ चार्ज फ्रेम करवा दिए। दोनों ने कोर्ट से प्रार्थना भी की कि उन्हें केस में सीबीआई ने चार्जशीट में आरोपित तक नही माना है। उन्हें ये तक नही पता है कि चार्जशीट में क्या क्या है। हाई कोर्ट में अभी अवकाश चल रहा है। उन्हें हाई कोर्ट जाने की मोहलत दी जाए।

इन्हें किया ट्रायल कार्रवाई से अलग
हाई कोर्ट में इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान, एसआई हिमांशु सिंह, श्याम सिंह, डीएसपी आरके पटेल सहित बरी हो चुके आईपीएस डीजी बंजारा, राज कुमार पांड्यन और दिनेश एमएन, डीएसपी नरेंद्र अमीन की डिस्चार्ज एप्लीकेशन पेंडिंग चल रही है। अभी मामले में बरी नहीं हुए इन पुलिस कर्मियों ने कोर्ट से निवेदन किया कि उनकी एप्लीकेशन पेंडिंग है। फिर भी चार्ज फ्रेम होता है तो हाई कोर्ट में पेंडिंग याचिका के कोई मायने नही राह जाएंगे लेकिन हाई कोर्ट से स्टे नही होने के कारण केवल विपुल अग्रवाल, आशीष पंडिया ,अब्दुल रहमान, बालकृष्ण चौबे की विभिन्न याचिका ट्रॉयल कोर्ट में लंबित होने एवं राजू जीरावला के अनुपस्थिति होने से इन्हें छोड़कर बाकी सभी आरोपीयो के विरूद्ध चार्ज फ्रेम कर दिए।
: जारी हुए गैर जमानती वारंट
आरोपी राजू जीरा वाला और आशीष पांड्यन आज कोर्ट में हाजिर नही हो सके तो इनके वकीलों ने हाजिरी माफी का प्रार्थना पत्र कोर्ट में पेश किया
इस पर कोर्ट ने प्रार्थना पत्र नामंजूर कर इनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है।

12 साल से पेंडिंग, रासुखदारो के बरी होते ही हुए चार्ज फ्रेम
इस मामले में जब तक रसुखदार बीजेपी नेता और आईपीएस अफसर आरोपी थे तो 12 साल से किसी को चार्ज फ्रेम की याद नही आई। सीबीआई चार्जशीट
में सीबीआई ने तत्कालीन गुजरात के गृह राज्य मंत्री बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया, मार्बल व्यवसायी विमल पाटनी, गुजरात के तत्कालीन डीजीपी डीसी पांडे, वर्तमान डीजीपी गीता जौहरी, आंध्रा के आईजी सुब्रमण्यम, गुजरात के आईपीएस राजकुमार पंड्यन, ओपी माथुर, चूडाश्मा, राजस्थान आईपीएस दिनेश एमएन, गुजरात डीवायएसपी नरेन्द्र अमीन, अमित शाह की को-ऑपरेटिव बैंक के बिजनेस पार्टनर दो अन्य व्यवसायी अजय पटेल, यशपाल को मुख्य आरोपी और षड्यंत्र कारी माना था। अब जब ये सभी रसूखात आरोपी बरी हो गए है। इनके बरी होने से केस में अब न तो मोटिव बचा है और न ही षड्यंत्र।
जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि पारिस्थितिक जन्य साक्ष्यों पर बने केस में मोटिव का होना आवश्यक है। इसके बावजूद सीबीआई ने अपने रसूखदार नेताओ और अफसरों को बचाने के लिए चार्ज फ्रेम करवा दिए।

भ्रष्ट लोक सेवकों को बचाने वाले काले कानून के खिलाफ लेकसिटी प्रेस क्लब का विरोध

उदयपुर। भ्रष्ट लोक सेवकों को बचाने के लिए लाया गया दण्ड प्रक्रिया संहिता संशोधन विधेयक -२०१७ का चैतरफा विरोध हो रहा है। राजस्थान सरकार के इस तुगलकी विधेयक के विरोध में उदयपुर के पत्रकार भी उतर आये। लेकसिटी प्रेस क्लब के बैनर तले पत्रकारों ने आज जिलाकलेक्त्र को इस काले कानून के विरोध में राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया।
‘‘सियासत के हरगिज चहेते नहीं हम, सियासत कब हमें बलम बोलती है। सियासत ने सौंपी है बगावत हमको, उसी की हकीकत कलम बोलती है।’’ राजस्थान के पत्रकार भी कुछ इन्हीं इरादों के साथ महारानी के तुगलकी फरमान के खिलाफ अब पूरजोर विरोध में उतर आए हैं। राज्य सरकार की ओर से पेष किए गया बिल अब सरकार के लिए ही नुकीली कील साबित हो गया है। राज्य की जनता विरोध में आ गई है। वहीं विपक्ष भी इस बिल को पूरी तरह से भुनाने में लगा है। आपको बता दे कि राज्य सरकार द्वारा लाये गए लोक सेवक संरक्षण विधेयक का अब चैतरफा विरोध होने लगा है। सोमवार को जयपुर में सड़क से सदन तक हुए विरोध के बाद मंगलवार को उदयपुर के पत्रकार संगठनो ने भी इस विधेयक को वापस लेने की मांग की। इसी कड़ी में उदयपुर में लेकसिटी प्रेस क्लब और राजस्थान पत्रकार संघ के बेनर तले तीन दर्जन से ज्यादा पत्रकार जिला कलेक्ट्री पर पंहुचे। इस दौरान सभी पत्रकारों ने इस विधेयक के विरोध में जिला कलक्टर को राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम का ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने मांग की है कि इस विधेयक से पत्रकारिता और पत्रकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में पड़ जाएगी। यही नहीं इस विधेयक के पारित होने से पत्रकारिता के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराएंगे। पत्रकारों ने पूरजोर तरीके से इसकी निंदा करते हुए इसे जल्द से जल्द वापस लेने की माग की। इस अवसर पर लेकसिटी प्रेस क्लब के कई पदाधिकारी,पूर्व अध्यक्ष और कई मीडिया समूहों के पत्रकार उपस्थित रहे। जिनमें क्लब के अध्यक्ष रफिक एम पठान, पूर्वध्यक्ष संजय खाब्या, नारीष्वर राव, मनु राव, प्रताप सिंह राठौड़ सहित कपिल श्रीमाली, डाॅ रवि षर्मा, कुलदीप सिंह गहलोत, मोहम्मद इलियास, प्रमोद सोनी, हरीष षर्मा, भुपेष दाधिच, भगवान प्रजापत, विनोद माली, षकील मोहम्मद, प्रकाष मेघवाल, अविनाष जगनावत, जमाल खान, सतीष षर्मा के अलावा जार से जुडे़ कुछेक पत्रकार भी मौजूद थे।

कांग्रेसी विधायक ने पुलिस अधिकारी को बीजेपी का एजेंट बता कर लगाईं फटकार ( वीडियो )

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जयपुर में कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह डोटासरा और एक पुलिस अधिकारी में जमकर कहासुनी हो गई। इस पर विधायक डोटासरा ने लताड़़ लगाते हुए पुलिस अधिकारी को एमएलए क्वार्टर से बाहर निकाल दिया। इतना ही नहीं इस अधिकारी को डोटसरा ने भाजपा का एजेंट तक बता डाला। आपको बता दे कि पुलिस अधिकारी नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी से मिलने गए थे, लेकिन इस दौरान डोटासरा से उनकी कहासुनी हो गई। विधायक गोविंद सिंह डोटसरा ने पुलिस अधिकारी को लताड़ लगाते हुए विधायक आवास से बाहर निकाल दिया। इधर काग्रेस पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि डिप्टी योगेश गोयल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा अध्यादेश के विरोध को रोकने का प्रयास किए जाने को लेकर विधानसभा तक आक्रोष रेली नहीं निकालने की बात कहने आए थे और इसी दौरान डटोसरा गुस्सा गए और कहासुनी षुरू हो गई। विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने एडिशनल डीसीपी योगेश गोयल फटकार कर आवास से बाहर निकाल दिया। इस दौरान फटकारते हुए डोटासरा ने कहा आप ऐसा क्यों हो रहे है सुबह से ही यहां तमाशा बना रहे है। हमें धमका रहे है। हम नहीं डरेंगे। बाहर निकलिए आप, गेट आउट। एमएलए के क्वार्टर से गेट आउट, आप बाहर निकलिए। आप एजेंट है बीजेपी के। बाहर चलिए। इतनी हिम्मत। सुबह से तमाशा बना रखा है आपने। हमें कैसे नहीं जाने दोगे। एक तो लोकतंत्र की हत्या कर रहे हो। ऊपर से हमें धमका रहे हो। ये सुबह से तानाशाही कर रहा है। किसने पॉवर दिया इसको। डूडी साहब हम सबकी मांग है। इसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

https://youtu.be/MvGii2sTzSM