मुहांसों को कुछ घंटों में दूर कैसे भगाएं

पोस्ट . युवाओं की मुख्य समस्या है चहरे के मुंहासे . युवक हो या युवती चेहरे पर मुहांसे किसी को अच्छे नहीं लगते . युवतियों को की यह परेशानी उन्हें कई बार डिप्रेशन तक का शिकार बना लेती है . मुंहासे दूर करने के लिए युवतियां कई महगे महगे कोस्मेटिक प्रोडक्ट का इस्तमाल करती है. बड़े बड़े डॉक्टरों को दिखाती है लेकिन कुछ ख़ास फायदा नहीं होता. यहाँ पर हम कुछ आसान घरेलु उपाय बता रहे है जिसकी सहायता से कुछ ही घंटों या यूँ कहिये एक ही रात में मुहासे गायब किये जा सकते है .

बर्फ थैरेपी

अगर आपके घर में बर्फ का एक टुकड़ा मौजूद है तो पिम्पल होने पर दवाई लगाना और उसके हटने का इंतजार करना बेवकूफी है। जी, हां! बर्फ असल में पिम्पल की लालिमा को कम करता है, सूजन कम होती और जलन में भी कमी आती है। वास्तव में बर्फ लगाने से रक्तसंचार में वृद्धि होती है और रोमछिद्रों को भी प्रभावित करती है। बर्फ के जरिये पिम्पल के इर्द-गिर्द मौजूद गंदगी और तेल पूरी तरह निकल जाता है। आपको सिर्फ इतना करना है कि एक कपड़े में बर्फ के टुकड़े को लपेटना है और पिम्पल पर उसे कुछ सेकेंडों के लिए फेरना है। यही प्रक्रिया कुछ कुछ मिनटों में दोहरानी है।

सफेद टूथपेस्ट का उपयोग

सफेद टूथपेस्ट काफी हद तक बर्फ ट्रीटमेंट की तरह काम करता है। सफेद टूथपेस्ट को तकरीबन एक घंटे के लिए पिम्पल पर लगाकर छोड़ दें। लेकिन यह ध्यान रखें कि आपका टूथपेस्ट जेलयुक्त न हो। पिम्पल हटाने के लिए सफेद टूथपेस्ट का ही इस्तेमाल करें। यह पिम्पल की सूजन कम करने में सहायक है।

स्टीम द्वारा उपचार

चेहरे की दमक के लिए स्टीम उपचार बेहद जरूरी है। यह न सिर्फ गंदगी हटाता है बल्कि चेहरे की त्वचा को मुलायम भी रखता है। दरअसल स्टीम उपचार के जरिये रोम छिद्र खुल जाते हैं। नतीजतन त्वचा को सांस लेने में आसानी होती है। स्टीम उपचार लेने से चेहरे में गंदगी नहीं जमती जिससे पिम्पल होने की आशंका में कमी आती है।

 

MLSU के बादशाहो की हुई जीत – आखरी दाव खेला भवानी ने .

– सुविवि छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी के भवानी शंकर बोरीवाल जीते
– केन्द्रीय छात्रसंघ पैनल में दो एबीवीपी, दो एनएसयूआई प्रत्याशी जीते
उदयपुर। सुखाडिया विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनावों में अध्यक्ष पद पर कांटे की हुई टक्कर में ऑटो चालक के बेटे एबीवीपी प्रत्याशी भवानी शंकर बोरीवाल ने कपडा व्यापारी के बेटे एनएसयूआई से चुनाव लडे रौनक गर्ग को 167 मतों से शिकस्त दी। उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी, महासचिव व संयुत्त* सचिव पर एनएसयूआई के प्रत्याशियों की जीत हुई।
उदयपुर के सुखाड़िया विश्वविद्यालय सहित संभागभर में आज हुए छात्रसंघ चुनावों में सुबह 8 बजे से 1 बजे तक मतदान हुआ। मतदान को लेकर सुबह से कॉलेज छात्र-छात्राओं मेें खासा उत्साह देखा दोपहर 1 बजे मतदान समाप्ति तक कुल 62.21 प्रतिशत मतदान हुआ। मतदान स्थल पर पुलिस की चाक चौबंद व्यवस्था रही। विवि प्रशासन ने इस बार मतदाता छात्र-छात्राओं को बूथ स्थल तक मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं दी। कॉमर्स कॉलेज में बाहर भवानी व रौनक के समर्थक मतदान समाप्ति तक जुटे रहे। इस दौरान गेट के पास बार-बार जमा होते समर्थकों को खदेडने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पडा। मतदान समाप्ति के बाद पुलिस ने संघटक कॉलेज के बाहर जमा भीड को वहां से रवाना किया। इसके बाद मतपेटियों को सुविवि के एफएमएस कॉलेज लाया गया जहां दोपहर 3 बजे मतगणना शुरू हुई और संघटक कॉलेजों के परिणाम आना शुरू हो गए। सुविवि अध्यक्ष पद पर भवानी व रौनक के मतों की गिनती रात ७.३० बजे तक चली। इसके बाद भवानी को विजेता घोषित किया गया। केन्द्रीय कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी के दिनेश डांगी ने 1923 मतों से जीत हासिल की। महासचिव पद पर एनएसयूआई के शिवनारायण जाट 260 मतों से विजयी रही वहीं संयुक्त सचिव पद पर एनएसयूआई की भारती कुंवर राठौड 593 वोटों से विजयी रही।
इधर, संघटक कॉलेज कॉमर्स कॉलेज से हिमांशु पंवार, आर्टस कॉलेज से महेश रोत, साइंस कॉलेज से कार्तिक सिंह यादव, विधि महाविद्यालय से नवीन मेनारिया अध्यक्ष पद पर विजयी रहे। मीरा गल्र्स कॉलेज में सभी पदों पर एबीवीपी के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि अध्यक्ष पद मणिराम ने पूजा जाट को हराया। डेयरी कॉलेज से दीपक मेघवाल, आयुर्वेद कॉलेज से दुर्गाशंकर गुर्जर व गुरूनानक कॉलेज से कृष्णा मेनारिया ने अध्यक्ष पद पर विजयी पताका लहराया।
लॉ व साइंस में कम अंतर से जीते प्रत्याशी: छात्रसंघ चुनावों में इस बार सुविवि के दो संघटक कॉलेज साइंस व लॉ कॉलेज में प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर रही। दोनों ही कॉलेजों में चुनाव परिणाम आने के बाद हार-जीत का अंतर कम होने से पुन: मतगणना की गई। जिसके आधार पर लॉ कॉलेज से नवीन मेनारिया ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी ललित सिसोदियों को 7 मतों से व साइंस कॉलेज में कार्तिक यादव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को 15 वोटों से शिकस्त दी।
साइंस कॉलेज ने दिया वोटों का अंतर: सुविवि केन्द्रीय छात्रसंघ अध्यक्ष पद चुनाव लड रहे रौनक गर्ग व भवानी शंकर बोरीवाल के बीच कांटे की टक्कर हुई। कॉमर्स कॉलेज से वोटरों को रिझाने के लिए दोनों ही प्रत्याशी दिनभर इसी कॉलेज के बाहर जुटे रहे। इसका कारण सर्वाधिक मतदाता इसी कॉलेज से होना है लेकिन दोनों ही प्रत्याशियों की पृष्ठभूमि इसी कॉलेज से होने के कारण इस कॉलेज के वोट आपस में बंट गए और विज्ञान महाविद्यालय ने इस बार हार-जीत का फैसला किया। अंतिम चरणों तक दोनों के बीच मुकाबला बराबरी का रहा और आखिरी में भवानी ने धीरे-धीरे बढत लेना शुरू की जो अंत में 167 मतों तक पहुंची और यह उसकी जीत में बदल गई।
एमपीयूटी में मणिराम अध्यक्ष: महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिकारी व मुख्य चुनाव अधिकारी प्रौ. सुमन सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में कुल 28 पोलिंग बूथ बनाये गये थे। वर्तमान छात्रसंघ चुनाव मे केंद्रीय कार्यकारिणी के लिये कुल 3056 मतदाताओं मे से 2441 (79.87 प्रतिषत) छात्रों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। केंद्रीय छात्रसंघ कार्यकारिणी के चुनाव मे अध्यक्ष, महासचिव एवं संयुक्त सचिव सहित तीनों पदों पर अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय का आधिपत्य रहा। अध्यक्ष पद पर मणिराम (1022 मत) ने पूजा जाट को (626 मत) हराया, महासचिव के पद पर यशवन्त मेनारिया ( 1285 मत) ने मोहित शर्मा (598 मत) को हराया। संयुक्त सचिव सह कोषाध्यक्ष के पद पर ज्योति पटेल नें (1363 मत) ने एक तरफा जीत तय करतें हुए पुष्पेन्द्र सिंह (497 मत) को हरा कर पर विजय प्राप्त कीे। पहली बार विवि में सृजित शोध प्रतिनिधि पद पर तरूण कुमार जाटवा ने निर्मल कुमार मीणा को हरा जीत हासिल की

उदयपुर की गड्ढों भरी सड़कों के बिच महापौर और विधायक के फोटो लगा किया प्रदर्शन

उदयपुर। उदयपुर शहर की खराब सडकों पर बड़े- बड़े गड्ढों से हर खासो आम परेशान है। शहर के हर गली मोहल्ले ही नहीं मुख्य सड़कें तक टूटी हुई है। इन गड्ढों और खस्ता हाल सड़कों को लेकर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विशेष प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के अंतर्गत पानी से भरे गड्ढों में बिच सड़कों पर नगर निगम महापौर और युआईटी अध्यक्ष शहर विधायक की सचित्र तख्तियां लगा कर प्रदर्शःन किया।
शहर की खस्ता हाल सड़कों के विरोध में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं नगर निगम महापौर चन्द्र सिंह कोठारी और युआईटी के अध्यक्ष रविन्द्र श्रीमाली के सचित्र तख्तियां बना कर गड्ढों भरी सड़क के बिच लगा दिए और सड़को के विरोध में प्रदर्शन किया।

इसके अलावा गृहमंत्री गुलाबचद कटारिया( विधायक उदयपुर) की भी सचित्र तख्तियां बनाकर खड्डों पर लगाई व जनता का प्रशासन द्वारा बनाई सभी सड़को पर स्वागत किया।
आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि पिछले २०-25 वर्षों से उदयपुर शहरमे BJP का शासन है किंतु आज भी शहर मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहा है।शहर में चारो तरफ सड़को की हालत खराब है।
स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ो रूपये आये हुए है, परन्तु कँहा खर्च हो रहे है??
जनता को नज़र क्यों नही आ रहे?
‌आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता राजेश चौहान, मयंक जानी, दीपेश शर्मा, मो.हनीफ, हेमंत पालीवाल, हेमराज जी लोहार, सुमित विजय, आसिफ, प्रकाश भारती, भरत कुमावत, मेवाड़ी महाराज आदि ने मांग की , की जनता द्वारा गाढ़ी कमाई से दिए हुए टेक्स का प्रशासन ईमानदारी से उपयोग करे।

विशेष योग्यजनों को कौशल विकास से जोडे़गा ‘‘जीवन तरंग जिंक के संग‘‘ कार्यक्रम

हिन्दुस्तान जिंक की इस पहल से 4 जिलों के 500 बच्चें होगें लाभान्वित

उदयपुर। ईष्वर कुछ बच्चों को खास तौर पर बनाता है जिनकी मुस्कान आपको मुस्कुराने के लिये बाध्य कर देती है तो वहीं आपकी आंख में आंसू भी ला देते है इन बच्चों को खास देखभाल की जरूरत होती है इस कारण इन बच्चों को विषेष बच्चें माने जाते है। ऐसे में यदि इन विषेष योग्यजन बच्चों के सपनों को संबंल मिल जाए तो ये भी समाज की मुख्यधारा से जुड सकते है। इसे संभंव करने की पहल है, हिन्दुस्तान जिंक का जीवन तरंग ज़िंक के संग कार्यक्रम जिसके अन्तर्गत अब इन बच्चों को कौषल विकास से जोडा जाएगा ताकि ये भी आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक तौर पर सक्षम हो सके।
बुधवार को यषदभवन सभागार में जिंक दिवस आयोजित किया गया विषेष योग्य जन बच्चों ने कार्यक्रम में भक्तिगीत, देषभक्तिगीत, फिल्मी गीतों तारे जमीं पर, जय हो पर नृत्य के साथ ही खुद की क्षमता को दर्शाया कई विषयों पर अपनी प्रस्तुती दी। कार्यक्रम में सभी प्रस्तुतियों की आॅडिटोरियम में मौजूद हर एक व्यक्ति ने तालियों की गडगडाहट और विषेष योग्यजनों को हाथ हिला कर अभिवादन से उत्साह वर्धन किया। कार्यक्रम में राजकीय विद्यालय चाकसू के कृष्णपाल ने गीत की प्रस्तुती दी। जिसमें श्री सांवलिया बहुउद्धेषीय विकलांग सेवा संस्थान चित्तौडगढ़, बधिर बाल कल्याण विकास समिति भीलवाडा, विकलांग कल्याण समिति उदयपुर, बाधित बालविकास कल्याण समिति अजमेर, प्रयास संस्था उदयपुर के बालक बालिकाओं की प्रस्तुतियों ने समारोह को अद्भूत और उर्जावान कर दिया।

इसके तहत् हिन्दुस्तान जिंक के कार्य क्षेत्र जिलों उदयपुर, चित्तौडगढ़ के चंदेरिया लेड जिंक स्मेल्टर, भीलवाड़ा के रामपुरा आगुचा खान और अजमेर के कायड माईन्स के 500 बच्चों को चिन्हित किया गया हैं। इन बच्चों को सार्थक षिक्षा देने के लिये हिन्दुस्तान जिं़क ने उदयपुर में विकलांग कल्याण समिति, चित्तौडगढ़ में श्री सांवलिया बहुउद्धेषीय विकलांग सेवा संस्थान, भीलवाड़ा में बधिर बाल विकास कल्याण समिति ए अजमेर में बाधित बालविकास समिति व्त् प्रयास संस्था उदयपुर से भागीदारी की है। कौषल विकास के लिये नेश्नल हेण्डीकेप्ड फाईनेंस एण्ड डेवलपमेन्ट कार्पोरेषन के साथ मिल कर

करीब 400 मूक बधिर बच्चों के जीवन में सार्थक बदलाव एवं इनके लिये कार्यरत संस्थानों की दीर्धकालीन दृष्टि और रोडमेप विकसित करने के लिए नोयेडा डीफ सोसायटी के साथ भागीदारी की गयी है जिसके 4 स्थायी प्रषिक्षक भारतीय सांकेतिक भाषा सिखाएगें। इस कार्यक्रम में सांकेतिक भाषा सिखाने वाले उन षिक्षकों को भी प्रषिक्षित किया जाएगा जो कि इस कोर्स को सिखाने में सक्षम हो सकेंगें। इस साझेदारी के माध्यम से वें सभी बच्चें सांकेतिक भाषा को सीख कर एवं कौषल विकास के जरियें व्यावसायिक और व्यक्तिगत क्षमता का गुणात्मक विकास कर समाज में सक्रिय योगदान दे सकेंगें। नोयेडा डीफ सोसायटी की संस्थापक रूमा रोका ने जानकारी दी ज्ञप् वें साकेंतिक भाषा को सिखाने के साथ ही युवाओं के लिये अग्रणी दृष्य प्रषिक्षण पाठ्यक्रम बनाने और कम्यूटर के जरियें एसे युवाओं को व्यावसायिक प्रषिक्षण देती है।

पेराएथलीट चेम्पियनषीप में गोल्ड विजेता भारतीय एथलीट सुंदर सिंह गुर्जर भी हाल ही में इन विषेषयोग्यजन बच्चों से मिले और इनसे बातचीत कर इनका उत्साह वर्धन किया। बच्चें भी उनसे मिलकर उत्साहित नज़र आए। सुन्दर सिंह ने बच्चों का मनोबल बढ़ाया एवं कहा कि कठिन परिश्रम एवं लगन से लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। 19 से 22 साल की उम्र सभी के लिए उज्जवल भविष्य की कुंजी होता है। उन्होंने बच्चों को जोर डालते हुए कहा कि बच्चों को अपनी रूचि के अनुसार अपने कॅरियर का चुनाव करना चाहिए। सुन्दर सिंह गुर्जर ने फज्जा, दुबई में फरवरी 2017 में आयोजित 9वीं आईपीसी ग्रांड प्रीक्स में डिस्कस एवं शाॅट पुट में 3 स्वर्ण पदक जीतकर विजेता रहे है। मार्च 2017 में 3 नेषनल पैरा एथलेटिक्स चैम्पियनषिप में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोषन किया है। सुन्दर सिंह जुलाई 2017 में लंदन में आयोजित विष्व पैरा एथलेटिक्स चैम्पियनषिप में 60.36 मीटर की रेस में भारत के एकमात्र स्वर्ण पदक विजेता रहे है।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील दुग्गल विषेष योग्यजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिये आगे आने कि आवष्यकता है एवं प्रत्येक व्यक्ति इनके लिये समय निकाल कर इन्हें समाज का अभिन्न हिस्सा बनाने में अहम भूमिका निभाएं। हिन्दुस्तान जिंक का जीवन तरंग कार्यक्रम इसी सोच को पुरी करने की पहल है।
हिन्दुस्तान जिंक के हेड कार्पोरेट कम्यूनिकेषन पवन कौषिक ने बताया कि 10 जनवरी को हिन्दुस्तान जिंक के 51वें स्थापना दिवस पर जीवन तरंग जिंक के संग कार्यक्रम की औपचारिक शुरूआत की गयी थी । इस पहल से विषेष योग्यजन बच्चें जो कि सुन बोल नहीं सकतें या देख नहीं सकते या आम लोगो की तरह सोच समझ नहीं रखतें, समाज के साथ समायोजित हो कर अपना जीवन जीने के लिये महत्वपूर्ण साबित होगा।
जिंक दिवस पर आयाजित कार्यक्रम में मुख्यकार्यकारी – अधिकारी सुनील दुग्गल, मुख्य वित्तीय अधिकारी – अमिताभ गुप्ता, हेड प्रोजेक्ट -नवीन सिंघल, मुख्यप्रचालन अधिकारी स्मेल्टर्स – पंकज कुमार, मुख्यप्रचालन अधिकारी माईनिंग – एलएस शेखावत, हेड सीएसआर – नीलिमा खेतान, चीफ काॅमर्षियल आॅफीसर – रामाकृष्णन काषीनाथ सहित अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।

 

 

 

करकरे पर राजनीतिक रस्साकशी खत्म हो

असुविधाजनक प्रश्न पूछने के लिए ही पेशेवर पत्रकार बने होते हैं, इसलिए मुझे सीधे यह प्रश्न पूछना चाहिए : महाराष्ट्र पुलिस के अधिकारी हेमंत करकरे, जो 26 नवंबर 2008 के मुंबई हमले में ‘शहीद’ हुए, क्या झूठे और राजनीतिक प्रतिष्ठान के प्यादे थे? मैं ऐसा इसलिए पूछ रहा हूं, क्योंकि मालेगांव विस्फोट मामले में कर्नल श्रीकांत पुरोहित को दी गई जमानत के संबंध में यह फैलाने का प्रयास चल रहा है कि करकरे के नेतृत्व में महाराष्ट्र एटीएस ने कर्नल पुरोहित जैसे ‘राष्ट्रवादी’ नायक को इसलिए ‘फंसा’ दिया, क्योंकि यूपीए सरकार ‘भगवा’ आतंक का हव्वा खड़ा करना चाहती थी।
मैं यह प्रश्न इसलिए भी पूूछ रहा हूं, क्योंकि मैं मृदुभाषी करकरे को ‘सम्माननीय’ पुलिस अधिकारी के रूप में ‘जानता’ था, जिनके साथ मेरी कई बार ऑफ रेकॉर्ड लंबी बातचीत हुई थीं। 25 नवंबर 2008 को करकरे ने मुझे फोन करके कहा था कि वे ‘खुल के बोलना’ चाहते हैं। शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ ने उन्हें ‘हिंदू विरोधी’ बताते हुए अभियान चला रखा था। तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंहने मालेगाव विस्फोट की मुख्य अभियुक्त साध्वी प्रज्ञा को परोक्ष क्लीन चिट दी थी और बताया जाता है कि वे प्रज्ञा से मिलने जेल में भी गए थे। करकरे ने कहा, ‘अब बहुत हो गया, मुझे लगता है कि वक्त आ गया है कि सारे तथ्य सामने रख दिए जाए।’ उनकी आवाज में बहुत चिंता झलक रही थी। अगले ही दिन मुंबई खौफनाक आतंकी हमले में रक्तरंजित हो गई और कर्तव्य निभाते हुए करकरे ने सर्वोच्च बलिदान कर दिया। अब लगभग एक दशक बाद मैं विचलित हूं : क्या ऐसा हो सकता है कि वह अधिकारी जिसका अंतिम संस्कार राष्ट्रीय सम्मान के साथ किया गया, जिन्हें ‘राष्ट्रीय हीरो’ माना गया, जिनके साथ के लोग उन्हें असंदिग्ध निष्ठा वाला व्यक्ति मानते हैं, अचानक जांच एजेंसियों के लिए संदिग्ध हो जाए।
मालेगांव मामले में एनआईए के आरोप-पत्र में दावा किया गया है कि कम से कम दो महत्वपूर्ण गवाहों को कर्नल पुरोहित सहित अभियुक्तों के खिलाफ झूठे बयान देने के लिए बाध्य किया गया था। एनआईए और महाराष्ट्र एटीएस के आरोप-पत्रों में फर्क को ही कर्नल पुरोहित को जमानत देने का महत्वपूर्ण कारण बताया गया। 2011 में एनआईए को गहराई से जांच के अच्छे इरादे से मामला सौंपा गया। फिर भी छह साल बाद भी मुकदमा शुरू नहीं हुआ, अभियुक्त को जमानत देने का यह भी एक कारण था। इस बीच केंद्र में सरकार बदल गई। जहां हमारे सामने ऐसे गृहमंत्री थे जो ‘हिंदू आतंक’ के बारे में कुछ भी कह देते थे, अब वह व्यक्ति गृहमंत्री है, जो साध्वी प्रज्ञा की गिरफ्तारी के वक्त उसके साथ खड़ा हुआ था। जब अभियोग लगाने वाली एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों का ऐसा भिन्न रुख हो तो क्या जांच पक्षपातरहित और स्वतंत्र हो सकेगी?
सच यह है कि अत्यधिक ध्रुवीकृत राजनीतिक विमर्श ने आतंकवाद संबंधी लगभग हर बड़ी जांच पर असर डाला है। जहां कभी हमें कहा जाता था कि ‘अभिनव भारत’ जैसे दक्षिणपंथी गुट इस्लामी आतंक का मुकाबला करने के लिए उभरे हैं, अब लगता है हमें यह बताने की कोशिश है कि ऐसे आतंकी गुट यूपीए सरकार ने भाजपा व संघ परिवार को मुश्किल में डालने के लिए ‘निर्मित’ किए हैं। जहां हमें कभी ऐसे विस्तृत टेप दिए गए थे, जिनमें कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा शामिल थे (इसमें दर्ज बातचीत कई घंटों की थी), अब हमें बताया जा रहा है कि उन्हें हम पूरी तरह ‘बनावटी’ सूचनाएं मानें। गवाह अचानक मुकर गए और सरकारी वकील ने यह कहते हुए त्यागपत्र दे दिया कि 2014 के बाद एनआईए उनसे ‘धीमे’ चलने के लिए कह रही है। यह तो अचानक ऐसा हो गया जैसे सात लोगों की जान लेने वाला मालेगांव विस्फोट कभी हुआ ही नहीं था और यदि हुआ भी था तो गलत लोग पकड़ लिए गए हैं।
आप देखिए कि ऐसे देश में जिसका नेतृत्व आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (बिल्कुल बर्दाश्त न करना) की बात करता है, वहां कैसी विचित्र स्थिति पैदा हो जाएगी। अब हमें 2007 में हुए समझौता बम विस्फोट का एकदम उलट वर्जन बताया जा रहा है। इसके पीछे लश्कर-आईएसअाई-सिमी की मिलीभगत थी या स्वामी असीमानंद जैसे संघ समर्थक इसमें शामिल थे? गुजरात का इशरत जहां मामला भी इसी प्रकार राजनीतिक लड़ाई में फंस गया है और ‘फर्जी मुठभेड़’ में हत्याओं के आरोपी पुलिस वालों को अब निर्दोष बताया जा रहा है और उनके साथ नायकों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। फिर चाहे 7/11 के मुंबई ट्रेन धमाके हों, हैदराबाद का मक्का मस्जिद विस्फोट हो मूल प्रकरण तो स्थानीय मुस्लिमों के खिलाफ बनाया गया, जो बाद में दक्षणपंथी हिंदू गुटों तक पहुंच गया। देश में आतंकी प्रकरणों में सफलतापूर्वक मुकदमा चलाने का रेकॉर्ड बहुत खराब है। दुखद है कि हिंदू-मुस्लिम के पक्षपाती चश्मे से आतंकवाद को पेश करके देश के राजनीतिक नेतृत्व ने खतरनाक ढंग से राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता किया है। अब उत्तरोत्तर स्पष्ट हो रहा है : या तो पूर्ववर्ती कांग्रेस-नेतृत्व वाली सरकार झूठ बोल रही थी अथवा मौजूदा सरकार अभियुक्तों को बचा रही है। आधिकारिक वर्जन को चुनौती देना अब ‘राष्ट्र-विरोधी’ कृत्य है, जिससे ऐसी तर्कसंगत बहस एक तरह से असंभव हो गई है, जिसमें तथ्यों को लगातार जारी मिथ्या प्रचार से अलग करके देखा जा सके।
इस सब में मेरे मित्र करकरे कहां ठहरते हैं? मृत व्यक्ति अपना बचाव नहीं कर सकते, इसलिए उम्मीद ही की जा सकती है उनकी कीर्ति को वे लोग दागदार नहीं बनाएंगे, जो असुविधाजनक सच का सामना नहीं कर सकते। एक पेशेवर पुिलस अधिकारी का ‘सम्मान’ दांव पर लगा है, इसलिए राज्य-व्यवस्था को साफ-सुथरा रवैया अपनाना चाहिए : या तो करकरे की जांच का ‘भंडाफोड़’ किया जाना चाहिए या उनके साथ मजबूती से खड़े होना चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीतिक रस्साकशी खत्म होनी चाहिए।
पुनश्च : कर्नल पुरोहित को जमानत देने के कुछ दिन पहले दस अज्ञात मुस्लिम जेल में दस से ज्यादा साल बिताकर बाहर आ गए, क्योंकि 2005 के हैदराबाद बम विस्फोट मामले में उनका शामिल होना साबित नहीं किया जा सका। फर्क यह था कि इस बार ‘न्याय’ पर न शोरभरी प्राइम टाइम बहस हुई, न भावुक जश्न था, न राष्ट्रवादी नारे थे। सरल-सी बात है छोड़ दिए गए लोग दूसरे धर्म के थे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
यह लेख दैनिक भास्कर में 01.09.2017 को सम्पादकीय पेज पर प्रकाशित हुआ है
राजदीप सरदेसाई
वरिष्ठ पत्रकार
rajdeepsardesai52@gmail.com

झमाझम बारिश से जयसमंद झील लबालब

सीसारमा 3 व मदार नहर 2 फीट बह रही

उदयपुर। लेकसिटी में लगातार बारिश का दौर जारी है। बीते चौबीस घंटों में उदयपुर में एक इंच से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। झीलों में नगरी में कल रात शुरू हुआ मूसलाधार बारिश का दौर आज भी जारी रहा। सुबह हल्की बूंदाबांदी के बाद दोपहर 2.30 बजे व शाम 6 बजकर 42 मिनट तक करीब दस से बारह मिनट तेज बारिश का दौर चला। एशिया की दूसरे सबसे बडे मीठे पानी की झील जयसमंद झील जिसे ढेबर झील भी कहा जाता है। अपनी पूर्ण भराव क्षमता से पौन फीट खाली रह गई है। आज इसका जलस्तर 26 फीट 8 इंच (7.96 मीटर) को पार कर गया। पूर्ण भराव क्षमता साढे 27 फीट (8.38 मीटर) से अब यह पौन फीट खाली है। गोमती व खरका नदी से जयसमंद में लगातार आवक हो रही है। पीछोला व फतहसागर फिर लबालब हो गए है। फतहसागर के चारों गेट दो-दो इंच व स्वरूपसागर के दो गेट 11 इंच खुले हुए है। दोनों ओर से बहता पानी यूआईटी पुलिया होते हुए आयड नदी में तेज बहाव के साथ बह रहा है। उदयसागर में भी लगातार आवक के चलते इसके दोनों गेट पांच-पांच इंच खुले हुए है। मदार बडा व छोटा भी एक बार फिर छलक पड़े है। सीसारमा नदी 3 फीट व मदार नहर 2 फीट के वेग से बह रही है।

MLSU छात्रसंघ चुनाव का धूम धड़ाका – नामांकन के दौरान आचार संहिता का उडी धज्जियाँ

उदयपुर। सुखाडिया विश्वविध्यालय छात्र संघ के चुनाव में नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन केन्द्रीय छात्र संघ के अध्यक्ष , कार्यकारणी एवं एनी संघटक कोलेज अध्यक्ष और एनी पदों के लिए नामांकन दाखिल किये गए। नामांकन पुरे धूम धडाके रैलियां और शक्ति प्रदर्शन के साथ किये गए। रलियों और शक्ति प्रदर्शन के दौरान आचार संहिता की जम कर धज्जियाँ उडी। केन्द्रीय छात्रसंघ अध्यक्ष के नामांकन के दौरान छात्रों ने जम कर हंगामा और नारे बाजी की।बाहरी लोगों की रोक के बावजूद भी कांग्रेस और भाजपा के कई बड़े नेता नज़र आये।

गुरुवार को छात्र संघ चुनावों के नामांकन पेश करने का आखरी दिन चुनावों को लेकर छात्रों में खासा उत्साह नज़र आया। मोहन लाल सुखाडिया विश्वविद्यालय के केन्द्रीय छात्र संघ अध्यक्ष पद के लिए एबीवीपी की ओर से भवानी शंकर बोरीवाल ओर एनएसयूआई की ओर से रौनक गर्ग ने अपना नामाकंन पत्र दाखिल किया। कामर्स कॉलेज के समीप डीएसडब्ल्यू कार्यालय में हुई नामाकंन प्रक्रिया के दौरान भारी पुलिस बल तैनात था। पुलिस की ओर बैरिकेटिंग की गई ताकि छात्रों को कार्यालय से 100 मीटर की दूरी पर ही रोक लिया जाए। पिछले कुछ सालों में सुखाडिया विश्व विद्यालय में निर्दलीय उम्मीदवार के जीतनें की परम्परा इस बार टूटती हुई दिखाई दे रही है। इस बार सुखाडिया विश्वविद्यालय के केन्द्रीय छात्र संघ अध्यक्ष पद के लिए एबीवीपी ओर एनएसयूआई के बीच सीधी टक्कर है। दोनों प्रत्याशियों ने नामाकंन के बाद अपनी अपनी प्राथमिकताए बताई। एबीवीपी की ओर से अध्यक्ष पद नामाकंन दाखिल करने वाले भवानी शंकर बोरीवाल के साथ उपाध्यक्ष पद के लिए दिनेश डांगी महासचिव पद के लिए निर्मल सिह राव ओर संयुक्त सचिव के लिए पुष्कर मेघवाल ने दाखिल किया वही दूसरी ओर एनएसयूआई से अध्यक्ष पद पर नामाकंन करने वाले रौनक गर्ग के साथ साथ उपाध्यक्ष पद के लिए राजेन्द्र सालवी महासचिव पद के लिए शिव नारायण जाट ओर सयुक्त सचिव के लिए ज्योति पटेल ने दाखिल किया है।

नामांकन के पहले आज सुबह से ही शाश्त्री सर्कल से कोमर्स कोलेज बाहर तक छात्रों का जमावड़ा लगा हुआ था। एबीवीपी का जुलुस शाश्त्री सर्कल से तो एनएसयुआई का जुलुस अशोकनगर रोड से शुरू हुआ। दोनों की रैलियों में छात्रों ने जम कर नारे बाजी की और आतिशबाजी के साथ नामांकन भरने के लिए रवाना हुआ। भाजपा और कांग्रेस के कई बड़े नेता भी रैलियों में मोजूद थे।
इधर एम्एलएसयु के संघटक कोलेजों में भी सभी पदों के लिए नामांकन दाखिल किये गए कोमर्स कोलेज व् साइंस कोलेजो में छात्रों में जबर्दस्त उत्साह देखा गया साइंस कॉलेज में नामांकन प्रक्रिया के तहत कई छात्रों के घुस जाने से हंगामा खड़ा हो गया । नामांकन दाखिल करने पहुचे प्रत्याक्षियों के समर्थकों ने साइंस कॉलेज में जोरदार नारेबाजी कर माहौल को गरमा दिया। इस दौरान मौके पर तैनात पुलिस के जवानों ने सभी छात्रों को खदेड़ते हुए बाहर निकाला । एक बारगी तो माहौल पूरी तरीके से हंगामेदार हो गया । लेकिन पुलिस के आला अधिकारियों ने छात्रों को कॉलेज परिसर से बाहर निकालकर पूरे मामले को शांत करवाया ।
आर्स कोलेज से तुलसी राम मीना, मनीष पूरी गोस्वामी, महेश रोत व् ललित डांगी ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। साइंस कोलेज से अध्यक्ष पद के लिए कार्तिक यादव विनय साल्वी, व् शुभम कलाल ने नामांकन दाखिल किया। कोमर्स कोलेज के अध्यक्ष पद के लिए लवपाल सिंह चौहान, सुखदेव सिंह डांगी, हिमांशु पंवार व् हिमांशु मुन्दानिया ने नामांकन दाखिल किया। विधि महाविश्यालय में अंकित कुमावत, गणेशलाल रौत, नविन मेनारिया, योगेश जोशी, एवं ललित सिंह सिसोदिया ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया है।
शुक्रवार को नामांकन वापस लेने का समय है ४ सितम्बर को वोटिंग होनी है।

तस्वीरों में देखिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदयपुर दौरा ( photo )

उदयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने २९ अगस्त को उदयपुर में सभा को संबोधित किया, 5610 परियोजनाओं का लोकार्पण किया तथा 9490 करोड़ रूपये की योजनाओं का शिलान्यास किया . इस दौरान वह महराना प्रताप गौरव केंद्र भी गए महाराणा प्रताप की प्रतिमा को नमन किया। सभा के दौरान अपने उद्बोधन की शुरुआत मेवाड़ी में की और उन्होंने मेवाड़ी में ” खम्मा घणी सा” कह कर सबका अभिवादन किया साथ ही मेवाड़ी में कहा,..
” वीर मेवाड़ महाराणा प्रताप री स्वतन्त्रता री लड़ाई री धरती, मीरा री भक्ति री धरती, पाथल पीथल री धरती, झाला मान, भामाशाह, हकिम खान सूर री धरती, पन्ना हाड़ी रानी री त्याग री भूमि जठे प्रभु एकलिंगनाथ स्वयं बिराजे असी त्याग तपस्या री वीर भूमि ने मारो घनो घनो नमन खम्मा घणी सबने ” कह कर सभा का दिल जीत लिया।
मोदी की सभा और प्रताप गौरव केंद्र को देखिये तस्वीरों में

बाबा राम रहीम की अय्याशी की हद, गर्ल्स स्कूल से लड़कियां लाता था, गुफा में बना रखा था स्विमिंग पूल

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post.डेरा सच्चा सौदा चीफ राम रहीम को दो साध्वियों का रेप करने के केस में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज जगदीप सिंहलोहान ने 10-10 साल की सजा सुनाई। बलात्कार केस में जेल जाने के बाद से बाबा गुरमीत की अय्याशियों के कई किस्से सामने आने लगे हैं। एक चैनल की खबर के अनुसार बाबा जहां रहता था वहां एक ऐसी गुफा थी जहां वह रोज नई-नई लड़कियों के साथ अय्याशियां करता था।
गुरमीत रहीम के रोज नए-नए किस्से सामने आ रहे हैं। बाबा के पूर्व डेरा प्रेमी ने एक चैनल से बात करते हुए कहा की बाबा राम रहीम रोज नई लड़की के साथ अय्याशियां करता था।
उनका कहना है कि बाबा की गुफा का एक दरवाजा गर्ल्स स्कूल के कैंपस में खुलता था। जहां से वह रोज लड़कियों को चुनकर लाता था।
डेरा प्रेमी के अनुसार बाबा लड़कियों से जानवरों की तरह व्यवहार करता था। वह रोज नई नई लड़कियां लाता था।
उन्होंने बताया की गुफा के एक हॉल में स्विमिंग पूल भी था, जहां किसी को जानें की अनुमति नहीं थी।
डेरा प्रेमी के ने बताया यह गुफा प्रिंटग प्रेस के पास थी कभी-कभी हमारी वहां ड्यूटी लगती थी।
बाबा की गुफा से रोज आधी रात को चीख की अवाज हमे सुनाई देती थी। फिर कुछ देर बाद गुरमीत गुफा के ऊपर वाले हिस्से में आकर खिड़कियां खोलता था।
उन्होंने बताया कि जब साध्वियों ने मुझे अपना दर्द बताया तो मैने 2002 में डेरा छोड़ दिया था।
गुफा के अंदर रहती थी 200 से ज्यादा साध्वियां
बाबा जहां रहता था, उसे कहा तो गुफा जाता था, लेकिन असल में वह जगह भी किसी राजमहल से कम नहीं थी।
यहां तक कि उसने अपने लिए राजाओं की तरह हरम तक बनवा रखा था, जिसमें 200 से ज्यादा सुंदर साध्वियों को रखा गया था।
इनमें से 30 साध्वियां रोजाना बाबा की हर तरह की सेवा में तैनात की जाती थी। ये साध्वियां अब डेरे से गायब हो चुकी हैं।
बाबा को खाने-पीने का काफी शौक था। बाबा को एक्टर और गायक बनने का शौक था। गुरमीत के पूर्व ड्राइवर खट्टा सिंह ने यह सारी जानकारी देते हुए बताया कि बाबा 200 से ज्यादा साध्वियों के साथ रहता था। यहां पुरुषों के आने पर पाबंदी थी।
 डेरे के अंदर जीता था महाराजाओं जैसी लाइफ
बलात्कार केस में जेल में बंद गुरमीत सिंह राम रहीम की अय्याशियों के कई किस्से सामने आने लगे हैं।
डेरे में रह चुके उसके कर्मचारी अब सामने आकर किस्से बता रहे हैं। राम रहीम अपने डेरे में महाराजा जैसी जिंदगी जी रहा था।
बाबा शीश महल में रहता था। डेरे में उसके ऐशो-आराम के सभी साधन मुहैया कराए जा रहे थे।
उसे राजाओं जैसी पोशाकें पहनने का शौक था और उसके लिए ऐसी कई महंगी पोशाकें रोजाना तैयार करवाई जाती थीं, जिन्हें बाबा खुद ही डिजाइन करवाता था।
इसके अलावा बाबा के पास 200 से ज्यादा महंगी लग्जरी गाड़ियां थीं। इनमें कई गाड़ियां कई-कई करोड़ की थीं, जिनके डिजाइन भी बाबा ने खुद तैयार करवाए थे।
गुफा आने का होता था कोड वर्ड
– खुद को रॉकस्टार समझने वाले बाबा के डेरे में बलात्कार शब्द का के लिए एक कोड वर्ड था।
– बाबा अपनी गुफा में जिन महिलाओं के साथ अश्लील हरकतें करता था, उसे गुरमीत राम रहीम की ओर से मिली ‘माफी’ कहा जाता था।
– जब भी किसी महिला या युवती को राम रहीम के आवास यानी उसकी गुफा में भेजा जाता था। बाबा के चेले उसे ‘बाबा की माफी’ बताते थे।

बाबा गुरमीत के बॉडीगार्ड का खुलासा – मैं पहरा दे रहा था, अंदर रेप कर रहा था बाबा

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post. सीबीआई कोर्ट से गुरमीत राम रहीम को मिली सजा के बाद उसके कई राज भी सामने आने लगे हैं। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, राम रहीम के गार्ड रह चुके बेअंत सिंह ने बाबा से जुड़े कई राज बताए हैं। बेअंत सिंह ने बताया कि 1995-1996 में माउंट आबू में एक टेंट में गुरमीत सिंह ने 15-16 साल की लड़की को बुलाया। तब वह खुद टेंट के बाहर पहरा दे रहा था। उसके साथ राम रहीम ने रेप किया, उसके सिसकने की आवाजें आ रही थीं। वह लड़की आज भी डेरे में है।
 बेअंत के मुताबिक, डेरा प्रमुख ने लगभग 250 लड़कियों के साथ बुरा काम किया है। वहां करीब 400 लड़कियां हैं, जिन्हें साध्वी बताया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि डेरा प्रमुख की गुफा में हर रात कोई न कोई लड़की आती थी। उसके पहरेदारों में वह खुद शामिल होता था। बेअंत के अनुसार, उसकी धारणा माउंट आबू से बाबा के प्रति खराब हो चुकी थी, लेकिन बाकी पहरेदार उसके बुरे कामों से सहमत थे। बेअंत के अनुसार, डेरे में सैकड़ों लोगों को गला घोंटकर मारा जाता था। इसके बाद उनकी डेड बाडी सिरसा ब्रांच नहर भाखड़ में बहा दी जाती थी। यह सिलसिला कई सालों तक चला। फिर कुछ समय बाद मारे जाने वाले लोगों का दाह संस्कार किया जाने लगा। इसके बाद मरे हुए लोगों की अस्थियों को डेरे के पीछे बने बाग में गाड़ दिया जाता था। बेअंत सिंह ने कहा कि डेरा प्रमुख ने सबसे पहला मर्डर फकीर चंद नाम के व्यक्ति का कराया। इसके बाद सैकडों लोग मारे गए और संदेश यह दिया जाता था कि फलां शख्स अपने गुरू को याद करते हुए स्वर्गलोक में चला गया।
 सूत्रों के मुताबिक, पिछले 20 साल से बाबा का राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा था। अब तो वह खुद की पार्टी बनाकर चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहा था। इसकी वजह यह थी कि हरियाणा राज्य का ऐसा कोई राजनीतिक दल नहीं बचा था, जो डेरे में नतमस्तक नहीं होता था। इससे उसको लगता था कि राजनीतिक पार्टी खड़ी कर दूंगा तो वह और ज्यादा पॉवरफुल हो जाएगा।