उदयपुर के बाघदडा नेचर पार्क में लगी भयानक आग

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उदयपुर. शहर से करीब 15 किमी. दूर उमरड़ा के निकट बाघदड़ा नेचर पार्क में सोमवार दोपहर बड़ी आग लग गई। आग ने बहुत भयानक रूप ले लिया है और अब तक 20 दमकलें आग बुझाने में लगी हुई हैं। उदयपुर नगरनिगम से भी दमकल मौके पर पहुंची हैं। लेकिन, आग पर अब तक काबू नहीं पाया जा सका है।

जानकारी के अनुसार, बाघदड़ा नेचर पार्क में दोपहर 3 बजे आग लग गई जिसने बाद में भयानक रूप ले लिया। आग के कारण पूरा नेचर पार्क जलने के कगार पर पहुंच चुका है। सैकड़ों वन्यजीव आग की चपेट में आ चुके हैं। आग की सूचना पर कई फायर ब्रिगेड पहुंची लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका। वन विभाग के क्षेत्र में लगी आग को बुझाने के लिए वन विभाग के स्टाफ के अलावा उदयपुर नगर निगम से भी दमकल भेजी जा चुकी है। आग के कारणों का अब तक खुलासा नहीं हो पाया है लेकिन कहा जा रहा है कि सुलगती हुई बीड़ी किसी के द्वारा फेंके जाने से आग लगी।

इधर, पार्क के 200 मीटर में ही आरएसएमएमएल का बारूद गोदाम है जहां करीब 300 टन बारूद जमा है। आग के काबू नहीं पाए जाने पर ये आग और भयावह रूप ले सकती है। ऐसे में आरएसएमएमएल की टीमें भीे  पहुंच चुकी हैं और बारूद हटाने का काम चल रहा है। इसके अलावा पास में ही वन क्षेत्र केवड़ा की नाल भी है जहां तक भी लपटें पहुंच चुकी हैं। दमकलें आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश में जुटी हुई हैं।

क्या कांग्रेस को राहुल पर अब फैसला करने की जरूरत ?

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post. हर चुनाव चाहे किसी निकाय का हो या विधानसभा का दिन ब दिन कांग्रेस की हालत बाद से बदतर होती जा रही है . ऐसे में अब समय आगया है कि राहुल अपना आत्मनिरीक्षण करें और पार्टी के हित में बड़े स्तर पर कोई कडा फैसला लें . इससे पहले कि कांग्रेस पार्टी के आलाकमान का राष्ट्रव्यापी विरोध शुरू हो जाय उससे पहले सोनिया गाँधी राहुल गाँधी प्रियंका गांधी की जिम्मेदारी बनती है कि पार्टी की इस बिगडती दशा को दुरुस्त करें .

हाल के पांच राज्यों के चुनावी नतीजे साफ़ बताते है कि देश की सबसे पुरानी और बड़ी पार्टी कही जाने वाली कांग्रेस पार्टी कितनी कमज़ोर पड़ गयी है . उत्तरप्रदेश के नतीजे साफ़ दर्शाते है कि जनता राहुल गाँधी को नकार चुकी है . राहुल गाँधी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के आगे कहीं टिक ही नहीं पाते .

पंजाब की जीत से राहुल बहुत ख़ुश नहीं हो सकते जहां पूरा दारोमदार कैप्टन अमरिंदर सिंह पर था.

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता अरुण जेटली को तब हराया था जब पूरा देश नरेंद्र मोदी की लहर पर सवार था.

इस हिसाब से कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के असल विजेता हैं. राहुल को सावधान रहना चाहिए क्योंकि उनके आलोचक इस जीत का सेहरा कैप्टन अमरिंदर सिंह के सिर बांध सकते हैं.

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अब समय आ गया है जब 10 जनपथ को राहुल गांधी के बारे में कड़ा फैसला ले . इस मामले में वरिष्ठ कांग्रेसियों की अलग अलग राय है . जिसके अनुसार कई कांग्रेसी अब चाहते है कि .

राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के बारे में नैतिक और व्यावहारिक रूप में गंभीरता से सोचना चाहिए.

विकल्प ये हो सकते हैं कि प्रियंका गांधी को पार्टी अध्यक्ष बना दिया जाए या सोनिया गांधी ही कांग्रेस अध्यक्ष बनी रहें.

कुछ कांग्रेसियों को ये भी लगता है कि राहुल गांधी ख़ुद को कांग्रेस संसदीय दल तक सीमित रखें और पार्टी संगठन की कमान प्रियंका गांधी को सौंप दें.

ये कुछ ऐसे विकल्प हैं जिससे गांधी परिवार को अस्थाई रूप से ही सही, लेकिन राहत मिलेगी और पार्टी मज़बूत होगी.

कांग्रेस की दशा के लिए ख़ुद राहुल गांधी को भी ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा.

है लोगों का मानना है कि अब कांग्रेस को शीर्ष से बदलने की जरूरत है . परिवार वाद से दूर हो कर राष्ट्र छवि वाले नए लोगों को आगे लाना चाहिए .

8 नवंबर 2016 को जब प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की, तब कांग्रेस के भीतर इस बात पर मतभेद थे कि सावधानी से इसका स्वागत करें या इंतज़ार करें या पूरा दम लगाकर विरोध करें.

राहुल गांधी ने ज़मीनी रिपोर्ट का इंतज़ार किए बिना जल्दबाज़ी में इसे ग़रीब विरोधी, किसान-विरोधी बता दिया.

जबकि नगद नहीं होने की वजह से तमाम दिक्कतों के बावजूद आम जनता के एक बड़े हिस्से ने प्रधानमंत्री मोदी की मंशा पर सवाल तक नहीं उठाए.

सीएसडीएस के निदेशक संजय कुमार ने इस साल जनवरी में एबीपी न्यूज़ के लिए उत्तर प्रदेश में जनमत सर्वेक्षण किया था.

इसका नतीजा ये था कि नोटंबदी इस चुनाव में कोई मुद्दा ही नहीं है.

सवाल ये है कि कांग्रेस जैसी पार्टी जनता के इस मूड को क्यों नहीं भांप पाई?

महाराष्ट्र और ओड़िशा में स्थानीय निकाय के लिए हुए चुनाव के नतीजे भी कांग्रेस आलाकमान की संस्कृति को दर्शाते हैं.

संजय निरुपम की अस्वीकार्यता के बावजूद राहुल ने उन पर दांव लगाया और उसके बाद जो नतीजा आया, सब जानते हैं.

ज़िम्मेदारी का अभाव कांग्रेस संगठन को खोखला कर रहा है.

कांग्रेस महासचिव मोहन प्रकाश को पारस पत्थर समझा जाता था जो विफलता को सफलता में बदल देते हैं लेकिन महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात और अन्य राज्यों में उनके प्रभार में कांग्रेस बुरी तरह पराजित हुई.

कांग्रेस के लिए सबसे बुरी बात ये रही कि सोनिया और राहुल पार्टी संगठन के विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग जातियों को जगह देने के विचार पर आंखें मूंदे रहे.

शरद पवार ने साल 1997 में कांग्रेस पार्टी को ‘तीन मियां और एक मीरा’ की पार्टी कहा था.

पवार तब सीताराम केसरी के ख़िलाफ़ पार्टी अध्यक्ष का चुनाव लड़ रहे थे. तब उनका इशारा सीताराम केसरी के अहमद पटेल, गुलाम नबी आज़ाद, तारिक़ अनवर और मीरा कुमार गठजोड़ की ओर था.

कांग्रेस के किसी भी जानकार से पूछ लीजिए, पार्टी में तब से अब तक हालात बहुत अधिक नहीं बदले हैं.

भाजपा के यूपी जितने के तीन कारण – नरेंद्र मोदी – नरेंद्र मोदी और सिर्फ नरेंद्र मोदी

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POST. देश भर के राजनितिक विश्लेषक यूपी चुनाव में भाजपा की जीत और सपा बसपा और कांग्रेस की हार की चाहे जितने कारण गिनाएं या हजारों तर्क दें घंटों तक चर्चा करें लेकिन अगर भाजपा की इस एतिहासिक जीत का कोई सबसे बड़ी तीन वजह है वह है सिर्फ नरेंद्र मोदी नरेंद्र मोदी और नरेद्र मोदी .

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देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में वोटों की गिनती शुरू होने के कुछ घंटों बाद ही साफ हो गया था कि उत्तर प्रदेश की जनता ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। बीते दो विधानसभा चुनावों में क्रमश: बसपा और सपा को राज्य की सत्ता सौंपने के बाद इस बार उत्तर प्रदेश की जनता ने भाजपा को पांच साल के लिए सूबे की कमान सौंप दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर पर सवार भाजपा ने 300 से ज्यादा सीटें जीतकर विरोधी दलों को काफी पीछे धकेल दिया । सपा, कांग्रेस और बसपा ने इस चुनाव में ऐतिहासिक हार का सामना किया है। जीत पर जनता को धन्यवाद देते हुए उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि संसदीय बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री का नाम तय किया जाएगा। भाजपा ने इसे पीएम मोदी की नीतियों की जीत करार दिया है। वहीं, सपा नेता नरेश अग्रवाल ने हार स्वीकार कर ली है। उधर बसपा ने अपनी हार के लिए ईवीएम में गड़बड़ी को जिम्मेदार ठहराया है।

यूपी में बीजेपी की 32 साल में सबसे बड़ी जीत
– बीजेपी यूपी में 1985 से चुनाव लड़ रही है। पहले चुनाव में उसने यूपी में 16 सीटें जीती थीं। 2017 के चुनाव में बीजेपी ने 1991 का रिकॉर्ड तोड़ दिया। उसे 312 सीटें मिलीं।
– 2017 का आंकड़ा राम मंदिर मुद्दे पर बीजेपी को 1991 में मिलीं 221 सीटों से भी कहीं ज्यादा है। वहीं, 2014 के लोकसभा चुनाव में वह 328 विधानसभा सीटों पर आगे थी। इस लहर को बीजेपी ने कायम रखा।
2) 37 साल बाद किसी पार्टी को 300+ सीटें
– पिछली बार 1980 में यूपी में कांग्रेस को 309 सीटें मिली थीं। अब 37 साल बाद ऐसा हुआ है कि किसी पार्टी को 300+ सीटें मिलीं हैं।
– यूपी में सबसे ज्यादा सीटें जीतने का रिकॉर्ड भी कांग्रेस के ही नाम है। उसने 1951 के पहले चुनाव में यूपी की 430 में से 388 सीटें जीती थीं।
3) किससे कितनी आगे बीजेपी?
– बीजेपी और अलायंस ने मिलकर 325 सीटें जीत लीं। इस लिहाज से वह सपा-कांग्रेस गठबंधन (54 सीटें) से 6 गुना ज्यादा और बीएसपी (19 सीटें) से 16 गुना ज्यादा सीटें ले आई।
यूपी में ऐसे हैं आंकड़े
पार्टी
2012
विधानसभा
वोट %
2014 लोकसभा
80 सीटें
2017
विधानसभा
वोट %
एसपी 224 29.2 5 47 22%
बीएसपी 80 25.9 0 19 22%
बीजेपी+ 47 15 73 325 40%
कांग्रेस 28 11.6 2 7 6%
अन्य 24 18.3 0 5 10%
यूपी में मुस्लिम असर वाली 124 सीटें, बीजेपी 99 जीती
– 2017 में बीजेपी ने 99 जीती। वहीं सपा ने 19 और बसपा ने 2 जीती। कांग्रेस और अन्य के खाते में सिर्फ 2-2 सीट गईं। जबकि 2012 में बीजेपी को 20, सपा को 59, बसपा को 28, कांग्रेस को 10 और अन्य को 7 सीट मिली थीं।
कितना असर है
सीटें मुस्लिम वोटर
– 50 20 से 29%
– 32 30 से 39%
– 42 40% +
– इन 124 सीटों पर लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 109 सीटों पर, सपा को 10 और अन्यपार्ती को 5 सीटों पर बढ़त थी।
यूपी में नहीं चला धर्म-जाति का गणित, युवा और महिला वोट बने जीत का फॉर्मूला
1) धर्म/जात: 74 सीटों पर मुस्लिम निर्णायक, बीजेपी इनमें से भी 53 पर जीती
– 14 जिलों की 74 सीटों पर मुस्लिम मतदाता 30% से ज्यादा हैं। इनकी भूमिका निर्णायक रहती है। बीजेपी ने इन में से 53 जीतीं। 2012 में बीजेपी सिर्फ 15 पर जीती थी।
– जहां 50% से अधिक हैं मुस्लिम वोटर: वहां पांच में से दो सीटें बीजेपी ने जीतीं, जबकि तीन पर सपा ने।
40 से 50% तक: 37 में से बीजेपी की 24 सीटें।
जहां 30 से 40% तक: यहां की 32 सीटें इस श्रेणी में हैं। बीजेपी यहां 27 सीटों पर जीती है।
– 2012 में सबसे ज्यादा 69 मुस्लिम प्रत्याशी जीते जबकि 2007 में 56 जीते थे लोकसभा में इस वोट बैंक का 66% सपा-कांग्रेस के खाते में, 21% बसपा के पास था।
2) युवा: 29 साल से कम उम्र के 4.05 करोड़ वोटर्स ने बदलाव के लिए वोट दिए
– 2017 के चुनावों में युवा वोटों ने यूपी में बीजेपी का वनवास खत्म करने में मदद की।
– 29 साल से कम उम्र के 4,05,84,888 (29%) यानी हर सीट पर ऐसे 1,00,706 वोटर्स हैं।
– इनमें भी 18 से 19 साल के वोटर 24.53 लाख हैं। जिन्होंने नतीजों को पलटने में बड़ी भूमिका निभाई।
– पहले चरण की हर सीट पर 25 हजार से ज्यादा युवा वोटर्स बढ़े, इनके वोट ने जीत का अंतर बढ़ा दिया।
– 2012 में 30% युवा वोटर्स ने सपा को वोट दिया था। वहीं 36-45 साल के 29% वोट सपा को मिले थे। इन्होंने सपा की जीत में बड़ी भूमिका अदा की थी।
3) महिला: पहली बार 42 महिलाएं जीतीं, सबसे ज्यादा वोटिंग भी इन्होंने की
– ऐसा पहली बार हुआ है कि यूपी विस चुनाव में 42 महिलाएं जीत गईं, बीजेपी की 38, कांग्रेस की 2, बसपा और अपना दल की एक-एक प्रत्याशी जीतीं।
– जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस बार 444 महिलाएं मैदान में थीं। पिछली बार 583 में से 35 महिलाएं विधानसभा में पहुंची थीं।
– इस बार महिलाओं के वोट प्रतिशत 63.26% रहा। जो पिछली बार से 3%ज्यादा रहा। 50 जिलों में भी 60% ज्यादा वोटिंग की। इनमें 275 सीटें हैं।
पीएम उज्जवला योजना बलिया से लांच करना भी रणनीति थी, सबसे ज्यादा कनेक्शन (46 लाख) यूपी में ही दिए गए। पीएम आवास योजना भी यूपी से लांच हुई थी।
किसने क्या कहा?
1) मोदी
– मोदी ने ट्वीट में कहा, ” यूपी की जनता को हृदय से धन्यवाद देता हूं। बीजेपी की ये ऐतिहासिक जीत विकास और सुशासन की जीत है। काशी के सांसद के रूप में काशी की जनता का अटूट विश्वास और अपार प्रेम पाकर मैं आज अभिभूत हूं। काशी के लोगों को शत-शत नमन। उत्तराखंड की जीत बेहद खास है। देवभूमि के लोगों का आभार। मैं विश्वास दिलाता हूं कि बीजेपी पूरी तत्परता और कमर्ठता से लोगों की सेवा करेगी। 10 साल तक अकाली दल-बीजेपी की सरकार को सेवा का मौका देने के लिए पंजाब के लोगों का शुक्रिया।”
– मोदी ने ये भी कहा, “बीजेपी को मिले अभूतपूर्व सपोर्ट से अभिभूत हूं। युवाओं ने जमकर समर्थन दिया। मैं बीजेपी कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत को सैल्यूट करता हूं। उन्होंने बिना थके जमीनी स्तर पर काम किया और और लोगों का विश्वास जीता।”
– “अमित शाह, सभी पदाधिकारियों को पार्टी को नई ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए धन्यवाद। हमारे वक्त का हर पल लोगों के हित और उनके कल्याण के लिए होगा। हमें 125 करोड़ भारतीयों की ताकत पर भरोसा है।”
2) अमित शाह
– अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि रविवार को मोदी बीजेपी मुख्यालय आएंगे। चार राज्यों (यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर) में हमारी सरकार बनने जा रही है। कल पार्लियामेंटरी बोर्ड की बैठक के बाद इसपर फैसला लिया जाएगा।
3) अखिलेश यादव
– अखिलेश यादव ने कहा, ”जो समाजवादी पार्टी के साथ खड़े रहे मैं उनका धन्यवाद देता हूं। मुझे लगता है कि आने वाले समय में जो सरकार आएगी, वो समाजवादी सरकार से बेहतर काम करेगी।
– यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने शनिवार शाम राज्यपाल से गवर्नर से मुलाकात कर इस्तीफा दे दिया। हालांकि, अगला सीएम चुने जाने तक वो केयर टेकर सीएम बने रहेंगे।
4) मायावती
– मायावती ने कहा, “चुनाव में बीएसपी को जनता ने नहीं, ईवीएम ने हराया। चुनाव रद्द होना चाहिए। ईवीएम में गड़बड़ी करके बीजेपी ने बहुमत हासिल किया है। मैं नरेंद्र मोदी और अमित शाह को चुनौती देती हूं कि वे चुनाव आयोग को इस बारे में बताएं। मैं चाहती हूं कि पुरानी व्यवस्था यानी बैलट पेपर से चुनाव कराए जाएं।”
– “बीजेपी ने कोई मुस्लिम कैंडिडेट खड़ा नहीं किया। इसके बावजूद उन्हें मुस्लिम इलाकों के पूरे वोट मिले। ये बात गले नहीं उतर रही। मुस्लिम समाज के लोग कह रहे हैं कि जब हमने बीजेपी को वोट ही नहीं दिया, तो उन्हें वोट कैसे पड़े।”
बाकी राज्यों का हाल
उत्तराखंड में भी बन रही है बीजेपी की सरकार
– उत्तराखंड में भी बीजेपी को बहुमत मिल चुका है। बीजेपी की सरकार बनाएगी।
पंजाब में:
– कांग्रेस को बहुमत मिला। अमरिंदर सिंह सरकार बनाएंगे।
गोवा में:
– यहां फिलहाल कांग्रेस को बढ़त है। लेकिन शाह ने कहा कि यहां बीजेपी की सरकार बनेगी।
मणिपुर में:
– बीजेपी-कांग्रेस में बराबरी का मुकाबला रहा। शाह ने कहा कि यहां भी बीजेपी की सरकार बनेगी।
इन नतीजों ने चौंकाया
– गोवा के सीएम लक्ष्मीकांत पार्सेकर और उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत चुनाव हार गए।
पंजाब
– यहां विधानसभा की 117 और लोकसभा की 13 सीटें हैं।
पार्टी
2012
विधानसभा
वोट %
2014
लोकसभा
2017
विधानसभा
वोट%
अकाली 56 34.7 4 15 25%
आप 4 20 24%
बीजेपी 12 7.2 2 3 5%
कांग्रेस 46 40.1 3 77 38%
अन्य 3 18 2 8%
उत्तराखंड
– यहां विधानसभा की 70 और लोकसभा की 5 सीटें हैं।
पार्टी
2012
विधानसभा
वोट %
2014
लोकसभा
2017
विधानसभा
वोट%
कांग्रेस 32 33.8 11 34%
बीजेपी 31 31.1 5 57 46%
बीएसपी 3 12.2 7%
यूकेडीपी 1 1.9 0.7%
अन्य 3 12.3 2 12%
गोवा
– यहां विधानसभा की 40 और लोकसभा 2 की सीटें हैं।
पार्टी 2012 विधानसभा वोट %
2014
लोकसभा
2017
विधानसभा
वोट%
बीजेपी 21 34.7 2 13 32%
कांग्रेस 9 30.8 17 28%
एमएजी 3 6.7 3 11%
जीएफपी 2 3.5 3 3.5%
अन्य 5 16.7 4 25%
मणिपुर
– यहां विधानसभा की 60 और लोकसभा 2 की सीटें हैं।
पार्टी
2012
विधानसभा
वोट %
2014
लोकसभा
2017
विधानसभा
वोट%
कांग्रेस 42 42.4 2 27 35%
तृणमूल 7 17 1 1%
बीजेपी 21 36%
एलजेपी 1 0.6 1 2%
अन्य 1 24.1 10 26%

महिलाओं को बुलाया तो सम्मान देने के लिए लेकिन पेसेफिक और गीतांजलि ने अपमानित कर खाना खिलाया भीख की तरह। ( VIDEO )

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उदयपुर। जहाँ एक तरफ ८ मार्च को पूरा विश्व महिलाओं के सम्मान, इज़्ज़त और अधिकारों के लिए अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा है वही दूसरी तरफ फोर्टीज़, पेसेफिक और गीतांजलि जैसे बड़े बड़े निजी अस्पताल के प्रबंधकों ने महिलाओं के अपमान में कोई कसर बाकी नहीं रखी और इनका साथ दिया सरकारी स्वस्थ विभाग ने। महिला दिवस पर सम्मान के लिए बुलाई गयी महिलाओं को भोजन के पेकेट भीख की तरह बांटने में ना तो इस धन्ना सेठों को शर्म आई ना ही कार्यक्रम में शामिल होने आये स्वस्थ विभाग के अधिकारियों को।
शहर के भुवाणा स्थित रत्नागिरी पहाड़ी पर मुख्य चिकित्सा विभाग, महिला अधिकारिता, जिला प्रषासन और निजी बड़े अस्पतालों गीतांजलि मेडिकल कॉलेज व् पेसेफिक मेडिकल कॉलेज के माध्यम से महिलाओं के सम्मान समारोह आयोजित किया गया था। जिसमें बेटियों के जन्म पर उनके नाम से रत्नागिरी पहाड़ी पर पौधे भी लगवाए गए। सम्मान देने के लिए बुलाई गयी महिलाओं के भोजन की व्यवस्था गीतांजलि और पेसेफिक मेडिकल कॉलेज द्वारा की गयी थी। धन्ना सेठों द्वारा बनाये गए ये मेडिकल कॉलेज के प्रबंधक के दिलों में अगर सचमुच में महिलाओं के प्रति सम्मान होता तो अपने खाना पूर्ति कार्यक्रम के लिए बुलाई गयी महिलाओं को पूरा सम्मान देते ढंग से बैठा कर उन्हें खाना भी खिलाते। लेकिन इन निजी अस्पतालों के धन्ना सेठों ने आज ही के दिन महिलाओं के सम्मान को ठोकर पर रखने की ठान रखी थी। जब महिलाओं को खाना खिलाने की बारी आई तो जानवरों और भूखों की तरह उन्हें बता दिया कि टेम्पो में पेकेट बांटे जायेगें वहां से लेलेना। शहर से दूर आई बेचारी महिलाएं जो घंटों भूखी प्यासी बैठी थी और इन अस्पतालों और सरकारी महकमे के खाना पूर्ति कार्यक्रम का हिस्सा बनी हुई थी उन्हें बे मन से भी बात मनानी पड़ी। टेम्पो में भीख की तरह दिए गए पेकेट को लेने के लिए मजबूर हो गयी। भूखी प्यासी महिलाएं वही मिट्ठी में जमीन पर बैठ कर खाना भी खाया। सरकारी महकमे और निजी अस्पताल के ठेकेदारों ने आज ही के दिन इन महिलाओं को अपनी इस करतूत से जीभर कर अपमानित किया। अगर चाहते तो इन्हें पंडाल में बैठा कर सम्मान के साथ खाना खिला सकते थे।

https://www.youtube.com/watch?v=q8xXvXoclk4

उदयपुर में कांग्रेस के जन वेदना सम्मलेन में खुद वेदना का नमूना बनी – गिनती के कांग्रेसी आये जनता की वेदना जताने।

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उदयपुर। राज्य सरकार की जन विरोधी नितियों के विरूद्ध उदयपुर शहर जिला कांग्रेस द्वारा आयोजित जन वेदना सम्मलेन खुद कांग्रेस की वेदना का नमूना बन गया।
कांग्रेस के इस जन वेदना सम्मलेन में बड़े बड़े नेताओं की उपस्थिति के बावजूद गिनती के कर्ग्रेसी उपस्थित थे। सम्मलेन में कार्यकर्ता तो दूर की बात है शहर की कार्यकारणी के पदाधिकारी भी उपस्थित नहीं थे।
मंगलवार को अशोकनगर स्थित विज्ञान भवन में शहर जिला कांग्रेस द्वारा जन वेदना सम्मलेन आयोजित किया गया। जन वेदना सम्मलेन खुद कांग्रेसियों के उपहास का ही कारण बन गया। सम्मलेन में ५० लोग बमुश्किल उपस्थित थे। कांग्रेस के इस सम्मलेन की हालत यह थी कि एक चोथाई कुर्सियां भी नहीं भरी थी। जनता से जुडी समस्याओं की और राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध चर्चा करने के लिए बुलाया गया जन वेदना सम्मलेन में कांग्रेस कमिटी के कार्यकर्ता तो बहुत दूर की बात है। शहर जिला कांग्रेस कमिटी की कार्यकारणी में कुल १२६ पदाधिकारी है इस संख्या के आधे पदाधिकारी भी मोजूद नहीं थे। जो कांग्रेसी उपस्थित थे उनको वक्ताओं द्वारा बोला जारहा भाषण समझ में नहीं आरहा था और उठ कर बाहर अपनी अपनी चर्चा में मगन थे। कई वरिष्ठ कांग्रेसी यह कहते हुए उठ कर चले गए कि कल परसों के लडको को हम सुनने नहीं आये है। कांग्रेस का जन विरोधी नीतियों के विरुद्ध जन वेदना सम्मलेन एक तरह से खुद कांग्रेस के वेदना का सम्मलेन बन कर रह गया।
सम्मलेन में पूर्व पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ.गिरिजा व्यास ने संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा के अच्छे दिनों का आज भी जनता को इन्तजार है। भाजपा ने झूठे वादों के अलावा कुछ नही दिया। जनता से किये गये वादों को जुमलों में बदला। मंहगाई, बिजली, किसान, मजदूर, व्यापारी और आमजन को इस सरकार से पीड़ा ही मिली है। नोटबंदी से कालाधन एवं आतंकवाद तो समाप्त नही हुआ लेकिन इससे देश के अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हुआ है। नोटबंदी की समस्या से जनता अब तक उबर नही पायी है उस पर कैशलेस व्यवस्था थोपी जा रही है जो कतई उचित नही है। ए.आई.सी.सी. पर्यवेक्षक मीर शाह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि केन्द्र व राज्य की भाजपा सरकार लोकतंत्र से चुनी हुई सरकार की तरह काम नही कर रही है। इनकी कार्यशेली से ऐसा लगता है कि यह आम जनता, किसानों की सरकार नही है। यह 5 करोडपतियांे की सरकार है। दोनों सरकारों में जनता का कोई विकास नही हुआ है। विकास सिर्फ बी.जे.पी. नेताओं का हुआ है। लोग इन्तजार कर रहे है कि कब कांग्रेस को वोट देकर बी.जे.पी. को सत्ता से बाहर करें। इस अवसर पर प्रदेश महासचिव जगदीशराज श्रीमाली, प्रदेश सचिव पंकज कुमार शर्मा, पूर्व विधायक त्रिलोक पूर्बिया, पूर्व नेता प्रतिपक्ष के.के.शर्मा, दिनेश श्रीमाली, नेता प्रतिपक्ष मोहसीन खान, महिला कांग्रेस अध्यक्ष चन्दा सुहालका, गोपाल राय नागर, पूरण मेनारिया, मुजीब सिद्धीकी, बाबूलाल जैन ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।

पुलिस के साये तले उदयपुर शहर में गुंडों का आतंक ( VIDEO )

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उदयपुर । उदयपुर के प्रतापनगर थाना इलाके के पायडा क्षेत्र में पिछले दिनों एक वृद्ध के साथ कुछ गुंडों द्वारा मारपीट का वीडियो आज सामने आया है । इस वीडियो में साफ़ तौर पर देख सकते हे की ये गुंडे किस तरह पुलिस की आड़ में अपनी गुंडई पर आमादा हे । दरअसल पायडा इलाके में रहने वाले एक वृद्ध व्यक्ति कुमावत का उसके पडोसी अधिवक्ता ललित जारोली से प्लाट को लेकर विवाद चल रहा है । यही इस विवाद को देखते हुए कोर्ट ने अधिवक्ता ललित जारोली को पाबन्द करते हुए पीड़ित कुमावत के पक्ष में स्टे दे रखा है । लेकिन कानून के रखवाले ललित जारोली ने न्यायलय के आदेश को ताक में रख कर अपने गुंडों द्वारा न सिर्फ पीड़ित कुमावत को धमकाया बल्कि उसकी और उसके परिजनों की जोरदार पिटाई कर दी । इस दौरान पीड़ित ने प्रतापनगर पुलिस से सहयोग की मांग की तो प्रताप नगर पुलिस थाने में तैनात एसआई विजेंद्र सिंह ने पीड़ित का सहयोग करने के बजाये गुंडों का साथ दिया । पीड़ित कुमावत पिछले कई दिनों से उन गुंडों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग को लेकर एसपी,एसएसपी और पुलिस थाने के चक्कर काट रहा है । पीड़ित का आरोप है कि पुलिस और कुछ असामाजिक तत्व मिलकर उसके घर के बाहर अवैध कब्जा करना चाहते है । जब इनकी और से इसका विरोध किया गया तो वकील ललित जारोली के इशारों पर कुछ गुण्डो ने उसके घर में घुसकर जोरदार मारपीट की । पीड़ित का कहना है कि गुंडों द्वारा उसे मकान की छत से नीचे फेंकने का भी प्लान था लेकिन परिजनों के आने से वे अपने मंसूबो में कामयाब नहीं हो पाए । पिटाई की घटना में बीजेपी के युवामोर्चे के कुछ कार्यकर्त्ता के शामिल होने की बात भी सामने आ रही है । वृद्ध के साथ पिटाई का सनसनीखेज वीडियो वायरल होने के बाद अब पुलिस के ऊपर मीडिया का दबाव बढ़ा तो पुलिस अब् 20 दिन बाद इस मामले में कार्यवाही की बात कह रही है । लेकिन इस पुरे प्रकरण से एक बात साफ़ हो गयी है कि की किस तरह उदयपुर में गुंडे खाकी की आड़ में जमीनों से जुड़े मामले निपटा रहे है।

https://youtu.be/8WiIcN-R7OM

 

 

ये हैं अच्छे दिन कैश ट्रांजक्शन पर ही नहीं , फ्री की सेवाओं पर भी अब देना होगा शुल्क

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POST. एचडीएफसी (HDFC), आईसीआईसीआई (ICICI), एक्सिस और एसबीआई (SBI) जैसे बैंकों ने अपने खाताधारकों के लिए न सिर्फ कैश ट्रांजेक्शन (नकद निकासी, जिसमें कैश जमा करना और निकालना दोनों शामिल हैं) को लेकर नए नियम बनाए हैं बल्कि कुछ और चार्ज भी लगाए हैं? जी हां. कहा जा रहा है कि नकदी के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए बैंकों द्वारा ऐसी पहल की जा रही हैं. आपको एक बार फिर से बता दें कि तय सीमा से अधिक बार कैश ट्रांजेक्शन करने पर आपको अतिरिक्त फीस देनी होगी.

देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने ग्राहकों के लिए खातों में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने को अनिवार्य बनाते हुए कहा है कि ऐसा न करने वालों पर 1 अप्रैल से पेनल्टी लगाई जाएगी. महानगरीय इलाकों में खातों के लिए न्यूनतम 5,000 रुपये, शहरी क्षेत्रों में 3,000, अर्ध शहरी क्षेत्रों में 2,000 तथा ग्रामीण इलाकों में 1,000 रुपये न्यूनतम बैलेंस रखना जरूरी कर दिया गया है. हालांकि बैंकों द्वारा ट्रांजेक्शन शुल्क वसूलने के बढ़ते विरोध के बीच सरकार हरकत में आई है. और यदि सूत्रों की मानें तो सरकार ने बैंकों से ट्रांजेक्शन शुल्क वसूलने के फैसले की समीक्षा करने का आग्रह किया है. यदि आपके सेविंग अकाउंट में 25 हजार रुपये से कम रकम है तो हर तीसरे माह में 15 रुपये SMS चार्ज के रूप में भी वसूले जाएंगे पर लेकिन बैंक 1,000 रुपये तक के यूपीआई/यूएसएसडी ट्रांजेंक्शन्स पर कोई चार्ज नहीं वसूलेगा. इसके अलावा, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से खातों में न्यूनतम बैलेंस न होने पर पेनल्टी लगाने के फैसले को वापस लेने का आग्रह किया है.  एसबीआई 1 अप्रैल से अपने सेविंग बैंक अकांउट ग्राहकों को महीने में सिर्फ 3 बार कैश फ्री में जमा करने की अनुमति देगा. इसके बाद हर बार सर्विस टैक्स के साथ 50 रुपये का चार्ज लगेगा. एक माह में दूसरे बैंक के एटीएम से तीन बार से ज्यादा कैश निकालने पर 20 रुपये की फीस देनी होगी. वहीं अगर ग्राहक एसबीआई के एटीएम से पांच से ज्यादा ट्रांजेक्शन करता है तो हर बार 10 रुपये का शुल्क लिया जाएगा.

अब यदि प्राइवेट सेक्टर के बड़े बैंक एचडीएफसी की बात करें तो इससे 4 बार से अधिक कैश निकालने पर 150 रुपये फीस चुकानी होगी. साथ ही यदि बैंक की होम ब्रांच से जमा निकासी कर रहे हैं तो भी दो लाख रुपये तक ही फ्री होगा इस के बाद कम से कम 150 रुपये या पांच रुपये प्रति 1000 रुपये पर पे करना होगा. वैसे नॉन-होम ब्रांच में फ्री लेन-देन 25,000 रुपये है. इसके ऊपर कस्टमर्स को न्यूनतम 150 रुपए या पांच रुपये प्रति 1000 रुपये की पेमेंट करनी होगी.

वहीं, आईसीआईसीआई बैंक की ओर से बदले नियम के मुताबिक, एक महीने में 4 लेन-देन के लिए कोई फीस नहीं है मगर इसके बाद प्रति 1,000 रुपये पर 5 रुपये की फीस लगेगी. थर्ड पार्टी ट्रांजेंक्शन के मामले में सीमा 50,000 रुपये प्रतिदिन की होगी. नॉन होम ब्रांच में एक महीने में पहली नकद निकासी के लिए कोई शुल्क नहीं लेगा लेकिन उसके बाद प्रति 1,000 रुपये पर 5 रुपये का शुल्क लेगा।

एक्सिस बैंक की बात करें तो नॉन-होम ब्रांच के 5 ट्रांजेंक्शन जहां बैंक ने फ्री रखे हैं. इसके अलावा, वैसे तो ग्राहकों को हर महीने 5 ट्रांजेक्शन फ्री दिए गए हैं लेकिन इसके बाद छठे लेन-देन पर भारी फीस वसूली जाएगी. कम से कम 95 रुपये प्रति लेन-देन की दर से चार्ज लगाया जाएगा. वहीं, महत्वपूर्ण बात यह है कि एक्सिस बैंक ने एक दिन में कैश जमा करने की सीमा 50,000 रुपये ही तय की है. इससे अधिक रुपया यदि आप जमा करते हैं तो प्रति 1000 रुपये पर 2.50 रुपये की दर से या प्रति ट्रांजेक्शन 95 रुपये, में जो भी ज्यादा होगा, चार्ज लिया जाएगा.

Source- khabar.ndtv.com

स्वार्थ सिद्ध करने के लिए सोशल मिडिया पर ग्रुप बनाया और उतर गए मुटठी भर लोगों को लेकर पुलिस का विरोध करने।

WhatsApp Image 2017-03-06 at 8.20.10 PMउदयपुर। शहर में पुलिस और कानून व्यवस्था को सुधरने को लेकर कुछ संगठनों ने विरोध में प्रदर्शन किया तो वहीँ पुलिस के समर्थन में भी कई संगठन खड़े हो गए और उन्होंने भी निजी स्वार्थ के चलते एक व्यक्ति द्वारा किये जा रहे पुलिस के विरोध का जम कर विरोध किया।
शहर में कानून व्यवस्था सुधारने और बढ़ रहे अपराध को कम करने की मांग को लेकर पिछले दिनों सोशल मिडिया पर “सेव उदयपुर” के बैनर तले खूब प्रचार किया जा रहा था। लेकिन इस मुहिम की हवा तब निकल गई, जब सोमवार को जिला कलेक्ट्री के बाहर मुट्ठीभर लोग ही इकट्ठे हुए। दरअसल सेव उदयपुर मुहिम के संयोजक प्रवीण रातलिया का कोई जमीन विवाद नहीं सुलटा तो रातलिया ने शहर के संगठनों और लोगों को जोड़ने के लिए स्वयंभू न्यायाधिश बनकर इस मुहिम का इजाद कर दिया। उनका मानना है कि शहर की पुलिस भुमाफियाओं और दलालों से मिली हुई है और थानों में ही अपराधों को जन्म दिया जा रहा है। जिला कलेक्ट्री के बाहर दो दर्जन लोगों की उपस्थिति ने यह साफ कर दिया कि रातलिया की इस मुहिम से शहरवासी सहमत नहीं है या सभी यह जान गए है कि रातलिया अपने निजी स्वार्थ हित के चलते सभी का सहयोग चाहते है। आज दिन में कलेक्टरी के बाहर आए इन लोगों ने जिला पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मुहिम से जुड़े सदस्यों ने कलेक्ट्री के बाहर जमा होने के बाद जिला पुलिस को कठघरे में खडा कर दिया ओर भूमाफियाओं के साथ पुलिस की मिली भगत बताते हुए पीडितों को न्याय नही मिलने की बात कही। बाद में अतिरिक्त जिला कलेक्टर ओपी बुनकर को ज्ञापन सौंपा ओर शहर में कानून व्यवस्था में सुधार लाने की बात कही। इतना ही नही रातलिया का आरोप था कि अपराधियों की पुलिस सहायता कर रही है पीडितों को न्याय नही मिल रहा है। रातलिया ने चेतावनी भी दी है कि तीस दिनों में बदलाव नही आता है तो सैकडों की तादात में जिला कलेक्ट्री के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा।
इधर सेव उदयपुर मुहिम के संयोजक पूरे जिले की पुलिस पर आरोप लगाते हुए पुलिस को दागदार बता रहे है वहीँ दूसरी और एक दर्जन से ज्यादा सामाजिक संगठनों ने प्रवीण रातलिया का जमकर विरोध करते हुए जिला पुलिस महानिरीक्षक और जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन भी सौंपा। सभी का कहना था कि रातलिया अपनी स्वार्थ सिद्धी के चलते लोगों को भ्रमित करके असामाजिक कृत्य कर रहे है। सभी ने रातलिया के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात
भी कही। ऐसे में व्हाट्स एप पर संचालित रोयल ग्रुप पर प्रवीण रातलिया ने सेव उदयपुर नाम से मुहिम में जुड़ने की बात कही तो कई सदस्यों ने इसका विरोध किया साथ ही भोपालपुरा सीआई चांदमल ने जब लिखा कि वर्दी मैरी दूसरी मां है उसके खिलाफ गाली कभी सहन नहीं करूंगा तो सभी सदस्यों ने सीआई की बात का समर्थन किया। बाद में प्रवीण रातलिया उस ग्रुप से हट गए लेकिन इससे पहले उन्होंने जो लिखा उससे साबित हो गया कि इस मुहिम से वह खुद की
स्वार्थसिद्धी ही चाहते थे।

पास होना है तो पहनो लाल अंडरवियर

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l_1-1488650908पूरे साल पढ़ाई करने के बाद भी एग्जाम आते ही डर लगने लगता है कि पास होंगे या नहीं। पास हो भी गए तो अच्छे नंबर आएंगे कि नहीं… और इसी डर को दूर करने के लिए किसी बच्चे के माता-पिता मीठा दही खिलाकर इम्तहान दिलाने के लिए घर से विदा करते हैं तो किसी के शुभ महूर्त और चौघड़िया देखकर।

अच्छे नंबरों की ख्वाहिश में यह टोटके हमारे और आपके घर में ही नहीं होते, बल्कि पूरी दुनिया में इन्हें अजमाया जाता है। हालांकि हमारे यहां बात दही और शक्कर पर ही खत्म हो जाती है, लेकिन दूसरे देशों में तो यह अंडरवियर के रंग, खाने और गाने तक पहुंच जाती है। आइए जानते हैं कि दुनिया भर में सफलता के लिए कैसे-कैसे टोटके अजमाए जाते हैः-

सेब से मिलती है सुरक्षा

परीक्षा के दौरान हांगकांग में सेब बहुत खाया जाता है। इतना ही एग्जाम देने वाले बच्चों के लिए सेब के दर्जनों पकवान बनाए जाते हैं। आइए इस टोटके की वजह बताते हैं। मामला ये है कि चीनी भाषा में सेब को पिंग गुओ कहते हैं। जिसका मतलब होता है  सेफ़्टी यानी सुरक्षा। इसीलिए माना जाता है कि इसे खाने से परीक्षा में सुरक्षित तौर पर पास होंगे।

बिना नहाए देते हैं परीक्षा 

दक्षिण कोरिया में मान्यता है कि अगर अच्छे नंबरों से पास होना है, तो परीक्षा से पहले नहाना नहीं चाहिए और ज्यादा मन करे तो शरीर पानी से पौंछ लें, लेकिन सिर धोना तो बिल्कुल मना है। यहां के लोग मानते हैं कि बाल धोने से दिमाग में सजो कर रखा गया सारा ज्ञान पानी के साथ बहकर बाहर निकल जाएगा और जब दिमाग खाली होगा तो परीक्षा अच्छी कैसे हो सकती है। है ना कमाल का टोटका।

सूअर काटोगे तभी पास होगे

चीन का टोटका तो और भी खतरनाक है। यहां परीक्षा से पहले भूने हुए सूअर को काटने का रिवाज है। इसमें छात्र-छात्राएं सूअर को दो बराबर भाग में काटने की कोशिश करते हैं। जो कामयाब होते हैं, माना जाता है कि वे अपनी परीक्षा पहली ही कोशिश में पास कर लेगा और जो ऐसा नहीं कर पाते, माना जाता है कि उन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ेगी।

पास होना है तो पहनो लाल अंडरवियर 

लाल रंग का अंडरवियर चीन में पास होने की गारंटी माना जाता है। चीनी लोग लाल रंग को लकी मानते हैं इसलिए छात्र परीक्षा के समय लाल रंग का लाल अंडरवियर जरूर पहनते हैं। हालत ये है कि चीन में जब कोई व्यक्ति सफल होता है तो कहा जाता है, क्या आपने लाल अंडरवियर पहना है ?

अच्छी परीक्षा की जापानी गारंटी

जापान में आमतौर पर यह माना जाता है कि परीक्षा के दिन काटसुडोन यानी डीप फ्राइड पोर्क कटलेट और अंडे वाला गरम चावल खाकर जाएं इससे परीक्षा अच्छी जाती है। आजकल जापान में किटकैट चॉकलेट भी ख़ुद को लकी बताते हुए मार्केटिंग कर रही है। जापानी में किट्टो काट्टो नाम का यह चॉकलेट किट्टो काटसू शब्द से मिलता-जुलता है जिसका मतलब है निश्चित सफलता।

यहां तो एग्जाम के देवता भी हैं

नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर और नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी जैसे एशिया के बड़े विश्वविद्यालयों में छात्र परीक्षा के दिनों की घबराहट से उबरने के लिए ख़ास देवता की पूजा करते हैं। ये देवता हैं, बेल कर्व गॉड। नेशनल यूनिवर्सिटी ने तो अपने छात्र-छात्राओं के लिए बेल कर्व गॉड की वेबसाइट, फ़ेसबुक और ट्विटर अकाउंट भी बना रखा है ताकि बच्चे ऑनलाइन प्रार्थना कर सकें।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट 

केंद्रीय विद्यालय कोटा के प्रिंसिपल शेखर कहते हैं कि एग्जाम तो तभी अच्छा होगा जब आपने पूरे साल पढ़ाई अच्छे से की हो। जो प्रॉब्लम्स बची रह गई हों उन्हें एग्जाम से पहले शॉर्टआउट कर लिया हो।

वहीं कोटा विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर और यूजीसी की रिसर्च अवार्डी डॉ. अनुकृति शर्मा कहती हैं कि टोटको से मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है। बच्चों और उनके माता-पिता को लगता है कि दही-शक्कर खाने से परीक्षा अच्छी हो जाएगी। इससे बच्चों पर पड़ने वाला परीक्षा का मानसिक दबाव कम हो जाता है और वह बेहतर करने की कोशिश में जुट जाते हैं। हालांकि इसका एक बुरा पहलू यह है कि कुछ अभिभावक और बच्चे मेहनत से ज्यादा भरोसा टोटकों पर करने लगते हैं जिसके चलते उन्हें असफलता झेलनी पड़ती है।

मौज-शौक के लिए 14-15 साल के अपचारियों ने चुरा लिए दुपहिया वाहन

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उदयपुर . 13-14 साल की उम्र के कुछ बच्चे की मौज-शौक और उनकी फर्राटेदार अलग-अलग गाडिय़ां पुलिस की नजर में चढ़ गई। पुलिस ने हाव-भाव व गतिविधियां संदिग्ध होने पर जब उन्हें घेरा तो उसके पास चोरी के आठ दुपहिया वाहन मिले। पुलिस ने उनसे सभी गाडिय़ां बरामद कर ली है।

उपाधीक्षक गिर्वा ओमकुमार ने बताया कि थानाधिकारी रवीन्द्रसिंह चारण मय टीम पिछले कई दिनों से दुपहिया वाहन चोरों पर नजर रखे हुए थे। इस बीच, सेक्टर 14 व उसके आसपास के इलाकों में टीम के सदस्यो को कुछ बच्चों की गतिविधिया संदिग्ध लगी। पुलिस ने जब उन्हें पूछताछ करनी चाही तो वे बचने के लिए इधर-उधर होने लगे।पुलिस ने छह अपचारियों को पकड़ा तो उन्होंने  शहर के अलग-अलग इलाकों से दुपहिया वाहन  चुराना कुबूल किया। पुलिस ने अपचारियों से चार माह में चोरी की गई छह मोटरसाइकिलें और दो स्कूटी बरामद की। एक मोटरसाइकिल को अपचारियों ने औने-पौने दामों किसी को बेचना भी बताया है पुलिस अभी उससे पूछताछ में जुटी है। पुलिस ने बताया कि चोरी गई गाडि़यों के नम्बर व हुलिया बदलते हुए अपचारी उन्हें दौड़ाते हुए मौज-शौक पूरा कर रहे थे।  सभी गाडिय़ों को इन्होंने मास्टर चाबी से खोला।