वेदान्ता समूह के चेयरमैन श्री अनिल अग्रवाल ने राजस्थान दिवस समारोह में शिरकत की

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उदयपुर। दिग्गज धातु खनन उद्योगपति एवं वेदान्ता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल राजस्थान दिवस समरोह में शिरकत होने के लिए सीधे विदेश से जयपुर आये हैं। श्री अग्रवाल राजस्थान दिवस समारोह के स्टेट अतिथि रहे।
अनिल अग्रवाल की राजस्थान में दो बड़ी कंपनियाॅं हिन्दुस्तान जिंक एवं केयर्न इण्डिया भारत एवं विष्व में खनन उत्पादन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। केयर्न इण्डिया भारत में 30 प्रतिषत कच्चे तेल का उत्पादन करती है।

ज्ञातव्य रहे कि श्री अनिल अग्रवाल की वेदान्ता रिसोर्सेज दुनिया की सबसे बड़ी धातु एवं खनन कंपनियों में से एक है जो जस्ता, तांबा, लौह अयस्क, बिजली, एल्यूमिनियम और ऊर्जा उत्पादन करती है। लंदन स्टाॅक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनी वेदान्ता लिमिटेड को नियंत्रित करती है जिसकी भारत, अफ्रीका और आयरलैण्ड में विभिन्न कंपनियाॅं स्थापित है। वेदान्ता के कारोबार में हिन्दुस्तान ज़िंक, जिं़क इंटरनेषनल, स्काॅर्पीन जिं़क, स्टरलाइट काॅपर, सेसा गोवा, केयर्न इण्डिया, टीएसपीएल एवं एल्यूमिनियम उद्योग बालको और वैल शामिल है। वेदान्ता समूह ने विदेषी पूंजी अर्जित कर भारत में निवेष किया है।

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राजस्थान के सीकर जिले के छोटे से कस्बे रींगस के श्री अनिल अग्रवाल ने विष्व के औद्योगिक पटल पर अपनी अनूठी उद्यमिता की धाक जमाते हुए श्री अग्रवाल खनिज एवं धातु व्यापार में तेजी से प्रगति करते हुए आज एक अत्यन्त सफल एवं अनुकरणीय व्यक्तित्व हैं ।

वेदान्ता के शेयरधारकों को 6,580 करोड़ रुपये का अंतरिम लाभांष

Dividend-Re-e1459399720179उदयपुर . वेदान्ता के निदेशक मण्डल ने कंपनी के शेयरधारकों को वित्तीय वर्ष 2016-17 में 1770 प्रतिशत द्वितीय अंतरिम लाभांश देने की घोषणा की है जो 1 रूपये के प्रति इक्विटी शेयर पर 17 रुपये 70 पैसे है। अंतरिम लाभांष की रिकाॅर्ड तिथि 12 अपै्रल, 2017 है।

इसके अलावा, निदेषक मण्डल ने केयर्न इण्डिया के शेयरधारकों को 17 रुपये 70 पैसे प्रति इक्विटी शेयर लाभांष देने की मंजूरी दी है, जो वेदान्ता लिमिटेड और केयर्न इण्डिया लिमिटेड के बीच व्यवस्थित योजना के अनुसार कंपनी के शेयरधारक बनेंगे। योजना के प्रभावित होने के बाद केयर्न इण्डिया लिमिटेड के शेयरधारकों को लाभांष भुगतान की रिकाॅर्ड तिथि निष्चित की जाएगा।
केयर्न इण्डिया के शेयरधारकों सहित कुल 6,580 करोड़ रुपये का लाभांष दिया जाएगा।

गंजापन व बालों के झड़ने के कारण और उसका होम्योपैथिक उपचार – डॉ. काजल वर्मा

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Dr kajal Verma -Homoeopathy physician
Dr kajal Verma -Homoeopathy physician

पोस्ट , इस कॉलम के जरिये होम्योपैथी फिजिशियन डॉक्टर काजल वर्मा आपको विभिन्न बीमारियों, उनके कारण तथा होम्योपैथी इलाज कितना कारगर व् किस तरह संभव है की जानकारी देंगी।

2016_3$largeimg10_Mar_2016_231219380बाल या गंजापन के कारण

बालों का झड़ना या गंजेपन के कारणों को समझने के लिए, बालों के विकास और गिरावट की सामान्य प्रक्रिया को समझना महत्वपूर्ण है। बाल निरंतर विकास की एक सामान्य चक्रीय प्रक्रिया से गुजरते हैं और एक ही समय में गिरते हैं। बाल का जीवन चक्र तीन चरणों में होता हैं। विकास के पहले चरण को एनेजेन चरण के रूप में जाना जाता है, जो 2 से 6 वर्षों तक रहता है। लगभग 85% बाल का विकास एनेजेन चरण के दौरान ही होता हैं। बाल में सामान्य वृद्धि एक वर्ष में लगभग 10 सेमी होती हैं। दूसरा चरण कैटेजन चरण या संक्रमण कालीन चरण के रूप में जाना जाता है। यह लगभग 1-2 सप्ताह तक रहता है। इस चरण के दौरान, बाल 1 / 6th तक कम हो जाते है। अंतिम चरण टेलोजेन चरण या आराम चरण है। इस चरण के दौरान, बाल विकसित नहीं होते हैं। यह 5-6 सप्ताह तक रहता है। बाल के जीवन के सामान्य चरणों को ध्यान में रखते हुए, एक व्यक्ति एक दिन में करीब 40-80 बाल  बाल खो देता हैं। वास्तव में जिस तरह हर व्यक्ति अपने बालों को खो देता है उसको पता भी नहीं चलता है । यह केवल तब होता है जब एक दिन में बाल गिरने की संख्या बहुत अधिक हो जाती है । अत्यधिक बाल के झड़ने के कारण हर व्यक्ति में अलग अलग होते है।  किसी के खान पान में कमी जहां किसी को आवश्यक खनिजों और विटामिन का पर्याप्त स्तर नहीं मिलता है यह बाल झड़ने का एक प्रमुख कारण हो सकता है। जंक, सेलेनियम और आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक बाल के सामान्य विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं और इन में किसी भी कमी से बाल झड़ सकते है।

अच्छे स्वास्थका न होना या किसी बिमारी का लम्बे समय तक होना भी बालों के झड़ने का कारण हो सकता है । यह बीमारी तीव्र या अस्थायी रूप से भी हो सकती है लेकिन कई बार यह लंबे समय तक चलने पर पुरानी भी हो सकती है . पुरुषों में, सबसे आम कारण एंड्रोजेनिक गंजापन या पुरुष पैटर्न गंजापन है गंजापन की यह विविधता केवल पुरुषों में मौजूद होती है और परिवारों में चलती होती है। यह टेस्टोस्टेरोन से अधिक होने की वजह से होता है, जिसके परिणामस्वरूप पूरे शरीर में बाल विकास बढ़ जाता है, लेकिन सिर पर बाल गिर जाता है। पुरुष पैटर्न की गंजापन में, बालों के झड़ने मुख्य रूप से सामने के हिस्से से होते है और पीछे वाले भाग की अपेक्षा सिर के ऊपर अधिक होते है। खोपड़ी में फंगल संक्रमण भी गंजेपन का कारण हो सकता है। सक्रमण के कारण भी अलग अलग हो सकते है जिसकी वजह से बाल झाडना शुरू हो जाते है .

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गंजापन या बालों के झड़ने का उपचार

इससे पहले कि हम बालों के झड़ने के उपचार की बात करते हैं, कुछ को कुछ बुनियादी चीजों को समझने की आवश्यकता है। जैसा कि बाल गिरने के कारणों के बारे में ऊपर बताया जा चुका है, इस समस्या के विभिन्न कारण हैं। गंजापन का इलाज हर समस्या के कारण के अनुसार अलग अलग होता है।

ऐसे मामलों में जहां ओर्ग्रोजेनिक कारणों के कारण गंजापन हो रहा है, इसे में गंजापन दूर करना लगभग असंभव है । लेकिन इसे मामलों में अगर सही समय पर ध्यान दिया जाय तो बालों को झाड़ने से रोका जासकता है . कई बार भ्रामक इलाज बता कर लोगों को भ्रमित भी किया जाता है जिससे हमेशा सावधान रहने की आवश्यकता है .

अन्य मामलों में, जहां समस्या कुछ फंगल संक्रमण या कुछ प्रणालीगत मुद्दों या खराब स्वास्थ्य की वजह से होती है, उसका इलाज निश्चित तौर पर संभव है और यहां तक कि खोए हुए बाल वापस प्राप्त किये जा सकते है।

हेयरफ्लो के इलाज में होम्योपैथी की भूमिका

होम्योपैथी बाल गिरने या गंजापन या बाल झड़ने के इलाज में बहुत प्रभावी है।  बालों के लिए होम्योपैथिक दवाएं न सिर्फ लक्षणों का इलाज करती हैं, बल्कि बालों के झड़ने के कारण ही उन समस्याओं का भी इलाज करती हैं जो बालों के झड़ने के मूल कारण हैं। यदि किसी संक्रमण के कारण बाल झड़ रहे है तो होम्योपैथी के जरिये इन्हें रोका जासकता है और बाल पुनः स्वाभाविक स्थिति में आसकते है . होम्योपैथी इलाज के दोरान रोगी के बालों के झड़ने या कम होने के मूल कारणों को खोजा जाता है उसके बाद ही चिकित्सक तय करता है कि रोगी का इलाज किस तरह संभव है .

कई बार बाल झाड़ने को लेकर रोगी काफी तनाव में भी रहता है और एक अच्छा होम्योपैथी चिकित्सक रोगी के तनाव को दूर करने के साथ साथ उसका इलाज भी करता है .

इस लेख के जरिये हम यह बताना चाहते है कि अगर आपके बाल झड़ रहे है तो तनाव में नहीं आकर एक अच्छे होम्योपैथी फिजिशियन से सलाह लेनी चाहिए . क्यूँ की बालों के झाड़ने और गंजेपन को दूर करने का कारगर नुस्खा होम्योपैथी में छिपा हुआ है .

मसाज कराने गयी विदेशी युवती के साथ अश्लील हरकत – झीलों की नगरी फिर हुई शर्मसार

WhatsApp Image 2017-03-27 at 7.29.16 PMउदयपुर। पर्यटन नगरी उदयपुर एक बार शर्मसार हो गया । हनुमान घाट पर एक विदेशी युवती के साथ मसाज पार्लर पर छेड़छाड़ का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
अतिथि देवो भव के संस्कार को लज्जित करते हुए उदयपुर एक बार फिर शर्मसार हुआ है। विदेशी युवती की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को हिरासत में लेलिया है।
जानकारी के अनुसार अम्बामाता थाना क्षेत्र में पिछोला झील किनारे हनुमान घाट पर भारती मसाज पार्लर संचालित है। सोमवार को आस्ट्रिया की रहने वाली बियंका नाम की युवती इस मसाज पार्लर पर एक्युपंक्टर एवं मसाज कराने गयी थी। मसाज के दौरान पार्लर के संचालक राजेंद्र शर्मा ने गलत नियत से उसके शरीर पर छेड़कानी करते हुए उसके प्राइवेट पार्ट के साथ अश्लील हरकत कर डाली। जिस पर विदेशी युवती ने इसका विरोध किया।
गुस्साई विदेशी युवती ने अम्बामाता थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई मामला विदेशी सैलानी का होने के चलते पुलिस ने इस त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी राजेन्द्र शर्मा को हिरासत में ले लिया है। पुलिस की आरोपी राजेन्द्र शर्मा से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। आस्ट्रिया की रहने वाली यह विदेशी बाला पिछले 2 महीने से उदयपुर में एक दोस्त के यहाँ आई हुई थी, अपने साथ हुए अभद्र व्यवहार को लेकर आहत विदेशी युवती पुलिस से इस मामले में कड़ी कारवाही की मांग की है। थानाधिकारी चंद्र पुरोहित ने बताया की मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को तुरंत प्रभाव से पकड़ कर जाँच शुरू कर दी है।

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अराजकता के कारण भयग्रस्त हैं यू.पी. के सभी मांस व अण्डे विक्रेता

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पोस्ट . उत्तर प्रदेश में, मांस उत्पादन के खिलाफ की गई कार्यवाही, गैर-कानूनी रूप से संचालित बूचडखानों को बंद कराने से कहीं ज्यादा बडा रूप लेती जा रही है। नयी योगी सरकार की नीतियों का प्रभाव क्षेत्र बढता जा रहा है-इससे ‘‘मटन‘‘ एवं ‘‘चिकन‘‘ के साथ ही, अण्डों की उपलब्धता भी प्रभावित हो रही है।
लखनऊ में मुर्गा मण्डी एवं बकरा व्यापार संगठनों ने, बीफ व्यापार के साथ हमदर्दी प्रकट करने के उद्देश्य से, अनिश्चितकालीन हडताल की घोषणा कर दी है। भाजपा सरकार के इरादों की अनिश्चितता तथा अनेक बूचडखानों पर हुये हिंसक हमलों से पैदा हुये भय के कारण यह उद्योग ठप्प सा पड गया है।
पूरे राज्य में मांस एवं मुर्गा बाजार में, मटन तथा बॉइलर चिकन की सप्लाई में भी कमी आ गई है तथा इस स्थिति के कारण अण्डों तक की कीमतें काफी बढ गई है। नोएडा तथा गाजियाबाद जैसे कुछ शहरों के होटलों, रैस्टोरेन्टों तथा ढाबों ने, कानपुर एवं लखनऊ से मिल रही मांस आपूॢत के गंभीर संकट की खबरों के चलते, सभी मांसहारी व्यंजनों की कीमतें बढा दी हैं।
इसके साथ ही, सब्जियों की मांग आसमान छूने लगी है तथा इसके फलस्वरूप, थोक एवं खुदरा दोनों ही स्तरों पर हरी सब्जियों के भावों में एकाएक उछाल आ गया है। व्यापारियों का कहना है कि अगर हडताल के कारण लम्बे समय तक चिकन तथा बकरे के मीट मांग के उत्पादन एवं आपूॢत का संकट जारी रहता है, तो प्रोटीनयुत्त* दालों की कीमतों में जबरदस्त वृद्घि होने तथा उनके भाव २०१५ की स्थिति तक पहुँचाने की संभावना है।
चिकन तथा मटन के डीलरों द्वारा किया गया ह$डताल का आव्हान, वैध बीफ-व्यापार के समर्थन एवं एकता जताने के अलावा चौकसी रखने वाली टुक$िडयों द्वारा मटन एवं चिकन उत्पादक इकाइयों को निशाना बनाने की संभावना से उपजे डर का नतीजा भी है। इनमें से अधिकांश अनौपचारिक क्षेत्र में हैं तथा दशकों से बिना किसी लाइसैंस के चल रही हैं। मांस की दुकानों तथा फेरीवालों को डराने-धमकाने तथा आगजनी तक की खबरें भी मिली हैं तथा इन घटनाओं से, खासतौर से अल्पसंख्यक समुदाय के विभिन्न वर्गों में, आजीविका के साधनों के नष्ट होने तथा शारीरिक क्षति की आशंकाएं ब$ढती जा रही है।
920x920मांस-व्यापार के प्रतिनिधियों को यह समझाने में परेशानी हो रही है कि मटन तथा मुर्गी उत्पादों के हजारों उत्पादकों एवं डीलरों द्वारा बिना लाइसैंस के काम करने का एक कारण यह भी है कि लखनऊ सहित, यू पी के अनेक शहरों एवं कस्बों के स्थानीय निकायों में, इन लोगों ने लाइसैंस के नवीनीकरण हेतु जो आवेदन किए थे वे सालों से धूल फाँक रहे हैं। इस स्थिति के परिणामस्वरूप, लम्बे समय से संचालित वैध प्रतिष्ठान भी अब तकनीकी रूप से अवैध श्रेणी में आ गये हैं, जबकि उनकी इस स्थिति का एक मात्र कारण स्थानीय निकायों की गैर जिम्मेदारी एवं लापरवाही तथा अधिकारियों की उदासीनता ही है।
एकाएक की गई इस कार्यवाही से सबसे ज्यादा प्रभावित बिना लाइसैंस वाले बूच$डखाने, सप्लायर तथा खुदरा विक्रेता हुये हैं तथा वे मांग कर रहे हैं कि नये मुख्यमंत्री को अपनी इस नयी नीति के बारे में स्पष्ट बयान देना चाहिये।
सरकार को उन स$डक-छाप हिन्दुत्ववादी एक्टिविस्टों पर लगाम लगानी चाहिये जो पूरे के पूरे मांस उद्योग एवं व्यापार-व्यवसाय को ज$ड-मूल से नष्ट कर देने के मूड में दिखाई दे रहे हैं। इन व्यापारियों में भैंसे के मांस के वैध निर्यातक भी शामिल हैं।
घोर भ्रमपूर्ण एवं भय का वातावरण पैदा कर देने को लेकर यू पी की नयी सरकार की भी आलोचना हो रही है क्योंकि सरकार ने ऐसी कोई गाइड लाइन जारी नहीं कीं, वैध एवं अवैध मांस-व्यापार के बीच स्पष्ट अंतर दर्शाती हों। इसके अतिरित्त*, रजिस्ट्रेशन तथा लाइसैंस-नवीनीकरण के लिये तर्कसंगत समय-सीमा भी नहीं बताई गई है।
ऐसी सूचनाएं हैं कि यू पी के अलग-अलग शहरों में उत्पादकों, ट्रांसपोर्टरों, डीलरों तथा फेरीवालों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन पूरे राज्य में स्थित अपने जैसे प्रभावित लोगों से संपर्क साधने में जुट गये हैं तथा संगठित होने की कोशिश कर रहे हैं ताकि योगी सरकार की इस क्रूर नयी नीति के खिलाफ एकजुट होकर कोई कदम उठाया जा सके।
उनका मूल विचार है कि खुद को अपने परिवारों को तथा आजीविका के स्रोत को खानपान की पवित्रता की जिम्मेवारी उठाने वाले स्वयं भू एक्टिविस्ट के हाथों नष्ट होने से बचाना है।
सत्य यह है कि कुछ सबसे ब$डी बीफ निर्यातक कम्पनियां जिनके मुखिया बहुसंख्यक समुदाय के लोग हैं, यह उम्मीद दे रहे हैं कि नई सरकार उनकी बात को पूरे ध्यान से सुनेगी।
हालिया चुनावों में भाजपा जिस भारी बहुमत से जीती है और जिस प्रकार से एक भगवाधारी साधु को मुख्यमंत्री बनाया गया है उससे ऐसा माहौल बन गया है कि सत्तारू$ढ पार्टी के सांसद व विधायक खुल कर कुछ भी कहने से डर रहे हैं हालांकि निजी तौर पर उनकी सहानुभूति मीट उद्योग के साथ है।
मौजूदा स्थिति में इस उद्योग से जु$डे कोई लोग महसूस करते हैं कि राज्य व्यापी अनिश्चित कालीन ह$डताल तथा राहत के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना ही उनके लिए एक मात्र विकल्प है।
इसी बीच सरकारी हलकों में चर्चा है कि नई दिल्ली में केन्द्रीय मंत्रियों के साथ वार्ता में आदित्यनाथ योगी ने उन्हें इस बात के लिए मना लिया है कि अमृतसर की तर्ज पर जिन पवित्र शहरों को बहु आयामी विकास के लिए चुना गया है, उसमें गोरखपुर को भी शामिल किया जाए। इस प्रकार इस लिस्ट में अब ५ शहर शामिल हो गए हैं-अयोध्या, आगरा, मथुरा, वाराणसी एवं गोरखपुर। यह देखना बाकी है कि क्या इन शहरों में धर्म क्षेत्र संंबंधी पवित्रता कायम रखने के लिए मीट के इस्तेमाल पर रोक का आदेश लगाया जाएगा।

हिन्दुस्तान जिंक ने लाभांष के सभी रिकाॅर्ड तोड़े – 13,985 करोड़ रुपये का विषेष लाभांष

वर्ष 2016-17 में कुल 27,157 करोड़ रुपये के लाभांष का भुगतान
जो भारतीय कंपनियों के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक
कंपनी ने 1375ः विषेष लाभांश की घोषणा
अप्रेल 2016 में स्वर्ण जयन्ती लाभांष एवं अक्टूबर 2016 में अंतरिम लाभांष के साथ वर्ष 2016-17 में भारत में सबसे अधिक लाभांष का भुगतान करने वाली कंपनी
वर्ष 2016-17 में 11,259 करोड़ रुपये सरकार के खाते में जाएंगे।

Sunil Duggalउदयपुर। हिन्दुस्तान ज़िंक के निदेशक मण्डल ने कंपनी के शेयरधारकों को 1375 प्रतिशत लाभांश देने की घोषणा की है जो 2 रूपये के प्रति इक्विटी शेयर पर 27 रुपये 50 पैसे है। हिन्दुस्तान जिंक भारत में सबसे अधिक विषेष लाभांष देने वाली कंपनी है। लाभांष रिकाॅर्ड तिथि 30 मार्च, 2017 है। आज घोषित विषेष लाभांष की राषि 13,985 करोड़ रु. है जिसमें लाभांष टेक्स भी सम्मिलित है।

हिन्दुस्तान जिंक द्वारा अपे्रल 2016 में स्वर्ण जयन्ती लाभांष एवं अक्टूबर 2016 में अंतरिम लाभांष के साथ वर्ष 2016-17 में कुल लाभांष 27,157 करोड़ होगा जो भारत में किसी भी निजी कंपनी द्वारा किये जाने वाले लाभांष भुगतान में सबसे अधिक है। इस प्रकार 11,259 करोड़ रुपये सरकार के खाते में जाएंगे।

‘‘हिन्दुस्तान जिंक के चेयरमैन श्री अग्निवेष अग्रवाल जी ने बताया कि शेयरधारियों को विषेष लाभांष का तोफा दिया जा रहा है जो कंपनी के प्रति बेहतर निष्पादन के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमें खुषी है कि हिन्दुस्तान जिं़क 2002 में विनिवेष के पष्चात् शेयरधारकों को लगातार लाभांष दिया है जिसमें टेक्स सहित 37,517 करोड़ रुपये है। हिन्दुस्तान जिं़क सदैव शेयरधारियों के बेहतर निष्पादन के लिए कटिबद्ध हैं।’’

‘‘हिन्दुस्तान जिंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सुनील दुग्गल ने बताया कि हिन्दुस्तान जिंक की सभी विस्तार योजनाएं सुचारू रूप से प्रगति पर है। कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में तत्पर है।’’

हिन्दुस्तान ज़िंक भारत का एकमात्र एवं विष्व का एकीकृत जस्ता एवं सीसा उत्पादक तथा अग्रणीय चांदी उत्पादक कंपनी है। हिन्दुस्तान जिं़क का प्रधान कार्यालय उदयपुर में, राजस्थान में रामपुरा आगुचा, सिन्देसर खुर्द, जावर, राजपुरा दरीबा एवं कायड़ में खदानंे स्थित है तथा राजस्थान में ही दरीबा, चन्देरिया एवं देबारी में कंपनी के स्मेल्टर्स स्थित है तथा उतराखण्ड राज्य में भी कंपनी के प्लांट स्थित है।

हिन्दुस्तान ज़िंक के पास 389.9 मिलियन टन संसाधन एवं भण्डार मौजूद है जिसमें उच्च ग्रेड रिजर्व औसतन 11.7 प्रतिषत जस्ता-सीसा मौजूद है। कंपनी 2003 से लगातार संसाधनों एवं भण्डारों का विकास कर रही है तथा खदानों की 25 वर्ष की आयु है।

हिन्दुस्तान जिं़क ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए कोयले पर आधारित 474 मेगावाट के कैप्टिव पावर स्थापना की है। इसके अतिरिक्त कंपनी के पास, 309 मेगावाट ग्रीन पावर, 274 मेगावाट पवन ऊर्जा सहित 35 मेगावाट वेस्ट हीट पावर मौजूद है। ज्ञातव्य रहे कि कंपनी के पास 17,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।

उदयपुर भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट दुर्घटना में घायल

WhatsApp Image 2017-03-25 at 8.40.55 PMउदयपुर। भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट शनिवार को सड़क दुर्घटना में घायल हो गए। उन्हें उदयपुर के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। दुर्घटना में उनकी पत्नी और भाभी के भी चोट आयी है।
जानकारी के अनुसार भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट शनिवार को उनके साडू रमेश चंद्र त्रिवेदी की मौत का समाचार सुन कर पत्नी रखा भट्ट और भाभी दक्ष देवी के साथ बांसवाड़ा जिले में स्थित तलवाड़ा के लिए रवाना हुए थे। गनोड़ा से तलवाड़ा के बिच भट्ट की कार रेती के ढेर पर चढ़ गयी और पलटी खा कर दुर्घटना ग्रस्त हो गयी । एक्सीडेंट देखते ही आसपास के गाँव वालों ने तुरंत मोके पर पहुच कर कर में से सभी घायलों को बाहर निकाला और भीलूड़ा के ही प्राथमिक चिकित्सालय में पहुचाया। दुर्घटना में दिनेश भट के साथ ड्राइवर गोपाल के अलावा उनकी पत्नी रखा भट्ट और भाभी दक्ष देवी को चोटें आयी। सूचना मिलते ही आसपुर बांसवाड़ा के भाजपा के नेता व कार्यकर्ताओं की भीलूडा अस्पताल में भीड़ लग गयी। बाद में दिनेश भट्ट को उनके परिजनों के साथ उदयपुर रेफर किया गया। शाम को ७ बजे करीब उन्हें कनक हॉस्पिटल में लाया गया। संभाग के मीडिया प्रभारी चंचल अग्रवाल ने बताया की जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट, उनकी पत्नी, भाभी व् ड्राईवर को हल्की चोटें आयी है जिन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। गंभीर चोट नहीं है इसलिए चिंता की बात नहीं है।

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अनिल अग्रवाल का एंग्लो अमेरिकन कंपनी में निवेष

Anil Agarwal Chairman Vedanta Group15,700 करोड़ रुपये का निवेष

एंग्लो अमेरिकन डायमंड में सबसे बड़ी कंपनी ‘‘डी बीयर्स’’ के भी मालिक

उदयपुर। अनिल अग्रवाल की वाॅलकैन इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड ने एंग्लो अमेरिकन पीएलसी के शेयरों में लगभग 15,700 करोड़ रुपये का निवेष करने की घोषणा की है। वाॅलकैन अनिल अग्रवाल के परिवार की पूर्ण रूप से स्वामित्व ट्रस्ट है।

एंग्लो अमेरिकन पीएलसी दुनिया की सबसे बड़ी विविध धातु एवं खनन कंपनियों में से एक है तथा वैष्विक स्तर पर खनिज धातुओं पर आधारित प्लेटिनिम एवं डायमंड का दुनिया भर में नेत्त्व भी कर रही है। एंग्लो अमेरिकन के प्रचालन साऊथ अफ्रीका, नार्थ एण्ड साऊथ अमेरिका, आस्ट्रेलिया, एषिया और यूरोप में फैला हुआ है। यह विष्व की डायमंड में सबसे बड़ी कंपनी डी बीयर्स के मालिक भी है जो दुनिया की डायमंड एक्सप्लोरेषन, खनन एवं विपणन कंपनी है। डी बीयर्स विष्व में 30 मिलियन से अधिक कैरेट डायमंड का वार्षिक उत्पादन करती है जो विष्व में डायमंड उत्पादन का 35 प्रतिषत है।

डी बीयर्स औसतन हर साल 5.2 बिलियन डाॅलर के कच्चे डायमंड की बिक्री करती है जिसके आधे से अधिक डायमंड व्यापारी भारत के सूरत, मुम्बई, एंटवर्प, हांगकांग, दक्षिण अफ्रीका एवं दुबई में स्थित है। डि बियर्स द्वारा बेचे जाने वाले डायमंड सूरत एवं मुम्बई बाजार में आते है जहां वे छोटे एवं मध्यम डायमंड व्यापारियों और बड़ी कंपनियों को बेचा जाता है।

भारत में डायमंड का उत्पादन नहीं के बराबर है तथा भारत विष्व में डायमंड का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जो विष्व में डायमंड उत्पादन का 80 प्रतिषत आयात करता है, जिसका लगभग 15 बिलियन डाॅलर का आयात बिल होता है।

अनिल अग्रवाल ने कहा कि हमारे लिए यह एक आकर्षक निवेष है। उन्होंने बताया कि एंग्लो अमेरिकन उत्कृष्ट संपत्तियों एवं सुदृढ़ बोर्ड तथा प्रबंधन टीम के साथ एक महान कंपनी है जो शेयरधारक वेल्यू के लिए सुचारू रूप से संचालन कर रही है।
अनिल अग्रवाल की वेदान्ता रिसोर्सेज ने भारत में 30 बिलियन डाॅलर से अधिक विदेषी पूंजी का निवेष किया है।

अनिल अग्रवाल द्वारा एंग्लो अमेरिकन पीएलसी में लगभग 15,700 करोड़ रुपये के निवेष से भारत और अफ्रीका के साथ व्यापारिक संबंध और अधिक सुदृढ़ बनेंगे तथा तकनाॅलोजी के क्षेत्र में निवेष से रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

अनिल अग्रवाल की वंदान्ता रिसोर्सेज दुनिया की सबसे बड़ी धातु एवं खनन कंपनियों में से एक है जो जस्ता, तांबा, लौह अयस्क, बिजली, एल्यूमिनियम और ऊर्जा उत्पादन करती है। लंदन में सूचीबद्ध कंपनी वेदान्ता लिमिटेड को नियंत्रित करती है जिसकी भारत, अफीका और आयरलैण्ड में विभिन्न कंपनियां स्थापित है। वेदान्ता के कारोबार में हिन्दुस्तान ज़िंक, जिं़क इंटरनेषनल, स्काॅर्पीन जिं़क, स्टरलाइट काॅपर, सेसा गोवा, केयर्न इण्डिया, टीएसपीएल एवं एल्यूमिनियम उद्योग बालको और वैल शामिल है।

कांग्रेस के जंगी प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज, कई कांग्रेसी घायल

 

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बांसवाड़ा/डूंगरपुर।  किसानों की समस्याओं की अनदेखी के खिलाफ व किसानों के क़र्ज़ माफ़ी को लेकर युवा कांग्रेस बांसवाड़ा-डूंगरपुर द्वारा डूंगरपुर जिला कलेक्ट्री पर कांग्रेसियों के जंगी प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्री में घुसने की बात को लेकर कांग्रेसी और पुलिस आमने सामने हो गए। कांग्रेसियों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर बितर किया। लाठीचार्ज के दौरान कई कांग्रेसियों को चोटें भी आई। कांग्रेसी नेताओं ने पुलिस द्वारा की गयी लाठीचार्ज की भर्त्सना करते हुए कहा मोजुदा भाजपा सरकार पुलिस के बल पर किसानों के हक की लड़ाई को कुचलना चाहती है। किसानों के हक के लिए आन्दोलन को कुचलना एक तरह से सरकार द्वारा किसानों के साथ विश्वासघात है।

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केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा लगातार किसानों की समस्याओं की अनदेखी के खिलाफ व किसानों के क़र्ज़ माफ़ी को लेकर युवा कांग्रेस बांसवाड़ा-डूंगरपुर द्वारा सोमवार को डूंगरपुर ज़िला कांग्रेस कमेटी के बाहर किसान वेदना धरना प्रदर्शन हल्ला बोल आयोजित किया गया।
सभा को हल्ला बोल का नाम दिया गया सभा को संबोधित करते हुवे अखिल भारतीय कांग्रेस के सचिव ताराचंद भगोरा ने कहा कि कि नोटबंदी जैसे सरकार के इस अदूरदर्शी व अपरिपक्व कदम ने देश के सभी नागरिकों के समक्ष परेशानियां खड़ी कर दी । किसानों व गरीब आबादी के ऊपर इस नोटबंदी का गहरा व विपरीत प्रभाव पड़ा । प्रदेश उपाध्यक्ष व बागीदौरा विधायक महेन्द्रजीत सिंह मालवीया ने कहा कि आज कल आम आदमी कई आवश्यक वस्तुओं के लिए परेशान देखा गया है। वह अपनी छोटी चोटी जरूरतों के लिए हैरान परेशान रहा। नोटबंदी मात्र यूपी चुनाव को लेकर किया गया फैसला था ।
भारत सरकर ने भ्रष्टाचार और अवैध रूप से नकदी रखने वालों को काबू में करने के लिए 500 और 1000 के पुराने नोटों को रद्द करने का फैसला किया था। लेकिन इस फ़ैसले से कम आय वाले ज़्यादातर लोग, व्यापारी और बचत करने वाले साधारण लोग जो नकदी अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं, वे बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं । कर्जे में डूबे किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। राजस्थान में 100 में से 62 किसान कर्जदार हैं। उन्होंने कहा कि जनता को कांग्रेस द्वारा किए गए वादों पर पूरा भरोसा रहता है क्योंकि कांग्रेस जो कहती है वह करके दिखाती भी है। उन्होंने भाजपा पर किसानों के साथ छलावा करने का आरोप भी लगाया और चेतावनी दी कि किसानों की कर्जा माफी के लिए कांग्रेस द्वारा सड़कों पर संघर्ष भी किया जाएगा।

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युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव व राजस्थान प्रभारी देवेंद्र कादियान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर किसानों की समस्याओं की ‘अनदेखी’ करने का आरोप लगाया तथा किसानों के ऋण की माफी, उच्च समर्थन मूल्य और विद्युत शुल्क में कमी करने की मांग की । कादियान ने कहा कि देश में कर्ज के बोझ से दबे किसानों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती रही है। मुख्य वक्ता के तौर पर मौजूद युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष व हिंडोली विधायक अशोक चांदना ने कहा कि ज्ञापन के माध्यम से युवा कांग्रेस मुख्यमंत्री से प्रदेश के किसानों की कर्ज माफ करने की मांग करती है।सीएम को ज्ञापन भेजते हुए कहा है कि सरकार सातवां वेतनमान लागू कर सभी को प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश का किसान कभी आपदा तो कभी सूखे से प्रभावित है। उसके बारे में कोई योजना नहीं चलाई जा रही है। किसान कर्ज में डूबे हैं। सरकार बड़े उद्योगपतियों के कर्ज तो माफ कर रही है परंतु किसानों के कर्ज के बारे में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। मोदी सरकार अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए केवल एक जुमलेबाज सरकार बन कर रहा गई है। बेरोजगारी बढ़ रही है एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इस कदर निराशा छा गई है कि किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं और देश के मध्यमवर्ग की कमर टूट गई है।

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संचालन प्रवक्ता एडवोकेट इमरान खान ने किया और कहा कि कांग्रेस की जन वेदना सभाओं को भारी जनसमर्थन मिल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट, युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक चांदना व उदयपुर डिवीजन में प्रदेश उपाध्यक्ष महेंद्र जीत सिंह मालवीया की सक्रियता को देखते हुवे विरोधी दल भाजपा में बेचैनी बढ़ रही है और इस बार प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनना तय है।

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सभा पश्चात् सभी युवा व वरिष्ठ कांग्रेसी भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जिला कलेक्ट्री पहुंचे । जहां पुलिस ने उन्हें गेट पर अंदर जाने से रोक लिया । सभी कांग्रेसी अंदर जाने की ज़िद करते हुए गेट पर बैठ गए व जमकर नारेबाजी की । इस दौरान पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा । पुलिस द्वारा लाठी चार्ज भी किया गया जिसमें युवा कार्यकर्ता के आँख के पाया गंभीर चोट आई व टाँके लिए गए ।
ज्ञापन देने जाते समय कलेक्ट्री गेट पर युवा कार्यकर्ताओ और पुलिस में झड़प भी हुई । एक बारगी तो माहौल गरमा गया था ।  चांदना सभी कार्यकर्त्ता को अंदर ले जाने की ज़िद करते रहे । इस दौरान युवाओ ने जमकर गगनभेदी नारो से माहौल गूंजा दिया । करीब 100 से अधिक कार्यकर्ताओ ने इस दौरान गिरफ़्तारी भी दी जिसमे अशोक चांदना, महेंद्र जीत सिंह मालवीया, ताराचंद भगोरा,युवा अध्यक्ष नटवर तेली, राष्ट्रिय सचिव देवेंद्र कादियान, प्रदेश सचिव चरमेश शर्मा, प्रेमप्रताप सिंह मालवीया, प्रधान राजेश कटारा, लक्ष्मण कोटेड, गणेश घोघरा सहित कई कांग्रेसजन शामिल थे जिनको थोड़ी देर बाद पुलिस द्वारा शहर के बाहर आसपुर रोड पर छोड़ा गया । इसके लिए  बड़ी तादाद में पुलिस कर्मी मौजुद रहे ।

गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश हिंदुत्व की दूसरी प्रयोगशाला – विचार

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yogiगोरखनाथ मठ के महंत और उग्र हिंदू संगठन हिंदू युवा वाहिनी के संस्थापक योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाकर संघ परिवार ने गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश को हिंदुत्व की दूसरी प्रयोगशाला बनाने की शुरुआत कर दी है.

पर क्या उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी को मिली ज़बरदस्त चुनावी सफलता से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) हिंदू राष्ट्र के अपने मक़सद के एक क़दम और नज़दीक पहुँच गया है?

इस सवाल का जवाब आसान नहीं है और न ही हिंदू राष्ट्र को एक राजनीतिक हक़ीक़त में बदलना आसान है.

लेकिन नौ दशक पहले 1925 से शुरू हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यात्रा को देखें तो समझ में आएगा कि इस दौर में कई तरह के हिंदूवादी समाज-समितियां बनीं, फैलीं और फिर भुला दी गईं. पर आरएसएस अपनी राह से भटका नहीं.

आरएसएस के स्वयंसेवकइमेज कॉपीरइटAFP

संघ हमेशा बिना लाग लपेट के घोषित करता रहा है कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना उसका ध्येय है- ऐसा हिंदू राष्ट्र जिसमें हिंदू समाज की जातियां अपनी-अपनी नियत जगह बनी रहें पर राजनीतिक फ़ैसले करते समय ये विभाजन अप्रासंगिक हो जाए.

‘संघ की रणनीति’

यानी वर्णाश्रम धर्म व्यवस्था में बिना छेड़छाड़ किए संघ सभी हिंदू जातियों को ‘समरसता’ की छतरी के नीचे ले आना चाहता है. पर इसके लिए उसे बार-बार हिंदू समाज को बताना पड़ता है कि वो चारों ओर से दुश्मनों से घिरा हुआ है.

इसके लिए कई बार नए-नए दुश्मन गढ़ने पड़ते हैं ताकि इस दुश्मन का भय दिखाकर हिंदू समाज को एकजुट किया जा सके. पर दुश्मन गढ़कर हिंदुओं को इकट्ठा करना संघ की व्यापक रणनीति का एक हिस्सा मात्र है- पूरी रणनीति नहीं.

उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में संघ-भाजपा की रणनीति का हर रंग नज़र आया था.

यूपी चुनाव में बीजेपी की जीतइमेज कॉपीरइटEPA

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क़ब्रिस्तान-श्मशान का हवाला देकर हिंदू और मुसलमानों को अलग-अलग खड़ा किया, लेकिन साथ में ग़रीब बस्तियों में गैस सिलेंडर भी पहुँचाए और कामगार तबक़े तक ये संदेश पहुंचाने में भी कामयाब रहे कि नोटबंदी दरअसल ‘अमीरों पर चोट’ है.

मोदी की लोकप्रियता

हालांकि लोकसभा चुनावों में बीजेपी को इससे भी ज़्यादा समर्थन मिला था पर तब उसे नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का असर माना गया था.

इसीलिए जनता दल (यूनाइटेड) के एक वरिष्ठ नेता ने तब मुझसे कहा था, “अब फिर से जाति चलानी पड़ेगी. वही हिंदुत्व का काट साबित होगी.”

पर हुआ ठीक उल्टा. जातीय समीकरण इस क़दर उलट-पुलट हो गए कि उत्तर प्रदेश की 85 आरक्षित विधानसभा सीटों में बहुजन समाज पार्टी सिर्फ़ दो सीटें जीत पाई.

 

 मुसलमानों को लगभग सौ टिकट देने की उसकी रणनीति नाकाम हो गई. भारतीय जनता पार्टी ने एक भी मुसलमान को टिकट न देकर साफ़ संदेश दे दिया कि वो मुसलमानों के वोट की मोहताज नहीं है.

हिंदुत्व की नई प्रयोगशाला

अगर किसी को बची खुची ग़लतफ़हमी रही भी तो गोरखनाथ मठ के महंत योगी आदित्यनाथ को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी और संघ ने इसी संदेश को साफ़-साफ़ और बड़े-बड़े अक्षरों में यूपी के आसमान पर लिख दिया है.

इस फ़ैसले से ये भी स्पष्ट हो गया है कि गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश हिंदुत्व की प्रयोगशाला बनने जा रहा है.

एक मायने में गुजरात के मुक़ाबले उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व का प्रयोग ज़्यादा मुश्किल और ज़्यादा पेचीदा साबित होगा पर नरेंद्र मोदी ने जातीय विभाजन को बेकार साबित करके, क़ब्रिस्तान-श्मशान के ज़रिए हिंदू और मुसलमानों को एक-दूसरे के आमने-सामने खड़ा करके और राष्ट्रवादी-राष्ट्रद्रोही की बहस का इस्तेमाल करके इस प्रयोग की बुनियाद डाल दी है.

 

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Image caption2002 के गुजरात दंगे

अब मुख्यमंत्री के तौर पर इस प्रयोग को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी संघ परिवार ने योगी आदित्यनाथ को दी है. गुजरात में हिंदुत्व के प्रयोग और उसके सबक़ योगी के सामने हैं.

मुस्लिम विरोधी बयान

विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 2002 में गोधरा कांड के बाद गुजरात में एक ऐसा उदाहरण पैदा किया जिसकी स्मृति मुसलमान कभी भुला नहीं सकेंगे.

अब उत्तर प्रदेश के चार करोड़ मुसलमानों के सामने वो आदित्यनाथ हैं जिनके मुस्लिम विरोधी बयानों के कारण कई बार विवाद खड़े हुए हैं.

मसलन, फ़रवरी 2015 में उन्होंने ऐलान किया कि मौक़ा मिलने पर वो “देश की सभी मस्जिदों में गौरी-गणेश की मूर्तियां स्थापित करवा देंगे.”

ऐसे आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने पर ‘सेकुलरों’ या मुसलमानों को एतराज़ है तो हुआ करे.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर असमर बेग का कहना है कि मुस्लिम वोट बैंक एक मिथक है.

अब संघ-बीजेपी को उनकी परवाह कहां है क्योंकि इस शब्द पर से भारतीयों का विश्वास उठाने की जो मुहिम बीस-पच्चीस साल पहले लालकृष्ण आडवाणी ने शुरू की थी उसका असर अब महसूस किया जाने लगा है.

बीजेपी का उद्देश्य

कई मध्यवर्गीय परिवारों में अब धर्मनिरपेक्षता को जनतंत्र का एक महत्वपूर्ण मूल्य नहीं बल्कि कांग्रेसियों और ‘फ़ैशनेबल कम्युनिस्टों’ का ढकोसला समझा जाने लगा है.

पर यहां तक पहुंचने के लिए संघ और भारतीय जनता पार्टी ने ज़बरदस्त लचीलापन दिखाया.

उस दौर में जब महात्मा गाँधी पर हमला करने से पहले उनके कट्टर आलोचक भी दो बार सोचते थे और समाजवाद के ज़रिए बराबरी का सपना साकार करने की बात होती थी, उस दौर में अटल बिहारी वाजपेयी ने ‘गांधीवादी समाजवाद’ को भारतीय जनता पार्टी का उद्देश्य घोषित कर दिया था.

किसी और राजनीतिक ताक़त की ओर से ऐसा लचीलापन दिखाने के उदाहरण कम ही मिलते हैं.

 

राम मंदिरइमेज कॉपीरइटAP
Image captionअयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए तराशे गए पत्थरों के साथ एक साधु और सुरक्षाकर्मी

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को लाने का एक और मक़सद है.

राम मंदिर

भले ही अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर बनाने को बीजेपी ने चुनावी मुद्दा न बनाया हो पर बीजेपी नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान इसे बार-बार कुरेदा ज़रूर था.

बीजेपी के नेता और राज्यसभा सदस्य सुब्रह्मण्यम स्वामी ने बीबीसी से कहा भी था, “अगले दो साल में मैं राम जन्मभूमि मंदिर बनवा दूंगा.”

बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि का अकेला मुद्दा सीधे-सीधे हिंदुओं और मुसलमानों को एक-दूसरे के विरोध में खड़ा कर चुका है.

अभी ये विवाद सुप्रीम कोर्ट में है और बीजेपी कहती रही है कि मामला अदालत के ज़रिए या आपसी सुलह-समझौते से निपटाया जाना चाहिए.

 

यूपी का बीजेपी समर्थक मुसलमान

पर अगले कुछ बरसों में इस विवाद को किसी न किसी नतीजे तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी और अगर अयोध्या में मंदिर बना तो योगी आदित्यनाथ की सरकार इसका विरोध करने वालों के प्रति कैसा रुख़ अपनाएगी अभी इसकी सिर्फ़ कल्पना ही की जा सकती है.

सत्ता में भागीदारी से अलग कर दिए गए उत्तर प्रदेश के मुसलमानों में तब क्या इतनी इच्छा शक्ति बाक़ी रह जाएगी कि वो मज़बूती से अपना विरोध भी दर्ज करवा पाएं?

आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की इस नई प्रयोगशाला में कई प्रयोग किए जाने हैं. देखते रहिए.

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