उदयपुर. खमनोर क्षेत्र के सपतलियों का भीलवाड़ा के पास जंगल में शुक्रवार दोपहर अपनी दो ननदों के साथ चारा काटने गई बीस साल की महिला को पैंथर उठा ले गया। बाद में उसका शव पचास मीटर दूर पहाड़ी पर मिला। उसे तीन महीने का गर्भ था। इससे पहले पैंथर यहां बच्चों का शिकार कर चुका है।
गर्भवती महिला को उठा ले गया पैंथर, खून से सना मिला शव
चहेतों को निकाला टेंडर तो एसीबी ने की कारवाई
उदयपुर. मुख्यमंत्रीजल स्वावलंबन अभियान के तहत खेरवाड़ा और ऋषभदेव पंचायत समिति में होने वाले कार्यों के ई-टेंडर में गड़बड़ी की शिकायत पर एसीबी टीम ने शुक्रवार को छापा मारा। टीम प्रतापनगर स्थित अधिशाषी अभियंता जल ग्रहण विकास एवं भू संरक्षण कार्यालय पहुंची और आवश्यक दस्तावेज जब्त किए। एएसपी ब्रजेश साेनी ने बताया कि ई-टेंडर प्रक्रिया में प्रथमदृष्टया अनियमितता पाई गई है, मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। एक्सईएन एनपी माथुर और एईएन प्रदीप सोमानी की भूमिका की भी जांच की जा रही है। संदेह है कि अधिकारियों ने ई-टेंडर में अनियमितता बरत कर उनकी चहेती फर्मों को टेंडर जारी किए हैं।
एएसपी ब्रजेश सोनी ने बताया कि एक परिवादी फर्म ने ई-टेंडर में हुई गड़बड़ी की एसीबी को शिकायत दी थी। परिवादी ने बताया कि मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत खेरवाड़ा अौर ऋषभदेव पंचायत समिति के कुछ गांवों में एनिकट नाड़ियां निर्माण से संबंधित चार कार्य होने थे। इसके लिए प्रतापनगर स्थित कार्यालय अधिशाषी अभियंता जल संग्रहण विकास एवं भू संरक्षण ने 31 दिसंबर को ई-निविदा निकाली। चार कार्यों के लिए 14 जनवरी तक ऑनलाइन और 16 जनवरी तक प्रतापनगर कार्यालय में आवेदन शुल्क के 500 रुपए और चारों कार्यों की कुल लागत की दो प्रतिशत धरोहर राशि के डीडी जमा कराने थे। सभी आवेदक फर्मों ने फाॅर्म के साथ डीडी स्कैन कर ऑनलाइन आवेदन किया। ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तारीख से एक दिन पहले 13 जनवरी को अधिकारियों ने डीडी जमा कराने की जगह बदल खेरवाड़ा स्थित कार्यालय कर दिया। इसकी सूचना भी सिर्फ ऑनलाइन अपलोड कर दी। परिवादी फर्म ने तय समय में खेरवाड़ा स्थित कार्यालय जाकर डीडी जमा करा दिए। विभाग ने निविदा खोली और किसी भी कार्य में परिवादी फर्म को शामिल नहीं कर उसके आवेदन खारिज कर दिए। निविदा चार अलग-अलग स्थानीय ठेकेदारों को जारी कर दी गई। फिर परिवादी को बताया गया कि उसका डीडी समय पर जमा नहीं हुआ। 19 जनवरी को परिवादी के पास एक प्राइवेट व्यक्ति का फोन आया कि उनके डीडी ले जाएं। इस पर परिवादी को उसके साथ हुए धोखे का एहसास हुआ और उसने 19 जनवरी की शाम को एसीबी कार्यालय में शिकायत की।
प्रो. चुण्डावत की गिरफ्तारी के विरोध में एनएसयूआई और कांग्रेस ने किया जोरदार प्रदर्शन
उदयपुर। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर में शिक्षक भर्ती मामले की जांच में सुखाड़िया विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर दरियाव सिंह चुंडावत की गिरफ्तारी के बाद सोमवार को शहर में कांग्रेस और एनएसयूआई ने राज्य सरकार के विरोध में जमकर प्रदर्शन किया। एनएसयूआई के बेनर तले सैकडों छात्र जिला कलेक्ट्री के बाहर पंहुचे और वसुधंरा सरकार पर बदले की भावना से कार्रवाई का आरोप लगाते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की वहीं देहात और शहर जिला कांग्रेस के कार्यकर्ता भी जिला कलेक्टर को ज्ञापन देने पंहुचे।
सोमवार सुबह भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के कार्यकर्ता और कांग्रेसियों ने जेएनवीयू के भर्ती घोटाले को लेकर सुविवि के पूर्व प्रोफेसर दरियावसिंह चूंडावत की गिरफ्तारी का विरोध किया। उन्होंने इसे द्वेषतापूर्वक गिरफ्तारी बताया। साथ ही उन्हें जल्द ही रिहा करने की मांग की।
एनएसयूआई के शहर अध्यक्ष रोहित पालीवाल ने बताया कि ये प्रो. चूंडावत के खिलाफ साजिश है, उन्हें राजनीति का शिकार बनाया जा रहा है। अगर प्रो. चूंडावत को रिहा नहीं किया जाएगा तो प्रदेश में उग्र आंदोलन किया जाएगा जिसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार व प्रशासन की होगी। सुखाडिया विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष हिमांशु चौधरी ने आह्वान किया है कि वह अपने गुरू के समर्थन में पहले तो विश्वविद्यालय बदं करवाएंगे और अगर 20 जनवरी से पहले श्री चुण्डावत को नही छोडा गया तो उदयपुर शहर बंद करवाया जाएगा। प्रो. चूंडावत को रिहा करने की मांग को लेकर अतिरिक्त जिला कलेक्टर ओपी बुनकर को ज्ञापन सौंपा।
इधर कांग्रेस पदाधिकारियो ने भी जिलाकेलक्टरी पर प्रदर्शन किया। देहात जिलाध्यक्ष लालसिंह झाला, पूर्व संसदीय सचिव गजेन्द्रसिंह शक्तावत की अगुवाई में प्रदर्शन करते हुए राज्य सरकार के दबाव में एसीबी द्वारा पक्षपातपूर्ण एवं द्वेषतापूर्वक कार्यवाही की कडी निन्दा करते हुए कहा कि वसुंधरा सरकार अपने राजनैतिक विरोधियो को ठिकाने लगाने के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर रही है। दरियाव सिंह चुण्डावत के सर्मथन में जिला कलेक्ट्री के बाहर पंहुचे काग्रेंसी नेताओं ने साफ किया कि सरकार बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है जो कि गलत है और आगे सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन भी करना पडेगा तो वह पीछे नही हटेंगे। पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं विधानसभा प्रत्याशी रहे दिनेश श्रीमाली एवं काँग्रेस के पदाधिकारियों ने कहा की जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय मे शिक्षण भर्ती मामले मे उदयपुर के से.नि. प्रोफेसर डॉ. दरियाव सिंह चुण्डावत को राजनीतिक बदले की कार्यवाही करते हुए अनुचित रूप से भाजपा की राज्य सरकार द्वारा फंसाया गया है जबकि डॉ. चुण्डावत पूर्व मे शिक्षा के क्षेत्र में ईमानदारी से सराहनीय योगदान के लिए कई बार सम्मानित हो चुके है । डॉ. दरियाव सिंह इससे पहले शिक्षक भर्ती मामले मे पुलिस प्रशासन द्वारा की गई जांच में सम्पूर्ण जानकारी साक्ष्यों सहित दे चुके हैं फिर भी उन पर सरकारी गवाह बनने के लिए लगातार दबाव बनाया गया और वह सरकारी गवाह नहीं बने तो षड्यंत्रपूर्वक उन्हे गिरफ्तार कर लिया गया । डॉ. चुण्डावत स्वच्छ छवि के श्रेष्ठ प्रशासक है एवं उन्होने शिक्षा जगत में विद्यार्थियों के लिए सम्पूर्ण जीवन पर्यन्त ईमानदारी से कार्य किया है । भाजपा सरकार द्वारा राजनेतिक षड्यंत्र कर काँग्रेस विचारधारा के लोगों को सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर गलत तरीके से फंसाया जा रहा है ।
गौरतलब है कि प्रोफेसर दरियाव सिंह चुण्डावत वर्ष 2012 में हुई शिक्षक भर्ती में सिंडिकेट के सदस्य थे ओर उस दौरान भर्ती मामले को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई गई थी जिसको बाद में खारिज कर दिया गया लेकिन बाद में राज्य सरकार ने शिक्षक भर्ती मामले में कार्रवाई की और कुछ दिनों पहले जोधपुर एसीबी की टीम ने कुल पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया जिसमें प्रोफेसर दरियाव सिंह चुण्डावत भी शामिल है।
भेड़िया शेर का मास्क पहनने से शेर नही बन जाता, ऐसे ही कोई चरखा चलाने से महात्मा गाँधी नहीं बन जाता – हार्दिक
उदयपुर। पटेल नवनिर्वाण सेना के संयोजक और गुजरात में पाटीदार आरक्षण के लिये आन्दोलनरत हार्दिक पटेल 6 महिने बाद अब मंगलवार को अपनी तड़ीपारी की अवधी पूरी कर उदयपुर से गुजरात के लिये रवाना होंगे। जाने के पहले उन्होंने अपने अस्थाई निवास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विवादित बयान देते हुए भेड़िये से तुलना कर दी। हार्दिक पटेल इसके पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के खिलाफ भी विवाधित बयान देचुके है और खुद के इनकाउंटर होने की आशंका भी जताई है।
हार्दिक पटेल को गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य से छह महीने के लिए राज्यबदर कर दिया था इस छह महीने की अवधी में वह उदयपुर ही रहे और छह महीने का कार्यकाल विवादित भी रहा। कभी टोल नाका वालों से झगड़े का मामला तो कभी शहर से बाहर जाने को लेकर पुलिस की सख्ती। छह माह तक पुलिस ने एक तरह से प्रताप नगर स्थित उनके अस्थाई निवास के बाहर अस्थाई चोकी भी बना डाली थी और सीसी टीवी कमर तक लगा दिए थे जिससे हर आने जाने वाले पर नज़र रखी जा सके।
गुजरात लोटने के एक दिन पहले हार्दिक पटेल ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए राजस्थान की मेहमाननवाजी की जमकर तारिफ की। हार्दिक ने कहा कि पिछले छ: महिनों में राजस्थान की जनता ने उनका पुरा सहयोग किया और यही वजह रही कि वे असैवाधिनीक रूपसे कसी गई प्रशासनिक नकेल के बावजुद सुरक्षित रूप से गुजरात जा रहे है। हार्दिक ने कहा कि गुजरात सरकार पिछले 15 महिनों से सिर्फ बातचित कर रही हैं और इसके बिच सरकार पाटीदारों को बॉंटने की कोशिश में जुटी हैं लेकिन अपने हक की लडाई लड रहे पाटीदारों को तोडना इस सरकार के बस की बात नहीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चरखे को लेकर उपजे विवाद पर हार्दिक ने विवादीत बयान देते हुए प्रधानमंत्री की तुलना भेड़िये से की और महात्मा गांधी को शेर बताया। हार्दिक ने कहा कि शेर का मुखटा पहन लेने से भेड़िया शेर नहीं बन जाता ऐसे ही किसी के चरखा चला लेने से कोई महात्मा गांधी नहीं बन जाता। हार्दिक ने कहा कि पूजते तो नाथूराम गोडसे को हो और महात्मा गाँधी का चरखा चलाते हो। इस दौरान गुजरात दंगों का भी जिक्र करते हुए हार्दिक ने प्रधानमंत्री मोदी के संस्कारों को महात्मा गांधी के संस्कारों से बिल्कुल अलग बताया।
द एडवेंचर ऑफ पलचिनगिरी हुई रिलीज पहले ही दिन से मिला फिल्म को जोरदार रिस्पोंस

उदयपुर। उदयपुर के १३ साल के बच्चों द्वारा बनाई गयी फिल्म “एडवेंचर ऑफ़ पलचिनगिरी” आज मकर सक्रांति के दिन यु ट्यूब पर रिलीज कर दी गयी। पहले ही दिन यु ट्यूब पर शाम तक ७०० लोगों से अधिक लोगों ने फिल्म को देख्।ली थी , जब की रविवार शाम तक ५००० हज़ार लोगों ने फिल्म को देखा और सराहा । शहरवासी फिल्म देख कर बच्चों के इस कारनामे से हैरान है। बड़े फिल्म डायरेक्टर की तरह और कुशल कलाकारों की तरह फिल्म में पल और चिन ने काम किया है। साथ ही पल चिन की माँ मंजू वर्धमान ने भी फिल्म में कुशल अभिनय किया है।
५१ मिनट की फिल्म ष् द एडवेंचर ऑफ़ पलछिन गिरीष् साइंस, टेक्नोलॉजी और बाहरी दुनिया के एलियन हमलों पर बनी हुई है। फिल्म में बच्चों द्वारा कमाल की ग्राफिक्स इफेक्ट का इस्तेमाल किया है। फिल्म देखने वालों ने आश्चर्य के साथ बताया की फिल्म देख कर लगता नहीं की यह फील १३ साल के बच्चों ने अपने घर में ही तय्यार की है। लोगों का कहना था कि इस तरह की ग्राफिक्स और इफेक्ट तो बड़े बेनर की फिल्मो में देखने को मिलते है जिसके लिए करोड़ों रुपया खर्च होता है।
पूरी फिल्म देखने के लिए यहाँ क्लिक करें
फिल्म की कहानी में पल और चिन दो जुडवा भाई है, जो शरारत से भरपूर है। दोनों भाई अपनी अपनी कला में माहिर है। एक भाई का शोक पेंटिंग बनाना है तो एक भाई को टेक्नोलोजी से प्यार है, वह अपनी सुझबुझ से तरह तरह के गेजेट्स बनाता है और शरारत करता है। यह भाई दुनिया के बाहरी लोगों से बातचीत करने के लिए एक विशेष गेजेट का आविष्कार कर लेता है। इस गेजेट पर बाहरी दुनिया के एलियन के मेसेज आने लग जाते है। एलियन जो प्रथ्वी पर विकसित टेक्नोलोजी से कई आगे है, लेकिन उनकी यही टेक्नोलोजी अब उनकी दुश्मन बन गयी है। एलियन अपने गृह पर शांति के लिए प्रथ्वी पर रेडियोएक्टिव पदार्थाे को भेजना चाहते है जिसको अपनी सुझबुझ और समझदारी से दोनों भाई रोकते है।
यह फिल्म एक मेसेज भी देती है कि दिन ब दिन बढत जा रहे टेक्नोलोजी के उपकरण एक दिन प्रथ्वी के लिए बड़ा खतरा बन सकते है जिसके बारे में हमे अभी से सोचना चाहिए।
फिल्म में पल चिन के अलावा माँ मंजू वर्धमान और कुता टाइगर ने भी काम किया है। कई इफेक्ट तो इतने दमदार बने है कि देखते बनाता है। फिल्म की एडिटिंग और अभिनय भी बढ़िया किया है। शनिवार को रिलीज होने के एक घंटे में २०० से अधिक लोगों ने देख ली थी। जब कि शाम तक ७०० से अधिक लोगों ने फिल्म को देखा था। कई लोगों ने तो इसके स्पेशल इफेक्ट की क्लिप व्हात्सप्प पर भी वायरल करदी। कई लोगों के बधाई के सन्देश भी आने शुरू होगये। उदयपुर के मयक शर्मा जो मुंबई में रहते है और फ़िल्मी दुनिया से सम्बन्ध रखते है, कई प्रोडक्शन हाउस में काम कर चुके है उन्होंने फिल्म देख कर बताया कि दोनों बच्चों में बहुत संभावना है अगर यह बच्चे बिना ज्ञान और शिक्षा के इतना अच्छा काम कर सकते है तो सिखाने के बाद तो यह तहलका मचा देंगे।
बेस्ट स्टूडेन्ट चयन प्रतियोगिता के साथ ‘‘मयूरी‘‘ का रंगारंग समापन

उदयपुर। भूपाल नोबल्स पी.जी. कन्या महाविद्यालय के वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘‘मयूरी‘‘ के अंतिम दिन बेस्ट स्टूडेंट के चयन के साथ समापन हुआ। इस साल की बेस्ट स्टूडेंट ऑफ द ईयर आयुषी चुंडावत रही।
मयूरी के आखरी दिन का मुख्य आकर्षण श्रेष्ठ छात्रा चयन प्रतियोगिता रही। श्रेष्ठ छात्रा के चयन हेतु छात्राओं की वर्ष भर की शैक्षणिक एवं सहशैक्षणिक गतिविधियों एवं योग्यता के आधार पर वरीयता सूची बनाकर पात्र छात्राओं को इस प्रतियोगिता का हिस्सा बनाया जाता है। यह छात्राएं ज्यूरी के समक्ष तीन चरणों में प्रतियोगिता के निर्धारित मापदण्डों के अनुसार अपना प्रदर्शन प्रस्तुत करती है। जो छात्राएं ज्यूरी के समक्ष अपनी कसौटी पर खरी उतरती है, उन्हीं में से एक छात्रा को श्रेष्ठ छात्रा एवं दो छात्राओं को फर्स्ट एवं सेकैण्ड रनरअप का खिताब दिया जाता है। डॉ. आशीष सूद, डॉ. सिमी सूद, डॉ. अंशु कोठारी, डॉ. मनीष श्रीमाली एवं श्री जयदीप सिंह चण्देला ने ज्यूरी के सदस्यों के रूप में श्रेष्ठ छात्रा चयन में निर्णायक भूमिका निभाई। ज्यूरी सदस्यों द्वारा बेस्ट स्टूडेन्ट (सर्वश्रेष्ठ छात्रा) के रूप में सुश्री आयुषी चूण्डावत का चयन किया गया। फर्स्ट रनरअप सुश्री आकांक्षा मेहता एवं सेकण्ड रनरअप सुश्री शैल्वी राव रही। मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, अध्यक्ष महोदय, विश्वविद्यालय अध्यक्ष एवं कुलसचिव तथा संस्था परिवार के साथ पधारे हुए गणमान्य अतिथियों ने श्रेष्ठ छात्रा एवं रनर्सअप को क्राउन एवं शेशे धारण करवाकर पुरस्कृत किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमान् प्रो. उमा शंकर जी शर्मा (कुलपति, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर) थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमान् लोकेश कुमार जी शर्मा (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, उदयपुर) एवं श्रीमान् महावीर सिंह जी राणावत (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, उदयपुर), श्रीमती बसन्ती देवी (पूर्व विधायक, सलूम्बर) उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमान् रघुवीर सिंह मीणा (पूर्व सांसद, उदयपुर एवं उपाध्यक्ष राजस्थान कांग्रेस समिति) ने की। भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रोफेसर महेन्द्र सिंह जी आगरिया एवं भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. निरंजन नारायण सिंह जी राठौड़ भी उपस्थित थे।

लेकसिटी में पहली बार नॉनवेज थाली मात्र 180/- रूपये में
उदयपुर। लेकसिटी के चेटक सर्कल पर ’पेरेमाउंट रेस्टोरेंट’ की शुरूआत रविवार को हुई। नॉनवेज व्यंजनों के लजीज जायकों का स्वाद इस रेस्टोरेंट पर किफायती दरों पर उपलब्ध होगा। पहली बार लेकसिटी में नॉनवेज थाली मात्र 180/- रूपए में उपलब्ध करवाई जा रही है। स्वादिष्ट व जायकेदार नॉनवेज बनाने के लिए मशहूर मो. जमील छीपा ’शेरा भाई’ का यह रेस्टोरेंट शाम 4 बजे से रात 11 बजे तक खुला रहेगा। रेस्टोरेंट के सहयोगी मो. रफीक ने बताया कि मात्र 180/- ’पेरेमाउंट थाली’ के मैन्यू में मटन कोरमा, चिकन लॉलीपोप कोरमा-1 पीस के साथ, 250 ग्राम पुलाव, 2 पीस चिकन पेटिस व चार रोटी सलाद सहित मिलेगी। हर वर्ग व श्रेणी को ध्यान में रखते हुए रेस्टोरेंट पर मात्र 50/- रूपए में चिकन लॉलीपोप कोरमा मिलेगा। नॉनवेज जायकेदार व्यंजनों के साथ ही उदयपुर में पहली बार देशी घी में बना अंडे का हवाला 350/- प्रति किग्रा से उपलब्ध होगा। शादी व बर्थडे पार्टियों व अन्य आयोजनों के लिए 650/- प्रति किग्रा के हिसाब से मटन कोरमा/स्टू व 450/- रूपए प्रति किग्रा के हिसाब से चिकन स्टू/कोरमा ऑर्डर पर बनाए जाएंगे। रेस्टोरेंट एचडीएफसी बैंक के सामने चेटक सर्कल पर स्थित है।क्या साहेब, बापू के लिए हानिकारक है ?
उदयपुर। ( पोस्ट पंच ) कुछ दिनों से बड़ा हंगामा मचा रिया है अपने साहेब की खादी वाली फोटू पे, ट्वीटर और फेसबुक हंगामा मच रिया है तीन दिन से । सब के मन में एक ही बात रही है “साहेब .. बापू के लिए तू तो हानिकारक है” लेकिन भाई क्या हमने सोचा है के गांधी और खादी कोई इंसान या प्रोडक्ट नहीं ये एक विचार है एक सोच है, और ये सोच अगर साहेब के मन में आई तो बापू के लिए हानिकारक कैसे हो गयी। क्या आपने गली मोहल्लों में स्कूल जाते नन्हे मुन्ने बच्चों को फेंसी ड्रेस प्रतियोगिता में गांधी बन कर जाते नहीं देखा ? वो बच्चे आखिर गांधी ही क्यूँ बनते है ? गोडसे के भेष में क्यों नहीं जाते ? सोचा कभी ? अब जिस संगठन या जिस विचारधारा से साहेब आये है वहां गांधी बनने का ज्ञान तो कभी नहीं दिया जाता है, तो अब अगर साहेब के मन में गांधी की तरह दिखने की इच्छा जाग रही है तो,…. एक तरह से जीत तो गांधी के विचारधारा की ही हुई है। चाहे गुजरात के हिंसा के घोड़े पे सवार हो कर साहेब पीएम की कुर्सी तक पहुचे हों लेकिन मुक्ति तो आखिर अहिंसा के चरखे में ही दिखाई दे रही है। क्यों के भाइयों और बहनों हर दिल में गांधी कही न कहीं बसा हुआ है,.. गोडसे को पूजने वालों की संख्या बहुत कम है .

अब ये बात अलग है कि तरह तरह के फेंसी ड्रेसों में और अलग अलग मुद्राओं में फोटो पड्वाना साहेब का शोक रहा है,. चाहे वह झुला झुलाते हो, चाहे वो ड्रम बजाते हो, माँ के साथ नाश्ता करते हो,. या चाहे वो चरखा चलाते हो ।
वैसे भी खादी के केलेंडर और डायरी पर बापू ७० सालों से चरखा चलाते चलाते थक गए थे और साहेब ने उन्हें ज़रा आराम देदिया है, अब अगर ज्यादा तीन पांच की तो मालूम है ना साहेब के मंत्री ने क्या कहा ” नोटों पर भी हंसता हुआ साहेब का फोटू चिपक जाएगा” फिर चिल्लाते रहना और जेब में लिए घूमते फिरना।
वैसे आज तक के इतिहास से और बचपन से लेकर बड़े होने तक लिए हुए ज्ञान से आपने क्या सिखा कि आज़ाद देश भारत का राष्ट्रपिता बनने के लिए बापू की तरह होना जरूरी है ? आज़ादी की लड़ाई लड़ना जरूरी है ? अंग्रेजों को भारत से भागना जरूरी है ? अगर साम्प्रदायिक दंगे देश में हो रहे हों तो बापू की तरह आमरण अनशन करना जरूरी है कि जब तक दंगे नहीं रुकेगें तब तक एक बूँद पानी की मुह में नहीं डालेगें। नहीं भाई अब ये सब कुछ जरूरी नहीं हमने तो बचपन से शिक्षा ही गलत ली है। राष्ट्रपिता बनने के लिए ये सब जरूरी नहीं है, अब मोजुदा दौर में बस अहंकारी सताधारी होना जरूरी है। अगर सत्ता हाथ में है तो आराम से बिना कुछ किये स्वयं भू राष्ट्रपिता बना जा सकता है। बापू को सालों आज़ादी की लड़ाई लड़ने के बाद जो राष्ट्रपिता की उपाधि मिली अब वो उपाधियाँ तो अहंकारी सत्ताधारी बनते ही अपने आप ली जा सकती है। फिर खादी का ब्रांड एम्बेसेटर बनना तो मामूली बात है। सत्ता हाथ में हो तो ये सोचने की जरूरत नहीं की आखिर खादी चलन में क्यों आई थी,.. अंग्रेजो को भारत से भगाने में खादी का क्या योगदान रहा। केसे एक हाथ से बना हुआ कपड़ा पुरे देश में एक विचारधारा बन गया, ये सब सोचने की जरूरत नहीं ये सब फ़ालतू बाते है। सत्ता हाथ में हो सबसे ऊँची कुर्सी पर बैठ गए साहेब बन गए तो फिर जहाँ मर्जी फोटू चिपकाओ, एक फेशनेबल चरखे और फेशनेबल कपड़ों के के साथ शानदार स्टाइल में पूरा फोटो सेशन करवाओ और चिपका दो जहाँ मर्जी हो। चिल्लाने वाले चिल्लाते रहेगें कोई फर्क नहीं पड़ता वेसे भी चिल्लाने और विरोध करने के नए नए मोके देते रहना चाहिए ताकि पुरानी बाते भूलते रहे और नए ढकोसलों में लोग उलझे रहे ।
लेकिन काश… काश एसा होता के फेंसी ड्रेस में गांधी की पोशाक पहनने वाले बच्चे सच मच के गांधी बन के उनकी विचारधारा पे चलने लगते तो देश में ३० प्रतिशत से ज्यादा गांधी, भगत सिंह सुभाषचंद बॉस या कोई महापुरुष होते क्यों कि हर एक ने बचपन में स्कूल में यह भूमिका कभी न कभी तो जरूर निभाई ही होगी चाहे खेल खेल में ही सही।
उदयपुर में सर्दी ने तोड़ा 10 साल का रिकॉर्ड, 2.2 डिग्री पर पहुंचा न्यूनतम तापमान ..

उदयपुर . कश्मीर जैसी कड़ाके की ठंडक से लोग कंपकंपा उठे हैं। पारा लुढ़कता हुआ २.२ डिग्री पर पहुंच गया। इसके साथ सबसे कम न्यूनतम पारे का पिछले १० साल का रिकार्ड टूट गया।
बर्फीली हवाओं ने सुबह से शाम तक धूजणी छुड़ाई। सर्दी से बचने के लिए लोग सिर से पैर तक गर्म कपड़ों में लिपटे रहे।शरीर को धुजाने वाली ठंड का अलसुबह ही असर दिखा। सर्दी के का्रण सड़कों पर सैर करने वाले लोग कम नजर आए। नलों के बर्फीले पानी ने खून जमाने जैसे तेवर दिखाए। सड़क, घास और वाहनों पर ओस ही ओस नजर आई। धूप निकलने के बाद भी सर्दी ने पिंड नहीं छोड़ा। जगह-जगह लोग हीटर और अलाव जलाकर बैठे रहे। दोपहर में तेज धूप रही, पर गलन ने जमकर परेशान किया। हवा में घुली ठंडक सिहराती रही। शाम ढलते-ढलते ही सर्दी की रंगत फिर तेज हो गई।
यूं तो तेज सर्दी के बीच खिल रही धूप लोगों को राहत दे रही है, लेकिन धूप के बीच चल रही सर्द हवाएं धूप को बेअसर साबित करती नजर आ रही हैं। धूप के बीच भी लोगों को गलन का एहसास हो रहा है।
जनवरी में सबसे कम न्यूनतम तापमान
– 20.1.2005 … 3.9
-09.1.2006 … 5.3
-14.1.2007 … 5.2
-24.1.2008 … 3.0
-02.1.2009 … 6.0
-07.1.2010 … 4.5
-10.1.2011 … 3.4
-21.1.2012 … 2.5
-08.1.2013 … 2.8
-13.1.2014 … 4.4
-20.12015 … 4.2
-22.1.2016 … 3.8 डि.से.
“मयूरी” में अमेरिकी ग्रुप डांस का धमाल – मस्ती में झूमी छात्राएं

उदयपुर। भूपाल नोबल्स पी.जी. कन्या महाविद्यालय, उदयपुर का वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘‘मयूरी‘‘ का शुभारम्भ गुलाबी सर्दी में सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलन से प्रारम्भ हुआ। रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ आगाज पहले दिन अमरीका से आए ग्रुप की डांस परफॉर्मेंस पर सभी ने खूब ठुमके लगाए। वंस मोर-वंस मोर की हूटिंग ने समारोह को और रंगारंग बना दिया।

त्रि-दिवसीय इस सांस्कृतिक महोत्सव में शुक्रवार के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर जे.पी. शर्मा, कुलपति (मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर) थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमान् शान्तिलाल जी मेघवाल (जिला प्रमुख, उदयपुर), श्रीमति प्रगति खराड़ी (अध्यक्ष, राजस्थान जनजाति आयोग), भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय के प्रेसीडेन्ट प्रोफेसर महेन्द्र सिंह राठौड़, भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. निरंजन नारायण सिंह जी राठौड़, कर्नल हरीश चण्डोक एवं श्रीमती कर्नल चण्डोक समारोह में उपस्थित थे।
आज का विशेष आकर्षण अमरीका के ‘द वनेवर केरावन‘ नृत्य ग्रुप की मनमोहक प्रस्तुतियां रही। वसुधैव कुटुम्बकम्, अपनत्व एवं सहिष्णुता के उद्देश्य से यह नृत्य ग्रुप विभिन्न देशों में अपनी अद्भुत प्रस्तुतियांे का प्रदर्शन कर चुका है तथा नृत्य एवं संगीत के माध्यम से प्रेम, प्यार, भाई चारा, शान्ति तथा आपसी सद्भाव का संदेश सम्पूर्ण विश्व में इनके द्वारा निःस्वार्थ भाव से देना है। श्रीमती लीबीया एवं श्री बिल के नेतृत्व में इस ग्रुप के सदस्यों ने गायन, वादन एवं नृत्य प्रस्तुत कर छात्राओं को ओर कुछ ओर नया करने को प्रेरित किया। विशिष्ट अतिथि, मुख्य अतिथि, अभिभावक, विश्वविद्यालय पदाधिकारीगण एवं छात्राओं ने इस ग्रुप की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्हें अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की।
छात्राओं की आज की प्रस्तुतियों में सोलो सॉंग, ग्रुप सॉंग,, फैन्सी डैªस, ड्यूट डांस एवं फॉक डांस आदि आकर्षण के केन्द्र रहे। आज की प्रस्तुतियों में फ्यूजन गीतों की धूम रही। ‘‘तेनू भूल जा भूल जा‘‘ ‘‘हिचकी, मचा जाऊ दे‘‘ ‘‘छन के मोहल्ला, हाई हिल्स‘‘ ‘‘ए उड़ी-उड़ी, काला चश्मा‘‘ ‘‘कौन तुझे, ओय-ओय‘‘ जैसे फ्यूजन गीतों को पांडाल में उपस्थित दर्शकों ने सराहा, वहीं छात्राएं अपने आप को नाचने से रोक न सकी। एक तरफ जहां नये फ्यूजन गानों की धूम रही वहीं पुराने फिल्मी गाने एवं गजल छात्राओं की जुबां पर अभी भी बरबस निकल आ रहे है, जिनमें ‘‘इन आंखों की मस्ती‘‘ ‘‘होंठों को ंछू लो तुम‘‘ जैसी गजलें शामिल है। वेस्टर्न ग्रुप डांस एवं सोलो डांस फिल्मी पर छात्राओं की प्रस्तुतियों ने खूब वाहीवाही लूटी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. संगीता राठौड़, डॉ. अनिता राठौड़, मोहिता दीक्षित एवं आकांक्षा मेहता ने बारी-बारी से किया गया।

परिणाम
प्रस्तुति प्रथम द्वितीय तृतीय
सोलो सॉंग (गज़ल) मारीषा दीक्षित पूजा देवड़ा शिवानी पालीवाल
ग्रुप सॉंग (फॉक) आरोही ग्रुप रियाज ग्रुप डेजलर्स ग्रुप
सोलो सॉंग (फॉक) मारीषा दीक्षित मानसी व्यास अनिता देवड़ा
सोलो डान्स (वेस्टर्न) हेमलता राव गौरी जोशी देविका रानी
ग्रुप सॉंग (फिल्मी) आरोही ग्रुप दिलदार ग्रुप डेजलर स्माईल
ग्रुप डान्स (वेस्टर्न) डेजलर स्माईल स्टनर्स ग्रुप फ्यूजन ग्रुप
फैन्सी डैªस विजय लक्ष्मी शक्तावत यामिनी कंवर राणावत पायल सुथार
सोलो डान्स (फिल्मी) ऋचा सोनी रिद्दी चौहान गौरी जोशी


