देसी फंदे में फंसा पेंथर

phpThumb_generated_thumbnail (2)

उदयपुर.  शहर से मावली रोड पर 8 किलोमीटर की दूरी पर पातलपुरा गांव में अज्ञात व्यक्ति द्वारा सड़क के पास लगाये फंदे में पैंथर आ गया। सूचना पर पहुंचे वन विभाग के शूटर ने बेहोश कर पैंथर को कब्जे में लिया। उथनोल ग्राम पंचायत के पातलपुरा की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग के ठीक पास एक बंजर खेत पर रविवार सुबह फंदे में बंधे पैंथर को किसी व्यक्ति ने देखा। जिसकी सूचना सुबह 6 बजे  वन विभाग को फोन से मिलने पर स्थानीय वन अधिकारी देवेन्द्र पुरोहित, राजेश मेहता एवं राजसमंद की टीम पहुंची। स्थिति को देखने के बाद उन्होंने आला अधिकारियों को सूचित किया। इस पर उदयपुर से शूटर सतनाम सिंह भी पहुंचे। उन्होंने पैंथर को ट्रेंकूलाइज गन से शूट कर बेहोश किया। उसके बाद कब्जे में लेकर वहां से रवाना हो गए। इस दौरान मौके पर उपवन सरंक्षक कपिल चन्द्रावल, नाथद्वारा का पुलिस जाब्ता आदि मौके पर पहुंचे।

दूसरे शूट में हुआ बेहोश

सतनाम सिंह द्वारा पहला शूट किया गया उस दौरान बेहोशी के इंजेक्शन का शूट पैंथर के पास निकल गया। उसके बाद दूसरा इंजेक्शन तैयार करने के बाद उस पर शूट किया गया जो सीधा उसेही जाकर लगा।

लोगों की भीड़ जमा

पातलपुरा के यहां पर हुए इस घटनाक्रम को देखने के लिए नाथद्वारा मंडीयाना, मावली, उथनोल तथा आसपास से लोग पहुंच गए। उथनोल सरपंच पुष्करलाल जाट, दिनेश, जगदीश सहित कई लोग आदि थे।

लोहे का फंदा

अज्ञात व्यक्ति द्वारा यहां लगाये फंदे को पूरा लोहे का बनाया हुआ था। इसके लगभग एक से डेढ़ फीट लंबी लोहे की सांकल भी बंधी हुई थी। जिसे जमीन में एक फीट से अधिक गहराई में दबा रखी थी। इसके मुंह पर एक चपटी लोहे कआंकड़ी भी लगा रखी थी । जिससे यह फंदा जानवर के अंदर फंस जाने के बाद भी एकाएक बाहर नहीं निकल पाए।

पाकिस्तान की पारी 83 रन पर सिमटी – तू चल में आया

0

पाकिस्तान ढाका में टी 20 एशिया कप में पाकिस्तान की पूरी टीम 83 रन पर सिमट गई है. पाकिस्तानी बल्लेबाज़ सिर्फ 17.3 ओवर ही खेल सके.

टॉस भारत ने जीतकर पाकिस्तान को पहले बल्लेबाज़ी करने को कहा, लेकिन पाकिस्तान के बल्लेबाज़ों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा. सरफ़राज़ अहमद को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज़ टिक कर नहीं खेल सका.

भारत की ओर से हार्दिक पंड्या ने आठ रन देकर तीन विकेट लिए, रविंद्र जडेजा ने भी दो विकेट चटकाए.

पाकिस्तान के लिए सबसे अधिक रन सरफ़राज़ ने बनाए. उन्हें रविंद्र जडेजा ने बोल्ड आउट किया. सरफ़राज़ ने 24 गेंदों पर तीन चौकों की मदद से 25 रन बनाए.

शाहिद अफ़रीदी

सरफ़राज़ के अलावा सिर्फ़ खुर्रम मंज़ूर ही दहाई के आंकड़े तक पहुँच सके. खुर्रम ने 10 रन बनाए.

वहाब रियाज़ को रविंद्र जडेजा ने एलबीडब्ल्यू आउट किया था. रियाज़ सिर्फ़ चार रन ही बना सके थे.

आठवें ओवर में कप्तान शाहिद अफ़रीदी सिर्फ़ दो रन बनाकर आउट हो गए. उनका विकेट 42 रन के योग पर गिरा.

शोएब मलिकImage copyrightAFP

सातवें ओवर की आखिरी गेंद पर हार्दिक पंड्या ने शोएब मलिक को महेंद्र सिंह के हाथों कैच कराया. अगले ही ओवर की पहली गेंद पर युवराज ने उमर अकमल को एलबीडब्ल्यू आउट कर पाकिस्तान को पाँचवां झटका दिया. अकमल का विकेट 35 के योग पर गिरा.

पारी के छठे ओवर में ख़ुर्रम मंज़ूर को विराट कोहली ने रन आउट किया. खुर्रम के रूप में पाकिस्तान को तीसरा झटका लगा. खुर्रम ने 18 गेंदों पर 10 रन बनाए. उनका विकेट 32 के स्कोर पर गिरा.

इससे पहले, अपना पहला ओवर मेडन फेंकने के बाद जसप्रीत बुमराह ने शरजील ख़ान को रहाणे के हाथों कैच कराया. शरजील ख़ान सात रन ही बना सके थे. पाकिस्तान ने दूसरा विकेट 22 रन के योग पर गंवाया.


मोहम्मद हफ़ीज़ के रूप में पाकिस्तान को पहला झटका लगा. आशीष नेहरा ने उन्हें विकेट के पीछे महेंद्र सिंह धोनी के हाथों कैच कराया. पाकिस्तान ने पहला विकेट 4 रन के योग पर गंवाया.


पाकिस्तान चार तेज़ गेंदबाज़ों के साथ मैदान में उतरा है.

बांग्लादेश के ख़िलाफ़ जीत दर्ज करने वाली भारतीय टीम में एकमात्र बदलाव आजिंक्य रहाणे के रूप में किया गया है, रहाणे को घायल शिखर धवन की जगह अंतिम एकादश में शामिल किया गया है.

जहाँ तक टी-20 मुक़ाबलों की बात है तो भारत और पाकिस्तान के बीच कुल मिलाकर छह मैच खेले गए हैं, जिसमें पाँच में भारत की जीत हुई है, जबकि पाकिस्तान सिर्फ़ एक ही मुक़ाबला जीत सका है.

जेएनयू भाजपा और संघ के लिए चुनौती क्यों?

0

दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को देशद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किए जाने के बाद देश के इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के बारे में तरह-तरह के सवाल किए जा रहे हैं.

कन्हैया को दोषी साबित करने के लिए कुछ ट्वीट और वीडियो भी सामने आए हैं जो कथित तौर पर नकली और फर्जी पाए गए हैं.

फ़ाइल फोटो

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जब स्थापित किया गया था, उस समय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उसे सरकार के विभिन्न क्षेत्रों के लिए उच्च पेशेवर अधिकारियों को प्रशिक्षण देने वाला विश्वविद्यालय बनाने की सोच रही थीं, लेकिन बाद में उसे एक अनुसंधान संस्थान में बदलने का फैसला किया गया.

पहले सरकार ने जेएनयू शुरू करने के लिए कुछ बेहतरीन लोगों को इकट्ठा किया और इस विश्वविद्यालय को एक ऊंचे दर्जे वाले और वैज्ञानिक नज़रिए के शिक्षण संस्थान के रूप में विकसित करने की पूरी ज़िम्मेदारी उन शुरुआती प्रोफ़ेसरों पर छोड़ दी. कुछ ही समय में यह भारत का एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय बन गया.

फ़ाइल फोटो

जेएनयू में शुरुआत से ही बौद्धिक रूप से प्रबुद्ध, उदारवादी और वामपंथी प्रवृत्ति के प्रोफ़ेसरों की नियुक्ति की गई थी. यह देश की पहली ऐसी यूनिवर्सिटी बनी जो अपने हर फैसले के लिए अधिकृत थी.

यहाँ कक्षाओं और कक्षाओं से बाहर खुले बहस-मुबाहिसे की ऐसी परंपरा स्थापित हुई जो देश के किसी अन्य विश्वविद्यालय में संभव नहीं हो सकी. इस विश्वविद्यालय का बजट भी अन्य विश्वविद्यालयों से बेहतर था.

यहां प्रवेश का ऐसा सिस्टम लागू किया गया कि इस संस्था में अगर बड़ी संख्या में देश के बड़े शहरों के पॉश वर्ग के बच्चे शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते हैं तो साथ में हजारों ऐसे दूरदराज के ग्रामीण बच्चे भी प्रवेश पाते हैं जो अत्यधिक गरीबी के बावजूद पहली बार शिक्षा तक पहुँच पाए हैं, कन्हैया भी उन्हीं में से एक है.

इंदिरा गांधी (फ़ाइल फोटो)

जेएनयू की प्रतिष्ठा और विकास के बाद इंदिरा गांधी की यह तमन्ना थी कि वह जेएनयू के छात्रों को संबोधित कर सकें, लेकिन छात्रों ने उन्हें कैंपस में दाखिल नहीं होने दिया.

छात्र आपातकाल के लिए उनसे माफ़ी चाहते थे जिसके लिए वह तैयार नहीं थीं.

परिसर में पारंपरिक रूप में उदारवादियों और उदार विचारों के शिक्षकों और छात्रों का वर्चस्व रहा है. कैंपस में वामपंथी छात्र संगठनों के साथ साथ मुक्त विचारक और लोहियावादी विचारधारा से जुड़े छात्र राजनीति की धुरी रहे हैं.

फ़ाइल फोटो

पिछले चालीस साल से कांग्रेस, भाजपा और आरएसएस ने कैंपस में अपना प्रभाव बढ़ाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन वह कोई विशेष सफलता प्राप्त न कर सके. पिछले कुछ सालों में कैंपस में वामपंथियों का एक ऐसा समूह मजबूत हुआ है जिसकी राष्ट्रीय राजनीति में लगभग कोई भूमिका नहीं है.

जेएनयू हमेशा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सवालों पर आधारित स्थापित विचारों को चुनौती देती रही है और कमोबेश हमेशा यह मौजूदा सरकार के ख़िलाफ़ रही है. पहले भी इस पर राष्ट्र विरोधी होने के आरोप लग चुके हैं.

जेएनयू के बाहर आमतौर पर इसे ‘वामपंथी’ प्रभुत्व वाला विश्वविद्यालय माना जाता है, लेकिन इस विश्वविद्यालय में हर राजनीतिक और धार्मिक विचारधारा को चुनौती दी गई है और हर पहलू पर सवाल उठाए जाते हैं. यहाँ कक्षाओं में, सेमिनार हॉल में, मेस में और छात्रावासों के कमरों में, हर जगह चर्चा और बहस की एक अच्छी और स्वस्थ परंपरा कायम है. यहाँ बिना डर के किसी भी विषय पर सार्वजनिक बहस की जा सकती है.

फ़ाइल फोटो

जेएनयू किसी विचारधारा के अधीन नहीं है. यह यूनिवर्सिटी ज्ञान के नए रास्तों की खोज और वैज्ञानिक सिद्धांतों का केंद्र रही है. यहां छात्र केवल अध्ययन करके ही नहीं निकलते, बल्कि यहां उन्हें मानवीय रिश्तों, मूल्यों और सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक जटिलताओं से परिचित कराया जाता है ताकि वो समाज की वास्तविकताओं की पृष्ठभूमि में खुद सोच पैदा कर सकें.

अतीत में भारत की हर बड़ी राजनीतिक पार्टी और आरएसएस जैसे संगठनों ने जेएनयू में अपनी विचारधारा के ज़रिए हावी होने की कोशिश की है लेकिन हर बार उन्हें हार मिली है.

News Source – BBC HINDI , 

‘पहली बार लगा मैं मुसलमान हूं’

0

khalid umar

दिल्ली के जवाहर लाल विश्वविद्यालय (जेएनयू) में कथित भारत विरोधी नारे लगाने के मामले में देशद्रोह का मुक़दमा झेल रहे उमर ख़ालिद ने कहा कि जेएनयू विवाद ने उन्हें मुसलमान होने का एहसास दिला दिया.

देशद्रोह केस का सामना कर रहे उमर ख़ालिद और उनके साथी रविवार देर रात यूनिवर्सिटी कैंपस पहुंचे और उमर ख़ालिद ने एडी ब्लॉक पर जमा छात्रों को संबोधित किया.

उमर का कहना था, ”पिछले सात साल में मुझे कभी इस बात का एहसास नहीं हुआ था कि मैं मुसलमान हैं. मैंने ख़ुद को कभी भी मुसलमान की तरह नहीं पेश किया. पहली बार लगा मैं मुसलमान हूं पिछले सात साल में और वो पिछले 10 दिनों में लगा.”

ऐसा कहा जा रहा है कि ये छात्र पुलिस के सामने सोमवार को आत्मसमर्पण कर सकते हैं. उमर ख़ालिद के अलावा रामा नागा, अनिर्बन भट्टाचार्या, अनंत प्रकाश नारायण और आशुतोष कुमार भी कैंपस में देखे गए.

उमर ख़ालिद ने कहा कि नौ फ़रवरी को हुए कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारत विरोधी नारे नहीं लगाए थे.

उन्होंने कहा कि उनके ख़िलाफ़ अभी तक कोई समन नहीं भेजा गया है.

इन छात्रों ने संसद हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरु को फांसी दिए जाने की दूसरी बरसी पर 9 फ़रवरी को जेएनयू परिसर में एक कार्यक्रम को आयोजित किया था.


इन पर आरोप है कि इन लोगों ने इस कार्यक्रम के दौरान भारत विरोधी नारे लगाए थे.

एक भारतीय टीवी न्यूज़ चैनल में ये ख़बर दिखाई गई थी. उसके बाद पूर्वी दिल्ली से बीजेपी सांसद महेश गिरी की शिकायत पर पुलिस ने इन छात्रों पर देशद्रोह का मुक़दमा दर्ज किया था.

इस केस में पुलिस ने छह लोगों को मुख्य अभियुक्त बनाया है. इन छह लोगों में जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार भी शामिल हैं जिन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया था और फ़िलहाल वो जेल में हैं.

लेकिन बाक़ी पांच छात्र अब तक फ़रार थे. इन पांच फ़रार छात्रों में उमर ख़ालिद भी हैं जिनके बारे में भारतीय मीडिया में सबसे ज़्यादा चर्चा हो रही है.


लेकिन उमर ख़ालिद के परिवार का कहना है कि उनके बेटे को ग़लत फंसाया जा रहा है.

उनके पिता सैय्यद क़ासिम रसूल इलियास ने बीबीसी को कहा था कि उनका बेटा उमर ख़ालिद इस कार्यक्रम के आयोजकों में ज़रूर शामिल था लेकिन उसने कोई भारत विरोधी नारा नहीं लगाया था.

अब कुछ मीडिया ये ख़बरें भी चला रही हैं कि भारत विरोधी नारे लगाते हुए पहले जो वीडियो दिखाया गिया था वो असली नहीं था और उसके साथ छेड़छाड़ की गई थी.

News Source – BBC Hindi

‘अबकी बार कंडोम गिनने वाली सरकार’

0

राजस्थान से भाजपा विधायक ज्ञानदेव आहूजा के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से जुड़े बयान पर लोगों ने सोशल मीडिया पर खूब चुटकी ली.

आहूजा ने कहा था, “जेएनयू परिसर से रोज़ाना शराब की दो हज़ार बोतलें और तीन हज़ार कंडोम बरामद होते हैं.”

ज्ञानदेव आहूजा ने पुष्टि की कि उन्होेंने ऐसा कहा है. उन्होंने कहा, “मेरे व्हाट्सऐप पर एक मैसेज आया, जिसमें ये आंकड़े थे. मैं उसके आधार पर यह बात कही.”वे यह मानते हैं कि उनके ये आंक़ड़े ग़लत भी हो सकते हैं, क्योंकि खुद उन्होेंने इन आंकड़ों की सच्चाई का पता नहीं लगाया.

ट्विटर पर लोगों ने इस पर मज़े लिए और खूब तंज कसे. लोगों की प्रतिक्रिया में राजनीतिक आरोप या नाराज़गी के बजाय व्यंग्य का पुट ज़्यादा था.

ट्विटर पर चुटकीImage copyrightTWITTER

महक (@MehekF) ने ट्वीट किया, “लगता है भाजपा विधायक ने स्किल इंडिया अभियान को कुछ ज़्यादा ही गंभीरता से ले लिया और कंडोम गिनने में महारत हासिल कर ली.”

पिंकी राजपुरोहित (@Madrassan) ने चुटकी लेते हुए लिखा, “वे आख़िर क्या कहना चाहते हैं? अबकी बार, कंडोम गिनने वाली सरकार!”

हंसना ज़रूरी है (@HasnaZarooriHai) ने लिखा, “विधायक को जेएनयू परिसर में यही मिला.”

अनिकेत प्रांतदर्शी (@prantadarshi) ने लिखा, “भाजपा विधायक ने गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना दर्ज करवा लिया.”

वहीं राम किरोड़वाल ने चुटकी ली और ट्वीट किया, “भाजपा विधायक जेएनयू में व्यस्त हो गए हैं.”

जेएनयू छात्रों का समर्थन

लेकिन कुछ लोगों ने गंभीर सवाल भी उठाए हैं.

कविता कृष्णन (@kavita_krishnan) ने लिखा, “भाजपा विधायक को लगता है कि जेएनयू में छात्र नंगे घूमते हैं, ये वहां सिगरेट के टुकड़े और कंडोम गिन रहे हैं.”

इसी तरह, राजश्री दत्त (@RD_justRD) ने पूछा है, “भाजपा की महिला नेता जेएनयू की छात्राओं से जुड़ी इस तरह की अनर्गल बातों पर चुप क्यों हैं?”

स्वामी (@mohitraj) ने ट्वीट किया, “हमारे सैनिक सीमा पर मारे जा रहे हैं और यह भाजपा विधायक कंडोम गिन रहे हैं!”

News Source – BBC Hindi

सलमान को मिली जान से मारने की धमकी

0

Untitled-81-580x395

POST. बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान को जान से मारने की धमकी मिली है. ये धमकी एक अंजान शख्स ने फोन करके दी है.

मुंबई पुलिस इस मामले की जांच कर रही है हालांकि अभी किसी के खिलाफ एफआईआर नहीं दर्ज की गई है. मुंबई पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ये फोन कॉल कहां से की गई है.

सूत्रों के मुताबिक 16 फरवरी को किसी शख्स ने मुंबई पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर कहा कि वह सलमान को जान से मार देगा. खबरें हैं कि पुलिस ने उस जगह का पता लगा लिया है, जहां से फोन किया गया. सोमवार को इस केस में पुलिस ने जांच शुरू कर दी.

पुलिस को शरारत का शक है और उनके मुताबिक ऐसा भी हो सकता है कि किसी ने मजाक में सलमान के साथ ऐसा किया हो. लेकिन फिर भी पुलिस मामले में कोई कमी नहीं रखना चाहती है.

सलमान खान ने पिछले साल ‘प्रेम रतन धन पायो’ और ‘बजरंगी भाईजान’ जैसी दो हिट फिल्में दे चुके हैं. इन दिनों सलमान अपनी आने वाली फिल्म ‘सुल्तान’ की शूटिंग में व्यस्त हैं.

राजपूत भी कूदेंगे आरक्षण जंग में, किया आंदोलन का ऐलान

0

phpThumb_generated_thumbnail (1)

जयपुर। उग्र हुए जाट आंदोलन के बीच अब राजपूत समाज के लोगों ने भी आरक्षण मांग की हुंकार भर दी है।  राजपूतों के अग्रणी संगठन श्री राजपूत करणी सेना ने देशव्यापी स्तर आरक्षण आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दे डाली है।

करणी सेना ने जयपुर में आंदोलन शुरू किये जाने की चेतावनी देते हुए कहा है कि राजपूत आरक्षण महाआंदोलन राष्ट्रीय स्तर का होगा। इस आंदोलन की शुरुआत राजस्थान के अलावा दिल्ली, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में एक साथ की जायेगी। 
करणी सेना प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के मुताबिक़ संगठन ने अब तक आरक्षण की मांग को शान्तीपूर्ण और अनुशासन के तरीके से सरकार तक पहुंचाया है, लेकिन अब तक उन्हें आरक्षण के नाम पर सिर्फ मीठी गोली ही मिली। अब अनुशासन की परीक्षा ख़त्म हो गई है।  लिहाज़ा करणी सेना ने फैसला लिया है कि अब मांगों को उग्र आंदोलन के ज़रिये ही मनवाया जाएगा। 
करणी सेना का आंदोलन चरणबद्ध तरीके से चलेगा। इसकी शुरुआत राजपूत समाज के सभी विधायकों और मंत्रियों को ज्ञापन देकर किया जाएगा। वहीं, प्रस्तावित विधानसभा सत्र के दौरान भी प्रदर्शन किया जाना तय किया गया है।इसी  दौरान अन्य प्रदेशों में भी आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।    
ये हैं मांगें: 
पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर कृषक राजपूत वर्ग को आरक्षण देने का निर्णय लिया था। लेकिन आज तक कृषक राजपूत आरक्षण नहीं दिया गया है, जिसे तुरंत प्रभाव से लैगून करवाया जाए। 
पूर्व में ओबीसी आयोग और सरकारों की ओर से हुए सर्वे के आधार पर राजपूत समाज को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था की जानी थी, लेकिन इस सिलसिले में भी कोई कदम आगे नहीं बढ़ाया गया।
पाक विस्थापित नागरिकों को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए जिसकी अनुशंसा प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और राष्ट्रपति से भी की जा चुकी है। 

  .   

मौताणे के लिए सेकड़ों ग्रामीणों ने तीरकमान व हथियारों से लैस हो कर किया चढ़ोतरा

motana

उदयपुर। नाई क्षेत्र के पई गांव में रविवार को महिला की जलने से हुई मौत के बाद मौताणा के लिए फलासिया से आए पीहर पक्ष ने तीरकमान व हथियारों से लैस होकर आई लगभग 500 लोगों ने चढ़ोतरा कर दिया। पीहर पक्ष के द्वारा घर में तोड़-फोड़ भी की है।

पीहर पक्ष के परिजनों का आरोप है कि महिला को सुसराल पक्ष के द्वारा जला दिया है। पीहर पक्ष से आये लोगों के द्वारा चार पहाडिय़ों पर 400-500 लोग फैले हुए है। सूचना पर मौके पर पुलिस द्वारा भारी जाब्ता भी तैनात किया है। पुलिस समझाइश करने की कोशिश रही है। ससुराल पक्ष के लोग जान बचाने के लिए पहडि़यों में भाग गए है। माहौल-तनाव बढऩे पर पुलिस लाइन से अतिरिक्त जाब्ता भेजा गया। सूत्रों के अनुसार पीहर पक्ष ने घर में घुसकर जमकर तोडफ़ोड़ की और घर को आग लगाने का प्रयास किया।

भूमाफिया ने करोड़ों डकारे – भू-कारोबारियों की हो गई मौज ( video )

मनु राव 

20160222000448

उदयपुर। बोहरा समुदाय के धर्मगुरु के नाम पर भुवाणा क्षेत्र के कथित बुरहानीनगर में करोड़ों की जमीन का घोटाला सामने आया है। करीब 30 साल पहले 36 बीघा जमीन पर समुदाय के लोगों से पूंजी निवेश करवाई गई। बाद में उक्त जमीनों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई तो उन्हें डरा-धमकाकर वहां से हटा दिया गया और औने-पौने दामों पर उक्त जमीन को भू-कारोबारियों ने हथिया लिया। इसके साथ ही प्लान को अब तक तीन बार बदला गया है, जिसमें सुविधा क्षेत्र की करीब 70 हजार स्क्वायर फीट जमीन को हथियाने के साथ नक्शे में हेर-फेर करके करीब एक लाख स्क्वायर फीट जमीन 80 फीट रोड पर निकाली गई, जो आज करोड़ों रुपए की है। इस भूमि घोटाला में यूआईटी के नाम पर दर्ज आराजी नंबर 3379 की सरकारी जमीन भी हजम कर ली गई।

यह सारा खेल कृषि भूमि पर हुआ और कोई नक्शा भी अब तक पास नहीं करवाया गया है। पिछले दिनों पुलिस में हुई शिकायत के बाद इस मामले से पर्दा उठता जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग 76 से डेढ़ किलोमीटर अंदर की तरफ 36 बीघा से ज्यादा जमीन पर भू-कारोबारियों ने एक बस्ती बसाने की योजना सन् 1986 में बनाई थी। इसमें एक ऐसे समाज का चयन किया गया, जो ज्यादातर बाहर रहने के साथ पूरी तरह संभ्रात है। इसमें पहले चार किरदार थे, जिनमें भूपेंद्र बाबेल, दिलीप सुराणा, विनय भाणावत और इंद्रसिंह मेहता के नाम शामिल थे लेकिन अब केवल भूपेन्द्र बाबेल व दिलीप सुराणा ही इसके प्लानर है।

इसमें इन्द्र जिनमें वर्तमान में  सभी ने बुरहानीनगर नाम से इस जमीन पर प्लानिंग काटी और समुदाय के लोगों से पंूजी निवेश करवाई। इस प्लान में मस्जिद, जमातखाना, मुसाफिरखाना, स्कूल, अस्पताल, बच्चा के गार्डन के साथ सुविधा क्षेत्र छोड़ा गया था, जो करीब 70,000 स्क्वायर फीट था, लेकिन इन मूलभूत सुविधाओं की जगह को भी ये जमीनखोर हड़प गए। हालांकि कोई सरकारी स्वीकृति बुरहानीनगर को अभी तक नहीं मिली, लेकिन यह जमीनखोर आखिरकार बोहरा समाज के सीधे-साधे लोगों को अपने जाल में फांसने में कामयाब हो गए।

आराजी नंबर 3609 से 3621 तक की करीब ३६ बीघा जमीन में  आठ लाख 42 हजार 800 स्क्वायर फीट कृषि भूमि थी, जहां सन् 1986 में बोहरा समाज के परिवारों को पांच रुपए स्क्वायर फीट में प्लॉट काटकर बेच दिए गए। प्लॉट बेचने के बाद बुरहानीनगर के बंटवारे तैयार करके सभी से हाथों-हाथ हस्ताक्षर करवाए गए। इस प्रकार प्लानर के पास करीब 25 प्रतिशत जमीन आ गई। पुराने नक्शे में 80 प्रतिशत कृषि भूमि पर प्लानिंग काटी गई, बाकी जमीन रोड नेटवर्क के लिए छोड़ी गई थी। इसमें करीब पांच लाख स्क्वायर फीट जमीन पर भूखंड काटे जाने चाहिए थे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

बुरहानी नगर के प्लानर्स दिलीप सुराणा और भूपेंद्र बाबेल ने 20 साल बाद यानी कि 2006 में नगर विकास प्रन्यास में एक नक्शा पेश किया, जिसे बाद में अनुमोदन के लिए भेजा, लेकिन यूआईटी से अनुमोदित हुए बिना ही इस कृषि भूमि पर अन्य लोगों के कब्जे हो गए, तो इन्होंने ने षडयंत्र के तहत बाहुबलियों का सहारा लेकर कब्जे ध्वस्त कराए और एक नया नक्शा प्लान किया, जिसमें वो सारी मूलभूत सुविधाएं हटा दी गई, जो 1986 के नक्शे में प्लानिंग के साथ दी गई थी। इन सुविधाओं में मस्जिद, मुसाफिरखाना, जमातखाना, स्कूल, गार्डन, हॉस्पीटल आदि शामिल थे। इतना ही नहीं इन बाहुबलियों ने खातेदारों को डरा-धमकाकर जमीन अपने आदमियों के नाम करवा दी। मूल खातेदारों से कौडिय़ों के दाम खरीदकर उन्हें यहां से बेदखल करते हुए कहा कि यह भूमि विवादित है और यहां माफियाओं के कब्जे है। इतना ही नहीं 2006 में नए प्लान के तहत नया बंटवारा भी तैयार किया, जिसमें यहां पर सबसे आश्चर्य वाली बात यह हुई कि आठ लाख 42 हजार 800 स्क्वायर फीट कृषि भूमि में से मात्र 6, 71000 स्क्वायर फीट कृषि भूमि का ही बंटवारा तैयार किया गया। इस प्रकार प्लानर ने 1, 71000 स्क्वायर फीट जमीन कागजों से ही गायब कर दी। कोई भी खातेदार इन दबंगों के आगे विरोध नहीं कर पाया, बस डरकर हस्ताक्षर करता गया।

सभी खातेदारों को प्लानिंग में मिलने वाली जमीन को डकारने वाले इन भू कारोबारियों ने वैसे तो 2006 के नक्शे के अनुसार 27 प्रतिशत जमीन काटने की बात कही थी, जो किसी भी तरह से गले नही उतरती। कायदे से १५ फीसदी कटौती होनी थी, जो आमने-सामने के दोनों खातेदारों से आधा-आधा लिया जाना चाहिए था, लेकिन इन जमीनखोरो ने 27 प्रतिशत के हिसाब से दोनों खातेदारों की मिलाकर करीब 54 प्रतिशत जमीन मूल भूखंड में से ले ली। अब जब 25 की जगह 40 फीट रोड नक्शे के अनुसार निकालनी है, तो दोनो तरफ  से 15 फीट ही तो लिया जाना चाहिए था, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ।

सिर्फ  इसी खेल में प्लानर्स ने करीब एक लाख स्क्वॉयर फीट जमीन और गायब कर दी। इस बार भी अधिकतर खातेदार बाहुबलियों के आगे विवश होकर हस्ताक्षर करते गए एवं मौके पर 27 प्रतिशत कम जमीन लेकर काबिज हुए। इस प्रकार करीब 90 प्रतिशत लोगों के हस्ताक्षर होने के बाद दोनो प्लानर्स अपने असली रंग में आ गए और नया नक्शा बनाया, जिसमें इन्होंने एक पूरा ब्लॉक तैयार किया, जो पिछले दोनों नक्शों में कहीं नही दिखाई दिया। 80 फीट रोड के पास निकाले गए इस बड़े ब्लॉक में अभी करीब तीन से चार हजार रुपए स्क्वायर फीट की दर से भूखंड दिए जा रहे हैं, जो इस योजना में शामिल खातेदारों की सुविधा क्षेत्र की जमीन है। हालांकि सुविधा क्षेत्र की जमीन का कोई और उपयोग किया ही नहीं जा सकता, ये सरकारी कायदा है। किंतु ये जमीन कारोबारी तो यहां पर स्वयं सरकार बनकर काम कर रहे हैं।

इस संबंध में जब दिलीप सुराणा और भूपेंद्र बाबेल से जवाब मांगा गया, तो उनका कहना है कि वर्ष 1986 में बोहरा समुदाय के लिए बुरहानीनगर के नाम से प्लानिंग काटी गई थी, परंतु ज्यादा बोहरा समाज के लोग नहीं होने के बाद यह प्लानिंग कैंसल कर दी गई थी। प्लानिंग के अनुसार 70 हजार स्क्वायर फीट पर स्कूल, मुसाफिर खाना व अन्य मूलभूत सुविधाओं का निर्माण करवाया जाना था, परंतु जब प्लानिंग ही निरस्त हो गई, तो मूलभूत सुविधाओं का कोई सवाल ही नहीं उठता। उनका कहना है कि इस भूमि पर सरकारी स्कूल बना हुआ है। इधर, अंकों के हिसाब से हुए घपले पर एक लाख 71 हजार स्क्वायर फीट के 13 आराजी को लेकर पूछे सवाल पर सुराणा व बाबेल कोई जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने कहा कि हम दस्तावेज देखकर इस संबंध में दो दिन में जवाब दे देंगे। इस पूरे मामले में सभी खातेदारों को एक साथ बैठाकर वार्ता कर हल निकाला जाएगा।

https://www.youtube.com/watch?v=QwhlyPbznww&feature=youtu.be

 

॥मैंने टीवी पर बुरहानीनगर प्लानिंग के संबंध में समाचार देखा, जो स्कूल के लिए जमीन दान करने की बात की जा रही है, उसमें किसी तरह की सत्यता नहीं है, क्योंकि स्कूल जिस आराजी पर स्थित है, वह शोभागपुरा पंचायत की है और बुरहानीनगर की जिस जमीन पर ये काबिज है, वो भुवाणा पंचायत में आती है, इसलिए स्कूल की जमीन से उनका कोई लेना-देना नहीं है।

– कविता जोशी, शोभागपुरा सरपंच

॥ आराजी नंबर 3610 के अंदर मैंने पिछले एक साल में करीब 26500 वर्गफीट जमीन अलग-अलग बोहरा खोतदारों से खरीदी थी। उसमें से १८ हजार वर्ग फीट जमीन पर कच्ची चारदीवारी बनी थी, जिसे ध्वस्त करके वहां पर कुछ लोगों ने पक्की चारदीवारी बनवा दी। वहां जाते हैं, तो असामाजिक तत्व डराते-धमकाते हैं। मेरे कब्जे में रहा भूखंड 8500 फीट का ही मिला। इसमें से साढ़े 4 हजार वर्ग फीट जमीन  बेच दी। अब मेरे पास 4 हजार वर्गफीट जमीन बची है। मेरे द्वारा खरीदी गई जमीन के सारे दस्तावेज मेरे पास है, लेकिन मौके पर बाहुबलियों ने आतंक मचा रखा है।

-राजेंद्र धाकड़, खातेदार

उदयपुर के अमेरिकन हॉस्पिटल ने मुर्दे से भी कर ली धोखेबाजी

0

अमेरिकन हॉस्पीटल पर मृतक के परिजनों ने लगाया धोखाधड़ी का आरोप, हर्जाने के रूप में दी गई राशि का चैक बाउंस

 

GBHAmericanHospital

उदयपुर। अमेरिकन हॉस्पीटल पर एक मृतक के परिजनों ने इंसानियत को शर्मसार करने वाला आरोप लगाया है। यहां मृतक के परिजनों के साथ धोखा हुआ है। मामला अमेरिकन हॉस्पीटल में डॉक्टरों की लापरवाही से एक युवक की मौत हो गई। बाद में अस्‍पताल ने हर्जाने के लिए दिए चैक को रद्द करवा दिया और कहा जा रहा है कि जाओ केस कर दो, जबकि बिना पोस्टमार्टम किए मृतक के शव को सप्ताहभर पहले सुर्पेद खाक कर दिया गया है।

मददगार अखबार में छपी के खबर के अनुसार 13 फरवरी को फारुख आज़म कॉलोनी निवासी 30 वर्षीय शहजाद अमेरिकन हॉस्पीटल में अपनी मां के साथ अच्छी हालत में खुद बाइक चलाकर डायलिसिस के लिए गया था। डॉक्टरों ने डायलिसिस के पूर्व ठीक से बीपी और अन्य जांच नहीं की और एक के बाद एक दो इंजेक्शन लगा दिए, जिससे उसकी उसी वक्त मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने पहले तो लापरवाही छुपाने के लिए युवक को वेंटिलेटर पर रख दिया और मृत घोषित नहीं किया। मामला बढ़ जाने से अस्पताल में समाज के लोगों की भीड़ बढ़ती गई। स्थानीय पुलिस, अस्पताल प्रशासन और मृत युवक के परिजनों के बीच वार्ता हुई, जिसमें अस्पताल ने डॉक्टरों की लापरवाही को माना और मृत शहजाद की दो बेटियों के नाम पांच -पांच लाख के दो चैक हर्जाने के रूप में दिए।

आज जब परिजनों ने चैक बैंक में डाले तो बाउंस हो गए, परिजनों ने अमेरिकन हॉस्पीटल के प्रशासन से जब बात की तो उन्होंने टका सा जवाब दे दिया कि क्रजाओ पुलिस में मामला दर्ज कर दो।ञ्ज जबकि उस वक्त मामला रफा-दफा करवाने में पुलिस के अधिकारी भी मौजूद थे। इसी कारण पुलिस केस भी दर्ज नहीं करवाया गया और ना ही पोस्टमार्टम करवाया। समाज में अब चैक बाउंस होने की खबर से आक्रोश फैल रहा है, क्योंकि मृतक शहजाद समाज का सीधा सादा युवक था और कार डेकोर  की दुकान पर काम करके गुजर-बसर कर रहा था। छह माह पहले गलत दवाइयों और पीलिया बिगड़ जाने से उसकी किडनियां खराब हो गई थी।

किड्नी ट्रांसप्लांट के लिए 25 लाख का खर्चा था, जो समाज के सैकड़ों लोगों ने सहायताकर जुटाए थे। 22 फरवरी को उसका ऑपरेशन अहमदाबाद में होना था।  एक किड्नी उसकी मां देने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही डॉक्टरों की लापरवाही ने उसकी जान ले ली। इस मामले को लेकर आज दोपहर समाज के लोग जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर अमेरिकन हॉस्पीटल को पाबंद करने की मांग करेंगे। परिजनों का कहना है कि चैक देते समय अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. राजेश भारद्वाज और अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद थे। उस वक्त ही यह तय हो गया कि अगर चैक बाउंस होगा, पुलिस अधिकारी जिम्मेदार रहेंगे, लेकिन अब पुलिस अधिकारी भी पलट गए हैं।