एसपी के आदेश से खाकी में निराशा
उदयपुर। लोकसभा चुनाव को लेकर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसपी अजय लांबा ने धुलंडी के एक दिन बाद आज पुलिस विभाग में मनाई जाने वाली होली पर रोक लगा दी। जिस होली के हुडदंग का जवानों को सालभर इंतज़ार रहता है, उसे नहीं मनाने के कारण जवान निराश दिखाई दिए।
इस आदेश से जवानों से लेकर अधिकारियों तक में मायूसी छा गई, क्योंकि होली पर्व पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए गली-नुक्कड़ पर जवान तैनात रहते है और आला अधिकारी भी राउंड पर रहते हंै। इसीलिए सालों से होली के अगले दिन पुलिस की होली की परंपरा चली आ रही है। इसमें पुलिस लाइन में एसपी से लेकर सिपाई तक सभी होली के रंग में डूब जाते हंै। जवान अपने आला अधिकारियों के साथ नाचते-गाते हैं। फिर हर एक थाने में होली का रंग जमता है, कई जगह गाना बजाना होता है, लेकिन इस बार यह सब नहीं हो सका, क्योंकि लोकसभा चुनाव की घोषणा हो गई है।
॥विभाग में व्यस्तता के चलते इस बार होली के अगले दिन मनाई जाने वाली पुलिस की होली नहीं मनाई जाएगी। -अजय लांबा, एसपी उदयपुर
पुलिस के जवानों ने नहीं मनाई होली
होलिका दहन के साथ शुरू हुई रंगों की मस्ती

उदयपुर। रंगों और मस्ती भरा त्योहार होली-धुलंडी हर्षोल्लास से मनाया गया। रविवार को गोधूलि वेला में होलिका दहन किया गया। शहर के हर-गली, चौराहों पर होलिका दहन हुआ। कुछ जगहों पर होलिका दहन पारंपरिक तरीकें से उत्सवी माहौल में किया गया। होलिका दहन के दिन रविवार होने के बावजूद भी सुबह से ही बाजारों में अच्छी खासी रौनक थी। मंडी, सूरजपोल, देहलीगेट आदि कई बाजारों में तो भारी भीड़ थी। शहरवासी सुबह से मिठाइयां, गुलाल आदि खरीदने में लगे हुए थे। शाम होते-होते हर गली, मोहल्ले और चौराहों पर होली रोपी गई। होलिका दहन गोधूलि वेला मुहुर्त में शाम 6.40 से शुरू हुआ, जो रात 11 बजे तक हर जगह अलग-अलग समय पर होता रहा। सबसे आखिर में रात 11 बजे मल्लातलाई में होली दहन किया गया।
जगदीश चौक : जगदीश चौक में होलिका दहन का बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। जगदीश चौक में पारंपरिक होलिका दहन देखने और कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कई विदेशी सैलानियों ने भी भाग लिया। होलिका दहन के पूर्व स्थानीय युवकों और कलाकारों द्वारा होली के गीतों पर नृत्य पेश किया गया। पारंपरिक घूमर नृत्य पर विदेशी सैलानी भी थिरके। करीब नौ बजे पूजा पाठ के बाद पारंपरिक तौर पर होलिका दहन किया गया।
मुल्ला तलाई: यहां पर शहर की सबसे बड़ी होली रोपी गई। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों के सहयोग से मल्लातलाई चौराहे पर होली का बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्थानीय युवाओं ने सर पर केसरिया सांफे बांध कर पारंपरिक पूजा-अर्चना की। कई युवाओं ने होली के गीतों पर अपनी प्रस्तुति दी। महिला कलाकारों ने राजस्थानी होली के लोक गीतों पर नृत्य किया गया। रात करीब 11 बजे होली का दहन किया गया।
सिटी पैलेस: सिटी पैलेस में मेवाड़ी परंपरा के अनुसार होलिका दहन का आयोजन किया गया। होली की पूजा पैलेस के नव विवाहित जोड़े लक्ष्यराज सिंह और निवृति कुमारी ने की। उसके बाद पंडितों का मंत्रोचारण के बाद होली का दहन किया गया। इसके अलावा हाथीपोल में भी खटीक समाज द्वारा होली दहन का आयोजन किया गया। बड़ी होली में भी पुरानी परंपरा के अनुसार होली दहन किया गया। सूरजपोल, खेरादीवाड़ा, मंडी, तीज का चौक, अमल का कांटा, अस्थल मंदिर चौराहा, झीणी रेत चौक, घंटाघर, अंबामाता, टीचर कॉलोनी, ओटीसी स्कीम, सज्जन नगर, राता खेत, 80 फीट रोड आदि जगह होलिका दहन किया गया। शहर के बाहरी कॉलोनियों, हिरणमगरी के सभी सैक्टर और कॉलोनियों में होली दहन का आयोजन किया गया। सविना, फतहपुरा, भुवाणा, चित्रकूटनगर शोभागपुरा आदि सभी जगह होली दहन का आयोजन किया गया।
होली के पर्व पर सभी सामजिक और राजनैतिक संगठनों ने शहरवासियों को होली पर बधाई प्रेषित की। केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास, कांग्रेसी नेता डॉ. सीपी जोशी, उदयपुर सांसद रघुवीर मीणा, कांग्रेस मीडिया सेंटर अध्यक्ष पंकज कुमार शर्मा ने शहरवासियों को होली की शुभकामनाएं दीं। भाजपा शहर विधायक और पंचायती राज्य मंत्री गुलाबचंद कटारिया, ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा, महापौर रजनी डांगी, भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट, प्रमोद सामर, पार्षद पारस सिंघवी, धनपाल स्वामी, किरण जैन आदि ने शहरवासियों को होली की बधाई दी है।
वैदिक मंत्रोच्चार से हुआ होलिका दहन

नाथद्वारा। विश्व प्रसिद्घ पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथद्वारा में वैदिक मंत्रोच्चर से होली का दहन किया गया। इससे पूर्व आरती के दर्शन के बाद मंदिर के पंड्या डॉ. परेश नागर, खर्च भंडार के भंडारी बंशीलाल गुर्जर एवं मंदिर के कीर्तनकार तथा रसिया गाने वाले ग्वाल-बाल शहर के विभिन्न मार्गों से तहसील रोड स्थित होली मंगरा पहुंचे, जहां पूजा-अर्चना के बाद होली का दहन किया गया। श्रीनाथ गार्ड द्वारा सलामी दी गई। श्रीनाथजी की मुख्य होली के बाद शहर के विभिन्न गली-मोहल्लों में होली का भी दहन किया गया। होली दहन को देखने होली मगरा पर लोगों का भारी हुजूम उमड़ा तथा होली मगरे के नीचे मेला लगा, जहां लोगांे ने मेले का लुत्फ उठाया।
विशाल बावा ने श्रीजी संग खेली होली
होली दहन के बाद शयन के दर्शन में तिलकायत राकेश महाराज व विशाल बावा ने श्रीजी के गाल पर गुलाल लगाकर श्रीजी को होली खिलाई। इसके बाद विशाल बावा वैष्णवों के साथ भी होली खेली व सभी वैष्णवों को होली की बधाई दी।
डोल उत्सव में लालन विराजे श्रीजी संग
श्रीनाथजी में धुलंडी के अवसर पर निधि स्वरूप नवनीत प्रियजी डोल तिबारी में बिराजित किए गए, जहां डोल को आम्र पत्तों से सजाया जाएगा, जिसमें नवनीत प्रियजी को डोल झुलाया गया। प्रभू को गुलाल, चौवा, चंदन से खिलाया गया और आरती उतारी जाएगी। इस दिन चार राजभोग के दर्शन हुए। चारों राजभोग के दर्शन के बाद नवनीत प्रियजी श्रीनाथजी के संग विराजित हुए। इस अवसर पर विशाला बावा गुंसाईकृत शाही जामा धारण किया। दर्शन के बाद पूरे मंदिर को धोया गया तथा इसके साथ गुलाल की सेवा समाप्त हुई।
बादशाह की सवारी
धुलंडी के अवसर पर शहर के गुर्जरपुरा में स्थित बादशाह गली से बादशाह की सवारी निकाली गई, जो मंदिर की परिक्रमा करते हुए श्रीजी मंदिर के गोवर्धन पूजा चौक में पहुंची। श्रीजी मंदिर में बादशाह नवधा भक्ति को मान्यता देने वाली सूरजपोल दरवाजे की सीढिय़ों को अपनी दाढ़ी से बुहारा। इस परम्परा के निर्वाहन के बाद बादशाह की सवारी को पुन: अपने घर प्रस्थान कर गई।
नाथद्वारा में उमड़ा भक्तों का सैलाब
नाथद्वारा। विश्व प्रसिद्घ पुष्टि मार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथद्वारा में होली व धुलंडी के अवसर पर भक्तों का जनसैलाब उमड़ा। शनिवार को श्रीजी के राजभोग झांकी के दर्शन लगभग ढ़ाई घण्टे तक खुले रहे।
श्रीजी नगरी में वैष्णवो की जबरदस्त भीड़ को देखने के बाद व्यापारियों के चेहरे खिल गए।
चौपाटी पर लगा रहा वाहनों का अंबार
शहर के चौपाटी पर वाहनों के जमावड़े के कारण बाहर से आए वैष्णवों को भारी मुसिबतों का सामना करना पड़ा। उल्लेखनीय है कि त्योहारों के चलते श्रीजी की नगरी में वैष्णवों की संख्या बहुत ज्यादा थी और राजभोग के दर्शन के दौरान चौपाटी पर वाहनों का जमावडा होने से प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है।
होली पर 100 से अधिक लोग दुर्घटनाओं में हुए घायल


उदयपुर। शहर मेें होली के त्योहार पर अलग-अलग क्षेत्रों में सड़क हादसों में लगभग सौ से अधिक लोग घायल हो गए। हादसे में कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है। घायलों में एमबी अस्पताल के ट्रोमा और वार्ड संख्या 16 में भर्ती कराया गया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार होली के तड़के से देर रात तक एमबी अस्पताल में लगभग १०६ घायलों का ईलाज किया गया।
यह है मुख्य हादसे
केस १ : एक अज्ञात व्यक्ति गुलाबबाग के पास बाइक पर सवार होकर जा रहा था। उसी दौरान अचानक बाइक फिसलने उसके सिर पर गंभीर चोट आई। अज्ञात की उम्र लगभग ३५ साल है। जिस वार्ड १६ में भर्ती कराया गया।
केस २ : सेक्टर १४ निवासी चार वर्षीय प्रथम सेन उसके पिता के साथ बाइक पर सवार होकर जा रहा था। इसी दौरान बाइक फिसलने से प्रथम के सिर में चोट आई।
केस ३ : शक्ति नगर में कुछ आरोपियों ने शराब के नेश के अस्थल मंदिर निवासी लोकेश जैन पर सिर पर बीयर की बोतल मारी दी। हादसे में लोकेश गंभीर रूप से घायल हो गया।
केस ४ : शहर के देहलीगेट चौराहे पर उदयपुर निवासी बल्कितसिंह बाइक पर सवार होकर होली मनाने जा रहा था। उसी दोरान देहलीगेट चौराहे पर पानी के कारण बाइक फिसल गई। हादसे में उसके सिर व हाथ पर चोटें आई।
केस ५ : जोशीवाड़ा निवासी नरेश राठौर होली खेलने के दौरान उसके घर में ही फिसल गया। इससे उसके सिर में चोट आईं।
केस ६ : हाथीपोल निवासी दिलीप खटीक उसके दोस्तों के साथ होली मनाने गया। उसी दौरान रास्ते में बाइक फिसलने से उसके सिर पर चोट आई। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
केस ७ : सवीना निवासी अनुराग उसके घर के बाहर खेल रहा था। उसी दौरान सामने से आ रही एक बाइक ने उसे टक्कर मार दी। हादसे में दस वर्षीय अनुराग घायल हो गया।
होली पर चढ़ा आधुनिकता का रंग, फेसबुक पर तो कही फार्म हाउस पर मनाई होली
उदयपुर। मस्ती और उमंग का त्योहार होली पर अब पहले जैसी परंपराएं नहीं दिखाई देती। फाल्गुन मास की दस्तक के साथ ही प्रकृति में अलग ही हलचल दिखाई देती है। प्रकृति ने अपना नियम तो नहीं बदला, लेकिन आधुनिकता की दौड़ में हमारी परंपराएं जरूर निढाल हो गई हैं। फाल्गुन माह में पहले शहर से लेकर गांवों तक में फाग गीतों की धूम मचती थी, जहां हर गली में मोहब्बतों के रंग में लिपटी रंगीली होली मनाई जाती थी अब इस होली ने अपना स्वरुप पूरी तरह बदल दिया है, बदलते इस दौर में, जहाँ लोगों के दिलों में दूरी आयी है, तो इस बार की होली भी अब दूर से ही फेसबुक, व्हाट्स अप और मेसेज के जरिये अधिक मनाई गयी और आधुनिकता ने इस को गली मोहल्लों और कॉलोनियों से दूर कर फ़ार्म हाउस और हॉटलों के पूल साइट बड़े बड़े घरों के गार्डन लोन में समेट कर रख दिया और परम्पराओं से दूर एक अलग ही स्वरुप में टुकड़ों टुकड़ों में बाँट दिया ।
उदयपुर में होली यूँ तो ख़ुशी और हर्षोलास के साथ मनाई गयी लेकिन पहले जैसी रंगत नहीं रही । ना तो गली चौराहों पर मस्तानों की टोली दिखी ना ही कॉलोनियों और मोहल्लों में महिलाओं के झुण्ड होली के रंगों में रंगी गीत गाती
मस्ती करती हुई दिखी। अधिकतर परिवार अपनों में ही सिमट कर रह गए और घरों में ही तिलक होली का दस्तूर निभा लिया । तो किसी ने कॉल और मेसेज पर जरूर होली की बधाई देने में दिन बिता दिया। हां चुनावी माहोल में रंगे शहर के नेता जरूर दिन भर घूमते रहे ।
गली मोहल्लों से ज्यादा तो फेस बुक और व्हाट्सअप पर जरूर होली की रंगत दिखी जहाँ दिन भर मोबाइल में व्हाट्स अप पर होली के मेसेज और फ़ोटो लोग एक दूसरे को भेजते रहे तो फेसबुक की वाल होली के चित्रों से भरपूर रंगी हुई रही। इस व्हाट्स अप और फेसबुक ने लोगों को ख़ास कर युवाओं को अपने पीसी और मोबाइल तक ही सिमित रखा। हा कुछ परिवारों ने और दोस्तों ने फेसबुक पर बने अपने ग्रुप को ही लेकर अलग अलग जगह फार्म हाउस होटल और रिसोर्ट में होली पार्टी का आयोजन जरूर किया जिसमे एक नयी तरह की आधुनिक होली से मुलाकात हुई जहां बेशर्मी और बेहूदगी पर किसी को कोई आपत्ति नहीं थी।
कई आधुनिक परिवारों और मॉर्डन युवाओं ने हवाला और बड़ी के फार्म हाउस पर डी जे साउंड और रैन डांस पार्टी के साथ होली मनायी। जानकारी के अनुसार जयपुर के कॉलेज की करीब 60 युवाओं की टोली हवाला स्थित एक फार्म हाउस पर होली मानाने पहुची। कुछ फार्म हाउस पर फेसबुक पर बने कॉलेज के लड़के लड़कियों के ग्रुप ने भी अपनी तरह की एक आधुनिक होली का आयोजन किया। और भी कई परिवारों ने एक साथ मिल कर डांस पार्टी के साथ एक अलग ही तरह की होली मनाई। और फार्म हाउस पर होने वाली इन पार्टियों में ख़ास ध्यान रखा गया कि कोई भी मोबाइल केमरा और वीडियो या फ़ोटो शूट नहीं हो सके। फेसबुक पर बने ग्रुप के युवा एडमिन ने पार्टी की पहली शर्त यही रखी थी कि मोबाईल केमरा अलाउड नहीं होगा।
उदयपुर शहर में दिन दहाड़े फायरिंग, एक की मौत
उदयपुर। आज होली के दिन शहर के बीच खून की होली खेली गयी जिसमे दिन दहाड़े शास्त्री सर्किल पर आपसी रंजिश और प्रोपर्टी विवाद के चलते फ़िल्मी स्टाइल फायरिंगकी गयी जिसमे एक युवक की मौत हो गयी और एक घायल हो गया ।
जानकारी के मुताबिक़ आज शाम को शाश्त्री सर्कल पर प्रवीण पालीवाल अपने परिवार और साथी विजेंद्र के साथ एक रेडिमेट कपड़ों के शो रूम पर खरीददारी कर रहा था, तब फोर्ड फीगो में सवार होकर चार पांच युवक आये और उन्होंने प्रवीण पालीवाल पर अंधाधुंध पांच फायर किये, और फरार हो गए फायरिंग में पालीवाल के पेट और पसली में गोली लगी और उसके साथ विजेन्द्र सिंह के हाथ में गोली लगी दोनों को तत्काल अमेरिकन हॉस्पिटल में भर्ती किया गया जहाँ इलाज़ के दौरान प्रवीण पालीवाल की मृत्यु हो गयी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक़ फायर करने वालों में नरेश हरिजन के भतीजे साहिल हरिजन और उसके साथियों का हाथ है, जो अभी तक फरार है।
बताया जा रहा है कि इनके बिच पुराना प्रोपर्टी विवाद चल रहा था जिसके लिए यह पहले भी आमने सामने हो चुके है ।
कैसी दिखती है इंटरनेट की ‘काली दुनिया’?
इंटरनेट का एक स्वरूप हम देखते हैं जिसमें गूगल, याहू, फेसबुक, ट्विटर और अन्य अनगिनत वेबसाइटें होती है जिसे हर कोई खोल सकता है, लेकिन इंटरनेट में एक दुनिया और बसी है, जिसे ‘डीप वेब’ कहते हैं.
डीप वेब यानी इंटरनेट की इस काली दुनिया में कई ग़ैरकानूनी बाज़ार सजते हैं. कई ऐसी मादक, ख़तरनाक चीज़ें ख़रीदी-बेची जाती हैं, जिन्हें बेचना या ख़रीदना जुर्म माना जाता है.
पैसे की बजाय वर्चुअल मनी, बिटकॉइन से पेमेंट होता है.
ऐसी ही एक ऑनलाइन बाज़ार ‘सिल्क रोड’ को पिछले साल अमरीका की एफ़बीआई ने बंद करवाया था.
इन वेबसाइटों से खरीदारी करने पर पहचान छुपी रह जाती है, इसलिए आपराधिक गतिविधियों में इनका इस्तेमाल ज़्यादा होता रहा है.
‘डीप वेब’ कितना गहरा?
एंटीवायरस बनाने वाली कंपनी मैकअफ़े की सार्क देशों की इकाई के प्रबंध निदेशक जगदीश महापात्रा ने बीबीसी को बताया कि डीप या डार्क वेब
हमें सार्वजनिक तौर पर दिखने वाले इंटरनेट से तीन गुना बड़ा हो सकता है.
उन्होंने कहा, “टॉर के ज़रिए डार्क वेब तक लोग पहुंचते हैं. इसे रक्षा सेवाओं के लिए प्रयोग किया जाता था, लेकिन जैसा ज़्यादातर तक़नीकों के साथ होता है, इसे वो लोग भी इस्तेमाल करने लगे जिन्हें यहां नहीं होना चाहिए था. साइबर अपराधी तमाम ग़ैरकानूनी गतिविधियों के लिए इसका इस्तेमाल करने लगे.”
सरकारी या ग़ैरसरकारी जासूसी, ड्रग्स बेचने से लेकर पॉर्न का कारोबार और मानव तस्करी तक, सब कुछ इंटरनेट की इस काली दुनिया में खुलेआम होता है.
काफ़ी समय तक इंटरनेट पर एफ़बीआई और डीप वेब संचालकों के बीच चोर-पुलिस के खेल के बाद बीते साल बंद किए गए ‘सिल्क रोड’ ने इस दुनिया की जो तस्वीर पेश की, वो कई विशेषज्ञों की सोच से ज़्यादा खतरनाक थी.
अपराधियों का ‘आश्रय’
आमतौर पर सार्वजनिक इंटरनेट पर ग़ैरकानूनी काम करने वालों तक सुरक्षा एजेंसियां आसानी से पहुंच जाती हैं, लेकिन डीप वेब में साइबर अपराधी बड़े आराम से ग़ैरकानूनी गतिविधियां करते हैं, क्योंकि उनके पकड़े जाने का खतरा वहां कम होता है.
क्या है टॉर (TOR)?
टीओआर यानी द ऑनियन रूटर इंटरनेट का ही एक हिस्सा है, जहां पर आम ब्राउज़र से नहीं पहुंचा जा सकता. इसके लिए फ़ायरफॉक्स ब्राउज़र के एक खास किस्म के ज़रूरत होती है.
इसे अमरीकी नेवी रिसर्च लैब ने बनाया था ताकि इंटरनेट पर बिना ट्रैक हुए अनॉनिमस ब्राउज़ किया जा सके.
ये दो तरह से काम करता है. एक तो यह कि किसी साइट को खोलने पर जो डिजिटल चिह्न पीछे छूटते हैं, ये उन्हें समझ पाना इतना कठिन बना देता है ब्राउज़िंग लगभग अनॉनिमस हो जाती है.
दूसरा यह कि टॉर में कई साइट डॉट कॉम की जगह डॉट ऑनियन एक्सटेंशन में खुलता है. ये साइट छुपी होती हैं और सिर्फ टॉर पर ही दिखती हैं. गूगल और बिंग जैसे सर्च इंजन पर भी ये लिस्ट नहीं होतीं.
इसका प्रयोग पॉर्नोग्राफ़ी या आपराधिक गतिविधियों के लिए ही नहीं बल्कि पत्रकारिता और गोपनीय जानकारी भेजने के लिए भी किया जाता है.
रंग मत डाले रे सांवरिया…

नाथद्वारा में गूंजा रसिया गान, दर्शन के दौरान टेसू के फूलों के रंग और अबीर से भीगे भक्त
नाथद्वारा। द्वितीय गृह पीठ श्रीविठ्ठलनाथजी मंदिर में शुक्रवार को ठाकुरजी निज बगीचे में पधारे। प्राचीन तिवारी में प्रभु को विराजमान किया गया। प्रभु को विशेष शृंगार धराया। द्वितीय पीठाधीश्वर कल्याणराज महाराज ने सपरिवार प्रभु को लाड़ लड़ा कर आरती उतारी।
पीठाधीश्वर ने फेट भर गुलाल, अबीर, केसरिया, पीला और नीला रंग उड़ाया। रंग मत डाले रे सांवरिया आया करो श्याम होली खेलने.. आदि रसिया गान ब्रजवासी रसिया मंडल ने किया। पुन: निज मंदिर में ठाकुरजी को पधराकर वहां भी होली खेली गई। जिसमें होली के ख्याल, स्वांग, सखी नृत्य आदि नृत्य किए गए। राग जैतश्री में ‘शोभा सकल शिरोमणि, झूलत डोल..Ó का कीर्तन गान किया गया। होली रंगी जाएगी ठाकुरजी की दाढ़ी युगल स्वरूप श्रीविठ्ठलनाथजी के मंदिर में होली के त्योहार पर दाढ़ी रंगने की परंपरा का निर्वाह किया जाएगा। होली के दिन रविवार को प्रभु को होली खेलाने के बाद गुलाल से ठाकुरजी की दाढ़ी रंगी जाएगी। इसके बाद मुखियाजी द्वारा महाराज द्वारा गोस्वामी बालकों व सेवादारों से गुलाल के साथ गुलाल खेलकर होली का उत्सव मनाया जाएगा।
ऐसा होता है यह मनोरथ
मंदिर के रतन चौक में चौरासी केले के पेड़ों से बगीचा बनाया। कई तरह के पुष्पों व पत्ते लगाए गए। मनोरथ के दर्शन राजभोग की झांकी से संध्या आरती की झांकी तक हुए। साल में एक ही बार यह मनोरथ होता है। राजभोग में श्री द्वारकाधीश प्रभु को सिंहासन पर विराजित कराकर गोस्वामी परिवार के सदस्यों ने फाग के खेल खेला कर श्री प्रभु की आरती उतारी। बगीचे के दर्शनों में स्थानीय व बाहर से आए दर्शनार्थियों ने श्री प्रभु के साथ रंग से भरी पिचकारियों व गुलाल के विभिन्न रंगों के साथ फाग खेला। मंदिर के कीर्तनकारों ने फाग में गाए जाने वाले पदों से व रसिया गान कर श्री प्रभु को सुनाते हुए वातावरण को संगीतमय बना दिया। सायं संध्या आरती के दर्शनों के बाद मंदिर के कमल चौक में नाथद्वारा से आए रसिया गायकों ने रसिया का गान कर व नृत्य कर दर्शनार्थियों का मनोरंजन किया।
फाल्गुन मेले की मस्ती खूब जमी
राजसमंद कांकरोली स्थित पवन वाटिका में शुक्रवार को जतन संस्थान के फाल्गुन मेले की मस्ती खूब जमी। महिलाएं जमकर थिरकी और खूब अबीर-गुलाल उड़ाई। जतन संस्थान की ओर से हर साल आयोजित होने वाले इस मेले में जिले भर की महिलाएं दिन भर खूब खेली और नाची। केवल महिलाओं के लिए आयोजित इस मेले में ग्रामीण हाट का भी था, तो महिलाएं बन्दूक हाथ में लेकर निशाना लगाते भी नजर आई। साथ ही साफा बांधो प्रतियोगिता में पुरुषों से भी खूबसूरत साफे बांधे। मेले में कई पकवानों की स्टॉल लगाई गई। इस दौरान रस्सा कस्सी, जलेबी रेस, मटकी फोड़, कुर्सी रेस, वन मिनट शो, कठपुतली के करतब हुए।
कांकरोली में 84 खंभ मनोरथ
चौरासी स्तंभ बगीचा मनोरथ की शुरुआत लीलास्थ गोस्वामी वि_लनाथ महाराज ने की थी। गोस्वामी महाराज के समय श्रीद्वारकाधीश प्रभु मंदिर से सवारी के साथ वि_ल विलास बाग में पधारते थे और चौरासी स्तम्भ मनोरथ वहीं होता था। उसी भाव को कायम रखते हुए इस मनोरथ को मंदिर के रतन चौक में बगीचा बनाकर मनाया जाता है।


चित्तौडगढ़ से लड़ेंगे राजनाथ !

काशी से मोदी, कानपुर से जोशी
नई दिल्ली। काशी और अवध के रहस्य से शनिवार को भाजपा परदा उठा देगी। सभी विवादों और कयासों को विराम देते हुए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को वाराणसी से अपना उम्मीदवार घोषित कर देगी। उनके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के लखनऊ या चित्तौडग़ढ़ से चुनाव लडऩे की संभावना है। पार्टी के दो शीर्षस्थ नेताओं के नामों के साथ-साथ शनिवार को उत्तर प्रदेश के पहले दो चरणों में होने वाले चुनाव की सीटों के नाम भी भाजपा घोषित कर देगी।
उत्तर प्रदेश में वाराणसी, लखनऊ और कानपुर जैसी सीटों पर बमुश्किल सहमति बनाने के बीच बिहार का घमासान अभी भी पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बना हुआ है। शुक्रवार को बिहार की नाराजगी पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के आवास तक पहुंच गई। बिहार के बड़े नेताओं गिरिराज सिंह और अश्विनी चौबे ने टिकट वितरण में खुलेआम नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठा दिया है। जाहिर है कि चुनावी मैदान में असली कसरत से पहले ही पार्टी को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।
लोकसभा चुनाव में जीत का दावा ठोक रही भाजपा को अंदरूनी खींचतान और कलह से उबारने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ खुद आगे आ गया है। सूत्रों के मुताबिक, लगातार वाराणसी और लखनऊ सीटों पर बढ़ते विवाद का राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने दखल देकर पटाक्षेप किया। वाराणसी से भाजपा के वरिष्ठ नेता डा. मुरली मनोहर जोशी हटने से नाराज बताए जा रहे थे। इसी तरह लखनऊ में राजनाथ सिंह का नाम चलने से वहां के मौजूदा सांसद लालजी टंडन विचलित थे। दोनों ही बुजुर्ग नेताओं ने अपनी असहजता या नाराजगी का इजहार भी कर दिया था। मोदी भी इस बात के कतई पक्षधर नहीं थे कि जोशी जैसे वरिष्ठ नेता की नाराजगी मोल लेकर उनकी सीट के बारे में फैसला किया जाए। संघ नेतृत्व से इस विवाद के बाबत अमित शाह ने बात की। संघ के सरकार्यवाह सुरेश जोशी उर्फ भैय्याजी ने इसके बाद जोशी और दूसरे बड़े नेताओं से बात की। डा. जोशी ने साफ कह दिया कि वह किसी सीट के लिए परेशान नहीं हैं, लेकिन हर बात तरीके से होनी चाहिए। संघ और भाजपा के प्रबंधकों ने इसे समझा और मोदी को वाराणसी से लड़ाने का मार्ग प्रशस्त हो गया। राजनाथ की इच्छा को देखते हुए उन्हें भी लखनऊ से उम्मीदवार घोषित करने पर सहमति बन गई। संभवत: डा. जोशी अब कानपुर से चुनाव लड़ सकते हैं। सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के लिए भाजपा अभी तक एक भी प्रत्याशी घोषित नहीं कर पाई है। दरअसल कुछ रणनीतिक सीटों को लेकर डर इतना हावी है कि औपचारिक चर्चा से पहले ही सब कुछ दुरुस्त करने की कोशिश हो रही थी। वैसे भी बिहार की घटना से आशंका थोड़ी और बढ़ गई थी। गुरुवार को पार्टी ने बिहार की 25 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए। उसके साथ ही विवाद भी तूल पकड़ गया। मुखर विधायक गिरिराज सिंह और अश्विनी चौबे ने खुलेआम अपनी नाराजगी जता दी। गिरिराज तो बिना जानकारी दिए ही दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के घर पहुंच गए।
भाजपा अध्यक्ष के घर के बाहर थोड़ा ड्रामा भी हुआ और आखिरकार उनसे मुलाकात भी हुई। भागलपुर से अपना दावा ठोकते रहे स्थानीय विधायक चौबे कुछ ज्यादा हमलावर थे। उन्होंने सीधे तौर पर प्रदेश के नेताओं पर उंगली उठा दी। बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा की उम्मीदवारी की घोषणा न किया जाना भी विवाद भड़का सकता है। पार्टी उन्हें दिल्ली से उतारना चाहती है। अगर वह नहीं माने तो पटना साहिब से ही प्रत्याशी होंगे। सिन्हा के समर्थकों ने चेतावनी दे दी है कि अगर पटना साहिब से उन्हें नहीं उतारा गया तो पार्टी के लिए मुश्किल हो जाएगी। शनिवार को उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड जैसे राज्यों के लिए प्रत्याशी तय होंगे।


























