उदयपुर। हजरत अब्दुल रऊफ उर्फ़ मस्तान बाबाका १६ वां चार दिवसीय उर्स रविवार को परचम कुशाई की रस्म के साथ शुरू हुआ। इस मौके पर अजमेर से आई चादर मस्तान बाबा के आस्ताने पर पेश की गई।
कल शाम अस्र की नमाज के बाद दरगाह परिसर में मस्तान बाबा ट्रस्ट के सदर मजीद खां, अब्दुल लतीफ एवं कई सदस्यों की उपस्थिति में परचम कुशाई की रस्म अदा की गई। परचम कुशाई से पूर्व बडी मस्जिद चौक मल्लातलाई से चादर शरीफ का जुलूस मस्तान बाबा दरगाह पहुंचा। उर्स के मौके पर अजमेर से आई चादर को मल्लातलाई से जुलूस के रूप में दरगाह लाया गया। इस दौरान जुलूस में व दरगाह परिसर में अकीदतमंदो की भीड उमड पडी। जुलूस में अकीदतमंद नारे लगाते हुए चल रहे थे। उर्स के आगाज के साथ आस्ताने पर अकीदतमंदों की भीड बढने लगी है।
३० जनों का हुआ सम्मान: उर्स के मौके पर मस्तान बाबा ट्रस्ट की ओर से दरगाह पर वर्षभर सेवा देने वाले करीब ३० जनों का सम्मान किया गया। इस दौरान गरीब बच्चों एवं असहायों को ट्रस्ट द्वारा कम्बलें भी वितरित की गई।
कुरआन ख्वानी, महफिले समां व कव्वाली होगी: चार दिवसीय उर्स के आयोजन के तहत कुरआन ख्वानी, महफिले समां व कव्वाली के कार्यक्रम होंगे। इस बार उर्स के कार्यक्रमों में तब्दीली की गई जिसके तहत अब ये सभी कार्यक्रम रात को केवल ११ बजे तक ही आयोजित होंगे।
मंगलवार को चादर जुलूस: मस्तान बाबा उर्स के तीसरे दिन शहर के खांजीपीर सहित विभिन्न मौहल्लों से चादर जुलूस मस्तान बाबा दरगाह पहुंचेगा। इसी दिन मस्तान बाबा ट्रस्ट की ओर से भी रात को गुस्ल की रस्म के दौरान चादर शरीफ पेश की जाएगी। इस चार दिवसीय उर्स का समापन १ जनवरी को दोपहर ३ बजे कुल की फातेहा के साथ सम्पन्न होगा।
यह रहेगी ट्रेफिक व्यवस्था: उर्स को लेकर यातायात पुलिस द्वारा ट्रेफिक व्यवस्था में भी कुछ परिवर्तन किया गया है। जिसके तहत संजय गार्डन की ओर से आने वाले वाहनों की पार्किंग चर्च के सामने की जाएगी। रूट पर चलने वाले टेंपो संजय गार्डन व अमरदीप किराणा स्टोर तक ही आ जा सकेंगे। गांधी मूर्ति से भदेरिया भेरूजी तक भी सभी वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी।
परचम कुशाई की रस्म के साथ मस्तान बाबा का उर्स शुरू
आओं गाली-गाली खेलें दिल्ली के दरबार में..
उदयपुर। सुखाडिया विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम के बाहर जंहा रात का पारा गिरता जा रहा था वहीं खचाखच भरे ऑडिटोरियम के अन्दर प्रख्यात वीर रस के कवि हरिओम पंवार की जोश भरी कविताएं सुधि श्रोताओं में जोश भरते हुए उनकी बाजुओं को फडका रही थी। अवसर था रोटरी क्लब एलीट द्वारा वीर रस के कवि हरिओम पंवार की काव्य संध्या के आयोजन का। काव्य संध्या के मुख्य अतिथि सुखाडिया विश्वविद्यालय के छात्र अधिष्ठाता प्रो डी.एस.चुण्डावत कल्याण अतिथि थे।
वीर रस के कवि हरि ओम पंवार ने कविता पाठ करते हुए ‘आओं गाली-गाली खेलें दिल्ली के दरबार में,आओं कोलदलीली खेलें,दिल्ली के दरबार में..‘, ‘मैं भारत का संवधिान हूं,लाल किले से बोल रहा हूं,मेरा अन्तर्मन घायल है दिल की गांठे खोल रहा हूं,मैं ऊपर से हरा भरा हूं, संसद में सौ बार मरा हूं ..‘, ‘मैं भी गीत सुना सकता हूं शबनम के अभिनंदन के,मैं भी ताज पहन सकता हूं नंनदनवन की चंदन के,लेकिन जब तक पगडंडी से संसद तक कौलाहल है तब तक जन-मन-गन के क्रन्दन के,मैं झोपडियों का चारण हूं आंसूओं के गीत गाने आया हूं,भारत माता की तस्वीर दिखाने लाया हूं..‘, ‘ ये पाकिस्तानी गालों पर दिल्ली के चांअे होते,गर हमनें दो के बदले बीस शीश काटे होते,दिल्ली वालों अपने को बुद्घ करों, या क्रुद्घ करों,काशमीर को दान करों या गद्दारों से युद्घ करों..‘ कविताएं सुनायी तो हॉल में बैठे हजारों श्रोताओं के तालियों की भूरपूर दाद मिली।
करीब ३ घंटे तक चले इस कवि सम्मेलन में एटा से आयी श्रृगांर रस की कवियित्री योगिता चौहान ने अपनी कविताओं से रस परितर्वन करते हुए ‘भूल गई मैं सारी बातें,एक फसाना याद रहा, मुझकों भरी जवानी मैं बस एक दिवाना याद राह..‘, ‘अखिंया ढूंढ रही है तेरी सूरत प्यारी,मितवा आओं प्यार कर लें..‘, ‘श्वंास-श्ंवास में रमने वाले मेरे दिल में बसने वाले इतनें तीर न सह पांऊगी,नहीं अबोली रह पाऊंगी..‘, कविता पाठ किया तो श्रृंगार रस की कविताओं को जनता ने भरपूर सराहा। कार्यक्रम के सूत्रधार राव अजात शत्रु ने अपने कविता पाठ में ‘गठबंधन की राजनीति है, ठगबंधन की राजनीति है,तेल कहीं का दीया कहीं की बाती है,ऐसे कहीं कोई ज्योत जलाई जाती है,जेसे दिनकर ने गाया कलम फिर गाती है, सिंहासन खाली करोंं अब जनता आती है ..‘, कविता प्रस्तुत की तो जनता ने उनकी बात का तालियों के साथ पूरा समर्थन किया। काव्य संध्या में शाहपुरा के दिनेश बंटी ने भी अपनी कविताएं प्रस्तुत की।
शार्ट सर्किट से विद्युत उपकरण नष्ट
उदयपुर| शहर के प्रतापनगर खेमपुरा क्षेत्र में विद्युत तार टूट कर अन्य लाईन पर गिरने से हुए शाट सर्किट से क्षेत्र में अधेरा छा गया तथा मकानों के विद्युत उपकरण जल गये।
सूत्रों के अनुसार रविवार को शहर केप्रताप नगर थाना क्षेत्र खेमरापुरा में रोड लाईन का विद्युत तार टूट कर एल टी लाईन पर जा गिरा जिससे बस्ती में अधंरा छा गया। इसको देख मकानों बाहर निकल कर लोगों की भीड रोड पर जमा होने से माहौल गर्मागया। इसकी सूचना मिलने पर प्रतापनगर थानाधिकार लाबू राम, एस आई भरत योगी, ए एस आई डालचंद मय जाप्ता मोके पर पहच कर विद्यतुत विभाग को घटना की जानकारी दी। इस पर विद्युत विभाग के कनिष्ठ अभियंता गिरीश मारीवाल मय टीम को मोके पर पहुचे तथा लाईन को जोडत्र कर चालू किया गया। इस पर क्षेत्र में अधिकांश मकानों पर लाईट आ गई तथा कुछ मकानों में लाईट नहीं चालू हो पाई तथा उनके माकानों की विद्युत लाई जलने का पता चला साथ ही टीवी, प्रि*ज, वाशिंग मशीन सहित अन्य उपकरण जलने से नुकासान होने का पता चलने पर लोगों की भी$ड पुन: जमा हो गई। इस पर पुलिस ने विभाग के उच्चाधिकारियों को मोके पर बुलवा कर जनता की समस्या समाधान का आश्वासन दिलाने पर महौल शांत हुआ।
कहीं किस, तो कहीं फर्नीचर फेंक कर मनाते हैं न्यू ईयर
Udaipur. नए साल का स्वागत करने का हर किसी का अपना तरीका होता है। ऎसा ही अलग अलग देशों में अलग अलग परम्पराएं हैं। इनमें से कुछ परम्पराएं लीक से हटकर भी हैं। इसी तरह विश्व के “स्टें्रजेस्ट न्यू इयर कस्टम” का खिताब जाता है चीलियन सीटी को जहां लोग न्यू ईयर की शाम कब्रिस्तान में एकत्र होकर अपने मृत रिश्तेदारों के साथ नए साल का स्वागत करते हैं। उनका मानना है कि कब्रिस्तान में उनके मृत रिश्तेदार उनके साथ होते हैं।
सोशल नेटवर्किग साइट बडू डॉट कॉम की ओर से किए गए पोल के मुताबिक इस खिताब के लिए रनरअप रही आयरिश परम्परा जिसमें दीवार पर ब्रेड फेंके जाते हैं और दक्षिण अफ्रीका में ऊंची इमारातों की खिड़कियों से फर्नीचर फेंक कर नए साल का स्वागत किया जाता है।
बडू ने 18 देशों के 7200 यूजर्स से नए साल के लिए विश्व के स्टें्रजेस्ट कस्टम के लिए वोट करने को कहा था। मोस्ट फन कैटेगरी में वेनिस के सेंट मार्क्स स्क्वायर के बाहर वर्ल्ड्स लाजेस्ट मास किस के तहत कपल्स का लिपकिस कर नए वर्ष का स्वागत करना टॉप पर रहा।
मोस्ट अनयूजुआल न्यू ईयर कस्टम्स –
1. कब्रिस्तान में एकत्रित होकर मृत रिश्तेदारों के साथ नव वर्ष का स्वागत (टालका, चील)
2. जानवरों को बातचीत करते हुए सुनने की कोशिश करना, अगर न सुन सके तो माने जाते हैं लकी (रोमानिया)
3. दीवार पर ब्रेड मारना ताकि बुरी आत्माओं को दूर भगाना (आयरलैंड)
4. खिड़की में से फर्नीचर बाहर फेंकना (जोहानेसबर्ग, दक्षिण अफ्रीका)
5. पेड़ लेकर जमी हुई झील में डाइव लगाना (साइबीरिया)
6. पॉसम ड्रॉप : शोर मचाती भीड़ पर पोसम फेंकना। पोसम कैट फेमिली का ही जानवर होता है।(नॉर्थ कैरोलिना, अमरीका)
7. पड़ोसियों को घूंसा मारकर पुराने विवाद सुलटाना (पेरू)
8. सिर के ऊपर से आग के गोले बनाते हुए गलियों में परेड करना (स्कॉटलैंड)
9. अकेले डिनर करते हुए का पुराना ब्रिटिश टीवी कॉमेडी स्केच देखना (जर्मनी)
10. तीन दिन की बड़ी वॉटर फाइट जिसमें पानी के गुब्बारे और बाल्टियों का इस्तेमाल किया जाता है। (थाईलैंड)
मोस्ट फन न्यू ईयर कस्टम्स –
1. मास किस वेनिस पियाजा (इटली)
2. गुडलक के लिए लाल अंडरवियर पहनना (स्पेन, इटली, मैक्सिको)
3. तीन दिवसीय वॉटर फाइट (थाईलैंड)
4. खिड़की से फर्नीचर बाहर फेंकना (जोहानेसबर्ग, दक्षिण अफ्रीका)
5. पड़ोसी को घूंसा मारकर पिछले विवाद सुलटाना (पेरू)
6. गर्म किए गए दूध के जग पर टाइट लिड लगाकर घर पर ही तोप बनाना (नीदरलैंड्स)
अभिनेता फारूख शेख का निधन
Udaipur. मशहूर अभिनेता फारूख शेख का शुक्रवार देर रात को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। 65 वर्षीय शेख दुबई में थे जब उनका निधन हुआ। औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शनिवार को उनके शरीर को मुंबई लाया जाएगा।
उन्होंने शतरंज के खिलाड़ी, उमराव जान, कथा, चश्में बद्दूर, नूरी समेत कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया। उन्होंने कई टीवी धारावाहिकों में भी काम किया।
उन्होंने इसी साल “क्लब 60” फिल्म में काम किया।
शिल्पग्राम मेले में कलाओं का संगम
उदयपुर। कला एवं शिल्प परंपरा के प्रोत्साहन हेतु उदयपुर के शिल्पग्राम में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित शिल्पग्राम उत्सव में सोमवार को हाट बाजार में कलात्मक वस्तुओं की खरीद-फरोख्त का सिलसिला शुरू हुआ वहीं लोग शिल्प उत्पादों को ले कर पूछ-परछ व दामों के बारे में जानकारी ले रहे हैं।

‘‘कलांगन’’ पर ब्रोजाई व घसियारी ने रंग जमाया, ताल-तरंग में गूंजे कोंकणी वाद्य
शिल्पग्राम उत्सव-2013 के तीसरे दिन शाम को मुक्ताकाशी रंगमंच पर लोक प्रस्तुतियों ने अरूणाचल प्रदेश का ब्रा-जाई व उत्तराखण्ड का घसियारी नृत्य लुभावनी प्रस्तुति रही वहीं ‘‘ताल-तरंग’’ गोवा के वाद्य यंत्रों की टंकार अरावली पर्वतमालिका में गूंजी।
रंगमंच पर कार्यक्रम की शुरूआत गोवा के कला एवं संस्कृति संचालनालय द्वारा प्रेषित ‘‘ताल तरंग से हुई। इस प्रस्तुति में गोवा का लोक वाद्य घुम्मट, समेळ, ताशा, तबला, पखावज, कसालें, वायलिन तबला तरंग आदि वाद्यों के साथ वेस्टन ड्रम का प्रयोग कलात्मक ढंग से किया गया। इस अवसर पर अरूणाचल प्रदेश का ब्रो-जाई नृत्य पूर्वांचल की माटी की मीक लेकर आया। पर्वतों पर छाई हरियाली से उन्मादित हो मिसी जाति की महिलाएं यह नृत्य करती हैं। नृत्य में मिसी जनजाति की बालाओं की भाव भंगिमाएं व अंग विन्यास दर्शकों को रास आया। कार्यक्रम में कर्नाटक का करघा कोलट्टा जहां आकर्षक व जोशपूर्ण पेशकश रही वहीं उत्तराखण्ड का घसियारी नृत्य वहां कृषि समुदाय के लोगों की संस्कृति को दर्शाने वाली प्रस्तुति रही।

तीसरे दिन की शाम कार्यक्रम में कल्पतरू गुहा द्वारा प्रस्तुत माइम को दर्शकों ने रूचि से देखा। गुहा ने क्रिकेट के दृश्यों तथ एक्शन्स को अपनी भाव भंगिमाओं से दर्शाया। छत्तीसगढ़ की मुरिया जनजाति के गौंड माडिया नृत्य की मंथर थिरकन से दर्शकों ने पसं की। इस अवसर पर ही गोवा को गौफ नृत्य में रंगन पट्टिकाओं का लयकारी के साथ गुंथन नवाकर्षण रहा। कार्यक्रम में इसके अलावा ऑडीशा सरकार के सौजन्य से प्राप्त गोटीपुवा नर्तकों ने बंधा प्रस्तुत किया। अन्य प्रस्तुतियों में पुरूलिया छाऊ, डांग, भपंग वादन, लाम्बरा उल्लेखनीय हैं।
शिल्पग्राम मेले में कलाओं का संगम
उदयपुर। कला एवं शिल्प परंपरा के प्रोत्साहन हेतु उदयपुर के शिल्पग्राम में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित शिल्पग्राम उत्सव में सोमवार को हाट बाजार में कलात्मक वस्तुओं की खरीद-फरोख्त का सिलसिला शुरू हुआ वहीं लोग शिल्प उत्पादों को ले कर पूछ-परछ व दामों के बारे में जानकारी ले रहे हैं।

‘‘कलांगन’’ पर ब्रोजाई व घसियारी ने रंग जमाया, ताल-तरंग में गूंजे कोंकणी वाद्य
शिल्पग्राम उत्सव-2013 के तीसरे दिन शाम को मुक्ताकाशी रंगमंच पर लोक प्रस्तुतियों ने अरूणाचल प्रदेश का ब्रा-जाई व उत्तराखण्ड का घसियारी नृत्य लुभावनी प्रस्तुति रही वहीं ‘‘ताल-तरंग’’ गोवा के वाद्य यंत्रों की टंकार अरावली पर्वतमालिका में गूंजी।
रंगमंच पर कार्यक्रम की शुरूआत गोवा के कला एवं संस्कृति संचालनालय द्वारा प्रेषित ‘‘ताल तरंग से हुई। इस प्रस्तुति में गोवा का लोक वाद्य घुम्मट, समेळ, ताशा, तबला, पखावज, कसालें, वायलिन तबला तरंग आदि वाद्यों के साथ वेस्टन ड्रम का प्रयोग कलात्मक ढंग से किया गया। इस अवसर पर अरूणाचल प्रदेश का ब्रो-जाई नृत्य पूर्वांचल की माटी की मीक लेकर आया। पर्वतों पर छाई हरियाली से उन्मादित हो मिसी जाति की महिलाएं यह नृत्य करती हैं। नृत्य में मिसी जनजाति की बालाओं की भाव भंगिमाएं व अंग विन्यास दर्शकों को रास आया। कार्यक्रम में कर्नाटक का करघा कोलट्टा जहां आकर्षक व जोशपूर्ण पेशकश रही वहीं उत्तराखण्ड का घसियारी नृत्य वहां कृषि समुदाय के लोगों की संस्कृति को दर्शाने वाली प्रस्तुति रही।

तीसरे दिन की शाम कार्यक्रम में कल्पतरू गुहा द्वारा प्रस्तुत माइम को दर्शकों ने रूचि से देखा। गुहा ने क्रिकेट के दृश्यों तथ एक्शन्स को अपनी भाव भंगिमाओं से दर्शाया। छत्तीसगढ़ की मुरिया जनजाति के गौंड माडिया नृत्य की मंथर थिरकन से दर्शकों ने पसं की। इस अवसर पर ही गोवा को गौफ नृत्य में रंगन पट्टिकाओं का लयकारी के साथ गुंथन नवाकर्षण रहा। कार्यक्रम में इसके अलावा ऑडीशा सरकार के सौजन्य से प्राप्त गोटीपुवा नर्तकों ने बंधा प्रस्तुत किया। अन्य प्रस्तुतियों में पुरूलिया छाऊ, डांग, भपंग वादन, लाम्बरा उल्लेखनीय हैं।
हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक थे अशफाक उल्ला खां
देश सेवा को सर्वोच्च मानने वाले अमर शहीद अशफाक उल्लाह खां हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रबल पक्षधर थे। काकोरी काण्ड के सिलसिले में 19 दिसम्बर 1927 को फैजाबाद जेल में फांसी पर चढ़ाए गए अशफाक उल्लाह खां ने समय समय पर ऎसे उदाहरण पेश किये जिनसे यह स्पष्ट होता था कि वह हिन्दू मुस्लिम एकता के न केवल प्रबल समर्थक थे बल्कि इस दिशा में रचनात्मक कार्य भी करते थे।
दिल्ली में गिरफ्तार किये जाने के बाद काकोरी काण्ड के विशेष न्यायाधीश सैय्यद एनुद्दीन ने जब उन्हें समझाने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि इस मामले में वह अकेले मुस्लिम हैं इसलिए उनकी और भी जिम्मेदारी है। जेल में उनसे मिलने आये एक मित्र ने जब जेल से भागने की बात की तो उन्होंने जवाब दिया, “भाई किसी मुसलमान को भी तो फांसी पर चढ़ने दो।”
काकोरी काण्ड के नायक शहीद रामप्रसाद बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा में लिखा, कु छ साथी अशफाक उल्लाह के मुसलमान होने के कारण उन्हें घृणा की दृष्टि से देखते थे और हिन्दू मुस्लिम झगड़ा होने पर सजातीय लोग उन्हें गालियां देते थे और काफिर कहते थे, लेकिन अशफाक उल्लाह बिना हिचक अपने रास्ते पर बढ़ते गये। अशफाक उल्लाह खां के क्रातिकांरी आन्दोलन में दिये गये सहयोग को अपनी उपलब्धि मानते हुए बिस्मिल ने लिखा है कि लोगों के फांसी पर चढ़ने से जनता को एक संदेश मिलेगा जो भाईचारे को बढ़ाते हुए देश की आजादी और तरक्की के लिए काम करेगा। राष्ट्रीयता प्रबल समर्थक अशफाक उल्लाह एक अच्छे शायर भी थे। वह हजरत वारसी के नाम से शायरी किया करते थे। उनकी शायरी में ओज और माधुर्य के साथ राष्ट्रीय भावना थी। उनकी शायरी से झलकता था कि उनके मन में गुलामी और सामाजिक वैमनस्यता को लेकर कितनी पीड़ा थी।
स्वतन्त्रता के लिए आशावादी रहे इन क्रांतिकारियों में सदैव स्वतंत्रता की दृढ इच्छाशक्ति। उनका मानना था मरते बिस्मिल, रोशन, लाहिणी, अशफाक अत्याचार से, होंगे सैकड़ों पैदा इनके रूधिर की धार से.. पंडित रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर जिला जेल में, अशफाक उल्लाह खां को फैजाबाद जिला जेल में और ठाकुर रोशन सिंह को इलाहाबाद जिला जेल में 19 दिसम्बर 1927 को फांसी दी गयी थी। फैजाबाद जेल में अशफाक उल्लाह खां की जब अन्तिम इच्छा पूछी गयी तो उन्होंने रेशम के नये कपड़े और इत्र मांगा। जेल वालों ने उनकी इच्छा तुरन्त पूरी कर दी। फैजाबाद जेल स्थित फांसीघर अब शहीद कक्ष के नाम से जाना जाता है।
बेटी से शादी करनी है, तो 10 लाख फेसबुक लाइक्स दो
। यमन में एक शख्स ने अपने होने वाले दामाद के सामने अजीब सी शर्त रखी। सलीम अय्याश नामक शख्स ने दामाद से अपनी बेटी का हाथ सौंपने की एवज में 10 लाख फेसबुक लाइक्स मांगे हैं। तएज शहर का सलीम पेशे से कवि है और फेसबुक पर काफी चर्चित हस्ती है। सलीम ने अपने भावी दामाद ओसामा के सामने प्रस्ताव रखा कि वो उनकी बेटी से शादी करना चाहते हैं तो उन्हें बदले में 10 लाख फेसबुक लाइक्स देने होंगे। इसके लिए ओसामा को दो साल तक का समय देने को तैयार है।
बड़ी है चुनौती
इस काम में सबसे बड़ी परेशानी ये है कि यमन की पूरी जनसंख्या ही 2.4 करोड़ है। यहां इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या बहुत कम है। लेकिन सलीम का कहना है कि मैं देखना चाहता हूं कि मेरी बेटी से प्यार करने वाला लड़का ओसामा शादी के लिए किस हद तक मेहनत कर सकता है।
इंटरनेट पर काफी चर्चा-
यह खबर यमन में इंटरनेट पर काफी चर्चा में है। सोशल मीडिया यूजर्स और ब्लॉगर्स इसके बारे में लिख रहे हैं और लोगों से ओसामा की शादी में मदद करने की अपील कर रहे हैं। इस मुहिम के बाद अब तक सलीम को लगभग 35 हजार लाइक्स मिल चुके हैं।
अनोखे दहेज का दूसरा पहलू
अपनी बेटी की शादी के लिए अनोखा दहेज मांगने वाले अय्याश का कहना है कि मैं अपने इस कदम से यमन की सामाजिक स्थिति की तरफ लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहा हूं। देश में हाल में हुई असामाजिक घटनाओं की वजह से अब कोई अपनी शादी के लिए दहेज देने में समर्थ नहीं है। यमन जैसे देश में दहेज बड़ी समस्या और राजनीतिक मुद्दा भी है। यहां पर कुछ ही लोग ज्यादा दहेज देने में सक्षम हैं, ऎसे में ऎसे दहेज की मांग को भविष्य में अच्छे कदम के रूप में भी देखा जा सकता है।
कैटरीना ने ख्वाजा के दर पर मांगी धूम-3 की सफलता

अजमेर। अपनी फिल्म धूम-3 की सफलता के लिए अभिनेत्री कैटरीना कैफ ने गुरूवार को ख्वाजा साहब के दर पर मत्था टेका। कैटरीना के साथ गुंडे फिल्म के निर्देशक अली अब्बास भी अपनी फिल्म की कामयाबी के लिए मन्नत मांगने आए। इस दौरान कैटरीना काले रंग के कपड़े पहन हुए थीं।
कैटरीना ने सुबह पौने छह बजे सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह पर मत्था टेका। वह 16 खंभा गेट से दरगाह में गई। इसके बाद उन्होंने जन्नती दरवाजे पर मन्नत का धागा बंाधा। कैटरीना के आने की भनक जब तक लोगों तक चल पाती तब तक वह वहां से निकल गई। कैटरीना के साथ ही यशराज बैनर्स की आगामी फिल्म गुंडे के निर्देशक अली अब्बास भी दरगाह में आए।
उन्होंने भी अपनी फिल्म की सफलता की दुआ मांगी। कैटरीना ने काले रंग के कपड़े पहन रखे थे। इसमें से केवल उनकी आंखें ही नजर आ रही थी। गौरतलब है कि यशराज बैनर्स के तले बनी धूम-3 में कैटरीना कैफ के अलावा, आमिर खान, अभिषेक बच्चन और उदय चोपड़ा भी हैं।


