36 घंटे के नवजात को लेकर परीक्षा देने पहुची महिला – इस होसले का सबने किया सम्मान .

उदयपुर। सेकण्ड ग्रेड शिक्षक की परीक्षा बुधवार को आयोजित हुई इस परीक्षा को लेकर एक ऐसे होसले वाली महिला का किस्सा सामने आया कि उसके होसले के आगे हर कोई अचंभित हो गया। सिजेरियन से प्रसव होने के दुसरे दिन ही तकलीफों के बावजूद महिला परीक्षा केंद्र में पहुच गयी और अपना पेपर दिया ।
उदयपुर जिले में सराडा की रहने वाली नाजमीन बानों ने गर्भवती होने के बावजूद भी बड़ी मेहनत और लगन से सेकण्ड ग्रेड शिक्षक परीक्षा की तय्यारी की थी लेकिन एन परीक्षा के मात्र दो दिन पहले सिजेरियन से प्रसव करवाना पढ़ा। इसके बावजूद नाजमीन की हिम्मत नहीं टूटी और ओपरेशन के बाद भी वह बुधवार को पानेरियों की मादडी स्थित स्कूल में आये सेंटर में परीक्षा देने पहुची। नाजमीन की इस हिम्मत होसले और शिक्षक बनने के जूनून को सबने सलाम किया एक तरफ जिस अरावली हॉस्पिटल में नाजमीन भर्ती थी वहां की डॉक्टर और स्टाफ ने काफी सहायता की और स्टाफ की देख रेख में उसको एम्बुलेंस से परीक्षा केंद्र भेजा गया । इधर परीक्षा केंद्र में तैनात परीक्षा संचालक को भी जब इस बात का पता चला तो उन्होंने नाजमीन की सहायता की और परीक्षा हॉल के सामने ही एम्बुलेंस खड़ी करवाई । एम्बुलेंस में नवजात बच्चे को लेकर नाना नानी को बैठने की इजाजत भी मिल गयी। जीतनी देर तक परीक्षा चलती रही नाना नानी बच्चे की देखभाल करते रहे। नाजमीन ने बताया कि शिक्षक बनने का उसका सपना है और उसने इस परीक्षा के लिए गर्भवती होने के बावजूद भी तय्यारी जारी राखी थी । आगे भी वह अपने बाकी पेपर इसी तरह देगी । नाजमीन की इस हिम्मत में साथ उसके परिजनों सहित अरावली अस्पताल के स्टाफ और परीक्षा केंद्र पर तैनात कर्मचारियों ने भी दिया ।

राज्यमंत्री , बांसवाडा के विधायक अब खुल कर नफरत फैला धर्म के नाम पर वोट मांग रहे है – मामला हुआ दर्ज .

Udaipur. किसी ने सही ही कहा है खादी धारी नेता अपनी कुर्सी और वोटों के लिए किसी भी हद तक जा सकते है तो फिर आचार संहिता इनके लिए क्या चीज़ है . आचार संहिता का तो ये लोग अचार बना कर मर्तबान में रख देते है . बांसवाडा ग्रामीण विकास और पंचायत रात मंत्री धन सिंह रावत अब सभा में खुल कर धर्म के नाम पर वोट मांग रहे है। इनका कहना है कि जब मुसलमान एक जुट हो कर कांग्रेस को वोट दे सकते है तो हिन्दू भाजपा को वोट क्यूँ नहीं दे सकते।
हालाँकि मंत्री महोदय इस बयान के बाद आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन में फंस गए हैं। राज्य चुनाव आयोग के निर्देश पर बांसवाड़ा के सहायक रिटर्निंग अधिकारी ने राज्यमंत्री रावत के खिलाफ कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। साथ ही उन्हें नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। सिरोही के गांव एवडी हाल बांसवाड़ा तहसीलदार एवं सहायक रिटर्निंग अधिकारी रामसिंह राव पुत्र मूलसिंह राव ने 29 अक्टूबर को कोतवाली थाना पुलिस को सौंपी रिपोर्ट में बताया कि 27 अक्टूबर को उदयपुर रोड स्थित निजी वाटिका में हाउसिंग बोर्ड निवासी राज्यमंत्री धनसिंह रावत ने सभा में मौजूद लोगों को यह कहते हुए सार्वजनिक भाषण दिया कि मुसलमान कांग्रेस को वोट देते हैं। कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है। प्रदेश के हिंदुओं को एकजुट होकर बीजेपी को वोट देना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार आगामी विधानसभाओं के मद्देनजर आचार संहिता के बावजूद रावत ने विभिन्न वर्गों के बीच शत्रुता व घृणा की भावना पैदा करने की नियत से कटुतापूर्ण भाषण दिया है। रिपोर्ट अनुसार आरोपी रावत का भाषण लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 125 के तहत दण्डनीय अपराध है। गौरतलब है कि 27 अक्टूबर को वाटिका में भाजपा बांसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं का नवशक्ति सम्मेलन था, जिसमें राज्यमंत्री ने उक्त बयान अपने संबोधन में दिया था।
चुनाव आयोग से मिली शिकायत रिटर्निंग अधिकारी एवं बांसवाड़ा उपखंड अधिकारी पूजा पार्थ ने मंगलवार को बताया कि सीईओ राजस्थान को रावत के खिलाफ धर्म के आधार पर वोट मांगे जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी। स्थानीय स्तर पर यह मामला संज्ञान में था। सीईओ राजस्थान से रिपोर्ट आते ही धनसिंह रावत को आचार संहिता के उल्लंघन का नोटिस जारी किया है और कोतवाली थाने को रिपोर्ट दर्ज करने के लिए प्रकरण भेजा।
बयान का विरोध भी गौरतलब है कि मंत्री के बयान के बाद कांग्रेस ने जिला निर्वाचन अधिकारी को सोमवार को पत्र देकर आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की थी। वहीं अंजुमन इस्लामिया के सदर नईम शेख ने पत्रकार वार्ता में कहा कि मुस्लिम समुदाय किसी पार्टी का पक्षधर नहीं है। मंत्री के बयान से समाज के लोगों को धक्का लगा है। बयान एक कौम को समाज की अन्य कौमों से अलग रखने की कोशिश जैसा है। बयान से मुस्लिम समुदाय में गलत संदेश गया. यह कहा था गृहमंत्री ने राज्यमंत्री के बयान के अगले दिन रविवार को बांसवाड़ा आए गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा था कि मतदाता की कोई जात नहीं होती है। मतदाता उस व्यक्ति को वोट दे जिससे देश का विकास हो। भाजपा का यह कभी उद्देश्य नहीं रहा कि किसी धर्म का व्यक्ति वोट देगा या नहीं देगा।

उदयपुर जनाना अस्पताल की लापरवाही में नवजात की मौत फिर किया इंसानियत को भी शर्मसार।

उदयपुर। शहर के पन्नाधाय चिकित्सालय में लापरवाही और इंसानियत को तार – तार करने का मामला सामने आया है। लापरवाही एसी कि नवजात बाल्टी में गिर गया और उसकी मौत हो गयी। बाद में अपनी गलती छिपाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने जबरदस्ती प्रसूता को अस्पताल से निकाल दिया।
दरअसल सेमारी तहसील के ग्राम पंचायत भौराई की रहने वाली बंसती नाम की गर्भवती महिला को इलाज के लिए पन्नाधाय चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया था। इसके बाद बसंती देवी ने एक बच्चे को जन्म दिया। कुछ ही घंटो के बाद जब बच्चे को हास्पीटल का स्टाफ इधर से उधर ले जा रहा था। लापरवाही से पकड़ा गया नवजात हॉस्पिटल स्टाफ के हाथों से बाल्टी में गिर गया और उसके सिर पर चोट लगने से काफी खून बह गया। हास्पीटल स्टाफ नवजात को आईसीयू में ले गया, लेकिन तब तक नवजात ने दम तोड दिया।
लेकिन हद यहाँ खत्म नहीं होती इंसानियत को तार तार करने का किस्सा यहाँ से शुरू होता है। अपनी लापरवाही छिपाने और अस्पताल की इस गलती को रफा दफा करने के लिए बेसुध मरीज और उसके पति को ही दफा करने की योजना बना ली।
इस घटना के बाद 29 अक्टूबर की रात को ही हास्पीटल स्टाफ ने मामले को रफा – दफा करने के लिए बसंती देवी और उसके पति सहित परिजनों को वहां से जाने के लिए कह दिया, लेकिन रात होने की वजह से हास्पीटल से कोई नही गया। मंगलवार सुबह हास्पीटल के स्टाफ ने मामले को रफा – दफा करते हुए जोर जबरदस्ती कर बसंती देवी और उसके परिजनों को मृत बच्चे को देकर रवाना कर दिया। इसके बाद परिजन बंसती देवी को हास्पीटल के गार्डन में ले आये। इस मामले के सामने आने के बाद गार्डन में भी सेकड़ों लोग जमा हो गये। बसंती देवी के पति हरि शंकर मीणा की माने तो हास्पीटल स्टॉफ अपनी गलती को मानने को तैयार नही है। इसके अलावा हास्पीटल स्टाफ ने बिना डिस्चार्ज टिकिट दिये ही पीड़िता को हास्पीटल से बाहर निकाल दिया जिसने न सिर्फ इंसानियत को शर्मसार किया है बल्कि डाॅक्टरी पेशे पर भी बदनुमा दाग लगाया है, आपको बता दे कि पीडित प्रसूता के साथ उसकी मां जमना देवी और ननंद केसर देवी मौजूद थी और जब नवजात बाल्टी में गिरा इस दौरान भी इन दोनों को उसके पास नही जाने दिया। नवजात की मौत हो जाने के कई घंटो के बाद इसकी सूचना परिजनों की दी गई। अब परिजन इस मामले में हॉस्पिटल प्रशासन से दोषी स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर हैं।

अशोक गहलोत: राजस्थान कांग्रेस का जादूगर

1970 के दशक की शुरुआत में जब इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी की तूती बोलती थी, उस समय Ashok Ghlot को किस्मत से कांग्रेस में एंट्री मिली. संजय एक दूसरे गहलोत, जनार्दन को आगे बढ़ा रहे थे, जिन्होंने कद्दावर भैंरों सिंह शेखावत को 1972 में जयपुर के गांधीनगर से पटखनी दी थी.

लेकिन यह किस्मत का ही खेल था कि जनार्दन के प्रति संजय का प्रेम ज्यादा दिनों तक बना नहीं रहा और उनके लोगों ने जल्दी ही जनार्दन की जगह माली समुदाय से आनेवाले एक दूसरे गहलोत को दे दी.

Ashok Gahlot को राजस्थान के नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) का अध्यक्ष बनाने का किस्सा बड़ा ही दिलचस्प है. एक बाइकर उनका नियुक्ति पत्र मोटरसाइकिल पर दिल्ली से जयपुर लेकर गया था.

जादूगरों के परिवार से आनेवाले अशोक गहलोत को शुरू में संजय की मंडली में गिल्ली बिल्ली संबोधन से पुकारा जाता था. वे मृदुभाषी और काफी धार्मिक थे और गांधीवादी जीवन पद्धति को कई रूपों में व्यवहार में लाते थे. व्यसन के नाम पर सिर्फ चाय पीनेवाले गहलोत सिर्फ सात्विक भोजन करने में यकीन करते हैं और शाम ढलने के बाद से सुबह तक कुछ भी खाने से परहेज करते हैं.

राहुल गांधी के कांग्रेस के सबसे ताकतवर लोगों में शुमार किये जानेवाले गहलोत के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है, सिवाय इसके कि गहलोत के पिता लक्ष्मण सिंह दक्ष एक प्रसिद्ध जादूगर थे, जो देशभर में अपनी प्रस्तुतियां दिया करते थे.

अपने बचपन के दिनों में अशोक भी अपने पिता के साथ सफर किया करते और जादू दिखाकर दर्शकों को एक तरह से सम्मोहित कर देते थे.

कुछ साल पहले गहलोत ने एक साक्षात्कार में कहा था, ‘अगर मैं राजनीति में नहीं आया होता, तो मैं एक जादूगर होता. मैं हमेशा सामाजिक काम करना और जादूगरी सीखना पसंद करता था. भविष्य में भी मुझे जादूगर बनने का मौका शायद न मिल सके, लेकिन जादूगरी आज भी मेरी आत्मा में है.’

हालांकि, वे इसे स्वीकार नहीं करते हैं, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि गहलोत ने इंदिरा गांधी की मौजूदगी में युवा राहुल और प्रियंका के सामने जादू दिखाया था.

कुछ लोग यह महसूस करते हैं कि अशोक गहलोत की खोज का श्रेय इंदिरा गांधी को दिया जाना चाहिए, क्योंकि वे उत्तर पूर्व क्षेत्र में भीषण शरणार्थी समस्या के दौरान गहलोत से मिलने वाले शुरुआती नेताओं में थीं.

उस समय 20 साल के गहलोत को राजनीति में आने का निमंत्रण और किसी ने नहीं, खुद उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिया था. वे इंदौर में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सत्र में शामिल हुए थे, जहां उनकी मुलाकात संजय गांधी से भी हुई. उसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

इंदौर सत्र के दौरान प्रियरंजन दासमुंशी को यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया था और वे आज तक यूथ कांग्रेस के निर्वाचित होनेवाले एकमात्र अध्यक्ष हैं. यह वह दौर था, जब इंदिरा गांधी और संजय गांधी यह चाहते थे कि यूथ कांग्रेस दक्षिणपंथी संघ और उससे संबंधित संगठनों का मुकाबला करे. यह कांग्रेस में युवा नेताओं को तैयार करने के लिहाज से स्वर्णकाल था.

वैसे तो संजय गांधी की आलोचना 21 महीने चले आपातकाल के दौरान उनकी अकड़ और संविधानेत्तर सत्ता केंद्र के तौर पर काम करने के लिए की जाती है, लेकिन यह भी सच है कि उन्होंने पार्टी के भीतर एक नेतृत्व के कारखाने की स्थापना की थी, जिससे कई ऐसे नेता निकले जिन्होंने 1980, 1990 और 2000 के दशकों में ग्रैंड ओल्ड पार्टी के अंदर प्रभावशाली भूमिका अदा की.

उनमें से कई, मसलन कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, अंबिका सोनी, व्यालार रवि, एके एंटनी, गुलाम नबी आज़ाद, मुकुल वासनिक, बीके हरिप्रसाद आज भी सक्रिय हैं.

संजय के नेतृत्व में इन नेताओं को कई जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, मसलन झुग्गियों को गिराना, परिवार नियोजन, वयस्क शिक्षा अभियान, एक व्यक्ति एक पेड़ पर्यावरण योजना, दहेज विरोधी अभियान, सरकारी कर्मचारियों के साथ शारीरिक बल-प्रयोग आदि.

यह संजय गांधी के ‘सीधे शासन’ का विचार था, जिसके तहत यूथ कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ताओं को पथभ्रष्ट नौकरशाहों की सार्वजनिक पिटाई करने का निर्देश दिया गया था. अतिउत्साहित और घमंड से भरे यूथ कांग्रेस के नेताओं द्वारा सरकारी कर्मचारियों पर जूते निकालने की कई घटनाएं हुईं.

लेकिन गहलोत संजय की मृत्यु के बाद राजीव गांधी के राजनीति में आने तक राजस्थान और दिल्ली में सामान्य भूमिकाओं में रहे. राजीव ने इंदिरा के मंत्रिमंडल में जूनियर मंत्री के तौर पर उनका नाम आगे किया. हरिदेव जोशी और शिवचरण माथुर जैसे कद्दावर नेताओं के खिलाफ उतारे गए अशोक राजस्थान में राजीव के आंख और कान बन गए.

राजनीतिक गलियारों में ये चर्चाएं रहीं कि जब राजीव गांधी ने राज्य की राजधानी से 170 किलोमीटर दूर कैबिनेट की बैठक करने का फैसला किया, उस समय गहलोत ने राजस्थान के मुख्यमंत्री के पद से जोशी को हटाए जाने में मुख्य भूमिका निभाई.

राजीव के निर्देशों के तहत राज्य के मंत्रियों को राजीव से मिलने के लिए सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल नहीं करना था. राजीव खुद एक एसयूवी ड्राइव कर रहे थे, जिसे कथित तौर पर स्थानीय ट्रैफिक कॉन्सटेबल द्वारा सीधे जाने देने की जगह दायें मुड़ने का संकेत दिया गया.

ऊपर से मासूम सी दिखाई देनेवाली यह चूक (कुछ लोगों का दावा है कि यह जादूगर अशोक की कारगुजारी थी) जोशी को महंगी पड़ी, क्योंकि मार्ग में यह बदलाव उस जगह की ओर लेकर गया जहां राज्य के मंत्रियों और अधिकारियों की सैकड़ों में संख्या में गाड़ियां खड़ी की गई थी.

विभिन्न मोर्चों पर लड़ रहे राजीव ने यह निर्देश उस समय भीषण सूखे का सामना कर रहे राजस्थान में किफायत का संदेश देने के लिए दिया था. राजीव द्वारा लगाई गई सार्वजनिक फटकार जोशी को हजम नहीं हुई, जिन्होंने नाराज होकर दोपहर के भोजन का बहिष्कार कर दिया.

मेजबान मुख्यमंत्री की गैरहाजिरी पर जोशी के मित्र पीवी नरसिम्हा राव का ध्यान गया, जो उस समय राजीव गांधी की कैबिनेट में मानव संसाधन विकास मंत्री थे. राव द्वारा बीच-बचाव की कोशिश बेकार गई और एक महीने के भीतर जोशी की जगह माथुर को राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया गया.

इस दौरान गहलोत दिल्ली में थे और पर्यटन मंत्रालय की कमान संभाल रहे थे. इससे पहले नागरिक उड्डयन मंत्रालय में जूनियर मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल ने उनके कद को बढ़ाने का काम किया था, क्योंकि उन्होंने जी जान लगाकर राजीव के विजन के मुताबिक काम किया था.

इसके बाद गहलोत के हिस्से में कई सफलताएं जुड़ीं. गहलोत को आईएनए मार्केट के सामने दिल्ली हाट की स्थापना का श्रेय दिया गया, जो आज भी लोक-कलाओं के बाजार के तौर पर काम करता है, जो देशभर के दस्तकारों/शिल्पियों और उनके हस्तशिल्प को सीधे खरीददारों से जोड़ता है.

पीवी नरसिम्हा राव के मंत्रिमंडल में कपड़ा मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल को कई नवाचारी विचारों कों मूर्त रूप देने के कारण यादगार माना जाता है.

राजीव गांधी के साथ उनकी नजदीकी ने संभवतः सोनिया गांधी और उनके बाद राहुल गांधी के साथ अच्छे संबंध बनाने में गहलोत की मदद की, जो अब तक अपने मित्र सचिन पायलट (जो वर्तमान में राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष हैं) और अपने चाचा के समान गहलोत के बीच बेहतरीन संतुलन कायम करने में कामयाब रहे हैं.

राहुल की मौजूदगी यह सुनिश्चित करने में कामयाब रही है कि गहलोत ने सचिन पायलट का तख्तापलट करने की कोई कोशिश नहीं की है. इसके साथ ही सचिन से यह उम्मीद की जाती है कि वे दो बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत को पूरा महत्व दें.

कांग्रेस में ऐसा सोचने वालों की कोई कमी नहीं है कि अगर राजस्थान में कांग्रेस कम अंतर से जीत हासिल करने में कामयाब रहती है, तो गहलोत मुख्यमंत्री के तौर पर राहुल की पहली पसंद होंगे.

गहलोत की सरलता और उनकी सादगी ने उनके कद को काफी बड़ा करने में काफी मदद की है. एक समय ऐसा भी था जब गहलोत अहमद पटेल और गुलाम नबी आजाद के सामने कुर्सी पर नहीं बैठा करते थे. आज वे उनके साथ बराबरी की कुर्सी पर बैठते हैं और वे 24 अकबर रोड के किसी भी शक्तिशाली पदाधिकारी जितने ही ताकतवर हैं.

पार्टी नेताओं और सहकर्मियों के एक बड़े हिस्से में गहलोत आज भी अच्छी नीयत वाले व्यक्ति के तौर पर जाने जाते हैं, जिन्होंने दिल्ली और जयपुर के सियासी गलियारों में चहलकदमी के बावजूद अपने दोस्तों के साथ सामान्य रिश्ते बनाए रखा है.

अपने गृहनगर जोधपुर में आराम फरमाने का गहलोत का तरीका एक पीसीओ के सामने बैठना और सभी तरह के लोगों के साथ गपशप करना है. इस अनुभवी नेता के पास खुद पर हंसने की क्षमता है.

एक बार उन्होंने एक युवा से धीमे स्वर में फुसफुसाकर कर जो कुछ कहा, वह इस तरह सुनाई दिया जैसे वे कह रहे हों ‘टमाटर खाओ’, जबकि उनके कहने का मतलब था, ‘कमाकर खाओ. जब यह चुटकुला गहलोत को सुनाया गया, तो वे जोर से हंसे थे.

The bridge between professional education and industry requirements needs to be narrowed down-Pavan Kaushik,

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Pavan Kaushik, Vice President and Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc was the Chief Guest of Spardha 2018, Institute of Rural Management, Jaipur. The event started with lamp lighting and a welcome address by Dr. B.R. Madan, Advisor, SIIRM. Over 150 MBA students attended the event.

 In his address, Pavan Kaushik said, “I am glad to be a part of Spardha 2018 and address all the bright students present here. I believe that today’s children are the future of the country. It is crucial that these future leaders drive the growth of our nation and make it reach its potential.”

 Pavan Kaushik explained that the bridge between professional education and industry requirements needs to be narrowed down. For that, the students must do research, data mining and forecast for the future.

 With regard to CSR, Pavan Kaushik said, “CSR or Corporate Social Responsibility is not merely a duty or job profile being fulfilled by a Corporate. For doing CSR, it is very important to have a ‘Character’ that drives you to do CSR. I believe that the ‘C’ in CSR stands for ‘Character’. As for the ‘S’ of CSR, I feel that the ‘S’ stands for ‘Sustenance’. It is utmost important that the projects in CSR provide for a long lasting and sustained growth. Thirdly, I feel that the ‘R’ in CSR’ stands for ‘Result’ because impact assessment and measurement is also imperative.”

 “30% of world’s poor children live in India. It is high time that we think about the future human resources of the country. There are many challenges that our country is facing. As an Institute, the students should collectively pick one area and work towards improving it.”

 Pavan Kaushik also gave an overview of how Hindustan Zinc is working towards child care through its project Khushi, and towards rural and tribal women empowerment through its project Sakhi. He also explained about project Be Safe Zindagi, which Pavan Kaushik launched to bring about road safety, especially in the state of Rajasthan.

 In the event, Spardha 2018, also present on the dais were Professor Barbara Cangan – President SIIRM, Dr. B.R. Madan – Advisor SIIRM, Ms. Stany Thomas Cangan – CEO SIIRM, Mr. R.D. Singh – Advisor SIIRM and Dr. Jessy John – Director FMS IRM, Jaipur.

राजस्थान : रिश्तों को शर्मसार करदे एसी घटना – पिता ने 14 साल की बेटी से किया रेप।

राजस्थान के सीकर जिले के खंडेला कस्बे में पिता-बेटी के रिश्तों को शर्मसार करने देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक रक्षक पिता ही अपनी बेटी का भक्षक बन गया। रात को बेटी को अकेला पाकर हैवानियत की सारी हदें पार कर डाली।
इस पिता ने बेटी के साथ रेप किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। सुबह बेटी ने अपनी मां को आपबीती बताई तो उसका भी खून खौल उठा। मां अपनी बेटी को लेकर पुलिस थाने पहुंची और दरिंदगी करने वाले पति के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। प्रकरण सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपित पिता को हिरासत में ले लिया और पीडि़ता बेटी का मेडिकल करवाया।
जानकारी के अनुसार खंडेला कस्बे के वार्ड नम्बर 2 की एक महिला ने खंडेला पुलिस थाने में शुक्रवार सुबह रिपोर्ट दर्ज करवाई कि उसका बच्चा बीमार चल रहा है।
वह उसके इलाज के लिए गुरुवार शाम को सीकर आई थी। बच्चे की तबीयत में सुधार नहीं होने पर वह रात को सीकर ही रुक गई थी।
सुबह महिला घर पहुंची तो 14 वर्षीय नाबालिग बेटी गुमशुम थी। मां इसकी वजह जाननी चाही तो बेटी फूट पड़ी और उसने रात को अपने साथ हुई हैवानियत की पूरी कहानी बयां कर दी। बेटी ने मां को बताया कि जब वह रात सो रही थी।
तब पिता ने उसके साथ दुष्कर्म किया। मां की शिकायत पर खंडेला पुलिस ने पीडि़ता के पिता के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
साथ ही पीडि़ता का खंडेला के सरकारी अस्पताल में मेडिकल करवाया गया। पुलिस ने आरोपित पिता को हिरासत में भी ले लिया है।
पीडि़ता की मानें तो पिता द्वारा रेप किए जाने की शुक्रवार रात की पहली घटना नहीं है। पिछले करीब सालभर से पिता उसकी अस्मत लूट रहा है। वह जब भी उसे मौका मिलता तब बेटी का रेप कर देता था। उल्लेखनीय है कि आरोपी की पिता की उम्र करीब 40 साल है। वह मजदूरी करता है।

अग्रवाल समाज बोला स्मार्ट सिटी को स्मार्ट विधायक की दरकार, डूंगरपुर के सभापति के.के गुप्ता ही हो सकते है स्मार्ट विधायक प्रत्याशी।

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उदयपुर। विधानसभा चुनाव में उदयपुर शहर से एक और भाजपा के दमदार नेता की उम्मीदवारी सामने आई है। डूंगरपुर नगर परिषद् के सभापति के के गुप्ता, हालाँकि के के गुप्ता की दावेदारी अग्रवाल समाज द्वारा रखी गयी है। लेकिन अगर सूत्रों की मानें तो खुद के के गुप्ता भी उदयपुर शहर से भाजपा के प्रत्याशी की दावेदारी मुख्यमंत्री वसुंधराराजे के समक्ष पेश कर चुके है। के के गुप्ता का नाम उदयपुर शहर के दावेदारों की सूचि में आने से भाजपा की अंदरूनी राजनीति में भूचाल सा अगया है। क्यूँ कि डूंगरपुर शहर के विकास कार्यों के चलते के के गुप्ता मेवाड़ ही नहीं बल्कि राजस्थान और भारत में एक बड़ा नाम हो गया है . के के गुप्ता ने डूंगरपुर शहर में नगर परिषद् सभापति रहते विकास के जो कार्य किये है उसकी बदोलत गुप्ता राजस्थान में ही नहीं देश भर में जाने पहचाने जाने लगे है। के. के. गुप्ता ने अपनी कार्यशैली से न सिर्फ डूंगरपुर को चमन किया है, बल्कि पूरे राजस्थान की निकायों के ब्राण्ड एम्बेसेडर भी बने है। इतना ही नहीं उनके कामों को अनुसरण के लिए विदेशों से भी निगम और निकाय वाले डूंगरपुर आ रहे हैं, ऐसे में अग्रवाल समाज चाहता है कि भारतीय जनता पार्टी हर बार एक ही आदमी को टिकिट देती है, इस बार पार्टी को बदलाव करना चाहिए और के.के. गुप्ता को उम्मीदवार बनाना चाहिए है। ताकी शहर की दिशा और दशा में सुधार आसके।
गुरुवार को उदयपुर शहर से अग्रवाल समाज ने अपने प्रत्याशी को मैदान में उतारने की ताल ठोकते हुए अग्रसेन भवन में पत्रकार वार्ता आयोजित जिसमें समाज के पदाधिकारियों ने पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव में अगर अग्रवाल समाज के प्रतिनिधि को विधायक की दावेदारी के लिए टिकिट नहीं मिला तो समाज सभी राजनीतिक दलों का बहिष्कार करेगा। इस मौके उन्होंने कहा कि अग्रवाल समाज वर्षों से राजनीति उपेक्षा का शिकार रहा है, ऐसे में अब समाज डूंगरपुर के सभापति के. के. गुप्ता को अपने प्रत्याशी के रूप में देखना चाह रहा है। इस अवसर पर समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि हम पूरजोर तरीके से पार्टी से टिकिट देने की मांग कर रहे है और अगर उदयपुर से गुप्ता को टिकिट नही मिलता है तो समाज मेवाड़ में अलग से अपना प्रत्याशी उतार सकता है। इस मौके पर कैलाशचंद्र अग्रवाल, मदन लाल अग्रवाल, रामचन्द्र अग्रवाल, बृजमोहन अग्रवाल ,ओमप्रकाश अग्रवाल सहित कई पदाधिकारी और समाजजन मौजूद रहे।

DELEGATION FROM VIGYAN SAMITI VISITED HINDUSTAN ZINC

A delegation of 24 team members from Vigyan Samiti, Udaipur visited Hindustan Zinc’s Chanderiya Smelting Complex. The delegation visited Smelter Plant to understand the process of Zinc Metallurgy and also witnessed various community service initiatives being implemented by Hindustan Zinc in nearby villages.

Chanderiya utilizes a combination of best proven technologies and innovation to continuously improve environmental and operational performance. The delegation comprising retired Bureaucrats, Engineers and Scientists also had 5 female members who were briefed about various sustainability initiatives taken up by Hindustan Zinc at its business locations. The delegation visited Sakhi Tailoring Centre at Putholi village and interacted with Sakhi rural women to know more about the initiative and their journey of empowerment. They were also briefed about various community development programs – Khushi, Shiksha Sambal & Samadhan through a stall exhibition.

Chanderiya Smelting Complex, located in the district of Chittorgarh, is the world’s second largest single location integrated Zinc smelting complex with Zinc production capacity of 535,000 tonne and Lead production capacity of 85,000 tonnes per annum. The location also has captive power plants of 234 MW.

Chanderiya Lead-Zinc Smelter complex is certified for Integrated Management System comprising of the Quality Management System (ISO 9001:2008), Environmental Management System (ISO 14001:2004), Occupational Health and Safety Management System (OHSAS 18001:2007). It is also certified by QCFI for 5-S workplace management system.

The Chanderiya Smelting complex has been bestowed many awards like Green Manufacturing Excellence – Challenger Award in Sustainable Development by Frost & Sullivan; Hydro 2 smelter was awarded Indian Manufacturing Excellence Award Gold Category by Frost & Sullivan; IMC Ramakrishna Bajaj National Quality Award for Performance Excellence; International Green Apple Award 2012 from the Green Organization London for gainful utilization of its waste.

भारत, दुनिया के 3 प्रमुख ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं में से एक होगा: मुकेश अंबानी

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Jio’s fibre offering to place India among top 3 nations in fixed broadband: Ambani

Udaipur Post. भारत को दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल डेटा उपभोक्ता देश बनाने के बाद, Reliance Industries Limited के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने गुरुवार को कहा कि जियो की फाइबर आधारित ब्रॉडबैंड पेशकश आने वाले समय में देश को दुनिया के तीन प्रमुख देशों में शामिल करवाएगी, जबकि अभी इस सूची में भारत की रैंकिंग 135 है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत मोबाइल ब्रॉडबैंड प्रवेश में 155वां रैंक से दो साल से भी कम समय में दुनिया में मोबाइल डेटा खपत में नंबर एक राष्ट्र बन गया है। देश में सस्ती दरों और कनेक्टिविटी का एक अद्वितीय संयोजन बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि यह 2 जी / 3 जी से 4 जी तक दुनिया में कहीं भी सबसे तेजी से आया बदलाव है। 2020 तक, मेरा मानना है कि भारत पूरी तरह से 4जी देश होगा और हम अन्यों से आगे चलते हुए 5जी के अपनाने के लिए पूरी तरह से तैयार होंगे।
भारत में हर फोन एक 4 जी सक्षम फोन होगा और प्रत्येक ग्राहक को 4 जी कनेक्टिविटी तक पहुंच होगी। उन्होंने कहा कि Jio में, हम हर किसी और सबकुछ को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं, हर जगह, हमेशा उच्चतम गुणवत्ता और सबसे किफायती मूल्य के साथ और ये सभी सेवाएं सबसे सस्ती दरों पर प्रदान की जाएंगी।
Reliance Jio, जिसने साल 2016 में बेहद सस्ते डेटा के साथ बंडल किए गए मुफ्त कॉल और एसएमएस के साथ दूरसंचार उद्योग में एक बड़े बदलाव की शुरुआत की, अब घरों और ऑफिस में अपनी महत्वाकांक्षी अल्ट्रा-हाई स्पीड फाइबर-आधारित ब्रॉडबैंड सेवाओं को प्रदान करना शुरू कर दिया है।
इंडियन मोबाइल कांग्रेस को संबोधित करते हुए मुकेश डी.अंबानी ने कहा कि ‘‘पहले दिन से ही, Jio Giga fiber पूरे फिक्स्ड-मोबाइल कन्वर्जेंस की पेशकश करेगा जहां भारतीय मोबाइल और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड नेटवर्क के बीच बाधारहित तौर पर ट्रेवल करेंगे, वहीं सफर के दौरान वे 5G और घर के अंदर वाई-फाई का उपयोग कर सकेंगे।’’
उच्चतम गुणवत्ता वाले नेटवर्क के साथ हर परिसर को जोड़ने का लक्ष्य रखते हुए उन्होंने कहा कि इस कदम से मोबाइल डेटा खपत की सफलता को फिक्सड ब्रॉडबैंड में दोहराने का मौका भी मिलेगा।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के चेयरमैन ने कहा कि ‘‘मेरा मानना है कि भारत 135वें रैंक से आगे बढ़ेगा और फिक्सड ब्रॉडबैंड में दुनिया के प्रमुख तीन देशों में से एक है। भारत की ये सफलता दुनिया को आश्चर्यचकित करेगी।’’
हालांकि, उन्होंने डेटा उपयोग पर सावधानी बरतने का सुझाव भी दिया।
उन्होंने कहा कि ‘‘हमें सावधान रहना होगा कि डेटा इस नई दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है। और भारत और भारतीय एक विशाल मात्रा में डेटा उत्पन्न करेंगे। यह महत्वपूर्ण है कि हम इस सुरक्षा संसाधन को भारत और भारतीयों के लाभ के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपायों के साथ उपयोग करें।’’

उन्होंने कहा कि चौथी औद्योगिक क्रांति प्रधान मंत्री के 150 मिलियन भारतीय किसानों की आय को दोगुना करने का वादा साकार कर सकती है, आयुषमान भारत योजना का 500 मिलियन लोगों को स्वास्थ्य सेवा लाने का वादा वास्तविकता में बदल सकती है और भारतीय स्कूलों और कॉलेजों में 200 मिलियन छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकती है। इसके साथ ही ये डिजिटली कनेक्टड और एआई-पॉवर्ड मार्केटप्लेसेज में छोटे दुकानदारों और छोटे उद्यमों के साथ बड़ी संख्या में नए रोजगार पैदा कर सकती है।
उन्होंने कहा कि ‘‘भारत विश्व इतिहास में लोगों के जीवन में सबसे बड़ा डिजिटल परिवर्तन लाने में सफल होगा।’’
उन्होंने कहा कि ‘‘विश्व बैंक की एक रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि 2021 तक भारत में गरीबी के तहत रहने वाली 3 प्रतिशत से कम आबादी होगी। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, अकेले पिछले दशक में 271 मिलियन लोगों को गरीबी रेखा के नीचे से निकाला गया है।’’

भारत विशेष रूप से दूरसंचार, आईटी और डिजिटल क्षेत्र में उद्यमियों के योगदान सहित कई कारकों के कारण दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ रही बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। उन्होंने कहा कि पहले कभी भारत ने उद्यमशीलता के इस तरह के जोरदार और बड़े उभार को नहीं देखा है।

अरावली की 31 पहाड़ियां ग़ायब, क्या लोग हनुमान हो गए हैं जो पहाड़ियां ले जा रहे हैं: कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के अरावली क्षेत्र में 31 पहाड़ियों के ‘गायब’ हो जाने पर मंगलवार को आश्चर्य व्यक्त करते हुए राज्य सरकार को 48 घंटे के भीतर 115.34 हेक्टेयर क्षेत्र में गैरकानूनी खनन बंद करने का आदेश दिया.

शीर्ष अदालत ने कहा कि यद्यपि राजस्थान को अरावली में खनन गतिविधियों से करीब पांच हजार करोड़ रुपये की रॉयल्टी मिलती है लेकिन वह दिल्ली में रहने वाले लाखों लोगों की जिंदगी को ख़तरे में नहीं डाल सकता क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर बढ़ने की एक वजह इन पहाड़ियों का गायब होना भी हो सकता है.

जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने राजस्थान सरकार द्वारा पेश स्थित रिपोर्ट का ज़िक्र किया और कहा कि इससे संकेत मिलता है कि राज्य में अरावली रेंज में 115.34 हेक्टेयर इलाके में ग़ैरकानूनी खनन की गतिविधियां चल रही हैं.

पीठ ने केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट का भी ज़िक्र किया जिसमें कहा गया है कि भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा लिए गए 128 नमूनों में से 31 पहाड़ियां गायब हो गई हैं.

जस्टिस लोकुर ने राजस्थान सरकार के वकील से कहा, ‘31 पहाड़ियां गायब हो गई हैं. यदि देश में पहाड़ियां गायब होंगी तो फिर क्या होगा? क्या लोग ‘हनुमान’ हो गए हैं जो पहाड़ियां ले जा रहे हैं?’

पीठ ने कहा, ‘राजस्थान में 15-20 प्रतिशत पहाड़ियां गायब हो गई हैं. यह आपके यहां की सच्चाई है. आप किसे अंधेरे में रखना चाहते हैं. राज्य अरावली पहाड़ियों को ग़ैरकानूनी खनन से बचाने में विफल हो गया है.’

पीठ ने 48 घंटे के भीतर 115.34 हेक्टेयर क्षेत्र में ग़ैरकानूनी खनन रोकने का आदेश देते हुए राज्य के मुख्य सचिव को इस पर अमल के बारे में हलफ़नामा दाख़िल करने का निर्देश दिया है. न्यायालय इस मामले में अब 29 अक्टूबर को आगे विचार करेगा.

पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि राज्य सरकार ने इस मामले को बहुत ही हल्के में लिया है और शीर्ष अदालत उसकी स्थिति रिपोर्ट से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है क्योंकि इसमें से अधिकांश वन सर्वेक्षण विभाग की ‘तथाकथित अक्षमता’ के बारे में है.

इस मामले में सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य सरकार के वकील से जानना चाहा कि उसने अरावली इलाके में ग़ैरकानूनी खनन की गतिविधियां रोकने के लिए क्या क़दम उठाए. इस पर वकील ने कहा कि हमने कारण बताओ नोटिस जारी करने के अलावा इस संबंध में कई प्राथमिकी भी दर्ज की हैं.

पीठ ने पहाड़ियों के महत्व को इंगित करते हुए राज्य सरकार के वकील से कहा, ‘पहाड़ियों का सृजन ईश्वर ने किया है. कुछ तो वजहें होंगी जो ईश्वर ने ऐसा किया. ये अवरोधक की भूमिका निभाती हैं. यदि आप सभी पहाड़ियों को हटाने लगेंगे तो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के आसपास के इलाकों के विभिन्न हिस्सों से प्रदूषण दिल्ली आएगा.’

राजस्थान सरकार के वकील ने कहा कि उसके यहां के सभी विभाग ग़ैरकानूनी खनन रोकने के लिए अपना-अपना काम कर रहे हैं. इस पर, पीठ ने कहा कि किस तरह का काम कर रहे हैं? दिल्ली को पहले ही नुकसान पहुंचाया जा चुका है. आपने केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति के इस तथ्य का खंडन नहीं किया है कि 31 पहाड़ियां गायब हो गयी हैं.

अधिकारप्राप्त समिति के वकील ने पीठ से अनुरोध किया कि अरावली क्षेत्र में ग़ैरकानूनी खनन की गतिविधियां रोकने के लिए कठोर से कठोर क़दम उठाने चाहिए क्योंकि राज्य सरकार उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करेगी.

शीर्ष अदालत दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण से उत्पन्न स्थिति से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी.