ठग्स ऑफ हिंदुस्तान, साल की सबसे बड़ी फिल्म “ठग” नही पाई – इदरीस खत्री

फिल्म समीक्षक – इदरीस खत्री 
समय :- 164 मिनट
अदाकार :- अमिताभ, आमिर, कैथरीना, फातिमा सना, जैकी श्रॉफ, रोनित रॉय, शशांक अरोरा, ल्योड़ ओवेन व अन्य
आधारित :- कन्फेशन ऑफ ठग, फिलीप मेडोस टेलर के उपन्यास (1839) पर, (यह चर्चागत विषय-इस पर अगली समीक्षा)
निर्देशक व पटकथा:- विजय कृष्ण आचार्य उर्फ विक्टर
संगीत:- अजय अतुल
गीत:- अमिताभ भट्टाचार्य
निर्माता:-YRF-आदित्य चोपड़ा
भाषा:- हिंदी, तमिल, तेलगू
छायांकन:- मानुष नंदन
इफेक्ट:- विशाल आनंद, लुइस ब्रेड्स
वेषभूषा:- रविन्द्र पाटिल
सेट:- रचना मन्डल
स्क्रीन्स:- 5300 भारत, 1500 ओवरसीज़
बजट:- 250 करोड़₹(160+90 करोड़)
दोस्तो फ़िल्म के कहानी से पहले फ़िल्म पर चर्चा कर लेते है सीने प्रेमियो का देश के महानायक अमिताभ बच्चन और मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान को साथ मे पर्दे पर देखना निसन्देह स्वप्न पूरा होने जैसा ही होगा, आमिर ने फ़िल्म में से 70%आमदनी बतौर मेहनताना मांगी थी जो कि Y RF यशराज फ़िल्म ने मान ली थी,इस हिसाब से आमिर के खाते में जाएगे 700 करोड़ ₹,
 फ़िल्म 5300 स्क्रीन्स पर भारत मे जिसमे 4700 स्क्रीन्स में हिंदी, 300+300 में तमिल तेलगू में प्रदर्शित होगी,
फ़िल्म का पहले नाम ठग था, जो कि बाद में ठग्स ऑफ हिंदुस्तान किया गया,
दीवाली की छुट्टियों के कारण 4 दिन का सप्ताहन्त निश्चित ही 100 करोड़ पार करने की उम्मीद की जा सकती है
आमिर की फ़िल्म दंगल ने चायना में 2100 करोड़ का व्यापार किया था वहां पर 85000 सिनेमा घर है
भारत मे लगभग 25000 सिनेमा सिंगल ओर मल्टीप्लेक्स मिला कर
5300 स्क्रीन्स पर प्रदर्शन हैप्पी न्यू ईयर का रिकॉर्ड 44 करोड़ पहले दिन का टूट सकता है,,,
विक्टर मूल लेखक रहे है इसके पहले धूम 3 निर्देशित कर चुके है, बतौर लेखक गुरू, धूम सीरीज, रॉ वन संवाद लिख चुके है,, बतौर निर्देशन धूम 3, टशन के बाद तीसरी फिल्म है,
कहानी
बात शुरू होती है 1735 ई से, सईद बैग मिर्ज़ा (रोनित रॉय) छोटी सी रियासत रौंकपूर के राजा है,
औऱ ईस्ट इंडिया कम्पनी छल,कपट, लोभ यानी एन केन प्रकारेण पूरे हिन्दोस्तान पर कब्ज़ा करना चाहती है,
यहां भी ब्रिटिश जनरल क्लाइव (लायड ओवन) पहुच जाते है और राजा, पत्नी, बेटे को जान से मार देते है, राजा की एक बेटी है ज़फिरा जो कि बच्ची है उसे भी मारने की कोशिश की जाती है लेकिन राजा का सिपहसालार खुदाबख्श(अमिताभ) उसे बचा कर निकाल कर ले जाता है|ज़फिरा को युद्ध कौशल सिखाई जाती है और वह अपने माँ, पिता, भाई की मौत का बदला लिए बड़ी होती है, 11 साल बीत जाते है,अब खुदाबक्ष औऱ ज़फिरा(फातमा सना) के साथ एक आज़ाद नामक फ़ौज बना लेते है, अंग्रेजो से लड़ने के लिए
इधर फिरंगी मल्लाह(आमिर खान) जिसकी फितरत में धोखा ओर फरेब है, ठगी करके जीवन यापन करता है,
एक बार अंग्रेज उसे धोखा दे देते है और मोत के घाट उतार रहे होते है कि आज़ाद फ़ौज उन के जहाज पर आक्रमण कर देते है उसमें फिरँगी मल्लाह को गोली पड़ जाती है और दुर्घटना वश पड़ी गोली आज़ाद फ़ौज में फिरंगी मल्लाह खुदाबक्ष का चहेता हो जाता है, इलाज के लिए आज़ाद फ़ौज उसे अपने खुफिया ठिकाने पर ले जाती है, फिरंगी अपनी फितरत के चलते अलाबक्ष आज़ाद को पकड़ने के लिए फिरंगी से सौदा पटा लेते है,
फिरंगी इस काम के लिए जेल में बंद एक साथी सनीचर (जीशान अय्यूबी) को साथ ले लेता है, औऱ मिज़ापुर के राजा (शरद सक्सेना) ईस्ट इंडिया से लड़ने के लिए चोरी छिपे आज़ाद फ़ौज़ को हथियार देता है तो इसमें अलाबक्ष  पकड़ा जाते है, फिरंगी को ज़फिरा की सुरक्षा का वादा देकर, अब ईस्ट इंडिया कम्पनी आज़ाद फ़ौज़ को पकड़ना चाहती है फिर से फिरंगी के साथ जाल फैलाया जाता है क्योकि खुदाबख्श ज़फिरा की जिम्मेदारी फिरंगी पर डाल देते है तो फिरंगी पूरी आज़ाद फ़ौज़ को लेकर दशहरे के दिन हमले की योजना बनाते है जिसमे मदद करती है नचनिया सुरैया जान(कैटरीना)लेकिन कहानी में आता है ट्विस्ट
इन सब ट्विस्ट ओर टर्न के लिए फ़िल्म देखना पड़ेगी,
फ़िल्म भव्य बजट, भव्य कम्प्यूटर जनित तकनीक, युद्ध दृश्य, VFX, विज्वल इफेक्ट से भरी पड़ी है, साथ ही कुछ ड्रोन दृश्य भी अच्छे है लेकिन किसी फिल्म की रीढ़ की हड्डी होती है कहानी, जो कि 80 के दशक की लगती है,
बस यही फ़िल्म औऱ निर्देशक गच्चा खा गए,
नावेल कन्फेशन ऑफ ठग को इस कदर तोड़ा मरोड़ा गया है कि फ़िल्म में कब देशभक्ति जाग जाती है, कब गायब हो जाती है समझ से परे यानी इतिहास से भरपूर मखोल, देश के भूगोल से भी यही किया गया है क्योंकि राजस्थानी रियासत में समुंद्र किनारा ???
वेशभूषा पर काम नही किया गया,
गांनो में वश्मल्ले ही आकर्षित करता है शेष काम चलाऊ ही लगे है, कहि कहि पर पार्श्व संगीत दिल को छूता है लेकिन हर जगह नही|
अभिनाभ की गांनो की शायरी ठीक ठाक ही है लेकिन उचित संगीत के बिना गाने मृत हो जाते है,
कैथरीना के लिए ज्यादा कोई काम नही था उससे ज्यादा काम तो खुदाबक्ष की बाज से लिया गया है
भव्य सेट, भव्य फिल्मांकन फ़िल्म की सफलता की ग्यारंटी नही हो सकते,
जब तक अमिताभ फ़िल्म में दिखते है फ़िल्म दौड़ती है शेष समय निर्देशक फ़िल्म से बांध नही पाए
फ़िल्म में जो भी मोड़ आते है दर्शक पहले ही समझ लेते है,
एक बड़ा सवाल ठग के कन्फेशन पर आधारित किताब को देशभक्ति से जोड़ कर भी मखोल उड़ाना ही माना जाएगा????
ओर ईस्ट इंडिया कम्पनी के एक जनरल को मार दिया जाए तो ईस्ट इंडिया कम्पनी दोबारा प्रयास न करेगी कब्जे का यह भी हास्यास्पद ही लगता है
खेर फ़िल्म ने निराश किया
अभिनय में आमिर मंजे हुवे लगते है लेकिन पाइरेट्स के जेक सपेरों से कोसो पीछे लगते है, अमिताभ जो करदे वही अभिनय होता है, फातिमा सना ओर कैटरीना को अभिनय में बहुत सीखना बाकी है, सनीचर की भूमिका में जीशान अय्यूबी अभिनय डिप्लोमा धारी धरती पकड़ अभिनेता है जो कि लगे भी शानदार के साथ अभिनय भी जानदार ओर जीवन्त लगा है,
फ़िल्म देखते समय 80 के दशक की फिल्मों की याद आती है वोभी 2K18 में,जो कि फ़िल्म के लिए ओर निर्देशक विक्टर के लिए हानिकारक है, फ़िल्म टिपिकल बॉलीवुड मसाला बनाने के चक्कर मे देशभक्ति से भी बाहर हो गए निर्देशक
दीपावली के सप्ताहन्त से फ़िल्म का बजट निकलना आसान होगा
अमिताभ और आमिर को पर्दे पर निहारना फ़िल्म की लागत और कमाई निकाल सकता है,,
फ़िल्म को 2.5 स्टार्स
क्योकि बड़ी उम्मीदें बड़ी निराशा भी लाती है यही हुआ इस फ़िल्म के साथ भी,,
इदरीस खत्री 

फिल्म समीक्षक – इदरीस खत्री

क्या वसुंधरा राजे और अमित शाह में एक बार फिर ठन गई है?

vasundhara and amit shah

राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष होने के मामले में वसुंधरा राजे के हठ के सामने सरेंडर कर चुके भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह टिकट वितरण के मुद्दे पर उनसे दो-दो हाथ करने के मूड में हैं.

शाह ने अपने स्तर पर करवाए सर्वे और संघ व विस्तारकों की ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर आधे से ज़्यादा विधायकों के टिकट पर तलवार लटका दी है, लेकिन वसुंधरा 20 फीसदी से ज़्यादा विधायकों का टिकट काटने को तैयार नहीं हैं.

गौरतलब है कि राजे बीते 31 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवारों के नाम तय करने के लिए अमित शाह से मिली थीं. इस दौरान पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी और पंचायतीराज मंत्री राजेंद्र राठौड़ भी उनके साथ थे. सूत्रों के अनुसार वे जो सूची अपने साथ ले गई थीं उसमें 90 नाम थे.

इस सूची को राजे ने जयपुर और रणकपुर में हुई रायशुमारी के बाद अंतिम रूप दिया था.

गौरतलब है कि प्रदेश भाजपा की ओर से 12 हज़ार कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों से पार्टी प्रत्याशी के बारे में राय पूछी गई थी. बताया जा रहा है कि इसके आधार पर 90 सीटों पर सिंगल नाम का पैनल तैयार किया गया. वसुंधरा को उम्मीद थी कि शाह जाते ही इस सूची पर मुहर लगा देंगे, लेकिन हुआ इसका उल्टा.

दरअसल, सबसे पहले श्रीगंगानगर ज़िले की सीटों पर चर्चा शुरू हुई. यहां की एक सीट पर वसुंधरा मौजूदा उम्रदराज़ विधायक की जगह उनके बेटे का नाम तय कर ले गई थीं.

जानकारी के मुताबिक इसे देखते ही अमित शाह की त्योरियां चढ़ गईं. उन्होंने कहा कि जब विधायक जीतने की स्थिति में नहीं है तो उनका बेटा कैसे जीत दर्ज करेगा.

भाजपा से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने अपनी ओर से कराए गए सर्वे और संघ एवं विस्तारकों की ग्राउंड रिपोर्ट का हवाला देते हुए कड़े लहज़े में कहा कि पार्टी उसे ही टिकट देगी जो जीतने की स्थिति में होगा. सिर्फ इस आधार पर किसी को टिकट नहीं दिया जाएगा कि वो मंत्री, विधायक, बड़ा नेता या किसी का चहेता है. चुनाव राजस्थान में फिर से सरकार बनाने के लिए लड़ा जा रहा है न कि किसी पर मेहरबानी करने के लिए.

शाह के तल्ख़ तेवर से सन्न वसुंधरा ने तर्क दिया कि जो लोग पार्टी और उनसे लंबे समय से जुड़े हुए हैं उनकी अनदेखी करना ठीक नहीं होगा. इन लोगों को साथ लेकर नहीं चलेंगे तो चुनाव में नुकसान होगा, लेकिन राजे की इस दलील से अमित शाह सहमत नहीं हुए.

सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने प्रदेश नेतृत्व को सभी सीटों पर कम से कम तीन दावेदारों का पैनल बनाकर लाने के लिए कहा है. साथ ही हर सीट के जातिगत आंकड़े, पांच साल में हुए विकास कार्य, 2013 के विधानसभा चुनाव का वोटिंग पैटर्न, वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक और जातिगत स्थिति का विस्तृत ब्योरा तैयार करने के लिए कहा है.

भाजपा अध्यक्ष ने रिपोर्ट में टिकट के दावेदारों की सूची के साथ मौजूदा विधायक का टिकट काटने की स्थिति में बागी होने से रोकने की योजना को भी शामिल करने के लिए कहा है. उनके इस निर्देश का पालन करने के लिए आननफानन प्रदेश भाजपा के 15 नेताओं फीडबैक लेने ज़िला मुख्यालयों पर भेजा गया.

गुलाब चंद कटारिया, राजेंद्र राठौड़, अविनाश राय खन्ना, वी. सतीश, चंद्रशेखर, ओमप्रकाश माथुर, अर्जुनराम मेघवाल, गजेंद्र सिंह शेखावत, नारायण पंचारिया, ओम बिड़ला, राजेंद्र गहलोत, हरिओम सिंह, सीपी जोशी, किरण माहेश्वरी व भजन लाल ने स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का मन टटोल जो नाम तय किए हैं उन्हें देखकर भी वसुंधरा की पेशानी पर पसीना आ गया है.

सूत्रों के मुताबिक छह मंत्रियों सहित कुल 60 विधायकों की रिपोर्ट वसुंधरा की पसंद से उल्टी आई है. अभी तो इस सूची को अमित शाह की पास मौजूद रिपोर्ट से मिलान होना बाकी है. बताया जा रहा है कि यदि राजस्थान में टिकट वितरण का ‘शाह फॉर्मूला’ लागू हुआ तो आधे से ज़्यादा विधायकों के टिकट कटना तय है.

प्रदेश भाजपा में चल रही चर्चा के मुताबिक अमित शाह, संघ और विस्तारकों के सर्वे में आधे से ज़्यादा विधायकों के ख़िलाफ़ रिपोर्ट आई है. इनमें कई ऐसे बड़े नाम भी शामिल हैं. इनमें सरकार के मंत्री और वसुंधरा के चहेते बड़े नेता भी हैं. राजे किसी भी सूरत में अपनों के टिकट पर कैंची नहीं चलने देंगी.

इस स्थिति में वसुंधरा राजे और अमित शाह के बीच तनातनी होना निश्चित है. यदि ऐसा होता है तो यह दूसरा मौका होगा जब इन दोनों के बीच सियासी भिड़ंत होगी. इससे पहले प्रदेशाध्यक्ष के मामले में वसुंधरा के शाह आमने-सामने हुए थे. तब राजे के हठ के सामने भाजपा अध्यक्ष को सरेंडर करना पड़ा था.

गौरतलब है कि इसी साल फरवरी में दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में भाजपा की क़रारी हार के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने वसुंधरा के ‘यस मैन’ माने जाने वाले अशोक परनामी से 16 अप्रैल को इस्तीफ़ा लिया था. अमित शाह इस ओहदे पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को बिठाना चाहते थे.

नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी शेखावत को प्रदेशाध्यक्ष बनाना चाहते थे, लेकिन वुसंधरा राजे ने इस पर सहमति व्यक्त नहीं की. पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने राजे को राज़ी करने के लिए सभी जतन किए, लेकिन मुख्यमंत्री टस से मस नहीं हुईं.

आख़िरकार मोदी-शाह की पसंद पर वसुंधरा का वीटो भारी पड़ा और मदन लाल सैनी प्रदेशाध्यक्ष बने.

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री और अमित शाह के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला मौका था जब इन दोनों को पार्टी के किसी क्षेत्रीय क्षत्रप ने न केवल सीधी चुनौती दी, बल्कि घुटने टेकने पर भी मजबूर कर दिया. जबकि माना यह जाता है कि मोदी-शाह की मर्ज़ी के बिना भाजपा में पत्ता भी नहीं हिलता.

अमित शाह को क़रीब से जानने वाले यह अक्सर कहते हैं कि वे सीधी चुनौती देने वालों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करते. उनके एक क़रीबी नेता कहते हैं, ‘अमित शाह माफ करने वाले शख्स नहीं हैं. वे वसुंधरा से गजेंद्र सिंह शेखावत को अध्यक्ष नहीं बनने देने का बदला जरूर लेंगे. टिकट उनकी मर्जी से बंटेंगे न कि मुख्यमंत्री के कहने से.’

राजस्थान के चुनावों में अहम भूमिका निभा रहे ये नेता आगे कहते हैं, ‘इस बार के चुनाव में वसुंधरा राजे पार्टी का चेहरा जरूर हैं, लेकिन उनके अकेले के हाथ में कुछ भी नहीं है. अमित शाह ने अविनाश राय खन्ना, वी. सतीश, चंद्रशेखर, मदन लाल सैनी, प्रकाश जावड़ेकर और गजेंद्र सिंह शेखावत के जरिये ऐसा चक्रव्यूह बनाया है कि वसुंधरा को हाथ खड़े करने ही पड़ेंगे.’

उल्लेखनीय है कि अविनाश राय खन्ना प्रदेश प्रभारी, वी. सतीश सह प्रभारी, चंद्रशेखर संगठन महामंत्री और मदन लाल सैनी प्रदेशाध्यक्ष की हैसियत से पहले से ही राजस्थान में सक्रिय हैं जबकि प्रकाश जावड़ेकर को चुनाव प्रभारी और गजेंद्र सिंह शेखावत को चुनाव प्रबंध समिति का संयोजक बनाया गया है.

भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक पार्टी उपाध्यक्ष ओमप्रकाश माथुर इन सबकी धुरी हैं. यह पूरी टीम जत्था सीधे अमित शाह को रिपोर्ट करता है. राजस्थान भाजपा में माथुर की धमक का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वसुंधरा 90 नामों की जिस सूची को अमित शाह के पास लेकर गई थीं, उसे दिखाने उन्हें माथुर के घर जाना पड़ा.

ऐसे में वसुंधरा के लिए टिकट वितरण में अपनी मर्जी चलाना आसान नहीं होगा. इस तनातनी में वसुंधरा के सामने बड़ी समस्या अकेले पड़ना है. टिकट वितरण में अमित शाह के सुर में सुर मिलाने के लिए नेताओं की लंबी फेहरिस्त है, वहीं राजे के कहे का समर्थन करने वाला कोई भी नहीं है.

हालांकि राजे खेमे के नेताओं को अभी भी भरोसा है कि टिकटों का बंटवारा मुख्यमंत्री की मर्जी से ही होगा. उनके एक करीबी नेता आॅफ द रिकॉर्ड बातचीत में कहते हैं, ‘मैडम ने न कभी किसी के सामने सरेंडर किया है और न अब करेंगी. कोई चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन टिकट वितरण में आख़िरकार चलेगी उनकी ही.’

वे आगे कहते हैं, ‘मैडम को यह अंदेशा पहले से था कि इस बार उनके क़रीबी लोगों का टिकट काटने की कोशिश होगी. उन्हें इसकी भनक तभी लग गई थी जब अमित शाह ने मुख्यमंत्री की ग़ैरमौजूदगी में कार्यक्रम किए. कोई कितना भी ज़ोर लगा ले मगर टिकट उसे ही मिलेगा जिसे मैडम चाहेंगी. जब वे ज़िद पर अड़ जाती हैं तो किसी की नहीं सुनती.’

यानी टिकट वितरण में अमित शाह और वसुंधरा राजे के बीच तनातनी होना तय है. यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सियासी लड़ाई कितनी लंबी चलेगी और इसमें विजेता कौन रहेगा. पिछली बार की तहर वसुंधरा ही भारी पड़ेंगी या इस बार अमित शाह बाज़ी मार लेंगे.

मुकेश अम्बानी बेटी की शादी की तैयारी का जायज़ा लेने आये उदयपुर – शादी में चुनिंदा चार पांच सुपर सितारे ही है मेहमान, बाकी सुपर सितारे होंगे सिर्फ परफोर्मिंग आर्टिस्ट।

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उदयपुर। देश के सबसे बड़े और सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अम्बानी की बेटी की शादी के प्री वेडिंग समारोह ९ व १० दिसंबर को उदयपुर में होने जा रहे है। उदयपुर में होने वाले समारोह की तैयारियां सीटी पैलेस से लगा कर होटलों तक में जोरों पर चल रही है, इन्ही तैयारियों का जायज़ा लेने के लिए मुकेश अम्बानी उदयपुर आये हुए है।
सूत्रों की माने तो उदयपुर में होने वाले समारोह में देश और विदेश के ख़ास और नामी गिरामी लोग मेहमानों की सूचि में शामिल है। इस हाईप्रोफाइल वेडिंग में बॉलीवुड हॉलीवुड से नामी गिरामी सितारों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि बॉलीवुड से अमिताभ बच्चन सहित कुछ चार पांच गिने चुने बड़े कलाकार ही समारोह में बतौर मेहमान शामिल होंगे। बाकी के जितने भी नामी गिरामी बॉलीवुड के फ़िल्मी सुपर सितारे है वह सभी सिर्फ परफोर्मिंग आर्टिस्ट के तौर पर आयेगें जिन्हे मेहमानों के मनोरंजन के तौर पर सशुल्क बुलाया जा रहा है।
शादी का फंक्शन के लिए शहर के बड़े सितारा होटलों की बुकिंग और शादी के समय उनकी साज सज्जा की तैयारियां चल रही है। सूत्रों की माने तो अमरीका की टॉप पॉप सिंगर बियोंस की भी परफॉर्मेंस की बात चल रही है। शादी की तैयारियों को लेकर पूर्व में भी मुकेश अंबानी और नीता अंबानी उदयपुर में है और खुद सभी होटलों और पार्टी की जगह को देख निर्देश दे रहे है । रिलायंस कंपनी की टीमें और इवेंट प्लानर्स बड़े होटलों में समारोह की तैयारियों को लेकर जुटे हैं।
अम्बानी पहले नाथद्वारा पहुचे दिया न्योता :
रिलायंस ग्रुप के मुकेश अंबानी व उनकी पत्नी नीता एवं मां कोकिला अंबानी शुक्रवार शाम को मुंबई से विशेष विमान से डबोक एयरपोर्ट पहुंचे, जहां से कार से यहां पहुंच कर प्रभु श्रीनाथजी के भोग आरती की झांकी के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने ठाकुरजी के सन्मुख पुत्री ईशा की शादी का कार्ड भी रखा। उनके साथ उनके समधी देश के ख्यात उद्यमी पीरामल इंड्रस्ट्रीज के मालिक अजय पीरामल एवं उनकी पत्नी स्वाति पीरामल भी थे। अंबानी ने दर्शन के बाद तिलकायत राकेश महाराज से आशीर्वाद लिया। अम्बानी तथा पीरामल परिवार के सदस्यों का उपरना व रजाई ओढ़ा प्रसाद प्रदान कर समाधान किया गया। दर्शन के बाद मुकेश पुन: उदयपुर प्रस्थान कर गए, जहां दो दिन रुकने का कार्यक्रम है। इस दौरान वे पुत्री की शादी की तैयारियों का जायजा लें रहे है ।
मुकेश, नीता एवं कोकिला बेन ने तिलकायत को परिवार सहित पहले ईशा की 12 दिसंबर को होने वाली शादी में निमंत्रित किया व उसके बाद आगामी 9 मार्च को पुत्र आकाश की शादी में भी परिवार सहित आने का निमंत्रण दिया। उल्लेखनीय है कि मुकेश अंबानी की पुत्री की शादी 12 दिसंबर को मुंबई में है। इसको लेकर 8 दिसंबर को अंबानी परिवार के सभी सदस्य मुंबई से यहां पहुंचेंगे एवं 9 व 10 दिसंबर को दो दिवसीय कार्यक्रम उदयपुर में होंगे।

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पांच दिन का दीपोत्सव भाई दूज के साथ संम्पन – दीपावली पर रोशनी से नहाया शहर।

उदयपुर। सुख-समृद्धि व वैभव का पांच दिवसीय दीपोत्सव धनतेरस से शुरू होकर शुक्रवार को भाई दूज के साथ संम्पन्न हुआ। दीपावली पर शहर रोशनी में नहाया। हर घर-प्रतिष्ठान, बाजार, चौक-चौराहा व सरकारी भवन पर आकर्षक सजावट की गई। पटाखों और मिठाइयों के साथ जोर शोर के साथ मनाई गयी दिवाली। पटाखों के लिए कोर्ट के चाहे कैसे भी आदेश हो लेकिन दीपावली की खुशियों के आगे सब कुछ फीका रहा और देर रात तक पटाखे छुटते रहे। बच्चों और बड़ों ने खूब पटाखे छुटाए , हालाँकि पटाखों पर पड़ी महगाई की मार ने कुछ कमी जरूर की। लोगों ने शुभ मुहूर्त पर लक्ष्मी पूजन कर खुशहाली की कामना की। पूरी रात आतिशबाजी का दौर जारी रहा।
दीपावली को सुबह से शहर में विशेष चहल-पहल रही। लोगों ने माता लक्ष्मी की आराधना कर जहां सुख- समृद्धि और वैभव की कामना की, वहीं शाम को घर- घर में दीप जलाकर प्रभु श्री राम के वनवास से लौटने की खुशियां मनाई। शाहर के श्री महालक्ष्मी मंदिर में सुबह से श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने माता लक्ष्मी के दर्शन कर सुख समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर शहर के विशिष्ट व्यक्तियों ने भी के परिवार सहित माताजी के दर्शन किए। इनमें गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी, मेवाड़ पूर्व राजघराने की अरविंद सिंह मेवाड़, कांग्रेस की डॉक्टर गिरिजा व्यास, त्रिलोक पूर्बिया सहित अन्य लोग शामिल थे। मंदिर पर श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ रही।श्रद्धालुओं ने लंबी कतारों में लगकर महालक्ष्मी जी के दर्शन किए। श्रद्धालुओं के लिए दीपोत्सव समिति की ओर से भटियानी चौहट्टा में विशेष सजावट की गई। इसके साथ ही दीपावली पर दर्शन करने आने वाले लोगों के लिए भजन संध्या का आयोजन किया गया।भक्तों ने कतार में लगे हुए भजनों का आनंद उठाया। इधर शाम होने के साथ ही घर-घर में दीपक जलाकर अमावस्या की अंधकार को मिटाया गया। पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह उमंग और श्रद्धा व्याप्त थी। बच्चों, बड़ों और बुजुर्गों ने आतिशबाजी कर प्रभु श्री राम के वनवास से लौटने की खुशियां मनाई। शहरवासियों ने लिया मेले का लुत्फ नगर निगम की ओर से टाउन हॉल परिसर में चल रहे मेले में दीपावली के दिन विशेष भीड़ उमड़ी। मेला परिसर के आसपास के व्यापारियों ने जिसमें बापू बाजार व्यापार मंडल, सूरजपोल व्यापार मंडल और अन्य मंडलों ने विविध प्रकार के आयोजन किए। इसमें स्टेज पर प्रतियोगिता रखी गई। जिसमें शहर वासियों ने भाग लिया। उन्हें उपहार भी प्रदान किए गए। विशेष सजावट से सजे बाजारों में लोगों ने जमकर रोशनी का आनंद उठाया। इसके साथ ही मेले में मनोरंजन के संसाधनों का भरपूर लुत्फ लिया। लोगों ने यहां लगी स्टालों पर जमकर खरीदारी की।

खेखरे के दिन हुई गोवर्धन पूजा :
दीपावली के अगले दिन गुरुवार को अलसुबह महिलाओं ने परंपरानुसार गोवर्धन पूजा की। दीपावली के दूसरे दिन गो पूजा का विशेष महत्‍व होता है। महिलाओं ने अल सुबह गाय की पूजा के बाद गाय पालक (गाय की सेवा करने वाला) को उपहार और अन्‍न दिया। गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर जल, मौली, रोली, चावल, फूल, दही और तेल का दीपक जलाकर पूजा की। ऐसी मान्‍यता है कि इंद्र के कोप से बचने के लिए गोकुल वासियों ने जब गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली, तब उन्‍होंने 56 भोग बनाकर श्री कृष्ण को भोग लगाया था। इससे खुश होकर श्री कृष्ण ने आशीर्वाद दिया और कहा इंद्र से डरने की जरूरत नहीं है, वह गोकुल वासियों की हमेशा रक्षा करेंगे। दिवाली के अगले दिन महिलाऐं गोवर्धन पूजा करती है तो घर के पुरुष इस दिन रामा-शामा करते है । जो लोग दीवाली की रात आतिशबाजी में व्यस्त रहे वो लोग शुक्रवार के दिन रामा शामा करने में जुटे रहे। रामा शामा का ये सिलसिला दिन भर चलता रहा। इस दौरान लोगों ने अपने घर आने वाले मेहमानों का स्वागत किया और घर में बनी मिठाइयों से उनका मुंह मीठा कराया। इसी तरह का माहौल सियासी पार्टियों के दफ्तरों और प्राईवेट कंपनियों के संस्थानों में रहा। उधर, दिवाली की छुट्टियों के बाद बाहर के लोगों का घर लौटने का सिलसिला शुरू हो गया।
रोड़वेज और प्राईवेट बसों में सवारियां खचाखच भरी रही। ऐसा ही हाल रेलगाड़ियों का भी रहा… रेलवे स्टेशनों पर रेलों के ज़रिये घर लौटने वालों की रेलमपेल देखि गई।

भाई दूज :
मेवाड़ के उदयपुर जिले में भाई दूज का पर्व पारम्परिक ढंग से उत्साहपूर्वक मनाया गया। इसके साथ ही पांच दिवसीय प्रकाश-पर्व सोल्लास संपन्न हो गया। उदयपुर शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस दिन काफी उल्लासपूर्ण माहौल देखने को मिला। भाई दूज के दिन भाई और भाभियों ने अपनी बहिनों और ननद को उपहार में नकद राशि और वस्त्र भेंट किए। इस दिन सुबह से ही शुभ मुुुुहूर्त में बहिनें अपने भाई के घर पहुंचना शुरू हो गई। उन्होंने भाई के अक्षत तिलक लगाकर उसके दीर्घायु होने की कामना की। देर शाम तक शहर के मुख्य मार्गों एवं गली-मोहल्लों में पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों में लकदक सजी महिलाओं व बालिकाओं की चहल-पहल बनी रही। दूर-दराज के क्षेत्रों एवं ग्रामीण अंचलों से भी कई महिलाएं भाई दूज मनाने यहां पहुंचीं। नगर में मिठाई की दुकानों पर काफी भीड़ देखने को मिली। दुकानदारों ने कई प्रकार की मिठाइयां तैयार कर सजावट की। इस अवसर पर बहिनों ने भाइयों के तिलक लगा कर उन्हें मिठाई खिलाई और उनकी दीर्घायु की कामना की

थानेदार के नाम कांस्टेबल ने मांगे दो लाख- एसीबी की ट्रेप कार्रवाई में सनसनीखेज खुलासे : राजनगर थाने में रिश्वत मांगने का मामला

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, राजसमंद की ट्रेप कार्रवाई में दो लाख रुपए की रिश्वत मांगने पर राजनगर थाने से लाइन हाजिर किए कांस्टेबल महावीरसिंह के विरुद्ध पुलिस थानों में मुकदमे दर्ज होने के बाद चौथ वसूली का सारा भंडाफोड़ हो गया। थाने में दर्ज प्रकरण में एफआर लगाने की एवज में 2 लाख रुपए थानेदार के नाम मांगे, जबकि सीआई से एक मुलाकात कराने के नाम पर 10 हजार रुपए भी ऐंठ लिए। यही नहीं, एफआईआर रफा-दफा करने के लिए अनुसंधान अधिकारी को दरकिनार कर 30 हजार रुपए अलग से खुद की फीस मांगी और सिगरेट के लिए हाथोंहाथ 5सौ रुपए भी ऐंठ लिए।
यह खुलासा एसीबी की ओर से कांस्टेबल महावीरसिंह के दो लाख रुपए रिश्वत मांगने पर 14 सितम्बर 18 को किए गए सत्यापन से हुआ। एसीबी के रिकॉर्डर में कैद तथ्यों को खंगाला, तो कांस्टेबल के रिश्वत मांगने के पीछे अप्रत्यक्ष तौर पर कई पुलिस अधिकारियों का दबाव होने का खुलासा हुआ। बातचीत में दो लाख रुपए तो सिर्फ सीआई के नाम पर मांगे थे, जबकि इस प्रकरण के अनुसंधान अधिकारी व एएसआई को कोई राशि नहीं देने की बात सामने आई। कांस्टेबल बोला कि एएसआई को कुछ नहीं आता-जाता तो उन्हें किस बात का पैसा देंगे। फाइल में जो भी लिखना या करना है, उसी के हाथ में है। पैसे आते ही एफआर कट जाएगी। अगर, एएसआई फोन भी करें, तो इधर-उधर होने का बहाना बनाकर टालते रहना और मैं बुलाऊं तो तत्काल आ जाना। मामले में चाहे निर्णय कुछ भी हो, मैं आपको (पीडि़त परिवादी) को बंद नहीं होने दूंगा। मस्त रहो।
यह था मामला: सांगठकला पंचायत के सापोल में राजपूताना फेल्सपार की खदान है। इसमें परिवादी ने राजसमंद के हामिद नूर व सरिता सेन को साझेदार बनाया। साझेदारों ने खदान को नहीं चलाया और वे उनकी निजी मार्बल माइंस का मलबा लाकर साझेदारी वाली फेल्सपार खदान में डालने लगा। इस पर परिवादी ने माइंस में साझेदारी की कार्रवाई निरस्त कराने के लिए सिविल न्यायालय में वाद दायर कर दिया। फिर भी परिवादी को डराने, धमकाने के लिहाज से हामिद नूर व सरिता सेन की ओर से जरिए इस्तगासे के राजनगर थाने में 6 जुलाई 2018 को प्रकरण दर्ज कराया गया। इस मामले की जांच एएसआई रामसिंह कर रहे हैं। उक्त मामले में गिरफ्तारी की बात कहते हुए कांस्टेबल महावीरसिंह रिश्वत मांग रहा था।

आरोपी कांस्टेबल व परिवाद की बातचीत के अंश
कांस्टेबल : प्रकरण में एफआर पर कितने दोगे?
परिवादी : आप बोलो, कितने लोगे।
कांस्टेबल : खान साझेदार का पैसा दे दो।
परिवादी : दो साल में लेबर, खनन पर 17 लाख रुपए खर्च हुए, जो साझेदार नहीं दे रहे और माइंस में डपिंग भी कर दी।
आरोपी : एफआर लगाने, थाने में सेट करना और जो भी करना मुझे ही करना है। सब कर दूंगा और आपका बाल भी बांका नहीं होने दूंगा।
परिवादी : कितने लोगे, फिर मेरे को व्यवस्था करनी पड़ेगी।
आरोपी : दो एक पेटी दे देना।
परिवादी : यह तो ज्यादा है, डेढ़ लाख तक ले लेना।
आरोपी : ठीक है, डेढ़ लाख दे देना।
परिवादी : मलबा डाला, डपिंग किया, डराया व पुलिस कार्रवाई की, जिसका खर्चा तो साझेदारों से लेना ही पड़ेगा।
आरोपी : खान साझेदारों से समझौते के तहत साढ़े सात लाख व कुछ ब्याज दे दो। फिर मैं एफआर लिख दूंगा। कोई भी फोन करें, रामसिंह वगैरह तो उन्हें कह देना इधर उधर हूं। ठोस बात के लिए मैं बुलाऊ तो आ जाना।
परिवादी : ठीक है।
आरोपी : ठीक है, … और भाई मेरी फीस कहा है?
परिवादी : बोलो आपकी फीस भी ?
आरोपी : जो हो, जितनी हो अभी दे दो ?
परिवादी : डेढ़ लाख तो सीआई साहब लेंगे और तो राम सिंहजी को नहीं देने क्या ?
आरोपी : रामसिंह को किस बात के, उसे कुछ आता जाता नहीं, किस बात के पैसे।
परिवादी : मुझे तो मेटर निबटाना है।
आरोपी : मेटर मैं निबटा दूंगा।
परिवादी :आपकी फीस कितनी?
आरोपी : 30 हजार दे देना।
परिवादी :10 तो पहले दे चुका हूं, इसकी व्यवस्था करने में दो तीन दिन लगेंगे।
आरोपी : सीआई साहब बुलाए, मैं बुलाऊ तो डरना मत, मैं सब सेट कर दूंगा।
परिवादी : मैं बंद होने से नहीं डरता हूं।
आरोपी : आप मस्त रहो। कुछ अभी सिगरेट विगरेट के तो रुपए दो ?
परिवादी : सिगरेट के क्या दूं। दो सौ- पांच सौ रुपए दे दूं तो बहुत है।
आरोपी : 5 सौ रुपए दे जाओ।
परिवादी : ये लो पांच सौ
आरोपी : नकली तो नहीं है ?
परिवादी : असली है, नहीं होते तो मना कर देता।
आरोपी : दाएं- बाएं रहना और रुपयों की व्यवस्था कर देना।
परिवादी : एक दो दिन में।
हर पहलू से जांच
कांस्टेबल की ओर से रिश्वत मांगने में जो भी तथ्य सामने आए हैं। उसकी हर एक पहलू से जांच की जाएगी, जो भी दोषी पाए जाएंगे। उनके विरुद्ध कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
राजेश चौधरी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, राजसमंद

3 साल की बच्ची के मुंह में ‘सुतली बम’ रख कर फोड़ा, लगे 50 टांके और हालत नाजुक

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दिवाली से एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुई एक घटना ने सबको हैरान कर दिया है. मेरठ में 3 साल की बच्ची उस वक्त बुरी तरह से घायल हो गई, जब एक लड़के ने उसके मुंह में पटाखा रख दिया और उसमें आग लगा कर विस्फोट कर दिया. यह जानकारी बुधवार को पुलिस ने दी. मुंह में पटाखों के जलने से बुरी तरह घायल बच्ची को तुरंत पास के अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है.

बता दें कि यह घटना मंगलवार को मिलक गांव में हुई थी. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कर ली है और उसकी तलाश में जुट गई है.

बताया जा रहा है कि बच्ची के पिता शशि कुमार ने अपनी शिकायत में स्थानीय युवक हरपाल का नाम लिया है. अपने घर के बाहर खेल रही शशि कुमार की बेटी के पास जाकर हरपाल उसके मुंह में ‘सूतली’ बम रख दिया और उसमें आग लगा दी.

जैसे ही हरपाल ने लड़की के मुंह में रखी सूतली बम में माचिस लगाई, बम मुंह में ही ब्लास्ट कर गया, जिसकी वजह से वह बुरी तरह से जख्मी हो गई. सुतली बम का धमाका इतना बड़ा था कि उसे 50 टांके लगे हैं और उसके गले में संक्रमण हो गया है. हालांकि, बच्ची का इलाज चल रहा है.

प्रतापनगर थाने का समाज को बड़ा सन्देश – गरीब बच्चों में मिठाइयाँ और पटाखे बाँट कर मनाई दिवाली।

उदयपुर। दीपावली का त्यौहार खुशियों का त्यौहार होता है और यहाँ खुशियां हर एक के हिस्से में आनी चाहिए क्या गरीब क्या अमीर। कुछ ऐसी ही सोच लिए शहर के प्रतापनगर थाने ने एक सार्थक पहल की और अपने थाना क्षेत्र के गरीब बच्चों में मिठाइयाँ और पटाखे बाँट कर उनके साथ दीपावली की खुशियों को साझा किया। दीपावली के दिन प्रतापनगर थाना अधिकारी डॉ हनवंत सिंह और थाने के अन्य पुलिस कर्मियों ने अपने थाना क्षेत्र में रह रहे गरीब बच्चों की बस्ती मी जाकर बच्चों को मिठाइयां और पटाखों का वितरण किया। पुलिस द्वारा किये गए सामाजिक सरोकार से जुड़े इस कार्य को शहरवासियों द्वारा सोशल मीडिया पर खूब सराहा। थाना अधिकारी डॉ हनवंत सिंह का कहना है कि मना कि पुलिस का कार्य शहर की सुरक्षा और अपराधी व् अपराधों पर नियंत्रण का कार्य प्रमुख होता है लेकिन पुलिस का सबसे पहला कर्तव्य आम जन में विश्वाश का भी है। एसी छोटी छोटी पहल आम जन में विश्वास मजबूत करती है।
जब सारा शहर खुशियाँ मना रहा होता है उस समय एक सिपाही से लेकर पुलिस के बड़े अधिकारी तक उन खुशियों और आम जनता की सुरक्षा के प्रबंध में खड़े होते है। कई पुलिस कर्मी ऐसे भी है जो अपनी ड्यूटी और कर्तव्य के चलते अपने घर परिवार से दूर यहाँ न्तैनात रहते है। ऐसे में गरीब बच्चों के साथ थोड़ी सी खुशियाँ बाँट कर मन को संतोष भी मिलता है।

दिपावली / पूजा के लिए 14 घंटे में 4 मुहूर्त, शाम 6.08 से 8.05 बजे तक का समय सर्वश्रेष्ठ।

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अाज दीपावली है। 14 घंटे में आप चार मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन कर सकते हैं। लग्न के हिसाब से पूजा के लिए शाम 6.08 बजे से रात 8.05 बजे तक का समय सर्वश्रेष्ठ बताया गया है।

दीपावली पर 59 साल बाद शुक्र, सूर्य, चंद्रमा का दुर्लभ संयोग

ज्योतिषाचार्य दामोदर प्रसाद शर्मा के मुताबिक दीपावली पर शुक्र, सूर्य, चंद्रमा तुला राशि में है, जो मालव्य योग बनता है। जबकि बुध और बृहस्पति वृश्चिक राशि में, शनि धनु राशि में और मंगल कुंभ राशि में हैं। यह दीपावली पर 59 साल में बना श्रेष्ठ संयोग है। इस दिन महालक्ष्मी की पूजा के लिए 13 मिनट का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। जो शाम 6:20 से 6:33 के बीच होगा। इसमें प्रदोष काल, वृष लग्न और कुंभ का स्थिर नवमांश रहेगा।

दुनिया में दिवाली

दुनियाभर में 100 करोड़ से ज्यादा लोग दिवाली मना रहे। 15 देशों में आज छुट्‌टी होगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति दिवाली पर पार्टी देंगे। ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, न्यूजीलैंड समेत 35 देशों के राष्ट्राध्यक्ष कार्यक्रमों में शामिल होंगे।
दिवाली पर 2016 में अमेरिका ने डाक टिकट जारी किया था। करीब दो माह में ही 1 लाख 70 हजार टिकट बिक गए। यूएस पोस्टल सर्विस के इतिहास में यह बेस्ट सेलिंग स्टैंप बनी।
ज्यादातर देशों, सभ्यताओं और धर्मों में रोशनी का सबसे ज्यादा महत्व है। दुनियाभर में रोशनी से संबंधित 60 से ज्यादा त्योहार मनाए जाते हैं।
नीदरलैंड्स की ट्वेंटे यूनिवर्सिटी ने रिसर्च में पाया कि रोशनी एकाग्रता बढ़ाती है। इसका स्वास्थ्य और मूड पर सकारात्मक असर होता है। यहां तक कि कृत्रिम रोशनी भी हमारे काम करने की रफ्तार बढ़ाती है।
एेसे समृद्ध हो रहे हैं हम

सरकार के स्तर पर : सरकार को 2017-18 में इनकम टैक्स (कंपनी और व्यक्तिगत) से 10.02 लाख करोड़ रुपए मिले। 2012-13 में 5.59 लाख करोड़ रुपए और 2008-09 में 3.34 लाख करोड़ रुपए मिले थे। यानी 5 साल में टैक्स कलेक्शन 79% और 10 साल में 200% बढ़ा है।

कंपनियों के स्तर पर

शीर्ष 100 कंपनियों की वैलुएशन 5 साल में 44.9 लाख करोड़ रु. बढ़ी। 5 वर्षों में 144% की ग्रोथ रही।
रिलायंस इंडस्ट्रीज 8 लाख करोड़ रु. मार्केट कैप वाली देश की पहली, टीसीएस दूसरी कंपनी बनी। 1.6 लाख करोड़ रु. वैलुएशन के साथ फ्लिपकार्ट सबसे महंगा स्टार्टअप बना।
लोगों के स्तर पर

वेतन वृद्धि: 2018 में वेतन वृद्धि 4.9% रही। अर्जेंटीना (7.2%) के बाद भारत दूसरे स्थान पर है।
आय: 1,12,835 रु. प्रति व्यक्ति हुई। 5 साल में 64% बढ़ी।
इनकम टैक्स: 2017-18 में रिकॉर्ड 6.85 करोड़ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल हुए। पिछले साल से 23% ज्यादा।

मोदी रिज़र्व बैंक को पालतू क्यूँ बनाना चाहते है ?

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की अर्थव्यवस्था में जो गड़बड़ की है, उसे दुरूस्त करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आर.बी.आई.) के भंडार से पैसा खींचने के लिए उस पर दबाव डाल रहे हैं।
एकट्वीट में उन्होंने आर.बी.आई. गवर्नर उर्जित पटेल से अनुरोध किया कि वे प्रधानमंत्री का मुकाबला करें और उनके द्वारा बनाये जा रहे दबाव के आगे नहीं झुके।।
राहुल ने ट्वीट कियाः रूपये 36,00,00,00, 00,000 (36 खरब रूपए)। ये वो रकम है जो प्रधानमंत्री आर.बी.आई. से चाहते हैं । ताकि अपनी “बुद्धिमता’ भरी आर्थिक नीतियों से हुई गड़बड़ियों को ठीक कर सके। पटेल आप उनका मुकाबला करें देश को बचायें। राहुल की टिप्पणियों को विस्तार से बताते हुए कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आर.बी.आई. के भण्डारों से धन प्राप्ति के मोदी सरकार के प्रयास देश की आर्थिक संप्रभुता को तबाह कर देंगे। सरकार को 9.59 लाख करोड़ के अपने मुद्रा भण्डार से 3.6 लाख करोड़ रूपये देने के आर.बी.आई. पर बनाये जा रहे दबाव के बारे में उन्होंने कहा “यदि यह फलीभूत हो जाता है तो आर.बी.आई. की स्वायत्तता पर हमले के अलावा यह ग्रेट इण्डियन रॉबरी के समान होगा। यह देश वृहद आर्थिक सम्प्रभुता को तबाह कर देगा।” |
यह उल्लेख कहते हुए कि आर.बी.आई. के इतिहास में पहले ऐसा कभी नहीं हुआ, तिवारी ने आश्चर्य व्यक्त किया कि वित्त मंत्रालय इतनी बड़ी राशि को केन्द्रीय बैंक में रखा हुआ “पूंजी अधिक्य” मानता है और उसे हड़पना चाहता है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय करने का अधिकार पूर्णतया
आर.बी.आई. के पास है कि उसे कितनी पूंजी का भण्डार रखना है तथा सरकार को इसमें हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने मंगलवार को इण्डियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि मंत्रालय आर.बी.आई.पर पूंजी भण्डार की जरूरत के अधिमूल्यांकन का आरोप लगा रहा है और आर.बी.आई. को आशंका है कि उसके भण्डार में सरकार की छेड़छाड़ से वृहद आर्थिक सम्प्रभुता पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
जब उनसे पूछा गया कि सरकार के प्रयास को विफल करने के लिये कांग्रेस क्या कदम उठायेगी तो तिवारी ने कहा कि सरकार के प्रयास का मुकाबला करने के लिये कांग्रेस के पास कानूनी व न्यायिक सहित तमाम विकल्प खुले हैं। सबसे पहले पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने उल्लेख किया था कि आर.बी.आई के मुद्रा भण्डार पर सरकार की गिद्ध दृष्टि है। तिवारी ने कहा: आर.बी.आई. के भण्डार ये आत्मविश्वास प्रदान करते हैं कि यह केन्द्रीय बैंक किसी भी संकट का मुकाबला कर सकता है। सरकार का प्रयास इस आत्मविश्वास को भंग कर देगा।
उन्होंने कहा, यह बेहद गंभीर विषय है। भारत की आर्थिक संप्रभुता पर इसके गंभीर प्रभाव पड़ेंगे। आर.बी.आई. की स्वायत्तता विदेशी व घरेलू निवेशकों को आश्वस्त करती है। यह याद दिलाते हुए कि ऐसा करके अर्जेन्टाइना ने किस प्रकार अपनी अर्थव्यवस्था का विध्वंस किया,तिवारी ने कहा कि गैर जिम्मेदाराना सरकार राष्ट्रीय हित से खिलवाड़ कर रही है।’ मतदाताओं को मुफ्त उपहार बांटकर 2019 का चुनाव जीतने के लिये उसे धन चाहिये। वित्तीय घाटा और वर्तमान लेखा घाटा बढ़ता जा रहा है। पैट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स वसूली से 11 लाख करोड़ रूपयों की आय हासिल करने के बावजूद सरकार के भण्डारों में वृद्धि नहीं हो रही है।
सरकार के इस आकलन पर कि आर.बी.आई. के पास मुद्रा आधिक्य है, उन्होंने कहा कि इसके निर्णय का अधिकार केन्द्रीय बैंक के पास है और इसके लिये प्रश्न करने का वित्त मंत्रालय को कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि नोटबंदी के तुगलकी फरमान सहित सरकार की अयोग्यता और गलत नीतियों के कारण वित्तीय हालात इस खतरनाक स्तर पर पहुंच गए हैं। । विडम्बना यह है कि सरकार द्वारा यह हस्तक्षेपनोटबंदी
की द्वितीय वर्षगांठ के महज कुछ ही दिन पूर्व किया गया है। माना जा रहा था कि नोटबंदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की सारी बुराईयों को समाप्त कर दिया है।
तिवारी ने कहा “प्रधानमंत्री ने नोटबंदी से अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी। इसके लिये बनाया गया एक भी लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। उम्मीद की गई थी कि लेन-देनों को डिजीटल करने के अतिरिक्त इससे काला धन, जाली मुद्रा और आतंक की बुराई समाप्त होगी लेकिन इसके बजाए आज 2016 की तुलना में अधिक नकदी प्रचलन में है। * नोटबंदी के लिए प्रधानमंत्री को देश से माफीनामा देने का अनुरोध करते हुए उन्होंने कहा आर.बी.आई. के मुद्रा भण्डार में से नकदी निकालने के इस अन्य प्रयास की अनुमति नहीं दी जाएगी क्योंकि कांग्रेस पूरी ताकत से इसका मुकाबला करेगी।

 

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“कमल” को छोड़ “जनता” के साथ जुड़े दलपत सुराणा उदयपुर में “गुलाब” से करेगें मुकाबला।

उदयपुर। 54 सालों से भाजपा में रहे कर्मठ कार्यकर्ता दलपत सुराणा ने आखिरकार भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे ही दिया। इतना ही नहीं श्री सुराणा ने हाथोहाथ जनता सेना की सदस्यता भी ग्रहण कर ही ली। आपको बता दे कि पिछले दिनों दलपत सुराणा ने भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से उदयपुर शहर या मावली से विधानसभा का टिकिट देने की अपील की थी, लेकिन उन्हें आभास हो गया कि पार्टी उन्हें टिकिट नहीं देगी तो सुराणा ने सोमवार को शहर की होटल रोयल इन जो हमेशा बागियों की मुख्य केंद्र रही है। उसमें जनता सेना का दामन थाम लिया और भाजपा की सदस्यता से ही इस्तीफा दे दिया। पूरा मेवाड़ जानता है कि भाजपा के कद्दावर नेता और मेवाड़ भाजपा के स्तम्भ माने जाने वाले गुलाबचंद कटारिया की इस बार काफी कद्दावर और पुराने नेता खिलाफत कर रहे हैं। कुछ समय पहले कटारिया की खुलकर बगावत करते हुए भैरों सिंह शेखावत जागृति मंच भी बनाया गया था। जिसमें भाजपा के दिग्गजों के साथ कटारिया के समधि रोशनलाल जैन तक शामिल हुए थे। ऐसे में यह मान लिया गया था कि इस बार कटारिया की राजनीति में बने रहने की डगर काफी मुश्किल होगी और सोमवार को यह साबित भी हो गया। जब जागृति मंच जनता सेना एक हो गए। आपको बता दे कि जनता सेना सुप्रीमों रणधीर सिंह भीण्डर को कटारिया के विरोध के कारण ही गत विधानसभा चुनावों में वल्लभनगर से टिकिट नहीं मिला था और उन्होंने निर्दलीय लड़ते हुए जम्बो जीत हांसिल की थी, यहां पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार गणपत मेनारिया की जमानत तक जब्त हो गई थी। सोमवार को दलपत सुराणा के जनता सेना में शामिल होते ही उनके उदयपुर से लड़ने की कवायदें तेज हो गई है अब देखना दिलचस्प होगा कि किस तरह कढ़ाई कमल पर भारी पड़ती है। आइए आपको सुनाते है दलपत सुराणा ने भरे गले से कटारिया के लिए क्या कुछ कहा और क्यों 54 साल बाद यह फैसला लिया सुनीए उन्हीं की कहानी उन्हीं जुबानी।