Udaipur Post. Salman khan ने Malta में फिल्म ‘Bharat’ के सेकंड शेड्यूल की शूटिंग पूरी कर ली है। रविवार काे उन्होंने को-स्टार katrina kaif के साथ एक तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर की। इस तस्वीर में सलमान शेरवानी अौर कटरीना घाघरा-चोली पहने हुए हैं। दोनों के अलावा इस फिल्म में दिशा पाटनी, नोरा फतेही और सुनील ग्रोवर भी होंगे। फिल्म के सेकंड शेड्यूल की शूटिंग भले ही पूरी हो चुकी हो पर सलमान, मां सलमा खान और बहन अलवीरा के साथ अभी भी माल्टा में ही रुके हुए हैं।
Salman Khan ने Bharat की शूटिंग का सेकंड शेड्यूल किया पूरा .
हज मुकम्मल, अब 40 नमाज के लिए मदीना पहुंचेंगे हाजी
नमाज में मांगी जाएगी अमन चैन की दुआ, 13 सितम्बर से लौटेंगे वतन

Udaipur. इस्लाम धर्म के पांच अरकान में से एक यानि Hajj saudi arabia के मिना में चल रहा है, दुनियाभर से करीब 50 लाख हज यात्री Hajj पर गए है। Indian Muslim के साथ Rajasthan muslim hajj yaatri भी इस बार करीब साढ़े पांच हजार यात्री इस मुकद्दस सफर है और इन सभी हज यात्रियों का हज-2018 मुकम्मल यानि हज पूरा हो गया है। आईए आपको बताते है इस पूरे हज सफर के वो पांच दिन जिनमें हज की रस्में रिवायतें पूरी करने के बाद ही हज मुकम्मल माना जाता है।
ऐसे मुकम्मल हुआ Hajj

पहला दिन 18 अगस्त :सभी हज यात्री ehram बांधकर मिना शहर पहुंचे और यहां जुहर, असर, मगरीब और इशा की नमाज अदा कर रात यहीं पर गुजारी।
दूसरा दिन 19 अगस्त : मिना में सुबह फज् की नमाज पढ़कर जुहर की नमाज के लिए अराफात रवाना हुए। हज सफर का यह सबसे खास दिन माना जाता है। यहां अराफात के मैदान में पहुंचकर जुहर और असर की नमाज पढ़ी गई। सभी हज यात्रियों को दिन ढलने से पहले अराफात छोड़कर मुजदलफा रवाना हुए। मुजदलफा में इशा की नमाज पढ़कर खुले आसमान में सोए। अगले दिन शैतान को पत्थर मारने की रस्म पूरी करने के लिए Hajj यात्रियों ने कंकर चुने।
तीसरा दिन 20 अगस्त : मुजदलफा में फज् की नमाज अदा कर मीना के जमरात पहुंचे और यहां शैतान रूपी स्तंभ को सात-सात कंकर मारे गए। इस रस्म के बाद अहराम की पाबंदी हट जाती है।
चौथा दिन 21 अगस्त : शैतान को कंकर मारने की परम्परा तीन दिन तक चलती है, इसमें दूसरे दिन छोटे-बड़े शैतान को कंकर मारे गए और रात मिना में ही गुजारी।
पांचवां दिन 22 दिन : कंकर मारने की रस्म के तीसरे दिन तीनों शैतानों को एक साथ कंकर मारे जाते है और इसके बाद शाम ढ़लने से पहले हज यात्री मक्का के लिए रवाना हो गए। इसके बाद कुर्बानी दी गई। सउदी सरकार की तरफ से हज यात्रियों द्वारा कुर्बानी की रस्म पूरी करने के लिए अलग-अलग स्लॉटर बनाए गए है, जहां हज यात्री कुछ रकम अदा कर अपने पसंद के जानवर बकरा, मेंड़ा, दुम्बा या ऊंट की कुर्बानी दी जाती है। इसके बाद हज यात्री सिर मुंडवाकर मक्का की जियारत शुरू करते है। हज पूरा करने के बाद सभी हज यात्री चालीस नमाज के लिए 3 सितम्बर से मदीना जाएंगे।
हज पर जाने से पहले सभी हाजियों ने मनाया स्वतंत्रता दिवस
अजीजिया बिल्डिंग में ठहरे हुए है जहां उनके साथ प्रदेश के अलग-अलग शहरों के 386 हज यात्री है। 18 अगस्त को हज के पांच दिन के सफर पर जाने से पहले सभी हज यात्रियों ने यहां 15 अगस्त को तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस मनाया। सभी हज यात्रियों ने अल्लाह की इबादत के दौरान अमन चैन और भाईचारे की दुआएं मांगी।
पहली फ्लाइट सुबह 6 बजे पहुंचेगी
स्टेट हज कमेटी चैयरमेन अमीन पठान ने बताया कि सभी हज यात्रियों का हज-2018 मुकम्मल हो गया है। 12 सितम्बर को रात साढ़े दस बजे हाजियों की पहली फ्लाइट अपने वतन के लिए रवाना होगी आैर अगले दिन सुबह छह बजे पहला जत्था अपने वतन लौटेगा। हाजियों के लौटने का सिलसिला 25 सितम्बर पर रहेगा। इस बार भी आब-ए-जमजम यानी मक्का पवित्र पानी एयरपोर्ट पर ही हाजियों को दिया जाएगा।
LAXMIDEVI’S PRIDE AND HONOR IS HER ‘SAKHI SABJI CENTRE

Today, Laxmidevi’s vegetable cart is not only famous in her community but also in her entire village of Putholi in Chittorgarh, for her fresh vegetables.
Laxmidevi’s husband’s income did not suffice the needs of the family, especially her daughter’s education. One day, she came to know about Hindustan Zinc’s Self Help Group (SHG) from other women of her village and she joined one of the SHGs called Radha Rani Samooh. These SHGs function on the method of ‘thrift savings’ and are linked with banks for loans, at much subsidized rates, which substantially scales up small-scale businesses.
Laxmidevi took a loan of Rs. 3000/- from the samooh to start making earthen pots. By selling these pots, she made a profit of almost Rs. 3000/-. But the season of earthenware had subdued and she stopped making enough money. Laxmidevi was doubtful to start with a new business. However, she had noticed that the women of her village had to travel to far away mandis to fetch fresh vegetables. To help them, ambitious Laxmidevi planned to switch to selling vegetables in her village. Hence, she took a loan of another Rs. 3000/- from her samooh to set up her vegetable selling business.
With the strong support of her family, she also bought a vegetable hand-cart. Every morning, Laxmidevi gets vegetables from the mandi and sells it in her village and today she makes a profit of more than Rs. 6000/- every month.
“Since the time I have been part of the samooh, I feel completely independent. I have a stable source of income. We don’t face any more financial problems. Through my business, I not only help the village ladies, but also earn from it. I am grateful to Hindustan Zinc for giving me my independence…”, says beaming Laxmidevi.
The Sakhi project has been developed to contribute towards socio-economic empowerment of rural women. Currently, ‘Sakhi’ is reaching out to about 19,860 rural and tribal women through almost 1565 SHGs in Rajasthan and Pantnagar.
Independent and confident Laxmidevi, who has ignited a spark of hope in other women of her village, may soon lead to a new story of empowerment in the life of another Sakhi like her…
अटलजी को विदाई, अंतिम यात्रा में हज़ारों लोग , विश्व नेताओं ने स्मृति स्थल पर पहुंचकर दी श्रद्धांजलि

भारत रत्न और तीन बार प्रधानमंत्री रहे Atal Bihari Vajpayee (93) शुक्रवार शाम 4:56 बजे पंचतत्व में विलीन हो गए। Atal ji की दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्य ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंत्येष्टि में राष्ट्रपति Ramnath kovind, प्रधानमंत्री Narendr Modi समेत कई देशों के नेता मौजूद रहे। अंतिम यात्रा के दौरान भाजपा मुख्यालय से स्मृति स्थल के पांच किलोमीटर रास्ते पर हजारों लोगों ने अटलजी को पुष्प चढ़ाए। इस दौरान नरेंद्र मोदी अंत्येष्टि स्थल तक पैदल साथ आए। उनके अलावा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान समेत कई वरिष्ठ भाजपा नेता भी साथ-साथ पैदल चले।
स्मृति स्थल पर तीनों सेना प्रमुख, रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे, रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण, लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामगेयाल वांगचुक, बांग्लादेश के विदेश मंत्री अबुल हसन महमूद अली, नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, श्रीलंका के कार्यवाहक विदेश मंत्री तिलक मारापना, लालकृष्ण आडवाणी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने श्रद्धांजलि दी। Atal Bihari Vajpayee की नातिन Niharika को सेना ने अटलजी की पार्थिव देह पर लिपटा तिरंगा सौंपा। स्मृति स्थल पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सभी दलों के प्रमुख नेता भी मौजूद थे। यमुना किनारे डेढ़ एकड़ जमीन पर अटलजी का स्मृति स्थल बनाया जाएगा।

सभी दलों के नेता भाजपा मुख्यालय पहुंचे : अंतिम दर्शन के लिए अटलजी की पार्थिव देह को सुबह 9 बजे उनके आवास से भाजपा मुख्यालय लाया गया था। यहां सभी दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। अटलजी ने गुरुवार शाम 5.05 बजे एम्स में अंतिम सांस ली थी। वे नौ साल से बीमार थे और 67 दिन से एम्स में भर्ती थे। पार्टी मुख्यालय में नरेंद्र मोदी, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण अाडवाणी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने अटलजी को पुष्पांजलि दी। अन्य दलों के नेता भी भाजपा मुख्यालय आए। इनमें सपा नेता मुलायम सिंह यादव, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया आप सांसद संजय सिंह, द्रमुक नेता ए राजा, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह शामिल थे। आडवाणी पूरे वक्त भावुक नजर आए।

अटलजी ने पूरी दुनिया में सम्मान हासिल किया- पुतिन : शुक्रवार को भूटान के नरेश जिग्मे खेसर नामगेयाल वांगचुक ने अटलजी को श्रद्धांजलि दी। नेपाल के विदेश मंत्री पीके ग्यावाल, बांग्लादेश के विदेश मंत्री अबुल हासन महमूद अली, श्रीलंका के कार्यकारी विदेशी मंत्री लक्ष्मण किरीला, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और पाकिस्तान के कानून मंत्री अली जफर अंत्येष्टि में मौजूद रहे। मॉरिशस ने अटलजी के निधन पर गहरा दुख जताया। शोक स्वरूप मॉरिशस सरकार ने अपना राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका दिया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा, “अटल बिहारी वाजपेयी ने पूरी दुनिया में सम्मान हासिल किया। उन्हें एक ऐसे राजनेता के तौर पर याद किया जाएगा, जिसने रूस और भारत के कूटनीतक संबंधों को मजबूत करने में निजी तौर पर बड़ा योगदान किया।’ श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने ट्वीट किया, “हमने एक महान मानवतावादी और श्रीलंका का अच्छा दोस्त खो दिया।
राहुल गांधी और मोहन भागवत ने आवास पर जाकर श्रद्धांजलि दी : अटलजी के पार्थिव शरीर को गुरुवार शाम एम्स से लाकर अंतिम दर्शन के लिए कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके आवास पर रखा गया था। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसी आवास पर पहुंचकर अटलजी को शुक्रवार सुबह श्रद्धांजलि दी। वहीं, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, मोदी, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह समेत कई नेताओं ने गुरुवार देर रात श्रद्धांजलि दी।

12 राज्यों में शासकीय अवकाश: अटलजी के निधन पर 7 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई। शुक्रवार को देश के 12 राज्यों ने राजकीय शोक और अवकाश की घोषणा की। इनमें दिल्ली, उत्तरप्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, ओडिशा, पंजाब, बिहार, झारखंड, हरियाणा, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक राज्य शामिल हैं। इन राज्यों में सरकारी कार्यालय, स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश रखा गया। सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में भी शुक्रवार को एक बजे तक ही काम हुआ। दिल्ली में व्यापारियों ने भी सभी बाजार बंद रखे।
अमेरिका, चीन, पाकिस्तान, ब्रिटेन और बांग्लादेश ने दुख जताया: पाकिस्तान तहरीक-इंसाफ के नेता और प्रधानमंत्री बनने जा रहे इमरान खान ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति के एक बड़े व्यक्तित्व थे। भारत-पाक संबंधों में सुधार के लिए उनके प्रयासों को हमेशा याद किया जाएगा। चीन के राजदूत लुयो झाओहुई ने ट्वीट किया- “अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से गहरा दुख पहुंचा है।” भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने शासनकाल में अमेरिका के साथ मजबूत रिश्तों पर जोर दिया।” ब्रिटेन और जापान के राजदूत ने कहा कि वे वैश्विक नेताओं में से एक थे। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश के लोगों में भी अटल बिहारी वाजपेयी काफी लोकप्रिय थे।
मोदी ने कहा- पिता का साया उठ गया: नरेंद्र मोदी ने अटलजी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जाना सिर से पिता का साया उठने जैसा है। इससे पहले उन्होंने ट्वीट में कहा- ‘‘मैं नि:शब्द हूं, शून्य में हूं, लेकिन भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है। हम सभी के श्रद्धेय अटलजी हमारे बीच नहीं रहे। यह मेरे लिए निजी क्षति है। अपने जीवन का प्रत्येक पल उन्होंने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। उनका जाना, एक युग का अंत है।’’
1924 में जन्मे, मूल रूप से कवि और शिक्षक : वाजपेयी मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 25 दिसंबर 1924 को जन्मे। वे मूलत: कवि थे और शिक्षक भी रह चुके थे। 1951 में जनसंघ की स्थापना हुई और अटलजी ने चुनावी राजनीति में प्रवेश किया। 1957 में वाजपेयी मथुरा से लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। हालांकि, बलरामपुर सीट से वह जीत गए। 1975-77 के आपातकाल के दौरान वह गिरफ्तार किए गए। 1977 के बाद जनता पार्टी की मोरारजी देसाई की सरकार में वह विदेश मंत्री भी रहे। 1980 में उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी की नींव रखी। वे 10 बार लोकसभा सदस्य और दो बार राज्यसभा सदस्य रहे। तीन बार प्रधानमंत्री बने।
Independence Day 2018 : लाल किले से बोले पीएम मोदी : 2022 तक कोई भारतीय तिरंगा लेकर अंतरिक्ष में जाएगा और मानव को अंतरिक्ष में पहुंचाने वाला चौथा देश बनेगा भारत
आज 72वां स्वतंत्रता दिवस (Independence Day 2018) है और आज पूरे देश में जश्न का माहौल है. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया. 2019 लोकसभा चुनाव से पहले पीएम नरेंद्र मोदी का लाल किले की प्राचीर से यह आखिरी भाषण होगा. उम्मीद जताई जा रही है कि पीएम अपने संबोधन में सरकार की कई नई योजनाओं की घोषणा भी कर सकते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बुधवार सुबह ट्विटर के जरिए देश को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी.“Parents and teachers, both responsible for effective education system”, says Pavan Kaushik at Gurukshetra
The reputation of a school is directly associated with its students, their parents and the faculty. If all the three keep blaming each other, then it will spoil the education system instead of working towards the welfare of the student. Ideally, the three should collectively work together to identify the strong areas of the student and create a roadmap for achieving the same.
Pavan Kaushik, Vice President and Head-Corporate Communication of Hindustan Zinc addressed more than 50 teachers of Maharana Mewar Public School Udaipiur, the school of royal family of Udaipur. The session, as part of the initiative – Gurukshetra, Learning Beyond the Territory, was attended by the faculty of classes 6th to 12th of all subjects.
In the second chapter of Gurukshetra, Pavan Kaushik focussed on how a school and its students can benefit tremendously if there is a strong connect between the students, teachers and the students’ parents. Speaking about the relationship between the Guru (Teacher) and his Shishya (Student), he said, “The connect between the teachers and their students is of utmost importance. How many teachers miss their students who have passed out of the school and how many students miss their teachers. With time, that emotional relationship is also diminishing. The connect of a student and teacher should not be based on a fear factor, rather the teachers should act as a guide to the students. Each student is different and special. Do not focus on just pass and fail, instead concentrate on identifying the leaders and strengthening the weak students at the same time.”
Pavan Kaushik also spoke about the importance of setting both long term and short terms visions for the school. He said, “With paucity of time and our busy schedules we might feel the pressure to stick only to our job descriptions. But the objective in our minds should not be to just finish the syllabus, instead we should think about giving rise to a new crop of well-rounded students and build brands out of those students.

In this regard, Pavan Kaushik recommended that the schools can constitute a Parents Advisory Board which will make the parents more involved in the students’ education and also draw out a vision for the school. Along with establishing a Board, various professionally qualified parents can conduct orientation exercises wherein the students can be exposed to different fields.
“If a corporate structure can be put in place in the schools, it will help devise various verticals of different subjects and with focussed teaching, the scoring of each of the verticals can be improved. This would ultimately help in a comprehensive marked improvement in all the subjects taught in the school and would also create a healthy evaluation criterion between schools. With coordination and cooperation, the students, their parents and teachers are a triangle of success.”, said Pavan Kaushik.
The session was appreciated and highly lauded by the faculty of the school who expressed their wish to have more of such sessions in the future not just for teachers but also for the students and their parents.
सूरजपोल सिंधियाँन कब्रस्तान से प्रशासन 7 दिन में अवैध कब्जा हटावे नहीं तो जिला वक़्फ़ बोर्ड अपने स्तर पर हटाएगा – वक़्फ़ बोर्ड जिलाध्यक्ष

उदयपुर। सूरजपोल स्थित सिंधीयांन कब्रस्तान में नगर निगम निर्माण समिति अध्यक्ष सहित कई लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है व् कब्रस्तान में कूड़ा करकट व् शराब की बोतलें डाली जाती है जिसके विरोध में राजस्थान जिला वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष व् सचिव ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया। वक्फ बोर्ड के जिला अध्यक्ष ने तुरंत कार्रवाई कर कब्रस्तान की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करवाने की मांग की है।
जिला वक़्फ़ बोर्ड के जिलाध्यक्ष हाजी उस्मान हैदर व् सचिव असलम हुसैन ने सोमवार को जिला कलक्टर विष्णुचरण मलिक से मुलाक़ात की व् सूरजपोल स्थित सिंधीयांन कब्रस्तान में अतिक्रमण हटवाने को लेकर ज्ञापन दिया । जिलाध्यक्ष हाजी उस्मान हैदर ने जिला कलेक्टर को बताया कि सूरजपोल स्थित सिंधीयांन कब्रस्तान में पिछले कुछ समय से उदयपोल रोड स्थित, होटल व्यवसायी व् अन्य दूकानदारों ने अपने अपने प्रतिष्ठानों के दरवाजे पीछे की तरफ से कब्रस्तान की जमींन में अवैध रूप से खोल कर कब्जा जमाते जा रहे है। कब्जा करने वालों में पारस होटल के मालिक व् नगर निगम निर्माण समिति के अध्यक्ष पारस सिंघवी भी शामिल है। हाजी उस्मान हैदर ने बताया कि पारस सिंघवी ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए कब्रस्तान की जमीन में ही अपनी होटल का किचन निर्माण करवा दिया है। यही नहीं उसकी होटल में व् किचन में होने वाली गन्दगी को भी वह कब्रस्तान की खाली जमींन व् कब्रों के ऊपर डाला जाता है। अन्य प्रतिष्ठानों के व्यवसायी भी अपने प्रतिष्ठानों का कचरा व् शराब की बोतलों को कब्रस्तान में डालते है। होटलों और रेस्ट्रोरेंट द्वारा किचन व् बाथरूम का पानी भी कब्रस्तान में डाला जाता है। जिला वक़्फ़ बोर्ड के सचिव असलम हुसैन ने बताया कब्रस्तान में हो रहे अतिक्रमण को लेकर मुस्लिम समुदाय में काफी रोष है। सचिव असलम हुसैन ने बताया की हमने जिला कलेक्टर को ज्ञापन में मांग की है कि वक़्फ़ एक्ट १९९५ के धारा ५४ व् ५५ के तहत कब्रस्तान में हो रहे अतिक्रमण को हटाया जावे। हाजी उस्मान हैदर ने कहा कि ७ दिन में अतिक्रमण हटाने की कठोर कार्रवाई की जाए अगर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो सात दिन के बाद वक़्फ़ बोर्ड मुस्लिम समुदाय के साथ मिल कर अपने स्तर पर अवैध निर्माण ध्वस्त कर देगा।

उदयपुर पोस्ट के यू ट्यूब चेनल पर अब वास्तु और ज्योतिष विशेषग्य हेमंत मेनारिया सुझायेगें समाधान आप भी जुड़िये .
हमारे जीवन में वास्तु और ज्योतिष का काफी महत्त्व है और इस महत्त्व को समझा रहे है जाने माने वास्तु विशेषग्य हेमंत मेनारिया निचे वीडियो पर क्लिक करिए और देखिये आखिर तक विडियो . आपकी समस्याओं को कमेन्ट बॉक्स में लिख भेजिए या फिर विडियो के डिस्क्रिप्शन में लिखे ई मेल पर लिख भेजिए . हफ्ते में दो बार एक नए विषय एक नए समाधान के साथ आयेगे हेमंत मेनारिया . आप खुद समझिये कि आखिर जीवन में वास्तु का क्या महत्त्व है .
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मंच पर शाह मोदी, सैनी और वसुंधरा के पोस्टर पर नहीं दिखा कमल निशान, मुख्यसेवक ने भी नहीं लिया भाजपा का नाम

सेवक नहीं महारानी साहिबा और महाराज साहब कहिये।
उदयपुर। राजस्थान गौरव यात्रा के अंतिम दिन भिंडर में पुराने राजे महाराजाओं का ज़माना याद आगया जब ऊँचे सिंहासन पर महाराज और महरानी बैठे हुए रहते थे और सामने उनकी प्रजा जमीन पर बैठे बैठे वाह वाही करती थी। लोकतंत्र के इस काल में एसा द्रश्य शायद ही कही देखने को मिले। लेकिन हमारा ये सोभाग्य हुआ कि हमने वल्लभनगर विधानसभा क्षेत्र के भिंडर कसबे में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और वल्लभनगर विधायक रंधीर सिंह भिंडर की सभा के दौरान यह दर्शय देखा। यह बात अलग है कि यहाँ पर यह जनता के सेवक के रूप में बैठे हुए थे लेकिन संबोधन महाराज साहब और महारानी साहिबा के नाम से ही हो रहा था।
भिंडर की सभा में एक तरह महारानी साहिबा तो दूसरी तरफ महाराज साहब। जी हाँ हम इसी सदी कीबात कर रहे है। आप अगर सोच रहे होंगे कि राजा महाराजों का ज़माना तो लद गया अब किसी को महाराज या महाराणा नाम से संबोधित नहीं किया जाता लेकिन राजस्थान गौरव यात्रा के आखरी दिन भिंडर में सभा के दौरान स्टेज से माइक पर जो आवाजें आरही थी वो सिर्फ महारानी साहिबा और महाराज साहब ही आरही थी। स्टेज के सामने आम प्रजा बैठी थी। सभा के दौरान जिस किसी ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए जिस किसी ने संबोधित किया महारानी साहिबा के नाम से ही संबोधित किया जबकि वल्लभनगर के विधायक रंधीर सिंह भिंडर को महाराजा साहब से ही संबोधित किया जाता है।
लोकतंत्र है ये नेता है और नेता जनता की सेवा के लिए आते है और खुद जनता के सेवक कहलाते है लेकिन शायद सेवक कहलाना इन्हें पसंद नहीं। चाहे खानदान राजसी हो लेकिन जब जनता के बिच में है तो जनता के सेवक ही कहलायेगें अब ये बात अलग है कि सत्ता में आने के बाद यह महाराजा साहब या महारानी साहिबा कहलाना पसंद करें।

