मरीज़ परेशान 108 व 104 एम्बुलेंस सेवाएं चौथे दिन भी ठप्प – कुछ कुछ अप्रिय हुआ तो सरकार व् कंपनी जिम्मेदार .

पोस्ट न्यूज़ . पिछले चार दिनों से १०८ और १०४ अब्लेंस के ड्राइवरों की हड़ताल चल रही है . कंपनी के खिलाफ राज्य भर के अम्बुलेंस ड्राइवर लामबंद हो कर हड़ताल पर उतारे हुए है . ड्राइवरों से चाबी लेने के सरकारी आदेश के बाद भी ड्राइवरों ने चिकित्सा अधिकारियों को चाबियाँ नहीं सोंपी है . उदयपुर जिले में मरीजों को ख़ासा नुक्सान उठाना पद रहा है साथ ही परेशानी का सामना भी करना पद रहा है .

इधर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव टांक ने जीवीके-ईएमआरआई कंपनी को नोटिस जारी कर पूछा है कि बार-बार कहने पर भी सभी 66 एंबुलेंस की चाबियां विभाग को क्यों नहीं दी गई हैं। साथ ही चेताया कि एंबुलेंस के अभाव में कोई अप्रिय घटना हुई तो जिम्मेदारी कंपनी की होगी।

जिले की कुल 66 में से 12 एंबुलेंस के संचालन का विभागीय दावा शहर में ही कोरा साबित हुआ। यहां हाथीपोल थाना पुलिस को स्वरूप सागर पुलिया के नीचे मिले शव को अस्पताल लाने के लिए निजी एंबुलेंस की मदद लेनी पड़ी। दूसरी ओर, पांच एंबुलेंस तीन दिन से यह सेवा चला रही जीवीके-ईएमआरआई कंपनी के भुवाणा स्थित सर्विस सेंटर में खड़ी रही। इनके चालकों का भी अता-पता नहीं था। कंपनी के मीडिया प्रभारी भानु सोनी ने कहा कि चालक एंबुलेंस की चाबियां दे नहीं रहे हैं। घायलों और गंभीर मरीजों को तत्काल अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए जिले में 108 एंबुलेंस 32 और 104 एंबुलेंस 34 लगी हैं, जिनमें से अमूमन थानों, पुलिस चौकियों, हाईवे किनारे सहित जहां-तहां पड़ी रहीं। एमबी हॉस्पिटल में दिनभर में एक भी 108 या 104 एंबुलेंस नजर नहीं आई।

मीडिया प्रभारी सोनी व अन्य ने बताया कि सरकार ने सुलह के लिए प्रदेशभर से चालक यूनियन के पदाधिकारियों को जयपुर बुलाया। उदयपुर यूनियन के चालक भी पहुंचे। दिन में तीन बार बातचीत हुई, लेकिन नतीजा नहीं निकला। रात को भी वार्ता का दौर चला। सोनी ने दावा किया है कि कंपनी चालकों को ईपीएफ, ईएसआई आदि का लाभ देने के बाद आठ हजार रुपए प्रतिमाह तनख्वाह देती है। वहीं चालकों ने कहा है कि वे घायलों को अस्पताल लाने-ले जाने के लिए दिनभर मेहनत करते हैं और उन्हें ही मेडिकल की सुविधा नि:शुल्क नहीं दी जाती। उन्हें समान कार्य का समान वेतन चाहिए। यह वर्ग कर्मचारियों से 8 घंटे से ज्यादा काम नहीं लेने, सप्ताह में एक दिन अवकाश आदि मांगें भी कर रहा है।

चुनाव के ठीक पहले राजस्थान की प्रदेश सरकार खोल रही है नोकारियों का पिटारा .

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पोस्ट न्यूज़ । चुनावी साल में वसुंधरा सरकार बेरोजगारों से किए गए अपने वादों को लेकर काफी सक्रिय होती दिख रही है। मंगलवार को मुख्यमंंत्री राजे की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में 1.29 लाख भर्तियों के कैलेंडर को मंजूरी दी गई। पंचायती राज मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि अप्रैल में इन भर्तियों के लिए विज्ञापन जारी कर दिए जाएंगे और जुलाई तक सभी परीक्षाएं करा ली जाएंगी। प्रदेश में जुलाई तक 1.29 लाख नौकरियों के लिए भर्ती परीक्षाएं पूरी हो जाएंगी। जिनमें आरपीएससी व अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के जरिए 1.08 लाख भर्तियों के अलावा 21 हजार भर्तियां सफाईकर्मियों की होंगी।
जुलाई में होगी सबसे ज्यादा 64 हजार भर्तियां आगामी विधान सभा चुनावों के मध्यनजर अब राजस्थान सरकार हर वर्ग को खुश करने में लगी है। ऐसे में सरकार ने राजस्थान के बेरोजगार युवाओं को खुश करने के बजट 2018 में कई घोषणाएं भी की। अब सरकार इन घोषणाओं को जल्द से जल्द पूरा कर युवाओं का समर्थन प्राप्त करने का प्रयास कर रही है। मंगलवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में जहां 1.29 लाख भर्तियों के कैलेंडर को मंजूरी दी गई वहीं सभी परीक्षाओं को जुलाई तक पूरा करवाने की बात भी कही गई। ऐसे में जुलाई माह में सबसे ज्यादा 64 हजार भर्तियों की बात कही गई।

किस माह में कितनी भर्ती
मार्च- 3168
अप्रैल- 10400
मई – 12,000
जून – 40,000
जुलाई – 64000

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में और भी कई अहम फैसले हुए जिनमें भूतपूर्व सैनिकों को राज्य सेवा में ५ प्रतिशत आरक्षण, किसानों वर्ग को अगस्त तक २ लाख कृषि कनेक्शन जारी करने का प्रस्ताव, एनआईडी के लिए देहमीकला में 12 हजार 62 वर्गगज निशुल्क जमीन, बायोमास प्लांट लगाने की 2 साल की समय सीमा को बढ़ाकर 3 साल करना, बीएसएफ कर्मियों के लिए ग्रुप हाउसिंग के लिए देहमीकला में 12 हजार वर्गगज भूमि, राजस्थान माइन एंड जियोलॉजिकल डिपार्टमेंट में।

एक माँ का रूप ये भी – इच्छा पूरी करने अपनी नवजात बेटी को फेंका झाड़ियों में .

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डूंगरपुर जिले के धम्बोला थाना क्षेत्र में करीब ढाई माह पहले सीथल गांव के पास झाड़ियों में मृत मिली नवजात बालिका के मामले का खुलासा पुलिस ने कर दिया है।
पोस्ट न्यूज़ . करीब ढाई माह पहले  डूंगरपुर जिले के सीथल गांव के पास झाड़ियों में मृत मिली नवजात बालिका के मामले का खुलासा पुलिस ने कर दिया है। अवैध संबंध के चलते एक मां ने अपनी कोख से जन्मी बेटी को मरने के लिए झाड़ियों में फैंक दिया था। पुलिस इस मामले में मंगलवार को आरोपित मां डोल कुंजेला बेडसा निवासी विमला (23) पुत्री कालूराम खांट को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। यहां से इसे
नारी निकेतन भेजा है। आरोपित प्रेमी फरार है, उसकी तलाश जारी है।
अवैध प्रेम का परिणाम। पुलिस ने पूछताछ में बताया कि दो वर्ष पूर्व विमला की शादी हुई थी। पति ने पत्नी को छोड़ दिया था। इसके बाद इसके अन्य युवक से प्रेम प्रसंग चल पड़ा। इसके चलते वह गर्भवती हो गई और मोडासा चिकित्सालय में छह जनवरी 18 को स्वस्थ बालिका को जन्म दिया। दो दिन बाद यहां आने पर आठ जनवरी को सुबह सीथल के निकट नाले की झाड़ियों में बच्ची को जिंदा छोड़ दनेा कबूला। पुलिस ने भारतीय दंड सहिता धारा 317, 304 में गिरफ्तार किया। आरोपित प्रेमी की पुलिस तलाश कर रही है।

नवजात के कपड़े से हुआ खुलासा। जांच अधिकारी दिलीप सिंह शक्तावत ने बताया कि आठ जनवरी की शाम को सीथल के निकट नाले की झाड़ियों में नवजात बालिका का शव मिला था। इस पर पुलिस वहां पहुंची और चिकित्सालय रिकार्ड जांच के दौरान विमला खांट की दो दिन पहले ही पुत्री होने की पुष्टि हुई। इस जानकारी के आधार पर पुलिस विमला तक पहुंची।

गरीब नवाज़ के 806वें उर्स का आगाज – बजे शादियाने, गूँज उठी तोपें

पोस्ट न्यूज़ .इस्लामिक माह रजब का चांद दिखाई देने के साथ ही सोमवार रात से सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 806वें उर्स की विधिवत शुरुआत हो गई। दरगाह परिसर में झांझ, शादियाने, नगाड़े बजाकर और बड़े पीर की पहाड़ी से पांच तोपों की सलामी देकर सोमवार रात रजब के चांद की घोषणा की गई। इसके साथ ही उर्स की मुबारकबाद का सिलसिला शुरू हो गया। लोगों ने एक-दूसरे को गले लगकर बधाई दी। ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह स्थित महफिलखाने में रात 11 बजे उर्स की पहली महफिल सजी और देर रात मजार शरीफ पर पहले गुस्ल की रस्म अदा की गई।
जायरीन की आवक से बढ़ी रौनक
उर्स शुरू होते ही देश भर से जायरीन के यहां पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। इसके चलते दरगाह क्षेत्र में रौनक बढ़ी है। जायरीन सिर पर चादर फैलाए जत्थे के रूप में दरगाह पहुंचने लगे हैं। वहीं मेला क्षेत्र में चारों तरफ कव्वालियां गूंज रही हैं। कायड़ विश्राम स्थली पर करीब 350 बसें अभी तक आ चुकी हैं। दरगाह में सोमवार को दिनभर जन्नती दरवाजे से गुजर कर जियारत करने के लिए अकीदतमंद में होड़ मची रही।
महफिल में झूमे अकीदतमंद महफिलखाने में सोमवार रात उर्स की पहली महफिल हुई। इसमें शाही कव्वाल असरार हुसैन व साथियों ने ‘ख्वाजा मोइनुद्दीन प्यारा बनड़ा…, मुख से घूंघट खोल…, मोरे ख्वाजा के अंगना होली है… Ó आदि कई कलाम पेश की अकीदतमंद को झूमने पर मजबूर कर दिया।

चाइना की बदमाशी, आपके व्हाट्सप्प को कर सकता है हैक – भारतीय सेना ने किया सावधान।

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भारतीय सेना ने तमाम भारतीय वॉट्सऐप यूजर्स के लिए एक चेतावनी जारी की है। उन्‍होंने यूजर्स से कहा है कि अगर आपके वॉट्सऐप पर भी ऐसा कुछ है, जिससे आपका डेटा हैक हो सकता है या आप पर नजर रखी जा सकती है तो सावधान रहें। सेना ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर एक वीडियो के जरिये यह समझाने की कोशिश की है। वहीं इसके साथ ही इससे किस तरह बचा जाए, इसके बारे में भी बताया गया है। उन्‍होंने कहा है कि अगर इन उपायों का ध्यान रखा जाए तो आपको सुविधा होगी। इसमें कहा गया है कि चाइनीज लगभग सभी डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर आपके डिजिटल वर्ल्ड में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

आप को बता दें की चेकइनीज कर रहे हैं ग्रुपों का इस्‍तेमाल भारतीय सेना ने वीडियो के जरिये बताया गया है कि आपकी डिजिटल वर्ल्ड में घुसपैठ करने के लिए अब किस तरह वॉट्सऐप ग्रुपों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए हैकिंग करने का नया तरीका निकाला है। वीडियो में बताया गया है कि चीनी नंबर +86 से शुरू होते हैं। यह आपके वॉट्सऐप ग्रुप से जुड़कर आपका पूरा डेटा हैक कर सकते हैं।
बचाव के उपाय।:
ऐसे बचें इससे बचने का सेना ने उपाय बताया है कि आप लगातार अपने वॉट्सऐप ग्रुप्स को चेक करें उनका लगातार ऑडिट करते रहें। कोशिश करें कि ग्रुप के सभी कॉन्टेक्ट्स नाम से सेव हों। अगर ग्रुप में अनजान नंबर्स हैं तो उन सबकी जांच करें। इसके अलावा अगर आप या ग्रुप का कोई साथी अपना मोबाइल नंबर बदल रहा है तो यह सुनिश्चित करने की कोशिश जरूर करें कि उसकी जानकारी ग्रुप एडमिन को दी जाए। अगर आपने अपना नंबर बदला है तो वह सिम कार्ड तोड़ दें। इसके अलावा उस नंबर पर बने अपने वॉट्सऐप अकाउंट को भी डिलीट कर दें। इस वीडियो के साथ लिखा है कि सजग रहे, सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। भारतीयसेना सोशल मीडिया उचित एवं नियमबद्ध एकाउंट को प्रोत्साहित करता है। हैकिंग जोरो पर है, उनके लिए जो असावधान हैं। अपने सोशल मीडिया को हमेशा चेक करें। व्यक्तिगत एवं ग्रुप एकाउंट के बारे में सावधान रहें, सुरक्षित रहें।

 

जिस जनता से हाथ जोड़ कर वोट मांगते है, सत्ता में आजाने के बाद हाथ उसी जनता का हाथ तोड़ने को उतावले होते है ये नेता – विधायक जीतमल खांट ने एक गरीब टोल कर्मी को पीटा

पोस्ट न्यूज़ चुनाव के वक़्त जिस जनता के सामने ये खादी धारी नेता शराफत का चोला पहन कर हाथ जोड़े हमारे दर पर ,… वोट मांगने की गुहार लगाते है ,.. और जनता इनके झांसो में आकर इन्हें भारी वोट देकर जिताती है उसके बाद ,.. ये खादी धारी नेता शराफत का चोला उतार कर अपने असली रंग में आजाते है और सत्ता के नशे में चूर ये ,… खादी धारी ,.. अपने सारे वादे भूल बजाये जनता के सेवक बनने के,.. उनके मालिक बन जाते है और जनता को अपना गुलाम समझने लगते है ,… और ऐसे नेता अपनी बेशर्मी का प्रदर्शन अक्सर करते रहते है ,.. ऐसे ही एक नेता ने अपनी gunndai और दादागिरी बताते हुए एक 6 हज़ार रूपये कमाने वाले टोल कर्मी से मारपीट की ,.. ये नेता है बांसवाडा जिले के गड़ी के विधायक जीतमल खंत जो राजस्थान सरकार के पूर्व राज्य मंत्री रह चुके है जिन्होंने सरकारी राशि का जम कर दुरूपयोग किया था।
आइये हम आपको दिखाते है एक गरीब कर्मचारी की पिटाई करते ये नेता का वीडियो ,.. हमारे साथ इस वीडियो के आखिर तक बने रहिएगा और अभी तक हमारे चेनल को snskraaib नहीं किया है तो एक बार सन्स्क्राइब करिए और पास में घंटे का बटन दबाना ना भूले

जीहाँ ये है गडी के विधायक जीत मल खांट का वीडियो जिसने सत्ता के नशे में मदमस्त हो कर एक छोटी बात पर उदयपुर रोड स्थित बडलिया टोल नाके पर केबिन में घुस कर एक टोल कर्मी से मारपीट की उसको थप्पड़ों और घूसों से मारा उसके बाल खीच कर ,… गालियों देते रहे ,.. हालाँकि जिस भाषा का इस्तमाल विधायक ने इस गरीब कर्मचारी के लिए किया उस भाषा से ही जनता को इस विधायक का महिमा मंडन करना चाहिए ,.. और एक नेता को उसकी ओकात दिखानी चाहिए कि वह जनता का मालिक नहीं बल्कि जनता का सेवक है ,…. सत्ता के नशे में चूर हो कर जनता को ही मारने और गालियाँ देने के लिए जनता ने वोट नहीं दिए थे ,. वोट इसलिए दिए है कि उसने जनता के सामने हाथ जोड़ कर उसकी सेवा का वादा किया था ,…. जो अब जनता का बाप बना बैठा है चुनाव के वक़्त,….. एक मांगने वालों की तरह हाथ जोड़े दर दर गया था ,.. जनता के पैर पडा ,… किसी गरीब मामूली कर्मचारी पर अपनी थाणे दारी दिखाने के लिए जनता ने वोट नहीं दिया था ,…

लेकिन बांसवाडा जिले के गडी विधायक जीतमल खांट ने एसा कोई महान काम नहीं किया बल्कि एक गरीब मजलूम युवा की ज़रा सी गलती पर,… अपनी मर्दानगी दिखाने के लिए अपने हुजिरियों समर्थकों के साथ टूट पड़ा ,… अगर एसी मर्दानगी दिखानी थी तो चुनाव में किये वादे पूरी कर के दिखाते ना कि एक गरीब को पीट कर ,..
ये घटना है शुक्रवार की जब विधायक जीतमल खांट किसी कार्यक्रम के लिए जा रहे थे और रास्ते में उदयपुर बांसवाडा रोड पर बडलिया टोल नाके पर जब एक टोल कर्मी ने प्राइवेट गाडी देख कर पैसे मांग लिए,…… बस फिर क्या था इन विधायक श्रीमान का ईगो हर्ट हो गया और पूरी दादागिरी दिखाते हुए ये अपनी गाडी से उतरे और केबिन में बैठे टोल कर्मी २३ वर्षीय प्रियंक सिंह पर दुश्मनों की तरह टूट पड़े,…. विधायक की इस काली करतूत का वीडियो भी वायरल हुआ जिसमे विधायक खांट कुर्सी पर बैठे एक टोलकर्मी के बाल खींचकर उसे नीचे गिरा देते हैं और फिर जोर से थप्पड़ जड़ रहे हैं। इस दौरान पीली शर्ट पहने उनका एक समर्थक भी टोल कर्मी पर टूट पड़ता है । केबिन में कर्मचारी से इस तरह मारपीट देख उसका एक साथी बीचबचाव की कोशिश करता है। लेकिन खांट बार-बार उसे अंगुली दिखाकर गालियाँ देते और धमकाते नजर आते हैं। टोलकर्मी से मारपीट की वजह विधायक की गाडी से टोल मांगना बताया जा रहा है ,….
सत्ता के इन अहंकारियों को यह पता नहीं है यह जनता है जिसने इनको यहाँ बैठाया है इन्हें उतारना भी जानती है ,…. इस सम्बन्ध में अभी तक पुलिस में टोल कंपनी या टोल कर्मी की तरफ से पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाई गयी है ,…….. शिकायत दर्ज नहीं करवाने का कारण राजनैतिक दबाव हो सकता है ,…………..

लेकिन हम आपसे कहना चाहते है ,.. ऐसे किसी भी नेता या मंत्री की इस तरह की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं करणी चाहिए ,.. अगर जहाँ कार्य कर रहे हो वह संस्था साथ ना दे तो खुद पर्सनल एसी गुंडागर्दी के खिलाफ आवाज़ उठाकर मामला दर्ज करवाना चाहिए ,…. हो सकता है पुलिस भी कोई कारवाई नहीं करे ,… लेकिन ऐसे लोगों के खिलाफ एफ़ाइआर दर्ज होनी चाहिए ,..चाहे वो कितना भी पॉवर फुल क्यूँ ना हो

पुलिस नहीं करती है तो कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाओ ,….. बोलोगे नहीं तो रोज़ ये लोग हमे पिटते रहेगें आज ये है तो कल कोई और होगा परसों हम खुद होंगे इसलिए ऐसे नेता विधायक यहाँ तक की मंत्री भी हो तो उनके खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए ,….. ये लोग आये थे हमारे पास हमारी सेवा करने का प्रण लेकर हाथ जोड़े आते थे ,.. इन्हें हमारा मालिक मत बनने दो दोस्तों वरना खादी धारी गुंडा गर्दी करते रहेगें और हमे गुलाम समझते रहेगें ,……
देखिये विडियो

https://youtu.be/UrEjdEZiS5E

इस देश की गरीबी का कारन तुम नहीं , बल्कि उन्हें लूटने वाले तुम जैसे आमिर लोग हैं – हिट हो रहे है फिल्म “रेड” के डायलॉग्स

की फिल्म ‘रेड’ शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म में एक ओर जहां अजय देवगन और सौरभ शुक्ला की जबर्दस्त एक्टिंग देखने को मिली वहीं उनकी डायलॉग डिलीवरी भी ऑडियंस को अट्रैक्ट कर रही है। डायरेक्टर राजकुमार गुप्ता की इस फिल्म के डायलॉग्स रितेश शाह ने लिखे हैं। फिल्म में ‘इस घर में कोई सरकारी नौकर मच्‍छर मारने नहीं आ सकता, तू रेड मारने आया है…’। ‘मैं बस ससुराल से शादी वाले दिन खाली हाथ लौटा हूं, वरना जिसके घर सुबह सुबह पहुंचा हूं कुछ लेकर ही आया हूं…’ जैसे डायलॉग्स हैं। फिल्म में अजय देवगन के साथ इलियाना डीक्रूस ने स्क्रीन शेयर की है। इसके पहले दोनों की जोड़ी फिल्म ‘बादशाहो’ में भी नजर आई थी।

शर्मा मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के नौसिखिये डॉक्टर लोगों की जान के लिए खतरा – वरिष्ठ पत्रकार की जान के साथ किया खिलवाड़।

शर्मा हॉस्पीटल में होता है मरीजों की जान के साथ खिलवाड, मानव अंगों से होती है छेड़छाड़

उदयपुर। हम आपको १५ मार्च की न्यूज़ में बताया था कि उदयपुर में भुवाणा चौराहे पर स्थित शर्मा मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पीटल में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है और वहां उपचार करवाना खतरनाक साबित हो सकता है। इस हॉस्पीटल में मरीजों का उपचार नहीं, बल्कि उन्हें ऐसी हालत में पहुंचा दिया जाता हैं कि अहमदाबाद या अन्य बड़े अस्पतालों में ले जाकर ही उनकी जान को बचाया जा सकता है। आज की इस न्यूज़ में हम आपको वो सारे सबुत बतायेगें जिसके इलाज के लिए इन्होने लाखों रूपये तो लेलिये लेकिन एक मामूली मर्ज का नोसिखिये और नालायक डॉक्टर द्वारा इलाज करते करते कैसे मौत के मूंह में पहुचा दिया।

उदयपुर के भुवाना चोराहे पर स्थित पांच सितारा नुमा बने मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल,.. शर्मा हॉस्पिटल की । इस हॉस्पीटल का संचालन डॉ. अनिल शर्मा और उसकी पत्नी कुसुम शर्मा द्वारा करना बताया जाता है, जहां इनका नालायक और नोसिखिया बेटा डॉक्टर धवल शर्मा डॉक्टरी जैसे पेशे को मजाक समझते हुए लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
मल्टी स्पेशलिस्ट के नाम पर लूटने वाले इन नोसिखिये डॉक्टरों ने उदयपुर शहर के वरिष्ठ पत्रकार नारीश्वर राव को मौत के मूंह में धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ी,…. इन नोसिखिये डॉक्टरों के पास पत्रकार नारीश्वर राव गए तो थे किडनी में पथरी निकलवाने का मामूली इलाज करवाने लेकिन इन्होने किडनी को इंजर्ड करते हुए हार्ट का पेशेंट बता दिया और 10 दिन में एक हँसते खेलते जवान को दुनिया से विदा करने का इंतजाम कर दिया ,… वह तो ठीक है परिजनों की तत्परता और शहरवासियों की दुआएं काम आई कि अहमदाबाद ले जाकर उनकी जान बचाई जा सकी।

इस नोसिखिये डॉक्टर धवल शर्मा द्वारा उपचार के नाम पर की गई काली करतूत का खुलासा अहमदाबाद के सिम्ंस हॉस्पीटल में हुआ। अहमदाबाद के डॉक्टरों ने जब इस बात का खुलासा कि उदयपुर के वरिष्ठ पत्रकार नारीश्वर राव की राइट किड्नी में इंजरी है, तो उनके परिजनों के हाथ-पैर फुल गए। पता चला कि शर्मा हॉस्पीटल में नौ फरवरी को डॉ. धवल शर्मा द्वारा पूर्व में ऑपरेशन के दौरान डाले गए स्टैंट को अनाड़ी तरीके से री-मूव करते समय नारीश्वर राव की किड्नी चोटिल हो गई। इससे उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसका खुलासा सिंस हॉस्पीटल द्वारा दिए गए डिस्चार्ज सर्टिफिकेट से भ्भी होता है, जिसमें बताया गया है कि मरीज को यूरोअप्सीस और किड्नी में गंभीर चोट है, जिसका वहां पर उपचार किया गया।

रिपोर्ट बताती है कि किस तरह शर्मा हॉस्पीटल के नालायक डॉक्टर ने एक अच्छे खासे इंसान की जान को खतरे में डाल दिया। अब हम आपको दिखाते हैं शर्मा हॉस्पीटल का डिस्चार्ज सर्टिफिकेट, जिसमें बताया गया है कि मरीज नारीश्वर राव को यूरीन का इंफेक्शन नहीं, बल्कि हार्ट की तकलीफ है और ११ व १२ फरवरी को भारी मात्रा में श्री राव को दवाइयां दी गई, जिससे उनकी तबीयत और ज्यादा बिगड़ गई और उन्हें अहमदाबाद रेफर किया गया। डिस्चार्ज सर्टिफिकेट में बताया गया कि नारीश्वर राव को जीवन रक्षक उपकरणों के साथ हॉयर सेंटर के लिए रेफर किया जा रहा है। इस दौरान डॉक्टर कुसुम शर्मा और धवल शर्मा ने मरीज नारीश्वर राव और परिजनों को बताया कि सिम्स हॉस्पीटल में उनके परिचित हार्ट विशेषज्ञ डॉ. धवल प्रजापति है, जिनको उनका रेफरेंस देना, लेकिन वहां जाने के बाद पता चला कि नारीश्वर राव को हार्ट की कोई बीमारी ही नहीं है, बल्कि उन्हें यूरीन इंफेक्शन और धवल शर्मा द्वारा दी गई किड्नी की चोट है, जिसका सिंस हॉस्पीटल में दस रोज तक उपचार करके श्री राव की जान बचाई गई। देखिए शर्मा हास्पीटल से दिए गए डिस्चार्ज सर्टिफिकेट को, जिसमें लिखा गया है कि विथ ऑक्सिजन मॉक्स रेफर टू हॉयर सेंटर।

सारी रिपोर्ट और सबूतों के आधार पर ज़ाहिर है कि शर्मा हॉस्पीटल में मरीजों का उपचार नहीं होता है, बल्कि यहां पहुंचने वाले मरीजों की तबीयत को और अधिक खराब करके उन्हें हायर सेंटर भेज दिया जाता है। पहले तो यहां पर इलाज के नाम पर भारी भरकम फीस वसूली जाती है। बाद में मरीज की तबीयत और बिगाडक़र हॉयर सेंटर भेजा जाता है। अंदेशा होता है कि इनका हॉयर सेंटर से भी कमीशनखोरी का धंधा है। रिपोर्ट जिसमें बताया गया है कि नारीश्वर राव का २० जनवरी को शर्मा हॉस्पीटल में किड्नी स्टोन का ऑपरेशन किय गया और स्टैंट डाला गया, जिसमें बताया गया है कि स्टैंट को तीन से चार हफ्फ्फ्ते बाद री-मूव किया जाएगा। इसी स्टैंट को री-मूव करने के दौरान नालायक डॉ. धवल शर्मा ने नारीश्वर राव की किड्नी को इंजर्ड किया था और उनकी जान पर बन आई थी।
शर्मा हॉस्पीटल से २० से २४ जनवरी के बाद दिया गया डिस्चार्ज सर्टिफिकेट
निष्कर्ष : तो देखा आपने कैसे शर्मा हॉस्पीटल में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ और मानव अंगों के साथ छेड़छाड़ की जाती है। हम आपसे अपील करते है कि ऐसे नालायक और नौसिखिये डॉक्टरों से अपने परिजनों का उपचार नहीं करवाए, क्योंकि ये डॉक्टर आपके अपनों की जान को खतरे में डाल सकते हैं।
हमारे पास कुछ और मरीजों की रिपोर्ट है जिनकी जान के साथ इन्होने खिलवाड़ किया है जिसको हम आपको हमारे अगले भाग में बताएगें

राजनीति में आने वाली महिलाएं इतनी कमज़ोर नहीं होती, लेकिन परिवार वालों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को पारिवारिक माहोल का ख्याल रखना चाहिए।

उदयपुर पोस्ट की एक  वरिष्ठ महिला भाजपा नेता से बेबाक बातचीत उन्होंने राजनीति में आने वाली महिलाओं से जुडी समस्या पर खुल कर बात की .

पार्षद गरिमा पठान की मौत राजनितिक हलकों में शोक्ड की तरह हो गयी है, ख़ास कर उन महलाओं के लिए जो अभी अभी राजनीति में आई है और पार्टी में पद के साथ साथ घर भी संभाल रही है। गरिमा पठान की मौत की खबर सुन कर हर महिला पार्षद सकते में आगई उनका कहना है कि गरिमा पठान एक एक्टिव पार्षद थी जिनका व्यवहार सभी से काफी अच्छा था।
उदयपुर पोस्ट की बात एक वरिष्ठ भाजपा महिला नेता से हुई जो तीन बार पार्षद भी रह चुकी है उन्होंने अपने बेबाक अंदाज़ में राजनीति में महिलाओं की स्थिति पर काफी कडवी सच्चाई बयान की। अपने अनुभवों के आधार पर उन्होंने काफी ऐसे सच बताए जो कि चोंकाने वाले भी थे। उन वरिस्थ महिला नेता का कहना है कि जब एक महिला राजनीति में आती है तो पहली बात तो यह कि वह कभी अपनी स्वेच्छा से नहीं आती किसी परिजन या परिवार में दखल रखने वाले राजनितिक व्यक्ति के सुझाव पर ही किसी पार्टी से जोड़ी जाती है। जुड़ने के बाद उस महिला का कद पार्टी में या किसी छोटे ही सही संवेधानिक पद से उसका कद बढ़ता है तो परिवार वाले कई बार सपोर्ट करते है लेकिन कई बार उसको घर में ताने और उलाहने सुनने पढ़ते है। कभी पति का ईगो हर्ट होता है तो कभी परिजन घर में वक़्त नहीं दिए जाने पर अक्सर नाराज़ चलते है। ऐसे में राजनीति में आई वो महिला बाहर चाहे उसको कितनी भी वाह वाही मिल जाए लेकिन घर में वह अक्सर तनाव में जीती है। और कई बार यह तनाव एक महिला के लिए बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है नोबत लड़ाई झगड़ों की भी आजाती है। तो अगर किसी पहिला का पति या परिजन उस महिला को राजनीति में जाने की इजाजत दे रहे है तो कम से कम दिल भी बड़ा रखना चाहिए।

उदयपुर पोस्ट के साथ वरिष्ठ भाजपा महिला नेता ने साझा करते हुए कहा कि जब एक महिला राजनातिक पार्टी में प्रवेश करती है तो पार्टी के वरिस्थ नेताओं को पुरुष नेताओं को भी उन महिलाओं का और उनकी पारिवारिक प्रथ्भूमि का ख़याल रखना चाहिए। पार्टी ज्वाइन करने का यह मतलब नहीं कि पुरुष नेता या वरिस्थ नेता उन्हें अपनी जागीर समझने लगे और जैसा चाहे वैसा व्यवहार करें और महिला नेता द्वारा किसी अवांछित बात का विरोध करने पर उसके बारे में गलत बयानी सरेआम करते रहे। किसी के चरित्र पर गलत बयानी से चाहे पुरुष को फर्क नहीं पढ़े लेकिन एक महिला को फर्क पड़ता है उसका परिवार बिखर सकता है वह महिला अवसाद में धकेली जा सकती है। इसलिए हर राजनातिक पार्टी के वरिस्थ नेताओं को इस बात का ख़याल रखना चाहिए कि पार्टी में आने वाली महिला का पूरा सम्मान हो और सभी एक सम्मान की द्रेअश्थि से देखें। वरिष्ठ महिला भाजपा नेता यह भी कहती है कि एसा नहीं है कि पार्टी में सभी वरिष्ठ नेता एक ही नियत के होते है कई नेता ऐसे होते है जो महिला नेताओं को शाम होते ही अपने घर जाने की सलाह देते है। शहर विधायक और राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया का नाम लेते हुए वे कहती है कि कटारिया जी अक्सर महिला नेताओं को पूरा सम्मान देते है साथ कभी किसी पार्टी के कार्य से जयपुर भी बुलाना हुआ तो कार्य समाप्त होते ही वापसी की सलाह देते हुए रवाना कर देते है। हर राजनीति पार्टी में महिलाओं का ख़याल रखा जाना चाहिए।

पार्षद गरिमा पठान की संदिग्ध मौत उठा रही है कई अनसुलझे सवाल, जिनके जवाब खोजेगी पुलिस।

उदयपुर। बुधवार की रात उदयपुर नगर निगम वार्ड 46 की पार्षद गरिमा पठान की मौत कई सवाल खड़े कर रही है जो हर शहरवासी के ज़हन में घूम रहे है। पुलिस हालाँकि तप्तीश में लगी हुई है लेकिन आत्महत्या का तरिका व् कारण आत्महत्या पर सवालिया निशान लगा रहा है।
पुलिस और डॉक्टरों की माने तो पार्षद की मौत पानी में डूबने से ही हुई है क्योंकि डॉक्टरों के अनुसार मृतका के फेफड़ों और लंग्स में पानी भरा हुआ पाया गया और ज़िंदा व्यक्ति पानी में डूबता है तब ही पानी फेफड़ों और लंग्स में पानी भरता है। पुलिस के अनुसार घर का दरवाजा भी अंदर से बंद था इसलिए किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा किसी वारदात की आशंका भी क्षीण हो जाती है।
सबसे बड़ा सवाल जो आज हर शहरवासी की जुबां पर है वह यह कि आखिर महज़ 500 लीटर की पानी की टंकी जिसमे सिर्फ डेड फिट पानी भरा हुआ और पानी की टंकी का मूंह भी इतना छोटा कि किसी स्वस्थ हेल्दी इंसान ( जैसी मृतका थी ) का अन्दर उतरना इतना आसान नहीं तो फिर पानी की टंकी में कैसे डूबी ?
दूसरा बड़ा सवाल कि जब रात को १२ बजे तक बेटे को परीक्षा की तय्यारी में सहयोग कर रही थी सब कुछ ठीक था तो आखिर 12 से 2 बजे के बिच ऐसा क्या हुआ कि मृतका ने एसा कदम उठाने की ठान ली ?
क्या एसा तो नहीं कि व्यक्तिगत कारणों से पहले ही तनावग्रस्त थी और ऐसे में रात को ही किसी ने इतना तनाव में ला कर आत्महत्या के लिए प्रेरित कर दिया ?
या ऐसा तो नहीं कि किन्ही कारणों से कोई उन्हें किसी तरह से ब्लेकमेल कर रहा हो ?
गरिमा पठान की आत्महत्या के लिए जिस किसी ने भी सूना अवाक रह गया उनके परिचितों को एकाएक यकीं नहीं आया क्यूँ कि वह इतनी कमज़ोर महिला नहीं थी कि आत्महत्या जैसा कदम उठा सकें। पुलिस सारे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।
अगर यह सीधा साधा तनाव के कारण आत्महत्या का मामला होगा तो अलाग्बात है लेकिन अगर इसमें किसी रसूखदार का इन्वोल्मेंट हुआ तो पुलिस की कहानी भी प्रभावित हो सकती है ? लेकिन जनता को पुलिस की जांच पर पूरा भरोसा है कि वह एक मृतका के साथ नयाँ जरूर करेगी।
हालाँकि मृतका गरिमा पठान के परिजन और उनके पति हामिद ने किसी तरह की अनहोनी या हत्या की आशंका नहीं जताई है ना ही पुलिस रिपोर्ट में एसी किसी बात का जिक्र किया गया है।