इंसानियत को शर्मसार हो जाए एसी तस्वीर है ये – मरीज का पैर काट कर बना दिया तकिया।

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Udaipur Post News-संवेदनाएं तो मानो जैसे आजके इंसान में बची ही नहीं ना तो किसी इंसान की जान की कोई कीमत रह गयी है ना ही उसके जिस्म के कटे हुए अंग की कीमत। धरती के भगवान् कहे जाने वाले डॉक्टर तो इस मामले में दो कदम हमेशा आगे रहते है। दुर्घटना में घायल मरीज अस्पताल में इलाज कराने आया तो डॉक्टर ने इंसानियत को शर्मसार करने वाला कृत्य कर दिया घायल का कटा हुआ पैर ही उसके सिराहने तकिये की जगह रख दिया। डॉक्टरों की इस हरकत को जिस किसी ने देखा खुद के इंसान होने पर ही उसको शक होने लगा।
मामला है यूपी में झांसी शहर महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज का जहाँ इमरजेंसी वार्ड में इलाज के लिए व्यक्ति के सिर के नीचे उसके कटे पैर का तकिया बनाकर रख दिया। डॉक्टर की इस हरकत ने हॉस्पिटल में मौजूद लोगों को हैरत में डाल दिया। जिसके तुरंत बाद उन्होंने घटना की जानकारी सीएमएस को दी।
शनिवार सुबह मऊरानीपुर इलाके के बम्हौरी और खिलारा के बीच स्कूल के बच्चों से भरी बस पलट गई। इस हादसे में छह बच्चे दबकर घायल हो गए। इस ही हादसे में बस के क्लीनर लहचूरा थाना इलाके के गांव इटायल के रहने वाले घनश्याम का बायां पैर घुटने के नीचे से कटकर अलग हो गया।
घायल बच्चों का इलाज तो मऊरानीपुर के हेल्थ सेंटर में कर दिया गया गया, जबकि घनश्याम को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। परिवार के लोग जब पीड़ित को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो डॉक्टरों ने उसके कटे हुए पैर को उसके सिर के नीचे तकिया की जगह लगा दिया।
– इसके तुरंत बाद वहां मौजूद लोगों ने नाराजगी जताते हुए हॉस्पिटल के सीएमएम को फोन करके सूचना दी।
– घटना की जानकारी मिलते ही मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. हरीशचंद्र आर्य मौके पर पहुंचे। उन्होंने तुरंत इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों को फटकार लगाई। इसके बाद मरीज के सिर के नीचे से कटा हुआ पैर हटवाकर तकिया लगवाया।

सरकार ने दिखाई गंभीरता…
– यूपी सरकार ने महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज झांसी में मरीज का पैर काटकर उसके सिर के नीचे रखने के मामले को गंभीरता से लिया है।
– मंत्री से लेकर मुख्य सचिव तक ने संवेदनशीलता दिखाते हुए शुरआती जांच में दोषी पाए गए डॉक्टरों और स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए।
– चिकित्सा शिक्षा मंत्री के निर्देश पर दो डॉक्टर और दो नर्स को सस्पेंड कर दिया गया है। जबकि डॉक्टर ऑन कॉल को चार्जशीट दी गई है।
– शासन ने इस मामले में जांच बैठा दी है और मेडिकल कालेज की प्रधानाचार्य से पूरे मामले पर रिपोर्ट तलब की गई है।

छपास के रोगी गए थे संवेदना जताने लेकिन संवेदनहीन बन कर – बलात्कार पीडिता और माँ के फोटो किये जग जाहिर।

उदयपुर। चाहे कोई राजनीति संगठन हो चाहे सामाजिक या धार्मिक संगठन हर संगठन के चुनिंन्दा पदाधिकारियों को कोई सामजिक सरोकार से जुड़ा सार्थक काम करने से ज्यादा जरूरी लगता है अपने ज्ञापन रूपी कार्य का फोटो खिचवा कर अखबारों में छपवाना। इस कार्य में माहिर ये संगठन और पार्टी के लोग सारी मान मर्यादा नियम कायदे भूल बैठते है इन्हे याद रहता है तो सिर्फ यह कि अगले दिन इनका फोटो अखबारों के प्रातः में प्रमुखता से कैसे आये।
छपास के इन रोगियों के पास ना तो संवेदनाएं है ना ही कोई सामाजिक सरोकार और इसका जीताजागता उदाहरण मिला एक बलात्कार पीड़िता मासूम बच्ची और उसकी माँ की पहचान उजागर करने के मामले में। छपास के इन रोगियों की करतूत को दैनिक अखबार दैनिक भास्कर के उदयपुर संस्करण में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया समाचार पत्र ने छपास के रोगियों की संवेदनहीनता को प्रमुखता से जग जाहिर किया।
हाल ही में चित्तोड़ के भदेसर में ५ साल की मासूम बच्ची हैवानियत का शिकार बनी जिसका इलाज उदयपुर के महाराणा भूपाल चिकित्सालय में चल रहा है। शुक्रवार को अपनी संगठन और राजनीति की रोटियां सेकने कांग्रेस, शिवसेना के पदाधिकारी और महिला आयोग की सदस्य पीड़िता मासूम बच्ची और उसकी मान से मिलने अस्पताल के आईसीयू तक जा पहुंचे। गए थे पीड़िता के प्रति सहानुभूति और संवेदना जाहिर करने लेकिन संवेदना और जिम्मेदारियों को ताक में रख कर इन महान लोगों ने आईसीयू में पीड़िता बच्ची और उसकी माँ से मिलते हुए अपना फोटो सेशन करवा कर मीडिया में जारी भी कर दिया जब इनसे जवाब मांगा कि इन्होने ऐसा क्यों किया तो बोले गलती हो गयी।
एडवोकेट राजेन्द्र सिंह हिरन ने बताया कि किसी भी दुष्कर्म पीड़ित की पहचान उजागर करने वाले के खिलाफ आईपीसी की धारा 228ए के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। इसमें दो वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
संवेदनहीनता की हद तो यह है कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए बने महिला आयोग की सदस्य सुषमा कुमावत ने मासूम और उसकी मां की फोटो sushmakumawat105@gmail.com ईमेल से खबर प्रकाशित कराने के लिए मीडिया तक को भेज दी।

वहीं भदेसर के पूर्व प्रधान और कांग्रेस नेता अर्जुन सिंह चुंडावत ने भी बच्ची और उसकी मां के फोटो krishnapalsinghmlsu@gmail.com ईमेल से भेज सार्वजनिक कर दिए। ऐसे ही शिवसेना ने gaurav.nagdashivsena@gmail.com से बच्ची की मां की फोटो मय प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी। जब उनसे इस बारे में सवाल किया था तीनों के ही पदाधिकारियों ने गलती स्वीकार करते हुए कहा कि-हमसे बहुत बड़ी भूल हो गई है।

छपास के इं रोगियों पर बलात्कार पीडिता की पहचान उजागर करने के लिए कोई कारवाई हो ना हो लेकिन अधिकारियों ने मामला सामने आने पर कारवाई का जरूर आश्वासन दिया है और ऐसे आश्वासन में कारवाई कहाँ तक होती है यह सब जानते है। दैनिक भास्कर में छापी खबर के अनुसार देखते है जिम्मेदार अधिकारियों ने इस मामले में क्या बयान दिए।

यदि ऐसा है तो जांच करेंगे कि कहां से औैर किसने दुष्कर्म पीड़ित बच्ची के फोटो जारी किए हैं। इसके बाद कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
-हर्ष रत्नू, एएसपी, उदयपुर

जेजे एक्ट के तहत पीड़िता का इस प्रकार से फोटाे नहीं जारी सकते हैं। फिलहाल प्रकरण हमारे सामने नहीं आया है। हम जांच करेंगे।
-सुधीर जोशी, एएसपी, चितौडग़ढ़

आईसीयू में फोटोग्राफी प्रतिबंधित है, मामले की जांच कराएंगे : उपाधीक्षक

नियमानुसार आईसीयू में भर्ती बच्ची की हालत देखने मास्क, कैप, अंदर की चप्पलें आदि पहनकर जा तो सकते हैं, क्योंकि भर्ती गंभीर मरीजों को संक्रमण का सर्वाधिक खतरा रहता है। आईसीयू सैरसपाटा करने की जगह नहीं है, जहां फोटोग्राफी प्रतिबंधित है। पब्लिसिटी के लिए दुष्कर्म पीड़ित बच्ची और उसकी मां के फोटो वायरल करना निंदनीय है। मामले की जांच कराई जाएगी।
-डॉ. रमेश जोशी, उपाधीक्षक एमबी हॉस्पिटल

सोशल मिडिया ने 16 साल पुराने हादसे में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को एक बार फिर पिटवाया – जानिये वायरल विडियो का सच

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उदयपुर। राजस्थान के गृहमंत्री और शहर विधायक गुलाबचंद कटारिया पर बीकानेर के श्री कोलियात जी में हुआ हमला। हमले में उनको व उनके साथियों को गंभीर चोटें आई है एसी पोस्ट के साथ गुलाबचंद कटारिया का एक वीडियो सोशल मिडिया वायरल हो रहा है जिसकी चर्चा शहर ही नहीं पुरे राज्य में है। व्हात्सप के हर एक ग्रुप में यह वीडियो वायरल किया जा रहा है।
पांच मिनट का यह वीडियो दरसल 16 साल पुराना है जिसको अब कटारिया की साख गिराने की नियत से वायरल किया जारहा है। इस वीडियों को देख कर जहाँ एक तरफ कटारिया विरोधी जम कर मजे ले रहे है वही कटारिया समर्थक चिंतित दिखाई दे रहे है लेकिन इस वीडियो को वायरल करने की मंशा चाहे किसी की साख गिराने की हो लेकिन वीडियो के वायरल होने से गृहमंत्री का कद बढ़ता हुआ सा लग रहा है।
पांच मिनट का यह वीडियो  बीकानेर के श्री कोलियात जी के एक प्राथमिक स्वास्थ केंद्र का है जहाँ कटारिया और उनके समर्थकों को लोग जम कर पीट रहे है। बाद में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को एक अस्पताल में बैठे हुए भी दिखाया है जहाँ वे पुलिस से बात चित कर रहे है।
जानकारी के अनुसार  राजस्थान के बीकानेर जिले का श्री कोलियात जी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जहां पर आज से 16 साल पूर्व गुलाबचंद कटारिया और उनके साथियों पर हमला हुआ था। दरअसल उस समय प्रदेष में अषोक गहलोत की सरकार थी और गुलाब जी नेता प्रतिपक्ष की भुमिका में थे। उन दिनों भाजपा के देवी सिंह भाटी भाजपा से खफा हो गए थे और सामाजिक न्याय मंच के नाम से अपनी पार्टी बना ली थी। तभी कोलियात जी में मौसमी बिमारियों का ऐसा प्रकोप छाया कि मलेरिया से काफी लोगों की मौत हो गई थी। ऐसे में विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने तय किया कि गांव का दौरा करने के लिए नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया और पार्टी के पदाधिकारी जाएंगे। सूत्र बताते है कि सामाजिक न्याय मंच के प्रमुख देवी सिंह भाटी को यह बात नगवार गुजरी और उनके समर्थकों ने गुलाबचंद कटारिया और उनके साथ गए लोगों पर हमला कर दिया था जिसमें वह काफी चोटिल हो गए थे। वैसे कुछ जानकार तो यह भी बताते है कि कटारिया की पिटाई से आहत उनके समर्थकों ने एक दिन के लिए उदयपुर बंद भी रखा था। सोलह साल बाद यह विडियो अचानक किसी के हाथ लग गया और उसने सोषल मीडिया पर इसे वायरल कर दिया। यह बात और है कि उस समय कटारिया जी को उतनी सहानुभूति नहीं मिली थी, जितनी इन दो दिनों में मिली है। तथाकथित लोगों ने वर्तमान हमले की बात कहते हुए अफवाह फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। वैसे इस वीडियो के वायरल होने के बाद कयास तो यह भी लगाए जा रहे है कि आने वाले चुनाव में कटारिया के प्रति लोगों का समर्थन बड़ेगा। क्योंकि भारतीय जनता पार्टी और एक गांव की जनता की कुषलक्षेम लेने पंहुचे थे उसी समय यह हमला हुआ था इसमे कटारिया जी का समर्पण भाव साफ – साफ जाहिर होता है
विडियो में देखिये क्या हुआ था 16 साल पहले
https://www.youtube.com/watch?v=Vz4obHjZcfQ&feature=youtu.be

मुट्ठी संसथान ने महिलाओं के साथ मनाया सप्ताह बताए कि क्या है महिलाओं के अधिकार

पोस्ट न्यूज़। महिलाओं की सशक्तिकरण के लिए कार्य करने वाली मुट्ठी संस्थान द्वारा शहर के आसपास गाँव की महिलाओं की जागरूकता के लिए “एक सप्ताह महिलाओं के नाम” कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसमे गाँव की महिलाओं और स्कूल में पढने वाली छात्राओं को विभिन्न मुद्दों पर जागरूक किया एवं कई मनोरंजक कार्यक्रम भी आयोजित किये।
मुट्ठी संस्थान की संस्थापक अर्चना शक्तावत और सरोज पटेल ने बताया कि महिला दिवस के के मौके पर मुट्ठी संसथान द्वारा ” एक सप्ताह महिलाओं के नाम ” साप्ताहिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। ५ मार्च से शुरू हुआ महिलाओं के सम्मान में यह सप्ताह ९ मार्च तक चला जिसके दौरान उदयपुर के पास मदार गाँव व् उसके आसपास के एनी गावों में यह साप्ताहिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमे महिलाओं और स्कूली छात्राओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। गाँव में महिलाओं की पांच दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गयी जिसमे महिलाओं के अलग अलग तरह की गतिविधियां करवाई गयी। कार्यशाला में महिलाओ और छात्राओं को योन उत्पीड़न, मासिक धर्म,स्वास्थ्य, महिला सम्बन्धी कानूनी जानकारी दी गयी। समापन के दौरान महिलाओं द्वारा कई मनोरंजक कार्यक्रमम प्रस्तुत किये गए। छात्राओं और गाँव की महिलाओं ने अपनी प्रतिभा का खासा प्रदर्शन किया। गाँव की महिलाओं ने अपने कई अनुभवों को साझा किया कई महिलाओं ने बहुत ही मनोरंजक किस्से भी सुनाए।

सम्मान से मरना इंसान का हक है – इच्छामृत्यु को सुप्रीम कोर्ट से इजाजत

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इच्‍छा मृत्‍यु को लेकर पिछले काफी समय से चल रहे मामले पर शुक्रवार को सप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. पांच न्‍यायाधीशों की बेंच ने कुछ शर्तों के साथ इच्‍छा मृत्‍यु का इजाजत दे दी है. कोर्ट की ओर से यह भी कहा गया कि इस दौरान इच्छा मृत्यु मांगने वाले के सम्‍मान का ख्‍याल रखना भी बेहद जरूरी है. फैसले में यह भी साफ किया गया कि वसीयत न होने की स्थिति में बीमार व्यक्ति के परिजन हाईकोर्ट में इच्छा मृत्यु की मांग कर सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि लिविंग विल पर भी मरीज के परिवार की इजाजत जरूरी होगी। साथ ही एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम भी इजाजत देगी, जो यह तय करेगी कि मरीज का अब ठीक हो पाना नामुमकिन है।

दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, “बीमार व्यक्ति यह तय कर सकता है कि लाइफ सपोर्ट कब बंद करना है. लाइफ सपोर्ट उसी स्थिति में बंद किया जा सकता है, जब मेडिकल बोर्ड यह घोषित कर दे कि व्यक्ति का इलाज नामुमकिन है.”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वसीयत का पालन कौन करेगा और इस प्रकार की इच्छा मृत्यु के लिए मेडिकल बोर्ड किस प्रकार हामी भरेगा, इस संबंध में वह पहले ही दिशा-निर्देश जारी कर चुका है.

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने पिछले साल 11 अक्टूबर को इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आज कल मध्यम वर्ग में वृद्ध लोगों को बोझ समझा जाता है ऐसे में इच्छा मृत्यु में कई दिक्कते हैं. सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने ये भी सवाल उठाया था कि जब सम्मान से जीने को अधिकार माना जाता है तो क्यों न सम्मान के साथ मरने को भी माना जाए.

ईच्छामृत्यु क्या है?
– किसी गंभीर या लाइलाज बीमारी से पीड़ित शख्स को दर्द से निजात देने के लिए डॉक्टर की मदद से उसकी जिंदगी का अंत करना है। यह दो तरह की होती है। निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) और सक्रिय इच्छामृत्यु (Active Euthanasia)।

निष्क्रिय इच्छामृत्यु क्या है?
– अगर कोई लंबे समय से कोमा में है तो उसके परिवार वालों की इजाजत पर उसे लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटाना निष्क्रिय इच्छामृत्यु है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे इजाजत दी है।

सक्रिय इच्छामृत्यु क्या है?
– इसमें मरीज को जहर या पेनकिलर के इन्जेक्शन का ओवरडोज देकर मौत दी जाती है। इसे भारत समेत ज्यादातर देशों में अपराध माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे मंजूरी नहीं दी है।

कॉन्स्टीट्यूशन बेंच में कैसे पहुंचा मामला?

– 2014 में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने निष्क्रिय इच्छामृत्यु पर अरुणा शानबाग मामले में 2011 में दिए गए फैसले को असंगत बताया था और यह मामला पांच जजों की बेंच के पास भेज दिया था। तब से यह पेंडिंग था।

अरुणा शानबाग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?

– सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की नर्स अरुणा शानबाग मामले में दायर जर्नलिस्ट पिंकी वीरानी की पिटीशन पर 7 मार्च 2011 को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की इजाजत दे दी थी। हालांकि, अरुणा शानबाग के लिए इच्छामृत्यु की मांग खारिज कर दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने वीरानी की पिटीशन क्यों खारिज की थी?

– सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि कुछ खास परिस्थितियों में संबंधित हाईकोर्ट के निर्देश पर निष्क्रिय इच्छामृत्यु की इजाजत दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए तीन डॉक्टरों और मरीज के परिवार वालों की इजाजत जरूरी है। पिंकी वीरानी शानबाग की परिजन नहीं थीं, इसलिए उनकी पिटीशन खारिज कर दी गई।

महाधिवेशन के बाद AICC से सी पी जोशी का पत्ता कटना तय – उत्तर पूर्व में कांग्रेस 7 में से 6 राज्यों में सत्ता गंवा चुकी है .

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पोस्ट न्यूज़ । ए आई सी सी में उच्च पद पर स्थित सूत्रों का कहना है कि ए आई सी सी महाधिवेशन के बाद राहुल गांधी के निजी पसंदीदा तथा आंकडों के खेल के माहिर नेता का पत्ता कटना तय है।
ए आई सी सी महासचिव सी पी जोशी ९ राज्यों में प्रभारी हैं, जो राहुल गांधी द्वारा स्वयं घोषित इस मंशा के विरूद्घ है कि एक महासचिव एक ही राज्य का प्रभारी होगा ताकि वह उस राज्य के प्रति न्याय कर सके जिसकी वह देखभाल कर रहा है।
सी पी जोशी के प्रभार के आधीन ७ उत्तर पूर्वी राज्यों में से कांग्रेस छ: राज्यों में सत्ता गंवा चुकी है। सातवां राज्य मिजोरम है जहां इस साल के अंत में चुनाव होने हैं। एक समय उत्तर पूर्व पर शासन करने वाली कांग्रेस हाल में हुए चुनावों में त्रिपुरा तथा नागालैंड में शून्य अंक पाकर आज साफ हो चुकी है। उनके प्रभार में दो अन्य राज्य बिहार तथा पश्चिम बंगाल हैं। बिहार में राज्य पी सी सी अध्यक्ष अशोक चौधरी सहित चार विधायक पार्टी छोडकर जद (यू) में शामिल हो चुके हैं। गत दो दिनों में दो जिला अध्यक्ष भी कांग्रेस छोड गये हैं।
सी पी जोशी को राहुल के नजदीक माना जाता है। कम्प्यूटर के आंकडों के विश्लेषण में वे दक्ष हैं। माना जाता है कि इससे वे राहुल को संतुष्ट कर देते हैं कि अधिक चिंता की आवश्यकता नहीं है क्योंकि पार्टी को लगभग उतने ही मत मिल रहे हैं जितने पहले मिला करते थे। लेकिन वह ये बताना भूल जाते हैं कि ये मत सीटों में क्यों नहीं बदल रहे हैं।
इन राज्यों के कांग्रेसियों ने कभी यह शिकायत करने का प्रयास नहीं किया कि जोशी को पार्टी के लोगों से मिलना पसंद नहीं है, वे उन क्षेत्रों का दौरा करने के प्रति अरूचि रखते हैं जिसके वे प्रभारी हैं तथा उनका रूख रूखा तथा अवज्ञा पूर्ण है जो पार्टी के लोगों को निराश कर देता है और डांटे जाने के डर से पार्टी कार्यकर्ता उनसे दुबारा नहीं मिलना चाहते।
राजस्थान के एक वरिष्ठ ब्राह्मण नेता के रूप में वे राजस्थान के मुख्यमंत्री पद में बहुत रूचि रखते थे और रखते हैं। उन्हें आशा है कि राहुल गांधी से उनकी निकटता उन्हें राज्य का शीर्ष पद दिलवा देगी। उन्होंने अशोक गहलोत से गठजोड किया है जो राज्य के शीर्ष पद के एक और दावेदार हैं। यह दोनों सचिन पायलट का हटना सुनिश्चित करने के लिए मिल कर कार्य कर रहे हैं।

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https://www.youtube.com/watch?v=JNnxA1dFDHk

 

जो रहस्य बना हुआ है वह ये कि राहुल गांधी ने जोशी से अभी तक वे कई राज्य छीने क्यों नहीं है जिनके वे प्रभारी हैं, जब कि खुद उनके निर्णय के अनुसार एक व्यक्ति के पास एक राज्य होना चाहिये। पार्टी के लोग कहते हैं कि वे उलझन में हैं क्योंकि उन्होंने उन सभी राज्यों को बर्बाद कर दिया है जिन्हें वे संभाल रहे हैं और उत्तर पूर्व में वे परिणाम नहीं दिला पाए हैं। उत्तर पूर्व में निर्वाचन के गत चक्र में मणिपुर को पार्टी के हाथ से फिसल जाने देने के लिये उनकी कडी आलोचना हुई थी क्योंकि उन्होंने मौके पर रहने तथा यह सुनिश्चित करने के लिये कोई प्रयास नहीं किये थे कि पार्टी अपनी स्वयं की सरकार बनाए। इस बार मेघालय में यही दोहराया गया।
राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद कई ए आई सी सी महा सचिवों से उनके राज्य वापस ले लिये गए थे लेकिन आश्चर्यजनक रूप से सी पी जोशी के मामले में राहुल ने अपने ही निर्देश की अनदेखी कर दी। इसका परिणाम यह हुआ कि उत्तर पूर्व को संभालने के तरीके तथा जिस तरीके से पार्टी कई राज्यों में शून्य के स्तर पर पहुंच गई है उसको लेकर पार्टी के भीतर बहुत अधिक आलोचना हो रही है।
इस दशा में राहुल भी दोष मुत्त* नहीं रहते क्योंकि सूत्रों के अनुसार ममता बनर्जी ने भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिये त्रिपुरा में कांग्रेस से गठबंधन की पेशकश की थी। लेकिन ज्ञात हुआ है कि कांग्रेस नेतृत्व ने इसे अस्वीकार कर दिया। जो स्पष्ट नहीं है वह ये कि क्या ऐसा राहुल के खुद के विवेक से किया गया था या इसमें सी पी जोशी की सलाह का हिस्सा भी था। चाहे जो रहा हो, उत्तर पूर्व के नेता आज जिस खराब दशा में पार्टी स्वयं को पा रही है उसके लिये सी पी जोशी को दोष देने में संकोच नहीं कर रहे हैं। और शायद अब समय आ गया है कि राहुल गांधी उन राज्यों सहित जिनके मुखिया सी पी जोशी हैं, कई राज्यों में सुधार के लिये कदम उठाएं।

Honey, ZINC Shrunk My Waist-line…

ZINC reduces hunger by increasing the level of leptin, a key hormone that alerts the body when one is full so that a person does not keep eating when he or she is full. Zinc regulates hunger hormones and leads to weight loss.     

ZINC promotes fat loss by preventing fat oxidation and storage of excess fat. It helps in proper digestion by improving protein synthesis, which boosts muscle recovery and metabolism. Zinc also increases energy by improving digestion which allows more energy to be converted from foods.

Evidence suggests that Zinc can help control appetite. Zinc intake reduces hunger by increasing the level of leptin, a key hormone that alerts the body when one is full so that a person does not keep eating when he or she is full. This promotes the body’s natural metabolism and digestion which further supports the oxidation of fat cells to prevent further storage.

According to a study by National Centre for Biotechnology Information, there’s a clear link between Zinc deficiency and body composition, with overweight people being much more likely to have low levels of the mineral. Zinc deficiency generally makes the body store excess fat.

According to clinical nutritionist, Byron Richards, those who are struggling to lose weight due to low thyroid function would benefit from additional Zinc. Zinc plays a primary role in insulin health by improving the production of enzymes that protect the cells and helps detoxify inflammatory biomarkers that get in the way of metabolic function. It has excellent weight loss properties. It enables the body to produce more thyroid hormone that is responsible for maintaining healthy weight. Zinc supplement is great help for people with slow metabolism. Thus, Zinc regulates hunger hormones and leads to weight loss.

Triglycerides, Body Mass Index (BMI) and waist size shrink with Zinc.

While getting plenty of Zinc in diet may help enhance weight loss if one is overweight or obese, the total daily calorie intake and energy spent determines whether or not one will lose weight. According to the “American Journal of Clinical Nutrition”,  many Zinc-rich foods are also high in dietary protein, which help boost satiety, and energy payoffs and are beneficial when one is trying to shed pounds.

Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading Zinc producer, proudly known as Zinc of India.

Pavan Kaushik

Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc

एक दिन में दो प्रेमी युगल ने दे दी जान,.. क्या वजह रही जानें ,..

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बुधवार को राजस्थान के दो अलग अलग जिलों की अलग अलग घटनाओं में दो प्रेमी युगल ने अपनी जान देदी। एक घटना बाड़मेर की है जबकि दूसरी घटना जोधपुर जिले की है।
जानकारी के अनुसार जोधपुर के देचू पुलिस थाना क्षेत्र के खियासरिया गांव में बुधवार को प्रेेमी युगल ने बबूल के पेड़ से फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। थानाप्रभारी बाघसिंह ने बताया कि आसरलाई निवासी बिदामी पुत्री बाबूराम भील, लक्ष्मणराम पुत्र लालाराम भील निवासी हापासर ने खियासरिया में रेत के टीले के निकट बबूल के पेड़ से फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। देचू पुलिस को सूचना मिलने पर थानाप्रभारी बाघसिंह मय जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे शव को नीचे उतारकर देचू सीएचसी की मोर्चरी में रखवाया गया। पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंपा। जानकारी मिलने के बाद दाेनाें परिवाराें में हाकाकार मच गया।
एक अन्य घटना में बाड़मेर के चौहटन कस्बे के निकट वेरधान मार्ग पर एक प्रेमी युगल ने पेड़ पर फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। सूचना मिलने पर पुलिस माैके पर पहुंची तथा शव अपनी निगरानी में लेकर उनकी पहचान करवाकर परिजनों को इतला की। प्रारम्भिक जानकारी के अनुसार, युवक की पहचान प्रागनाथ पुत्र प्रेमनाथ जोगी निवासी चौहटन के रूप में हुई है। वहीं युवती भील जाती की बताई जा रही है।
पुलिस के अनुसार, दोनों को कुछ दिन पहले ही गांव में साथ देखा गया था। पुलिस प्रेम-प्रसंग का मामला मानकर जांच कर रही है। राजस्थान में पिछले कुछ दिनाें में प्रेमी कपल के आत्महत्या करने के कर्इ मामले सामने आ हैं। इन दाेनाें घटनाआें से पहले हाल ही में दाैसा जिले के रामगढ़ पचवारा थाना क्षेत्र के गांव टूटियावास में एक प्रेमी युगल के शव पेड़ से लटके मिले थे।

खेलगाँव में फिर से हो रहा है व्यावसायिक काम – धन्ना सेठों की लगेगी प्रदर्शनी

उदयपुर। खेलगांव अब खेलों के लिए नहीं बल्कि राजनितिक सभाएं प्रायोजित मनोरंजक कार्यक्रम व् बड़ी बड़ी प्रदर्शनी के लिए ही रह गया है। खेलों से खेलगांव के जिम्मेदार अधिकारियों को कोई सरोकार नहीं। कुछ दिन पहले यहाँ एक रेसलिंग की व्यावसायिक नोटंकी हुई थी और अब यहाँ पर मिनरल्स एवं मशीनरी एक्सपो की तय्यारी की जा रही है।
उदयपुर के चित्रकूट नगर में पिछले कई सालों से खेलगांव का आधा अधूरा निर्माण कार्य चल रहा है जहाँ पर अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट ग्राउंड से लेकर कार रेसिंग ट्रेक तक के सपने अधिकारियों और नेताओं ने शहर की जनता को दिखा दिए थे। लेकिन फिलहाल यहाँ पर खेल से सम्बंधित कोई भी सपना पूरा होने के आसार नहीं है। बल्कि शहर से सटी हुई इतनी बड़ी सेफ जगह देख कर रसूखदार लोगों को मुफ्त का उनके व्यावसायिक आयोजन का खाली स्पेस मिल गया है। खेल अधिकारियों को थोडा खुश कर ये लोग अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे है। हाल ही में डब्ल्यू डब्ल्यू ई की व्यावसायिक डेमो कुश्ती की नोटंकी का शो करवाया गया था जिसका टिकिट १० हज़ार रूपये तक था और इसके पहले कई राजनैतिक सभाएं भी आयोजित की जा चुकी है। अब यहाँ संभाग स्तरीय अन्तराष्ट्रीय मिनरल्स एंड मशीनरी इण्डिया एक्सपो की प्रदर्शनी लगाईं जा रही है।
जानकारी के अनुसार यह प्रदर्शनी ९ मार्च से १२ मार्च तक चलेगी जिसमे २५० से अधिक विदेशी कम्पनियां आएगी। प्रदर्शनी को लेकर खेल गाँव में जोरदार तय्यरियाँ चल रही है। इस प्रदर्शनी में दुनिया भर के खनन कंपनियों के प्रतिनिधि आयेगें। इस चार दिन की प्रदर्शनी में मुख्यतः निर्माण एवं खनन में प्रयुक्त होने वाली आधुनिक मशीनों का पदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शनी में देश विदेश से करीब २० हज़ार से अधिक लोगों के आने की संभावना है। होटल की अधिकतर तर तीन और पांच सितारा होटलें बुक हो चुकी है।

कांस्टेबल पद के लिए परीक्षा देने जारहे है तो यह खबर जरूर पढ़िए।

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उदयपुर । जी हाँ राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल की परीक्षा 7 मार्च यानी बुधवार से शुरू होने वाली है। इसके लिए साड़ी तय्यारियां पूरी करली गयी है। ५३९० पदों के लिए यह परीक्षाएं होनी है जिसमे सामान्य कांस्टेबल और ड्राइवर के पद शामिल है।
यह परीक्षा पूरी तरह ऑनलाइन होगी और उदयपुर सहित राज्य के 8 शहरों में आयोजित की जारही है। तीन पारियों में होने वाली यह परीक्षा का टाइमिंग प्रथम पारी ८.३० से १०.३० बजे द्वीतीय पारी दोपहर १२.३० से २.३० बजे व तृतीय पारी ४.३० से ६.३० बजे तक होगी।
उदयपुर शहर के पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र प्रसाद गोयल के अनुसार अभ्यर्थी को प्रत्येक पारी से डेड घंटा पहले प्रवेशपत्र में उल्लेखित परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होना अनिवार्य है। प्रत्येक पारी के आधा घंटा पूर्व परीक्षा केंद्र पर प्रवेश बंद कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया की कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के लिए अभ्यर्थी को इ-प्रवेशपत्र के साथ स्वयं का आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड या पास्पोस्र्ट में से कोई एक दस्तावेज लाना आवश्यक होगा। अभ्यर्थी केवल साधारण बॉल पेन, पेन्सिल ही साथ में ला सकेगा। इसके अलावा मोबाइल, ब्लूटूथ, पर्स, बेल्ट, घडी, टोपी केलकुलेटर पानी की बोतल टिफिन बॉक्स आदि कुछ भी नहीं ला सकेगे। आपत्तिजनक सामग्री साथ लाने पर परीक्षार्थी के लिए प्रवेश नहीं दिया जायेगा।
परीक्षार्थी की परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी। लिखित परीक्षा का प्रश्नपत्र ७५ अंकों का होगा। ऑनलाइन परीक्षा तीन भागों में वस्तुनिष्ठ प्रकार की होगी। परीक्षा का भाग ‘अ’ विवेचना एवं तार्किक योग्यता के प्रश्नों से सम्बंधित ३० अंको का , भाग ‘ब’ सामान्य ज्ञान, सामाजिक ज्ञान एवं सामयिक विषयों पर १५ अंक का तथा भा ‘स’ राजस्थान के इतिहास संस्कृति,कला भूगोल राजनितिक आर्थिक आदि विषयों पर होगा। भा ‘अ’ के किसी भी प्रश्न का सही उत्तर देने पर १ अंक मिलेगा जबकि गलत देने पर १/४ अंक काटे जायेगें। एवं ‘ब’ व् ‘स’ भागों के प्रश्न पत्रों के सही उत्तर देने पर प्रत्येक प्रश्न के सही होने पर १/२ अंक मिलेगा गलत होने पर १/८ अंक काटा जायेगा।
परीक्षा को लेकर आधिकारियों से बातचीत के आधार पर आपको बता दें की यह पूरी तरह ऑनलाइन परीक्षा है इसमे मानवीय हस्तक्षेप बिलकुल भी शून्य है। इसलिए अभ्यर्थी किसी भी ठग या पास करने का दावा करने वाले के चक्कर में ना आये और प्रश्नपत्र अपने विवेक से देकर आयें।