जो काम पुलिस 12 दिनों में नहीं कर पाई “महादेव की शपथ” ने कुछ ही देर में कर दिखाया।

शपथ लेने महादेव मंदिर के बाहर जमा हुए गाँव के लोग

पोस्ट न्यूज़। ‘‘ मैं गीता पर हाथ रखकर कसम खाता हूं कि जो कुछ कहूंगा सच कहुगां और सच के सिवा कुछ नहीं कहूंगा’’ यह स्पश्टीकरण आपने फिल्मों और न्यायपालिका में तो कई बार सुना होगा, लेकिन उदयपुर संभाग के डूंगरपुर जिले के एक गाँव में महादेव के मंदिर में सच बोलने और अपराध नहीं करने की कसम खाई और जो दो युवकों ने शपथ नहीं खाई और नदारत दिखे तो शक उन पर तेज हो गया कुछ हद तक पुलिस का रास्ता भी साफ़ हो गया पुलिस मामले की जांच कर रही है। महादेव की शपथ विवेकानंद की प्रतिमा को आग लगाए जाने को लेकर खाई गयी।
डूंगर पुर जिले के मंझोला गाँव में ऐसा मंदिर है जहां पर आज भी किसी भी अनसुलझे अपराध की तह तक जाने के लिए हर खासोआम को महादेव की सामने बैठकर खुद को पाक साफ साबित करना होता है और अगर नहीं कर पाया तो वह स्वतः ही अपराधी मान लिया जाता है। वैसे हर अपराध का निदान खाकी करती है और अगर खाकी भी फेल हो जाए तो न्यायपालिका से तो न्याय की आस रहती ही हैै, लेकिन डूंगरपुर जिले का एक ऐसा गांव जहां अपराधी तक पंहुचने में खाकी फेल हो गई तो लोगों ने अपने पुरखों की प्रणाली को अपनाते हुए न सिर्फ अपराधी की खोज की बल्कि उन अपराधियों को खाकी की शरण में पंहुचाने में भी महत्ती भुमिका निभाई। जी हां आस पर आस्था की ऐसी कहानी आपने आजाद भारत में आज तक नहीं देखी होगी। जहां न्यायमूर्ति आज भी देवा दी देव महादेव हैं और उनकी शरणों में जाने से न्याय न मिले ऐसा संभव ही नहीं है।

महादेव मन्दिन में शपथ लेते

यह घटना है डूंगरपुर जिले के मझोला गांव का गोपेष्वर महादेव मंदिर की जहां पर दो दिन पूर्व अंधविष्वास की एसी कहानी हकीकत बन गई जिसने खाकी को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। महादेव के चमत्कार ने वह कर दिखाया जो यहां की खाकी पिछले 12 दिनों में न कर पाई। दरअसल जिले के मझोला गांव में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा को आग लगाने की घटना और पुलिस की सारी तफ्तिशों के बावजुद कोई सुराख हाथ न लगा, तो ग्रामीणों ने पुरखों की न्याय प्रणाली ‘‘आस्था’’ का सहारा लिया। परम्पराओं की चैपाल जमी और शिव को साक्षी मानकर शपथ लेने की तैयारी हुई। आस्था की इस अदालत का प्रभाव ऐसा हुआ कि शपथ से पहले ही वारदात के समय मौके पर देखे गए दो संदिग्धों के नाम सामने आ गए। आपको बता दे कि विवेकानंद की प्रतिमा जलाने के बाद से पूरा गांव उद्वेलित था। वारदात के बाद से ही कई बार बैठकें हुई। खाकी ने भी एढ़ी चोटी का दम लगा दिया। बाद में बुजूर्गों की रायशूमारी के बाद तय किया गया कि कस्बे कें ‘‘गोपेश्वर महादेव’’ मन्दिर में गांव के हर घर का आदमी इस घटना को लेकर शपथ लेगा। फिर क्या था, सुबह से ही यहां पर मजमा जम गया था। मुखिया मोतबीर अपने – अपने वार्डों से उपस्थित- अनुपस्थितों की सूची बन रहे थे। जैसे ही शपथ लेने की तैयारी शुरू हुई। इसी दौरान दो युवक बोल उठे कि घटना के दिन देर शाम को तिराहे पर लगी प्रतिमा के समीप कुछ लोग बैठक कर शराब पी रहे थे। ग्रामीणों की पूछताछ में दो युवकों का नाम भी बताया। यह दोनों युवक चैपाल से नदारद थे। इस पर इनके मोबाइल पर सम्पर्क किया तो स्वीच ऑफ आया। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच महादेव के आगे बेठकर षपथ लेते हुए लोगों ने खुद को पाक साफ बताया पुलिस अब आगे की कारवाई कर रही है।

“मैं तड़ीपार हूं सबको मारना चाहता हूं” कह कर युवक ने जिला कलक्टरी में ही पुलिस पर हमला बोल दिया।

उदयपुर। “मैं तडिपार हूं, मैं सबको मारना चाहता हूं” जोर – जोर से चिल्लाते हुए एक शख्स खुद पर पेट्रोल डाल हाथों में मिर्ची पाउडर लिए बुधवार को जिला कलेक्टरी में जा घुसा। पुलिस के जवानों ने बीच – बचाव का प्रयास किया तो इस आरोपी ने उन पर भी पेट्रोल उढेलकर मिर्ची पाउडर डालते हुए उन्हें जख्मी कर दिया। माहौल इतना गर्मा गया कि काबू करने के लिए कलेक्टरी में तैनात पुलिस नाकाफी साबित हुई तो भोपालपुरा सीआई सहित डीप्टी भगवत सिंह हिंगड़ को भी कुर्सी छोड़ मौकाए वारदात पर आना पड़ा। हालाकि डेढ़ दर्जन से ज्यादा जवानों ने मिलकर बड़ी मुष्किल से आरोपी पर काबू तो पा लिया लेकिन अगर थोड़ी भी चुक होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। आरोपी राधेष्याम तेली ने इस तरह की वारदात को पहली बार अंजाम नहीं दिया है। पहले भी यह आरोपी दो बार पुलिसकर्मियों को जख्मी कर चुका हैं।
शहर के सेलिब्रेशन मॉल के पास एक रेस्टोरेंट पर एक मामले में कार्रवाई करने गए सुखेर पुलिस थाने के दो सिपाहियों पर आरोपित ने आवेश में आकर गरम सब्जी फेंक दी थी जिससे एक सिपाही का मुंह और दूसरे का हाथ झुलस गया। बाद में रेस्टोरेंट मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया। सुखेर पुलिस थाने के दो कांस्टेबल सीकर निवासी राकेशकुमार और राजेशकुमार सेामवार को सेलिब्रेशन मॉल के पास राधे-राधे रेस्टोरेंट मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर कार्रवाई के लिए वहां गए थे। इससे गुस्साए रेस्टोरेंट मालिक पुलां निवासी राधेश्याम पुत्र लक्ष्मण साहू ने गरम सब्जी दोनों पर फेंक दी। यहीं नहीं विरोध कर भट्टी जलाकर पेट्रोल की भरी बोतल से खुद को और कांस्टेबल को जलाने की धमकी तक दे दी। बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
आज भी पुलिस ने जिला कलेक्ट्री में हंगामे और पुलिस पर हमले के बाद आरोपी राधेश्याम को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी में उसके जेब से दो चाकू मिले। भूपालपुरा पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी से पूछताछ की जा रही है।

Is ZINC helpful in Depression ?

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Is ZINC helpful in Depression ? This question was asked by one of the respondents of ‘Ask for Zinc’. The answer is YES….. it turns out that Zinc plays a part in modulating the brain and body’s response to stress all along the way…

Zinc has been found to be low in the serum of those suffering from depression. In fact, the lower the Zinc level, the more depressed a person is. Zinc deficiency can lead to symptoms of depression, difficulties with learning and memory, seizures, aggression, and violence.

Low serotonin levels are also believed to be the cause of many cases of mild to severe depression which can lead to symptoms such as anxiety, apathy, fear, feelings of worthlessness, insomnia and fatigue. The enzymes containing Zinc are necessary for the synthesis of serotonin.

Since the 1920s Zinc has been known to play a credible role in mental health. Decades of research have found a link between taking Zinc supplements and improvement in the symptoms of schizophrenia, autism, ADHD (Attention Deficit Hyperactivity Disorder) and other mental health problems.

Around 300 enzymes in our bodies use Zinc to help make DNA, for protein synthesis, cell division, cell growth etc. Zinc is particularly found in a part of the brain called the hippocampus.

In the hippocampus, which is the part of the brain central to memory and mood, antidepressants work by increasing the production of the nerve fertilizer BDNF (Brain-Derived Neurotrophic Factor) in the hippocampus, which helps in nerve recovery, adaptation, and repair. Zinc deficiency leads to decreased Zinc in the nerve synapse. The same mechanism might be responsible for seizures, migraines, dementia, anxiety, depression, and bipolar disorder.

Under conditions of major stress, Zinc swiftly leaves the body in the form of urine, sweat, and saliva. A daily intake of Zinc is required to maintain a steady state of the body.

Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading Zinc-Lead-Silver Producer..

Pavan Kaushik

Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc

“आम जन में विश्वास” की बात सार्थक की पुलिस ने तो युवाओं ने भी किया पुलिस का सम्मान।

उदयपुर। “आमजन में विश्वास अपराधियों में डर” यह वाक्य हर पुलिसकर्मी कर्मी कांस्टेबल से लेकर एक आईपीएस तक की रग-रग में बसा हुआ है। पुलिस की इसी शपथ की वजह से एक आम नागरिक चैन की नींद सोता है। हालाँकि सबसे ज्यादा आरोप भी पुलिस पर ही लगते है, और यह वाक्य कभी कभी उल्टा भी दिखाई देता है, लेकिन इस बात को मानना होगा कि साल के 365 दिन बिना छुट्टी के कार्य करने वाले ये समाज के रक्षक की बदोलत ही शहर में शांति व्यवस्था कायम है।
पुलिस के अत्याचार और भ्रष्टाचार की कहानियाँ हर कोई कह देता है, लेकिन इन सबके बावजूद पुलिस ऐसे-ऐसे कार्य कर देती है जिसकी प्रसंशा खुले दिल से होनी चाहिए। लेकिन प्रसंशा छोड़िये एक सम्मान की नज़र उन पर नहीं उठती। अपराधियों में डर के तो कई उदाहरण है लेकिन आम जन में विश्वास की बात सार्थक हुई आज उदयपुर शहर के अम्बामाता थाने में जहाँ कुछ युवा पुलिस कांस्टेबल वाहिद हुसैन का जन्मदिन मनाने केक लेकर पहुच गए और पुरे सम्मान के साथ उन युवाओं ने कांस्टेबल वाहिद हुसैन का जन्म दिन मनाया उन्हें बधाई दी। युवाओं में सिद्धार्थ सोनी ने बताया कि जहाँ पुलिस और थाने के नाम से एक आम आदमी के पसीने छूट जाती है, वहीँ अम्बामाता थाने में कांस्टेबल वाहिद हुसैन का ऐसा व्यवहार देखने को मिला कि पुलिस को लेकर हमारा सारा डर और भ्रम दूर हो गया। सिद्धार्थ ने बताया कि एक केस के दौरान अम्बामाता थाने के कांस्टेबल वाहिद भाई ने हमारी सहायता कि बिना किसी लालच के कानून की बारीकियां समझाते हुए की, क़ानून के दायरे में हमे हर बात को समझाया और हमारी मदद की। सिद्धार्थ सोनी ने बताया मेरे साथ-साथ मेरे साथियों की भी यह भ्रम टूटा की कोई भी पुलिस कर्मी बिना लेन देन के कुछ करता है। वाहिद हुसैन को हमने सहायता के बदले कुछ कहना चाहा तो उन्होंने हाथ जोड़ कर बस एक वाक्य कहा कि आप लोगों का संतोष ही एक पुलिस कर्मी होने के नाते मेरा इनाम है। सिद्धार्थ सोनी ने बताया कि तब से मेरे और मेरे दोस्तों के दिल में एक पुलिस कर्मी के लिए इज्ज़त बढ़ गयी। एक जनवरी को वाहिद भाई का जन्म दिन जब हमने फेसबुक पर देखा तो उनसे पुछ कर हम थाने में केक लेकर गए और उनका जन्म दिन की बधाई दी। वाहिद हुसैन का मानना है कि राजस्थान पुलिस “सेवार्थ कटिबद्धता” के लिए जानी जाती है, और आमजन के सेवार्थ के लिए ही हम है और विनम्रता हमारा पहला सिद्धांत है।
इस दौरान थाने के अन्य पुलिस कर्मी और थाना अधिकारी ने भी वाहिद को बधाइयाँ दी।
सिद्धार्थ सोनी और उनके साथियों का मानना है कि जब एक महकमे की बुराई बढ़ा चड़ा कर बताते है तो उसकी अच्छाइयों का भी खुले दिल से सम्मान करना चाहिए। आम लोगों को एक एक पुलिस कर्मी चाहे सिपाही हो या अफसर उसका और उसके किये गए अच्छे कार्यों का सम्मान करना चाहिए।

उदयपुर में 15 पाकिस्तानी शरणार्थियों को दिलाई भारतीय नागरिकता की शपथ .

उदयपुर। अतिरिक्त जिला कलक्टर (शहर) सुभाष चंद्र शर्मा ने सोमवार को 15 पाक विस्थापितों को भारतीय नागरिकता की शपथ दिलाई। यह सभी 2009 से पूर्व से भारत में निवासरत हैं जिनके आवेदन की पात्रता की जांच के बाद यह कार्यवाही की गई।
श्री शर्मा ने अपने कार्यालय में सभी 15 पाक विस्थापितों को राजनिष्ठा की शपथ दिलाई जिनमें एक दिव्यांग बालिका और एक गर्भवती महिला शामिल थी। अनिल कुमार, संगीता कुमारी, सुशील कुमार, सनजीत कुमार, सोनम राजपूत, खुशबू कुमारी, दीपक कुमार, संगीता बाई, शंकर लाल, सपना कुमारी, सनी कुमार, लखोमल, नानकी, विनोद कुमार एवं निकिता कुमारी ने राजनिष्ठा की शपथ ली।

Silver – this white Gold glitters more than Gold.

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Globally, 51% Silver is used for Industrial Fabrication… The highest usage of Silver, globally, is Industrial Fabrication (51%), followed by Coins and Bars (25%), Jewellery (19%) and Silverware (5%)

 With the entire spotlight usually given to Gold, Silver gets side-lined and is considered as Gold’s poorer cousin. Gold is considered to be more valuable primarily because it exists in precious quantities when compared to Silver. While majority of the Gold goes into hoarding – like jewellery, only a fraction of it is used in industrial production.

 This is where, Silver dominates Gold !!!

 Silver’s industrial role is much more than that of Gold and it is for this reason that a shortage of Silver has always had higher negative implications than there would be if there was a shortage of Gold.

 Silver will always continue to be in demand essentially because of its industrial usage. It has the highest electrical conductivity amongst all the metals, which is why it is used as an alloyed form for electrical contacts. Satellites, lasers, high tech weaponry, robotics, telecommunications need Silver. Conductors, contracts, switches and fuses need Silver too because of its non-corroding properties or overheating.

 The consumption of Silver in solar panels, brazing alloys, electrical contacts, batteries used in laptops and electric cars and circuits guarantees that Silver’s industrial demand will stay strong even when there is economic slowdown.

 Indeed … this white Gold glitters more than Gold..!!! Silver!!!

 Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading Zinc-Lead-Silver Producer..

Pavan Kaushik

Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc

गैस सिलेंडर के दामों में 6 रूपये की भारी कमी – 2017 में 190 रूपये तक की मामूली वृद्धि हुई थी .

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गैस सिलेंडर सस्ता होने पर खुशियाँ मनाती आम महिला  (व्यंग )

post punch . बधाई हो गैस सिलेंडर के दामों में भारी कमी आगई है, पिछले कुछ महीनों में लगातार 190 रूपये की मामूली वृद्धि के बाद 2017 की सुबह सुबह गैस सिलेंडर ने आपने भाव में जोरदार गिरावट दर्ज करवा ली .
घरेलु गैस पर पुरे 6 रूपये की कमी हुई है, इतनी भारी कमी से राज्य ही नहीं देश का हर बच्चा बच्चा खुश है, महिलाओं में भारी उत्साह है कि अब जम कर चुल्हा जलेगा . 2017 में गैस के दामों में करीब 190 रूपये की मामूली वृद्धि हुई थी, जो हर माह के हिसाब से लगातार 8 रूपये से लेकर 100 रूपये तक भी बढ़ी है . तेल कंपनियों ने इस बात का ध्यान रखा और साल के पहले ही दिन देश वासियों को शानदार तोहफा दिया है. गैस कंपनियों ने मासिक समीक्षा बैठक के बाद सोमवार को गैस सिलेंडर को सस्ता कर दिया। नॉन सब्सिडी गैस सिलेंडर के दामों में तेल कंपनिओं ने मासिक समीक्षा बैठक के बाद नए साल में गैस सिलेण्डर को सस्ता कर दिया। नॉन सब्सिडी गैस सिलेण्डर के दामों में 6 रुपए और वाणिज्यिक गैस सिलेण्डर के दामों में 8 रुपए 50 पैसे की कमी की है।
14.2 किलो का गैस सिलेण्डर अभी 735 रुपए का आ रहा था जो अब 729 रुपए का मिलेगा। उपभोक्ता के बैंक खाते में पहले 237 रुपए 2 पैसे सब्सिडी के रूप में जाते थे वहीं अब 231 रुपए 2 पैसा सब्सिडी आएगी। इसी प्रकार 19 किलो का वाणिज्यिक गैस सिलेण्डर 1322 रुपए 50 पैसे का आ रहा था जो अब 1314 रुपए का आएगा।

भाईसाब फिश एक्वेरियम का शुल्क कम हुआ तो बर्बाद हो जायेगें ये

उदयपुर। भाईसाहब गजब हो जायेगा बर्बाद हो जायेगें ये फिश एक्वेरियम के मालिक, अगर इन्होने आपके कहने पर 10 रुपया भी कम कर दिया। भाईसाहब आप 69 दिन बाद टहलते हुए फतहसागर पर आये और कह कर चले गए “भय्या Fish Aquarium का प्रवेश शुल्क ज्यादा है कम करो” , क्या आपने सोचा अगर ये “अंडर द सन ” और मंशा पूर्ण ” रोपवे ” के मालिक श्री कैलाश खंडेलवाल का क्या होगा। ये तो बर्बाद हो जायेगें, Fish Aquarium हो चाहे रोपवे हो कोई शहर वासियों और Tourist की सुविधा ला लुभाने के लिए नहीं बनाएं है, ये तो इनको लूटने खसोटने के लिए बनाये है।
आखिर बेचारे खंडेलवाल जी भी इन पर्यटकों या शहरवासियों को लूटें नहीं तो क्या करें इन्हें भी तो इस जेब कटाई प्रोजेक्ट के लिए कितने “ऊपर” के लोगों को खुश करना पड़ता है तभी तो धडाधड एक के बाद एक मलाई वाले प्रोजेक्ट इनकी झोली में आते है। ये ऊपर के लोगों खुश ही इसलिए करते है कि जब इनकी बारी आये लुटमारी प्रोग्राम की तो कोई भी बोले नहीं,.. सब के सब ऐसे बैठ जाएँ जैसे “मूंह में बिल्ली ने बच्चा दे दिया है।
अब इन्हें या सरकार में बैठे आकाओं को क्या फर्क पड़ता है कि फिश एक्वेरियम के इतने मंहगे प्रवेश शुल्क से कोई शहर वासी देख पाए या नहीं। सीधी बात है एक परिवार की अगर रूपये खर्च करने की ओकात है तो ना देखों। फतहसागर पर 10 रूपये का चना जोर गरम खा कर घर को चले जाओ, माफ़ कीजिये वो भी आजकल 20 रूपये का हो गया है।
अगर हिम्मत करके किसी ने अपने बच्चों को एक बार यह फिश एक्वेरियम दिखा दिया तो दौबारा बेचारा वो फतहसागर की पाल की तरफ का रुख भी नहीं करता क्यूँ कि अगर बच्चों ने फिर से जिद्द कर ली तो फिर से 500 – १००० की लग जायेगी जो शायद उसकी कमाई का 10 वां या 20 वां हिस्सा हो। सुन लो वैसे भी गरीबों मजदूरों के के लिए जरूरी नहीं कि फिश एक्वेरियम देखें उनके बच्चों को कोई हक नहीं की 260 तरह की मछलियाँ देख कर खुश हो।
बेचारे फिश एक्वेरियम के मालिक के सामने अब बड़ी समस्या आगयी है। भाई साहब ने कह दिया है तो शुल्क कम करना ही पड़ेगा। लेकिन फ़िक्र मत करो ज्यादा कम करने की जरूरत नहीं 5 या 10 रुपया कम कर के सभी को खुश कर देना। वेसे भी 10 रूपये में कोनसा ताजमहल उजड़ जायेगा। जो ऑटो वाले पर्यटकों को लेकर आते है उनको थोड़ा कमीशन कम देदेना आपका हिसाब उधर पूरा हो जाएगा। वेसे भी कमीशन का यह खेल 20 से 30 प्रतिशत चलता है।

वैसे श्री गुलाबचंद कटारिया जी का बहुत बहुत आभार की उन्हें 69 दिन के बाद आखिर लगा कि फिश एक्वेरियम का शुल्क ज्यादा है। बहुत जल्दी इसका शुल्क 100 रूपये से 90 रूपये हो जायेगा बाकी जीएसटी लगा कर 107 रुपया ही देना पड़ेगा इतनी बड़ी राहत मिलते ही शहर में पर्यटकों का हुजूम उमड़ पडेगा शहर के हर खासो आम फिश एक्वेरियम के लिए दौड़ पड़ेगें आखिर इतनी बड़ी राहत जो मिलने वाली है। ( पोस्ट का पंच 1 )

हिन्दू – मुस्लिम को बांटने का प्रयास है भंसाली की “पद्मावती” फिल्म – मेवाड़ राजघराना की आपत्ति।

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उदयपुर। विवादित फिल्म padmavati के लिए चाहे सेंसर बोर्ड ने “आई” हटा कर पद्मावत नाम और इका दुक्का परिवर्तन कर रिलीज करने की अनुमति देदी हो, लेकिन पद्मावती के वंशज मेवाड़ राज घराने ने फिल्म को नकार दिया है। Mahendr Singh Mewar और Arvind Singh Mewar ने साफ़ टूर पर कहा है कि यह फिल्म रिलीज़ करने लायक है ही नहीं। इसमें सिर्फ राजपूतों का ही नहीं मुस्लिमों का भी एक तरह से अपमान किया गया है।
फिल्म की रिव्यू कमिटी में शामिल अरविन्द सिंह मेवाड़ के साथ अन लोगों ने भी आपत्ति जताते हुए रिलीज नहीं करने की सिफारिश की है।
Mewar के पूर्व राजघराने के अरविन्द सिंह मेवाड़ और महेंद्र सिंह मेवाड़ ने साफ़ टूर पर कहा है कि यह फिल्म इतिहास के साथ छेड़छाड़ तो है ही लेकिन हिन्दू – मुस्लिम में आपस में झगड़ा फसाद करवाने वाली फिल्म भी है। अरविन्द सिंह मेवाड़ ने कहा है कि फिल्म में सिर्फ राजपूतों का ही नहीं मुस्लिमों का भी अनादर बताया है।
रिव्यू कमेटी में शामिल मेवाड़ पूर्व राजघराने के अरविंद सिंह मेवाड़ नेकहा कि फिल्म देखने के बाद सभी तीनों सदस्यों ने फिल्म को रिलीज नहीं करने की सिफारिश की। लेकिन बोर्ड ने नाम बदलकर कुछ कट लगाकर खुद ही रिलीज करने का फैसला ले लिया।
इग्नूके प्रो. कपिल कुमार नेकहा कि फिल्म में कल्पना को तथ्यों के रूप में पेश कर भ्रम पैदा किया था, हमने आपत्ति की। फिल्म मूल स्वरूप में रिलीज होती तो विवाद ज्यादा बढ़ सकता था। इतिहास का इस्तेमाल पैसा कमाने में हो रहा है।
गौरतलब है कि सेंसर बोर्ड बिना कट लगाए फिल्म को U/A certificate देने काे तैयार हो गया है, लेकिन फिल्म का नाम बदलकर पद्मावत करने सहित 5 बदलाव की शर्त रखी है। निर्माता संजय लीला भंसाली भी बदलाव को तैयार हैं। दूसरी ओर, रिव्यू कमेटी में शामिल मेवाड़ के पूर्व राजघराने के अरविंद सिंह ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा- मेरे साथ सभी तीनों सदस्यों ने फिल्म को रिलीज नहीं करने की सिफारिश की। फिल्म ऐसी है कि नाम बदलने के बाद भी हिंदू-मुस्लिमों में फसाद होने की संभावना है।

इधर विवादित फिल्म पद्मावती के संशोधन के लिए पहली कमेटी में शामिल नहीं करने और गुपचुप तरीके से दूसरी कमेटी बनाकर निर्णय गुप्त रखने के मामले में मेवाड़ के पूर्व राजघराने के पूर्व महाराणा महेन्द्र सिंह मेवाड़ ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के चेयरमैन प्रसून जोशी की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि जोशी की कार्यशैली की जांच हो। कोई गड़बड़ी मिली तो सरकार उनसे इस्तीफा ले। उन्होंने पत्र में लिखा है कि ऐसा लग रहा है कि समुदायों के बीच माहौल बिगाड़ने के लिए इस फिल्म के जबरदस्ती प्रदर्शन की कोशिश की जा रही है। मेवाड़ ने केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी और केन्द्रीय राज्य सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ को लिखे पत्र में कहा है कि उनके पुत्र विश्वराज सिंह मेवाड़ को 21 दिसम्बर को सीबीएफसी के चेयरमैन जोशी ने फिल्म पद्मावती की रिव्यू कमेटी के लिए आमंत्रित किया था। जिसके बाद विश्वराज सिंह ने कमेटी में शामिल होने से पहले सवाल पूछा कि आप हम सदस्यों से क्या चाहते हैं, इसका लिखित में जवाब दें। लेकिन कमेटी के किसी भी सदस्यों को इसका जवाब नहीं मिला। सिर्फ टेलीफोन पर ही बात सीमित रही। इस बीच सीबीएफसी ने गुपचुप तरीके तीन लोगों की कमेटी गठित कर दी। फिर उस कमेटी में अभी तक क्या हुआ, वह भी पूरी तरह गुप्त रखा गया है। मैं आश्वस्त हूं कि कमेटी में तीन में से दो सदस्यों ने फिल्म के प्रदर्शन को नकारा है। बावजूद प्रसून जोशी ने फिल्म में पांच सुधार करने का दावा करते हुए U/A certificate जारी करने का ऐलान कर दिया।

Silver Glitters in My Medicine…

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  1. Silver has been known since ancient time. It was one of the first five metals to be discovered. Mankind learned to separate silver from lead back in 3000 BC. Silver objects have been found dating back before 4000 BC. It is believed the element was discovered around 5000 BC.  Silver has been revered by the medical community since a long time. Hippocrates, “The Father of Medicine”, knew of its healing and anti-disease properties. In World War I, before the widespread use of antibiotics, it was imperative on the battlefield. Silver foil was wrapped around wounds to help them heal.

Silver, a germicidal, kills bacteria and other lower organisms. Silver ions act as a catalyst by absorbing oxygen, which kills bacteria by interfering with their respiration. This antibiotic property, along with its non-toxicity, has given Silver an essential role in medicine for thousands of years.

In medicine, Silver is incorporated into wound dressings to treat external infections and also used as an antibiotic coating in medical devices. It is also used in some medical applications, such as urinary catheters (where tentative evidence indicates it reduces catheter-related urinary tract infections) and in endotracheal breathing tubes (where evidence suggests it reduces ventilator-associated pneumonia). The Silver ion (Ag+) is bioactive and in sufficient concentration readily kills bacteria in vitro. Silver is also used in other medical instruments and is a key part of the technology behind X-rays. It has also been used in eye drops and in dental hygiene to cure and prevent infection. Silver Sulfadiazine is especially useful for burn victims because it kills bacteria while also allowing the skin to regrow. Silver ion treatments can heal bone infections and allow regeneration of damaged tissue.

Today, the presence of antibiotic-resistant superbugs increases the demand for Silver in hospitals. Small amounts of Silver can coat hospital surfaces and medical equipment to prevent the spread of pathogens.

Silver and Silver nanoparticles are also used as an antimicrobial in a variety of industrial, healthcare, and domestic applications.

Indeed … this White Gold glitters more than Gold..!!! Silver!!!

Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading Zinc-Lead-Silver Producer..

Pavan Kaushik

Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc