जनता विकास को तरसती रही विधायकों का पैसा खातों से बाहर ही नहीं निकला – काम तो किया नहीं लाखों का फर्जी भुगतान उठाया

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सीएजी की रिपोर्ट में खुलासा | 2011 से 16 तक एमएलए लेड का एक हजार करोड़ रुपया जिला परिषदों के खातों में ही पड़ा रहा 

न्यूज़ पोस्ट. जनतासे जुड़े विकास कार्यों के लिए विधायकों को मिलने वाला फंड का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हो पा रहा। जो पैसा खर्च हो भी रहा है उसमें भी भारी गड़बड़ियां सामने रही हैं। मंगलवार को विधानसभा में पेश की गई स्थानीय निकाय की वार्षिक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया कि 2011 से मार्च 2016 तक एमएलए लेड की 21 प्रतिशत राशि ही खर्च की जा सकी। मार्च 2016 के आखिर में एमएलए लेड में 1093 करोड़ रुपए जिला परिषद के खातों में अनुपयोगी पड़ी थी। सीएजी ने एमएलए लेड को लेकर पांच जिलों की सेंपल ऑडिट की। इसमें बीकानेर, हनुमानगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर राजसमंद शामिल हैं। इन पांचों जिलों में 2011 से 2016 तक एमएलए लेड का कुल 23 प्रतिशत फंड ही इस्तेमाल किया जा सका 122 करोड़ रुपए जिला परिषदों के खातों में अनुपयोगी पड़े रहे। इसमें बांसवाड़ा में 26 करोड़, बीकानेर में 30 करोड़, डूंगरपुर में 20 करोड़, हनुमानगढ़ में 17 करोड़ रुपए खर्च नहीं किए गए।

काम हुआ ही नहीं लाखों का भुगतान उठा लिया
बांसवाड़ा,बीकानेर राजसमंद में एमएलए लेड से करवाए गए कामों में भारी गड़बडिय़ां मिलीं। इसमें 28 लाख के भुगतान फर्जी पाए गए। जांच में पता चला कि जिन कामों का हवाला देते हुए यह भुगतान उठाया गया वह हुए ही नहीं। कई काम ऐसे किए गए जो एमएलए लेड में स्वीकृत ही नहीं थे। बांसवाड़ा राजसमंद में करीब 92 लाख रुपए सीमेंट की सड़कों के निर्माण के लिए खर्च किए गए। जांच में पता चला कि इनमें 20 लाख का फर्जी भुगतान किया गया।

रेलवे की लूट – रोजाना 10 लोगों की जेब काट रहा है

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न्यूज़ पोस्ट. रेलवे रोजाना अपने 10 लाख यात्रियों को चूना लगा रहा है। रेलवे ट्रेनों के अंदर खानपान की वस्तुओं पर राउंड ऑफ फॉर्मूला लगा कर प्रति यात्री 5 रुपए तक अतिरिक्त वसूल रहा है। खानपान की वस्तुओं का मूल्य 5 रुपए के गुणक यानि 5, 10, 15 20 के हिसाब से वसूला जा रहा है। दैनिक भास्कर में छापी खबर के अनुसार रेलवे ने टिकट बुकिंग के बाद अब ट्रेन में सफर के दौरान खानपान की वस्तुओं पर जीएसटी लगाकर जो टैक्स पहले 8.66% था उसको बढ़ाकर 18% कर दिया और उसके बाद राउंडिंग ऑफ से दोहरी मार दे रही है। राउंडिंग ऑफ यह ऐसा खेल है, कि जिसमें अगर आपकी वस्तु 5 रु से 10 पैसे भी अधिक होती है तो ट्रेन में कैटरिंग कॉन्ट्रेक्टर आपसे सीधा 10 रुपए तक वसूलेगा। आरटीआई के जवाब में रेलवे ने राउंडिंग ऑफ फॉर्मूले के जरिए वस्तु के वास्तविक मूल्य से अधिक वसूलने की बात को स्वीकार किया है। आरटीआई एक्टिविस्ट सुजीत स्वामी ने रेलवे मंत्रालय से राउंडिंग ऑफ फॉर्मूले को लागू करने का कारण पूछा था। जवाब में रेलवे ने यह तर्क दिया कि यह बताना लोक सूचना की श्रेणी में नहीं आता है। राजस्थान के सुजीत स्वामी ने रेल मंत्रालय से यह जानकारी आरटीआई में मांगी थी। जिसके बाद मंत्रालय ने यह जानकारी दी थी। सुजीत ने बताया कि नोट बंदी के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने से राउंडिंग ऑफ और दुकानदारों द्वारा खुल्ले पैसों की जगह टॉफी इत्यादि देने पर विरोध करने की अपील की थी।

यह है सर्कुलर : सर्कुलरमें 1 जुलाई के बाद से रेलवे ने वास्तविक मूल्य पर 18% जीएसटी और राउंडिंग ऑफ के नाम पर 19.6 से 53.8 फीसदी की वृद्वि की है। जैसे यदि आप जयपुर से मुंबई दुरंतो में सफर कर रहे हैं। इस दौरान अगर आप ब्रेकफास्ट करते हैं। तो 34 रुपए के ब्रेकफास्ट के लिए आपको 32.3 फीसदी यानि 45 रुपए चुकाने होंगे, जबकि 18 फीसदी जीएसटी के साथ यह कीमत सिर्फ 40.12 रुपए होती है।

सोहराबुद्दिन-तुलसी एनकाउंटर केस : सीबीआई ने जबरन करवाया चार्ज फ्रेम, बहुत सी एप्लीकेशन हैं पेंडिंग

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न्यूज़ पोस्ट . सोहराबुद्दिन-तुलसी एनकाउंटर केस में मंगलवार को मुम्बई सेशन कोर्ट में रूटीन डेट पर ही सीबीआई ने जबरन ड्राफ्ट चार्ज देकर चार्ज फ्रेम की प्रक्रिया शुरू करवा दी। जबकि इस तारीख पर मामले में आरोपी बनाए गए कुछ अधीनस्थ पुलिस कर्मी मौजूद भी नही थे तथा कुछ अधीनस्थ पुलिस कर्मियों की हाई कोर्ट और ट्रॉयल कोर्ट में याचिकाएं पेंडिंग चल रही है। अधीनस्थ पुलिस कर्मियों के विरोध करने के बावजूद सीबीआई ने उनकी एक नही सुनी गई , चार्ज फ्रेम करवा दिया।
मंगलवार कोसोहराबुद्दिन-तुलसी एनकाउंटर केस में मुम्बई सेशन कोर्ट में तारीख थी। आरोपी बनाए गए कुछ अधीनस्थ पुलिस कर्मियों को छोड़कर बाकी सभी अधीनस्थ पुलिस कर्मी और अन्य आरोपी कोर्ट में मौजूद थे। तभी अचानक से सीबीआई ने डरा-धमका कर मामले में बरी हो चुके रसूखदार बीजेपी नेता औऱ आईपीएस अधिकारियों के दबाव में कुछ पुलिस कर्मियों को जबरन ड्राफ्ट चार्ज पकड़ा दिया और कोर्ट को यह कह दिया कि ड्राफ्ट चार्ज सभी अभियुक्तों को दे दिया है और सभी ने स्वीकार कर लिए हैं ऐसे में चार्ज फ्रेम की कार्रवाई शुरू कर सकते हैं। इस पर
कोर्ट में मौजूद कुछ अधिनस्थ पुलिस कर्मी जिनकी डिस्चार्ज एप्लीकेशन हाई कोर्ट में पेंडिंग हैं, उन्होंने चार्ज फ्रेम का विरोध किया और कोर्ट से प्रार्थना की कि उनके एप्लीकेशन हाई कोर्ट में पेंडिंग है इस पर कोर्ट ने उन्हें चार्ज फ्रेम की कार्रवाई से अलग रखकर बाकि आरोपी अधीनस्थ पुलिस कर्मियों के चार्ज फ्रेम कर दिए।

बिना चार्जशीट की कॉपी दिए कर दिए चार्ज फ्रेम, ट्रायल कोर्ट में याचिका लंबित
मामले में आरोपी बनाए कई अधीनस्थ पुलिस कर्मियों की ट्रायल कोर्ट में ही याचिका पेंडिंग चल रही है। अधीनस्थ पुलिस कर्मियों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में ट्रायल कोर्ट में याचिका लगाकर निवेदन किया था कि मामले की सी आई डी द्वारा पेश की गई 2 मुख्य चार्जशीट सहित कुल 5 चार्जशीट गुजराती भाषा मे है। इसकी अंग्रेजी/मराठी भाषा मे अनुवादित कॉपी उन्हें उपलब्ध करवाई जाए। ये सभी याचिकाएं लंबित होने के बावजूद आरोपी बनाए गए पुलिसकर्मियों को चार्जशीट की कॉपी दिए बगैर ही चार्ज फ्रेम कर दिए गए। इसके अलावा तत्कालीन इस्पेक्टर बाल कृष्ण चौबे और आईपीएस विपुल अग्रवाल की डिस्चार्ज एप्लीकेशन तो ट्रायल कोर्ट में ही पेंडिंग है।

वकील तक नहीं हैं -इन अधिनस्थ पुलिस कर्मियों के पास
कोर्ट में जिन अधिनस्थ पुलिस कर्मियों पर चार्ज फ्रेम किया गया उनके इतनी स्थिति भी नही है कि वे मुम्बई जैसे मंहगे शहर में रहकर एक वकील खड़ा कर ट्रायल कार्रवाई का सामना कर सकें। अधिकतर पुलिस कर्मियों के पास वकील भी नही है। सीबीआई ने डरा धमका कर रसूखदार नेता अफसरों के दबाव में चार्ज फ्रेम तो करवा दिए लेकिन बिना वकील के इस केस में ट्रायल लड़ना अधीनस्थ पुलिस कर्मियों के साथ नैसर्गिक न्याय के विपरीत होगा।

चार्ज शीट में नाम नही फिर भी हो गया चार्ज फ्रेम-
आकाओं को नुकसान न पहुँचे इसलिए सीबीआई ने उन दो कांस्टेबलो के भी चार्ज फ्रेम करवा दिए जिनक सीबीआईे चार्जशीट में नाम तक नही थे। मामले में बरी हो चुके आईपीएस राजकुमार पांड्यन के गनमैन संतराम और असिस्टेन्ट कांस्टेबल अजय परमार को सीबीआई ने चार्जशीट में आरोपी नही माना था और चार्जशीट में उनके खिलाफ कोई चार्ज नही थे। लेकिन बरी हो चुके आकाओं को बचाने उनके दबाव में सीबीआई ने मंगलवार को हांथो हाँथ दोनों कांस्टेबलों को चार्जशीट के कुछ सेलेक्टेड डाक्यूमेंट्स दिए औऱ चार्ज फ्रेम करवा दिए। दोनों ने कोर्ट से प्रार्थना भी की कि उन्हें केस में सीबीआई ने चार्जशीट में आरोपित तक नही माना है। उन्हें ये तक नही पता है कि चार्जशीट में क्या क्या है। हाई कोर्ट में अभी अवकाश चल रहा है। उन्हें हाई कोर्ट जाने की मोहलत दी जाए।

इन्हें किया ट्रायल कार्रवाई से अलग
हाई कोर्ट में इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान, एसआई हिमांशु सिंह, श्याम सिंह, डीएसपी आरके पटेल सहित बरी हो चुके आईपीएस डीजी बंजारा, राज कुमार पांड्यन और दिनेश एमएन, डीएसपी नरेंद्र अमीन की डिस्चार्ज एप्लीकेशन पेंडिंग चल रही है। अभी मामले में बरी नहीं हुए इन पुलिस कर्मियों ने कोर्ट से निवेदन किया कि उनकी एप्लीकेशन पेंडिंग है। फिर भी चार्ज फ्रेम होता है तो हाई कोर्ट में पेंडिंग याचिका के कोई मायने नही राह जाएंगे लेकिन हाई कोर्ट से स्टे नही होने के कारण केवल विपुल अग्रवाल, आशीष पंडिया ,अब्दुल रहमान, बालकृष्ण चौबे की विभिन्न याचिका ट्रॉयल कोर्ट में लंबित होने एवं राजू जीरावला के अनुपस्थिति होने से इन्हें छोड़कर बाकी सभी आरोपीयो के विरूद्ध चार्ज फ्रेम कर दिए।
: जारी हुए गैर जमानती वारंट
आरोपी राजू जीरा वाला और आशीष पांड्यन आज कोर्ट में हाजिर नही हो सके तो इनके वकीलों ने हाजिरी माफी का प्रार्थना पत्र कोर्ट में पेश किया
इस पर कोर्ट ने प्रार्थना पत्र नामंजूर कर इनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है।

12 साल से पेंडिंग, रासुखदारो के बरी होते ही हुए चार्ज फ्रेम
इस मामले में जब तक रसुखदार बीजेपी नेता और आईपीएस अफसर आरोपी थे तो 12 साल से किसी को चार्ज फ्रेम की याद नही आई। सीबीआई चार्जशीट
में सीबीआई ने तत्कालीन गुजरात के गृह राज्य मंत्री बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया, मार्बल व्यवसायी विमल पाटनी, गुजरात के तत्कालीन डीजीपी डीसी पांडे, वर्तमान डीजीपी गीता जौहरी, आंध्रा के आईजी सुब्रमण्यम, गुजरात के आईपीएस राजकुमार पंड्यन, ओपी माथुर, चूडाश्मा, राजस्थान आईपीएस दिनेश एमएन, गुजरात डीवायएसपी नरेन्द्र अमीन, अमित शाह की को-ऑपरेटिव बैंक के बिजनेस पार्टनर दो अन्य व्यवसायी अजय पटेल, यशपाल को मुख्य आरोपी और षड्यंत्र कारी माना था। अब जब ये सभी रसूखात आरोपी बरी हो गए है। इनके बरी होने से केस में अब न तो मोटिव बचा है और न ही षड्यंत्र।
जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि पारिस्थितिक जन्य साक्ष्यों पर बने केस में मोटिव का होना आवश्यक है। इसके बावजूद सीबीआई ने अपने रसूखदार नेताओ और अफसरों को बचाने के लिए चार्ज फ्रेम करवा दिए।

भ्रष्ट लोक सेवकों को बचाने वाले काले कानून के खिलाफ लेकसिटी प्रेस क्लब का विरोध

उदयपुर। भ्रष्ट लोक सेवकों को बचाने के लिए लाया गया दण्ड प्रक्रिया संहिता संशोधन विधेयक -२०१७ का चैतरफा विरोध हो रहा है। राजस्थान सरकार के इस तुगलकी विधेयक के विरोध में उदयपुर के पत्रकार भी उतर आये। लेकसिटी प्रेस क्लब के बैनर तले पत्रकारों ने आज जिलाकलेक्त्र को इस काले कानून के विरोध में राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया।
‘‘सियासत के हरगिज चहेते नहीं हम, सियासत कब हमें बलम बोलती है। सियासत ने सौंपी है बगावत हमको, उसी की हकीकत कलम बोलती है।’’ राजस्थान के पत्रकार भी कुछ इन्हीं इरादों के साथ महारानी के तुगलकी फरमान के खिलाफ अब पूरजोर विरोध में उतर आए हैं। राज्य सरकार की ओर से पेष किए गया बिल अब सरकार के लिए ही नुकीली कील साबित हो गया है। राज्य की जनता विरोध में आ गई है। वहीं विपक्ष भी इस बिल को पूरी तरह से भुनाने में लगा है। आपको बता दे कि राज्य सरकार द्वारा लाये गए लोक सेवक संरक्षण विधेयक का अब चैतरफा विरोध होने लगा है। सोमवार को जयपुर में सड़क से सदन तक हुए विरोध के बाद मंगलवार को उदयपुर के पत्रकार संगठनो ने भी इस विधेयक को वापस लेने की मांग की। इसी कड़ी में उदयपुर में लेकसिटी प्रेस क्लब और राजस्थान पत्रकार संघ के बेनर तले तीन दर्जन से ज्यादा पत्रकार जिला कलेक्ट्री पर पंहुचे। इस दौरान सभी पत्रकारों ने इस विधेयक के विरोध में जिला कलक्टर को राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम का ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने मांग की है कि इस विधेयक से पत्रकारिता और पत्रकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में पड़ जाएगी। यही नहीं इस विधेयक के पारित होने से पत्रकारिता के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराएंगे। पत्रकारों ने पूरजोर तरीके से इसकी निंदा करते हुए इसे जल्द से जल्द वापस लेने की माग की। इस अवसर पर लेकसिटी प्रेस क्लब के कई पदाधिकारी,पूर्व अध्यक्ष और कई मीडिया समूहों के पत्रकार उपस्थित रहे। जिनमें क्लब के अध्यक्ष रफिक एम पठान, पूर्वध्यक्ष संजय खाब्या, नारीष्वर राव, मनु राव, प्रताप सिंह राठौड़ सहित कपिल श्रीमाली, डाॅ रवि षर्मा, कुलदीप सिंह गहलोत, मोहम्मद इलियास, प्रमोद सोनी, हरीष षर्मा, भुपेष दाधिच, भगवान प्रजापत, विनोद माली, षकील मोहम्मद, प्रकाष मेघवाल, अविनाष जगनावत, जमाल खान, सतीष षर्मा के अलावा जार से जुडे़ कुछेक पत्रकार भी मौजूद थे।

कांग्रेसी विधायक ने पुलिस अधिकारी को बीजेपी का एजेंट बता कर लगाईं फटकार ( वीडियो )

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जयपुर में कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह डोटासरा और एक पुलिस अधिकारी में जमकर कहासुनी हो गई। इस पर विधायक डोटासरा ने लताड़़ लगाते हुए पुलिस अधिकारी को एमएलए क्वार्टर से बाहर निकाल दिया। इतना ही नहीं इस अधिकारी को डोटसरा ने भाजपा का एजेंट तक बता डाला। आपको बता दे कि पुलिस अधिकारी नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी से मिलने गए थे, लेकिन इस दौरान डोटासरा से उनकी कहासुनी हो गई। विधायक गोविंद सिंह डोटसरा ने पुलिस अधिकारी को लताड़ लगाते हुए विधायक आवास से बाहर निकाल दिया। इधर काग्रेस पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि डिप्टी योगेश गोयल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा अध्यादेश के विरोध को रोकने का प्रयास किए जाने को लेकर विधानसभा तक आक्रोष रेली नहीं निकालने की बात कहने आए थे और इसी दौरान डटोसरा गुस्सा गए और कहासुनी षुरू हो गई। विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने एडिशनल डीसीपी योगेश गोयल फटकार कर आवास से बाहर निकाल दिया। इस दौरान फटकारते हुए डोटासरा ने कहा आप ऐसा क्यों हो रहे है सुबह से ही यहां तमाशा बना रहे है। हमें धमका रहे है। हम नहीं डरेंगे। बाहर निकलिए आप, गेट आउट। एमएलए के क्वार्टर से गेट आउट, आप बाहर निकलिए। आप एजेंट है बीजेपी के। बाहर चलिए। इतनी हिम्मत। सुबह से तमाशा बना रखा है आपने। हमें कैसे नहीं जाने दोगे। एक तो लोकतंत्र की हत्या कर रहे हो। ऊपर से हमें धमका रहे हो। ये सुबह से तानाशाही कर रहा है। किसने पॉवर दिया इसको। डूडी साहब हम सबकी मांग है। इसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

https://youtu.be/MvGii2sTzSM

नयी हज निति के तहत हज पर नहीं जा सकेंगे 70 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग

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हजयात्रा 2018 में जाने के लिए पूरी तैयारी करके बैठे 70 साल से ज्यादा उम्र के प्रदेश में 500 बुजुर्ग जिंदगी का सबसे बड़ा फर्ज अदा करने से वंचित रह जाएंगे। अब तक उन्हें रिजर्व कैटेगरी में रखा जाता और लॉटरी में शामिल किए बिना ही हज पर पर भेजा जाता है। जबकि नई हज नीति 2018-2022 में दिए गए प्रस्तावों के अनुसार यह रिजर्व कैटेगरी खत्म कर दी जाएगी और बुजुर्गों को भी सामान्य हज आवेदकों की फेहरिस्त में शामिल किया जाएगा। नई हज नीति के ड्राफ्ट में लगातार चार साल से आवेदन कर रहे हैं लोगों की रिजर्व कैटेगरी भी खत्म करने की सिफारिश की गई, जिसमें करीब 2000 लोग इस बार आवेदन करने वाले हैं और हज की पूरी तैयारी करके बैठे हैं।
राजस्थान हज वेलफेयर सोसायटी ने इसके लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री और केंद्रीय हज कमेटी के अधिशाषी अधिकारी को पत्र लिखकर इस समस्या से आगाह किया है। सोसायटी के महासचिव हाजी निजामुद्दीन ने बताया कि पत्रों में बताया गया है कि नई हज नीति में रिजर्व कैटेगरी खत्म करने की सिफारिशें मान ली गईं तो राजस्थान के करीब 2500 हज यात्री रिजर्व कैटेगरी से वंचित रहेंगे। फिर चाहे वे 70 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग हों या लगातार चार साल से आवेदन करने वाले, उन्हें सामान्य श्रेणी में लॉटरी का इंतजार करना पड़ेगा।
देशमें 70 हजार प्रभावित
सोसायटीने पत्र में यह भी आगाह किया है कि रिजर्व कैटेगरी खत्म करने से जहां राजस्थान के 2500 हज आवेदक प्रभावित होंगे, वहीं पूरे देश में इन दोनों श्रेणियों में करीब 70 हजार लोग हज यात्रा करते हैं, वे भी इस फैसले से मायूस हाेंगे। गौरतलब है कि नई हज नीति में पहले इम्बार्केशन पाइंट 21 से घटाकर 9 कर दिए गए थे, जिनमें जयपुर से भी हज यात्रा की फ्लाइटें बंद करने की सिफारिश की गई थी। जबकि हज कमेटी, निजी संस्थाओं के दबाव के कारण जयपुर से हज फ्लाइटें यथावत रखने का फैसला लिया गया है।

DNS and Homoeopathy approach -Dr. Kajal Verma

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Deviated nasal septum starts around puberty reaches its full development at the age of 20 yrs. Common in both sexes. Many cases are hereditary. Lack of descent of the palate may cause buckling of the cartilaginous part of septum.

Causes

Septum grow at same rate like root. If septum start growing at rapid rate it becomes

dr. kajal verma

buckled to accommodate itself.

-Congenital cause Abnormal intrauterine posture may result in compression forces acting on the nose & upper root.

-Trauma

Cause secondary to trauma
– polyp in nose.

Pathology

1- Deviation are smooth: Deflection which are upper, lower, anterior or posterior septum ( Isolated thickening on septum).

2- Spur: Occur at junction of base & cartilage may predispose to epistaxis from the vessel on their surface.

3- Thickening may result from trauma due to overriding of the cartilaginous fragments.

4- Dislocation: Displacement of the lower edge of the cartilage from the maxillary crust & the vom due to trauma.

The deviation may be ‘C’ shape, ‘S’ shape.

Symptoms

-Blocking of nose.

-Sinusital headache secondary to obstruction to drainage of sinuses.

-Vacuum headache causes by vacuum created in Para nasal sinus due to obstruction in the drainage of the sinus resulting in absorption of the air by the mucosa of the sinus.

-Neurological headache when septum touches a sensitive part on the lateral wall of the nose.

-Recurrent rhinitis i.e. nose.

-Epistaxis: Little area the deviated side of the septum is exposed to atmospheric directly predisposing to drying and crusting of mucosa and tendency to pick the nose.

-Anosmia due to DNS, perforation of nose

Signs

-Deformity of external nose.

-DNS

-Secondary hypertrophy of turbinate.

Complications

-Recurrent sinusitis due to obstruction to drainage of sinus.

-Middle ear infection due to forcible blockening  of nose or recurrent upper respiratory infection.

-Mouth breathing causing infection of pharynx, larynx, trachebronchial tree.

-Asthma: DNS acts as trigger for bronchospasm.

-Atrophic rhinitis on the root side of nose.

-Differential Diagnosis:

-Hypertrophied turbinate

-Polyps

Treatment

Sub mucous resection of septum or septoplasty.

Homoeopathic Approach

Homoeopathy offers an permanent relief for DNS & cures signs & symptoms of the patient speedily without any further recurrence.

Homeopathic treatment for those who suffer from nasal septum can be a big boon. It can help them save from the surgeon?s knife.You may have realized that the root cause of your problem is lack of an appropriate response to allergens to which your body is susceptible. There are a number of reasons why you may be experiencing these symptoms, including chronic sinusitis or nasal allergie.Mostly patients experience more than 80 % reduction in the intensity and frequency of their ailment after a period of 1-3 months of treatment

Sangunaira,Ars alb,Aconite,Tuber,Thuja,Teucr mer v are some of the good reult oriented medicines

जनता का जूता जनता के ही मूंह पर मारा युआईटी ने – गृहमंत्री ने कहा वाह क्या बात है

उदयपुर। आज उदयपुर की आम जनता का जूता उसके ही मूंह पर मारा है यु आई टी ने। यु आई टी के इस महान कार्य को शहर विधायक गुलाबचंद कटारिया ने खुश होकर फीता काटा और कहा वाह क्या बात है इस तमाचे से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, ग्रामीण विधायक फूल चंद मीणा ने भी कहा यह जूता पर्यटन के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। युआईटी अध्यक्ष रविन्द्र श्रीमाली भी जनता को पड़ रहे जूते से खुश दिखाई दे रहे थे।  यही नहीं जिन जिन जन – प्रतिनिधियों को जनता ने चुन कर जनहित के लिए भेजा आज जनता पर पड़ने वाले जुते से खुश दिखाई दे रहे थे।
जीहाँ सही सूना जनता का जूता जनता के सर।  फतह सागर पर फिश एक्वेरियम का उदघाटन हुआ और जनता के लिए देखने का शुल्क रखा गया है 100 रूपये जो सरासर शहर की जनता के लिए वेसा ही है जेसे अपना जुता अपने सर।  युआइटी ने करोड़ों खर्च कर फिश एक्वेरियम की गेलेरी बनाई तो क्या यह जनता का रुपया नहीं है,…यह करोड़ों रुपया यु आई टी के जिम्मेदार अपने घर से लेकर आयें है ? फतहसागर पर जिस जगह फिश एक्वेरियम बनाया गया क्या यह इन जिम्मेदार लोगों की निजी संम्पत्ति है ?  फतह सागर को शहर की जनता ने ही आबाद किया हुआ है, यह जगह आम जनता की है ,.. लेकिन युआईटी की निजी कंपनी से जनता की भागीदारी के नाम पर जनता को लूटने की ये एक सोची समझी योजना है जिस के लिए सभी जिम्मेदारों पर अपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिये।
पिछले कई सालों से फतहसागर पर उदयपुर की जनता को को फिश एक्वेरियम बनने का इंतज़ार था लेकिन एक्वेरियम के शुरू होते ही जनता की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। सत्ता धारियों ने निजी कंपनी के साथ मिल कर उदयपुर की जनता के मूह पर  तमाचा जड़ा है,  और एसा लग रहा है मानो निजी हितों के चलते जनता की संम्पत्ति को ही बेच कर जश्न मना रहे है।
निजी कंपनी मंशापुरण करणी माता रोपवे प्रा. ली. की भागीदारी में युआईटी ने फिश एक्वेरियम का निर्माण करवाया और अब टिकिट उसकी रख दी है 100 रूपये साथ में 18 रूपये जीएसटी के अलग। शहर की जनता अब सिर्फ इसको बाहर से गेट से ही निहार सकेगी, बच्चे फिश देखने की जिद करेगें लेकिन माँ बाप को अपने बजट देख कर जाना पड़ेगा।  कहलाने को जनता के प्रतिनिधि लेकिन एक बार भी जनता के हित के बारे में नहीं सोचा। देश के पहले वर्चुअल फिश एक्वेरियम का दावा किया जारहा है लेकिन देश में पहला एसा फिश एक्वेरियम होगा जिसकी फीस 100 रूपये रखी गयी है। जबकि देश के एनी हिस्सों में बने फिश एक्वेरियम पर नज़र डालें तो १० रूपये से ५० रूपये तक का शुल्क है।
आश्चर्य की बात तो यह है कि गेलेरी का निर्माण जनता के पैसे से करवाया गया. और उसको बेच दिया निजी ठेकेदार को , साथ ही उसको खुली छूट और देदी लूटने की कि जितना हो सके जनता की खाल उतार दो। कहा जारहा है कि अभी तो एक्वेरियम का पहला चरण का काम ही हुआ है आखरी चरण का काम होने के बाद तो शायद २५० से ३०० रूपये टिकिट हो जायेगा।
सरकार और आमजनता की भागीदारी के नाम पर एक ही कंपनी को बार बार ठेका देदिया जाता है और ठेकेदार की मौज हो जाती है , और शायद यही ठेकेदार सत्ता में बैठे लोगों और अधिकारियों की मौज भी करवाता होगा। इससे पहले दूधतलाई पर रोपवे भी इसी कंपनी के नाम है।
जनता को इससे कोई मतलब नहीं की ठेका किसको दिया जाता है लेकिन अपने ही शहर या अपने ही देश में फिश एक्वेरियम जैसी चीज़ को देखने के लिए उसको इतनी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी यह दुःख की बात है।
बड़ी शान से शनिवार को  गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, ग्रामीण विधायक फूलचंद मीना युआइटी अध्यक्ष रविन्द्र श्रीमाली और जाने सत्ता पक्ष के कितने लोग मोजूद थे किसी ने इतनी ज्यादा रेट पर कुछ नहीं बोला सब के सब वाह वाही कर चाय नाश्ता कर फीता काटा और पर्यटन को बढ़ावा देने की तारीफ करते हुए वहां से आगये।
निजी कंपनी के इस ठेकेदार की जनता को लूटने की मंशा पहले ही दिन झलक गयी जब उसको कहा गया था की पहले दिन शहर की जनता के लिए फ्री किया जाय लेकिन जनता की खाल तक नोचने वाले ने वीअओपी के जाते ही शुल्क लेना शुरू करदिया।

राजस्थान में नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ जांच अब आसान नहीं, वसुंधरा सरकार ने पास किया अध्यादेश

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राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार सोमवार से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में एक ऐसा बिल लाने जा रही है जो एक तरह से सभी सांसदों-विधायकों, जजों और अफ़सरों को लगभग इम्युनिटी दे देगा. उनके ख़िलाफ़ पुलिस या अदालत में शिकायत करना आसान नहीं होगा. सीआरपीसी में संशोधन के इस बिल के बाद सरकार की मंज़ूरी के बिना इनके ख़िलाफ़ कोई केस दर्ज नहीं कराया जा सकेगा. यही नहीं, जब तक एफआईआर नहीं होती, प्रेस में इसकी रिपोर्ट भी नहीं की जा सकेगी. ऐसे किसी मामले में किसी का नाम लेने पर दो साल की सज़ा भी हो सकती है.

राज्य में काम कर रहे अधिकारी राजे सरकार के इस अध्यादेश के बाद किसी भी संभावित कार्रवाई से इम्युन हो जाएंगे और इनके खिलाफ बिना अनुमति लिए कोई अदालती या पुलिस कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।

7 सिंतबर को जारी द क्रिमिनल लॉ (राजस्थान अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस 2017 में मीडिया को भी ऐसे किसी आरोप की रिपोर्टिंग की इजाजत नहीं होगी जब तक कि संबंधित मामले में जांच के लिए मंजूरी नहीं दे दी जाती है।

इस बिल के अनुसार किसी जज या पब्लिक सर्वेंट की किसी कार्रवाई के खिलाफ, जो कि उसने अपनी ड्यूटी के दौरान की हो, आप कोर्ट के जरिए भी एफआईआर दर्ज नहीं कर सकते. ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के लिए सरकार की मंजूरी लेना जरूरी होगा.

अध्यादेश में अधिकारियों को 180 दिनों के लिए इम्युनिटी दी गई है। इसमें कहा गया है, ‘कोई भी मजिस्ट्रेट किसी भी सेवानिवृत्त या कामकाजी जज या मजिस्ट्रेट के खिलाफ जांच का आदेश नहीं देगा।

अध्यादेश के जरिए आपराधिक संहिता 1973 को संशोधित किया जाएगा और इसके साथ ही नौकरशाहों से जुड़े किसी भी मामले, उनका नाम, पता, फोटो या पारिवारिक जानकारी छापने की अनुमित नहीं होगी। इन नियमों का उल्लंघन करने वाले को दो सालों की सजा दिए जाने का प्रावधान रखा गया है।

मीडिया पर भी होगी सख्ती

इसके मुताबिक किसी जज या पब्लिक सर्वेंट की किसी कार्रवाई के खिलाफ, जो कि उसने अपनी ड्यूटी के दौरान की हो, आप कोर्ट के जरिए भी एफआईआर दर्ज नहीं कर सकते. ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के लिए पहले सरकार की मंजूरी लेना जरूरी होगा. अगर सरकार ने इजाजत नहीं दी तो 180 दिनों के बाद किसी पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ कोर्ट के जरिए एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है. ऐसे ‘आरोपी’ का नाम तब तक मीडिया में नहीं आ सकता जब त‍क कि सरकार इसकी इजाजत ना दे दे. किसी अगर मंजूरी से पहले ऐसा हुआ तो 2 साल तक की सजा दी जा सकती है.

खुशियों के साथ मनाई दीपावली- खूब छुटे पटाखे

उदयपुर। सुख-समृद्धि व वैभव का दीपोत्सव धनतेरस से शुरू होकर आज भाई दूज तक लगातार जारी है। दीपावली पर गुरुवार को शहर रोशनी में नहाया। हर घर-प्रतिष्ठान, बाजार, चौक-चौराहा व सरकारी भवन पर आकर्षक सजावट की गई। पटाखों और मिठाइयों के साथ जोर शोर के साथ मनाई गयी दिवाली . पटाखों के लिए कोर्ट के आदेश हो चाहे बड़े बड़े ज्ञानियों के ज्ञान लेकिन दीपावली की खुशियों के आगे सब कुछ फीका रहा .बच्चों और बड़ों ने खूब पटाखे छुटाए , हालाँकि पटाखों पर पड़ी महगाई की मार ने कुछ कमी जरूर की . लोगों ने शुभ मुहूर्त पर लक्ष्मी पूजन कर खुशहाली की कामना की। पूरी रात आतिशबाजी का दौर जारी रहा।

अलसुबह महिलाओं ने परंपरानुसार गोवर्धन पूजा की। दीपावली के अगले दिन शुक्रवार को रामा-सामा पर लोगों ने अपने परिजनों व परिचितों के यहां जाकर बड़ों से आशीर्वाद लिया। साथ ही अपनों से छोटों को उपहार देकर दीपावली की शुभकामनाएं दी। मुलाकात का यह दौर देर रात तक जारी रहा। महिलाओं ने घरों में विशेष पकवान बनाकर मेहमानों का मुंह मीठा करवाया।

लक्ष्मी मंदिर में भक्तों की कतार :
दिवाली की अल सुबह से भटियानी चोहट्टा स्थित महालक्ष्मी मंदिर में भक्तों की कतारें लगी जो देर रात तक जारी रही। लक्ष्मी के दर्शन और पूजा के लिए महियें युवा घंटों लाइन में खड़े रहे। पुलिस ने लक्ष्मी मंदिर रोड का यातायात एक दिन पहले ही बंद कर दिया था। सुबह तो भक्तों की कतार जगदीश चोक तक पहुच गयी थी।
सजे बाज़ार बापूबाजार रहा फीका : इस बार हालाँकि शहर के हर हिस्से के बाज़ार रोशनी से जगमग रहे लेकिन शहर का हार्ट कहे जाने वाले बापूबाजार में व्यापारियों ने सजावट में कोई उत्साह नहीं दिखाया। बापूबाजार के अधिकतर व्यवसाई महापौर और नगर निगम के विरोध स्वरुप साज्जा नहीं की। गौर तलब है की शहर की आम जनता बापूबाजार में शाम को रोशनी देखने जरूर आती है।

Cute Indian girls dressed in sari with folded hands representing traditional Indian greeting, standing inside a temple celebrating diwali, festival of lights.

खेखरे पर हुई गोवर्धन पूजा:
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा दिवाली के अगले दिन शुक्रवार को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया गया। दीपावली के दूसरे दिन गो पूजा का विशेष महत्‍व होता है। महिलाओं ने अल सुबह गाय की पूजा के बाद गाय पालक (गाय की सेवा करने वाला) को गिफ्ट और अन्‍न दिया। गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर जल, मौली, रोली, चावल, फूल, दही और तेल का दीपक जलाकर पूजा की। ऐसी मान्‍यता है कि इंद्र के कोप से बचने के लिए गोकुल वासियों ने जब गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली, तब उन्‍होंने 56 भोग बनाकर श्री कृष्ण को भोग लगाया था। इससे खुश होकर श्री कृष्ण ने आशीर्वाद दिया और कहा इंद्र से डरने की जरूरत नहीं है, वह गोकुल वासियों की हमेशा रक्षा करेंगे।
मेहमानों का सिलसिला सुर रामा शामा :
दिवाली के अगले दिन महिलाऐं गोवर्धन पूजा करती है तो घर के पुरुष इस दिन रामा-शामा करते है । जो लोग दीवाली की रात आतिशबाजी में व्यस्त रहे वो लोग शुक्रवार के दिन रामा शामा करने में जुटे रहे। रामा शामा का ये सिलसिला दिन भर चलता रहा। इस दौरान लोगों ने अपने घर आने वाले मेहमानों का स्वागत किया और घर में बनी मिठाइयों से उनका मुंह मीठा कराया। इसी तरह का माहौल सियासी पार्टियों के दफ्तरों और प्राईवेट कंपनियों के संस्थानों में रहा। उधर, दिवाली की छुट्टियों के बाद बाहर के लोगों का घर लौटने का सिलसिला शुरू हो गया।
रोड़वेज और प्राईवेट बसों में सवारियां खचाखच भरी रही। ऐसा ही हाल रेलगाड़ियों का भी रहा… रेलवे स्टेशनों पर रेलों के ज़रिये घर लौटने वालों की रेलमपेल देखि गई।