नयी हज निति के तहत हज पर नहीं जा सकेंगे 70 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग

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हजयात्रा 2018 में जाने के लिए पूरी तैयारी करके बैठे 70 साल से ज्यादा उम्र के प्रदेश में 500 बुजुर्ग जिंदगी का सबसे बड़ा फर्ज अदा करने से वंचित रह जाएंगे। अब तक उन्हें रिजर्व कैटेगरी में रखा जाता और लॉटरी में शामिल किए बिना ही हज पर पर भेजा जाता है। जबकि नई हज नीति 2018-2022 में दिए गए प्रस्तावों के अनुसार यह रिजर्व कैटेगरी खत्म कर दी जाएगी और बुजुर्गों को भी सामान्य हज आवेदकों की फेहरिस्त में शामिल किया जाएगा। नई हज नीति के ड्राफ्ट में लगातार चार साल से आवेदन कर रहे हैं लोगों की रिजर्व कैटेगरी भी खत्म करने की सिफारिश की गई, जिसमें करीब 2000 लोग इस बार आवेदन करने वाले हैं और हज की पूरी तैयारी करके बैठे हैं।
राजस्थान हज वेलफेयर सोसायटी ने इसके लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री और केंद्रीय हज कमेटी के अधिशाषी अधिकारी को पत्र लिखकर इस समस्या से आगाह किया है। सोसायटी के महासचिव हाजी निजामुद्दीन ने बताया कि पत्रों में बताया गया है कि नई हज नीति में रिजर्व कैटेगरी खत्म करने की सिफारिशें मान ली गईं तो राजस्थान के करीब 2500 हज यात्री रिजर्व कैटेगरी से वंचित रहेंगे। फिर चाहे वे 70 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग हों या लगातार चार साल से आवेदन करने वाले, उन्हें सामान्य श्रेणी में लॉटरी का इंतजार करना पड़ेगा।
देशमें 70 हजार प्रभावित
सोसायटीने पत्र में यह भी आगाह किया है कि रिजर्व कैटेगरी खत्म करने से जहां राजस्थान के 2500 हज आवेदक प्रभावित होंगे, वहीं पूरे देश में इन दोनों श्रेणियों में करीब 70 हजार लोग हज यात्रा करते हैं, वे भी इस फैसले से मायूस हाेंगे। गौरतलब है कि नई हज नीति में पहले इम्बार्केशन पाइंट 21 से घटाकर 9 कर दिए गए थे, जिनमें जयपुर से भी हज यात्रा की फ्लाइटें बंद करने की सिफारिश की गई थी। जबकि हज कमेटी, निजी संस्थाओं के दबाव के कारण जयपुर से हज फ्लाइटें यथावत रखने का फैसला लिया गया है।

DNS and Homoeopathy approach -Dr. Kajal Verma

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Deviated nasal septum starts around puberty reaches its full development at the age of 20 yrs. Common in both sexes. Many cases are hereditary. Lack of descent of the palate may cause buckling of the cartilaginous part of septum.

Causes

Septum grow at same rate like root. If septum start growing at rapid rate it becomes

dr. kajal verma

buckled to accommodate itself.

-Congenital cause Abnormal intrauterine posture may result in compression forces acting on the nose & upper root.

-Trauma

Cause secondary to trauma
– polyp in nose.

Pathology

1- Deviation are smooth: Deflection which are upper, lower, anterior or posterior septum ( Isolated thickening on septum).

2- Spur: Occur at junction of base & cartilage may predispose to epistaxis from the vessel on their surface.

3- Thickening may result from trauma due to overriding of the cartilaginous fragments.

4- Dislocation: Displacement of the lower edge of the cartilage from the maxillary crust & the vom due to trauma.

The deviation may be ‘C’ shape, ‘S’ shape.

Symptoms

-Blocking of nose.

-Sinusital headache secondary to obstruction to drainage of sinuses.

-Vacuum headache causes by vacuum created in Para nasal sinus due to obstruction in the drainage of the sinus resulting in absorption of the air by the mucosa of the sinus.

-Neurological headache when septum touches a sensitive part on the lateral wall of the nose.

-Recurrent rhinitis i.e. nose.

-Epistaxis: Little area the deviated side of the septum is exposed to atmospheric directly predisposing to drying and crusting of mucosa and tendency to pick the nose.

-Anosmia due to DNS, perforation of nose

Signs

-Deformity of external nose.

-DNS

-Secondary hypertrophy of turbinate.

Complications

-Recurrent sinusitis due to obstruction to drainage of sinus.

-Middle ear infection due to forcible blockening  of nose or recurrent upper respiratory infection.

-Mouth breathing causing infection of pharynx, larynx, trachebronchial tree.

-Asthma: DNS acts as trigger for bronchospasm.

-Atrophic rhinitis on the root side of nose.

-Differential Diagnosis:

-Hypertrophied turbinate

-Polyps

Treatment

Sub mucous resection of septum or septoplasty.

Homoeopathic Approach

Homoeopathy offers an permanent relief for DNS & cures signs & symptoms of the patient speedily without any further recurrence.

Homeopathic treatment for those who suffer from nasal septum can be a big boon. It can help them save from the surgeon?s knife.You may have realized that the root cause of your problem is lack of an appropriate response to allergens to which your body is susceptible. There are a number of reasons why you may be experiencing these symptoms, including chronic sinusitis or nasal allergie.Mostly patients experience more than 80 % reduction in the intensity and frequency of their ailment after a period of 1-3 months of treatment

Sangunaira,Ars alb,Aconite,Tuber,Thuja,Teucr mer v are some of the good reult oriented medicines

जनता का जूता जनता के ही मूंह पर मारा युआईटी ने – गृहमंत्री ने कहा वाह क्या बात है

उदयपुर। आज उदयपुर की आम जनता का जूता उसके ही मूंह पर मारा है यु आई टी ने। यु आई टी के इस महान कार्य को शहर विधायक गुलाबचंद कटारिया ने खुश होकर फीता काटा और कहा वाह क्या बात है इस तमाचे से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, ग्रामीण विधायक फूल चंद मीणा ने भी कहा यह जूता पर्यटन के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। युआईटी अध्यक्ष रविन्द्र श्रीमाली भी जनता को पड़ रहे जूते से खुश दिखाई दे रहे थे।  यही नहीं जिन जिन जन – प्रतिनिधियों को जनता ने चुन कर जनहित के लिए भेजा आज जनता पर पड़ने वाले जुते से खुश दिखाई दे रहे थे।
जीहाँ सही सूना जनता का जूता जनता के सर।  फतह सागर पर फिश एक्वेरियम का उदघाटन हुआ और जनता के लिए देखने का शुल्क रखा गया है 100 रूपये जो सरासर शहर की जनता के लिए वेसा ही है जेसे अपना जुता अपने सर।  युआइटी ने करोड़ों खर्च कर फिश एक्वेरियम की गेलेरी बनाई तो क्या यह जनता का रुपया नहीं है,…यह करोड़ों रुपया यु आई टी के जिम्मेदार अपने घर से लेकर आयें है ? फतहसागर पर जिस जगह फिश एक्वेरियम बनाया गया क्या यह इन जिम्मेदार लोगों की निजी संम्पत्ति है ?  फतह सागर को शहर की जनता ने ही आबाद किया हुआ है, यह जगह आम जनता की है ,.. लेकिन युआईटी की निजी कंपनी से जनता की भागीदारी के नाम पर जनता को लूटने की ये एक सोची समझी योजना है जिस के लिए सभी जिम्मेदारों पर अपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिये।
पिछले कई सालों से फतहसागर पर उदयपुर की जनता को को फिश एक्वेरियम बनने का इंतज़ार था लेकिन एक्वेरियम के शुरू होते ही जनता की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। सत्ता धारियों ने निजी कंपनी के साथ मिल कर उदयपुर की जनता के मूह पर  तमाचा जड़ा है,  और एसा लग रहा है मानो निजी हितों के चलते जनता की संम्पत्ति को ही बेच कर जश्न मना रहे है।
निजी कंपनी मंशापुरण करणी माता रोपवे प्रा. ली. की भागीदारी में युआईटी ने फिश एक्वेरियम का निर्माण करवाया और अब टिकिट उसकी रख दी है 100 रूपये साथ में 18 रूपये जीएसटी के अलग। शहर की जनता अब सिर्फ इसको बाहर से गेट से ही निहार सकेगी, बच्चे फिश देखने की जिद करेगें लेकिन माँ बाप को अपने बजट देख कर जाना पड़ेगा।  कहलाने को जनता के प्रतिनिधि लेकिन एक बार भी जनता के हित के बारे में नहीं सोचा। देश के पहले वर्चुअल फिश एक्वेरियम का दावा किया जारहा है लेकिन देश में पहला एसा फिश एक्वेरियम होगा जिसकी फीस 100 रूपये रखी गयी है। जबकि देश के एनी हिस्सों में बने फिश एक्वेरियम पर नज़र डालें तो १० रूपये से ५० रूपये तक का शुल्क है।
आश्चर्य की बात तो यह है कि गेलेरी का निर्माण जनता के पैसे से करवाया गया. और उसको बेच दिया निजी ठेकेदार को , साथ ही उसको खुली छूट और देदी लूटने की कि जितना हो सके जनता की खाल उतार दो। कहा जारहा है कि अभी तो एक्वेरियम का पहला चरण का काम ही हुआ है आखरी चरण का काम होने के बाद तो शायद २५० से ३०० रूपये टिकिट हो जायेगा।
सरकार और आमजनता की भागीदारी के नाम पर एक ही कंपनी को बार बार ठेका देदिया जाता है और ठेकेदार की मौज हो जाती है , और शायद यही ठेकेदार सत्ता में बैठे लोगों और अधिकारियों की मौज भी करवाता होगा। इससे पहले दूधतलाई पर रोपवे भी इसी कंपनी के नाम है।
जनता को इससे कोई मतलब नहीं की ठेका किसको दिया जाता है लेकिन अपने ही शहर या अपने ही देश में फिश एक्वेरियम जैसी चीज़ को देखने के लिए उसको इतनी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी यह दुःख की बात है।
बड़ी शान से शनिवार को  गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, ग्रामीण विधायक फूलचंद मीना युआइटी अध्यक्ष रविन्द्र श्रीमाली और जाने सत्ता पक्ष के कितने लोग मोजूद थे किसी ने इतनी ज्यादा रेट पर कुछ नहीं बोला सब के सब वाह वाही कर चाय नाश्ता कर फीता काटा और पर्यटन को बढ़ावा देने की तारीफ करते हुए वहां से आगये।
निजी कंपनी के इस ठेकेदार की जनता को लूटने की मंशा पहले ही दिन झलक गयी जब उसको कहा गया था की पहले दिन शहर की जनता के लिए फ्री किया जाय लेकिन जनता की खाल तक नोचने वाले ने वीअओपी के जाते ही शुल्क लेना शुरू करदिया।

राजस्थान में नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ जांच अब आसान नहीं, वसुंधरा सरकार ने पास किया अध्यादेश

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राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार सोमवार से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में एक ऐसा बिल लाने जा रही है जो एक तरह से सभी सांसदों-विधायकों, जजों और अफ़सरों को लगभग इम्युनिटी दे देगा. उनके ख़िलाफ़ पुलिस या अदालत में शिकायत करना आसान नहीं होगा. सीआरपीसी में संशोधन के इस बिल के बाद सरकार की मंज़ूरी के बिना इनके ख़िलाफ़ कोई केस दर्ज नहीं कराया जा सकेगा. यही नहीं, जब तक एफआईआर नहीं होती, प्रेस में इसकी रिपोर्ट भी नहीं की जा सकेगी. ऐसे किसी मामले में किसी का नाम लेने पर दो साल की सज़ा भी हो सकती है.

राज्य में काम कर रहे अधिकारी राजे सरकार के इस अध्यादेश के बाद किसी भी संभावित कार्रवाई से इम्युन हो जाएंगे और इनके खिलाफ बिना अनुमति लिए कोई अदालती या पुलिस कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।

7 सिंतबर को जारी द क्रिमिनल लॉ (राजस्थान अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस 2017 में मीडिया को भी ऐसे किसी आरोप की रिपोर्टिंग की इजाजत नहीं होगी जब तक कि संबंधित मामले में जांच के लिए मंजूरी नहीं दे दी जाती है।

इस बिल के अनुसार किसी जज या पब्लिक सर्वेंट की किसी कार्रवाई के खिलाफ, जो कि उसने अपनी ड्यूटी के दौरान की हो, आप कोर्ट के जरिए भी एफआईआर दर्ज नहीं कर सकते. ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के लिए सरकार की मंजूरी लेना जरूरी होगा.

अध्यादेश में अधिकारियों को 180 दिनों के लिए इम्युनिटी दी गई है। इसमें कहा गया है, ‘कोई भी मजिस्ट्रेट किसी भी सेवानिवृत्त या कामकाजी जज या मजिस्ट्रेट के खिलाफ जांच का आदेश नहीं देगा।

अध्यादेश के जरिए आपराधिक संहिता 1973 को संशोधित किया जाएगा और इसके साथ ही नौकरशाहों से जुड़े किसी भी मामले, उनका नाम, पता, फोटो या पारिवारिक जानकारी छापने की अनुमित नहीं होगी। इन नियमों का उल्लंघन करने वाले को दो सालों की सजा दिए जाने का प्रावधान रखा गया है।

मीडिया पर भी होगी सख्ती

इसके मुताबिक किसी जज या पब्लिक सर्वेंट की किसी कार्रवाई के खिलाफ, जो कि उसने अपनी ड्यूटी के दौरान की हो, आप कोर्ट के जरिए भी एफआईआर दर्ज नहीं कर सकते. ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के लिए पहले सरकार की मंजूरी लेना जरूरी होगा. अगर सरकार ने इजाजत नहीं दी तो 180 दिनों के बाद किसी पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ कोर्ट के जरिए एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है. ऐसे ‘आरोपी’ का नाम तब तक मीडिया में नहीं आ सकता जब त‍क कि सरकार इसकी इजाजत ना दे दे. किसी अगर मंजूरी से पहले ऐसा हुआ तो 2 साल तक की सजा दी जा सकती है.

खुशियों के साथ मनाई दीपावली- खूब छुटे पटाखे

उदयपुर। सुख-समृद्धि व वैभव का दीपोत्सव धनतेरस से शुरू होकर आज भाई दूज तक लगातार जारी है। दीपावली पर गुरुवार को शहर रोशनी में नहाया। हर घर-प्रतिष्ठान, बाजार, चौक-चौराहा व सरकारी भवन पर आकर्षक सजावट की गई। पटाखों और मिठाइयों के साथ जोर शोर के साथ मनाई गयी दिवाली . पटाखों के लिए कोर्ट के आदेश हो चाहे बड़े बड़े ज्ञानियों के ज्ञान लेकिन दीपावली की खुशियों के आगे सब कुछ फीका रहा .बच्चों और बड़ों ने खूब पटाखे छुटाए , हालाँकि पटाखों पर पड़ी महगाई की मार ने कुछ कमी जरूर की . लोगों ने शुभ मुहूर्त पर लक्ष्मी पूजन कर खुशहाली की कामना की। पूरी रात आतिशबाजी का दौर जारी रहा।

अलसुबह महिलाओं ने परंपरानुसार गोवर्धन पूजा की। दीपावली के अगले दिन शुक्रवार को रामा-सामा पर लोगों ने अपने परिजनों व परिचितों के यहां जाकर बड़ों से आशीर्वाद लिया। साथ ही अपनों से छोटों को उपहार देकर दीपावली की शुभकामनाएं दी। मुलाकात का यह दौर देर रात तक जारी रहा। महिलाओं ने घरों में विशेष पकवान बनाकर मेहमानों का मुंह मीठा करवाया।

लक्ष्मी मंदिर में भक्तों की कतार :
दिवाली की अल सुबह से भटियानी चोहट्टा स्थित महालक्ष्मी मंदिर में भक्तों की कतारें लगी जो देर रात तक जारी रही। लक्ष्मी के दर्शन और पूजा के लिए महियें युवा घंटों लाइन में खड़े रहे। पुलिस ने लक्ष्मी मंदिर रोड का यातायात एक दिन पहले ही बंद कर दिया था। सुबह तो भक्तों की कतार जगदीश चोक तक पहुच गयी थी।
सजे बाज़ार बापूबाजार रहा फीका : इस बार हालाँकि शहर के हर हिस्से के बाज़ार रोशनी से जगमग रहे लेकिन शहर का हार्ट कहे जाने वाले बापूबाजार में व्यापारियों ने सजावट में कोई उत्साह नहीं दिखाया। बापूबाजार के अधिकतर व्यवसाई महापौर और नगर निगम के विरोध स्वरुप साज्जा नहीं की। गौर तलब है की शहर की आम जनता बापूबाजार में शाम को रोशनी देखने जरूर आती है।

Cute Indian girls dressed in sari with folded hands representing traditional Indian greeting, standing inside a temple celebrating diwali, festival of lights.

खेखरे पर हुई गोवर्धन पूजा:
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा दिवाली के अगले दिन शुक्रवार को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया गया। दीपावली के दूसरे दिन गो पूजा का विशेष महत्‍व होता है। महिलाओं ने अल सुबह गाय की पूजा के बाद गाय पालक (गाय की सेवा करने वाला) को गिफ्ट और अन्‍न दिया। गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर जल, मौली, रोली, चावल, फूल, दही और तेल का दीपक जलाकर पूजा की। ऐसी मान्‍यता है कि इंद्र के कोप से बचने के लिए गोकुल वासियों ने जब गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली, तब उन्‍होंने 56 भोग बनाकर श्री कृष्ण को भोग लगाया था। इससे खुश होकर श्री कृष्ण ने आशीर्वाद दिया और कहा इंद्र से डरने की जरूरत नहीं है, वह गोकुल वासियों की हमेशा रक्षा करेंगे।
मेहमानों का सिलसिला सुर रामा शामा :
दिवाली के अगले दिन महिलाऐं गोवर्धन पूजा करती है तो घर के पुरुष इस दिन रामा-शामा करते है । जो लोग दीवाली की रात आतिशबाजी में व्यस्त रहे वो लोग शुक्रवार के दिन रामा शामा करने में जुटे रहे। रामा शामा का ये सिलसिला दिन भर चलता रहा। इस दौरान लोगों ने अपने घर आने वाले मेहमानों का स्वागत किया और घर में बनी मिठाइयों से उनका मुंह मीठा कराया। इसी तरह का माहौल सियासी पार्टियों के दफ्तरों और प्राईवेट कंपनियों के संस्थानों में रहा। उधर, दिवाली की छुट्टियों के बाद बाहर के लोगों का घर लौटने का सिलसिला शुरू हो गया।
रोड़वेज और प्राईवेट बसों में सवारियां खचाखच भरी रही। ऐसा ही हाल रेलगाड़ियों का भी रहा… रेलवे स्टेशनों पर रेलों के ज़रिये घर लौटने वालों की रेलमपेल देखि गई।

कार – ट्रक की जोरदार भिडंत, डूंगरपुर निवासी चार युवकों की घटना स्थल पर ही मौत

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उदयपुर, जिले में शुक्रवार तड़के एक कार ट्रक में घुस गई। हादसे में डूंगरपुर के 4 युवकों की घटनास्‍थल पर ही मौत हो गई और 4 घायल हाे गए। घायलाें काे उदयपुर के एमबी अस्‍पताल में भर्ती कराया है। इनमें 2 की हालत गंभीर है। हादसे की खबर मिलते ही परिवारों में हाहाकार मच गया। परिजन बदहवास से घटना स्थल और अस्पताल पहुंचे। हादसे में घायल युवक लेखक के पिता सुनील ने बताया कि रात डेढ़ बजे तक तो सभी दोस्त आतिशबाजी कर रहे थे। इसके बाद बिना बताए चले गए। अस्पताल से फ़ोन आने पर हादसे की जानकारी मिली।

पुलिस ने बताया कि शुक्रवार तड़के कार 8 युवक कार से उदयपुर से डूंगरपुर जा रहे थे। सोमकागदर गांव के पास तड़के साढ़े चार बजे कार आगे चल रही ट्रक में घुस गई। हादसे में चार लाेगाें की माैके पर ही माैत हाे गर्इ। सभी मृतक व घायलों की उम्र 20 से 25 वर्ष बताई जा रही है। कार में 8 लोग सवार थे जिनमें से 4 आगे बैठे थे और 4 पीछे वाली सीट पर बैठे थे।

आगे बैठने वाले चारों लोगों की घटनास्‍थल पर ही मौत हो गई। घायलों को उदयपुर के एमबी अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि आगे की सीट पर बैठे चारों लोग के शव बुरी तरह क्षतविक्षित होकर कार के अंदर फंस गए थे जिन्‍हें क्रेन की सहायता से बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला जा सका। घटना के बाद ऋषभदेव पुलिस तत्‍काल मौके पर पहुंची और घायलों को अस्‍पताल में भर्ती कराया।

ताया जा रहा है कि डूंगरपुर के ये युवक दिवाली और नया साल सेलिब्रेट करने हाइवे पर गए थे। हादसे में हाउसिंग बोर्ड डूंगरपुर निवासी दिग्विजय सिंह, पुत्र बलवीर सिंह, रेलड़ा निवासी महिपाल सिंह पुत्र नटवरसिंह, गामड़ी आहाड़ निवासी चंद्रविरसिंह पुत्र महिपाल सिंह तथा शास्त्री कॉलोनी निवासी ललित पुत्र राजेंद्र तम्बोली की घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गई। वहीं हाऊसिंग बोर्ड निवासी गोकुल पुत्र यशवंत सोनी, लेखक पुत्र सुनील भठीजा, प्रकाश पुत्र दौलतराम सिंधी तथा अशोकनगर निवासी कपिल पुत्र राजू सिंधी घायल हो गए।

चांदी के सिक्कों की बनवाई में मची लूट – एसोसिएशन के फरमान से सर्राफा व्यवसायी परेशान , जेब कट रही जनता की

उदयपुर। त्यौहार के सीजन में एक आम आदमी की कमर महगाई से वेसे ही टूटी हुई है ऊपर से लक्ष्मी की पूजा में काम आने वाले चांदी के सिक्के या उपहार में देने के लिए सर्राफा बाज़ार से ख़रीदे जा रहे सिक्कों को बाज़ार रेट से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। सिक्कों की दलाली की वजह से खुद सर्राफा व्यवसाई सर्राफा एसोसिएशन के जारी फरमान से दुखी है। उन्हें एसोसिएशन द्वारा अधिक्रत व्यापारी तय राशि से अधिक वसूल रहा है और वह ग्राहकों से लेने के लिए बाध्य है। इधर सर्राफा एसोसिएशन का गैर जिम्मेदाराना रवय्या भी संदेह पैदा कर रहा है।
अक्सर यह सुनाने में आया है कि सोना – चांदी के व्यवसायी जेवर बनवाई आदि का पैसा ज्यादा वसूलते है लेकिन इन दिनों सोने चांदी के व्यवसाइयों से चांदी के सिक्कों की बनवाई का मेहनताना तय राशि से अधिक लिया जारहा है। सर्राफा व्यवसाइयों ने बताया कि दीपों के महापर्व पर षहर के हजारों हजार लोग मां लक्ष्मी की पूजा, शगुन और खुशी के लिए सोने – चांदी के आभूषण खरीदते हैं। एकदुजे को उपहार देने, पूजा में भी चांदी के सिक्कों को रखना शुभ माना जाता है। ऐसे में उदयपुर की श्री सर्राफा ऐसोसिएषन ने 3 अक्टूबर को एक सक्र्यूलर जारी कर 99 वें प्रतिषत चांदी के सिक्कों की बनवाई के लिए नाचाणी मेटल के घनष्याम नाचाणी को अधिकृत किया था। जिसकी मजदूरी 750 रूपए प्रतिकिलों निर्धारित की गई। इसके साथ ही सभी व्यापारियों से अपील भी की थी कि वे ऐसोसिएशन द्वारा सत्यापित सोने चांदी के सिक्कों को ही खरीदे और बेचे। लेकिन अभी जो बाजारों में चांदी के सिक्के अधिकृत घनष्याम नाचाणी द्वारा दिए जा रहे हैं वह 750 रूपए के हिसाब से नहीं दिए जा रहे है। मनमर्जी की ओनी पोनी राषि व्यापारियों से वसूल की जा रही है। बुधवार को उदयपुर होलसेल गोल्ड ज्वेलर्स ऐसोसिशन से जुड़े पदाधिकारियों ने इस बात का खुलासा करते हुए अपना विरोध जताया और ऐसोसिएशन के फरमान की आलोचना भी की। सभी का कहना था कि नाचाणी द्वारा तय की गई राशि से भी अधिक वसूला जा रहा है। ऐसे में ग्राहकों को सिक्कों को बेचने में भी काफी मुष्किल हो रही है। वर्तमान भाव के से हजार से तीन हजार ज्यादा वसुलने की शीकायत व्यापारियों ने की है।
इधर एसोशिएशन के पदाधिकारी गैर जिम्मेदाराना जवाब दे रहे है। ने श्री सर्राफा ऐसोसिएषन के अध्यक्ष इन्दर सिंह मेहता की राय जानना चाहिए तो पहले तो उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी उन्हें नहीं है और अब ध्यान में आया है तो दिखवाते है,लेकिन बाद में अचानक उन्होंने जो जवाब दिया वह काफी चोंकाने वाला था श्री मेहता ने कहा कि जो इनवेस्ट करता है तो वह थोड़ा बहूत ज्यादा लेने का हक भी रखता है। एसोशिएसन के पदाधिकारी ग्राहकों और सर्राफा व्यवसाइयों के इस नुक्सान को क्यों नज़र अंदाज़ कर अधिकृत किये गए व्यवसायी से जवाब तलब नहीं कर रहे है।

वक्फ़ बोर्ड जिलाध्यक्ष ने इन्ताजामियां कमेटियों को दिए नोटिस, माँगा हिसाब

वक्फ़ बोर्ड उदयपुर के जिलाध्यक्ष हाज़ी उस्मान हैदर

उदयपुर . वक्फ़ बोर्ड उदयपुर के जिलाध्यक्ष  हाजी उस्मान गनी ने शहर की इन्ताजामियां कमेटियों के कार्यकारी अध्यक्षों को नोटिस दे कर वक्फ़ संम्पत्ति और उनके द्वारा किये जा रहे इंतजामों का ब्योरा माँगा है . कई कमेटियों के सदर सालों से कमेटियों में काबिज है, और इस तरह के नोटिस देकर कभी किसी ने हिसाब नहीं पूछा . हाजी उस्मान हैदर को राजस्थान वक्फ़ बोर्ड ने हाल ही में उदयपुर जिला वक्फ़ बोर्ड का अध्यक्ष बनाया है. मोजुदा समय में शहर भर में 7 अलग अलग कमेटियां बनी हुई है जो वक्फ बोर्ड के अंतर्गत आती है।

वक्फ बोर्ड के जिलाध्यक्ष हाजी उस्मान हैदर ने शहर में मोजूद वक्फ की सम्म्पत्तियों के लिए बनाई गयी इन्ताजामियां कमेटियों के कार्यकारी अध्यक्षों को नोटिस दे कर 7 दिनों के भीतर संम्पत्ति का ब्यौरा माँगा है, साथ ही उनके कार्यकाल के दौरान संम्पत्ति से होने वाली आय और खर्च के बारे में भी पूरी जानकारी मांगी है। नोटिस की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर को सूचनार्थ भेजी गयी है। हाजी उस्मान हैदर ने बताया कि उनका पहला लक्ष्य है कि शहर में मोजूद वक्फ की संम्पत्ति संरक्षित सुरक्षित हो, तथा उससे होने वाली आय को समाज के हितों में व संम्पत्ति के जीर्णोद्धार में लगाईं जा सके साथ ही केन्द्रीय वक्फ बोर्ड को इसकी रिपोर्ट भेज कर समाज हित में अनुदान माँगा जा सके। साथ ही जिला प्रशासन से भी सहयोग लिया जासके। हाजी उस्मान हैदर को राजस्थान वक्फ बोर्ड द्वारा हाल ही में उदयपुर वक्फ बोर्ड के जिलाध्यक्ष पद पर मनोनीत किया है।
वक्फ बोर्ड के सचिव असलम हुसैन ने बताया कि शहर में अभी ७ इन्ताजामियां कमेटियां वक्फ की संम्पत्ति की देख रेख कर रही है। जो  सभी कमेटियों के कार्यकाल भी समाप्त हो चुके है मोजुदा अध्यक्ष कार्यकारी अध्यक्ष या संरक्षक के तौर पर कार्य कर रहे है। सचिव असलम हुसैन ने बताया कि प्रदेश वक्फ बोर्ड के निर्देशानुसार बहुत जल्दी ही नयी कमेटियों का गठन किया जाएगा।

 

गरीब के घर में अनाज के लाले पड़े हुए है – कैसे होगी हैप्पी दीपावली

उदयपुर . उदयपुर जिले के ढाई लाख गरीब परिवार जो सस्ते अनाज का लाभ उठाते है उन्हें अनाज नहीं मिल पाया है . दीपावली के दो दिन पहले तक भी वह सस्ते अनाज का इंतज़ार कर रहे है लेकिन सस्ते अनाज की दुकानों पर गेहूं नहीं है . ऐसे में एक गरीब परिवार कैसे कह पायेगा यह हैप्पी दीपावली है .

उदयपुर जिले में करीब साड़े पांच लाख परिवार ऐसे है जो सस्ते अनाज का लाभताते है और इसी सस्ते अनाज की बदोलत उनके घर में दो वक़्त का चुल्हा आराम से जलता है .इन परिवारों के लिए आबंटित होने वाले अनाज का अक्टूबर में आधा ही उठाव हो पाया है। ऐसे में करीब ढाई लाख परिवारों के करीब 12 लाख लोगों के लिए अनाज नहीं पहुंच पाया है। वजह हाल ही में डीएसओ का निलम्बन होना है। कार्रवाई के बाद सरकार ने ऐसी व्यवस्था नहीं की है कि गेहूं आबंटन और उठान में व्यवधान नहीं आए।

जिले में प्रतिमाह 1135 उचित मूल्य दुकानों पर 11129 मेट्रिक टन गेहूं आबंटित होता है। जिला रसद अधिकारी के निलबंन की वजह से अक्टूबर के आवंटित गेहूं में से आधे का ही उठाव हो पाया। इसके बाद एफसीआई ने रसद विभाग को गेहूं देने पर रोक लगा दी है। अब नए रसद अधिकारी के आने के बाद ही गेहंू का उठाव हो पाएगा। ऐसे में अब वंचित परिवारों को राशन का गेहूं मिलने में देरी हो गई है। लिहाजा 12 लाख से भी अधिक परिवार दीपावली पर राशन का गेहूं लेने से वंचित रहेंगे

खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जिले में प्रति माह आवंटित गेहूं के आने के साथ ही हर माह की 10 तारीख से उपभोक्ता सप्ताह शुरू हो जाता है। इस माह की दस तारीख से 6 हजार मेट्रिक टन गेहूं का उठाव ही हो पाया। जिले की करीब 550 दुकानों पर ही गेहूं पहुंच पाया। इनमें से भी कुछ दुकानों पर पोस मशीन में इंद्रार्ज नहीं होने के कारण वितरण नहीं हो पाया

कोटा में हुई लम्बे बालों की प्रतियोगिता में उदयपुर की प्रोमिता विजेता

उदयपुर . कोटा के दशहरे मेले में सम्पन्न लंबे बालों की प्रतियोगिता में लेकसिटी की प्रोमिता मोदी ने 68 इंच लंबे बालों के दम पर खिताब जीत लिया। प्रोमिता प्राकृतिक चिकित्सक होने के साथ ही योगा और एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ भी है। वे कहती हैं कि शरीर की तरह बालों की सार-संभाल के लिए प्रकृति प्रदत्त चीजें ही कारगर होती हैं। बाजारी वस्तुएं इस्तेमाल करने से स्वास्थ्य, त्वचा और बालों को नुकसान पहुंचता है। वे बताती हैं कि पौष्टिक आहार के साथ उचित देखभाल से ही यह सब संभव हो सका। इतने लंबे बालों का शौक पालना आसान बात नहीं। घर के रोजमर्रा के कामकाज के बीच रोजाना आधा-पौन घंटा इनके लिए निकालना पड़ता है। आयोजन समिति ने उन्हें इस उपलब्धि पर प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया।