फर्जी हथियारों के लाइसेंस और हथियार रखने वालों के चेहरे हुए बेनकाब

उदयपुर . जम्मू कश्मीर से फर्जी हथियारों के के लाइसेंस बनवाने और अवैध हथियारों को रखने के मामले में एटीस द्वारा उदयपुर में कारवाई कर 13 रसूखदार लोगों पर कारवाई करते हुए उनके हथियारों के लाइसेंस व् हथियार जब्त करने की कारवाई के बाद . एटीस द्वारा इन रसूखदारों के नामों का खुलासा नहीं किया गया,. लेकिन गुरुवार को इस सभी लोगों को जयपुर में तलब किया गया . जयौर एटीस मुख्यालय में तलब किये जाने के बाद इन नामचीन रसूखदारों के चेहरे बेनकाब हो गए. सभी फर्जी लाइसेंस धारी जिन्होंने झूठे शपथपत्र देकर जम्मू कश्मीर से हथियारों के लाइसेंस बनवाये थे वे जयपुर एटीस मुख्यालय गए जिनमे मुख्यतः सुमित भंडारी, पारस बोल्या, दीपक परिहार, हसन पालीवाला, विकास सुहालका, रविकांत त्रिपाटी आदि शामिल है . कुछ और नाम है जिनकी पुष्ठी नहीं हो पायी 

सूत्रों की माने तो एटीस ने इनसे गहन पूछताछ के बाद हिरासत में लेलिया है . हालाँकि इस खबर की पुष्ठी किसी अधिकारी ने नहीं कि है. लेकिन माना जारहा है कि हथियारों के लाइसेंस के लिए कई शपथपत्र जमीनों के कागजात व् अन्य स्थानीय दस्तावेज जमा करवाने होते है, तभी वहां का लाइसेंस बन सकता है. अगर जम्मू कश्मीर से लाइसेंस आधिकारिक तौर पर बनवाये गए है तब भी दोषी है क्यूँ कि सभी शपथपत्र झूठे हो सकते है. और अगर लाइसेंस जाली हुए तब भी जाली लाइसेंस और हथियार रखने वाले दोषी है.

उदयपुर में बेशकीमती भूखण्ड का मामला सुलटाने के चक्कर में एक थाना अधिकारी का तबादला बना चर्चा का केंद्र

उदयपुर। शहर में इन दिनों एक थानाधिकारी का तबादला चर्चा का विषय बना हुआ है।
तबादला यों तो एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का अंग है लेकिन चर्चा का केन्द्र इसलिए बना कि एसपी को भी ’ओवरटेक’ कर यह थानाधिकारी केवल अपने एक उच्च अधिकारी के आदेशों का ही पालन कर रहा था लेकिन लेकसिटी में जमीनों की बढती ऊंची कीमतों ने हर वर्ग में लालच पैदा कर रखा है और यह अधिकारी भी उसी की लपेट में आ गया।
प्रकरण के अनुसार शहर के एक मलाईदार थाना के थानाधिकारी को हाल जारी तबादला सूची में जिलाबदर कर दिया गया। तबादले का कारण यों तो प्रशासकीय आधार बताया जा रहा है लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी अलग ही संदेश दे रही है। यों पूरे प्रदेश में 20 थानाधिकारियों को विभिन्न कारणों से जिला बदर किया गया है लेकिन 3 को प्रशासकीय आधार पर स्थानांतरित बताया गया। हालांकि अब भी यह थानाधिकारी जिला बदर कर के उस आदेश से अपना नाम कटवाने की जुगत में लगा हुआ है, लेकिन अंदर के सूत्र बता रहे है कि तबादला निरस्त होना बहुत मुश्किल है क्योंकि मामला संगीन है। इधर, इस मलाईदार थाने का प्रभारी बनने के लिए कई दावेदारों ने अपने जुगाड लगाना शुरू कर दिए हैं। यह थानाधिकारी वास्तव में सुखाडिया सर्कल के पास बेशकीमती भूखण्ड का मामला सुलटाने के चक्कर में आ गए। सुखाडिया सर्कल पर इलाहाबाद बैंक से सटी इस जमीन का वर्तमान बाजार मूल्य एक सौ करोड रूपये बताया जा रहा है। 75 हजार वर्ग फिट के इस भूखण्ड का दो रजिस्ट्रीयों से बेचान विवाद बना हुआ है। रियासतकालीन इस विवादित भूखण्ड पर शहर के कई भू माफियाओं, राजनेताओं एवं उच्च अधिकारियों की निगाह टिकी हुई है। फर्जी पट्टों पर बिकी यह भूमि दलाल आगे से आगे बेचते रहे। पट्टा संख्या 2952 की जमीन के बेचान में पूरा खेल धन और बाहुबल का चल रहा है। इसी मामले को सुलटाने की जिम्मेदारी उक्त थानाधिकारी द्वारा लेने की जानकारी मिलने पर सत्ताधारी दल में विरोध के स्वर उभरे और उन्हें जिला बदर करने के आदेश जारी हो गए। फिलहाल यह अधिकारी तबादला निरस्त कराने की जुगत में लगे हुए है ।

मरने से पहले पहलू खान ने जिन 6 आरोपियों का लिया था नाम, पुलिस ने सबको दी क्लीन चिट

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राजस्थान के अलवर में गौरक्षा के नाम पर हिंसा का शिकार हुए पहलू खान के मर्डर के मामले में नया मोड़ आ गया है. राजस्थान पुलिस ने एफआईआर से हत्या के 6 आरोपियों को बाहर कर दिया है.

खास बात ये है कि पुलिस ने उन छह आरोपियों को क्लीन चिट दी है, जिनके नाम खुद पहलू खान ने मरने से पहले बताए थे. आपको बता दें कि 55 साल के पहलू खान और उनके बेटे पर गौरक्षकों ने अलवर में तब हमला किया था जब वो जयपुर के मवेशी मेले से गाय और बछड़े खरीदकर अपने घर हरियाणा ले जा रहे थे.

ये घटना एक अप्रैल की है. तब किसी ने पहलू खान की पिटाई का वीडियो बना लिया था, जिसमें देखा जा सकता है कि पहलू खान को जमीन पर गिराकर बड़ी बेरहमी से पीटा गया. इस घटना की गूंज संसद में भी सुनी गई.

अस्पताल में इलाज के दौरान मरने से पहले पहलू खान ने अपने बयान में छह लोगों के नाम लिए थे. ये नाम एफआईआर में दर्ज किए गए थे, लेकिन उन्हें कभी गिरफ्तार नहीं किया गया. हालांकि, वीडियो के आधार पर पुलिस ने दूसरे सात लोगों को गिरफ्तार किया. उनमें दो अभी भी जेल में है, जबकि 5 को जमानत मिली हुई है.

आज CID CB ने पहलू खान के जरिए दिए गए छह नामों को एफआईआर से बाहर कर दिया. पुलिस सूत्रों का कहना है कि ऐसा कोई संतोषजनक सबूत नहीं मिला है जिससे ये कहा जा सके कि इन छह लोगों ने पहलू खान पर हमला किया था.

पुलिस के मुताबिक, वीडियो और फोटो में ये लोग नहीं देखे गए हैं. GPS डेटा से ये जानकारी मिलती है कि घटना के वक़्त ये लोग मौक-ए-वारदात से काफी दूर थे. आपको बता दें कि पहलू खान की मौत के बाद पुलिस ने एक दूसरी एफआईआर भी दर्ज की, जिसमें पहलू खान के परिवार पर जानवरों की तस्करी का मामला बनाया गया.

हालांकि, पहलू खान के बेटे ने गाय खरीदने की रसीद दिखाई थी. इसपर पुलिस का कहना है कि उसने रसीद दिखाई, लेकिन उसके पास राजस्थान से गाय दूसरे सूबे में लेने का अनुमति पत्र नहीं था.

हथियारों के फर्जी लाइसेंस बनवाने में भू-कारोबारी अधिक – सुरक्षा के लिए बनवाये या डराने के लिए ?

उदयपुर। अवैध हथियारों और फर्जी लाइसेंस के मामले में एटीएस ने जिन नामचीन रसूखदारों ने फर्जी हथियार के लाइसेंस बनवाये थे उन्हें जयपुर तलब किया है। रसूखदारों में गिरफ्तारी के डर से खलबली मची हुई है। एटीस ने अभी तक नामों का खुलासा तो नहीं किया लेकिन सूत्रों की मानें तो अधिकतर फर्जी लाइसेंस भू कारोबारियों ने ही बनवाये थे। अब ये अलग शोध का विषय है कि इन भू कारोबारियों ने अपनी सुरक्षा के लिए बनवाये थे या भूमि व्यवसाय में मजलूमों को डराने धमकाने के लिए। 

शहर के १३ रसूखदार जिनके नाम अभी तक एटीस ने खुलासा नहीं किया उन्हें एटीस की हाई अथोरिटी ने पूछताछ के लिए जयपुर बुलाया है। इन नामचीन रसूखदारों में एक तरह से डर भी है की उन्हें बुला कर गिरफ्तार किया जायेगा। इधर एटीस भी हथियारों और लाइसेंस के लिए गहनता से जांच कर रही है, जानकारी के अनुसार लाइसेंस की जांच के लिए एटीस की टीम जम्मू कश्मीर गयी हुई है। १३ हथियारों के लाइसेंस के साथ २० हथियार जब्त किये थे लेकिन जांच के बाद अब इन हथियारों की संख्या ३० हो गयी है। 
१३ नाम चीन लोगों के नामों का खुलासा एटीस ने तो नहीं किया लेकिन सूत्रों के अनुसार अधिकतर नाम सामने आचुके है जिनमे  एक बड़े तम्बाकू प्रोडक्ट से जुड़ा हुआ है, जो सारा कारोबार संभालता है। एक हाथीपोल स्थित मॉल का मालिक, बड़ी के पीछे एकांत में स्थित रिसोर्ट के दो पार्टनर, आयड पुल स्थित बड़े मॉल का एक बड़ा एक पार्टनर, विशेष संगठन का कार्यकर्ता जो भू कारोबार में लिप्त है, दो शराब के व्यवसायी, दो भाई के नाम भी है जिनका कपड़ों का शोरूम है साथ ही भूमि व्यवसाय में भी लगे हुए है। एक बड़े ट्रावेल्स का मालिक है।  इन सब में एक सबसे बड़ी बात निकल कर यह सामने आरही है जितने भी लाइसेंस धारी है सभी भू कारोबार में लिप्त है। यह जांच का विषय है कि इन लोगों ने यह फर्जी लाइसेंस अपनी सुरक्षा के लिए बनवाये थे या भूमी व्यवसाय में गरीब और मजलूम लोगों को डराने के लिए हथियारों का इस्तमाल होता था। यह तो सर्व विदित है कि लेकसिटी में भूमी का कारोबार में भूमाफियाओं के कई कारनामों और करतूतों से भरी पड़ी है जिसमे डरना धमकाने से लेकर भूमि पर अवैध कब्जे तक किये जाते है जिसमे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की भी लिप्तता सामने आचुकी है।  

राजस्थान के तीन हजयात्री मक्का की मिट्टी में हुए सुपर्दे ख़ाक

पोस्ट . राजस्थान से हज यात्रा पर गए चार हज़ार हज़ यात्रियों के पाक मुक़द्दस सफ़र पर तीन हज यात्रियों के विभिन्न कारणों से मक्का में ही मौत होगई . जिन हज यात्रियों का इंतकाल मक्का में हुआ उनमे दो सीकर से है और एक हज यात्री नागौर के है . जानकारी के अनुसार मरहूम हजयात्रियों ने हज के अरकान पुरे कर लिए थे उसके बाद ही मक्का में विभिन्न कारणों से इंतकाल हो गया .

सीकर शहर के वार्ड संख्या 29 के मोहम्मद अब्दुल गनी अपनी पत्नी रशीदा बानो सहित परिवार के तीन लोगों के साथ हज करने निकले थे अस्थमा होने के कारण पहले तो उन्हे मक्का स्थित डिस्पेंसरी में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। ताखलसर निवासी बुलकेश बानो भी अपने पति हसन मोहम्मद के साथ हज पर गईं थी। वहां, दिल का दौरा पडऩे से उनकी मौत हो गई। इधर, नागौर के रहने वाले जहुरूद्दीन भी परिजनों के साथ 31 अगस्त की फ्लाइट से हज के लिए मक्का पहुंचे थे। उनका भी निधन हो जाने पर, वहीं सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया . मक्का की मिट्टी नसीब होना किस्मत की बात है। अभी तीनों के परिजन भी मक्का में ही हैं। प्रदेश से हज पर गए यात्रियों की वापसी 25 सितंबर से शुरू होगी। वहां से आने वाली पहली फ्लाइट में इनके परिजन भी आयेगें .

 

जयसमंद झील छलकने को तैयार – बस 2 mm है खाली .

एशिया की दूसरी सबसे बडी मीठे पानी की झील 2 मिमी खाली

उदयपुर। एशिया की दूसरी सबसे बडी मीठे पानी की झील जयसमंद पर बने हाथी के पैरों तक लहरों के साथ पहुंचते पानी के बाद बुधवार को अब इसके पैर पानी से ढकने लगे है। लबालब जयसमंद झील अब 2 मिमी खली हे जिसे भरने में 2 दिन लग सकते है। इसके बाद इस पर चादर चलेगी।
जयसमंद ’ढेबर झील’ में गोमती व खरका नदी से लगातार आवक जारी है। लेकिन इसका फेलाव क्षेत्र अधिक होने से इसमें प्रतिदिन हल्की आवक ही हो पा रही है। लगातार आवक के चलते जयसमंद झील पूरी तरह लबालब होकर छलकने को आतूर है। आज इसका जलस्तर 8.36 मीटर रिकॉर्ड किया गया जबकि इसकी पूर्ण भराव क्षमता 8.38 मीटर है। सिंचाई विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विशाल क्षेत्रफल में फेली इस झील में 2 मिमी पानी के लिए अभी दो दिन ओर इंतजार करना पड सकता है। इस आवक के बाद ही झील के अंतिम मुहाने पर स्थित चादर चलने वाले स्थान चादर चलेगी। हालांकि झील पर बने पत्थरों के हाथियों के पैर पानी में डूबने लगे है जो इसके पूरी तरह भरने का संकेत दे रहे है। नैसर्गिक सौन्दर्य से खिली आभा को निहारने इन दिनों पर्यटकों व आसपास की भीड झील किनारे पहुंचने लगी है।
इधर, लेकसिटी में बारिश का दौर आज भी जारी रहा। दोपहर में हुई मध्यम क्रम की बारिश से खूब भिगोया। बाढ नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार शाम 7 बजे तक उदयपुर में 7 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। सर्वाधिक बारिश गोगुन्दा में 27 मिमी रिकॉर्ड की गई। सीसारमा नदी के 3 फीट बहने से स्वरूपसागर के दो गेट आधा-आधा फीट व मदार नहर 2 फीट बहने से फतहसागर के चारों गेट आधा-आधा इंच खुले हुए है। झरनों व पहाडों से रिसकर आ रहे पानी से बडी झील का जलस्तर भी लगातार बढ रहा है। पूर्ण भराव क्षमता 32 फीट वाली इस झील में 26 फीट पानी आ चुका है। मदार बडा एक इंच व मदार छोटा आधा इंच ओवरफ्लो बह रहे है।

कौन है शहर के 13 रसूखदार नामचीन जिन्होंने अवैध हथियार और फर्जी लाइसेंस रखे हुए थे ?

उदयपुर। अवैध हथियार और फर्जी लाइसेंस रखने वाले शहर के १३ नामचीन रसूखदार कोन है ? आखिर क्यों एटीएस इन रसूखदारों के नामों का खुलासा नहीं कर रही ?  लाखों रुपया देकर जम्मू एन्ड कश्मीर से फर्जी लाइसेंस बनवा खतरनाक हथियार अपने पास रखना क्या इन रसूखदारों की नादानी मान कर बख्शा जाएगा ? क्या स्टेटस सिंम्बल का हवाला देकर अवैध हथियारों की खरीद फरोख्त के अपराध से बचा जा सकता है ? या इन रसूखदारों को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है जिसकी वजह से एटीएस ने इन्हे इनोसेंट मान लिया है ?  
 
शहर के इन नामचीन लोगों से एटीस ने कारवाई कर १३ लाइसेंस और २० हथियार तो जब्त कर लिए थे लेकिन उनके नामों का खुलासा करने में जांच का हवाला दिया जारहा है। शहर में मोजूद एटीस के जिम्मेदार अधिकारियों को हाई अथोरिटी ने नाम नहीं बताने के निर्देश दिए है और हाई अथोरिटी लाइसेंस की जांच कर रही है। 
आखिर शहर के इन रसूखदार लोगों को ऐसे आधुनिक और खतरनाक हथियार रखने की कोनसी जरूरत आपडी कि उन्होंने अजमेर के वली मोहम्मद एंड संस को लाखों रूपये देकर जम्मू एंड कश्मीर से फर्जी लाइसेंस बनवाये। सवाल यह उठता है कि जब उदयपुर के मूल निवासी होने के बावजूद भी इस १३ रसूखदारों ने जम्मू एंड कश्मीर से लाइसेंस बनवा लिए तो पहली नज़र में ही अवैध हो गए, इसके बावजूद एटीस इन रसूखदारों को गिरफ्तार करने या कारवाई करना तो दूर इनके नाम भी बताने से कतरा रही है। सूत्रों की माने तो यह रसूखदार बड़े बड़े व्यवसाई भू माफिया, मार्बल व्यवसायी सफ़ेद पोश है। यह भी माना जासकता है कि इन्हें राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है और इसी वजह से इन लोगों के नाम आज तीन दिन बाद भी सामने नहीं आये है। यही नहीं एक बड़े मुख्य समाचार पत्र में तो अवैध हथियारों की यह खबर मामूली बना कर अन्दर के पेज की बन कर रह गयी। 
पुलिस जब भी किसी असामाजिक तत्व के पास से देसी कट्टा या एक बड़ा चाक़ू भी बरामद करती है तो प्रेस वार्ता कर 10 – 10 पुलिस कर्मियों के बिच उस अपराधी की फोटो खिचवा कर प्रकाशित किया जाता है, फिर यहाँ तो अवैध लाइसेंस और अवैध विदेशी और आधुनिक खतरनाक हथियारों की बात है। एटीस आखिर क्यूँ नाम छुपा रही है ? या क्यूँ इनकी गिरफ्तारी नहीं हो रही ? जबकि इस मामले में तीन हथियार तस्करों अजमेर निवासी जुबेर खां, पंजाब के अबोहर निवासी विशाल आहूजा और नसीराबाद निवासी गणपत सिंह को गिरफ्तार किया है। एटीएस यह भी बता रही है कि यह लोग अवैध हथियार और जम्मू एन्ड कश्मीर से फर्जी लाइसेंस बनवाने के कामों में लिप्त थे। 
जिन रसूखदारों ने अपने शोक के लिए लिए हो चाहे अपना स्टेटस सिंम्बल दिखाने के लिए लिए हों लेकिन आता तो अपराध की श्रेणी में है फिर इन रसूखदार अपराधियों से मेहमानों जैसा व्यवहार और आवभगत क्यों की जारही है ? 

उस्मान हैदर जिला वक्फ कमेटी उदयपुर का चेयरमैन मनोनीत।

उदयपुर .राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ ने एक आदेश जारी कर जिला वक्फ कमेटी,उदयपुर का गठन कर हाजी उस्मान हैदर को चैयरमेन मनोनीत किया है।
राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमन उल्लाह खान ने जारी आदेश में हाजी उस्मान हैदर को जिला वक्फ  कमेटी के चैयरमेन ,असलम हुसैन को सचिव एवम यासीन मोहम्मद को कोषाध्यक्ष मनोनीत किया है।
 उस्मान हैदर मेवाफरोश समाज के कोषाध्यक्ष एवम भारतीय जनता पार्टी डॉ मुखर्जी मण्डल के सक्रिय कार्यकर्ता है।
भाजपा शहर जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट,पूर्व प्रदेश मंत्री प्रमोद सामर,महामंत्री प्रेमसिंह शक्तावत,डॉ किरण जैन,मोतीलाल डांगी, मण्डल अध्यक्ष चंचल कुमार अग्रवाल आदि ने इस नियुक्ति पर प्रसन्नता जाहिर कर प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी आदि का आभार व्यक्त किया है।

ब्रह्मा से जैमिनी तक ऋषि परम्परा के प्रतिनिधि थे दयानन्द – ज्वलन्त कुमार शास्त्री

उदयपुर. आर्य समाज उदयपुर का वेद प्रचार सप्ताह ज्ञान काण्ड, कर्म काण्ड और उपासना काण्ड इन तीनों का प्रतिपादन करते हैं वेद । वेदों का प्रचार व प्रसार उपनिषद् ब्राह्मण ग्रन्थ और योग सांख्य, न्याय, वैशेषिक मीमांसा व वेदान्त आदि दर्शन द्वारा ऋषियों ने किया। ये ऋषि परम्परा ब्रह्मा से प्रारम्भ होकर जैमिनी ऋषि तक अविच्छिन्न रही। तब तक सम्पूर्ण विश्व में वेद एवं सत्यविद्या का प्रचलन था। ये विचार आर्य समाज उदयपुर के वेद प्रचार सप्ताह में पं. ज्वलन्त कुमार शास्त्री ने व्यक्त किये।
 श्री शास्त्री ने अपने प्रवचन में कहा कि इस ऋषि परम्परा को पुनः जीवित करने का श्रेय महर्षि दयानन्द को जाता है। महर्षि दयानन्द ने नारा दिया – “वेदों की ओर लौटो”। वेद मानवमात्र के लिए उपयोगी ज्ञान का बीजरूप संकलन वेद है। ईश्वर का ज्ञान तो इससे भी कहीं अधिक व अनन्त है। ऋग्वेद में ज्ञानकाण्ड है, यजुर्वेद में कर्मकाण्ड तथा सामवेद में उपासनाकाण्ड है। ये तीनों ही काण्ड मानव जीवन हेतु अत्यन्त उपयोगी व आवश्यक है।
इससे पूर्व वीरेन्द्र शर्मा ने सपत्नीक यजमान के रूप में यज्ञ सम्पन्न किया। इन्द्रदेव पीयूष ने ईश्वर भक्ति के भजन से भक्तजनों को भक्तिरस से सराबोर किया।
ओइ्म, वेद और नमस्ते हैं भारतीय पद्धति
परमपिता परमात्मा का निजनाम ओइ्म है। उस ओइ्म का मानवमात्र के लिए संसार में जीवन जीने की नियमावली है वेद और भारतीयों का अपना अभिवादन है – नमस्ते। ये सन्देश ज्वलन्त कुमार शास्त्री ने हैप्पी होम सीनियर सैकण्ड्री स्कूल में छात्रों को दिया। शास्त्री आर्य समाज उदयपुर के वेद प्रचार सप्ताह के अन्तर्गत छात्रों को सम्बोधित कर रहे थे।
व्यक्ति विशेष के नाम से अभिवादन वैदिक तथा वास्तविक भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं हो सकती है जो भावना, नम्रता व सदाचार नमस्ते में है वह अन्य अभिवादन के प्रचलित तरीकों में नहीं है। इसी प्रकार गीता, पुराण आदि सम्पूर्ण भारतीय धार्मिक विशेषता को पूर्णतः समाविष्ट नहीं कर पाते अतः ये ग्रन्थ हमारे धर्मग्रन्थ नहीं हैं। हमारे धर्मग्रन्थ वस्तुतः वेद हैं।
आर्य समाज के प्रधान सुरेशचन्द्र ने बताया कि यह कार्यक्रम निरन्तर 17 सितम्बर, 2017 रविवार तक संचालित होगा।

टेक्नो कॉलेज के निदेशक पर चाकू वार और आरोपित विद्यार्थी की आत्महत्या : कारण और समाधान

डॉ. अनिल मेहता 

Dr. Anil mehata

शहर के एक नामी इंजीनियरिंग कॉलेज के विद्यार्थी ने निदेशक पर चाकू से हमला  किया और फिर स्वयं ने आत्महत्या कर ली। यह घटना झकझोर देने वाली है। निदेशक  एक उच्च प्रशिक्षित, सहज प्रवृति के  व्यक्ति है। उनको चाकू लगना दुख देता है। वंही एक खूबसूरत युवा का मर जाना उसके माता पिता, परिवार के लिए बहुत पीड़ादायी और आपदा पूर्ण है।यह दुर्घटना  वर्तमान समाज की  भयावह स्थिति का भी चित्रण करती है। सब तरफ संवेदनाएं घटी है और महत्वकांक्षाएं, गुस्सा, निराशा बढ़ी है। परिवारों में स्नेह नही है, अभिभावक स्वयं अपने कामो में उलझे हैं, वे अपने बच्चो के सामने कोई आदर्श उपस्थित नही कर रहे। अभिभावको में नैतिक साहस घट रहा है । वे स्वयं मोबाइल, सोशल मीडिया पर इतने अस्त व्यस्त है कि अपने बच्चों को यह नही समझा पाते हैं कि मोबाइल,इंटरनेट का सही उपयोग क्या है। आप इन युवा बच्चो के मोबाइल में झांक नही सकते क्यो कि वे  इसे अपनी निजता का हनन मानते है। इनके मोबाइल में अधिकांश सामग्री वो है जो घोर अश्लील है और स्वस्थ मस्तिक के विकास के लिए बाधा कारी है। फिर, अभिभावक इन बच्चों की  जिद के कारण इतने मजबूर है कि वे उन्हें स्पोर्ट्स बाइक दिलाते है और स्पीड कंट्रोल , हेलमेट के उपयोग के लिए कुछ नही कह पाते। बच्चे में निराशा , गुस्सा और हिंसक प्रवृति है तो परिवार में ये समझ नही कि वो उसका मनोवैज्ञानिक समाधान चुने। ऐसे में  अपने बच्चों की समस्याओं का समाधान स्कूल , कॉलेज में ढूंढते है। स्कूल , कॉलेज में अध्यापक, प्रोफेसर भी इसी समाज से आते है, उन्हें स्वयं यह समझ नही कि युवा वर्ग के सामने क्या आदर्श प्रस्तुत करना है। उनमे से कई खुले आम शराब पीते, धूम्रपान करते, गाली गलौच करते मिल जाएंगे। कई लोग दिन भर अश्लील चुटकलों, फ़ोटो , वीडियो क्लिप को भेजते, खोलते मिल जाएंगे।संस्थाओ में इस बात पर चर्चा नही होती कि एक युवा लड़के, लड़की की भावनात्मक, शारीरिक समस्याओ,परिवर्तनो को कैसे देखा जाए, कैसे उन्हें रचनात्मकता प्रदान की जाए।

प्रोफेशनल संस्थानों खास कर इंजीनियरिंग संस्थानों में स्थिति ज्यादा गंभीर है । कई दुकान नुमा कॉलेज है। जो सीटे भर कमाई के लिए  बिहार, पूर्वोत्तर भारत , कश्मीर, गुजरात, और मेवाड़ वागड़ के ग्रामीण क्षेत्रो से विद्यार्थियों को, उनके अभिभावकों को बरगलाकर प्रवेश देते है। वे अनैतिक वादे करते है कि बिना पढ़े फर्स्ट डिवीजन मिल जाएगा। वे फर्जी  अस्तित्वहीन  कंपनियों के नाम बताकर वादा करते है कि विद्यार्थी को ऊंची तनख्वाह की नॉकरी की गारंटी है। ऐसे विद्यार्थी फिर उदयपुर में दिन रात धमा चौकड़ी ही मनाते है। शहर में कई हुक्का कैफे है जंहा शराब से लेकर ड्रग्स मिलती है। और लड़के लड़कियो को एक दो घंटे के एकांत की सुविधा उपलब्ध है।

पर, परिवार इस जूठे मुगालते में रहता है कि बच्चा बड़ी पढ़ाई कर रहा है और बड़ी नॉकरी प्राप्त करने वाला है।फिर जब तीन साल  , चार साल बाद विधार्थी को लगता है कि उसने कुछ नही सीखा, वह कुछ नही कर सकता , तब वह गहरी निराशा हताशा में जाता है। वह शार्ट कट ढूंढता है कि कैसे पैसा कमाया जाए।

वक्त आ गया है कि राजस्थान में तकनीकी संस्थाओं की वास्तविक क्षमता का आंकलन करवाया जाए, वंहा किस स्तर की शिक्षण, सलाह, मार्गदर्शन की सुविधाएं है उन्हें जांचा जाए। फर्जीवाड़ा कर रही संस्थाओ पर प्रभावी रोक लगाई जाए। अभिभावकों के प्रशिक्षण की भी समाज मे व्यवस्था बने। संस्थानों में निरंतर इस बात का विमर्श चले कि तकनीकी शिक्षा का उद्देश्य क्या है। तकनीकी शिक्षा के साथ साथ जीवन की शिक्षा की एक अनौपचारिक किंतु प्रभावी व्यवस्था बने। संस्थान भी नकल करवाने, जुठ बोलने, लूटने के इरादे से कार्य नही करे तथा अभिभावक भी संस्थाओ पर बिना सीखे अच्छे रिजल्ट रिपोर्ट कार्ड का दबाव नही बनाये। संस्थान और अभिभावक एक दूसरे के पूरक बन , सहयोग कर, निरंतर संवाद बना कर विद्यार्थी की रचनात्मकता का पोषण करे।