
उदयपुर। भूपाल नोबल्स पी.जी. कन्या महाविद्यालय, उदयपुर का वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘‘मयूरी‘‘ का शुभारम्भ गुलाबी सर्दी में सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलन से प्रारम्भ हुआ। रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ आगाज पहले दिन अमरीका से आए ग्रुप की डांस परफॉर्मेंस पर सभी ने खूब ठुमके लगाए। वंस मोर-वंस मोर की हूटिंग ने समारोह को और रंगारंग बना दिया।

त्रि-दिवसीय इस सांस्कृतिक महोत्सव में शुक्रवार के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर जे.पी. शर्मा, कुलपति (मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर) थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमान् शान्तिलाल जी मेघवाल (जिला प्रमुख, उदयपुर), श्रीमति प्रगति खराड़ी (अध्यक्ष, राजस्थान जनजाति आयोग), भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय के प्रेसीडेन्ट प्रोफेसर महेन्द्र सिंह राठौड़, भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. निरंजन नारायण सिंह जी राठौड़, कर्नल हरीश चण्डोक एवं श्रीमती कर्नल चण्डोक समारोह में उपस्थित थे।
आज का विशेष आकर्षण अमरीका के ‘द वनेवर केरावन‘ नृत्य ग्रुप की मनमोहक प्रस्तुतियां रही। वसुधैव कुटुम्बकम्, अपनत्व एवं सहिष्णुता के उद्देश्य से यह नृत्य ग्रुप विभिन्न देशों में अपनी अद्भुत प्रस्तुतियांे का प्रदर्शन कर चुका है तथा नृत्य एवं संगीत के माध्यम से प्रेम, प्यार, भाई चारा, शान्ति तथा आपसी सद्भाव का संदेश सम्पूर्ण विश्व में इनके द्वारा निःस्वार्थ भाव से देना है। श्रीमती लीबीया एवं श्री बिल के नेतृत्व में इस ग्रुप के सदस्यों ने गायन, वादन एवं नृत्य प्रस्तुत कर छात्राओं को ओर कुछ ओर नया करने को प्रेरित किया। विशिष्ट अतिथि, मुख्य अतिथि, अभिभावक, विश्वविद्यालय पदाधिकारीगण एवं छात्राओं ने इस ग्रुप की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्हें अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की।
छात्राओं की आज की प्रस्तुतियों में सोलो सॉंग, ग्रुप सॉंग,, फैन्सी डैªस, ड्यूट डांस एवं फॉक डांस आदि आकर्षण के केन्द्र रहे। आज की प्रस्तुतियों में फ्यूजन गीतों की धूम रही। ‘‘तेनू भूल जा भूल जा‘‘ ‘‘हिचकी, मचा जाऊ दे‘‘ ‘‘छन के मोहल्ला, हाई हिल्स‘‘ ‘‘ए उड़ी-उड़ी, काला चश्मा‘‘ ‘‘कौन तुझे, ओय-ओय‘‘ जैसे फ्यूजन गीतों को पांडाल में उपस्थित दर्शकों ने सराहा, वहीं छात्राएं अपने आप को नाचने से रोक न सकी। एक तरफ जहां नये फ्यूजन गानों की धूम रही वहीं पुराने फिल्मी गाने एवं गजल छात्राओं की जुबां पर अभी भी बरबस निकल आ रहे है, जिनमें ‘‘इन आंखों की मस्ती‘‘ ‘‘होंठों को ंछू लो तुम‘‘ जैसी गजलें शामिल है। वेस्टर्न ग्रुप डांस एवं सोलो डांस फिल्मी पर छात्राओं की प्रस्तुतियों ने खूब वाहीवाही लूटी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. संगीता राठौड़, डॉ. अनिता राठौड़, मोहिता दीक्षित एवं आकांक्षा मेहता ने बारी-बारी से किया गया।

परिणाम
प्रस्तुति प्रथम द्वितीय तृतीय
सोलो सॉंग (गज़ल) मारीषा दीक्षित पूजा देवड़ा शिवानी पालीवाल
ग्रुप सॉंग (फॉक) आरोही ग्रुप रियाज ग्रुप डेजलर्स ग्रुप
सोलो सॉंग (फॉक) मारीषा दीक्षित मानसी व्यास अनिता देवड़ा
सोलो डान्स (वेस्टर्न) हेमलता राव गौरी जोशी देविका रानी
ग्रुप सॉंग (फिल्मी) आरोही ग्रुप दिलदार ग्रुप डेजलर स्माईल
ग्रुप डान्स (वेस्टर्न) डेजलर स्माईल स्टनर्स ग्रुप फ्यूजन ग्रुप
फैन्सी डैªस विजय लक्ष्मी शक्तावत यामिनी कंवर राणावत पायल सुथार
सोलो डान्स (फिल्मी) ऋचा सोनी रिद्दी चौहान गौरी जोशी



उदयपुर। जयनारायणव्यास विश्वविद्यालय में 2012-13 के दौरान असिस्टेंट प्रोफेसर के 111 पदों पर हुई भर्तियों के घोटाले में एसीबी ने शुक्रवार को सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो. डॉ. दरियाव सिंह चुण्डावत को पूछताछ के लिए जोधपुर ले गई। चुण्डावत उस भर्ती में राज्य सरकार के प्रतिनिधि थे। सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर दरियाव सिंह सुविवि में स्पोर्टस बोर्ड चैयरमेन, छात्र कल्याण अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, एचआरएम निदेशक तथा बोम के सदस्य भी रह चुके है। भर्ती के दौरान पद का दुरूपयोग करना एवं न्यूनतम योग्यता नहीं होने पर भी चहेतो को साक्षात्कार में शामिल करना आदि कई आरोप थे जिसे एसीबी ने जांच में प्रमाणित पाया था। विवादों में रहे प्रो. चुण्डावत कॉमर्स कॉलेज के डीन रहने के दौरान स्पोर्टस कोटे से ब$डी संख्या में छात्रों को प्रवेश देने को लेकर भी विवादित रहे है। इसी दौरान राजीव गांधी जनजाति विश्वविद्यालय का गठन हुआ। कुलपति के दावेदारेां में उनका नाम भी सबसे आगे था पर विवादों के कारण उनका नाम अंतिम समय में कट गया। वर्तमान में चुण्डावत एश्वर्या कॉलेज में कार्यरत है।






करना था और बीच में उनकी माॅडल को खडा होकर अलग – अलग एंगल में फोटा शूट करवाना था। यहां तक तो ठीक था, लेकिन जैसे ही कैमरा, एक्शन, राॅल बोला गया तो सभी के होश उड गए। माॅडल ने उपरी वस्त्र सारे उतार दिए और सिर्फ अन्तः वस्त्रों में अपने जिस्म की नुमाईष करने लगी। यह देख हर कोई तोबा करने लगा . ग्रामीण महिलाओं ने तो अपनी आंखें तक बंद कर दी। लेकिन अष्लीलता परोसकर मेग्जीन के कवर पेज में खुद को ज्यादा से ज्यादा होट दिखाने वाली माॅडल को कुछ फर्क नहीं पड़ा। सवाल यह नहीं है कि प्रोड्यूसर को शूटिंग की अनुमति मिली की नहीं, सवाल तो यह है कि स्वयंभू प्रोड्यूसर ने किसी भी जिम्मेदार को यह बोला क्या कि वह यहां पर माॅडल को अन्तः वस्त्रों में उतारकर अपनी मेग्जीन का कवर पेज तैयार करेगा। जिम्मेदार हुक्मरान भी इस संबंध में कुछ बोलना नहीं चाहते है, लेकिन हमारी कोशिश रही है कि हमेशा पाठकों को पूरी निर्भिकता के साथ हर खबर की हकीकत बताकर प्रशासन को आईना दिखाए जो हम आगे भी करते रहेंगे।
दोनों बच्चों की माँ मंजू वर्धमान ने बताया कि यह फिल्म “द एडवेंचर ऑफ पलचिन गिरी बिगिन्स” का निर्माण 90 प्रतिशत घर में हुआ है। मंजू वर्धमान ने बताया कि बच्चों ने घर पर ही नार्मल केनन के कमरे की मदद और नार्मल घर की ही लाइट्स को अपनी सुझबुझ के साथ यूज किया। जितने भी इफेक्ट डाले वे उन्होंने खुद ही अपने घर के पीसी से ही डाले। मंजू ने बताया कि बच्चे जब 10 साल के थे तब से उन्होंने इस फिल्म पर काम करना शुरू कर दिया था। फिल्म का ट्रेलर देख कर ही लगता है बच्चों ने अपनी इस फिल्म के लिए काफी मेहनत की साथ ही बच्चों के मातापिता को सबसे अधिक श्रेय जाता है, जिन्होंने अपने बच्चों की इस कुदरती और छुपी हुई प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने इसको पूरा बढ़ावा देते हुए उनके लिए सारे संसाधन जुटाए। दोनों बच्चे 8 वीं और 9 वीं में स्कूल भी नहीं गए इसी फिल्म पर काम करते रहे वे घर पर रह कर पढाई करते, इसमें उनकी स्कूल सीडलिंग पब्लिक स्कूल ने भी काफी योगदान दिया जिन्होंने घर पर ही ट्यूशन की व्यवस्था की और परीक्षा ली।
