महापौर के खिलाफ बगावत का नतीजा – छीना आधा अधिकार

udaipur-nagar-nigam-300x224उदयपुर। नगर निगम महापौर के खिलाफ बगावत समिति अध्यक्ष को मंहगी पढ़ गयी और उसकी समिति का आधा कार्य भार छीन कर अन्य पार्षद को दे दिया हालाँकि अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई हैं लेकिन औपचारिक घोषणा करते हुए समिति के दो टुकड़े कर दिए।
नगर निगम के इतिहास में पहले बार ऐसा हुआ है कि किसी एक समिति के दो टुकड़े कर दो अध्यक्ष बना दिए गए हों। स्वास्थ एवं सेनिटेशन समिति के महापौर चन्द्र सिंह कोटरहारी ने दो टुकड़े कर दिए और अध्यक्ष ओम प्रकाश चित्तौड़ा से आधे वार्ड छीन कर वार्ड ११ के पार्षद पंकज भंडारी के सुपुर्द कर दिये। महापौर के इन निर्णय के बाद भाजपा के ही पार्षदों में चर्चा जोरों पर है कि पिछले दिनों स्वास्थ समिति के अध्यक्ष ओम प्रकाश चित्तौड़ा ने महापौर चन्द्र सिंह कोठारी के खिलाफ बगावत की थी स्मार्ट सिटी के लिए आयोजित बैठक में सवाल उठाते हुए कहा कि रूटीन के काम नालियां और सड़कें ही साफ़ नहीं हो पा रही है तो स्मार्ट सिटी की बात तो अभी दूर है। इस बात को महापौर ने दिल पर लेली और ओम प्रकाश चित्तौड़ा से स्वास्थ एवं सेनिटेशन समिति का आधा चार्ज लेलिया और पंकज भंडारी को अध्यक्ष बना दिया। अब पंकज भंडारी आधे शहर यानी चार दिवारी के अंदर आने वाले वार्ड का भार संभालएगें। बाकी के वार्डों के अध्यक्ष ओम प्रकाश चित्तौड़ा होंगे। गौरतलब है कि स्मार्ट सिटी के पहले फेज में शहर की चार दिवारी के अंदर आने वाले वार्डों को स्मार्ट करने की योजना है ।

24 को जुलुस-ए-मोहम्मदी – स्वच्छ भारत के तहत की जायेगी सडकों की सफाई

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उदयपुर। रबीउल अव्वल का चांद दिखने के साथ ही अंजुमन द्वारा जुलूस ए मोहम्मदी की तैयारियां शुरू हो गयी। रविवार को अंजुमन तालिमुल इस्लामिया में जुलूस ए मोहम्मदी को लेकर बैठक आयोजित की गयी जिसमे स्वच्छ भारत अभियान के तहत जुलुस के बाद सडकों से सफाई के निर्णय के साथ कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए। २४ दिसंबर को जश्ने ईद मिलादुन्नबी मनाई जायेगी और इसी दिन दोपहर में जुलूस ए मोहम्मदी निकाला जाएगा।
जुलूस मोहम्मदी की तैयारियों को लेकर बैठक आयोजित हुई जिसमे निर्णय लिया गया कि स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत का अनुसरण करते हुए अंजुमन की तरफ से जुलुस के दौरान एक टीम रहेगी जो जुलुस में होने वाली गन्दगी और कचरे को साफ़ करने की व्यवस्था करेगी। नायब सदर मुनव्वर अशरफ खान ने बताया कि अंजुमन की तरफ से जुलुस के पीछे पीछे सफाई कर्मचारी लगाये जायेगें और जिस रास्ते से जुलुस निकलेगा उसको पूरा कचरे से साफ़ करवाया जाएगा, सफाई में आने वाला खर्चा अनुजुमन ही वहन करेगा।अंजुमन सदर मोहम्मद खलील ने बताया कि जुलुस में उन्ही वाहन को प्रवेश दिया जाएगा जिनकी सूचना पूर्व में अंजुमन में दी जायेगी और उन वाहनों पर स्टिकर चिपका हुआ होगा। सेक्रेटरी रिज़वान खान ने कहा कि सभी मुस्लिम मोहल्लों में अनुजुमन की तरफ से यह निर्देशित किया जाएगा कि जुलूस मोहम्मदी में तबर्रुक फेंक कर नहीं दिया जाये। जुलुस में आने वालों के हाथ में तरीके से तबर्रुक बांटा जाए। प्रवक्ता अशरफ जिलानी ने बताया कि बैठक में निर्णय लिया गया कि जुलुस में महिलाएं शरीक ना हों। आज हुई बैठक में सदर मोहम्मद खलील सेक्रेटरी रिजवान खान, नायब सदर मुनव्वर अशरफ खान, जोइंट सेक्रेटरी वाकर अहमद खान, हाजी जंग दाद खान, नज़र मोहम्मद, सैयद मुर्तजा हुसैन आदि मोजूद थे।

उदयपुर में संभाग स्तरीय युवा महोत्सव रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ सम्पन्न

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उदयपुर. राजस्थान सरकार के युवा मामले एवं खेल विभाग के निर्देशानुसार जिला प्रशासन,जिला युवा बोर्ड एवं नेहरु युवा केन्द्र, उदयपुर द्वारा आयोजित संभागीय स्तरीय युवा महोत्सव आकर्षक रंगीन प्रस्तुतियों के साथ गुरुवार सांय भारतीय लोक कला मण्डल के रंगमंच पर सम्पन्न हुआ।

समापन समारोह में संभाग भर से आयी प्रतिभाओं को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उदयपुर नगर निगम के महापौर चन्द्रसिंह कोठारी ने कहा कि राज्य सरकार युवा प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने हेतु प्रयत्नशील है। उन्होंने कहा कि युवा महोत्सव जैसे आयोजन हमारी लोक संस्कृति को जीवित रखते हैं तथा इससे युवाओं में देश प्रेम की भावना भी मजबूत होती है।समारोह की अध्यक्षता करते हुए  अतिरिक्त जिला कलक्टर ओ.पी.बुनकर ने युवा प्रतिभाओं को मेहनत कर आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि वे समय का उपयोग कर जीवन में सफलता प्राप्त करें। विशिष्ट अतिथि उदयपुर नगर निगम के पार्षद गजेश शर्मा ने युवाओं को हर क्षेत्र में आगे आने का अनुरोध किया।

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ढाई सौ प्रतियोगियों ने दी प्रस्तुतियां

प्रारंभ में सचिव जिला युवा बोर्ड एवं युवा समन्वयक पवन कुमार अमरावत ने बताया कि महोत्सव में उदयपुर संभाग के 6 जिलों के लगभग 250 युवा प्रतिभागियों ने विभिन्न 14 प्रतियोगिताओं में अपनी प्रस्तुतियां दी। उन्होंने बताया कि महोत्सव के दौरान लोक नृत्य में प्रथम अजंलि गौड़ एव दल उदयपुर तथा द्वितीय रजत शर्मा एवं दल बांसवाड़ा रहे।  लोक गीत में प्रथम संजय दामनिया एव दल तथा द्वितीय प्रियंक व्यास एवं दल,उदयपुर रहे। एकल गान में प्रथम अनिता छीपा राजसमन्द तथा द्वितीय गिरधारीलाल प्रतापगढ़ रहे।

इसी प्रकार चित्रकला में जयेश सिकलीगर उदयपुर प्रथम तथा मोहन गिरी, डूंगरपुर द्वितीय, आशु भाषण में सोनिया गोरी, बांसवाड़ा प्रथम तथा दीपक दवे उदयपुर द्वितीय, तबला वादन में भूपेश पुरोहित,डूंगरपुर प्रथम तथा पर्व याज्ञनिक, बांसवाड़ा द्वितीय रहे।

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बाँसुरी वादन में जयेश सिकलीगर,उदयपुर प्रथम तथा कानजी, प्रतापगढ़ द्वितीय रहे, गिटार में हेमांग जोशी, बांसवाड़ा प्रथम तथा हेमांशु व्यास,उदयपुर द्वितीय, हारमोनियम में गिरधारीलाल मेघवाल, प्रतापगढ़ प्रथम तथा विक्रांत सोनपुरा, उदयपुर द्वितीय, कत्थक में अंजलि गौड,उदयपुर प्रथम तथा तिथि नागर, बांसवाड़ा द्वितीय तथा नाटक में लक्ष्मीनारायण एवं दल, चितौड प्रथम तथा रांखी आर्य एवं दल,राजसमन्द द्वितीय रहे।

कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने प्रथम एवं द्वितीय विजेताओं को नकद राशि एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।  समारोह का संचालन डॉ. श्रुति टण्ड़न तथा महेश जोशी ने किया।

हिन्दुस्तान जिंक चिकित्सालय में ओर्थो एवं फिजियोथैरेपी शिविर

IMG_20151204_121855478उदयपुर। हिन्दुस्तान जिंक प्रधान चिकित्सालय में आज मेवाड़ हॉस्पिटल, उदयपुर द्वारा ओर्थो एवं फिजियोथेरेपी पर एक दिवसीय षिवरि का आयोजन किया गया। शिविर में 58 पेसेन्टस ने भाग लिया तथा शिविर से लाभान्वित हुए। शिविर में मेवाड़ हॉस्पिटल द्वारा पेसेन्टस को निःषुल्क आवष्यक जॉच सुविधाएं उपलब्ध कराई गई। शिविर में बीएमडी जॉच, रेन्डण्म शुगर जॉच, बी.पी. चेकअप तथा 31 जनों का एक्सरे आदि निःषुल्क किये गये। मेवाड़ हास्पिटल के डा. मनीष छप्परवाल ने परामर्ष दिया।

हिन्दुस्तान जिंक प्रधान चिकित्सालय के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रकाष चन्द्र भण्डारी ने कहा कि इस तरह के षिविर नियमिततैार पर आयोजित किये जाते है ताकि आम जनता को चिकित्सा के बारे में जानकारी मिल सके।

आक्रोशित मुस्लिम समाज का विरोध जुलुस – कमलेश तिवारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग

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उदयपुर। हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष कमलेश तिवारी द्वारा पैगंबर मोहम्मद साहब को लेकर दिए बयान से नाराज मुस्लिम समाज लामबंद हो गया है। मुस्लिम समाज के हज़ारों लोगों ने तिवारी पर कारवाई की मांग तख्तियां और बेनर लिए मौन जुलुस निकाला। राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया और कमलेश तिवारी के खिलाफ सख्त कारवाई करने की मांग की है। मोलाना कमेटी के सदर मोलाना जुलकरनेन अंजुमन सदर मोहम्मद खलील सेक्रेटरी रिजवान खान ने दुसरे धर्मों का आदर करने नारे नहीं लगाने और शांती बनाए रखने की अपील जारी की।

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पिछले दिनों हिन्दु महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तिवारी ने पैगंबर मोहम्मद साहब को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया था। इस बयान से नाराज होकर हजारों की संख्या में उदयपुर मुस्लिम समाज के लोग आज सुबह से हाथीपोल में इकट्ठा होना शुरू होगये। उदयपुर अंजुमन तालीमुल इस्लाम के बैनर तले सुबह साडे दस बजे मौन जुलुस हाथीपोल से रवाना हुआ जो अशविनी बाज़ार और देहली गेट होता हुआ जिला कलेक्ट्री पहुचा। जुलुस में शहर के सभी मुस्लिम मोहल्लों के युवा बुजुर्गों शामिल हुए थे इसके अलावा शहर की ३३ मस्जिदों के इमाम और मोलाना भी शामिल हुए थे। कई लोगों के हाथों में कमलेश तिवारी पर सख्त कारवाई करने को लेकर तख्तियां थी। जिला कलेक्ट्री पहुचने पर कमलेश तिवारी का पुतला फूंका गया।

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अंजुमन कमेटी का प्रतिनिधि मंडल जिसमे सदर मोहम्मद खलील, सेक्रेटरी रिजवान खान, नायब सदर मुनव्वर अशरफ खान, जॉइंट सेक्रेटरी वकार अहमद, सय्यद मुर्तजा साबरी आदि ने जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया गया। मोलाना कमेटी के सदर मोलाना जुलकर नेन ने कहा कि हिन्दू महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष कमलेश तिवारी द्वारा हज़रात मोहम्मद साहब के बारे में गन्दी और अशोभनीय टिपण्णी की है, जिससे मुस्लिम समाज में रोष है। तिवारी पर उदयपुर ही नहीं देश का मुस्लिम समाज सख्त से सख्त कारवाई की मांग करता है। अंजुमन के सेक्रेटरी रिजवान खान ने कहा की पिछले सात आठ महीनों से असामिजिक लोगों द्वारा देश में असहिष्णुता और साम्प्रार्दायिक माहोल बनाया जारहा है मुस्लिम और इस्लाम धर्म के प्रति हर रोज़ अशोभनीय भाषा का इस्तमाल करते हुए गलत बयान बाजी की जारी है। इसे में लोगों में अविश्वाश बढ़ता जारहा है। इसे सम्प्रादिक माहोल पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कारवाई होनी चाहिए।

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अंजुमन के सदर मोहम्मद खलील ने कमलेश तिवारी पर सख्त कारवाई करने की बात कहते हुए यह भी कहा की इसके अलावा साक्षी महाराज योगी आदित्य नाथ साध्वी प्राची जेसे लोग जो हर रोज मुसलामानों और इस्लाम के खिलाफ गैरकानूनी भाषा का प्रयोग कर गलत बयान बाजी कर रहे है उनको व् जिन संगठनों से इसे लोग जुड़े है, उन संगठनों पर प्रतिबन्ध लगाया जाना चाहिए। नायब सदर मुनव्वर अशरफ खान, जॉइंट सेक्रेटरी वकार अहमद अल्पसंख्यक मोर्चा के जहीरुद्दीन सक्का ने कहा कि ज्ञापन में राष्ट्रपति से यह मांग रखी है कि देश में साम्प्रदायिक माहोल खराब करने और और आयेदिन गलत बयान बाजी करने वाले इन लोगों और संगठनों पर प्रतिबन्ध लगाया जाय।

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जुलुस के बाद मस्जिदों के इमामों और अंजुमन के जिम्मेदारो ने सभी युवाओं को शान्ति से घर लोट जाने की अपील की। जुलुस में भी सभी जिम्मेदार लोग नारे नहीं लगाने और शान्ति रखने की अपील करते हुए दिखे। जुलुस में और कलेक्टर को ज्ञापन देने में अंजुमन कमिटी के पदाधिकारियों के अलावा मोलाना जुल्कार नेन , मोलाना बदरे आलम, आम मोहम्मद, अकिलुद्दीन, मोहसिन सिद्दीकी, मुजिबं सिद्दीकी, सलीम राजा साबिर हुसैन आदि मोजूद थे।

 

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जिसकी दहाड़ से कांप उठता था रणथम्भोर – आज सलाखों में कैद लाचार आखिरी सांसे ले रहा है।

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ustad1[2]उदयपुर। जिसके पैरों की धमक से धरती कांप उठती थी, जिसकी दहाड़ सैंकड़ों किलोमीटर के जंगलों में हवा को चीरती हुई सभी को डरने पर मजबूर कर देती थी। आज हिन्दूस्तान का वही सबसे बलवान जानवर जिन्दगी की आखिरी सांसे गिन रहा है। वही बहादूर ‘उस्ताद’ निरंकुश अधिकारियों और अपराधी सरकार की  तानाशाही का खामियाजा भुगत रहा है, जिसे इंसानों की गलती की वजह से चालिस गज के एन्क्लोजर में बंधक बनाकर रखा गया है। क्या यही है हमारा संविधान ?  क्या यही है इंसानी कानून ?
हालाकि सरकारी अधिकारी यह भी साबित नहीं कर पाए कि ‘उस्ताद’ आदम खोर हो गया है। वे ‘उस्ताद’ के हाथों किसी भी मानव की मौत की एक भी नजीर सामने नहीं ला पाए है। एक बेजुबान जानवर को मिली इस तरह की सजा देखकर लगता है कि आज हम आजाद भारत में नहीं बल्कि गुलामी की जंजीरों से जकड़े भारत में रह रहे हैं।
हम बात कर रहे है दक्षिणी राजस्थान के उदयपुर जिले की जो छह माह से एक बदनामी का दंश जेल रहा है। उस समय रणथम्भौर के घने जंगलों से वन विभाग के स्वयं भू न्यायाधीशों के फरमान पर टाईगर 24 ( उस्ताद ) को उदयपुर के बायलोजिकल पार्क के एक छोटे सेे एन्क्लोजर में लाकर बंधक बनाया गया था। लेकिन अपराध यहीं नहीं थमा इस घायल बेजुबान के पिंजरे के चारो तरफ ग्रीन नेट का पर्दा लगवा दिया गया ताकि वो किसी को देख तक नहीं सके। नूर और बच्चों से दूर होने का गम अभी उस्ताद के जहन से गया ही नही था कि उसे ऐसी बिमारी ने जकड़ लिया कि चिकित्सकों को भी पता नहीं चल पाया। अभी तो ‘उस्ताद’ की हालात बद से बदत्तर हो गई है।

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रणथम्भौर अभ्यारण्य की शान रहे टी – 24 को बिना वन मंंत्रालय को सूचित किए  गत 16 मई को उदयपुर के सज्जन गढ़ बायलोजिकल पार्क में शिफ्ट कर दिया गया। उस दौरान पूरे देश के वन प्रेमियों ने इस घटनाक्रम का काफी विरोध किया था, लेकिन निरंकुश नौकर शाहों ने किसी की एक न सुनी। मामला सार्वजनिक होने के बाद वन मंत्री राजकुमार रिणवा ने अपने विभाग के बचाव में बयान दे डाला कि उस्ताद के रणथम्भौर में होने से असुरक्षा होगी। उस्ताद को यहां पर लाकर वनकर्मियों और पशु चिकित्सकों ने आॅब्जर्व करना शुरू कर दिया। उस्ताद केे एन्क्लोजर के पास किसी के भी जाने की अनुमति नहीं थी। वन अधिकारी रोजाना बुलेटिन जारी करके उस्ताद की स्थिति के बारे में बताने लगे,लेकिन सभी गुमराह करते ही दिखाई दिए। क्योंकि कोई भी चिकित्सक उस्ताद की असली बिमारी को नहीं पकड़ पाया। उस्ताद के एन्क्लोजर के पास ही शेरनी दामिनी का एन्क्लोजर था। केयर टेकरों का मानना था कि  दामिनी की दहाड़ सुनने के बाद उस्ताद की चहल कदमियां बड़ी है। लेकिन 23 नवम्बर से उस्ताद के हालात फिर बिगड़ने लगे उसने खाना पीना छोड़ दिया। बाहर से आए चिकित्सकों ने उस्ताद को ईलाज शुरू कर दिया लेकिन किसी को बिमार का पता नहीं चला ऐसे में माना ये जा रहा था कि उस्ताद के टूल पास नहीं हो रहा है,लेकिन उस्ताद का पेट लगातार फूलता ही जा रहा था। पिछले दो दिनों से इण्डियन वैटेनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट का दल उस्ताद की तिमारदारी में लगा है। इस दल का मानना है कि उस्ताद की आहार नली में रूकावट और कान्सटीपेशन की शिकायत है। शुक्रवार को सोनोग्राफी भी की गई लेकिन कोई अधिकारिक जवाब नहीं आने से साफ नहीं किया जा सकता है कि उस्ताद की हालत अभी कैसी है। वैसे माना यह जा रहा है कि उस्ताद का आॅपरेशन करना पड़ेगा और उसी से उसकी हालात में सुधार होगा।
उस्ताद को वापस रणथंभोर भेज देना चाहिए :
रणथम्भौर अभ्यारण्य से उदयपुर लाकर कैद किए गए सोनेहरी शेर ‘उस्ताद’ को तुरन्त वापस उनके परिवार के पास भेज दिया जाना चाहिए। वैसे भी हमारी न्याय व्यवस्था अंतिम इच्छा पूरी करने का आदर्श सिद्धांत स्थापित करके दुनिया में अपान सिर उंचा कर रखा है। इस मामले में देशभर के वन्यजीव प्रेमियों ने राजस्थान सरकार की कड़ी निन्दा की, लेकिन राजसत्ता और उसके कारिन्दों ने अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया है। दामिनी की दहाड़ उस्ताद को अपनी पत्नी नूर की याद दिलाती है। वह अपने बच्चों से दूर है। इस प्रकार की निर्मम प्रताड़ना लगातार आखिर क्यों दी जाती रही।

पांच हज़ार में फिल्म यूनिट को देदिया एमबी अस्पताल का न्यूरो वार्ड – मरीजों की जान से किया खिलवाड़

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उदयपुर । मामूली फीस लेकर महाराणा भूपाल चिकत्सालय के जिम्मेदारों ने गुरुवार की रात मरीजों का इलाज छोड़ आठ घंटे तक संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में फिल्म की शूटिंग तमाशा चलाया। जो शूटिंग किसी निजी अस्पताल क्लीनिक या किसी मामूली से सेट पर हो सकती थी उसके लिए महाराणा भूपाल चिकित्सालय का सबसे क्रिटिकल वार्ड न्यूरो सर्जरी और ट्रॉमा सेंटर को चुना। अतिरिक्त जिला कलेक्टर ओ पी बुनकर ने भी कहा की अस्पताल में शूटिंग के लिए स्वीकृति नहीं देनी चाहिए।
गुरुवार शाम को पांच बजे से रात एक बजे तक महाराणा भूपाल चिकित्सालय के न्यूरो सर्जरी और ट्रॉमा सेंटर में फिल्म “जीना इसीका नाम है” फिल्म का तमाशा चलता रहा। इस दौरान फिल्म शूटिंग की यूनिट के १०० से अधिक लोग अस्पताल की इस क्रिटिकल यूनिट के मालिक बने रहे। किस मरीज और उनके परिजनों को अंदर आना है किसको नहीं आना है इसका फैसला डॉक्टर और गार्ड के बजाय शूटिंग यूनिट वाले करते रहे। फिल्म के हीरो आशुतोष राणा और हीरोइन मंजरी फडणवीस के आने के बाद तो मरीजों के परिजनों को वार्ड से पूरी तरह बाहर निकाल दिया गया। जिम्मेदार महाराणा भूपाल चिकित्सालय के उप अधीक्षक रमेश जोशी बजाय इलाज करने के फिल्म में अपने छोटे से रोल के लिए सुबह से देर रात तक शूटिंग की व्यवस्था करते नज़र आये।
पांच हज़ार और २० सेकण्ड के रोल में मरीजों की जान दाव पर :
अस्पताल उप अधीक्षक रमेश जोशी का कहना है कि फिल्म जीना इसीका नाम की शूटिंग के लिए फिल्म यूनिट ने अधीक्षक से स्वीकृति ली थी और अस्पताल प्रशासन को पांच हज़ार रुपया जमा करवाये है। रमेश जोशी को एक २० सेकण्ड का रोल भी दिया इस २० सेकण्ड के रोल के लिए रमेश जोशी सुबह से देर रात तक फिल्म यूनिट की जी हुजूरी में लगे रहे। डॉ जोशी सुबह ही आकर न्यूरो सर्जरी और ट्रॉमा सेंटर के इंचार्ज और नर्सिंग स्टाफ को आकर निर्देश दे गए थे कि शाम को फिल्म की शूटिंग होगी। कोई रोकना मत और उनकी व्यवस्था कर देना। खुद जोशी शूटिंग के दौरान शाम छह बजे से १२ बजे तक वही मौजूद रहे।
पत्रकारों से होते है मरीज डिस्टर्ब शूटिंग से नहीं :
महाराणा भूपाल चिकित्सालय में पत्रकार और फोटो पत्रकारों को किसी भी वार्ड में जाने के लिए सरकार ने रोक लगा रखी है और इधर वार्ड में शूटिंग का फ़िल्मी तमाशा चल रहा है इससे कोई मरीज को परेशानी नहीं हो रही।
अस्पताल की क्रिटिकल यूनिट लेकिन परवाह नहीं :
न्यूरो सर्जरी वार्ड और ट्रॉमा सेंटर अस्पताल का सेंसेटिव और क्रिटिकल वार्ड है यहाँ पर कल रात करीब ३० से अधिक मरीज भर्ती थे। यहां पर सर में चोट लगे बेहोश हुए और ऑपरेशन हुए या एक्सिडेंटल मरीज भर्ती किये जाते है। इसके बावजूद न्यूरो सर्जरी के बाहर गेलेरी में अधीक्षक के रूम में व् ट्रॉमा सेंटर वार्ड में शूटिंग का तमाशा घंटों तक चलता रहा।
मरीज, परिजन और स्टाफ भी हुआ परेशान :
शूटिंग के दौरान मरीज के परिजनों को ट्रॉमा सेंटर और वार्ड से ही बाहर निकाल दिया । मरीजों के परिजन घंटों तक बाहर खड़े रहे । इधर नर्सिंग स्टाफ और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। न्यूरो सर्जरी के नर्सिंग इंचार्ज रमेश आर्य का कहना है की हमको तो सुबह उपाधीक्षक ने आकर निर्देश दिए थे।

इनका कहना …

शहर में सार्वजनिक जगहों पर शूटिंग करने की स्वीकृति जिला प्रशासन देता है लेकिन अस्पताल या अन्य किसी विभाग में शूटिंग करने के लिए स्वीकृति वहां के अधीक्षक या विभाग अध्यक्ष से लेनी होती है। अस्पताल के न्यूरो सर्जरी व् ट्रोमा सेंटर में शूटिंग की गयी है तो यह गलत है । अस्पताल प्रशासन को इस तरह की स्वीकृति नहीं देनी चाहिए।

ओ पी बुनकर , अतिरिक्त जिला कलेक्टर

अधीक्षक डॉ तरुण गुप्ता ने स्वीकृति दी थी वह अभी इन्दोर गए हुए है। न्यूरो और ट्रोमा में मरीजों को कोई परेशानी नहीं हुई हमने बाहर रूम में ही शूटिंग करवाई। शूटिंग यूनिट ने पांच हज़ार रुपये अस्पताल प्रशासन को जमा करवाए है।

डॉ रमेश जोशी , उपाधीक्षक महाराणा भूपाल चिकित्सालय

पत्रकारों के साथ सल्फी – दिवाली मिलन के बहाने रिझाने की कोशिश?

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शनिवार के दिन वरिष्ठ पत्रकारों को किसी कार्यक्रम में बुलाने का मतलब मुसीबत मोल लेने से कम नहीं होता. चुनिंदा व्यंजन, जाड़ों की बढ़िया धूप और किसी बड़ी ख़बर के बिना वीकेंड में घर से बाहर निकलना मुश्किल होता है. लेकिन जब नरेंद्र मोदी और अमित शाह भोजन के साथ समय बिताने का न्यौता दें तो शनिवार भी सोमवार जान पड़ता है. जगह है दिल्ली के बीचोंबीच स्थित भाजपा मुख्यालय, जहाँ भारत के वरिष्ठ पत्रकार लाइन में लगकर भीतर जा रहे हैं. भाजपा ने इन्हें दिवाली के दो हफ़्ते बाद ‘दिवाली मिलन’ लिए बुला रखा है और खुद नरेंद्र मोदी ने पहुँचते इसके लिए माफ़ी मांग ली.

उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि इस आयोजन में मेरी व्यस्तता के चलते थोड़ा विलम्ब हुआ है”. सवाल ये है कि क्या मोदी वाकई में अपने मन की बात कह रहे थे?

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हाल ही में मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा को बिहार में कड़वी हार का घूँट पीना पड़ा है. बीफ़ हत्या मामले में मोदी के देर से आए बयान के बावज़ूद, साहित्यकारों के पुरस्कार लौटाने से सरकार की काफ़ी किरकिरी भी हुई. बढ़ती असहिष्णुता के विवाद पर शाहरुख़ खान के बाद आमिर खान बोल बैठे, तब भाजपा के नेताओं को मजबूरन सफाई देनी पड़ीं. अर्थव्यवस्था के मामले में चुनाव के पहले मोदी के वादे ‘सारे घर को बदल डालूँगा’, उसे भी पूरा होते देखना अभी तक सपना ही है. इस माहौल में मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को अपनी सहजता और अपना पूरा ‘कंट्रोल’ दर्शाने की ज़रूरत भी आन पड़ी थी. इसी का नतीजा था क़रीब चार सौ पत्रकारों के लिए ‘दिवाली मिलन’, भोज पर आमंत्रण और उनसे ‘मेल-मिलाप’.

कल्पना कीजिए इस नज़ारे की:

अरुण जेटली का गोलगप्पे और सलाद लेकर पत्रकारों के साथ संसद की कार्यवाही पर हंंसी-मज़ाक करना. बगल में बैठे अमित शाह का पनीर-चावल के निवालों के साथ, 1950 के दशक में नेहरू और मौलाना आज़ाद के बीच हुई तक़रीरों का ज़िक्र करना. दूसरी तरफ़ राजीव प्रताप रूडी का पत्रकारों से पूछना कि शरबत कौन से बेहतर लगे. वहीं शहनवाज़ हुसैन और रवि शंकर प्रसाद एक ही टेबल पर बैठ कर खाना खाते हुए बिहार विधानसभा चुनाव में हार की वजहों को गिनाना चाह रहे थे. आमतौर पर थोड़े ‘रौब’ में रहने वाली मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी मोदी के आने के एक घंटे पहले से ही पत्रकारों के हाल-चाल ले रहीं थीं. आख़िर में मध्यप्रदेश के ‘करोड़पति’ व्यापारी और उभरते हुए भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय को पार्टी महासचिवों के साथ बैठकर खाते देखना. इस नज़ारे का जवाब ढूंढना बिलकुल भी मुश्किल नहीं, क्योंकि मोदी और अमित शाह की भाजपा को अपनी छवि की चिंता सता रही है. ऊपर से न तो संसद में अहम क़ानून पास हो रहे हैं, और न ही विपक्ष इन क़ानूनों को लेकर नरम दिख रहा है. इन मसलों के मद्देनज़र मोदी की पत्रकारों से भोजन पर मुलाक़ात के मायने बढ़ जाते हैं.

लेकिन जिस बात ने मोदी के मंसूबों को आसमान तक पहुंचा दिया होगा उस शब्द का नाम है सेल्फ़ी. जिस तरह से दर्जनों पत्रकारों ने मोदी को घेर कर एक के बाद एक सेल्फ़ी खींचनी शुरू की उससे मोदी का ‘खोया हुआ नूर’ दोबारा लौट आया. लेकिन उम्मीद यही है कि चंद लम्हों के लिए पत्रकारों से मिले अप्रत्याशित ‘सेल्फ़ी मेनिया’ को मोदी अब तक भूल चुके होंगे. क्योंकि अगर वे नहीं भूले, तब कम से कम रवैया तो बदलने से रहा.

राजस्थान सहकारिता में पहली ई-कॉमर्स सुविधा महिला समृद्धि बैंक में प्रारम्भ।

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उदयपुर । ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए महिला समृद्धि बैंक की ई-कॉमर्स सुविधा का शुभारम्भ 28 नवम्बर से शुरू कर दी। महिला समृद्धि बैंक ई-कॉमर्स सुविधा प्रारम्भ करने वाला देश का पहला महिला बैंक एवं राजस्थान सहकारिता का पहला सहकारी बैंक हो गया है।
बैंक अध्यक्ष डॉ. किरण जैन ने बताया कि महिला समृद्धि बैंक की ई-कॉमर्स सुविधा का भव्य शुभारम्भ गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया एवं सहकारिता मंत्री माननीय अजयसिंह जी किलक के द्वारा किया गया।
मुख्यकार्यकारी अधिकारी विनोद चपलोत ने ई कॉमर्स सुविधा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस सुविधा से बैंक के एटीएम कार्ड धारक सभी ग्राहक घर बैठे ऑनलाईन ही शॉपिंग साईट से खरीददारी कर सकेंगे, रेलवे, एयर अथवा रोडवेज के टिकिट बुक कर सकेंगे एवं बिलो का भुगतान कर सकेंगें। यह बैंक ई-कॉमर्स सुविधा प्रारम्भ करने वाला राजस्थान का पहला सहकारी बैंक एवं देश का छठा सहकारी बैंक बन गया है।

NSUI की छात्रा पदाधिकारी ने गृहमंत्री कटारिया को कह दिया ये हमारे नेता नहीं – नहीं ली शपथ

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उदयपुर। मीरा कन्या महाविद्यालय के छात्रसंघ शपथ ग्रहण समारोह में एनएसयूआई की निर्वाचित महाविद्यालय की महासचिव ने राज्य सरकार के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को मला पहनाने से भी इंकार कर दिया और कटारिया द्वारा दिलाई गयी शपथ में हाथ बांध कर खड़ी रही। एनएसयूआई की छात्रों ने कहा ये ना तो हमारी मर्जी से आये है ना ही हमारे नेता है।
गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया शुक्रवार को सुबह मीरा कन्या महाविद्यालय में छात्रासंघ कार्यालय का उदघाटन करने और शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में गए थे। छात्रासंघ कार्यालय का उदघाटन के बाद शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कटारिया के स्वागत और माला पहनाने के लिए नव निर्वाचित कार्यकारणी का नाम पुकारा जाने के दौरान जैसे ही महासचिव धीरज सोलंकी का स्वागत के लिए नाम बोला गया तो निचे बैठी एनएसयूआई की छात्राओं ने हंगामा करना शुरू कर दिया और कहा की धीरज सोलंकी गुलाबचंद कटारिया का स्वागत नहीं करेगी सोलंकी भी कटारिया स्वागत करने और माल्यार्पण करने अपनी जगह से नहीं उठी। एनएसयूआई की छात्राओं ने कहा की गुलाबचंद कटारिया हमारे नेता नहीं है। हमारे संगठन की छात्रा पदाधिकारी स्वागत नहीं करेगी। हंगामा बढ़ते देख कॉलेज की प्राध्यापकों और मौजूद महिला पुलिस कर्मियों ने स्थिति को सम्भाला। कटारिया ने भी मोके की नज़ाकत को समझते हुए भाषण के लिए माइक थाम लिया और उन्होंने समझाया की अतिथि कोई भी स्वागत किया जाना चाहिए। कटारिया के भाषण के बाद महासचिव धीरज सोलंकी ने कटारिया को माला पहनाई। लेकिन जब गुलाबचंद कटारिया नवनिर्वाचित कार्यकारणी को शपथ दिलवा रहे थे तब भी महासचिव धीरज सोलंकी शपथ लेने वाली कार्यकारणी के साथ हाथ बांध कर खड़ी रही और शपथ नहीं ली। बाद में धीरज सोलंकी ने बताया कि हर कार्यक्रम में बिना कॉलेज कार्यकारणी के परामर्श के सहमति के होता है। मीरा कन्या महाविद्यालय में अध्यक्ष सहित तीन पदाधिकारी एबीवीपी की है, जबकि महासचिव एनएसयूआई की है। एनएसयूआई की धीरज सोलंकी ने बताया की हर कार्यक्रम में भाजपा नेताओं का जमावड़ा होता है। और उन्ही की ही मनमानी चलती है। शपथग्रहण समारोह भी बिना उनकी सहमति के किया गया। अतिथियों के बारे में भी उनसे नहीं पूछा गया और आनन फानन में यह कार्यक्रम रख दिया जिसकी किसी को कोई पूर्व सूचना नहीं दी गयी थी। सोलंकी ने बताया की यदि नेताओं को बुलाया जाता है तो भाजपा नेता के साथ हमारे नेता भी आने चाहिए अन्यथा हमारा विरोध सहना पडेगा।