उदयपुर। मार्बल एसोसिएशन के चुनाव पर कोर्ट ने स्टे लगा दिया और चुनाव प्रक्रिया को पुनः करवाने के आदेश जारी किये है। चुनाव ९ अक्टूबर को होने वाले थे लेकिन कुछ मार्बल व्यवसाइयों ने संविधान के विरातीत चुनाव होने का आरोप लगाते हुए कोर्ट की शरण ली थी जिस पर कोर्ट ने आज कार्रवाई करते हुए आदेश जारी किये।
शुक्रवार को मार्बल एसोसिएशन के चुनाव होने थे मार्बल व्यवसाइयों के एक गुट ने मोजुदा अध्यक्ष और कार्यकारणी पर संविधान के विपरीत मन माने ढंग से चुनाव कराने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में चुनाव पर रोक के लिए परिवाद दायर किया था जिस पर कोर्ट ने आज सुनवाई करते हुए मोजुदा चुनाव पर स्टे लगाते हुए पूरी चुनाव की कारवाई पुनः करवाने के निर्देश दिए है। मार्बल व्यवसाइयों ने मोजुदा अध्यक्ष रोबिन सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन्होने अपने दो साल के कार्य काल में कई काम संविधान के विपरीत किये है। और चुनाव की सम्पूर्ण प्रक्रिया एक तरफ़ा और और अपने मन माने ढंग से अपनाई जारही थी। मार्बल व्यवसाइयों ने बताया कि रोबिन सिंह की कार्य शेली और मनमाने रवय्ये से एसोसिएशन के अधिकतर व्यवसाई नाराज़ थे। उदयपुर की सुखेर अम्बेरी मार्बल मंडी राजस्थान की बड़ी मंडियों में से एक है। यहां की मार्बल एसोसिएशन में कुल ८२५ सदस्य है। कल होने वाले चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सेक्रेटरी, जॉइंट सेक्रेटरी, कोषाध्यक्ष और आठ कार्यकारणी सदस्यों के चुनाव होने थे। अध्यक्ष पद के लिए निवर्तमान अध्यक्ष रोबिन सिंह, पंकज गंगावत और पूर्व अध्यक्ष रह चुके महिपाल सिंह ने नामांकन दाखिल किया था जिसमे से महिपाल सिंह का फ़ार्म निरस्त हो गया था। अगले चुनाव की तारीख अब की जानकारी
उदयपुर मार्बल एसोसिएशन के चुनाव पर कोर्ट का स्टे – निवर्तमान अध्यक्ष पर मनमाने ढंग से चुनाव करवाने का आरोप।
सिविल वॉर करवाना चाहती है मोदी सरकार : अाबिद सुरती
उदयपुर. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबद्ध नेशनल बुक ट्रस्ट के राष्ट्रीय पुस्तक मेले में बुधवार को आए मशहूर कार्टूनिस्ट, पेंटर और लेखक आबिद सुरती कहा कि मोदी सरकार देश में सिविल वॉर करवाना चाहती है। इसके पीछे मानसिकता यह है कि लोगों की एकता टूटेगी तो सबसे ज्यादा फायदा सांप्रदायिक ताकतों को होगा। यह उनकी सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। मोदी सरकार दिखावे के लिए विकास की बात करती है और उसने पीछे के रास्ते से अल्पसंख्यकों के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा है।झूठा है गैस सब्सिडी से 12,700 करोड़ रुपए की बचत का दावा?
नई दिल्ली। घरेलू गैस सब्सिडी के सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर से सरकार को 12 हजार 7 सौ करोड़ रुपए की बचत के सरकार के दावे पर एक एक रिसर्च संस्थान ने सवाल उठाए हैं। संस्थान का कहना है कि सब्सिडी के खातों में सीधे हस्तांतरण से होने वाली बचत का सरकार का अनुमान ओवरऐस्टीमेट जैसा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सस्टेनैबल डवलपमेंट (आईआईएसडी) के मुताबिक 2014-15 में इस स्कीम के लागू होने के बाद सरकार का 12,700 करोड़ रुपए बचत का दावा गलत है उसे इसके मुकाबले महज 143 करोड़ रुपए की बचत हुई है।
स्टडी के लेखक कीरन क्लार्क का कहना है कि हमारी स्टडी से यह पता चलता है कि पिछले साल सब्सिडी के नकद हस्तांतरण से होने वाली बचत का अनुमान बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया आंकड़ा है।
सरकार की ओर से इस बचत के बारे में कोई आधिकारिक दस्तावेज जारी नहीं किया गया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन कई बार यह दोहरा चुके हैं।
एनडीए सरकार ने नवंबर मध्य 2014 में देश में 54 जिलोंं में एलपीजी गैस सब्सिडी के नकद हस्तांतरण की योजना शुरु की थी।
इसके बाद जनवरी 2015 में इसे देश के सभी जिलों में लागू किया गया। सबसे पहले यूपीए सरकार ने यह योजना शुरु की थी, लेकिन फरवरी 2014 में इस योजना को निलंबित कर दिया गया था।
आईआईएसडी ने इस योजना को दुनिया की सबसे बड़ी नकद सब्सिडी हस्तांतरण योजना बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक अरविंद सुब्रमण्यन का कहना है कि 12,700 करोड़ की बचत 2014-15 के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि हम नहीं जानते कि इस साल कुल कितनी एलपीजी गैस का उपभोग होगा।
पराए मर्द के साथ एक रात बिताना गलत नहीं: हाईकोर्ट
अहमदाबाद। गुजरात हाईकोर्ट ने विवाहेतर संबंधों को लेकर एक अनोखा फैसला दिया है। संयोगवश पराए मर्द के साथ एक रात बिताना गलत नहीं लेकिन जानबूझकर लगातार सेक्स संबंध बनाना व्यभिचार है।
अलवर कलक्टर बोले-मैं हूं रेप पीडि़त बच्ची का गार्जियन, अब तो दर्ज करो एफआईआर
अलवर. कभी नियम कायदे की आड़ तो कभी किसी बहाने से प्राथमिकी दर्ज करने में आनकानी करना पुलिस की पुरानी फितरत है। अलवर पुलिस को इसी ‘फितरत को लेकर फटकार खानी पड़ी।
प्रदेशभर में मावा न बनेगा, न बिकेगा
जयपुर. हाईकोर्ट ने दीपावली पर मिलावटी घी, मावा व मिठाइयों की बिक्री की आशंका जताते खाद्य सुरक्षा आयुक्त को उनकी कानूनी शक्तियां याद दिलाई।
नहीं मिली कार तो दूल्हे ने रोकी बरात, इधर लड़की ने दूसरे से कर लिया निकाह
दुल्हन तमन्ना ने कहा- दहेज के ऐसे लालची लोगों को पुलिस सबक सिखाए ताकि फिर किसी बेटी और उसके परिवार को यह जिल्लत न सहना पड़े। निकाह से मैं खुश हूं।
सखियों ने सिले 1000 बेटियों के लिए स्कूल यूनिफॉर्म
उदयपुर। हिन्दुस्तान जिंक द्वारा चलाये जा रहे ‘सखी’ अभियान के अंतर्गत मटून की 20 सखियों ने मात्र 19 दिन में आंगनवाड़ी की बालिकाओं के लिए 1000 यूनिफार्म बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया। तकरीबन 8 घंटे रोज आकर इन महिलाओं ने हर प्रकार का कार्य जिसमें कपड़े की नपाई, कटाई, सिलाई, बटन लगाना व प्रेस करके पैकिंग करना सब शामिल रहा।
स्कूल यूनिफार्म के कार्य करने के लिए हिन्दुस्तान जिंक ने हाल ही में एक चार दिवसीय कार्यषाला का आयोजन किया था जिसमें हिन्दुस्तान जिं़क की ओर से टेªनर नियति कोठारी ने टेªनिंग दी थी। इस कार्यषाला में महिलाओं को स्कूली यूनिफार्म बनाने व्यवसायिक प्रषिक्षण दिया गया था।
इन मटून की 20 सखियों ने अपने कार्यों को आपस में बांटा। कुछ महिलाएं केवल नापा व कटिंग का कार्य करती रही। कुछ महिलाएं केवल सिलने का कार्य करती रही और कुछ महिलाओं ने बीड़ा उठाया इन बालिकाओं की यूनिफार्म को प्रेस करके पैक करने का।
हिन्दुस्तान जिंक के हेड-कार्पोरेट कम्यूनिकेषन एवं प्रोजेक्ट सखी पवन कौषिक ने बताया कि वेदान्ता फाउण्डेषन व हिन्दुस्तान जिंक की ओर से इन सभी सखियों को आज पारिश्रमिक दिया गया।
हिन्दुस्तान जिंक वेदान्ता फाउण्डेषन एवं राजस्थान सरकार ने हाल ही में समझौते के ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर हिन्दुस्तान जिंक व वेदान्ता फाउण्डेषन को 3055 आंगनवाड़ियों को गोद दिया है। इनमें से 1000 आंगनवाड़ियों के बच्चों को स्कूली यूनिफार्म दी जाएगी। इन बच्चों के लिए स्कूल यूनिफार्म बनाने का बीड़ा हिन्दुस्तान ज़ि़क के प्रोजेक्ट ‘सखी’ ने उठाया है। मटून की सखी महिलाएं बालिकाओं के लिए यूनिफार्म बना रही हैं तथा देबारी की सखी महिलाएं लड़कों की यूनिफार्म बना रही हैं।
सखी ममता, बंसती, हेमलता व इन्द्रा आदि सभी ने इस कार्य से जुड़कर प्रसन्नत व्यक्त की तथा कार्य सिखने के साथ-साथ उत्पाद बनाने की भी इस विधि की सराहना की। सखी ममता ने कहा कि कार्य सीखना अपने आप में रोचक व महत्वपूर्ण है परन्तु उसके साथ-साथ उत्पाद बनाने से रूचि और बढ़ गई है।
पवन कौषिक ने बताया कि ‘सखी’ अभियान के अंतर्गत हिन्दुस्तान जिंक विभिन्न जिलों में मार्केट के अनुसार सखियों द्वारा क्लस्टर की स्थापना कर रहा है। इन क्लस्टरों में यूनिफार्म क्लस्टर एक बड़ा क्लस्टर होगा जिसको कुछ चुनिनन्दा जिलों में स्थापित किया जाएगा।
मावली की चंदा ताईवान में बिखेरेगी हौसले की चांदनी
उदयपुर,.मावली क्षेत्र के फलीचड़ा गांव की चंदा ताइवान में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर 6 से 13 अक्टूबर तक होने वाले कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है।
दादरी कांड: अब पीडि़त परिवार को देशद्रोही साबित करने की साजिश, डीएम ने जताई नाराजगी
उदयपुर। दादरी काण्ड में लिप्त संगठनों और राजनैतिक पार्टियों की देश भर में फजीहत होने के बाद स्थानीय दलाल नुमा अखबार के जरिये नया खेल खेला जारहा है।
जिस परिवार का एक बेटा “सरताज” भारतीय वायुसेना में है, जिसके पिता “अख़लाक़” को कुछ लोगों ने साजिश के तहत गोमांस खाने की अफवाह फैला कर मार दिया, अब दलाल नुमा स्थानीय पत्रकार और अखबार के जरिये अख़लाक़ के परिवार को पाकिस्तानी बता कर देशद्रोही साबित करने की घटिया साजिश कर रहे है।
दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के दादरी कस्बे के बिसाहड़ा गांव में एक स्थानीय अखबार के द्वारा मृतक अखलाक के पाकिस्तानी संबंध बताने से दुखी पीडि़त परिवार ने डीएम से गुहार लगाई है। डीएम ने भी अखबार की रिपोर्ट पर नाराजगी जताई है।
जागरूक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीडि़त परिवार का कहना है कि उन्हें अब देशद्रोही साबित करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने इस संबंध में कुछ सबूत एसडीएम को भी दिए हैं, जिसमें पीडि़त परिवार ने बताया कि अखलाक 1988 में अपनी मौसी से मिलने पाकिस्तान गए थे और जिस कार को पाकिस्तान से लौटने के बाद खरीदने की बात कही जा रही है, वह सरताज की शादी में मिली थी।
गौरतलब है कि मंगलवार को एक स्थानीय अखबार ने खबर छापी थी कि अखलाक करीब सवा साल पहले पाकिस्तान गया था और वहां ढाई महीने रहा था। वहां से आने के बाद उसने कार खरीदी और मस्जिद में मीटिंग करने लगा था।
अखलाक के भाई ने जमील ने बताया कि इस तरह गलत सूचना देकर उन्हें देशद्रोही साबित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मंगलवार को भी इसकी शिकायत एसडीएम दादरी से की है। वहीं डीएम एन पी सिंह ने भी इस पर नाराजगी जताई है।
जमील ने एसडीएम को अखलाक के पासपोर्ट की कॉपी सौंपते हुए बताया कि वह 1988 मेंं अपनी रिश्ते की मौसी से मिलने के लिए एक बार पाकिस्तान गए थे। मौसी की मौत के बाद संबंध भी खत्म हो गए। 7 मार्च 1998 को उनका पासपोर्ट भी एक्सपायर हो गया था, जिन्हें रिन्यू नहीं कराया गया।
जमील के मुताबिक परिवार की जिस तरक्की की बात की जा रही है, वह बड़े बेटे सरताज की एयरफोर्स में नौकरी लगने के बाद थोड़ी बहुत हुई है। वहीं जिस कार की बात की जा रही है वो सरताज की शादी में मिली थी और वो उसकी पत्नी के नाम रजिस्टर्ड है।

