अलवर कलक्टर बोले-मैं हूं रेप पीडि़त बच्ची का गार्जियन, अब तो दर्ज करो एफआईआर

0

hands-and-feet-tied-and-rape-of-minor-5609573d18dbd_lअलवर. कभी नियम कायदे की आड़ तो कभी किसी बहाने से प्राथमिकी दर्ज करने में आनकानी करना पुलिस की पुरानी फितरत है। अलवर पुलिस को इसी ‘फितरत को लेकर फटकार खानी पड़ी।

 हुआ यूं कि अलवर कलक्टर मुक्तानंद अग्रवाल बुधवार रात तिजारा में दुष्कर्म की शिकार बच्ची (5) के हाल जानने यहां जनाना अस्पताल पहुंचे। कलक्टर को पता चला कि पीडि़ता की पहचान नहीं होने के कारण पुलिस ने मामला ही दर्ज नहीं किया। 
 इस पर कलक्टर ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा, मैं हूं बच्ची का गार्जियन, तुरंत एफआईआर दर्ज करो। साथ ही डॉक्टरों को बच्ची की बेहतर इलाज व देखभाल करने की हिदायत दी। साथ ही चेताया-मैं कभी भी बच्ची की तबीयत जानने आ सकता हूं। बोले-बच्ची की देखरेख में एक कर्मचारी लगाया जाए।
 तिजारा पुलिस के अनुसार, बुधवार दोपहर 3.30 बजे किशनगढ़बास-कोटकासिम रोड पर गहनकर गांव के पास ग्रामीणों ने सड़क किनारे खून से लथपथ पांच वर्षीय बच्ची को अचेत देखा।
 सूचना पर पहुंची पुलिस ने बच्ची को तिजारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां हालत बिगडऩे पर उसे अलवर के जनाना अस्पताल रैफर कर दिया है। 
 जनाना अस्पताल की डॉ. कल्पना माथुर ने कहा, पीडि़ता की जांच करने वाली डॉक्टर ने बताया कि बच्ची के शरीर पर चोट के निशान हैं। गुप्त अंगों पर भी चोट है। इससे साफ है कि पीडि़ता के साथ दुष्कर्म हुआ है।
 केवल दादा-पिता का नाम बता पाई
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार होश में आने पर बच्ची काफी सदमे में थी और कुछ भी बताने में असमर्थ थी। प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची पुलिस को केवल अपने पिता व दादा का नाम ही बता पाई है लेकिन उसके परिजनों का पता नहीं चला। पुलिस दुष्कर्म को अंजाम देने वाले और बच्ची के परिजनों का पता लगा रही है।

प्रदेशभर में मावा न बनेगा, न बिकेगा

0

mawaजयपुर. हाईकोर्ट ने दीपावली पर मिलावटी घी, मावा व मिठाइयों की बिक्री की आशंका जताते खाद्य सुरक्षा आयुक्त को उनकी कानूनी शक्तियां याद दिलाई।

इस पर आयुक्त ने बुधवार को हाईकोर्ट में कहा, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत मावे की बिक्री रोकने का आदेश दे दिया गया है।
कोर्ट ने तथ्यात्मक रिपोर्ट व रोक की अधिसूचना रिकॉर्ड पर लेकर सुनवाई 17 नवंबर तक टाल दी। इधर, चिकित्सा विभाग ने बाजार में उपलब्ध मावे के माल को नष्ट करवाने की तैयारी भी कर ली है।
राजू सैनी की याचिका पर बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायाधीश महेशचंद्र शर्मा ने चिंता जताई।
दिवाली…
कहा राज्य में दिन-प्रतिदिन मिलावट के मामले बढ़ रहे हैं। घी, मावा व उससे निर्मित मिठाइयों में एेसा ज्यादा रहा है और दीपावली नजदीक है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी शशिकांत शर्मा से इसे रोकने के उपाय पूछे। 
शर्मा बोले, खाद्य सुरक्षा आयुक्त व निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. बीआर मीणा ही इस पर कार्रवाई कर सकते हैं, जो कोर्ट में हाजिर हैं। याचिका में घी के नमूने के बारे में जयपुर व प्रदेश के बाहर की एक प्रयोगशाला की अलग-अलग रिपोर्ट आने का मुद्दा उठाया है।
यूं निकला रास्ता
कोर्ट ने मीणा से पूछा-जनता की सेहत पर मिलावट का बुरा असर रोकने को क्या कर सकते हैं। मीणा ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 30 के तहत शक्तियां बताई। 
कहा-इस धारा के तहत शहर के चार नामी प्रतिष्ठान से जांच के नमूने लिए हैं। नमूनों की रिपोर्ट आने में 15 दिन लगेंगे। इसी कानून के तहत प्रदेश में मावा व मावे से निर्मित पदार्थोंे के निर्माण व विक्रय रोकने के आदेश जारी कर दिए। 
यह कहती धारा 30 
आयुक्त जनहित में खाद्य पदार्थों का किसी क्षेत्र विशेष में निर्माण, विक्रय व भंडारण पर पाबंदी लगा सकता है। निर्माता कंपनियों का निरीक्षण करा कता है। 
खाद्य सुरक्षा से जुडे़ कर्मियों को कार्रवाई के लिए प्रशिक्षण दिलाया जाए। दोषियों पर कार्रवाई के लिए अभियोजन की स्वीकृति दी जाए। आयुक्त जरूरत पडऩे पर अपने प्रतिनिधि नियुक्त कर सकता है।
चिथवाड़ी और चौमूंं बड़े केन्द्र
जयपुर के चिथवाड़ी व चौमूं मिलावटी मावे बनाने के बड़े केंद्र हैं। यहां कार्रवाई भी कई गई है। लेकिन कुछ केंद्र एेसे भी हैं, जिन तक विभाग पहुंच ही नहीं पाया है। रोक के बाद बाजार में चोरी छिपे मावे की बिक्री की आशंका बढ़ गई है। 
01 लाख कारोबारी हैं प्रदेश में मावे से जुड़े
20 हजार जयपुर में
 गुरुवार से मावे की बिक्री के खिलाफ कार्रवाई शुरू करेंगे। सभी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों निर्देश दे दिए हैं।
बीआर मीणा, आयुक्त खाद्य सुरक्षा
पत्रिका व्यू त्योहारी खेलÓ!
दुनिया के लिए त्योहारी मौसम नवरात्र से शुरू हो रहा है, लेकिन सरकारी अधिकारियों का त्योहार तो शुरू हो गया। मिठाई वालों के सैंपल लिए जाने लगे। मावे के निर्माण व बिक्री पर रोक लगा दी गई। 
हालांकि मिलावटियों पर कार्रवाई कब होगी या पहले कब हुई? यह बताने वाला कोई नहीं। कानून में ही इतनी गलियां छोड़ रखी हैं कि ‘भाई त्योहार तुम भी मनाओ, हमारे त्योहार का इंतजाम भी कर दो।Ó हम भी खुश तुम भी खुश! जनता जाए भाड़ में। 
हाईकोर्ट मिलावट पर 10 साल से चिंता जता रहा है और राजस्थान पत्रिका के अभियानों पर मिलावटियों के खिलाफ दो बार प्रसंज्ञान भी ले चुका है।
त्योहारी…
इस बार अधिकारियों ने कोर्ट को ही ढाल बना लिया। दिन में अधिकारियों ने हाईकोर्ट की सख्ती पर मावे पर रोक लगा दी, शाम को वही सफाई देते दिखे कि कोर्ट के दवाब में पाबंदी लगानी पड़ी। 4 बड़े व्यापारियों के यहां से सैंपल उठाए ताकि थड़ी वाले तक संदेश पहुंच जाए कि ‘त्योहारÓ आ रहा है।
 कानून इतना लचर की जो रिपोर्ट खाद्य अधिकारियों के अनुसार आधे से एक घंटे में आ सकती है उसके लिए 40 दिन की अवधि निर्धारित है। 1954 के खाद्य मिलावट निषेध कानून की जगह 2006 में नया खाद्य सुरक्षा कानून आ गया, लेकिन यह प्रावधान जस का तस रहा। सिर्फ जुर्माना बढ़ा दिया गया। ताकि उसके आधार पर ‘खर्चाÓ बढ़ाया जा सके। 
कोर्ट भी कानून की धाराओं का हवाला दे एक तरह से अपने दायित्वों से मुक्ति पा जाते हैं। यदि मिलावट सिद्ध हो जाए तो व्यापारी कोर्ट से यह आदेश करा लेते हैं कि जांच पर भरोसा नहीं है, कलकत्ता या गाजियाबाद में जांच हो। 
मिलावट करना क्या किसी आतंकवाद से कम है। इससे तो हजारों की जान पर बन आती है। जब तक सरकार वाकई सख्त कानून नहीं बनाएगी, रिपोर्ट हाथों हाथ नहीं आएगी और मिलावटियों को जेल नहीं होगी। तब तक यूं ही हर साल ‘त्योहारी खेलÓ चलता रहेगा और प्रदूषित खाद्य पदार्थों के जरिए मिलावटिये और इनके संरक्षक तिजोरियां भरते रहेंगे। 

नहीं मिली कार तो दूल्हे ने रोकी बरात, इधर लड़की ने दूसरे से कर लिया निकाह

0
bride_1444168909
इंदौर. एक लड़की की शादी देवास के लड़के से तय थी। मंगलवार को बरात आनी थी, लेकिन रात को दूल्हा दहेज में कार की मांग को लेकर अड़ गया और बरात लेकर नहीं आया। रात 12 बजे लड़की के पिता ने थाने पर शिकायत कर दी। उधर, रिश्तेदारी में ही एक परिवार को शादी के लिए तैयार किया और आधे घंटे में गम का माहौल खुशी में बदल गया। रात में ही निकाह हो गया।
 अब्दुल हफीज शाह ने बेटी तमन्ना की शादी देवास के अजीज शाह के बेटे फरीद से तय की थी। 14 सितंबर को सगाई हो गई और 6 अक्टूबर का दिन शादी का तय हुआ। ईद के बाद से फरीद कार की मांग करता रहा। पिता ने बाइक का इंतजाम कर लिया। दूल्हे ने कहा- कार नहीं मिलेगी तो बरात लेकर नहीं आऊंगा। रात 11 बजे तक लड़का देवास में ही बरात रोके बैठा रहा। बोलता रहा कि कार दो या चार लाख रुपए, वरना रिश्ता भूल जाओ। गार्डन में मेहमान आ गए, पकवान सज गए, लेकिन मायूसी छाई रही। आखिरकार रात 11.30 बजे हफीस ने खजराना थाने पर फरीद की शिकायत कर दी।
आधे घंटे में सारी बातें पक्की हो गई
मायूसी के माहौल के बीच हफीज के छोटे भाई हनीफ शाह ने अपने ससुराल पक्ष से रमजान शाह को तैयार किया। इसके बाद रमजान ने अपने बेटे शरीफ से बात की और तमन्ना का निकाह तय हुआ। हाथोंहाथ सारी बातें पक्की हो गईं और आधे घंटे में काजी को बुलाकर निकाह पढ़वा दिया गया। शरीफ ने बताया उनकी तरफ से तमन्ना से रिश्ते की बात पहले हो गई थी, लेकिन किन्हीं कारणों से रिश्ता हो नहीं सका। वे तो पहले से इस रिश्ते के लिए तैयार थे।
कानून ऐसे लालची को सबक सिखाए 
दुल्हन तमन्ना ने कहा- दहेज के ऐसे लालची लोगों को पुलिस सबक सिखाए ताकि फिर किसी बेटी और उसके परिवार को यह जिल्लत न सहना पड़े। निकाह से मैं खुश हूं।

सखियों ने सिले 1000 बेटियों के लिए स्कूल यूनिफॉर्म

Matoon Sakhi Uniform

 

उदयपुर। हिन्दुस्तान जिंक द्वारा चलाये जा रहे ‘सखी’ अभियान के अंतर्गत मटून की 20 सखियों ने मात्र 19 दिन में आंगनवाड़ी की बालिकाओं के लिए 1000 यूनिफार्म बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया। तकरीबन 8 घंटे रोज आकर इन महिलाओं ने हर प्रकार का कार्य जिसमें कपड़े की नपाई, कटाई, सिलाई, बटन लगाना व प्रेस करके पैकिंग करना सब शामिल रहा।
स्कूल यूनिफार्म के कार्य करने के लिए हिन्दुस्तान जिंक ने हाल ही में एक चार दिवसीय कार्यषाला का आयोजन किया था जिसमें हिन्दुस्तान जिं़क की ओर से टेªनर नियति कोठारी ने टेªनिंग दी थी। इस कार्यषाला में महिलाओं को स्कूली यूनिफार्म बनाने व्यवसायिक प्रषिक्षण दिया गया था।
इन मटून की 20 सखियों ने अपने कार्यों को आपस में बांटा। कुछ महिलाएं केवल नापा व कटिंग का कार्य करती रही। कुछ महिलाएं केवल सिलने का कार्य करती रही और कुछ महिलाओं ने बीड़ा उठाया इन बालिकाओं की यूनिफार्म को प्रेस करके पैक करने का।
हिन्दुस्तान जिंक के हेड-कार्पोरेट कम्यूनिकेषन एवं प्रोजेक्ट सखी पवन कौषिक ने बताया कि वेदान्ता फाउण्डेषन व हिन्दुस्तान जिंक की ओर से इन सभी सखियों को आज पारिश्रमिक दिया गया।
हिन्दुस्तान जिंक वेदान्ता फाउण्डेषन एवं राजस्थान सरकार ने हाल ही में समझौते के ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर हिन्दुस्तान जिंक व वेदान्ता फाउण्डेषन को 3055 आंगनवाड़ियों को गोद दिया है। इनमें से 1000 आंगनवाड़ियों के बच्चों को स्कूली यूनिफार्म दी जाएगी। इन बच्चों के लिए स्कूल यूनिफार्म बनाने का बीड़ा हिन्दुस्तान ज़ि़क के प्रोजेक्ट ‘सखी’ ने उठाया है। मटून की सखी महिलाएं बालिकाओं के लिए यूनिफार्म बना रही हैं तथा देबारी की सखी महिलाएं लड़कों की यूनिफार्म बना रही हैं।

सखी ममता, बंसती, हेमलता व इन्द्रा आदि सभी ने इस कार्य से जुड़कर प्रसन्नत व्यक्त की तथा कार्य सिखने के साथ-साथ उत्पाद बनाने की भी इस विधि की सराहना की। सखी ममता ने कहा कि कार्य सीखना अपने आप में रोचक व महत्वपूर्ण है परन्तु उसके साथ-साथ उत्पाद बनाने से रूचि और बढ़ गई है।

पवन कौषिक ने बताया कि ‘सखी’ अभियान के अंतर्गत हिन्दुस्तान जिंक विभिन्न जिलों में मार्केट के अनुसार सखियों द्वारा क्लस्टर की स्थापना कर रहा है। इन क्लस्टरों में यूनिफार्म क्लस्टर एक बड़ा क्लस्टर होगा जिसको कुछ चुनिनन्दा जिलों में स्थापित किया जाएगा।

मावली की चंदा ताईवान में बिखेरेगी हौसले की चांदनी

chandaniउदयपुर,.मावली क्षेत्र के फलीचड़ा गांव की चंदा ताइवान में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर 6 से 13 अक्टूबर तक होने वाले कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है।

चंदा वहां एशियाई बालिकाओं में भारत की एम्बेसेडर के रूप में बाल विवाह, बालिका शिक्षा आदि मुद्दों पर बात रखने के साथ ही अपने जीवन के संघर्ष की दास्तां भी बताएगी।
गौरतलब है कि ताइवान कीद गार्डन ऑफ होप फाउंडेशन की ओर से एशियन गर्ल कैम्पेन चलाया जा रहा है। इसके तहत नेपाल, बांग्लादेश, थाइलैंड, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन से एक-एक बालिका को एम्बेसेडर के रूप में चुना गया है।

दादरी कांड: अब पीडि़त परिवार को देशद्रोही साबित करने की साजिश, डीएम ने जताई नाराजगी

0

dadri-mos-उदयपुर। दादरी काण्ड में लिप्त संगठनों और राजनैतिक पार्टियों की देश भर में फजीहत होने के बाद स्थानीय दलाल नुमा अखबार के जरिये नया खेल खेला जारहा है।
जिस परिवार का एक बेटा “सरताज” भारतीय वायुसेना में है, जिसके पिता “अख़लाक़” को कुछ लोगों ने साजिश के तहत गोमांस खाने की अफवाह फैला कर मार दिया, अब दलाल नुमा स्थानीय पत्रकार और अखबार के जरिये अख़लाक़ के परिवार को पाकिस्तानी बता कर देशद्रोही साबित करने की घटिया साजिश कर रहे है।
दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के दादरी कस्बे के बिसाहड़ा गांव में एक स्थानीय अखबार के द्वारा मृतक अखलाक के पाकिस्तानी संबंध बताने से दुखी पीडि़त परिवार ने डीएम से गुहार लगाई है। डीएम ने भी अखबार की रिपोर्ट पर नाराजगी जताई है।
जागरूक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीडि़त परिवार का कहना है कि उन्हें अब देशद्रोही साबित करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने इस संबंध में कुछ सबूत एसडीएम को भी दिए हैं, जिसमें पीडि़त परिवार ने बताया कि अखलाक 1988 में अपनी मौसी से मिलने पाकिस्तान गए थे और जिस कार को पाकिस्तान से लौटने के बाद खरीदने की बात कही जा रही है, वह सरताज की शादी में मिली थी।
गौरतलब है कि मंगलवार को एक स्थानीय अखबार ने खबर छापी थी कि अखलाक करीब सवा साल पहले पाकिस्तान गया था और वहां ढाई महीने रहा था। वहां से आने के बाद उसने कार खरीदी और मस्जिद में मीटिंग करने लगा था।
अखलाक के भाई ने जमील ने बताया कि इस तरह गलत सूचना देकर उन्हें देशद्रोही साबित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मंगलवार को भी इसकी शिकायत एसडीएम दादरी से की है। वहीं डीएम एन पी सिंह ने भी इस पर नाराजगी जताई है।
जमील ने एसडीएम को अखलाक के पासपोर्ट की कॉपी सौंपते हुए बताया कि वह 1988 मेंं अपनी रिश्ते की मौसी से मिलने के लिए एक बार पाकिस्तान गए थे। मौसी की मौत के बाद संबंध भी खत्म हो गए। 7 मार्च 1998 को उनका पासपोर्ट भी एक्सपायर हो गया था, जिन्हें रिन्यू नहीं कराया गया।
जमील के मुताबिक परिवार की जिस तरक्की की बात की जा रही है, वह बड़े बेटे सरताज की एयरफोर्स में नौकरी लगने के बाद थोड़ी बहुत हुई है। वहीं जिस कार की बात की जा रही है वो सरताज की शादी में मिली थी और वो उसकी पत्नी के नाम रजिस्टर्ड है।

शांति भंग करने में श्याम बाबा सहित चार गिरफ्तार

unnamed (2)उदयपुर. सूरजपोलचौराहे पर पुलिस से उलझने पर शनिवार रात को शांतिभंग में श्याम बाबा सहित 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कार से टक्कर लगने पर स्कूटी चालकों को मुआवजा दिलाने की मांग पर पुलिस ने झगड़ना शुरू कर दिया था। एक कार और गलत दिशा से रही स्कूटी के बीच टक्कर हो गई थी। एसआरजी ग्रुप की कार ड्राइवर नरेंद्र सिंह चला रहा था। चौराहे पर स्कूटी से गलत साइड से आए दो युवक कार से भिड़ गए। दोनों युवकों ने फोन करके श्याम बाबा को बुला लिया। बाबा ने ट्रैफिक पुलिस गश्ती जवानों पर रौब झाड़ना शुरू कर दिया। सूरजपोल थाना पुलिस ने खेरादीवाड़ा, काष्ठकला मार्ग निवासी श्याम बाबा, अभिजीत खींची, ठक्कर बापा कॉलोनी निवासी यतिन कुड़िया गोपाल टेलर को गिरफ्तार कर लिया।

अस्पताल के बाहर के बैरिकेट एम्बुलेंस के लिए नहीं खुलते, जिला कलेक्टर के लिये खुल जाते है।

upost

 

महाराणा भूपाल चिकित्सालय के आगे लगे बैरिकेट एम्बुलेंस और आम आदमी के लिए हमेशा बंद रहते है लेकिन जिला कलेक्टर के लिए यह सुविधा हो जाती है कि बैरिकेट तुरंत खोल कर उन्हें रास्ता दे दिया जाय। शनिवार को भी जिला कलेक्टर रोहित गुप्ता जब हॉस्पिटल में किसी कार्यक्रम के सिलसिले में गए तो ट्राफिक पुलिस कर्मियों ने तुरंत बैरिकेट्स खोल दिए लेकिन उसके तुरंत बाद घायलों को लेकर एम्बुलेंस आई उसको वही चेतक से घूम कर  आना पढ़ा।

एसीबी ने अाबकारी निरीक्षक को चार लाख रु. के साथ पकड़ा

1_1443916954उदयपुर. एसीबी ने शनिवार को प्रतापगढ़ के आबकारी निरीक्षक चेतनलाल को 4.19 लाख रुपए के साथ पकड़ा। वे टीम को यह नहीं बता पाए कि उनके पास यह रकम कहां से आई। एसीबी इसे अवैध वसूली का मामला मान रही है। बैंक खातों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
चेतनलाल को दोपहर डेढ़ बजे भीलवाड़ा-चित्तौड़गढ़ मार्ग पर जोजरों का खेड़ा टोल प्लाजा के पास पकड़ा गया। उसकी कार की तलाशी में यह रकम मिली। पहले तो चेतन ने खुद का नाम-पता भी टीम को नहीं बताया, सख्ती से पूछताछ के बाद उसने अपना सही परिचय दिया। एसीबी आबकारी निरीक्षक चेतनलाल को अपने साथ उदयपुर ले गई है।

दादरी से मुसलमानों के लिए क्या है संदेश?

0

4

अख़लाक़ की मौत जितनी डरावनी थी, उसके बाद की प्रतिक्रियाएँ भी चिंतित करने वाली हैं.

भाजपा के स्थानीय नेताओं को पुलिस की कार्रवाई पर ऐतराज़ है. उनका कहना है कि यह इरादतन क़त्ल नहीं था, इसलिए हत्या की धाराएँ न लगाकर ग़ैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए.

उनका तर्क यह है कि अख़लाक़ की हत्या की कोई पूर्व योजना न थी, वह तो ‘गोवध’ और ‘गोमांस’ खाने की ख़बर से हिंदू ग्रामीणों की धार्मिक भावनाएं भड़क उठीं. उनका मानना है कि लोगों ने ‘कुछ कड़े रूप में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं’, जिसके नतीजे में अख़लाक़ की मौत हो गई.

वे उलटे अख़लाक़ के परिवार पर गोवध और गोमांस भक्षण के लिए आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग कर रहे हैं. धमकी दी जा रही है की अगर ऐसा न किया गया तो महापंचायत की जाएगी.

‘पीड़ित ही अपराधी’

 

भाजपा के कुछ स्थानीय नेता कह रहे हैं कि असल मुजरिम तो ख़ुद अख़लाक़ ही था क्योंकि उसके घर गोमांस होने का शक गाँव वालों को हुआ. जो शिकार है, वही अपराधी साबित किया जा रहा है. अख़लाक़ ने अपनी मौत को दावत दी.

पुलिस ने अख़लाक़ के फ्रिज में रखे मांस को जांच के लिए लिए भेजा है की वह गोमांस तो नहीं था! मानो, यह मालूम हो जाने से इस हत्या की गंभीरता कम हो जाएगी.

गाँव में हत्या को लेकर कोई अफ़सोस नहीं दिखता.

ये हत्या प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़, गाँव के मंदिर से किए गए इस ऐलान के बाद की गई कि अख़लाक़ ने गाय काटी है और गोमांस खाया है.

पहली नज़र में ऐसा लगता है कि लोगों का ग़ुस्सा भड़का और बात हाथ से निकल गई, लेकिन ये ख़ूनी ग़ुस्सा यूँ ही नहीं भड़का है, लंबे हिन्दुत्ववादी प्रचार और मुस्लिम विरोधी ट्रेनिंग के बाद ही नफ़रत सामूहिक हिंसा में बदली है.

अब रिपोर्टरों को यह मालूम हो रहा है कि काफ़ी पहले से इस पूरे इलाक़े में एक मुस्लिम विरोधी माहौल बन रहा था. इसके पहले भी मवेशी लेकर जा रहे तीन मुसलमान व्यापारियों को गाड़ी से खींच कर मार डाला गया था. दुकान खोलने पर एक मुसलमान की पिटाई की गई थी.

मुसलमानों की छोटी-छोटी बात पर पिटाई और उन्हें बेइज्ज़त करने की घटनाओं की ख़बरें भी मिल रही हैं. इससे नतीजा यही निकलता है कि मुसलमानों को आतंकित करने की एक मुहिम-सी छेड़ी गई है.

मुज़फ़्फ़रनगर

 

यही पैटर्न मुज़फ़्फ़रनगर में भी देखा गया था.

जब हिंसक कांड के बाद वे किसी तरह मुक़दमे में फँस जाते हैं तो इसके लिए वे मुसलमानों को ही जवाबदेह मानते हैं. कहा जाता है, ‘अगर उन्होंने उकसाया न होता तो वे उत्तेजित नहीं होते!’ ‘हम मुसलमानों की तरह हिंसक प्रवृत्ति के नहीं हैं.’

ऐसे मुसलमानों से सहानुभूति क्यों हो जो शांतिप्रिय-सहिष्णु लोगों को क़त्ल के लिए उकसाते हैं? उन्हें यह साफ़ संदेश भी मिल जाता है कि या तो वे गाय की तरह रहें या गाँव छोड़ दें. यह मुज़फ़्फ़रनगर में हो चुका है और अटाली में भी.

अस्करी भी यही करने जा रही है. वह अपना मकान, जो पड़ोस के बिना अब घर नहीं रह गया है, बेचना चाहती हैं.

तो क्या हिंदुओं ने मुसलमानों का पड़ोसी बनने से इनकार कर दिया है? क्या यह मुसलमानों के लिए अलग देस बनाने का संदेश है?

 

सोजन्य – बीबीसी हिंदी