अलवर. कभी नियम कायदे की आड़ तो कभी किसी बहाने से प्राथमिकी दर्ज करने में आनकानी करना पुलिस की पुरानी फितरत है। अलवर पुलिस को इसी ‘फितरत को लेकर फटकार खानी पड़ी।
अलवर कलक्टर बोले-मैं हूं रेप पीडि़त बच्ची का गार्जियन, अब तो दर्ज करो एफआईआर
प्रदेशभर में मावा न बनेगा, न बिकेगा
जयपुर. हाईकोर्ट ने दीपावली पर मिलावटी घी, मावा व मिठाइयों की बिक्री की आशंका जताते खाद्य सुरक्षा आयुक्त को उनकी कानूनी शक्तियां याद दिलाई।
नहीं मिली कार तो दूल्हे ने रोकी बरात, इधर लड़की ने दूसरे से कर लिया निकाह
दुल्हन तमन्ना ने कहा- दहेज के ऐसे लालची लोगों को पुलिस सबक सिखाए ताकि फिर किसी बेटी और उसके परिवार को यह जिल्लत न सहना पड़े। निकाह से मैं खुश हूं।
सखियों ने सिले 1000 बेटियों के लिए स्कूल यूनिफॉर्म
उदयपुर। हिन्दुस्तान जिंक द्वारा चलाये जा रहे ‘सखी’ अभियान के अंतर्गत मटून की 20 सखियों ने मात्र 19 दिन में आंगनवाड़ी की बालिकाओं के लिए 1000 यूनिफार्म बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया। तकरीबन 8 घंटे रोज आकर इन महिलाओं ने हर प्रकार का कार्य जिसमें कपड़े की नपाई, कटाई, सिलाई, बटन लगाना व प्रेस करके पैकिंग करना सब शामिल रहा।
स्कूल यूनिफार्म के कार्य करने के लिए हिन्दुस्तान जिंक ने हाल ही में एक चार दिवसीय कार्यषाला का आयोजन किया था जिसमें हिन्दुस्तान जिं़क की ओर से टेªनर नियति कोठारी ने टेªनिंग दी थी। इस कार्यषाला में महिलाओं को स्कूली यूनिफार्म बनाने व्यवसायिक प्रषिक्षण दिया गया था।
इन मटून की 20 सखियों ने अपने कार्यों को आपस में बांटा। कुछ महिलाएं केवल नापा व कटिंग का कार्य करती रही। कुछ महिलाएं केवल सिलने का कार्य करती रही और कुछ महिलाओं ने बीड़ा उठाया इन बालिकाओं की यूनिफार्म को प्रेस करके पैक करने का।
हिन्दुस्तान जिंक के हेड-कार्पोरेट कम्यूनिकेषन एवं प्रोजेक्ट सखी पवन कौषिक ने बताया कि वेदान्ता फाउण्डेषन व हिन्दुस्तान जिंक की ओर से इन सभी सखियों को आज पारिश्रमिक दिया गया।
हिन्दुस्तान जिंक वेदान्ता फाउण्डेषन एवं राजस्थान सरकार ने हाल ही में समझौते के ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर हिन्दुस्तान जिंक व वेदान्ता फाउण्डेषन को 3055 आंगनवाड़ियों को गोद दिया है। इनमें से 1000 आंगनवाड़ियों के बच्चों को स्कूली यूनिफार्म दी जाएगी। इन बच्चों के लिए स्कूल यूनिफार्म बनाने का बीड़ा हिन्दुस्तान ज़ि़क के प्रोजेक्ट ‘सखी’ ने उठाया है। मटून की सखी महिलाएं बालिकाओं के लिए यूनिफार्म बना रही हैं तथा देबारी की सखी महिलाएं लड़कों की यूनिफार्म बना रही हैं।
सखी ममता, बंसती, हेमलता व इन्द्रा आदि सभी ने इस कार्य से जुड़कर प्रसन्नत व्यक्त की तथा कार्य सिखने के साथ-साथ उत्पाद बनाने की भी इस विधि की सराहना की। सखी ममता ने कहा कि कार्य सीखना अपने आप में रोचक व महत्वपूर्ण है परन्तु उसके साथ-साथ उत्पाद बनाने से रूचि और बढ़ गई है।
पवन कौषिक ने बताया कि ‘सखी’ अभियान के अंतर्गत हिन्दुस्तान जिंक विभिन्न जिलों में मार्केट के अनुसार सखियों द्वारा क्लस्टर की स्थापना कर रहा है। इन क्लस्टरों में यूनिफार्म क्लस्टर एक बड़ा क्लस्टर होगा जिसको कुछ चुनिनन्दा जिलों में स्थापित किया जाएगा।
मावली की चंदा ताईवान में बिखेरेगी हौसले की चांदनी
उदयपुर,.मावली क्षेत्र के फलीचड़ा गांव की चंदा ताइवान में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर 6 से 13 अक्टूबर तक होने वाले कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है।
दादरी कांड: अब पीडि़त परिवार को देशद्रोही साबित करने की साजिश, डीएम ने जताई नाराजगी
उदयपुर। दादरी काण्ड में लिप्त संगठनों और राजनैतिक पार्टियों की देश भर में फजीहत होने के बाद स्थानीय दलाल नुमा अखबार के जरिये नया खेल खेला जारहा है।
जिस परिवार का एक बेटा “सरताज” भारतीय वायुसेना में है, जिसके पिता “अख़लाक़” को कुछ लोगों ने साजिश के तहत गोमांस खाने की अफवाह फैला कर मार दिया, अब दलाल नुमा स्थानीय पत्रकार और अखबार के जरिये अख़लाक़ के परिवार को पाकिस्तानी बता कर देशद्रोही साबित करने की घटिया साजिश कर रहे है।
दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के दादरी कस्बे के बिसाहड़ा गांव में एक स्थानीय अखबार के द्वारा मृतक अखलाक के पाकिस्तानी संबंध बताने से दुखी पीडि़त परिवार ने डीएम से गुहार लगाई है। डीएम ने भी अखबार की रिपोर्ट पर नाराजगी जताई है।
जागरूक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीडि़त परिवार का कहना है कि उन्हें अब देशद्रोही साबित करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने इस संबंध में कुछ सबूत एसडीएम को भी दिए हैं, जिसमें पीडि़त परिवार ने बताया कि अखलाक 1988 में अपनी मौसी से मिलने पाकिस्तान गए थे और जिस कार को पाकिस्तान से लौटने के बाद खरीदने की बात कही जा रही है, वह सरताज की शादी में मिली थी।
गौरतलब है कि मंगलवार को एक स्थानीय अखबार ने खबर छापी थी कि अखलाक करीब सवा साल पहले पाकिस्तान गया था और वहां ढाई महीने रहा था। वहां से आने के बाद उसने कार खरीदी और मस्जिद में मीटिंग करने लगा था।
अखलाक के भाई ने जमील ने बताया कि इस तरह गलत सूचना देकर उन्हें देशद्रोही साबित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मंगलवार को भी इसकी शिकायत एसडीएम दादरी से की है। वहीं डीएम एन पी सिंह ने भी इस पर नाराजगी जताई है।
जमील ने एसडीएम को अखलाक के पासपोर्ट की कॉपी सौंपते हुए बताया कि वह 1988 मेंं अपनी रिश्ते की मौसी से मिलने के लिए एक बार पाकिस्तान गए थे। मौसी की मौत के बाद संबंध भी खत्म हो गए। 7 मार्च 1998 को उनका पासपोर्ट भी एक्सपायर हो गया था, जिन्हें रिन्यू नहीं कराया गया।
जमील के मुताबिक परिवार की जिस तरक्की की बात की जा रही है, वह बड़े बेटे सरताज की एयरफोर्स में नौकरी लगने के बाद थोड़ी बहुत हुई है। वहीं जिस कार की बात की जा रही है वो सरताज की शादी में मिली थी और वो उसकी पत्नी के नाम रजिस्टर्ड है।
शांति भंग करने में श्याम बाबा सहित चार गिरफ्तार
उदयपुर. सूरजपोलचौराहे पर पुलिस से उलझने पर शनिवार रात को शांतिभंग में श्याम बाबा सहित 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कार से टक्कर लगने पर स्कूटी चालकों को मुआवजा दिलाने की मांग पर पुलिस ने झगड़ना शुरू कर दिया था। एक कार और गलत दिशा से रही स्कूटी के बीच टक्कर हो गई थी। एसआरजी ग्रुप की कार ड्राइवर नरेंद्र सिंह चला रहा था। चौराहे पर स्कूटी से गलत साइड से आए दो युवक कार से भिड़ गए। दोनों युवकों ने फोन करके श्याम बाबा को बुला लिया। बाबा ने ट्रैफिक पुलिस गश्ती जवानों पर रौब झाड़ना शुरू कर दिया। सूरजपोल थाना पुलिस ने खेरादीवाड़ा, काष्ठकला मार्ग निवासी श्याम बाबा, अभिजीत खींची, ठक्कर बापा कॉलोनी निवासी यतिन कुड़िया गोपाल टेलर को गिरफ्तार कर लिया।
अस्पताल के बाहर के बैरिकेट एम्बुलेंस के लिए नहीं खुलते, जिला कलेक्टर के लिये खुल जाते है।
महाराणा भूपाल चिकित्सालय के आगे लगे बैरिकेट एम्बुलेंस और आम आदमी के लिए हमेशा बंद रहते है लेकिन जिला कलेक्टर के लिए यह सुविधा हो जाती है कि बैरिकेट तुरंत खोल कर उन्हें रास्ता दे दिया जाय। शनिवार को भी जिला कलेक्टर रोहित गुप्ता जब हॉस्पिटल में किसी कार्यक्रम के सिलसिले में गए तो ट्राफिक पुलिस कर्मियों ने तुरंत बैरिकेट्स खोल दिए लेकिन उसके तुरंत बाद घायलों को लेकर एम्बुलेंस आई उसको वही चेतक से घूम कर आना पढ़ा।
एसीबी ने अाबकारी निरीक्षक को चार लाख रु. के साथ पकड़ा
उदयपुर. एसीबी ने शनिवार को प्रतापगढ़ के आबकारी निरीक्षक चेतनलाल को 4.19 लाख रुपए के साथ पकड़ा। वे टीम को यह नहीं बता पाए कि उनके पास यह रकम कहां से आई। एसीबी इसे अवैध वसूली का मामला मान रही है। बैंक खातों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।दादरी से मुसलमानों के लिए क्या है संदेश?
अख़लाक़ की मौत जितनी डरावनी थी, उसके बाद की प्रतिक्रियाएँ भी चिंतित करने वाली हैं.
भाजपा के स्थानीय नेताओं को पुलिस की कार्रवाई पर ऐतराज़ है. उनका कहना है कि यह इरादतन क़त्ल नहीं था, इसलिए हत्या की धाराएँ न लगाकर ग़ैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए.
उनका तर्क यह है कि अख़लाक़ की हत्या की कोई पूर्व योजना न थी, वह तो ‘गोवध’ और ‘गोमांस’ खाने की ख़बर से हिंदू ग्रामीणों की धार्मिक भावनाएं भड़क उठीं. उनका मानना है कि लोगों ने ‘कुछ कड़े रूप में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं’, जिसके नतीजे में अख़लाक़ की मौत हो गई.
वे उलटे अख़लाक़ के परिवार पर गोवध और गोमांस भक्षण के लिए आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग कर रहे हैं. धमकी दी जा रही है की अगर ऐसा न किया गया तो महापंचायत की जाएगी.
‘पीड़ित ही अपराधी’
भाजपा के कुछ स्थानीय नेता कह रहे हैं कि असल मुजरिम तो ख़ुद अख़लाक़ ही था क्योंकि उसके घर गोमांस होने का शक गाँव वालों को हुआ. जो शिकार है, वही अपराधी साबित किया जा रहा है. अख़लाक़ ने अपनी मौत को दावत दी.
पुलिस ने अख़लाक़ के फ्रिज में रखे मांस को जांच के लिए लिए भेजा है की वह गोमांस तो नहीं था! मानो, यह मालूम हो जाने से इस हत्या की गंभीरता कम हो जाएगी.
गाँव में हत्या को लेकर कोई अफ़सोस नहीं दिखता.
ये हत्या प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़, गाँव के मंदिर से किए गए इस ऐलान के बाद की गई कि अख़लाक़ ने गाय काटी है और गोमांस खाया है.
पहली नज़र में ऐसा लगता है कि लोगों का ग़ुस्सा भड़का और बात हाथ से निकल गई, लेकिन ये ख़ूनी ग़ुस्सा यूँ ही नहीं भड़का है, लंबे हिन्दुत्ववादी प्रचार और मुस्लिम विरोधी ट्रेनिंग के बाद ही नफ़रत सामूहिक हिंसा में बदली है.
अब रिपोर्टरों को यह मालूम हो रहा है कि काफ़ी पहले से इस पूरे इलाक़े में एक मुस्लिम विरोधी माहौल बन रहा था. इसके पहले भी मवेशी लेकर जा रहे तीन मुसलमान व्यापारियों को गाड़ी से खींच कर मार डाला गया था. दुकान खोलने पर एक मुसलमान की पिटाई की गई थी.
मुसलमानों की छोटी-छोटी बात पर पिटाई और उन्हें बेइज्ज़त करने की घटनाओं की ख़बरें भी मिल रही हैं. इससे नतीजा यही निकलता है कि मुसलमानों को आतंकित करने की एक मुहिम-सी छेड़ी गई है.
मुज़फ़्फ़रनगर
यही पैटर्न मुज़फ़्फ़रनगर में भी देखा गया था.
जब हिंसक कांड के बाद वे किसी तरह मुक़दमे में फँस जाते हैं तो इसके लिए वे मुसलमानों को ही जवाबदेह मानते हैं. कहा जाता है, ‘अगर उन्होंने उकसाया न होता तो वे उत्तेजित नहीं होते!’ ‘हम मुसलमानों की तरह हिंसक प्रवृत्ति के नहीं हैं.’
ऐसे मुसलमानों से सहानुभूति क्यों हो जो शांतिप्रिय-सहिष्णु लोगों को क़त्ल के लिए उकसाते हैं? उन्हें यह साफ़ संदेश भी मिल जाता है कि या तो वे गाय की तरह रहें या गाँव छोड़ दें. यह मुज़फ़्फ़रनगर में हो चुका है और अटाली में भी.
अस्करी भी यही करने जा रही है. वह अपना मकान, जो पड़ोस के बिना अब घर नहीं रह गया है, बेचना चाहती हैं.
तो क्या हिंदुओं ने मुसलमानों का पड़ोसी बनने से इनकार कर दिया है? क्या यह मुसलमानों के लिए अलग देस बनाने का संदेश है?
सोजन्य – बीबीसी हिंदी

