उदयपुर मार्बल एसोसिएशन के चुनाव पर कोर्ट का स्टे – निवर्तमान अध्यक्ष पर मनमाने ढंग से चुनाव करवाने का आरोप।

A_marble_factory_in_Kishangarhउदयपुर। मार्बल एसोसिएशन के चुनाव पर कोर्ट ने स्टे लगा दिया और चुनाव प्रक्रिया को पुनः करवाने के आदेश जारी किये है। चुनाव ९ अक्टूबर को होने वाले थे लेकिन कुछ मार्बल व्यवसाइयों ने संविधान के विरातीत चुनाव होने का आरोप लगाते हुए कोर्ट की शरण ली थी जिस पर कोर्ट ने आज कार्रवाई करते हुए आदेश जारी किये।
शुक्रवार को मार्बल एसोसिएशन के चुनाव होने थे मार्बल व्यवसाइयों के एक गुट ने मोजुदा अध्यक्ष और कार्यकारणी पर संविधान के विपरीत मन माने ढंग से चुनाव कराने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में चुनाव पर रोक के लिए परिवाद दायर किया था जिस पर कोर्ट ने आज सुनवाई करते हुए मोजुदा चुनाव पर स्टे लगाते हुए पूरी चुनाव की कारवाई पुनः करवाने के निर्देश दिए है। मार्बल व्यवसाइयों ने मोजुदा अध्यक्ष रोबिन सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन्होने अपने दो साल के कार्य काल में कई काम संविधान के विपरीत किये है। और चुनाव की सम्पूर्ण प्रक्रिया एक तरफ़ा और और अपने मन माने ढंग से अपनाई जारही थी। मार्बल व्यवसाइयों ने बताया कि रोबिन सिंह की कार्य शेली और मनमाने रवय्ये से एसोसिएशन के अधिकतर व्यवसाई नाराज़ थे। उदयपुर की सुखेर अम्बेरी मार्बल मंडी राजस्थान की बड़ी मंडियों में से एक है। यहां की मार्बल एसोसिएशन में कुल ८२५ सदस्य है। कल होने वाले चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सेक्रेटरी, जॉइंट सेक्रेटरी, कोषाध्यक्ष और आठ कार्यकारणी सदस्यों के चुनाव होने थे। अध्यक्ष पद के लिए निवर्तमान अध्यक्ष रोबिन सिंह, पंकज गंगावत और पूर्व अध्यक्ष रह चुके महिपाल सिंह ने नामांकन दाखिल किया था जिसमे से महिपाल सिंह का फ़ार्म निरस्त हो गया था। अगले चुनाव की तारीख अब की जानकारी

सिविल वॉर करवाना चाहती है मोदी सरकार : अाबिद सुरती

aabid suratiउदयपुर. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबद्ध नेशनल बुक ट्रस्ट के राष्ट्रीय पुस्तक मेले में बुधवार को आए मशहूर कार्टूनिस्ट, पेंटर और लेखक आबिद सुरती कहा कि मोदी सरकार देश में सिविल वॉर करवाना चाहती है। इसके पीछे मानसिकता यह है कि लोगों की एकता टूटेगी तो सबसे ज्यादा फायदा सांप्रदायिक ताकतों को होगा। यह उनकी सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। मोदी सरकार दिखावे के लिए विकास की बात करती है और उसने पीछे के रास्ते से अल्पसंख्यकों के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा है।
नेशनल बुक ट्रस्ट के निमंत्रण पर आए सुरती ने कहा : दिल्ली में चर्च तोड़े गए। गोमांस की अफवाहें फैलाकर लोगों को मारा जा रहा है। आजाद विचारों और असहमति रखने वाले लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। अल्पसंख्यकों पर जिस तरह से हमले हो रहे हैं, उन पर लोग कब तक चुप रहेंगेω एक दिन उनका संयम टूट जाएगा और आपस में लड़ बैठेंगे। देश में जो हो रहा है उसका कोई इलाज नहीं, क्योंकि लोगों ने ही ऐसी सरकार चुनी है और अब उन्हें भुगतना पड़ेगा।
विवेकानंद पर बात आज : गुरुवार को पुस्तक मेले में सुबह 11 बजे आबिद सुरती और देवेंद्र मेवाड़ी जुगलबंदी कार्यक्रम में बच्चों से बातचीत करेंगे। 2 बजे स्वामी विवेकानंद के जीवन पर आधारित कहानियों पर कार्यशाला, जिसमें शेखर सरकार द्विजेंद्र कुमार प्रतिभागी होंगे।
 नयनतारा सहगल और अशोक वाजपेयी के बाद अब आबिद सुरती ने साधा कट्टरता पर मोदी की चुप्पी पर निशाना
मुस्लिम कट्टरता पर भी चोट करते रहे हैं सुरती 
सुरती ने कहा कि मीडिया मौजूदा सरकार के खिलाफ असरदार भूमिका नहीं निभा सकता, क्योंकि सरकार ने इसे कई तरह से गिरफ्त में ले रखा है। सुरती मशहूर पत्रिका धर्मयुग में अपने कार्टून किरदार ढब्बूजी के लिए प्रसिद्ध हैं। यह सीरीज 30 साल तक लगातार छपती रही। इसके प्रशंसकों में अटल बिहारी वाजपेयी भी रहे हैं। सुरती मुस्लिम कट्टरता पर भी चोट करते रहे हैं। उनकी किताब ‘द ब्लैक बुक’ पर विवाद छिड़ने के बाद उन्हें भारत का सलमान रुश्दी कहा जाने लगा।
 पुरस्कार लौटाना मोदी सरकार पर तमाचा
कलबुर्गी की हत्या के विरोध में पुरस्कार लौटाने वाले लेखकों की लाइन लग गई है। नेहरू की भांजी नयन तारा सहगल के साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने के बाद बुधवार को एक अंग्रेजी अखबार ने अपने पहले पन्ने पर शीर्षक दिया है कि ‘सरकार के गाल पर एक और तमाचा’। गौरतलब है कि बुधवार को कलबुर्गी की हत्या और सांप्रदायिक घटनाओं में वृद्धि का हवाला देकर मशहूर लेखक अशोक वाजपेयी ने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिया है। इससे पहले लेखक उदयप्रकाश भी पुरस्कार लौटा चुके हैं। बीते दिनों कन्नड़ साहित्य परिषद् को भी छह लेखकों ने अपने पुरस्कार लौटाये।
सुरती ने ‘धर्मयुग’ को मुसलमान बना दिया
पुस्तक मेले में ‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम में सुरती ने एक दिलचस्प संस्मरण सुनाया। उन्होंने बताया कि धर्मयुग पत्रिका में ढब्बूजी कार्टून किरदार की लोकप्रियता इतनी थी कि लोगों ने मैगजीन को पीछे से पढ़ना शुरू कर दिया। सुरती बोले- एक बार संपादक धर्मवीर भारती पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मेरा परिचय कराते हुए बोले कि सुरती ने धर्मयुग पत्रिका को मुसलमान बना दिया है, क्योंकि अब लोग इसे उल्टा पढ़ते हैं। आपको ध्यान होगा मुस्लिम ग्रंथ पीछे से आगे की ओर पढ़े जाते हैं। यह सुनते ही अटल बिहारी ठहाके लगाकर हंस पड़े।
सोर्स – दैनिक भास्कर

झूठा है गैस सब्सिडी से 12,700 करोड़ रुपए की बचत का दावा?

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gas-cylinder-नई दिल्ली। घरेलू गैस सब्सिडी के सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर से सरकार को 12 हजार 7 सौ करोड़ रुपए की बचत के सरकार के दावे पर एक एक रिसर्च संस्थान ने सवाल उठाए हैं। संस्थान का कहना है कि सब्सिडी के खातों में सीधे हस्तांतरण से होने वाली बचत का सरकार का अनुमान ओवरऐस्टीमेट जैसा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सस्टेनैबल डवलपमेंट (आईआईएसडी) के मुताबिक 2014-15 में इस स्कीम के लागू होने के बाद सरकार का 12,700 करोड़ रुपए बचत का दावा गलत है उसे इसके मुकाबले महज 143 करोड़ रुपए की बचत हुई है।

स्टडी के लेखक कीरन क्लार्क का कहना है कि हमारी स्टडी से यह पता चलता है कि पिछले साल सब्सिडी के नकद हस्तांतरण से होने वाली बचत का अनुमान बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया आंकड़ा है।

सरकार की ओर से इस बचत के बारे में कोई आधिकारिक दस्तावेज जारी नहीं किया गया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन कई बार यह दोहरा चुके हैं।

एनडीए सरकार ने नवंबर मध्य 2014 में देश में 54 जिलोंं में एलपीजी गैस सब्सिडी के नकद हस्तांतरण की योजना शुरु की थी।

इसके बाद जनवरी 2015 में इसे देश के सभी जिलों में लागू किया गया। सबसे पहले यूपीए सरकार ने यह योजना शुरु की थी, लेकिन फरवरी 2014 में इस योजना को निलंबित कर दिया गया था।

आईआईएसडी ने इस योजना को दुनिया की सबसे बड़ी नकद सब्सिडी हस्तांतरण योजना बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक अरविंद सुब्रमण्यन का कहना है कि 12,700 करोड़ की बचत 2014-15 के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि हम नहीं जानते कि इस साल कुल कितनी एलपीजी गैस का उपभोग होगा।

पराए मर्द के साथ एक रात बिताना गलत नहीं: हाईकोर्ट

symbolic-image-relationship-55d73324b6bf6_lअहमदाबाद। गुजरात हाईकोर्ट ने विवाहेतर संबंधों को लेकर एक अनोखा फैसला दिया है। संयोगवश पराए मर्द के साथ एक रात बिताना गलत नहीं लेकिन जानबूझकर लगातार सेक्स संबंध बनाना व्यभिचार है।

उत्तर गुजरात के सिद्धपुर के कॉरपोरेट घराने की बहू ने पति से भरणपोषण की मांग के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश जेबी पारडीवाला ने कहा कि संयोगवश पराए मर्द के साथ सेक्स संबंध बनाना एक भूल है जिसे माफ किया जा सकता है। 
लेकिन इरादा पूर्वक प्रेमी के साथ लगातार यौन संबंध रखना व्यभिचार है जिसे माफ नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि महिला गर्भावस्था में भी प्रेमी के साथ यौन संबंध बना रखे थे। कोर्ट ने महिला को भरणपोषण नहीं देने के निचली अदालत व पाटण सेशंस कोर्ट के फैसले को बहाल रखा।
बच्चे के लिए भरण पोषण तय
अदालत ने उसके बच्चे के लिए मासिक एक हजार रुपये भरणपोषण तय किया जिसे समयबद्ध तरीके से बढ़ाते रहने के निर्देश दिए। आधुनिक समाज में बढ़ रहे विवाहेतर संबंधों के मामले में अदालत का यह फैसला दर्पण दिखाने जैसा है, आधुनिकता की आड़ में भी अनैतिक संबंध को जायज नहीं ठहराया जा सकता।

अलवर कलक्टर बोले-मैं हूं रेप पीडि़त बच्ची का गार्जियन, अब तो दर्ज करो एफआईआर

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hands-and-feet-tied-and-rape-of-minor-5609573d18dbd_lअलवर. कभी नियम कायदे की आड़ तो कभी किसी बहाने से प्राथमिकी दर्ज करने में आनकानी करना पुलिस की पुरानी फितरत है। अलवर पुलिस को इसी ‘फितरत को लेकर फटकार खानी पड़ी।

 हुआ यूं कि अलवर कलक्टर मुक्तानंद अग्रवाल बुधवार रात तिजारा में दुष्कर्म की शिकार बच्ची (5) के हाल जानने यहां जनाना अस्पताल पहुंचे। कलक्टर को पता चला कि पीडि़ता की पहचान नहीं होने के कारण पुलिस ने मामला ही दर्ज नहीं किया। 
 इस पर कलक्टर ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा, मैं हूं बच्ची का गार्जियन, तुरंत एफआईआर दर्ज करो। साथ ही डॉक्टरों को बच्ची की बेहतर इलाज व देखभाल करने की हिदायत दी। साथ ही चेताया-मैं कभी भी बच्ची की तबीयत जानने आ सकता हूं। बोले-बच्ची की देखरेख में एक कर्मचारी लगाया जाए।
 तिजारा पुलिस के अनुसार, बुधवार दोपहर 3.30 बजे किशनगढ़बास-कोटकासिम रोड पर गहनकर गांव के पास ग्रामीणों ने सड़क किनारे खून से लथपथ पांच वर्षीय बच्ची को अचेत देखा।
 सूचना पर पहुंची पुलिस ने बच्ची को तिजारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां हालत बिगडऩे पर उसे अलवर के जनाना अस्पताल रैफर कर दिया है। 
 जनाना अस्पताल की डॉ. कल्पना माथुर ने कहा, पीडि़ता की जांच करने वाली डॉक्टर ने बताया कि बच्ची के शरीर पर चोट के निशान हैं। गुप्त अंगों पर भी चोट है। इससे साफ है कि पीडि़ता के साथ दुष्कर्म हुआ है।
 केवल दादा-पिता का नाम बता पाई
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार होश में आने पर बच्ची काफी सदमे में थी और कुछ भी बताने में असमर्थ थी। प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची पुलिस को केवल अपने पिता व दादा का नाम ही बता पाई है लेकिन उसके परिजनों का पता नहीं चला। पुलिस दुष्कर्म को अंजाम देने वाले और बच्ची के परिजनों का पता लगा रही है।

प्रदेशभर में मावा न बनेगा, न बिकेगा

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mawaजयपुर. हाईकोर्ट ने दीपावली पर मिलावटी घी, मावा व मिठाइयों की बिक्री की आशंका जताते खाद्य सुरक्षा आयुक्त को उनकी कानूनी शक्तियां याद दिलाई।

इस पर आयुक्त ने बुधवार को हाईकोर्ट में कहा, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत मावे की बिक्री रोकने का आदेश दे दिया गया है।
कोर्ट ने तथ्यात्मक रिपोर्ट व रोक की अधिसूचना रिकॉर्ड पर लेकर सुनवाई 17 नवंबर तक टाल दी। इधर, चिकित्सा विभाग ने बाजार में उपलब्ध मावे के माल को नष्ट करवाने की तैयारी भी कर ली है।
राजू सैनी की याचिका पर बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायाधीश महेशचंद्र शर्मा ने चिंता जताई।
दिवाली…
कहा राज्य में दिन-प्रतिदिन मिलावट के मामले बढ़ रहे हैं। घी, मावा व उससे निर्मित मिठाइयों में एेसा ज्यादा रहा है और दीपावली नजदीक है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी शशिकांत शर्मा से इसे रोकने के उपाय पूछे। 
शर्मा बोले, खाद्य सुरक्षा आयुक्त व निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. बीआर मीणा ही इस पर कार्रवाई कर सकते हैं, जो कोर्ट में हाजिर हैं। याचिका में घी के नमूने के बारे में जयपुर व प्रदेश के बाहर की एक प्रयोगशाला की अलग-अलग रिपोर्ट आने का मुद्दा उठाया है।
यूं निकला रास्ता
कोर्ट ने मीणा से पूछा-जनता की सेहत पर मिलावट का बुरा असर रोकने को क्या कर सकते हैं। मीणा ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 30 के तहत शक्तियां बताई। 
कहा-इस धारा के तहत शहर के चार नामी प्रतिष्ठान से जांच के नमूने लिए हैं। नमूनों की रिपोर्ट आने में 15 दिन लगेंगे। इसी कानून के तहत प्रदेश में मावा व मावे से निर्मित पदार्थोंे के निर्माण व विक्रय रोकने के आदेश जारी कर दिए। 
यह कहती धारा 30 
आयुक्त जनहित में खाद्य पदार्थों का किसी क्षेत्र विशेष में निर्माण, विक्रय व भंडारण पर पाबंदी लगा सकता है। निर्माता कंपनियों का निरीक्षण करा कता है। 
खाद्य सुरक्षा से जुडे़ कर्मियों को कार्रवाई के लिए प्रशिक्षण दिलाया जाए। दोषियों पर कार्रवाई के लिए अभियोजन की स्वीकृति दी जाए। आयुक्त जरूरत पडऩे पर अपने प्रतिनिधि नियुक्त कर सकता है।
चिथवाड़ी और चौमूंं बड़े केन्द्र
जयपुर के चिथवाड़ी व चौमूं मिलावटी मावे बनाने के बड़े केंद्र हैं। यहां कार्रवाई भी कई गई है। लेकिन कुछ केंद्र एेसे भी हैं, जिन तक विभाग पहुंच ही नहीं पाया है। रोक के बाद बाजार में चोरी छिपे मावे की बिक्री की आशंका बढ़ गई है। 
01 लाख कारोबारी हैं प्रदेश में मावे से जुड़े
20 हजार जयपुर में
 गुरुवार से मावे की बिक्री के खिलाफ कार्रवाई शुरू करेंगे। सभी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों निर्देश दे दिए हैं।
बीआर मीणा, आयुक्त खाद्य सुरक्षा
पत्रिका व्यू त्योहारी ‘खेलÓ!
दुनिया के लिए त्योहारी मौसम नवरात्र से शुरू हो रहा है, लेकिन सरकारी अधिकारियों का त्योहार तो शुरू हो गया। मिठाई वालों के सैंपल लिए जाने लगे। मावे के निर्माण व बिक्री पर रोक लगा दी गई। 
हालांकि मिलावटियों पर कार्रवाई कब होगी या पहले कब हुई? यह बताने वाला कोई नहीं। कानून में ही इतनी गलियां छोड़ रखी हैं कि ‘भाई त्योहार तुम भी मनाओ, हमारे त्योहार का इंतजाम भी कर दो।Ó हम भी खुश तुम भी खुश! जनता जाए भाड़ में। 
हाईकोर्ट मिलावट पर 10 साल से चिंता जता रहा है और राजस्थान पत्रिका के अभियानों पर मिलावटियों के खिलाफ दो बार प्रसंज्ञान भी ले चुका है।
त्योहारी…
इस बार अधिकारियों ने कोर्ट को ही ढाल बना लिया। दिन में अधिकारियों ने हाईकोर्ट की सख्ती पर मावे पर रोक लगा दी, शाम को वही सफाई देते दिखे कि कोर्ट के दवाब में पाबंदी लगानी पड़ी। 4 बड़े व्यापारियों के यहां से सैंपल उठाए ताकि थड़ी वाले तक संदेश पहुंच जाए कि ‘त्योहारÓ आ रहा है।
 कानून इतना लचर की जो रिपोर्ट खाद्य अधिकारियों के अनुसार आधे से एक घंटे में आ सकती है उसके लिए 40 दिन की अवधि निर्धारित है। 1954 के खाद्य मिलावट निषेध कानून की जगह 2006 में नया खाद्य सुरक्षा कानून आ गया, लेकिन यह प्रावधान जस का तस रहा। सिर्फ जुर्माना बढ़ा दिया गया। ताकि उसके आधार पर ‘खर्चाÓ बढ़ाया जा सके। 
कोर्ट भी कानून की धाराओं का हवाला दे एक तरह से अपने दायित्वों से मुक्ति पा जाते हैं। यदि मिलावट सिद्ध हो जाए तो व्यापारी कोर्ट से यह आदेश करा लेते हैं कि जांच पर भरोसा नहीं है, कलकत्ता या गाजियाबाद में जांच हो। 
मिलावट करना क्या किसी आतंकवाद से कम है। इससे तो हजारों की जान पर बन आती है। जब तक सरकार वाकई सख्त कानून नहीं बनाएगी, रिपोर्ट हाथों हाथ नहीं आएगी और मिलावटियों को जेल नहीं होगी। तब तक यूं ही हर साल ‘त्योहारी खेलÓ चलता रहेगा और प्रदूषित खाद्य पदार्थों के जरिए मिलावटिये और इनके संरक्षक तिजोरियां भरते रहेंगे। 

नहीं मिली कार तो दूल्हे ने रोकी बरात, इधर लड़की ने दूसरे से कर लिया निकाह

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इंदौर. एक लड़की की शादी देवास के लड़के से तय थी। मंगलवार को बरात आनी थी, लेकिन रात को दूल्हा दहेज में कार की मांग को लेकर अड़ गया और बरात लेकर नहीं आया। रात 12 बजे लड़की के पिता ने थाने पर शिकायत कर दी। उधर, रिश्तेदारी में ही एक परिवार को शादी के लिए तैयार किया और आधे घंटे में गम का माहौल खुशी में बदल गया। रात में ही निकाह हो गया।
 अब्दुल हफीज शाह ने बेटी तमन्ना की शादी देवास के अजीज शाह के बेटे फरीद से तय की थी। 14 सितंबर को सगाई हो गई और 6 अक्टूबर का दिन शादी का तय हुआ। ईद के बाद से फरीद कार की मांग करता रहा। पिता ने बाइक का इंतजाम कर लिया। दूल्हे ने कहा- कार नहीं मिलेगी तो बरात लेकर नहीं आऊंगा। रात 11 बजे तक लड़का देवास में ही बरात रोके बैठा रहा। बोलता रहा कि कार दो या चार लाख रुपए, वरना रिश्ता भूल जाओ। गार्डन में मेहमान आ गए, पकवान सज गए, लेकिन मायूसी छाई रही। आखिरकार रात 11.30 बजे हफीस ने खजराना थाने पर फरीद की शिकायत कर दी।
आधे घंटे में सारी बातें पक्की हो गई
मायूसी के माहौल के बीच हफीज के छोटे भाई हनीफ शाह ने अपने ससुराल पक्ष से रमजान शाह को तैयार किया। इसके बाद रमजान ने अपने बेटे शरीफ से बात की और तमन्ना का निकाह तय हुआ। हाथोंहाथ सारी बातें पक्की हो गईं और आधे घंटे में काजी को बुलाकर निकाह पढ़वा दिया गया। शरीफ ने बताया उनकी तरफ से तमन्ना से रिश्ते की बात पहले हो गई थी, लेकिन किन्हीं कारणों से रिश्ता हो नहीं सका। वे तो पहले से इस रिश्ते के लिए तैयार थे।
कानून ऐसे लालची को सबक सिखाए 
दुल्हन तमन्ना ने कहा- दहेज के ऐसे लालची लोगों को पुलिस सबक सिखाए ताकि फिर किसी बेटी और उसके परिवार को यह जिल्लत न सहना पड़े। निकाह से मैं खुश हूं।

सखियों ने सिले 1000 बेटियों के लिए स्कूल यूनिफॉर्म

Matoon Sakhi Uniform

 

उदयपुर। हिन्दुस्तान जिंक द्वारा चलाये जा रहे ‘सखी’ अभियान के अंतर्गत मटून की 20 सखियों ने मात्र 19 दिन में आंगनवाड़ी की बालिकाओं के लिए 1000 यूनिफार्म बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया। तकरीबन 8 घंटे रोज आकर इन महिलाओं ने हर प्रकार का कार्य जिसमें कपड़े की नपाई, कटाई, सिलाई, बटन लगाना व प्रेस करके पैकिंग करना सब शामिल रहा।
स्कूल यूनिफार्म के कार्य करने के लिए हिन्दुस्तान जिंक ने हाल ही में एक चार दिवसीय कार्यषाला का आयोजन किया था जिसमें हिन्दुस्तान जिं़क की ओर से टेªनर नियति कोठारी ने टेªनिंग दी थी। इस कार्यषाला में महिलाओं को स्कूली यूनिफार्म बनाने व्यवसायिक प्रषिक्षण दिया गया था।
इन मटून की 20 सखियों ने अपने कार्यों को आपस में बांटा। कुछ महिलाएं केवल नापा व कटिंग का कार्य करती रही। कुछ महिलाएं केवल सिलने का कार्य करती रही और कुछ महिलाओं ने बीड़ा उठाया इन बालिकाओं की यूनिफार्म को प्रेस करके पैक करने का।
हिन्दुस्तान जिंक के हेड-कार्पोरेट कम्यूनिकेषन एवं प्रोजेक्ट सखी पवन कौषिक ने बताया कि वेदान्ता फाउण्डेषन व हिन्दुस्तान जिंक की ओर से इन सभी सखियों को आज पारिश्रमिक दिया गया।
हिन्दुस्तान जिंक वेदान्ता फाउण्डेषन एवं राजस्थान सरकार ने हाल ही में समझौते के ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर हिन्दुस्तान जिंक व वेदान्ता फाउण्डेषन को 3055 आंगनवाड़ियों को गोद दिया है। इनमें से 1000 आंगनवाड़ियों के बच्चों को स्कूली यूनिफार्म दी जाएगी। इन बच्चों के लिए स्कूल यूनिफार्म बनाने का बीड़ा हिन्दुस्तान ज़ि़क के प्रोजेक्ट ‘सखी’ ने उठाया है। मटून की सखी महिलाएं बालिकाओं के लिए यूनिफार्म बना रही हैं तथा देबारी की सखी महिलाएं लड़कों की यूनिफार्म बना रही हैं।

सखी ममता, बंसती, हेमलता व इन्द्रा आदि सभी ने इस कार्य से जुड़कर प्रसन्नत व्यक्त की तथा कार्य सिखने के साथ-साथ उत्पाद बनाने की भी इस विधि की सराहना की। सखी ममता ने कहा कि कार्य सीखना अपने आप में रोचक व महत्वपूर्ण है परन्तु उसके साथ-साथ उत्पाद बनाने से रूचि और बढ़ गई है।

पवन कौषिक ने बताया कि ‘सखी’ अभियान के अंतर्गत हिन्दुस्तान जिंक विभिन्न जिलों में मार्केट के अनुसार सखियों द्वारा क्लस्टर की स्थापना कर रहा है। इन क्लस्टरों में यूनिफार्म क्लस्टर एक बड़ा क्लस्टर होगा जिसको कुछ चुनिनन्दा जिलों में स्थापित किया जाएगा।

मावली की चंदा ताईवान में बिखेरेगी हौसले की चांदनी

chandaniउदयपुर,.मावली क्षेत्र के फलीचड़ा गांव की चंदा ताइवान में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर 6 से 13 अक्टूबर तक होने वाले कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है।

चंदा वहां एशियाई बालिकाओं में भारत की एम्बेसेडर के रूप में बाल विवाह, बालिका शिक्षा आदि मुद्दों पर बात रखने के साथ ही अपने जीवन के संघर्ष की दास्तां भी बताएगी।
गौरतलब है कि ताइवान कीद गार्डन ऑफ होप फाउंडेशन की ओर से एशियन गर्ल कैम्पेन चलाया जा रहा है। इसके तहत नेपाल, बांग्लादेश, थाइलैंड, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन से एक-एक बालिका को एम्बेसेडर के रूप में चुना गया है।

दादरी कांड: अब पीडि़त परिवार को देशद्रोही साबित करने की साजिश, डीएम ने जताई नाराजगी

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dadri-mos-उदयपुर। दादरी काण्ड में लिप्त संगठनों और राजनैतिक पार्टियों की देश भर में फजीहत होने के बाद स्थानीय दलाल नुमा अखबार के जरिये नया खेल खेला जारहा है।
जिस परिवार का एक बेटा “सरताज” भारतीय वायुसेना में है, जिसके पिता “अख़लाक़” को कुछ लोगों ने साजिश के तहत गोमांस खाने की अफवाह फैला कर मार दिया, अब दलाल नुमा स्थानीय पत्रकार और अखबार के जरिये अख़लाक़ के परिवार को पाकिस्तानी बता कर देशद्रोही साबित करने की घटिया साजिश कर रहे है।
दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के दादरी कस्बे के बिसाहड़ा गांव में एक स्थानीय अखबार के द्वारा मृतक अखलाक के पाकिस्तानी संबंध बताने से दुखी पीडि़त परिवार ने डीएम से गुहार लगाई है। डीएम ने भी अखबार की रिपोर्ट पर नाराजगी जताई है।
जागरूक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीडि़त परिवार का कहना है कि उन्हें अब देशद्रोही साबित करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने इस संबंध में कुछ सबूत एसडीएम को भी दिए हैं, जिसमें पीडि़त परिवार ने बताया कि अखलाक 1988 में अपनी मौसी से मिलने पाकिस्तान गए थे और जिस कार को पाकिस्तान से लौटने के बाद खरीदने की बात कही जा रही है, वह सरताज की शादी में मिली थी।
गौरतलब है कि मंगलवार को एक स्थानीय अखबार ने खबर छापी थी कि अखलाक करीब सवा साल पहले पाकिस्तान गया था और वहां ढाई महीने रहा था। वहां से आने के बाद उसने कार खरीदी और मस्जिद में मीटिंग करने लगा था।
अखलाक के भाई ने जमील ने बताया कि इस तरह गलत सूचना देकर उन्हें देशद्रोही साबित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मंगलवार को भी इसकी शिकायत एसडीएम दादरी से की है। वहीं डीएम एन पी सिंह ने भी इस पर नाराजगी जताई है।
जमील ने एसडीएम को अखलाक के पासपोर्ट की कॉपी सौंपते हुए बताया कि वह 1988 मेंं अपनी रिश्ते की मौसी से मिलने के लिए एक बार पाकिस्तान गए थे। मौसी की मौत के बाद संबंध भी खत्म हो गए। 7 मार्च 1998 को उनका पासपोर्ट भी एक्सपायर हो गया था, जिन्हें रिन्यू नहीं कराया गया।
जमील के मुताबिक परिवार की जिस तरक्की की बात की जा रही है, वह बड़े बेटे सरताज की एयरफोर्स में नौकरी लगने के बाद थोड़ी बहुत हुई है। वहीं जिस कार की बात की जा रही है वो सरताज की शादी में मिली थी और वो उसकी पत्नी के नाम रजिस्टर्ड है।