शांति भंग करने में श्याम बाबा सहित चार गिरफ्तार

unnamed (2)उदयपुर. सूरजपोलचौराहे पर पुलिस से उलझने पर शनिवार रात को शांतिभंग में श्याम बाबा सहित 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कार से टक्कर लगने पर स्कूटी चालकों को मुआवजा दिलाने की मांग पर पुलिस ने झगड़ना शुरू कर दिया था। एक कार और गलत दिशा से रही स्कूटी के बीच टक्कर हो गई थी। एसआरजी ग्रुप की कार ड्राइवर नरेंद्र सिंह चला रहा था। चौराहे पर स्कूटी से गलत साइड से आए दो युवक कार से भिड़ गए। दोनों युवकों ने फोन करके श्याम बाबा को बुला लिया। बाबा ने ट्रैफिक पुलिस गश्ती जवानों पर रौब झाड़ना शुरू कर दिया। सूरजपोल थाना पुलिस ने खेरादीवाड़ा, काष्ठकला मार्ग निवासी श्याम बाबा, अभिजीत खींची, ठक्कर बापा कॉलोनी निवासी यतिन कुड़िया गोपाल टेलर को गिरफ्तार कर लिया।

अस्पताल के बाहर के बैरिकेट एम्बुलेंस के लिए नहीं खुलते, जिला कलेक्टर के लिये खुल जाते है।

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महाराणा भूपाल चिकित्सालय के आगे लगे बैरिकेट एम्बुलेंस और आम आदमी के लिए हमेशा बंद रहते है लेकिन जिला कलेक्टर के लिए यह सुविधा हो जाती है कि बैरिकेट तुरंत खोल कर उन्हें रास्ता दे दिया जाय। शनिवार को भी जिला कलेक्टर रोहित गुप्ता जब हॉस्पिटल में किसी कार्यक्रम के सिलसिले में गए तो ट्राफिक पुलिस कर्मियों ने तुरंत बैरिकेट्स खोल दिए लेकिन उसके तुरंत बाद घायलों को लेकर एम्बुलेंस आई उसको वही चेतक से घूम कर  आना पढ़ा।

एसीबी ने अाबकारी निरीक्षक को चार लाख रु. के साथ पकड़ा

1_1443916954उदयपुर. एसीबी ने शनिवार को प्रतापगढ़ के आबकारी निरीक्षक चेतनलाल को 4.19 लाख रुपए के साथ पकड़ा। वे टीम को यह नहीं बता पाए कि उनके पास यह रकम कहां से आई। एसीबी इसे अवैध वसूली का मामला मान रही है। बैंक खातों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
चेतनलाल को दोपहर डेढ़ बजे भीलवाड़ा-चित्तौड़गढ़ मार्ग पर जोजरों का खेड़ा टोल प्लाजा के पास पकड़ा गया। उसकी कार की तलाशी में यह रकम मिली। पहले तो चेतन ने खुद का नाम-पता भी टीम को नहीं बताया, सख्ती से पूछताछ के बाद उसने अपना सही परिचय दिया। एसीबी आबकारी निरीक्षक चेतनलाल को अपने साथ उदयपुर ले गई है।

दादरी से मुसलमानों के लिए क्या है संदेश?

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अख़लाक़ की मौत जितनी डरावनी थी, उसके बाद की प्रतिक्रियाएँ भी चिंतित करने वाली हैं.

भाजपा के स्थानीय नेताओं को पुलिस की कार्रवाई पर ऐतराज़ है. उनका कहना है कि यह इरादतन क़त्ल नहीं था, इसलिए हत्या की धाराएँ न लगाकर ग़ैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए.

उनका तर्क यह है कि अख़लाक़ की हत्या की कोई पूर्व योजना न थी, वह तो ‘गोवध’ और ‘गोमांस’ खाने की ख़बर से हिंदू ग्रामीणों की धार्मिक भावनाएं भड़क उठीं. उनका मानना है कि लोगों ने ‘कुछ कड़े रूप में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं’, जिसके नतीजे में अख़लाक़ की मौत हो गई.

वे उलटे अख़लाक़ के परिवार पर गोवध और गोमांस भक्षण के लिए आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग कर रहे हैं. धमकी दी जा रही है की अगर ऐसा न किया गया तो महापंचायत की जाएगी.

‘पीड़ित ही अपराधी’

 

भाजपा के कुछ स्थानीय नेता कह रहे हैं कि असल मुजरिम तो ख़ुद अख़लाक़ ही था क्योंकि उसके घर गोमांस होने का शक गाँव वालों को हुआ. जो शिकार है, वही अपराधी साबित किया जा रहा है. अख़लाक़ ने अपनी मौत को दावत दी.

पुलिस ने अख़लाक़ के फ्रिज में रखे मांस को जांच के लिए लिए भेजा है की वह गोमांस तो नहीं था! मानो, यह मालूम हो जाने से इस हत्या की गंभीरता कम हो जाएगी.

गाँव में हत्या को लेकर कोई अफ़सोस नहीं दिखता.

ये हत्या प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़, गाँव के मंदिर से किए गए इस ऐलान के बाद की गई कि अख़लाक़ ने गाय काटी है और गोमांस खाया है.

पहली नज़र में ऐसा लगता है कि लोगों का ग़ुस्सा भड़का और बात हाथ से निकल गई, लेकिन ये ख़ूनी ग़ुस्सा यूँ ही नहीं भड़का है, लंबे हिन्दुत्ववादी प्रचार और मुस्लिम विरोधी ट्रेनिंग के बाद ही नफ़रत सामूहिक हिंसा में बदली है.

अब रिपोर्टरों को यह मालूम हो रहा है कि काफ़ी पहले से इस पूरे इलाक़े में एक मुस्लिम विरोधी माहौल बन रहा था. इसके पहले भी मवेशी लेकर जा रहे तीन मुसलमान व्यापारियों को गाड़ी से खींच कर मार डाला गया था. दुकान खोलने पर एक मुसलमान की पिटाई की गई थी.

मुसलमानों की छोटी-छोटी बात पर पिटाई और उन्हें बेइज्ज़त करने की घटनाओं की ख़बरें भी मिल रही हैं. इससे नतीजा यही निकलता है कि मुसलमानों को आतंकित करने की एक मुहिम-सी छेड़ी गई है.

मुज़फ़्फ़रनगर

 

यही पैटर्न मुज़फ़्फ़रनगर में भी देखा गया था.

जब हिंसक कांड के बाद वे किसी तरह मुक़दमे में फँस जाते हैं तो इसके लिए वे मुसलमानों को ही जवाबदेह मानते हैं. कहा जाता है, ‘अगर उन्होंने उकसाया न होता तो वे उत्तेजित नहीं होते!’ ‘हम मुसलमानों की तरह हिंसक प्रवृत्ति के नहीं हैं.’

ऐसे मुसलमानों से सहानुभूति क्यों हो जो शांतिप्रिय-सहिष्णु लोगों को क़त्ल के लिए उकसाते हैं? उन्हें यह साफ़ संदेश भी मिल जाता है कि या तो वे गाय की तरह रहें या गाँव छोड़ दें. यह मुज़फ़्फ़रनगर में हो चुका है और अटाली में भी.

अस्करी भी यही करने जा रही है. वह अपना मकान, जो पड़ोस के बिना अब घर नहीं रह गया है, बेचना चाहती हैं.

तो क्या हिंदुओं ने मुसलमानों का पड़ोसी बनने से इनकार कर दिया है? क्या यह मुसलमानों के लिए अलग देस बनाने का संदेश है?

 

सोजन्य – बीबीसी हिंदी

दादरी हत्याकांड दुनिया भर में सुर्ख़ियों में

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अरब भाषा के टीवी चैनल अल एलन की वेबसाइट पर ख़बर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया.

दादरी में गोमांस खाने की अफ़वाह पर एक मुसलमान की पीट-पीटकर हत्या की ख़बर आने के बाद से ही ट्विटर पर #internationalshame यानी अंतरराष्ट्रीय शर्म हैशटैग ट्रेंड करने लगा.

मर्डर ओवर मील (खाने के लिए हत्या) हैशटैग भी ट्रेंड कर रहा था.

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अल जज़ीरा ने अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं के अपने वेब संस्करणों में ख़बर को प्रकाशित किया.

अंग्रेज़ी प्रेस के तमाम बड़े अंतरराष्ट्रीय अख़बारों के साथ-साथ विश्व भर की भाषाओं में भी इस हत्याकांड को कवर किया गया.

अल मिस्र अल योम

 

मिस्र के अख़बार अल मिस्र अल योम की वेबसाइट ने ख़बर के साथ भारतीय तिरंगे की तस्वीर लगाई.

अंग्रेज़ी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी अख़लाक़ की मौत की ख़बर प्रकाशित की. साथ ही वाइस न्यूज़, हफ़िग्टन पोस्ट, टाइम पत्रिका समेत तमाम प्रमुख अंग्रेज़ी वेबसाइटों ने दादरी हत्याकांड की ख़बर को जगह दी.

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Image captionन्यू यॉर्क टाइम्स ने गाय की हत्या की अफ़वाह पर मुसलमान की हत्या बताया.

सभी अंग्रेज़ी वेबसाइटों ने इसे हिंदू भीड़ के हाथों एक मुसलमान की हत्या बताया.

आयरलैंड का अख़बार आइरिश टाइम्सImage copyrightOther
Image captionआयरलैंड के अख़बार आइरिश टाइम्स ने सड़क पर टहलती गाय की तस्वीर के साथ ये ख़बर प्रकाशित की.

यही नहीं दुनिया भर की कई भाषाओं के प्रकाशनों में भी इस ख़बर को जगह दी गई.

ऊरूग्वे के स्पेनिश भाषी समाचार पत्रों में भी हिंदू भीड़ के हाथों एक मुसलमान की हत्या की इस ख़बर को जगह दी गई.

योनहेप न्यूज़Image copyrightOther
Image captionदक्षिण कोरिया की सबसे बड़ी समाचार सेवा योनहेप न्यूज़ पर भी ये ख़बर प्रकाशित हुई.
जापानी भाषाImage copyrightOther
Image captionजापान की सरकारी समाचार सेवा एनएचके समेत प्रमुख जापानी भाषी वेबसाइटों पर भी भारत की इस ख़बर को जगह दी गई.
फ़्रेंच भाषाImage copyrightOther
Image captionफ़्रेंच भाषा के तमाम प्रमुख समाचार माध्यमों पर भी ये ख़बर रही.
जर्मन भाषीImage copyrightOther
Image captionडेर स्पीगल समेत जर्मन भाषा के मुख्य समाचार माध्यमों में भी ये ख़बर रही.
तुर्की भाषाImage copyrightOther
Image captionदुनिया बुलेटिन समेत तुर्की की अहम वेबसाइटों पर भी गोमांस की अफ़वाह पर हुई हत्या की ये ख़बर छापी गई.
वाइस न्यूज़Image copyrightOther
Image captionपत्रिका वाइस न्यूज़ ने लिखा, ‘गोमांस की अफ़वाह पर हुई हत्या से हिंदू कट्टरपंथ सुर्खियों में.’
रूसी भाषाImage copyrightOther
Image captionरूसी भाषा की प्रमुख वेबसाइटों पर भी इस घटना को जगह दी गई.

पाकिस्तान के उर्दू टीवी चैनलों और अख़बारों ने इस ख़बर पर आक्रामक रुख़ अख़्तियार करते हुए इसे हिंदू चरमपंथ की वारदात क़रार दिया.

सोर्स – बीबीसी हिंदी

अमेरिका में “अहिंसा परमोधर्म ” लिख कर आने वाले मोदी क्या अख़लाक़ की मौत पर दुखी है ?

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गाय मारी गई या नहीं, मालूम नहीं, ये मालूम है कि अख़लाक़ मारा गया और उसका बेटा मौत से जूझ रहा है.

अमरीका में फ़ेसबुक के हेडक्वार्टर में नरेंद्र मोदी ‘अहिंसा परमोधर्म:’ लिखकर भारत लौट आए हैं, और बांका की रैली में अपना बांकपन भी दिखा दिया है.

जब अहिंसा के दूत महात्मा गांधी का जन्मदिन स्वच्छता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है, भारत ही नहीं, दुनिया भर के मीडिया में अख़लाक़ की हत्या पर चर्चा हो रही है.

चुप्पी एक राजनीतिक विकल्प

दिल्ली की सड़कों पर भाजपा नेता विजय गोयल ने पोस्टर लगवाए हैं जिन पर लिखा है-‘साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल’, इस पोस्टर में साबरमती के दो संत दिख रहे हैं, एक पुराने और एक नए.

पिल्ले के मरने पर भी दुखी होने वाले मोदी अभी दुखी हैं या नहीं, यह देश को पता नहीं चल सका है.

दादरी की दर्दनाक घटना के बाद से प्रधानमंत्री पंकज आडवाणी को बिलियर्ड्स चैम्पियनशिप जीतने पर बधाई दे चुके हैं, वे आशा भोंसले के बेटे के निधन पर दुख भी व्यक्त कर चुके हैं, यानी देश के दुख-सुख में साथ हैं.

मौनमोहन के मुक़ाबले वाकपटुता से वोटरों को मोहने के बाद, अब मोदी चुप रहने के मामले में मनमोहन से नहीं, बल्कि नरसिंहा राव से प्रेरणा लेते दिख रहे हैं जो चुप्पी को राजनीतिक विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करते थे.

मोदी की चुप्पी की आदत डालना इस देश की जनता के लिए बड़ी चुनौती है क्योंकि उसने अब तक गरजते-बरसते, ललकारते-पुकारते मोदी को ही देखा है.

वैसे ये उनकी चुप्पी 2.0 है. ललित गेट और व्यापमं पर उनकी चुप्पी काफ़ी गहरी थी, इन मुद्दों पर उनके ‘मन की बात’ कई रेडियो प्रसारण सुनकर भी लोग नहीं जान सके.

प्रधानमंत्री के इस मामले में कुछ न बोलने का मतलब यही है कि हर कोई उनके मन की बात अपने ढंग से पढ़ेगा. क्या इसका ये मतलब निकाला जाए कि मोदी चाहते हैं कि मुसलमान जो समझ रहे हैं, वो समझते रहें और इस मामले में उग्र हिंदुओं को कुछ समझाने की ज़रूरत नहीं है.

सोर्स – बीबीसी हिंदी

 

विरोधियों ने गुलाबचंद कटारिया की शिकायत प्रदेशाध्यक्ष से की – संगठन के चुनाव में तानाशाही और मनमानी का आरोप।

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उदयपुर । भाजपा में संगठन के चुनाव का घमासान अपने चरम पर है। संगठन के चुनाव में पक्षपात और तानाशाही की शिकायत प्रदेशाध्यक्ष तक पहुच गयी। शुक्रवार को गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया के विरोधियों ने एक साथ लामबंद हो कर भाजपा के वरिष्ठ नेता भानुकुमार शाश्त्री के निवास पर बैठक आयोजित की। कटारिया विरोधियों का आरोप है कि कटारिया अपनी तानाशाही के चलते संगठन के चुनाव में अपनी मनमानी कर रहे है । भानुकुमार शाश्त्री ने प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी से से भी फोन पर यहां की समस्या से अवगत भी कराया।प्रदेशाध्यक्ष ने शिकायत लिखित में देने का कहा। बैठक में भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्म नारायण जोशी ने भी कटारिया पर संगठन विरोधी होने का आरोप लगाया है।
भाजपा के संगठन के चुनाव घमासान चरम पर है, एक ही पार्टी के लोग आपस में लड़ रहे है। इन चुनावों में नियुक्तियां गृह मंत्री शहर विधायक गुलाबचंद कटारिया ने अपने हाथों में ले रखी है। ऐसे में कटारिया विरोधियों को कही भी मौका नहीं मिल पा रहा। आखिर परेशान हो कर सभी ने कटारिया की तानाशाही के खिलाफ खड़े हो गए और भाजपा के वरिष्ठ नेता भानु कुमार शस्त्री के घर बैठक आयोजित की जिसमे मांगीलाल जोशी, धर्म नारायण जोशी,महेंद्र सिंह शेखावत,गोविन्द दीक्षित,पार्षद जगत नागदा, अनिल सिंघल, विजय प्रकाश विपल्लवि, दिग्विजय श्रीमाली, पदम् शर्मा, दुल्ले सिंह आदि मौजूद थे। सभी का आरोप है कि संगठन के चुनाव, सदस्यता अभियान सूचि आदि कार्यक्रम कटारिया द्वारा अपने मनमाने ढंग से चलाये जारहे है। मंडल व् बूथ चुनाव अधिकारियों की नियुक्तियां भी गुटबाजी पूर्ण तरीके से की गयी है। सक्रीय सदस्यता अभियान भी अपने मनमाने ढंग से चलाया जारहा है। सक्रीय सदस्यों की व् सामान्य सदस्यों की सूचियां भी प्रकाशित नहीं की गयी जब की नियम के अनुरूप इनकी सुचि प्रकाशित की जाती है। सिर्फ अपने समर्थकों को चुनाव की सूचना दी जबकि ना पसंद के कार्यकर्ताओं को पूरी प्रक्रिया से बाहर रखा है। बैठक में आये सभी नेताओं ने कहा की कार्यकर्ता और सक्रीय सदस्यों में काफी रोष है।
भानुकुमार शाश्त्री ने बैठक से ही प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी से मोबाइल पर वार्ता की, अशोक परनामी ने कहा कि आप सब एक पत्र बना कर लिखित में मुझे भिजवाओ फिर आगे जो होगा कार्रवाई करते है।
कांग्रेस विधायक जिताने का आरोप :
भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्म नारायण जोशी ने २००९ में हुए विधान सभा चुनाव में मावली से कांग्रेस विधायक को जिताने का आरोप लगाया है। धर्म नारायण जोशी ने कहा कि मुझे हराने के लिए गुलाब चंद कटारिया ने उस वक़्त कांग्रेस के उम्मीदवार पुष्कर लाल डांगी को बुला कर उससे मुलाक़ात की थी और उसको कहा था कि धर्म नारायण जोशी हर हाल में वहां से हारना चाहिए। जोशी ने कहा कि इस बात के उनके पास पुख्ता साबुत है, अगर कटारिया मेरी इस बात क्लो झुठला दें तो वे पार्टी से इस्तीफा देदेगें। इस मामले में गुलाबचंद कटारिया से संपर्क करने की कोशिश की गयी लेकिन उनसे संपर्क हो नहीं पाया।

आम आदमी की थाली से बाहर हो गयी दालें

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Moong_Daalउदयपुर। दालें आम आदमी की थाली से बाहर हो गई हैं। एक सप्ताह के दौरान इनकी कीमतें दस रुपए से चालीस रुपए प्रति किलो तक उछल गई हैं। रिटेल कीमतों की बात करें तो उड़द दाल के भाव 140 रुपए किलो और अरहर दाल के 150 रुपए प्रति तक पहुंच गए हैं। धान मंडी के रिटेल व्यापारियों के मुताबिक़ तो पिछले १० दिन में दालों की बिक्री आधी हो गयी है। महीने के राशन में दाल या तो हे ही नहीं और है तो आधी मात्रा में।
व्यापारियों के मुताबिक कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु तथा महाराष्ट्र में खराब मानसून से खरीफ में दलहन की पैदावार बुरी तरह प्रभावित हुई है। जबकि पूरे देश को अरहर दाल खिलाने वाले मध्यप्रदेश में अरहर अथवा तूअर दाल की पैदावार घटने का अनुमान है । राजस्थान में दूूसरे राज्यों के मुकाबले पैदावार बेहतर हुई है, लेकिन स्टॉक लिमिट होने से अस्सी फीसदी नई फसल दूसरे राज्यों को भेजी जा रही हैं।
कीमत वृद्धि रोकने में सरकार नाकाम :
थोक व्यापारी विष्णु नाटाणी का कहना है कि सरकार के स्तर पर दालों की महंगाई को रोकने के लिए उठाए कदम पर्याप्त नहीं है। दालों का आयात भी महंगा पड़ रहा है। राजस्थान में थोक व्यापारियों पर 2,000 क्विंटल की स्टॉक लिमिट से दालें महंगी हुई हैं।
माल की कमी नहीं, फिर भी बढ़ी कीमतें :
खुदरा विक्रेता नितेश अग्रवाल का कहना है कि माल की कमी नहीं, लेकिन थोक में दलहन की लगातार बढ़ती कीमतों से खुदरा में दालें महंगी हो रही है। गुरुवार को ही दालों की कीमत में एक से दो रु. किलो की बढ़ोतरी हुई।
इस साल राहत की उम्मीद कम :
मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान देश में दलहन की पैदावार केंद्रीय कृषि मंत्रालय के वर्ष 2014-15 के चौथे अनुमान के मुताबिक 1.72 करोड़ टन होगी, जो पूर्व वर्ष के मुकाबले 20.5 लाख टन कम होगी। चने का उत्पादन भी पिछले वर्ष के मुकाबले घटकर 71.7 लाख टन रहने का अनुमान है।
दाल मौजूदा भाव बढ़ोतरी :
अरहर-150 -35
उड़द -140 -40
मूंग -110 – 20
चौला – 75 – 10
चना – 70 – 10

‘लाउडस्पीकर से झूठी घोषणा की गोमांस खाने की’ और भीड़ ने हमला कर एक व्यक्ति को मार दिया

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दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के दादरी इलाक़े में बीफ़ खाने के शक में एक व्यक्ति की हत्या के मामले में एक चश्मदीद ने कहा है कि इसके लिए मंदिर में पहले घोषणा की गई थी.

पीड़ित के परिजनों के अलावा  चश्मदीद के अनुसार.

मारे जाने वाले अख़लाक़ के परिचित पंकज कुमार ने पूरी घटना की जानकारी देते हुए कहा, ”मैंने मंदिर के लाउडस्पीकर से ऐलान करते हुए सुना कि एक घर में कुछ लोग गोमांस खा रहे हैं. मेरा घर मंदिर से सटा हुआ है. लेकिन जब तक मैं बाहर आया मुझे पता चला कि भीड़ ने अख़लाक़ के घर पर हमला कर दिया है.”

उधर अख़लाक़ की मां असग़री का कहना है कि हर तरफ़ से लोग आ रहे थे. कोई सुनने को तैयार नहीं थे |

असग़री का कहना था, ”वो भारी संख्या में थे. हमने उन लोगों से कहा कि हमारे पास बीफ़ नहीं है. फ़्रिज में बकरे का गोश्त रखा है. लेकिन वे सुनने के लिए तैयार नहीं थे. उन्होंने हम लोगों को बाहर निकाला और हम सभी पर हमला कर दिया.”

अख़लाफ़ के चचेरे भाई शहाबुद्दीन ने कहा कि भीड़ में ऐसे कई लोग थे जिन्हें परिवार पहचानता है.

शहाबु्द्दीन कहते हैं, ”उनमें से कई पास में ही रहते हैं. अब हम भला किसी पर कैसे विश्वास करेंगे.”

दादरी इलाक़े में बीफ़ खाने के संदेह में 50 वर्षीय अख़लाक़ अहमद की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई, जबकि उनका बेटा अस्पताल में भर्ती है.

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घायल है बेटा

नोएडा पुलिस के प्रवक्ता के मुताबिक़ बिसराड़ा गाँव में ऐसी अफ़वाह फैल गई थी कि कुछ लोग गोमांस खा रहे हैं.

इसके बाद उत्तेजित भीड़ ने अख़लाक़ अहमद के घर पर धावा बोल दिया.

इस हमले में अख़लाक़ अहमद की मौक़े पर ही मौत हो गई, जबकि उनके 22 वर्षीय बेटे को घायल हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

पुलिस ने इस मामले में 10 लोगों के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज किया है. इनमें से छह लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

फंस गया रे बेचारा पेंथर – स्टील के बर्तन में मुंह फंसा ( video )

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उदयपुर।  राजसमन्द के सार्दुल खेड़ा गांव में पैंथर का मुँह स्टील के मटके में फंस गया । अल सुबह हुई इस घटना की जानकारी जैसे ही लोगों तक पहुँची मोके पर भारी भीड़ जमा हो गई । सुचना के करीब 3 घण्टे देरी से आई पैंथर को बांधकर वन विभाग के ओफ्फिस ले गयी । बाद में पेंथर को ट्रैंगुलाइज कर स्टील के मटके को काट कर पेंथर का मुंह बाहर निकाला।  माना जा रहा है की पैंथर पानी पीने आया होगा तभी उसका मुह इस मटके में फंस गया होगा

https://youtu.be/qfE6dyGLsjU

 

https://youtu.be/5xScH01alls

 

https://youtu.be/kZEV2qVDQyc