क्या ये कुदरत ने इंसाफ किया ?

आत्महत्या करने वाली महिला के कांस्टेबल पति को ट्रक ने कुचला
-बंबोरा के फीला गांव में आज तडक़े सलूंबर हाइवे पर हुआ हादसा, लघुशंका के लिए कार से उतारा, तभी ट्रक ने चपेट में लिया, सडक़ पर बिखेर कांस्टेबल के शरीर के टुकड़े

55555उदयपुर। महिला थाने के एक कांस्टेबल की बंबोरा-फीला के बीच हाइवे पर आज तडक़े ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई। हादसे में कांस्टेबल के शव के टुकड़े-टुकड़े होकर सडक़ पर बिखर गए। इस कांस्टेबल की पत्नी ने दो दिन पहले यहां सुखेर थाने के पीछे स्थित पुलिस क्वार्टर में फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। पुलिस जांच में सामने आया कि पति-पत्नी के बीच अनबन के चलते उसने आत्महत्या की थी। पत्नी के आत्महत्या करने के दो ही दिन बाद उसके पति की सडक़ हादसे में इस दुर्गति से मौत होने को कुदरत के इंसाफ के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार कानपुर (करावली) निवासी भूपेंद्रसिंह (२७) पुत्र गमेरङ्क्षसह राजपूत पत्नी का अंतिम संस्कार करके किसी काम से आज तडक़े चार बजे उदयपुर की तरफ आ रहा था। इसी दौरान बंबोरा से फीला के बीच भूपेंद्रसिंह लघुशंका के लिए कार से नीचे उतारा, तो एक ट्रक ने उसे चपेट में ले लिया। भूपेंद्रसिंह के शरीर के टुकड़े-टुकड़े होकर सडक़ पर बिखर गए। भूपेंद्रसिंह के शव की काफी दुर्गति हुई। तडक़े भूपेंद्र के शरीर के टुकड़ों को देखकर ग्रामीणों ने कुराबड़ पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर टुकड़ों को समेटा और कुराबड़ के रेफरल हॉस्पीटल पहुंचाया, जहां पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए। उल्लेखनीय है कि भूपेंद्रसिंह मूलरूप से कानपुर (करावली) का रहने वाला है। वह महिला थाने में कांस्टेबल के पद पर नियुक्त था और सुखेर थाने के पीछे पुलिस क्वार्टर में रहता था। दो दिन पूर्व भूपेंद्र की पत्नी डिम्पल कुंवर (२८) ने पुलिस क्वॉर्टर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुखेर एसएचओ मांगीलाल ने बताया कि पुलिस जांच में सामने आया कि भूपेंद्र की उसकी पत्नी से अनबन चल रही थी, जिस कारण उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आज सुबह भूपेंद्र उसकी पत्नी का अंतिम संस्कार करके उदयपुर किसी काम से लौट रहा था, तभी यह हादसा हुआ, जिसमें उसकी भी जान चली गई, जो केवल इत्तेफाक नहीं माना जा सकता है। इस कुदरत का इंसाफ कहा जा सकता है।

सोशल मीडिया पर हुआ मोदी की एजुकेशन पर सवाल- #DegreeDikhaoPMSaab

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पीएम नरेंद्र मोदी जिस सोशल मीडिया पर मशहूर हैं, शनिवार को वे उसी के यूज़र्स के निशाने पर आ गए। ट्विटर यूजर्स ने DegreeDikhaoPMSaab हैशटैग का इस्तेमाल करके उनकी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन पर सवाल उठाए। इतने ट्वीट हुए कि यह हैशटैग टॉप ट्रेन्डिंग टॉपिक बन गया। हालांकि, कुछ लोगों ने मोदी के फेवर में भी ट्वीट किए।
pm modi
क्या है मामला?
– एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक आरटीआई में पीएम के एजुकेशनल क्वालिफिकेशन के बारे में पूछा गया। पीएमओ ने इसकी जानकारी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद टि्वटर पर यूजर्स का गुस्सा फूटा।
– एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएम की नई साइट पर उनकी एजुकेशन का जिक्र ही नहीं है।
– वहीं, लोकसभा की साइट पर पीएम मोदी की एजुकेशन में उनके एमए होने का जिक्र है।
– 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान फाइल किए गए ऐफिडेविट में भी उनकी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन गुजरात यूनिवर्सिटी से एमए बताई गई है।
किसी ने मोदी को फेंकूलॉजी में एमए तो किसी ने उन्हें बताया गुड गवर्नेँस में पीएचडी, पढ़ें कुछ ट्वीट्स-
@ZebraCross_7
बचपन में मैं डिग्री बनना चाहता था #DegreeDikhaoPMSaab
@Atheist_Club
56 degree. #DegreeDikhaoPMSaab
@SarcastiCharm
Modi Sir, I am a Post Graduate from NMIMS. I work in a Social Media Firm. I hv no 2nd thoughts on displaying my degree.
@MudraParashar
Pl. don’t doubt PM’s degree. He is MA with FENKULOGY. Not only degree holder, but he is practically expert in this art.
@ablenavin
PM @narendramodi ji hv PhD in good governance ,D.Engg in International affairs, dont need to show dgre 2 cheap peoples #DegreeDikhaoPMSaab
@speedmystic
SoniaG aur RahulG ka bhi dekh lo #DegreeDikhaoPMSaab
@kapsology
We hv no issue in having a uneducated PM if he is capable. Issue is whn he fakes it & say he is Univ topper & a PG. #DegreeDikhaoPMSaab
@gurubrammha
Only Indians can abuse their own PM..hail AAPtards! #DegreeDikhaoPMSaab
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प्रत्याशियों को लेकर एनएनयूआई आपस में ही भिड़ी

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उदयपुर । छात्र संघ चुनाव नजदीक आते ही छात्र राजनीति गरमाने लगी है । एनएसयूआई के प्रत्याशी की घोषणा होने के पहले ही प्रेस वार्ता में हंगामा हो गया और प्रत्याशियों को लेकर एनएसयूआई के दो गुट आपस में ही भीड़ गए, नारे बाजी से बात बढ़ते बढ़ते रोड तक पहुंच गयी और हाथापाई तक एक बार तो हो गयी, यही नहीं बाद में पुलिस को हल्का बल पूर्वक छात्रों को हटाना पड़ा । एक बार तो माहोल देखते हुए लग रहा था कि एनएसयूआई आपस में ही उलझ कर रह जायेगी लेकिन फिर शाम को बड़े नेताओं की समझाइश से माहोल शांत किया । काफी जद्दोजहद के बाद एनएसयूआई ने अपना प्रत्याशी रोनक पुरोहित को घोषित किया । गुरुवार को होटल रघुमहल में एनएसयूआई के प्रत्याशी की आधिकारिक घोषणा में रखी गयी प्रेस वार्ता के दौरान बीच में एनएसयूआई का जिलाध्यक्ष यशवंत चौधरी आया और हंगामा खड़ा कर दिया, यशवंत चौधरी ने कहा कि रौनक पुरोहित के लिए मेरे से कोई सहमति नहीं ली गयी जब की में चुन कर एनएसयूआई अध्यक्ष बना हुँ। हंगामा करते हुए चौधरी ने महासचिव पद के लिए अपने चहेते योगेश लोहार को टिकिट देने को लेकर अड़ गए और कहा यदि योगेश लोहार को टिकिट नहीं दिया गया तो वे अपनी पूरी कार्यकारणी के साथ एनएसयूआई के पदों से इस्तीफा दे देगें। चौधरी उदयपुर के प्रभारी अशोक पूनिया को लेकर प्रेस वार्ता से बाहर चले गए और काफी देर वार्ता करने के बाद भी वे अपनी बात पर अड़े रहे।
जब यशवंत चौधरी की बात नहीं मानी गयी तो यशवंत चौधरी के समर्थक नारे बाजी करर्ते हुए होटल के बाहर आगये और प्रदेश उपाध्यक्ष दीपक मेवाड़ा के विरोध में नारे बाजी करते हुए उससे हाथापाई तक की नौबत आगयी, इसी बीच सड़क पर माहोल बिगड़ता देख पुलिस को कमान संभालनी पड़ी और छात्रों को वहां से हटाया बाद में एनएसयूआई के पदाधिकारियों ने समझाइश कर मामला शांत किया । शाम तक कांग्रेस के आला नेताओं की आपस में बात चित हुई और मामले को शांत किया।

 

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सीएसएस का खात्मा

छात्र हित दरकिनार – अपने हितों को साधने के लिए एबीवीपी में मिल गई

IMG-20150805-WA0013उदयपुर । एबीवीपी से बगावत कर जो संगठन सिर्फ छात्र हितों के लिए खडा हुआ था और जिसने २००४ से २०११ तक जीत की हेट्रिक बनाई थी वह सीएसस ( छात्र संघर्ष समिति ) का आज खात्मा हो गया | छात्र हितों को दरकिनार करते हुए अपने हितों को ध्यान में रख छात्र संघर्ष समिति ने एबीवीपी को अपना समर्थन दे दिया। सीएसस और एबीवीपी को गले मिलते देख जो छात्र राजनीति से दूर सिर्फ छात्र हितों के लिए इस संगठन से जुड़े थे, वो अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे है । सीएसएस के कई पदाधिकारी इस इस फैसले से काफी गुस्सा और नाराज़ है।

आज सीएसस ने होटल रॉयल इन में पत्रकार वार्ता के दौरान एबीवीपी को अपने समर्थन देने की आधिकारिक घोषणा कर डाली इसी घोषणा के बिच सीएसस के पदाधिकारी वीरेंद्र सिंह सिसोदिया ने आकर हंगामा कर दिया और सीएसस के पदाधिकारियों को जम कर लताड़ लगाईं कि ऐसी क्या मुसीबत आगई कि ११ सालों से चले आरहे इस संगठन का खात्मा कर एबीवीपी में मिलाने की घोषणा कर रहे हो । सिसोदिया ने लताड़ लगाते कहा कि जो छात्र ११ सालों सीएसस से जुड़े हुए है उनके साथ विशवास घात किया जारहा है। सीएसस के पदाधिकारियों को भी घंटे भर पहले सूचित किया जा रहा है। यहां तक कि उन्होंने सीएसस का प्रत्याशी गौरव शर्मा व् उसके साथियों को भी लताड़ लगाईं कि तुम्हे क्या दे कर खरीदा गया है। बाद में उन्हें सीएसस के पदाधिकारी और भाजपा नेता अलग लेगये और समझाइश कर शांत किया ।
इधर पत्रकार वार्ता के दौरान सीएसस के संस्थापक अशोक शर्मा ने कहा की सीएसस और एबीवीपी एक ही माँ के दो बेटे थे जिनका आज मिलन हो गया । उन्होंने कहा की सोनू अहारी एक उपयुक्त प्रत्याशी है, जिसका समर्थन हम करते है, हम कभी एबीवीपी से अलग नहीं हुए है, हमारी और एबीवीपी की विचार धारा एक ही है । अशोक शर्मा ने माना की उनके इस फेसले से २० प्रतिशत छात्र नाराज़ है लेकिन उनको मनाने के हर प्रयास किये जायेगें । एबीवीपी के प्रदेश संयोजक देवेन्द्र सिंह चुण्डावत ने भी कहा कि एबीवीपी और सीएसस दो भाई की तरह ही है । जो किन्ही कारणों के चलते अलग हुए थे लेकिन अब एक है । दोनों का मकसद एनएसयुआइ को हराना है । चुण्डावत ने कहा की हमारी आपस की लड़ाई में पूर्व में एनएसयूआई पिछले वर्ष जीत गयी लेकिन अब नहीं जीतेगी । इस दौरान सीएसस के संस्थापक अशोक शर्मा, केलाश शर्मा, संयोजक सूर्य प्रकाश सुहालका, और पूर्व अध्यक्ष दिलीप जोशी रवि शर्मा, मोजूद थे साथ ही एबीवीपी के देवेन्द्र सिंह, विष्णु शंकर पालीवाल, नीरज अग्निहोत्री व् अन्य पदाधिकारी और भाजपा नाना लाल वाया सहित अन्य नेता भी मोजूद थे ।
११ सालों का संगठन ख़त्म :
११ वर्ष पहले छात्र हितों का हवाला देते हुए एबीवीपी और भाजपा से अलग हुए अशोक शर्मा कैलाश शर्मा, दीपक शर्मा रविशर्मा, सूर्य प्रकाश सुहालका आदि ने मिल कर सीएसएस ( छात्र संघर्ष समिति) का निर्माण किया था और २००४ में रवि शर्मा को खडा कर जीत हासिल की थी उसके बाद पांच साल चुनाव बंद होने के बाद सीएसस ने फिर जीत हासिल की और २०१० में दिलीप जोशी अध्यक्ष बने २०११ मे परमवीर सिंह चुंडावत सीएसस से अध्यक्ष बने और २०१३ में अमित पालीवाल सीएसस के प्रत्याशी बन एमएलएसयू केन्द्रीय छात्रसंघ के अध्यक्ष बने । ११ साल से चला आरहा यह संघठन आज एक तरह से ख़त्म हो गया और एबीवीपी में विलय हो गया | इससे जुड़े कई छात्र और पदाधिकारी इस फैसले से खुश नहीं है | कई पदाधिकारी पिचले ११ वर्षों से इस संघठन से जुड़े हुए है जिसमे सूर्य प्रकाश सुहालका भी है, जिन्हें संथापक सदस्य मना जाता है और जो सीएसस के संयोजक है । वे भी उपरी मन से भले एबीवीपी के साथ है, लेकिन इस फेसले से खुश नहीं है । यही नहीं कई छात्र नेता और छात्र जो की गोरव शर्मा का समर्थन में थे वे भी इस फेसले से नाराज नज़र आये ।
लाखों के चुनाव बना कर सीएसस जा रही है :
छात्र संघ चुनाव में अचार संहिता के चलते जो चुनाव की सीमा पञ्च हज़ार है, और 11 वर्ष पहले मुश्किल से २५ से ५० हज़ारों में ही ख़त्म हो जाते थे उन छात्रसंघ के चुनावों के खर्चों को लाखों तक पहुचाने वाला संघठन सीएसस है । सीएसस के आने के बाद ही छात्र वोटरों को पीवीआर में फिल्म दिखाना, रिसोर्ट में पार्टी, छात्र वोटरों को लुभाने के लिए किये जाने वाले भोज आदि सीएसस आने के बाद शुरू हुए जिससे आज चुनावी खर्चा ३० से ४० लाख तक पहुच गया है । आज वही सीएसस अपने हितों के चलते छात्रों के इन चुनावों को इतना खर्चीला बना कर एबीवीपी में विलय हो गयी है ।

राजनैतिक संगठनों पर भारी है इनकी दोस्ती

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उदयपुर। संगठन पर दोस्ती भारी है, और यह बात पिछले चार सालों से सिद्ध करते आरहे है केम्पस के चार दोस्त जो पिछले चार सालों से मोहनलाल सुखाड़िया विश्व विद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष बनते आरहे है। ये चारों दोस्त चाहे किसी भी संगठन से जुड़े हुए रहे लेकिन अपनी दोस्ती पर कोई आंच नहीं आने दे रहे। कई बार संगठन को एक तरफ रख कर अपने दोस्त का हर हाल में हर साल में समर्थन और सहायता करते आरहे है, इसी के बल बुते पर चाहे इन दोस्तों को किसी भी संगठन ने अपना प्रत्याशी बना के खड़ा किया हो लेकिन इन चारों ने अपनी दोस्ती के वादे को बखूबी निभाया है। ये चारों दोस्त है एमएलएसयू के वर्तमान अध्यक्ष हिमांशु चौधरी, इससे पहले अध्यक्ष रहे अमित पालीवाल, पंकज बोराणा और परमवीर सिंह।
चारों दोस्त अलग अलग संगठन से लेकिन दोस्ती में कही भी कड़वाहट नहीं आई, छात्र संघ चुनाव के दौरान कई बार ऐसा भी मौका आया की ये एक दूसरे के आमने सामने एक दूसरे के विरोध में नारे भी लगाए लेकिन लेकिन इसके बावजूद उसी शाम इनकी आपस महफ़िल भी सजी। कॉमर्स कॉलेज मे प्रथम वर्ष से साथ हिमांशु चौधरी, पंकज बोराणा और परमवीर सिंह गहरे दोस्त है। इसके बाद इनके ग्रुप में शामिल हुए अमित पालीवाल।
संगठन अलग फिर भी एक :
चुनाव के समय अलग अलग छात्र संगठन से जुड़े ये चारों दोस्त अलग अलग संगठन से अध्यक्ष बने परमवीर सिंह व् अमित पालीवाल सीएसएस से अध्यक्ष बने तो पंकज बोराणा एबीवीपी और हिमांशु चौधरी एनएसयूआई। संगठन की बाध्यताओं के चलते चुनाव के दौरान भले ही इन्होने एक दूसरे का साथ खुल कर साथ नहीं दिया हो लेकिन एक दूसरे के विरोधी कभी नहीं रहे। कभी एक दूसरे के विरोध में आमने सामने खड़े नहीं हुए, और एक दूसरे के चुनाव के दौरान हर संभव मदद भी की। आज भी चारों के संगठन अलग है लेकिन दोस्ती उसी तरह कायम है। चाहे संगठन के राज आपस में नहीं बांटे हो लेकिन दोस्तों की बाते और सुख दुःख आज भी हर शाम शेयर होते है।
ये भी दोस्ती :
१७ दिन बाद होने वाले चुनाव में एबीवीपी ने सोनू अहारी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है । सीएसएस ने गौरव शर्मा को। जबकि सीएसएस से मयूर ध्वज सिंह भी दावेदार थे लेकिन उन्होंने सोनू आहारी से अपनी दोस्ती के चलते पहले ही तय करलिया था की यदि सोनू अहारी एबीवीपी से खड़े होते है तो वे उनके विरोध में खड़े नहीं होंगे और हुआ भी ऐसा ही।

उदयपुर के बायोलॉजिकल पार्क में आएगा व्हाइट का टाइगर जोड़ा

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बायोलॉजिकलपार्कमें व्हाइट टाइगर का जोड़ा लाने के लिए वन विभाग ने इसके लिए तिरुपति और चेन्नई के जंतु आलयों को प्रस्ताव भेजे हैं। सीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) राहुल भटनागर ने बताया कि व्हाइट टाइगर उदयपुर के लिए बिलकुल नया मेहमान होगा। क्यों कि यह अब तक उदयपुर में नहीं रहा है। व्हाइट टाइगर का जोड़ा देने के लिए वैंकटेश्वर जूलॉजिकल पार्क, तिरुपति (तिरुपति जू) और चेन्नई जू को उदयपुर वन विभाग की ओर से प्रस्ताव भेजे हैं। इन जू प्रबंधक की ओर से स्वीकृति का इंतजार है।

गृहमंत्री कटािरया ने दिया था सुझाव

}गतदिनों बायोलॉजिकल पार्क में हुए वनमहोत्सव के दौरान गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने वन विभाग को व्हाइट टाइगर लाने का सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि उदयपुरवासियों ने शहर में व्हाइट टाइगर कभी नहीं देखा। ऐसे में व्हाइट टाइगर का जोड़ा यहां लाया जाता है तो शहरवासियों के लिए आकर्षण का केन्द्र होगा।

फेसबुक पर महिला के नाम से फर्जी आईडी बनाकर लोगों से की चेटिंग

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उदयपुर| फेसबुकपर एक महिला के नाम से फर्जी आईडी बनाकर दूसरों से चेटिंग कर बदनाम करने का मामला सामने आया है। महिला के पति ने अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। थानाधिकारी जितेन्द्र आंचलिया ने बताया कि अज्ञात आरोपी ने कुमावतपुरा निवासी एक महिला के नाम से फर्जी आईडी बनाई। महिला के पति के दोस्तों को फेसबुक रिक्वेस्ट भेजी और चेटिंग की। सर्किल में बात आने पर पति को जानकारी हुई तो उसने महिला से पूछा। महिला ने फेसबुक आईडी होने से इनकार किया। इस पर पति ने एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस ने आईडी ब्लॉक करा दी है, ताकि इसका आगे दुरुपयोग हो सके। इसके अलावा आईपी एड्रेस के जरिए आरोपी की तलाश की जा रही है।

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में होती है नकल

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copyingउदयपुर. राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से गत चार वर्ष में हुई लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में जोधपुर संभाग से नकल कराए जाने का खुलासा हुआ है। यही नहीं हाल में थानेदारों की भर्ती में बाड़मेर, जालोर व इसके पास के क्षेत्रों से चयनित हुए 42 अभ्यर्थियों के चयन पर भी सवाल उठ गए हैं।

पुलिस की प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया है कि इस भर्ती में भी नकल कराने वाले गिरोह ने अभ्यर्थियों की पूरी मदद की।  आयोग की रविवार को आयोजित कनिष्ठ व तहसील राजस्व लेखाकार प्रतियोगी परीक्षा में नकल कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ होने के बाद यह सच सामने आया है।  
आरोपितों से पूछताछ व दस्तावेजों की बरामदगी में चौंकाने वाले तथ्य सामने आने के बाद पुलिस तह तक जांच में जुटी है। पुलिस के अनुसार लेखा परीक्षा का प्रश्नपत्र इलेक्ट्रॉनिक घड़ी से स्केन कर बाहर भेजा गया। यह पेपर पुलिस को बाड़मेर के गुढ़ामलानी से मिला है, जिसकी जांच हो रही है। 
इस परीक्षा में जोधपुर, भीनमाल व गुड़ामलानी से बैठकर गिरोह अलग-अलग केन्द्रों पर उन अभ्यर्थियों को नकल करवा रहा था, जो इनके सम्पर्क में आए थे। गुड़ामलानी  में तो एक फॉर्म हाउस में बैठकर गिरोह के 20 सदस्य एकसाथ नकल कराने का काम कर रहे थे। 
कहा पेपर लीक नहीं 
पुलिस ने समस्त अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड व अन्य जानकारी आरपीएससी को भिजवा दी है। आयोग के सचिव नरेशकुमार ठकराल ने बताया कि पुलिस जांच व चालान पेश होने के बाद मामला कमिश्नर के सामने रखा जाएगा। वे अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। ठकराल ने लेखा परीक्षा का पेपर लीक होने से साफ इनकार किया। पेपर अभ्यर्थियों को मिलने से पहले बाजार में नहीं मिला। 

आठ सौ से ज़्यादा पोर्न साइट्स ब्लॉक

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भारत सरकार ने 857 पोर्न साइट्स को ब्लॉक कर दिया है.

सरकार के मुताबिक़ बच्चों की पहुंच से इन्हें दूर करने के लिए ऐसा किया गया.

हालांकि वयस्क अब भी इन साइट्स को प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल कर देख पाएंगे.

इसी साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने पोर्न साइट्स को ब्लॉक ना किए जाने पर सरकार के प्रति नाराज़गी ज़ाहिर की थी.

अदालत की नाराज़गी ख़ासतौर से चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी से जुड़ी वेबसाइट्स को ब्लॉक ना किए जाने पर थी.

वयस्कों के लिए बैन नहीं?

हालांकि टेलीकॉम कंपनियों ने कहा कि वो फ़ौरन इस बैन को लागू नहीं कर सकती हैं.

एक टेलीकॉम कंपनी के अधिकारी ने ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ को बताया, “हमें एक-एक करके ये वेबसाइट ब्लॉक करनी होंगी. ऐसे में सभी सर्विस प्रोवाइडर्स को इन सभी साइट्स ब्लॉक करने में कुछ दिनों का वक़्त लगेगा.”

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बीबीसी को बताया, “दूरसंचार मंत्रालय ने सभी टेलीकॉम प्रोवाइडर और इंटरनेट सर्विस कंपनियों को सलाह दी थी कि वो

इन 857 पोर्न साइट्स को फ्री एक्सिस पर नियंत्रण लगाएँ.”

अधिकारी ने कहा, “ये बैन पूरी तरह से नहीं है. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को ध्यान में रखते हुए और बच्चों को पोर्न साइट से दूर रखने के लिए ये कदम उठाया गया है. भारत की संस्कृति को बचाने के लिए ऐसा किया गया है. वयस्क अब भी पोर्न साइट पर जा सकते हैं.”

सोशल मीडिया पर विरोध

बीबीसी को इस अधिकारी ने बताया कि सरकार का ये सिर्फ़ एक अस्थायी कदम है और भविष्य में पोर्नसाइट को नियंत्रित करने के लिए एक दीर्घकालीन योजना बनाई जाएगी.

सरकार के इस क़दम की सोशल मीडिया पर आलोचना हो रही है और #pornban ट्रेंड कर रहा है.

मशहूर लेखक चेतन भगत ने ट्विटर पर लिखा, “पोर्न बैन मत करो, बल्कि मर्दों का औरतों को घूरना, उनकी बिना अनुमति के उन्हें छूना, उन्हें पकड़ना, उनका शोषण करना, उन्हें गाली देना, उनकी बेइज़्ज़ती करना और रेप करना बैन करो. सेक्स मत बैन करो.”

फ़िल्मकार रामगोपाल वर्मा ने लिखा, “वयस्कों को पोर्न देखकर हानि रहित मज़े लेने से रोकना वैसा ही है जैसा तालिबान और इस्लामिक स्टेट जैसे संगठनों का लोगों की मूलभूत आज़ादी को छीनना.”

कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा ने लिखा, “ये बैन पोर्न को पसंद या नापसंद करने से नहीं जुड़ा है. इस बैन का मतलब यही है कि सरकार लोगों की व्यक्तिगत आज़ादी छीन रही है. अब अगली दफ़ा किसे बैन करेंगे- टीवी या फ़ोन?”

 

उदयपुर शहर में सक्रिय बाइक चोर गिरोह

moter bikeउदयपुर। शहर में सक्रिय बाइक चोर गिरोह के बदमाश हिरणमगरी एवं प्रतापनगर क्षेत्र में वारदातों को अंजाम देकर पांच बाइक चुरा ले गए।
शहर में पुलिस गश्त होने के बावजूद बाइक चोर गिरोह सक्रिय है। गिरोह के बदमाश शहर के विभिन्न स्थानों पर खडी बाइक चोरी करने की वारदातों को अंजाम देकर अपनी सक्रियता दर्शा रहे हैं लेकिन पुलिस गश्त से उन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। गत दिनों शहर के हिरणमगरी थाना क्षेत्र उमरडा निवासी भेराराम पुत्र धरमा मीणा, अम्बामाता थाना क्षेत्र होटल हिलटॉप कर्मी देलवाडा राजसमन्द निवासी दिनेश पुत्र भॅवरलाल रेबारी की १५ जुलाई को आयुर्वेद चोराहा से चोर बाइक चुरा ले गए। इसी तरह शिवमंदिर के पास प्रतापनगर निवासी सुनिल पुत्र दयाराम भाटिया की २७ जुलाई को,ट्रांसपोर्ट नगर निवासी छोगालाल पुत्र नन्दलाल जाट की बेडास से तथा मावली निवासी राजेन्द्र कुमार पुत्र रमणलाल की २८ जुलाई को सुन्दरवास से बाइक चोर गिरोह के बदमाश बाइक चुरा ले गए। इस मामले में पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। पुलिस को अहम सुराग हाथ लगे है। जल्द ही गिरोह पुलिस गिरफ्त में होगा।