बिग बॉस सीजन 5 की प्रतियोगी पूजा मिश्रा ने लगाया रेप का आरोप

puja mishra in udaipur
उदयपुर। बिग बॉस-5 की प्रतियोगी पूजा मिश्रा से उदयपुर के एक होटल में रेप और छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। हालाँकि बार बार अपने आरोप बदलने को लेकर खुद संदेह के घेरे में आ गयी है ।
पूजा मिश्रा ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा कि मुझे पेय पदार्थ में कुछ नशीली वस्तु मिलाकर दी गई जिससे पीडि़ता को गहरी नींद आ गई। सुबह उठने पर पीडि़ता को महसूस हुआ कि रात को उसके साथ कुछ अनैतिक काम हुआ है। पीडि़ता ने बताया कि जब से वो यहां आई है तब से उनका कई बार सामान चोरी किया गया है।
पूजा ने बताया कि वह कैंलेडर की शूटिंग के लिए पिछले चार-पांच दिन से यहां आई हुई थी और एक होटल में ठहरी थीं। अपनी शिकायत में बताया कि रात को डिनर करने के बाद उन्होंने कोई पेय पदार्थ पिया जिसके बाद उन्होंने गहरी नींद आ गई।
उन्होंने आशंका जताते हुए कहा कि होटल में पेय पदार्थ के अंदर कुछ नशीली वस्तु मिलाई गई थी जिसके बाद उन्हें ज्यादा गहरी नींद आ गई। उसने आरोप लगाया है कि अगले दिन वह सुबह उठी तो उसे लगा कि उसके साथ शारीरिक छेड़छाड़ हुई है।
इसके बाद पीडि़ता ने थाने में मामले की जानकारी दी। सूचना मिलने पर पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और आला अधिकारियों को घटना से अवगत कराया।
इसके बाद मीडिया से बातचीत करते हुए पीडि़ता ने अपने साथ रेप होना बताया। पुलिस ने मामला दर्ज कर उसका मेडिकल करवा लिया है।

बार-बार बदल रही है बयान
वहीं दूसरी ओर पीडि़ता की ओर से बार-बार बयान बदलने के चलते पूरा मामला संदेेह के दायरे में है। इससे पुलिस भी पेशोपेश में है कि आखिर क्या किया जाए।

कई फिल्मी कलाकारों व बिजनेसमैनों पर भी लगाए आरोप
पीडि़ता ने पुलिस को दी शिकायत में कई फिल्मी और प्रसिद्ध बिजनेसमैनों पर भी आरोप लगाए हैं कि ये लोग पिछले दस सालों से पीडि़ता के खिलाफ षडय़ंत्र रच रहे हैं। पीडि़ता ने इन लोगों ने खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की हुई है। पीडि़ता ने इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।

गौरतलब है कि बिग बॉस 5 में अपने बर्ताव को लेकर खासी सुर्खियों में रही थी। शो से बाहर आने के बाद इस मॉडल ने कई खुलासे भी किए थे।

अहमदाबाद के इन स्कूल में बच्चे अच्छा इंसान नहीं हिन्दू – मुस्लिम बनने आते है

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saffron-uniformउदयपुर । मां-बाप अपने बच्चों को अच्छा और काबिल इंसान बनाने के लिए स्कूल भेजते है । मासूम बच्चे अपने धर्म से अनजान अपनी मासूमियत लिए स्कूल की तरफ आते है, जिन्हे ये भी ठीक से नहीं पता होता है कि हिन्दू क्या होता है और मुसलमान कौन होता है। लेकिन फिरका परस्त लोगों को बच्चों की ये मासूमियत आखों में खटक गयी, और इन बच्चों के दिमाग में अपनी जलील और घटिया सोच का ज़हर भरना शुरू कर दिया । ये घटिया और जलील हरकत अहमदाबाद के म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (एमसी) ने अपने द्वारा संचालित दो स्कूल में की है।
जिस स्कूल में हिन्दू बच्चे ज्यादा थे उनको भगवा यूनिफार्म पहना दी और जिस स्कूल में मुस्लिम बच्चे ज्यादा थे उनको हरी यूनिफार्म पहना कर उन्हें ये अहसास दिला दिया की तुम हिन्दू और तुम मुस्लिम हो और तुम एक नहीं अलग – अलग हो।

अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (एमसी) के शाहपुर पब्लिक स्कूल और दानी लिम्डा पब्लिक स्कूल इस मामले में खास हैं कि ये दोनों इंग्लिश मीडियम स्कूल हैं। इसके बावजूद इन दोनों स्कूलों में फर्क साफ दिखता है। शाहपुर स्कूल में पढ़ने वाले लगभग स्टू़डेंट्स हिन्दू हैं और इनके यूनिफॉर्म भगवा कलर के हैं। दूसरी तरफ दानी लिम्डा स्कूल में पढ़ने वाले लगभग स्टूडेंट्स मुस्लिम हैं और इनके यूनिफॉर्म ग्रीन कलर के हैं।

एएमसी इन दोनों स्कूलों के अलावा 454 और स्कूलों को चलाता है। ये सारे स्कूल नॉन-इंग्लिश मीडियम के हैं। इन सारे स्कूलों के यूनिफॉर्म ब्लू और वाइट हैं। एएमसी स्कूल बोर्ड के चेयरमैन जगदीश भवसार ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘दानी लिम्डा स्कूल में ग्रीन यूनिफॉर्म का चयन किसी खास वजह से नहीं है। इसका किसी खास समुदाय से भी संबंध नहीं है। हमलोग के पास गुलाबी और ब्लू के भी विकल्प थे लेकिन फिर लगा कि बच्चों पर ये कलर बहुत जंचते नहीं। ऐसे में ग्रीन कलर पर अंतिम मुहर लगी।’ उन्होंने कहा कि शाहपुर स्कूल में भगवा कलर का भी चयन गैर पक्षपातपूर्ण है। भवसार ने कहा कि भगवा रंग के चयन में कोई पूर्वाग्रह या वरीयता जैसी बात नहीं है।

भवसार से पूछा गया कि क्या यूनिफॉर्म के कलर चयन में कहीं से भी मजहब का भी खयाल रखा गया? इस पर उन्होंने कहा कि यहां कलर को कम्युनिटी से जोड़कर नहीं देखें क्योंकि ऐसा सोचकर यूनिफॉर्म के कलर का चयन नहीं किया गया है। दानी लिम्डा गांव में कानुभाई नी चाली स्लम मुस्लिम बहुल है। स्कूल भी यहीं स्थित है। इस स्कूल में 98 पर्सेंट स्टूडेंट्स मुस्लिम हैं। दूसरी तरफ शापहुर पब्लिक स्कूल में 95 पर्सेंट स्टूडेंट्स हिन्दू हैं।

एएमसी ने अपने स्कूलों में घटते नामांकन को नियंत्रित करने की उम्मीद में इंग्लिश मीडियम स्कूल शुरू किया है। शाहपुर पब्लिक स्कूल 2013 में शुरू हुआ था और दानी लिम्डा स्कूल पिछले साल शुरू किया गया। इन दोनों स्कूलों की शुरुआत क्लास वन से हुई थी लेकिन हर साल इन दोनों स्कूलों में एक-एक क्लास जुड़ रही है। इस साल शाहपुर में क्लास तीन तक पढ़ाई हो रही है और दानी लिम्डा में क्लास दो तक।

शाहपुर स्कूल का यूनिफॉर्म भगवा शर्ट और शॉर्ट्स है। इसे ‘सोशल ऑर्गेनाइजेशन’ शाहपुर सेवा संघ ने स्पॉन्सर किया है। इस संघ के मेंबर खुद एएमसी स्कूल बोर्ड के चेयरमैन जगदीश भवसार भी हैं। इसके चेयरमैन शाहपुर वॉर्ड से पूर्व बीजेपी पार्षद अतुल भवसार हैं। जगदीश भवसार ने कहा, ‘यह संगठन शिक्षा और समाज के लिए काम करता है। रोटरी क्लब और शारदा ट्रस्ट भी स्कूलों के लिए यूनिफॉर्म्स उपलब्ध कराते हैं। अब हमने स्वामीनारायण पंथ से स्कूलों में बच्चों को यूनिफॉर्म दान करने का अनुरोध किया है।’

हालांकि दानी लिम्डा पब्लिक स्कूल में बच्चों के लिए यूनिफॉर्म्स का पैसा स्थानीय लोग जुटाते हैं। जब इस स्कूल को शुरू किया गया था तब 6 महीने तक बच्चे बिना यूनिफॉर्म के ही आए थे। दिसंबर 2014 में ग्रीन कलर का यूनिफॉर्म यहां फाइनल किया गया था।

पुलिस अधिकारी के बंगले में घुस गई सडक़!

यूआईटी ठेकेदार से सांठ-गांठ करके किया महिला पुलिस अधिकारी ने अपने बंगले में घुसवाई सडक़, यूआईटी अधिकारियों को नहीं है मामले की जानकारी

divya mittal RPSउदयपुर। शहर की आधी से ज्यादा सडक़ें खुदी पड़ी है, जिन पर न तो यूआईटी न ही नगर निगम और ना ही पीडब्ल्यूडी ध्यान दे रही है, लेकिन फतहपुरा पर स्थित एक महिला पुलिस अधिकारी और यूआईटी ठेकेदार की मिलीभगत से सरकारी बंगले के भीतर सडक़ बनाई जा रही है। इस मामले की यूआईटी अधिकारियों और इंजीनियरों को जानकारी नहीं थी, लेकिन जब क्रमददगारञ्ज ने पड़ताल की, तो यूआईटी अधिकारियों ने जानकारी जुटाकर बताया कि सरकारी बंगले में बनाई जा रही सडक़ का भुगतान यूआईट नहीं करेगी।
फतहपुरा स्थित जीआरपी की डिप्टी दिव्या मित्तल के बंगले में सडक़ बनाने के लिए आज सुबह पूरे तामजाम के साथ यूआईटी ठेकेदार व उसके कर्मचारी पहुंचे, जिन्होंने सरकारी सडक़ को बंगले में घुसाने की कवायद शुरू कर दी, जहां गिट्टी बिछाकर रोड रोलर से समतलीकरण का कार्य किया गया और बाद में मशीनों द्वारा डामरीकरण किया गया। चार घंटे में ताबड़तोड़ बंगले के अंदर तक सडक़ का काम पूरा कर दिया गया। सडक़ बनाने का यह काम यूआईटी द्वारा किया जा रहा था, लेकिन बंगले के अंदर तक सडक़ बनाने के आदेश यूआईटी के किसी अधिकारी और इंजीनियर ने नहीं दिए थे। क्रमददगारञ्ज ने जब यूआईटी अधिकारियों और इंजीनियर से बात की और मौके पर इंजीनियर पहुंचा, तब तक ये काम पूरा हो चुका था। यूआईटी अधिकारियों का कहना है कि बंगले के भीतर सडक़ बनाने के आदेश उनके द्वारा नहीं दिए गए, जबकि मौके पर काम कर रहा ठेकेदार जवाब देने से बचता रहा।

मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। किसके कहने पर पुलिस अधिकारी के बंगले में सडक़ बनाई जा रही है। मैं मामले का पता लगाकर आपको बताती हूं।
-कीर्ति राठौड़, ओएसडी, यूआईटी
मैं अभी मौके पर पहुंचा हूं। बंगले में सडक़ का काम पूरा कर लिया गया है। यूआईटी ने मुख्य मार्ग पर पेच वर्क निकालने के लिए ऑर्डर निकाले थे। अधिकारियों के बंगले में सडक़ बनाने के आर्डर नहीं दिए गए थे। ये सडक़ शायद पुलिस अधिकारी और ठेकेदार की मिलीभगत से बनी है। बंगले में बनाई गई सडक़ का भुगतान यूआईटी नहीं करेगी।
-निर्मल शर्मा, यूआईटी इंजीनियर

हत्या के बाद पैर काटकर चांदी के कड़े लूट ले गए हत्यारे

123उदयपुर। डबोक थाना क्षेत्र के भैंसड़ाकला गांव में बीती रात एक वृद्धा की नृशंस हत्या कर दी गई। वारदात के बाद हत्यारों ने चांदी के कड़े निकालने के लिए वृद्धा के दोनों पैर काट दिए। हत्यारे वृद्धा के शरीर पर पहनी बजंटी, कंदौरा और चांदी के कड़े ले गए। आज सुबह वृद्धा के पौते ने जब वद्धा का कमरे का दरवाजा खोला, तो वहां वृद्धा की पैर कटी लाश पड़ी थी, जिसे देखकर वह चिल्लाया, जिस पर पूरा गांव वहां एकत्र हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई शुरू करते हुए शव को एमबी हॉस्पीटल के मुर्दाघर में पहुंचाया।
पुलिस के अनुसार भैंसड़ाकला निवासी ८० वर्षीय नानीबाई पत्नी लक्ष्मण मेघवाल बीती रात घर में अकेली सो रही थी। इस दौरान परिजन खेत पर थ्रेसर से गेंहू निकलवा रहे थे। नानीबाई बेऔलाद है, लेकिन उसके देवर का पौता पुष्कर उसके मकान पर रात को सोने के लिए जाता था। बीती रात वह भी खेत पर गेंहू निकल रहे थे। इसलिए वहां नानीबाई के घर नहीं गया। आज सुबह पुष्कर और उसका भाई हीरालाल नानी बाई के घर पहुंचे, जहां ये दोनों दूसरे कमरे में जाकर सो गए। सुबह सात बजे हीरालाल लघुशंका के लिए निकला और उसने नानीबाई को आवाज लगाई, लेकिन कोई आवाज नहीं आई। इस पर उसने दरवाजा खोलकर देखा, तो नानीबाई की पैर कटी लाश पड़ी थी। उसकी चीख सुनकर आसपास के लोग एकत्र हो गए। सूचना पर पहुंची डबोक पुलिस ने बताया कि कमरे के हालात देखते हुए लगता है कि हत्यारों से वृद्धा ने काफी संघर्ष किया। हत्यारों ने कमरे में पड़ी कुल्हाड़ी और कूंट से ही वृद्धा की हत्या की और बाद में उसके पैर काट दिए। हत्यारे वृद्धा के शरीर पर पहने जेवर भी ले गए, जिनमें बजंटी, कंदौरा और पांव के कड़े शामिल है। पुलिस ने शव को एमबी हॉस्पीटल पहुंचा दिया है, जहां पोस्टमार्टम की कार्रवाई चल रही है। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने टीम गठित करके हत्यारों की तलाश शुरू कर दी है।

फिल्मी स्टाइल में थानेदार को गोली मार भागे तस्कर

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राजसमंद के दिवेर थाने की सातपालिया घाटी में हुई पुलिस और तस्करों के बीच फायरिंग, दोनों तरफ से हुए १७ राउंड फायर
-अमेरिकन हॉस्पीटल में आज सुबह दो घंटे चला ऑपरेशन, थानेदार रमेश कविया अब खतरे से बाहर

उदयपुर । दिवेर थाना क्षेत्र की सात पालिया घाटी में बीती रात पुलिस से हुई मुठभेड़ में डोडा-चूरा तस्कर फिल्मी स्टाइल में थानेदार रमेश कविया को गोली मारकर भाग छूटे। पुलिस और तस्करों के बीच करीब १७ राउंड फायर हुए, जिनमें १२ फायर तस्करों की तरफ से ramesh kaviyaकिए गए, जबकि पांच फायर पुलिस ने किए। इनमें से चार फायर घायल होने से पहले थानेदार रमेश कविया ने किए। थानेदार कविया की दायीं आंख के ऊपर गोली लगी, जिसे अमेरिकन हॉस्पीटल में आज सुबह हुए ऑपरेशन में निकाल दिया गया। डॉक्टरों ने कविया की हालत खतरे से बाहर बताई है।
पुलिस के अनुसार बोलेरो जीप से डोडा-चूरा तस्करी कर ले जाए जाने की सूचना पर बीती रात दिवेर थाने के सातपालिया घाटी में थानाधिकारी रमेश कविया मय जाब्ते ने नाकाबंदी की। इस दौरान पुलिस ने सडक़ पर पत्थर डाल दिए, ताकि वाहन को रोका जा सके। इसी बीच रात सवा दो बजे घाटी में एक बोलेरो जीप आती दिखी। तस्करों ने आगे पड़े पत्थर देखकर नाकाबंदी से २५ फीट दूर ही वाहन रोक दिया। इसी बीच रमेश कविया पुलिस जीप को तस्करों की बोलेरे के पीछे ले गए, ताकि तस्कर वहां से भाग न सके । इसी बीच ड्राइवर के पास बैठे तस्कर ने रिवाल्वर से फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में रमेश कविया ने भी फायर किए। तस्करों की तरफ से १२ फायर किए गए, जबकि रमेश कविया ने चार और एक कांस्टेबल ने एक फायर किया। इसी बीच एक गोली पुलिस जीप के कांच को तोड़ते हुए रमेश कविया की दायीं आंख के ऊपर गोली लगी।
पुलिसकर्मी घबराए, तस्कर भागे : थानेदार रमेश कविया के सिर में गोली लगते ही पुलिसकर्मी घबरा गए और जवाबी फायरिंग नहीं कर सके। ऐसे में फायर करते हुए तस्कर पुलिस जीप को टक्कर मारकर वहां से भाग छूटे। पुलिसकर्मी रमेश कविया को राजसमंद अस्पताल लाए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद कविया को उदयपुर के अमेरिकन हॉस्पीटल पहुंचा गया, जहां आज सुबह साढ़े छह बजे से साढ़ आठ बजे तक उनका ऑपरेशन चला। रमेश कविया का ऑपरेशन अमेरिकन हॉस्पीटल के डॉ. नरेंद्रमल, डॉ. रमाकांत सहित छह के मेडिकल स्टॉफ ने किया। डॉ. नरेंद्रमल ने बताया कि गोली आंखे के ऊपर दस सेंटीमीटर का छेद करते हुए सिर में लगी। यहीं गोली अगर आंख के नजदीक लगती, तो उनकी हालत चिंताजनक हो सकती थी।
रेलमगरा में पुलिस जीप को मारी टक्कर : इस मुठभेड़ से पहले चित्तौड़ से तस्कर बोलेरो जीप लेकर राजसमंद में रेलमगरा होकर जा रहे थे। इसी दौरान रेलमगरा में भी नाकाबंदी के दौरान ये तस्कर पुलिस जीप को टक्कर मारते हुए भाग निकले थे। बाद में इन तस्करों की दिवेर के सात पालिया घाटी में पुलिस से मुठभेड़ हो गई।

चित्तौड़ से चली सूचना पर हुई नाकाबंदी : बीती रात चित्तौड़ जिले के राशमी थाने से सूचना चली कि बोलेरो मेें कुछ तस्कर डोडा-चूरा लेकर जा रहे हैं। इस पर पूरे चित्तौड़ जिले में नाकाबंदी कराई गई। बाद में सूचना मिली कि तस्कर भीलवाड़ा होते हुए राजसमंद की तरफ जा रहे हैं। इस पर राजसमंद में भी नाकाबंदी कराई गई। इस सूचना पर दिवेर थानाधिकारी रमेश कविया भी स्टॉफ के साथ सात पालिया घाटी में नाकाबंदी कर रहे थे, तब तस्करों से उनकी मुठभेड़ हुई, जिसमें वे जख्मी हो गए। कविया के साथ नाकाबंदी में एएसआई जगदीशंद्र, हेड कांस्टेबल लाभूराम, कांस्टेबल शिवराज, अनिलकुमार, जगदीश राम, विजेंद्र और मुकेश कुमार शामिल थे। रमेश कविया के अमेरिकन हॉस्पीटल में भर्ती होने के बाद उनके साथ देवगढ़ एसएचओ कृष्णासिंह हैं। कविया के परिजन भी हॉस्पीटल में मौजूद है।

“पुलिस मुठभेड़ में दिवेर थानाधिकारी को गोली लगने के बाद पूरे संभाग में नाकाबंदी करवा दी गई है। संदिग्धों की तलाश की जा रही हैं। ऑपरेशन के बाद थानाधिकारी की हालत में सुधार है। सूचना चित्तौड़ जिले के राशमी थाने से मिली थी। इसके चलते चित्तौड़ जिले के पुराने तस्करों को राउंडअप किया जा रहा है” ।
-आनंद श्रीवास्तव, आईजी, उदयपुर रेंज

वाह रे वीर जवानों, हज़ारों शहीदों को भूल गए – बाज़ारू होगये अब हम भी।

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उदयपुर। मेरा बेटा मिनहाज खान 12th में पढ़ता है, सुबह से वह बड़ा उलझन में था, आर्ट्स का विद्यार्थी है, हिस्ट्री में उसकी ख़ास रूचि भी है। सुबह से में उसको देख रहा था दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका, टाइम्स ऑफ़ इंडिया न्यूज़ पेपरों को उसने बीसियों बार पलट पलट कर देखा। दिन भर सभी न्यूज़ चैनल बदल बदल कर देखता रहा। शाम को चहरे पर कन्फूजन के भाव लिए मेरे से सवाल किया ,… पापा आज 13 अप्रेल है, आज के दिन ही जालियां वाला बाग़ ह्त्या काण्ड हुआ था, और यहीं से हिन्दुस्तान में आज़ादी की चिंगारी ने एक ज्वाला का रूप लिया था। इस ह्त्या काण्ड में हज़ारों लोग शहीद हुए थे। …. फिर भी आज ना तो किसी अखबार में ना ही किसी न्यूज़ चैनल पे कोई इस बारे में न्यूज़ आई ना ही किसी ने उन शहीदों को याद किया। और तो और शोशल मीडिया पर भी कोई हलचल नहीं जब कि वहां पे तो बड़े बड़े ज्ञानी बुद्धिजीवी और बड़े बड़े देश भक्त बैठे है उन्होंने भी कोई ऐसी पोस्ट नहीं की।

उसकी इस बात का कुछ जवाब दे पाता उससे पहले उसने धड़ाधड़ तीन चार और दहकते हुआ सवाल दाग दिए,..

तो क्या मेने जो किताबों पढ़ा वो सिर्फ ऐसे ही कहानी बनाने के लिए कोर्स पूरा करने के लिए ही लिखा था क्या ?

जालियां वालां बाग़ का हम हिन्दुस्तानियों की आज़ादी से कोई लेना देना नहीं है क्या ?

जब इसका महत्त्व ही नहीं तो क्यों इसको इतिहास में इतना बढ़ा चढ़ा कर बता रखा है ?

क्या आज़ादी हमको ऐसे ही मुफ्त में मिल गयी ?

बात उस 16 साला युवा की सही है, जिसके बाद में भी सोचा में पढ़ गया, ये सवाल सिर्फ उसी के नहीं देश के हर उस युवा के होंगे जिसने अपने कोर्स में जलियाँ वाला बाग़ पढ़ा होगा उसने इतनी बात इसलिए भी की क्यों की वो एक आर्ट्स का छात्र है, और उसने जलियाँ वाला बाग़ ह्त्या काण्ड को पढ़ रखा है, लेकिन, जिन्होंने नहीं पढ़ा उनका क्या, उनको तो ये बताने वाले “हम” भी तो सो गए है, कि उनको ये बताएं कि देखो ये आज़ादी मुफ्त में नहीं मिली है, हज़ारों शहीदों का खून बहा है, अब तो ये याद दिलाने वाले भी इतने बाज़ारू हो गए है जिनके लिए कॉन्डम, जापानी तेल, और ना जाने कैसे कैसे वाहियात विज्ञापन ज्यादा जरूरी है, बजाय इसके कि ये बताएं की आज कोनसा और कितना बढ़ा दिन है।
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( उदयपुर के दैनिक अखबार मददगार ने जरूर लीड पर एक बड़ा सा फोटो लगा कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी उसके लिए मददगार का आभार )

 

 

 

बात ये इतनी छोटी नहीं है ,……. बात ये है कि आज ९६ साल के बाद हम अपनी जमीं अपना वतन खुद को भूले जा रहे है, आने वाली पीढ़ी को देने के लिए हमारे पास कुछ नहीं है ,। क्यों कि हमे कुछ याद ही नहीं तो क्या आने वाली पीढ़ी को बतायेगें । हम भारतीय बड़े बड़े देश भक्ति की बाते करने वाले, शोशल साइट फेसबुक और वॉट्सएप्प पर गालियां दे कर अपनी देशभक्ति जताने वाले महान देश भक्त उन हज़ारों लोगों की कुर्बानी को भुला बैठे है।

बात सिर्फ फेसबुक, वॉट्सएप्प की ही नहीं है । इस घटना को तो दुनिया का विकसित माना जाने वाला मिडिया तक भुला चुका है। सनी लीओन या किसी पोर्न स्टार तक की ज़रा सी हरकत पर आधा आधा घंटा प्राइम टाइम में खबरे चलाने वाला, बाज़ारू नेताओं की बेबुनियाद बातों पर घंटों तक बकवास करने वाला इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने भी पुरे दिन किसी चैनल पर एक मिनट के लिए जालियां वालां बाग़ पर कोई प्रोग्राम नहीं चलाया ।

यहाँ में नेताओं और संगठनों की बात तो क्या करू क्यों कि जलियाँ वाला बाग़ को जब हम लोग ही भुला चुके है तो ये तो मौका परस्त लोग है ये फिर क्यों याद करेंगे इसमे इनका कोई लाभ नहीं है। बात तो यहां आज सिर्फ आपकी और छाती ठोकने वाले हम मिडिया की है ।
इस शहादत पर कैसे और क्यों हमको मिडिया और देश भक्ति का बिगुल बजा कर माहोल गरमाने वालों को शर्म आने लग गई। जहाँ तक मुझे याद है मेने पढ़ा है, तो इस शहादत की चिंगारी ही ब्रिटिश शाशन को भारी पड़ी और इस चिंगारी ने ही ऐसा रूप लिया था जिसकी वजह से आज हम खुद को आज़ाद समझते है। लेकिन हमे इसके लिए ना तो समय है ना ही हमे पता है । कल ऐसा भी दिन आएगा जब देश का युवा ये कहेगा ,… कोण था जलियाँ वाला बाग़ क्या हुआ था ,…. क्या कोई रेव पार्टी हुई थी या,… फिर किसी फिल्म की शूटिंग थी या कोई और मजेदार बात हुई थी ,…। बिलकुल ऐसा ही होगा ,…. धन्यवाद आपका भी और हमारा भी ।

जाते जाते बता दू जलियाँ वाला बाग़ क्या था :
भारत के पंजाब प्रान्त के अमृतसर में स्वर्ण मन्दिर के निकट जलियाँवाला बाग में १३ अप्रैल १९१९ (बैसाखी के दिन) हुआ था। रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी जिसमें जनरल डायर नामक एक अँग्रेज ऑफिसर ने अकारण उस सभा में उपस्थित भीड़ पर गोलियाँ चलवा दीं जिसमें १००० से अधिक व्यक्ति मरे और २००० से अधिक घायल हुए ।यदि किसी एक घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था तो वह घटना यह जघन्य हत्याकाण्ड ही था। माना जाता है कि यह घटना ही भारत में ब्रिटिश शासन के अंत की शुरुआत बनी। ……।

भारतीय रेलवे के निजीकरण का ख़ाका तैयार ?

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भारत रेल कंपनियों का स्वर्ग है.
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भारतीय रेल नेटवर्क के पास 9,000 इंजन हैं जिनमें 43 अभी भी भाप से चलने वाले हैं. इंजनों का यह विशाल बेड़ा क़रीब पांच लाख माल ढोने वाले डिब्बों और 60,000 से अधिक यात्री कोचों को 1 लाख 15 हज़ार किलोमीटर लंबे ट्रैक पर खींचते हैं.
रेलवे 12,000 से अधिक ट्रेनों का संचालन करता है, जिसमें 2 करोड़ 30 लाख यात्री रोज़ यात्रा करते हैं.

एक ‘ऑस्ट्रेलिया’ को रोज़ ढोती है भारतीय रेल
यह विशाल सरकारी कंपनी ‘राज्य के अंदर एक राज्य जैसा’ है. रेलवे के अपने स्कूल, अस्पताल और पुलिस बल है. इसमें कुल 13 लाख कर्मचारी काम करते हैं और इस लिहाज से यह दुनिया की सातवां सबसे ज़्यादा रोज़गार देने वाली कंपनी है.
लेकिन इतना बड़ा उपक्रम ज़ल्द ही टूट सकता है.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल जब अपना कार्यकाल संभाला तभी से वो कड़े सुधारों की कमी के लिए झिड़की देते रहे हैं.
पिछले सप्ताह भारतीय रेलवे के पुनर्गठन को लेकर एक विवादास्पद प्रस्ताव आया. लेकिन काफ़ी चर्चा पैदा करने की संभावना होने के बावजूद इसने बहुत कम ही हलचल पैदा की.
यह प्रस्ताव एक ऐसी कमिटी की ओर से आया है जो भारतीय रेलवे में सुधार के लिए विकल्प तलाश रही है. इसमें रेलवे के निजीकरण के ब्रितानी नुस्खे पर ज़्यादा भरोसा किया गया है.
कमिटी की अंतरिम रिपोर्ट बिल्कुल साफ़ है: रेलवे को ‘प्रतियोगिता की एक ख़ुराक’ दिए जाने की ज़रूरत है.
इसमें कहा गया है कि रेलवे नेटवर्क को निज़ी कंपनियों के लिए खोल देना चाहिए ताकि ये कंपनियां यात्री और माल ढुलाई जैसी सेवाओं में राज्य के साथ मुक़ाबला कर सकें.

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ब्रिटेन की राह पर
कमिटी की सिफ़िरिशों में तर्क दिया गया है कि ब्रिटेन की तरह ट्रेन संचालन के काम को पटरियों से अलग कर देना चाहिए.
ब्रिटेन की तरह, पूरी प्रक्रिया को ऐसे एक स्वतंत्र नियामक की निगरानी पर छोड़ देना चाहिए, जिसकी ज़िम्मेदारी यह तय करना हो कि नए निजी ऑपरेटरों को समान रूप से रेल पटरियों को इस्तेमाल करने का मौका मिले.
कमिटी ने रेलवे से जुड़े उद्योगों में भी निजी हिस्सेदारी की सिफ़ारिश की है. निजी कंपनियां पहले ही रेलवे के लिए बोगियां बनाती हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें यात्री डिब्बों और इंजन बनाने की भी इजाज़त देनी चाहिए.
कमिटी के सदस्यों को डर है कि प्रतियोगिता में भारतीय रेलवे का निर्माण विभाग पिछड़ जाएगा इसलिए उन्होंने इनकी जगह एक नई और स्वतंत्र कंपनी बनाने का सुझाव दिया है.
भारतीय रेलवे, एसी कोच
यह सब सार्वजनिक मालिकाने के तहत ही रहेगा, लेकिन सरकार की निररानी में होगा. इसे तनख़्वाह तय करने और कर्ज़ लेने की आज़ादी होगी.
इस दरम्यान, पूरे नेटवर्क का प्रबधंन और लेखातंत्र को पूरी तरह पुनर्गठित करने की ज़रूरत है.
कमिटी के चीफ़ अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय का कहना है कि कोई प्रकल्प फ़ायदे में रहेगी या नुक़सान में यह तय करना असंभव है.

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मोदी वादा तोड़ेंगे?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय रेलवे को अपने असंख्य अस्पताल, स्कूल, पुलिस बल और अन्य अतिरिक्त गतिविधियों से हाथ खींच लेना चाहिए.
भारत की सबसे बड़ी रेलवे यूनियन नें इस रिपोर्ट की आलोचना की है और दावा किया है कि यह रेलवे के निजीकरण की कोशिश है.
हालांकि नरेंद्र मोदी इस बात से साफ़ इनकार किया था.
मोदी ने वाराणसी में रेलवे के एक कार्यक्रम में ट्रेड यूनियनों को भरोसा दिलाया था, “हम रेलवे का निजीकरण नहीं करने जा रहे हैं. ऐसा करने की ना तो हमारी इच्छा है और ना ही हम इस ओर सोच रहे हैं.”
हालांकि यूनियनों से किए गए अपने वादे को बिना तोड़े मोदी कमिटी की सभी सिफ़ारिशों को स्वीकार कर सकते हैं.
निजी कंपनियों की चांदी?
कमिटी के सदस्य और प्रॉक्टर एंड गैंबल (इंडिया) इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रहे गुरुचरन दास कहते हैं, “निजीकरण और प्रतियोगिता में अंतर होता
वे तर्क देते हैं, “हम रेलवे को बेचना नहीं चाहते. हम इस क्षेत्र में प्रतियोगिता लाना चाहते हैं. ऐसा होने से अधिक विकल्प होंगे, क़ीमतें कम होंगी और स्टैंडर्ड ऊंचा होगा.”
लेकिन निजीकरण को लेकर यूनियनों की बेचैनी को आप बेजा क़रार नहीं दे सकते. हो सकता है कि इसे बेचने की अभी कोई मंशा न हो, लेकिन ये सारे नए उद्योग भविष्य में बेचे जाने के लिए तैयार हो चुके होंगे.
इस बात से ट्रेन कंपनियों को चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है. नई ट्रेन कंपनियों के लिए यह एक सुनहरा मौका है.

so- BBC – hindi

शराब माफियाओं के सिंडीकेट ने सब कर रखा है “सेट”

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आबकारी और पुलिस विभाग की बंदियां फिक्स, पिछले छह माह में एक भी शराब से भरा ट्रक नहीं पकड़ा ।

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उदयपुर। पिछले छह माह से जिले में शराब तस्करी कर ले जाई जा रही एक भी ट्रक या कोई बड़ी खेप नहीं पकड़ी गर्ई। ऐसी किसी कार्रवाई को न तो पुलिस ने अंजाम दिया है और ना ही आबकारी विभाग ने कोई रूचि दिखाई है। पता चला है कि जिले में शराब तस्कर, पुलिस और आबकारी के बीच एक सिंडीकेट काम कर रहा है, जिसके तहत सबको सेट कर लिया गया है। पिछले छह माह से ऐसा लगा रहा है, जैसे उदयपुर-अहमदाबाद हाइवे से शराब तस्करी बंद हो गई है, लेकिन ऐसा नहीं है तस्करों द्वारा बनाए गए सिंडीकेट ने ऐसा तालमेल बिठाया है कि सबकुछ आराम से चल रहा है। बस अवैध शराब की उन्हीं गाडिय़ों को पकड़ा जा रहा है, जो इस सिंडीकेट में शामिल नहीं है।
महाराष्ट्र, गुजरात जाने का मुख्य हाइवे नंबर आठ उदयपुर से गुजरता है, जिससे सर्वाधिक शराब की तस्करी होती है। इसीलिए कुछ समय पहले महीने में पांच से दस ट्रकें शराब की पकड़ी जा रही थी। एसपी दिनेश एमएन के समय में शराब तस्कारों की अधिकतर गाडिय़ां पकड़ी गई। सर्वाधिक कार्रवाई गोवर्धनविलास और प्रतापनगर पुलिस ने की, लेकिन पिछले छह माह से एक भी तस्करी की गाड़ी को पुलिस या आबकारी विभाग के अधिकारियों ने नहीं पकड़ा।
आबकारी और पुलिस के अधिकारी अधिकारिक तौर पर तो कुछ नहीं कहते हैं, लेकिन जब शराब तस्करी को लेकर सवाल किया जाता है, तो उनका सिर्फ एक ही जवाब होता है कि तस्करों ने रूट बदल दिय है। इन दिनों सिरोही, पिंडवाड़ा सहित अन्य मार्गों से हरियाणा निर्मित शराब गुजरात पहुंचाई जा रही है। जब कि शराब से जुड़े ही कुछ व्यवसाइयों का कहना है कि शराब माफियाओं का बनाया हुआ सिंडिकेट अब इतना मजबूत हो गया है कि इसके तहत तस्करी होने वाली शराब को कोई नहीं पकड़ता और अगर कोई नया तस्कर इससे अलग हट कर सीधा मुनाफ़ा कमाने के लालच में काम शुरू करता है तो उसको आबकारी विभाग या पुलिस द्वारा कहीं न कहीं दबोच लिया जाता है।
क्या है सिंडिकेट : शराब कारोबारियों की अंधी कमाई के बारे में हर कोई जानता है, लेकिन इस कमाई में कुछ दिक्कतें भी आती है, जिसे देखते हुए शराब कारोबारियों ने सफेद पोश बड़े कारोबारियों के साथ मिलकर सिंडीकेट बना लिया है। इसमें सभी को हिस्सेदारी के हिसाब से शेयर मिलता है। इसमें शराब के कारोबारी धंधे को संभालते है और सिंडीकेट के सफेदपोश पुलिस, प्रशासन और राजनीति से जुड़े लोगों को अपने साथ मिलाने का काम करता है। इस अवैध कारोबार में सबसे ज्यदा दिक्कत वसूली और कमीशन को लेकर होती थी, लेकिन सिंडीकेट के बनने के बाद यह धंधा पुरी ईमानदारी के साथ किया जा रहा है।
मुखबिर भी सेट : शराब तस्करी से जुड़े कई पुराने ट्रक ड्राइवर और खलासियों को पुलिस ने ही अपना मुखबिरा बना लिया था, जो अवैध शराब की गाडिय़ों को उड़वाने में लग गए थे। पहले पुलिस मुखबिरों को ५० से सौ पेटी तक मुखबिरों को दी थी, लेकिन बाद में शराब तस्करों ने मुखबिरों का भी कमिशन बांध दिया। अब मुखबिरों को भी मंथली दी जाती है। मुखबिर भी सिंडीकेट के प्रभाव के आगे किसी के साथ धोखा नहीं करते हैं।

अभियांत्रिकी छात्रों का देश निर्माण में योगदान- टॉम अलबानिस

DSC_3858उदयपुर । महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संघटक प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय में हिन्दुस्तान जिंक (वेदान्ता) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टॉम अलबानिस ने अभियांत्रिक छात्रों को देश निर्माण में अपने योगदान देने का आव्हान किया। उन्होनें अपने उद्बोधन में हिन्दुस्तान जिंक का उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में विद्यार्थियों को अपनी इन्नोवेटिव सोच को प्रधानता देनी चाहिये जिससे वे भविष्य में न केवल अपने लिए अपितु समाज के अन्य व्यक्तियों के लिए भी रोजगार के अवसर उत्पन्न कर सकेगें।

उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि आने वाले 10 वर्षो में प्राकृतिक संसाधनों का चार गुना खपत बढ़ जायेगी अतः उनके खनन के लिए पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए जैव विविधता बनाए रखना आवश्यक होगा। निम्न स्तर के खनिजों का दोहन के लिए आर्थिक रूप से सक्षम तकनीक का विकास आवश्यक होगा । सुरक्षित खनन के लिए विभिन्न संकायों के अभियन्ताओ का योगदान महत्वपूर्ण है।

इस अवसर पर श्री अखिलेष जोषी, हिन्दुस्तान के जिंक मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने भी अपने उद्बोधन में कहा कि सीटीएई के सभी आठ ब्रान्चों के तृतीय वर्ष में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को 50 हजार की स्कॉलरषिप प्रदान की जायेगी।

उन्होनें कहा कि सीटीएई के उच्च शैक्षणिक स्तर को देखते हुए प्लेसमेंट में खनन अभियांत्रिकी के साथ ही बाकी सभी ब्रान्चों के लिए भी सीटीएई के विद्यार्थियों को वरीयता प्रदान की जायेगी।

कार्यक्रम के आरम्भ में वेदान्ता द्वारा निर्मीत एक डॉक्यूमेन्ट्री फिल्म का भी प्रर्दषन किया गया। छात्रों द्वारा पुछे गये विभिन्न रोजगार संबंधी प्रष्नों का श्री टॉम अलबानिस ने उचित जबाव देकर विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान किया व सन्तुष्ट किया। कार्यक्रम की शुरूआत में महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ0 बी.पी. नन्दवाना ने महाविद्यालय की विभिन्न गतिविधिओं की जानकारी देते हुए कहा कि गत वर्ष इस महाविद्यालय द्वारा अपनी स्थापना की स्वर्ण जयन्ती मनाई गयी है। उन्होनें यह भी जानकारी दी कि महाविद्यालय को एन.आई.टी.टी.टी.आर द्वारा सर्वश्रेष्ठ महाविद्यालय का खिताब भी प्रदान किया गया है। इस महाविद्यालय के छात्रों ने विभिन्न राष्ट्रीय एवं अर्न्तराष्ट्रीय संगठनों में उल्लेखनीय कार्य करके देष का नाम रोषन किया है। कार्यक्रम के अंत में सीटीएई प्रषासनिक अधिकारी डॉ0 दीपक शर्मा ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया।

टोम अल्बनीज ने जावर में किया HZL की प्रदर्शनी का उद्घाटन

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उदयपुर । उदयपुर के 40 कि.मी. दक्षिण में स्थित जावर की पहाड़ियों में आज से 2500 वर्ष पूर्व जस्ता एवं सीसा धातु का खनन एवं प्रद्रावण किया जाता था। पूरे क्षेत्र में फैले हुए प्राचीन खनन एवं प्रद्रावण अवशेष इस तथ्य के मूक प्रमाण है। आम जन में इसकी महत्ता प्रसारित करने के उद्देश्य से हिन्दुस्तान जिंक ने पहल करते हुये प्राचीन रामानाथ मन्दिर के पूर्व में एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन आज 10 अप्रेल 2015 को वेदान्ता रिसोर्सेस पी.एल.सी. के समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी टोम अल्बनीज द्वारा किया गया। समारोह में हिन्दुस्तान जिंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अखिलेश जोशी एवं उप-मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील दुग्गल उपस्थित थे।
संग्राहलय में प्राचीन खनन एवं प्रद्रावण पद्धति का चित्रों द्वारा प्रदर्शन किया गया। अवलोकन के पश्चात श्री अलबनीज ने इस क्षेत्र को संग्राहलय के रूप विकसित करने की आवश्यकता जताई जिससे आम जन विशेषकर विद्यार्थियों को हमारी विरासत से अवगत कराया जा सके।