
उदयपुर। उदयपुर लोकसभा सीट से जहां भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज मैदान में है, वही बुलंद हौंसलों से जीत-हार की फि़क्र से दूर अन्य पार्टियों के छह प्रत्याशी भी मैदान में डटे हुए हैं। जिन्हें चाहे इस बार उनकी जीत नजर नहीं आ रही हो, लेकिन हौंसले इतने बुलंद है कि अभी नहीं तो कोई बात नहीं, लेकिन भविष्य में उनकी पार्टी का परचम जरूर लहराएगा। ऐसे ही जोश से भरे हुए ये प्रत्याशी अपने गिने चुने कार्यकर्ताओं के साथ एकल वाहन में उदयपुर लोकसभा सीट के हर क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं।
क्रमददगारञ्ज ने जब इन छह प्रत्याशियों से बात की, तो किसी ने कहा कि हमे भरोसा है हमारी जीत पर, तो किसी ने कहा इस बार भले हार हो, लेकिन एक दिन जरूर आएगा, जब हमारी पार्टी देश को इन दो भ्रष्टाचारी पार्टियों के चंगुल से बचाएगी। किसी ने अपनी तुलना हाथी के सामने चींटी से कर यह बता दिया कि हाथी को परास्त भी एक चींटी ही करती है। इन सभी प्रत्याशियों की दिनचर्या भी वैसी ही है, जैसे भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों की होती है। दिनभर अपने एक वाहन में गांव-गांव के दौरे, खुद पर्चें बांटना, तो खुद डोर-टू-डोर जाकर अपने पक्ष में वोट मांगना।
छह प्रत्याशी : उदयपुर लोकसभा सीट से भाजपा के अर्जुन मीणा और कांग्रेस के रघुवीर मीणा के अलावा छह और प्रत्याशी है, जिसमे आप पार्टी के डॉ. वेला राम, सीपीआई (माले) के गौतम मीणा, बीएसपी के लक्ष्मण भील, एसपी के लक्ष्मीलाल गमेती, सीपीआई के मेघराज तावड़ और बहुजन मुक्ति के प्रभुलाल मीणा है।
हाथी को चींटी परास्त करती है : डॉ. वेलाराम
आम आदमी पार्टी (आप) के डॉ. वेलाराम कहते हैं कि मेरा मानना है कि मेरे सामने कांग्रेस और भाजपा जैसे दो हाथी है और में उनके सामने एक चींटी के सामान हूं, लेकिन एक हाथी को चींटी ही परास्त कर सकती है। वेलाराम का कहना है कि मुझे दोनों पार्टी के प्रत्याशियों के सामने सवाल-जवाब के लिए खड़ा कर दो। मैं उन्हें लाजवाब कर दूंगा। पिछले 65 सालों में इन दोनों पार्टियों के नेताओं ने शहर पर अपना राज जमाया है और शहर को गर्त में धकेल दिया है। क्रआपञ्ज जनता की उम्मीद बन कर उभरी है और मुझे अपनी जीत पर पूरा भरोसा है।
धुंआधार चल रहा है प्रचार : गौतम लाल
सीपीआई (माले) के प्रत्याशी गौतमलाल मीणा का कहना है कि हमारा प्रचार गांव-गांव में धुंआधार चल रहा है। जनता का अच्छा समर्थन भी मिल रहा है। माना कि हम बड़ी पार्टियों की तरह पैसा नहीं बांट सकते, लेकिन हम इनको बड़ी टक्कर देंगे। इनकी जीत इतनी आसान नहीं होगी। 20 लोगों की टीम लगी हुई है, जो प्रचार कार्य में जुटी हुई है। ग्रामीण इलाकों में मुझे अच्छा समर्थन मिल रहा है।
भविष्य हमारा है : गमेती
सपा प्रत्याशी लक्ष्मीलाल गमेती का कहना है कि अभी हमारी जीत संभव नहीं है, लेकिन भविष्य हमारा है। चाहे मैं जीत हासिल नहीं कर सकूं, लेकिन साठ हज़ार से एक लाख तक वोट जरूर लाऊंगा और एक दिन ऐसा आएगा जब मेवाड़ में सपा का प्रत्याशी जीतेगा।
जीत-हार से नहीं पड़ता फर्क : भील
बीएसपी प्रत्याशी लक्ष्मण भील अपनी चुनावी भाग-दौड़ के बीच रूककर बात करते हुए बताते हंै कि जीत-हार से कोई फर्क नहीं पड़ता। हमारी मेहनत में कोई कमी नहीं है। हम जीत के इरादे से ही मैदान में उतरे हैं, हो सकता है इस बार नाकामी मिले, लेकिन यह नाकामी एक दिन कामयाबी में बदलेगी। सुबह से शाम तक हर क्षेत्र का दौरा करते हैं, जहां भी गए सामने आया कि जनता कांग्रेस और भाजपा से त्रस्त है और एक दिन ऐसा आएगा जब जनता हमें चुनेंगी।
हम होंगे कामयाब : तावड़
सीपीआई के प्रत्याशी मेघराज तावड़ के मोबाइल की रिंग टोन ही है क्रक्र हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब एक दिन…ञ्जञ्ज, जब उनसे बात की तो जीत के विश्वास के साथ वे कहते हैं कि चाहे हमारे पास कार्यकर्ता और संसाधन की कमी है, लेकिन देश के लिए लडऩा हमारा फर्ज है। बड़ी राजनैतिक पार्टियों के लिए तो बड़े-बड़े अफसर अपनी नौकरी बजा रहे हैं, लेकिन हम भी हार नहीं मानेंगे। आज नहीं, तो कल कम्युनिस्टों का सूरज उगेगा। हम आज जीतने के लिए नहीं लड़ रहे। हम तो उन आने वाले दिनों की तैयारी कर रहे हैं, जब देश में जनता का राज होगा। मजदूर का राज होगा।
हमारा घोषणा पत्र सबसे बेहतर : प्रभुलाल
बहुजन मुक्ति पार्टी के प्रत्याशी प्रभुलाल को अपने घोषणा पत्र पर इतना भरोसा है कि यदि कोई एक बार उसको पढ़ ले, तो कभी भी भाजपा कांग्रेस को वोट नहीं दे। यही नहीं उनका दावा है कि हमारी पार्टी का घोषणा पत्र भाजपा और कांग्रेस के घोषणा पत्र से बेहतर हैं। जिस दिन हमारी सरकार आई, उस दिन देश की दशा बदल जाएगी। भ्रष्टाचारियों से देश को मुक्ति मिल जाएगी। प्रभुलाल कहते हैं इस देश का भविष्य है बहुजन शक्ति पार्टी। अभी भी लोग समर्थन दे रहे हंै, माना कि अभी मेरी जीत नहीं होगी, लेकिन हमेशा हार भी नहीं होगी। हमने अपना संदेश घर-घर तक पहुंचाया है। जनता जागेगी एक न एक दिन।
‘हम होंगे कामयाब एक दिन…
पुलिस विभाग के पास नहीं जवान !
जेल में मारपीट के सात आरोपियों को चुनाव के बाद किया जाएगा गिरफ्तार, जेल प्रहरी के साथ मारपीट का मामला

उदयपुर। उदयपुर केंद्रीय कारागृह में रविवार को गश्त के दौरान एक जेल प्रहरी की विचाराधीन कैदियों द्वारा की गई पिटाई के मामले में पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर पा रही है, जबकि वह न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्टॉफ की कमी के चलते आरोपियों की गिरफ्तार अब चुनाव बाद की जाएगी। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की है, लेकिन पुलिस विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि राज्य में लोकसभा के चुनाव के चलते विभाग के पास जवानों की कमी है। इस कारण अभी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। पुलिस की इस कार्यशैली से जेल में पीडि़त प्रहरी की जान को खतरा भी हो सकता है, क्योंकि इस वारदात के बाद पीडि़त प्रहरी और हमलावर विचाराधीन कैदी जेल में ही है।
गौरतलब है कि रविवार को केेंद्रीय कारागृह में प्रहरी महावीरसिंह गुर्जर गश्त कर रहा था। इसी दौरान बैरिक संख्या 18 में विचाराधीन बंदी दिलीपनाथ, प्रवेश उर्फ रिंक्कु, अब्दुल जोसफ सहित अन्य कैदी जेल की मुख्य दीवार के पास घूम रहे थे, तभी प्रहरी महावीर ने उनको आशंका के चलते बैरिक में जाने के लिए कहा। बंदी बैरिक में चले गए, जहां प्रहरी भी गया। वहां पर प्रहरी पर कंबल डालकर बंदियों ने उसकी पिटाई शुरू कर दी है। प्रहरी की आवाज सुनकर अन्य प्रहरी आए, जिन्होंने महावीर को बचाया। इस संबंध में सूरजपोल पुलिस थाने में जेल प्रहरी महावीर की रिपोर्ट पर सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है, लेकिन स्टॉफ की कमी के चलते अभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की जा सकी है।
ट्टा-कट्टा बकरा देता है रोजाना 1 किलो दूध,

Udaipur.गुजरात अमरेली जिले का एक छोटा सा गांव बाबरा इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में हैं। वह भी एक बकरे की वजह से। दरअसल इस गांव में एक बकरा है, जो रोजाना एक किलोग्राम दूध देता है। यह बकरा गांव में स्थित मंदिर के एक महंत के पास है। यह घटना पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। महंत के बताए अनुसार इस हैरतअंगेज घटना को देखने अब दूर-दराज के गांव वाले भी यहां आने लगे हैं।
इस बारे में मंदिर के महंत सीमारामबापू का कहना है कि कुछ महीनों पहले तक यह साधारण बकरा ही था। लेकिन अचानक उसके थन निकल आए और जब उन्होंने उसे दुहना शुरू किया तो यह बिल्कुल बकरी के दूध जैसा ही था।
इसमें भी आश्चर्य की बात यह है कि बकरे के थन को किसी भी समय दुहा जाए, उसमें से दूध आने लगता है। महंत के बताए अनुसार दिन भर में यह बकरा अब लगभग एक किलोग्राम दूध देने लगा है।
बूथ पर मोबाइल ले जाने पर होगी कार्रवाई
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिलने पर हो सकती है परेशानी
उदयपुर। मतदान के दौरान मोबाइल लेकर बूथ पर पहुंचना भारी पड़ सकता है। इलेक्शन में बूथ पर मोबाइल लेकर जाने पर पूरी तरह से रोक रहेगी। सौ मीटर के दायरे में मोबाइल की घंटी बजी, तो खैर नहीं। यह निर्देश इलेक्शन कमीशन ने जारी किया है। इलेक्शन कमीशन से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे बूथ की गोपनीयता बनी रहेगी।

इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बढ़ा सकते हैं प्रॉब्लम
वोटिंग के दौरान किसी तरह का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लेकर जाने पर आप मुसीबत में पड़ सकते हैं। चेकिंग के दौरान पकड़े जाने पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा किसी भी तरह का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लैपटॉप, टैबलेट और कैमरा लेकर बूथ पर जाने पर भी दिक्कत हो सकती है।
नहीं खा पाएंगे गुटखा, घर रखकर आए थैला
वोट डालने के लिए लाइन में लगकर गुटखा खाने, तंबाकु का सेवन करने, पान खाने पर भी आफत आ सकती है। इस बार पोलिंग बूथ पर पान, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट, माचिस लेकर जाने पर रोक रहेगी। गर्मी होने के बावजूद कोई भी वोटर पानी लेकर बूथ के भीतर नहीं जा सकेगा। बोतल बंद पानी साथ होने पर उसे बाहर रखना होगा। किसी तरह का थैला लेकर भी बूथ के भीतर नहीं जा सकेंगे।
प्रचार में टॉकटाइम का ऑफर!

व्हाट्सअप पर दोनों ही पार्टियों के नाम से मिथ्या मैसेज
उदयपुर। लोकसभा चुनाव को लेकर देश की दोनों ही बड़ी पार्टियां इन दिनों जहां प्रचार-प्रसार में अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। वहीं इन के प्रचार अभियान के तहत इस बार लोकसभा चुनाव में नये-नये तरीके भी अपनाए गए हैं। आजकल व्हॉटसअप पर एक मिथ्या मैसेज, जो कि दोनों ही पार्टियों के नाम से भेजा जा रहा है, जिसमें इस मैसेज को 10 लोगों को भेजने पर 551 रुपए टॉकटाइम की बात की जा रही है।
क्रमददगारञ्ज रिपोर्टर के मोबाइल पर आज एक ऐसा ही मैसेज आया, जिसमें लिखा हुआ है- क्रवोट फॉर कांग्रेस-सेंड दिस टू 15 फैंड्स एण्ड गेट 551.49 बेलेंस फ्रीÓ। निर्वाचन आयोग की सख्ती के चलते, जहां इन दिनों शहर में होर्डिंग्स, बैनरों एवं अखबारों में छपने वाले विज्ञापनों पर तो काफी हद तक रोक लगी है क्योंंकि इस समस्त खर्चों को प्रत्याशी के व्यय में जोड़ा जाता है। ऐसे में प्रत्याशी Óयादा प्रचार प्रसार के व्यय से बच रहे हैं। परन्तु सोश्यल साइट्स पर विज्ञापन बनाकर डालना एवं पार्टी का प्रचार जोर-शोर से चल रहा है। ऐसे प्रचार पर हो रहे खर्चें पर भी चुनाव आयोग को ध्यान देने की जरूरत है।
शादी को उजागर करके संकट में फंसे मोदी

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी से प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी नई उलझन में फंसते दिखाई पड़ रहे हैं। यह उलझन वड़ोदरा संसदीय सीट से नामांकन पत्र दाखिल करने के साथ ही पैदा हुई है। विवाद है उनकी शादी का। श्री मोदी ने नामांकन पत्र के शादी वाले कॉलम में खुद को विवाहित बताते हुए पत्नी का नाम जसोदा बैन अंकित किया है। यह पहली बार है, जब उन्होंने खुद को विवाहित स्वीकार किया है।
इससे पहले लड़े सभी चुनावों में श्री मोदी ने नामांकन पत्र के इस कॉलम को खाली छोड़ दिया था। चंूकि अब सुप्रीम कोर्ट ने नामांकन पत्र के किसी भी कॉलम को खाली छोडऩे पर उम्मीदवारी निरस्त करने का प्रावधान कर दिया है, साथ ही झूठी जानकारी देने पर सजा का प्रावधान पहले से ही है; इसलिए श्री मोदी की शादी का राज उजागर हो पाया है। सारे मामले की पड़ताल करने वाले पत्रकारों का कहना है कि शादी के समय नरेेंद्र मोदी नाबालिग नहीं थे। उस समय श्रीमती जसोदा बेन की उम्र भी १९ वर्ष थी। इस प्रकार श्री मोदी ने शादी के बाद ग्रहस्थ जीवन के कर्तव्यों का निर्वाह नहीं किया और पत्नी के प्रति क्रूरता का आचरण करके उसे छोड़ दिया। बताया गया है कि उपर्युक्त आरोप के अलावा श्री मोदी पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से झूठ बोलने का आरोप भी सामने आया है। यह कहा जा रहा है कि विवाहित को संघ का प्रचारक नहीं बनाया जाता है। श्री मोदी ने शादी के बाद संघ का प्रचारक बनने के लिए खुद को अविवाहित बताया। अब यह सवाल संघ से भी पूछा जा रहा है कि संघ से यह बड़ा झूठ बोलने वाले श्री मोदी के खिलाफ क्या कोई कार्रवाई की जाएगी? या संघ अपने नियम कायदों में शिथिलता प्रदानकरते हुए श्री मोदी को क्षमादान देगा? इधर नरेंद्र मोदी के चुनाव आयोग को दिए एफिडेविट में पत्नी मानने के बाद जशोदाबेन गुरुवार की सुबह तीर्थयात्रा पर निकल गईं। उधर गुजरात में आम आदमी पार्टी के सदस्य निशांत वर्मा ने राज्य चुनाव आयुक्त अनिता करवाल को एक शिकायती पत्र लिखकर ‘2012 के विधानसभा चुनाव में 53- मणिनगर सीट का परिणाम और उस समय मोदी की जीत को रद्दÓ करने की मांग की है। इससे वह ‘तुरंत आधार पर गुजरात विधानसभा से अयोग्य हो जाएंगे, जिसके जरिए वह राज्य के मुख्यमंत्री हैं।Ó
बीजेपी के एक सूत्र ने बताया, कि सुप्रीम कोर्ट का यह आर्डर पिछली तारीख से लागू नहीं होने की वजह से इसका पुराने हलफनामों पर कोई असर नहीं होगा। सूत्र के मुताबिक, इसे देखते हुए मोदी पर आयोग से झूठ बोलने का आरोप नहीं लगाया जा सकता। बीजेपी ने गुरुवार को नरेंद्र मोदी के बड़े भाई सोमाभाई पटेल की ओर से एक बयान जारी कर विवाह से मोदी को अलग कर दिया। उनका कहना है कि नरेंद्र भाई 40-50 साल से परिवार से अलग है। इसे उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
बयान में सोमाभाई ने कहा है कि उनका परिवार निर्धन था और परंपराओं से जुड़ा होने के साथ ही सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक तौर पर पिछड़ा था। इस मामले को उसी नजर से देखा जाना चाहिए।
बयान में आगे कहा गया है कि जशोदाबेन चिमनभाई मोदी के साथ विवाह केवल एक परंपरा के तौर पर रहा और मोदी ने लगभग उसी समय घर छोड़ दिया था। बयान में कहा गया है, ‘आज 40-50 वर्षों के बाद भी नरेंद्रभाई परिवार से अलग हैं।Ó इसमें यह अपील की गई है कि ’40-50 साल पुरानीÓ घटना को एक निर्धन और परंपरागत परिवार के नजरिए के साथ ही उस समय की हकीकत के तौर पर देखना चाहिए।
प्रचार सामग्री बेचने वालों का धंधा ठप

आयोग की सख्ती से नहीं दिख रहा चुनावी माहौल
उदयपुर। एक समय था, जब चुनाव आते ही गली-मोहल्लों में माहौल देखने लायक होता था। घरों की छतों पर पार्टियों के झंडे लगे हुए होते थे, दुकानों के बाहर प्रत्याशियों के पोस्टर टंगे होते थे। शोरगुल की बातें करें, तो थोड़े-थोड़े समय में ही लाउड स्पीकरों पर बजते हुए गीत और उनके बीच में प्रत्याशियों के वोट डालने की अपील करते कार्यकर्ता दिखाई पड़ते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। न तो झंड़े-पोस्टर दिखाई पड़ रहे है और ना ही चुनावी लाउड स्पीकर का शोर गुल सुनाई पड़ रहा है।
लोकसभा चुनाव के लिए मतदान दिवस में छह दिन शेष रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग की ऐसी सख्ती है कि शहर में पार्टियों के झंडे-बैनर ढूंढे से भी नहीं मिल रहे। चुनाव आयोग ने खर्च सीमा तो 70 लाख कर दी है, लेकिन प्रत्याशी इस डर से कि कही खर्च ज्यादा ना हो जाए, हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं। शहर के मुख्य मार्गों पर पोस्टर दिख भी जाए, लेकिन गांवों में तो यह भी नहीं है।
धंधा ठप्प : शहर में प्रचार सामग्री बेचने वालों की मानें, तो उनका व्यापार पहले के मुकाबले दस फीसदी रह गया है। आलम यह है कि सबसे ज्यादा वोटिंग करने वाली कच्ची बस्तियां और मुस्लिम इलाकों में भी प्रचार सामग्री नजर नहीं आ रही है। कहीं कोई सभा या प्रत्याशी के जनसंपर्क का कार्यक्रम होता है, तो जरूर झंडे बैनर लग जाते हैं, लेकिन इसके अलावा कहीं कुछ नहीं दिख रहा। बापूबाजार और मंडी में प्रचार सामग्री बेचने वाले दुकानदारों का कहना है कि चुनाव आयोग की सख्ती ने प्रचार सामग्री का व्यापार लगभग खत्म कर दिया है। पहले माल कम पड़ता था। अब यह हालत है कि जो माल मंगवा लिया है, वही नहीं निकल रहा है। इनके साथ ही कागज़ के पोस्टर व स्टीकर छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस वालों के पास भी चुनाव का काम एक चौथाई रह गया है।
कांग्रेस 25 फीसदी तो भाजपा 75 फीसदी :
यूं तो प्रचार सामग्री बेचने वालों का धंधा काम चल रहा है। लेकिन जो बिक्री हो रही है, उसमें भाजपा की प्रचार सामग्री की मांग ज्यादा है। उदयपुर शहर में प्रचार सामग्री से जुड़े लोगों की माने तो आज भाजपा की खरीद जहां 75 फीसदी है, तो कांग्रेस की 25 फीसदी के आसपास है। भाजपा की प्रचार सामग्री में वही सामान बिक रहा है, जिसमे नरेंद्र मोदी के नाम व फोटो है।
राज्यपाल ने बताई थी शोक सभा :
पिछले दिनों चुनाव आयोग के एक कार्यक्रम में चुनाव आयोग की सख्ती को लेकर राज्य की राज्यपाल मार्गेट अल्वा ने कहा था कि अब लोकतंत्र का उत्सव शोक सभा में तब्दील हो गया है।
पुरानी रंजिश के चलते टैक्सी ड्राइवर को चाकू मारा

बड़ीसादड़ी में भारी पुलिस जाब्ता तैनात, कलेक्टर-एसपी पहुंचे
बड़ीसादड़ी/उदयपुर। बड़ीसादड़ी कस्बे में पुरानी रंजिश के चलते बीती रात एक ट्रैक्सी ड्राइवर को कुछ युवकों ने चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। वारदात के बाद बदमाश भाग गए। बड़ीसादड़ी अस्पताल में उपचार के बाद आज सुबह जख्मी ट्रैक्सी ड्राइवर को उदयपुर रेफर कर दिया गया। यहां एमबी अस्पताल में उसका उपचार चल रहा है। इस संबंध में पुलिस ने नामजद सात जनों सहित १७ के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया हैं।
पुलिस के अनुसार बड़ीसादड़ी निवासी रूस्तम (२९) पुत्र हकीम खान को बीती रात साढ़े 12 बजे बड़ीसादड़ी कस्बे में कुछ युवकों ने घेर लिया। इनमें से दुर्गाशंकर पुत्र सत्यनारायण ने चाकू निकालकर रूस्तम के पेट में मार दिया। इससे वह जख्मी होकर वहीं गिर पड़ा। रूस्तम ट्रैक्सी ड्राइवर बताया जाता है। वारदात के बाद सभी बदमाश वहां से भाग गए। यह हमला पुरानी रंजिश के चलते हुआ है। पुलिस ने दुर्गाशंकर सहित १७ जनों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है, जिनमें सात नामजद है। इस वारदात के बाद कस्बे में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सौ से ज्यादा पुलिस कांस्टेबल तैनात किए गए हैं। चित्तौडग़ढ़ कलेक्टर वेद प्रकाश और एसपी प्रसन्न कुमार खमेसरा आज सुबह स्वयं बड़ीसादड़ी पहुंचे, जो वहां पर निगरानी रखे हुए हैं। उल्लेखनीय है कि छह माह पूर्व दोनों पक्षों में मारपीट हुई थी। उस दौरान एक युवक गंभीर घायल हो गया था, जिसकी बाद में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि यह हमला उसी रंजिश को लेकर किया गया है।
राहुल को राखी नहीं बांध सकी सपना

उदयपुर। उदयपुर में राहुल गांधी की सभा के दौरान युवाओं और महिलाओं में विशेष उत्साह देखा गया। सभा में शहरी और ग्रामीण महिलाओं की खासी भीड़ रही। महिलाओं की भीड़ में से एक महिला को राहुल गांधी से ऐसा लगाव हुआ कि वह राहुल गांधी को राखी बांधकर भाई बनाने की जिद्द कर बैठी, जिसको बाद में बड़ी मुश्किल से सुरक्षा कर्मियों ने समझाइश कर मनाया। सभा के दौरान जब कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट का भाषण चल रहा था, तब सबसे आगे बने महिलाओं के ब्लॉक में बैठी धानमंडी निवासी सपना उदासी ने अपने बैग से राखी निकालकर राहुल गांधी की तरफ हाथ बढ़ा दिया। उसको जैसे ही सुरक्षा कर्मियों और महिला पुलिसकर्मियों ने देखा, तो रोका लेकिन वह मंच पर जाकर राखी बांधने की जिद्द करने लगी। महिला पुलिस कर्मियों ने उसको समझाया कि ऐसा नहीं हो सकता। सुरक्षा घेरे को नहीं तोड़ा जा सकता, लेकिन वह अपनी जिद्द पर अड़ी रही और रोने लगी। बाद में कांग्रेसी कार्यकर्ता आए और उसको स्थानीय नेताओं के ब्लॉक में लेकर गए, जहां स्थानीय महिला नेता भी बैठी हुई थी। उन्होंने भी उसको समझाया कि सुरक्षा के चलते ऐसा नहीं किया जा सकता, लेकिन वह नहीं मानी। आखिरकार कोई अनहोनी ना हो जाए या सुरक्षा व्यवस्था नहीं बिगड़े इसको ध्यान में रखते हुए सुरक्षाकर्मियों ने उसके आसपास दो महिला पुलिसकर्मी को तैनात कर दिया, जो अंत तक खड़ी रही। जब राहुल गांधी सभा के बाद नीचे उतर कर हाथ मिलाने आए, तब भी महिला ने अपनी बात राहुल गांधी तक पहुंचाने की काफी कोशिश की, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी।
चुनाव आयोग ने तैयार की एएसडी वोटर लिस्ट

इन ११ दस्तावेज से भी कर सकते हैं मतदान
उदयपुर। अगर आपका नाम वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं है या किसी वजह से डिलीट हो गया है तो टेंशन मत लीजिए। चुनाव आयोग ने पहली बार ‘एएसडी वोटर लिस्टÓ तैयार की है। इसमें ऐसे वोटर्स के नाम शामिल हैं, जिनका नाम तीन प्रमुख वजहों से मेन वोटर लिस्ट से डिलीट किया जा चुका है। मतदान वाले दिन एएसडी वोटर्स पोलिंग बूथ जाकर इस लिस्ट में अपना नाम चेक कर सकते हैं। लिस्ट में नाम दर्ज होने पर भी मतदान कर सकते हैं। नामों को डिलीट करने वजहों में पहली, वोटर की गैरमौजूदगी पर। दूसरा, वोटर या उसके परिवार का दूसरे पते पर शिफ्ट हो जाना। तीसरा, वोटर की डेथ होने पर। इन तीनों बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए आयोग ने ‘एब्सेंट-शिफ्टेड-डेथÓ यानि एएसडी वोटर लिस्ट तैयार की है।
अगर एएसडी वोटर मतदान वाले दिन पोलिंग बूथ पर पहुंचता है, तो पोलिंग पार्टी पहले उस वोटर का नाम एएसडी वोटर लिस्ट में चेक करेंगी। फिर मौके पर ही संबंधित वोटर से ‘एएसडी फॉर्मÓ भी फिलअप करवाया जाएगा। एडीएम सिटी यासिन पठान ने बताया कि एएसडी वोटर्स को भी तीन कैटेगरी में डिवाइड किया गया है। पहला, ऐसे लोग जिनका घर सालों से उसी विधानसभा क्षेत्र में है, लेकिन वो कहीं बाहर नौकरी या बिजनेस कर रहे हैं। दूसरा, ऐसे वोटर जो खुद जिले में नहीं रहते, लेकिन उनका कोई न कोई फैमिली मेम्बर यहां रहता है। लास्ट कैटेगरी में ऐसे वोटर्स हैं, जिनका कोई भी परिजन यहां न रहता हो।
इन दस्तावेजों से कर सकते हैं वोट
अगर आप वोट करने से सिर्फ इसलिए परहेज कर रहे हैं कि आपके पास वोटिंग आईडी कार्ड नहीं है, तो आपके लिए यह जरूरी जानकारी है। वोटरों को अपनी पहचान स्थापित करने के लिए मतदाता फोटो पहचान पत्र के साथ ही 11 अन्य वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेजों को भी निर्वाचन आयोग ने मान्यता दी है। वोटिंग के लिए वोटर के पास मतदाता पहचान पत्र होना चाहिए, लेकिन मतदाता किसी कारणवश अगर यह पहचान पत्र नहीं दिखा पाता है, तो उसे वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेज के रूप में मान्य 11 दस्तावेजों में से किसी एक को दिखाना होगा।
ये दस्तावेज हैं
> पासपोर्ट
> ड्राइविंग लाइसेंस
> राज्य या केंद्र सरकार, पब्लिक सेक्टर कंपनियों के फोटो आईडी कार्ड
> बैकों या डाकघरों द्वारा जारी की गई फोटोयुक्त पासबुक
> आयकर पहचान पत्र पैन कार्ड
> आधार कार्ड
> राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर एनपीआर
> मनरेगा जॉब कार्ड
> श्रम मंत्रालय की योजना द्वारा जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड
> फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज
> निर्वाचन तंत्र द्वारा जारी प्रमाणिक फोटो मतदाता पर्ची
:वोटर्स की सहूलियत के लिए चुनाव आयोग ने यह विशेष व्यवस्था की है। एएसडी वोटर्स लिस्ट के जरिए वोटर्स को आसानी से पहचाना जा सकता है।।
-यासीन पठान, एडीएम सिटी

