लंबे समय तक रहें जवां

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अगर आप भी चाहती हैं कि आपकी त्वचा लंबे समय तक जवां बनी रहे, तो वैज्ञानिकों की यह नई खोज आपके लिए मददगार हो सकती है। टायरॉन नामक एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को अल्ट्रावॉयलेट किरणों के नुकसान से बचाता है और लंबे समय तक जवां दिखने मेंमददगार है। एक नए शोध में वैज्ञानिकों ने एक ऎसे तत्व की खोज करने का दावा किया है, जो आपकी त्वचा को लंबे समय तक जवां रखने मेंसहायक हो सकता है।

ताउम्र जवां दिखने की चाहत तो हर किसी की होती है और इसके लिए लोग तरह-तरह के जतन भी करते हैं। भले ही ताउम्र जवां दिखना संभव न हो। लेकिन हाल में वैज्ञानिकों ने त्वचा को लंबे समय तक जवां बनाए रखने का एक फार्मूला खोज निकालने का दावा किया है। न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने टायरॉन नामक एंटीऑक्सीडेंट की खोज की है, जो त्वचा को अल्ट्रावॉयलेट किरणों के नुकसान से बचाता है और लंबे समय तक जवां दिखने में मददगार है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यूवी रेडिएशन से त्वचा की कोशिकाएं नष्ट होती हैं।

इस तत्व से कोशिकाओं को न सिर्फ नष्ट होने से रोका जा सकता है, बल्कि यह त्वचा में कोलाजन को बचाता है, जो त्वचा को लचीला बनाता है। शोधकर्ताओं का दावा है कि सब्जियों और कॉस्मेटिक में इसकी मौजूदगी से अल्ट्रावॉयलेट किरणों से100 प्रतिशत बचाव संभव है। यह शोध द फैसब जर्नल में प्रकाशित किया गया

जब बाप ने ठोंका बेटे पर एक करोड़ का मुकदमा

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बिहार में एक पिता ने अपने बेटे पर मानहानि का मुकदमा इसलिए दायर कर दिया है क्योंकि बेटे ने अपने से ‘नीची’ जाति की लड़की से विवाह कर लिया था. अदालत ने इस मामले की सुनवाई शुरू कर दी है.

सिद्ध नाथ शर्मा पेशे से वकील हैं और उन्होंने अपने बेटे सुशांत जासु पर एक करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किया है. उन्होंने अपने बेटे से यह भी कहा है कि वह उनके ‘सरनेम’ का इस्तेमाल न करे. सरनेम से किसी की जाति का अंदाजा लगाया जा सकता है.
इस मामले से पता चलता है कि भारतीय समाज में जाति की जड़े कितनी गहरी हैं. वे लोग जो अपनी जाति के बाहर शादी करते हैं, अक्सर अपने परिवार और समुदाय से बाहर कर दिए जाते हैं. सिद्ध नाथ शर्मा ने अपने बेटे सुशांत जासु के खिलाफ इस महीने की शुरुआत में मुकदमा दायर किया था. सुशांत आयकर मामलों का काम देखते हैं और उन्होंने एक बैंक अधिकारी से विवाह किया है.

हफ्ते के आखिर में हुई सुनवाई के दौरान पटना के दानापुर कोर्ट ने एडवोकेट शर्मा की दलीलें सुनी. सुनवाई की अगली तारीख 25 जनवरी की तय की गई है. सिद्ध नाथ शर्मा ने अदालत से कहा कि उनके बेटे ने इस महिला के साथ प्यार में पड़कर उससे विवाह करने का फैसला ठीक नहीं किया है.

उन्होंने जज त्रिभुवन नाथ से कहा, “जब कोई व्यक्ति पूरी नींद नहीं सोता है, वह बेचैन हो जाता है और फिर वह सही फैसला ले ही नहीं सकता. जैसा कि मेरा बेटा किसी के प्यार में पड़कर बेचैन हो गया और सही फैसला नहीं ले सका.” मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील मौजूद नहीं थे और सुशांत जासु ने इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

सामंती समाज

सुशांत जासु ने बीबीसी से कहा, “यह एक पारिवारिक मामला है और मैं इस बारे में बात नहीं करूंगा.” इस दंपत्ति ने बीते साल नवंबर में विवाह कर लिया था और वे गुजरात में रह रहे हैं.

इससे पहले सिद्ध नाथ शर्मा ने बीबीसी से कहा, “अपनी जाति से बाहर की लड़की से विवाह करके मेरे बेटे ने न केवल मेरी प्रतिष्ठा धूमिल की है बल्कि 400 सालों से चले आ रहे हमारे खानदान की परंपरा को भी ध्वस्त कर दिया है. अब उसे अपनी गलतियों का हरजाना मुझे चुकाना होगा. उसे बाप के नाम के तौर पर मेरे नाम का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए.”

सिद्ध नाथ शर्मा अपने बेटे के बर्ताव से बेहद दुखी थे. उन्होंने कहा, “लोग कहते हैं कि प्यार अंधा होता है लेकिन प्यार किसी को पहले से चले आ रहे प्रेम को खत्म करने की इजाजत नहीं देता है, वो प्यार जो कि उसका हमारे परिवार के अन्य सदस्यों से था.” हालांकि शर्मा जी की पत्नी, तीनों बहनें और परिवार के अन्य सदस्य सुशांत के प्रेम विवाह में शरीक हुए.

इस पर वे कहते हैं कि परिवार के लोगों ने ‘भावनात्मक दबाव में आकर’ इस विवाह को स्वीकार किया. उनका कहना है कि मेरे बेटे को अपनी पत्नी को ‘उसकी सहमति से’ तलाक दे देना चाहिए और ‘अपनी ही जाति की किसी अन्य लड़की के साथ विवाह करने के लिए तैयार’ हो जाना चाहिए.

इस मसले पर समाज विज्ञानी श्रीकांत कहते हैं कि बिहार जैसे सामंती ढाँचे वाले समाज में जाति एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा है.

एक और दिलचस्प बात ये भी है कि बिहार सरकार ने अंतरजातीय विवाहों को बढ़ावा देने के लिए 50 हज़ार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का एलान कर रखा है.

कड़ाके की सर्दी में बारिश की झड़ी

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उदयपुर। कड़ाके की सर्दी से पीछा नहीं छूटा, वहीं आधी रात के बाद ओलो के साथ आई बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। देर रात साढ़े तीन बजे से ओले गिरने के साथ शुरू हुई बारिश रुक-रुककर दिन तक जारी रही। एक बारगी, तो ऐसा लग रहा है कि मानो सर्दी में सावन आ गया हो। रात साढ़े तीन बजे गरज के साथ ओले गिरे और बारिश शुरू हुई। ओले एक बार गिर कर बंद हो गए लेकिन बारिश दिन में भी रुक-रुककर चलती रही। सुबह होते-होते तो शहर की सड़कों का हाल सावन में बारिश गिरने जैसा हो गया। शहर की गलियों और मुख्य सड़कों पर पानी भर गया, लोग छातें और बरसाती लेकर निकल गए। चारों ओर कोहरा छाया हुआ है। सुबह 11 बजे तक आठ मिमी बारिश गिर चुकी थी। बारिश के साथ ही ठण्ड ने और ज्यादा जोर जमा लिया और दिन का टेम्प्रेचर गिर कर 14.4 हो गया, जबकि रात का बारिश गिरने के बाद तापमान 5 डिग्री से भी नीचे चला गया। जहां मावठ की इस लगातार बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई, वहीं सावों की शादियों पर भी पानी फिर गया है।
कोहरे में कैद हुआ शहर : बारिश के साथ-साथ कोहरा भी बढ़ गया है। सुबह 11 बजे तो यह हाल थे कि आस-पास की पहाडिय़ां ही नजऱ नहीं आ रही थी। फतहसागर पर झील के बीच नेहरू गार्डन भी गायब हो गया और सड़क से देखने पर मोतीमगरी भी नहीं दिखाई दे रही थी। हाइवे पर सफर करने वालों के लिए कोहरा और बारिश दोनों मुसीबत बनी हुई है।
स्कूलों और ऑफिस में अनुपस्थिति कम : सरकारी ऑफिस और स्कूलों में रोज की तरफ आज उपस्थिति कम रही। नन्हें-मुन्नों को माता पिता ने बारिश को देखते हुए स्कूल नहीं भेजा। सुबह स्कूल जाने वाले ऑटो काफी खाली गए । स्कूल बसों के इंतज़ार में भी इक्का-दुक्का बच्चे खड़े दिखाई दिए। वही बड़ों ने भी बारिश को देखते हुए अपने ऑफिस से छुट्टी मार ली। कलेक्ट्री, युआईटी, तहसील कार्यालय और कई सरकारी विभागों में तो 11 बजे तक अपनी सीट पर इक्का दुक्का कर्मचारी ही नजऱ आ रहे थे। अधिकतर कर्मचारी ने आकस्मिक छुट्टी लेकर घर पर ही दुबके रहे।

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सैयदना का जिस्म सुपूर्द-ए-खाक़

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उदयपुर। दाऊदी बोहरा समुदाय के धर्मगुरु डॉक्टर सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन का शुक्रवार को निधन हो गया. आज उनको मुंम्बई स्थित रोजा ताहेर में दफनाया गया ,वह बोहरा समुदाय के 52वें धर्मगुरु थे और उन्होंने पांच दशकों तक समुदाय के आध्यात्मिक प्रमुख के बतौर मार्गदर्शन किया.
शुक्रवार को उनके मौत कि खबर सुन कर सम्भाग भर के बोहरा समुदाय में शोक और मातम छा गया। बोहरा समुदाय के सभी लोगों ने अपने अपने प्रतिष्ठान बंद कर मस्जिदों में तिलावत की जो आज तक जारी रही। सम्भाग भर से बोहरा समुदाय के लोग शनिवार को उनके जनाजे में शामिल होने के लिए रवाना हुए। कल शाम तक यह हाल थे कि मुंम्बई जाने वाली किसी विडियो कोच ट्रैन और प्लेन में कोई सीट नहीं थी यही हाल डूंगरपुर, सागवाड़ा, बांसवाड़ा, के थे यहाँ से भारी संख्या में सैयदना के अनुयायी जनाजे में शामिल होने के लिए मुंम्बई पहुचे। और यहाँ सम्भाग भर की बोहरा मस्जिदों में दिन भर तिलावत और मातम चलता रहा । जानकारी के अनुसार सुबह १० बजे सैयदना का जनाजा उनके निवास सैफी महल से रवाना हुआ जो लाखों अनुयाइयों के बिच दोपहर भिन्डी बाज़ार स्थित रोज़ा ताहेर लाया गया । सैयदना को राष्ट्रिय सम्मान के साथ तिरंगे में लपेट कर लेजाया गया और बंदूकों की सलामी के साथ दफनाया गया।

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केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध हालात में मौत

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केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की मौत हो गई है.

दिल्ली के होटल लीला के कमरा नंबर 345 में उनका शव मिला है.
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने बीबीसी के साथ बातचीत में इसकी पुष्टि की है.

पुलिस ने होटल के इस कमरे को सील कर दिया है और मजिस्ट्रेट भी मौक़े पर पहुँच गए हैं.sunnada265317-01-2014-09-30-99W

शशि थरूर के प्राइवेट सेक्रेटरी ने पत्रकारों को बताया कि गुरुवार से ही शशि थरूर और सुनंदा होटल में रुके हुए थे.

उन्होंने बताया, “शशि थरूर कांग्रेस की बैठक के बाद एक कार्यक्रम में गए थे और उसके बाद रात 830 बजे होटल पहुँचे. कुछ देर बाद जब वे सुइट के एक कमरे में गए थे, तो सुनंदा मृत पाई गईं.”

शशि थरूर और सुनंदा पुष्कर की शादी 2010 में हुई थी.

तकरार

एक दिन पहले ही पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार से ट्विटर पर उनकी काफ़ी तकरार हुई थी.

जिसके बाद शशि थरूर और पत्नी सुनंदा पुष्कर ने एक संयुक्त बयान जारी करके कहा था कि वे सुखी वैवाहिक जीवन बिता रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र में राजनयिक रहे शशि थरूर को 2010 भारत सरकार के मंत्रिपद से एक विवाद के बाद इस्तीफ़ा देना पड़ा था जिसमें आईपीएल क्रिकेट टीम की निविदा में उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए थे.

लेकिन कुछ समय बाद उन्हें मंत्री परिषद में दोबारा शामिल किया गया.

सुनंदा पुष्कर की मौत पर लोगों ने आश्चर्य व्यक्त किया है. विवादों में आई पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार ने ट्विटर पर लिखा है कि वे इस घटना से सदमे में हैं. उन्होंने लिखा है- मैं काफ़ी सदमे में हूँ. ये काफ़ी दुखद है. मैं नहीं जानती कि मुझे क्या कहना चाहिए. आरआईपी (रेस्ट इन पीस) सुनंदा.

जन्नत नशीं हुए सैयदना

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उदयपुर। दाउदी बोहरा समाज के 52वे धर्मगुरू सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन का शुक्रवार को ह्रदयाघात से निधन हो गया। वे 102 साल के थे। दक्षिण मुम्बई के मालाबार स्थित सैफी महल में उनका निधन हुआ। शनिवार सुबह उन्हें मुंम्बई में सुपुर्दे ख़ाक किया जाएगा । सैयदना का जनाजा शुक्रवार को रात ११.३० बजे सैफी महल से रवाना होगा।
सैयदना की मौत कि खबर की पुष्टि सैफी महल के प्रवक्ता ने की उनकी मौत की खबर मिलते ही संभाग भर दाउदी बोहरा समाज के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। यहां बोहरवाड़ी में शोक की लहर छा गई। बोहरा समुदाय के सभी व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर मातम मनाने के लिए मस्जिदों में एकत्र होना शुरू कर दिया। अपने मौला के नहीं रहने की खबर सुनते ही दाऊदी बोहरा समाज के घर-घर में मातम शुरू हो गया। सैयदना के अंतिम दर्शनों के लिए सम्भाग से सैंकड़ों श्रद्धालु मुंबई रवाना हो गए हैं।
डॉ. सैयदना के अनुयायी दुनियांभर से मुंबई पुहंच रहे हैं। उनके जनाजे की अंतिम यात्रा शुक्रवार को रात ११.३० बजे मुंम्बई में मालाबार स्थित उनके निवास सैफी महल से रवाना होगी जो सुबह तक भिन्डी बाज़ार स्थित रोज़ा ताहेरा सैयदना के वालिद सैयदना ताश सैफुद्दीन की दरगाह पर पहुचेगी जहाँ उन्हें सुपुर्दे ख़ाक किया जायेगा । उनकी अंतिम यात्रा में देश विदेश की कई हस्तियों के आने कि खबर है ।
डॉ. सैयदना कुरान के हाफिज थे। उनका जन्म छह मार्च, 1912 को सूरत में हुआ था। वे ५२ वर्ष की उम्र में गद्दीनशीन हुए थे। डॉ. सैयदना ने जीवनभर अपने समुदाय की रहनुमाई की। दाउदी बोहरा समुदाय में उनका आदेश ही कानून था। उन्होंने सदैव प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। वे हिंदुस्तान से बहुत प्रेम करते थे और अपने अनुयायियों को भी मुल्क की खिदमत का संदेश देते थे।
डॉ. सैयदना को उनकी विद्वता के लिए दुनिया भर में सम्मान प्राप्त हुआ। वे जहां भी जाते उन्हें स्टेट गेस्ट का दर्जा प्राप्त होता था। मौला ने १९९८ में उदयपुर आकर दाउदी बोहरा समुदाय को अमन का पैगाम दिया था। उन्होंने पिछले साल गलियाकोट की यात्रा की थी। डॉ. सैयदना ने अपने जीवन काल में तीन इस्लामिक यूनिवरसिटी की स्थापना की। डॉ. सैयदना ने दुनिया भर में करीब 500 मस्जिदों का निर्माण करवाया।
अपने निधन से पहले ही सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन ने सैयदना मुफ्फदल सैफुद्दीन को अगला धर्मगुरू घोषित कर दिया था।

 
उदयपुर के बोहरा समुदाय की हर आँख से आंसू छलका …….. (PHOTO)

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71 साल के अमिताभ ने 65 साल की जया बच्चन को किया ‘लिप किस’

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मेगास्टार अमिताभ बच्चन ‘ब्लैक’ फिल्म में रानी मुखर्जी को ‘लिप-किस’ करते नजर आए थे. लेकिन सार्वजनिक रूप से पहली बार उनकी ऐसी तस्वीरें सामने आई है.
71 साल के अमिताभ ने अपनी 65 साल की पत्नी जया बच्चन को किस किया. यह मौका था हाल ही में हुए स्क्रीन अवॉर्ड्स का, जहां अमिताभ को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया. जया बच्चन और रेखा की गलबहियों वाली तस्वीरें तो आपने खूब देखीं, लेकिन उसके बाद क्या हुआ, वह हम आपको दिखाते हैं.

अमिताभ बच्चन जब अवॉर्ड लेकर मंच से लौटे तो सीधे आगे की सीटों पर बैठे अपने परिवार के पास गए. पत्नी जया ने अप्रत्याशित तौर पर उन्हें अपनी ओर खींचा और किस करके बधाई दी. इस दौरान उनके बेटे अभिषेक बच्चन दोनों के बीच में ही बैठे हुए थे.

सियासत के लिए शांत शहर में न करें सौहार्द तोडने का प्रयास

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उदयपुर। प्रतापगढ जिले के एक छोटे से गांव में बीती 14 जनवरी को जो कुछ हुआ वह निंदनीय है। कोई भी सभ्य समाज ऐसे दंगों का समर्थक नहीं हो सकता। दंगे की परिणिती में दोनों ओर से चली गोलियों ने तीन घरों के चिराग बुझा दिए, लाखों रूपयों की सम्पत्ति को फूंका गया। जो कुछ भी हुआ उसकी भर्त्सना की जानी चाहिए लेकिन ऐसे संवेदनशील अवसरों पर वाणी और शब्दों पर संयम की नितांत आवश्यकता है। हिंसा का दौर मानसिक उबाल का परिणाम होता है, उसके लिए दोनों पक्ष जिम्मेदार होते है। घटना के जिम्मेदारों को चिन्हित कर उन्हें निश्चित रूप से दण्डित भी किया जाना चाहिए। लेकिन ऐसे अवसरों का राजनीतिक लाभ हथियाने की चेष्टा करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनकी यह कुचेष्टा माहौल को हवा देने में तात्कालिक रूप से सफल हो सकती है, लेकिन उसके परिणाम समाज एवं देश को वर्षों तक झेलने पडते है।
हाल ही की घटना पर उदयपुर शहर के जिम्मेदार भाजपा के प्रवक्ता ने भाजपा के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के हवाले से एक विज्ञप्ति जारी कर पुरे मुस्लिम समाज को कटघरे में खडे करते हुए कह दिया कि  “उदयपुर शहर सहित अन्य स्थानों पर समुदाय विशेष द्वारा त्यौहार के अवसर पर अराजकता का प्रदर्शन किया गया”

क्या ऐसा कह कर ये अन्य समाजों को जबर्दस्ती मुस्लिम समाज के विरोध में करने की राजनीति नहीं कर रहे है ?

क्या उन्हें उदयपुर शहर और अन्य शहरों की शांति अच्छी नहीं लग रही ?

क्या वे लोकसभा चुनाव के करीब आने से दंगों की राजनीति नहीं करना चाह रहे है ?
शहर के इन जिम्मेदार लोगों ने ही नहीं अन्य सभी ने देखा कि उदयपुर शहर में ईद मिलादुन्नबी के मोके पर निकले गए जुलूस में 70 से 80 हजार लोग आये थे और इतनी भारी तादाद में लोग जुलुस के रूप में खुशियां मनाते हुए निकले लेकिन कहीं से भी कोई अवांछित या अप्रिय घटना नहीं हुई । जहाँ इन जिम्मेदार वोटों की राजनीति करने वालों को शहर के लोगों की तारीफ करनी चाहिए कि अन्य जगह के तुलना में यहाँ इतनी भारी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग निकले लेकिन कही से कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। जबकि जुलूस हर मौहल्ले से होकर गुजरता है। उसकी जगह यह और उकसाने का काम कर रहे है । ऐसे में ये अपने आपको जनप्रतिनिधि कहने वाले खुद के शहर के लोगों में ही भेद भाव की भावना पैदा कर रहे है ।
आराजकता किसको कहते है, शायद यह भी इन जिम्मेदारो को नहीं मालूम। जहाँ कोई कानून ना हो किसी को कानून की पडी ना हो । ईद मिलादुन्नबी की पूर्व संध्या पर मुस्लिम बाहुल्य खांजीपीर में भी साज सज्जा और रौशनी देखने के करीब 30 से 40 हजार लोग आये और सबसे बडी बात यह कि वहां एक भी पुलिस का जवान तैनात नहीं था फिर भी वहाँ के नौजवानो के पुख्ता इंतजाम के चलते बिना कोई अप्रिय घटना के सारा कार्यक्रम शांतिपूर्वक हो गया, तो क्या यह आराजकता होती है ? ईद मिलादुन्नबी का जुलूस ही नहीं कोई भी धार्मिक जुलूस को चाहे भगवान् जगन्नाथ की रथ यात्रा हो, गुरु गोविन्द सिंह साहेब की शोभायात्रा हो, चेटीचंड पर निकाली जाने वाली यात्रा या शिवरात्रि पर निकाले जाने वाली यात्रा हो हर यात्रा अपने आप में एक शांति और धर्म पर चलने का पैगाम लिए होती है। जिसमे लोग भक्ति भाव और दिल से जुडते है। पिछले सौ साल का इतिहास उठा कर देख ले तो इक्का दुक्का घटना को छोड कर कभी किसी यात्रा में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई ।
धार्मिक जुलूस किसी भी धर्म का हो उसमे भाग लेने वाले लोग कभी आराजकता पैदा नहीं करते। हां खुशी के आलम में कुछ अनुशासनहीनता हो सकती है जो हर समाज के मोतबीर लोगों को ध्यान रखना चाहिए लेकिन आराजकता नहीं हो सकती। धार्मिक जुलूस कोई राजनैतिक पार्टियों की रैली या हडताल के जुलूस की तरह नहीं होते जहाँ लोगों को खरीदकर बुलाया जाता है। और आराजकता का माहोल बनाया जाता है ।
ऐसे माहोल में ऐसे जिम्मेदार लोग अपने वोट और सीट की चिंता करने वाले लोग जो खुद को जनप्रतिनिधि कहते है वे लोग इस तरह से समाजों में घृणा पैदा करके कुछ वक्त के लिए जरूर जीत जायेगे लेकिन ऐसे लोग ही इन दंगों की राजनीति और साप्रदायिकता के घोडे पर सवार होकर पहले इस शहर को और फिर देश को गर्त में ले जायेगें।

अमिताभ बनें देश के राष्ट्रपति: भाजपा नेता

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शत्रुघ्न सिन्हा ने की अमिताभ बच्चन को राष्ट्रपति बनाने की वकालत, माधुरी दीक्षित के साथ दोबारा काम करने को लेकर जूही चावला डांवाडोल और सलीम ख़ान किस बात में अपने बेटे सलमान ख़ान को अपने जैसा मानते हैं.
अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की अमिताभ बच्चन से प्रतिद्वंद्विता किसी से छिपी नहीं है. वो समय-समय पर अमिताभ बच्चन की आलोचना करते रहे हैं. लेकिन बीती रात मुंबई में हुए क्लिक करें स्क्रीन पुरस्कार समारोह में उन्होंने अमिताभ बच्चन को राष्ट्रपति बनाने की वकालत तक कर डाली.

अमिताभ को इस समारोह में लाइफ़ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें स्टेज पर ये पुरस्कार शत्रुघ्न सिन्हा ने दिया.

अमिताभ की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा, “अमिताभ बच्चन फ़िल्म इंडस्ट्री और देश का गौरव हैं. उन्हें देश का राष्ट्रपति बनना चाहिए.”

कई फ़िल्मों में साथ काम कर चुके अमिताभ और शत्रुघ्न सिन्हा के बीच लंबे समय से आत्मीय संबंध नहीं रहे. शत्रुघ्न सिन्हा ने तब खुलकर नाराज़गी भी ज़ाहिर की थी, जब अमिताभ ने उन्हें अपने बेटे अभिषेक की शादी में नहीं बुलाया था.

‘माधुरी संग दोबारा आने की उम्मीद नहीं’

जूही चावला फ़िल्म ‘गुलाब गैंग’ में पहली बार क्लिक करें माधुरी दीक्षित के साथ नज़र आएंगी. 90 के दशक की इन दोनों मशहूर अभिनेत्रियों ने अपने करियर के शीर्ष पर कभी एक दूसरे के साथ काम नहीं किया.

और जूही चावला को नहीं लगता कि वो दोबारा माधुरी के साथ काम कर पाएंगी. उन्होंने एक समारोह के दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि ‘गुलाब गैंग’ के ज़रिए मुझे पहली और आख़िरी बार माधुरी के साथ काम करने का मौक़ा मिला है. मुझे नहीं लगता कि भविष्य में ऐसा मौक़ा फिर मिलेगा.”
‘गुलाब गैंग’ की कहानी बहुत सशक्त है और जूही को लगता है कि इस तरह की कहानियां बहुत कम होती हैं, इसलिए वह और माधुरी को साथ देखने को लेकर उतनी आशावादी नहीं हैं.

जूही ने आगे कहा, “यह कभी-कभी होता है जब हमें अच्छी कहानी मिलती है और हम समर्पण से काम कर सकते हैं. इसलिए, मुझे नहीं लगता कि हम दोबारा साथ काम करेंगे.”

सलमान बिलकुल मेरे जैसे: सलीम ख़ान

मशहूर लेखक सलीम ख़ान का मानना है कि उनके बेटे क्लिक करें सलमान ख़ान कई मायनो में उनके जैसे ही है. एक अख़बार को दिए इंटरव्यू में सलीम ख़ान ने कहा, “सलमान की ज़िंदगी में जितनी भी महिला मित्र आईं बाद में उनसे भले ही सलमान का संबंध टूट गया हो वो उनके संपर्क में रहते हैं. एक या दो उदाहरण को छोड़ दिया जाए तो सलमान की दोस्ती अब भी उनकी पुरानी गर्लफ़्रेंड्स से है. उसी तरह से मैं भी अपनी पुरानी महिला मित्रों के संपर्क में रहता था.”

सलीम ख़ान कहते हैं कि यही वजह है कि संबंध टूट जाने के बावजूद उनकी अपनी पुरानी गर्लफ़्रेंड्स से रिश्तों में कड़वाहट नहीं आती.

मांझे से कटी मासूम की जिंदगी की डोर

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जयपुर। महावीर नगर मोड़ (बजाज नगर) पर मंगलवार दोपहर मांझे से छह वर्षीय बच्ची की गर्दन कटकर लटक गई। बच्ची बाइक की टंकी पर बैठकर मां-बाप के साथ घर जा रही थी। बेटी की चीख पिता ने सुनी तो बाइक रोकी और मांझा को हाथ से रोकना चाहा तो वह भी जख्मी हो गया। बच्ची को एसएमएस अस्पताल लेकर गए, लेकिन तब तक उसकी जान जा चुकी थी।

पतंग-डोर के चक्कर में मंगलवार को दो और लोगों की जान चली गई। पतंग लूटने के चक्कर में जगतपुरा में अज्ञात वाहन की टक्कर से दस वर्षीय बालक की मौत हो गई और आगरा रोड पर मांझे से घायल होने पर असंतुलित होकर गिरे बाइकसवार की मौत हो गई। हादसे में उसका साथी गम्भीर रूप से घायल हो गया, जो एसएमएस अस्पताल में भर्ती है।

मांझा से मौत का शिकार हुई छह वर्षीय चंचल एलबीएस नगर निवासी प्रमोद दाधीच की बेटी थी। प्रमोद दाधीच मूल रूप से गांव राजमहल बोटूंदा, टोंक के रहने वाले हैं। तीन साल से जेएलएन मार्ग एक निजी हॉस्पिटल के पास स्थित वेंकटेश्वर मंदिर में महंत हैं।

प्रमोद दाधीच की बेटियां राधा (8), चंचल (6) और एक बेटा खुशीराम (4) है। मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे वह अपनी पत्नी सीता देवी, बेटी राधा और बेटा चंचल के साथ बाइक से महावीरनगर में एक यजमान के घर गए। पूजा पाठ कराकर दावत खाकर प्रमोद बाइक से घर आ रहे थे। बाइक की टंकी पर बेटी चंचल बैठी थी।

महावीर नगर मोड़ से आगे अचानक चंचल चीखी, उसकी गर्दन लटक गई। प्रमोद ने बाइक रोकी और चंचल की गर्दन में फंसे मांझे को हाथ से रोकना चाहा तो मांझा उसकी शर्ट, इनर को काटा और हाथ जख्मी कर दिया। प्रमोद लहूलुहान बेटी को जयपुरिया हॉस्पिटल लेकर पहुंचे तो चिकित्सकों ने उसे एसएमएस रेफर कर दिया। एसएमएस में चिकित्सकों ने बच्ची को मृत घोçष्ात कर दिया।

जिद करके बैठी बाइक की टंकी पर

प्रमोद दाधीच ने बताया कि बेटी चंचल यूकेजी में पढ़ती थी। मंगलवार दोपहर यजमान के घर जब बाइक से जाने लगे तो चंचल जिद कर बाइक पर आगे बैठी ताकि पतंगें देश सके। जब यजमान के यहां से चलने लगे तो फिर चंचल ने बाइक की टंकी पर बैठने की जिद की।