जब टिकिट नहीं मिला तो समाज सेवा का दावा करने वाला गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को अगले 20 दिनों में हार्ट अटैक से मारने का दावा कर रहे है .

उदयपुर . राजनीति स्वार्थ और कुर्सी की चाह जाने क्या क्या करवा देती है , चुनाव का दौर है और जो लोग जनता की सेवा करने का दावा कर विधायक बनाने के सपने पाले हुए है वो अपने विरोधियों का यूँ कहिये अपने प्रतिद्वंदियों को जी भर कर गालिया दे रहे है, बात अगर हम  उदयपुर शहर विधानसभा करें तो यहाँ गाली और अमर्यादित भाषा का पूरा बाज़ार सज चुका है, एक तरफ भाजपा के प्रत्याशी और मोजुदा विधायक गुलाबचंद कटारिया कांग्रेस की जड़ों में तेज़ाब डालने जैसे फ़िल्मी डायलोग मार रहे है तो दूसरी तरफ उन्ही की पार्टी का दम भरने वाले उनको हार्ट अटैक से मारने की बात कह रहे है,.. जी हाँ अगर इन हार्ट अटैक से मारने वाले साहब की बात माने तो अगले २० दिनों में राजस्थान के गृहमंत्री  हार्ट अटैक से मर जायेगें,

https://www.youtube.com/watch?v=rhwR4qnr8es

प्रवीन रतालिया नाम के इस एक शख्स का कहना है कि वे अगक्ले 20 दिनों में कटारिया की इतनी हालत खराब कर देंगे कि वह हार्ट अटैक से मर जायेगें .
 ये दावा करने वाले साहब है समाज की सेवा करने का दावा करने वाले प्रवीण रतालिया दावा तो यह समाज की सेवा करने का करते है लेकिन फिलहाल हार्ट अटैक से मारने में  एक्क्स्पर्ट लग रहे है .
आखिर बैर क्या है इनका गुलाबचंद कटारिया से, चलिए कम शब्दों में आपको बता देते है, श्री प्रवीन रतालिया अपने चंद समाज सेवा के घोड़े पर सवार हो कर सत्ता की कुर्सी पर खुद को बैठे देखने का सपना पाले हुए थे . इस सपने को साकार करने करने के लिए इन्होने काफी जुगत भी लगाईं भाजपा के आला कमान को खुश करने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से नमो विचार मंच भी बनाया अमित शाह के शान में कार्यक्रम भी किये और आखिर जिस काम के लिए ये सारी उठापटक की यानी शहर का विधायक बनने के लिए तो उसका केम्पेन भी सोशल मीडिया और शहर में पोस्टर लगा के चलाया खेर फायनली बात बनी नहीं और भाजपा से टिकिट मिला ,.. साहब को गुस्सा आगया और मंगलवार को प्रेस कोंफ्रेस बुला कर निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर दिया साथ ही गुलाबचंद कटारिया को हार्ट अटैक से मारने का दावा भी ठोक दिया इनका कहना है कि. इनके पास कटारिया जो पाक साफ़ होने का दावा करते है उनकी कर्तुत्प्म का कच्चा चिटठा है जो एक एक कर खोलेगें और कटारिया उन्हें देख हार्ट अटैक से ,……….
सोचिये सिर्फ टिकिट नहीं मिला उसमे इन समाज की सेवा करने वाले के तेवर इसे है अगर यह टिकिट ले कर जीत गए होते तो जिस जनता को यह समाज सेवा की नोटंकी के नाम पर चप्पल और स्वेटर बाँटते  है उस जनता की खाल भी उतरवा लेते ,.. खेर ,.. फिलहाल हम यह देखेगे की अगले २० दिनों में ये कौनसे  ऐसे काम करते है कि जिससे गुलाबचंद कटारिया को हार्ट अटैक आजायेगा ,.. फिलहाल इन्होने किसी जमीं के कागज़ दिखाए है जो गुलाबचंद कटारिया की पत्नी के नाम है ,…. बाकी और कुछ खुलासे करने का दावा कर रहे है जिसका जनता को और खुद कटारिया को भी इंतज़ार है क्यूँ कि भाई हार्ट अटैक भी तो आना है .
https://www.youtube.com/watch?v=rhwR4qnr8es

कांग्रेस की लिस्ट तो जारी नहीं हुई लेकिन गहलोत और पायलट दोनों लड़ेगें चुनाव – सस्पेंस बरकरार रहेगा

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राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2018 की सरगर्मियां उफान पर हैं। ताज़ा खबर कांग्रेस खेमे से आई है जहां पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पीसीसी चीफ सचिन पायलट दोनों ने ही चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। नई दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय में हुई एक प्रेस कांफ्रेंस में गहलोत-पायलट ने विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर चल रही अटकलों को विराम देते हुए ये घोषणा की। पर अब इस घोषणा के बाद राजस्थान में कांग्रेस के सीएम चहरे को लेकर बना सस्पेंस बरकरार ही है।

पहले गहलोत बोले फिर पायलट ने भी दिया साथ

दोपहर 12 बजे प्रतावित प्रेस कांफ्रेंस को पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सम्बोधित किया। गहलोत ने पहले दौसा से भाजपा सांसद हरीश मीणा के कांग्रेस में ज्वाइन करने की औपचारिक घोषणा की। इसके बाद बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि मैं भी चुनाव लडूंगा , पायलट भी चुनाव लड़ेंगें, सभी चुनाव लड़ेंगें। इसके बाद सचिन पायलट ने भी प्रेस को सम्बोधित करते हुए साफ़ कर दिया कि गहलोत के साथ ही वो भी विधानसभा चुनाव लड़ेंगें।

लिस्ट जारी नहीं, पर दो कैंडिडेट पक्के

राजस्थान कांग्रेस में अभी चुनाव मैदान में उतारे जाने वाले प्रत्याशियों की पहली सूची का इंतज़ार है। लेकिन इस बीच गहलोत और पायलट के चुनाव लड़ने की घोषणा होने के साथ दो प्रत्याशी तो पहले ही डिक्लेयर हो गए। ऐसे में अब सभी को बाकी सीटों पर घोषित नामों का इंतज़ार है।

एकजुट है कांग्रेस: गहलोत

प्रेस के सामने एक बार फिर गहलोत को ये कहना पड़ गया कि कांग्रेस पार्टी में कोई अंदरूनी फुट नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी में सभी एकजुट हैं और मीडिया में फूट जैसी तमाम खबरें निराधार हैं। उन्होंने इस बार के चुनाव में ज़बरदस्त जीत का दावा किया
गहलोत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की स्थिति पांचों राज्यों में मजबूत है। उन्होंने भाजपा और संघ की कार्यशैली को कटघरे में रखते हुए कहा, ”भाजपा को तो अचानक राममंदिर मुद्दा याद आ जाता है। संघ ने तो देश के लिए अंगुली तक नहीं कटाई’

जानिये कौन दावा कर रहा है गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को 20 दिन में हार्ट अटैक से मारने का 

https://youtu.be/_dutZVaUf9k

राजस्थान कांग्रेस का सूची जारी करने से पहले ज़ोरदार ‘धमाका’, भाजपा सांसद हरीश मीणा ने थामा ‘हाथ’

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राजस्थान कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करने से पहले बड़ा ‘धमाका’ कर दिया है। ‘धमाका’ ऐसा जिसने भाजपा सहित तमाम सियासी दलों में हड़कंप मचा दिया। दरअसल, सूबे की सियासत में जारी ‘आयाराम-गयाराम’ के तहत कांग्रेस पार्टी में एक और दिग्गज नेता शामिल हो गए। कांग्रेस का दामन थामने वालों में भाजपा से दौसा सांसद हरीश मीणा भी शामिल हैं। मीणा राजस्थान पुलिस के पूर्व डीजीपी हैं। मीणा ने कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की मौजूदगी में कांग्रेस ज्वाइन की। चुनाव की तारीख से ऐन पहले दौसा सांसद हरीश मीणा कांग्रेस से नाता जोड़ने के बाद भाजपा के साथ ही इसे अन्य दलों के लिए भी तगड़ा झटका माना जा रहा है।

पहले ही इस बात की संभावना थी कि एआईसीसी मुख्यालय पर दोपहर 12 बजे बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में दौसा सांसद हरीश मीणा शामिल हो सकते हैं। प्रेस कांफ्रेंस में औपचारिक पुष्टि और ऐलान के बाद इन सम्भावनाओं पर मुहर लग गई। नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने का सस्पेंस ख़त्म होने के बाद कांग्रेस के साथ ही भाजपा और अन्य दलों में भी चर्चाओं का दौर उफान पर है।

इन नेताओं के आने की भी थी अटकलें

दोपहर 12 बजे बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में जिन अन्य नामों के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें लगाईं जा रहीं थीं उनमें भाजपा से विधायक रहे हबीबुर्रहमान का नाम सबसे ऊपर था । रहमान पांच बार भाजपा से विधायक रह चुके हैं लेकिन इस बार जारी बीजेपी प्रत्यशी सूची में उनका नाम नदारद रहा।
वहीं दूसरा नाम कन्हैयालाल झंवर का बताया जा रहा है। बीकानेर जिले के नोखा विधानसभा के निर्दलीय कन्हैयालाल झंवर को लेकर कांग्रेस और भाजपा में आंतरिक खींचतान मची हुई है। नोखा में उनकी अच्छी पकड़ को देखते हुए कांग्रेस में उनके शामिल अटकलें लगाई जा रही हैं।

सभी को चौंका गया मीणा का नाम
मीणा का नाम सबसे चौंकाने वाला है। हालांकि अब तक उनके कांग्रेस में शामिल होने की वास्तविक वजह सामने नहीं आई है। लेकिन उनका नाम भी उन संभावित नेताओं की फहरिस्त में शुमार हुआ है जो कांग्रेस पार्टी में शामिल हो रहे हैं।

इधर, कांग्रेस-भाजपा के बागियों पर तीसरे मोर्चे की नजर

राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस बार निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकत्रांतिक पार्टी और घनश्याम तिवाड़ी की भारत वाहिनी पार्टी ने गठबंधन कर प्रदेश के मतदाताओं को नया विकल्प देने के लिए ताल ठोक दी है। इन दोनों की पार्टियों को अपने प्रत्याशी मैदान में उतारने के लिए कांग्रेस और बीजेपी प्रत्याशियों की सूची का इंतजार है। माना जा रहा है दोनों राजनीतिक पार्टियों से जिनके टिकट कटेंगे, वो बेनीवाल और तिवाड़ी की पार्टी का हाथ थाम सकते हैं।
बीजेपी ने 131 सीट पर प्रत्याशी उतार दिए हैं और प्रत्याशियों की घोषणा के साथ ही यहां बगावत के सुर शुरू हो गए है। वहीं अभी कांग्रेस की सूची का इंतजार है। ऐसे में तिवाड़ी और बेनीवाल ने अभी तक इन बगावत करने वालों को अपने साथ शामिल करने के लिए प्रदेश की विधानसभा सीटों से अपने प्रत्याशी नहीं उतारे हैं। हालांकि घनश्याम तिवाड़ी खुद सांगानेर से मैदान में उतर चुके हैं। वहीं हनुमान बेनीवाल आज खींवसर से नामांकन दाखिल करेंगे। इसके साथ ही बसपा, आप सहित अन्य पार्टियां अपने प्रत्याशी मैदान में उतार चुकी है।

आप आज जारी करेगी सूची

आप भी राजस्थान के 200 सीट पर चुनाव लडऩे का एलान कर चुकी है। वह अब तक 103 सीट पर अपने प्रत्याशी उतार चुकी है। वहीं करीब 55 से 60 सीट पर आज शाम अपने प्रत्याशियों की घोषणा करेगी। इसके साथ ही बसपा भी मैदान में है। बसपा ने अब तक कुल 61 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। वहीं आमेर से नवीन पिलानियां भी बसपा में शामिल हो चुनाव लडऩे का एलान कर चुके हैं।

 

रानी की बग़ावत के आगे “शाह” हुए चारों खाने चित ( विडियो )

https://youtu.be/fI1AhAbTLuc

 

राजस्थान में भाजपा की पहली सूची में अमित शाह की पसंद पर भारी पड़ा वसुंधरा राजे का हठ .

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राजस्थान में सात दिसंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 131 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. पार्टी ने 85 मौजूदा विधायकों को फिर से मौका दिया है जबकि दो मंत्रियों सहित 23 का टिकट कट गया है.
हालांकि जिन 23 मौजूदा विधायकोंं के टिकट पर कैंची चली है, उनमें से पांच का नाम उम्र आड़े आने की वजह से सूची में नहीं है. पार्टी ने इनकी जगह इनके परिजनों को मैदान में उतारा है.
मंत्री नंद लाल मीणा के बेटे हेमंत मीणा, विधायक सुंदर लाल काका के बेटे कैलाश मेघवाल, गुरजंट सिंह के पोते गुरमीत सिंह बराड़, कुंजी लाल मीणा के बेटे राजेंद्र मीणा व कैलाश भंसाली के भतीजे अतुल भंसाली को टिकट मिला है.
यानी ऐसे विधायकों की संख्या महज़ 18 है जिनका टिकट ख़राब प्रदर्शन के आधार पर कटा है. जबकि पहले यह माना जा रहा है कि एंटीइनकम्बेंसी से निपटने के लिए भाजपा आधे से ज्यादा विधायकों की जगह नए चेहरों को उम्मीदवार बनाएगी.
सियासी गलियारों में चली इस चर्चा को उस समय और बल मिला जब अमित शाह ने मुख्यमंत्री वसुंधरा की सूची को नकार दिया.
गौरतलब है कि राजे बीते 31 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवारों के नाम तय करने के लिए अमित शाह से मिली थीं. इस दौरान पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी और पंचायतीराज मंत्री राजेंद्र राठौड़ भी उनके साथ थे. सूत्रों के अनुसार वे जो सूची अपने साथ ले गई थीं उसमें 90 नाम थे.
इस सूची में सबसे पहले श्रीगंगानगर ज़िले की सीटों पर चर्चा शुरू हुई. यहां की सादुलशहर सीट पर वसुंधरा मौजूदा उम्रदराज़ विधायक गुरजंट सिंह की जगह उनके पोते गुरमीत सिंह बराड़ का नाम तय कर ले गई थीं.
जानकारी के मुताबिक इसे देखते ही अमित शाह की त्योरियां चढ़ गईं. उन्होंने कहा कि जब विधायक जीतने की स्थिति में नहीं है तो उनका पोता कैसे जीत दर्ज करेगा.
भाजपा से जुड़े सूत्रों के अनुसार अमित शाह ने अपनी ओर से कराए गए सर्वे और संघ एवं विस्तारकों की ग्राउंड रिपोर्ट का हवाला देते हुए कड़े लहज़े में कहा कि पार्टी उसे ही टिकट देगी जो जीतने की स्थिति में होगा. सिर्फ इस आधार पर किसी को टिकट नहीं दिया जाएगा कि वो मंत्री, विधायक, बड़ा नेता या किसी का चहेता है. चुनाव राजस्थान में फिर से सरकार बनाने के लिए लड़ा जा रहा है न कि किसी पर मेहरबानी करने के लिए.
शाह के तल्ख़ तेवर पर वसुंधरा राजे ने तर्क दिया कि जो लोग पार्टी और उनसे लंबे समय से जुड़े हुए हैं उनकी अनदेखी करना ठीक नहीं होगा. इन लोगों को साथ लेकर नहीं चलेंगे तो चुनाव में नुकसान होगा, लेकिन राजे की इस दलील से अमित शाह सहमत नहीं हुए. उन्होंने प्रदेश नेतृत्व को सभी सीटों पर कम से कम तीन दावेदारों का पैनल बनाकर लाने के लिए कहा.

विडियो देखें 

https://youtu.be/fI1AhAbTLuc

शाह के निर्देश के बाद गुलाब चंद कटारिया, राजेंद्र राठौड़, अविनाश राय खन्ना, वी. सतीश, चंद्रशेखर, ओमप्रकाश माथुर, अर्जुनराम मेघवाल, गजेंद्र सिंह शेखावत, नारायण पंचारिया, ओम बिड़ला, राजेंद्र गहलोत, हरिओम सिंह, सीपी जोशी, किरण माहेश्वरी व भजन लाल ने प्रदेश के सभी ज़िलों का दौरा कर दावेदारों का पैनल तैयार किया.
माना जा रहा था कि नए सिरे से तैयार पैनल और अमित शाह के पास मौजूद सूची के मिलान के बाद उम्मीदवारों का ऐलान होगा, लेकिन वसुंधरा राजे की ज़िद के सामने यह पूरी कवायद कोरी साबित हुई. टिकट तय करने में मुख्यमंत्री की तूती किस क़दर बोली है इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि श्रीगंगानगर ज़िले की सादुलशहर सीट पर जिस नाम को देखकर अमित शाह भन्ना गए थे, पार्टी ने उन्हें ही प्रत्याशी घोषित किया है.
131 उम्मीदवारों की सूची में शामिल ज़्यादातर नाम मुख्यमंत्री की पसंद के हैं. जिन विधायकों के टिकट काटे गए हैं, उनके प्रदर्शन से वसुंधरा भी नाखुश थीं. हालांकि पार्टी ने संघनिष्ठ माने जाने वाले दो दर्जन से ज़्यादा नामों को चुनावी रण में उतारा है, लेकिन इनमें से एकाध को छोड़कर सभी के राजे से भी अच्छे संबंध हैं.
सूची की ख़ास बात यह है कि वसुंधरा खेमे के किसी बड़े नेता का टिकट नहीं कटा है. उनके चहेते माने जाने वाले मंत्री यूनुस ख़ान का टिकट ज़रूर अटक गया है.
गौरतलब है कि ख़ान के पास सार्वजनिक निर्माण विभाग और परिवहन विभाग के कैबिनेट मंत्री थे. आमतौर पर इन दोनों विभागों के अलग-अलग मंत्री होते हैं, लेकिन यूनुस ने अकेले ही इन्हें संभाला.
यूनुस ख़ान वर्तमान में नागौर ज़िले की डीडवाना सीट से विधायक हैं. चर्चा है कि उनकी उम्मीदवारी एक भी मुस्लिम को मौका नहीं देने की नीति के चपेट में आ सकती है. इस चर्चा को इसलिए बल मिला है, क्योंकि पार्टी ने नागौर विधायक हबीबुर्रहमान का टिकट काट दिया है. उल्लेखनीय है कि भाजपा में यूनुस ख़ान के अलावा वे ही मुस्लिम विधायक थे.
यूनुस ख़ान के अलावा वसुधंरा सरकार के सात मंत्रियों- कालीचरण सराफ, राजपाल सिंह शेखावत, जसवंत यादव, धन सिंह रावत, हेम सिंह भड़ाना, राजकुमार रिणवां व सुरेंद्र पाल सिंह टीटी के टिकट पर फैसला पहली सूची में नहीं हुआ है. इनमें कालीचरण सराफ का टिकट कटना तय माना जा रहा है.
भाजपा की ओर से जारी पहली सूची गौर करें तो इस पर वसुंधरा का अक्स साफतौर पर दिखाई देता है. राजनीतिक प्रेक्षकों के मुताबिक यह पूरी तरह से राजे की सूची है. इसमें अमित शाह का असर सिर्फ़ इतना सा है कि किसी भी मौजूदा विधायक को सीट बदलने का मौका नहीं मिला है. अब यह तय माना जा रहा है कि बाकी बचे 69 उम्मीदवार भी वसुंधरा की पसंद के होंगे.
यह लगातार दूसरा मौका है जब अमित शाह को वसुंधरा राजे की हठ के सामने सरेंडर करना पड़ा है. इससे पहले प्रदेशाध्यक्ष के मामले में उन्हें सूबे की मुख्यमंत्री के आगे झुकना पड़ा था.
गौरतलब है कि इसी साल फरवरी में दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में भाजपा की क़रारी हार के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने वसुंधरा के ‘यस मैन’ माने जाने वाले अशोक परनामी से 16 अप्रैल को इस्तीफ़ा लिया था.
अमित शाह राजस्थान में पार्टी की कमान केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के हाथों में सौंपना चाहते थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी शेखावत को प्रदेशाध्यक्ष बनाना चाहते थे, लेकिन वुसंधरा राजे ने इस पर सहमति व्यक्त नहीं की. पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने राजे को राज़ी करने के लिए सभी जतन किए, लेकिन मुख्यमंत्री टस से मस नहीं हुईं.
आख़िरकार मोदी-शाह की पसंद पर वसुंधरा का वीटो भारी पड़ा और मदन लाल सैनी प्रदेशाध्यक्ष बने. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री और अमित शाह के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला मौका था जब इन दोनों को पार्टी के किसी क्षेत्रीय क्षत्रप ने न केवल सीधी चुनौती दी, बल्कि घुटने टेकने पर भी मजबूर कर दिया. जबकि माना यह जाता है कि मोदी-शाह की मर्ज़ी के बिना भाजपा में पत्ता भी नहीं हिलता.
अमित शाह के इस आत्मसमर्पण को उनके खेमे के एक नेता दूसरी नज़र से देखते हैं. नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर वे कहते हैं, ‘राजस्थान में भाजपा हारी हुई लड़ाई लड़ रही है. अमित शाह ने जी यहां पार्टी को मुक़ाबले में लाने के लिए ख़ूब मशक्कत की, लेकिन बात बनती हुई दिखाई नहीं दे रही. मुख्यमंत्री का अड़ियल रवैया भी इसके लिए ज़िम्मेदार है.’
वे आगे कहते हैं, ‘पार्टी ने राजस्थान को हाथ से निकला हुआ मान लिया है. ऐसे में वसुंधरा का कहा न मानने का मतलब है उन्हें यह बहाना पकड़ा देना कि केंद्रीय नेतृत्व की दख़ल की वजह से पार्टी सत्ता में आने से रह गई. इसलिए पार्टी ने उन्हें पूरी तरह से फ्रीहैंड दे दिया है. पार्टी हारती है तो इसके लिए मुख्यमंत्री ज़िम्मेदार होंगी न कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व.’
वहीं, वसुंधरा खेमे के एक बड़े नेता उम्मीदवारों की पहली सूची को मुख्यमंत्री की जीत के तौर पर देखते हैं. ‘आॅफ द रिकॉर्ड’ बातचीत में वे कहते हैं, ‘एक बार फिर साबित हो गया कि राजस्थान में वसुंधरा ही भाजपा है. पार्टी के पास उनका दूसरा विकल्प नहीं है. उनकी बात मानना पार्टी की मजबूरी है. उन्हें फ्रीहैंड दिए बिना पार्टी चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकती.’
वे आगे कहते हैं, ‘पहले यह कहा जा रहा था कि अमित शाह ने अविनाश राय खन्ना, वी. सतीश, चंद्रशेखर, मदन लाल सैनी, प्रकाश जावड़ेकर और गजेंद्र सिंह शेखावत के ज़रिये ऐसा चक्रव्यूह बनाया है कि वसुंधरा राजे को आख़िरकार हाथ खड़े करने ही पड़ेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और न कभी होगा. राजस्थान में भाजपा की कमान वसुंधरा के हाथों में ही रहेगी.’

भाजपा में बगावत जारी उदयपुर ग्रामीण मेंफूल सिंह मीणा का विरोध हरीश मीणा लड़ सकते है निर्दलीय।

उदयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए 131 उम्मीदवारों की पहली सूचि जारी करने के
बाद असंतोष का सामना कर रही सतारूढ़ पार्टी बीजेपी की मुसीबते उदयपुर में कम होती हुई नजर नहीं आ रही है। एक ओर जहां प्रदेश के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के खिलाफ सभी विरोधी लामबंद हो रहे है, तो दूसरी ओर ग्रामीण विधानसभा सीट के लिए घोषित किये गए प्रत्याक्षी फुल सिंह मीणा की भी जोरदार खिलाफत हो रही है। उदयपुर ग्रामीण विधानसभा से भाजपा के असंतुष्ठों ने अनुसूचित जनजाति मोर्चा के हरीश मीणा को निर्दलीय चुनाव लड़ाने का एलान किया है।
लगातार हो रहे इस विरोध की श्रंखला में ग्रामीण विधानसभा के असंतुष्टो ने गोवर्धन विलास इलाके में स्थित बडबडेश्वर महादेव मंदिर परिसर में इक्कठा होकर निर्दलीय के रूप में अपना प्रत्याक्षी उतारने का ऐलान कर दिया है। ग्रामीण भाजपा के सभी असंतुष्ट कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने हुंकार भरते हुए अनुसूचित जनजाति मोर्चे के जिलाध्यक्ष हरीश मीणा को चुनाव लड़ाने की बात कही है। इस दौरान सभी लोगों ने एक बैठक का आयोजन कर आने वाले चुनाव में जीतने के लिए रणनीति भी बनाई है। बीजेपी झामेश्वर मंडल के उपाध्यक्ष राजेन्द्र टांक ने साफ किया की ग्रामीण विधायक फुल सिंह मीणा को लेकर क्षेत्र में खासा आक्रोश है। यही नहीं पहले भी सभी कार्यकर्ताओं ने अपनी भावनाओ से ग्रहसेवक कटारिया को अवगत करवा दिया गया था। लेकिन फिर भी फुलसिंह मीणा को पार्टी ने वापस प्रत्याक्षी बना दिया है। ऐसे में मंगलवार को सभी कार्यकर्ताओं ने मंदिर परिसर में इकठ्ठा होकर बैठक कि है कि हरीश मीणा को निर्दलीय चुनाव लड़ना चाहिए या जनता सेना से। टांक ने कहा की अभी सिर्फ मुख्य – मुख्य लोगों की बैठक ही आयोजित की गयी है आगे की रणनीति और बनाई जायेगी।

मेवाड़ की 28 सीटो पर जीतेगी भाजपा। इस बार पूूरी तरह कांग्रेस की जड़ो में तैजाब डालकर ही बनाउगा भाजपा की सरकार – कटारिया

उदयपुर। नगर विधायक एवं भाजपा प्रत्याषी गुलाब कटारिया के नई दिल्ली से उदयपुर पहुंचने पर एयरपोर्ट पर कार्यकर्ताओं की ओर से भव्य स्वागत किया गया। रास्तों में जगह जगह कटारिया का उपरणा, माला व पगड़ी पहना कर स्वागत किया। कटारिया डबोक होते हुए सबसे पहले बोहरा गणेष मंदिर पहुंचे और गणपति का आषीर्वाद लिया, जहाॅ बडी संख्या में कार्यकर्ता पहले से ही मौजूद थे जिन्होने जमकर नारेबाजी की। पार्टी कार्यालय पर आयोजित समारोह में कटारिया ने कहा कि आज मैं आभारी हॅू भारतीय जनता पार्टी केन्द्रीय एवं राज्य के नेतृत्व का कि उन्होने मुझे एक बार फिर जनता के बीच में जाकर आषीर्वाद लेने के लिए भेजा है। उन्होने आव्हान किया कि मेरे 40 साल के राजनीति में कोई एक काला दाग लगा कर बता दे। कार्यकर्ताओं का आव्हान किया कि हम किसी व्यक्ति के लिए कार्य नहीं करते है, हमने पार्टी के लिए कार्य नहीं किया, हमने हमेषा देश को ध्यान में रखते हुए अपने कदमों को आगे बढाया है। कार्यकर्ताओं का आव्हान किया कि चुनाव में कोई कुछ भी बोले बोलने दे, उनका काम है बोलने का हमारा काम है काम करने का। हम जो कार्य कर रहे है वो गुलाब कटारिया के लिए नही कर रहे है, हम किसी की चाकरी करने के लिए पैदा नही हुए है, हम देष सेवा का संकल्प लेकर राजनीति में आये है, लुटने , खसोटने के लिए नही आए है, हम लोगो को सही न्याय मिले व जो पिछडा है उसे आगे केसे लाये उसके लिए आये है। इसलिए पूरी ताकत के साथ चुनाव मे लग जाए, यो समझो बिमार हो गया, यो समझो खाट पर पडा, भगवान ने तुम्हे बिमार ही नही किया यो समझो, और अपने समस्त निजी कार्यो को भूल पार्टी का कार्य करे। उन्होने कहा चुनाव में गुलाब कटारिया या फुलसिंह मीणा को टिकिट मिल गया है इसलिए उनका कार्य करना है ऐसा नहीं हमें पार्टी के लिए कार्य करना है और जीत हार की चिंता मुझ पर छोड दे और मुझे उदयपुर से मुक्त रखे और मेरा कार्य आप कार्यकर्ता करेगे। इस बार मैं पूरे संभाग में घूमुंगा और कांग्रेस की जड़ो मे ऐसा तैजाब डालूंगा कि 28 में से 28 सीटे भाजपा की झोली में जायेगी, कांग्रेस ने पूरे देश को तबाह कर डाला.
बैठक को ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, जिलाध्यक्ष दिनेष भटट्, प्रमोद सामर, किरण जैन, प्रेमसिंह शक्तावत ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर जिला प्रमुख शांतिलाल मेघवाल, डेरी अध्यक्ष गीता पटेल, गिर्वा प्रधान तख्तसिंह , चंचल अग्रवाल, मनोहर चैधरी, शभू जैन, देवनारायण धाबाई, अमृत लाल मनारिया, गिरिष शर्मा,, राजेन्द्र बोर्दिया, ललित मेनारिया ,गजपाल सिंह , नारायण सिंह चदाना, डायालाल लबाना, युवा मोर्चा के गजेन्द्र भण्डारी, मोहन गूर्जर, किरण तातेड, ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष कृष्णकांत कुमावत, हेमलता जैन, पिकी मांडावत ,पारस जैन, सहित कार्यकर्ता उपस्थित थे।

सांप नेलवे हुए इकट्ठे:

कटारिय ने कार्यकर्ताओं का आव्हान किया कि ये चुनाव कोई सामान्य चुनाव नहीं है आज हमारे सामने सभी सांप नेवले इकटठ्े हो गए है, और आज देष की सभी देषद्रोहियो ताकतो ने कांग्रेस के साथ मिलकर हम से मुकाबला कर रहे है। हमारी पेदाईष ही राष्ट्र के लिए हुई है, हम किसी व्यक्ति के लिए पैदा नहीं हुए, न पार्टी के लिए पैदा हुए। हमसे मुकाबला करने का मतलब देषद्रोही ताकतो को आगे बढाने के लिए राज को झपट करके और राज के माध्यम से देषद्रोही ताकतो को यहा पनाह देना चाहते हो, वो मरे ही किसी किमत पर होने नही देगे। इस बार का चुनाव हमारी प्रतिष्ठा का चुनाव है, जीवन के संकल्प का चुनाव है

खेरवाडा विधायक का टिकिट कटने पर पार्टी कार्यालय पर किया विरोध प्रदर्शन।

उदयपुर। राजस्थान विधान सभा चुनाव के लिए भाजपा ने पहली लिस्ट जारी कर दी लेकिन लिस्ट के साथ ही अपनों के ही बगावती तेवर तो कार्यकर्ताओं का विरोध सहना पढ़ रहा है। खेरवाड़ा के वर्तमान विधायक नाना लाल अहारी का टिकिट काटने के बाद सोमवार को उनके कई समर्थक पार्टी कार्यालय पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन किया। खेरवाड़ा से भाजपा ने शंकरलाल खराड़ी को टिकिट दिया है।
सोमवार को पार्टी कार्यालय पर जहाँ एक तरफ गुलाबचंद कटारिया और फूलसिंह मीना को टिकिट मिले का जश्न मनाया जा रहा था वही दूसरी तरफ खेरवाडा से वर्तमान विधायक नानालाल अहारी को टिकट नहीं मिलने से उनके समर्थकों ने पार्टी कार्यालय के बाहर अपना जमावड़ा जमा दिया और अपना विरोध दर्ज कराया। पार्टी कार्यालय पहुचे नाना लाल अहारी के समर्थक सहित सभी आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने गृहमंत्री से वार्ताकर इस नारजगी को आलाकमान तक पहुंचाने की बात कही। हालाकि वर्तमान विधायक नानालाल अहारी खुद तो इस विरोध में शामिल नहीं हुए। लेकिन जिस तरह से उनके समर्थक और क्षेत्र के लोग विरोध करने के लिए पहुंचे थे उससे यह साफ हो रहा गया है कि कहीं ना कहीं इस विरोध में विधायक की भी मौन स्वीकृति है। इस विरोध के चलते नाना लाल अहारी के समर्थक करीब 1 घंटे तक पार्टी कार्यालय के बाहर जमे रहे और विधायक नानालाल के समर्थन में नारेबाजी करते रहे । गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा पहली सूची जारी करने के साथ ही उदयपुर जिले से खेरवाड़ा और मावली विधानसभा के वर्तमान विधायकों के टिकट काटे गए हैं जिसमें नानालाल अहारी और दली चंद डांगी शामिल है इस समय नानालाल अहारी का टिकट कटने के बाद खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में उनके समर्थकों में खासा आक्रोश देखा जा रहा है और यही वजह है कि सभी समर्थकों ने पार्टी कार्यालय पर इकट्ठा होकर अपना विरोध प्रकट किया।

मावली में भाजपा के खेमे में बगावत, कुलदीप सिंह ने बताई अपनी शक्ति , सकल राजपूत महासभा ने दिया समर्थन – धर्म नारायण की मुश्किलें बढ़ेगी।

उदयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने जैसे ही अपनी पहली सूचि जारी की वैसे ही बगावत के सूर भी उठ गए। बात कर रहे है हम उदयपुर जिले के मावली विधानसभा की यहाँ से धर्मनारायण जोशी को टिकिट दिया गया है। रात को धर्म नारायण जोशी को भाजपा ने मावली से अपना घोषित किया और सुबह होते होते मावली के युवा कुलदीप सिंह चुण्डावत ने अपने बगावती तेवर दिखा दिए। यही नहीं उन्होंने मावली डबोक स्थित धुनी माता के मंदिर में कार्यकर्ताओं का सम्मलेन आयोजित कर हज़ारों कार्यकर्ताओं के बिच अपना शक्ति प्रदर्शन कर यह बता दिया कि बाहरी व्यक्ति को भाजपा ने टिकिट जरूर देदिया है लेकिन जीत आसान नहीं होगी। हालाँकि धर्म नारायण जोशी पूर्व में मावली से चुनाव लद चुके है और हार का सामना करना पड़ा है। लेकिन इस बार उनके बाहरी होने का काफी विरोध है।
गौरतलब है कि धर्मनारायण जोशी उदयपुर शहर में रहते हैं और मावली में बाहरी स्वीकार नहीं, पैराशूट स्वीकार नहीं का नारा लग रहा है, जबकि धर्मनारायण जोशी 2008 के विधानसभा चुनाव में भी मावली से चुनाव लड़ चुके हैं. हालांकि उन्हें उस वक्त हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन हार का अंतर ज्यादा नहीं रहा था. इस बार मौजूदा विधायक दलीचंद डांगी का टिकट कटा है और जोशी को फिर मौका दिया गया है, लेकिन पिछले दो साल से चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे कुलदीप सिंह ने टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय लडऩे का ऐलान कर दिया है.
हालांकि, राजनीति के जानकारों का कहना है कि भाजपा को यहां भितरघात से ज्यादा खतरा नहीं है, बल्कि कांग्रेस की ओर से मिलने वाले टिकट पर हार-जीत तय होगी. क्योंकि कांग्रेस का उम्मीदवार मजबूत हुआ तो भाजपा को यहां कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा.
इधर दिन होते होते सकल राजपूत महासभा ने भी अपना समर्थन कुलदीप सिंह चुण्डावत को देदिया है।
सकल राजपूत महासभा मेवाड़ की सोमवार को संस्थापक तनवीर सिंह कृष्णावत की अध्यक्षता में हरिदास स्थित कार्यालय पर बैठक हुई जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी विधानसभा चुनाव में मावली सीट से निर्दलीय प्रत्याशी कुलदीप सिंह साकरिया खेड़ी का पूर्ण रूप से तन-मन-धन से समर्थन करेगा। तनवीर सिंह कृष्णावत ने कहा कि दलगत राजनीति से उपर उठकर समाज हित में वोट देने की अपील की है।, देहात अध्यक्ष गोपाल सिंह तितरडी, महामंत्री डाॅ. दिलिप सिंह चैहान,महेन्द्र सिंह, देवेन्द्र सिंह, डाॅ. घनश्यात सिंह रविन्द्र सिंह चैहान, लक्ष्मणसिंह चैहान सहित कार्यकर्ताओं ने बैठक में हिस्सा लिया।

ठग्स ऑफ हिंदुस्तान, साल की सबसे बड़ी फिल्म “ठग” नही पाई – इदरीस खत्री

फिल्म समीक्षक – इदरीस खत्री 
समय :- 164 मिनट
अदाकार :- अमिताभ, आमिर, कैथरीना, फातिमा सना, जैकी श्रॉफ, रोनित रॉय, शशांक अरोरा, ल्योड़ ओवेन व अन्य
आधारित :- कन्फेशन ऑफ ठग, फिलीप मेडोस टेलर के उपन्यास (1839) पर, (यह चर्चागत विषय-इस पर अगली समीक्षा)
निर्देशक व पटकथा:- विजय कृष्ण आचार्य उर्फ विक्टर
संगीत:- अजय अतुल
गीत:- अमिताभ भट्टाचार्य
निर्माता:-YRF-आदित्य चोपड़ा
भाषा:- हिंदी, तमिल, तेलगू
छायांकन:- मानुष नंदन
इफेक्ट:- विशाल आनंद, लुइस ब्रेड्स
वेषभूषा:- रविन्द्र पाटिल
सेट:- रचना मन्डल
स्क्रीन्स:- 5300 भारत, 1500 ओवरसीज़
बजट:- 250 करोड़₹(160+90 करोड़)
दोस्तो फ़िल्म के कहानी से पहले फ़िल्म पर चर्चा कर लेते है सीने प्रेमियो का देश के महानायक अमिताभ बच्चन और मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान को साथ मे पर्दे पर देखना निसन्देह स्वप्न पूरा होने जैसा ही होगा, आमिर ने फ़िल्म में से 70%आमदनी बतौर मेहनताना मांगी थी जो कि Y RF यशराज फ़िल्म ने मान ली थी,इस हिसाब से आमिर के खाते में जाएगे 700 करोड़ ₹,
 फ़िल्म 5300 स्क्रीन्स पर भारत मे जिसमे 4700 स्क्रीन्स में हिंदी, 300+300 में तमिल तेलगू में प्रदर्शित होगी,
फ़िल्म का पहले नाम ठग था, जो कि बाद में ठग्स ऑफ हिंदुस्तान किया गया,
दीवाली की छुट्टियों के कारण 4 दिन का सप्ताहन्त निश्चित ही 100 करोड़ पार करने की उम्मीद की जा सकती है
आमिर की फ़िल्म दंगल ने चायना में 2100 करोड़ का व्यापार किया था वहां पर 85000 सिनेमा घर है
भारत मे लगभग 25000 सिनेमा सिंगल ओर मल्टीप्लेक्स मिला कर
5300 स्क्रीन्स पर प्रदर्शन हैप्पी न्यू ईयर का रिकॉर्ड 44 करोड़ पहले दिन का टूट सकता है,,,
विक्टर मूल लेखक रहे है इसके पहले धूम 3 निर्देशित कर चुके है, बतौर लेखक गुरू, धूम सीरीज, रॉ वन संवाद लिख चुके है,, बतौर निर्देशन धूम 3, टशन के बाद तीसरी फिल्म है,
कहानी
बात शुरू होती है 1735 ई से, सईद बैग मिर्ज़ा (रोनित रॉय) छोटी सी रियासत रौंकपूर के राजा है,
औऱ ईस्ट इंडिया कम्पनी छल,कपट, लोभ यानी एन केन प्रकारेण पूरे हिन्दोस्तान पर कब्ज़ा करना चाहती है,
यहां भी ब्रिटिश जनरल क्लाइव (लायड ओवन) पहुच जाते है और राजा, पत्नी, बेटे को जान से मार देते है, राजा की एक बेटी है ज़फिरा जो कि बच्ची है उसे भी मारने की कोशिश की जाती है लेकिन राजा का सिपहसालार खुदाबख्श(अमिताभ) उसे बचा कर निकाल कर ले जाता है|ज़फिरा को युद्ध कौशल सिखाई जाती है और वह अपने माँ, पिता, भाई की मौत का बदला लिए बड़ी होती है, 11 साल बीत जाते है,अब खुदाबक्ष औऱ ज़फिरा(फातमा सना) के साथ एक आज़ाद नामक फ़ौज बना लेते है, अंग्रेजो से लड़ने के लिए
इधर फिरंगी मल्लाह(आमिर खान) जिसकी फितरत में धोखा ओर फरेब है, ठगी करके जीवन यापन करता है,
एक बार अंग्रेज उसे धोखा दे देते है और मोत के घाट उतार रहे होते है कि आज़ाद फ़ौज उन के जहाज पर आक्रमण कर देते है उसमें फिरँगी मल्लाह को गोली पड़ जाती है और दुर्घटना वश पड़ी गोली आज़ाद फ़ौज में फिरंगी मल्लाह खुदाबक्ष का चहेता हो जाता है, इलाज के लिए आज़ाद फ़ौज उसे अपने खुफिया ठिकाने पर ले जाती है, फिरंगी अपनी फितरत के चलते अलाबक्ष आज़ाद को पकड़ने के लिए फिरंगी से सौदा पटा लेते है,
फिरंगी इस काम के लिए जेल में बंद एक साथी सनीचर (जीशान अय्यूबी) को साथ ले लेता है, औऱ मिज़ापुर के राजा (शरद सक्सेना) ईस्ट इंडिया से लड़ने के लिए चोरी छिपे आज़ाद फ़ौज़ को हथियार देता है तो इसमें अलाबक्ष  पकड़ा जाते है, फिरंगी को ज़फिरा की सुरक्षा का वादा देकर, अब ईस्ट इंडिया कम्पनी आज़ाद फ़ौज़ को पकड़ना चाहती है फिर से फिरंगी के साथ जाल फैलाया जाता है क्योकि खुदाबख्श ज़फिरा की जिम्मेदारी फिरंगी पर डाल देते है तो फिरंगी पूरी आज़ाद फ़ौज़ को लेकर दशहरे के दिन हमले की योजना बनाते है जिसमे मदद करती है नचनिया सुरैया जान(कैटरीना)लेकिन कहानी में आता है ट्विस्ट
इन सब ट्विस्ट ओर टर्न के लिए फ़िल्म देखना पड़ेगी,
फ़िल्म भव्य बजट, भव्य कम्प्यूटर जनित तकनीक, युद्ध दृश्य, VFX, विज्वल इफेक्ट से भरी पड़ी है, साथ ही कुछ ड्रोन दृश्य भी अच्छे है लेकिन किसी फिल्म की रीढ़ की हड्डी होती है कहानी, जो कि 80 के दशक की लगती है,
बस यही फ़िल्म औऱ निर्देशक गच्चा खा गए,
नावेल कन्फेशन ऑफ ठग को इस कदर तोड़ा मरोड़ा गया है कि फ़िल्म में कब देशभक्ति जाग जाती है, कब गायब हो जाती है समझ से परे यानी इतिहास से भरपूर मखोल, देश के भूगोल से भी यही किया गया है क्योंकि राजस्थानी रियासत में समुंद्र किनारा ???
वेशभूषा पर काम नही किया गया,
गांनो में वश्मल्ले ही आकर्षित करता है शेष काम चलाऊ ही लगे है, कहि कहि पर पार्श्व संगीत दिल को छूता है लेकिन हर जगह नही|
अभिनाभ की गांनो की शायरी ठीक ठाक ही है लेकिन उचित संगीत के बिना गाने मृत हो जाते है,
कैथरीना के लिए ज्यादा कोई काम नही था उससे ज्यादा काम तो खुदाबक्ष की बाज से लिया गया है
भव्य सेट, भव्य फिल्मांकन फ़िल्म की सफलता की ग्यारंटी नही हो सकते,
जब तक अमिताभ फ़िल्म में दिखते है फ़िल्म दौड़ती है शेष समय निर्देशक फ़िल्म से बांध नही पाए
फ़िल्म में जो भी मोड़ आते है दर्शक पहले ही समझ लेते है,
एक बड़ा सवाल ठग के कन्फेशन पर आधारित किताब को देशभक्ति से जोड़ कर भी मखोल उड़ाना ही माना जाएगा????
ओर ईस्ट इंडिया कम्पनी के एक जनरल को मार दिया जाए तो ईस्ट इंडिया कम्पनी दोबारा प्रयास न करेगी कब्जे का यह भी हास्यास्पद ही लगता है
खेर फ़िल्म ने निराश किया
अभिनय में आमिर मंजे हुवे लगते है लेकिन पाइरेट्स के जेक सपेरों से कोसो पीछे लगते है, अमिताभ जो करदे वही अभिनय होता है, फातिमा सना ओर कैटरीना को अभिनय में बहुत सीखना बाकी है, सनीचर की भूमिका में जीशान अय्यूबी अभिनय डिप्लोमा धारी धरती पकड़ अभिनेता है जो कि लगे भी शानदार के साथ अभिनय भी जानदार ओर जीवन्त लगा है,
फ़िल्म देखते समय 80 के दशक की फिल्मों की याद आती है वोभी 2K18 में,जो कि फ़िल्म के लिए ओर निर्देशक विक्टर के लिए हानिकारक है, फ़िल्म टिपिकल बॉलीवुड मसाला बनाने के चक्कर मे देशभक्ति से भी बाहर हो गए निर्देशक
दीपावली के सप्ताहन्त से फ़िल्म का बजट निकलना आसान होगा
अमिताभ और आमिर को पर्दे पर निहारना फ़िल्म की लागत और कमाई निकाल सकता है,,
फ़िल्म को 2.5 स्टार्स
क्योकि बड़ी उम्मीदें बड़ी निराशा भी लाती है यही हुआ इस फ़िल्म के साथ भी,,
इदरीस खत्री 

फिल्म समीक्षक – इदरीस खत्री

क्या वसुंधरा राजे और अमित शाह में एक बार फिर ठन गई है?

vasundhara and amit shah

राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष होने के मामले में वसुंधरा राजे के हठ के सामने सरेंडर कर चुके भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह टिकट वितरण के मुद्दे पर उनसे दो-दो हाथ करने के मूड में हैं.

शाह ने अपने स्तर पर करवाए सर्वे और संघ व विस्तारकों की ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर आधे से ज़्यादा विधायकों के टिकट पर तलवार लटका दी है, लेकिन वसुंधरा 20 फीसदी से ज़्यादा विधायकों का टिकट काटने को तैयार नहीं हैं.

गौरतलब है कि राजे बीते 31 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवारों के नाम तय करने के लिए अमित शाह से मिली थीं. इस दौरान पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी और पंचायतीराज मंत्री राजेंद्र राठौड़ भी उनके साथ थे. सूत्रों के अनुसार वे जो सूची अपने साथ ले गई थीं उसमें 90 नाम थे.

इस सूची को राजे ने जयपुर और रणकपुर में हुई रायशुमारी के बाद अंतिम रूप दिया था.

गौरतलब है कि प्रदेश भाजपा की ओर से 12 हज़ार कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों से पार्टी प्रत्याशी के बारे में राय पूछी गई थी. बताया जा रहा है कि इसके आधार पर 90 सीटों पर सिंगल नाम का पैनल तैयार किया गया. वसुंधरा को उम्मीद थी कि शाह जाते ही इस सूची पर मुहर लगा देंगे, लेकिन हुआ इसका उल्टा.

दरअसल, सबसे पहले श्रीगंगानगर ज़िले की सीटों पर चर्चा शुरू हुई. यहां की एक सीट पर वसुंधरा मौजूदा उम्रदराज़ विधायक की जगह उनके बेटे का नाम तय कर ले गई थीं.

जानकारी के मुताबिक इसे देखते ही अमित शाह की त्योरियां चढ़ गईं. उन्होंने कहा कि जब विधायक जीतने की स्थिति में नहीं है तो उनका बेटा कैसे जीत दर्ज करेगा.

भाजपा से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने अपनी ओर से कराए गए सर्वे और संघ एवं विस्तारकों की ग्राउंड रिपोर्ट का हवाला देते हुए कड़े लहज़े में कहा कि पार्टी उसे ही टिकट देगी जो जीतने की स्थिति में होगा. सिर्फ इस आधार पर किसी को टिकट नहीं दिया जाएगा कि वो मंत्री, विधायक, बड़ा नेता या किसी का चहेता है. चुनाव राजस्थान में फिर से सरकार बनाने के लिए लड़ा जा रहा है न कि किसी पर मेहरबानी करने के लिए.

शाह के तल्ख़ तेवर से सन्न वसुंधरा ने तर्क दिया कि जो लोग पार्टी और उनसे लंबे समय से जुड़े हुए हैं उनकी अनदेखी करना ठीक नहीं होगा. इन लोगों को साथ लेकर नहीं चलेंगे तो चुनाव में नुकसान होगा, लेकिन राजे की इस दलील से अमित शाह सहमत नहीं हुए.

सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने प्रदेश नेतृत्व को सभी सीटों पर कम से कम तीन दावेदारों का पैनल बनाकर लाने के लिए कहा है. साथ ही हर सीट के जातिगत आंकड़े, पांच साल में हुए विकास कार्य, 2013 के विधानसभा चुनाव का वोटिंग पैटर्न, वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक और जातिगत स्थिति का विस्तृत ब्योरा तैयार करने के लिए कहा है.

भाजपा अध्यक्ष ने रिपोर्ट में टिकट के दावेदारों की सूची के साथ मौजूदा विधायक का टिकट काटने की स्थिति में बागी होने से रोकने की योजना को भी शामिल करने के लिए कहा है. उनके इस निर्देश का पालन करने के लिए आननफानन प्रदेश भाजपा के 15 नेताओं फीडबैक लेने ज़िला मुख्यालयों पर भेजा गया.

गुलाब चंद कटारिया, राजेंद्र राठौड़, अविनाश राय खन्ना, वी. सतीश, चंद्रशेखर, ओमप्रकाश माथुर, अर्जुनराम मेघवाल, गजेंद्र सिंह शेखावत, नारायण पंचारिया, ओम बिड़ला, राजेंद्र गहलोत, हरिओम सिंह, सीपी जोशी, किरण माहेश्वरी व भजन लाल ने स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का मन टटोल जो नाम तय किए हैं उन्हें देखकर भी वसुंधरा की पेशानी पर पसीना आ गया है.

सूत्रों के मुताबिक छह मंत्रियों सहित कुल 60 विधायकों की रिपोर्ट वसुंधरा की पसंद से उल्टी आई है. अभी तो इस सूची को अमित शाह की पास मौजूद रिपोर्ट से मिलान होना बाकी है. बताया जा रहा है कि यदि राजस्थान में टिकट वितरण का ‘शाह फॉर्मूला’ लागू हुआ तो आधे से ज़्यादा विधायकों के टिकट कटना तय है.

प्रदेश भाजपा में चल रही चर्चा के मुताबिक अमित शाह, संघ और विस्तारकों के सर्वे में आधे से ज़्यादा विधायकों के ख़िलाफ़ रिपोर्ट आई है. इनमें कई ऐसे बड़े नाम भी शामिल हैं. इनमें सरकार के मंत्री और वसुंधरा के चहेते बड़े नेता भी हैं. राजे किसी भी सूरत में अपनों के टिकट पर कैंची नहीं चलने देंगी.

इस स्थिति में वसुंधरा राजे और अमित शाह के बीच तनातनी होना निश्चित है. यदि ऐसा होता है तो यह दूसरा मौका होगा जब इन दोनों के बीच सियासी भिड़ंत होगी. इससे पहले प्रदेशाध्यक्ष के मामले में वसुंधरा के शाह आमने-सामने हुए थे. तब राजे के हठ के सामने भाजपा अध्यक्ष को सरेंडर करना पड़ा था.

गौरतलब है कि इसी साल फरवरी में दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में भाजपा की क़रारी हार के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने वसुंधरा के ‘यस मैन’ माने जाने वाले अशोक परनामी से 16 अप्रैल को इस्तीफ़ा लिया था. अमित शाह इस ओहदे पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को बिठाना चाहते थे.

नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी शेखावत को प्रदेशाध्यक्ष बनाना चाहते थे, लेकिन वुसंधरा राजे ने इस पर सहमति व्यक्त नहीं की. पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने राजे को राज़ी करने के लिए सभी जतन किए, लेकिन मुख्यमंत्री टस से मस नहीं हुईं.

आख़िरकार मोदी-शाह की पसंद पर वसुंधरा का वीटो भारी पड़ा और मदन लाल सैनी प्रदेशाध्यक्ष बने.

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री और अमित शाह के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला मौका था जब इन दोनों को पार्टी के किसी क्षेत्रीय क्षत्रप ने न केवल सीधी चुनौती दी, बल्कि घुटने टेकने पर भी मजबूर कर दिया. जबकि माना यह जाता है कि मोदी-शाह की मर्ज़ी के बिना भाजपा में पत्ता भी नहीं हिलता.

अमित शाह को क़रीब से जानने वाले यह अक्सर कहते हैं कि वे सीधी चुनौती देने वालों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करते. उनके एक क़रीबी नेता कहते हैं, ‘अमित शाह माफ करने वाले शख्स नहीं हैं. वे वसुंधरा से गजेंद्र सिंह शेखावत को अध्यक्ष नहीं बनने देने का बदला जरूर लेंगे. टिकट उनकी मर्जी से बंटेंगे न कि मुख्यमंत्री के कहने से.’

राजस्थान के चुनावों में अहम भूमिका निभा रहे ये नेता आगे कहते हैं, ‘इस बार के चुनाव में वसुंधरा राजे पार्टी का चेहरा जरूर हैं, लेकिन उनके अकेले के हाथ में कुछ भी नहीं है. अमित शाह ने अविनाश राय खन्ना, वी. सतीश, चंद्रशेखर, मदन लाल सैनी, प्रकाश जावड़ेकर और गजेंद्र सिंह शेखावत के जरिये ऐसा चक्रव्यूह बनाया है कि वसुंधरा को हाथ खड़े करने ही पड़ेंगे.’

उल्लेखनीय है कि अविनाश राय खन्ना प्रदेश प्रभारी, वी. सतीश सह प्रभारी, चंद्रशेखर संगठन महामंत्री और मदन लाल सैनी प्रदेशाध्यक्ष की हैसियत से पहले से ही राजस्थान में सक्रिय हैं जबकि प्रकाश जावड़ेकर को चुनाव प्रभारी और गजेंद्र सिंह शेखावत को चुनाव प्रबंध समिति का संयोजक बनाया गया है.

भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक पार्टी उपाध्यक्ष ओमप्रकाश माथुर इन सबकी धुरी हैं. यह पूरी टीम जत्था सीधे अमित शाह को रिपोर्ट करता है. राजस्थान भाजपा में माथुर की धमक का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वसुंधरा 90 नामों की जिस सूची को अमित शाह के पास लेकर गई थीं, उसे दिखाने उन्हें माथुर के घर जाना पड़ा.

ऐसे में वसुंधरा के लिए टिकट वितरण में अपनी मर्जी चलाना आसान नहीं होगा. इस तनातनी में वसुंधरा के सामने बड़ी समस्या अकेले पड़ना है. टिकट वितरण में अमित शाह के सुर में सुर मिलाने के लिए नेताओं की लंबी फेहरिस्त है, वहीं राजे के कहे का समर्थन करने वाला कोई भी नहीं है.

हालांकि राजे खेमे के नेताओं को अभी भी भरोसा है कि टिकटों का बंटवारा मुख्यमंत्री की मर्जी से ही होगा. उनके एक करीबी नेता आॅफ द रिकॉर्ड बातचीत में कहते हैं, ‘मैडम ने न कभी किसी के सामने सरेंडर किया है और न अब करेंगी. कोई चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन टिकट वितरण में आख़िरकार चलेगी उनकी ही.’

वे आगे कहते हैं, ‘मैडम को यह अंदेशा पहले से था कि इस बार उनके क़रीबी लोगों का टिकट काटने की कोशिश होगी. उन्हें इसकी भनक तभी लग गई थी जब अमित शाह ने मुख्यमंत्री की ग़ैरमौजूदगी में कार्यक्रम किए. कोई कितना भी ज़ोर लगा ले मगर टिकट उसे ही मिलेगा जिसे मैडम चाहेंगी. जब वे ज़िद पर अड़ जाती हैं तो किसी की नहीं सुनती.’

यानी टिकट वितरण में अमित शाह और वसुंधरा राजे के बीच तनातनी होना तय है. यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सियासी लड़ाई कितनी लंबी चलेगी और इसमें विजेता कौन रहेगा. पिछली बार की तहर वसुंधरा ही भारी पड़ेंगी या इस बार अमित शाह बाज़ी मार लेंगे.