पांच दिन का दीपोत्सव भाई दूज के साथ संम्पन – दीपावली पर रोशनी से नहाया शहर।

उदयपुर। सुख-समृद्धि व वैभव का पांच दिवसीय दीपोत्सव धनतेरस से शुरू होकर शुक्रवार को भाई दूज के साथ संम्पन्न हुआ। दीपावली पर शहर रोशनी में नहाया। हर घर-प्रतिष्ठान, बाजार, चौक-चौराहा व सरकारी भवन पर आकर्षक सजावट की गई। पटाखों और मिठाइयों के साथ जोर शोर के साथ मनाई गयी दिवाली। पटाखों के लिए कोर्ट के चाहे कैसे भी आदेश हो लेकिन दीपावली की खुशियों के आगे सब कुछ फीका रहा और देर रात तक पटाखे छुटते रहे। बच्चों और बड़ों ने खूब पटाखे छुटाए , हालाँकि पटाखों पर पड़ी महगाई की मार ने कुछ कमी जरूर की। लोगों ने शुभ मुहूर्त पर लक्ष्मी पूजन कर खुशहाली की कामना की। पूरी रात आतिशबाजी का दौर जारी रहा।
दीपावली को सुबह से शहर में विशेष चहल-पहल रही। लोगों ने माता लक्ष्मी की आराधना कर जहां सुख- समृद्धि और वैभव की कामना की, वहीं शाम को घर- घर में दीप जलाकर प्रभु श्री राम के वनवास से लौटने की खुशियां मनाई। शाहर के श्री महालक्ष्मी मंदिर में सुबह से श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने माता लक्ष्मी के दर्शन कर सुख समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर शहर के विशिष्ट व्यक्तियों ने भी के परिवार सहित माताजी के दर्शन किए। इनमें गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी, मेवाड़ पूर्व राजघराने की अरविंद सिंह मेवाड़, कांग्रेस की डॉक्टर गिरिजा व्यास, त्रिलोक पूर्बिया सहित अन्य लोग शामिल थे। मंदिर पर श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ रही।श्रद्धालुओं ने लंबी कतारों में लगकर महालक्ष्मी जी के दर्शन किए। श्रद्धालुओं के लिए दीपोत्सव समिति की ओर से भटियानी चौहट्टा में विशेष सजावट की गई। इसके साथ ही दीपावली पर दर्शन करने आने वाले लोगों के लिए भजन संध्या का आयोजन किया गया।भक्तों ने कतार में लगे हुए भजनों का आनंद उठाया। इधर शाम होने के साथ ही घर-घर में दीपक जलाकर अमावस्या की अंधकार को मिटाया गया। पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह उमंग और श्रद्धा व्याप्त थी। बच्चों, बड़ों और बुजुर्गों ने आतिशबाजी कर प्रभु श्री राम के वनवास से लौटने की खुशियां मनाई। शहरवासियों ने लिया मेले का लुत्फ नगर निगम की ओर से टाउन हॉल परिसर में चल रहे मेले में दीपावली के दिन विशेष भीड़ उमड़ी। मेला परिसर के आसपास के व्यापारियों ने जिसमें बापू बाजार व्यापार मंडल, सूरजपोल व्यापार मंडल और अन्य मंडलों ने विविध प्रकार के आयोजन किए। इसमें स्टेज पर प्रतियोगिता रखी गई। जिसमें शहर वासियों ने भाग लिया। उन्हें उपहार भी प्रदान किए गए। विशेष सजावट से सजे बाजारों में लोगों ने जमकर रोशनी का आनंद उठाया। इसके साथ ही मेले में मनोरंजन के संसाधनों का भरपूर लुत्फ लिया। लोगों ने यहां लगी स्टालों पर जमकर खरीदारी की।

खेखरे के दिन हुई गोवर्धन पूजा :
दीपावली के अगले दिन गुरुवार को अलसुबह महिलाओं ने परंपरानुसार गोवर्धन पूजा की। दीपावली के दूसरे दिन गो पूजा का विशेष महत्‍व होता है। महिलाओं ने अल सुबह गाय की पूजा के बाद गाय पालक (गाय की सेवा करने वाला) को उपहार और अन्‍न दिया। गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर जल, मौली, रोली, चावल, फूल, दही और तेल का दीपक जलाकर पूजा की। ऐसी मान्‍यता है कि इंद्र के कोप से बचने के लिए गोकुल वासियों ने जब गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली, तब उन्‍होंने 56 भोग बनाकर श्री कृष्ण को भोग लगाया था। इससे खुश होकर श्री कृष्ण ने आशीर्वाद दिया और कहा इंद्र से डरने की जरूरत नहीं है, वह गोकुल वासियों की हमेशा रक्षा करेंगे। दिवाली के अगले दिन महिलाऐं गोवर्धन पूजा करती है तो घर के पुरुष इस दिन रामा-शामा करते है । जो लोग दीवाली की रात आतिशबाजी में व्यस्त रहे वो लोग शुक्रवार के दिन रामा शामा करने में जुटे रहे। रामा शामा का ये सिलसिला दिन भर चलता रहा। इस दौरान लोगों ने अपने घर आने वाले मेहमानों का स्वागत किया और घर में बनी मिठाइयों से उनका मुंह मीठा कराया। इसी तरह का माहौल सियासी पार्टियों के दफ्तरों और प्राईवेट कंपनियों के संस्थानों में रहा। उधर, दिवाली की छुट्टियों के बाद बाहर के लोगों का घर लौटने का सिलसिला शुरू हो गया।
रोड़वेज और प्राईवेट बसों में सवारियां खचाखच भरी रही। ऐसा ही हाल रेलगाड़ियों का भी रहा… रेलवे स्टेशनों पर रेलों के ज़रिये घर लौटने वालों की रेलमपेल देखि गई।

भाई दूज :
मेवाड़ के उदयपुर जिले में भाई दूज का पर्व पारम्परिक ढंग से उत्साहपूर्वक मनाया गया। इसके साथ ही पांच दिवसीय प्रकाश-पर्व सोल्लास संपन्न हो गया। उदयपुर शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस दिन काफी उल्लासपूर्ण माहौल देखने को मिला। भाई दूज के दिन भाई और भाभियों ने अपनी बहिनों और ननद को उपहार में नकद राशि और वस्त्र भेंट किए। इस दिन सुबह से ही शुभ मुुुुहूर्त में बहिनें अपने भाई के घर पहुंचना शुरू हो गई। उन्होंने भाई के अक्षत तिलक लगाकर उसके दीर्घायु होने की कामना की। देर शाम तक शहर के मुख्य मार्गों एवं गली-मोहल्लों में पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों में लकदक सजी महिलाओं व बालिकाओं की चहल-पहल बनी रही। दूर-दराज के क्षेत्रों एवं ग्रामीण अंचलों से भी कई महिलाएं भाई दूज मनाने यहां पहुंचीं। नगर में मिठाई की दुकानों पर काफी भीड़ देखने को मिली। दुकानदारों ने कई प्रकार की मिठाइयां तैयार कर सजावट की। इस अवसर पर बहिनों ने भाइयों के तिलक लगा कर उन्हें मिठाई खिलाई और उनकी दीर्घायु की कामना की

थानेदार के नाम कांस्टेबल ने मांगे दो लाख- एसीबी की ट्रेप कार्रवाई में सनसनीखेज खुलासे : राजनगर थाने में रिश्वत मांगने का मामला

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, राजसमंद की ट्रेप कार्रवाई में दो लाख रुपए की रिश्वत मांगने पर राजनगर थाने से लाइन हाजिर किए कांस्टेबल महावीरसिंह के विरुद्ध पुलिस थानों में मुकदमे दर्ज होने के बाद चौथ वसूली का सारा भंडाफोड़ हो गया। थाने में दर्ज प्रकरण में एफआर लगाने की एवज में 2 लाख रुपए थानेदार के नाम मांगे, जबकि सीआई से एक मुलाकात कराने के नाम पर 10 हजार रुपए भी ऐंठ लिए। यही नहीं, एफआईआर रफा-दफा करने के लिए अनुसंधान अधिकारी को दरकिनार कर 30 हजार रुपए अलग से खुद की फीस मांगी और सिगरेट के लिए हाथोंहाथ 5सौ रुपए भी ऐंठ लिए।
यह खुलासा एसीबी की ओर से कांस्टेबल महावीरसिंह के दो लाख रुपए रिश्वत मांगने पर 14 सितम्बर 18 को किए गए सत्यापन से हुआ। एसीबी के रिकॉर्डर में कैद तथ्यों को खंगाला, तो कांस्टेबल के रिश्वत मांगने के पीछे अप्रत्यक्ष तौर पर कई पुलिस अधिकारियों का दबाव होने का खुलासा हुआ। बातचीत में दो लाख रुपए तो सिर्फ सीआई के नाम पर मांगे थे, जबकि इस प्रकरण के अनुसंधान अधिकारी व एएसआई को कोई राशि नहीं देने की बात सामने आई। कांस्टेबल बोला कि एएसआई को कुछ नहीं आता-जाता तो उन्हें किस बात का पैसा देंगे। फाइल में जो भी लिखना या करना है, उसी के हाथ में है। पैसे आते ही एफआर कट जाएगी। अगर, एएसआई फोन भी करें, तो इधर-उधर होने का बहाना बनाकर टालते रहना और मैं बुलाऊं तो तत्काल आ जाना। मामले में चाहे निर्णय कुछ भी हो, मैं आपको (पीडि़त परिवादी) को बंद नहीं होने दूंगा। मस्त रहो।
यह था मामला: सांगठकला पंचायत के सापोल में राजपूताना फेल्सपार की खदान है। इसमें परिवादी ने राजसमंद के हामिद नूर व सरिता सेन को साझेदार बनाया। साझेदारों ने खदान को नहीं चलाया और वे उनकी निजी मार्बल माइंस का मलबा लाकर साझेदारी वाली फेल्सपार खदान में डालने लगा। इस पर परिवादी ने माइंस में साझेदारी की कार्रवाई निरस्त कराने के लिए सिविल न्यायालय में वाद दायर कर दिया। फिर भी परिवादी को डराने, धमकाने के लिहाज से हामिद नूर व सरिता सेन की ओर से जरिए इस्तगासे के राजनगर थाने में 6 जुलाई 2018 को प्रकरण दर्ज कराया गया। इस मामले की जांच एएसआई रामसिंह कर रहे हैं। उक्त मामले में गिरफ्तारी की बात कहते हुए कांस्टेबल महावीरसिंह रिश्वत मांग रहा था।

आरोपी कांस्टेबल व परिवाद की बातचीत के अंश
कांस्टेबल : प्रकरण में एफआर पर कितने दोगे?
परिवादी : आप बोलो, कितने लोगे।
कांस्टेबल : खान साझेदार का पैसा दे दो।
परिवादी : दो साल में लेबर, खनन पर 17 लाख रुपए खर्च हुए, जो साझेदार नहीं दे रहे और माइंस में डपिंग भी कर दी।
आरोपी : एफआर लगाने, थाने में सेट करना और जो भी करना मुझे ही करना है। सब कर दूंगा और आपका बाल भी बांका नहीं होने दूंगा।
परिवादी : कितने लोगे, फिर मेरे को व्यवस्था करनी पड़ेगी।
आरोपी : दो एक पेटी दे देना।
परिवादी : यह तो ज्यादा है, डेढ़ लाख तक ले लेना।
आरोपी : ठीक है, डेढ़ लाख दे देना।
परिवादी : मलबा डाला, डपिंग किया, डराया व पुलिस कार्रवाई की, जिसका खर्चा तो साझेदारों से लेना ही पड़ेगा।
आरोपी : खान साझेदारों से समझौते के तहत साढ़े सात लाख व कुछ ब्याज दे दो। फिर मैं एफआर लिख दूंगा। कोई भी फोन करें, रामसिंह वगैरह तो उन्हें कह देना इधर उधर हूं। ठोस बात के लिए मैं बुलाऊ तो आ जाना।
परिवादी : ठीक है।
आरोपी : ठीक है, … और भाई मेरी फीस कहा है?
परिवादी : बोलो आपकी फीस भी ?
आरोपी : जो हो, जितनी हो अभी दे दो ?
परिवादी : डेढ़ लाख तो सीआई साहब लेंगे और तो राम सिंहजी को नहीं देने क्या ?
आरोपी : रामसिंह को किस बात के, उसे कुछ आता जाता नहीं, किस बात के पैसे।
परिवादी : मुझे तो मेटर निबटाना है।
आरोपी : मेटर मैं निबटा दूंगा।
परिवादी :आपकी फीस कितनी?
आरोपी : 30 हजार दे देना।
परिवादी :10 तो पहले दे चुका हूं, इसकी व्यवस्था करने में दो तीन दिन लगेंगे।
आरोपी : सीआई साहब बुलाए, मैं बुलाऊ तो डरना मत, मैं सब सेट कर दूंगा।
परिवादी : मैं बंद होने से नहीं डरता हूं।
आरोपी : आप मस्त रहो। कुछ अभी सिगरेट विगरेट के तो रुपए दो ?
परिवादी : सिगरेट के क्या दूं। दो सौ- पांच सौ रुपए दे दूं तो बहुत है।
आरोपी : 5 सौ रुपए दे जाओ।
परिवादी : ये लो पांच सौ
आरोपी : नकली तो नहीं है ?
परिवादी : असली है, नहीं होते तो मना कर देता।
आरोपी : दाएं- बाएं रहना और रुपयों की व्यवस्था कर देना।
परिवादी : एक दो दिन में।
हर पहलू से जांच
कांस्टेबल की ओर से रिश्वत मांगने में जो भी तथ्य सामने आए हैं। उसकी हर एक पहलू से जांच की जाएगी, जो भी दोषी पाए जाएंगे। उनके विरुद्ध कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
राजेश चौधरी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, राजसमंद

3 साल की बच्ची के मुंह में ‘सुतली बम’ रख कर फोड़ा, लगे 50 टांके और हालत नाजुक

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दिवाली से एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुई एक घटना ने सबको हैरान कर दिया है. मेरठ में 3 साल की बच्ची उस वक्त बुरी तरह से घायल हो गई, जब एक लड़के ने उसके मुंह में पटाखा रख दिया और उसमें आग लगा कर विस्फोट कर दिया. यह जानकारी बुधवार को पुलिस ने दी. मुंह में पटाखों के जलने से बुरी तरह घायल बच्ची को तुरंत पास के अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है.

बता दें कि यह घटना मंगलवार को मिलक गांव में हुई थी. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कर ली है और उसकी तलाश में जुट गई है.

बताया जा रहा है कि बच्ची के पिता शशि कुमार ने अपनी शिकायत में स्थानीय युवक हरपाल का नाम लिया है. अपने घर के बाहर खेल रही शशि कुमार की बेटी के पास जाकर हरपाल उसके मुंह में ‘सूतली’ बम रख दिया और उसमें आग लगा दी.

जैसे ही हरपाल ने लड़की के मुंह में रखी सूतली बम में माचिस लगाई, बम मुंह में ही ब्लास्ट कर गया, जिसकी वजह से वह बुरी तरह से जख्मी हो गई. सुतली बम का धमाका इतना बड़ा था कि उसे 50 टांके लगे हैं और उसके गले में संक्रमण हो गया है. हालांकि, बच्ची का इलाज चल रहा है.

प्रतापनगर थाने का समाज को बड़ा सन्देश – गरीब बच्चों में मिठाइयाँ और पटाखे बाँट कर मनाई दिवाली।

उदयपुर। दीपावली का त्यौहार खुशियों का त्यौहार होता है और यहाँ खुशियां हर एक के हिस्से में आनी चाहिए क्या गरीब क्या अमीर। कुछ ऐसी ही सोच लिए शहर के प्रतापनगर थाने ने एक सार्थक पहल की और अपने थाना क्षेत्र के गरीब बच्चों में मिठाइयाँ और पटाखे बाँट कर उनके साथ दीपावली की खुशियों को साझा किया। दीपावली के दिन प्रतापनगर थाना अधिकारी डॉ हनवंत सिंह और थाने के अन्य पुलिस कर्मियों ने अपने थाना क्षेत्र में रह रहे गरीब बच्चों की बस्ती मी जाकर बच्चों को मिठाइयां और पटाखों का वितरण किया। पुलिस द्वारा किये गए सामाजिक सरोकार से जुड़े इस कार्य को शहरवासियों द्वारा सोशल मीडिया पर खूब सराहा। थाना अधिकारी डॉ हनवंत सिंह का कहना है कि मना कि पुलिस का कार्य शहर की सुरक्षा और अपराधी व् अपराधों पर नियंत्रण का कार्य प्रमुख होता है लेकिन पुलिस का सबसे पहला कर्तव्य आम जन में विश्वाश का भी है। एसी छोटी छोटी पहल आम जन में विश्वास मजबूत करती है।
जब सारा शहर खुशियाँ मना रहा होता है उस समय एक सिपाही से लेकर पुलिस के बड़े अधिकारी तक उन खुशियों और आम जनता की सुरक्षा के प्रबंध में खड़े होते है। कई पुलिस कर्मी ऐसे भी है जो अपनी ड्यूटी और कर्तव्य के चलते अपने घर परिवार से दूर यहाँ न्तैनात रहते है। ऐसे में गरीब बच्चों के साथ थोड़ी सी खुशियाँ बाँट कर मन को संतोष भी मिलता है।

दिपावली / पूजा के लिए 14 घंटे में 4 मुहूर्त, शाम 6.08 से 8.05 बजे तक का समय सर्वश्रेष्ठ।

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अाज दीपावली है। 14 घंटे में आप चार मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन कर सकते हैं। लग्न के हिसाब से पूजा के लिए शाम 6.08 बजे से रात 8.05 बजे तक का समय सर्वश्रेष्ठ बताया गया है।

दीपावली पर 59 साल बाद शुक्र, सूर्य, चंद्रमा का दुर्लभ संयोग

ज्योतिषाचार्य दामोदर प्रसाद शर्मा के मुताबिक दीपावली पर शुक्र, सूर्य, चंद्रमा तुला राशि में है, जो मालव्य योग बनता है। जबकि बुध और बृहस्पति वृश्चिक राशि में, शनि धनु राशि में और मंगल कुंभ राशि में हैं। यह दीपावली पर 59 साल में बना श्रेष्ठ संयोग है। इस दिन महालक्ष्मी की पूजा के लिए 13 मिनट का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। जो शाम 6:20 से 6:33 के बीच होगा। इसमें प्रदोष काल, वृष लग्न और कुंभ का स्थिर नवमांश रहेगा।

दुनिया में दिवाली

दुनियाभर में 100 करोड़ से ज्यादा लोग दिवाली मना रहे। 15 देशों में आज छुट्‌टी होगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति दिवाली पर पार्टी देंगे। ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, न्यूजीलैंड समेत 35 देशों के राष्ट्राध्यक्ष कार्यक्रमों में शामिल होंगे।
दिवाली पर 2016 में अमेरिका ने डाक टिकट जारी किया था। करीब दो माह में ही 1 लाख 70 हजार टिकट बिक गए। यूएस पोस्टल सर्विस के इतिहास में यह बेस्ट सेलिंग स्टैंप बनी।
ज्यादातर देशों, सभ्यताओं और धर्मों में रोशनी का सबसे ज्यादा महत्व है। दुनियाभर में रोशनी से संबंधित 60 से ज्यादा त्योहार मनाए जाते हैं।
नीदरलैंड्स की ट्वेंटे यूनिवर्सिटी ने रिसर्च में पाया कि रोशनी एकाग्रता बढ़ाती है। इसका स्वास्थ्य और मूड पर सकारात्मक असर होता है। यहां तक कि कृत्रिम रोशनी भी हमारे काम करने की रफ्तार बढ़ाती है।
एेसे समृद्ध हो रहे हैं हम

सरकार के स्तर पर : सरकार को 2017-18 में इनकम टैक्स (कंपनी और व्यक्तिगत) से 10.02 लाख करोड़ रुपए मिले। 2012-13 में 5.59 लाख करोड़ रुपए और 2008-09 में 3.34 लाख करोड़ रुपए मिले थे। यानी 5 साल में टैक्स कलेक्शन 79% और 10 साल में 200% बढ़ा है।

कंपनियों के स्तर पर

शीर्ष 100 कंपनियों की वैलुएशन 5 साल में 44.9 लाख करोड़ रु. बढ़ी। 5 वर्षों में 144% की ग्रोथ रही।
रिलायंस इंडस्ट्रीज 8 लाख करोड़ रु. मार्केट कैप वाली देश की पहली, टीसीएस दूसरी कंपनी बनी। 1.6 लाख करोड़ रु. वैलुएशन के साथ फ्लिपकार्ट सबसे महंगा स्टार्टअप बना।
लोगों के स्तर पर

वेतन वृद्धि: 2018 में वेतन वृद्धि 4.9% रही। अर्जेंटीना (7.2%) के बाद भारत दूसरे स्थान पर है।
आय: 1,12,835 रु. प्रति व्यक्ति हुई। 5 साल में 64% बढ़ी।
इनकम टैक्स: 2017-18 में रिकॉर्ड 6.85 करोड़ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल हुए। पिछले साल से 23% ज्यादा।

मोदी रिज़र्व बैंक को पालतू क्यूँ बनाना चाहते है ?

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की अर्थव्यवस्था में जो गड़बड़ की है, उसे दुरूस्त करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आर.बी.आई.) के भंडार से पैसा खींचने के लिए उस पर दबाव डाल रहे हैं।
एकट्वीट में उन्होंने आर.बी.आई. गवर्नर उर्जित पटेल से अनुरोध किया कि वे प्रधानमंत्री का मुकाबला करें और उनके द्वारा बनाये जा रहे दबाव के आगे नहीं झुके।।
राहुल ने ट्वीट कियाः रूपये 36,00,00,00, 00,000 (36 खरब रूपए)। ये वो रकम है जो प्रधानमंत्री आर.बी.आई. से चाहते हैं । ताकि अपनी “बुद्धिमता’ भरी आर्थिक नीतियों से हुई गड़बड़ियों को ठीक कर सके। पटेल आप उनका मुकाबला करें देश को बचायें। राहुल की टिप्पणियों को विस्तार से बताते हुए कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आर.बी.आई. के भण्डारों से धन प्राप्ति के मोदी सरकार के प्रयास देश की आर्थिक संप्रभुता को तबाह कर देंगे। सरकार को 9.59 लाख करोड़ के अपने मुद्रा भण्डार से 3.6 लाख करोड़ रूपये देने के आर.बी.आई. पर बनाये जा रहे दबाव के बारे में उन्होंने कहा “यदि यह फलीभूत हो जाता है तो आर.बी.आई. की स्वायत्तता पर हमले के अलावा यह ग्रेट इण्डियन रॉबरी के समान होगा। यह देश वृहद आर्थिक सम्प्रभुता को तबाह कर देगा।” |
यह उल्लेख कहते हुए कि आर.बी.आई. के इतिहास में पहले ऐसा कभी नहीं हुआ, तिवारी ने आश्चर्य व्यक्त किया कि वित्त मंत्रालय इतनी बड़ी राशि को केन्द्रीय बैंक में रखा हुआ “पूंजी अधिक्य” मानता है और उसे हड़पना चाहता है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय करने का अधिकार पूर्णतया
आर.बी.आई. के पास है कि उसे कितनी पूंजी का भण्डार रखना है तथा सरकार को इसमें हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने मंगलवार को इण्डियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि मंत्रालय आर.बी.आई.पर पूंजी भण्डार की जरूरत के अधिमूल्यांकन का आरोप लगा रहा है और आर.बी.आई. को आशंका है कि उसके भण्डार में सरकार की छेड़छाड़ से वृहद आर्थिक सम्प्रभुता पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
जब उनसे पूछा गया कि सरकार के प्रयास को विफल करने के लिये कांग्रेस क्या कदम उठायेगी तो तिवारी ने कहा कि सरकार के प्रयास का मुकाबला करने के लिये कांग्रेस के पास कानूनी व न्यायिक सहित तमाम विकल्प खुले हैं। सबसे पहले पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने उल्लेख किया था कि आर.बी.आई के मुद्रा भण्डार पर सरकार की गिद्ध दृष्टि है। तिवारी ने कहा: आर.बी.आई. के भण्डार ये आत्मविश्वास प्रदान करते हैं कि यह केन्द्रीय बैंक किसी भी संकट का मुकाबला कर सकता है। सरकार का प्रयास इस आत्मविश्वास को भंग कर देगा।
उन्होंने कहा, यह बेहद गंभीर विषय है। भारत की आर्थिक संप्रभुता पर इसके गंभीर प्रभाव पड़ेंगे। आर.बी.आई. की स्वायत्तता विदेशी व घरेलू निवेशकों को आश्वस्त करती है। यह याद दिलाते हुए कि ऐसा करके अर्जेन्टाइना ने किस प्रकार अपनी अर्थव्यवस्था का विध्वंस किया,तिवारी ने कहा कि गैर जिम्मेदाराना सरकार राष्ट्रीय हित से खिलवाड़ कर रही है।’ मतदाताओं को मुफ्त उपहार बांटकर 2019 का चुनाव जीतने के लिये उसे धन चाहिये। वित्तीय घाटा और वर्तमान लेखा घाटा बढ़ता जा रहा है। पैट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स वसूली से 11 लाख करोड़ रूपयों की आय हासिल करने के बावजूद सरकार के भण्डारों में वृद्धि नहीं हो रही है।
सरकार के इस आकलन पर कि आर.बी.आई. के पास मुद्रा आधिक्य है, उन्होंने कहा कि इसके निर्णय का अधिकार केन्द्रीय बैंक के पास है और इसके लिये प्रश्न करने का वित्त मंत्रालय को कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि नोटबंदी के तुगलकी फरमान सहित सरकार की अयोग्यता और गलत नीतियों के कारण वित्तीय हालात इस खतरनाक स्तर पर पहुंच गए हैं। । विडम्बना यह है कि सरकार द्वारा यह हस्तक्षेपनोटबंदी
की द्वितीय वर्षगांठ के महज कुछ ही दिन पूर्व किया गया है। माना जा रहा था कि नोटबंदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की सारी बुराईयों को समाप्त कर दिया है।
तिवारी ने कहा “प्रधानमंत्री ने नोटबंदी से अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी। इसके लिये बनाया गया एक भी लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। उम्मीद की गई थी कि लेन-देनों को डिजीटल करने के अतिरिक्त इससे काला धन, जाली मुद्रा और आतंक की बुराई समाप्त होगी लेकिन इसके बजाए आज 2016 की तुलना में अधिक नकदी प्रचलन में है। * नोटबंदी के लिए प्रधानमंत्री को देश से माफीनामा देने का अनुरोध करते हुए उन्होंने कहा आर.बी.आई. के मुद्रा भण्डार में से नकदी निकालने के इस अन्य प्रयास की अनुमति नहीं दी जाएगी क्योंकि कांग्रेस पूरी ताकत से इसका मुकाबला करेगी।

 

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“कमल” को छोड़ “जनता” के साथ जुड़े दलपत सुराणा उदयपुर में “गुलाब” से करेगें मुकाबला।

उदयपुर। 54 सालों से भाजपा में रहे कर्मठ कार्यकर्ता दलपत सुराणा ने आखिरकार भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे ही दिया। इतना ही नहीं श्री सुराणा ने हाथोहाथ जनता सेना की सदस्यता भी ग्रहण कर ही ली। आपको बता दे कि पिछले दिनों दलपत सुराणा ने भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से उदयपुर शहर या मावली से विधानसभा का टिकिट देने की अपील की थी, लेकिन उन्हें आभास हो गया कि पार्टी उन्हें टिकिट नहीं देगी तो सुराणा ने सोमवार को शहर की होटल रोयल इन जो हमेशा बागियों की मुख्य केंद्र रही है। उसमें जनता सेना का दामन थाम लिया और भाजपा की सदस्यता से ही इस्तीफा दे दिया। पूरा मेवाड़ जानता है कि भाजपा के कद्दावर नेता और मेवाड़ भाजपा के स्तम्भ माने जाने वाले गुलाबचंद कटारिया की इस बार काफी कद्दावर और पुराने नेता खिलाफत कर रहे हैं। कुछ समय पहले कटारिया की खुलकर बगावत करते हुए भैरों सिंह शेखावत जागृति मंच भी बनाया गया था। जिसमें भाजपा के दिग्गजों के साथ कटारिया के समधि रोशनलाल जैन तक शामिल हुए थे। ऐसे में यह मान लिया गया था कि इस बार कटारिया की राजनीति में बने रहने की डगर काफी मुश्किल होगी और सोमवार को यह साबित भी हो गया। जब जागृति मंच जनता सेना एक हो गए। आपको बता दे कि जनता सेना सुप्रीमों रणधीर सिंह भीण्डर को कटारिया के विरोध के कारण ही गत विधानसभा चुनावों में वल्लभनगर से टिकिट नहीं मिला था और उन्होंने निर्दलीय लड़ते हुए जम्बो जीत हांसिल की थी, यहां पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार गणपत मेनारिया की जमानत तक जब्त हो गई थी। सोमवार को दलपत सुराणा के जनता सेना में शामिल होते ही उनके उदयपुर से लड़ने की कवायदें तेज हो गई है अब देखना दिलचस्प होगा कि किस तरह कढ़ाई कमल पर भारी पड़ती है। आइए आपको सुनाते है दलपत सुराणा ने भरे गले से कटारिया के लिए क्या कुछ कहा और क्यों 54 साल बाद यह फैसला लिया सुनीए उन्हीं की कहानी उन्हीं जुबानी।

गुजरात के पूर्व गृहमंत्री हरेन पंड्या की ह्त्या की सुपारी आईपीएस डीजी बंजारा ने दी थी – आज़म ने कोर्ट में दिया बड़ा बयान . सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस पर फिर एक बार मचा हडकंप

उदयपुर . सोहराबुद्दीन एनकाउन्टर ( Sohrabuddin Encounter ) मामले के मुख्य गवाह आज़म खान (azam khan ) के शनिवार मुंबई की सीबीआई की विशेष कोर्ट में हुए बयान के बाद पूरा एनकाउंटर का पूरा मामला ही बदल गया.
जिन बड़े आईपीस अधिकारियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है वे अधिकारी एक बार फिर कटघरे में खड़े दिखाई दे रहे है .

आज़म खान ने शनिवार 3 नवम्बर को कोर्ट बड़ा सनसनीखेज खुलासा करते हुए अपने बयान में बताया कि गुजरात के पूर्व गृहमंत्री हरेन पंड्या की हत्या की सुपारी गुजरात के आईपीएस डीजी बंजारा ने सोहराबुद्दीन को दी थी . बंजारा के कहने पर ही पूर्व गृहमंत्री हरेन पंड्या की हत्या सोहराबुद्दीन और उसके साथी नईमुद्दीन ने मिल कर की थी.

आज़म खान के इस बड़े बयान के बाद सोहराबुद्दीन एनकाउन्टर( Sohrabuddin Encounter ) मामले की पूरी तस्वीर ही बदल गयी है. जहाँ एक तरफ सीबीआई ने चार्जशीट पेश की जिसमे बताया कि  Sohrabuddin Encounter  मार्बल व्यवसाइयों से फिरोती मांगने की वजह से राजनेताओं के कहने पर पुलिस अधिकारियों ने किया. जबकि अब आज़म खान ने शनिवार को कोर्ट में जो बयान दिए है उससे तो साबित होता है कि गुजरात के पूर्व गृहमंत्री हरेन पंड्या की हत्या में बड़े नामों के शामिल होने और उनके राज़ बहार ना आयें इस वजह से हुई है. कोर्ट में आज़म खान ने आईपीएस डीजी बंजारा द्वारा हरेन पंडया की ह्त्या की सुपारी देना वाला बयान दिया, आज़म के बयान के बाद राजनैतिक हलकों में खासी हलचल हो गयी है क्यूँ कि कयास लगाए जा रहे है कि हो सकता है इसके पीछे कई ऐसे और बड़े बड़े नाम हो जिनके सामने आने पर पुरे देश में राजनातिक भूकंप आजाये. हालाँकि एसी निष्पक्ष जांच होना मुश्किल है. लेकिन हरेन पंड्या की ह्त्या में डीजी बंजारा का नाम आना ही एक बड़ा खुलासा है.

कोर्ट में आज़म के बयान :

आजम ने कोर्ट को बताया कि सोहराबुद्दीन, तुलसी उसके अच्छे दोस्त थे और सोहराबुद्दीन ने ही मुझे बताया था कि उसने बंजारा के कहने पर नयीमुद्दीन उर्फ कलीमुद्दीन और शाहिद के साथ मिलकर हरेन पंड्या की हत्या की थी। गौरतलब है कि हरेन पंड्या केस में गुजरात पुलिस ने पहले जिन भी लोगों को गिरफ्तार था, वह सभी दोष मुक्त होकर बरी हो चुके हैं।

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर को लेकर कोर्ट में आजम खान ने बयान दिए कि उसी ने ही सोहराबुद्दीन, उसकी पत्नी कौसरबी और तुलसी को अपनी बुआ के मल्लातलाई स्थित मकान में पनाह दिलवाई थी। ये तीनों यहां रह रहे थे। फिर एक दिन सोहराबुद्दीन ने तुलसी और किसी एक अन्य व्यक्ति के जरिए अहमदाबाद के गुजरात बिल्डर के यहां फायरिंग करवाई थी। सोहराबुद्दीन को एक कंपनी से रिकवरी का काम मिला था और उसे मरीयम मार्बल वाले से रिकवरी करनी थी, इसके लिए सोहराबुद्दीन ने मरियम मार्बल वाले को धमकी दी थी, तो उदयपुर के हामिदलाल के कहने पर मरीयम मार्बल मालिक ने सोहराबुद्दीन के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया था। इस पर सोहराबुद्दीन के कहने पर तुलसी ने मुदस्सर के साथ मिलकर हामिदलाल की 31 दिंसबर 2004 को हत्या करवा दी थी। हामिदलाल की हत्या के बाद हम सभी अलग-अलग फरार हो गए थे और मैं पत्नी के साथ रिश्तेदार के यहां मोडासा चला गया था। अप्रेल 2005 में मुझे उदयपुर पुलिस ने मोडासा से हामिदलाल हत्या कांड में गिरफ्तार कर लिया था और मुझे सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। 27 नवंबर 2005 को मुझे जेल में अखबार से पता चला कि सोहराबुद्दीन एनकाउंटर में मारा गया है, इसके तीन-चार दिन बाद तुलसी के गिरफ्तार होने का समाचार अखबार में पढ़ा था। कुछ दिनों बाद तुलसी को भी उदयपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

तुलसी मुझे सेंट्रल जेल में मिला और फूट-फूट कर रोने लगा, तुलसी ने मुझे बताया कि गुजरात पुलिस ने मुझे धोखा दिया है। एक आदमी ने मुझे बंजारा से मिलवाया था। बंजारा ने कहा था कि उपर से बहुत ज्यादा दबाव है, एक बार सोहराबुद्दीन को पकड़वा दो, छह महीने में उसकी जमानत करवा देंगे। मुझे बंजारा ने कहा था कि सोहराबुद्दीन को पकड़वा दिया तो मुझे लतीफ सेठ की जगह बैठा देंगे। गौरतलब है कि लतीफ सेठ उस समय अहमदाबाद का बड़ा डॉन था। मैं बंजारा की बातों में आ गया। मेरी सूचना पर ही गुजरात पुलिस ने सोहराबुद्दीन, कौसरबी और मुझे हम तीनों को हैदराबाद से लौटते समय सांगली के पास से बस से उतार लिया था और इस बात की उन लोगों ने बंजारा को सूचना दी थी। हम तीनों को अहमदाबाद के फार्म हाउस में लाया गया था। जहां वे लोग सोहराबुद्दीन से मारपीट करने लगे। इसका कौसरबी ने विरोध किया, तो उसके साथ भी मारपीट हुई, फिर एक फायर हुआ और कौसरबी की आवाज बंद हो गई, इसके बाद एक और फायर हुआ और सोहराबुद्दीन की आवाज भी बंद हो गई। तुलसी ने मुझे बताया था कि सोहराबुद्दीन-कौसरबी की हत्या के बाद उन लोगों ने मुझे दो-तीन दिन उसी फार्म हाउस में रखा और फिर राजस्थान पुलिस के सुपुर्द कर दिया था। तुलसी सेंट्रल जेल में अक्सर बोलता था कि मेरे साथ धोखा हुआ है, मैं बंजारा को मार दूंगा। उदयपुर जेल में बंजारा का मुखबीर अहमद जाबिर बंद था, उसने तुलसी की यह सारी बातें बंजारा तक पहुंचा दीं। .

पेशी पर जाने से पहले तुलसी ने कहा था अकेले जा रहा हूं, वापस नहीं आउंगा :

तुलसी एनकाउंटर ( Tulsi Encounter ) को लेकर आजम ने कोर्ट में बयान दिए कि अहमदाबाद पुलिस ने तुलसी के साथ उसे भी पॉपुलर बिल्डर पर हुई फायरिंग मामले में आरोपी बनाया था। आजम ने बताया कि इस केस में हम दोनों को अहमदाबाद पेशी पर एक साथ ले जाया जाता था। राजस्थान पुलिस एक पेशी पर मुझे और तुलसी को लेकर अहमदाबाद कालूपुर स्टेशन पहुंची। वहां से एटीएस वाले हमें शाहीबाग स्थित ऑफिस और फिर कोर्ट लेकर गए। कोर्ट में हमें सोहराबुद्दीन का वकील सलीम मिला। हमने उसे कहा कि हमारी जान को खतरा है। इस पर सलीम ने हमें जज के सामने पेश करवाया और हमने जज से निवेदन किया कि हमें हथकड़ी, रस्सी से बांधकर सुरक्षित उदयपुर सेंट्रल जेल पहुंचा दिया जाए। कोर्ट पेशी के बाद राजस्थान पुलिस हमें उदयपुर ले आई और सेंट्रल जेल में जमा करवा दिया।

आजम ने कोर्ट में बयान दिए कि हम दोनों की अगली पेशी थी, इससे पहले पुलिस ने मुझे एक चोरी के मामले में प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार कर लिया। अंबामाता थाना पुलिस मुझे लेने आई, तब तुलसी ने मुझे कहा था कि इस पेशी पर मैं अहमदाबाद अकेला जाउंगा और शायद इस बार वापस न लौटूं। अंबामाता थाना से रिमांड पूरी होने पर मैं सेंट्रल जेल लौटा तो पता चला कि तुलसी पुलिस कस्टडी से भाग गया है और अगले दिन उसके भी एनकाउंटर में मारे जाने की खबर मिली। 2009 में मुझे भी कोर्ट ने हामिदलाल हत्याकांड से बरी कर दिया और मैं जेल से बाहर आ गया।

बदला एनकाउंटर का मोटिव और स्थान

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर का अनुसंधान कर सीबीआई ने जो चार्जशीट पेश की थी, उसमें एनकाउंटर का मोटिव अलग है। सीबीआई चार्जशीट के अनुसार सोहराबुद्दीन ने मार्बल व्यवसायी आरके मार्बल के विमल पाटनी और संगम टेक्सटाइल वाले को धमकी देकर एक्सटॉर्शन मनी मांगी थी। व्यवसायियों ने इसकी जानकारी राजनेताओं को दी थी और इसके बाद आईपीएस डीजी बंजारा, राजकुमार पांडियन और दिनेश एमएन ने मिलकर सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर की साजिश रची थी। लेकिन आजम ने जो बयान ट्रायल कोर्ट में दिए, उससे तो सोहराबुद्दीन एनकाउंटर का मोटिव हरेन पंड्या की हत्या से जुड़ गया। चार्जशीट में एनकाउंटर पावर हाउस के पास बताया गया है, जबकि आजम ने कहा कि सोहराबुद्दीन और कौसरबी की हत्या तो फार्म हाउस में ही कर दी गई थी।

दाउद से थे सोहराबुद्दीन के कनेक्शन

आजम ने कोर्ट को बताया कि एक बार सोहराबुद्दीन ने उसे बताया कि वह नयीमुद्दीन से मिलने हैदराबाद गया था, नयीमुद्दीन दाउद इब्राहिम से बात करना चाहता था, लेकिन मैंने उसको यह कहकर मना कर दिया था कि दाउद तो किसी से बात नहीं करता है, हां वह उसकी छोटा शकील से बात करवा सकता है। तब आजम ने सोहराबुद्दीन को चेताया था कि नयीमुद्दीन अच्छा आदमी नहीं है, तो सोहराबुद्दीन ने आजम को भरोसा दिलाया था कि नयीमुद्दीन उसके साथ धोखा नहीं कर सकता है, क्यों कि वे एक-दूसरे के राजदार है और हमने ही हरेन पंड्या की हत्या की थी और हमें सुपारी डीजी बंजारा ने दी थी।

पहले के बयानों में है अलग कहानी, फिर भी पीपी ने नहीं पूछा एक भी सवाल

गौरतलब है कि सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस की जब सीबीआई जांच कर रही थी, तब सीबीआई के इंस्पेक्टर पंवार, विश्वास मीणा और एनएस राजू ने अलग-अलग तीन बार उसके सीआरपीसी की धारा 161 के तहत बयान लिए थे और आजम इस पूरे केस का एकलौता ऐसा गवाह है, जिसके सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कोर्ट में दो बार बयान हो चुके हैं। पांच बार हुए बयानों में आजम ने जो कहानी बताई है, वह शनिवार को ट्रायल कोर्ट में दिए बयानों से अलग है। इसके बावजूद न तो सीबीआई के स्पेशल सरकारी वकील बीपी राजू ने इस पर कोई प्रश्न पूछा और न ही उसे होस्टाइल घोषित किया।

बचाव पक्ष के वकील ने आजम से पूछा कि हरेन पंड्या की हत्या से संबंधित यह बात तुम्हारे पूर्व में सीबीआई को दिए बयानों में कहीं नहीं है। तो आजम ने कोर्ट में बताया कि उसने सीबीआई इंस्पेक्टर एनएस राजू को बयान देते समय यह बात बताई थी, लेकिन उन्होंने यह बात लिखने से मना कर दिया था और मुझे कहा था कि इससे बहुत बड़ा बवाल मच जाएगा, यह बात बयान में मत लिखवाओ। तो मैंने एनएस राजू को कहा था कि मैं जो जानता हूं, वह बताउंगा।

 

News Source – ARlive news ( Lucke Jain ) 

“उदयपुर लाईट फेस्टिवल” उदयपुर की पहचान बना – युवाओं के सर चढ़ बोल रहा है “ULF” का जादू .

Udaipur . उदयपुर ब्लॉग द्वारा आयोजित राजस्थान भर में मशहूर उदयपुर के युवाओं दिल के करीब “उदयपुर लाईट फेस्टिवल” “ULF” रंगारंग, मस्ती, एडवेंचर और संगीत की रोशनी से भरपूर रविवार 4 नवम्बर को शिल्प ग्राम के पास शोर्यगढ़ में होने जा रहा है। उदयपुर लाईट फेस्टिवल की रंगीनियों में जहाँ एक तरफ सुरों का जादू बिखेरने के लिए कई कलाकार अपनी लाइव प्रस्तुति देंगे वहीँ इसबार के फेस्टिवल में एडवेंचर गेम्स जैसे कई आकर्षक आयोजन युवाओं का इंतज़ार कर रहे है। फेस्टिवल को लेकर युवाओं की दीवानगी का आलम अपने चरम पर है।
उदयपुर ब्लॉग हर वर्ष की तरह इस बार भी लाईट फेस्टिवल (ULF) रविवार को आयोजित होने जा रहा है। लाईट फेस्टिवल की रंग बिरंगी रोशनी के बिच सुरों की गंगा भी बहेगी और मस्ती भरे कई आयोजन भी होंगे। उदयपुर ब्लॉग के फाउंडर संजीत ने बताया कि इससे होने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा सामाजिक कल्याण और ज़रूरतमंदों के बीच समर्पित किया जाता है। लाईट फेस्टिवल एक तरह से उदयपुर की पहचान बन चुका है। राजस्थान भर में मशहूर यह फेस्टिवल अब पर्यटकों में खासा फेमस हो रहा है। देसी और विदेशी पर्यटकों ने फेस्टिवल में आने के लिए अपनी बुकिंग करवा ली है।
संजीत ने बताया कि रविवार को दोपहर 3 बजे से यह शुरू हो जाएगा और शोर्यगढ़ में आयोजित हो रहे इस फेस्टिवल में संगीत से जुड़े कई कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। साथ ही साथ एडवेंचर से जुड़े कई आयोजन भी होंगे।

 

छह साल पहले 300 लोगों के बिच फतहसागर की पाल से उदयपुर ब्लॉग के संजीत और उसके साथ जुड़े कुछ जोशीले युवाओं द्वारा शुरू किया लेन्टर्न फेस्टिवल अब उदयपुर लाईट फेस्टिवल से उदयपुर की पहचान बनता जा रहा है। यह फेस्टिवल सिर्फ उदयपुर ही नहीं पुरे प्रदेश में ख्याति पा चुका है जयपुर जोधपुर, कोटा अजमेर बांसवाडा डूंगरपुर के युवा इसमें भाग लेने के लिए आते है . युवाओं को हर वर्ष इस फेस्टिवल का इंतज़ार रहता है।
इस बार रोशनी का यह रंगारंग फेस्टिवल शिल्पग्राम के पास स्थित शोर्य गढ़ में रविवार को शाम 3 से 11 बजे तक के बिच आयोजित होगा। इस बार करीब 8000 लोग इसको देखने पहुचेगें। फेस्टिवल को लेकर उदयपुर ब्लॉग की टीम तय्यारियाँ जोरों पर कर रही है।
रविवार फेस्टिवल की शुरुआत रोक बेंड सूफ़ी संगीत, डीजे मस्ती के साथ होगी जो आखिर तक चलेगी .इन सबके आलावा शाम के चार बजे से ही वहाँ आपको ढेर सारी मस्ती.डांस और म्यूजिक देखने को मिलेगाए इनके साथ आप खाने का मज़ा भी ले पाएँगेए अलग.अलग तरह के कई खाने की स्टाल्स वहाँ आपको सभी तरह के ज़ायके उपलब्ध करवाएगी। कई तरह के गेम्सए क्विज और सेल्फी कार्नर आकर्षण का केंद्र बने रहेंगे। कई सरप्राइसेज़ भी आपका इंतज़ार करेंगे।

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https://allevents.in/udaipur/ulf-%7C-udaipur-light-festival-2018/20002106469279

अचार संहिता में बंधे महापौर पार्षद पुलिस से उलझे – राज्य निर्वाचन अधिकारी से की शिकायत बेवजह जनप्रतिनिधियों को किया जा रहा परेशान।

उदयपुर। आचार संहिता के चलते नगरनिगम दशहरा दीपावली मेले में जन प्रतिनिधियों पर जिला निर्वाचन आयोग द्वारा हद से ज्यादा पाबंदी को लेकर राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी से मिलने गए नगर निगम के महापौर पार्षद और पुलिस अधीक्षक सहित पुलिस अधिकारी आमने सामने हो गए। स्थिति धक्का मुक्की तक बन आई एक पार्षद को गिरफ्तार कर थाने भी ले गए लेकिन विरोध बढ़ने पर आधे रास्ते से वापस लेकर आगये। बाद में राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी ने पार्षदों और महापोर की शिकायतें भी सुनी और जिला निर्वाचन अधिकारी को मेले में बरती जा रही सख्ती में नियमानुसार रियायत देने की निर्देश भी दिए।
नगर निगम में दीपावली दशहरा मेला शुरू हुए छह दिन हो गए है लेकिन आचार संहिता के चलते नगर निगम के पार्षदों सहित महापौर या अन्य जनप्रतिनिधियों को मेले में आयोजित कार्यक्रमों से दूर रखा जा रहा है। देखा जाए तो आयोजन स्थल पर कुर्सियों पर बैठने को लेकर जनप्रतिनिधि और अधिकारी आमने सामने हो रहे है। नगर निगम आयुक्त ने वहां एक बोर्ड भी लगा रखा ही कि जन प्रतिनिधियों का प्रवेश इस परिधि के बाहर रहे।
आज स्थिति तब और बिगड़ गयी जब आरसीए राय के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार जिला निर्वाचन अधिकारी के साथ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक ले रहे थे। इस दौरान महापौर चन्द्र सिंह कोठारी सहित करीब ४० पार्षद निर्वाचन अधिकारी से मिलने और नगर निगम मेले में बरती जा रही बेवजह की सख्ती को लेकर शिकायत दर्ज करवाने के लिए आये थे। इधर आरसीए में मोजूद जिला पुलिस अधीक्षक राष्ट्र्दीप कुंवर और अन्य पुलिस अधिकारियों ने जन प्रतिनिधियों की इतनी भीड़ देख कर अन्दर जाने से मना कर दिया और पांच लोगों को जाने के लिए ही कहा। इसी मिलने की बात को लेकर पुलिस और जनप्रतिनिधियों के बिच बहस हो गयी। बहस काफी हद तक धक्का मुक्की तक भी पहुच गयी बहस बढ़ने के बाद पार्षद राकेश पोरवाल को पुलिस अधीक्षक ने थाने ले जाने तक के लिए कह दिया लेकिन बाद में विरोध को देखते हुए आधे रास्ते से वापस बुलवा लिया। राकेश पोरवाल का कहना है कि महापौर जनप्रतिनिधि है और उनके साथ पुलिस अधीक्षक द्वारा किये जा रहे व्यवहार से मुझे आक्रोश आगया। हालाँकि बाद में मामला शांत हो गया और महापौर सहित पांच पार्षद राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी से मुलाक़ात कर अपना विरोध दर्ज करवाया और प्रशासन द्वारा मेले में जनप्रतिनिधियों के साथ बरती जा रही सख्ती के का विरोध दर्ज करवाया। इधर चुनाव अधिकारी ने भी जनप्रतिनिधियों को माना कि यह सही है कि आचार संहिता के चलते स्टेज पर कोई किसी जनप्रतिनिधि को नहीं बुलाया जा सकता लेकिन बाकी बैठने की व्यवस्था तो जिस तरह पहले रहती थी वह किया जा सकता है। पार्षदों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि की बैठने की जगह पर अधिकारी अपने परिचितों को बैठा देते है और आचार संहिता का हवाला दे लकर हमको दूर रहने को बोला जा रहा है। मेले के निमंत्रण पत्र भी नहीं बंटवाये गए जबकि बिना किसी जनप्रतिनिधि का फोटो लगा कर पत्रकारों व् अन्य लोगों को निमंत्रण पत्र दिया जा सकता था। आगंतुकों के स्वागत के लिए लाल उपरना ओढाया जा रहा है और लाल कलर किसी पार्टी विशेष का सिम्बोल है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने नियमों के अंतर्गत आरही जनप्रतिनिधि बातों को सही माना और जिला निर्वाचन अधिकारी को निर्देश भी दिए।