SEA View v/s SEE View

0

Who does not want to have a bungalow or flat facing sea. Globally, everyone wants to stay in room in a hotel that is facing sea-view. The mesmerising nature has its own depth like ocean which cannot be measured. But not many know that the coastal environment causes severe damage to the building structure and envelope (i.e., exterior doors, windows, skylights, exterior wall coverings, soffits, roof systems, and attic vents). When steel reinforcement corrodes, the corrosion product occupies more than three times the volume of the original steel, exerting great disruptive tensile stress on the surrounding concrete, leading to further cracking, more weather access and further corrosion. In mild cases, rust staining occurs whereas in more serious cases severe spalling of concrete may occur and ultimately the concrete members may fail completely.

The corrosive effect of salt-laden, wind-driven moisture in coastal areas cannot be overstated. Salt-laden, moist air can corrode exposed metal surfaces and penetrate any opening in the building. Corrosion is most likely to attack metal connectors that are used to attach the parts of the structure to one another, such as floor joists to beams and connectors used in cross-bracing below the finished lowest floor. Galvanized connectors coated with Zinc at the rate of 0.9 ounce per square foot of surface area (designated G-90) can corrode in coastal environments at a rate of 0.1 to 0.3 millimetre/year. At this rate, the Zinc protection will be gone in 7 years. Alternatively, a G-185 coated connector, which provides twice as much protection as G-90, can corrode in less than 20 years.

More galvanized protection (moreounces of Zinc per square foot of surface area to be protected) increases service life. Corrosion can also affect fasteners for siding and connectors for attaching exterior-mounted heating, ventilation, and air-conditioning units, electrical boxes, lighting fixtures, and any other item mounted on the exterior of the building.

Corrosion of reinforcing steel is one of the most important causes of deterioration of concrete structures in coastal environment. High permeability concrete, poor design detailing and construction defects such as inadequate depth of cover allow the ingress of salt and moisture into the concrete. High concentration of salt and moisture result in accelerated corrosion of reinforcing steel thereby significantly deteriorating the concrete structure.

Corrosion is commonly associated with deposition of sea salt in presence of moisture on steel and light metals. Chloride is the most significant corrosive species in the salt particles. Corrosion is influenced by the amount of salt on the metal surface and related to speed and direction of wind, distance of structure from the shore, elevation of the structures, degree of sheltering and frequency and amount of rain washing. Other factors that influence corrosion include time of wetness, relative humidity, metal surface temperature etc. Normal steel has poor resistance in coastal atmosphere and hence requires protection for durability.

So, moral of the story is… Do have a SEA facing bungalow or flat, SEE that the steel used is Galvanised…

Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading Zinc-Lead-Silver Producer..

Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc

शहर के चप्पे चप्पे पर पुलिस होने के बावजूद कुछ हुडदंगी अपने मनसूबों में कामयाब हुए ।

पोस्ट न्यूज़ । पूरे शहर में पुलिसकर्मी और अधिकारी चप्पे चप्पे पर तैनात होने के बावजूद चंद गिनती के हुडदंगीयों ने अपनी शैतानी हरकत को अंजाम देते हुए शहर में तनाव पैदा करने की कोशिश की । मल्लातलाई निवासी सकलेन, शोयब और अरशद की रिपोर्ट के अनुसार बड़ी में जब वह फ़ोटो शूट कर लौट रहे थे तब कुछ हुडदंगी ने उनका नाम पूछ कर मारपीट की और उनकी एक बाईक में आग लगा दी । ऐसे ही फतहसागर व हवाला रॉड पर भी चार टेम्पो में तोड़ फोड़ कर दी । सभी जगह सूचना पा कर पुलिस मौके पर पहुची, लेकिन हुडदंगी शहर में माहौल खराब करने के लिए बाईक से दहशत फैलाते रहे । पुलिस ने शांतिभंग के आरोप में 15 लोगों को गिरफ्तार भी किया है ।

राजसमंद में हुई अफराज़ूल की हत्या, हत्या का वीडियो वायरल और उसके बाद चले घटना क्रम जिसमे आपत्तिजनक नारे लगाना, 144 के दौरान उपद्रव, शंभूलाल जैसे कायर हत्यारे का सोशल मीडिया पर समर्थन ,,,, इन सारे घटनाक्रमों ने पूरे मेवाड़ का माहौल खराब कर रखा है।इसमें भूमिका निभा रहे है कुछ बाहर के उपद्रवी जो शांत शहर की शान्ति को पलीता लगाना चाहते है।

25 दिसंबर को भी इसी तरह शहर को बंद रखने और रैली निकालने का सोशल मीडिया के जरिये आव्हान किया था । शहर के सभी संगठनों और पुलिस अधीक्षक ने 25 दिसंबर को किसी भी प्रकार के बंद और रैली होने से इनकार किया था । इसके बावजूद महज चन्द हुड़दंगियों ने शहर में माहौल खराब करने की कोशिश की ।

25 दिसंबर को माहौल को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने एक बार तो पूरे शहर में पुलिस लगा दी लेकिन चंद हुडदंगीयों के आगे पूरी फोर्स मानो बेबस नज़र आई । जिस तरह से 25 दिसंबर को बड़ी, फतहसागर, और हवाला में घटना हुई और उसके बाद चेतक पर हुड़दंगियों का घटना क्रम चला उससे लगता है कि चंद असामाजिक हुडदंगी बाहरी लोग मिल कर शहर की शांत फिजा को बिगाड़ सकते है । और इनके खिलाफ पुलिस प्रशासन के पास 151 शांतिभंग के आरोप में 8 घंटे तक गिरफ्तार करने के अलावा और कोई रास्ता भी नही बचा है। ऐसे में आगे हर एक उपद्रव करने वाले के हौसले बुलंद होंगे ।

25 को उदयपुर में ना कोई बंद है, ना ही कोई रैली निकाली जा रही है, बस एक अफवाह है – एसपी गोयल

उदयपुर। शहर में पिछले कई दिनों से 25 दिसंबर को उदयपुर बंद व संगठनों द्वारा रैली के आयोजन की अफवाह चल रही है। जबकि उदयपुर बंद व् किसी भी तरह की रैली के आयोजन के लिए किसी भी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली। संगठनों के पदाधिकारियों के अनुसार यह सिर्फ कुछ शरारती तत्वों की शरारत है जो व्हाट्सअप पर इस तरह का मेसेज वायरल कर रहे है। पुलिस अधीक्षक ने भी बताया की ना तो किसी संगठन द्वारा बंद का आव्हान किया गया ना ही किसी संगठन द्वारा रैली निकालने की जिम्मेदारी ली है।
राजसमंद में हुए हत्याकाण्ड के बाद से ही सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाजार गर्म है। अफवाहों के चलते शहर में तनाव की लकीरें हर एक आम आदमी के चेहरे पर नज़र आती है। . पहले 8 दिसम्बर को मुस्लिम समाज द्वारा राजसमन्द ह्त्या काण्ड के विरोध में जुलुस जिसमे आपत्तिजनक नारे लगाए जाना उसके बाद 14 को 144 धारा और हिन्दु संगठनों द्वारा निकाली गयी रैली के बाद हुए उपद्रव की घटना में इन्ही अफवाहों की मुख्य भूमिका रही है। शरारती तत्वों द्वारा व्हात्सप ग्रुप में भड़काऊ मेसेज चलाना रैली और बंद का आव्हान करना इसमें शामिल है। पिछले कई दिनों से 25 दिसंबर को रैली निकाल आपत्तिजनक नारों का विरोध प्रदर्शन का मेसेज वायरल होने से हर आम शहरवासी के मन में बस एक ही बात छाई हुई है आखिर 25 को कोन बंद करवा रहा है ? कोन रैली निकाल रहा है ? शहर में हर कोई एक दुसरे से ये बात पूछ रहा है। इधर पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र प्रसाद गोयल ने बताया कि शहर में ना तो किसी संगठन द्वारा कोई रैली निकाली जा रही है ना ही किसी संगठन द्वारा बंद का आव्हान किया गया है। बजरंग सेना के कमलेन्द्र सिंह पंवार ने भी बताया कि शहर में शांति है, 25 को किसी भी संगठन द्वारा रैली नहीं निकाली जायेगी इसकी जिम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली है। कमलेन्द्र सिंह पंवार ने कहा कि यह सिर्फ कुछ शरारती तत्वों की शरारत है जो किसी ना किसी तरह शहर में तनाव की स्थिति पैदा करना चाहते है। मुस्लिम महासंघ के प्रदेश संयोजक के आर सिद्दीकी ने भी बताया कि 25 दिसंबर को कोई भी किसी तरह का बंद नहीं है बस कुछ लोगों की शरारत है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन को ऐसे अफवाह फैलाने वाले लोगों को चिन्हित कर उन पर कड़ी कारवाई करनी चाहिए।

दो दिन से घर से लापता हुए बच्चों के शव नाले में मिले।

उदयपुर। शहर की सज्जन नगर कच्ची बस्ती इलाके के एक नाले में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। दोनो ही बच्चे इसी क्षेत्र के बताए जा रहे हैं जो पिछले दो दिनों से लापता भी थे। दोनो को ही खोजने के लिए परिवार और आस – पड़ोस के लोग काफी जगह गए लेकिन किसी को सफलता नहीं मिली। इस बीच अम्बामाता थाना क्षेत्र में भी बच्चों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई। शनिवार दोपहर में प्रत्यक्षदर्षियों को नाले में एक बच्चे को तैरता शव दिखाई दिया, जब उसकी शिनाख्त की गई तो पता चला वह विक्रम गमेती है जो दो दिनों से लापता था। छह साल के विक्रम का शव मिलते ही क्षेत्रवासियों और पुलिस ने उसी नाले में तलाश शुरू कर दी। काफी छानबिन के बाद देर शाम दूसरे बच्चे का शव भी नाले में मिल गया, जिसकी पहचान प्रवीण गमेती के रूप में हुई है। दोनो ही शवों को देखकर पूरे क्षेत्र में गमगीन माहौल हो गया। जबकि दो परिवारों में तो मानो मातम छा गया हो। जानकारी मिली है कि खाकी ने दोनो ही शवों को पोस्टमार्टम के लिए उदयपुर की मुर्दाकोठरी में रखवाया है जहां रविवार को पंचनामे के बाद मासूमों के षवों को परिजनों को सुपूर्द किया जाएगा।

उप चुनाव में हुई हार पचा नहीं पा रहे हैं जिलाध्यक्ष भट्ट, पूर्व सरपंच देवड़ा के निश्कासन को दिग्गजों ने ठहराया गलत

उदयपुर। हाल ही में उदयपुर में पंचायतों के उपचुनाव में भाजपा की की हार बाद मटून पंचायत के पूर्व सरपंच ओनार सिंह देवड़ा को पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगा कर निष्काषित करना भाजपा में अन्त्र्काहल का कारण बनता जारहा है। जिलाध्यक्ष द्वारा आनन् फानन में ओनार सिंह देवड़ा को निष्काशन का विरोध अंदरूनी तौर पर उठने लगा है।भाजपा के कई नेता इसको तुगलकी फरमान बता निष्काशन को गलत बता रहे है। जबकि उनके हिसाब से भाजपा के हार की वजह ओनार सिंह नहीं और दिग्गजों की रणनीति रही जिसके चलते भाजपा की हार हुई .

पंचायत राज के उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद शहर जिलाध्यक्ष दिनेस्भ भट्ट द्वारा लिए गए फैसले की पार्टी के ही अन्दरूनी गु्रपों में निंदा हो रही है। वहीं निष्काषित औनार सिंह देवड़ा को भी समर्थन मिलता जा रहा है। स्वर्गीय भैरूसिंह जाग्रती मंच के समन्वयक मांगीलाल जोशी जो खुद पार्टी के जिलाध्यक्ष रह चुके है, उनका भी कहना है कि किसी के भी निश्कासन का अधिकारी जिलाध्यक्ष के पास हो ही नहीं सकता। वह सिर्फ हाईकमान तक षिकायत पत्र भेज सकता है। दूसरी और जहां पार्टी के इतने दिग्गज लग गए और पार्टी को जीता कर नहीं ला पाए इससे लगता है कि सभी जनाधार विहीन नेता हो गए है।

गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न पंचायतराज के उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी के मटून पंचायत के पूर्व सरपंच औनारसिंह देवड़ा को पार्टी विरोधी गतिविधियों में सम्मिलित होने एवं वार्ड 29 की अधिकृत पार्टी प्रत्याशी को पराजित करने में अपनी अहम भूमिका निर्वहन करने पर भारतीय जनता पार्टी शहर जिला अध्यक्ष दिनेश भट्ट ने पार्टी से निष्कासित कर दिया था। जिलाध्यक्ष दिनेशभट्ट द्वारा आरोप लगाया गया था कि ओनार सिंह देवड़ा ने खुले आम पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी को हराने का कार्य किया। कांग्रेस के एजेंट के तौर पर कार्य करते हुए विधायक द्वारा सतत अपनी विधानसभा में विकास के कार्य कराने उपरांत संघर्ष समिति बनाकर लोगो को सरकार के विरोध हेतु तैयार किया।
लेकिन भाजपा पार्टी में अब इस निष्काशन को लेकर विरोध के स्वर उभर रहे है। भाजपाई नेताओं का कहना है कि उप चुनावों में हुई हार पार्टी के दिग्गज पचा नहीं पा रहे है और इस स्थिति में पार्टी के जिम्मेदार पदों पर बैठे कर्ताधर्ता हार का ठीकरा जबरदस्ती बेकसूरों पर फोड़ते दिखाई दे रहे हैं। देश में जहां कहीं भी चुनाव जीते तो मोदी के जयकारे हो रहे है और हारने पर पार्टी में जनसंघ के समय से पीढी दर पीढ़ी जुडे कार्यकर्ताओं का निश्कासन कहां तक उचित है। भाजपाइयों का मानना है कि हार पर मंथन किए बिना आनन – फानन में शहर जिलाध्यक्ष ने बेकसूर का निश्कासन कर दिया। हार का कारण वह है ही नहीं जो जिलाध्यक्ष पार्टी हाईकमान और शहरवासियों को बताना चाह रहे है। असल में हार की मुख्यवजह और है। क्षेत्र के भाजपाईयों के अलावा मतदाताओं की माने तो झामेष्वर मण्डल के अध्यक्ष अमृतलाल मेनारिया का नेतृत्व रहा है। इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा मतदाताओं वाला धड़ा श्री मेनारिया से काफी नाराज है और उस नाराजगी की वजह पर भाजपा ओबीसी प्रकोश्ठ गिर्वा के पूर्वध्यक्ष षिवलाल डांगी ने कहा कि टिकिट देने से पहले पार्टी ने एक बार भी क्षेत्र के वरिश्ठों से चर्चा नहीं कि साथ ही झामेष्वर मण्डलध्यक्ष की गलती का खामियाजा पूरी पार्टी को भुगतना पड़ा है। अब हार में किसी न किसी को सजा देनी थी तो वह औनार सिंह देवड़ा को मिल गई। श्री देवड़ा तो एक बार भी खरबड़िया में नहीं आए थे और यहीं से पार्टी को सबसे ज्यादा हार मिली है। यहां 152 वोटों से कांगे्रस की प्रत्याषी आगे रही थी। औनार सिंह देवड़ा जो कि दस वर्षों तक इस क्षेत्र में सरपंच रह चुके हैं उनसे बात की तो उन्होंने पूरे मामले का पटाक्षेप करते हुए साफ किया कि झामेष्वर मण्डलध्यक्ष की वजह से ही पार्टी की हार हुई है। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि वह जनसंघ के समय से ही पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता है। सरकार की ओर से झील प्राधिकरण में करीब 5000 बीघा जमीन पेटा कास्ट में सरकार एक्वायर्ड करने जा रही है। वहां के किसान कहां जाएंगे। किसानों को उन जमीनों पर कुछ भी करने नहीं दिया जाएगा। ऐसे में हक की लड़ाई तो लड़नी ही पड़ेगी और आगे भी लड़ते रहेंगे। निष्काशन के बाद जिस तरह से पार्टी में विरोध उभरा है इसका खामियाजा पार्टी को ही भुगतना पड़ रहा है जिसके दूरगामी परिणाम भी कुछ अच्छे नहीं दिख रहे है।

रिश्वतखोरी मानो अधिकार हो गया है – एक ही दिन में तीन मामले .

0

पोस्ट न्यूज़ . रिश्वत लेना मानो आजकल सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों का हक बन गया हो हर छोटे मोटे काम के लिए रिश्वत और कमीशन तो इसे मांगते है जैसे सरकार ने इन्हें इसके लिए अधिकार दे रखे हों . शुक्रवार को राजस्थान में हनुमानगढ़, डूंगरपुर बांसवाड़ा में रिश्वत के तीन मामले सामने आये .

बांसवाड़ा : सब्जी के सप्लायर से रिश्वत लेते प्राचार्य गिरफ्तार
बांसवाड़ा | गढ़ीउपखंड के खोड़न गांव में भीमराव अंबेडकर बालिका आवासीय विद्यालय के प्राचार्य हीराचंद नायक को एसीबी ने 10 हजार रिश्वत लेते पकड़ा। प्राचार्य यह राशि छात्रावास में सब्जी सप्लायर को धमकाकर ऑनबिल बनवाकर पास करने के बाद ले रहा था।
डूंगरपुर में ऑडिट के बदले मांगी रिश्वत, 2 हजार में से 1500 लौटाए
डूंगरपुर | सर्वशिक्षा अभियान में ऑडिट कराने के बदले में रिश्वत लेने का मामला सामने आया है। शुक्रवार को डीईओ कार्यालय में शिक्षक नेताओं ने रिश्वत लेने का विरोध करते हुए यह राशि लौटाने की मांग की। लेखाधिकारी अशोक जैन का रिश्वत लेने के बाद रुपए गिनते हुए एक फोटो वायरल हुआ था। डीईओ ने जांच के आदेश दिए हैं।

रावतसर (हनुमानगढ़र) | एसीबीबीकानेर ने शुक्रवार को एएसआई जगदीश सिंह को 60 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। यह राशि जमीन पर कब्जा दिलाकर बिजाई करवाने के एवज में ली जा रही थी। एएसपी रजनीश पूनिया ने बताया कि सरदारपुरा खालसा निवासी दिलीप मेघवाल ने एसीबी में 5 दिन पहले जमीन विवाद को लेकर शिकायत की थी। उसने एसडीएम के यहां इस्तगासा पेश किया था तो एसडीएम ने जांच रावतसर पुलिस को सौंप दी।
विपक्षियों ने भी उसके खिलाफ थाने में शिकायत की थी। दोनों मामलों की जांच एएसआई जगदीश सिंह कर रहे थे। दिलीप ने बताया कि एएसआई उसके खिलाफ कार्रवाई करने कब्जा दिलाने के नाम पर एक लाख रुपए रिश्वत मांग रहा था।

घर में बेटी की शादी की तैय्यारियाँ चल रही थी, प्राचार्य पिता आवासीय स्कूल में पढने वाली बेटियों के नाम रिश्वत डकार रहे थे .

0

पोस्ट न्यूज़ . इधर तो घर में आने वाले दो माह में बेटी की शादी होनी है जिसकी तय्यरियाँ चल रही है दूसरी तरफ आवासीय स्कूल में प्राचार्य के पद पर विराजमान पिता स्कूल में रोज़ आने वाली सब्जियों के बिल के नाम पर रिश्वत डकार रहे थे जिनको एसीबी ने रेंज हाथों गिरफ्तार किया . मामला है बांसवाडा गढ़ीउ पखंड के खोड़न गांव में डॉ. भीमराव अंबेडकर बालिका आवासीय स्कूल का जहाँ प्राचार्य  हीराचंद नायक को शुक्रवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के दल ने 10 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा। प्राचार्य यह राशि छात्रावास में सब्जी सप्लायर को धमकाकर ऑनबिल बनवाकर पास करने के बाद ले रहा था।

जानकारी के मुताबिक़ इस प्राचार्य की बेटी की शादी फरवरी में होनी प्रस्तावित है। घर में शादी की तैयारी चल रही है, इस घटनाक्रम से परिजन भी सन्न रह गए। एसीबी ब्यूरो के डीएसपी गुलाब  सिंह ने बताया कि इस बारे में 2016-17 में हॉस्टल में सब्जी सप्लाई का ठेका लेने वाले मेतवाला गांव के अंबालाल भोई ने 13 दिसंबर को शिकायत की थी। इस पर ब्यूरो के दल ने 20 दिसंबर को सत्यापन करवाया, तो मामला सही पाया गया। इसके बाद शुक्रवार को अंबालाल को रंग लगे नोट देकर खोड़न के आवासीय स्कूल भेजा गया। वहां प्राचार्य हीराचंद नायक के अपने कार्यालय में 10 हजार रुपए लेने के संकेत पाकर पीछे से ब्यूरो की टीम ने आकर उसे धर लिया। बाद में गिरफ्तारी कर आगे कार्रवाई की गई।

आवासीय विद्यालय में बालिकाओं के लिए सुबह-शाम भोजन बनाने के लिए सब्जी की सप्लाई नियमित होती है। इसके लिए टेंडर लेने वाले सप्लायर पर दबाव बनाकर भेजी गई सब्जी की कीमत से ज्यादा का बिल बनवाकर प्राचार्य खुद पास कर रहे थे। फिर वह राशि सप्लायर के बैंक खाते में जमा होती थी। प्राचार्य नायक सप्लायर से मूल बिल का दस फीसदी कमीशन कहकर रिश्वत लेता था। ताज्जुब यह कि हॉस्टल में वार्डन वालम यादव नाम मात्र का ही है। पूछताछ से पता चला कि उसे लाई गई सब्जी, उसके बिल के बारे में जानकारी से दूर रखा जाता था और कमीशन समय पर नहीं मिलने पर सब्जियां तुलवाने और कम लावाना कहलवाकर महज सप्लायर पर दबाव बनाने के काम में लिया जाता रहा है।

फरियादी अंबालाल भोई की माने, तो प्राचार्य नायक के लालच के आगे वह परेशान हो गया था। भोई ने बताया कि रोज 50 किलो सब्जी की सप्लाई करता हूं। महीने का 80 से 90 हजार का बिल होता है, लेकिन उसमें भी हर महीने प्रिंसिपल साहब की बंधी देनी जरूरी थी, भले ही कमाई हो या हो। जब फल मंगवाए जाते थे, तो बाजार की आवक के मुताबिक सीजन का फल अमरुद भी लाता, तो वे दबाव बनाकर बिल महंगे सेब का बनवा रहे थे। बच्चियों के नाम पर इस कदर लूट तो क्या करता। शिकायत करना मजबूरी हो गई।

भीषण हादसा – राजस्थान के सवाई माधोपुर के पास बनास नदी में बस गिराने से 32 लोगों की हुई मौत

पोस्ट न्यूज़ . सवाई माधोपुर से 20 किलोमीटर दूर बनास नदी के पुल पर एक मिनी बस अनियंत्रित हो कर बनास नदी में जा गिरी जिससे 32 लोगों की मौत हो गयी और कई घायल हो गए . हादसा बस ड्राइवर की गलती की वजह से हुआ वह पुल पर अन्य वाहन को ओवर ट्रक कर रहा था और ओवार्त्रेक करते समय बस उसके कंट्रोल के बाहर हो गयी और नदी में जा गीति . प्रत्यक्ष दर्शियों की माने तो बस का मुख्य ड्राइवर अपने 16 वर्षीय नाबालिग कंडक्टर से बस चलवा रहा था.

जानकारी के मुताबिक़ हादसा सुबह 6:15 बजे हुआ। सवाई माधोपुर के पास दुब्बी इलाके में बनास नदी पर बने पुल पर हुआ। बस पुल से नदी में गिर गई। जिस जगह पर हादसा हुआ, वह सवाई माधोपुर से करीब 20 किमी दूर है .

दुब्बी के पुलिस अफसर सुभाष मिश्रा ने बताया कि करीब 32 बॉडी नदी से निकाली जा चुकी है। मरने वालों में राजस्थान, मध्यप्रदेश और बिहार के हैं। अभी तक जिन लोगों की पहचान हुई उनमें 7 लोग सवाई माधोपुर के हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ड्राइवर ने अपने नाबालिग कंडक्टर को बस चलाने को दी थी। पुल पर बस कंट्रोल से बाहर हो गई और वह रेलिंग तोड़ते हुए नदी में जा गिरी। कंडक्टर की उम्र 16 साल बताई जा रही है। आई विटनेसेस के मुताबिक, यह मिनीबस बस यात्रियों से खचाखच भरी थी और काफी स्पीड से जा रही थी। बताया जा रहा है कि बस में करीब 40 लोग सवार थे यह सवाई माधोपुर से लालसोट की ओर जा रही थी।

सवाई माधोपुर के सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने बताया कि हादसा ड्राइवर की वजह से हुआ। वह पुल पर ओवरटेक करने की कोशिश कर रहा था। इस मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि विक्टिम्स ज्यादातर मध्यप्रदेश के हैं।

 

पुरे दम ख़म एक्शन के साथ बॉक्स ऑफिस पर टाइगर की दहाड़ सुनाई दे रही है : रिव्यू “टाइगर जिंदा है”

उदयपुर। काफी आरसे के बाद “Tiger” Salman Khan अपने पुरे पावर पैक्ड एक्शन के साथ धमाके दार वापसी की है। उदयपुर जैसे शहर में Tiger Zinda Hai के 40 से अधिक शो हाउस फूल चल रहे है। आईनोक्स, पीवीआर और अशोका में फिल्म शहर के दर्शकों को काफी पसंद आरही है। जिस रूप में दर्शक अपने चेहते “भाईजान” सलमान खान को देखना चाहते है सलमान ने ठीक उसी दबंद अंदाज़ में अपना रोल खासा प्ले किया है। आईएसआई जैसे आतकवादी संगठन से अकेले भिड़ते हुए सलाम खान की फिल्म टाइगर ज़िंदा है ( Tiger Zinda Hai) देशभक्ति का खासा तडका लगा हुआ है जो दर्शकों को तालिया और सीटियाँ बजाने पर मजबूर कर देता है।
टाइगर ज़िंदा है फिल्म अपने पहले भाग एक था टाइगर की सिक्वल है जिसमे टाइगर अपने अंदाज़ में आतंकवादी संगठन आईएसआई (ISI) से 40 बंधक नर्सों की जान बचंता है और इस ओपरेशन में उनका साथ देती है पाकिस्तानी जासूस बनी केटरीना कैफ जोया। एक्शन के साथ सलमान और केटरीना का रोमांस भी फिल्म में देखने को मिलेगा। और इस जोड़ी को दर्शक खासा पसंद भी करते है। फिल्म का संगीत पहले ही अपने सारे रिकार्ड तोड़ चुका है।

फिल्म की कहानी कुछ इस प्रकार है :
अविनाश सिंह राठौर ( salman khan ) अब करीब आठ साल के एक सुंदर से बेटे जूनियर टाइगर का पापा बन चुका है। अपनी खूबसूरत वाइफ जोया ( कटरीना कैफ) और बेटे के साथ टाइगर ऑस्ट्रिया की बर्फीली पहाड़ियों के बीच शांति से अपनी लाइफ गुजार रहा है, लेकिन एक पल भी टाइगर न तो अपने वतन और न ही रॉ को भूल पाया है।

यही वजह है कि टाइगर अपनी मौजूदगी का संकेत नई दिल्ली मै बैठे अपने बॉस शिवाय सर (गिरीश कर्नाड) को भेजता रहता है। इसी बीच सीरिया के कई कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन आईएस का मुखिया उस्मान (साजिद) एक के बाद एक कई शहरों पर अपना कब्जा करने और इन्हें बर्बाद करने में लगा है, जो अमेरिका को सबक सिखाने के लिए और यहां दहशत फैलाने व बेगुनाह नागरिकों की हत्याएं करने में लगा है। अमेरिकी जर्नलिस्ट को मौत के घाट उतारने के बाद भी उस्मान की कैद में कई अमेरिकी हैं। ऐसे में अमेरिका उस्मान के बेस कैम्प को तबाह करने और उस्मान सहित दूसरे आंतकियों को मारने के लिए सात दिन बाद अटैक करने का प्लान बनाता है। उस्मान के इसी अड्डे में भारत और पाकिस्तान की करीब 40 से ज्यादा नर्स भी हैं जो उस्मान और उसके साथी बगदादी के कब्जे में हैं। अब इन भारतीय नर्सों को भारत वापस लाने का मिशन रॉ प्रमुख शिनॉय टाइगर को सौंपते हैं। टाइगर अपनी टीम में अपने विश्वासपात्र साथियों के साथ जाता है तो वही कभी पाक खुफिया एजेंसी की खास एजेंट रही जोया खान भी आईएस और उस्मान की गिरफ्त से पाकिस्तानी नर्सों को बचाने के मिशन पर सीरिया पहुंचती है। टाइगर के साथ रॉ की टीम और जोया के साथ आईएसआई के दो लोग भी यहां इन सबकी मदद करने में लगा है । करीब 25 सालों से ऑयल रिफाइनरी के लिए मजदूरों का लाने का काम करता है, लेकिन असल मे वह भी रॉ का एजेंट है। जोया और टाइगर के इस मिशन का अंजाम क्या होता है यह देखने के लिए आपको टाइगर से मिलना होगा।
फिल्म में एक बहुत ही दिलचस्प बात है कहानी को सुनाने का ढंग. अली अब्बास ने इसका बेहतरीन डायरेक्शन किया है. फिल्म की सिनेमेटोग्राफी बहुत उम्दा है. वो चाहे रेगिस्तान के सीक्वेंस हों या पहाड़ों के सीक्वेंस या फिर पीछा करने वाले सीक्वेंस. कभी सलमान घोड़े पर दिखाई देते हैं. कभी अपने ही अंदाज में दुश्मनों का पीछा करते दिखाई देते हैं. बड़े ही अच्छे अंदाज में इंटरनेशनल लेवल की ये कहानी है जिसका फिल्मांकन बहुत बढ़िया है. सलमान की एक्टिंग काबिलेतारीफ है. हालांकि ट्यूबलाइट में सलमान को ज्यादा पसंद नहीं किया गया था. लेकिन उसके बाद एक तरीके से कह सकते हैं कि सलमान ने बेहतरीन वापसी की है. उम्दा प्रदर्शन. जानदार एक्टिंग, इमोशन और एक्शन. उनके साथ कटरीना कैफ सब्जी में धनिया की तरह नहीं हैं. उनका भी बेहतरीन काम है. सज्जाद, अंगद बेदी, परेश और गिरीश कर्नाड ने भी बहुत बढ़िया रोल किया है. एक्टिंग के हिसाब से फिल्म काफी अच्छी बन पड़ी है. इसके गाने भी काफी बढ़िया हैं. फिल्म के गाने बहुत अच्छे से फिल्माए हैं अली अब्बास ने. ‘दिल दिया गल्ला’ और ‘स्वैग से करेंगे स्वागत’ लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर बहुत बढ़िया है. स्पाई थ्रिलर में एक अच्छी साई फाई फिल्म बनाई गई है.
फिल्म में सलमान की एंट्री पर बहुत सारी तालियाँ बजती हैं. फिल्म के संवाद भी बहुत दिलचस्प हैं. कई लिहाज से ये फिल्म देखी जा सकती है.
फिल्म का बजट

जहां एक तरफ एक था टाइगर का बजट करीब 70 करोड़ के आसपास था वहीं फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 320 करोड़ से ज्यादा की कमाई की थी. टाइगर जिंदा है का बजट करीब 140-150 करोड़ में बनाया गया है. सलमान ने इसके लिए कोई फीस नहीं ली है. वो शायद प्रॉफिट शेयर कर रहे हैं. इसे 4 हजार से ज्यादा स्क्रीन्स पर रिलीज किया गया है. कोई बड़ी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं है. इसा लिहाज से पहले ही दिन फिल्म 40 करोड़ का कलेक्शन कर सकती है. वीकेंड में 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई हो सकती है. ये अब तक सलमान की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म भी बन सकती है. फिल्म का बिजनेस देखना दिलचस्प होगा.

A Marvel in Hot-dip Galvanization Bergen County Bridge- Fairlawn/Patterson, NJ, 2009

0

Breaking through a lush grove of trees to connect the cities of Fairlawn and Patterson, New Jersey, the Bergen County bridge is one of several in the state to utilize hot-dip galvanized steel for corrosion protection.  A natural surface appearance was desired by both communities to help the gently arcing bridge complement and not supersede the surrounding vegetation.

 This goal was achieved by incorporating a new truss design to replace the previous view-obscuring plate design, so the public could continue to enjoy the scenic view of the creek flowing through the trees.  In keeping with this natural emphasis, the soft, grey appearance of the zinc coating blends seamlessly into the surrounding environment.

 Not only will the galvanized coating provide a pleasing aesthetic, it will also keep the appearance of the bridge unmarred by the unsightly effects of rust and corrosion.  The barrier and cathodic protection developed during the galvanizing process will keep the bridge both structurally sound and free of dripping or streaking rust stains.  All of the trusses, floor beams, flooring, diaphragms, supports, rail, and plates were hot-dip galvanized, ensuring the bridge will remain an attractive, functional addition to the two communities for generations to come. 

Pavan Kaushik

Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading Zinc-Lead-Silver Producer..