उदयपुर, । नारायण सेवा संस्थान के बडी ग्राम स्थित सेवा महातीर्थ में रविवार का सूर्योदय अविवाहित नि:शक्त बन्धु-बहिनों के सुखद जीवन की नई ईबारत लिख गया। जब वे सात जन्मों के पवित्र रिश्तें में वचनबद्घ हो गये। मौका था १९ वें विकलांग सामूहिक विवाह समारोह का। मंच पर सजे-धज्जे दुल्हा-दुल्हनों ने जब एक दूसरे को वर-माला पहनाई तब सारा पाण्डाल तालियों से गूंज उठा। इससे पूर्व दूल्हों ने क्रम से नीम की टहनी से तोरण मारने की परम्परागत रस्म का निर्वाह किया।

संस्थान निदेशक श्रीमती वंदना अग्रवाल प्रात:काल से ही दुल्हनों के श्रृंगार में अपनी टीम के साथ जुटी थी। वहीं वर के समुचित श्रृंगार में संस्थान अध्यक्ष डॉ. प्रशान्त अग्रवाल ने कोई कसर नहीं छोडी।

डॉ. प्रशान्त अग्रवाल ने बताया कि प्रात: १०.०० बजे विशाल पाण्डाल के आकर्षक द्वार पर तोरण सजाकर रखे गये जहां सभी दुल्हों ने तोरण मारकर विवाह की वैदी पर पहुंचे।

रामप्रसाद जी महाराज के मंगल आशीर्वाद के बाद डॉ. लोकेश पालीवाल व श्री जगदीश चन्द्र शास्त्री के आचार्यत्व में ५१ पण्डितों ने वैदिक विधि-विधान के साथ के सात वचनों और सात फैरों की रस्म पूरी कराने के बाद आठवे वंचन के रूप में भू्रण हत्या नहीं करने का संकल्प दिलवाया। इन वैदियों पर देश के विभिन्न भागों से आये धर्म-माता पिताओं ने कन्यादान का पुण्य अर्जित किया, और नव युगलों को अलमारी, पंखे, पंलग, गद्दे, रजाई, प्रेशर कूकर, रसोई के बर्तन, पेन्ट, शर्ट, सादिया , सूट, श्रृंगार सामग्री,, बाल्टियां, अटैची, शॉल, ड्रम इत्यादि घरेलू सामग्री प्रदान की। कन्यादान में वधुओं को कर्ण फूल, पायजेब, मंगलसूत्र आदि भी सप्रेम भेंट किये गये।

आस्था चैनल पर इस अनूठे विवाह समारोह का सम्पूर्ण विश्व में प्रात: १० से अपरान्ह १ बजे तक सीधा प्रसारण किया गया। परिचय सम्मेलन का संयोजन डॉ. प्रशान्त अग्रवाल व श्रीमती वंदना अग्रवाल ने किया।

भाव पूर्ण विदाई : अध्यक्ष डॉ. प्रशान्त अग्रवाल ने बताया कि सायं ६.०० बजे नव युगलों की उनके घरों के लिए जब विदाई हुई तब वातावरण अत्यन्त भावपूर्ण था। सभी लोगों की आंख नम थी। जैसे अपने ही घर की बेटी विदा हो रही हो। डॉ. कैलाश ‘मानव‘ सहित सभी ने वर-वधुओं के सिर पर हाथ रखकर मंगलकामनाओं और सजल नेत्रों के साथ उन्हें विदा किया।

ऐसे भी थे नव युगल : सिविल हॉस्पीटल अहमदाबाद में कम्प्यूटर ऑपरेटर ममनेश (३४) जिनके दोनों हाथ नहीं है का विवाह रमिला (३२) के साथ सम्पन्न हुआ । ६००० रू मासिक वेतन पाने वाले ममनेश विकलांग होते हुए भी ९९० किलोमीटर साईकिल चलाने का रिकार्ड अपने नाम दर्ज करवा चुके हैं, पर्वतारोहण में भी उनकी रूचि है। इनकी दुल्हन पूर्ण रूप से स्वस्थ है जिन्हें ममनेश की सादगी, कर्मठता और सात्विक जीवन भा गया और इन्होंने उसे अपने जीवन साथी के रूप में जब देखा तभी वरण कर लिया और आज पवित्र अग्नि की परिक्रमा के साथ उन्होंने अपना यह संकल्प पूरा भी कर लिया।

लिखी नई ईबारत: सकलांग दिलीप पण्ड्या (३४) ने अपने जीवन साथी के रूप में दौनो पावों से पोलियो ग्रस्त सरिता रंजन से विवाह कर समाज में एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। दिलीप पण्ड्या विगत ५ वर्षों से सुरक्षा प्रहरी के रूप में संस्थान में ही सेवा दे रहे हैं। लगभग ७-८ महिनों पूर्व सविता रंजन पोलियो ऑपरेशन के लिये संस्थान में आइर्, इसी दौरान उनकी मुलाकात दिलीप से हुई एवं आंखों-आंखों में पे्रमांकुर अंकुरित हो गये एवं दोनों ने जीवन भर साथ निभाने का निश्चय किया। आज इस मुबारक दिन पर दोनों ने हृदय की असीम गहराइयों के साथ एक-दूजे का वरण कर जन्म जन्मान्तर साथ निभाने का संकल्प किया। दिलीप का कहना है कि संस्थान की नि:शक्तजनों के प्रति नि:शुल्क और समर्पित सेवाओं ने ही उसे किसी विकलांग को अद्र्वागनी के रूप में वरण करने हेतु पे्ररित किया।

इसी प्रकार उम्मीदों के सपने बुनते हुए मुजफ्फरनगर से सरजू कुमार पोलियो का ऑपरेशन कराने इसी वर्ष संस्थान में आये थे। यहां उनकी मुलाकात अपने ही शहर की आंशिक विकलांग संगीता से हुई। दोनों ने एक-दूजे से मुलाकात के बाद ही जीवन भर साथ निभाने का वादा कर लिया। सरजू ऑपरेशन के बाद सिलाई का कार्य सुचारू कर लेता है एवं निकट भविष्य में उसकी अपनी स्वयं की दूकान खोलने की येाजना है। संगीता को सरजू के हौसले व स्पष्टवादिता ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया इसीलिए उन्होंने सरजू का जीवन साथी के रूप में वरण किया।

 

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