पत्रकारिता का ‘पत्थरकारिता’ और “बिकाऊ” काल?

न स्याही के हैं दुश्मन न सफ़ेदी के हैं दोस्त। हमको आईना दिखाना है दिखा देते हैं।।

पत्रकारिता के संदर्भ में कहा गया यह शेर देश के प्रबुद्ध पत्रकारों द्वारा बड़ी शान के साथ अक्सर उनके व्याखानों में पढ़ा जाता रहा है। परंतु आज यही पंक्तियां अपने वजूद पर ही सवाल उठा रही हैं। आज चारों तरफ़ यह सवाल किया जा रहा है कि क्या वास्तव में पत्रकार, पत्रकारिता, संपादक, मीडिया समूहों के मालिक तथा पत्रकारिता से जुड़े लेखक, स्तंभकार, समीक्षक आदि अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी के साथ निभा रहे हैं? क्या वाकई आज के दौर का मीडिया सरकार, शासन-प्रशासन तथा व्यवस्था को आईना दिखाने का काम ईमानदारी से कर रहा है? क्या आज अपनी लेखनी, अपनी वाणी, अपनी नेकनीयती तथा पूरी ज़िम्मेदारी के साथ पत्रकारों द्वारा दर्शकों अथवा पाठकों को ऐसी सामग्री परोसी जा रही है जिससे जनता लाभान्वित हो सके? क्या पत्रकारों द्वारा सरकार,शासन-प्रशासन तथा व्यवस्था का सही स्वरूप व चित्रण पेश किया जा रहा है? या फिर लोकतंत्र का स्वयंभू चौथा स्तंभ पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण हो चुका है, अधिकांश मीडिया समूहों के स्वामी आर्थिक लाभ कमाने की ग़रज़ से सत्ता की गोद में जा बैठे हैं?

क्या आजकल एक अच्छे पत्रकार का पैमाना योग्यता अथवा पत्रकारिता का संपूर्ण ज्ञान होने के बजाए उसका आकर्षक व्यक्तित्व, उसकी सुंदरता, उसके चीख़ने-चिल्लाने का ढंग तथा अपने मालिक के प्रति उसकी वफ़ादारी आदि ही रह गया है?

आजकल टेलीविज़न के समाचार चैनल को ही यदि देखा जाए तो अनेक चैनल्स के अनेक एंकर्स व समाचार वाचक शालीनता के साथ गंभीरतापूर्वक अपना कार्यक्रम पेश करने के बजाए जान-बूझ कर बेवजह चीख़ने-चिल्लाने का नाटक करते देखे जा सकते हैं। किसी गंभीर बहस को अथवा किसी साधारण से विषय को चीख़-चिल्ला कर तथा उस कार्यक्रम में भड़काऊ किस्म के सवाल दाग़ कर या विवादित प्रश्र पूछ कर यह नए ज़माने के एंकर्स महज़ अपने कार्यक्रम की टीआरपी बढ़ाना चाहते हैं।

टीआरपी का बढ़ना या घटना पत्रकारिता की विषयवस्तु नहीं है बल्कि यह व्यवसाय तथा मार्किटिंग से जुड़ी चीज़ है।परंतु टीवी एंकर्स के भड़काऊ व आग लगाऊ अंदाज़ ने इन दिनों जनता को अपनी ओर इस कद्र आकर्षित कर रखा है कि दर्शक अन्य मनोरंजक कार्यक्रमों से अधिक अब टीवी समाचार सुनने लगे हैं। यही वजह है कि समाचार प्रसारण के दौरान इन टीवी चैनल्स की मुंह मांगी मुराद पूरी हो रही है तथा बढ़ती टीआरपी की वजह से ही समाचार प्रसारण के दौरान या किसी गर्मागर्म बहस के दौरान उन्हें भरपूर व्यावसायिक विज्ञापन प्राप्त हो रहे हैं।

दूसरी ओर इन दिनों यह भी देखा जा रहा है कि अधिक से अधिक लेखक व पत्रकार सत्ता की ख़ुशामद करने व उन्हें ख़ुश करने में लगे हुए हैं। इनमें कई तो ऐसे भी हैं जो स्वयं को समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष अथवा वाम या मध्यमार्गी विचारधारा का लेखक तो बताते हैं परंतु यदि आप उनकी टीवी डिबेट सुने या उनकी लेखनी पढ़ें तो आपको यही पता चलेगा कि ऐसे कई लोग किसी मान-सम्मान, अवार्ड या पुरस्कार की लालच में सत्ता की भाषा बोलते दिखाई देने लगते हैं। पत्रकारों की इसी लालसा ने व मीडिया समूहों के स्वामियों की शत-प्रतिशत होती जा रही व्यसायिक सोच ने ही ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं कि अब पत्रकारिता को ‘पत्थरकारिता’ कहना ही ज़्यादा उचित प्रतीत होता है। यदि आपको उकसाऊ व भड़काऊ पत्रकारिता के कुछ जीते-जागते उदाहरण देखने हों तो अनेक टीवी चैनल के कार्यक्रमों के शीर्षक से ही आपको यह पता चल जाएगा कि प्रस्तोता के कार्यक्रम में क्या पेश किया जाने वाला है। उदाहरण के तौर पर हल्ला बोल, सनसनी, दंगल, टक्कर, गो तमाशा, ताल ठोक के जैसे कार्यक्रमों के शीर्षक क्या पत्रकारिता के मापदंड पर सही उतरते हैं? या फिर नमक-मिर्च-मसाला लगे हुए ऐसे शीर्षक केवल टीआरपी बढ़ाने के लिए व्यवसायिक दृष्टिकोण से बनाए जाते हैं? और ज़ाहिर है जब शीर्षक ऐसे हों तो कार्यक्रम प्रस्तोता भी इस शीर्षक तथा अपने स्वामी के दूरगामी मकसद अर्थात् टीआरपी बढ़ाने के उद्देश्य से अपनी बात शालीनता के साथ कहने के बजाए गरजता और बरसता हुआ दिखाई देता है।

सूत्र तो यह भी बताते हैं कि टीवी पर होने वाली कई बहस ख़ासतौर पर मंदिर-मस्जिद, हिंदू-मुस्लिम, तीन तलाक, अन्य धार्मिक मुद्दों, गाय, गंगा, लव जेहाद, गौरक्षक, पद्मावती जैसे अनेक विवादित मुद्दों पर होने वाली बहस में एंकर्स द्वारा जान-बूझ कर कार्यक्रम में भाग लेने वाले लोगों से ऐसे प्रश्र किए जाते हैं जिससे उसे ग़ुस्सा आए और ग़ुस्से में आकर वह व्यक्ति कुछ ऐसे उत्तर दे डाले जो विवाद का कारण बन सकें।

आपने अक्सर देखा होगा कि टीवी पर जब कभी दो पक्ष आपस में किसी विषय पर बहस में भिड़ जाते हैं उस समय प्रस्तोता की ओर से उन्हें और ढील दे दी जाती है। जबकि यदि एंकर चाहे तो उसी समय उनका माईक बंद कर सकता है और दूसरे अतिथि की ओर रुख़ कर सकता है। परंतु एंकर जान-बूझ कर दो प्रतिद्वंद्वी विचार के लोगों में बहस कराता है ताकि उसका बहुमूल्य समय भी गुज़र सके और लोगों को उस विवादित चटकारापूर्ण बहस में आनंद भी आ सके और इसी बदौलत उसकी टीआर पी भी बढ़ सके। परंतु दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि यह मीडिया समूहों के मालिक व उनके इशारों पर चंद पैसेां की ख़ातिर नाचने वाले प्रस्तोता यह नहीं जानते कि उनकी इस बदनीयती, बदज़ुबानी का ख़मियाज़ा भारतीय समाज और पूरे देश को भुगतना पड़ता है। निश्चित रूप से यह सब पत्रकारिता के लक्षण कतई नहीं हैं।

इन दिनों पूरे देश में ऐेसे ही एक टीवी शोमैन रोहित सरदाना के विरुद्ध ज़बरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है। इसके विरुद्ध सैकड़ों एफ़आईआर दर्ज होने की ख़बरें हैं। कई जगह हिंदू-मुस्लिम सभी ने मिलकर सरदाना के विरुद्ध ज्ञापन दिए हैं तथा इसे न्यूज़ चैनल से हटाए जाने की मांग की है। एक टीवी शो में इसने अपनी एक सहयोगी पत्रकार के साथ हो रही एक बहस के दौरान हिंदू-मुस्लिम व ईसाई धर्म की कई आराध्य हस्तियों के साथ अभद्र शब्द का प्रयोग किया था। ख़बर तो यह है कि यह विवादित कार्यक्रम भी जान-बूझ कर इसी लिए तैयार किया गया था ताकि विवाद बढ़ने के बाद टीवी चैनल व एंकर्स को भारी शोहरत मिल सके।

दुर्भाग्यवश हमारे देश में नकारात्मक रूप से मिलने वाली प्रसिद्धि को भी सकारात्मक प्रसिद्धि के रूप में देखते हैं और कुछ क्षेत्रों में तो जान-बूझ कर इसीलिए विवाद खड़ा भी किया जाता है ताकि विवाद होने के बाद मीडिया में उसे अच्छा कवरेज हासिल हो सके। फ़िल्म पद्मावती को लेकर खड़े हुए बवाल के विषय में भी ऐसी ही बातें कही जा रही हैं। यदि आज पत्रकारिता भी इसी फ़ार्मूले का सहारा लेकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है तो यह देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। ऐसी पत्रकारिता से देश को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।

आज हमारे समाज में जो भी दुर्भावना या वैमनस्य का वातावरण बनता दिखाई दे रहा है या चारों ओर से असहिष्णुता की जो ख़बरें सुनाई दे रही हैं उसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि पत्रकारिता का वर्तमान दौर दरअसल ‘पत्थरकारिता’ काल बनता जा रहा है।

तनवीर जाफ़री

पहले स्कूली छात्रा से दोस्ती कर किया दुष्कर्म फिर करता रहा ब्लेकमेल और अब ….

हिरणमगरीमें एक स्कूली छात्रा को सोश्यल मीडिया पर दोस्त बना उससे दुष्कर्म और ब्लेकमेलिंग से रुपए ऐंठने के चित्तौड़ निवासी अभियुक्त को पोक्सो मामलों के विशिष्ट न्यायाधीश वीरेंद्रकुमार जसूजा की अदालत ने सोमवार को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। आरोपी किशोरी को डरा-धमका कर कार से रानी रोड ले गया था, जहां पिस्टल दिखाकर मामला पुलिस तक नहीं ले जाने की धमकी भी दी थी। हिरणमगरी पुलिस ने दुष्कर्म ब्लेकमेलिंग के आरोपी आदिल पुत्र जमील खां को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। आदिल चित्तौड़ के गांधीनगर में सेक्टर 4 का निवासी है। किशोरी के पिता ने 2 नवंबर को एसपी को परिवाद दिया था। एसपी के आदेश पर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने किशोरी के धारा 164 के बयान कराए थे। रिपोर्ट में बताया गया कि अभियुक्त आदिल ने किशोरी को फेसबुक फ्रेंड बनाकर जाल में फांसा था। इसके बाद वह उदयपुर आने लगा। नशीली वस्तु खिलाकर दुष्कर्म किया और आपत्तिजनक फोटाे खींच लिए थे। बाद में फोटो दिखाकर कई बाद दुष्कर्म किया। आरोप है कि आदिल ने ब्लेकमेलिंग कर कभी 5 हजार, कभी 10 हजार रुपए भी ऐंठ लिए। बाद में अगस्त में किशोरी को डरा-धमका कर कार से रानी रोड ले गया और पिस्तौल दिखाकर पुलिस में रिपोर्ट नहीं देने की धमकी भी दी। पीड़िता के पिता ने हिरणमगरी थाने में दर्ज कराई थी रिपोर्ट

A little known eating disorder is on rise- PICA – Dr. Kajal Verma

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Pica is the persistent eating of substances such as dirt or paint that have no nutritional value. Mineral deficiencies are occasionally associated with pica; however, biological abnormalities are rarely found in individuals with pica.
-People practicing forms of pica, such as geophagy, pagophagy and amylophagy, are more likely anemic, have low hemoglobin concentration in their blood, lower levels of red blood cells (hematocrit), or have lower plasma zinc levels.
– Specifically, practicing geophagy is more likely to associated with anemia or low hemoglobin.
– Practicing pagophagy and amylophagy were more highly associated with anemia.
– Additionally, being a child or pregnant woman practicing pica was associated with higher

डॉ. काजल वर्मा

chance of being anemic or having low hemoglobin relative to the general population.
-More recently, cases of pica have been tied to the obsessive–compulsive spectrum, and there is a move to consider OCD in the cause of pica.
-However, pica is currently recognized as a mental disorder by the widely used Diagnostic and Statistical Manual of Mental Disorders (DSM-IV). Sensory, physiological, cultural and psychosocial perspectives have also been used by some to explain the causation of pica.[citation needed]
It has been proposed that mental-health conditions, such as obsessive-compulsive disorder (OCD) and schizophrenia, can sometimes cause pica.

Causes

-Mineral deficiency specially iron deficiency
-Traumatic events/ stress:Maternal deprivationParental separation/ neglect
-Child abuse
-Disorganized family structure
-Poor parent-child interaction
-Low socio-economic status
Clinical Features
Child with habit of eating substances like clay, dirt, stones, pebbles, hair, faeces, lead, plastic, pencil, erasers, fingernails, paper, paint chips, coal, chalk, wood, plaster, light bulbs, needles, string, cigarette, wire and burnt matches etc.
A case with history of PICA may present with symptoms of:Constipation
Chronic or acute, diffuse or focused abdominal pain
Nausea/ vomitingLoss of appetite
On examination, findings like :Abdominal distension
PallorIron deficiency anaemia which could be the cause of PICA
Clinical presentation of PICA is variable and is associated with the specific nature of the resulting medical conditions and the indigested substances.Parasitic infestations are usually associated with PICA. Ascariasis is commonly seen in children with Pica.

Examples

Amylophagia – consumption of starch
Coprophagy – consumption of faeces
Geophagy – consumption of soil, clay or chalk
Hyalophagia – consumption of glass
Pagophagia – pathological consumption of ice
Trichophagia – consumption of hair or wool
Urophagia – consumption of urine
Xylophagia – consumption of wood.

Complications

There are many potential complications of pica, such as:
Certain items, such as paint chips, may contain lead or other toxic substances and eating them can lead to poisoning, increasing the child’s risk of complications including learning disabilities and brain damage. This is the most concerning and potentially lethal side effect of pica
Eating non-food objects can interfere with eating healthy food, which can lead to nutritional deficiencies.Eating objects that cannot be digested, such as stones, can cause constipation or blockages in the digestive tract, including the intestines and bowels. Also, hard or sharp objects (such as paperclips or metal scraps) can cause tears in the lining of the esophagus or intestines.Bacteria or parasites from dirt or other objects can cause serious infections. Some infections can damage the kidneys or liver.Co-existing developmental disabilities can make treatment difficult.

Pica Homeopathic Treatment
The homeopathic treatment for PICA is holistic and comprehensive.Homeopathy does not target the symptomsof Pica. The target of homeopathic treatment for Pica is the underlying cause that leads to development of Pica in a given individual.Once the underlying cause is removed with homeopathy or the deficiency is eliminated,the cravings disappear soon.Homeopathic treatment for Pica improves the body’s natural defense mechanisms or ‘immunity’ and prevents the occurrence of Pica. Thus, homeopathic treatment plays an excellent role as a ‘preventive’ and curative for Pica.Importantly, homeopathic treatment for Pica significantly diminishes the risk of development of nasty complications of Pica.

शराब बंदी का जादू – किडनी, लीवर और न्यूरो रोगियों में आई 44 प्रतिशत तक की कमी

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पोस्ट म्युज़ । बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी को सामाजिक सद्भावना का प्रतीक बताते हुये इसे पूरे देश में लागू करने की  वकालत की और कहा कि बिहार में एक साल के अंदर ही किडनी और लिवर के रोगियों की संख्या 39 प्रतिशत तथा न्यूरो संबंधी बीमारियों से ग्रस्त रोगियों की संख्या 44 प्रतिशत घटी है।
जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष  कुमार ने यहाँ दिल्ली के पार्टी कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुये बताया कि बिहार सरकार ने एक अध्ययन कराया है जिसमें शराबबंदी से पहले और उसके बाद के एक साल के दौरान सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की तुलना की गयी। राज्य में 1 अप्रैल 2016 से शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। उन्होंने बताया कि अध्ययन में पता चला कि स$डक दुर्घटनाओं एवं ट्रामा के मरीजों की संख्या में एक साल में 31 प्रतिशत की कमी आयी है।
इसके अलावा किडनी तथा लिवर के रोगियों की संख्या 39 प्रतिशत, मानसिक बीमारियों के मरीजों की संख्या 33 प्रतिशत और तंत्रिका तंत्र (न्यूरो) संंबंधी रोगों के मरीजों की संख्या 44 प्रतिशत कम हुई है।
जदयू अध्यक्ष ने कहा शराबबंदी को मुद्दा नहीं बनाने के लिए दूसरी पार्टियों पर निशाना साधते हुये कहा कि यदि यह बिहार और गुजरात में लागू हो सकता है तो पूरे देश में क्यों नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कांग्रेस तथा वाम दल लंबे-चौडे भाषण देते हैं, लेकिन इसकी बात नहीं  करते और न ही इसके लिए कोई अभियान चलाते हैं। हालाँकि, उन्होंने बिहार में अपने सहयोगी दल भारतीय जनता पार्टी का नाम नहीं लिया।  कुमार ने कहा कि हिंदू, इस्लाम, सिख, बौद्घ और जैन, सभी धर्म शराब और नशे के खिलाफ हैं। सांप्रदयिक और सामाजिक सद्भावना का इससे बेहतर प्रतीक नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद चंद पढे-लिखे लोग इसे आजादी से जोडकर शराबबंदी का विरोध करते हैं।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने नशाबंदी लागू करने के साथ नशामुक्ति केंद्रों की भी स्थापना की थी। इन केंद्रों पर कराये गये त्वरित सर्वेक्षणों के अनुसार, शराबबंदी से अवसाद में 81 प्रतिशत और तनाव में 77 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी। इन केंद्रों में आने वाले मरीजों में 86 प्रतिशत स्वास्थ्य में सुधार हुआ, 75 प्रतिशत की आमदनी बढी, 83 प्रतिशत की बचत बढी और 86 प्रतिशत की काम करने की क्षमता बढी। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकडों के हवाले से  कुमार ने बताया कि जनवरी 2015 से मार्च 2016 के मुकाबले अप्रैल 2016 से सितंबर 2017 की अवधि में बिहार में हत्या के मामलों में 14 प्रतिशत, डकैती के मामलों में 23 प्रतिशत, बैंकों में डकैती के मामलों में 21 प्रतिशत और सडक दुर्घटना के मामलों में 10 प्रतिशत की गिरावट आयी है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में प्रति लाख आबादी के लिए अपराध का राष्ट्रीय औसत 234.2 था जो वर्ष 2016 में मामूली गिरावट के साथ 232.3 रहा। इसी अवधि में बिहार में यह औसत 171.6 से घटकर 157.4 पर आ गया और पूरे देश में अपराध के मामले में वह २२वें स्थान पर रहा।

इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना एक कैंसर पीडिता के साथ गैंग रेप

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उदयपुर पोस्ट। लखनऊ में १६ वर्षीया ब्लड कैंसर पीडिता लडकी से गैंगरेप (gang rap )का मामला सामने आया है। घटना पूरी तरह से इंसानियत को शर्मशार कर देने वाली है, (cancer sufferers) पीडिता  के साथ पहले तो दो लडकों ने गैंगरेप किया और जब उसने मदद के लिए एक  बाइक सवार से गुहार लगाई तो उसने भी उसके साथ दुष्कर्म किया। लडकी ब्लड कैंसर से पीड़ित है और पिछले पांच सालों से लखनऊ के एक अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।
यह लडकी लखनऊ के बाहरी इलाके सरोजिनी नगर के एक गांव की रहने वाली है। घटना शनिवार की है जिन दो लडकों ने उसके साथ गैंगरेप किया, उनमें से एक उसकी जान-पहचान का है। लखनऊ पुलिस में अनुसार पीड़ित लडकी शनिवार शाम को पास में ही मार्केट गई थी। वहां उसके पहचान का लडका शुभम मिला, जिसने अपनी बाइक से उसे घर छोडने की बात कही। जब लडकी उसकी बाइक पर बैठ कर रवाना हुई तो वह बाइक लेकर एक सुनसान जगह पर पहुंच गया जहां उस लडके का एक अन्य साथी सुमित मौजूद था। दोनों लडकों ने उसके साथ गैंगरेप किया। रात में करीब ११ बजे दोनों लडके पीड़ित लडकी को सडक के किनारे छोडकर फरार हो गए।  पीड़ित लडकी वहीं पडी हुई थी, तभी एक स्थानीय कांट्रैक्टर अपनी बाइक पर वहां से गुजरा। पीडिता ने उसे रोककर अपनी साथ हुई घटना बताई और अपने घर पहुंचा देने का आग्रह किया। पीड़ित लडकी की मदद करने की बजाय वीरेंद्र यादव नामक इस शख्स ने भी उसके साथ रेप किया और वहां से भाग गया। लडकी सडक पर ही पडी रही। देर रात करीब २ बजे आसपास के कुछ लोगों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने लडकी को घर पहुंचाया। लखनऊ पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है, एक आरोपी युवक की पहचान सामने आने के कारण आरोपियों को पकडने में ज्यादा वक़्त नहीं लगेगा

The Galvanized Marvel – Bandra Worli Sea Link…

Bandra Worli Sea Link is the first and the longest sea link bridge in India. It is an 8-lane cable-stayed bridge, spanning about 5600 meters in length and towering to a height of 126 meters. Executed at a cost of Rs. 16.5 billion, the material used in the construction project had to meet quality regulations and standards considering an average daily traffic of 37,500 vehicles.

 Infrastructure like bridges are extremely vulnerable to corrosion due to their proximity to marine salts and moisture. The only corrosion prevention method for these structures is to provide a barrier coating by galvanization.

 The quality and reliability of steel wire ropes was a crucial factor in the construction of the bridge since the steel wires are required to support the cable stay bridge. The bridge stands strong with support of high-strength galvanized steel cables, rigorously tested before being put to use.

 Over Rs. 90 million is spent on illuminating the sea link. Construction of the sea link was not only worked on by aced groups from India, but groups from 11 other countries including Egypt, China, Canada, Switzerland, Britain, Hong Kong, Thailand, Singapore, Philippines, Indonesia and Serbia who deliberated and decided to make this bridge stand tall for many years to come.

 Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading Zinc-Lead-Silver Producer..

Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc

Pavan Kaushik

Zinc Deficiency… a reason behind Osteoporosis…

What is Osteoporosis : a medical condition in which the bones become brittle and fragile from loss of tissue, typically as a result of hormonal changes, or deficiency of calcium or vitamin D. More than 10 million cases per year (India). Though any age is vulnerable to Osteoporosis, but people above 40 are more prone to it.

 We all have forever patronized Calcium for strong bone health in our bodies. With increased advertising for the nutrient, everyone focuses on Calcium and forgets about another essential element which helps in increasing bone density and boosting immunity.

 Zinc (long ignored by mainstream medicine for bone health), is in fact a crucial element

for proper absorption of Calcium and Vitamin D to get into cells where it works to build bones. Although Calcium is the mineral most associated with bone formation, Zinc is also found in the bones. Forming a small percentage of the bone, Zinc is needed to form Hydroxylapatite which is a naturally occurring crystalline Calcium complex. Hydroxylapatite crystals make up about half of the bones’ weight. Thus, Zinc is essential for proper mineralization of bones by contributing to its bone mass.

 Calcium is not the only nutrient important for bone formation, many trace minerals such as Zinc, Copper, Manganese and Boron are also important. A deficiency in trace minerals predisposes osteoporosis. According to studies by National Centre for Biotechnology Information, Zinc helps in prevention of osteoporosis.

 You may not think of Zinc as a vital nutrient for bones, yet without adequate Zinc, the bones cannot maintain themselves.

 Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading Zinc-Lead-Silver Producer..

Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc

Pavan Kaushik

इटली में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने रचाई शादी,

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post news . देश के समस्याओं और गुजरात चुनाव से ज्यादा महत्त्व पूर्ण खबर थी क्रिकेट के धुरंधर विराट कोहली फिल्म अभिनेत्री अनुष्का की शादी की जिसके लिए देश भर की मीडिया ने अनुष्का के कपड़ों से लेकर नाम के लोंगमेहदी आँखों के काजल तक का बखान अपने प्रेम टाइम में कर डाला है तो इस कहबर की आखर पुष्ठी हो गयी और अनुष्का और विराट ने अपने ट्वीटर अकाउंट पर शादी होने की पुष्ठी कर दी दोनों ने शादी की की फोटो श्जेयर करते हुए शादी हो जाने की आधिकारिक घोषणा करदी. शादी में कोण गया किसने कितना खाना अखया कोण नहीं गया और किसको क्यूँ नहीं बुलाया अब इस पर चुनावी विश्लेषण से बड़ा विश्लेषण कर रही है .

विराट और अनुष्‍का की शादी की खबर का सभी को इंतजार था। अब उन्‍होंने इसकी ऑफ‍िशल घोषणा भी कर दी है। क्र‍िकेट और बॉलीवुड ने जो एक और जोड़ी बनाई है, वह हर तरीके से परफेक्‍ट है। दोनों की शादी की पहली तस्‍वीरें भी सामने आ गई हैं। बताया जा रहा है क‍ि दुलहन बनी अनुष्‍का शर्मा की ड्रेस डिजाइनर साब्‍यसाची ने तैयार की है।

 

Today we have promised each other to be bound in love for ever. We are truly blessed to share the news with you.This beautiful day will be made more special with the love and support of our family of fans & well wishers. Thank you for being such an important part of our journey.

Today we have promised each other to be bound in love forever. We are truly blessed to share the news with you. This beautiful day will be made more special with the love and support of our family of fans & well wishers. Thank you for being such an important part of our journey.

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विराट और अनुष्का के बीच चार साल के अफेयर था. हालांकि इनके अफेयर के चर्ऐ 2014 के बाद से तेज हुए. जब टीम इंडिया न्यूजीलैंड के दौरे पर गई. इस दौरे पर अनुष्का शर्मा भी उनके पीछे-पीछे गईं. दोनों की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी. तब से ही दोनों के बीच प्यार की खबरें आम होती गईं.

दो दिन पहले ही मुंबई एयरपोर्ट पर अनुष्का शर्मा को स्पॉट किया गया था. जहां वह अपने पिता अजय शर्मा, मां आशिमा और बड़े भाई करनेश के साथ निकलीं. वहीं विराट कोहली के परिवार और करीबी दोस्तों ने भी इटली के शहर मिलान के लिए टिकट बुक कराई हुई थी. इसके साथ ही दोनों की शादी की अटकलें तेज हो गईं थी. गौरतलब है कि विराट और अनुष्का की शादी की चर्चाएं पिछले काफी समय से होती रही हैं. विराट जब भी क्रिकेट से छुट्टी लेते थे तो शादी की हवा गर्म हो जाती थी. इस बार भी विराट कोहली छुट्टी पर हैं और ऐसा ही हुआ था.

मेवाड़ की फिजां में ज़हर घोलने की तैयारी कर रहे है नफरत की दूकान चलाने वाले।

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उदयपुर पोस्ट। उदयपुर की फिजां में हर तरह से ज़हर घोलने की तैयारी हो रही है। कुछ अमन के दुश्मन अपनी राजनीति दुकानदारी के चलते उदयपुर से अपने ज़हर घोलने का कार्यक्रम शुरू करना चाहते है जिससे कि उनकी धर्म की ठेकेदारी कुछ और चल सके। नफरत फैलाने के लिए मुद्दा बनाया है हत्यारे शम्भू लाल के समर्थन में रैली निकालना । जिला प्रशासन और पुलिस को सचेत रहना होगा अगर पुलिस प्रशासन ने समय रहते कोई पुख्ता कदम नहीं उठाया तो मेवाड़ में किसी अनहोनी होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
राजस्थान के राजसमन्द जिले में श्रमिक का क़त्ल कर ह्त्या कर विडियो वायरल करने के बाद तो जैसे नफरत की राजनीति पर रोटियां सेंकने वालो की बल्ले बल्ले हो गयी है। विशेष संगठन से जुड़े कुछ टुच्चे लोगों ने एक हैवान हत्यारे के समर्थन में सोशल मिडिया पर मेसेजों की बाढ़ ला दीहै। इस तरह की राजनीति और अपनी संगठन की दूकान को चमकाने में कई छोटे मोटे लोग बढ़ चढ़ कर भड़काऊ बाते और मेसेज वायरल कर रहे है।
यही नहीं “उपदेश राणा” नाम का हिंदूवादी संगठन से जुड़ा युवक तो 14 दिसंबर को उदयपुर पहुच कर हत्यारे शम्भूलाल के समर्थन में रैली तक निकालने का आव्हान फेसबुक और व्हात्सप के जरिये कर रहा है। हालाँकि उसके समर्थकों की संख्या बीसियों में ही सिमित है लेकिन फेसबुक वाल पोस्ट पर मुस्लिम समाज के लिए जिस तरह की खुल कर भड़काऊ पोस्ट डाली जा रही है उससे उदयपुर की शांत फिजां में आग लगाने की तैयारी कही जा सकती है।
यही नहीं उसने अपनी पोस्ट पर चार दिन पहले मुस्लिम समाज द्वारा निकलने वाले जुलुस को भी यह कह कर प्रचारित किया की मेरे खिलाफ मुस्लिम समाज वहां जुलुस निकाल रहा है।
हालाँकि उसकी इस तरह की भड़काऊ पोस्ट और उदयपुर जैसे शांत शहर का माहोल खराब करने के इरादे को भांपते हुए कुछ जागरूक मुस्लिम युवाओं ने जिला कलक्टर और एसपी को ज्ञापन दे कर सचेत भी किया है कि कुछ नफरत की राजनीति कर अपने संगठनों की रोटियां सेंकने वाले लोगों के नापाक इरादे उदयपुर का माहोल खराब करने का है।
उदयपुर पोस्ट भी जिला कलक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक से निवेदन करता है कि इस तरह की भड़काऊ पोस्ट दाल कर शहर और मेवाड़ का माहोल खराब करने वालों के खिलाफ समय रहते कारवाई करें। जिस रैली को 14 दिसंबर को निकाले जाने की बात फेसबुक के जरिये की जा रही है उसका मकसद भी सिर्फ ज़हर घोलना और आग लगाना ही मात्र है इस बात के लिए भी पुलिस प्रशासन उचित संज्ञान लेकर कारवाई करे।

एक बात यह सच है और हकीकत है कि शम्भुनाथ जैसे हत्यारे का समर्थन महज कुछ स्वार्थी और अपनी राजनीति की दूकान चलाने वालों ने ही की है जो इसके बल पर अपने छोटे मोटे संगठन को बढ़ावा दे सकें जबकि एक आम नागरी वो चाहे हिन्दू हो या मुस्लिम हो या चाहे किसी धर्म का हो उस हत्यारे की भर्त्सना की है और उसके लिए फांसी की सजा की मांग ही की है। इसलिए शहर सहित मेवाड़ के सभी धर्म के लोगों को भी इस बात के लिए आगाह करना चाहता हूँ कि, हत्या के बाद हत्यारे को महिमामंडित करने वाले मेसेज कुछ चंद विकृत लोग ही कर रहे है जिनकी संख्या बहुत ज्यादा नहीं है। आम शहरी आम नागरिक इस तरह की ह्त्या के भर्त्सना करता है और हत्यारे को फांसी की मांग करता है। बस समझना आपको है कि इस तरह के मेसेज और पोस्ट से सिर्फ नफरत की आग फैला कर अपना स्वार्थ सिद्द कर रहे है और इन्हें कामयाब नहीं होने देना है क्यूँ कि अगर शांत फिजां बिगड़ गयी तो ये नफरत की दूकान चलाने वाले लोग कामयाब हो जायेगें।

हैवान हत्यारे “शम्भूलाल” को महिमा मंडित कर माहोल खराब करने वाले होंगे गिरफ्तार – राजस्थान पुलिस

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उदयपुर। राजस्थान के राजसमन्द जिले में श्रमिक का क़त्ल कर ह्त्या कर विडियो वायरल करने वाले हत्यारे का समर्थन कर माहोल खराब करने की कोशिश करने वालों पर अब पुलिस सख्त कारवाई करेगी। हैवान हत्यारे को व्हात्सप ग्रुप और फेसबुक पर कुछ लोग जय जय कार महिमा मंडित कर रहे है साथ ही भड़काऊ पोस्ट भी कर रहे है जिससे की सम्प्रद्यिक माहोल खराब होने की पूरी आशंका है।
हत्यारे का पक्ष लेकर भड़काऊ पोस्ट करने वालों पर होने वाली कारवाई को लेकर बीबीसी हिंदी वेब साईट में भी खबर छापी जिसमे बताया गया है कि राजसमंद हत्याकांड के बाद राजसमंद और उदयपुर के कुछ व्हाट्सएप ग्रुपों में शंभुलाल की जय जयकार की गई है.
राजस्थान पुलिस का कहना है कि शंभूलाल का समर्थन करने वाले लोगों को चिन्हित किया जा रहा है और अगले एक-दो दिनों में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया जाएगा.
उदयपुर के पुलिस महानिरीक्षक आनंद श्रीवास्तव ने बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा से कहा, “जघन्य अपराध करने वाले शंभूलाल का समर्थन कुछ व्हास्टएस ग्रुपों में किया गया है. हम धार्मिक उन्माद भड़काने वालों की पहचान कर रहे हैं. अगले एक-दो दिनों में गिरफ़्तारियां की जाएंगी.” आनंद श्रीवास्तव स्वीकार करते हैं कि सोशल मीडिया की वजह से तनाव बढ़ रहा है और ऐसे वीडियो को वायरल होने से पहले रोकना मुश्किल होता जा रहा है.
वो कहते हैं, “हमारे पास जो क़ानूनी शक्तियां हैं उनके तहत हम वीडियो वायरल होने के बाद इसके पीछे जो लोग हैं, उन्हें गिरफ़्तार तो कर सकते हैं, लेकिन वीडियो को वायरल होने से नहीं रोक सकते.”
श्रीवास्तव कहते हैं, “उन्मादी सामग्री सबसे ज़्यादा फ़ेसबुक और व्हाट्सएप से शेयर की जाती है. इन माध्यमों को रोकने की क़ानूनी शक्ति अभी हमारे पास नहीं है. हम सिर्फ़ इंटरनेट ही बंद कर सकते हैं, लेकिन ये रास्ता भी बहुत प्रभावशाली नहीं है.”

हत्यारे को महिमामंडित कर रहे है कुछ विकृत मानसिकता के लोग सोशल मिडिया पर

वो कहते हैं, “इंटरनेट बंद करने का आम जनजीवन पर व्यापक असर पड़ता है. आज चिकित्सा के क्षेत्र में लगभग 60 फ़ीसदी काम इंटरनेट पर ही हो रहा है. जांच रिपोर्टें इंटरनेट पर तैयार होती हैं और ये मरीज़ों से तुरंत साझा की जाती हैं. बैंकिंग के साथ-साथ अन्य व्यवसाय भी इससे जुड़े हैं. ऐसे में इंटरनेट बंद करना भले कई बार ज़रूरी हो, लेकिन इससे बहुत असुविधा होती है.”
क्या पुलिस व्हाट्सएप ग्रुपों पर नज़र रखने की तैयारी कर रही है? श्रीवास्तव कहते हैं, “हम हर ज़िले में सोशल मीडिया पर नज़र रखने के लिए सेल बना रहे हैं. जब कोई चीज़ वायरल हो जाती है हम तब कार्रवाई करते हैं. लेकिन हमारी कोशिश है कि चीज़ों को वायरल होने से पहले ही रोका जाए.”
श्रीवास्तव कहते हैं, “हमारी पहली प्राथमिकता अभियुक्त को गिरफ़्तार करने की थी और हमने चौबीस घंटों के भीतर उसे गिरफ़्तार कर लिया. इससे लोगों का ग़ुस्सा और ज़्यादा नहीं भड़का. हालात बेहद नाज़ुक थे इसलिए हमने दोनों समुदायों के लोगों को भरोसे में लिया.”
घटना के बाद कई बंगाली प्रवासी वापस भी लौट गए हैं. श्रीवास्तव कहते हैं कि पुलिस ने प्रवासियों को सुरक्षा का भरोसा दिया है और उनके क्षेत्र में नई पुलिस पिकेट स्थापित की है.
व्हाट्सएप ग्रुपों में शंभूलाल रैगर का समर्थन करने वाले कथित हिंदुत्तवादी कार्यकर्ता भी हो सकते हैं. क्या पुलिस उन पर कार्रवाई करने में हिचकेगी? श्रीवास्तव कहते हैं, “हम अभियुक्तों का धर्म या विचारधारा नहीं देखते. जो भी माहौल ख़राब करने की या धार्मिक उन्माद भड़काने की कोशिश करेगा हम उसे गिरफ़्तार करेंगे.”
अगर पुलिस कार्रवाई में राजनेताओं ने दख़ल दिया तो पुलिस क्या करेगी इस पर श्रीवास्तव कहते हैं, “हमारी कार्रवाई में नेता दख़ल नहीं देते हैं. शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जो भी ज़रूरी है वो हम करेंगे. हमारी पहली प्राथमिकता माहौल शांतिपूर्ण बनाए रखने की है. जो भी लोग माहौल ख़राब करने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें गिरफ़्तार किया जाएगा.”
बीबीसी से बातचीत में राजस्थान के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने भी कहा था कि जो लोग क़ानून तोड़ेंगे उन पर पुलिस बिना भेदभाव के कार्रवाई करेगी.