हैवान हत्यारे “शम्भूलाल” को महिमा मंडित कर माहोल खराब करने वाले होंगे गिरफ्तार – राजस्थान पुलिस

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उदयपुर। राजस्थान के राजसमन्द जिले में श्रमिक का क़त्ल कर ह्त्या कर विडियो वायरल करने वाले हत्यारे का समर्थन कर माहोल खराब करने की कोशिश करने वालों पर अब पुलिस सख्त कारवाई करेगी। हैवान हत्यारे को व्हात्सप ग्रुप और फेसबुक पर कुछ लोग जय जय कार महिमा मंडित कर रहे है साथ ही भड़काऊ पोस्ट भी कर रहे है जिससे की सम्प्रद्यिक माहोल खराब होने की पूरी आशंका है।
हत्यारे का पक्ष लेकर भड़काऊ पोस्ट करने वालों पर होने वाली कारवाई को लेकर बीबीसी हिंदी वेब साईट में भी खबर छापी जिसमे बताया गया है कि राजसमंद हत्याकांड के बाद राजसमंद और उदयपुर के कुछ व्हाट्सएप ग्रुपों में शंभुलाल की जय जयकार की गई है.
राजस्थान पुलिस का कहना है कि शंभूलाल का समर्थन करने वाले लोगों को चिन्हित किया जा रहा है और अगले एक-दो दिनों में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया जाएगा.
उदयपुर के पुलिस महानिरीक्षक आनंद श्रीवास्तव ने बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा से कहा, “जघन्य अपराध करने वाले शंभूलाल का समर्थन कुछ व्हास्टएस ग्रुपों में किया गया है. हम धार्मिक उन्माद भड़काने वालों की पहचान कर रहे हैं. अगले एक-दो दिनों में गिरफ़्तारियां की जाएंगी.” आनंद श्रीवास्तव स्वीकार करते हैं कि सोशल मीडिया की वजह से तनाव बढ़ रहा है और ऐसे वीडियो को वायरल होने से पहले रोकना मुश्किल होता जा रहा है.
वो कहते हैं, “हमारे पास जो क़ानूनी शक्तियां हैं उनके तहत हम वीडियो वायरल होने के बाद इसके पीछे जो लोग हैं, उन्हें गिरफ़्तार तो कर सकते हैं, लेकिन वीडियो को वायरल होने से नहीं रोक सकते.”
श्रीवास्तव कहते हैं, “उन्मादी सामग्री सबसे ज़्यादा फ़ेसबुक और व्हाट्सएप से शेयर की जाती है. इन माध्यमों को रोकने की क़ानूनी शक्ति अभी हमारे पास नहीं है. हम सिर्फ़ इंटरनेट ही बंद कर सकते हैं, लेकिन ये रास्ता भी बहुत प्रभावशाली नहीं है.”

हत्यारे को महिमामंडित कर रहे है कुछ विकृत मानसिकता के लोग सोशल मिडिया पर

वो कहते हैं, “इंटरनेट बंद करने का आम जनजीवन पर व्यापक असर पड़ता है. आज चिकित्सा के क्षेत्र में लगभग 60 फ़ीसदी काम इंटरनेट पर ही हो रहा है. जांच रिपोर्टें इंटरनेट पर तैयार होती हैं और ये मरीज़ों से तुरंत साझा की जाती हैं. बैंकिंग के साथ-साथ अन्य व्यवसाय भी इससे जुड़े हैं. ऐसे में इंटरनेट बंद करना भले कई बार ज़रूरी हो, लेकिन इससे बहुत असुविधा होती है.”
क्या पुलिस व्हाट्सएप ग्रुपों पर नज़र रखने की तैयारी कर रही है? श्रीवास्तव कहते हैं, “हम हर ज़िले में सोशल मीडिया पर नज़र रखने के लिए सेल बना रहे हैं. जब कोई चीज़ वायरल हो जाती है हम तब कार्रवाई करते हैं. लेकिन हमारी कोशिश है कि चीज़ों को वायरल होने से पहले ही रोका जाए.”
श्रीवास्तव कहते हैं, “हमारी पहली प्राथमिकता अभियुक्त को गिरफ़्तार करने की थी और हमने चौबीस घंटों के भीतर उसे गिरफ़्तार कर लिया. इससे लोगों का ग़ुस्सा और ज़्यादा नहीं भड़का. हालात बेहद नाज़ुक थे इसलिए हमने दोनों समुदायों के लोगों को भरोसे में लिया.”
घटना के बाद कई बंगाली प्रवासी वापस भी लौट गए हैं. श्रीवास्तव कहते हैं कि पुलिस ने प्रवासियों को सुरक्षा का भरोसा दिया है और उनके क्षेत्र में नई पुलिस पिकेट स्थापित की है.
व्हाट्सएप ग्रुपों में शंभूलाल रैगर का समर्थन करने वाले कथित हिंदुत्तवादी कार्यकर्ता भी हो सकते हैं. क्या पुलिस उन पर कार्रवाई करने में हिचकेगी? श्रीवास्तव कहते हैं, “हम अभियुक्तों का धर्म या विचारधारा नहीं देखते. जो भी माहौल ख़राब करने की या धार्मिक उन्माद भड़काने की कोशिश करेगा हम उसे गिरफ़्तार करेंगे.”
अगर पुलिस कार्रवाई में राजनेताओं ने दख़ल दिया तो पुलिस क्या करेगी इस पर श्रीवास्तव कहते हैं, “हमारी कार्रवाई में नेता दख़ल नहीं देते हैं. शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जो भी ज़रूरी है वो हम करेंगे. हमारी पहली प्राथमिकता माहौल शांतिपूर्ण बनाए रखने की है. जो भी लोग माहौल ख़राब करने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें गिरफ़्तार किया जाएगा.”
बीबीसी से बातचीत में राजस्थान के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने भी कहा था कि जो लोग क़ानून तोड़ेंगे उन पर पुलिस बिना भेदभाव के कार्रवाई करेगी.

नवजात का दर्द देख छात्रों ने जिला कलेक्ट्री पर किया प्रदर्शन – राहत हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द करने की मांग।

उदयपुर। उदयपुर के राहत हास्पीटल में नवजात के साथ हुए लापरवाही के मामलें में सोमवार को एक तरफ जहां सैंकडों युवाओं ने जिला कलेक्ट्री के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया वहीं दूसरी तरफ नौ दिन की बच्ची वेंटिलेटर पर अपनी अंतिम सांसों को गिनती रही। आक्रोषित युवा छात्रों ने राहत हॉस्पीटल का लाइसेंस रद्द कर नवजात के परिजनों को 50 लाख रूपयें का मुआवजा देने की मांग की है।
सोमवार को राहत अस्पताल की लापरवाही से मौत की साँसे गिन रही नवजात बच्ची के पक्ष में कई युवाओं के साथ – साथ सामाजिक संगठन भी आ गये और परिजनों को न्याय दिलाने की मांग कर जिला कलेक्ट्री पर जमकर प्रदर्शन किया। गुस्साए युवाओं ने जिला कलेक्ट्री के बाहर डाक्टरों के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। बाद में एक प्रतिनिधि मण्डल जिला कलेक्टर से मिला और साफ किया कि चिकित्सकों की घोर लापरवाही के बाद भी हजारों रूपये ऐंठ लिये गये थे वहीं नवजात कन्या के पैर में भी इन्फेक्शन होने से उसकी जिंदगी बर्बाद हो गई है। ऐसे में सभी ने मांग की है कि नवजात कन्या के परिजनों को पूर्ण रूप से उचित न्याय मिलना चाहिए।
गौरतलब है कि शनिवार को राहत हॉस्पीटल में नवजात कन्या के इलाज के दौरान चिकित्सकों की लापरवाही के चलते उसके पैर में इन्फेक्शन हो गया था और इसके बाद परिजनों ने जब हास्पीटल में हंगामा किया तो दोनो पक्षों की ओर से पुलिस में प्रकरण दर्ज करवाये गए। ऐसे में
इस पूरे मामले में सरकारी चिकित्सक लाखन पोसवाल की भुमिका भी संदिग्ध मानी जा रही हैं। हालाकि नामचीन पोसवाल ने राहत हास्पिटल में अपनी भागीदारी या किसी भी प्रकार का जुड़ाव होने से साफ मना कर दिया है, लेकिन उन तक पहुचने वाले हर बच्चे का परिजन यह जानता है कि वह दिन में ज्यादातर समय इसी हाॅस्पिटल में रहते है और सरकारी अस्पताल से भी कई पीड़ित बच्चों को यह पर ही रैफर किया जाता है। दूसरी ओर सबसे ज्यादा आष्चर्य की बात तो यह हैकि जब परिजनों ने लाखन पोसवाल की इसी अस्पताल में उपस्थिति का दावा किया तो अचानक ही हाॅस्पिटल में लगे हुए सीसीटीवी कैमरे खराब हो गए और पुलिस ने भी इस बात में संतुष्ठी जता दी। अभी जांच चल रही है राहत अस्पताल दोषी है या नहीं यह बात भी जांच के बाद ही पता चल पायी है।

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन से BCCI ने प्रतिबन्ध हटाया

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पोस्ट न्यूज़। राजस्थान में क्रिकेट के दीवानों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण हो सकती है की BCCI भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने सोमवार को हुई मीटिंग के बाद RCA ( राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन ) से तीन साल का प्रतिबन्ध हटा लिया गया है। राजस्थान में क्रिकेट में रूचि रखने वालों और खेलने वालों को फायदा हो सकता है। सोमवार को दिल्ली में आरसीए और बीसीसीआई की एक बैठक के बाद बैन हटाने का निर्णय लिया गया। सोमवार को दिल्ली में इस बैठक के बाद लिए गए फैसले की जानकारी बोर्ड के कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना ने दी। जबकि अब आरसीए पर बैन को लेकर बीसीसीआई को हाईकोर्ट को जवाब देना है, और इसी के साथ राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन पर लगा बैन हट जाएगा। और इसी के साथ साल के जाते-जाते राजस्थान क्रिकेट को दो बड़े फायदे भी मिल गए। पहला तो अब एक बार फिर आपीएल में राजस्थान रॉयल्स की टीम नजर आएगी। क्योंकि इस पर लगा बैन हट गया है। तो दूसरी बड़ी खबर कि आरसीए से बैन हटने के बाद बीसीसीआई द्वारा आयोजित होने वाले इंटरनेशल मैचों को भी हरी झंडी मिल सकती है।
गौरतलब है कि साल 2014 में एक मामले को लेकर बीसीआई और आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी के बीच विवाद काफी बढ़ गया था। जिसके बाद ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अपनी शर्त रखते हुए कहा था कि या तो आरसीए से ललित मोदी को हटाया जाए नहीं तो राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन बैन का सामना करने के लिए तैयार रहे। जिसके बाद इसी साल जून के महीने में बीसीसीआई ने ललित मोदी को भारत की क्रिकेट से पूरी तरह बाहर कर दिया। और ललित मोदी की अगुवाई वाली नागौर जिला क्रिकेट को बी निलंबित कर दिया था। पता हो कि प्रदेश में आरसीए के चुनाव और इस पद को लेकर काफी विवाद हुआ था, जिसमें ललित मोदी के कारण काफी विवाद भी हुआ था। तो वहीं आरसीए के अध्यक्ष पद की दावेदारी के लिए ललिच मोदी ने अपने बेटे को मैदान पर उतारा था। और खुद देश के बाहर से सारे घटना क्रम पर नियंत्रण बनाए हुए थे। लेकिन चुनाव का नतीजा उनके उलट आया और इस पद की जिम्मेदारी सी पी जोशी को मिली।

भाजपा को बैठे बिठाय लगा झटका कांग्रेस प्रत्याशी निर्विरोध हुआ निर्वाचित

पोस्ट न्यूज़। चुनावी सरगर्मियों के बिच एक तरफ तो भाजपा अपने सारे हथकंडे अपना रही है वही २०१८ के चुनावों को देखते हुए वसुंधरा सरकार अपने चौथे वर्ष के जश्न की तैयारी कर रही है वही सोमवार को चित्तौड़गढ़ जिले के बड़ी सादड़ी में भाजपा को बड़ा झटका लग गया जहाँ नगर पालिका अध्यक्ष कांग्रेस का प्रत्याशी बिना किसी विरोध के निर्विरोध निर्वाचित हो गया जब की भाजपा के ११ पार्षद होने के बावदूद कांग्रेस के दिलीप चौधरी निर्विरोध निर्वाचित हो गए। भाजपा में आपसी कहल की वजह से यह समभाव हो पाया।
बीस सदस्यीय बोर्ड में 11 सदस्यों के साथ बहुमत होने के बावजूद भाजपा ने नामांकन पत्र ही दाखिल नहीं किया। नामांकन पत्र की जांच में चौधरी का आवेदन पत्र सही पाया गया। दोपहर 2 बजे नाम वापसी का समय पूूरा होते ही चौधरी निर्वाचित घोषित हो गए।
भाजपा के चुनाव से दूर रहने के पीछे मुख्य वजह अन्दरूनी कलह को माना जा रहा है। चौधरी की जीत पर शुरू में भाजपा विधायक गौतम दक समर्थकों ने सोशल मीडिया पर उनके भाजपा में शामिल हो जाने की अफवाहे फैला दी एवं चौधरी व दक के साथ वाले पुराने फोटो भी डाल दिए। >इससे एक बार असमंजस की स्थिति बन गई,लेकिन चौधरी ने तुरन्त साफ किया कि ये फोटो किसी पुराने सामाजिक कार्यक्रम के है एवं कांग्रेस नहीं छोड़ी है। चौधरी की जीत चित्तौडग़ढ़ जिले में कांग्रेस का मनोबल बढ़ाने वाली है। वर्तमान में जिले की छह नगरपालिका/परिषद में से किसी भी कांग्रेस का मुखिया नहीं था। गौरतलब है कि 10 अक्टूबर को भाजपा से निर्वाचित अध्यक्ष पुष्करराज माली के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने से यहां उपचुनाव कराया गया। परिणाम घोषित होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल बन गया तो भाजपा कार्यकर्ताओं में निराशा छा गई।

महिला इन्सान है इतना भर मान लिया जाय- महिलाएं

उदयपुर |  मानवाधिकार दिवस के अवसर पर विकल्प हेल्प लाइन और सपोर्ट सेंटर के तत्वावधान में हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं के साथ संवाद का आयोजन किया गया | इसमें उदयपुर शहर, मावली और गोगुन्दा की 48 महिलाओं ने भाग लिया |

संवाद के दौरान महिलाओं ने बताया कि महिला इन्सान है इतना भर मान लिया जाय तो भी दुनिया में बहुत सारी परेशानियां, दुःख, मारपीट, प्रताड़नाएँ कम हो जाएगी | महिलाओं पर होने वाली हिंसा के कोई बहुत बड़े कारन नहीं होते | मामूली बातों पर मारपीट करना बहुत ही आम बात है | दुख कि बात तो यह है कि अपने समाज में इनको साधारण बात मानकर छोड़ दिया जाता है | यह हिंसाएँ ख़तम होने का नाम ही नहीं ले रही है |

खांजीपीर, मल्लातलाई और गोगुन्दा की महिलाओं ने तय किया अपने आसपास में महिलाओं पर होने वाले हिंसाओं पर मिलकर आवाज़ उठाएंगे | न मारपीट सहेंगे और न ही होने देंगे | और आपस में एक दूसरी महिला का सहारा बनेंगे |

सामाजिक कार्यकर्ता शशिप्रभा ने कहा कि विकल्प हेल्प लाइन और सपोर्ट सेंटर महिलाओं की मदद के लिए है | महिलाएं निसंकोच यहाँ आ सकती है फ़ोन कर सकती है | निशुल्क मदद ले सकती है | महिलाये किसी भी प्रकार के अत्याचार सहन नहीं करें |

संवाद में विकल्प संस्थान की कार्यक्रम निदेशक उषा चौधरी ने कहा कि महिलाओं और लड़कियों पर होने वाले अत्याचारों का असर पुरे समाज पर होता है | इसीलिए यह मामला केवल महिलाओं का ही नहीं है | इसको ख़तम करने और इसको रोकने की जिम्मेदारी सभी की है | हम सब मिलकर ही समाज में महिला-पुरुष के बीच की गैरबराबरी और लड़कियों- महिलाओं पर होने वाली हिंसा से मुक्त समाज बना सकेंगे | उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों का हनन मानवाधिकारों का हनन है |

हेल्पलाइन की काउंसलर अफरोज पठान ने महिलाओं से जुडी विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी | 

बूंदा बांदी के साथ सर्दी ने फिर से दिखाए अपने तेवर

उदयपुर। मौसम ने उस वक़्त पलटा खाया जब सभी गहरी नींद में सोये हुए थे। आसमान में बादल छाने के साथ ही करीब एक बजे शहर के अधिकतर हिस्सों में बूंदा बंदी शुरू हो गयी। सुबह होते होते तो एक बार फिर तापमान निचे आगया और तेज सर्दी का अहसास होने लग गया। गौरतलब है की कुछ दिन पूरब ओखी तूफ़ान के चलते मेवाड़ का मोसम खराब हुआ था और सर्दी ने अपना जोरदार असर दिखाया था। इसके बाद अचानक तापमान थोडा बढ़ गया और सर्दी का अहसास थोड़ा कम हो गया था। लेकिन बीती रात को अचानक हुए इस बदलाव से फिर एक बार सर्दी ने अपने तेवर दिखा दिए है। अचानक बदले इस मोसम से मोसमी बीमारियाँ होने का खतरा बढ़ गया है। सोमवार सुबह से सूरज के दर्श भर भी नहीं हुए है। बादलों की वजह से सर्दी और गलन का अहसास बढ़ गया है।

आतंकी हत्यारे “शम्भूलाल” का कुछ विकृत मानसिकता के लोग सोशल मिडिया पर महिमा मंडन कर रहे है और जिम्मेदार तमाशा देख रहे है।

उदयपुर। राजसमंद में श्रमिक अफ़राजुल के आतंकी हत्यारे का अब व्हाट्सअप ग्रुप और फेसबुक पर महिमा मंडन शुरू कर दिया गया है। यही नहीं इस आतंकवादी का महिमा मंडन करने वाले कई लोग ऐसे है जो अपने आपको समाज सेवक बताते है। कुछ पुलिस कर्मी है और कई ऐसे है जो विभिन्न संगठनों से जुड़े हुए है। इतना ही नहीं कई व्हाट्सअप ग्रुप ऐसे है जिसमे बीजेपी की उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेशवरी और सांसद हरिओम पंवार भी जुड़े हुए है। एक आतंकी हत्यारे के महिमा मंडान को लेकर भाजपा के बड़े नेता तो चुप्पी लगाए बैठे ही है पुलिस प्रशासन भी इस पर कोई कारवाई नहीं कर रहा। जबकि यह बिलकुल साफ़ दिख रहा है कि इस तरह के मेसेज और महिमा मंडान की पोस्ट से आपसी नफरत और साम्प्रदियिक माहोल बन रहा है।
ताज्जुब की बात यह है कि महिमा मंडन करने वाले आतंकी हत्यारे को मेवाड़ का हीरो और सच्चा सपूत तक बता रहे है। “स्वच्छ राजसमंद स्वच्छ भारत” नामक एक वाटसप ग्रूप में हत्यारे शंभूलाल रेगर का महिमामंडन किया गया है, इस ग्रूप में राजसमंद से भाजपा सांसद हरोइम सिंह राठौड़ और भाजपा विधायक किरण माहेश्वरी भी एड हैं। यह ग्रूप प्रेम माली नाम के एक भाजपा कार्यकर्ता द्वारा बनाया गया है। प्रम माली का दावा है कि भाजपा का बूथ लेवल का कार्यकर्ता है।

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इस ग्रूप में भेजे गये संदेश में साफ लिखा है कि “लव जिहादियों सावधान, जाग उठा है शंभू लाल, जय श्री राम।” एक दूसरे संदेश में लिखा है “शंभू का केस सुखदेव लड़ेगा और शंभू का न्याय दिलाएगा, वकील हो तो आप जैसा, जय मेवाड़, जय मावली। निशुल्क लड़ेंगे, वकील सुखदेव सिंह उज्जवल मावली।” हालाँकि वकील सुखदेव से इस बात की पुष्ठी नहीं हो पायी।
इसी तरह राजेश कुमार माली जो नरेंद्र मोदी विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष बताये जाते है और अपने आपको बड़ा समाज सेवक कहते है। जिन्होंने अपने फेसबुक के कवर पेज पर तो बेटी बचाओ और बेटियों के सम्मान का वाल पेपर लगा रखा है, लेकिन नरेंद्र मोदी विचार मंच के इस विचारक के विचार क्या है आपको बताते है यह अपने फेसबुक पर लिखते है ” किसी हिंदूवादी नेता की ओकात नहीं जो शम्भुनाथ के साथ खड़ा हो सब कहाँ मर गए अगर किसी ने भी अब हिंदुत्व की बात मेरी आईडी पर करि तो सबसे पहले वो मार खायेगा ,.. लाइक नहीं अपनी ओकात दिखाओ” उसके बाद उनके जैसी विचार धारा के कई लोगों ने आतंकी हत्यारे शम्भू लाल के जय जय कार के नारे लगाई। फेसबुक पर एसी विकृत मानसिकता के लोगों की कुछ पोस्ट है जिसमे उन्होंने आतंकी शम्भू लाल का महिमा मंडान किया है और उनकी इस पोस्ट को लैक करने वाले कुछ पुलिस कर्मी भी है जिसकी शिकायत कुछ जागरूक लोग पुलिस द्वारा बनाए गए शांति समिति के ग्रुप में भी कर चुके है।
अब बात करते है प्रशासन और पुलिस की। सबकुछ जानते हुए पुलिस ऐसे मेसेजों करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही। एक निर्मम आतंकी हत्यारे जिसको लेकर अधिकतर लोगों में रोष है उसका महिमा मंडन चंद लोग कर रहे है और एक तरह से हिन्दू मुस्लिम को फिर से आपस में लड़वाने की यह एक सोची समझी साजिश नज़र आरही है लेकिन पुलिस इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही।

सात दिनों तक मौत से लड़ रही बच्ची को “राहत” अस्पताल नहीं दिला सका “राहत” – परिजनों ने की तोड़फोड़, काबू पाने पुलिस को करना पड़ा बल का प्रयोग।

उदयपुर। शहर के मधुबन इलाके में स्थित राहत हॉस्पिटल में शनिवार को उस समय हंगामा हो गया जब एक नवजात बच्ची के परिजनों ने चिकित्साकर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में तोड़फोड़ के साथ वहां मौजूद कर्मचारियों से मारपीट भी कर डाली। बाद में आए पुलिस जाब्ते ने बड़ी मुष्किल से आक्रोषित परिजनों को डण्डे के जोर पर थाने ले गई, जहां दोनो ही पक्षों ने एक दूसरे पर मामले दर्ज करवाएं है।

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दरसअल शहर के कल्पना नर्सिंग हाॅस्पिटल में सात दिनों पूर्व एक अपरिपक्व बच्ची का जन्म हुआ था, लेकिन उसकी हालत नाजुक होने से हाॅस्पिटल ने बच्ची का इलाज राहत शिशु एवं बाल चिकित्सालय में भर्ती कराने की सलाह दी परिजनों ने भी सलाह मानते हुए बच्ची को तुरन्त राहत में भर्ती करवा दिया। सूत्र बताते हैं कि महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय नामचीन चिकित्सक लाखन पोसवाल का भी इस हाॅस्पिटल से खासा जुड़ाव है और वह अपनी सेवाएं अधिकतर इसी हाॅस्पिटल में देते है, इसलिए इस हाॅस्पिटल में इलाज महंगा पर सरकारी से अच्छा होता है। शनिवार को यहां पर इलाजरत बच्ची को डिस्चार्ज करके सरकारी हाॅस्पिटल में भर्ती करवाने की बात पर हंगामा खड़ा हो गया और परिजनों ने एक बार तो बच्ची को सरकारी अस्पताल में भर्ती करवा दिया लेकिन बाद में आकर भारी हंगामा करते हुए जिम्मेदार चिकित्सक को बाहर बुलाने की मांग करने लगे। इस बीच हाॅस्पिटल की शिकायत पर पुलिस के जवान भी मौके पर पंहुच गए और परिजनों से उलझ बैठे परिजन आरोप लगाते रहे कि अंतिम सांसे गिनती बच्ची की यह हालत इसी अस्पताल की लापरवाही की वजह से हुई है। इसी दौरान छात्रनेता मयूरध्वज सिंह और अन्य युवा भी परिजनों के समर्थन में पंहुच गए। पुलिस के जवानों ने सभी से दो दो हाथ करते हुए परिजनों को गाड़ी में बिठा ही लिया और बाद में थाने ले गई।
परिजनों ने बताया कि सात माह गर्भ में रहने वाली बच्ची की सांसे सात दिनों में ही खत्म होने के कगार पर है। इंफेक्षन के कारण बच्ची का एक पांव पूरी तरह से खत्म हो चुका है। जिसका ठीक होना अब नामुमकीन ही लग रहा है। दूसरी तरफ राहत हाॅस्पिटल के शेयरधारक डाक्टर अरविन्दर सिंह का कहना है कि बच्ची की हालत भर्ती होने से पहले ही काफी चिंताजनक थी, जो बात परिजनों को भी बता दी गई, हम बेहतर से बेहतर ईलाज कर सकते है, लेकिन भगवान नहीं है। परिजनों ने डिस्चार्ज फार्म ले लिया और बाद में फिर आने की धमकी देकर चले गए, जिनकों हमने गंभीरता से नहीं लिया क्योंकि ऐसी स्थिति में परिजन भी आवेषित होते हैं, कुछ देर बाद परिजन कई युवाओं के साथ आए और अस्पताल में तोड़फोड़ करते हुए स्टाॅफ के साथ मारपीट षुरू कर दी। जिसकी रिपोर्ट थाने में लिखवा दी गई है। वहीं हाथीपोल थानाधिकारी अशोक आंजना ने दोनो ही पक्षों द्वारा रिपोर्ट लिखाए जाने के बाद जांच शुरू कर दी है।

सिरफिरा आशिक़ प्रेमिका को बिच सड़क पर तब तक चाक़ू से गोदता रहा जब तक वो मर नहीं गयी

पोस्ट न्यूज़। राजस्थान के कोटा में एक सिरफिरे आशिक ने अपनी प्रेमिका को चाकुओं से गोद ह्त्या कर दी। अपनी प्रेमिका से सगाई टूटने से नाराज़ सिरफिरा आशिक़ गली में सड़क के बिच लड़की पर तब तक चाकुओं से वार करता रहा जब तक उसने डीएम नहीं तोड़ दिया।
कुछ महीनों पहले कोटा नेहरु नगर की रहने वाली शाहिनूर की सगाई वही के रहने वाले साबिर से हुई थी। साबिर के चाल चलन ठीक नहीं होने के कारण शाहिनूर के परिजनों ने यह सगाई तोड़ दी थी। सगाई टिटने के बाद से साबिर आये दिन शाहिनूर को परेशां करता रहता था। शाहिनूर 12वीं कक्षा की छात्रा थी। वह उर्दू की पढ़ाई करने के लिए ट्यूशन भी जाती थी। साबिर फ्रेब्रिकेशन का काम करता था। सगाई के बाद शादी की तैयारियों के बीच शाहीनूर के रिश्तेदारों से पता चला कि साबिर सही लड़का नहीं हैं। इस पर खोजबीन शुरू की तो पता चला कि साबिर नशेड़ी और बदमाश है। हालांकि, साबिर के खिलाफ थाने में कोई मुकदमा दर्ज नहीं था, लेकिन परिजनों ने कुछ ही समय पहले दोनों का रिश्ता तोड़ दिया।

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शाहिनूर की बहन जो ह्त्या के वक़्त उसके साथ थी उसने आँखों देखा हाल बताया कि
‘दोपहर करीब 2.30 से 3 बजे के बीच का समय था। मैं बड़ी बहन शाहीनूर के साथ उर्दू क्लास की ट्यूशन के लिए निकली थी। हम दोनों घर से करीब 200 मीटर दूर दूसरी गली में पहुंच चुके थे। इस गली में शाहीनूर की मौसी का मकान है, इसलिए हम अक्सर इसी गली से जाते-आते थे। हम दोनों जैसे ही गली में घुसे दीदी ने साबिर को देख लिया था। वो मुझसे बोली- थोड़ा तेज-तेज कदम बढ़ाओ, पीछे कोई आ रहा है। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो साबिर था। इसी बीच दीदी ने परिजनों को फोन लगाने के लिए मोबाइल हाथ में ले लिया था। शायद फोन लगा भी दिया था… मुझे पूरा पता नहीं है। हम दोनों तेज-तेज कदमों से मौसी के मकान तक पहुंचे ही थे कि साबिर भागता हुआ आया और दीदी को पीछे से गला दबाते हुए पकड़ लिया। मैं इतना घबरा गई थी कि मुझे कुछ नहीं सूझा। मैं चिल्लाना चाहती थी, लेकिन साबिर के हाथ में चाकू देखकर मैं डर गई और चिल्ला नहीं पाई। इसी दौरान साबिर ने चाकू से दीदी के सीने पर ताबड़तोड़ वार शुरू कर दिए। वो छटपटाते हुए बचने की कोशिश कर रही थी, लेकिन कुछ नहीं कर सकी क्योंकि साबिर ने उसे पूरी ताकत से पकड़ा हुआ था। चिल्लाने की आवाज सुनकर मौसी के घर की छत पर कोई आया था, लेकिन कौन था मुझे नहीं पता। शायद मौसी ही थी। घर ज्यादा दूर नहीं था और मुझे खुद को बचाना था इसलिए मैं घर पर परिजनों को बुलाने दौड़ी। मैं जब तक वापस आई दीदी सड़क पर खामोश पड़ी थी।” साबिर ने शाहीनूर को मारने की पहले से पूरी प्लानिंग कर रखी थी। वो चाकू कहां से लाया और गली में हत्या की प्लानिंग कैसे की, इसकी पुलिस जांच कर रही है।
– साबिर बोरखेड़ा में रहता है और हत्या करने के लिए बाइक से आया था। वारदात के बाद अपनी बाइक छोड़कर फरार हो गया।
– पुलिस ने मुखबिरों और टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन के आधार पर बदमाश को मुर्गीफार्म के पास से दबोच लिया। जहां से वो पकड़ा गया, उसके बाद चंबल नदी का एरिया शुरू हो जाता है। वो चंबल के इलाके में छुपना चाहता था।

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Forever in Bloom – Lotus Temple in Delhi…

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The Bahai or Lotus Temple in Delhi, completed in the year 1986, is a monumental structure shaped as the petals of the lotus flower. It was built by a renowned Canadian architect named Fariborz Sahba and took 10 years for planning the structure of the temple and implementing it.

The petals of the Lotus temple of Delhi are clad in white marble panels, and their structure has been reinforced with 300 tonnes of galvanized bars to avoid the risk of rust staining on the white concrete body. This also helped to maintain the pristine appearance of the monument and avoid cracking which is prevalent in Delhi because of the humid conditions of the city. Also, the reinforcement used in the white concrete shells, the binding wires and the connecting cables are entirely galvanized so as to prevent the long-term effects of rusting and to guarantee the life of the delicate shell structure of the petals.

 Lotus temple is one of the best pieces of art of olden times, that has stood the test of time till today. The monument remains one of the major attractions and a prominent landmark which has won numerous architectural awards. Hundreds of millions of devotees from across the world have already visited Lotus temple and the structure is made to see many more millions in the coming hundreds of years.

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Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc

Pavan Kaushik