थानेदार को कोर्ट की अवमानना करने पर खानी पड़ी जेल की हवा

उदयपुर। उदयपुर शहर के एक थाना अधिकारी को ही आज जेल की हवा खानी पड़ी चाहे थोड़ी देर के लिए ही सही लेकिन नाराज़ हुए जज ने कोर्ट ने अवमानना के जुर्म में हवालात में दाल दिया बाद में जमानत पर रिहा किया गया।
कानून सबके लिए एक है, चाहे वह कानून की पालना करवाने वाला हो या कोई आम आदमी। प्रदेश के दौसा जिले की एक कोर्ट ने गुरूवार को इस मिथ्या को भी गलत साबित कर दिया कि कानून अंधा होता है। शहर के धानमंडी थाने के सीआई राजेश शर्मा को पेशी पर नहीं जाने की वजह से सलाखों के पीछे जाना पड़ा। जानकारी के अनुसार प्रकरण के अनुसार 10 वर्ष पूर्व दोसा के कोलवा थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश शर्मा के विरूद्घ आईपीसी 166 के तहत एक मामला इस्तगासा से दर्ज हुआ था। उक्त प्रकरण में शर्मा को न्यायालय ने कई बार तलब किया लेकिन वे पेश नहीं हुए, बार बार तलब करने के बाद भी सीआई राजेश शर्मा  न्यायालय में पेश नहीं हुए। जब गुरूवार को राजेश शर्मा दौसा ग्राम न्यायालय पहुचे तो माननीय न्यायाधीष ने नाराजगी जाहिर करते हुए कोर्ट में उपस्थित नहीं होने की वजह पूछी और संतुष्ट पूर्ण जवाब नहीं मिलने पर अदालत में उपस्थित नहीं होने को अदालत की अवमाना माना और  उन्हें कोर्ट के आदेष की पालना नहीं करने के लिए कोर्ट परिसर में ही बने हवालात में भेजने का फैसला सूना दिया। हालाँकि थोड़ी देर बाद ही सीआई को जमानत मिल गयी उसके बाद उन्हें जेल से निकाला गया।

’सोहराबुद्दीन काण्ड के सी बी आई जज को सौ करोड रू.की रिश्वत की पेशकश की गई थी’

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पोस्ट। दिल्ली की अंग्रेजी मासिक पत्रिका ’’कैरवैन’’ के नवीनतम अंक में छपी एक रिपोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को कटघरे में खडा कर दिया है। यह रिपोर्ट एक सी.बी.आई जज की रहस्यमय मृत्यु के बारे में है जिसने गुजरात के, सन 2005 के सोहराबुद्दीन एन्काउण्टर हत्या के केस में सौ करोड रूपये की रिश्वत लेने से इंकार कर दिया था।
जज की मृत्यु के तीन वर्षों के बाद उनके परिवार ने अपनी चुप्पी तोडी है तथा, जज की मृत्यु के 29 दिनों के अंदर उनके स्थान पर आये जज द्वारा अमित शाह को क्लीन चिट देने पर प्रश्न चिन्ह लगाया है। परिवार के सदस्यों ने उन परिस्थितियों को लेकर कई चिंताएं उठाई हैं, जिनमें 48 वर्षीय जज मृत पाये गये थे। परिवार वालों का कहना है कि उनके सभी प्रश्नों को यह कहकर नजर अंदाज कर दिया गया था कि जज की मृत्यु ’’मैसिव कार्डिक अरेस्ट’’ के कारण हुई।
कथित रुप से बृजगोपाल हरकिशन लोया, जिनकी दिसम्बर 2004 में नागपुर जाते समय रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हुई, को शाह के पक्ष में निर्णय देने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहित शाह ने उत्त* रकम देने की पेशकश की थी। ज्ञातव्य है कि तत्कालीन नरेन्द्र मोदी सरकार में जूूनियर होम मिनिस्टर के रूप में शाह का नाम इस केस में मुख्य आरोपी के रूप में था।
कैरवैन मैगजीन ने अपनी रिपोर्ट में स्वर्गीय न्यायाधीश की बहन अनुराधा बियानी के हवाले से कहा है कि कैसे तत्कालीन चीफ जस्टिस ’’उन्हें (मृत जज) सिविल ड्रैस में देर रात को मुलाकात के लिए बुलाते थे तथा उनके ऊपर जल्दी से जल्दी तथा सकाकारात्मक निर्णय देने के लिए दबाव डालते थे।’’ अनुराधा बियानी ने आरोप लगाया है कि ’’मेरे भाई को अनुकूल निर्णय देने के एवज में सौ करोड रूपये देने की पेशकश की गई थी; स्वयं चीफ जस्टिस मोहित शाह ने यह प्रस्ताव दिया था।’’
इस खुलासे से उत्साहित कांग्रेस ने समस्त मामलों की जांच की मांग की है। बुधवार को यहां पार्टी प्रवत्त*ा अभिषेक मनु सिंघवी ने ए.आई.सी.सी.की प्रैस ब्रीफिंग में कहा कि सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में केस की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए तथा तत्कालीन हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के विरुद्घ लगाये गये आरोपों की जांच होनी चाहिए तथा मृत न्यायाधीश के पुत्र द्वारा लगाये गये इस आरोप की भी जांच की जानी चाहिए कि, चीफ जस्टिस शाह ने उनके पिता की रहस्यमय मृत्यु की जांच के लिए आयोग गठित करने से इंकार कर दिया था।
गुजरात के कई कांग्रेस नेता, जिनमें पार्टी के प्रवत्त*ा शत्ति* सिंह गोहिल भी शामिल हैं, तुरत-फुरत-ट्विटर पर सक्रिय हो गये तथा कयास लगाने लगे कि क्या लोया की हत्या में अमित शाह का हाथ था।
पत्रकार निरंजन टाकले, जिन्होंने कैरवैन में छपी रिपोर्ट का संकलन किया है, का कहना है कि जज लोया के पिता हरकिशन ने भी उन्हें बताया कि उनके पुत्र ने उन्हें बताया था कि उन्हें मुंबई में एक घर तथा धन के बदले में अनुकूल निर्णय देने के प्रस्ताव दिये गये थे। लोया के परिवार के सदस्यों ने न्यायाधीश की मृत्यु के बताये गये विवरण तथा मृत्यु के बाद जो कार्यवाही की गयी उसमें असंगतियों का खुलासा किया तथा जज की मृत देह की हालत के बारे में बताया। मृत्यु की घटना पर जांच आयोग गठित करने की परिवार वालों के अनुरोध पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
लोया की मृत्यु के कुछ समय बाद ही, एक नये जज, एम.बी.गोसावी को केस सौंपा गया। गोसावी ने 17, दिसंबर 2014 को निर्णय सुरक्षित रखने से पूर्व तीन दिन संबंधित पाॢटयों की दलीलों को सुना। उसके बाद 30 दिसंबर को निर्णय सुनाया जिसमें अमित शाह को दोषमुत्त* करार दिया गया।
इस निर्णय पर, फिर बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की गई, जिसने अपील को खारिज कर दिया।
गत वर्ष सुप्रीम कोर्ट में अमित शाह को दोष मुत्त* किये जाने को चुनौती देने वाली याचिका की भी यही नियति हुई।
जिस तरीके से सुनवाई की गई, उस पर भी प्रश्न उठाया गया है। केस की सुनवाई तीन अलग न्यायाधीशों ने की, जो कि अपने आप में सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की सीधी अवहेलना थी कि केस गुजरात के बाहर स्थानान्तरित किया जाए व शुरु से आखिर तक एक ही जज केस की सुनवाई करे। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश सी बी आई की याचिका पर दिया था।
सितम्बर, 2012 में जस्टिस आफताब आलम एवं रंजना प्रकाश देसाई ने बॉम्बे हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति को, शुरु से अंत तक एक ही जज द्वारा केस की सुनवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।
इसके बाद भी, मोदी के प्रधानमंत्री बनने के एक महीने के अंदर ही, 25 जून, 2014 को पहले न्यायाधीश का स्थानान्तरण हो गया। उस जज की गलती यह थी कि उसने, एक बार भी न्यायालय में उपस्थित नहीं होने के लिए अमित शाह को फटकार लगाई थी।
जज बी एच लोया, जिन्होंने उस वर्ष अक्टूबर में केस का चार्ज लिया, ने शाह को व्यत्ति*गत रूप से उपस्थित होने की छूट दी थी, लेकिन ’’केवल आरोप फ्रेम किये जाने तक।’’ उन्होंने इस बात पर अप्रसन्नता जताई कि मुंबई में उपस्थित होने के बाद भी शाह तारीख पर कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। सुनवाई की अगली तारीख 15, दिसंबर की तय की गई, लेकिन 1 दिसंबर को जज लोया की मृत्यु हो गई।
परिवार को सारे संदेह इसलिए हैं क्योंकि लोया स्वस्थ थे, रोज दो घंटे तक टेबल टेनिस खेलते थे और ह्रदय रोग का कोई आनुवांशिक इतिहास भी नहीं था। उनके माता पिता उम्र के आठवें दशक हैं और जीवित हैं तथा सक्रिय भी।
जज लोया 29 नवम्बर 2014 को अपने एक सहकर्मी की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए नागपुर गये थे। 30 नवम्बर को रात 11 बजे उन्होंने 40 मिनट तक पत्नी से बात की थी वे काफी खुश लग रहे थे कहा जाता है कि उन्हें 12.30 बजे कार्डिक अरैस्ट हुआ और उनकी मृत्यु हो गयी।
उनकी मृत्यु काफी संदिग्ध थी, और इन कारणों के आधार पर उनकी मृत्यु की जांच की जानी चाहिए थी।
-दो साथी जज जो उनके साथ नागपुर गये थे और जिनके आग्रह पर लोया शादी में शामिल होने नागपुर गये थे वे उनकी मृत्यु के डेढ माह बाद भी उनके परिवार से नहीं मिले। ना ही ये दोनों जज उनके शव के साथ उनके लाटूर स्थित खानदानी घर पहुंचे।
-उन्हें एक मामूली से दांडे हॉस्पिटल क्यों ले जाया गया?
-दोनों जजों ने कहा कि लोया खुद हॉस्पिटल की सीडियां चढकर गये थे वहां उन्हें कुछ दवाइयां दी गयी। इसके बाद उन्हें दूसरे निजी अस्पताल मैडिट्रीमा अस्पताल ले जाया गया वहां उन्हें ’’मृत लाया’’ घोषित कर दिया गया।
-पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हर पेज पर उनके चचेरे भाई के रूप में किसने साइन किये। लोया के मोबाइल से उनके परिवार को संघ कार्यकर्ता ईश्वर बाहेतीन ने क्यों सूचना दी, नागपुर पुलिस या दोनों जजों ने क्यों नहीं।
-लोया के मोबाइल से कॉल रिकॉर्ड व टैक्स्ट मैसेज किसने डिलीट किये थे?
-परिजनों को दोबारा पोस्टमार्टम नहीं करवाने के लिए क्यों मनाया गया?
वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यन्त दवे कहते हैं, उन्होंने तत्कालीन सीजेआई एच एल दत्तू को लिखे एक पत्र में मोहित शाह को सुप्रीम कोर्ट के जज के पद पर पदोन्नति नहीं देने की अपील की थी। उन्होंने लिखा था कि विद्वान ट्रायल जज को बार-बार किसी ना किसी बहाने से बदला गया वो भी माननीय कोर्ट की मंजूरी लिए बिना.., मैं उस अदालती आदेश की बात नहीं कर रहा हूं जो अमित शाह के पक्ष में दिया गया है बल्कि बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस माोहित शाह की कारगुजारियों के बारे में बात कर रहा हूं।
’’इस स्तर पर उनके केस पर किसी भी पुनॢवचार से नागरिकों के जेहन में गंभीर व उचित संदेह जन्म लेंगे। हो सकता है सरकार उन्हें पुरस्कार स्वरूप किसी राज्य का राज्यपाल बना दे लेकिन कालेजियम द्वारा ऐसा करना बिल्कुल अलग बात होगी। मैं ससम्मान आग्रह करता हू कि न्यायपालिका के वृहद हितों के लिए ऐसा ना किया जाए।’’
जस्टिस शाह को 2005 में गुजरात हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया था 1991 में उन्हें स्थायी जज बनाया गया उसके बाद 2009 में उन्हें प्रमोशन देकर कोलकाता हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बना दिया गया इसके एक साल बाद उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बना दिया गया। 9 सितंबर 2015 को वे रिटायर हो गये।

खबर अंग्रेजी मासिक पत्रिका ’’कैरवैन’’ में छपी रिपोर्ट और राष्ट्रदूत में इस रिपोर्ट की खबर की हिंदी अनुवाद में छपी होने के आधार पर है .

प्रौढ़ शिक्षाविद गोवर्धन सिंह राव का देहावसान

POST. वयोवृद्ध प्रौढ़ शिक्षाविद श्री गोवर्धन सिंह राव का मंगलवार सुबह 8.बजकर 15 मिनट पर देहावसान हो गया। वे 98 वें वर्ष के थे। वे अपने पीछे दो पुत्र , तीन पुत्रियों का भरापूरा परिवार शोकाकुल छोड़ गए है । श्री राव का अंतिम संस्कार मंगलावार दोपहर बेदला स्थित श्मशान घाट में पत्रकारों, राजनेताओं और प्रबुद्धजनों की उपस्थिति में किया गया।
श्री राव ने आजादी से पहले बम्बोरा गांव में महाराणा मेवाड़ राजपूत स्कूल शुरू करके शिक्षा क्षेत्र में कार्य शुरू किया, लेकिन बाद में पंडित जनार्दन राय नागर के साथ राजस्थान विद्यापीठ से जुड़कर अपनी धर्म पत्नी स्वर्गीय राजकुमारी के साथ प्रौढ़ शिक्षा का कार्य शुरू किया , जो सेवानिवृति के बाद भी जारी रखा। वे राजस्थान विद्यापीठ के एकमात्र वयोवृद्ध जीवन सदस्य थे । श्री राव को मेवल क्षेत्र के जगत गांव का प्राचीन मन्दिर उत्खनन करके प्रकट करने का श्रेय जाता है। यह कार्य 1952 में नवभारत स्कूल के बच्चों का शिविर आयोजित करवा कर किया गया । श्री राव ने 1962 में स्वतंत्र पार्टी के समर्थन से सलूम्बर सीट पर विधायक का चुनाव भी लड़ा । वे लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी में अन्य पिछड़ा वर्ग के जिला उपाध्यक्ष पद पर सक्रिय रहे । मेवल और छप्पन क्षेत्र के कई गांवों में विद्यालय खोलकर शिक्षा की मशाल जलाने के लिए सदैव उन्हें याद किया जाता रहेगा । वे महिलाओं को भी सामाजिक क्षेत्र में आगे लाने के हिमायती थे । इसी वजह से उनकी पत्नी स्वर्गीय राजकुमारी राव को मेवाड़ में पर्दाप्रथा त्यागकर समाज कार्य के लिए आगे आने वाली प्रथम महिला होने का गौरव हासिल है । इसी वजह से उन्हें पूर्व केंद्रीय मंत्री गोविंद वल्लभ पंत के हाथों समाज सेवा विद की उपाधि प्राप्त हुई थी । श्री राव के बड़े पुत्र उग्रेसन राव प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार तथा छोटे पुत्र राव अजातशत्रु राष्ट्रीयस्तर के कवि है ।

ZINC for a Healthy Heart…’

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Pavan Kaushik – Head of Cor. Com. HZL

Researchers from the University of Leicester discovered that Zinc plays a key role in regulating the way Calcium moves in the heart cells. Zinc is present in heart muscle and interacts with Calcium to affect heart function.

Zinc is the most common mineral in human body beside Iron. Zinc is actually found in every cell. Past research have shown patients with congestive heart failure often have profound Zinc deficiency. Zinc has potent antioxidant properties which help to neutralize

Pavan Kaushik

free radicals that may accelerate aging & contribute to the development of chronic diseases like cancer and heart disease. In addition to essential metabolic functions, the level of Zinc in the body also affects the heart muscle. When oxidative stress occurs, it may be due to a shortage of Zinc, which can be determined by examining the heart muscle. Studies by the Technical University of Munich (TUM) show the relationship between the total amount of Zinc in the body and cardiac function. Zinc deficiency initially appears as symptoms on the skin, hair and fingernails, although it can progress to include reduced immune response and organ failure, including the heart. Heart palpitations have numerous causes, including many benign ones, but they may indicate early signs of heart failure.

Zinc appears to have protective effects in coronary artery disease and cardiomyopathy. In such states, replenishing with Zinc has been shown to improve cardiac function and prevent further damage.

And we thought Zinc is used only for galvanizing..Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading integrated Zinc-Lead-Silver producer.

Another example of usage of ZINC… We all have Zinc in our lives…

मरीजों के साथ खिलवाड़ – ब्लैक लिस्टेड कंपनी प्रदेश में कर रही दवा की सप्लाई

पोस्ट न्यूज़ राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए दवा खरीद का ठेका एक एेसी फर्म को दे दिया, जिसकी दवा की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए हरियाणा मेडिकल सर्विसेज काॅर्पोरेशन लि. ने उसे डेबार कर दिया था। इसकी सूचना राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन को भी दी गई थी। ताज्जुब है कि हरियाणा मेडिकल सर्विसेज ने 13 सितंबर को इस फर्म की खराब दवा और डेबार की सूचना दे दी थी, इसी के ठीक एक सप्ताह बाद 19 सितंबर को आरएमएससी ने उसी फर्म को दवा सप्लाई के ऑर्डर जारी कर दिए।
हरियाणा में तीन साल के लिए डेबार गुजरात की सेन्च्यूरियन लेबोरेट्री ने राजस्थान में थैलेसीमिया मरीजों की डेफ्रासिरोक्स (500 मिलीग्राम) की 30 लाख रु. कीमत की 1 लाख 80 हजार टेबलेट सप्लाई भी कर दी है। यह दवा निशुल्क दवा योजना में शामिल है। यह टेबलेट खून चढ़ाते समय जमा आयरन को बाहर निकालने के लिए इस्तेमाल की जाती है। हरियाणा में यह दवा कंपनी बिना लाइसेंस और फर्जी दस्तावेज पर दवा सप्लाई करते पाई गई थी। दवा भी मानकों पर खरी नहीं उतरी थी। अब सवाल उठता है कि हरियाणा में फर्जी घोषित दवा कंपनी के राजस्थान में दस्तावेज जांचे भी गए कि नहीं? हरियाणा में कंपनी की परफार्मेंस की स्टडी की गई की नहीं? जो दवा सप्लाई हुई, उसकी मानक जांच सिंतबर के बाद हुई कि नहीं? हालांकि यही कंपनी राजस्थान में 2016 से ही थैलेसीमिया सहित 56 दवाओं की सप्लाई दे रही है।
प्रदेश में 2 हजार, अकेले जयपुर में 500 मरीज
राजस्थानथैलेसीमिया चिल्ड्रन सोसायटी के अध्यक्ष नरेश भाटिया का कहना है कि राज्य में थैलेसीमिया के 2 हजार से ज्यादा मरीज है।

फर्जी हथियार लाइसेंस मामले में जम्मू कश्मीर से 150 लोगों के लाइसेंस की फाइल ही गायब

उदयपुर . फर्जी हथियारों के लाइसेंस बनवाने और अवैध हथियार रखने के मामले में एटीस ने चोकाने वाला खुलासा किया. प्रदेश में जिन 150 लोगों के फर्जी लाइसेंस जम्मूकश्मीर से बनवाये गए थे उनकी फ़ाइल जम्मूकश्मीर से ही गायब हो गयी .

एटीस की जांच में जांच में 150 फाइलें गायब होने की बात सामने आई है। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा से 18 लोगों ने सैनिकों के नाम से हथियार लाइसेंस लिए थे, उन लोगों की फाइलें गायब हो गईं। जबकि संबंधित लाेगों के हथियार लाइसेंस कलेक्टर एसएसपी की सहमति के बाद रजिस्टर्ड हो रखे हैं। 9 सुरक्षा एजेंसियों के नाम से लाइसेंस बने हैं। हाल ही में एटीएस के एसपी विकास कुमार के नेतृत्व में एक टीम 10 नवंबर को जम्मू-कश्मीर गई थी।
जिनकेनाम लाइसेंस उनमें से 30% सेना में ही नहीं : एटीएसने जम्मू-कश्मीर से सेना के जवानों के नाम पर बने 5 हजार हथियार लाइसेंस का रिकॉर्ड लिया था। एटीएस ने दिल्ली सेना मुख्यालय से भी जवानों की जानकारी मांगी थी। सेना ने 200 जवानों की जानकारी दी है। इससे पता चला है कि 30 फीसदी हथियार लाइसेंस जिन लोगाें ने लिए है, वे सेना में नहीं है।
रिकॉर्डगायब, कई अफसर भी संदेह के घेरे में
^8दिन तक दिल्ली जम्मू-कश्मीर में टीम रही। जिन लोगों ने जम्मू से हथियार लाइसेंस बनाए थे, बड़ी संख्या में उनका रिकॉर्ड गायब था। अफसरों कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। -विकास कुमार, एसपी, एटीएस

दो लाख की रिश्वत लेते भ्रष्टाचारी अधिकारी को एसीबी ने किया गिरफ्तार

उदयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो टीम ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए जल ग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग (वाटर शेड) के एईएन विपिन कुमार और जेईएन गोपाल पटेल को 2 लाख 4 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। यह रिश्वत आरोपी अधिकारी पीड़ित ठेकेदार से ४० लाख का बिल पास करने के लिए कमीशन के रूप में मांग रहे थे।
एईएन और जेईएन पीड़ित ठेकेदार रतन सिंह चूंडावत ने बिल के 20 प्रतिशत के अनुसार 8 लाख 4 हजार रुपए राशि कमीशन के तौर पर रिश्वत में मांगी थी। इसमें से 6 लाख रुपए एईएन-जेईएन पीड़ित से ले चुके थे।
जानकारी के अनुसार 2लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए वाटर शेड विभाग के जेईएन-एईएन कमीशन के नाम पर ठेकेदारों से रिश्वत लेने के लिए उनसे हस्ताक्षरशुदा चेक पहले ही एडवांस में ले लेते थे, ताकि बाद में ठेकेदार इनकार नहीं कर दे। एडिशनल एसपी डॉ. राजेश भारद्वाज ने बताया कि भूपालपुरा निवासी एईएन विपिन बापना पुत्र शिवकुमार को 2 लाख 4 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए उसके घर से और जेईएन गोपाल पुत्र रामलाल पटेल के कब्जे से पीड़ित का 7 लाख रुपए का चेक जब्त कर मनवाखेड़ा स्थित घर से गिरफ्तार किया है। विभाग ने बड़गांव पंचायत समिति के कठार गांव में ट्रेंच और कच्चे चेकडेम सहित अन्य कार्य के 1 करोड़ रुपए के टेंडर किए थे। यह ठेका दशरथ सिंह शक्तावत के नाम पर हुआ था, इसके प्रतिनिधि झालों का गुड़ा निवासी रतन सिंह चूंडावत ने ठेके का काम करवाया। रतन सिंह 80 लाख रुपए के काम करवा चुका था। अभी उसका 40 लाख रुपए का बिल पास होना था। यह बिल पास करने की एवज में एईएन और जेईएन कुल राशि के 20 प्रतिशत के अनुसार 8 लाख 4 हजार रुपए की रिश्वत राशि मांग रहे थे। बिल पास करवाने के लिए एईएन और जेईएन को परिवादी रतन सिंह अलग-अलग समय में 6 लाख रुपए दे चुका था। एईएन और जेईएन ने 40 लाख रुपए का बिल पास करते समय परिवादी का हस्ताक्षर किया हुआ 7 लाख रुपए का एडवांस चेक पहले ही ले लिया था, ताकि बची हुई रिश्वत राशि 2 लाख 4 हजार रुपए परिवादी देने से इनकार नहीं कर दे। पीड़ित को एईएन-जेईएन ने धमकी दी थी कि रिश्वत की बची राशि नहीं दी तो वे इस चेक का दुरुपयोग करेंगे और ठेके का नो-ड्यूज और पूरा हिसाब नहीं करेंगे। काफी परेशान होने के बाद रतन सिंह ने एसीबी ऑफिस शिकायत की।
निरीक्षक हनुवंत सिंह ने बताया कि जेईएन गोपाल पटेल की 2015 में ही विभाग में भर्ती हुई है। वि नवंबर 2015 से प्रोबेशन पीरियड में वाटर शेड के प्रतापनगर स्थित कार्यालय में काम कर रहा था। प्रोबेशन पीरियड में ही रिश्वत लेनी शुरू कर दी थी। इसी महीने 6 नवंबर को उसका प्रोबेशन पूरा हुआ था। वहीं एईएन विपिन कुमार बापना 1997 में विभाग में जेईएन पद पर भर्ती हुए थे, 2013 में पदोन्नत होकर एईएन बने और तब से यहीं पर कार्यरत थे।
सत्यापन में एईएन और जेईएन के रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इस पर सोमवार को एसीबी निरीक्षक हरीश चन्द्र सिंह और हनुवंत सिंह के नेतृत्व में टीम ने ट्रेप का जाल बिछाया। एईएन ने रिश्वत लेने के लिए परिवादी रतन सिंह को अपने घर ही बुला लिया। एसीबी टीम ने एईएन विपिन कुमार को 2 लाख 4 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। इसके बाद एसीबी टीम ने जेईएन गोपाल को उसके मनवाखेड़ा स्थित घर पर दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया।

सावधान चोरी की रिपोर्ट दर्ज करवानी है तो चोर भी खुद को पकड़ना पड़ेगा – और बाद में जेल भी खुद को जाना पड़ेगा।

उदयपुर। क्या हो गया है शहर की पुलिस को, शहर के आला पुलिस के अधिकारी की पकड़ शहर पर काम होती जा रही है। एक चोरी की एफआईआर दर्ज करवाने के लिए लोगों को थाने के कई चक्कर लगाने पड़ते है। यही नहीं कई बार तो आइओ को कार्रवाई करने के लिए जेब भी गरम करनी पड़ती है। मोटरसाइकिल चोरी हुई पुलिस ने चार दिन तक रिपोर्ट दर्ज नहीं कि, जब परिवादी खुद मोटरसाइकिल चोर को पकड़ के लाया और थाने में सूचना दी तो उसको ही अपहरण के केस में जेल में दाल दिया।
खुद काम करेगें नहीं और अगर कोई खुद काम करेगा तो उसको भी नहीं मानेगें और उसको ही सजा देने बैठ जायेगें। आखिर पुलिस चाहती क्या है।
पिछले दिनों भी पुष्प वाटिका में शादी समारोह के दौरान पांच लाख के आभूषण चोरी हो गए। तुरंत अम्बामाता थाने में सूचना दी तो ड्यूटी पर तैनात पुलिस karmiyon ने ना to एफआईआर लिखी ना ही तुरंत मोके पर आकर जांच की। यही नहीं अगले दिन आइओ ने पीड़ित पक्ष को बुला कर खर्चे पानी की मांग और कर ली। uस चोरी की रिपोर्ट तीन दिन बाद दर्ज की गयी जिसकी कारवाई पूछताछ के अलावा कुछ नहीं हुई।
और अब एक ये मामला जिसमे एक युवक की गोवर्धनविलास थाने में बाइक चोरी की रिपोर्ट कराने वाले बाइक मालिक के दोस्तों ने जिस चोरी के आरोपी को दबोचा, उस आरोपी के दोस्तों की अपहरण की अन्य रिपोर्ट पर अंबामाता थाना पुलिस ने बाइक मालिक सहित पांच दोस्तों को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया। लेकिन बाइक चोरी का आरोपी एक माह तक आजाद घूमता रहा। बाद में जब जेल से छूटकर आए युवकों ने कोर्ट में इस्तगासा पेश कर रिपोर्ट दर्ज कराई तो उसके भी एक महीने बाद बाइक चोरी के असली आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
यह मामला उपरोक्त दोनों थानों के बीच में हुआ है, जिसमें बाइक मालिक सहित उसके दोस्तों को जेल में 10 दिन बिताने पड़े।

मामला यह है कि 22 सितम्बर को बाइक मालिक आवेश पुत्र अली मोहम्मद, इसके दोस्त मुस्तफा पुत्र खुर्शीद अहमद, इमरान हुसैन पुत्र अनवर हुसैन और गुलाम मोइनुद्दीन पुत्र हकीम मोहम्मद सहित अन्य युवक अहमदाबाद हाइवे स्थित काठियावाड़ी होटल गए। वहां उनकी बाइक चोरी हो गई। उस रात आवेश अपने दोस्तों के संग गोवर्धन विलास थाने आया और बाइक चोरी की सूचना दी। पुलिस ने उस समय बाइक चोरी की सूचना वायरलेस पर प्रसारित करवा दी। लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इसके बाद 23 सितम्बर को आवेश फिर थाने गया लेकिन रिपोर्ट नहीं लिखी गई। 24 सितम्बर को पुलिस ने रोजनामचा दर्ज किया पर रिपोर्ट तब भी नहीं लिखी। युवकों ने सीसी टीवी फुटेज निकाले, जिसमें चोरी के आरोपी युवकों की पहचान हुई। इसके बाद 26 सितम्बर को सीसी टीवी फुटेज के आधार पर आरआर डेंटल कॉलेज में पढ़ने वाले कृष्णा नामक युवक को शास्त्री सर्कल पर बाइक मालिक ने ही पकड़ लिया। उससे बाइक के बारे में पूछा तो उसने मल्लातलाई चलने के लिए कहा। मल्लातलाई पहुंचे तो वहां चोरी के अन्य आरोपी रणधीर और सुमित भी गए। फिर वे सभी चकमा देकर भाग गए। इसकी सूचना बाइक मालिक और उसके दोस्तों ने गोवर्धनविलास थाना पुलिस को दी। तब भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
कमाल की बात यह है कि इस मामले में पुलिस इन्वेस्टिगेशन कही भी नहीं दिख रहा। अगर पुलिस तत्परता दिखाती तो शायद मामला जिस दिन बाइक चोरी गयी उसी दिन सारा मामला निपट जाता और बाइक चोरी का आरोपी पकड़ में होता लेकिन यहाँ तो खुद पुलिस ने परिवादी को ही अपहरण के केस में जेल में डाल दिया।

राजस्थान, मध्यप्रदेश और पंजाब में पद्मावती पर लगी रोक

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उदयपुर . राजस्थान में पद्मावती फिल्म के लिए फिलहाल रोक लगा दी गयी है साथ ही पंजाब और मध्यप्रदेश में भी पद्मावती फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गयी है .

राजस्थान की मुख्य मंत्री वसुंधरा राजे ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति इरानी को लेटर लिख कर फिल्म में विवादों पर बदलाव करने के सुझाव दिए थे . इसके बाद जब तक बदलाव नहीं हो जाते तब तक राज्य में पद्मावती के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गयी है .  राज्य सरकार ने पत्र में सुझाव दिया था कि उक्त फिल्म और उसके कथानक पर प्रसिद्ध इतिहासकारों, फिल्मी हस्तियों और समाज के प्रतिनिधियों की एक समिति से समीक्षा सुनिश्चित कराई जाए। इससे पूर्व सीमा सुरक्षा को लेकर बुलाई बैठक में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने फिल्म पर बैन को लेकर पुलिस अधिकारियों से चर्चा की। इसमें डीजी अजीत सिंह, एडीजी (इंटेलीजेंस) यूआर साहू व गृह विभाग के अधिकारी मौजूद थे। इसमें पहले सीमा सुरक्षा और पाक हिंदू विस्थापितों के मुद्दे पर चर्चा हुुई। इसके बाद एडीजी साहू ने फिल्म को लेकर उपजे तनाव पर रिपोर्ट दी। इसमें बताया कि फिल्म रिलीज होने पर कई जगह तनाव हो सकता है।

पद्मावती फिल्म के विरोध में जयपुर के एसीजेएम कोर्ट 16 में सोमवार को परिवाद पेश किया गया है। परिवाद में बताया है कि फिल्म में इतिहास से छेडछाड और रानी पद्मनी का अपमान किया गया है। इस संबंध में परिवादी भवानी शंकर शर्मा ने एसीजेएम कोर्ट 16 में परिवाद पेश किया है। परिवादी के वकील फरीद खान ने बताया कि फिल्म निर्माण के दौरान निर्देशक संजय बंसाली ने इतिहास को गलत तरीके से पेश किया है। जिससे राजपूत समाज में काफी रोष है। पूरे प्रदेश में फिल्म के प्रति विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। कोर्ट ने परिवाद पर 22 नवंबर को सुनवाई करेगी।

मध्यप्रदेश की राजधानी में सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया है कि मध्यप्रदेश में पद्मावती फिल्म पर प्रतिबंध रहेगा। राजपूत समाज के लोगों से मिलने के बाद यह बड़ा ऐलान कर दिया है।

राजधानी भोपाल में आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हम लोग बचपन से पद्मावती के बारे में पढ़ते आ रहे हैं। इससे पहले राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के कई जिलों में रानी पद्मावती पर आने फिल्म पर विवाद चल रहा था। मध्यप्रदेश सरकार ने देश में सबसे पहले यह कदम उठाते हुए फिल्म पर बैन लगा दिया है। इस फैसले से करणी सेना ने खुशी जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का आभार व्यक्त किया है।

उदयपुर के फोटो जर्नलिस्ट ताराचंद गवारिया को मिला अन्तर्राष्ट्रीय गौरव

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दुनिया के सर्वश्रेष्ठ 72 फोटोग्राफर्स में गवारिया का हुआ चयन
उदयपुर. पर्यटन स्थलों में दुनियाभर में चर्चित लेकसिटी उदयपुर ने इस बार फोटोग्राफी की दुनिया में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मुकाम हासिल कर न सिर्फ राजस्थान अपितु देश को गौरवान्वित किया है। इस गौरव को प्रदान करने के माध्यम बने हैं उदयपुर के प्रतिभावान युवा फोटो जर्नलिस्ट ताराचंद गवारिया जिन्होंने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ 72 फोटोग्राफर्स में अपना स्थान बनाया है। 
प्राप्त जानकारी के अनुसार इटली की अन्तर्राष्ट्रीय फोटो मैगजीन इंटरफोटो के वर्ष 2017 के संस्करण में दुनिया के 72 सर्वश्रेष्ठ फोटोग्राफर्स की सूची में उदयपुर के युवा फोटोजर्नलिस्ट ताराचंद गवारिया को सम्मिलित करते हुए उनके एक फोटोग्राफ को स्थान दिया गया है। मैगजीन में भारत के सिर्फ दो फोटोग्राफर्स को यह सम्मान दिया गया है जिसमें ताराचंद एक हैं। इंटरफोटो मैगजीन ने विश्व के सर्वश्रेष्ठ फोटोग्राफों का चयन इंटरनेट पर सर्वाधिक चर्चित और लाईक्स के आधार पर किया है जिसमें ताराचंद के कैमेरे में झांकते बंदर के फोटो को सर्वश्रेष्ठ फोटोग्राफ मानते हुए उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया है। ताराचंद ने यह फोटोग्राफ जयपुर के गलताजी के मंदिर से लिया है जिसमें एक पर्यटक जब किसी बंदर का फोटो ले रहा था तो एक बंदर उत्सुकतावश कैमेरे के पास पहुंच गया और कैमेरे के लेंस के भीतर झांकने लगा। ताराचंद ने इसी घटना को क्लिक किया और जब इसे इंटरनेट पर डाला गया तो एक दिन में लाखों लाईक्स और शेयर ने इसे पूरी दुनिया में भारत से सर्वाधिक चर्चित फोटोग्राफ बना दिया। इसके बाद तो यह फोटो सोशल मीडिया पर काफी वाईरल हुआ। 
सैकड़ों सम्मान, लाखों के इनाम: 
अपने बेमिसाल फोटोग्राफ से देश-दुनिया का ध्यान आकृष्ट करने वाले ताराचंद गवारिया को उनकी फोटोग्राफी के लिए  सैकड़ों सम्मान और लाखों रुपयों के इनाम भी प्राप्त हुए हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में एक ऑनलाईन फोटो प्रतियोगिता में गवारिया को नेशनल अवार्ड से नवाज़ा गया है। इस अवार्ड के तहत गवारिया को उनके इस फोटोग्राफ के लिए एक लाख रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया है। इसी प्रकार इससे पूर्व चित्रकुट धाम स्थित रावतपुरा सरकार न्यास की तरफ से सिंहस्थ कुंभ विषय पर आयोजित हुई फोटोग्राफी प्रतियोगिता में भी एक लाख रुपये का प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया था। इसके अलावा भी गवारिया को फोटोग्राफी के कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त हो चुके हैं। गवारिया को पुनः राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार प्राप्त करने पर उदयपुर, डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिले के मित्रवर्ग के साथ मीडियाकर्मियों ने खुशी जताई और शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा है कि गवारिया ने अपने कौशल से फोटोग्राफी जगत में भी उदयपुर को देशव्यापी पहचान दी है।