स्थानीय अधिकारियों और नेताओं की मिलिभगत के बिना द ललित के अवैध गेट खुलना नामुमकीन।

उदयपुर। भाजपा शासनकाल में भ्रष्‍टाचार किस कदर तक फैला हुआ है इसका ताजा उदाहरण इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस करोड़ों रुपए की सरकारी होटल को कोड़ियों के दाम में खरीद लिया था, उसके काफी हिस्से में झील किनारे निर्माण भी करवा दिया और अब सेटिंग करके नियम विपरीत गेट भी खोल दिए हैं। जबकि कुछ समय पूर्व स्‍थानीय नगर निगम ने उक्‍त गेट को बंद करवा दिया था। अब स्वायत्त शासन विभाग ने आदेश देकर नगर निगम द्वारा बंद करवाए “द ललित होटल” के गेट खोलने का फरमान जारी कर दिया है। स्वायत्त शासन विभाग ने फतहसागर से 100 कदम की दूरी पर होटल दी ललित (लक्ष्मी विलास) के दो गेट खोलने के आदेश दे दिए हैं। बिना मंजूरी बने ये दरवाजे नगर निगम ने बंद करवाए थे। स्‍थानीय स्‍तर पर विरोध होने पर निगम की बोर्ड बैठक में पूरे सदन ने विरोध किया था और जिसके बाद गेट के आगे रेडीमेड ब्राउण्डीवाल खड़ी करवा दी थी। अब सवाल यह उठता है कि जब नगर निगम ने इसको अवैध माना था तो अधिकारियों ने इसको सही कैसे मान लिया?
शहर में स्थित जिस बेशकीमती सरकारी होटल को तत्कालीन सरकार उस समय के निजामों ने कोडियों के दाम बेच दिया था उसी होटल में अब अवैध रूप से दरवाजे भी बना दिए गए और उन्हें खोलने को फरमार विभाग की ओर से भी आ गया। इससे बडी कमजोर उदयपुर के सूरमाओं के लिए ओर कोई नहीं होगी। इमानदारी का दम भरने वाले महापौर जी को सबसे पहले राज्य सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए तुरन्त प्रभाव से इस पर एक्शन लेना चाहिए ताकी जनता के बीच में उनकी यह छवि बरकरार रहे। वहीं अब शहरवासियों को भी राज्य सरकार के इस फैसले के विरोध में खड़े होकर प्रदर्शन करना चाहिए और हर हाल में इस दरवाजे को बंद कराने की कोशिश करनी चाहिए अगर ऐसा नहीं हुआ तो यकीन मानिए वह दिन दूर नहीं जब फतहसागर का यह छौर आम लोगों के लिए बंद सा हो जाएगा और खास लोग इसे अपनी विलासिता का स्थान बना लेंगे। इस पूरे मसले पर क्षेत्र में पूर्व पार्शद अजय पोरवाल ने स्थानीय प्रषासन की मिलीभगत होने का दावा किया है। उनकी माने तो अगर यहां के लोग इस फैसले के खिलाफ होते तो आज भी विरोध कर सकते थे। लेकिन उनका मौन रहना साबित करता है कि यहां से ही तथाकथित होटेल मालिक को राजधानी से स्वीकृति लाने का इषारा किया गया हो।

थानेदार ने खाई जेल की हवा

इसको भी आजमाइए

 

भाईसाब की भपकी के बाद शांत हुए समिति अध्यक्ष और महापौर – नगर निगम की नुरा कुश्ती को लगा विराम

उदयपुर। उदयपुर शहर की नगर निगम का हाई वोल्टेज ड्रामा गृहमंत्री की घुड़की के बाद अब ख़त्म होने के आसार है। गृहमंत्री ने असंतुष्ट समिति अध्यक्ष और महापौर की आमने सामने बैठा कर साम दाम दंड भेद तरीके इस्तमाल करते हुए समझा दिया और भपकी देते हुए आगे के लिए निर्देश भी देदिए की कोई मीडिया के पास नहीं जाएगा और मीडिया में सिर्फ जिलाध्यक्ष ही बयान देंगे।
पिछले कई दिनों से महापौर चन्द्र सिंह कोठारी की कार्य करने के तरीकों से नाराज़ समिति अध्यक्ष ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था तब से नगर निगम में महापौर और पार्षदों के बिच खींचा तानी चल रही थी। इस कुश्ती को रोकने के लिए नगर निगम और उदयपुर भाजपा के कर्ता धर्ता गृहमंत्री शहर विधायक गुलाबचंद कटारिया ” भाईसाब” निपटारे के लिए उदयपुर पहुचे और आनन – फानन में समितिध्यक्षों और महापौर की गुप्त बैठक भाईसाहब ने पार्टी कार्यालय में लेने की बात कहकर सभी को बुला लिया, लेकिन इसकी भनक मिडिया को लग गई। जब इस सियासी ड्रामे को कवर करने के लिए मिडियाकर्मी मौके पर पंहुच गए तो सभी को दुरभाश पर कटारिया ने अनयत्र जगह बुला लिया जिसका पता बाद में नहीं लग पाया। हालाकि सभी समितिध्यक्ष, महापौर और जिलाध्यक्ष गाड़ियों में बैठते हुए जरूर कैमरे में कैद हो गए। सूत्र बताते है कि देबारी में किसी जगह पर गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने सभी असन्तुष्ट सामिति अध्यक्षांे और महापौर चंद्रसिंह कोठारी से आमने – सामने बात कराई। साथ ही साफ कर दिया कि चंद्रसिंह कोठारी महापौर की कुर्सी पर बने रहेंगे। भाई साहब के इस बयान के बाद समितिध्यक्षों के चहेरों पर मायूसी छा गई, सभी रूंदे कंठों से भाई साहब की हां में हां मिलाते रहे और आखिरकार वहीं हुआ जो भाई साहब ने चाहा था। बाद में किसी को भी सार्वजनिक रूप से बयान नहीं देने के निर्देष दिए गए और इसके लिए अधिकृत रूप से जिलाध्यक्ष दिनेष भट्ट को अधिकृत किया गया। साथ ही कटारिया ने चंद्रसिंह कोठारी से भी व्यवहार में शीथिलता लाने की हिदायत दी है। गौरतलब है कि गुरूवार के बयान में राजस्थान के दुसरे नम्बर के नेता और शहर विधायक ने कहा था कि अगर कोठारी महापौर की कुर्सी को नहीं संभाल पाए तो वह इस महापौर की कमान संभाल लेंगे। इससे यह बात तो साबित हो गई कि भाईसाहब का निगम मोह अभी भी नहीं छुटा है। वैसे शायद अब शहर में होता काम दिखाई देने लगेगा क्योंकि तीन साल पूरे होने आए है और जनता को कनवेंस करने के लिए दो साल ही चाहिए है। गृहमंत्री कटारिया ने शुक्रवार को अपने उदयपुर प्रवास के दौरान सिर्फ समिति अध्यक्षों और महापौर की बैठक ही ली, इससे तो यह साबित होता है कि हर बार रविवार को अपने गृहक्षेत्र में आने वाले कटारिया को डेमेज कंट्रोल मैनेज्ड करने के लिए शुक्रवार को ही आना पड़ा। पार्टी के नेताओं में अब यह उम्मीद जताई जारही है कि भाईसाब की घुड़की के बाद सारे समिति अध्यक्ष अब शांत बैठ जायेगें अब कोई कुछ नहीं बोल सकेगा।

पद्मावती के विरोध में ख़ुदकुशी या हत्या ? – नाहरगढ़ पर लटका मिला युवक का शव

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उदयपुर . पद्मावती फिल्म का विरोध धीरे धीरे अब विकराल रूप में आगया है . आज जयपुर नाहर गढ़ पर एक युवक का शव फांसी के फंदे पर लटका हुआ मिला . जहाँ शव लटका हुआ था वहां लिखा हुआ था ” पद्मावती का विरोध करने वालों  हम सिर्फ पुतले ही नहीं लटकाते हम में है दम” .

जानकारी के अनुसार जयपुर के नाहरगढ़ फोर्ट पर शुक्रवार सुबह एक शख्स की लाश लटकी मिली। पास में ही पत्थरों पर लिखा मिला कि पद्मावती का विरोध करने वालों हम सिर्फ पुतले नहीं जलाते हैं। वहां करीब आधा दर्जन सन्देश पद्मावती के विरोध में लिखे हुए थे . पुलिस फिलहाल इस मामले को खुदकुशी और हत्या, दोनों एंगल से देख रही है। एक पत्थर पर चेतन तांत्रिक भी लिखा मिला है।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। कहा कि पद्मावती फिल्म से जुड़ी जो धमकियां पत्थर पर लिखी मिली हैं, वो इसी व्यक्ति से जुड़ी हैं या नहीं, ये कहना मुश्किल है।
– मृतक का नाम चेतन सैनी (40) बताया जा रहा है, जो शास्त्री नगर इलाके का रहने वाला है। लड़के के पास से मुंबई का एक टिकट भी मिला है।

बता दें कि पद्मावती के विरोध के चलते फिल्ममेकर्स ने फिलहाल रिलीज टाल दी है। ये भी कहा कि भारत में रिलीज से पहले फिल्म विदेश में रिलीज नहीं होगी। पद्मावती को ब्रिटिश सेंसर बोर्ड ने बिना कट लगाए स्क्रीनिंग की मंजूरी दे दी है।

राजस्थान में करणी सेना, बीजेपी लीडर्स और हिंदूवादी संगठनों ने इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। राजपूत करणी सेना का मानना है कि ​इस फिल्म में पद्मिनी और खिलजी के बीच इंटीमेट सीन फिल्माए जाने से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची है। लिहाजा, फिल्म को रिलीज से पहले पार्टी के राजपूत प्रतिनिधियों को दिखाया जाना चाहिए।

अब तक विरोध मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक तक पहुंच गया है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और यूपी में सरकार ने इसे रिलीज नहीं करने की बात कही।
– राजस्थान की राजपूत करणी सेना के अलावा राजघराने भी फिल्म के खिलाफ है। इनकी मांग है कि इसे रिलीज करने के पहले उन्हें दिखाई जाए।
– राजनाथ सिंह, उमा भारती, लालू प्रसाद यादव, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कई नेताओं ने बयान दिए कि लोगों की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए।
– गुरुवार को राजपूतों ने चित्तौड़गढ का किला बंद रखकर प्रदर्शन किया था।
– करणी सेना ने सूर्पणखा की तरह दीपिका पादुकोण की नाक काटने, हरियाणा के बीजेपी नेता ने दीपिका और भंसाली का सिर काटने पर 10 करोड़ के इनाम का एलान किया था।

जनता की समस्या देखने आने के लिए निगम प्रशासन को दिए पीले चावल

उदयपुर। नगर निगम में महापौर और समिति अध्यक्षों के बिच में घमासान चल रहा है इसी बिच प्रतिपक्ष नेता मोहसिन खान ने जनता की समस्याओं से निगम प्रशासन को अवगत करवाते हुए शहर में लोगों के बिच आकर जनता की समस्या सुनने के पीले चावल दे कर न्योता दिया।
नगर निगम का मोजुदा बोर्ड अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है।  एक तरफ शहर की व्यवस्था चोपट हो रखी है दूसरी तरफ समिति अध्यक्ष और महापौर के बिच चली आरही खिचातान की वजह से चार समिति अध्यक्ष समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देचुके है। इसी बिच आज प्रतिपक्ष के नेता मोहसीन खान और पर्यावरण प्रकोष्ठ अध्यक्ष अमित श्रीवास्तव ने नगर निगम प्रशासन को पीले चावल देकर जनता की समस्या सुनने के लिए न्योता दिया। मोहसीन खान का कहना है कि भाजपा के बोर्ड को आपस में लड़ने भिड़ने से फुर्सत नहीं और यहाँ जनता समस्याओं के बिच घिरती जा रही है। मोहसिन खान ने बताया कि शहर में  ट्राफिक व्यवस्था सुचारू करने, आवारा पशुओं को नियंत्रण करने ,  पर्यावरण की दृष्टि से शहर में उजाड़ पड़े पार्को में पेड़ पौधे लगाकर उनका विकास कर नये ऑक्सीजन पॉकेट उपलब्ध कराने की नगर निगम प्रशासन से की है और निगम की चार दिवारी से निकल कर जनता के बिच आने के पीले चावल भी दिए है।  हम सभी को बाकायदा न्योता दे कर आये है कि अब तो जनता के बिच आओ और उनकी समस्याएँ सुनों।  पीले चावल देने के दौरान अभिजीत खींची, अभिषेक सिंह, मनदीप चौहान, प्रशान्त कुमावत, रवि चौधरी, कुलदीप सिंह सोलंकी, आशीष
श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे।

थानेदार को कोर्ट की अवमानना करने पर खानी पड़ी जेल की हवा

उदयपुर। उदयपुर शहर के एक थाना अधिकारी को ही आज जेल की हवा खानी पड़ी चाहे थोड़ी देर के लिए ही सही लेकिन नाराज़ हुए जज ने कोर्ट ने अवमानना के जुर्म में हवालात में दाल दिया बाद में जमानत पर रिहा किया गया।
कानून सबके लिए एक है, चाहे वह कानून की पालना करवाने वाला हो या कोई आम आदमी। प्रदेश के दौसा जिले की एक कोर्ट ने गुरूवार को इस मिथ्या को भी गलत साबित कर दिया कि कानून अंधा होता है। शहर के धानमंडी थाने के सीआई राजेश शर्मा को पेशी पर नहीं जाने की वजह से सलाखों के पीछे जाना पड़ा। जानकारी के अनुसार प्रकरण के अनुसार 10 वर्ष पूर्व दोसा के कोलवा थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश शर्मा के विरूद्घ आईपीसी 166 के तहत एक मामला इस्तगासा से दर्ज हुआ था। उक्त प्रकरण में शर्मा को न्यायालय ने कई बार तलब किया लेकिन वे पेश नहीं हुए, बार बार तलब करने के बाद भी सीआई राजेश शर्मा  न्यायालय में पेश नहीं हुए। जब गुरूवार को राजेश शर्मा दौसा ग्राम न्यायालय पहुचे तो माननीय न्यायाधीष ने नाराजगी जाहिर करते हुए कोर्ट में उपस्थित नहीं होने की वजह पूछी और संतुष्ट पूर्ण जवाब नहीं मिलने पर अदालत में उपस्थित नहीं होने को अदालत की अवमाना माना और  उन्हें कोर्ट के आदेष की पालना नहीं करने के लिए कोर्ट परिसर में ही बने हवालात में भेजने का फैसला सूना दिया। हालाँकि थोड़ी देर बाद ही सीआई को जमानत मिल गयी उसके बाद उन्हें जेल से निकाला गया।

’सोहराबुद्दीन काण्ड के सी बी आई जज को सौ करोड रू.की रिश्वत की पेशकश की गई थी’

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पोस्ट। दिल्ली की अंग्रेजी मासिक पत्रिका ’’कैरवैन’’ के नवीनतम अंक में छपी एक रिपोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को कटघरे में खडा कर दिया है। यह रिपोर्ट एक सी.बी.आई जज की रहस्यमय मृत्यु के बारे में है जिसने गुजरात के, सन 2005 के सोहराबुद्दीन एन्काउण्टर हत्या के केस में सौ करोड रूपये की रिश्वत लेने से इंकार कर दिया था।
जज की मृत्यु के तीन वर्षों के बाद उनके परिवार ने अपनी चुप्पी तोडी है तथा, जज की मृत्यु के 29 दिनों के अंदर उनके स्थान पर आये जज द्वारा अमित शाह को क्लीन चिट देने पर प्रश्न चिन्ह लगाया है। परिवार के सदस्यों ने उन परिस्थितियों को लेकर कई चिंताएं उठाई हैं, जिनमें 48 वर्षीय जज मृत पाये गये थे। परिवार वालों का कहना है कि उनके सभी प्रश्नों को यह कहकर नजर अंदाज कर दिया गया था कि जज की मृत्यु ’’मैसिव कार्डिक अरेस्ट’’ के कारण हुई।
कथित रुप से बृजगोपाल हरकिशन लोया, जिनकी दिसम्बर 2004 में नागपुर जाते समय रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हुई, को शाह के पक्ष में निर्णय देने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहित शाह ने उत्त* रकम देने की पेशकश की थी। ज्ञातव्य है कि तत्कालीन नरेन्द्र मोदी सरकार में जूूनियर होम मिनिस्टर के रूप में शाह का नाम इस केस में मुख्य आरोपी के रूप में था।
कैरवैन मैगजीन ने अपनी रिपोर्ट में स्वर्गीय न्यायाधीश की बहन अनुराधा बियानी के हवाले से कहा है कि कैसे तत्कालीन चीफ जस्टिस ’’उन्हें (मृत जज) सिविल ड्रैस में देर रात को मुलाकात के लिए बुलाते थे तथा उनके ऊपर जल्दी से जल्दी तथा सकाकारात्मक निर्णय देने के लिए दबाव डालते थे।’’ अनुराधा बियानी ने आरोप लगाया है कि ’’मेरे भाई को अनुकूल निर्णय देने के एवज में सौ करोड रूपये देने की पेशकश की गई थी; स्वयं चीफ जस्टिस मोहित शाह ने यह प्रस्ताव दिया था।’’
इस खुलासे से उत्साहित कांग्रेस ने समस्त मामलों की जांच की मांग की है। बुधवार को यहां पार्टी प्रवत्त*ा अभिषेक मनु सिंघवी ने ए.आई.सी.सी.की प्रैस ब्रीफिंग में कहा कि सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में केस की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए तथा तत्कालीन हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के विरुद्घ लगाये गये आरोपों की जांच होनी चाहिए तथा मृत न्यायाधीश के पुत्र द्वारा लगाये गये इस आरोप की भी जांच की जानी चाहिए कि, चीफ जस्टिस शाह ने उनके पिता की रहस्यमय मृत्यु की जांच के लिए आयोग गठित करने से इंकार कर दिया था।
गुजरात के कई कांग्रेस नेता, जिनमें पार्टी के प्रवत्त*ा शत्ति* सिंह गोहिल भी शामिल हैं, तुरत-फुरत-ट्विटर पर सक्रिय हो गये तथा कयास लगाने लगे कि क्या लोया की हत्या में अमित शाह का हाथ था।
पत्रकार निरंजन टाकले, जिन्होंने कैरवैन में छपी रिपोर्ट का संकलन किया है, का कहना है कि जज लोया के पिता हरकिशन ने भी उन्हें बताया कि उनके पुत्र ने उन्हें बताया था कि उन्हें मुंबई में एक घर तथा धन के बदले में अनुकूल निर्णय देने के प्रस्ताव दिये गये थे। लोया के परिवार के सदस्यों ने न्यायाधीश की मृत्यु के बताये गये विवरण तथा मृत्यु के बाद जो कार्यवाही की गयी उसमें असंगतियों का खुलासा किया तथा जज की मृत देह की हालत के बारे में बताया। मृत्यु की घटना पर जांच आयोग गठित करने की परिवार वालों के अनुरोध पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
लोया की मृत्यु के कुछ समय बाद ही, एक नये जज, एम.बी.गोसावी को केस सौंपा गया। गोसावी ने 17, दिसंबर 2014 को निर्णय सुरक्षित रखने से पूर्व तीन दिन संबंधित पाॢटयों की दलीलों को सुना। उसके बाद 30 दिसंबर को निर्णय सुनाया जिसमें अमित शाह को दोषमुत्त* करार दिया गया।
इस निर्णय पर, फिर बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की गई, जिसने अपील को खारिज कर दिया।
गत वर्ष सुप्रीम कोर्ट में अमित शाह को दोष मुत्त* किये जाने को चुनौती देने वाली याचिका की भी यही नियति हुई।
जिस तरीके से सुनवाई की गई, उस पर भी प्रश्न उठाया गया है। केस की सुनवाई तीन अलग न्यायाधीशों ने की, जो कि अपने आप में सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की सीधी अवहेलना थी कि केस गुजरात के बाहर स्थानान्तरित किया जाए व शुरु से आखिर तक एक ही जज केस की सुनवाई करे। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश सी बी आई की याचिका पर दिया था।
सितम्बर, 2012 में जस्टिस आफताब आलम एवं रंजना प्रकाश देसाई ने बॉम्बे हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति को, शुरु से अंत तक एक ही जज द्वारा केस की सुनवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।
इसके बाद भी, मोदी के प्रधानमंत्री बनने के एक महीने के अंदर ही, 25 जून, 2014 को पहले न्यायाधीश का स्थानान्तरण हो गया। उस जज की गलती यह थी कि उसने, एक बार भी न्यायालय में उपस्थित नहीं होने के लिए अमित शाह को फटकार लगाई थी।
जज बी एच लोया, जिन्होंने उस वर्ष अक्टूबर में केस का चार्ज लिया, ने शाह को व्यत्ति*गत रूप से उपस्थित होने की छूट दी थी, लेकिन ’’केवल आरोप फ्रेम किये जाने तक।’’ उन्होंने इस बात पर अप्रसन्नता जताई कि मुंबई में उपस्थित होने के बाद भी शाह तारीख पर कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। सुनवाई की अगली तारीख 15, दिसंबर की तय की गई, लेकिन 1 दिसंबर को जज लोया की मृत्यु हो गई।
परिवार को सारे संदेह इसलिए हैं क्योंकि लोया स्वस्थ थे, रोज दो घंटे तक टेबल टेनिस खेलते थे और ह्रदय रोग का कोई आनुवांशिक इतिहास भी नहीं था। उनके माता पिता उम्र के आठवें दशक हैं और जीवित हैं तथा सक्रिय भी।
जज लोया 29 नवम्बर 2014 को अपने एक सहकर्मी की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए नागपुर गये थे। 30 नवम्बर को रात 11 बजे उन्होंने 40 मिनट तक पत्नी से बात की थी वे काफी खुश लग रहे थे कहा जाता है कि उन्हें 12.30 बजे कार्डिक अरैस्ट हुआ और उनकी मृत्यु हो गयी।
उनकी मृत्यु काफी संदिग्ध थी, और इन कारणों के आधार पर उनकी मृत्यु की जांच की जानी चाहिए थी।
-दो साथी जज जो उनके साथ नागपुर गये थे और जिनके आग्रह पर लोया शादी में शामिल होने नागपुर गये थे वे उनकी मृत्यु के डेढ माह बाद भी उनके परिवार से नहीं मिले। ना ही ये दोनों जज उनके शव के साथ उनके लाटूर स्थित खानदानी घर पहुंचे।
-उन्हें एक मामूली से दांडे हॉस्पिटल क्यों ले जाया गया?
-दोनों जजों ने कहा कि लोया खुद हॉस्पिटल की सीडियां चढकर गये थे वहां उन्हें कुछ दवाइयां दी गयी। इसके बाद उन्हें दूसरे निजी अस्पताल मैडिट्रीमा अस्पताल ले जाया गया वहां उन्हें ’’मृत लाया’’ घोषित कर दिया गया।
-पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हर पेज पर उनके चचेरे भाई के रूप में किसने साइन किये। लोया के मोबाइल से उनके परिवार को संघ कार्यकर्ता ईश्वर बाहेतीन ने क्यों सूचना दी, नागपुर पुलिस या दोनों जजों ने क्यों नहीं।
-लोया के मोबाइल से कॉल रिकॉर्ड व टैक्स्ट मैसेज किसने डिलीट किये थे?
-परिजनों को दोबारा पोस्टमार्टम नहीं करवाने के लिए क्यों मनाया गया?
वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यन्त दवे कहते हैं, उन्होंने तत्कालीन सीजेआई एच एल दत्तू को लिखे एक पत्र में मोहित शाह को सुप्रीम कोर्ट के जज के पद पर पदोन्नति नहीं देने की अपील की थी। उन्होंने लिखा था कि विद्वान ट्रायल जज को बार-बार किसी ना किसी बहाने से बदला गया वो भी माननीय कोर्ट की मंजूरी लिए बिना.., मैं उस अदालती आदेश की बात नहीं कर रहा हूं जो अमित शाह के पक्ष में दिया गया है बल्कि बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस माोहित शाह की कारगुजारियों के बारे में बात कर रहा हूं।
’’इस स्तर पर उनके केस पर किसी भी पुनॢवचार से नागरिकों के जेहन में गंभीर व उचित संदेह जन्म लेंगे। हो सकता है सरकार उन्हें पुरस्कार स्वरूप किसी राज्य का राज्यपाल बना दे लेकिन कालेजियम द्वारा ऐसा करना बिल्कुल अलग बात होगी। मैं ससम्मान आग्रह करता हू कि न्यायपालिका के वृहद हितों के लिए ऐसा ना किया जाए।’’
जस्टिस शाह को 2005 में गुजरात हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया था 1991 में उन्हें स्थायी जज बनाया गया उसके बाद 2009 में उन्हें प्रमोशन देकर कोलकाता हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बना दिया गया इसके एक साल बाद उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बना दिया गया। 9 सितंबर 2015 को वे रिटायर हो गये।

खबर अंग्रेजी मासिक पत्रिका ’’कैरवैन’’ में छपी रिपोर्ट और राष्ट्रदूत में इस रिपोर्ट की खबर की हिंदी अनुवाद में छपी होने के आधार पर है .

प्रौढ़ शिक्षाविद गोवर्धन सिंह राव का देहावसान

POST. वयोवृद्ध प्रौढ़ शिक्षाविद श्री गोवर्धन सिंह राव का मंगलवार सुबह 8.बजकर 15 मिनट पर देहावसान हो गया। वे 98 वें वर्ष के थे। वे अपने पीछे दो पुत्र , तीन पुत्रियों का भरापूरा परिवार शोकाकुल छोड़ गए है । श्री राव का अंतिम संस्कार मंगलावार दोपहर बेदला स्थित श्मशान घाट में पत्रकारों, राजनेताओं और प्रबुद्धजनों की उपस्थिति में किया गया।
श्री राव ने आजादी से पहले बम्बोरा गांव में महाराणा मेवाड़ राजपूत स्कूल शुरू करके शिक्षा क्षेत्र में कार्य शुरू किया, लेकिन बाद में पंडित जनार्दन राय नागर के साथ राजस्थान विद्यापीठ से जुड़कर अपनी धर्म पत्नी स्वर्गीय राजकुमारी के साथ प्रौढ़ शिक्षा का कार्य शुरू किया , जो सेवानिवृति के बाद भी जारी रखा। वे राजस्थान विद्यापीठ के एकमात्र वयोवृद्ध जीवन सदस्य थे । श्री राव को मेवल क्षेत्र के जगत गांव का प्राचीन मन्दिर उत्खनन करके प्रकट करने का श्रेय जाता है। यह कार्य 1952 में नवभारत स्कूल के बच्चों का शिविर आयोजित करवा कर किया गया । श्री राव ने 1962 में स्वतंत्र पार्टी के समर्थन से सलूम्बर सीट पर विधायक का चुनाव भी लड़ा । वे लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी में अन्य पिछड़ा वर्ग के जिला उपाध्यक्ष पद पर सक्रिय रहे । मेवल और छप्पन क्षेत्र के कई गांवों में विद्यालय खोलकर शिक्षा की मशाल जलाने के लिए सदैव उन्हें याद किया जाता रहेगा । वे महिलाओं को भी सामाजिक क्षेत्र में आगे लाने के हिमायती थे । इसी वजह से उनकी पत्नी स्वर्गीय राजकुमारी राव को मेवाड़ में पर्दाप्रथा त्यागकर समाज कार्य के लिए आगे आने वाली प्रथम महिला होने का गौरव हासिल है । इसी वजह से उन्हें पूर्व केंद्रीय मंत्री गोविंद वल्लभ पंत के हाथों समाज सेवा विद की उपाधि प्राप्त हुई थी । श्री राव के बड़े पुत्र उग्रेसन राव प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार तथा छोटे पुत्र राव अजातशत्रु राष्ट्रीयस्तर के कवि है ।

ZINC for a Healthy Heart…’

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Pavan Kaushik – Head of Cor. Com. HZL

Researchers from the University of Leicester discovered that Zinc plays a key role in regulating the way Calcium moves in the heart cells. Zinc is present in heart muscle and interacts with Calcium to affect heart function.

Zinc is the most common mineral in human body beside Iron. Zinc is actually found in every cell. Past research have shown patients with congestive heart failure often have profound Zinc deficiency. Zinc has potent antioxidant properties which help to neutralize

Pavan Kaushik

free radicals that may accelerate aging & contribute to the development of chronic diseases like cancer and heart disease. In addition to essential metabolic functions, the level of Zinc in the body also affects the heart muscle. When oxidative stress occurs, it may be due to a shortage of Zinc, which can be determined by examining the heart muscle. Studies by the Technical University of Munich (TUM) show the relationship between the total amount of Zinc in the body and cardiac function. Zinc deficiency initially appears as symptoms on the skin, hair and fingernails, although it can progress to include reduced immune response and organ failure, including the heart. Heart palpitations have numerous causes, including many benign ones, but they may indicate early signs of heart failure.

Zinc appears to have protective effects in coronary artery disease and cardiomyopathy. In such states, replenishing with Zinc has been shown to improve cardiac function and prevent further damage.

And we thought Zinc is used only for galvanizing..Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading integrated Zinc-Lead-Silver producer.

Another example of usage of ZINC… We all have Zinc in our lives…

मरीजों के साथ खिलवाड़ – ब्लैक लिस्टेड कंपनी प्रदेश में कर रही दवा की सप्लाई

पोस्ट न्यूज़ राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए दवा खरीद का ठेका एक एेसी फर्म को दे दिया, जिसकी दवा की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए हरियाणा मेडिकल सर्विसेज काॅर्पोरेशन लि. ने उसे डेबार कर दिया था। इसकी सूचना राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन को भी दी गई थी। ताज्जुब है कि हरियाणा मेडिकल सर्विसेज ने 13 सितंबर को इस फर्म की खराब दवा और डेबार की सूचना दे दी थी, इसी के ठीक एक सप्ताह बाद 19 सितंबर को आरएमएससी ने उसी फर्म को दवा सप्लाई के ऑर्डर जारी कर दिए।
हरियाणा में तीन साल के लिए डेबार गुजरात की सेन्च्यूरियन लेबोरेट्री ने राजस्थान में थैलेसीमिया मरीजों की डेफ्रासिरोक्स (500 मिलीग्राम) की 30 लाख रु. कीमत की 1 लाख 80 हजार टेबलेट सप्लाई भी कर दी है। यह दवा निशुल्क दवा योजना में शामिल है। यह टेबलेट खून चढ़ाते समय जमा आयरन को बाहर निकालने के लिए इस्तेमाल की जाती है। हरियाणा में यह दवा कंपनी बिना लाइसेंस और फर्जी दस्तावेज पर दवा सप्लाई करते पाई गई थी। दवा भी मानकों पर खरी नहीं उतरी थी। अब सवाल उठता है कि हरियाणा में फर्जी घोषित दवा कंपनी के राजस्थान में दस्तावेज जांचे भी गए कि नहीं? हरियाणा में कंपनी की परफार्मेंस की स्टडी की गई की नहीं? जो दवा सप्लाई हुई, उसकी मानक जांच सिंतबर के बाद हुई कि नहीं? हालांकि यही कंपनी राजस्थान में 2016 से ही थैलेसीमिया सहित 56 दवाओं की सप्लाई दे रही है।
प्रदेश में 2 हजार, अकेले जयपुर में 500 मरीज
राजस्थानथैलेसीमिया चिल्ड्रन सोसायटी के अध्यक्ष नरेश भाटिया का कहना है कि राज्य में थैलेसीमिया के 2 हजार से ज्यादा मरीज है।

फर्जी हथियार लाइसेंस मामले में जम्मू कश्मीर से 150 लोगों के लाइसेंस की फाइल ही गायब

उदयपुर . फर्जी हथियारों के लाइसेंस बनवाने और अवैध हथियार रखने के मामले में एटीस ने चोकाने वाला खुलासा किया. प्रदेश में जिन 150 लोगों के फर्जी लाइसेंस जम्मूकश्मीर से बनवाये गए थे उनकी फ़ाइल जम्मूकश्मीर से ही गायब हो गयी .

एटीस की जांच में जांच में 150 फाइलें गायब होने की बात सामने आई है। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा से 18 लोगों ने सैनिकों के नाम से हथियार लाइसेंस लिए थे, उन लोगों की फाइलें गायब हो गईं। जबकि संबंधित लाेगों के हथियार लाइसेंस कलेक्टर एसएसपी की सहमति के बाद रजिस्टर्ड हो रखे हैं। 9 सुरक्षा एजेंसियों के नाम से लाइसेंस बने हैं। हाल ही में एटीएस के एसपी विकास कुमार के नेतृत्व में एक टीम 10 नवंबर को जम्मू-कश्मीर गई थी।
जिनकेनाम लाइसेंस उनमें से 30% सेना में ही नहीं : एटीएसने जम्मू-कश्मीर से सेना के जवानों के नाम पर बने 5 हजार हथियार लाइसेंस का रिकॉर्ड लिया था। एटीएस ने दिल्ली सेना मुख्यालय से भी जवानों की जानकारी मांगी थी। सेना ने 200 जवानों की जानकारी दी है। इससे पता चला है कि 30 फीसदी हथियार लाइसेंस जिन लोगाें ने लिए है, वे सेना में नहीं है।
रिकॉर्डगायब, कई अफसर भी संदेह के घेरे में
^8दिन तक दिल्ली जम्मू-कश्मीर में टीम रही। जिन लोगों ने जम्मू से हथियार लाइसेंस बनाए थे, बड़ी संख्या में उनका रिकॉर्ड गायब था। अफसरों कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। -विकास कुमार, एसपी, एटीएस