राजस्थान, मध्यप्रदेश और पंजाब में पद्मावती पर लगी रोक

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उदयपुर . राजस्थान में पद्मावती फिल्म के लिए फिलहाल रोक लगा दी गयी है साथ ही पंजाब और मध्यप्रदेश में भी पद्मावती फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गयी है .

राजस्थान की मुख्य मंत्री वसुंधरा राजे ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति इरानी को लेटर लिख कर फिल्म में विवादों पर बदलाव करने के सुझाव दिए थे . इसके बाद जब तक बदलाव नहीं हो जाते तब तक राज्य में पद्मावती के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गयी है .  राज्य सरकार ने पत्र में सुझाव दिया था कि उक्त फिल्म और उसके कथानक पर प्रसिद्ध इतिहासकारों, फिल्मी हस्तियों और समाज के प्रतिनिधियों की एक समिति से समीक्षा सुनिश्चित कराई जाए। इससे पूर्व सीमा सुरक्षा को लेकर बुलाई बैठक में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने फिल्म पर बैन को लेकर पुलिस अधिकारियों से चर्चा की। इसमें डीजी अजीत सिंह, एडीजी (इंटेलीजेंस) यूआर साहू व गृह विभाग के अधिकारी मौजूद थे। इसमें पहले सीमा सुरक्षा और पाक हिंदू विस्थापितों के मुद्दे पर चर्चा हुुई। इसके बाद एडीजी साहू ने फिल्म को लेकर उपजे तनाव पर रिपोर्ट दी। इसमें बताया कि फिल्म रिलीज होने पर कई जगह तनाव हो सकता है।

पद्मावती फिल्म के विरोध में जयपुर के एसीजेएम कोर्ट 16 में सोमवार को परिवाद पेश किया गया है। परिवाद में बताया है कि फिल्म में इतिहास से छेडछाड और रानी पद्मनी का अपमान किया गया है। इस संबंध में परिवादी भवानी शंकर शर्मा ने एसीजेएम कोर्ट 16 में परिवाद पेश किया है। परिवादी के वकील फरीद खान ने बताया कि फिल्म निर्माण के दौरान निर्देशक संजय बंसाली ने इतिहास को गलत तरीके से पेश किया है। जिससे राजपूत समाज में काफी रोष है। पूरे प्रदेश में फिल्म के प्रति विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। कोर्ट ने परिवाद पर 22 नवंबर को सुनवाई करेगी।

मध्यप्रदेश की राजधानी में सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया है कि मध्यप्रदेश में पद्मावती फिल्म पर प्रतिबंध रहेगा। राजपूत समाज के लोगों से मिलने के बाद यह बड़ा ऐलान कर दिया है।

राजधानी भोपाल में आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हम लोग बचपन से पद्मावती के बारे में पढ़ते आ रहे हैं। इससे पहले राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के कई जिलों में रानी पद्मावती पर आने फिल्म पर विवाद चल रहा था। मध्यप्रदेश सरकार ने देश में सबसे पहले यह कदम उठाते हुए फिल्म पर बैन लगा दिया है। इस फैसले से करणी सेना ने खुशी जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का आभार व्यक्त किया है।

उदयपुर के फोटो जर्नलिस्ट ताराचंद गवारिया को मिला अन्तर्राष्ट्रीय गौरव

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दुनिया के सर्वश्रेष्ठ 72 फोटोग्राफर्स में गवारिया का हुआ चयन
उदयपुर. पर्यटन स्थलों में दुनियाभर में चर्चित लेकसिटी उदयपुर ने इस बार फोटोग्राफी की दुनिया में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मुकाम हासिल कर न सिर्फ राजस्थान अपितु देश को गौरवान्वित किया है। इस गौरव को प्रदान करने के माध्यम बने हैं उदयपुर के प्रतिभावान युवा फोटो जर्नलिस्ट ताराचंद गवारिया जिन्होंने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ 72 फोटोग्राफर्स में अपना स्थान बनाया है। 
प्राप्त जानकारी के अनुसार इटली की अन्तर्राष्ट्रीय फोटो मैगजीन इंटरफोटो के वर्ष 2017 के संस्करण में दुनिया के 72 सर्वश्रेष्ठ फोटोग्राफर्स की सूची में उदयपुर के युवा फोटोजर्नलिस्ट ताराचंद गवारिया को सम्मिलित करते हुए उनके एक फोटोग्राफ को स्थान दिया गया है। मैगजीन में भारत के सिर्फ दो फोटोग्राफर्स को यह सम्मान दिया गया है जिसमें ताराचंद एक हैं। इंटरफोटो मैगजीन ने विश्व के सर्वश्रेष्ठ फोटोग्राफों का चयन इंटरनेट पर सर्वाधिक चर्चित और लाईक्स के आधार पर किया है जिसमें ताराचंद के कैमेरे में झांकते बंदर के फोटो को सर्वश्रेष्ठ फोटोग्राफ मानते हुए उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया है। ताराचंद ने यह फोटोग्राफ जयपुर के गलताजी के मंदिर से लिया है जिसमें एक पर्यटक जब किसी बंदर का फोटो ले रहा था तो एक बंदर उत्सुकतावश कैमेरे के पास पहुंच गया और कैमेरे के लेंस के भीतर झांकने लगा। ताराचंद ने इसी घटना को क्लिक किया और जब इसे इंटरनेट पर डाला गया तो एक दिन में लाखों लाईक्स और शेयर ने इसे पूरी दुनिया में भारत से सर्वाधिक चर्चित फोटोग्राफ बना दिया। इसके बाद तो यह फोटो सोशल मीडिया पर काफी वाईरल हुआ। 
सैकड़ों सम्मान, लाखों के इनाम: 
अपने बेमिसाल फोटोग्राफ से देश-दुनिया का ध्यान आकृष्ट करने वाले ताराचंद गवारिया को उनकी फोटोग्राफी के लिए  सैकड़ों सम्मान और लाखों रुपयों के इनाम भी प्राप्त हुए हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में एक ऑनलाईन फोटो प्रतियोगिता में गवारिया को नेशनल अवार्ड से नवाज़ा गया है। इस अवार्ड के तहत गवारिया को उनके इस फोटोग्राफ के लिए एक लाख रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया है। इसी प्रकार इससे पूर्व चित्रकुट धाम स्थित रावतपुरा सरकार न्यास की तरफ से सिंहस्थ कुंभ विषय पर आयोजित हुई फोटोग्राफी प्रतियोगिता में भी एक लाख रुपये का प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया था। इसके अलावा भी गवारिया को फोटोग्राफी के कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त हो चुके हैं। गवारिया को पुनः राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार प्राप्त करने पर उदयपुर, डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिले के मित्रवर्ग के साथ मीडियाकर्मियों ने खुशी जताई और शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा है कि गवारिया ने अपने कौशल से फोटोग्राफी जगत में भी उदयपुर को देशव्यापी पहचान दी है। 

 

खिसकेले रेस्टोरेंट मालिक ने चालान तामिल करने गए कांस्टेबल पर उड़ेली सब्जी की कड़ाई – जद्दोजहद के बाद पकड़ में आए पति – पत्नी

उदयपुर। शहर के सुखेर थानाक्षेत्र में एक कांस्टेबल पर उबलती सब्जी फेंकने का मामला सामने आया है। इस हादसे में कांस्टेबल बुरी तरह से झुलस गया, जिसे उदयपुर के एक निजी चिकित्सालय में भर्ती करवाया है। वहीं बाद में मौके पर पंहुची खाकी ने आरोपी और उसकी पत्नी को बड़ी जद्दोजहद करके घसीटते हुए गाड़ी में धकेला और थाने ले गई। दरअसल सेलीब्रेषन माॅल के सामने स्थित राधे – रसोई नाम का एक रेस्टोरेंट है। जहाँ पर सोमवार को सुखेर थाने के दो कांस्टेबल एक चालान तामिल कराने के लिए गए थे। तभी आरोपी संचालक भड़क उठा और उबलती हुई सब्जी की कड़ाई कांस्टेबल राकेश जाट पर उड़ेल दी। कोई कुछ समझ पाता इससे पहले आरोपी साइड में पड़ी पेट्रोल की बोतल उठाकर सबको मार डालने की धमकी देता रहा। इतने में आरोपी ने जलती हुई गैस की नली निकाली और उसको पकड़ने पर पूरे इलाके को उडाने की धमकी दे ड़ाली। इस वाकये से आसपास के दूसरे व्यापारी अपनी दुकाने छोड़कर भागने लगे। कुछ देर में सुखेर थाने का जाब्ता मौके पर पंहुच गया और बड़ी मुष्किल से आरोपी को काबू करके गाड़ी में डाला। इस बीच आरोपी की पत्नी भी खाकी के जवानों को रोकने लगी तो जवानों ने उसे भी गाड़ी में बिठा दिया और थाने ले गए। पता चला है कि तीन माह पूर्व आरोपी ने ऐसा ही कृत्य एक युवक पर किया था। जिससे वह भी बुरी तरह झुलस गया था। उसी मामले का चालान तामिल कराने के लिए सोमवार को सुखेर थाने से कांस्टेबल इसके रेस्टोरेंट पर पंहुचे थे। बहरहाल खाकी के जवानो ने आरोपी और उसकी पत्नी को पकड़कर आगे की कार्रवाई षुरू कर दी है, जबकिं घायल कांस्टेबल राकेष जाट का एक नीजि चिकित्सालय में इलाज चल रहा है।

ऑनलाइन ठगी- एटीम चुरा कर निकाल लिए 50 हज़ार रूपये , बैंक कर्मचारी के मिलीभगत की आशंका

उदयपुर . ट्रेन से बेग चोरी हुआ उसमे रखे दो एटीम भी चुरालिये लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि उन एटीम से 50 हज़ार रुपये निकलवा लिए गए . जब कि चुराने वाले के पास अटीम के पिन नंबर कहाँ से आगये .

ऑनलाइन ठगी के मामले तो सामने आते रहे हैं लेकिन इस प्रकार का मामला पहली बार सामने आया है जब पिन नंबर का पता कर ठगी हुई। पुलिस इस मामले में साइबर एक्सपर्ट की सलाह ले रही है। परिवादी ने मामले में कैनरा बैंक के कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप भी लगाया है। पुलिस के अनुसार बेदला बड़गांव लिंक रोड निवासी दिलीप कुमार पुत्र सुरेश नाथ नंदा ने मामला दर्ज कराया है। केस में परिवादी ने बताया है कि 13 अक्टूबर को पत्नी मंदिरा नंदा के साथ ट्रेन से कोलकाता गया था। उनके पास एक बड़ा बैग और एक छोटा बैग था जिसमें बैंक एटीएम सहित कई दस्तावेज थे। कोलकाता पहुंचने के बाद जब बैग देखा तो छोटा बैग नहीं था जिससे यह शंका हुई कि उदयपुर घर पर ही छूट गया होगा। इसके एक माह बाद 4 नवंबर को उदयपुर लौटे तो घर पर भी बैग नहीं था तो उन्होंने बैंक में जाकर जानकारी ली। इस दौरान सामने आया कि कोलकाता, हरियाणा में एटीएम मशीन से करीब 50 हजार रुपए नकदी निकाली गई।

एफआईआरमें बताया कि मधुबन स्थित कैनरा बैंक में खाता है। नकदी विड्रॉल होने पर बैंक की तरफ से पंजीकृत मोबाइल पर मैसेज या अन्य प्रकार से सूचना नहीं दी। बैंक के कर्मचारियों ने इस बारे में पूछा तो उन्होंने दो बार हमारे मोबाइल नंबर की बजाए अन्य मोबाइल नंबर के बारे में बताया। इससे यह लगता है कि बैंक के कर्मचारियों की मिलीभगत है। वहीं 15 अक्टूबर को खाते में 9163 रुपए थे लेकिन एटीएम से 10 हजार रुपए विड्रॉल हुए।

साइड नहीं देने की छोटी सी बात पर चला दिए चाक़ू – तीन युवक घायल

उदयपुर . लगता है युवकों को जेब में चाक़ू लेकर निकलना एक फेशन या मानसिक बिमारी बन गयी है, इसे युवकों को ना तो घर के किसी बड़े सदस्य की सिख याद रहती है ना ही पुलिस का खोफ रहता है . चाँदपोल में रविवार की रात सिर्फ साइड नहीं देने जैसी छोटी सी बात पर चाक़ू बाजी हो गयी .

पुलिस ने बताया कि लाल घाट निवासी नदीम पुत्र असलम शेख, राहुल पुत्र मोहनलाल सेन, जहीर उर्फ मोनू तीनों बाइक पर जा रहे थे। इधर नागा नगरी निवासी सोहेब और इरशाद रहे थे। दानों पक्षों में इंडिकेटर से साइड देने के बाद विवाद हो गया। इसके बाद सोहेब और इरशाद ने तीनों युवक पर चाकू से हमला कर दिया। बाद में पीड़ित पक्ष ने पुलिस में मामला दर्ज करवाया . ताज्जुब की बात है कि युवक जेब में चाक़ू लेकर चल रहे है क्या ये युवक घर से ही तय करके निकलते है कि रास्ते में जो कोई भी ज़रा सी कहा सुनी करेगा उन्हें चाक़ू मार देंगे . ईएसआई विकृत मानसिकता आखिर युवकों में किसलिए आरही है. इसे युवकों को इस बात का खोफ भी नहीं कि रास्ते में अगर पुलिस वाले कही चेकिंग करलेते है तो हमे मुसीबत का सामना करना पद जायेगा . छोटी सी बात पर किसी की जान लेने पर उतारू इसे युवकों पर पुलिस द्वारा कड़ी कारवाई की जानी चाहिए .

बीएन की छात्राओं ने बताया भंसाली को ऐसा होता है घूमर – कुम्भलगढ़ किया बंद

उदयपुर। मेवाड़ राजवंश के 42 वें वंशज राणा रावल रतन सिंह की महारानी पद्मिनी को लेकर संजय लीला भंसाली द्वारा बनाई गई विवादित फिल्म पद्मावती पर बवाल लगातार जारी है । इसी कड़ी में फिल्म निर्माता द्वारा जारी किए गएघूमर नृत्य के गाने को लेकर भी विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इसी कड़ी में उदयपुर में पिछले कई वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली भोपाल नोबल्स यूनिवर्सिटी की छात्राओं ने पारंपरिक परिधानों में घूमर नृत्य कर के इस फिल्म का और दीपिका पादुकोण द्वारा किए गए नृत्य का विरोध किया है। दरअसल बीएन कन्या महाविद्यालय की पढ़ने वाली यह राजपूत छात्राएं हाल ही में फिल्म के प्रोमो के रूप में रिलीज हुए घूमर नृत्य के गाने का विरोध कर रही है। इन गल्र्स दलील है कि पद्मावती फिल्म में यह गाना पूरी तरीके से गलत दर्शाया गया है । यही नहीं दीपिका पादुकोण द्वारा जिस तरह की वेशभूषा धारण की गई और जो फिल्म का सेट है वह भी पूरी तरह गलत है । ऐसे में लड़कियों ने पारंपरिक परिधानों में घूमर नृत्य पेश कर आने वाली पीढ़ी को इस नृत्य के बारे में जानकारी और उसका महत्व बताया । नृत्य करने वाली लड़कियों का साफ कहना है कि फिल्म में जो घूमर नृत्य दिखाया गया है वह पूरी तरीके से गलत है । राजपूत समाज की महारानिया न तो इस तरह का नृत्य कभी करती थी और ना ही उनका पहनावा इस तरीके क्या होता था । साथ ही महिलाओं द्वारा जहां पर नृत्य किया जाता था वहां पर पुरुषों की इंट्री तो कतई होती ही नहीं थी । ऐसे में आने वाली पीढ़ी को सही घूमर नृत्य को बताने और संजय लीला भंसाली को संदेश देने के उद्देश्य से इन कन्याओं ने पद्मिनी हाउस में नृत्य इसके बारे में अवगत कराया है ।
इधर पद्मावती विवाद पर शहर विधायक व् गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने अपनी प्रतिक्रिया दी। कटारिया ने साफ किया कि अब फिल्म के प्रदर्शन पर एक बार रोक लग गयी है ओर कुछ लोगों ने फिल्म को देखा भी है, जिन्होने फिल्म देखी है वह सभी यही कह रहे हंै कि फिल्म में ऐसे कोई दृश्य नही है जो कि आपत्तिजनक हो, लेकिन फिर भी सेंसर बोर्ड के निर्णय के बाद ही फिल्म के प्रदर्शन पर सोचा जा सकता है।

कुम्भलगढ़ बंद रू
रानी पद्मिनि की फिल्म को लेकर चल रहा बवाल चित्तोड़ दुर्ग के बाद राजसमन्द जिले के एतिहासिक कुम्भलगढ़ किले तक पहुच चूका है। इसी कड़ी में शनिवार को राजपूत करनी सेना के कार्यक्रताआंे और सर्व समाजांे के सैंकड़ो लोगांे ने कुम्भलगढ़ किले पर प्रदर्शन करते हुए इसके मुख्य द्वार को बंद कर दिया। फिल्म पद्मावती का विरोध कर रहे इन लोगों ने दुर्ग के किले के मुख्य द्वार को बंद करने के बाद वहां पर जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान बड़ी तादाद में सर्व समाजों के लोगों के साथ भारी पुलिस लवाजमा भी मौके पर तैनात रहा। कुम्भलगढ़ दुर्ग के बंद होने से अब वहां घुमने आने वाले देशी और विदेशी सैलानियों को मायुस होकर लौटना पड़ेगा। करणी सेना के पदाधिकारियों ने साफ किया कि इस फिल्म में जिस तरीके से मेवाड़ और पद्मिनि के इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है उसका कुम्भलगढ़ के सर्व समाजो में जोरदार विरोध है। ऐसे में सिर्फ एक दिन का बंद कर हम लोग चेतावनी देते हैं कि अगर इस फिल्म का प्रसारण होता है तो हमारी और से आगे उग्र आन्दोलन किया जायेगा !

पद्मावती पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा आवश्यक बदलाव किये बिना फिल्म रिलीज़ ना हो

पोस्ट न्यूज़ .मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि पद्मावती फिल्म तब तक रिलीज न हो, जब तक इसमें आवश्यक बदलाव नहीं किए जाएं ताकि किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
उन्होंने पत्र में कहा है कि इस संबंध में सेंसर बोर्ड को भी फिल्म प्रमाणित करने से पहले इसके सभी संभावित नतीजों पर विचार करना चाहिए। प्रसिद्ध इतिहासकारों, फिल्मी हस्तियों और पीड़ित समुदाय के सदस्यों की एक समिति गठित की जाए जो इस फिल्म तथा इसकी कथानक पर विस्तार से विचार-विमर्श करे। उसके बाद ऐसे आवश्यक परिवर्तन किए जाए जिससे किसी भी समाज की भावनाओं को आघात न लगे।
श्रीमती राजे ने कहा कि फिल्म निर्माताओं को अपनी समझ के अनुसार फिल्म बनाने का अधिकार है लेकिन कानून व्यवस्था, नैतिकता और नागरिकों की भावनाओं को ठेस पहुंचने की स्थिति में मौलिक अधिकारों पर भी तर्क के आधार पर नियंत्रण रखने का प्रावधान भारत के संविधान में है। इसलिए पद्मावती फिल्म की रिलीज पर पुनर्विचार किया जाए।
केन्द्रीय मंत्री को पत्र लिखने के लिए मेवाड़ के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पर श्रीमती राजे से मुलाकात कर उनका आभार जताया। प्रतिनिधिमंडल में यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी, चित्तौड़गढ़ विधायक चन्द्रभान आक्या, मेवाड क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष बालू सिंह कानावत, मेवाड क्षत्रिय महासभा के संरक्षक मनोहर सिंह कृष्णावत एवं तेज सिंह बांसी, जोहर स्मृति संस्थान, चित्तौड़गढ़ के महामंत्री भंवर सिंह खरड़ी, कोषाध्यक्ष नरपत सिंह भाटी, चित्तौड़ क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह खोर शामिल थे।

बांसवाडा के दो अंजुमन सदर की हत्याओं का मास्टर माइंड सिराज नेपाल में गिरफ्तार

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उदयपुर . बांसवाडा में पूर्व सदर अबुलाला और उसके भाई सोहराब खान की ह्त्या का मुख्य साजिशकर्ता  हिस्ट्रीशीटर सिराज अहमदनि गेंग के साथ नेपाल में धर लिया गया . नेपाल पुलिस ने निवारक अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। जिस पर तीनों को 4 महीने की कैद की सजा सुनाई गई है। अब चार महीने बाद ही भारत लाने की कवायद की जा सकती है .

बांसवाडा अंजुमन इस्लामिया संस्था के मरहूम सदर सोहराब खान की गोली मारकर हत्या करने वाले मास्टर माइंड हिस्ट्रीशीटर भाइयों सिराज-इम्तियाज और साथी काशिफ को नेपाल पुलिस ने गिरफ्तार किया। यहां पर एक दूसरे मामले में उन्हें शुक्रवार को 4 महीने की कैद सुनाई गई है। तीनों को वहां की पुलिस ने सदर सोहराब की हत्या के ठीक 29 दिनबाद ही 4 नवंबर को गिरफ्तार कर लिया था। नेपाल पुलिस ने निवारक अधिनियम के तहत यह कार्रवाई की थी। जिसमें जांच में तीनों के स्थानीय नागरिक नहीं होने और अपराधिक रिकॉर्ड होना पाया गया था।
तीनों शातिरों में से शूटर काशिफ की गिरफ्तारी ने शहर पुलिस समेत निगरानी एजेंसियों की पोल भी खोलकर रख दी है। झालावाड़ का 24 वर्षीय काशिफ उर्फ कासम उर्फ कालू उन्हीं पांच शूटरों में से एक है, जिसने 7 अक्टूबर को अंजुमन इस्लामिया के सदर सोहराब खान की राजतालाब में गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस शूटरों को बांसवाड़ा और दूसरे शहरों में तलाशती रही, लेकिन काशिफ बॉर्डर पारकर नेपाल लौट गया। काशिफ पहले भी नेपाल सिराज के साथ रहता था और वारदात को अंजाम देने के लिए भारत लौटा

तीनोंआरोपियों को नेपाल के गिरफ्तार करने के बाद भी बांसवाड़ा पुलिस टीम भारत नहीं लौटी। टीम नेपाल-भारत के बीच सोनाली बॉर्डर पर ही कैंप कती रही। टीम इसका इंतजार कर रही थी कि अगर तीनों को जमानत मिल गई तो हो सकता है कि नेपाल पुलिस उनके भारत भेज दे। जिस पर तीनों को बॉर्डर पर ही गिरफ्तार कर लिया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सूत्रों के अनुसार सिराज और उनके साथियों की माली हालत भी वहां ठीक नहीं थी। हालांकि सिराज का परिवार फिलहाल कहां है, इसकी स्थिति अब तक साफ नहीं हो पाई है।

राजसमन्द में सर्व समाज के साथ मंत्री किरण माहेश्वरी आई धरना प्रदर्शन में .

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उदयपुर . पुरे देश में पद्मावती फिल्म का विरोध हो रहा है वही दूसरी तरफ चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार विरोध में बयान दे रहे है लेकिन इसके बावजूद विरोध प्रदर्शन से दुरी बनाये हुए है वही राज्य में पहली बार उच्च  शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी सांसद हरिओम पंवार धरना प्रदर्शन में शामिल हुए.

मेवाड़गौरव रक्षा मंच के आह्वान पर राजसमंद जिले के सर्व समाज ने फिल्म पद्मावती के विरोध में शुक्रवार को पुरानी कलेक्ट्री के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। मंच के भरत पालीवाल ने बताया की फिल्म पद्मावती में रानी पद्मिनी के व्यक्तित्व और इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है। रानी पद्मिनी का व्यक्तित्व भारतीय नारी के लिए आर्दश है ऐसे आर्दश चरित्र के प्रति भारतीय समाज की गहरी निष्ठा सम्मान रहा है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मनोहर सिंह, कृष्णावत ने रानी पद्मिनी के जीवन पर ऐतिहासिक तथ्यों से अवगत कराते हुए इस फिल्म को किसी भी स्थिति में रिलीज नहीं होने देने का आह्वान किया। सभा को सांसद हरिओम सिंह राठौड़, उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने भी संबोधित करते हुए फिल्म में रानी पद्मिनी के चरित्र एवं इतिहास से संबंधित जो गलत कथानक फिल्माए गए है उनका विरोध किया और सेंसर बोर्ड सरकार से इस पर तुरंत कार्रवाई करने की मांग की। इस दौरान पीसीसी सदस्य हरिसिंह राठौड़, श्रीराजपूत करणी सेना प्रदेश उपाध्यक्ष कुलदीप सिंह ताल, जिलाध्यक्ष चंद्रभानसिंह मोयणा, अर्जुनसिंह चूंडावत, पूर्व सरपंच दिग्विजयसिंह भाटी, पूर्व केलवा सरपंच दिग्विजयसिंह राठौड़, युवा कांग्रेस राजसमंद विधान सभा अध्यक्ष मुकेश भार्गव, प्रदीप पालीवाल, सुन्दरलाल कुमावत, अशोक टांक, संगीता चौहान, महेंद्रसिंह चौहान, झौर सरपंच शिवचरण सिंह चौहान सहित बड़ी संख्या लोग मौजूद थे।

कांस्टेबल का अपहरण करने वाला कांस्टेबल अजमेर में पकड़ा गया

उदयपुर। खाकी ने ही कुछ दिनों पहले खाकी का अपहरण किया और अब वहीं खाकी, खाकी की कैद मेें है। यह मामला सूरजपोल थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। पुलिस लाईन में तैनात कांस्टेबल कानसिंह ने गत 2 नवम्बर को उसके अपहरण का रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। इसके तहत उसने बताया कि कांस्टेबल धर्मीचंद ने उसे लाईन के प्रवेष द्वार पर फोन करके बुलाया । जब वह वहां पंहुचा तो धर्मीचंद और उसके साथ आए चार लोगों ने उसे जबरन स्वीफ्ट कार में डालकर डबोक की ओर ले गए। जहां इन सभी आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की और कहा कि अशोक मुंशी के खिलाफ आए दिन शिकायत करता रहता है इसलिए तुझे आज जिंदा नहीं छोड़ेंगे। हालाकि कानसिंह जैसे – तैसे खुद को आरोपियों के चंगुल से मुक्त होने में सफल रहा और रिपोर्ट दर्ज करवाई। इस पर सूरजपोल थाना पुलिस ने कई दिनों से फरार चल रहे धर्मीचंद को आखिरकार शुक्रवार को गिरफ्तार कर ही लिया। पुलिस ने आरोपी धर्मीचंद को अजमेर जिले से गिरफ्तार किया है। अब कांस्टेबल धर्मीचंद से पुलिस इस अपहरण और इसके पीछे छिपे राज उगलवाएंगी।