भंसाली और दीपिका पादुकोण का सर काटने वाले को पांच करोड़ का इनाम – फिल्म पद्मावती विवाद (video)

0

पोस्ट न्यूज़ .  संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती की प्रस्तावित रिलीज डेट नजदीक आते ही विवाद चरम पर पहुंचता जा रहा है. सिनेमाघर जलाने, जान से मारने और हिंसा फैलाने की धमकी दी जा रही है. इन सबसे आगे बढ़कर अब मेरठ से भी अखिल भारतीय युवा क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिषेक सोम ने विवादित बयान देकर सनसनी फैला दी है। अभिषेक सोम ने कहा है कि फिल्म पद्मावती यदि रिलीज होती है तो दीपिका पादुकोण और संजय लीला भंसाली की गर्दन काटने वाले को पांच करोड़ का नगद ईनाम दिया जाएगा।

https://www.youtube.com/watch?v=4UEk8cMuczQ

गौरतलब है कि फिल्म में अभिनेत्री दीपिका पादुकोण पद्मावती का किरदार निभा रही हैं। सोम का कहना है कि पद्मावती के किरदार को इस फिल्म में गलत ढंग से दर्शाया गया है। इससे पूरा क्षत्रिय समाज आहत है। उन्होंने कहा कि इतने धरना-प्रर्दशन और विरोध के बाद भी फिल्म रिलीज करने की तैयारी चल रही है। इस लिए अब क्षत्रिय आरपार की लड़ाई को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि दीपिका और संजय लीला भंसाली देश छोड़ दें नहीं तो मरेंगे।

उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि दोनों को अब कोई पुलिस या सुरक्ष बचा नहीं पाएगी। पुलिस -प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। इसके अलावा, करणी सेना का कहा कि इस फिल्म से राजपूत समाज की बेज्जती होगी, इसलिए अगर ये फिल्म रिलीज होती है तो हम फिल्म की अभिनेत्री का नाक काट लेंगे। इसके साथ ही राजपूत करणी सेना ने फिल्म के विरोध में 1 दिसम्बर को देशव्यापी बंद का ऐलान किया है।

 

हड़ताल के दौरान हुई 30 मौतों के जिम्मेदार है डॉक्टर – मौतों का खामियाजा भी उन्हें ही भुगतना पड़ेगा .

0

पोस्ट न्यूज़ . डॉक्टरों की हड़ताल के दौरान हुई 30 लोगों की मौतों पर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए उनके परिजनों को मुआवजा देने की बात कही है . और यह मुआवजा इन हडताली डॉक्टरों से लेकर दिया जाय और इन मौतों की जवाबदेही देहि इनकी तय की जाय . कोर्ट ने डॉक्टरों की जवाबदेही तय करने के लिए राज्य सरकार से शपथ पत्र मांगा है .

न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने इस बारे में महाधिवक्ता के जरिए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने सुनवाई 27 नवम्बर तक टालते हुए हड़ताली डॉक्टरों की जवाबदेही तय करने के लिए राज्य सरकार से शपथ पत्र मांगा है। आपको बता दें कोर्ट ने हड़ताल के दौरान 30 लोगों की मौत को गंभीरता से लिया है। अतिरिक्त स्वास्थ्य निदेशक डॉ. कुसुम सांघी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था। सरकार ने लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं को  में रखते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया था। डॉ. सांघी की ओर से अधिवक्ता प्रवीण शर्मा ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का प्रार्थना पत्र निरस्त करने के राज्य सरकार के निर्णय को चुनौती दी थी। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य मंत्री के बयान का हवाला देकर डॉक्टर हड़ताल के दौरान 30 लोगों की मौत के बयान को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने इस बात को भी गंभीरता से लिया कि राज्य सरकार ने वेतन सहित अन्य मांगों को मान लिया, इसके बाद हड़ताल समाप्त हुई।

गौरतलब है कि सात दिनों में हुई 30 मौतों के बाद डॉक्टरों की हड़ताल रविवार रात 11 बजे समाप्त हुई थी। 8.30 घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद सेवारत चिकित्सक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी और चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने इसकी आधिकारिक घोषणा की थी। हड़ताल समाप्ति की घोषणा से पहले कई बार नाटककीय घटनाक्रम चला। रात 9 बजे सेवारत डॉक्टरों की मांगों पर सहमति बनने के बाद रेजीडेंट्स को बुलाया गया। रेजीडेंट की मांगों पर रात 1.30 बजे सहमति बनी थी

 

बिंदी, काजल, सिंदूर पर GST नहीं तो “नेपकिन” पर आखिर क्यों – दिल्ली हाईकोर्ट

0

post News . दिल्ली हाईकोर्ट ने जीएसटी की कटोती पर केंद्र सरकार से एक सवाल पुच लिया . कि जब काजल, बिंदिया, सिंदूर जैसी चीजों पर जीएसटी नहीं लग रहा है तो महिलाओं के लिए बेहद जरूरी चीज सेनेटरी नेपकिन पर जीएसटी कैसे लगाया जा सकता है , सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा की आपके पास क्या इसके लिए कोई व्याख्या है. केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं के लिए आवश्यक सेनेटरी नेपकिन को 12 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में रखा जिसके बाद सोशल मिडिया पर सरकार का खासा मजाक भी बनाया और इस बात का विरोध भी हुआ . और अब सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा है .

कोर्ट ने इस बात पर भी अपनी नाराजगी जताई की, 31 सदस्यों की जीएसटी काउंसिल में एक भी औरत क्यो नहीं है। कार्ट ने ये भी सरकार से कड़े लहजे में ये भी पूछा कि, क्या इसको लेकर आपने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से इस बाबत कोई बात किया या फिर आपने केवल इंपोर्ट और एक्सपोर्ट ड्यूटी को देखकर सैनेटरी नैपकिन पर जीएसटी लगाने का फैसला किया। कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई 14 दिसंबर को करेगा। हाई कोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की एक पीएचडी स्कॉलर जमिरा इसरार खान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा। इस याचिका में सैनेटरी नैपकिन पर लगाया जाने वाला 12 फीसदी जीएसटी को अवैध एवं असंवैधानिक बताया था।

सरकार के एक आला अधिकारी ने बताया कि, यदि हम सैनेटरी नैपकिन पर जीएसटी की छूट देते हैं तो इसकी कीमत में बढ़ातरी हो जाएगा। सैनेटरी नैपकिन पर जीएसटी हटा लेेने से घरेलू मैन्यूफैक्चरर को कोई भी इनपुट के्रडिट नहीं मिल सकेगा। सरकार द्वारा फाइल किए काउंटर एफिडेविट में कहा गया है कि, इससे घरेलू रूप से निर्मित सैनेटरी नैपकिन को आयात के रूप में भारी नुकसान होगा। जो की जीरो रेटेड होगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि, ये एक तकनीक एवं सांख्यिकी कारण है और सरकार नंबर गेम में उलझा रही है।

सरकार ने अपने काउंटर ऐफिडेविट में कहा कि, सैनेटरी नैपकिन बनाने के लिए प्रयोग होने वाले कच्चे सामानों पर 12 से 18 फीसदी का जीएसटी लगता है यहां तक सैनेटरी नैपकिन पर 12 फीसदी जीएसटी लगाना भी जीएसटी स्ट्रक्चर में एक उलटाव है। ये भी कहा गया कि, टैक्स दर न तो मनमाना है और न ही असंवैधानिक है।

परिषद से दायर याचिका पर जवाब मांगा था। याचिकाकर्ता ने ये दावा किया है कि ये याचिका महिलाओं के हित के लिए दायर किया गया है, खासकर उन महिलाओं के लिए तो नीचले आर्थिक तबके से आती है। एडवोकेट अमित जॉर्ज द्वारा दायर किया गया इस याचिका में कहा गया है कि, ये एक जमीनी स्तर का मसला है और सैनेटरी नैपकिन से 12 फीसदी के जीएसटी को पूरी तरह से खत्म कर देना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि, सरकार ने काजल, कुमकुम, बिन्दी, सिंदुर, आल्ता, प्लास्टिक और चुडिय़ां और पूजा समग्री जैसी वस्तुओं से पर जीएसटी नहीं लगाया है। इसके साथ ही सभी तरह के कंट्रासेप्टिव जैस कंडोम पर भी जीएसटी नहीं लगाया गया है। लेकिन महिलाओं की सेहत के लिए जरूरी सैनेटरी नैपकिन पर अभी जीएसटी लगाया जा रहा है।

पद्मावती देश का गौरव कहा अजमेर दरगाह दीवान ने – मुस्लिम दें विरोध में राजपूतों का साथ

0

पोस्ट न्यूज़ . सूफी संत ख्वाज़ा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दीवान ने “पद्मावती” फिल्म का विरोध करते हुए कहा कि संजय लीला भंसाली पद्मावती फिल्म के जरिये देश में धार्मिक भावनाएं भड़का कर माहोल खराब करना चाहते है. उन्होंने संजय लीला भंसाली की तुलना सलमान रश्दी और तसलीमा नसरीन से करते हुए कहा कि भंसाली बेवजह विवाद पैदा कर देश का सांप्रदायिक सोहार्द ख़त्म करना चाहते है . पद्मावती इस देश का गौरव है .

दरगाह दीवान ने कहा कि भंसाली की फिल्म इतिहास और तथ्यों से परे नजर आती है। चित्तौड़ की महारानी पदमावती देश और राजपूत समाज की वीरता और सम्मान का प्रतीक है। उनकी नाराजगी को देखते हुए मुस्लिम समुदाय को भी राजपूत समुदाय को समर्थन देना चाहिए। भंसाली ने इतिहास को तोड़-मरोड़कर पदमावती फिल्म का निर्माण किया। इससे राजपूत समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। इससे पहले रश्दी और नसरीन ने इस्लाम धर्म के खिलाफ अनर्गल टिप्पणियां कर मुस्लिम समुदाय के लोगों की भावनाएं आहत करने की कोशिश की है। फिल्म में पदमावती और अलाउद्दीन खिलजी के कथित चित्रण से धार्मिक भावनाएं भड़क सकती है।

दीवान जैनुअल आबेदीन ने कहा कि फिल्म का मकसद किसी समुदाय की भावना को आहत करना नहीं होता है। लेकिन पद्मावती फ्लिम में राजपूतों के गौरवशाली इतिहास को धूमिल करने और तोडऩे-मरोडऩे का प्रयास किया गया है। ऐसे में भारत सरकार को तत्काल फिल्म प्रदर्शन पर रोक लगानी चाहिए। पद्मिनी राजस्थान और पूरे देश के स्वाभिमान का प्रतीक हैं। उनके अपमान को कोई भी स्वीकार नहीं करेगा।

 

अरविन्द सिंह मेवाड़ और लक्ष्यराज ने कहा इतिहास के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी – लेकिन विरोध का तरिका शांतिपूर्ण हो .

उदयपुर . संजयलीला भंसाली की फिल्म पद्मावती पर पंगा अब पुरे देश में बड़ा रूप ले चुका है . राजस्थान में हर जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे है . हर संगठन ने फिल्म का विरोध करते हुए इसके प्रदर्शन को रोकने की मांग की है . पूर्व में राजस्थान के कई राजघरानों ने इसका विरोध किया और अपने बयान जारी करदिये . बुधवार को मेवाड़ पूर्व के राजघराने से अरविन्द सिंह मेवाड़ और लक्ष्यराज सिंह ने भी अपना बयान फेसबुक के जरिये जारी किया . जिसमे उन्होंने फिल्म का विरोध तो किया है लेकिन किसी भी तरह की बयान बाजी और तोड़ फोड़ को उचित नहीं माना .

फेसबुक और whatsapp पर अरविन्द सिंह मेवाड़ एवं लक्ष्य राज सिंह मेवाड़ के बयान आने बाद जहाँ कई लोगों ने उनका समर्थन किया वही कई पोस्ट इस पूर्व राज घराने के विरोध में भी वायरल हो रही है .

आइये देखते है मेवाड़ के पूर्व राज घरानों ने अपने बयानों में क्या कहा .

क्या कहा अरविन्द सिंह मेवाड़ ने :

मे रानिवेदन है कि इस प्रकरण को बैठकर सुलझाया जाए। इस प्रकार के रोष और आक्रामक रुख को अपनाने से कुछ नहीं होता। आक्रामक रोष अपनाने से सभी पक्षों काे हानि है। इसमें किसी की जीत है, किसी की हार है। ऐसा कोई माध्यम ढूंढा जाए कि जिससे बातचीत से इस मसले को सुलझाया जा सके। यही परिपक्व तरीका है। यह कोई मजाक नहीं। यह चित्तौड़ और राजस्थान ही नहीं, पूरे देश की नारी अस्मिता का प्रश्न है। हमारे सारे राजपूत भाई और हम खुद इस विषय पर फिल्म बनाने के विरोध में हैं, क्योंकि आप कितना भी कर लें, असलियत आप नहीं बता पाएंगे। असलियत बताएंगे तो फिल्म नहीं बनेगी। बनेगी तो बहुत ही रूखी होगी। आप जिस मकसद से फिल्म बनाना चाहते हैं, आपका मकसद पूरा नहीं होगा और बॉक्स ऑफिस में मुनाफा नहीं दिला पाएगी। आपके लिए तो ये व्यापार है। मैं चाहता हूं, आप ऐसी फिल्म बनाएं जिससे किसी समाज की भावनाएं आहत हों। पूरा समाज उमड़ा हुआ है। आज बच्चे इतिहास नहीं पढ़ते। इतिहास की पुस्तकों में से बहुत सा इतिहास निकाल दिया गया है। बड़ा दुख है, ये बच्चे इतिहास को फिल्मों के माध्यम से देखते हैं और उसी को वे पत्थर की लकीर मानते हैं। लिहाजा, बालीवुड के प्रॉड्यूसर की जिम्मेदारी है कि वह इस इस पत्थर की लकीर की जिम्मेदारी ले और ऐसा कुछ नहीं करे, जिससे युवा पीढ़ी इतिहास को गलत ढंग से ले ले और फिर वह फिल्म की कहानी काे ही सच मान ले। मैंने यह फिल्म नहीं देखी है। इसलिए दावे के साथ नहीं कह सकता, फिर भी जो कुछ देखने को मिला है, ये ऐतिहासिक तथ्यों से बहुत परे है और इस कारण ये आर्टिस्टिक लाइसेंस की परिभाषा में भी नहीं सकती है।

क्या लक्ष्यराज सिंह ने :

नमस्कार , मै लक्श्राज सिंह मेवाड़ आप सभी से मुखातिब हो रहा ही . रानी पद्मावती पे काल्पनिक फिम के विरोध में बयान बाजी करना तो बहुत आसान है , लेकिन इसका समाधान निकालना आज की सदी की सबसे बड़ी शिक्षा है . क्या इसे पवित्र विषय को एक मरोरंजन के रूप में पेश करना किसी निर्देशक की जिम्मेदाराना शैली है क्या ?मै इस फिल्म के कलाकारों से भी पूछना चाहता हूँ कि उन्होंने मर्यादा में रह कर एक सच्चे कलाकार होने का फ़र्ज़ निभाया है क्या ? क्या पैसा ही सबकुछ होता है ? अब इस वक़्त मेरे परिवार और मुझे हमारे पूर्वजन और मेवाड़ के प्रति हमारे समर्पण का प्रमाण देना पडेगा . फिल्म के प्रति मेरे ज़ज्बात को जानने का क्या जरिया गैर जिम्मेदाराना बयान बाजी , तोड़फोड़ और हाथापाई तक ही सिमित रह गया है क्या ?

मेरे दर्द को जानने का यही एक तरिका है क्या ? ऐसे किसी भी प्रकार के इतिहास के साथ खिलावाड़ का मेवाड़ बहिष्कार करता है . और करता रहेगा . इस फिल्म से जो रोष उभरा है उससे हमे एकजुट होना चाहिए , नाकि एक दुसरे की आलोचना करनी चाहिए .

हम सबका प्रयास हो कि भारत सरकार एक सख्त क़ानून बनाए और उसे लागू भी करवाए ताकि भविष्य में केवल मेवाड़ ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारत में मनोरंजन के नाम पर इतिहास , संस्कृति और लोगों की भवनाप्न के साथ छेड़छाड़ करने की कोई भी जुर्रत ना कर सके . यह प्रयास और एकता व्यर्थ जाती है तो इसका सर्वाधिक दुःख मुझे होना . आप सभी की एक जुटाना वाकई में काबिले तारीफ़ है . मन में बहिष्कार की उठ रही ज्वाला को हमे क़ानून के दायरे में रह कर मंजिल तक पहुचाना होगा उम्मीद करता हूँ की आप मेरे विचारों के साथ सहमत होंगे जय मेवाड़ जय भारत .

 

डूंगरपुर शहर की राजकीय उच्च माध्यमिक महारावल स्कूल में पिता पुत्र ने टोपीदार बन्दूक से की फायरिंग

उदयपुर. अंधाधुंध फायरिंग की घटना अमेरिका यूरोप में सुअनाने को मिलती है लेकिन राजस्थान के डूंगरपुर जिले में शहर की राजकीय उच्च माध्यमिक महारावल स्कूल में पिता पुत्र ने अंधाधुंध टोपीदार बन्दूक से फायरिंग कर दी. फायरिंग की घटना से पुरे शहर में दहशत का माहोल हो गया . स्कूल के दरवाजे पर लगे फायर में तीन छात्रों को हलकी चोटे आई . पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है .

जिस समय फायरिंग की घटना हुई उस वक़्त स्कूल में उस समय विधिक साक्षरता कार्यक्रम चल रहा था। जिसमें जिला न्यायाधीश भी मौजूद थे। स्कूल में 1700 बच्चे पढ़ते हैं जो इस कार्यक्रम में बैठे हुए थे, लेकिन 12वीं विज्ञान-बी के क्लासरूम में कोई चोरी कर ले, इस कारण 5 बच्चों को मॉनिटरिंग के लिए बैठा रखा था। तभी आरोपी जुम्मे मेवाफरोश और उसके पुत्र अमजद ने मिलकर स्कूल के कमरे की खिड़की पर ताबड़तोड़ फायरिंग की।

जानकारी के अनुसार जुम्मे मेवाफरोश ने स्कूल से लगती सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा था। यहीं पर उसका एक बगीचा भी है। प्रशासन ने जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराकर स्कूल को सौंपी थी। और स्कूल ने 12वीं क्लास के लिए रूम बना दिया था। बच्चे बगीचे की दीवार फांदकर भागते थे। इससे वह बच्चों से चिढ़ता था और अक्सर स्कूल में नुकसान होने की बात कहकर गाली-गलौच करता था। बुधवार को भी वह आया और गाली-गलौच करने लगा। शिक्षकों ने समझाने की कोशिक की लेकिन वह नहीं माना। इसी दौरान उसने बंदूक निकालकर फायरिंग शुरू कर दी। कुछ देर बाद उसका बेटा भी बंदूक लेकर गया। उसने भी ताबड़तोड़ फायरिंग की और फरार हो गया।

शहरके राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल महारावल में बुधवार को गोली चलाने की घटना से ठीक आधे घंटे पहले हमलावर जुम्मे खान स्कूल में पहुंचा था, जहां उसने स्टाफ के साथ गाली-गलौच की।
इस दौरान धमकाते हुए कहा था कि सभी को गोली से उड़ा दूंगा। ठीक इसके आधे घंटे के बाद वापस लौटा और गोलियां चाल दी। इसकी पुष्टि करते हुए स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि वह हर रोज स्कूल में आकर गाली-गलौच करता है। बुधवार को सुबह 11.30 बजे हुई इस घटना के बाद एक ओर पूरे शहर में सनसनी फैल गई, वहीं गोली चलाने के बाद भी अपने खेत में आरोपी करीब दो घंटे तक खड़ा रहा।

हिन्दुस्तान जिंक में 41वां भूमिगत खान सुरक्षा, स्वच्छता एवं सीलिकोसिस जागरूकता सप्ताह मनाया।

हिन्दुस्तान जिंक द्वारा जावर माईन्स के महाकुमार मंगलम स्टेडियम में महानिदेशालय खान सुरक्षा, उदयपुर व अजमेर क्षेत्र के तत्वावधान में 41 वां भूमिगत खान सुरक्षा, स्वच्छता एवं सीलिकोसिस जागरूकता सप्ताह आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महानिदेशक खान सुरक्षा पी.के.सरकार, विषिष्ट अतिथि उपमहानिदेशक खान सुरक्षा उत्तर पष्चिमी जोन उदयपुर नारायण राजक थे।
कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों ने विभिन्न खदानों द्वारा प्रदर्षित भूमिगत खदान आपातकालीन बचाव उपकरण एवं प्राथमिक सहायता प्रदर्षनी के अवलोकन कर की। तत्पष्चात विधिवत द्वीप प्रज्जवलन कर सभी ने उन लोगो। के लिये दो मिनट का मौन रखा जिनकी भारत में कही भी खनन के दौरान दुर्घटना से मृत्यु हो गयी हो। साईट प्रेसिडेंट जावर पीएस जैतावत ने अपने उद्बोधन में सभी अतिथियों का स्वागत किया।
मुख्य अतिथि महानिदेषक खान सुरक्षा पी.के.सरकार ने इस अवसर पर हिन्दुस्तान जिंक द्वारा अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और जागरूकता के प्रति किये जा रहे कार्यो की सराहना करते हुए कहा कि हिन्दुस्तान जिं़क खनन के क्षेत्र में एषिया में दूसरे नंबर पर आता है जो कि अपने आस-पास के क्षेत्र में सीएसआर के तहत् भी सराहनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने ज़ावर में फुटबाॅल अकादमी की स्थापना को भी महत्वपूर्ण पहल बताया। सरकार ने कहा कि जितने भी खदान मालिक और प्रबंधक है वे सिलिकोसिस बीमारी के प्रती गंभीरता से ध्यान दे। इस प्रकार के आयोजन को अगले वर्ष उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित करने की मंषा जताई।
कार्यक्रम संयोजक निदेषक खान सुरक्षा उदयपुर क्षेत्र, एके पोरवाल ने इस वर्ष के सुरक्षा सप्ताह की थीम सुरक्षा, स्वच्छता एवं सीलिकोसिस जागरूकता के बारे मे अवगत कराते हुए कहा कि सिलिकोसिस एक गम्भीर व घातक बीमारी है जिसे उचित सावधानी व विवेकपूर्ण तरिके से रोका जा सकता है। सिलिकोसिस फेफड़ों की बीमारी है जो कि लम्बे समय तक सिलिका के कणों के श्वास के साथ फेफड़ों में जाने से होती है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिन्दुस्तान जिं़क के मुख्य प्रचालन अधिकारी एलएस शेखावत ने कहा कि सुरक्षा हमारी पहली और महत्वपूर्ण प्राथमिकता रही है जिसके लिए किसी भी प्रकार के समझौते से हमारी हर खदान प्रभावपूर्ण कार्यप्रणाली हेतु प्रतिबद्ध है। सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है और हम महानिदेषालय खनन सुरक्षा के सभी निर्देषों का पालन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान जिं़क सदैव सुरक्षित काम के महौल पर उच्च मानकों को स्थापित करने के लिए हर कदम उठाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित खनन प्रणाली का सख्ती से पालन करने और किसी भी जोखिम से परे कार्य का वातावरण प्रदान करना उच्च मानकों के पालन की शर्त है यह कदम उसी दिषा की और महत्वपूर्ण है। सिलिकोसिस जैसी घातक बीमारी से बचाव एवं रोकथाम इस सप्ताह के महत्वपूर्ण पहलू में से एक है।
इस अवसर पर हिन्दुस्तान जिं़क के मुख्य वित्त अधिकारी अमिताभ गुप्ता ने हिन्दुस्तान जिं़क की सभी खदानों के मार्च 2018 तक भूमिगत खनन हो जाने की जानकारी दी।
इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों और कठपुतली शो के माध्यम से खान सुरक्षा एवं स्वच्छता जागरूकता का संदेष दिया गया। सर्वश्रेष्ठ खान एवं कर्मचारियों को अतिथियों ने पुरस्कृत किया।
हिन्दुस्तान जिंक के हेड कार्पोरेट कम्यूनिकेशन पवन कौषिक ने बताया कि हिन्दुस्तान जिं़क ओपन कास्ट माइनिंग से पुरी तरह अंडरग्राउण्ड माइनिंग के परिचालन की ओर बढ़ रहा है सुरक्षा हमेषा से हमारी प्राथमिकता रही हैं। हम आॅन जाॅब और आॅफ जाॅब सुरक्षा पर ध्यान देते हैं, सुरक्षा के लिए हम आम लोगों को रोजमर्रा के जीवन में भी जागरूक करते रहते है बीईंग सेफ कार्यक्रम सुरक्षा के प्रति आम लोगों को जागरूकरने के का एसा माध्यम है जिसके माध्यम से कर्मचारियों, परिवार और स्कूली बच्चों को घर,सडक एवं कार्य स्थल पर सुरक्षा हेतु जागरूक किया जा चुका है।
इस अवसर पर निदेषक खान सुरक्षा अजमेर क्षेत्र अरविन्द कुमार, मानिदेषक खान सुरक्षा उदयपुर पीके कुण्डु, आॅपरेषन हेड राजीव श्रीमाली, हिन्दुस्तान जिं़क वर्कर्स फेडरेषन के महासचिव केएस शक्तावत सहित विभिन्न खदानों के प्रतिनिधी, कर्मचारी एवं कामगार उपस्थित थे।

बाल दिवस पर उदयपुर कलेक्टर ने बलून बेचने वालों के हाथों में थमाई पुस्तकें – एक दिन का ड्रामा या बदलेगी सूरत

उदयपुर. 14 नवम्बर “बालदिवस के रूप में मनाया जाता है . हर स्वयं सेवी संस्थान इस दिन बच्चों के लिए कोई ना कोई कार्य करते है . जिला कलेक्टर ने सुखाडिया सर्कल पर बलून व् अन्य सामग्री बेचने वाले बच्चों को पास बुलाकर उनके हाथों में पुस्तकें  गिफ्ट किट थमाई जिसमे किट में स्कूल बैग, स्लेट, पेन्सिल, बॉक्स, हिन्दी की अक्षरमाला, पानी की बोटल, स्वेटर एवं खिलौने शामिल थे और उन्हें प्यार से पास बुला कर ढेर सारी बातें की उन्हें पढ़ाई के बारे में भी पूछा कि क्या वह पढ़ना चाहते है . गैर सरकारी संगठन इम्पिटस ने उन बच्चों को पढ़ाने का का जिमा भी उठाया रोज़ शाम को आधा घंटा उन्हें वही पढ़ने आने के लिए वादा लिया . इस दौरान नगर निगम आयुक्त ओपी बुनकर, महिला एवं बाल विकास विभाग की उप निदेशक डॉ. तरू सुराणा एवं रेडक्रॉस सोसायटी के उपाध्यक्ष डॉ. रणवीर मेहता आदि उपस्थित थे। इससे पूर्व सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया

हालाँकि बाल मजदूरों के लिए उद्या गया यह कदम काफी अच्छा है लेकिन क्या इस कदम को सार्थक माना जा सकता है? क्या यह बच्चे रोज़ की तरह बलून आदि नहीं बेचेगें ? क्या इस पहल से कोई सूरत बदलने वाली है या यह सिर्फ एक दिन का छपाउ ड्रामा बन कर रह जायेगा ? क्या कोई एसी व्यवस्था नहीं की जा सकती जिससे यह बच्चे अपनी पढ़ाई नियमित कर सकें और इनके परिवार के काम में कुछ हाथ भी बंटा सकें.

या यह कार्यक्रम सिर्फ एक बालदिवस के दिन फोटो खिचाऊ और खबर छपाऊ कार्यक्रम बन कर ही रह जाएगा . अगले साल फिर 14 नवम्बर आयेगा फिर एक संस्था के साथ सारे अधिकारी मिल कर एक और नया कार्यक्रम आयोजित करेगें फिर एक दिन की वाहवाही होगी फिर खबर चलेगी फिर फोटो अखबारों में छपेगा और फिर बच्चे रोज़ की तरह पांच का एक लेलो साहब पांच का एक लेलो साहब कहते हुए बलून बेचेगें ?

पद्मावती का ट्रेलर दिखाने पर सिनेमा हॉल में करनी सेना ने की जम कर तोड़फोड़

कोटा पोस्ट। संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती का विरोध कम होने का नाम नहीं ले रहा है। करणी सेना सहित कई संगठनों ने फिल्म का विरोध कर फिल्म प्रदर्शित नहीं किये जाने की चेतावनी दी है। राजस्थान के कोटा में आकाश माल में फिल्म पद्मावती का ट्रेलर दिखाए जाने पर सिनेमा हाल में करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने जम कर तोड़ फोड़ की। मॉल की तीसरी मंजिल पर स्थित गोल्ड सिनेमा हाल में करणी सेना ने तोड़ फोड़ की और वहां मोजूद पुलिस वालों के सामने ही निकल कर चले गए। माल के आगे और पीछे के गेट से घुसे करणी सेना के कार्यकर्ता मॉल की पहली मंजिल से तीसरी मंजिल तक तोड़ फोड़ करते हुए घुसे जहाँ भी कांच दिखा तोड़ते गए। फिल्मों के पोस्टर फाड़ दिए कई फर्नीचर आदि तोड़ दिए। मॉल में मोजूद म्नाहिलाएं बच्चे बुरी तरह डर गए जो धह्शत के मारे चिल्लाते हुए बाहर निकले।

प्रदर्शनकारियों ने आधे घंटे तक मॉल में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। एक साथ सिनेमा हॉल में नारेबाजी करते हुए १० से १५ कार्यकर्ता अंदर घूसे और जमकर तांडव मचाया। उनके आक्रोश को देखते हुए उन्हें कोई रोक नहीं सका। सिनेमा हॉल में से लोग बाहर भागने लगे। कई लोग भगदड में नीचे गिर गए। महिलाओं की चीख पुकार के बीच करणी सेना ने दरवाजों के कांच तोड़ दिए . आकाश मॉल में करणी सेना के कार्यकर्ताआें ने कई खिड़की व दरवाजों के कांच तोड़ दिए। कम्प्यूटर, एलसीडी, काउंटर, फ्रिज, वाटर कूलर, कॉफी मशीन, शोकेस, बिलिंग मशीन, कुर्सिया, डस्टबीन तोड़ दिए .

करनी सेना ने फिल्म के विरोध के चलते मॉल पर पथराव किया। पथराव करते ही बाहर भगदड़ मच गई। लोग इधर-उधर बचने का प्रयास करते रहे। पुलिस जाप्ता पहले कम था लेकिन बाद में अतिरिक्त जाप्ता बुलाया गया और पुलिस ने करणी सेना के कार्यकर्ताओं लाठियां भांजना शुरू कर दिया। पुलिस ने आईटीआई कॉलेज तक कार्यकर्ताओं को दौडाया और उनपर लाठियां बरसाई। इसके साथ ही पुलिस ने बंदूक के उल्टे बट से भी कार्यकर्ताओं को ठोका।

मेवाड़ की धरा पर आकर पद्मावती के समर्थन में बोल कर चला गया नील नीतिन मुकेष, बयान में बोला कहानियां तो बदलती रहती है

उदयपुर। फिल्म पद्मावती को लेकर चल रहे विवाद के बिच में फिम अभिनेता मेवाड़ में आये और फिल्म का समर्थन करके चले गए। उन्होंने विवाद और विरोध को बेमानी बताया।
मेवाड़ ही नहीं पुरे राजस्थान में फिल्म पद्मावती के प्रदर्शन को लेकर विरोध चल रहा है। मंगलवार को फिल्म अभिनेता नील नितिन मुकेश एक निजी कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आये जिसमे उन्होंने मिडियाकर्मियों से बातचीत की ओर पद्मावती फिल्म को लेकर पूछे गये सवाल पर फिल्म का समर्थन करते हुए कहा कि कोई भी फिल्म हो कहीं न कही लोग उसमें विवाद ढूंढ ही लेते है। उन्होंने यह भी कहा ​कि सभी लोगों को इसे एक फिल्म के रूप से देखना चाहिए और अगर वह उसे अपने अनुरुप ऑडियंस तक पहुंचाना चाहते है तो गलत कुछ भी नही है। कई बार ऐसा होता है कि हम इतनी कहानियां सुनते हैं और जब तक कहानियां एक से दूसरे तक पंहुच जाती है तब तक कई बार कहानिया भी बदल जाती हैं ओर हम भी किसी को कहानी सुनाते तो कहानी में कुछ बदलाव आ ही जाता है। हालांकि मुकेश ने इस फिल्म के टाइटल के बदलने को लेकर कुछ भी कहने से मना कर दिया लेकिन एक दर्शक होने के नाते यह जरूर कहा कि फिल्म को देखने के लिए दर्शक उत्सुक है वहीं तकनीकी जानकारी के बारे में यह कहा कि फिल्म से जुडे हुए नही है इसलिए उन्हे इसके बारे में ज्यादा पता नही है मेरी फिल्म होती तो शायद फिल्म के बारे में ज्यादा कुछ बता पाता। उन्होंने उम्मीद जताई है कि फिल्म अच्छे से आये और दर्शक इस फिल्म को देख सके और किसी कलाकार का नुकसान नही हो।