अवैध हथियारों, फर्जी लाइसेंस के मामले में एटीस ने हिन्दू जागरण मंच के पदाधिकारी सहित 9 रसूखदार गिरफ्तार किये, बाकी पर भी होगी कारवाई

उदयपुर। एटीस ने हथियारों के फर्जी लाइसेंस और अवैध हथियारों के मामले में हिन्दू जागरण मंच के रविकांत त्रिपाटी सहित शहर के आठ अन्य नामचीन लोगों को गिरफ्तार किया है। सूत्रों के अनुसार एटीस की कड़ी पूछताछ में सामने आया कि हिन्दू जागरण मंच के रविकांत त्रिपाटी का संपर्क था अजमेर के अवैध हथियारों के कारोबारी जुबैर से। कई भू-माफिया और रसूखदारों को त्रिपाटी ने ही दिलवाए थे हथियार। सूत्रों की माने तो 40 से अधिक हो सकते है गिरफ्तार।  
एटीएस ने हथियारों के फर्जी लाइसेंस और अवैध हथियारों  की कार्रवाई को अंजाम देते हुए उदयपुर के कई रसूखदारों के पास से हथियारों के फर्जी लाइसेंस और अवैध हथियार जब्त किये थे। पिछले पांच दिनों से एटीएस ने इन रसूखदारों के नामों का खुलासा नहीं किया था लेकिन गुरुवार को जयपुर में तलब किये जाने के बाद ये नामचीन लोग बेनकाब हो गए। जानकारी के अनुसार उदयपुर से ९ लोग जयपुर गए थे  जिन्हे एटीस ने पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों की माने तो हिन्दू जागरण मंच के एक पदाधिकारी ने एटीस की कड़ी पूछताछ में अपना मूह खोला और कई नाम सामने आये है।
अवैध हथियारों और फर्जी लाइसेंस का भंडा फोड़ करते हुए एटीस ने रविवार को अजमेर में आर्म्स अम्युनेशन वली मोहम्मद एंड संस के जुबेर को गिरफ्तार किया था। सोमवार को उदयपुर में कारवाई करते हुए 13 लाइसेंस और २० हथियार जब्त किये थे। एटीस ने गुरुवार को फर्जी हथियारों के लाइसेंस बनवाने वालों को जयपुर मुख्यालय में तलब किया। जिसमे से 9 लोग पहुचे इनमे हिन्दू जागरण मंच के चित्तौड़ प्रांत प्रमुख रविकान्त त्रिपाठी । भुव्यवसाई दीपक परिहार, अरवाना कॉम्प्लेक्स के मालिक हसन पालीवाला, भुव्यवसाई पारस बोलिया, जयशंकर राय, संजय तलेसरा,विकास सुहालका, इंतखाब आलम और सुमित भंडारी जयपुर एटीस मुख्यालय पहुचे थे।  जानकारी के अनुसार एटीस ने इनसे पूछताछ कर गिरफ्तार कर लिया। बाकी के लोग जयपुर नहीं पहुचे और अपने बचाव का जुगाड़ में लगे हुए है।
सूत्रों के अनुसार जयपुर में एटीस ने सभी से कड़ी पूछताछ की जिसमे हिन्दू जागरण मंच के रविकांत त्रिपाटी ने कई खुलासे किये है। सूत्रों की माने तो रविकांत त्रिपाटी अजमेर में पकडे गए वालिमोहम्मद एंड संस  के जुबेर के संपर्क में था और वह यहाँ के नामचीन लोगों को हथियारों के लाइसेंस बनवाने का काम करता था और बिच में लाखों रूपये रख लेता था २ से ढाई लाख रूपये जुबेर को देता जब की यहाँ से पांच से आठ लाख रूपये तक लेलेता था जिसमे फर्जी लाइसेंस और अवैध हथियार मुहय्या करवाता था। रविकांत त्रिपाटी के खुलासे के बाद १३ से यह संख्या ४० तक पहुच सकती है शहर में और भी फर्जी लाइसेंस और हथियार मिल सकते है।
 गौरतलब है कि रविकान्त का संघ में काफी रसूख है और वह गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया के करीबी रहे है कुछ समय पूर्व 100 फीट रोड पर बने त्रिपाठी के प्रोपर्टी ऑफिस का उदघाटन भी गृह मंत्री द्वारा किया गया था । इससे तो साबित होता है कि रविकांत की कटारिया के साथ संघ के लोगों से भी नजदिकियां थी। एटीएस की तफ्तीश में और कितने लोगों के नाम सामने आते है क्योंकि अवैध लाइसेंस बनाकर हथियार को रखना कहीं न कहीं जमीन व्यवसाय में गरीब मासूम, किसानों को डराने के काम में भी लिया गया हो ? ऐसे में अब एटीएस को चाहिए कि वह इन सभी आरोपियों के कारोबार की भी जांच करें और इनसे प्रताड़ित गरीबों की भी सुध ले क्योंकि उदयपुर में इतने कम समय मे रहकर करोडों की जमीनों का मालिक बनना साबित करता है कि इन सभी आरोपियों के पास या तो कोई अलादीन का चिराग था या इन्होंने इन अवैध हथियारों के बल पर मेवाड़ के लोगों की खून पसीने से कमाई जमीनों को बाहुबल से हथियाकर उन्हें रोड पर ला दिया।

हिन्दुस्तान ज़िंक यषद भवन में ग्रीन बिल्डिंग जागरूकता सत्र आयोजित

राजस्थान की एक मात्र सीआईआई आईजीबीसी प्लेटिनम रेटिंग ग्रीन बिल्डिंग

हिन्दुस्तान जिंक के यषद भवन में हिन्दुस्तान जिंक एवं इण्डियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल सीआईआई हैदराबाद द्वारा शुक्रवार को जागरूकता सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्धेष्य राजस्थान में ग्रीन बिल्डिंग हेतु जागरूकता लाना है। वेदान्ता समूह की कंपनी हिन्दुस्तान जिंक का यषद भवन कन्फेडरषन आॅफ इण्डिया द्वारा आईजीबीसी ग्रीन एग्जिस्टिंग बिल्डिंग्स रेटिंग के लिए प्लेटीनम रेटिंग अवार्ड से सम्मानित है। यह भवन हरा-भरा, जल क्षमता, ऊर्जा दक्षता, नवाचार, स्वस्थ एवं स्वच्छ वातावरण, उत्कृष्ट प्रबन्धन एवं सुविधा युक्त है।
इस जागरूकता सत्र में मुख्य अतिथि नगरनिगम के महापौर चंद्र सिंह कोठारी ने हरित पर्यावरण की आवष्यकता और महत्व पर प्रकाष डालते हुए सरकार द्वारा इस हेतु चलाये जा रहे अभियान और योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने हिन्दुस्तान जिं़क को बधाई देते हुए कहा कि उदयपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये कम्पनी का बहुत बडा योगदान रहा है। उन्होनें सभी का आव्हान करते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी बनाने के लिये आमजन का सहयोग आवष्यक है। उदयपुर नगर निगम, सौर उर्जा को बढावा देने के लिये सरकार द्वारा तय 30 प्रतिषत सब्सिडी के अतिरिक्त 10 प्रतिषत सब्सिडी दे रहा है जिसका सभी को लाभ लेना चाहिए ताकि सिमित संसाधनो का संरक्षण एवं विकल्प उपयोग में लिया जा सके।
हिन्दुस्तान जिंक के हेड कार्पोरेट अफेयर्स प्रवीण जैन ने सभी का स्वागत करते हुए यषद भवन को सीआईआई-आईजीबीसी द्वारा सम्मानित करने के पहलुओं और पर्यावरण एवं अनुकूल वातावरण हेतु उठाएं गये कदमों के बारे मे जानकारी दी।

हिन्दुस्तान जिंक के प्रधान कार्यालय को पूर्णरूप से ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित किया गया है और यह सौर ऊर्जा से संचालित है। हिन्दुस्तान जिंक के सभी परिसर एवं संयंत्रों में 13 लाख से अधिक वृक्षारोपण है। हिन्दुस्तान जिंक भारत का एकमात्र एवं दुनिया का अग्रणी जस्ता-सीसा एवं चांदी उत्पादक कंपनी है जिसे सीआईआई-आईजीबीसी ने इस सम्मान से नवाजा है।
इस अवसर पर सीआईआई आईजीबीसी के काउंसलर ने कहा कि सरकार एवं अन्य हितधारकों के सहयोग से आईजीबीसी देष में हरित भवन आंदोलन की अगुवाई कर रही है। वर्तमान में भारत में 4.66 अरब वर्ग फुट में 4,200 से ज्यादा बिल्डिंग आईजीबीसी में पंजीकृत है जो कि विष्व में दूसरा सबसे बडा स्थान रखता है।

हिन्दुस्तान जिंक के हेड कार्पोरेट कम्यूनिकेषन पवन कौषिक ने बताया कि हरियाली के लिए उत्कृष्टकता एवं आधुनिक तकनीक एवं नवाचार के साथ-साथ स्वस्थ एवं स्वच्छ वातावारण हेतु उठाये गये प्रभावी उपायों की पालना प्रत्येक स्तर पर सुनिष्चित की जाती रही है। हिन्दुस्तान जिं़क ने सौर ऊर्जा परियोजना विस्तार के तहत 115 मेगावाट के प्लांट लगाने जा रहा है, जिसमें से 12 मेगावाट देबारी स्मेल्टर एवं 4 मेगावाट के प्लांट राजपुरा दरीबा काॅम्प्लेक्स में स्थापित किये जा चुके हैं।

उल्लेखनीय है हिन्दुस्तान जिंक के यषद भवन में इस परियोजना के तहत 27 प्रतिषत ऊर्जा की तथा 37 प्रतिषत पानी की बचत हुई है। भवन के अंदर ताजा हवा के लिए वेंटिलेषन सिस्टम स्थापित गया है। 100 किलोवाॅट अक्षय ऊर्जा की स्थापना की गई जिससे 162,000 यूनिट प्रतिवर्ष ऊर्जा पैदा हो रही है। ऊर्जा निष्पादन के ट्रेक नियंत्रण के लिए आॅनलाइन व्यवस्था है। भवन की सभी जगह बिजली, यूपीएस, वातानुकूलित, बाहरी बिजली उपकरणों सहित वाटर रिकार्ड के लिए मीटर्स स्थापित किये गये है।

हिन्दुस्तान जिं़क ने राजस्थान सरकार के साथ 20 मिलियन टन प्रतिदिन क्षमता वाले पहला प्राईवेट-पब्लिक पार्टनरषीप सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया है जो कि उदयपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के प्रयास में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है । हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा अब 20 मिलियन टन से बढ़ाकर इसकी क्षमता 60 मिलियन टन की जा रही है। जिससे उदयपुर की झीलों में मल का प्रवाह कम होने लगा है तथा झीलों की सुन्दरता में भी प्रभाव दिखने लगा है।
हिन्दुस्तान जिं़क को खनन एवं धातु क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए विष्व प्रसिद्ध प्रतिष्ठत संस्था डाॅव जोन्स सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स द्वारा किये गये मूल्यांकन के आधार पर 58 कंपनियों में से 82 प्रतिषत अंकों के साथ विष्व स्तर पर 11वां स्थान मिला है।

कार्यक्रम में यूसीसीआई के अध्यक्ष हंसराज चैधरी, आर्किटेक्ट अभिषेक पटेल, शहर के जाने माने डेवलपर्स, आर्किटेक्ट्स, कान्टेªक्टर्स, ग्रीन प्रोडक्ट मेन्यूफेक्चर्स, सरकारी अधिकारी एवं शैक्षिक संस्थान के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

फर्जी हथियारों के लाइसेंस और हथियार रखने वालों के चेहरे हुए बेनकाब

उदयपुर . जम्मू कश्मीर से फर्जी हथियारों के के लाइसेंस बनवाने और अवैध हथियारों को रखने के मामले में एटीस द्वारा उदयपुर में कारवाई कर 13 रसूखदार लोगों पर कारवाई करते हुए उनके हथियारों के लाइसेंस व् हथियार जब्त करने की कारवाई के बाद . एटीस द्वारा इन रसूखदारों के नामों का खुलासा नहीं किया गया,. लेकिन गुरुवार को इस सभी लोगों को जयपुर में तलब किया गया . जयौर एटीस मुख्यालय में तलब किये जाने के बाद इन नामचीन रसूखदारों के चेहरे बेनकाब हो गए. सभी फर्जी लाइसेंस धारी जिन्होंने झूठे शपथपत्र देकर जम्मू कश्मीर से हथियारों के लाइसेंस बनवाये थे वे जयपुर एटीस मुख्यालय गए जिनमे मुख्यतः सुमित भंडारी, पारस बोल्या, दीपक परिहार, हसन पालीवाला, विकास सुहालका, रविकांत त्रिपाटी आदि शामिल है . कुछ और नाम है जिनकी पुष्ठी नहीं हो पायी 

सूत्रों की माने तो एटीस ने इनसे गहन पूछताछ के बाद हिरासत में लेलिया है . हालाँकि इस खबर की पुष्ठी किसी अधिकारी ने नहीं कि है. लेकिन माना जारहा है कि हथियारों के लाइसेंस के लिए कई शपथपत्र जमीनों के कागजात व् अन्य स्थानीय दस्तावेज जमा करवाने होते है, तभी वहां का लाइसेंस बन सकता है. अगर जम्मू कश्मीर से लाइसेंस आधिकारिक तौर पर बनवाये गए है तब भी दोषी है क्यूँ कि सभी शपथपत्र झूठे हो सकते है. और अगर लाइसेंस जाली हुए तब भी जाली लाइसेंस और हथियार रखने वाले दोषी है.

उदयपुर में बेशकीमती भूखण्ड का मामला सुलटाने के चक्कर में एक थाना अधिकारी का तबादला बना चर्चा का केंद्र

उदयपुर। शहर में इन दिनों एक थानाधिकारी का तबादला चर्चा का विषय बना हुआ है।
तबादला यों तो एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का अंग है लेकिन चर्चा का केन्द्र इसलिए बना कि एसपी को भी ’ओवरटेक’ कर यह थानाधिकारी केवल अपने एक उच्च अधिकारी के आदेशों का ही पालन कर रहा था लेकिन लेकसिटी में जमीनों की बढती ऊंची कीमतों ने हर वर्ग में लालच पैदा कर रखा है और यह अधिकारी भी उसी की लपेट में आ गया।
प्रकरण के अनुसार शहर के एक मलाईदार थाना के थानाधिकारी को हाल जारी तबादला सूची में जिलाबदर कर दिया गया। तबादले का कारण यों तो प्रशासकीय आधार बताया जा रहा है लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी अलग ही संदेश दे रही है। यों पूरे प्रदेश में 20 थानाधिकारियों को विभिन्न कारणों से जिला बदर किया गया है लेकिन 3 को प्रशासकीय आधार पर स्थानांतरित बताया गया। हालांकि अब भी यह थानाधिकारी जिला बदर कर के उस आदेश से अपना नाम कटवाने की जुगत में लगा हुआ है, लेकिन अंदर के सूत्र बता रहे है कि तबादला निरस्त होना बहुत मुश्किल है क्योंकि मामला संगीन है। इधर, इस मलाईदार थाने का प्रभारी बनने के लिए कई दावेदारों ने अपने जुगाड लगाना शुरू कर दिए हैं। यह थानाधिकारी वास्तव में सुखाडिया सर्कल के पास बेशकीमती भूखण्ड का मामला सुलटाने के चक्कर में आ गए। सुखाडिया सर्कल पर इलाहाबाद बैंक से सटी इस जमीन का वर्तमान बाजार मूल्य एक सौ करोड रूपये बताया जा रहा है। 75 हजार वर्ग फिट के इस भूखण्ड का दो रजिस्ट्रीयों से बेचान विवाद बना हुआ है। रियासतकालीन इस विवादित भूखण्ड पर शहर के कई भू माफियाओं, राजनेताओं एवं उच्च अधिकारियों की निगाह टिकी हुई है। फर्जी पट्टों पर बिकी यह भूमि दलाल आगे से आगे बेचते रहे। पट्टा संख्या 2952 की जमीन के बेचान में पूरा खेल धन और बाहुबल का चल रहा है। इसी मामले को सुलटाने की जिम्मेदारी उक्त थानाधिकारी द्वारा लेने की जानकारी मिलने पर सत्ताधारी दल में विरोध के स्वर उभरे और उन्हें जिला बदर करने के आदेश जारी हो गए। फिलहाल यह अधिकारी तबादला निरस्त कराने की जुगत में लगे हुए है ।

मरने से पहले पहलू खान ने जिन 6 आरोपियों का लिया था नाम, पुलिस ने सबको दी क्लीन चिट

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राजस्थान के अलवर में गौरक्षा के नाम पर हिंसा का शिकार हुए पहलू खान के मर्डर के मामले में नया मोड़ आ गया है. राजस्थान पुलिस ने एफआईआर से हत्या के 6 आरोपियों को बाहर कर दिया है.

खास बात ये है कि पुलिस ने उन छह आरोपियों को क्लीन चिट दी है, जिनके नाम खुद पहलू खान ने मरने से पहले बताए थे. आपको बता दें कि 55 साल के पहलू खान और उनके बेटे पर गौरक्षकों ने अलवर में तब हमला किया था जब वो जयपुर के मवेशी मेले से गाय और बछड़े खरीदकर अपने घर हरियाणा ले जा रहे थे.

ये घटना एक अप्रैल की है. तब किसी ने पहलू खान की पिटाई का वीडियो बना लिया था, जिसमें देखा जा सकता है कि पहलू खान को जमीन पर गिराकर बड़ी बेरहमी से पीटा गया. इस घटना की गूंज संसद में भी सुनी गई.

अस्पताल में इलाज के दौरान मरने से पहले पहलू खान ने अपने बयान में छह लोगों के नाम लिए थे. ये नाम एफआईआर में दर्ज किए गए थे, लेकिन उन्हें कभी गिरफ्तार नहीं किया गया. हालांकि, वीडियो के आधार पर पुलिस ने दूसरे सात लोगों को गिरफ्तार किया. उनमें दो अभी भी जेल में है, जबकि 5 को जमानत मिली हुई है.

आज CID CB ने पहलू खान के जरिए दिए गए छह नामों को एफआईआर से बाहर कर दिया. पुलिस सूत्रों का कहना है कि ऐसा कोई संतोषजनक सबूत नहीं मिला है जिससे ये कहा जा सके कि इन छह लोगों ने पहलू खान पर हमला किया था.

पुलिस के मुताबिक, वीडियो और फोटो में ये लोग नहीं देखे गए हैं. GPS डेटा से ये जानकारी मिलती है कि घटना के वक़्त ये लोग मौक-ए-वारदात से काफी दूर थे. आपको बता दें कि पहलू खान की मौत के बाद पुलिस ने एक दूसरी एफआईआर भी दर्ज की, जिसमें पहलू खान के परिवार पर जानवरों की तस्करी का मामला बनाया गया.

हालांकि, पहलू खान के बेटे ने गाय खरीदने की रसीद दिखाई थी. इसपर पुलिस का कहना है कि उसने रसीद दिखाई, लेकिन उसके पास राजस्थान से गाय दूसरे सूबे में लेने का अनुमति पत्र नहीं था.

हथियारों के फर्जी लाइसेंस बनवाने में भू-कारोबारी अधिक – सुरक्षा के लिए बनवाये या डराने के लिए ?

उदयपुर। अवैध हथियारों और फर्जी लाइसेंस के मामले में एटीएस ने जिन नामचीन रसूखदारों ने फर्जी हथियार के लाइसेंस बनवाये थे उन्हें जयपुर तलब किया है। रसूखदारों में गिरफ्तारी के डर से खलबली मची हुई है। एटीस ने अभी तक नामों का खुलासा तो नहीं किया लेकिन सूत्रों की मानें तो अधिकतर फर्जी लाइसेंस भू कारोबारियों ने ही बनवाये थे। अब ये अलग शोध का विषय है कि इन भू कारोबारियों ने अपनी सुरक्षा के लिए बनवाये थे या भूमि व्यवसाय में मजलूमों को डराने धमकाने के लिए। 

शहर के १३ रसूखदार जिनके नाम अभी तक एटीस ने खुलासा नहीं किया उन्हें एटीस की हाई अथोरिटी ने पूछताछ के लिए जयपुर बुलाया है। इन नामचीन रसूखदारों में एक तरह से डर भी है की उन्हें बुला कर गिरफ्तार किया जायेगा। इधर एटीस भी हथियारों और लाइसेंस के लिए गहनता से जांच कर रही है, जानकारी के अनुसार लाइसेंस की जांच के लिए एटीस की टीम जम्मू कश्मीर गयी हुई है। १३ हथियारों के लाइसेंस के साथ २० हथियार जब्त किये थे लेकिन जांच के बाद अब इन हथियारों की संख्या ३० हो गयी है। 
१३ नाम चीन लोगों के नामों का खुलासा एटीस ने तो नहीं किया लेकिन सूत्रों के अनुसार अधिकतर नाम सामने आचुके है जिनमे  एक बड़े तम्बाकू प्रोडक्ट से जुड़ा हुआ है, जो सारा कारोबार संभालता है। एक हाथीपोल स्थित मॉल का मालिक, बड़ी के पीछे एकांत में स्थित रिसोर्ट के दो पार्टनर, आयड पुल स्थित बड़े मॉल का एक बड़ा एक पार्टनर, विशेष संगठन का कार्यकर्ता जो भू कारोबार में लिप्त है, दो शराब के व्यवसायी, दो भाई के नाम भी है जिनका कपड़ों का शोरूम है साथ ही भूमि व्यवसाय में भी लगे हुए है। एक बड़े ट्रावेल्स का मालिक है।  इन सब में एक सबसे बड़ी बात निकल कर यह सामने आरही है जितने भी लाइसेंस धारी है सभी भू कारोबार में लिप्त है। यह जांच का विषय है कि इन लोगों ने यह फर्जी लाइसेंस अपनी सुरक्षा के लिए बनवाये थे या भूमी व्यवसाय में गरीब और मजलूम लोगों को डराने के लिए हथियारों का इस्तमाल होता था। यह तो सर्व विदित है कि लेकसिटी में भूमी का कारोबार में भूमाफियाओं के कई कारनामों और करतूतों से भरी पड़ी है जिसमे डरना धमकाने से लेकर भूमि पर अवैध कब्जे तक किये जाते है जिसमे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की भी लिप्तता सामने आचुकी है।  

राजस्थान के तीन हजयात्री मक्का की मिट्टी में हुए सुपर्दे ख़ाक

पोस्ट . राजस्थान से हज यात्रा पर गए चार हज़ार हज़ यात्रियों के पाक मुक़द्दस सफ़र पर तीन हज यात्रियों के विभिन्न कारणों से मक्का में ही मौत होगई . जिन हज यात्रियों का इंतकाल मक्का में हुआ उनमे दो सीकर से है और एक हज यात्री नागौर के है . जानकारी के अनुसार मरहूम हजयात्रियों ने हज के अरकान पुरे कर लिए थे उसके बाद ही मक्का में विभिन्न कारणों से इंतकाल हो गया .

सीकर शहर के वार्ड संख्या 29 के मोहम्मद अब्दुल गनी अपनी पत्नी रशीदा बानो सहित परिवार के तीन लोगों के साथ हज करने निकले थे अस्थमा होने के कारण पहले तो उन्हे मक्का स्थित डिस्पेंसरी में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। ताखलसर निवासी बुलकेश बानो भी अपने पति हसन मोहम्मद के साथ हज पर गईं थी। वहां, दिल का दौरा पडऩे से उनकी मौत हो गई। इधर, नागौर के रहने वाले जहुरूद्दीन भी परिजनों के साथ 31 अगस्त की फ्लाइट से हज के लिए मक्का पहुंचे थे। उनका भी निधन हो जाने पर, वहीं सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया . मक्का की मिट्टी नसीब होना किस्मत की बात है। अभी तीनों के परिजन भी मक्का में ही हैं। प्रदेश से हज पर गए यात्रियों की वापसी 25 सितंबर से शुरू होगी। वहां से आने वाली पहली फ्लाइट में इनके परिजन भी आयेगें .

 

जयसमंद झील छलकने को तैयार – बस 2 mm है खाली .

एशिया की दूसरी सबसे बडी मीठे पानी की झील 2 मिमी खाली

उदयपुर। एशिया की दूसरी सबसे बडी मीठे पानी की झील जयसमंद पर बने हाथी के पैरों तक लहरों के साथ पहुंचते पानी के बाद बुधवार को अब इसके पैर पानी से ढकने लगे है। लबालब जयसमंद झील अब 2 मिमी खली हे जिसे भरने में 2 दिन लग सकते है। इसके बाद इस पर चादर चलेगी।
जयसमंद ’ढेबर झील’ में गोमती व खरका नदी से लगातार आवक जारी है। लेकिन इसका फेलाव क्षेत्र अधिक होने से इसमें प्रतिदिन हल्की आवक ही हो पा रही है। लगातार आवक के चलते जयसमंद झील पूरी तरह लबालब होकर छलकने को आतूर है। आज इसका जलस्तर 8.36 मीटर रिकॉर्ड किया गया जबकि इसकी पूर्ण भराव क्षमता 8.38 मीटर है। सिंचाई विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विशाल क्षेत्रफल में फेली इस झील में 2 मिमी पानी के लिए अभी दो दिन ओर इंतजार करना पड सकता है। इस आवक के बाद ही झील के अंतिम मुहाने पर स्थित चादर चलने वाले स्थान चादर चलेगी। हालांकि झील पर बने पत्थरों के हाथियों के पैर पानी में डूबने लगे है जो इसके पूरी तरह भरने का संकेत दे रहे है। नैसर्गिक सौन्दर्य से खिली आभा को निहारने इन दिनों पर्यटकों व आसपास की भीड झील किनारे पहुंचने लगी है।
इधर, लेकसिटी में बारिश का दौर आज भी जारी रहा। दोपहर में हुई मध्यम क्रम की बारिश से खूब भिगोया। बाढ नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार शाम 7 बजे तक उदयपुर में 7 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। सर्वाधिक बारिश गोगुन्दा में 27 मिमी रिकॉर्ड की गई। सीसारमा नदी के 3 फीट बहने से स्वरूपसागर के दो गेट आधा-आधा फीट व मदार नहर 2 फीट बहने से फतहसागर के चारों गेट आधा-आधा इंच खुले हुए है। झरनों व पहाडों से रिसकर आ रहे पानी से बडी झील का जलस्तर भी लगातार बढ रहा है। पूर्ण भराव क्षमता 32 फीट वाली इस झील में 26 फीट पानी आ चुका है। मदार बडा एक इंच व मदार छोटा आधा इंच ओवरफ्लो बह रहे है।

कौन है शहर के 13 रसूखदार नामचीन जिन्होंने अवैध हथियार और फर्जी लाइसेंस रखे हुए थे ?

उदयपुर। अवैध हथियार और फर्जी लाइसेंस रखने वाले शहर के १३ नामचीन रसूखदार कोन है ? आखिर क्यों एटीएस इन रसूखदारों के नामों का खुलासा नहीं कर रही ?  लाखों रुपया देकर जम्मू एन्ड कश्मीर से फर्जी लाइसेंस बनवा खतरनाक हथियार अपने पास रखना क्या इन रसूखदारों की नादानी मान कर बख्शा जाएगा ? क्या स्टेटस सिंम्बल का हवाला देकर अवैध हथियारों की खरीद फरोख्त के अपराध से बचा जा सकता है ? या इन रसूखदारों को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है जिसकी वजह से एटीएस ने इन्हे इनोसेंट मान लिया है ?  
 
शहर के इन नामचीन लोगों से एटीस ने कारवाई कर १३ लाइसेंस और २० हथियार तो जब्त कर लिए थे लेकिन उनके नामों का खुलासा करने में जांच का हवाला दिया जारहा है। शहर में मोजूद एटीस के जिम्मेदार अधिकारियों को हाई अथोरिटी ने नाम नहीं बताने के निर्देश दिए है और हाई अथोरिटी लाइसेंस की जांच कर रही है। 
आखिर शहर के इन रसूखदार लोगों को ऐसे आधुनिक और खतरनाक हथियार रखने की कोनसी जरूरत आपडी कि उन्होंने अजमेर के वली मोहम्मद एंड संस को लाखों रूपये देकर जम्मू एंड कश्मीर से फर्जी लाइसेंस बनवाये। सवाल यह उठता है कि जब उदयपुर के मूल निवासी होने के बावजूद भी इस १३ रसूखदारों ने जम्मू एंड कश्मीर से लाइसेंस बनवा लिए तो पहली नज़र में ही अवैध हो गए, इसके बावजूद एटीस इन रसूखदारों को गिरफ्तार करने या कारवाई करना तो दूर इनके नाम भी बताने से कतरा रही है। सूत्रों की माने तो यह रसूखदार बड़े बड़े व्यवसाई भू माफिया, मार्बल व्यवसायी सफ़ेद पोश है। यह भी माना जासकता है कि इन्हें राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है और इसी वजह से इन लोगों के नाम आज तीन दिन बाद भी सामने नहीं आये है। यही नहीं एक बड़े मुख्य समाचार पत्र में तो अवैध हथियारों की यह खबर मामूली बना कर अन्दर के पेज की बन कर रह गयी। 
पुलिस जब भी किसी असामाजिक तत्व के पास से देसी कट्टा या एक बड़ा चाक़ू भी बरामद करती है तो प्रेस वार्ता कर 10 – 10 पुलिस कर्मियों के बिच उस अपराधी की फोटो खिचवा कर प्रकाशित किया जाता है, फिर यहाँ तो अवैध लाइसेंस और अवैध विदेशी और आधुनिक खतरनाक हथियारों की बात है। एटीस आखिर क्यूँ नाम छुपा रही है ? या क्यूँ इनकी गिरफ्तारी नहीं हो रही ? जबकि इस मामले में तीन हथियार तस्करों अजमेर निवासी जुबेर खां, पंजाब के अबोहर निवासी विशाल आहूजा और नसीराबाद निवासी गणपत सिंह को गिरफ्तार किया है। एटीएस यह भी बता रही है कि यह लोग अवैध हथियार और जम्मू एन्ड कश्मीर से फर्जी लाइसेंस बनवाने के कामों में लिप्त थे। 
जिन रसूखदारों ने अपने शोक के लिए लिए हो चाहे अपना स्टेटस सिंम्बल दिखाने के लिए लिए हों लेकिन आता तो अपराध की श्रेणी में है फिर इन रसूखदार अपराधियों से मेहमानों जैसा व्यवहार और आवभगत क्यों की जारही है ? 

उस्मान हैदर जिला वक्फ कमेटी उदयपुर का चेयरमैन मनोनीत।

उदयपुर .राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ ने एक आदेश जारी कर जिला वक्फ कमेटी,उदयपुर का गठन कर हाजी उस्मान हैदर को चैयरमेन मनोनीत किया है।
राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमन उल्लाह खान ने जारी आदेश में हाजी उस्मान हैदर को जिला वक्फ  कमेटी के चैयरमेन ,असलम हुसैन को सचिव एवम यासीन मोहम्मद को कोषाध्यक्ष मनोनीत किया है।
 उस्मान हैदर मेवाफरोश समाज के कोषाध्यक्ष एवम भारतीय जनता पार्टी डॉ मुखर्जी मण्डल के सक्रिय कार्यकर्ता है।
भाजपा शहर जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट,पूर्व प्रदेश मंत्री प्रमोद सामर,महामंत्री प्रेमसिंह शक्तावत,डॉ किरण जैन,मोतीलाल डांगी, मण्डल अध्यक्ष चंचल कुमार अग्रवाल आदि ने इस नियुक्ति पर प्रसन्नता जाहिर कर प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी आदि का आभार व्यक्त किया है।