Kidney stones and homoeopathy – Dr Kajal Verma

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Kidney stones are hard, abnormal concretions composed of mineral salts which can lie in the kidney, ureters or urinary bladder. Kidneys are vital organs that filter blood and help urine formation. Ureters are tubes that carry urine from the kidney to the urinary bladder. The urinary bladder is a sac that acts like a reservoir for holding urine until it is voided outside the body through the urethra. Urethra is the lower part of the urinary system

डॉ. काजल वर्मा

through which urine seeks its path outside the body from the urinary bladder. Kidney stones affect more men than women. The causes include decreased water intake, increase intake of protein, calcium, sodium, sugar or urinary tract infection. Diets rich in oxalates such as spinach, tomato, cabbage, coffee, chocolates, tea, blackberries, strawberries, beetroot and nuts also predispose a person to kidney stones. Excessive vitamin C, vitamin D and uric acid also increase the risk of kidney stone formation. Familial disposition is also a factor in developing kidney stones.

Symptoms of Kidney Stone
Kidney stones may lie silently in the kidney without any symptom. Severe pain with other associated symptoms appear when the stone tries to enter the ureter from the kidney or from the ureter into the urinary bladder or when it tries to pass down from the urinary bladder  to the urethra. Pain caused by kidney stones is felt in the flanks (outer side of lower abdomen), lower back and often extends to the groin area (area where abdomen and thighs join) or genitals. The urine may contain blood or pus.  Painful urination or urgency to urinate may also be present. Nausea and vomiting is yet another symptom associated with kidney pain.
Homeopathy a Safe and Effective Cure for Kidney Stone
Homeopathy is without doubt the best treatment mode to follow to get rid of kidney stones. Homeopathic medicines for kidney stone are dual action remedies which are natural and safe.some of them are,
Berberis vulgaris
Lycopodium
Ocimum sanc
Hydrangea 
Cantharis 
Etc.
First, they help remove the stones present in the urinary tract either by crushing them into fine sand-like particles or in a few cases, in the intact state. Secondly, they hold the promise of completing removing the tendency towards stone formation in the future. While selecting the appropriate Homeopathic medicine for kidney stone, the side affected is considered along with the pain and associated symptoms. The colour of sand particles in urine helps to further refine the search.  Although kidney stones can be safely handled with properly selected Homeopathic medicines, care should be taken when the size of the stone is very large and it gets impacted in the ureter leading to hydronephrosis that calls for surgical intervention to prevent kidney damage.

प्रतिभाओं के सम्मान से नई प्रतिभाएं मिलती – झाला

क्षत्रिय रत्न सम्मान समारोह का आयोजन

उदयपुर । प्रतिभाओं के सम्मान से उन्हें आगे बढने की प्रेरणा के साथ समाज को विभिन्न क्षेत्रों से नई-नई प्रतिभाएं मिलती है। शिक्षा और संगठन से ही समाज संगठित व् जागरूक होता है और विकास की और अग्रसर रहता है। समाज को आगे बढ़ाने में युवाओं की सक्रियता बहुत जरूरी है। किसी भी समाज की प्रगति उसकी युवा टीम पर निर्भर होती है,युवा पीढ़ी ही देश की भविष्य निर्माता है उक्त विचार राजस्थान हाइकोर्ट के न्यायाधीश रामचंद्र सिंह झाला ने शनिवार को मेवाड़ क्षत्रिय महासभा संस्थान की और से मीरा मेदपाट भवन चित्रकूट नगर में आयोजित प्रथम क्षत्रिय रत्न सम्मान समारोह में व्यक्त किये। उन्होंने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देते हुए कहां की बालिका शिक्षा को बढ़ाने के लिए क्षत्रिय समाज के लोगों को आगे आना चाहिए। बुजुर्गों का सम्मान करने की परंपरा को जीवंत रखकर समाज में खुशहाली लाई जा सकती है। मेवाड़ क्षत्रिय महासभा के संरक्षक रावत मनोहर सिंह कृष्णावत ने कहा कि समाज में बहुत सी प्रतिभाएं मौजूद है लेकिन सुविधाओं और साधनों  के अभाव में वो संघर्षरत है उनकी सुविधाओं  के लिए महासभा द्वारा इन प्रतिभाओं को संसाधनों की पूर्ति में सहयोग किया जायेगा। उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षित समाज ही देश के विकास में सहयोगी हो सकता है। उन्होंने आह्वान किया कि समाज के विकास के लिए हमें निजी स्वार्थ से उपर उठकर कार्य करना होगा। समारोह में क्षत्रिय समाज के राजनीतिक,सामाजिक,प्रशासनिक क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान के लिए पूर्व विधायक और भाजपा की वरिष्ठ नेता श्रीमती श्यामा कुमारी सेंगर, वल्लभनगर विधायक रणधीर सिंह भींडर,देहात कांग्रेस के जिलाध्यक्ष लालसिंह झाला, भूपाल नोबल्स संस्थान के पूर्व निदेशक तेजसिंह बांसी,भारतीय सेना के रि लेफ्टिनेंट जनरल एन के सिंह, प्रशासनिक सेवा के डॉ भोपाल सिंह चुंडावत, शिक्षाविद डॉ औंकार सिंह राठौड़, समाजसेवी भारत सिंह सिसोदिया व् सज्जन सिंह राणावत को शॉल,सम्मान पत्र प्रदान कर  “क्षत्रिय रत्न सम्मान” से नवाजा गया। महासभा के अध्यक्ष बालू सिंह कानावत और महामंत्री तनवीर सिंह कृष्णावत ने अतिथियों का स्वागत किया,समारोह में न्यायाधीश रामचंद्र सिंह झाला का नागरिक अभिनन्दन किया गया। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री मांगीलाल गरासिया, डॉ दरियाव सिंह चुंडावत,चंद्रगुप्त सिंह चौहान, खीम सिंह कितावत,कुंदन सिंह मुरोली,राजेंद्र सिंह सिसोदिया,भोपाल सिंह,डी डी सिंह ,गुमान सिंह ,अशोक सिंह मेतवाला सहित सैंकड़ो समाजजन मौजूद थे।समारोह में क्षत्रिय समाज की महिलाएं भी मौजूद थी

बालिकाओं को दी गीता – समारोह में मीरा मेदपाद छात्रावास में अध्ययनरत बालिकाओं को महंत प्रयाग गिरी महाराज ने गीता की प्रतियां प्रदान की और खान की गीता का उपदेश को अपने जीतव में अंगीकार करना चाहिए
दिसम्बर में होगा महा सम्मलेन– मेवाड़ क्षत्रिय महासभा का संभाग स्तरीय सम्मलेन आगामी दिसम्बर माह में आयोजित होगा जिसमें संभाग से 40 हजार से अधिक क्षत्रिय समाज के लोग हिस्सा लेंगे।

चुनाव जीतने के बाद नेता हो जाते है मालामाल

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पोस्ट. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राजनेताओं की मौद्रिक संपत्ति में भारी उछाल के विरुद्घ कार्यवाही न करने के लिए केन्द्र की खिंचाई की और इस संबंध में आयकर द्वारा की गई इसकी जांच की रिपोर्ट अगले मंगलवार तक प्रस्तुत करने को कहा।
चुनावों में राजनेताओं द्वारा धनबल का प्रयोग किया जाता है। इसे रोकने के लिए राजनेताओं की संपत्ति की वृद्घि को रोकने पर जोर देते हुए जस्टिस जे चेलमेश्बर तथा अब्दुल नजीर ने कुछ नहीं करने के लिए केन्द्र की नीयत पर सवाल किया। और पूछा कि सरकार ने क्यों और चुनाव सुधार की बात की किन्तु उन्हें लागू करने की तारीख की बात कभी नहीं की।
पीठ ने अतिरित्त सॉलिसिटर जनरल पी एस नरसिम्हा से पूछा “क्या भारत सरकार का यही रूख है? आपने अब तक क्या किया है?” मैं पूछना चाहता हूं कि क्या नेताओं द्वारा अपने चुनावी शपथ पत्र में घोषित की गयी संपदाओं और जो वे आयकर रिटर्न में भी दिखाते हैं उनकी किस गतियों के बारे में कभी कोई जांच की गयी है।
एनजीओ लोक प्रहरी ने चुनाव जीतने के बाद राजनेताओं की संपत्ति में अचानक वृद्घि होने के संबंध में एक जनहित याचिका दायर की थी। जब उसके वकील ने बताया कि आयकर विभाग ने ऐसी जांच की है तब कोर्ट ने १२ सितंबर को अगली सुनवाई में इसे जांचना चाहा। जब नरसिम्हन ने कहा कि सरकार कार्यवाही करेगी तब जस्टिस चेलमेश्वर ने पलटकर कहा कृपया यह सुनिश्चित करें और मंगलवार को प्रात: ठीक १०. ३० बजे डेटा उपलब्ध कराये। आप मूलभूत डेटा उपलब्ध क्यों नहीं करा सकते? आप कम से कम यह तो कर सकते हैं। इस पर बल देते हुए कि यह एक बहुत गंभीर मामला है जज ने कहा कि वे ऐसे मामलों में सरकार के टालमटोल वाले वत्त*व्यों की अनुमति नहीं देंगे।
कोर्ट ने पुष्टि की आप कहते हैं कि आप चुनाव व्यवस्था सुधारने को तैयार है लेकिन आप निर्वाचित प्रतिनिधियों के बारे में ऐसी मूलभूत सूचना तक उपलब्ध कराने को तैयार नहीं हैं।
अपनी याचिका में लोक प्रहरी ने मांग की है कि न केवल चुनाव लड रहे प्रत्याशी बल्कि उनके जीवन साथी और बच्चों की आय भी सार्वजनिक की जाए।

जनहित याचिका का जबाव देते हुए चुनाव आयोग ने धनबल का बढती भूमिका पर रोष जताया। आयोग चाहता है कि सुप्रीम कोर्ट प्रत्याशियों के लिए उनके शपथ पत्र में उनके जीवन साथी तथा उन पर निर्भर बच्चों की आय घोषित करना भी आवश्यक कर दे। आयोग ने कहा कि निर्वाचन कानून के उद्देश्य से प्रत्याशियों के वास्ते ईमानदारी का वहीं पैमाना होना चाहिए जिससे सेवा कानूनों के तहत लोक सेवक पाबंद होते हैं।
चुनावों में धन बल के प्रयोग से लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को होने वाले गंभीर खतरे इंगित करते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि किस प्रकार उसने भारत के चुनावी इतिहास में पहली बार मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए पैसे के उपयोग के सबूत मिलने के बाद तमिलनाडु के दो निर्वाचन क्षेत्रों में नये सिरे से चुनाव करवाए।

वो किसी से नहीं डरती थी, लेकिन कोई उनसे डरता था

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पोस्ट । वो किसी से नहीं डरती थी, लेकिन कोई था जो उससे बहुत डरता था, इतना ज्यादा डरता था कि उसने उसकी हत्या कर दी। पत्रकार एवं एक्टिविस्ट गौरी लंकेश जिसकी मंगलवार को बैंगलोर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी कि मृत्यु के मद्देनजर ये शब्द सीधे दिल पर असर करने वाले हैं।
वे उसे क्यों मारना चाहते थे? वे किस बात से डरते थे? एक दुबली-पतली अधेड उम्र की महिला से किसी को भी क्या खतरा हो सकता था? ये लोग कौन थे जो बेहद डरे हुए व कमजोर थे और जिनमें इतनी ज्यादा नफरत थी, साथ ही वे इतने अमीर थे कि उसकी हत्या के लिए पेशेवर हत्यारों को सुपारी दे सकें?
पत्रकारिता के मूल सवाल हैं – कब? कहां? कौन? क्या? क्यों? और कैसे? गौरी लंकेश के केस में सिर्फ कब और कहां का जवाब पता है अन्य सवालों के जवाब अभी अटकलों व अनुमानों में छिपे हुए हैं।
साफ शब्दों में कहें तो सर्वाधिक संभाव्य सिद्घान्त, जो अभी प्रचलित है, यह है कि उसे हिन्दुत्व उन्मादियों ने मारा है, क्योंकि वह लगातार उनका पर्दाफाश कर रही थी, जिससे ये लोग काफी चिढे हुए थे।
कन्नड भाषा में प्रकाशित उनके साप्ताहिक पत्र में लिखे उनके हालिया आलेख तथा विभिन्न ऑनलाइन प्रकाशनों में लिखे उनके अंग्रेजी के आलेखों पर सरसरी नजर डाली जाए तो उपरोत्त धारणा को बल मिलता है।
अपनी पत्रिका गौरी लंकेश पत्रिके में वे धर्मनिरपेक्षता, दलितों, शोषितों व महिलाओं के अधिकारों के प्रति काफी मुखर रही हैं। और अपने सभी आलेखों में उन्होंने दक्षिण पंथी राजनीति व भगवा नेताओं की आलोचना करने में कोई कसर नहीं छोडी। यहां तक कि ट्विटर व फेसबुक पर उनकी सोशल मीडिया पोस्ट पर भी नाराजगी व क्रोधभरी प्रतिक्रियाएं आती थी उन्हें राष्ट्र विरोधी व हिंदु विरोधी जैसे तमगों से नवाजा जाता था।

भगवा खेमे में उनके वैचारिक शत्रुओं की संख्या काफी ज्यादा थीं। गत नवम्बर में कर्नाटक के हुबली जिला मजिस्ट्रेट ने उन्हें मानहानि के मुकदमे में दोषी ठहराया था, जिसमें उन्हें ६ माह का कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। हालांकि उन्हें उसी दिन जमानत मिल गई थी। यह मामला २००८ में उनकी पत्रिका में धारवाड के भाजपा सांसद प्रहलाद जोशी तथा भाजपा नेता उमेश दुशी पर लिखे एक लेख से सम्बन्धित था।
उनकी प्रतिक्रिया भी उन्हीं के जैसी निडर थी मुझे पता नहीं था कि भाजपा की आईटी सैल इस मसले का इस्तेमाल दूसरे पत्रकारों को डराने के लिए करेगी।
उन्होंने कहा था कि, उनकी स्थिति देश में अभिव्यत्ति* की आजादी की स्थिति पर जो कहती है, उनकी चिंता उसी बात को लेकर है। यह बात काफी चिंताजनक है कि जो लोग सत्तारूढ विचारधारा का विरोध करते हैं उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
एम एम कलबुर्गी, जिनकी हत्या को बजरंग दल के कार्यकर्ता भुविथ शेट्टी ने जायज ठहराते हुए ट्वीट किया था कि, हिंदुत्व का मजाक उडाओ और कुत्ते की मौत मरो। इसके बाद उभरते हालात पर भी गौरी ने अपने विचार बेबाकी से रखे। गौरतलब है कि शेट्टी पर गत वर्ष किसी हरीश पुजारी की हत्या का आरोप लगा था। कहा जा रहा है कि उसने पुजारी को गलती से मुसलमान समझ लिया था इसलिए उसकी हत्या कर दी थी।
गौरी ने बी वी सीताराम का भी जिक्र किया, जिन्हें मानहानि के आरोप में गिरफ्तार किया था। सीताराम ने कहा था कि उसे अपनी हत्या किए जाने का डर है। उसने कहा कि, अगर मुझे मंगलोर जेल भेजा गया तो बजरंग दल के लोग मुझे जेल में ही नुकसान पहुंचा सकते हैं।
अपने खिलाफ केस के मामले में लंकेश ने कहा कि जहां तक वे समझती हैं, मानहानि का मुकदमा करने वाले को साबित करना होता है कि उसकी मानहानि हुई है और अदालत को आलेख पर अपनी राय तय करने का अधिकार नहीं है।
गौरी को लगता था कि आलेख पर प्रहलाद जोशी की आपत्ति निराधार है क्योंकि यह आलेख तो एक जूलर के बारे में था जो न्याय मांगने के लिए जोशी के पास गया था क्योंकि उसे जोशी की पार्टी सदस्य परेशान कर रहे थे। चूंकि जोशी के पास उसकी सुनवाई नहीं हुई इसलिए उसने पुलिस के पास जाने की धमकी दी थी।
असल में इस खबर में आरोप लगाया गया था कि जोशी अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को बचा रहे हैं। लेकिन इस खबर से जोशी को कोई नुकसान नहीं हुआ। यह खबर कई अखबारों में छपी थी लेकिन उन्हीं के प्रकाशन को निशाना बनाया गया। गौरी का सवाल था, मैने उन्हें कैसे बदनाम किया, वे तो उसके बाद चुनाव भी जीते हैं।
जहां तक दुशी का सवाल है लंकेश का कहना था कि उनके खिलाफ पहले से ही कई केस थे इसलिए दुशी की प्रतिष्ठा को उनके प्रकाशन से शायद ही कोई नुकसान हुआ हो।
कुल मिलाकर उनका कहना था कि भारत में लोगों की आवाज दबाई जा रही है और काले अंधकार भरे दिन आने वाले हैं। गत दो वर्षों में देशद्रोह का आरोप तो हर मामले में लगा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार समर्थक असंतोष व असहमति को दबाने के लिए कानून का दुरुपयोग कर रहे हैं।
रिपोर्ट कहती है गौरी लंकेश जो कर्नाटक के भ्रष्ट नेताओं व उद्योगपतियों का पर्दाफाश करने पर काम कर रही थी, ने अपने मित्रों को हालिया दिल्ली यात्रा के दौरान ऐसे आलेखों की शृंखला पर काम करने का संकेत दिया था।
चार सितम्बर को गौरी ने ट्वीट किया था कि, मुझे ऐसा क्यों लगता है कि हममें से कुछ आपस में ही लड रहे हैं? हम सब अपने सबसे बडे शत्रु के बारे में जानते हैं। बैंगलौर पुलिस इसे उनके मन की बेचैनी का संकेत मान रही है। एक कन्नड टी वी चैनल ने दावा किया था कि कुछ दिन पहले भी हत्यारों ने लंकेश का पीछा किया था। पब्लिक टीवी ने दावा किया कि लंकेश की हत्या का पहला प्रयास दो सितम्बर को हुआ था।

कपासन के बुरहानी स्कूल में दस दिवसीय हैण्डराइटिंग इम्प्रुवमेंट शिविर शुरू, शिक्षकों का सम्मान

उदयपुर/कपासन, 6 सितम्बर। कपासन स्थित बुरहानी स्कूल में बुधवार से दस दिवसीय हैण्डराइटिंग इम्प्रुवमेंट शिविर प्रारंभ हुआ। शिविर के शुभारंभ पर विद्यालय परिसर में शिक्षक दिवस समारोह भी आयोजित किया गया जिसमें विद्यालय के शिक्षकगणों का सम्मान किया गया। बुरहानी स्कूल के निदेशक आबिद अली ने अपने उदबोधन में कहा कि बच्चों के जीवन में शिक्षा का बहुत महत्व है। वर्तमान परिदृश्य में प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह छोटे से छोटा मजदूर ही क्यों ना हो अपने बच्चे को उच्च स्तर की शिक्षा देना चाहता है। गत कई वर्षों यह विद्यालय भी बच्चों को उच्चतर शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्घ है। उन्होंने बताया कि स्कूली बच्चों मेें शैक्षिक स्तर को ऊंचा उठाने के लिए हर वर्ष की तरह इस साल भी दस दिवसीय शिविर उदयपुर की एनआईईएल संस्था के सहयोग से लगाया गया। जिसकी शुरूआत आज हुई। शिविर के पहले दिन एनआईईएल निदेशक मेहजबीन मगर ने बच्चों में अंंग्रेजी की जरूरत व जीवन में बेहतर शिक्षा की महत्ती आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कई बार परीक्षा में शिक्षक बच्चों की हैण्डराइटिंग को देखकर ही उसे अंक प्रदान कर देता है। मगर ने बताया कि इस दस दिवसीय शिविर में विद्यालय के कक्षा पहली से सातवीं तक के बच्चों को हैण्डराइटिंग सुधार व अंग्रेजी का ज्ञान दिया जाएगा जिसके लिए उदयपुर से उनकी संस्था के पांच शिक्षक सहयोग करेंगे। सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि मेहजबीन मगर,मुफद्दल बोहरा, प्रिंसिपल मन्नालाल उपाध्याय व उपस्थित अतिथियों ने स्कूली शिक्षकों व उदयपुर एनआईईएल संस्था के शिक्षकों का माल्यार्पण कर एवं उपहार भेंट कर सम्मान किया।

मुहांसों को कुछ घंटों में दूर कैसे भगाएं

पोस्ट . युवाओं की मुख्य समस्या है चहरे के मुंहासे . युवक हो या युवती चेहरे पर मुहांसे किसी को अच्छे नहीं लगते . युवतियों को की यह परेशानी उन्हें कई बार डिप्रेशन तक का शिकार बना लेती है . मुंहासे दूर करने के लिए युवतियां कई महगे महगे कोस्मेटिक प्रोडक्ट का इस्तमाल करती है. बड़े बड़े डॉक्टरों को दिखाती है लेकिन कुछ ख़ास फायदा नहीं होता. यहाँ पर हम कुछ आसान घरेलु उपाय बता रहे है जिसकी सहायता से कुछ ही घंटों या यूँ कहिये एक ही रात में मुहासे गायब किये जा सकते है .

बर्फ थैरेपी

अगर आपके घर में बर्फ का एक टुकड़ा मौजूद है तो पिम्पल होने पर दवाई लगाना और उसके हटने का इंतजार करना बेवकूफी है। जी, हां! बर्फ असल में पिम्पल की लालिमा को कम करता है, सूजन कम होती और जलन में भी कमी आती है। वास्तव में बर्फ लगाने से रक्तसंचार में वृद्धि होती है और रोमछिद्रों को भी प्रभावित करती है। बर्फ के जरिये पिम्पल के इर्द-गिर्द मौजूद गंदगी और तेल पूरी तरह निकल जाता है। आपको सिर्फ इतना करना है कि एक कपड़े में बर्फ के टुकड़े को लपेटना है और पिम्पल पर उसे कुछ सेकेंडों के लिए फेरना है। यही प्रक्रिया कुछ कुछ मिनटों में दोहरानी है।

सफेद टूथपेस्ट का उपयोग

सफेद टूथपेस्ट काफी हद तक बर्फ ट्रीटमेंट की तरह काम करता है। सफेद टूथपेस्ट को तकरीबन एक घंटे के लिए पिम्पल पर लगाकर छोड़ दें। लेकिन यह ध्यान रखें कि आपका टूथपेस्ट जेलयुक्त न हो। पिम्पल हटाने के लिए सफेद टूथपेस्ट का ही इस्तेमाल करें। यह पिम्पल की सूजन कम करने में सहायक है।

स्टीम द्वारा उपचार

चेहरे की दमक के लिए स्टीम उपचार बेहद जरूरी है। यह न सिर्फ गंदगी हटाता है बल्कि चेहरे की त्वचा को मुलायम भी रखता है। दरअसल स्टीम उपचार के जरिये रोम छिद्र खुल जाते हैं। नतीजतन त्वचा को सांस लेने में आसानी होती है। स्टीम उपचार लेने से चेहरे में गंदगी नहीं जमती जिससे पिम्पल होने की आशंका में कमी आती है।

 

MLSU के बादशाहो की हुई जीत – आखरी दाव खेला भवानी ने .

– सुविवि छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी के भवानी शंकर बोरीवाल जीते
– केन्द्रीय छात्रसंघ पैनल में दो एबीवीपी, दो एनएसयूआई प्रत्याशी जीते
उदयपुर। सुखाडिया विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनावों में अध्यक्ष पद पर कांटे की हुई टक्कर में ऑटो चालक के बेटे एबीवीपी प्रत्याशी भवानी शंकर बोरीवाल ने कपडा व्यापारी के बेटे एनएसयूआई से चुनाव लडे रौनक गर्ग को 167 मतों से शिकस्त दी। उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी, महासचिव व संयुत्त* सचिव पर एनएसयूआई के प्रत्याशियों की जीत हुई।
उदयपुर के सुखाड़िया विश्वविद्यालय सहित संभागभर में आज हुए छात्रसंघ चुनावों में सुबह 8 बजे से 1 बजे तक मतदान हुआ। मतदान को लेकर सुबह से कॉलेज छात्र-छात्राओं मेें खासा उत्साह देखा दोपहर 1 बजे मतदान समाप्ति तक कुल 62.21 प्रतिशत मतदान हुआ। मतदान स्थल पर पुलिस की चाक चौबंद व्यवस्था रही। विवि प्रशासन ने इस बार मतदाता छात्र-छात्राओं को बूथ स्थल तक मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं दी। कॉमर्स कॉलेज में बाहर भवानी व रौनक के समर्थक मतदान समाप्ति तक जुटे रहे। इस दौरान गेट के पास बार-बार जमा होते समर्थकों को खदेडने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पडा। मतदान समाप्ति के बाद पुलिस ने संघटक कॉलेज के बाहर जमा भीड को वहां से रवाना किया। इसके बाद मतपेटियों को सुविवि के एफएमएस कॉलेज लाया गया जहां दोपहर 3 बजे मतगणना शुरू हुई और संघटक कॉलेजों के परिणाम आना शुरू हो गए। सुविवि अध्यक्ष पद पर भवानी व रौनक के मतों की गिनती रात ७.३० बजे तक चली। इसके बाद भवानी को विजेता घोषित किया गया। केन्द्रीय कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी के दिनेश डांगी ने 1923 मतों से जीत हासिल की। महासचिव पद पर एनएसयूआई के शिवनारायण जाट 260 मतों से विजयी रही वहीं संयुक्त सचिव पद पर एनएसयूआई की भारती कुंवर राठौड 593 वोटों से विजयी रही।
इधर, संघटक कॉलेज कॉमर्स कॉलेज से हिमांशु पंवार, आर्टस कॉलेज से महेश रोत, साइंस कॉलेज से कार्तिक सिंह यादव, विधि महाविद्यालय से नवीन मेनारिया अध्यक्ष पद पर विजयी रहे। मीरा गल्र्स कॉलेज में सभी पदों पर एबीवीपी के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि अध्यक्ष पद मणिराम ने पूजा जाट को हराया। डेयरी कॉलेज से दीपक मेघवाल, आयुर्वेद कॉलेज से दुर्गाशंकर गुर्जर व गुरूनानक कॉलेज से कृष्णा मेनारिया ने अध्यक्ष पद पर विजयी पताका लहराया।
लॉ व साइंस में कम अंतर से जीते प्रत्याशी: छात्रसंघ चुनावों में इस बार सुविवि के दो संघटक कॉलेज साइंस व लॉ कॉलेज में प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर रही। दोनों ही कॉलेजों में चुनाव परिणाम आने के बाद हार-जीत का अंतर कम होने से पुन: मतगणना की गई। जिसके आधार पर लॉ कॉलेज से नवीन मेनारिया ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी ललित सिसोदियों को 7 मतों से व साइंस कॉलेज में कार्तिक यादव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को 15 वोटों से शिकस्त दी।
साइंस कॉलेज ने दिया वोटों का अंतर: सुविवि केन्द्रीय छात्रसंघ अध्यक्ष पद चुनाव लड रहे रौनक गर्ग व भवानी शंकर बोरीवाल के बीच कांटे की टक्कर हुई। कॉमर्स कॉलेज से वोटरों को रिझाने के लिए दोनों ही प्रत्याशी दिनभर इसी कॉलेज के बाहर जुटे रहे। इसका कारण सर्वाधिक मतदाता इसी कॉलेज से होना है लेकिन दोनों ही प्रत्याशियों की पृष्ठभूमि इसी कॉलेज से होने के कारण इस कॉलेज के वोट आपस में बंट गए और विज्ञान महाविद्यालय ने इस बार हार-जीत का फैसला किया। अंतिम चरणों तक दोनों के बीच मुकाबला बराबरी का रहा और आखिरी में भवानी ने धीरे-धीरे बढत लेना शुरू की जो अंत में 167 मतों तक पहुंची और यह उसकी जीत में बदल गई।
एमपीयूटी में मणिराम अध्यक्ष: महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिकारी व मुख्य चुनाव अधिकारी प्रौ. सुमन सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में कुल 28 पोलिंग बूथ बनाये गये थे। वर्तमान छात्रसंघ चुनाव मे केंद्रीय कार्यकारिणी के लिये कुल 3056 मतदाताओं मे से 2441 (79.87 प्रतिषत) छात्रों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। केंद्रीय छात्रसंघ कार्यकारिणी के चुनाव मे अध्यक्ष, महासचिव एवं संयुक्त सचिव सहित तीनों पदों पर अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय का आधिपत्य रहा। अध्यक्ष पद पर मणिराम (1022 मत) ने पूजा जाट को (626 मत) हराया, महासचिव के पद पर यशवन्त मेनारिया ( 1285 मत) ने मोहित शर्मा (598 मत) को हराया। संयुक्त सचिव सह कोषाध्यक्ष के पद पर ज्योति पटेल नें (1363 मत) ने एक तरफा जीत तय करतें हुए पुष्पेन्द्र सिंह (497 मत) को हरा कर पर विजय प्राप्त कीे। पहली बार विवि में सृजित शोध प्रतिनिधि पद पर तरूण कुमार जाटवा ने निर्मल कुमार मीणा को हरा जीत हासिल की

उदयपुर की गड्ढों भरी सड़कों के बिच महापौर और विधायक के फोटो लगा किया प्रदर्शन

उदयपुर। उदयपुर शहर की खराब सडकों पर बड़े- बड़े गड्ढों से हर खासो आम परेशान है। शहर के हर गली मोहल्ले ही नहीं मुख्य सड़कें तक टूटी हुई है। इन गड्ढों और खस्ता हाल सड़कों को लेकर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विशेष प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के अंतर्गत पानी से भरे गड्ढों में बिच सड़कों पर नगर निगम महापौर और युआईटी अध्यक्ष शहर विधायक की सचित्र तख्तियां लगा कर प्रदर्शःन किया।
शहर की खस्ता हाल सड़कों के विरोध में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं नगर निगम महापौर चन्द्र सिंह कोठारी और युआईटी के अध्यक्ष रविन्द्र श्रीमाली के सचित्र तख्तियां बना कर गड्ढों भरी सड़क के बिच लगा दिए और सड़को के विरोध में प्रदर्शन किया।

इसके अलावा गृहमंत्री गुलाबचद कटारिया( विधायक उदयपुर) की भी सचित्र तख्तियां बनाकर खड्डों पर लगाई व जनता का प्रशासन द्वारा बनाई सभी सड़को पर स्वागत किया।
आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि पिछले २०-25 वर्षों से उदयपुर शहरमे BJP का शासन है किंतु आज भी शहर मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहा है।शहर में चारो तरफ सड़को की हालत खराब है।
स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ो रूपये आये हुए है, परन्तु कँहा खर्च हो रहे है??
जनता को नज़र क्यों नही आ रहे?
‌आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता राजेश चौहान, मयंक जानी, दीपेश शर्मा, मो.हनीफ, हेमंत पालीवाल, हेमराज जी लोहार, सुमित विजय, आसिफ, प्रकाश भारती, भरत कुमावत, मेवाड़ी महाराज आदि ने मांग की , की जनता द्वारा गाढ़ी कमाई से दिए हुए टेक्स का प्रशासन ईमानदारी से उपयोग करे।
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विशेष योग्यजनों को कौशल विकास से जोडे़गा ‘‘जीवन तरंग जिंक के संग‘‘ कार्यक्रम

हिन्दुस्तान जिंक की इस पहल से 4 जिलों के 500 बच्चें होगें लाभान्वित

उदयपुर। ईष्वर कुछ बच्चों को खास तौर पर बनाता है जिनकी मुस्कान आपको मुस्कुराने के लिये बाध्य कर देती है तो वहीं आपकी आंख में आंसू भी ला देते है इन बच्चों को खास देखभाल की जरूरत होती है इस कारण इन बच्चों को विषेष बच्चें माने जाते है। ऐसे में यदि इन विषेष योग्यजन बच्चों के सपनों को संबंल मिल जाए तो ये भी समाज की मुख्यधारा से जुड सकते है। इसे संभंव करने की पहल है, हिन्दुस्तान जिंक का जीवन तरंग ज़िंक के संग कार्यक्रम जिसके अन्तर्गत अब इन बच्चों को कौषल विकास से जोडा जाएगा ताकि ये भी आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक तौर पर सक्षम हो सके।
बुधवार को यषदभवन सभागार में जिंक दिवस आयोजित किया गया विषेष योग्य जन बच्चों ने कार्यक्रम में भक्तिगीत, देषभक्तिगीत, फिल्मी गीतों तारे जमीं पर, जय हो पर नृत्य के साथ ही खुद की क्षमता को दर्शाया कई विषयों पर अपनी प्रस्तुती दी। कार्यक्रम में सभी प्रस्तुतियों की आॅडिटोरियम में मौजूद हर एक व्यक्ति ने तालियों की गडगडाहट और विषेष योग्यजनों को हाथ हिला कर अभिवादन से उत्साह वर्धन किया। कार्यक्रम में राजकीय विद्यालय चाकसू के कृष्णपाल ने गीत की प्रस्तुती दी। जिसमें श्री सांवलिया बहुउद्धेषीय विकलांग सेवा संस्थान चित्तौडगढ़, बधिर बाल कल्याण विकास समिति भीलवाडा, विकलांग कल्याण समिति उदयपुर, बाधित बालविकास कल्याण समिति अजमेर, प्रयास संस्था उदयपुर के बालक बालिकाओं की प्रस्तुतियों ने समारोह को अद्भूत और उर्जावान कर दिया।

इसके तहत् हिन्दुस्तान जिंक के कार्य क्षेत्र जिलों उदयपुर, चित्तौडगढ़ के चंदेरिया लेड जिंक स्मेल्टर, भीलवाड़ा के रामपुरा आगुचा खान और अजमेर के कायड माईन्स के 500 बच्चों को चिन्हित किया गया हैं। इन बच्चों को सार्थक षिक्षा देने के लिये हिन्दुस्तान जिं़क ने उदयपुर में विकलांग कल्याण समिति, चित्तौडगढ़ में श्री सांवलिया बहुउद्धेषीय विकलांग सेवा संस्थान, भीलवाड़ा में बधिर बाल विकास कल्याण समिति ए अजमेर में बाधित बालविकास समिति व्त् प्रयास संस्था उदयपुर से भागीदारी की है। कौषल विकास के लिये नेश्नल हेण्डीकेप्ड फाईनेंस एण्ड डेवलपमेन्ट कार्पोरेषन के साथ मिल कर

करीब 400 मूक बधिर बच्चों के जीवन में सार्थक बदलाव एवं इनके लिये कार्यरत संस्थानों की दीर्धकालीन दृष्टि और रोडमेप विकसित करने के लिए नोयेडा डीफ सोसायटी के साथ भागीदारी की गयी है जिसके 4 स्थायी प्रषिक्षक भारतीय सांकेतिक भाषा सिखाएगें। इस कार्यक्रम में सांकेतिक भाषा सिखाने वाले उन षिक्षकों को भी प्रषिक्षित किया जाएगा जो कि इस कोर्स को सिखाने में सक्षम हो सकेंगें। इस साझेदारी के माध्यम से वें सभी बच्चें सांकेतिक भाषा को सीख कर एवं कौषल विकास के जरियें व्यावसायिक और व्यक्तिगत क्षमता का गुणात्मक विकास कर समाज में सक्रिय योगदान दे सकेंगें। नोयेडा डीफ सोसायटी की संस्थापक रूमा रोका ने जानकारी दी ज्ञप् वें साकेंतिक भाषा को सिखाने के साथ ही युवाओं के लिये अग्रणी दृष्य प्रषिक्षण पाठ्यक्रम बनाने और कम्यूटर के जरियें एसे युवाओं को व्यावसायिक प्रषिक्षण देती है।

पेराएथलीट चेम्पियनषीप में गोल्ड विजेता भारतीय एथलीट सुंदर सिंह गुर्जर भी हाल ही में इन विषेषयोग्यजन बच्चों से मिले और इनसे बातचीत कर इनका उत्साह वर्धन किया। बच्चें भी उनसे मिलकर उत्साहित नज़र आए। सुन्दर सिंह ने बच्चों का मनोबल बढ़ाया एवं कहा कि कठिन परिश्रम एवं लगन से लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। 19 से 22 साल की उम्र सभी के लिए उज्जवल भविष्य की कुंजी होता है। उन्होंने बच्चों को जोर डालते हुए कहा कि बच्चों को अपनी रूचि के अनुसार अपने कॅरियर का चुनाव करना चाहिए। सुन्दर सिंह गुर्जर ने फज्जा, दुबई में फरवरी 2017 में आयोजित 9वीं आईपीसी ग्रांड प्रीक्स में डिस्कस एवं शाॅट पुट में 3 स्वर्ण पदक जीतकर विजेता रहे है। मार्च 2017 में 3 नेषनल पैरा एथलेटिक्स चैम्पियनषिप में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोषन किया है। सुन्दर सिंह जुलाई 2017 में लंदन में आयोजित विष्व पैरा एथलेटिक्स चैम्पियनषिप में 60.36 मीटर की रेस में भारत के एकमात्र स्वर्ण पदक विजेता रहे है।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील दुग्गल विषेष योग्यजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिये आगे आने कि आवष्यकता है एवं प्रत्येक व्यक्ति इनके लिये समय निकाल कर इन्हें समाज का अभिन्न हिस्सा बनाने में अहम भूमिका निभाएं। हिन्दुस्तान जिंक का जीवन तरंग कार्यक्रम इसी सोच को पुरी करने की पहल है।
हिन्दुस्तान जिंक के हेड कार्पोरेट कम्यूनिकेषन पवन कौषिक ने बताया कि 10 जनवरी को हिन्दुस्तान जिंक के 51वें स्थापना दिवस पर जीवन तरंग जिंक के संग कार्यक्रम की औपचारिक शुरूआत की गयी थी । इस पहल से विषेष योग्यजन बच्चें जो कि सुन बोल नहीं सकतें या देख नहीं सकते या आम लोगो की तरह सोच समझ नहीं रखतें, समाज के साथ समायोजित हो कर अपना जीवन जीने के लिये महत्वपूर्ण साबित होगा।
जिंक दिवस पर आयाजित कार्यक्रम में मुख्यकार्यकारी – अधिकारी सुनील दुग्गल, मुख्य वित्तीय अधिकारी – अमिताभ गुप्ता, हेड प्रोजेक्ट -नवीन सिंघल, मुख्यप्रचालन अधिकारी स्मेल्टर्स – पंकज कुमार, मुख्यप्रचालन अधिकारी माईनिंग – एलएस शेखावत, हेड सीएसआर – नीलिमा खेतान, चीफ काॅमर्षियल आॅफीसर – रामाकृष्णन काषीनाथ सहित अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।

 

 

 

करकरे पर राजनीतिक रस्साकशी खत्म हो

असुविधाजनक प्रश्न पूछने के लिए ही पेशेवर पत्रकार बने होते हैं, इसलिए मुझे सीधे यह प्रश्न पूछना चाहिए : महाराष्ट्र पुलिस के अधिकारी हेमंत करकरे, जो 26 नवंबर 2008 के मुंबई हमले में ‘शहीद’ हुए, क्या झूठे और राजनीतिक प्रतिष्ठान के प्यादे थे? मैं ऐसा इसलिए पूछ रहा हूं, क्योंकि मालेगांव विस्फोट मामले में कर्नल श्रीकांत पुरोहित को दी गई जमानत के संबंध में यह फैलाने का प्रयास चल रहा है कि करकरे के नेतृत्व में महाराष्ट्र एटीएस ने कर्नल पुरोहित जैसे ‘राष्ट्रवादी’ नायक को इसलिए ‘फंसा’ दिया, क्योंकि यूपीए सरकार ‘भगवा’ आतंक का हव्वा खड़ा करना चाहती थी।
मैं यह प्रश्न इसलिए भी पूूछ रहा हूं, क्योंकि मैं मृदुभाषी करकरे को ‘सम्माननीय’ पुलिस अधिकारी के रूप में ‘जानता’ था, जिनके साथ मेरी कई बार ऑफ रेकॉर्ड लंबी बातचीत हुई थीं। 25 नवंबर 2008 को करकरे ने मुझे फोन करके कहा था कि वे ‘खुल के बोलना’ चाहते हैं। शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ ने उन्हें ‘हिंदू विरोधी’ बताते हुए अभियान चला रखा था। तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंहने मालेगाव विस्फोट की मुख्य अभियुक्त साध्वी प्रज्ञा को परोक्ष क्लीन चिट दी थी और बताया जाता है कि वे प्रज्ञा से मिलने जेल में भी गए थे। करकरे ने कहा, ‘अब बहुत हो गया, मुझे लगता है कि वक्त आ गया है कि सारे तथ्य सामने रख दिए जाए।’ उनकी आवाज में बहुत चिंता झलक रही थी। अगले ही दिन मुंबई खौफनाक आतंकी हमले में रक्तरंजित हो गई और कर्तव्य निभाते हुए करकरे ने सर्वोच्च बलिदान कर दिया। अब लगभग एक दशक बाद मैं विचलित हूं : क्या ऐसा हो सकता है कि वह अधिकारी जिसका अंतिम संस्कार राष्ट्रीय सम्मान के साथ किया गया, जिन्हें ‘राष्ट्रीय हीरो’ माना गया, जिनके साथ के लोग उन्हें असंदिग्ध निष्ठा वाला व्यक्ति मानते हैं, अचानक जांच एजेंसियों के लिए संदिग्ध हो जाए।
मालेगांव मामले में एनआईए के आरोप-पत्र में दावा किया गया है कि कम से कम दो महत्वपूर्ण गवाहों को कर्नल पुरोहित सहित अभियुक्तों के खिलाफ झूठे बयान देने के लिए बाध्य किया गया था। एनआईए और महाराष्ट्र एटीएस के आरोप-पत्रों में फर्क को ही कर्नल पुरोहित को जमानत देने का महत्वपूर्ण कारण बताया गया। 2011 में एनआईए को गहराई से जांच के अच्छे इरादे से मामला सौंपा गया। फिर भी छह साल बाद भी मुकदमा शुरू नहीं हुआ, अभियुक्त को जमानत देने का यह भी एक कारण था। इस बीच केंद्र में सरकार बदल गई। जहां हमारे सामने ऐसे गृहमंत्री थे जो ‘हिंदू आतंक’ के बारे में कुछ भी कह देते थे, अब वह व्यक्ति गृहमंत्री है, जो साध्वी प्रज्ञा की गिरफ्तारी के वक्त उसके साथ खड़ा हुआ था। जब अभियोग लगाने वाली एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों का ऐसा भिन्न रुख हो तो क्या जांच पक्षपातरहित और स्वतंत्र हो सकेगी?
सच यह है कि अत्यधिक ध्रुवीकृत राजनीतिक विमर्श ने आतंकवाद संबंधी लगभग हर बड़ी जांच पर असर डाला है। जहां कभी हमें कहा जाता था कि ‘अभिनव भारत’ जैसे दक्षिणपंथी गुट इस्लामी आतंक का मुकाबला करने के लिए उभरे हैं, अब लगता है हमें यह बताने की कोशिश है कि ऐसे आतंकी गुट यूपीए सरकार ने भाजपा व संघ परिवार को मुश्किल में डालने के लिए ‘निर्मित’ किए हैं। जहां हमें कभी ऐसे विस्तृत टेप दिए गए थे, जिनमें कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा शामिल थे (इसमें दर्ज बातचीत कई घंटों की थी), अब हमें बताया जा रहा है कि उन्हें हम पूरी तरह ‘बनावटी’ सूचनाएं मानें। गवाह अचानक मुकर गए और सरकारी वकील ने यह कहते हुए त्यागपत्र दे दिया कि 2014 के बाद एनआईए उनसे ‘धीमे’ चलने के लिए कह रही है। यह तो अचानक ऐसा हो गया जैसे सात लोगों की जान लेने वाला मालेगांव विस्फोट कभी हुआ ही नहीं था और यदि हुआ भी था तो गलत लोग पकड़ लिए गए हैं।
आप देखिए कि ऐसे देश में जिसका नेतृत्व आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (बिल्कुल बर्दाश्त न करना) की बात करता है, वहां कैसी विचित्र स्थिति पैदा हो जाएगी। अब हमें 2007 में हुए समझौता बम विस्फोट का एकदम उलट वर्जन बताया जा रहा है। इसके पीछे लश्कर-आईएसअाई-सिमी की मिलीभगत थी या स्वामी असीमानंद जैसे संघ समर्थक इसमें शामिल थे? गुजरात का इशरत जहां मामला भी इसी प्रकार राजनीतिक लड़ाई में फंस गया है और ‘फर्जी मुठभेड़’ में हत्याओं के आरोपी पुलिस वालों को अब निर्दोष बताया जा रहा है और उनके साथ नायकों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। फिर चाहे 7/11 के मुंबई ट्रेन धमाके हों, हैदराबाद का मक्का मस्जिद विस्फोट हो मूल प्रकरण तो स्थानीय मुस्लिमों के खिलाफ बनाया गया, जो बाद में दक्षणपंथी हिंदू गुटों तक पहुंच गया। देश में आतंकी प्रकरणों में सफलतापूर्वक मुकदमा चलाने का रेकॉर्ड बहुत खराब है। दुखद है कि हिंदू-मुस्लिम के पक्षपाती चश्मे से आतंकवाद को पेश करके देश के राजनीतिक नेतृत्व ने खतरनाक ढंग से राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता किया है। अब उत्तरोत्तर स्पष्ट हो रहा है : या तो पूर्ववर्ती कांग्रेस-नेतृत्व वाली सरकार झूठ बोल रही थी अथवा मौजूदा सरकार अभियुक्तों को बचा रही है। आधिकारिक वर्जन को चुनौती देना अब ‘राष्ट्र-विरोधी’ कृत्य है, जिससे ऐसी तर्कसंगत बहस एक तरह से असंभव हो गई है, जिसमें तथ्यों को लगातार जारी मिथ्या प्रचार से अलग करके देखा जा सके।
इस सब में मेरे मित्र करकरे कहां ठहरते हैं? मृत व्यक्ति अपना बचाव नहीं कर सकते, इसलिए उम्मीद ही की जा सकती है उनकी कीर्ति को वे लोग दागदार नहीं बनाएंगे, जो असुविधाजनक सच का सामना नहीं कर सकते। एक पेशेवर पुिलस अधिकारी का ‘सम्मान’ दांव पर लगा है, इसलिए राज्य-व्यवस्था को साफ-सुथरा रवैया अपनाना चाहिए : या तो करकरे की जांच का ‘भंडाफोड़’ किया जाना चाहिए या उनके साथ मजबूती से खड़े होना चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीतिक रस्साकशी खत्म होनी चाहिए।
पुनश्च : कर्नल पुरोहित को जमानत देने के कुछ दिन पहले दस अज्ञात मुस्लिम जेल में दस से ज्यादा साल बिताकर बाहर आ गए, क्योंकि 2005 के हैदराबाद बम विस्फोट मामले में उनका शामिल होना साबित नहीं किया जा सका। फर्क यह था कि इस बार ‘न्याय’ पर न शोरभरी प्राइम टाइम बहस हुई, न भावुक जश्न था, न राष्ट्रवादी नारे थे। सरल-सी बात है छोड़ दिए गए लोग दूसरे धर्म के थे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
यह लेख दैनिक भास्कर में 01.09.2017 को सम्पादकीय पेज पर प्रकाशित हुआ है
राजदीप सरदेसाई
वरिष्ठ पत्रकार
rajdeepsardesai52@gmail.com