कांग्रेस के जंगी प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज, कई कांग्रेसी घायल

 

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बांसवाड़ा/डूंगरपुर।  किसानों की समस्याओं की अनदेखी के खिलाफ व किसानों के क़र्ज़ माफ़ी को लेकर युवा कांग्रेस बांसवाड़ा-डूंगरपुर द्वारा डूंगरपुर जिला कलेक्ट्री पर कांग्रेसियों के जंगी प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्री में घुसने की बात को लेकर कांग्रेसी और पुलिस आमने सामने हो गए। कांग्रेसियों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर बितर किया। लाठीचार्ज के दौरान कई कांग्रेसियों को चोटें भी आई। कांग्रेसी नेताओं ने पुलिस द्वारा की गयी लाठीचार्ज की भर्त्सना करते हुए कहा मोजुदा भाजपा सरकार पुलिस के बल पर किसानों के हक की लड़ाई को कुचलना चाहती है। किसानों के हक के लिए आन्दोलन को कुचलना एक तरह से सरकार द्वारा किसानों के साथ विश्वासघात है।

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केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा लगातार किसानों की समस्याओं की अनदेखी के खिलाफ व किसानों के क़र्ज़ माफ़ी को लेकर युवा कांग्रेस बांसवाड़ा-डूंगरपुर द्वारा सोमवार को डूंगरपुर ज़िला कांग्रेस कमेटी के बाहर किसान वेदना धरना प्रदर्शन हल्ला बोल आयोजित किया गया।
सभा को हल्ला बोल का नाम दिया गया सभा को संबोधित करते हुवे अखिल भारतीय कांग्रेस के सचिव ताराचंद भगोरा ने कहा कि कि नोटबंदी जैसे सरकार के इस अदूरदर्शी व अपरिपक्व कदम ने देश के सभी नागरिकों के समक्ष परेशानियां खड़ी कर दी । किसानों व गरीब आबादी के ऊपर इस नोटबंदी का गहरा व विपरीत प्रभाव पड़ा । प्रदेश उपाध्यक्ष व बागीदौरा विधायक महेन्द्रजीत सिंह मालवीया ने कहा कि आज कल आम आदमी कई आवश्यक वस्तुओं के लिए परेशान देखा गया है। वह अपनी छोटी चोटी जरूरतों के लिए हैरान परेशान रहा। नोटबंदी मात्र यूपी चुनाव को लेकर किया गया फैसला था ।
भारत सरकर ने भ्रष्टाचार और अवैध रूप से नकदी रखने वालों को काबू में करने के लिए 500 और 1000 के पुराने नोटों को रद्द करने का फैसला किया था। लेकिन इस फ़ैसले से कम आय वाले ज़्यादातर लोग, व्यापारी और बचत करने वाले साधारण लोग जो नकदी अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं, वे बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं । कर्जे में डूबे किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। राजस्थान में 100 में से 62 किसान कर्जदार हैं। उन्होंने कहा कि जनता को कांग्रेस द्वारा किए गए वादों पर पूरा भरोसा रहता है क्योंकि कांग्रेस जो कहती है वह करके दिखाती भी है। उन्होंने भाजपा पर किसानों के साथ छलावा करने का आरोप भी लगाया और चेतावनी दी कि किसानों की कर्जा माफी के लिए कांग्रेस द्वारा सड़कों पर संघर्ष भी किया जाएगा।

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युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव व राजस्थान प्रभारी देवेंद्र कादियान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर किसानों की समस्याओं की ‘अनदेखी’ करने का आरोप लगाया तथा किसानों के ऋण की माफी, उच्च समर्थन मूल्य और विद्युत शुल्क में कमी करने की मांग की । कादियान ने कहा कि देश में कर्ज के बोझ से दबे किसानों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती रही है। मुख्य वक्ता के तौर पर मौजूद युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष व हिंडोली विधायक अशोक चांदना ने कहा कि ज्ञापन के माध्यम से युवा कांग्रेस मुख्यमंत्री से प्रदेश के किसानों की कर्ज माफ करने की मांग करती है।सीएम को ज्ञापन भेजते हुए कहा है कि सरकार सातवां वेतनमान लागू कर सभी को प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश का किसान कभी आपदा तो कभी सूखे से प्रभावित है। उसके बारे में कोई योजना नहीं चलाई जा रही है। किसान कर्ज में डूबे हैं। सरकार बड़े उद्योगपतियों के कर्ज तो माफ कर रही है परंतु किसानों के कर्ज के बारे में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। मोदी सरकार अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए केवल एक जुमलेबाज सरकार बन कर रहा गई है। बेरोजगारी बढ़ रही है एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इस कदर निराशा छा गई है कि किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं और देश के मध्यमवर्ग की कमर टूट गई है।

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संचालन प्रवक्ता एडवोकेट इमरान खान ने किया और कहा कि कांग्रेस की जन वेदना सभाओं को भारी जनसमर्थन मिल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट, युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक चांदना व उदयपुर डिवीजन में प्रदेश उपाध्यक्ष महेंद्र जीत सिंह मालवीया की सक्रियता को देखते हुवे विरोधी दल भाजपा में बेचैनी बढ़ रही है और इस बार प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनना तय है।

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सभा पश्चात् सभी युवा व वरिष्ठ कांग्रेसी भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जिला कलेक्ट्री पहुंचे । जहां पुलिस ने उन्हें गेट पर अंदर जाने से रोक लिया । सभी कांग्रेसी अंदर जाने की ज़िद करते हुए गेट पर बैठ गए व जमकर नारेबाजी की । इस दौरान पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा । पुलिस द्वारा लाठी चार्ज भी किया गया जिसमें युवा कार्यकर्ता के आँख के पाया गंभीर चोट आई व टाँके लिए गए ।
ज्ञापन देने जाते समय कलेक्ट्री गेट पर युवा कार्यकर्ताओ और पुलिस में झड़प भी हुई । एक बारगी तो माहौल गरमा गया था ।  चांदना सभी कार्यकर्त्ता को अंदर ले जाने की ज़िद करते रहे । इस दौरान युवाओ ने जमकर गगनभेदी नारो से माहौल गूंजा दिया । करीब 100 से अधिक कार्यकर्ताओ ने इस दौरान गिरफ़्तारी भी दी जिसमे अशोक चांदना, महेंद्र जीत सिंह मालवीया, ताराचंद भगोरा,युवा अध्यक्ष नटवर तेली, राष्ट्रिय सचिव देवेंद्र कादियान, प्रदेश सचिव चरमेश शर्मा, प्रेमप्रताप सिंह मालवीया, प्रधान राजेश कटारा, लक्ष्मण कोटेड, गणेश घोघरा सहित कई कांग्रेसजन शामिल थे जिनको थोड़ी देर बाद पुलिस द्वारा शहर के बाहर आसपुर रोड पर छोड़ा गया । इसके लिए  बड़ी तादाद में पुलिस कर्मी मौजुद रहे ।

गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश हिंदुत्व की दूसरी प्रयोगशाला – विचार

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yogiगोरखनाथ मठ के महंत और उग्र हिंदू संगठन हिंदू युवा वाहिनी के संस्थापक योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाकर संघ परिवार ने गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश को हिंदुत्व की दूसरी प्रयोगशाला बनाने की शुरुआत कर दी है.

पर क्या उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी को मिली ज़बरदस्त चुनावी सफलता से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) हिंदू राष्ट्र के अपने मक़सद के एक क़दम और नज़दीक पहुँच गया है?

इस सवाल का जवाब आसान नहीं है और न ही हिंदू राष्ट्र को एक राजनीतिक हक़ीक़त में बदलना आसान है.

लेकिन नौ दशक पहले 1925 से शुरू हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यात्रा को देखें तो समझ में आएगा कि इस दौर में कई तरह के हिंदूवादी समाज-समितियां बनीं, फैलीं और फिर भुला दी गईं. पर आरएसएस अपनी राह से भटका नहीं.

आरएसएस के स्वयंसेवकइमेज कॉपीरइटAFP

संघ हमेशा बिना लाग लपेट के घोषित करता रहा है कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना उसका ध्येय है- ऐसा हिंदू राष्ट्र जिसमें हिंदू समाज की जातियां अपनी-अपनी नियत जगह बनी रहें पर राजनीतिक फ़ैसले करते समय ये विभाजन अप्रासंगिक हो जाए.

‘संघ की रणनीति’

यानी वर्णाश्रम धर्म व्यवस्था में बिना छेड़छाड़ किए संघ सभी हिंदू जातियों को ‘समरसता’ की छतरी के नीचे ले आना चाहता है. पर इसके लिए उसे बार-बार हिंदू समाज को बताना पड़ता है कि वो चारों ओर से दुश्मनों से घिरा हुआ है.

इसके लिए कई बार नए-नए दुश्मन गढ़ने पड़ते हैं ताकि इस दुश्मन का भय दिखाकर हिंदू समाज को एकजुट किया जा सके. पर दुश्मन गढ़कर हिंदुओं को इकट्ठा करना संघ की व्यापक रणनीति का एक हिस्सा मात्र है- पूरी रणनीति नहीं.

उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में संघ-भाजपा की रणनीति का हर रंग नज़र आया था.

यूपी चुनाव में बीजेपी की जीतइमेज कॉपीरइटEPA

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क़ब्रिस्तान-श्मशान का हवाला देकर हिंदू और मुसलमानों को अलग-अलग खड़ा किया, लेकिन साथ में ग़रीब बस्तियों में गैस सिलेंडर भी पहुँचाए और कामगार तबक़े तक ये संदेश पहुंचाने में भी कामयाब रहे कि नोटबंदी दरअसल ‘अमीरों पर चोट’ है.

मोदी की लोकप्रियता

हालांकि लोकसभा चुनावों में बीजेपी को इससे भी ज़्यादा समर्थन मिला था पर तब उसे नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का असर माना गया था.

इसीलिए जनता दल (यूनाइटेड) के एक वरिष्ठ नेता ने तब मुझसे कहा था, “अब फिर से जाति चलानी पड़ेगी. वही हिंदुत्व का काट साबित होगी.”

पर हुआ ठीक उल्टा. जातीय समीकरण इस क़दर उलट-पुलट हो गए कि उत्तर प्रदेश की 85 आरक्षित विधानसभा सीटों में बहुजन समाज पार्टी सिर्फ़ दो सीटें जीत पाई.

 

 मुसलमानों को लगभग सौ टिकट देने की उसकी रणनीति नाकाम हो गई. भारतीय जनता पार्टी ने एक भी मुसलमान को टिकट न देकर साफ़ संदेश दे दिया कि वो मुसलमानों के वोट की मोहताज नहीं है.

हिंदुत्व की नई प्रयोगशाला

अगर किसी को बची खुची ग़लतफ़हमी रही भी तो गोरखनाथ मठ के महंत योगी आदित्यनाथ को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी और संघ ने इसी संदेश को साफ़-साफ़ और बड़े-बड़े अक्षरों में यूपी के आसमान पर लिख दिया है.

इस फ़ैसले से ये भी स्पष्ट हो गया है कि गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश हिंदुत्व की प्रयोगशाला बनने जा रहा है.

एक मायने में गुजरात के मुक़ाबले उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व का प्रयोग ज़्यादा मुश्किल और ज़्यादा पेचीदा साबित होगा पर नरेंद्र मोदी ने जातीय विभाजन को बेकार साबित करके, क़ब्रिस्तान-श्मशान के ज़रिए हिंदू और मुसलमानों को एक-दूसरे के आमने-सामने खड़ा करके और राष्ट्रवादी-राष्ट्रद्रोही की बहस का इस्तेमाल करके इस प्रयोग की बुनियाद डाल दी है.

 

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Image caption2002 के गुजरात दंगे

अब मुख्यमंत्री के तौर पर इस प्रयोग को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी संघ परिवार ने योगी आदित्यनाथ को दी है. गुजरात में हिंदुत्व के प्रयोग और उसके सबक़ योगी के सामने हैं.

मुस्लिम विरोधी बयान

विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 2002 में गोधरा कांड के बाद गुजरात में एक ऐसा उदाहरण पैदा किया जिसकी स्मृति मुसलमान कभी भुला नहीं सकेंगे.

अब उत्तर प्रदेश के चार करोड़ मुसलमानों के सामने वो आदित्यनाथ हैं जिनके मुस्लिम विरोधी बयानों के कारण कई बार विवाद खड़े हुए हैं.

मसलन, फ़रवरी 2015 में उन्होंने ऐलान किया कि मौक़ा मिलने पर वो “देश की सभी मस्जिदों में गौरी-गणेश की मूर्तियां स्थापित करवा देंगे.”

ऐसे आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने पर ‘सेकुलरों’ या मुसलमानों को एतराज़ है तो हुआ करे.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर असमर बेग का कहना है कि मुस्लिम वोट बैंक एक मिथक है.

अब संघ-बीजेपी को उनकी परवाह कहां है क्योंकि इस शब्द पर से भारतीयों का विश्वास उठाने की जो मुहिम बीस-पच्चीस साल पहले लालकृष्ण आडवाणी ने शुरू की थी उसका असर अब महसूस किया जाने लगा है.

बीजेपी का उद्देश्य

कई मध्यवर्गीय परिवारों में अब धर्मनिरपेक्षता को जनतंत्र का एक महत्वपूर्ण मूल्य नहीं बल्कि कांग्रेसियों और ‘फ़ैशनेबल कम्युनिस्टों’ का ढकोसला समझा जाने लगा है.

पर यहां तक पहुंचने के लिए संघ और भारतीय जनता पार्टी ने ज़बरदस्त लचीलापन दिखाया.

उस दौर में जब महात्मा गाँधी पर हमला करने से पहले उनके कट्टर आलोचक भी दो बार सोचते थे और समाजवाद के ज़रिए बराबरी का सपना साकार करने की बात होती थी, उस दौर में अटल बिहारी वाजपेयी ने ‘गांधीवादी समाजवाद’ को भारतीय जनता पार्टी का उद्देश्य घोषित कर दिया था.

किसी और राजनीतिक ताक़त की ओर से ऐसा लचीलापन दिखाने के उदाहरण कम ही मिलते हैं.

 

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Image captionअयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए तराशे गए पत्थरों के साथ एक साधु और सुरक्षाकर्मी

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को लाने का एक और मक़सद है.

राम मंदिर

भले ही अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर बनाने को बीजेपी ने चुनावी मुद्दा न बनाया हो पर बीजेपी नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान इसे बार-बार कुरेदा ज़रूर था.

बीजेपी के नेता और राज्यसभा सदस्य सुब्रह्मण्यम स्वामी ने बीबीसी से कहा भी था, “अगले दो साल में मैं राम जन्मभूमि मंदिर बनवा दूंगा.”

बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि का अकेला मुद्दा सीधे-सीधे हिंदुओं और मुसलमानों को एक-दूसरे के विरोध में खड़ा कर चुका है.

अभी ये विवाद सुप्रीम कोर्ट में है और बीजेपी कहती रही है कि मामला अदालत के ज़रिए या आपसी सुलह-समझौते से निपटाया जाना चाहिए.

 

यूपी का बीजेपी समर्थक मुसलमान

पर अगले कुछ बरसों में इस विवाद को किसी न किसी नतीजे तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी और अगर अयोध्या में मंदिर बना तो योगी आदित्यनाथ की सरकार इसका विरोध करने वालों के प्रति कैसा रुख़ अपनाएगी अभी इसकी सिर्फ़ कल्पना ही की जा सकती है.

सत्ता में भागीदारी से अलग कर दिए गए उत्तर प्रदेश के मुसलमानों में तब क्या इतनी इच्छा शक्ति बाक़ी रह जाएगी कि वो मज़बूती से अपना विरोध भी दर्ज करवा पाएं?

आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की इस नई प्रयोगशाला में कई प्रयोग किए जाने हैं. देखते रहिए.

विचार , सोजन्य – 

अनोखी बरात बुलेट पर युवा बाराती, ट्रेक्टर में थिरकती निकली महिलाएं

jpr312969-largeउदयपुर। सेक्टर-11 स्थित गुरुद्वारे में एक शादी के दौरान रविवार को अनोखी बारात निकली। बाराती में ट्रैक्टर और बुलेट पर सवार महिलाएं-पुरुष ढोल-बाजों पर थिरकते हुए नजर आए। बारात सेक्टर-11 के विभिन्न मार्गों से होते हुए गुरुद्वारा पहुंची, जहां वर-वधू विधि-विधान से विवाह बंधन में बंधे।

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दुल्हा चिराग सोनी को अपनी शादी में कुछ अलग करने की छह थी इसी के चलते उसने पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर बरात निकाली २१ ढोल वादक और २१ बुलेट पर बरात निकाली . महिलाएं और एनी बाराती ट्रेक्टर पर डीजे के धुन पर थिरकते रहे .

ये कुछ लोग फरिश्तों से बने फिरते हैं, मेरे हत्थे कभी चढ़ जाये तो इन्सां हो जाए – राहत इन्दोरी

2उदयपुर। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र एवं राजस्थान उर्दू अकादमी की ओर से आयोजित ‘‘अखिल भारतीय मुशायरा’’ में देश के लब्ध प्रतिष्ठित शायरों ने अपनी गज़लों, नज़्मों से दर्शकों का दिल जीत लिया। इनमें जाने माने शायर राहत इंदौरी, लता हया, शीन काफ निजाम तथा अज़्म शाकिरी ने अपने कलामों से खवातिनो हज़रात का दिल जीत लिया।
शिल्पग्राम के मुक्ताकाशी रंगमंच पर आयोजित मुशायरे का आगाज़ शकील अहमद शकील से हुआ। जिन्होंने खूबसूरती से अपने शेरों से दर्शकों की दाद बटोरी। ‘‘अब कौन है जो अपना आकर हमें कह ेअब किससे जाकर हें टूट रहे हैं…’’ इसके बाद उनहोंने एक नज़्म ‘‘ये जो वक्त का तुम अदब कर रहे हो करना था पहले अब कर रहे हो…’’ सुना कर वाहवाही लूटी। मशहूर शायर राहत इंदौरी देर रात मंच पर आए और एक से बढ़कर एक मुशायरे पढ़े। रोज इन ताजा कसीदों की जरूरत नहीं, आप ताे इतना बता दिजिए जरूरत क्या है। हम अपनी जान के दुश्मन को जान कहते हैं, मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिन्दुस्तान कहते हैं। जो दुनिया में सुनाई दे उसे खामोशी कहते है, जो आंखों में दिखाई दे उसे तूफान कहते हैंं आदि मुशायरे पढ़े।

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मुशायरे में सबसे ज्यादा दाद रश्मि सबा ने बटोरी। अपने दिलकश अंदाज में उन्होंने एक एक कर शेर सुनाये तो दर्शक बंध से गये। ‘‘वो समंदर की तरह शोर मचाने से रही, जबकि सीने में नदी कितने भंवर रखती हैं…’’ सुनाई। इसके बाद एक और शेर ‘‘सिर्फ एक रात है जो ऐसा हूनर रखती है आसमानों में सजा कर वो गुहर रखती है..’ पे वाहवाही लूटी। महफिल की निजामत करने वाले शकील अहमद शकील ई इसके बाद श्रोताआंे की मांग पर उन्हें दोबारा बुलाया। तो उन्होने चंद शेर और सुना कर महफिल को आनन्दमय बना दिया।

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भोपाल के मेहताब आलम ने इस मौके पर अपनी नज़्म ‘फूलों में झलक हुस्ने यार की निकली, हम खुश हैं कोई शक्ल तो दीदार की निकली..’ इसके बाद उन्होंने एक और शेर ‘‘ जिनकी लकों पे तेरे ख्वाब होते हैं लि भी तोड़़ते है तो सलीके से ना तोड़ा तू ने बेवफाई की भी आदाब हुआ करते हैं ’’ पेश किया। टोंक के जिया टोंकी ने इस अवसर पर ‘‘मुझे यारा ऐसी अदा बख्श दे जिसे देख कर तू ख़ता बख्श दे…’’ सजा और जज़ा उसके बस में है, ना जाने वो क्या बख्श दे सुना कर दर्शकों पर अपने कलाम का जादू सा कर दिया। इसके बाद टोंकी ने एक गज़ल ‘‘ इश्क की कायनात कुछ भी न थी, दिल का झगड़ा था बात कुछ भी न थी’’ सुना कर तालियां बटोरी।
मुंबई की सुहाना नाज़ ने महफिल में ‘‘मैं हया बेंच दू ऐसी नाचीज नहीं हां गरीबी फिक्र है कोई बीमारी नहीं, सूद के लुक्मे से अच्छा भूख मुझको मार दे जिन्दगी प्यारी भी है कुछ प्यार दे’’ सुनाई तो दर्शकों ने इरशाद इरशादर हौसला अफजाई की। इसके बाद उन्होंने एक और शेर ‘‘ ख्वाहिशें क्यू खत्म नीं होती मेरी उलझन भी कम नहीं होती सुना कर दाद बटोरी। रूड़़की के सिकंदर हयात गड़बड़ ने तंजो मिजा के शेर सुना कर माहौल को हल्का बनाय। उन्होंने ‘‘मुझपे तोहमत अहले फन यूे भी सुबहो शाम है, आलम फितनागरी में मेरा अव्व्ल नाम है’’ सुना दर्शकों को लुभाया। इसके बाद सिकंदर हयात ने एक और शेर सुना कर लोगों को हंसाया ‘‘बड़ी मगरूर लगती है बड़ी बेदर्द लग रही थी, वो जब गुस्सेमें आती है मर्द लग रही थी। जयपुर के खालिद जयपुरी ने इस अवसर पर ‘‘हाल अच्छा है उनको बताना पड़ा, दर्द होते हुए मुस्कुराना पड़ा सुना कर दाद लूटी। शाहिस्ता साना ने महफिल में ‘‘बड़ी अनमोल निशानी की तरह रखा है तेरा गम आंख में पानी की तरह रखा है, कोई भी पढ़ ना सके इसलिये उसने मुझको अधूरी सी कहानी की तरह रखा’’ नज़्म सुनाई।
उउदयपुर के शायर फारूख बख्शी ने मुशायरे में अपने मुख्तलिस अंदाज में ‘‘खामोशी को पिघलना चाहिये था कोई हल तो निकलना चाहिये था सुनाई इसके बाद उन्होंने ग्लोबलाइजेशन पर गांव की चैपाल से जुड़ी नज्म सुना कर दर्शकां के दिल को दॅ सा लिया। उदयपुर के ही शादि अजीज ने इस अवसर पर ‘‘बरबाद कैसे हो गई जागीर देखना, दुनियां में इश्क वालों की तकदीर देखना…’ सुना कर दाद बटोरी। मुशायरे में हर दिल अजीज शायर अज़्म शाकिरी के शेरो पर दर्शक सबसे ज्यादा फिदा हुए। दिल को दॅ लेने वाली इनकी शारी में ‘‘ हौंसला भी नहीं है जीने का, और जीने की आरजू रखता है’’, अब जख़़्मों में ताब नहीं है, अब क्यों मरहम लाये हो..’’ सुना रक दर्शकों में जोश संचार किया।
इसके अलावा लता हया, मलका नसीम, मोहाना नाज, अतीक अनवर, राहत इंदौरी, शीन काफ़ निजाम जेसे शायरों का सुनने के लिये दर्शक देर रात तक जमंे रहे। इससे पूर्व मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति जे.पी. शर्मा, राजस्थान उर्दू अकामी के अध्यक्ष अशरफ अली, पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक फुरकान खान ने इल्मों अदब की शमा को रोशन कर महफिल का आगाज़ किया तथा फरकान खान ने अतिथि शायरों को पुष्प् गुच्छ व स्मृति चिन्ह भेंट किये।

होली के रंगों में घुला मोहब्बत का रंग – धूम धाम से मना रंगोत्सव

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उदयपुर। शहर में होली का दो दिवसीय पर्व धूम धाम और रंगों से सराबोर होकर मनाया । शहर भर में जगह जगह होली दहन के कार्यक्रम हुए जिसमे शहर भर के लोगों ने भाग लिया । धुलंडी के दिन मस्तानों की टोलियों ने झीलों के नगरी को रंगों से भर दिया । गली-मोहल्लों और सड़कों पर युवक-युवतियों की टोलियां एक-दूसरे पर जमकर अबीर-गुलाल उड़ाए और सेल्‍फी ली। पूरा शहर रंग-गुलाल और अबीर के रंग में रंग गया। महिलाओं की टोली भी अपने को रोक नहीं सकी। युवा अपने कपड़े फाड़कर डांस करते दिखे। कई परिवारों में नवजात बच्चों के ढ़ूंढ़ोत्सव भी मनाये गए। शहर भर में होली के दोनों दिन पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए किसी भी अप्रिय घटना के लिए चाक चौबंद निगरानी की |

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होली का दहन :
शहर में होली दहन का मुहूर्त गोधूलि वेला के साथ शहर के हर गली मोहल्ले कॉलोनियों आदि में होली दहन के कार्यक्रम हुए । होली दहन के पूर्व पूजा अर्चना की गयी, नव विवाहितों और नव जात बच्चों को होली की परिक्रमा करवाई गयी । होली में नारियल का होम किया गया । बड़ी होली, जगदीश चोक, मल्लातलाई, होली के बड़े कार्यक्रम आयोजित किये गए | जगदीश चौक में होलिका दहन के पूर्व सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया गया और सैकड़ों की संख्या में मौजूद लोगों ने होली दहन के कार्यक्रम में हिस्सा लिया । मल्ला तलाई चौराहे पर होली दहन का बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमे पूजा अर्चना और पारम्परिक अनुष्ठान के बाद होली का दहन किया गया।

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रंगोत्सव मना धूम धाम से :
होलिका दहन के बाद गुरुवार को सुबह से रंगों की होली की शुरुआत हो गई। खासतौर से बच्चों ने तो जमकर होली खेली, वहीं महिलाएं और युवा भी चेहरे रंगने में पीछे नहीं रहे। सुबह होते ही हर उम्र के लोगों के सिर पर होली का खुमार दिखाई देने लगा था। होली को खास अंदाज में मनाने की प्लानिंग कर रहे बच्चों को उकसाया जा रहा था। बच्चे भी टोलियां बनाकर होली खेलने निकल पड़े। एक प्रकार से पूरा शहर रंगों में सराबोर था।
रंगोत्सव पूरी तरह रंगों में डूबा रहा फिजां में उत्साह का गुलाल था…चेहरों पर रंगों की बहार है…आज खिलने लगी फिर मुस्कान है…ऐसे ही रंगबिरंगे माहोल में रंगोत्सव का आगाज़ हुआ। दोस्तों के साथ खिलखिलाते हुए ये रंग-बिरंगे चेहरे होली की खुशियों का पैगाम लेकर आए हैं। कही गुलाल तो कही रंग भरी पिचकारी, रंगों में लिपटे हुए मस्तों की टोलिया दिन भर शहर में घुमती रही, जगदीश चोक में विदेशियों ने भी रंगों के इस त्यौहार का आनंद लिया, कोलोनियों में महिलाओं ने घर घर जाकर अपनी सखियों के गलों पे गुलाल की चमक डाली। पुरुष, महिला, बच्चे और युवा उड़ते गुलाल और म्यूजिक की धुन पर होली है…. बुरा न मानो होली है…. बोलते हुए एक दूसरे को गुलाल से रंगते हुए देखे गए। शहर के अलग-अलग हिस्सों में समूह और संगठनों द्वारा मिल कर रंग खेला गया। रंगोत्सव पर हर ओर रंग और अबीर में लबरेज खुशियां दिखाई दी।

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पुलिस रही चौकन्ना:
होली के हुड़दंग में कोई संदिग्ध गतिविधि न हो। ड्रिंक करके लोग सड़कों प दुर्घटनाओं को अंजाम न दे दें। लोगों में किसी तरह का विवाद न हो। इन बातों को रोकने के लिए पुलिस भी पूरी तरह मुस्तैद नज़र आई। कई बार मनचले रंग के बहाने शहर में घूम लोगों पर रंग डालने पर पुलिस द्वारा रोका गया। मुस्लिम समाज का जुमे का दिन होने से मस्जिदों के बाहर भी खासा पुलिस का जाब्ता नज़र आया। पुलिस की सतर्कता और शहर वासियों की सद्भावना के चलते होली के दोनों दिन कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई।

उदयपुर के बाघदडा नेचर पार्क में लगी भयानक आग

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उदयपुर. शहर से करीब 15 किमी. दूर उमरड़ा के निकट बाघदड़ा नेचर पार्क में सोमवार दोपहर बड़ी आग लग गई। आग ने बहुत भयानक रूप ले लिया है और अब तक 20 दमकलें आग बुझाने में लगी हुई हैं। उदयपुर नगरनिगम से भी दमकल मौके पर पहुंची हैं। लेकिन, आग पर अब तक काबू नहीं पाया जा सका है।

जानकारी के अनुसार, बाघदड़ा नेचर पार्क में दोपहर 3 बजे आग लग गई जिसने बाद में भयानक रूप ले लिया। आग के कारण पूरा नेचर पार्क जलने के कगार पर पहुंच चुका है। सैकड़ों वन्यजीव आग की चपेट में आ चुके हैं। आग की सूचना पर कई फायर ब्रिगेड पहुंची लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका। वन विभाग के क्षेत्र में लगी आग को बुझाने के लिए वन विभाग के स्टाफ के अलावा उदयपुर नगर निगम से भी दमकल भेजी जा चुकी है। आग के कारणों का अब तक खुलासा नहीं हो पाया है लेकिन कहा जा रहा है कि सुलगती हुई बीड़ी किसी के द्वारा फेंके जाने से आग लगी।

इधर, पार्क के 200 मीटर में ही आरएसएमएमएल का बारूद गोदाम है जहां करीब 300 टन बारूद जमा है। आग के काबू नहीं पाए जाने पर ये आग और भयावह रूप ले सकती है। ऐसे में आरएसएमएमएल की टीमें भीे  पहुंच चुकी हैं और बारूद हटाने का काम चल रहा है। इसके अलावा पास में ही वन क्षेत्र केवड़ा की नाल भी है जहां तक भी लपटें पहुंच चुकी हैं। दमकलें आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश में जुटी हुई हैं।

क्या कांग्रेस को राहुल पर अब फैसला करने की जरूरत ?

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post. हर चुनाव चाहे किसी निकाय का हो या विधानसभा का दिन ब दिन कांग्रेस की हालत बाद से बदतर होती जा रही है . ऐसे में अब समय आगया है कि राहुल अपना आत्मनिरीक्षण करें और पार्टी के हित में बड़े स्तर पर कोई कडा फैसला लें . इससे पहले कि कांग्रेस पार्टी के आलाकमान का राष्ट्रव्यापी विरोध शुरू हो जाय उससे पहले सोनिया गाँधी राहुल गाँधी प्रियंका गांधी की जिम्मेदारी बनती है कि पार्टी की इस बिगडती दशा को दुरुस्त करें .

हाल के पांच राज्यों के चुनावी नतीजे साफ़ बताते है कि देश की सबसे पुरानी और बड़ी पार्टी कही जाने वाली कांग्रेस पार्टी कितनी कमज़ोर पड़ गयी है . उत्तरप्रदेश के नतीजे साफ़ दर्शाते है कि जनता राहुल गाँधी को नकार चुकी है . राहुल गाँधी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के आगे कहीं टिक ही नहीं पाते .

पंजाब की जीत से राहुल बहुत ख़ुश नहीं हो सकते जहां पूरा दारोमदार कैप्टन अमरिंदर सिंह पर था.

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता अरुण जेटली को तब हराया था जब पूरा देश नरेंद्र मोदी की लहर पर सवार था.

इस हिसाब से कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के असल विजेता हैं. राहुल को सावधान रहना चाहिए क्योंकि उनके आलोचक इस जीत का सेहरा कैप्टन अमरिंदर सिंह के सिर बांध सकते हैं.

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अब समय आ गया है जब 10 जनपथ को राहुल गांधी के बारे में कड़ा फैसला ले . इस मामले में वरिष्ठ कांग्रेसियों की अलग अलग राय है . जिसके अनुसार कई कांग्रेसी अब चाहते है कि .

राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के बारे में नैतिक और व्यावहारिक रूप में गंभीरता से सोचना चाहिए.

विकल्प ये हो सकते हैं कि प्रियंका गांधी को पार्टी अध्यक्ष बना दिया जाए या सोनिया गांधी ही कांग्रेस अध्यक्ष बनी रहें.

कुछ कांग्रेसियों को ये भी लगता है कि राहुल गांधी ख़ुद को कांग्रेस संसदीय दल तक सीमित रखें और पार्टी संगठन की कमान प्रियंका गांधी को सौंप दें.

ये कुछ ऐसे विकल्प हैं जिससे गांधी परिवार को अस्थाई रूप से ही सही, लेकिन राहत मिलेगी और पार्टी मज़बूत होगी.

कांग्रेस की दशा के लिए ख़ुद राहुल गांधी को भी ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा.

है लोगों का मानना है कि अब कांग्रेस को शीर्ष से बदलने की जरूरत है . परिवार वाद से दूर हो कर राष्ट्र छवि वाले नए लोगों को आगे लाना चाहिए .

8 नवंबर 2016 को जब प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की, तब कांग्रेस के भीतर इस बात पर मतभेद थे कि सावधानी से इसका स्वागत करें या इंतज़ार करें या पूरा दम लगाकर विरोध करें.

राहुल गांधी ने ज़मीनी रिपोर्ट का इंतज़ार किए बिना जल्दबाज़ी में इसे ग़रीब विरोधी, किसान-विरोधी बता दिया.

जबकि नगद नहीं होने की वजह से तमाम दिक्कतों के बावजूद आम जनता के एक बड़े हिस्से ने प्रधानमंत्री मोदी की मंशा पर सवाल तक नहीं उठाए.

सीएसडीएस के निदेशक संजय कुमार ने इस साल जनवरी में एबीपी न्यूज़ के लिए उत्तर प्रदेश में जनमत सर्वेक्षण किया था.

इसका नतीजा ये था कि नोटंबदी इस चुनाव में कोई मुद्दा ही नहीं है.

सवाल ये है कि कांग्रेस जैसी पार्टी जनता के इस मूड को क्यों नहीं भांप पाई?

महाराष्ट्र और ओड़िशा में स्थानीय निकाय के लिए हुए चुनाव के नतीजे भी कांग्रेस आलाकमान की संस्कृति को दर्शाते हैं.

संजय निरुपम की अस्वीकार्यता के बावजूद राहुल ने उन पर दांव लगाया और उसके बाद जो नतीजा आया, सब जानते हैं.

ज़िम्मेदारी का अभाव कांग्रेस संगठन को खोखला कर रहा है.

कांग्रेस महासचिव मोहन प्रकाश को पारस पत्थर समझा जाता था जो विफलता को सफलता में बदल देते हैं लेकिन महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात और अन्य राज्यों में उनके प्रभार में कांग्रेस बुरी तरह पराजित हुई.

कांग्रेस के लिए सबसे बुरी बात ये रही कि सोनिया और राहुल पार्टी संगठन के विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग जातियों को जगह देने के विचार पर आंखें मूंदे रहे.

शरद पवार ने साल 1997 में कांग्रेस पार्टी को ‘तीन मियां और एक मीरा’ की पार्टी कहा था.

पवार तब सीताराम केसरी के ख़िलाफ़ पार्टी अध्यक्ष का चुनाव लड़ रहे थे. तब उनका इशारा सीताराम केसरी के अहमद पटेल, गुलाम नबी आज़ाद, तारिक़ अनवर और मीरा कुमार गठजोड़ की ओर था.

कांग्रेस के किसी भी जानकार से पूछ लीजिए, पार्टी में तब से अब तक हालात बहुत अधिक नहीं बदले हैं.

भाजपा के यूपी जितने के तीन कारण – नरेंद्र मोदी – नरेंद्र मोदी और सिर्फ नरेंद्र मोदी

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POST. देश भर के राजनितिक विश्लेषक यूपी चुनाव में भाजपा की जीत और सपा बसपा और कांग्रेस की हार की चाहे जितने कारण गिनाएं या हजारों तर्क दें घंटों तक चर्चा करें लेकिन अगर भाजपा की इस एतिहासिक जीत का कोई सबसे बड़ी तीन वजह है वह है सिर्फ नरेंद्र मोदी नरेंद्र मोदी और नरेद्र मोदी .

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देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में वोटों की गिनती शुरू होने के कुछ घंटों बाद ही साफ हो गया था कि उत्तर प्रदेश की जनता ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। बीते दो विधानसभा चुनावों में क्रमश: बसपा और सपा को राज्य की सत्ता सौंपने के बाद इस बार उत्तर प्रदेश की जनता ने भाजपा को पांच साल के लिए सूबे की कमान सौंप दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर पर सवार भाजपा ने 300 से ज्यादा सीटें जीतकर विरोधी दलों को काफी पीछे धकेल दिया । सपा, कांग्रेस और बसपा ने इस चुनाव में ऐतिहासिक हार का सामना किया है। जीत पर जनता को धन्यवाद देते हुए उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि संसदीय बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री का नाम तय किया जाएगा। भाजपा ने इसे पीएम मोदी की नीतियों की जीत करार दिया है। वहीं, सपा नेता नरेश अग्रवाल ने हार स्वीकार कर ली है। उधर बसपा ने अपनी हार के लिए ईवीएम में गड़बड़ी को जिम्मेदार ठहराया है।

यूपी में बीजेपी की 32 साल में सबसे बड़ी जीत
– बीजेपी यूपी में 1985 से चुनाव लड़ रही है। पहले चुनाव में उसने यूपी में 16 सीटें जीती थीं। 2017 के चुनाव में बीजेपी ने 1991 का रिकॉर्ड तोड़ दिया। उसे 312 सीटें मिलीं।
– 2017 का आंकड़ा राम मंदिर मुद्दे पर बीजेपी को 1991 में मिलीं 221 सीटों से भी कहीं ज्यादा है। वहीं, 2014 के लोकसभा चुनाव में वह 328 विधानसभा सीटों पर आगे थी। इस लहर को बीजेपी ने कायम रखा।
2) 37 साल बाद किसी पार्टी को 300+ सीटें
– पिछली बार 1980 में यूपी में कांग्रेस को 309 सीटें मिली थीं। अब 37 साल बाद ऐसा हुआ है कि किसी पार्टी को 300+ सीटें मिलीं हैं।
– यूपी में सबसे ज्यादा सीटें जीतने का रिकॉर्ड भी कांग्रेस के ही नाम है। उसने 1951 के पहले चुनाव में यूपी की 430 में से 388 सीटें जीती थीं।
3) किससे कितनी आगे बीजेपी?
– बीजेपी और अलायंस ने मिलकर 325 सीटें जीत लीं। इस लिहाज से वह सपा-कांग्रेस गठबंधन (54 सीटें) से 6 गुना ज्यादा और बीएसपी (19 सीटें) से 16 गुना ज्यादा सीटें ले आई।
यूपी में ऐसे हैं आंकड़े
पार्टी
2012
विधानसभा
वोट %
2014 लोकसभा
80 सीटें
2017
विधानसभा
वोट %
एसपी 224 29.2 5 47 22%
बीएसपी 80 25.9 0 19 22%
बीजेपी+ 47 15 73 325 40%
कांग्रेस 28 11.6 2 7 6%
अन्य 24 18.3 0 5 10%
यूपी में मुस्लिम असर वाली 124 सीटें, बीजेपी 99 जीती
– 2017 में बीजेपी ने 99 जीती। वहीं सपा ने 19 और बसपा ने 2 जीती। कांग्रेस और अन्य के खाते में सिर्फ 2-2 सीट गईं। जबकि 2012 में बीजेपी को 20, सपा को 59, बसपा को 28, कांग्रेस को 10 और अन्य को 7 सीट मिली थीं।
कितना असर है
सीटें मुस्लिम वोटर
– 50 20 से 29%
– 32 30 से 39%
– 42 40% +
– इन 124 सीटों पर लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 109 सीटों पर, सपा को 10 और अन्यपार्ती को 5 सीटों पर बढ़त थी।
यूपी में नहीं चला धर्म-जाति का गणित, युवा और महिला वोट बने जीत का फॉर्मूला
1) धर्म/जात: 74 सीटों पर मुस्लिम निर्णायक, बीजेपी इनमें से भी 53 पर जीती
– 14 जिलों की 74 सीटों पर मुस्लिम मतदाता 30% से ज्यादा हैं। इनकी भूमिका निर्णायक रहती है। बीजेपी ने इन में से 53 जीतीं। 2012 में बीजेपी सिर्फ 15 पर जीती थी।
– जहां 50% से अधिक हैं मुस्लिम वोटर: वहां पांच में से दो सीटें बीजेपी ने जीतीं, जबकि तीन पर सपा ने।
–40 से 50% तक: 37 में से बीजेपी की 24 सीटें।
–जहां 30 से 40% तक: यहां की 32 सीटें इस श्रेणी में हैं। बीजेपी यहां 27 सीटों पर जीती है।
– 2012 में सबसे ज्यादा 69 मुस्लिम प्रत्याशी जीते जबकि 2007 में 56 जीते थे लोकसभा में इस वोट बैंक का 66% सपा-कांग्रेस के खाते में, 21% बसपा के पास था।
2) युवा: 29 साल से कम उम्र के 4.05 करोड़ वोटर्स ने बदलाव के लिए वोट दिए
– 2017 के चुनावों में युवा वोटों ने यूपी में बीजेपी का वनवास खत्म करने में मदद की।
– 29 साल से कम उम्र के 4,05,84,888 (29%) यानी हर सीट पर ऐसे 1,00,706 वोटर्स हैं।
– इनमें भी 18 से 19 साल के वोटर 24.53 लाख हैं। जिन्होंने नतीजों को पलटने में बड़ी भूमिका निभाई।
– पहले चरण की हर सीट पर 25 हजार से ज्यादा युवा वोटर्स बढ़े, इनके वोट ने जीत का अंतर बढ़ा दिया।
– 2012 में 30% युवा वोटर्स ने सपा को वोट दिया था। वहीं 36-45 साल के 29% वोट सपा को मिले थे। इन्होंने सपा की जीत में बड़ी भूमिका अदा की थी।
3) महिला: पहली बार 42 महिलाएं जीतीं, सबसे ज्यादा वोटिंग भी इन्होंने की
– ऐसा पहली बार हुआ है कि यूपी विस चुनाव में 42 महिलाएं जीत गईं, बीजेपी की 38, कांग्रेस की 2, बसपा और अपना दल की एक-एक प्रत्याशी जीतीं।
– जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस बार 444 महिलाएं मैदान में थीं। पिछली बार 583 में से 35 महिलाएं विधानसभा में पहुंची थीं।
– इस बार महिलाओं के वोट प्रतिशत 63.26% रहा। जो पिछली बार से 3%ज्यादा रहा। 50 जिलों में भी 60% ज्यादा वोटिंग की। इनमें 275 सीटें हैं।
पीएम उज्जवला योजना बलिया से लांच करना भी रणनीति थी, सबसे ज्यादा कनेक्शन (46 लाख) यूपी में ही दिए गए। पीएम आवास योजना भी यूपी से लांच हुई थी।
किसने क्या कहा?
1) मोदी
– मोदी ने ट्वीट में कहा, ” यूपी की जनता को हृदय से धन्यवाद देता हूं। बीजेपी की ये ऐतिहासिक जीत विकास और सुशासन की जीत है। काशी के सांसद के रूप में काशी की जनता का अटूट विश्वास और अपार प्रेम पाकर मैं आज अभिभूत हूं। काशी के लोगों को शत-शत नमन। उत्तराखंड की जीत बेहद खास है। देवभूमि के लोगों का आभार। मैं विश्वास दिलाता हूं कि बीजेपी पूरी तत्परता और कमर्ठता से लोगों की सेवा करेगी। 10 साल तक अकाली दल-बीजेपी की सरकार को सेवा का मौका देने के लिए पंजाब के लोगों का शुक्रिया।”
– मोदी ने ये भी कहा, “बीजेपी को मिले अभूतपूर्व सपोर्ट से अभिभूत हूं। युवाओं ने जमकर समर्थन दिया। मैं बीजेपी कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत को सैल्यूट करता हूं। उन्होंने बिना थके जमीनी स्तर पर काम किया और और लोगों का विश्वास जीता।”
– “अमित शाह, सभी पदाधिकारियों को पार्टी को नई ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए धन्यवाद। हमारे वक्त का हर पल लोगों के हित और उनके कल्याण के लिए होगा। हमें 125 करोड़ भारतीयों की ताकत पर भरोसा है।”
2) अमित शाह
– अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि रविवार को मोदी बीजेपी मुख्यालय आएंगे। चार राज्यों (यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर) में हमारी सरकार बनने जा रही है। कल पार्लियामेंटरी बोर्ड की बैठक के बाद इसपर फैसला लिया जाएगा।
3) अखिलेश यादव
– अखिलेश यादव ने कहा, ”जो समाजवादी पार्टी के साथ खड़े रहे मैं उनका धन्यवाद देता हूं। मुझे लगता है कि आने वाले समय में जो सरकार आएगी, वो समाजवादी सरकार से बेहतर काम करेगी।
– यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने शनिवार शाम राज्यपाल से गवर्नर से मुलाकात कर इस्तीफा दे दिया। हालांकि, अगला सीएम चुने जाने तक वो केयर टेकर सीएम बने रहेंगे।
4) मायावती
– मायावती ने कहा, “चुनाव में बीएसपी को जनता ने नहीं, ईवीएम ने हराया। चुनाव रद्द होना चाहिए। ईवीएम में गड़बड़ी करके बीजेपी ने बहुमत हासिल किया है। मैं नरेंद्र मोदी और अमित शाह को चुनौती देती हूं कि वे चुनाव आयोग को इस बारे में बताएं। मैं चाहती हूं कि पुरानी व्यवस्था यानी बैलट पेपर से चुनाव कराए जाएं।”
– “बीजेपी ने कोई मुस्लिम कैंडिडेट खड़ा नहीं किया। इसके बावजूद उन्हें मुस्लिम इलाकों के पूरे वोट मिले। ये बात गले नहीं उतर रही। मुस्लिम समाज के लोग कह रहे हैं कि जब हमने बीजेपी को वोट ही नहीं दिया, तो उन्हें वोट कैसे पड़े।”
बाकी राज्यों का हाल
उत्तराखंड में भी बन रही है बीजेपी की सरकार
– उत्तराखंड में भी बीजेपी को बहुमत मिल चुका है। बीजेपी की सरकार बनाएगी।
पंजाब में:
– कांग्रेस को बहुमत मिला। अमरिंदर सिंह सरकार बनाएंगे।
गोवा में:
– यहां फिलहाल कांग्रेस को बढ़त है। लेकिन शाह ने कहा कि यहां बीजेपी की सरकार बनेगी।
मणिपुर में:
– बीजेपी-कांग्रेस में बराबरी का मुकाबला रहा। शाह ने कहा कि यहां भी बीजेपी की सरकार बनेगी।
इन नतीजों ने चौंकाया
– गोवा के सीएम लक्ष्मीकांत पार्सेकर और उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत चुनाव हार गए।
पंजाब
– यहां विधानसभा की 117 और लोकसभा की 13 सीटें हैं।
पार्टी
2012
विधानसभा
वोट %
2014
लोकसभा
2017
विधानसभा
वोट%
अकाली 56 34.7 4 15 25%
आप – – 4 20 24%
बीजेपी 12 7.2 2 3 5%
कांग्रेस 46 40.1 3 77 38%
अन्य 3 18 – 2 8%
उत्तराखंड
– यहां विधानसभा की 70 और लोकसभा की 5 सीटें हैं।
पार्टी
2012
विधानसभा
वोट %
2014
लोकसभा
2017
विधानसभा
वोट%
कांग्रेस 32 33.8 – 11 34%
बीजेपी 31 31.1 5 57 46%
बीएसपी 3 12.2 – — 7%
यूकेडीपी 1 1.9 – — 0.7%
अन्य 3 12.3 – 2 12%
गोवा
– यहां विधानसभा की 40 और लोकसभा 2 की सीटें हैं।
पार्टी 2012 विधानसभा वोट %
2014
लोकसभा
2017
विधानसभा
वोट%
बीजेपी 21 34.7 2 13 32%
कांग्रेस 9 30.8 – 17 28%
एमएजी 3 6.7 – 3 11%
जीएफपी 2 3.5 – 3 3.5%
अन्य 5 16.7 – 4 25%
मणिपुर
– यहां विधानसभा की 60 और लोकसभा 2 की सीटें हैं।
पार्टी
2012
विधानसभा
वोट %
2014
लोकसभा
2017
विधानसभा
वोट%
कांग्रेस 42 42.4 2 27 35%
तृणमूल 7 17 – 1 1%
बीजेपी — — – 21 36%
एलजेपी 1 0.6 – 1 2%
अन्य 1 24.1 – 10 26%

महिलाओं को बुलाया तो सम्मान देने के लिए लेकिन पेसेफिक और गीतांजलि ने अपमानित कर खाना खिलाया भीख की तरह। ( VIDEO )

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उदयपुर। जहाँ एक तरफ ८ मार्च को पूरा विश्व महिलाओं के सम्मान, इज़्ज़त और अधिकारों के लिए अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा है वही दूसरी तरफ फोर्टीज़, पेसेफिक और गीतांजलि जैसे बड़े बड़े निजी अस्पताल के प्रबंधकों ने महिलाओं के अपमान में कोई कसर बाकी नहीं रखी और इनका साथ दिया सरकारी स्वस्थ विभाग ने। महिला दिवस पर सम्मान के लिए बुलाई गयी महिलाओं को भोजन के पेकेट भीख की तरह बांटने में ना तो इस धन्ना सेठों को शर्म आई ना ही कार्यक्रम में शामिल होने आये स्वस्थ विभाग के अधिकारियों को।
शहर के भुवाणा स्थित रत्नागिरी पहाड़ी पर मुख्य चिकित्सा विभाग, महिला अधिकारिता, जिला प्रषासन और निजी बड़े अस्पतालों गीतांजलि मेडिकल कॉलेज व् पेसेफिक मेडिकल कॉलेज के माध्यम से महिलाओं के सम्मान समारोह आयोजित किया गया था। जिसमें बेटियों के जन्म पर उनके नाम से रत्नागिरी पहाड़ी पर पौधे भी लगवाए गए। सम्मान देने के लिए बुलाई गयी महिलाओं के भोजन की व्यवस्था गीतांजलि और पेसेफिक मेडिकल कॉलेज द्वारा की गयी थी। धन्ना सेठों द्वारा बनाये गए ये मेडिकल कॉलेज के प्रबंधक के दिलों में अगर सचमुच में महिलाओं के प्रति सम्मान होता तो अपने खाना पूर्ति कार्यक्रम के लिए बुलाई गयी महिलाओं को पूरा सम्मान देते ढंग से बैठा कर उन्हें खाना भी खिलाते। लेकिन इन निजी अस्पतालों के धन्ना सेठों ने आज ही के दिन महिलाओं के सम्मान को ठोकर पर रखने की ठान रखी थी। जब महिलाओं को खाना खिलाने की बारी आई तो जानवरों और भूखों की तरह उन्हें बता दिया कि टेम्पो में पेकेट बांटे जायेगें वहां से लेलेना। शहर से दूर आई बेचारी महिलाएं जो घंटों भूखी प्यासी बैठी थी और इन अस्पतालों और सरकारी महकमे के खाना पूर्ति कार्यक्रम का हिस्सा बनी हुई थी उन्हें बे मन से भी बात मनानी पड़ी। टेम्पो में भीख की तरह दिए गए पेकेट को लेने के लिए मजबूर हो गयी। भूखी प्यासी महिलाएं वही मिट्ठी में जमीन पर बैठ कर खाना भी खाया। सरकारी महकमे और निजी अस्पताल के ठेकेदारों ने आज ही के दिन इन महिलाओं को अपनी इस करतूत से जीभर कर अपमानित किया। अगर चाहते तो इन्हें पंडाल में बैठा कर सम्मान के साथ खाना खिला सकते थे।

https://www.youtube.com/watch?v=q8xXvXoclk4

उदयपुर में कांग्रेस के जन वेदना सम्मलेन में खुद वेदना का नमूना बनी – गिनती के कांग्रेसी आये जनता की वेदना जताने।

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उदयपुर। राज्य सरकार की जन विरोधी नितियों के विरूद्ध उदयपुर शहर जिला कांग्रेस द्वारा आयोजित जन वेदना सम्मलेन खुद कांग्रेस की वेदना का नमूना बन गया।
कांग्रेस के इस जन वेदना सम्मलेन में बड़े बड़े नेताओं की उपस्थिति के बावजूद गिनती के कर्ग्रेसी उपस्थित थे। सम्मलेन में कार्यकर्ता तो दूर की बात है शहर की कार्यकारणी के पदाधिकारी भी उपस्थित नहीं थे।
मंगलवार को अशोकनगर स्थित विज्ञान भवन में शहर जिला कांग्रेस द्वारा जन वेदना सम्मलेन आयोजित किया गया। जन वेदना सम्मलेन खुद कांग्रेसियों के उपहास का ही कारण बन गया। सम्मलेन में ५० लोग बमुश्किल उपस्थित थे। कांग्रेस के इस सम्मलेन की हालत यह थी कि एक चोथाई कुर्सियां भी नहीं भरी थी। जनता से जुडी समस्याओं की और राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध चर्चा करने के लिए बुलाया गया जन वेदना सम्मलेन में कांग्रेस कमिटी के कार्यकर्ता तो बहुत दूर की बात है। शहर जिला कांग्रेस कमिटी की कार्यकारणी में कुल १२६ पदाधिकारी है इस संख्या के आधे पदाधिकारी भी मोजूद नहीं थे। जो कांग्रेसी उपस्थित थे उनको वक्ताओं द्वारा बोला जारहा भाषण समझ में नहीं आरहा था और उठ कर बाहर अपनी अपनी चर्चा में मगन थे। कई वरिष्ठ कांग्रेसी यह कहते हुए उठ कर चले गए कि कल परसों के लडको को हम सुनने नहीं आये है। कांग्रेस का जन विरोधी नीतियों के विरुद्ध जन वेदना सम्मलेन एक तरह से खुद कांग्रेस के वेदना का सम्मलेन बन कर रह गया।
सम्मलेन में पूर्व पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ.गिरिजा व्यास ने संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा के अच्छे दिनों का आज भी जनता को इन्तजार है। भाजपा ने झूठे वादों के अलावा कुछ नही दिया। जनता से किये गये वादों को जुमलों में बदला। मंहगाई, बिजली, किसान, मजदूर, व्यापारी और आमजन को इस सरकार से पीड़ा ही मिली है। नोटबंदी से कालाधन एवं आतंकवाद तो समाप्त नही हुआ लेकिन इससे देश के अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हुआ है। नोटबंदी की समस्या से जनता अब तक उबर नही पायी है उस पर कैशलेस व्यवस्था थोपी जा रही है जो कतई उचित नही है। ए.आई.सी.सी. पर्यवेक्षक मीर शाह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि केन्द्र व राज्य की भाजपा सरकार लोकतंत्र से चुनी हुई सरकार की तरह काम नही कर रही है। इनकी कार्यशेली से ऐसा लगता है कि यह आम जनता, किसानों की सरकार नही है। यह 5 करोडपतियांे की सरकार है। दोनों सरकारों में जनता का कोई विकास नही हुआ है। विकास सिर्फ बी.जे.पी. नेताओं का हुआ है। लोग इन्तजार कर रहे है कि कब कांग्रेस को वोट देकर बी.जे.पी. को सत्ता से बाहर करें। इस अवसर पर प्रदेश महासचिव जगदीशराज श्रीमाली, प्रदेश सचिव पंकज कुमार शर्मा, पूर्व विधायक त्रिलोक पूर्बिया, पूर्व नेता प्रतिपक्ष के.के.शर्मा, दिनेश श्रीमाली, नेता प्रतिपक्ष मोहसीन खान, महिला कांग्रेस अध्यक्ष चन्दा सुहालका, गोपाल राय नागर, पूरण मेनारिया, मुजीब सिद्धीकी, बाबूलाल जैन ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।