5 साल पहले लापरवाही से प्रसूता की मौत, अस्पताल कराएगा बेटी के नाम 5 लाख रुपए

51_1462838815उदयपुर.पन्नाधाय जनाना अस्पताल में डाक्टरों और स्टाफ की लापरवाही से पांच वर्ष पूर्व हुई एक प्रसूता की मौत को गंभीर अपराध मानते हुए स्थायी लोक अदालत ने 6 लाख 66 हजार रुपए जुर्माना लगाया है। अदालत ने अस्पताल प्रबंधन को इनमें से पांच लाख रुपए प्रसूता की पांच साल की बेटी के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडी कराने के आदेश दिए हैं।
क्या है मामला
दरौली के गोपाल पुत्र धूल शंकर शर्मा और उसकी बेटी विनीशा ने अस्पताल अधीक्षक और राज्य सरकार पर कलेक्टर के जरिए परिवाद दर्ज कराया था। परिवादी के वकील पराग अग्रवाल और मनीष शर्मा ने स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष के.बी.कट्टा और मेम्बर शंभू सिंह राठौड़ व सुशील कोठारी को बताया कि जिम्मेदार डाक्टरों और स्टाफ की लापरवाही से एक महिला की 20 वर्ष की उम्र में मौत हो गई।
तो नहीं छिनता विनिशा के सिर से मां का साया
गोपाल ने अपनी पत्नी तुलसी को डिलीवरी के लिए 13 फरवरी 2011 को जनाना अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां उसी दिन शाम छह बजे ऑपरेशन से तुलसी ने बालिका विनिशा को जन्म दिया। इसके बाद तुलसी को पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में दाखिल किया गया। प्रार्थी का आरोप है कि डाक्टरों ने रात 9 बजे तक मरीज की खैर खबर नहीं ली। हालत बिगड़ने पर डाॅ. शिल्पी गुप्ता और डाॅ. कमलेश पंजाबी को बुलाया गया था। सीनियर डाक्टरों के नहीं आने पर जूनियर डाक्टरों ने तुलसी का दोबारा ऑपरेशन किया।
इस दिन हुई थी मौत
इस दौरान यूनिट इंचार्ज डाॅ. राजरानी शर्मा भी देर से पहुंची। दोबारा आॅपरेशन के बाद भी उसकी हालत गंभीर रही और 18 फरवरी को तुलसी की मौत हो गई। परिवादी के वकील पराग अग्रवाल और मनीष शर्मा ने दावे में बताया कि नाजुक हालत में उसे वेंटीलेटर पर रखने में देर हुई। जेनरेटर खराब होने से उपकरणों का उपयोग नहीं किया जा सका। मृतका का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड से कराया गया था। आरोप है कि सीनियर डॉक्टरों को बचाते हुए पैरामेडिकल स्टाफ पर जिम्मेदारी डाल दी गई थी।

मजबूरी या अपराध – पति के इलाज के लिए बेटे को बेचा

54_1462840286उदयपुर. प्रतापनगर पुलिस ने शनिवार को गणेशनगर स्थित अग्रवाल सदन के एक कमरे में दबिश देकर वहां से एक महीने के बच्चे और बच्चे की खरीद-फरोख्त करने वाले रेलमगरा हाल सेक्टर-3 निवासी राजेन्द्र विजयवर्गीय उर्फ राजू पुत्र रामप्रकाश और गीता-मंदिर, अहमदाबाद निवासी ज्योति बेन पत्नी अशोक भाई मकवाना को गिरफ्तार किया था। इनकी सूचना पर रविवार को अहमदाबाद से अहमदाबाद के नरोड़ा निवासी धवल पुत्र अशोक त्रिवेदी, उसकी पत्नी अंजना उर्फ अंजू और सिद्धेश्वरी नगर निवासी अरविंद भाई पुत्र कांतिलाल मकवाना गिरफ्तार किया था। आरोपियों ने बच्चे की खरीद-फरोख्त की पूरी चेन का खुलासा किया ।
नवजात को बेचने के मामले में पुलिस ने आरोपी मां चैंबूर, मुंबई निवासी खुर्शीद बानो उर्फ खुशी (30) पत्नी शमीम अहमद को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी महिला ने पुलिस को बताया कि गर्भवती होने के पहले से उसे और उसके पति को बेटी की चाहत थी। एक्सीडेंट में पति का हाथ कटने से इलाज के लिए उसे रुपयों की जरूरत थी। गत महीने डिलीवरी हुई, बेटी के बजाए बेटा जन्मा तो उसने बेचने का मानस बना लिया।
 आर्थिक स्थिति नहीं थी अच्छी
एसआई अजय सिंह ने बताया कि खुशी का शमीम अहमद से दूसरा निकाह हुआ था। शमीम के ऑटो चालक होने से आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। पहले पति जहीर अब्बास से खुशी के दो बेटे हैं और साथ में ही रहते हैं। परिवार में दो बेटे होने से शमीम को तीसरी संतान बेटी की चाहत थी। जुलाई 2015 में खुशी गर्भवती हुई। इस दौरान ही एक एक्सीडेंट में शमीम का हाथ कट गया। परिवार की आर्थिक स्थिति और ज्यादा खराब हो गई और पति के इलाज के लिए भी उसे रुपए चाहिए थे। अप्रैल में उसने एक बेटे को जन्म दिया। बेटी नहीं होने से उसे इस संतान की चाहत नहीं थी। पति के इलाज में रुपयों की जरूरत बढ़ती जा रही थी तो उसने बेटे को बेचने का मानस बनाया और धवल-अंजू काे फोन कर बच्चा बिकवाने के लिए कहा।
सहेली के इलाज के लिए आई थी इन्फर्टिलिटी सेंटर पर
नवजात बेटे को बेचने की आरोपी महिला खुशी ने पूछताछ में बताया कि उसकी सेहली शहनाज की संतान नहीं होने से उसका उदयपुर के एक इन्फर्टिलिटी सेंटर पर इलाज चल रहा था। वह सहेली के यहां आई हुई थी। खुशी शहनाज के साथ इन्फर्टिलिटी सेंटर गई और वहीं उसकी मुलाकात अंजू-धवल से हुई।
नवजात को महेशाश्रम से राजकीय शिशु गृह भेजा
बाल कल्याण समिति, उदयपुर ने सोमवार को खरीद-फरोख्त का शिकार हुए बच्चे को महेशाश्रम से राजकीय शिशु गृह भेजने के आदेश दिए। आदेश के बाद बच्चे को शिशु गृह में प्रवेशित कराया गया। सीडब्ल्यूसी ने 13 मई को होने वाली बैठक में संपूर्ण कार्यवाही की प्रगति रिपोर्ट के साथ जांच अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।

इस हाइवे पर खुलेआम हो रही जिस्मफरोशी, 300 रुपये में युवतियां करती हैं जिस्म का सौदा

prostitutionउदयपुर. किशनगढ़ के पास नेशनल हाईवे संख्या-8 से सटे बडग़ांव में वेश्यावृत्ति कारोबार थमा नहीं है। यहां आज भी विभिन्न शहरों के मनचले युवक बेरोक-टोक और बिना किसी भय के महंगी गाडि़यों में आते हैं और स्त्रियों के जिस्म का सौदा करते हैं। खास बात यह है कि जिला एवं पुलिस प्रशासन के अधिकारियों और राजनेताओं को इसकी जानकारी होने के बावजूद कोई सख्ती नहीं बरती जा रही है। यही वजह है कि जिस्म का सौदा करने वाली युवतियां न केवल खुलकर मनचलो से बात करती है बल्कि यह कहकर उनका भय भी खोल देती है कि यहां पुलिस का कोई डर नहीं है।

स्टिंग ओपरेशन के तहत समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका टीम के साथ तीन अन्य युवक दोपहर ढाई बजे बडग़ांव पहुंचे तो डेरों में से पांच युवतियां बाहर निकली। उनमें से तीन युवतियां कार के नजदीक आ गई और साथ चलने के लिए कहने लगी। इस दौरान किसी ने पांच सौ रुपए तो किसी ने तीन सौ रुपए बताए। आखिर तीन सौ रुपए पर बात बनी।

यहां पुलिस का क्या काम

टीम के सदस्यों ने जब पुलिस के आने और पकड़े जाने की बात कही तो एक युवती ने कहा कि पुलिस के डर से टेंशन फ्री रहिएगा…, इन डेरों में पुलिस क्या काम, आप तो बेफिक्र होकर अंदर चलिए…।

पूर्व में भी यहाँ पर देह व्यापार को उजागर हुआ था। इसके बाद कुछ दिन के लिए इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगा लेकिन पुलिस की ढि़लाई के कारण दोबारा से जिस्मफरोशी का धंधा शुरू हो गया।

ग्रामीण भी जता चुके हैं विरोध

बडग़ांव के कई ग्रामीण भी पुलिस और प्रशासन को शिकायत देकर जिस्मफरोशी के धंधे को बंद कराने की मांग कर चुके हैं लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई।

 

तहसीलदार को दो थप्पड़ मारे तो बोले-पीछे की जेब में रखे हैं रुपए

untitled-11_1462857717बांसवाडा के गागड़तलाई में रिश्वत लेते गिरफ्तार तहसीलदार भोगीलाल भारद्वाज एसीबी की टीम के सामने पहले तो रुपए लेने के सवाल पर ना-नुकर करता रहा है। टीम को छकाता रहा। इस पर टीम के एक जवान ने दो थप्पड़ लगाई, तो वह बोला कि पीछे की जेब में है रुपए, बाद में पेंट की पीछे वाली जेब से साढ 11 हजार रुपए टीम ने निकाले।
देहात में गांगड़तलाई के तहसीलदार और रोहनवाड़ी के पटवारी कृषि भूमि से आबादी भूमि में जमीन रूपांतरण करने की एवज में 12 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़े गए। एसीबी की उदयपुर की टीम ने सोमवार दोपहर 1.30 बजे गांगड़तलाई तहसील कार्यालय में ही तहसीलदार भोगीलाल भारद्वाज और पटवारी शेरसिंह मीणा को गिरफ्तार किया।

इसके पहले एसीबी के पास रोहनवाड़ी निवासी दिलीप कुमार कलाल पुत्र भूरालाल कलाल ने एसीबी उदयपुर को शिकायत की थी कि 0.10 हेक्टेयर जमीन कृषि भूमि का रूपांतरण आबादी भूमि में करना था। इस काम के लिए पटवारी ने 34 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। जिस पर एसीबी ने प्लान के मुताबिक 2500 की रिश्वत देकर शिकायत का सत्यापन किया और 12 हजार रुपए की रिश्वत ट्रेपिंग के दौरान दी गई। जिसमें से साढ़े 11 हजार रुपए तहसीलदार भोगीलाल भारद्वाज की जेब से निकले और शेष 500 रुपए पटवारी शेरसिंह की जेब से मिले। एसीबी के एएसपी बृजेश सोनी ने बताया कि दोनों ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें मंगलवार को उदयपुर एसीबी की कोर्ट में पेश किया जाएगा। कार्रवाई पुलिस निरीक्षक हरीशचंद्रसिंह, राजकुमारसिंह, गणेश लबाना, करणसिंह, जितेंद्र कुमार, उंकारसिंह, रतनसिंह ब्यूरो जाब्ता द्वारा की गई।

सेमलिया गढ़ी निवासी तहसीलदार भोगीलाल भारद्वाज को एक माह पहले ही कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित ने कलक्ेट्ट का रे र्यालय में प्रतीक्षारत तहसीलदार से गांगड़तलाई में बतौर तहसीलदार का चार्जदिया था। अवकाश को छोड़ दिया जाए तो करीब 25 दिनों की ही नौकरी तहसीलदार द्वारा गांगड़तलाई में की गई थी। इसी दौरान रिश्वत लेते हुए दोनों ही पकड गए। ़े वहीं, अलवर के बानसूर निवासी पटवारी शेरसिंह करीब ढाई साल से रोहनवाड़ी पटवार मंडल में कार्यरत था। रोहनवाड़ी के पटवारी शेरसिंह का हाल ही में छोटी सरवन तहसील क्षेत्र के लिए तबादला हुआ था।
सोमवार को गांगड़तलाई से रिलीव होना था और दोपहर बाद पटवारी की विदाई पार्टी भी गांगड़तलाई में रखी गई थी। इस पार्टी में तहसीलदार से लेकर सभी कर्मचारियों को बुलाया गया था। लेकिेन, विदाई समारोह से पहले ही पटवारी रिश्वत में पकड़ा गया।
पिछले दिनों ही कलक्ट्रेट से शेर सिंह को छोटी सरवन तहसील में बतौर पटवारी स्थानांतरण किया था। जिसकी जानकारी गांगड़तलाई में सभी को हो गई थी। इसके चलते पटवारी ने दो दिन पहले ही शिकायककर्ता से कहा था कि उसके जाने से पहले ही रुपए दे, ताकि उसके सामने ही तहसीलदार से हस्ताक्षर हो जाएंगे।
जून में तहसीलदार की थी सेवानिवृत्ति : तहसीलदार भारद्वाज की अगलेमाह जनू मेंसेवानिवृत्ति थी।इसके पहले13 अप्रैल को ही कलेक्टर के आदेश पर गांगड़तलाई मेंकार्यभार संभाला था। गांगड़तलाई तहसीलदारकास्थानांतरण होनेके बाद प्रशासनिक कामकाज नहीं रुक,ेइसके लिए कलेक्टर नेवैकल्पिक व्यवस्था करतेहएु भारद्वाज को लगाया था। सत्ूरों के अनसार ु जमीन कीरजिस्ट्री, भूमि रूपांतरण, मोटशने खोलनाआदि कार्यों के लिएपटवारी और तहसीलदार की मिलीभगत रहती थी।पटवारी तहसीलदार के नाम सेही रिश्वत की राशि मांगता था औरउसमेंसेकरीब 40 से50 फीसदी राशि तहसीलदार को दी जाती थी।
यह थी रिश्वत की दर
नकल निकालना – 1 हजार रुपए
मोटेशन खोलना – 5 हजार रुपए
रजिस्ट्री कराना– 2 से5 हजार रुपए
भूमि रूपांतरण – 25 से40 हजार (नोट – स्थानीय स्तर पर रिश्वत मेंपकड़े जानेके बाद पटवारी से जुड़े कार्य करने के बदलेमेंलोगों सेमांगी जानेवाली रिश्वत की रकम इस तरह की होती थी। )

के.एस. शक्तावत राष्ट्रीय खान मजदूर फेडरेशन के महामंत्री बने

Photo of Shaktawatji.2 (1)उदयपुर। राष्ट्रीय खान मजदूर फेडरेशन के छिन्दवाडा (मध्य प्रदेश) में आयोजित अधिवेशन में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के हुये चुनाव में दरीबा खान मजदूर संघ एवं हिन्दुस्तान जिंक वर्कर्स फेडरेशन के महामंत्री श्री कल्याण सिंह शक्तावत को राष्ट्रीय खान मजदूर फेडरेशन के महामंत्री पद पर चुना गया।
श्री शक्तावत पिछले 36 वर्षों से श्रम आन्दोलन के साथ जुडे हुए है। ये पिछले 32 वर्षों से श्रमिक शिक्षा का कार्य भी करते आ रहे हैं जिसके तहत हजारों श्रमिकों को शिक्षित किया है। इन्होनें शिक्षा के माध्यम से अंसगठित क्षैत्र के श्रमिकों को संगठित करने में उल्लेखनीय कार्य किया है।
श्री शक्तावत श्रम आन्दोलन के तहत कई बार राष्ट्रीय/अन्तराष्ट्रीय सेमीनार/कार्यशालाओं में भाग लिया एवं कई बार विदेश यात्राएं भी कर चुके हैं।

भारतीय जनता युवा मोर्चा या भारतीय जमीन कारोबारी मोर्चा

bjymउदयपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा की कार्यकारणी में जुड़ने वाले अधिकांश पदाधिकारी भूमी व्यवसाय से जुड़े हुए है, जो अपनी राजनीति पद का लाभ उठाते हुए जमीनों की खरीद फरोख्त में लिप्त है। यह आरोप विपक्ष कांग्रेस ही नहीं खुद भाजपा से जुड़े लोग और पदाधिकारी भी लगा रहे है। भाजयुमो का कहना है कि चाहे भूमि व्यवसाय से जुड़े हो लेकिन गलत काम कोई नहीं करता। गलत काम ना करने के लिए पहले ही निर्देशित किया जाचुका है।
भाजयुमो अध्यक्ष गजेंद्र भंडारी की नियुक्ति के साथ ही भाजपा में आपस में विवाद गहरा रहा है। पहले कार्यकारणी को लेकर भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट की नाराजगी। बाद में कार्यकारणी के विस्तार को लेकर भाजपा में असहमति, बड़गांव मंडल अध्यक्ष की कार्यकारणी को लेकर आपत्ति। अब भाजपा और कांग्रेस के पदाधिकारी भाजयुमो गजेंद्र भंडारी पर आरोप लगा रहे है कि उन्होंने कार्यकारणी में ८० प्रतिशत पदाधिकारी जमीन कारोबारियों को जोड़ा है। भाजपा के एक पदाधिकारी का कहना है कि भाजयुमो अध्यक्ष खुद जमीनों के कारोबार से जुड़े हुए है साथ ही उन्होंने अपने निजी फायदे के लिए अपनी कार्यकारणी में भूमि व्यवसाइयों को जोड़ा है। भाजपा पदाधिकारी यहाँ तक बताते है कि दिखने के कारोबार अलग है जबकि असली काम विवादित जमीनों को अपने पद और बाहुबल से निपटारे का काम करना है। जितने भी मंडल अध्यक्ष बनाए गए है उसमे अधिकाँश जमीनों के कारोबार से जुड़े हुए है। भाजपा पदाधिकारी का कहना है कि भाजयुमो अध्यक्ष पर गुलाबजी भाईसाहब का सिद्धहस्त है इसलिए कोई इनके खिलाफ खुल कर बोल नहीं सकता। कांग्रेसी पदाधिकारियों का कहना है कि भाजयुमो के पदाधिकारी अपने राजनैतिक पद का उपयोग कर अधिकारियों से साथ गांठ कर सिर्फ भूमि के व्यबसाय में लगे हुए है। ये भूमि व्यवसायी शहर को गरीबों के लिए रहने लायक नहीं छोड़ेगें।

चार लोग भू कारोबारी बाकी का साइड बिजनेस हो सकता है :
भाजयुमो अध्यक्ष गजेंद्र भंडारी का कहना है कि २३ लोगों की भाजयुमो की कार्यकारणी में चार लोग रियल स्टेट कारोबारी है। बाकी सभी के अलग अलग व्यवसाय और नौकरी है। अगर कोई साइड बिजनेस के हिसाब से जमीन की खरीद फरोख्त करता है तो यह काम सभी करते है। अध्यक्ष गजेंद्र भंडारी का कहना है की मेरे सहित उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिसोदिया, मोहन पटेल और मंत्री सन्नी पोखरना जमीनों के कारोबार से जुड़े हुए है। भंडारी का कहना है की अगर जमीनों के कारोबार से जुड़े भी है तो कोई बुरा काम नहीं है। पहले ही निर्देशित किया जा चुका है कि कोई भी गलत काम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो भी जमीनों की खरीद फरोख्त होती है साफ़ सुथरी तौर पर होती है।
मेरे अध्यक्ष रहने तक यही कार्यकारणी रहेगी :
भाजयुमो अध्यक्ष गजेंद्र भंडारी ने बड़गांव मंडल की कार्यकारणी पर बड़गांव अध्यक्ष की आपत्ति पर कहा की मेरा विशवास जोड़ने में है तोड़ने में नहीं है। अगर किसी को कोई नाम जोड़ना है तो कहे वो विचार करने पर जोड़ा जासकता है। भंडारी ने जोर देते हुए कहा की मेरे अध्यक्ष रहने तक यही कार्यकारणी रहेगी इसमें से कोई भी अपने पद से नहीं हटाया जाएगा।

वर्जन। …….
मेने अभी इस बारे में गौर नहीं किया कौन पदाधिकारी किस व्यवसाय से जुड़ा है, अभी में शहर के बाहर हु आता हु फिर देखते है , विवाद क्या है वो भी देखते है। दिनेश भट्ट, शहर जिलाध्यक्ष भाजपा,

जमीनों का कारोबार कोई बुरा काम नहीं है गलत कुछ नहीं करते। ८० प्रतिशत नहीं और ३० प्रतिशत पदाधिकारी जमीनों के कारोबार से जुड़े होंगे। बाकी के अगर साइड में कोई सौदे हो तो बात अलग है। हमारा कोई भी पदाधिकारी किसी विवादित मामले में नहीं है। गजेंद्र भंडारी, अध्यक्ष भाजयुमो,
युवा मोर्चा के अधिकाँश पदाधिकारी जमीनों के कारोबार से जुड़े है। पिछले कुछ समय से शहर में सिर्फ इस जमीनों की खरीद फरोख्त का काम ही हो रहा है। राजनैतिक पद का जम कर दुरूपयोग किया जारहा है। शहर की एक फिट जमीन ये कारोबारी किसी आम आदमी के खरीदने के लिए नहीं छोड़ेगें। दिनेश श्रीमाली, पूर्व प्रतिपक्ष नेता

महानायक बिग बी को देखने प्रशंसकों की भीड जुटी, उदयपुर के स्वागत से अभिभूत हुए अमिताभ

अरविंद सिंह मेवाड ने पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया

amitabh bachhan 1

उदयपुर। सदी के महानायक बिग बी अमिताभ बच्चन ने रविवार शाम उदयपुर के देहलीगेट स्थित कल्याण ज्वैलर्स का विधिवत शुभारंभ किया।
amitabh bachhanअमिताभ बच्चन के आने की खबर को लेकर डबोक एयरपोर्ट व देहलीगेट स्थित कल्याण ज्वैलर्स के शो रूम के बाहर प्रशंसकों की भारी भीड जमा हो गई। जयपुर, जोधपुर में शुभारंभ के बाद अमिताभ बच्चन ६ बजे डबोक एयरपोर्ट पहुंचे जहां से वे सीधे शोरूम का शुभारंभ करने पहुंचे। देहलीगेट स्थित कल्याण ज्वैलर्स पर पहुंचने पर अमिताभ का कल्याण ज्वैलर्स के चैयरमेन टी. एस. कल्याण रमन व महाराणा फाउंडेशन के अरविंद सिंह मेवाड ने पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। अमिताभ ने मंच से हाथ हिलाकर शोरूम में बाहर जमा भारी प्रशंसकों की भीड का अभिवादन किया। प्रशंसकों की भीड के साथ एक सेल्फी ली। करीब आठ साल बाद उदयपुर आए अमिताभ ने प्रशंसकों से कहा कि उदयपुरवासियों ने जिस भव्य तरीके से उनका स्वागत किया उन्होंने ऐसा पहली बार देखा। उन्होंने कहा कि मैं कल्याण ज्वैलर्स के मालिक एस. कल्याण का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझ पर विश्वास जताया। पंचवटी निवासी हर्षल गौड जो कि आॢटस्ट है अमिताभ के लिए स्केच चित्र बनाकर लाए। मंच से जब अमिताभ की नजर उस पर पडी तो उन्होंने उस स्केच को मंगवाया और अपने साथ ले गए।
अमिताभ बच्चन ने देहलीगेट स्थित कल्याण ज्वैलर्स के शोरूम का फीता काटकर विधिवत उद्घाटन किया।

amitabh bachhan 2

amitabh bachhan 3

क्या निगम ने वरुण मॉल को सीज कर बाकी अवैध निर्माणकर्ताओं को सेटलमेंट करने की धमकी दी है ?

varun2

प्रतिपक्ष्ण नेता, उदयपुर बगर निगम - मोहसिन खान
प्रतिपक्ष्ण नेता, उदयपुर बगर निगम – मोहसिन खान

उदयपुर। वरुण मॉल जैसे बड़े शॉपिंग मॉल को अगर सीज कर सकते है तो बाकी को भी नहीं बख्शेंगे इसलिए चाहो तो सेटलमेंट के लिए रास्ता खुला है। ऐसे ही आरोप अब नगर निगम की सत्ता पक्ष और महापौर पर लगाए प्रतिपक्ष द्वारा लगाए जा रहे है। प्रतिपक्ष नेता मोहसिन खान का कहना है कि जहाँ शहर में सैकड़ों अवैध निर्माण है नियम के विरुद्ध बहुमंजिला इमारते खड़ी होगयी है वहां सिर्फ वरुण मॉल के गरीब दुकानदारों को निशाना बना कर। बहुमंजिला इमारतों के धन्ना सेठो को चेतावनी दी गयी है। इतने समय बाद भी इन धन्ना सेठों पर कार्रवाई नहीं कर महापौर की मंशा झलक रही है कि धन्ना सेठों से सेटलमेंट किया जासकता है।
वरुण मॉल को लेकर प्रतिपक्ष नेता मोहसिन खान ने महापौर की नियत पर सवाल उठाया है। जो बात सत्ता पक्ष के कुछ पार्षद दबी जुबान में कह रहे है वही बात विपक्ष के नेता और कांग्रेसी पार्षद खुल कर इस बात को बोल रहे है, कि वरुण माल पर कार्रवाई सिर्फ एक धमकी भरा दिखावा है। असल में एक तरह से शहर के उन सैकड़ों अवैध निर्माण कर्ताओं को दी गयी धमकी है, जिन्होंने नियमों के विरुद्ध बहुमंजिला निर्माण खड़े कर दिये है। उन बहुमंजिला निर्माण कर्ताओं को वरुण माल के जरिये सेटलमेंट के लिए न्योता दिया गया है। अगर ऐसा नहीं होता तो अब तक कितने ही अवैध बहुमंजिला निर्माणों पर निगम की कार्रवाई हो चुकी होती।
आज प्रतिपक्ष के नेता मोहसिन खान ने वरुण माल के मामले में महापौर को घेरते हुए सवाल उठाते और महापौर पर आरोप लगाया है। मोहसिन खान ने वरुण माल पर कारवाई सिर्फ एक धमकी है जो उन सेकडों बहुमंजिला निर्माण कर्ताओं को दी गयी है जिन्होंने नियमों के विरुद्ध जाकर निर्माण किये है। मोह्सिल ने कहा कि एक तरह से वरुण माल अवैध निर्माण कर्ताओं को दबाव में लेकर सेटलमेंट का जरिया बन गया लगता है। क्यों कि वरुण माल की कारवाई के बाद महापौर ने कहा था कि शहर के सभी नियमों के विरुद्ध कारवाई करने वालों के खिलाफ कारवाई होगी लेकिन आज तक एक भी कारवाई नहीं की गयी। ऐसे में महापौर भी शक के घेरे माँ आगये है उन कि नियत पर भी शक होता है। मोहसिन खान ने निशाना साधते हुए कहा की क्या सत्ता पक्ष इन बिल्डरों से सेटलमेंट करना चाहते है इसीलिए वरुण मॉल को हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया।
समझौता समिति की सदस्य कांग्रेस पार्षद अमिता गौड़ ने भी आरोप लगाते हुए कहा कि वरुण मॉल तो सिर्फ बाकी के बिल्डरों को डराने के लिए की गयी कार्रवाई है। इसकी आड़ में जाने कितने खेल खेले जारहे है। इन सब में वरुण मॉल के व्यापारी सफर कर रहे है।

कैसे भारत के हाथ से छिटका कोहिनूर?

0

kohinoor

कोहिनूर हीरा एक बार फिर चर्चा में है. भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखा है कि ये हीरा ना तो चुराया गया था और ना ही बलपूवर्क ले जाया गया था.

क्या है कोहिनूर और क्यों इतना मशहूर है यह. इसको लेकर जब तब इतनी चर्चा क्यों होती रहती है?

कोहिनूर में क्या क्या ख़ास है, देखिए एक नज़र में.

1. कोहिनूर दुनिया का सबसे मशहूर हीरा है. मूल रूप से आंध्र प्रदेश के गोलकोंडा ख़नन क्षेत्र में निकला था कोहिनूर.

2. मूल रूप में ये 793 कैरेट का था. अब यह 105.6 कैरेट का रह गया है जिसका वजन 21.6 ग्राम है. एक समय इसे दुनिया का सबसे बड़ा हीरा माना जाता था.

3. कोहिनूर के बारे में पहली जानकारी 1304 के आसपास की मिलती है, तब यह मालवा के राजा महलाक देव की संपत्ति में शामिल था.

4. इसके बाद इसका जिक्र बाबरनामा में मिलता है. मुगल शासक बाबर की जीवनी के मुताबिक, ग्वालियर के राजा बिक्रमजीत सिंह ने अपनी सभी संपत्ति 1526 में पानीपत के युद्ध के दौरान आगरा के किले में रखवा दी थी. बाबर ने युद्ध जीतने के बाद किले पर कब्ज़ा जमाया और तब 186 कैरेट के रहे हीरे पर भी कब्जा जमा लिया. तब इसका नाम बाबर हीरा पड़ गया था.

5. इसके बाद ये हीरा मुगलों के पास ही रहा. 1738 में ईरानी शासक नादिर शाह ने मुगलिया सल्तनत पर हमला किया. 1739 में उसने दिल्ली के तब के शासक मोहम्मद शाह को हरा कर उसे बंदी बना लिया और शाही ख़जाने को लूट लिया. इसमें बाबर हीरा भी था. इस हीरे का नाम नादिर शाह ने ही कोहिनूर रखा.

6. नादिर शाह कोहिनूर को अपने साथ ले गया.1747 में नादिर शाह के अपने ही लोगों ने उनकी हत्या कर दी. इसके बाद कोहिनूर नादिर शाह के पोते शाह रुख़ मिर्ज़ा के कब्ज़े में आ गया.

7. 14 साल के शाह रुख़ मिर्ज़ा की नादिर शाह के बहादुर सेनापति अहमद अब्दाली ने काफी मदद की तो शाह रुख़ मिर्जा ने कोहिनूर को अहमद अब्दाली को ही सौंप दिया.

Image copyrightPA

8. अहमद अब्दाली इस हीरे को लेकर अफ़ग़ानिस्तान तक पहुंचा. इसके बाद यह हीरा अब्दाली के वंशजों के पास रहा.

9. अब्दाली का वंशज शुजा शाह जब लाहौर पहुंचा तो कोहिनूर उसके पास था. पंजाब में सिख राजा महाराजा रणजीत सिंह का शासन था. जब महाराजा रणजीत सिंह को पता चला कि कोहिनूर शुजा के पास है, तो उन्होंने उसे हर तरह से मनाकर 1813 में कोहिनूर हासिल कर लिया.

10. रणजीत सिंह कोहिनूर हीरे को अपने ताज में पहनते थे. 1839 में उनकी मौत के बाद हीरा उनके बेटे दिलीप सिंह तक पहुंचा.

11. 1849 में ब्रिटेन ने महाराजा को हराया. दिलीप सिंह ने लाहौर की संधि पर तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी के साथ हस्ताक्षर किए. इस संधि के मुताबिक कोहिनूर को इंग्लैंड की महारानी को सौंपना पड़ा.

12. कोहिनूर को लॉर्ड डलहौजी 1850 में लाहौर से मुंबई ले कर आए और वहां से छह अप्रैल, 1850 को मुंबई से इसे लंदन के लिए भेजा गया.

13. तीन जुलाई, 1850 को इसे बकिंघम पैलेस में महारानी विक्टोरिया के सामने पेश किया गया. 38 दिनों में हीरों को शेप देने वाली सबसे मशूहर डच फर्म कोस्टर ने इसे नया अंदाज दिया. इसका वजन तब 108.93 कैरेट रह गया. यह रानी के ताज का हिस्सा बना. अब कोहिनूर का वजन 105.6 कैरेट है.

14. स्वतंत्रता हासिल करने के बाद 1953 में भारत ने कोहिनूर की वापसी की मांग की थी, जिसे इंग्लैंड ने अस्वीकार कर दिया था.

15. 1976 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फ़िकार अली भुट्टो ने भी इसकी मांग की थी, जिसे ब्रिटेन ने ख़ारिज़ कर दिया था.

सो . – बीबीसी हिंदी 

IPL के लिए भगौड़े ललित मोदी के संपर्क में CM : कांग्रेस

lalit-modi-1-55add98f979c7_lजयपुर। आईपीएल के तीन  मैचों की मेजबानी महाराष्ट्र से जयपुर को मिलने के साथ ही अब इसे लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने जयपुर में आईपीएल मैचों के आयोजन को निराधार बताया है।  साथ ही राज्य सरकार को इस मामले में आढ़े हाथ लेने की कोशिश भी की है।

कांग्रेस पार्टी की तरफ से नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी ने राज्य सरकार पर हल्ला बोला है।  उन्होंने आईपीएल मैचों के जयपुर में आयोजन के लिए प्रदेश की सीएम के भगौड़े ललित मोदी से संपर्क होने की ओर इशारा किया है।

डूडी ने कहा कि ये साफ़ जाहिर है कि देश के भगौड़े ललित मोदी से प्रदेश की मुख्यमंत्री के ताल्लुकात अभी भी बने हुए हैं क्योंकि खींवसर मुख्यमंत्री से बिना पूछे कोई कदम नहीं उठा सकते।

‘सरकार ने दिया दुविधाओं को न्यौता’

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य सरकार ने बिना किसी होमवर्क के आईपीएल मैचों के आयोजन का निर्णय लेकर दुविधाओं को न्यौता है क्योंकि राज्य सरकार के पास क्रिकेट विषेषज्ञों और मैचों के आयोजन से संबंधित संसाधन का अभाव है। जिसके लिए उसे राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) पर निर्भर रहना पड़ेगा। लेकिन आरसीए विवादों में घिरी है और उसका नियंत्रण देश के भगौड़े ललित मोदी के हाथों में है।

‘इतनी फुर्ती सूखे-पानी संकट ने निपटने पर दिखाये सरकार’

डूडी ने कहा कि राज्य सरकार ने जिस तरह की फुर्ती आईपीएल मैचों को लेकर दिखाई है ऐसी ही फुर्ती वो प्रदेश में व्याप्त सूखे, पानी की कमी, ऊर्जा संकट जैसे मुद्दों का सामना करने में भी दिखाते।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वे क्रिकेट खेल के विरोधी नहीं है, लेकिन राजस्थान और महाराष्ट्र में व्याप्त सूखे की स्थिति और पानी की कमी के हालात में कोई अंतर नहीं है। यदि प्रदेश में हालात ठीक हों तो क्रिकेट मैचों के आयोजन हो सकते हैं, लेकिन आज के हालात ऐसे नहीं है कि यहां मैच कराये जा सकें।

‘प्रदेश की स्थिति मैच के लिए सही नहीं’

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि क्रिकेट मैच के आयोजन से बड़ा प्रश्न यह है कि राज्य सरकार प्रदेश में व्याप्त सूखे और पानी की कमी से मुकाबले के लिए क्या कार्रवाई कर रही है। पूरे प्रदेष में पशुओं के लिए चारा और पानी का संकट है। प्रदेश के नगरों, कस्बों से लेकर गांव-ढाणियों तक सुचारू पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है। चारों तरफ पानी की कमी साफ दिख रही है। राजधानी जयपुर भी इससे अछूता नहीं है।

डूडी ने कहा कि ऐसे में राज्य सरकार ने आईपीएल मैच के आयोजन का निर्णय लेकर कोई समझदारी नहीं दिखाई है। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदेश में तत्काल सूखा घोषित करना चाहिए और पानी की कमी से जूझती जनता को राहत पहुंचानी चाहिए।