कांग्रेस के असलम शेख का स्वागत

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उदयपुर। मुम्बई के मालाड क्षेत्र के विधायक एवं मुम्बई काँग्रेस कमेटी के महामंत्री असलम शेख का डबोक हवाई अड्डे पहुँचने पर काँग्रेस कार्यकर्ताओ द्वारा मेवाड़ी पागड़ी अवाम माला पहनाकर भव्य स्वागत किया गया ।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष उदयपुर नगर निगम दिनेश श्रीमाली ने बताया की असलम शेख के उदयपुर पहुँचने पर डबोक हवाई अड्डे पर भव्य स्वागत किया गयाए स्वागत करने वालो में प्रवक्ता फिरोज अहमद शेखए जगदीश पालीवालए रितुराज शर्माए सतीश लौहारए तरुण भटनागरए मुकेश बड़गुर्जरए भूषण प्रकाश श्रीमालीए आशीष पालीवालए भानु गुर्जरए रोहित पालीवालए मुकेश सेनए शादाब खानए शेलेन्द्र गावरीए भरत अग्रवालए शाहबाज़ खान आदि उपस्थित रहे ।
इस दौरान उदयपुर में राजनीतिक स्थिति तथा काँग्रेस संगठन के बारे में जानकारी ली ।

हैवानियत की पराकाष्ठा और गैर इस्लामी है आतंकवाद – असरार अहमद खान

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asrar ahmad khanअजमेर। इस्लामिक आतंकवादी संगठन आईएसआईएस द्वारा पेरिस पर आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हुए भारत में मुसलमानों के सबसे बडे़ धर्म स्थल सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन की दरगाह कमेटी के सदर असरार अहमद खान ने कहा कि इस क्रूरता की जितनी निंदा की जाए कम है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सभी लोगों के खड़े होने का समय आ गया है। इसे खत्म करने के लिए लोग व्यावहारिक उपाय आजमाएं।

दरगाह कमेटी के सदर ने शनिवार को जारी एक ब्यान में कहा कि हमला हैवानियत की पराकाष्ठा और गैर इस्लामी है। इस्लाम में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है क्योकि ख्वाजा साहब ने सूफिज्म के माध्यम से इन्सानियत भाईचारे और मानवता का संदेष दिया जो इस्लाम का मूल सिद्धांत है और इसके बिलकुल विपरित आईएसआईएस आतंक फैलाकर इस्लाम की गलत तस्वीर पेष करने का षडयंत्र रच रहा है दरगाह कमेटी इस प्रकार के कायराना आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करती हैं।

असरार खान ने कहा कि दुनिया भर के मुसलमानों को आतंकवादी और चरमपंथी तत्वों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। ये तत्व मानवता और इस्लाम के सबसे बड़े दुश्मन हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को इस्लाम के बारे में व्यापक समझ और कुरान की शिक्षाओं की गलत व्याख्या से बचाने की जरूरत है। दुनिया भर में आतंकवाद और चरमपंथ की चुनौतियों से मुकाबले के लिए इमामों, धार्मिक नेताओं और अन्य विद्वानों को बड़ी भूमिका निभानी होगी।

उन्होने कहा कि आतंकावादियों ने ऐसे लोगों को मारा गया है जो बिल्कुल निर्दोष थे। आईएस को इजरायल और अमेरिका ने बढ़ावा दिया है। सभी देश मिलकर आईएस की मदद बंद करने का दबाव बनाएं। उन्होने कहा कि इस्लामिक आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के जुल्मों से पीड़ीत सीरियाई मुस्लिम यूरोपीय देशों में शरण ले रहे हैं। यह आतंकी हमला उन मजलूमों के लिए यूरोप के देशों के दरवाजे बंद करने की साजिश हो सकती है।

मासूम के लिए मदद की गुहार – भामाशाह ध्यान दें

aabidउदयपुर। 9 साल का मासूम बच्चा ज़िन्दगी और मौत के बीच झूल रहा है। इलाज में आने वाला पहाड़ जैसा खर्च को देखते हुए परिजन भी बच्चे को तिल तिल कर मरते रोज देख रहे है । बच्चे के इलाज के लिए भामाशाहों की जरूरत है।
हरिदास जी की मगरी में रहने वाले मोहम्मद उमर के ९ वर्षीय बेटे मोहम्मद आबिद  को प्लास्टिक एनीमिया नामक कैंसर है। जिसके चलते बच्चा पिछले साल भर से खून उगल रहा है। इस बिमारी का इलाज बोनमेरो ट्रांसप्लांट से ही संभव है। इस बिमारी में नाक से खून लगातार बहता रहता है और बच्चे को हर चार से पांच दिन में खून चडाना पड़ रहा है।
साल भर पहले आबिद की यह बिमारी सामने आई जब आये दिन बैठे-बैठे नाक में से खून निकलने लग गया। उदयपुर में बच्चों के डॉक्टर लाखन पोसवाल को दिखाने के बाद डॉक्टर ने हज़ार हज़ार रुपये के दस इंजेक्शन लगाए, लेकिन बिमारी सही नहीं हुई। बाद में बच्चे के परिजन उसको अहमदाबाद के केंसर रिसर्च सेंटर लेकर गए वहां पर पहले तो उसका इलाज चला लेकिन तब भी नाक से खून बंद ना हुआ तो अहमदाबाद के डॉक्टरों ने भी कह दिया कि यह बोन मेरो ट्रांसप्लांट का केस है।  और इस पुरे इलाज के दौरान करीब दस लाख का खर्च आएगा। केंसर रिसर्च सेंटर से भी यह कह दिया गया कि यहां आप को तब ही आना चाहिए जब आपके पास रुपयों का इंतज़ाम हो, क्यूं कि बोनमेरो ट्रांसप्लांट किये बिना यह संभव नहीं है। बोनमेरो ट्रांसप्लांट के लिए मोहम्मद उम्र के बड़े बेटे मोहम्मद अकरम का बोन मेरो देने के लिए भी परिजन तय्यार है लेकिन इलाज में आने वाले खर्च को लेकर बेबस और लाचार है। पिता की मासिक आय भी आठ हज़ार रुपये से अधिक नहीं है, पिता मोहम्मद उमर हेंडी क्राफ्ट व्यवसाई के यहां नोकरी करता है। परिवार में अन्य परिजनों की स्थिति एसी नहीं है कि इतना मंहगा इलाज करवा सके पिछले तिन माह से परिजन हर संभव कोशिश कर रहे है, अपने घर के लाडले को बचाने की। परिजनों को भामाशाहों का इंतज़ार है कि कोई मासूम की मदद के लिए आगे आये . पढ़ने वाले अगर बच्चे की मदद करना चाहे तो निचे लिखे बच्चे के पिता के मोबाईल नंबर पर संपर्क कर सकते है या फिर उदयपुर पोस्ट ( www.udaipurpost.com ) से संपर्क कर सकते है .

मोहम्मद उम्र ( पिता )  –   08854855786

मोहम्मद सलीम ( बड़े पापा ) –  08854891786

पेट्रोल 36 पैसे,डीजल 87 पैसे लीटर महंगा हुआ

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petrolदेश की पेट्रोलियम कंपनियों ने रविवार को पेट्रोल की कीमतों में 36 पैसे प्रति लीटर की बढोतरी की है। इसके साथ ही डीजल की कीतमों में भी 87 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। पेट्रोलियम कंपनियों के मुताबिक नई कीमतें रविवार आधी रात से लागू हो जाएंगी। पिछले पखवाडे पेट्रोल के दाम में 50 पैसे प्रति लीटर की कटौती की गई थी जबकि डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया था। बता दें, पिछले दिनों केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढाई थी। पेट्रोल पर पर 1.6 रूपये प्रति लीटर और डीजल पर 40 पैसे प्रति लीटर “एक्साइज ड्यूटी” बढाई गई थी हालांकि इसका उपभोक्ता पर असर नहीं पडा था लेकिन ये लाभ उपभोक्ता को मिलने की बजाय सरकार ने अपने कोष में जमा कर लिया।

अशोक महान हो सकते हैं तो टीपू क्यों नहीं?

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टीपू सुल्तान की जयंती मनाने पर विरोध के दौरान पिछले हफ्ते कर्नाटक में दो लोग मारे गए. जैसा कि आजकल देश में बहुत सी हताश कर देने वाली चीजें हिंदू मुस्लिम का मुद्दा बन जा रही हैं, यह भी इसी क़िस्म का मुद्दा बन गया है.दुनिया के इस हिस्से में राजाओं को दो तरह से देखा जाता है- अच्छा जैसे अशोक और अकबर आदि और बुरा जैसे औरंगजेब और टीपू सुल्तान आदि.

एक ऐसे समाज और राष्ट्र में यह खास प्रवृत्ति बन गई है, जो इतिहास को तथ्यों या कारण के बजाय भावनाओं की नज़र से देखता है. यह अधिकांश अनपढ़ और अधिकांश नए पढ़े लिखे लोगों का संकेत भी है. टीपू और उनके जनरलों की प्रतिष्ठा को उन्हीं के ख़िलाफ़ इस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है मानो वो हमेशा ही हिंदुओं के ख़िलाफ़ जिहाद चलाते थे. यह बकवास बात है, लेकिन यहां ये बताने की कोशिश करने का कोई मतलब नहीं है. बेहतर हो कि लोग उनके बारे में किताबें पढ़ें और फिर सहमत हों, इसके बजाय कि उन्हें बताया जाए.

लेकिन यहां असल में मुश्किल ये है कि सभ्य दुनिया से उलट, भारत में बहुत कम किताबें लिखी गई हैं. हमारे यहां डायरी रखने और संस्मरण लिखने की कोई परम्परा नहीं है. ऐतिहासिक तथ्यों पर नया काम करने में हमारी कोई दिलचस्पी नहीं है. और इसीलिए टीपू पर कोई ऐसी किताब नहीं है जिसे किसी भारतीय ने लिखा हो. अगर किसी को इस राजा के बारे में कुछ जानना है तो उसे 19वीं शताब्दी में लुईस बॉवरिंग द्वारा लिखी किताब ‘हैदर अली, टीपू सुल्तान एंड स्ट्रगल ऑफ़ मुसलमान पॉवर्स ऑफ़ साउथ’ पढ़ना पड़ेगा. (बॉवरिंग ऐसा नाम है जिसे बंगलुरु के लोग अच्छी तरह परिचित हैं, क्योंकि इनके नाम पर ही सेंट मार्क्स रोड पर बॉवरिंग क्लब है.)

tipu_sultanटीपू सुल्तान में जो दिलचस्पी दो-तीन बातों को लेकर है.

पहला, यह कि अंग्रेजों के लिए उन्हें हराना बहुत मुश्किल हो गया था. जब हम पिछले समय के अंतिम महान इतिहासविद सर जदुनाथ सरकार का अध्ययन करते हैं तो यह बिल्कुल साफ हो जाता है कि मराठों से उलट, टीपू असली योद्धा थे. पानीपत की लड़ाई में करारी हार के बाद मराठों का जिस तरह मनोबल टूटा, इसके मुकाबले टीपू का लगातार ज़बदस्त टक्कर देना क़ाबिल-ए-ग़ौर है. ये घटनाएं 40 वर्षों में घटीं यानि, 1761 (जब अहमद अब्दाली ने पानीपत की लड़ाई जीती) और 1799 जब टीपू सुल्तान मारा गया. इन सालों में अंग्रेज़ों ने अपने सभी दुश्मनों का हरा दिया और केवल पंजाब बचा रहा गया, जो कुछ दशकों में रणजीत सिंह की मौत के बाद अपने आप हथियार डाल देता. यह केवल टीपू ही था, जिसकी ओर से उन्हें असली प्रतिरोध का सामना करना पड़ा. वह बहुत जांबाज जनरल था और उसे भू राजनीतिक विषयों की बहुत बारीक समझ थी (अंग्रेजों के ख़िलाफ़ फ्रांसीसियों को इस्तेमाल करना). इसके अलावा युद्ध के प्रति उसका नज़रिया बहुत अत्याधुनिक था.

दूसरी बात, यह जगजाहिर है कि टीपू की सेना ही पहली सेना या शुरुआती सेनाओं में से एक थी जिसने युद्ध में रॉकेट इस्तेमाल किए. उनके सिपाही रॉकेट में ब्लेड लगाते थे, जिन्हें दुश्मन की सेनाओं पर फ़ायर किया जाता था. टीपू को हराने के लिए ब्रितानी इतिहास के सबसे महान योद्धा आर्थर वेलेस्ली की सेवा लेनी पड़ी. वेलेस्ली, जिन्हें हम ‘ड्यूक ऑफ़ वेलिंगटन’ के नाम से जानते हैं, ने बाद में वाटरलू की लड़ाई में नेपोलियन को हराया. यह  बड़ी निराशाजनक बात है कि टीपू की सैन्य और राष्ट्रीय उपलब्धियों को आजकल बहुत आसानी से नज़रअंदाज़ किया जा रहा है. टीपू के बारे में जो कुछ याद किया जा रहा है वो बस ये कि उसने हिंदुओं को मारा या धर्म परिवर्तन कराए, चाहे ये बात सही हो या ग़लत.

महान अशोक ने कलिंग को जीतने के बाद विदेशियों या मुसलमानों की हत्याएं नहीं कीं थीं. ये ओड़िया भाषी हिंदू ही थे जिन्हें उसने दसियों हज़ार की संख्या में क्रूरता पूर्वक मार डाला था, जैसा कि कहानियों में हमें बताया जाता है. लेकिन अशोक को महान कहा जाता है और उसका चिह्न ‘शेर’ भारतीय गणतंत्र का आधिकारिक चिह्न है. भारतीय झंडे में चक्र को अशोक चक्र कहा जाता है क्योंकि यह भी उसी का चिह्न है. हम क्यों अशोक का सम्मान करते हैं लेकिन टीपू का नहीं, जबकि दोनों पर ही एक ही जैसे अपराध करने के आरोप हैं? हम इसका जवाब जानते हैं और यह स्वाभाविक ही है. भारत में एक मुसलमान राजा को वैसे ही अपराध के लिए माफ नहीं किया जा सकता, जैसा एक हिंदू राजा ने किया हो. पटियाला की विशाल इमारत को महाराज आला सिंह ने बनवाया था. उनके नाम सैन्य उपलब्धियां शून्य के बराबर हैं. लेकिन आला सिंह ताक़तवर हो गए थे क्योंकि उन्होंने मराठाओं को हराने में अब्दाली का साथ दिया था और उन्हें अफ़गान शासकों की ओर से पुरस्कृत किया गया. क्या कोई आला सिंह या उनके पूर्वजों को देशद्रोही के रूप में देखता है?पटियाला के राजा लगातार महाराजा रणजीत सिंह का विरोध करते रहे, लेकिन उन्हें कोई भी राष्ट्र विरोधी के रूप में नहीं देखता. ऐसा बर्ताव केवल मुस्लिम राजाओं के लिए ही आरक्षित है. ऐसे लोगों के बारे में पढ़ने या लिखने में हमारी दिलचस्पी नहीं है, बल्कि ऐसे लोगों के बारे में बुरे से बुरा मान लेने और ऐसी चीजों के बारे में विरोध करने की हममें हमेशा दिलचस्पी रहती है, जिनके बारे में हम बहुत थोड़ा जानते हैं.

सोजन्य – 

धूम धडाके और रोशनी के बिच मनाई दिवाली – रोशनी में नहाया शहर हर चहरे पर दिखी ख़ुशी

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उदयपुर। सुख-समृद्धि व वैभव का दीपोत्सव धनतेरस से शुरू होकर आज भाई दूज के साथ संपन्न हो गया। दीपावली पर बुधवार को शहर रोशनी में नहाया। हर घर-प्रतिष्ठान, बाजार, चौक-चौराहा व सरकारी भवन पर आकर्षक सजावट की गई। लोगों ने शुभ मुहूर्त पर लक्ष्मी पूजन कर खुशहाली की कामना की। पूरी रात आतिशबाजी का दौर जारी रहा।

अलसुबह महिलाओं ने परंपरानुसार गोवर्धन पूजा की। दीपावली के अगले दिन गुरुवार को रामा-सामा पर लोगों ने अपने परिजनों व परिचितों के यहां जाकर बड़ों से आशीर्वाद लिया। साथ ही अपनों से छोटों को उपहार देकर दीपावली की शुभकामनाएं दी। मुलाकात का यह दौर देर रात तक जारी रहा। महिलाओं ने घरों में विशेष पकवान बनाकर मेहमानों का मुंह मीठा करवाया।

लक्ष्मी मंदिर में भक्तों की कतार :
दिवाली की अल सुबह से भटियानी चोहट्टा स्थित महालक्ष्मी मंदिर में भक्तों की कतारें लगी जो देर रात तक जारी रही। लक्ष्मी के दर्शन और पूजा के लिए महियें युवा घंटों लाइन में खड़े रहे। पुलिस ने लक्ष्मी मंदिर रोड का यातायात एक दिन पहले ही बंद कर दिया था। सुबह तो भक्तों की कतार जगदीश चोक तक पहुच गयी थी।
सजे बाज़ार बापूबाजार रहा फीका : इस बार हालाँकि शहर के हर हिस्से के बाज़ार रोशनी से जगमग रहे लेकिन शहर का हार्ट कहे जाने वाले बापूबाजार में व्यापारियों ने सजावट में कोई उत्साह नहीं दिखाया। बापूबाजार के अधिकतर व्यवसाई महापौर और नगर निगम के विरोध स्वरुप साज्जा नहीं की। गौर तलब है की शहर की आम जनता बापूबाजार में शाम को रोशनी देखने जरूर आती है।

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खेखरे पर हुई गोवर्धन पूजा:
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा दिवाली के अगले दिन गुरुवार को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया गया। दीपावली के दूसरे दिन गो पूजा का विशेष महत्‍व होता है। महिलाओं ने अल सुबह गाय की पूजा के बाद गाय पालक (गाय की सेवा करने वाला) को गिफ्ट और अन्‍न दिया। गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर जल, मौली, रोली, चावल, फूल, दही और तेल का दीपक जलाकर पूजा की। ऐसी मान्‍यता है कि इंद्र के कोप से बचने के लिए गोकुल वासियों ने जब गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली, तब उन्‍होंने 56 भोग बनाकर श्री कृष्ण को भोग लगाया था। इससे खुश होकर श्री कृष्ण ने आशीर्वाद दिया और कहा इंद्र से डरने की जरूरत नहीं है, वह गोकुल वासियों की हमेशा रक्षा करेंगे।
मेहमानों का सिलसिला सुर रामा शामा :
दिवाली के अगले दिन महिलाऐं गोवर्धन पूजा करती है तो घर के पुरुष इस दिन रामा-शामा करते है । जो लोग दीवाली की रात आतिशबाजी में व्यस्त रहे वो लोग गूरुवार के दिन रामा शामा करने में जुटे रहे। रामा शामा का ये सिलसिला दिन भर चलता रहा। इस दौरान लोगों ने अपने घर आने वाले मेहमानों का स्वागत किया और घर में बनी मिठाइयों से उनका मुंह मीठा कराया। इसी तरह का माहौल सियासी पार्टियों के दफ्तरों और प्राईवेट कंपनियों के संस्थानों में रहा। उधर, दिवाली की छुट्टियों के बाद बाहर के लोगों का घर लौटने का सिलसिला शुरू हो गया।
रोड़वेज और प्राईवेट बसों में सवारियां खचाखच भरी रही। ऐसा ही हाल रेलगाड़ियों का भी रहा… रेलवे स्टेशनों पर रेलों के ज़रिये घर लौटने वालों की रेलमपेल देखि गई।

प्रेम की धमाकेदार वापसी – प्रेम रतन धन पायो

फिल्म: प्रेम रतन धन पायो
डायरेक्टर: सूरज बडजात्या
संगीत: हिमेश रेशमिया
कलाकार: सलमान खान, सोनम कपूर, अनुपम खेर, स्वरा भास्कर, नील नितिन मुकेश और अरमान कोहली

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सलमान की जिस फिल्म का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था वह प्रेम रतन धन पायो रिलीज हो गई। दर्शक एक बार फिर से सलमान को प्रेम के रूप में देखकर काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं। सलमान ने भी अपने प्रशंसकों को निराश नहीं किया है। सलमान ने एक बार फिर से प्रेम के रूप में खुद को साबित कर दिया है। फिल्म प्रेम रतन धन पायो एक फैमिली ड्रामा है। फिल्म के भव्य सेटों ने दर्शकों को काफी लुभाया है। सूरज बडजात्या और सलमान खान की जोडी ने एक बार फिर सये कमाल कर दिखाया है। फिल्म का संगीत तो पहले से ही लोकप्रिय हो चुका है। फिल्म के अन्य कलाकारों जैसे सोनम कपूर, अनुपम खेर,नील नीतिन मुकेश, स्वरा भास्कर ने भी प्रशंसनीय अभिनय किया है। फिल्म में सलमान खान को डबल रोल में दिखाया गया है। कुल मिलाकर फिल्म प्रेम रतन धन पायो पैसा वसूल फिल्म है।

कहानी: फिल्म की कहानी अयोध्या में शुरू होती है। प्रेम यानी सलमान खान जो कि बडे दिलवाला है उसे रामलीला जुबानी याद है। वह हर वक्त अपनी धुन में रहता है। वह अपनी कमाई वहां की राजकुमारी मैथिली यानी सोनम कपूर के चैरिटेबल ट्रस्ट में दान दे देता है। राजकुमारी मैथिली की प्रशंसा सुनकर प्रेम उनसे मिलने के लिए उत्सुक हो जाता है। प्रेम अपने दोस्त के साथ राजकुमारी से मिलने के लिए राजमहल पहुंच जाता है।

राजकूमारी मैथिली को फिल्म में बडा उदार और दूसरों की सहायता करने वाला दिखाया है। प्रेम राजकुमारी की इस उदारता से काफी प्रभावित होता है। प्रेम राजकुमारी से मिल लेता है। मैथिली से मिलने के बाद फिल्म में प्रेम का माहौल शुरू हो जाता है। फिल्म में सलमान के दूसरे रूप को राजकुमार विजय के रूप में दिखाया गया है। इसके बाद फिल्म रिश्तों के इर्द गिर्द घूमती है। फिल्म की कहानी काल्पनिक और पारिवारिक रिश्तों की बुनियाद पर बनाई गई है। फिल्म ने अंत तक दर्शकों को कुर्सी से बांधकर रखा है।

बिहार चुनाव: ‘भाजपा के लिए सलाह- गाय वोट नहीं देती, लोग देते है’

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biharबिहार विधानसभा चुनावों के परिणाम को लेकर पाकिस्तान में भले ही पटाखे नहीं छूटे हों लेकिन सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जमकर धूमधड़ाका किया और भाजपा की हार पर कई चटपटी टिप्पणियां की। सुबह आठ बजे मतगणना शुरू होने के साथ ही ट्विटर पर हैशटेग #BiharResults ‘ ट्रेंड करने लगा और दिनभर टॉप पर बना रहा।
इस दौरान यूजर्स ने भाजपा की हार के बहाने गाय, पाकिस्तान, असहिष्णुता पर टिप्पणी की और भाजपा को आगे के लिए नसीहत भी दे डाली। मजेदार बात यह है कि ट्विटर  पर भारतीयों के अलावा पाकिस्तानियों ने भी जमकर आतिशबाजी की।
ट्विटर पर आरती सवाल करती हैं कि बिहार को खरीदने के लिए मोदी जी ने जिस पैकेज की बोली लगाई थी वो चुनाव हारने के बाद भी मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के लिए एक लाख 65 हजार करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा कर रखी है। हालांकि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने साफ किया है कि बिहार को पैकेज दिया जाएगा। 
आकृति मट्टू ने लिखा कि भारतीय चुनावों के बारे में अच्छी बात यह है कि औसत मतदाता के मन की थाह लेना बहुत मुश्किल है। किसी भी तरह के आडंबर से उसे मूर्ख नहीं बनाया जा सकता है। 
नम्रता साहू का कहना था कि भाजपा ने पिछले चुनावों में 91 सीटें जीती थीं और इस बार वह 60 पर आ गई है। क्या यह मोदी सरकार के कामकाज पर जनमत संग्रह है। 
स्नेहल गांधी ने कहा, ‘भाजपा के लिए सलाह- गाय वोट नहीं देती है लोग देते हैं। एक अन्य टिप्पणी थी कि भाजपा की गाय पर ‘घर वापसी‘ हुई है। एक टिप्पणी यह भी थी कि बिहार चुनावों में भाजपा की सीटों की संख्या डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत से भी कम रही।
महेंद्र रघुवंशी ने ट्वीट किया, ‘आज बिहार की जनता चिल्ला चिल्ला के पूछ रही है मोदी से कितनी सीट दूं। तीस दूं या 40-50 दूं या 60 दूं। पाकिस्तान में भी लोगों ने ट्वीटर पर बिहार जीत पर खूब टिप्पणी की है। 
नसीम जेहरा लिखती हैं, ‘बीजेपी संघ राजनीतिक आक्रमण में उन सभी को पाकिस्तानी कहा जा रहा है जो उनके विरोध में हैं। ये घटिया राजनीति है।
अली कामरान चिश्ती का ट्वीट है, ‘जो न कटे आरी से वो कटे बिहारी से।
स्नाइपर नाम के एक हैंडल ने ट्वीट किया है, ‘यहां पाकिस्तान में हाफिज सईद जैसे लोग मोदी की जीत का इंत•ाार कर रहे हैं। वो चाहते हैं कि मोदी की जीत हो तो तनाव बढ़ता रहे।’
‘सच है माता कभी कुमाता नहीं होती देखिये न गौ माता का चारा खा जाने वाले बेटे लालू को भी गौ माता ने जीत दिया ‘

इमाम हुसैन की याद में आम न्याज़ में उमड़े हज़ारों लोग

80 fittउदयपुर । नूरे इस्लाम नौजवान कमैटी ने ८० फिट रोड राता खेत पर इमाम हुसैन की याद में आम न्याज का आयोजन किया जिसमे शहर के कई मोहल्लों से हज़ारों लोग शामिल हुए।
रातखेत की नुरे इस्लाम कमेटी के जाकिर मंसूरी ने बताया कि सामाजिक कार्यों के लिए बनी युवाओं की नुरे इस्लाम कमिटी ने हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी इमाम हुसैन की याद में आम न्याज़ का आयोजन किया जिसमे सात क्विंटल तबर्रुक आम लोगों में वितरित किया गया । जाकिर ने बताया कि नुरे इस्लाम कमिटी के अलावा मोहल्ले के कई युवा और महिलाओं का इस आम नयाज के आयोजन को सफल बनाने में योगदान रहा। शहर के अन्य मोहल्ले सज्जन नगर, मस्तान पीया कॉलोनी, फारुख आज़म नगर, अंम्बावगढ़ कच्ची बस्ती आदि से हज़ारों महिलाऐं बच्चे और पुरुष न्याज़ के लिए राताखेत पहुंचे जिन्हे न्याज़ का तबर्रुक तकसीम किया गया । इस आयोजन में नुरे इस्लाम कमेटी के साबिर खान, आबिद हुसैन, मोहम्मद शाकिर, मोहसिन हैदर, अनवर मंसूरी, निसार मंसूरी, इकराम, आदिल, इरफान, सईद, उमर, नदीम, आवेश, मुकर्रम, इदरिस, सलीम, शाकिर, शादाब, शादान, सौहेल, हामीद भाई, बबला, आजाद नाना, फिरोज, मोहम्मद रियाज, फरदीन, जीशान सहित नूरे इस्लाम नोजवान कमेटी के कई मेम्बरान मौजूद थे, जो कि कार्यक्रम के सफल आयेाजन के लिए कई दिनों से तैयारियों में लगे हुए थे।

बिहार की जीत पर कोंग्रेस कार्यकर्ताओ ने की आतिशबाजी

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उदयपुर। बिहार विधानसभा के आए नतीजो से उत्साहित कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने मादडी चोराहे पर आतिशबाजी की एवं एक.दुसरो को मीठा मुँह करा कर लड्डू वितरण किये !
नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष दिनेश श्रीमाली ने बताया की बिहार विधानसभा चुनावो में महागठबंधन को मिली ऐतिहासिक जीत के उपलक्ष्य में कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने मादडी चौराहे पर भव्य आतिशबाजी की तथा एक.दुसरे का मुहँ मीठा करा कर मिठाई वितरण की !
इस दौरान कार्यकर्ताओ ने कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद सोनिया गाँधी जिंदाबाद राहुल गाँधी जिंदाबाद सी पी जोशी जिंदाबाद तथा सचिन पायलट जिंदाबाद के नारे लगते हुए एक.दुसरे को बधाई दी साथ ही बिहार के प्रभारी पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ सीपी जोशी का आभार जताया जिनके नेतृत्व में ये करिश्मा हुआ साथ ही शुभकामनाये भी प्रेक्षित की !
कार्यकर्म में दिनेश श्रीमाली, पूर्व पार्षद भगवती लाल सुथार, पार्षद प्रमिला चौधरी, भूषण श्रीमाली, संजय सुथार, अरुण सुथार, पन्नालाल चौधरी, भानु गुर्जर, पंकज शर्मा, तरुण भटनागर, संतोष शर्मा, आशिफ खान, राम लाल, ब्रिजेश, प्रदीप,दुर्गेश सहित सेकड़ो कार्यकर्ता उपस्थित थे !