उदयपुर. एसीबी ने शनिवार को प्रतापगढ़ के आबकारी निरीक्षक चेतनलाल को 4.19 लाख रुपए के साथ पकड़ा। वे टीम को यह नहीं बता पाए कि उनके पास यह रकम कहां से आई। एसीबी इसे अवैध वसूली का मामला मान रही है। बैंक खातों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।एसीबी ने अाबकारी निरीक्षक को चार लाख रु. के साथ पकड़ा
उदयपुर. एसीबी ने शनिवार को प्रतापगढ़ के आबकारी निरीक्षक चेतनलाल को 4.19 लाख रुपए के साथ पकड़ा। वे टीम को यह नहीं बता पाए कि उनके पास यह रकम कहां से आई। एसीबी इसे अवैध वसूली का मामला मान रही है। बैंक खातों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।दादरी से मुसलमानों के लिए क्या है संदेश?
अख़लाक़ की मौत जितनी डरावनी थी, उसके बाद की प्रतिक्रियाएँ भी चिंतित करने वाली हैं.
भाजपा के स्थानीय नेताओं को पुलिस की कार्रवाई पर ऐतराज़ है. उनका कहना है कि यह इरादतन क़त्ल नहीं था, इसलिए हत्या की धाराएँ न लगाकर ग़ैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए.
उनका तर्क यह है कि अख़लाक़ की हत्या की कोई पूर्व योजना न थी, वह तो ‘गोवध’ और ‘गोमांस’ खाने की ख़बर से हिंदू ग्रामीणों की धार्मिक भावनाएं भड़क उठीं. उनका मानना है कि लोगों ने ‘कुछ कड़े रूप में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं’, जिसके नतीजे में अख़लाक़ की मौत हो गई.
वे उलटे अख़लाक़ के परिवार पर गोवध और गोमांस भक्षण के लिए आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग कर रहे हैं. धमकी दी जा रही है की अगर ऐसा न किया गया तो महापंचायत की जाएगी.
‘पीड़ित ही अपराधी’
भाजपा के कुछ स्थानीय नेता कह रहे हैं कि असल मुजरिम तो ख़ुद अख़लाक़ ही था क्योंकि उसके घर गोमांस होने का शक गाँव वालों को हुआ. जो शिकार है, वही अपराधी साबित किया जा रहा है. अख़लाक़ ने अपनी मौत को दावत दी.
पुलिस ने अख़लाक़ के फ्रिज में रखे मांस को जांच के लिए लिए भेजा है की वह गोमांस तो नहीं था! मानो, यह मालूम हो जाने से इस हत्या की गंभीरता कम हो जाएगी.
गाँव में हत्या को लेकर कोई अफ़सोस नहीं दिखता.
ये हत्या प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़, गाँव के मंदिर से किए गए इस ऐलान के बाद की गई कि अख़लाक़ ने गाय काटी है और गोमांस खाया है.
पहली नज़र में ऐसा लगता है कि लोगों का ग़ुस्सा भड़का और बात हाथ से निकल गई, लेकिन ये ख़ूनी ग़ुस्सा यूँ ही नहीं भड़का है, लंबे हिन्दुत्ववादी प्रचार और मुस्लिम विरोधी ट्रेनिंग के बाद ही नफ़रत सामूहिक हिंसा में बदली है.
अब रिपोर्टरों को यह मालूम हो रहा है कि काफ़ी पहले से इस पूरे इलाक़े में एक मुस्लिम विरोधी माहौल बन रहा था. इसके पहले भी मवेशी लेकर जा रहे तीन मुसलमान व्यापारियों को गाड़ी से खींच कर मार डाला गया था. दुकान खोलने पर एक मुसलमान की पिटाई की गई थी.
मुसलमानों की छोटी-छोटी बात पर पिटाई और उन्हें बेइज्ज़त करने की घटनाओं की ख़बरें भी मिल रही हैं. इससे नतीजा यही निकलता है कि मुसलमानों को आतंकित करने की एक मुहिम-सी छेड़ी गई है.
मुज़फ़्फ़रनगर
यही पैटर्न मुज़फ़्फ़रनगर में भी देखा गया था.
जब हिंसक कांड के बाद वे किसी तरह मुक़दमे में फँस जाते हैं तो इसके लिए वे मुसलमानों को ही जवाबदेह मानते हैं. कहा जाता है, ‘अगर उन्होंने उकसाया न होता तो वे उत्तेजित नहीं होते!’ ‘हम मुसलमानों की तरह हिंसक प्रवृत्ति के नहीं हैं.’
ऐसे मुसलमानों से सहानुभूति क्यों हो जो शांतिप्रिय-सहिष्णु लोगों को क़त्ल के लिए उकसाते हैं? उन्हें यह साफ़ संदेश भी मिल जाता है कि या तो वे गाय की तरह रहें या गाँव छोड़ दें. यह मुज़फ़्फ़रनगर में हो चुका है और अटाली में भी.
अस्करी भी यही करने जा रही है. वह अपना मकान, जो पड़ोस के बिना अब घर नहीं रह गया है, बेचना चाहती हैं.
तो क्या हिंदुओं ने मुसलमानों का पड़ोसी बनने से इनकार कर दिया है? क्या यह मुसलमानों के लिए अलग देस बनाने का संदेश है?
सोजन्य – बीबीसी हिंदी
दादरी हत्याकांड दुनिया भर में सुर्ख़ियों में
अरब भाषा के टीवी चैनल अल एलन की वेबसाइट पर ख़बर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया.
दादरी में गोमांस खाने की अफ़वाह पर एक मुसलमान की पीट-पीटकर हत्या की ख़बर आने के बाद से ही ट्विटर पर #internationalshame यानी अंतरराष्ट्रीय शर्म हैशटैग ट्रेंड करने लगा.
मर्डर ओवर मील (खाने के लिए हत्या) हैशटैग भी ट्रेंड कर रहा था.
अंग्रेज़ी प्रेस के तमाम बड़े अंतरराष्ट्रीय अख़बारों के साथ-साथ विश्व भर की भाषाओं में भी इस हत्याकांड को कवर किया गया.

अंग्रेज़ी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी अख़लाक़ की मौत की ख़बर प्रकाशित की. साथ ही वाइस न्यूज़, हफ़िग्टन पोस्ट, टाइम पत्रिका समेत तमाम प्रमुख अंग्रेज़ी वेबसाइटों ने दादरी हत्याकांड की ख़बर को जगह दी.
Image copyrightOtherसभी अंग्रेज़ी वेबसाइटों ने इसे हिंदू भीड़ के हाथों एक मुसलमान की हत्या बताया.
Image copyrightOtherयही नहीं दुनिया भर की कई भाषाओं के प्रकाशनों में भी इस ख़बर को जगह दी गई.
ऊरूग्वे के स्पेनिश भाषी समाचार पत्रों में भी हिंदू भीड़ के हाथों एक मुसलमान की हत्या की इस ख़बर को जगह दी गई.
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Image copyrightOtherपाकिस्तान के उर्दू टीवी चैनलों और अख़बारों ने इस ख़बर पर आक्रामक रुख़ अख़्तियार करते हुए इसे हिंदू चरमपंथ की वारदात क़रार दिया.
सोर्स – बीबीसी हिंदी
अमेरिका में “अहिंसा परमोधर्म ” लिख कर आने वाले मोदी क्या अख़लाक़ की मौत पर दुखी है ?
गाय मारी गई या नहीं, मालूम नहीं, ये मालूम है कि अख़लाक़ मारा गया और उसका बेटा मौत से जूझ रहा है.
अमरीका में फ़ेसबुक के हेडक्वार्टर में नरेंद्र मोदी ‘अहिंसा परमोधर्म:’ लिखकर भारत लौट आए हैं, और बांका की रैली में अपना बांकपन भी दिखा दिया है.
जब अहिंसा के दूत महात्मा गांधी का जन्मदिन स्वच्छता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है, भारत ही नहीं, दुनिया भर के मीडिया में अख़लाक़ की हत्या पर चर्चा हो रही है.
चुप्पी एक राजनीतिक विकल्प
दिल्ली की सड़कों पर भाजपा नेता विजय गोयल ने पोस्टर लगवाए हैं जिन पर लिखा है-‘साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल’, इस पोस्टर में साबरमती के दो संत दिख रहे हैं, एक पुराने और एक नए.
पिल्ले के मरने पर भी दुखी होने वाले मोदी अभी दुखी हैं या नहीं, यह देश को पता नहीं चल सका है.
दादरी की दर्दनाक घटना के बाद से प्रधानमंत्री पंकज आडवाणी को बिलियर्ड्स चैम्पियनशिप जीतने पर बधाई दे चुके हैं, वे आशा भोंसले के बेटे के निधन पर दुख भी व्यक्त कर चुके हैं, यानी देश के दुख-सुख में साथ हैं.
मौनमोहन के मुक़ाबले वाकपटुता से वोटरों को मोहने के बाद, अब मोदी चुप रहने के मामले में मनमोहन से नहीं, बल्कि नरसिंहा राव से प्रेरणा लेते दिख रहे हैं जो चुप्पी को राजनीतिक विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करते थे.
मोदी की चुप्पी की आदत डालना इस देश की जनता के लिए बड़ी चुनौती है क्योंकि उसने अब तक गरजते-बरसते, ललकारते-पुकारते मोदी को ही देखा है.
वैसे ये उनकी चुप्पी 2.0 है. ललित गेट और व्यापमं पर उनकी चुप्पी काफ़ी गहरी थी, इन मुद्दों पर उनके ‘मन की बात’ कई रेडियो प्रसारण सुनकर भी लोग नहीं जान सके.
प्रधानमंत्री के इस मामले में कुछ न बोलने का मतलब यही है कि हर कोई उनके मन की बात अपने ढंग से पढ़ेगा. क्या इसका ये मतलब निकाला जाए कि मोदी चाहते हैं कि मुसलमान जो समझ रहे हैं, वो समझते रहें और इस मामले में उग्र हिंदुओं को कुछ समझाने की ज़रूरत नहीं है.
सोर्स – बीबीसी हिंदी
विरोधियों ने गुलाबचंद कटारिया की शिकायत प्रदेशाध्यक्ष से की – संगठन के चुनाव में तानाशाही और मनमानी का आरोप।
उदयपुर । भाजपा में संगठन के चुनाव का घमासान अपने चरम पर है। संगठन के चुनाव में पक्षपात और तानाशाही की शिकायत प्रदेशाध्यक्ष तक पहुच गयी। शुक्रवार को गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया के विरोधियों ने एक साथ लामबंद हो कर भाजपा के वरिष्ठ नेता भानुकुमार शाश्त्री के निवास पर बैठक आयोजित की। कटारिया विरोधियों का आरोप है कि कटारिया अपनी तानाशाही के चलते संगठन के चुनाव में अपनी मनमानी कर रहे है । भानुकुमार शाश्त्री ने प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी से से भी फोन पर यहां की समस्या से अवगत भी कराया।प्रदेशाध्यक्ष ने शिकायत लिखित में देने का कहा। बैठक में भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्म नारायण जोशी ने भी कटारिया पर संगठन विरोधी होने का आरोप लगाया है।
भाजपा के संगठन के चुनाव घमासान चरम पर है, एक ही पार्टी के लोग आपस में लड़ रहे है। इन चुनावों में नियुक्तियां गृह मंत्री शहर विधायक गुलाबचंद कटारिया ने अपने हाथों में ले रखी है। ऐसे में कटारिया विरोधियों को कही भी मौका नहीं मिल पा रहा। आखिर परेशान हो कर सभी ने कटारिया की तानाशाही के खिलाफ खड़े हो गए और भाजपा के वरिष्ठ नेता भानु कुमार शस्त्री के घर बैठक आयोजित की जिसमे मांगीलाल जोशी, धर्म नारायण जोशी,महेंद्र सिंह शेखावत,गोविन्द दीक्षित,पार्षद जगत नागदा, अनिल सिंघल, विजय प्रकाश विपल्लवि, दिग्विजय श्रीमाली, पदम् शर्मा, दुल्ले सिंह आदि मौजूद थे। सभी का आरोप है कि संगठन के चुनाव, सदस्यता अभियान सूचि आदि कार्यक्रम कटारिया द्वारा अपने मनमाने ढंग से चलाये जारहे है। मंडल व् बूथ चुनाव अधिकारियों की नियुक्तियां भी गुटबाजी पूर्ण तरीके से की गयी है। सक्रीय सदस्यता अभियान भी अपने मनमाने ढंग से चलाया जारहा है। सक्रीय सदस्यों की व् सामान्य सदस्यों की सूचियां भी प्रकाशित नहीं की गयी जब की नियम के अनुरूप इनकी सुचि प्रकाशित की जाती है। सिर्फ अपने समर्थकों को चुनाव की सूचना दी जबकि ना पसंद के कार्यकर्ताओं को पूरी प्रक्रिया से बाहर रखा है। बैठक में आये सभी नेताओं ने कहा की कार्यकर्ता और सक्रीय सदस्यों में काफी रोष है।
भानुकुमार शाश्त्री ने बैठक से ही प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी से मोबाइल पर वार्ता की, अशोक परनामी ने कहा कि आप सब एक पत्र बना कर लिखित में मुझे भिजवाओ फिर आगे जो होगा कार्रवाई करते है।
कांग्रेस विधायक जिताने का आरोप :
भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्म नारायण जोशी ने २००९ में हुए विधान सभा चुनाव में मावली से कांग्रेस विधायक को जिताने का आरोप लगाया है। धर्म नारायण जोशी ने कहा कि मुझे हराने के लिए गुलाब चंद कटारिया ने उस वक़्त कांग्रेस के उम्मीदवार पुष्कर लाल डांगी को बुला कर उससे मुलाक़ात की थी और उसको कहा था कि धर्म नारायण जोशी हर हाल में वहां से हारना चाहिए। जोशी ने कहा कि इस बात के उनके पास पुख्ता साबुत है, अगर कटारिया मेरी इस बात क्लो झुठला दें तो वे पार्टी से इस्तीफा देदेगें। इस मामले में गुलाबचंद कटारिया से संपर्क करने की कोशिश की गयी लेकिन उनसे संपर्क हो नहीं पाया।
आम आदमी की थाली से बाहर हो गयी दालें
उदयपुर। दालें आम आदमी की थाली से बाहर हो गई हैं। एक सप्ताह के दौरान इनकी कीमतें दस रुपए से चालीस रुपए प्रति किलो तक उछल गई हैं। रिटेल कीमतों की बात करें तो उड़द दाल के भाव 140 रुपए किलो और अरहर दाल के 150 रुपए प्रति तक पहुंच गए हैं। धान मंडी के रिटेल व्यापारियों के मुताबिक़ तो पिछले १० दिन में दालों की बिक्री आधी हो गयी है। महीने के राशन में दाल या तो हे ही नहीं और है तो आधी मात्रा में।
व्यापारियों के मुताबिक कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु तथा महाराष्ट्र में खराब मानसून से खरीफ में दलहन की पैदावार बुरी तरह प्रभावित हुई है। जबकि पूरे देश को अरहर दाल खिलाने वाले मध्यप्रदेश में अरहर अथवा तूअर दाल की पैदावार घटने का अनुमान है । राजस्थान में दूूसरे राज्यों के मुकाबले पैदावार बेहतर हुई है, लेकिन स्टॉक लिमिट होने से अस्सी फीसदी नई फसल दूसरे राज्यों को भेजी जा रही हैं।
कीमत वृद्धि रोकने में सरकार नाकाम :
थोक व्यापारी विष्णु नाटाणी का कहना है कि सरकार के स्तर पर दालों की महंगाई को रोकने के लिए उठाए कदम पर्याप्त नहीं है। दालों का आयात भी महंगा पड़ रहा है। राजस्थान में थोक व्यापारियों पर 2,000 क्विंटल की स्टॉक लिमिट से दालें महंगी हुई हैं।
माल की कमी नहीं, फिर भी बढ़ी कीमतें :
खुदरा विक्रेता नितेश अग्रवाल का कहना है कि माल की कमी नहीं, लेकिन थोक में दलहन की लगातार बढ़ती कीमतों से खुदरा में दालें महंगी हो रही है। गुरुवार को ही दालों की कीमत में एक से दो रु. किलो की बढ़ोतरी हुई।
इस साल राहत की उम्मीद कम :
मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान देश में दलहन की पैदावार केंद्रीय कृषि मंत्रालय के वर्ष 2014-15 के चौथे अनुमान के मुताबिक 1.72 करोड़ टन होगी, जो पूर्व वर्ष के मुकाबले 20.5 लाख टन कम होगी। चने का उत्पादन भी पिछले वर्ष के मुकाबले घटकर 71.7 लाख टन रहने का अनुमान है।
दाल मौजूदा भाव बढ़ोतरी :
अरहर-150 -35
उड़द -140 -40
मूंग -110 – 20
चौला – 75 – 10
चना – 70 – 10
‘लाउडस्पीकर से झूठी घोषणा की गोमांस खाने की’ और भीड़ ने हमला कर एक व्यक्ति को मार दिया
दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के दादरी इलाक़े में बीफ़ खाने के शक में एक व्यक्ति की हत्या के मामले में एक चश्मदीद ने कहा है कि इसके लिए मंदिर में पहले घोषणा की गई थी.
पीड़ित के परिजनों के अलावा चश्मदीद के अनुसार.
मारे जाने वाले अख़लाक़ के परिचित पंकज कुमार ने पूरी घटना की जानकारी देते हुए कहा, ”मैंने मंदिर के लाउडस्पीकर से ऐलान करते हुए सुना कि एक घर में कुछ लोग गोमांस खा रहे हैं. मेरा घर मंदिर से सटा हुआ है. लेकिन जब तक मैं बाहर आया मुझे पता चला कि भीड़ ने अख़लाक़ के घर पर हमला कर दिया है.”
उधर अख़लाक़ की मां असग़री का कहना है कि हर तरफ़ से लोग आ रहे थे. कोई सुनने को तैयार नहीं थे |
असग़री का कहना था, ”वो भारी संख्या में थे. हमने उन लोगों से कहा कि हमारे पास बीफ़ नहीं है. फ़्रिज में बकरे का गोश्त रखा है. लेकिन वे सुनने के लिए तैयार नहीं थे. उन्होंने हम लोगों को बाहर निकाला और हम सभी पर हमला कर दिया.”
अख़लाफ़ के चचेरे भाई शहाबुद्दीन ने कहा कि भीड़ में ऐसे कई लोग थे जिन्हें परिवार पहचानता है.
शहाबु्द्दीन कहते हैं, ”उनमें से कई पास में ही रहते हैं. अब हम भला किसी पर कैसे विश्वास करेंगे.”
दादरी इलाक़े में बीफ़ खाने के संदेह में 50 वर्षीय अख़लाक़ अहमद की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई, जबकि उनका बेटा अस्पताल में भर्ती है.
घायल है बेटा
नोएडा पुलिस के प्रवक्ता के मुताबिक़ बिसराड़ा गाँव में ऐसी अफ़वाह फैल गई थी कि कुछ लोग गोमांस खा रहे हैं.
इसके बाद उत्तेजित भीड़ ने अख़लाक़ अहमद के घर पर धावा बोल दिया.
इस हमले में अख़लाक़ अहमद की मौक़े पर ही मौत हो गई, जबकि उनके 22 वर्षीय बेटे को घायल हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
पुलिस ने इस मामले में 10 लोगों के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज किया है. इनमें से छह लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
फंस गया रे बेचारा पेंथर – स्टील के बर्तन में मुंह फंसा ( video )
उदयपुर। राजसमन्द के सार्दुल खेड़ा गांव में पैंथर का मुँह स्टील के मटके में फंस गया । अल सुबह हुई इस घटना की जानकारी जैसे ही लोगों तक पहुँची मोके पर भारी भीड़ जमा हो गई । सुचना के करीब 3 घण्टे देरी से आई पैंथर को बांधकर वन विभाग के ओफ्फिस ले गयी । बाद में पेंथर को ट्रैंगुलाइज कर स्टील के मटके को काट कर पेंथर का मुंह बाहर निकाला। माना जा रहा है की पैंथर पानी पीने आया होगा तभी उसका मुह इस मटके में फंस गया होगा
https://youtu.be/qfE6dyGLsjU
https://youtu.be/5xScH01alls
https://youtu.be/kZEV2qVDQyc
जूते में कैमरा छिपा कर औरतों की तस्वीरें ले रहा था, पकड़ा गया….
दिल्ली पुलिस ने एक 34 वर्षीय वकील को स्कर्ट पहनने वाली महिलाओं की तस्वीरें खींचने और वीडियो बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया है.
पुलिस का आरोप है कि अभियुक्त अपने जूते में लगाए गए कैमरे से महिलाओं की तस्वीरें खींचता था वीडियो बनाता था.
दिल्ली के एक मॉल के एक फ़ैशन स्टोर में जब ये व्यक्ति स्कर्ट पहनने वाली महिलाओं के क़रीब जाकर खड़ा हो रहा था और अपना जूता उनके पास रख रहा था.
उसके ऐसे संदिग्ध व्यवहार को देखकर मैनेजर ने उससे पूछताछ की और जब वह भागने की कोशिश करने लगा तो गार्ड ने उसे पकड़ लिया.
छानबीन पर उसके जूते में लगाया गया कैमरा मिला. पुलिस का कहना है कि उसके पास से दर्जनों ‘अश्लील वीडियो’ बरामद हुए हैं.
इस व्यक्ति के ख़िलाफ़ छेड़खानी और महिलाओं की अश्लील तस्वीरें लेने का मामला दर्ज किया गया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने पुलिस के हवाले से बताया है कि इस व्यक्ति ने दाएँ पैर के जूते में कैमरा फिट किया था और उसे एक विशेष एंगल पर रखकर महिलाओं की तस्वीरें लेता था.
पुलिस का दावा है कि उसे ऐसा करने का आइडिया कुछ वेबसाइटों से मिला. उसका मोबाइल और लैपटॉप ज़ब्त कर लिया गया है.
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या वो व्यक्ति इन तस्वीरों या वीडियो को अपलोड भी करता था. पुलिस के मुताबिक गिरफ़्तार व्यक्ति को ज़मानत मिल गई है.
डेढ़ साल से खूंटी पर लटकी है लाश – मोक्ष के लिए लगा रही है गुहार
रिपोर्ट – मनु राव
उदयपुर । दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी अंचल में गुजरात राज्य से जुडे कोटड़ा के पास आंजणी गांव में करीब डेढ वर्ष से खुंटी पर लटकी लाश अब भगवान से मोक्ष की गुहार कर रही है। कानूनी नियमों का हवाला देेते हुए दोनो राज्यों की पुलिस और सरकारें अपना पल्ला झाडने का प्रयास कर रही है। वहीं यहां की स्वयंभू पंचायतें पांच लाख रूपए की हर्जाना राशी नहीं देने तक शव को उतारने तक में तैयार नहीं है।
दरअसल ये कहानी अजमेरी नाम के उस युवक की है जो डेढ वर्ष पहले अपनी बहन से मिलने राजस्थान के एक गांव में गया था, लेकिन फिर जिन्दा नहीं लौटा। अजमेरी के भाईयों ने जंगलों में से उसकी लाश की तलाश कर उसी के घर में खुंटी पर टांग दी और बहनोई और भाणजों पर हत्या का आरोप मढते हुए पांच लाख नहीं मिलने तक अंतिम संस्कार नहीं करने की चेतावनी दे दी।
गुजरात और राजस्थान प्रदेश के सीमा पर लगा निचली आंजणी कस्बा जहां पर कभी 35 वर्षीय अजमेरी और उसके परिवार की चहल पहल से ये घर आबाद रहता था, लेकिन अब ये आंगनवाडी एक खण्डहर में तब्दील हो गई है। मानवीयता की सारी हदों को तार तार करने वाली इस कहानी के किरदार और कोई नहीं अजमेरी के ही परिजन है। चार भाईयों में सबका चहेता अजमेरी अपनी बहन का भी लाडला हुआ करता था। सभी आपस में मिलजुल कर रहते थे और अपना जीवन यापन करते थे। साल 2013 में अजमेरी के साथ ऐसा वाक्या हुआ कि उसे यह जहां छोडकर जाना पडा। रहस्यमयी तरीके से हुई भाई की मौत का ईल्जाम परिजनों ने उसकी सगी बहन के ससुराल वालों पर डाल दिया और आज तक अजमेरी के शव को पंच तत्वों में विलीन नही किया जा सका। बहन से अपना पीहर छुट गया तो भाईयों के हाथ की कलाई राखी से सुनी हो गई लेकिन रूढीवादी आदिवासी परम्परा ने अपने नियम के आगे भाई बहन के रिश्तों की अहमियत भी नहीं समझी।
यहां सिर्फ रिश्तों का कत्ल नहीं हुआ इस कहानी का दूसरा पहलू जुडा है हमारी खाकी से ! जो अपराधियों में डर और आमजन में विश्वास की बात तो करती है लेकिन यहां पर नतमस्तक हो जाती है। अजमेरी के घर पर लटकी उसकी लाश को दोनो ही राज्यों की खाकी ने देखा पूछताछ भी की लेकिन इस अपाराधिक कृत्य का निवारण करने की बजाय पंचायत के आदेश का इन्तजार कर रही है और अपने क्षेत्र की वारदात नहीं होने का हवाला देते हुए इतिश्री कर रही है।
अजमेरी के शव की खूंटी पर लटकने की बात हवा की तरह दोनों राज्यों में फैल गई है, लेकिन बेबस और लाचार सरकारें मुकदर्शक बन बैठी है। वोटों के जुगाडू नेता और आदिवासी कानूनों से डरती खाकी कैसे भी करके मुद्दे से हटने का प्रयास कर रही है। बडे अधिकारी भी यहां आए जांच की लेकिन मामला दूसरे राज्य का बताकर पूरी घटना से हटने में ही भलाई समझी।
इधर अजमेरी के परिवार के सगे भाईयों को भाई की मौत का शिकन नहीं है, न ही उसके साथ बिताए पलों की कोई याद उनके जहन में जिन्दा है। उन्हें अब चाहिए तो सिर्फ मौताणा जो उनकी सदियों की परम्परा का एक हिस्सा है। अपने भाई की लाश को राजस्थान के जंगलों में से ढूंढकर इन भाईयों ने उसके ही घर की खुंटी पर टांग दिया और आज डेढ वर्ष बाद भी उसका अंतिम संस्कार नहीं करने पर अडे हुए है। इतना ही नहीं पंचो ने भी बहन के परिजनों द्वारा पांच लाख नहीं देने तक शव का क्रियाकर्म नहीं होने देने की चेतावनी दी है।
हमारे पत्रकार जब इस खबर की पड़ताल करने के लिए पहुंचे तो दोनो ही थानों की पुलिस हरकत में आ गई और मानो जैसे इन्हें कानून की सारी किताबें एक बार में ही याद आ गई हों। डेढ वर्ष से दोनो ही राज्यों की खाकी ये काम नहीं कर पाई आज आरोप लगने वाले बुजा गांव में रहने वाले बहन के परिवार को थाने में भी बुला लिया। जहां बहनोई के साथ पंच भी आए और उन्होंने भी सारे आरोपो को निराधार बताया और कहा कि कुछ भी हो जाए पैसा तो हम नहीं देंगे।
किसी ससपेंस मुवी की तरह लगने वाली इस कहानी के किरदार तो कई है जो अपना काम फिल्म की तरह ही निभा रहे है, लेकिन अजमेरी के शव को अब मोक्ष की दरकार है। धरती पर रहने वाले इंसान तो उसका क्रियाक्रम नहीं करना चाहते इसलिए अब उसकी मर चुकी आत्मा भी भगवान से मोक्ष की गुहार कर रही है।






