जूते में कैमरा छिपा कर औरतों की तस्वीरें ले रहा था, पकड़ा गया….

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दिल्ली पुलिस ने एक 34 वर्षीय वकील को स्कर्ट पहनने वाली महिलाओं की तस्वीरें खींचने और वीडियो बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया है.

पुलिस का आरोप है कि अभियुक्त अपने जूते में लगाए गए कैमरे से महिलाओं की तस्वीरें खींचता था वीडियो बनाता था.

दिल्ली के एक मॉल के एक फ़ैशन स्टोर में जब ये व्यक्ति स्कर्ट पहनने वाली महिलाओं के क़रीब जाकर खड़ा हो रहा था और अपना जूता उनके पास रख रहा था.

उसके ऐसे संदिग्ध व्यवहार को देखकर मैनेजर ने उससे पूछताछ की और जब वह भागने की कोशिश करने लगा तो गार्ड ने उसे पकड़ लिया.

छानबीन पर उसके जूते में लगाया गया कैमरा मिला. पुलिस का कहना है कि उसके पास से दर्जनों ‘अश्लील वीडियो’ बरामद हुए हैं.

इस व्यक्ति के ख़िलाफ़ छेड़खानी और महिलाओं की अश्लील तस्वीरें लेने का मामला दर्ज किया गया है.

 

समाचार एजेंसी पीटीआई ने पुलिस के हवाले से बताया है कि इस व्यक्ति ने दाएँ पैर के जूते में कैमरा फिट किया था और उसे एक विशेष एंगल पर रखकर महिलाओं की तस्वीरें लेता था.

पुलिस का दावा है कि उसे ऐसा करने का आइडिया कुछ वेबसाइटों से मिला. उसका मोबाइल और लैपटॉप ज़ब्त कर लिया गया है.

पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या वो व्यक्ति इन तस्वीरों या वीडियो को अपलोड भी करता था. पुलिस के मुताबिक गिरफ़्तार व्यक्ति को ज़मानत मिल गई है.

डेढ़ साल से खूंटी पर लटकी है लाश – मोक्ष के लिए लगा रही है गुहार

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रिपोर्ट – मनु राव
IMG-20150927-WA0021उदयपुर । दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी अंचल में गुजरात राज्य से जुडे कोटड़ा के पास आंजणी गांव में करीब डेढ वर्ष से खुंटी पर लटकी लाश अब भगवान से मोक्ष की गुहार कर रही है। कानूनी नियमों का हवाला देेते हुए दोनो राज्यों की पुलिस और सरकारें अपना पल्ला झाडने का प्रयास कर रही है। वहीं यहां की स्वयंभू पंचायतें पांच लाख रूपए की हर्जाना राशी नहीं देने तक शव को उतारने तक में तैयार नहीं है।
दरअसल ये कहानी अजमेरी नाम के उस युवक की है जो डेढ वर्ष पहले अपनी बहन से मिलने राजस्थान के एक गांव में गया था, लेकिन फिर जिन्दा नहीं लौटा। अजमेरी के भाईयों ने जंगलों में से उसकी लाश की तलाश कर उसी के घर में खुंटी पर टांग दी और बहनोई और भाणजों पर हत्या का आरोप मढते हुए पांच लाख नहीं मिलने तक अंतिम संस्कार नहीं करने की चेतावनी दे दी।
गुजरात और राजस्थान प्रदेश के सीमा पर लगा निचली आंजणी कस्बा जहां पर कभी 35 वर्षीय अजमेरी और उसके परिवार की चहल पहल से ये घर आबाद रहता था, लेकिन अब ये आंगनवाडी एक खण्डहर में तब्दील हो गई है। मानवीयता की सारी हदों को तार तार करने वाली इस कहानी के किरदार और कोई नहीं अजमेरी के ही परिजन है। चार भाईयों में सबका चहेता अजमेरी अपनी बहन का भी लाडला हुआ करता था। सभी आपस में मिलजुल कर रहते थे और अपना जीवन यापन करते थे। साल 2013 में अजमेरी के साथ ऐसा वाक्या हुआ कि उसे यह जहां छोडकर जाना पडा। रहस्यमयी तरीके से हुई भाई की मौत का ईल्जाम परिजनों ने उसकी सगी बहन के ससुराल वालों पर डाल दिया और आज तक अजमेरी के शव को पंच तत्वों में विलीन नही किया जा सका। बहन से अपना पीहर छुट गया तो भाईयों के हाथ की कलाई राखी से सुनी हो गई लेकिन रूढीवादी आदिवासी परम्परा ने अपने नियम के आगे भाई बहन के रिश्तों की अहमियत भी नहीं समझी।

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यहां सिर्फ रिश्तों का कत्ल नहीं हुआ इस कहानी का दूसरा पहलू जुडा है हमारी खाकी से ! जो अपराधियों में डर और आमजन में विश्वास की बात तो करती है लेकिन यहां पर नतमस्तक हो जाती है। अजमेरी के घर पर लटकी उसकी लाश को दोनो ही राज्यों की खाकी ने देखा पूछताछ भी की लेकिन इस अपाराधिक कृत्य का निवारण करने की बजाय पंचायत के आदेश का इन्तजार कर रही है और अपने क्षेत्र की वारदात नहीं होने का हवाला देते हुए इतिश्री कर रही है।
अजमेरी के शव की खूंटी पर लटकने की बात हवा की तरह दोनों राज्यों में फैल गई है, लेकिन बेबस और लाचार सरकारें मुकदर्शक बन बैठी है। वोटों के जुगाडू नेता और आदिवासी कानूनों से डरती खाकी कैसे भी करके मुद्दे से हटने का प्रयास कर रही है। बडे अधिकारी भी यहां आए जांच की लेकिन मामला दूसरे राज्य का बताकर पूरी घटना से हटने में ही भलाई समझी।
इधर अजमेरी के परिवार के सगे भाईयों को भाई की मौत का शिकन नहीं है, न ही उसके साथ बिताए पलों की कोई याद उनके जहन में जिन्दा है। उन्हें अब चाहिए तो सिर्फ मौताणा जो उनकी सदियों की परम्परा का एक हिस्सा है। अपने भाई की लाश को राजस्थान के जंगलों में से ढूंढकर इन भाईयों ने उसके ही घर की खुंटी पर टांग दिया और आज डेढ वर्ष बाद भी उसका अंतिम संस्कार नहीं करने पर अडे हुए है। इतना ही नहीं पंचो ने भी बहन के परिजनों द्वारा पांच लाख नहीं देने तक शव का क्रियाकर्म नहीं होने देने की चेतावनी दी है।

 

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हमारे पत्रकार जब इस खबर की पड़ताल करने के लिए पहुंचे तो दोनो ही थानों की पुलिस हरकत में आ गई और मानो जैसे इन्हें कानून की सारी किताबें एक बार में ही याद आ गई हों। डेढ वर्ष से दोनो ही राज्यों की खाकी ये काम नहीं कर पाई आज आरोप लगने वाले बुजा गांव में रहने वाले बहन के परिवार को थाने में भी बुला लिया। जहां बहनोई के साथ पंच भी आए और उन्होंने भी सारे आरोपो को निराधार बताया और कहा कि कुछ भी हो जाए पैसा तो हम नहीं देंगे।
किसी ससपेंस मुवी की तरह लगने वाली इस कहानी के किरदार तो कई है जो अपना काम फिल्म की तरह ही निभा रहे है, लेकिन अजमेरी के शव को अब मोक्ष की दरकार है। धरती पर रहने वाले इंसान तो उसका क्रियाक्रम नहीं करना चाहते इसलिए अब उसकी मर चुकी आत्मा भी भगवान से मोक्ष की गुहार कर रही है।

आरके मार्बल्स के यहां मिले 24 करोड़ रु. नकद, अघोषित आय 200 करोड़

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20150923071656आरकेमार्बल्ससमूह के पास 200 करोड़ रुपए की अघोषित आय मिली है। कार्रवाई को अपर आयकर निदेशक अन्वेषण रघुवीर सिंह डागुर ने अंजाम दिया। आयकर अधिकारियों ने बताया-समूह के खिलाफ पिछले चार दिन से चार राज्यों के 10 शहरों में 30 ठिकानों पर चल रही कार्रवाई शनिवार को पूरी हो गई। समूह के ठिकानों से 24.17 करोड़ नकद और 24.27 करोड़ रुपए की ज्वैलरी जब्त की गई है। अभी तीन लॉकर्स खोला जाना बाकी है। समूह के मालिकों ने अघोषित आय स्वीकार कर ली है। प्रदेश के 7 शहरों जयपुर, मदनगंज-किशनगढ़, चित्तौड़गढ़, निंबाहेड़ा, राजसमंद, उदयपुर और बांसवाड़ा में कार्रवाई की गई। मुंबई, इंदौर और दिल्ली में भी छापे मारे गए।

सबसेबड़ा सर्च ऑपरेशन

आयकरअधिकारियों के अनुसार आरके मार्बल्स समूह पर की गई कार्रवाई प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी आयकर कार्रवाई रही। इससे पहले इतनी अघोषित आय नहीं मिली।

गीता पटेल के सरस डेयरी चेयरमैन बनने पर लगी रोक

20150922074117उदयपुर | रिश्वतमामले में भ्रष्टाचार निवारण मामलों के विशिष्ट न्यायालय के प्रसंज्ञान लेने के बावजूद राजनीतिक प्रभाव से सरस डेयरी चेयरमैन बनीं डाॅ. गीता पटेल के निर्वाचन पर जयपुर के पंच निर्णायक एवं संस्थागत विकास अधिकारी ने अस्थाई निषेधाज्ञा के आदेश जारी किए हैं।

पूर्व डेयरी चेयरमैन कांग्रेस के जग्गा राम पटेल परिवादी सूरज प्रकाश पुत्र परमानंद मेहता निवासी अदकालिया, सलूंबर देवी लाल पटेल निवासी बाणाकलां, सराड़ा चुनाव प्रक्रिया के दौरान आपत्ति दर्ज कराने डेयरी पहुंचे थे, लेकिन चुनाव अधिकारी ने डेयरी गेट पर आपत्तियां लेने से मना कर दिया था। सूरज प्रकाश देवी लाल ने जयपुर जाकर डाॅ. गीता पटेल के चेयरमैन पद पर निर्वाचन को अवैध बता कर परिवाद दर्ज कराया था। इस पर संस्थागत विकास अधिकारी आरसीडीएफ लिमिटेड जयपुर ने राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001 की धारा 60 (3) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उदयपुर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के 22 सितंबर को हुए निर्वाचन अस्थाई रूप से स्थगित कर दिए।

डेयरी के एमडी उमेश गर्ग को ये आदेश शनिवार दोपहर में मिले। स्टे आदेश की प्रति गीता पटेल के मयूर काम्पलेक्स स्थित निवास पर डेयरी कर्मचारी के हाथों भिजवा दी गई है। डा. पटेल को आदेश दोपहर बाद मिला। जयपुर से संस्थागत विकास अधिकारी कार्यालय का कर्मचारी खुद डाक लेकर पहुंचा था। संस्थागत विकास अधिकारी अजयवीर सिंह ने स्टे आदेश 24 सितंबर को जारी किए थे जबकि डा. गीता पटेल 22 सितंबर को निर्विरोध चेयरमैन निर्वाचित हुई थी।

क्या अदा और क्या जलवे

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उदयपुर. इन दिनों लेकसिटी में मौजूद विश्वविद्यालयों में फे्रशर व फेयरवेल पार्टियों की धूम है। आए दिन हो रहे आयोजन में छात्र-छात्राएं कैट वाक व आकर्षक परिधानों से अपने साथियों का दिल जीत ले रहे हैं। आयोजन में बड़ी संख्या में मौजूद छात्र-छात्राएं भी अपने चहेतों की अदाओं पर मारे जा रहे हैँ। इसी कड़ी में सिंघानिया विश्वविद्यालय की कन्सर्न सेल की ओर से फ्रेशर पार्टी ‘ओरायन्स-2015Ó का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने नृत्य के साथ ही रैंप पर कैटवॉक किया। प्रतियोगिता में विरमदेव देवड़ा को मिस्टर और शिवानी नागर को मिस फ्रेशर चुना गया। संगीत कला अकादमी के कलाकारों के साथ ही विद्यार्थियों ने प्रस्तुतियां दी। फिल्मी गानों से लेकर राष्ट्रभक्ति गीतों की धूम रही। प्रेसीडेंट अशोक घोष ने नए विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी आत्म विश्वास के साथ रोजगारोन्मुखी निर्णय लें।

मक्का में हज के दौरान मची भगदड़ में गुम हुआ “ज़हिर” – मिलने की उम्मीद कायम

zahirउदयपुर. उदयपुर. हज यात्रा के दौरान गुरुवार को मक्का में मची भगदड़ में उदयपुर का जहीर अब्बास (37) खो गया। विमंदित अब्बास का पिछले 24 घंटे से पता नहीं चला है, लेकिन परिजनों को उसके मिलने की उम्मीत बाकी है। हादसे में जहीर के पिता हातिम अली अख्तरी (55)  भी गंभीर चोटिल हो गए। भगदड़ में वे गिर गए और सिर में चोट के बाद वे अचेत हो गए। करीब 36 घंटे के बाद उनको होश आया। वे स्थानीय अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी तीमारदारी के लिए उनकी पत्नी शिरीन बानू मौजूद है। जहीर के चाचा और यहां दिल्ली गेट पर पुलिस कन्ट्रोल रूम के सामने इत्र की दुकान लगाने वाले हिपतुल्ला अख्तरी ने बताया कि परिजन लगातार जहीर को ढूंढने का काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक उसकी कोई सूचना नहीं मिल पाई है। वह बोलने-सुनने और समझने में असमर्थ है। उसके पास कोई पहचान पत्र तक नहीं है। एेसे में वहां मौजूद उसके माता-पिता बेहद परेशान और चिंतित है। उनसे लगातार सम्पर्क में बने हुए हैं और वहां की पुलिस व प्रशासन से मदद ली जा रही है। वाट्स एप और दूसरे माध्यमों से जहीर के फोटो को भेजा जा रहा है, जिससे कि जिसे भी वह मिले, सूचना दी जा सके।

उदयपुर से गए थे परिवार के 5 सदस्य

चमनपुरा में इत्र की दुकान लगाने वाले हातिम अली, पत्नी-पुत्र और रिश्तेदार अब्बास अली व सोफिला बानू के साथ हज की यात्रा के लिए गत 6 सितम्बर को उदयपुर से निकले थे। पूरा परिवार हिम्मत नगर की रजा ट्रेवल्स के जरिए करीब 45 सदस्यों के दल में गया था। दल में उदयपुर के यूथ गुट से जुड़े अन्य सदस्य भी थे।

RK मार्बल के ठिकानों पर आयकर का छापा – महा घूस काण्ड से जुड़ी हो सकती है कार्रवाई।

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उदयपुर । मार्बल और सीमेंट के सबसे बड़े व्यवसाइ मार्बल किंग कहे जाने वाले आर के मार्बल के उदयपुर के पांच ठिकानों सहित देश भर में कुल २९ ठिकानों पर आयकर विभाग ने पुरे जाब्ते के साथ छापा मारा है। मकान, ऑफिस और फैक्ट्रियों में सैकड़ों आयकर अधिकारी कार्रवाई कर रहे है। आयकर की यह कार्रवाई खान विभाग के सचिव अशोक सिंघवी की महा घूस कांड में हुई गिरफ्तारी से भी जोड़ कर देखा जारहा है। सूत्रों की माने तो राज्य के सबसे बड़े रिश्वत काण्ड के खुलासे के बाद आयकर विभाग का यह सबसे बड़ी कार्रवाई है।
मार्बल के किंग कहे जाने वाले आर के मार्बल के देश भर में २९ ठिकानों पर आज सुबह ५.३० बजे एक साथ आयकर अधिकारियों ने छापे की कारवाई शुरू की। उदयपुर में यह कारवाई फतहपुरा स्थित आर के हाउस, वंडर सीमेंट, भुवाणा और बोहरा गणेश जी स्थित ऑफिस में करवाई जारी है। इसके अलावा राजस्थान में राजसमन्द, किशनगढ़, अजमेर और जयपुर में भी सभी ठिकानों पर कारवाई जारी है। बताया जा रहा है कि राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और आंद्रप्रदेश और देहली में फेले आर के मार्बल के हर ऑफिस हर घर और फेक्ट्रियों में छापे की कारवाई जारी है।
सूत्रों की माने तो पिछले दिनों भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा खान विभाग के महा घूस कांड खुलासे में सचिव अशोक सिंघवी और आरके मार्बल्स के सीए के फोन कॉल डिटेल्स के आधार पर ही इनकम टैक्स विभाग ने छापे मारे हैं। इंकमटेक्स के इस छापे को खान विभाग के महा घुस कांड के खुलासे की अगली कड़ी के रूप में भी देखा जारहा है। जानकारी के अनुसार छापे के दौरान कई अनियमितताओं के दस्तावेज बरामद हुए है।
उदयपुर में आर के मार्बल के ठिकानों पर आयकर विभाग के छापे की कारवाई अल सुबह 5.30 बजे शुरू हो गयी थी ३० से अधिक गाड़ियों में जयपुर जोधपुर से आये अधिकारियों ने फतहपुरा, भुवाणा और बोहरा गणेश जी स्थित चार ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। सूत्र बताते है कि किसी को उठने और सम्भलने का मौका भी नहीं दिया जो जिस हाल में था वैसे ही बैठा दिया और कार्रवाई शुरू करदी। जानकारी के अनुसार अगले दो दिनों तक कार्रवाई जारी रहेगी।
सूत्रों की माने तो प्रदेश में किसी एक व्यवसाई के यहां आयकर विभाग की इतनी बड़ी कार्रवाई पहली बार हो रही है।

भ्रष्टाचार की आरोपी को फिर से बनाया डेयरी चेयरमेन

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उदयपुर । भ्रष्टाचार निवारण मामलात के विशेष न्यायालय द्वारा डेयरी चेयरमेन गीता पटेल के पक्ष में एसीबी द्वारा दी गयी खारिज किये जाने और मुकदमा चलाये जाने के आदेश के बाद भी तीसरी बार गीता पटेल सरस डेयरी की चेयरमेन चुन ली गयी। यह भी भाग्य रहा की १२ डायरेक्टर्स में से कोई भी कांग्रेस समर्थक नहीं था इसीलिए किसी ने आपत्ति नहीं कि और बाहर वालों की आपत्ति चुनाव अधिकारी ने मान्य नहीं की।
तीन साल पहले १० हज़ार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकडे जाने के बावजूद मंगलवार को गीता पटेल तीसरी बार सरस डेयरी की चेयरमेन बन गयी। भ्रष्टाचार के मामले में लिप्त गीता पटेल के केस की सोमवार को ही एसीबी ने कोर्ट में दूसरी बार एफआर लगाई थी, लेकिन कोर्ट ने खारिज कर खुद प्रसंगान लेते हुए उनपर मुकदमा चलाये जाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के इस फेसले के बाद माना जारहा था कि मंगलवार को सरस डेयरी के होने वाले चुनाव में भाजपा गीता पटेल को अध्यक्ष पद की दावेदार करने की इजाजत नहीं देगी, क्यूँ कि गीता पटेल को कोर्ट ने जिन धाराओं भ्रनिअ ८ व् ९ के तहत दोषी माना है, उसमे पांच साल की सजा का प्रावधान है। लेकिन सुबह सारे नियम कायदे धरे के धरे रह गए और १२ सदस्यों में गीता पटेल ने ही अध्यक्ष पद के लिए पर्चा भरा और निर्विरोध अध्यक्ष चुन ली गयी।
चुनाव अधिकारी अश्विन वशिष्ठ के अनुसार निदेशक मंडल के १२ सदस्यों में से सिर्फ गीता पटेल ने ही अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया था और सुबह ११.३० बजे तक आपत्तियों का समय था लेकिन १२ सदस्यों में से किसी सदस्य ने भी कोई आपत्ति नहीं की इसलिए गीता पटेल को निर्विरोध अध्यक्ष घोषित किया गया । हालाँकि सरस डेयरी के पूर्व चेयरमेन जग्गाराम पटेल आपत्ति करने के लिए पहुचे थे लेकिन चूँकि वह निदेशक मंडल के १२ सदस्यों में नहीं थे इसलिए उनकी आपत्ति मान्य नहीं हुई।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम २००१ तथा सेक्शन २८ के अनुसार भ्रष्टाचार की पीसी एक्ट ८,व् ९ सहकारी समितियों के चुनावों पर लागू नहीं होती है, इसीलिए गीता पटेल का नामांकन खारिज नहीं किया जा सकता था । गीता पटेल ने चेयरमेन चुने जाने के बाद कहा कि मुझपर अभी आरोप साबित नहीं हुआ है । अगर यहां की कोर्ट मुझे आरोपित करती भी है तो में हाईकोर्ट जाउंगी ।
यह था भ्रस्टाचार का मामला :
एसीबी ने २९ जून २०१२ को संदीप लक्ष्कार से १० हज़ार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में सरस डेयरी की चेयरमेन गीता पटेल को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था । आरोपों के अनुसार पटेल ने आबंटन के एवज में 10 हजार रुपए मांगे थे। संदीप ने इसकी शिकायत एसीबी उदयपुर में की थी। उदयपुर एसीबी टीम ने रिश्वत की मांग टेप कराई गई थी, और संदीप से रिश्वत लेने के आरोप में गीता को एसीबी टीम ने पानेरियों की मादड़ी स्थित मयूर काम्पलेक्स में उनके घर से गिरफ्तार किया था।

कांग्रेस के धुरंधर साबित हुए फिसड्डी :
उदयपुर में जिले में संगठन के इतने धुरंधर कांग्रेसी नेता बैठे है, लेकिन इन्होने ११ डेयरी सदस्यों में एक भी जगह किसी कांग्रेसी को सदस्य के लिए फ़ार्म तक नहीं भरवाया ना ही किसी को सदस्य का नामांकन भरने के लिए प्रेरित किया । कई निचले स्तर के नेताओं ने इस बात पर रोष भी जाहिर किया उनका कहना है, कि प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने पहले ही सभी जिलाध्यक्षों को निर्देशित किया था, कि उनकी जिम्मेदारी है सभी चुनावों में अपने कार्यकर्ताओं को और योग्य उम्मीदवारों को चुनाव लड़वाना । लेकिन पायलट के निर्देशों का कही पालन नहीं हो रहा है । चेयरमेन के पद की दावेदारी तो बहुत दूर की बात है ११ सदस्यों के चुनाव में किसी जगह किसी कांग्रेसी इ नामांकन तक नहीं भरा ।

गुरमीत राम रहीम ने कहा आदिवासी शैतान

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उदयपुर। धार्मिक संस्‍था डेरा सच्‍च सौदा के प्रमुख और खुद को  मैसेंजर ऑफ गॉड  के रूप में बड़े पर्दे पर प्रस्‍तुत करने वाले संत गुरमीत राम रहीम द्वारा इंडिया-टू-डे में  “आदिवासी बने जैंटलमैन”  शीर्षक से प्रकाशित विज्ञापन को लेकर झाड़ोल और कोटड़ा के आदिवासियों मेंं भारी गुस्सा है। संत गुरमीत राम रहीम की फिल्म  “मैंसेजर ऑफ गॉड-2” पर भी बवाल मचा हुआ है। फिल्‍म शुक्रवार को ही रिलीज हुई है। इस फिल्म पर झारखंड में रोक लगा दी गई है। आदिवासी संघर्ष मोर्चा ने पुलिस महानिरीक्षक को सौंपे ज्ञापन में बताया है कि इंडिया-टू-डे और  “मैसेंजर ऑफ गॉड-२” नामक फिल्म में आदिवासियों को इंसान नहीं माना गया है। इंडिया-टू-डे में प्रकाशित विज्ञापन में संत गुरमीत राम रहीम द्वारा बताया गया है कि  वे लोग नग्न रहते थे, शिक्षा व सभ्यता नाम की चीज तो उनमें दूर-दूर तक नहीं थी। हर वक्त मदिरा के नशे में धुत्त रहना, मांस भी कच्चा खा जाना उनकी तहजीब थी। जब दुनिया की संरचना हुई तो ऐसा ही तो था आदिमानव का व्यवहार। परंतु यहां पर जो हम बात कर रहे हैं, वह सदियों पहले पत्थर युग की नहीं महज, चंद वर्ष पहले सन् २००१ के करीब की है। देश के पिछड़े इलाकों में उदयपुर राजस्थान का कोटड़ा और झाड़ोल भी प्रमुख है। यहां पर वर्ष २००१ एक से पहले हफ्ते में एक-दो कत्ल होना आम बात थी।
इस विज्ञापन में आगे बताया गया है कि ऐसे राक्षस रूपी इंसानों को डेरा सच्चा सौदा के मौजूदा गुरु  संत गुरमीत राम रहीमसिंह जी इंसा ने इंसानियत का ऐसा पाठ पढ़ाया कि वे लोग भी तन-मन-धन से इंसानियत को समर्पित हो गए। और इस इलाके के आदिवासी सभ्य समाज का अंग हो गए।ञ्ज आदिवासी संघर्ष मोर्चा ने राष्ट्रपति के नाम भी ज्ञापन भेजकर संत गुरमीत रामरहीम सिंह के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और संत गुरमीत राम रहीम की फिल्म  मैंसेजर ऑफ गॉड-2  के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की है।
:जो उस बाबा ने कहा वो बकवास है। प्रचार और सेवा के नाम पर जमीनों पर कब्जा करना उसका मुख्य काम है।
उसके अलावा भी उसके अवैध काम हो सकते हैं, जिसकी जांच की जानी चाहिए। उसने जो कहा है उसका विरोध करते हैं और कार्रवाई के लिए आंदोलन करेंगे।
-मेघराज तावड़, पूर्व विधायक, गोगुंदा
:जो आदिवासियों को सुधारने की बात करता है, वो आदिवासियों की संस्कृति अपनाकर पहले खुद सुधरे।
उसके बाद आदिवासियों को सुधारने की बात करें। आदिवासियों को लेकर की गई इस टिप्पणी पर कोटड़ा में जाकर आदिवासिायों को एकजुट करके आंदोलन किया जाएगा।
-वेलाराम, अध्यक्ष, भारतीय आदिवासी संघमम
:आदिवासी और आदिमानव में जिसको फर्क ही नहीं पता, वो आदिवासियों को सुधारने की बात कैसे कर सकता है? उसने अपना मान बढ़ाने के लिए आदिवासियों की इज्जत का मखौल उड़ाया है। इस संदर्भ में कार्रवाई नहीं हुई और फिल्म के प्रदर्शन को नहीं रोका गया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
-अरविंद कोटेड़, अध्यक्ष, आदिवासी संघ मोर्चा

‘सखी परियोजना’ ने आदिवासी महिलाओं को सिखाया मोमबत्तियां बनाना

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रोटरी मेवाड़ ने 500 मोमबत्तियां बनाने के लिए दिया 1.50 लाख रु. का ऑर्डर

20150826_140957उदयपुर। राजस्थान का आदिवासी क्षेत्र सदैव अपनी संस्कृति और पारम्परिक कला के लिए जाना जाता है। राजस्थान के उदयपुर जिले से 45 किलोमीटर दूर जावर की आदिवासी महिलाओं को हिन्दुस्तान जिंक ‘सखी परियोजना’ के अंतर्गत सुगन्धित मोमबत्तियां बनाने का कार्य सिखाया जा रहा है। मोमबत्तियां बनाने की प्रक्रिया में सबसे पहले मोम के छोटे-छोटे टुकड़े करना, इण्डक्षन चूल्हे पर वांछित तापमान पर उबलना, मोमबत्ती के आकार के अनुरूप रंग एवं इत्र का प्रयोग करना और अंत में मोमबत्ती धागा रखकर सांचे में गर्म मोम डालने का कार्य इन ग्रामीण एवं आदिवासी महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। ये आदिवासी महिलाएं अपने नये विचारों से मोमबत्तियों में प्राकृतिक रंग के लिए हल्दी एवं करी पत्ती का प्रयोग कर रही है। इन महिलाएं द्वारा सीखने के पश्चात् बिक्री योग्य सुगन्धित मोमबत्तियां बना रही है।

इस कार्यषाला की संचालन षिखा बोम्ब ने बताया कि सबसे पहले 18 आदिवासी महिलाओं को एकत्रित करने में बहुत कठिनाई आयी जो अलग-अलग स्थानों पर दूर-दूर तक रहती है जहां यातायात के साधन भी नहीं है। इस कार्यषाला में उन महिलाओं ने भाग लिया जो मोमबत्तियां बनाने में रूचि रखती है। षिखा ने बताया कि हिन्दुस्तान जिं़क महिलाओं को जावर ‘सखी’ प्रषिक्षण केन्द्र पर आने-जाने के लिए यातायात साधन की व्यवस्था कर उनकी समस्या का समाधान किया।

हिन्दुस्तान ज़िक के हेड-कार्पोरेट कम्यूनिकेषन एवं ‘सखी’ प्रोजेक्ट ने बताया कि ग्रामीण एवं आदिवासी महिलाओं द्वारा बनाई गई मोमबत्तियों की सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही है। 1000 मोमबत्तियां बनाने का पहले ही ऑर्डर मिला चुका है तथा दिपावली के अवसर पर और ऑर्डर मिलने की संभावना है। सबसे पहले लगभग 500 मोमबत्तियां बनाई गयी जिनकी बिक्री भी हो गई है। अब इन महिलाओं को रोटरी मेवाड़ से 1.50 लाख रुपये की 500 मोमबत्तियां खरीदने का ऑर्डर भी मिला है। उन्होंने बताया कि सखी के कई सदस्यों ने छोटी एवं बड़ी मोमबत्तियां खरीदने के लिए सदस्यों से मिल रहे हैं।

रोटरी मेवाड़ के अध्यक्ष हंसराज चौधरी ने ग्रामीण एवं आदिवासी महिलाओं द्वारा बनाई गयी सुगन्धित मोमबत्तियों की प्रषंसा की और 500 मोमबत्तियां खरीदने का ऑर्डर भी दिया। रोटरी मेवाड़ ने हमेषा इस तरह के प्रयासों का समर्थन किया है।

‘सखी’ पुष्पा, संतोष, मधु, अनीता, गायत्री, सुगना एवं कई जो इस परियोजना से जुड़ी हुई है, तथा सुगन्धित मोमबत्तियां बनाने के कार्य से बहुत खुष है तथा सभी कुछ नया करने की इच्छा रखती हैं। महिलाओं ने कहा कि हमारे घरों के लिए भी सुगन्धित मोमबत्तियां बनाने जा रही हैं।

कंपनी अपनी इकाईयों के आस-पास के क्षेत्रों में विषेष रूप से राजस्थान के जिलों में ग्रामीण एवं आदिवासी महिलाओं को सषक्तीकरण के लिए विषेष ध्यान दिया जाता है। हिन्दुस्तान जिं़क अपनी परियोजना ‘सखी’ के तहत मसाले बनाना, फैषनी कपड़े बनाने, घर साज-सज्जा के सामान, यूनीफार्म बनाना, पेपर-क्रॉफ्ट, चटाई बनाना, पापड़ बनाना तथा जूट के सामान बनाने के साथ विभिन्न समूहों को विकसित कर रहा है। परियोजना के माध्यम से उत्पादों की विपणन एवं बिक्री करना भी सुनिष्चित किया है। पवन कौषिक ने बताया कि इन उत्पादों का या तो कंपनी के कर्मचारियों द्वारा उपयोग किया जा रहा है और समुदाय से कन्फर्म ऑर्डर मिल रहे हैं।