Detox with Homoeopathy and add permanent glow in your life – Dr. Kajal Verma

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No other generation before ours has been exposed to as many man-made chemicals and toxic substances as we are. The air we breathe is polluted, the water we drink is not clean, the food we eat is processed, the food for our soul is provided by a sensationalizing media, our life style is sedentary, our body cells lack oxygen, vitamins, minerals and enzymes, our organs of detoxification and excretion are overwhelmed and our body is overloaded with waste products and toxic metabolites.
All what we need is a good technique or program for detox our body, mind and soul.

डॉ. काजल वर्मा

When we talk about doing a detox we are referring to a process of cleaning the blood. How? By removing impurities from the blood in the liver, where toxins are processed for elimination as well as through the kidneys, intestines, lungs, lymph and skin.
There are various detox programs that help the body’s natural cleaning process, such as
1) Resting the organs through fasting; 2)stimulating the liver to drive toxins from the body;
3) promoting elimination through the intestines, kidneys and skin;
4) Improving circulation of the blood; and
5)Refueling the body with healthy nutrients.

Here’s how you can naturally detox your body with these 7 tips:

* Drink Warm Water With Lemon Juice. …

* Swap Caffeinated Drinks With Green Tea. …

* Avoid Packaged Fruit Juices. …

* Purify Your Body With Water. …

* Get Adequate Sleep. …

* Include Probiotics In Your Daily Diet. …

* Drink green tea, Cinnamon Or Fenugreek Tea.

Homoeopathic Approach

The Homeopathic approach believes that the vital force can be disturbed by stress, chronic illness, environmental toxins, poor diet or consumption of chemicals in food or drugs.

Homeopathic remedies reinforce the body’s natural ability to remove toxins and waste by-products, without harmful side effects.
The great thing about Homeopathic support in a detox program is that it not only aids in releasing the toxins into the blood stream thus removing blockage, but also enables the vital force to prepare the body for a return to health. On top of this it allows for the rebuilding and strengthening of the immune system and can be incorporated with other regimens without any conflict.

The most important steps in the homeopathic detox process are as follows:

Hydrate yourself well — drink at least 2-3 litre of filtered water every day during the detox process

Sleep well, perform moderate exercises and minimize stress — they all help in detox

— along with homeopathic remedies few other things like sauna, skin cleansing, and nutritional supplements, such as vitamin C and Zinc facilitates good results.

Remedy Selection for DETOX

How the remedies are selected for detoxing can be broadly divided into constitutional and organ specific.
In constitutional prescribing the whole body is considered, and remedy is selected after complete case taking. This constitutional remedy alone may be all that is required to bring about the body’s innate ability to heal, repair, cleanse and restore. Other times there may be cause to further prescribe specific remedies to target individual organs or supporting systems.

Most professional homeopathy doctor would recommend the kidneys and the liver as a good place to start a detox plan because the two are the key organs that ‘filter’ blood. The liver is the organ where toxins are converted to non-toxic soluble substances and excreted.

Bodily systems involved in flushing out toxins and few examples of remedies which can help

Kidney
A kidney detox is ideal if you have dark circles under your eyes, or painful, urgent or frequent urination.Berberis vul, Hydrangea, Chelidoneum are of good choice.

Liver
A liver detox plan is recommended if you suffer from constipation, poor digestion, fatigue, bad breath, or sore breasts before periods.
Chelidoneum, cardus mar, Nux are few examples.

Lymphatics
A lymphatic detox is advised if you have sore and bulbous tissue, just under the skin, swollen lymph nodes and aching soft tissues.In this
Phytolacca, Fumaria can be very useful.

Bowels
A bowel detox is helpful if you suffer from alternating constipation or diarrhoea, leaky gut syndrome, allergies and food sensitivities, or compromised immune function.Taraxacum
Nux Vom, Aloes can be thought of according to symptom similarity.

Lungs & Sinuses
You will need a lung and sinus detox if you have chronic breathing problems, such as respiratory allergies, asthma and bronchitis, or suffer from chronic cough, or sinusitis.
Spongia, senega and lobelia are of great help for this.

Skin
A skin detox programme is useful if you report of persistent skin allergies, acne (pimples), atopic dermatitis (eczema), hair loss, dry skin and rashes, body odour (BO), excessive, or ‘colliquative,’ sweating.
Berb aqua, saponaria, calendula are few examples which can detox skin.

Pancreas
Phosphorus- to encourage drainage of the pancreas and improve sugar regulation disorders.

Uterus and urinary bladder
Disorders including fibroids, endometriosis, menstrual disorders and infertility, and incontinence – Thalaspi Bursa, uva ursi are few which can help.

General detox especially after over-indulgence in stimulants, rich foods, coffee, cigarettes and alcohol. – Nux vom

With all these adding some local superfoods, yoga will enhance the process more effectively.

उदयपुर शहर में दिन दहाड़े बैखोफ लुटेरों को आतंक – चाक़ू मार कर दस लाख लूटने का प्रयास.

अपराधियों में डर  और आमजन में विशवास का नारा देने वाली पुलिस का डर लगता है अब ख़तम हो गया है। अपराधी बेखोफ़ होकर कभी लूट तो कभी हत्या की वारदातों को अंजाम दे रहे है। इसी कड़ी में  उदयपुर में सोमवार को दिन दहाड़े  बैंक के बहार बदमाशों ने लूट का प्रयास किया। इस प्रयास  के दौरान हमलाकर्मियो ने एक कंपनी में कार्यरत कर्मचारी पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किये। इसपर वह कर्मचारी हिम्मत और साहस का परिचय देते हुए पास ही एक्सिस बैंक की शाखा में घुस गया। इस घटना के दौरान युवक ने नकदी से भरे बैग को नहीं छोड़ा जिससे हमला करने वाले लूट में कामयाब नहीं हो पाए । ऐसे  में लूटेरो के हाथ कुछ नहीं लगा और पब्लिक देख बदमाश मोके से भाग गए। यह घटना उदयपुर के हाथीपोल थानांतर्गत पंचवटी क्षेत्र में एक्सिस बैंक के बहार घटित हुयी।  बताया  जा  रहा  है  की अमित नाम के युवक पैसो  से  भरा  बैग  लेकर   पैसे जमा करवाने आया था। इसपर बदमासो ने लूट की नियत सेबैंक के बाहर ही अमित पर चाकू से हमला कर दिया।उसे चाकू के  घाव लगे और वह बुरी तरह से घायल  हो गया।पास ही स्तिथ एक्सिस बैंक में  गुसने की वजह से वह और रूपया बच  गयाऔर बदमाश मोके से भाग गए। तुरंत हथिपोल थाने  पर सुचना दी गयी। सुचना पाकर हथिपोल थाना पुलिस मोके पर पहुची और तफ्तीश शुरू की। बैंक परिसर में खून फ़ैल गया था।  इसपर युवक को एम् बी हॉस्पिटल भरती करवाया गया।   बताया जा रहा है की बैग में क़रीबन १० लाख रुपये थे।हालाकि  पुलिस ने अभी नकदी के बारे में कोई भी पुष्टि नहीं की। आगे का अनुसन्धान जारी है।

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आखिर एसा क्या हुआ कि इश्किया ने आठवीं मंजिल से कूद कर देदी अपनी जान – पापा मम्मी को क्यूँ कहा सॉरी ?

उदयपुर शहर दो वारदातों से दिन भर चर्चा का विषय बना रहा जिसमे एक युवक पर दिन दहाड़े चाकू बाजी की घटना और दूसरी घटना है सुखेर  थाना क्षेत्र में सोमवार तड़के ईडन कॉम्प्लेक्स की आठवीं मंजिल से छलांग लगाकर एक युवती ने आत्महत्या कर ली। पुलिस को उसके कमरे से एक सुसाइड नोट मिला है।युवती का नाम इश्किया बताया जा रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।पुलिस के अनुसार शहर के ईडन कॉम्प्लेक्स की आठवीं मंजिल से इशकिया ने छलांग लगा कर जान दे दी। युवती के फर्श पर गिरने की जोर की आवाज होने पर लोग वहां आए। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इशकिया घंटाघर थाना क्षेत्र की रहने वाली थी तथा एमएससी कर रही थी। वह पिछले तीन-चार दिन से अपनी मौसी के यहां रहने आई हुई थी। पुलिस को उसके कमरे से 10 तारीख का लिखा सुसाइड नोट मिला है। जिसमें उसने अपने पापा-मम्मी को सॉरी लिखा है।पुलिस के अनुसार इशकिया ने आत्महत्या से पहले किसी को रात को फोन किया था। उसके बाद उसने आत्महत्या कर ली। पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है।

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गौतम को भाई गुलाब की खेती वहीं बाबुलाल मक्का की बुवाई से निहाल

Udaipur. जावर क्षेत्र में 2 हजार से ज्यादा किसान परिवार हिन्दुस्तान जिं़क की समाधान परियोजना से लाभान्वित
हिन्दुस्तान जिंक द्वारा संचालित समाधान परियोजना के तहत बायफ के सहयोग से जावर क्षेत्र में कृषि व पशुधन विकास से जुडे हुऐ 28 गाॅवों मे 2 हजार से अधिक किसान परिवार लाभान्वित हो रहे है। समाधान परियोजना कृषि एवं पशुपालन में आधुनिक तकनीक और प्रणाली के माध्यम से 2250 किसानों और उनके परिवारों की स्थायी आजीविका को सुनिश्चित कर रही है। अपनी दो बेटियों, बेटे और पत्नि के साथ खिलखिलाते गौतम मीणा अपने खेत में गुलाब के फुलों और पौधो के बीच काफी खुश नज़र आ रहे थे। हमारें पूछने पर उन्होंने बताया कि उन्हंे कुछ वर्षो पहले तक गुलाब की खेती की तकनीक के बारें में कोई जानकारी नही थी। वर्ष 2017-18 मंे हिंदुस्तान जिं़क द्वारा बायफ के माध्यम से कृषक भ्रमण करवाया गया जिसमें गौतम मीणा को फूलों की खेती दिखाई गयी । जिसे देखकर उन्होंने पुष्प उत्पादन से खेती करने की सलाह ली और स्वयं के खेत पर गुलाब की खेती करना तय किया। गौतम ने बताया कि उन्हें पुरी जानकारी और प्रशिक्षण देने के साथ ही समाधान परीयोजना अन्तर्गत गुलाब के 1000 पौधे उपलब्ध करा लगवाये गये। पौधे लगाने के 40 से 45 दिन बाद उत्पादन आना शुरु हो गया। जिसे उन्होंने ंजावर माता मन्दिर, जावर माईन्स में बैचना शुरू किया जिससे प्राप्त आमदनी से उन्हें हौंसला मिला। नियमित रूप से गुलाब क बिक्री होने पर उन्हें 400 से 500 रूपये प्रतिदिन की आय हो जाती है। अब तक प्राप्त आय से कोरोना महामारी के समय में भी उन्हें परिवार के पालन पोषण में सहायता मिली है। गौतम के खतों में लगे गुलाब के फुलों के आकर्षण की तरह ही हम बाबुलाल मीणा के खतों में लगे मक्का के हरे भरे खेत से भी प्रभावित हुए और उनसे भी जानना चाहा कि वें किस प्रकार खेती में नवाचार को प्राथमिकता देते है। उन्नत तकनीक से कम खर्च में अधिक उत्पादन के बारे में बताते हुए बाबुलाल ने कहा कि समाधान परियोजना से जुड़ने से पहलें उनी एक बीघा जमीन मे छिड़काव विधि से गेहॅू फसल व मक्का फसल पैदा करता थी। जो कि उत्पादन 2 क्विन्टल मक्का व 3 क्विन्टल गेहॅू फसल उत्पादन होता था। बाजार मुल्य 1500 रु प्रति क्विन्टल मक्का व 2000 रु. प्रति क्विन्टल गेहॅू था जिससे कुल आमदानी एक बीघा से 3000 से 6000 रु होती थी और पशुओं के लिए हरा चारा के रुप मे फसल मिला करती थी। अपने गाॅव नेवातलाई मे हिंन्दुस्तान जिंक जावर माइन्स द्वारा समाधान परियोजना की सामुहिक बैठक के आयोजन पर उन्होंने भी बैठक में भाग लिया जिसमे परियोजना कि जानकारी दी गयी कि खेती मे पुरानी पद्वति से नयी पद्धति कि खेती करने से अधिक आमदनी व लागत भी कम आती है। इस महत्वपूर्ण जानकारी के बाद वें परियोजना से जुड़ गये। पर्यवेक्षक द्वारा मक्का कि फसल की बुवाई विधि व खेती की अन्य तकनीकी का प्रषिक्षण लेने के बाद की गयी खेती से उत्पादन मे 15 से 20 प्रतिषत वृद्धि हुई। इसी दौरान समाधान परीयोजना से जानकारी व सहयोग से बाबुलाल ने सब्जियों की खेती ,फलों की खेती तथा वर्ष 2019-20 में समाधान परीयोजना व पशुपालन विभाग उदयपुर द्वारा मुर्गी पालन हेतु एक युनिट प्राप्त की। यह उनके लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन गया आज वे अपनी बढ़ी हुई आय से खुश है। गौतम और बाबुलाल की तरह ही आस पास के क्षेत्र से किसानो को खेती में बेहतर उत्पादन के लिए नवीनतम तकनीक और उन्नत कृषि से जोडा गया है। इसके साथ ही किसान परिवार पशुपालन में भी नवीन प्रयोगो से अपने जीवन स्तर में बदलाव ला रहे हैं। समाधान परियोजना केे तहत् मुख्य उद्धेश्य रूचि रखनें वालें किसानों का समूह बना कर उन्हें नवीनतम तकनीकी को सीखने और अमल में लाने में सहयोग करना है।
परियोजना में मृदा परिक्षण, कृषि बीज और बागवानी पौधों की गुणवत्ता, पशुओं की नस्लों में सुधार और कृषि तकनीक और प्रौद्योगिकी में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान में 138 किसान समूह हाई-टेक सब्जी की खेती, ड्रिप सिस्टम, मल्चिंग शीट और बुनियादी स्तर पर तकनीकी सहायता के माध्यम से पानी की बचत, कुशल प्रजनन और फसल प्रबंधन तकनीकों के साथ खेती कर रहे है। साथ ही पशुधन विकास के तहत् किसान परिवारों द्वारा अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर लाभ लिया जा रहा है। अतिरिक्त मंच प्रदान करने के उद्धेश्य से रत्रि चैपाल का आयोजन कर तकनीकी विशेषज्ञों और राजकीय अधिकारियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी के लिए आमंत्रित किया जाता है जो आय संवर्धन के लिए ग्रामीण और आदिवासी किसानों के लिए अनुकरणीय पहल है।

आखिर… 17 घंटे बाद ही दोबारा खोलने पड़े झील के चारों गेट

Udaipur Post . बीते रविवार को फतहसागर छलकने को लेकर शहरवासियों का उत्साह चरम पर है और हमेशा से रहा है और कई कई दिन तक बहते झरने को देखने के लिए शहरवासियों के साथ साथ पर्यटकों का भी रेला लगा रहता था परन्तु अभी  कोरोना के कारण न पर्यटक ज्यादा आ रहे  है और न ही स्थानीय लोग भी ज्यादा आ प् रहे है परन्तु फिर भी लोग थोड़ी थोड़ी संख्या में लगातार पहुंच रहे है। लेकिन अगर आप वहां  जाये और झरना  दिखे तो निराशा होना स्वाभाविक है ऐसा ही कुछ बुधवार को हुआ दरअसल फतहसागर के गेट बंद करने से बेखबर कई लोग बुधवार को झरना देखने पहुंचे, लेकिन मायूस हुए। जल संसाधन विभाग ने मंगलवार रात 11 बजे एकाएक गेट बंद कर दिए थे। इसका जम  के विरोध हुआ और जागरूक लाेगाें के विरोध और सवाल उठाने पर विभाग भी  बैकफुट पर आ गया। लाेगाें का कहना था कि फतहसागर के गेट बंद कर मदार तालाब का पानी चिकलवास पिकअप वियर छलकाकर उदयसागर ले जानेे की मंशा है जिसका कोई तुक नहीं है।
यह पानी मदार नहर होकर फतहसागर आएगा ताे निकास बना रहने से झील का पानी साफ होगा और झरने से पर्यटन काे भी फायदा हाेगा। आखिरकार शाम करीब 7 बजे झील के चाराें गेट फिर से खाेलने पड़े।इससे सभी में ख़ुशी का माहौल है और उदयपुर वासियो के मन का सागर यानि की फतेहसागर फिर से छलक पड़ा |

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निजी स्कूलों की फीस वसूली के मामले में स्कूल संचालकों को राहत देकर अंतरिम व्यवस्था

निजी स्कूलों के और अभिभावकों के बीच फीस को लेके जारी खीचतान अब हाई कोर्ट के आदेश से कम हो जाएगी इस फैसले से स्कूल संचालको को राहत दी गयी है। परन्तु अभिभावकों को फोरी तोर पर ही ये राहत महसूस होगी क्युकी हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों की फीस वसूली के मामले में स्कूल संचालकों को राहत देकर अंतरिम व्यवस्था करते हुए ट्यूशन फीसवसूली  की 70 फीसदी राशि को अभिभावकों से तीन  किस्तों में वसूल करने का फैसला सुनाया है।इससे आखिरकार अभिभावकों पर बोझ पड़ेगा ही फिर भी सोमवार को दिए आदेश को स्कूलों ने संतुलित फैसला बताते हुए स्वागत किया।इनका कहना है कि फैसले के साथ शिक्षक, संचालक और उनसे जुड़े परिवारों को ना केवल राहत मिलेगी, बल्कि अभिभावकों के भीतर जीरो सेशन को लेकर चल रहा कंफ्यूजन भी खत्म हो जाएगा।प्राइवेट स्कूल डायरेक्टर्स एंड मैनेजमेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष दिलीप सिंह यादव का कहना है कि इस फैसले से स्कूल ऑनलाइन कक्षा का संचालन करने के साथ ही स्कूल के शिक्षकों के वेतन का भुगतान भी कर सकेंगे। अभिभावक और स्कूल के लिए  यह फैसला सराहनीय है। सीबीएसई कोऑर्डिनेटर और सेंट एंथोनी स्कूल के प्रिंसिपल विलियम डिसूजा ने इसे संतुलित आदेश बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि ऑनलाइन क्लासेज ले रहे शिक्षकों और उनके परिवार के लिए भी यह राहत देने वाला फैसला है। इससे स्कूल खर्चे और वेतन दोनों का भुगतान करने में समर्थ हो सकेगी। बच्चों की शिक्षा और उनके हित मे कार्य करने वाले शिक्षकों की आय, दोनों के हित में यह फैसला हैं। इस आदेश से अभिभावकों पर भी भार नहीं पड़ेगा। साथ ही आदेश ने जीरो सेशन के संशय को खत्म कर दिया। इस आदेश से अभिभावकों को मिलेगी राहत अभिभावक समिति सदस्य प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि निर्णय से संस्था प्रबंधन और अभिभावकों के बीच गतिरोध खत्म होगा। न्यायालय ने किस्तों में ट्यूशन फीस जमा कराने की सुविधा देकर अभिभावकों को राहत दी हैं।

कोर्ट ने जो गाइड लाइन दी है वो इस प्रकार है…….

स्कूल ऑनलाइन कक्षा चला सकते हैं। मार्च से जो भी बकाया फीस है, उसका योग करके 70% तक तीन किस्तों में वसूल किया जा सकेगा। इन किस्तों की अंतिम तारीख 30 सितंबर, 30 नवंबर और 31 जनवरी रहेगी। बाकी फीस का फैसला केस खत्म होने पर किया जाएगा। जिसकी जमा नहीं कराई, उसकी ऑनलाइन कक्षा बंद की जा सकती है, लेकिन स्कूल नाम नहीं काट सकेंगे।

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तीन साल बाद 2020 में अश्विन माह में अधिक मास यानी मलमास लगने जा रहा है

इस बार अश्विन माह में अधिक मास यानी मलमास लगने जा रहा है। जिस कारण श्राद्ध पक्ष के एक माह बाद शारदीय नवरात्र शुरू होंगे। ज्योतिष विद्वानों अनुसार आश्विन मास में अधिक मास लगना और श्राद्ध पक्ष के एक महीने बाद दुर्गा पूजा आरंभ होना ऐसा संयोग दुर्लभ है। वैसे तो पितृ पक्ष समाप्त होने के अगले दिन से ही नवरात्र शुरू हो जाते हैं। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। तीन साल बाद 2020 में अश्विन माह में अधिक मास यानी मलमास लगने जा रहा है। जिस कारण श्राद्ध पक्ष के एक माह बाद शारदीय नवरात्र शुरू होंगे। इस बार शारदीय नवरात्र 17 अक्टूबर से शुरु होकर 25 अक्टूबर तक रहेंगे। इन दिनों माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है। सनातन धर्म का यह एक महत्वपूर्ण पर्व है जिसे देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। अधिक मास लगने के कारण ही इस बार चातुर्मास चार महीने की बजाय पांच महीने का है। ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में किए गए धार्मिक कार्यों का अन्य माह की अपेक्षा 10 गुना अधिक फल मिलता है। अधिक मास 18 सितंबर से लग रहा है और इसकी समाप्ति 16 अक्टूबर को होगी। अधिक मास में शुभ कार्य वर्जित होते हैं । इस कारण लोग इसे मलमास भी कहते हैं। मलमास में विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं करने की मान्यता है। इस महीने को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। भागवत कथा सुनने और प्रवचन सुनने का इस माह में विशेष महत्व माना गया है। कहा जाता है कि इस महीने दान पुण्य करने से मोक्ष के द्वार खुलते हैं। एक सूर्य वर्ष होता है जो 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, जबकि चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। यही अंतर हर तीन साल में एक माह के बराबर हो जाता है। इस अंतर को दूर करने के लिए ही हर तीन साल में एक चंद्र मास अधिक हो जाता है, जिसे अधिक मास का नाम दिया गया है।हिंदू धर्म के लोगों के लिए ये दिन बेहद ही खास माने जाते हैं। पितृ पक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर पितृ नाराज हो जाएं तो इससे घर परिवार के लोगों की तरक्की में बाधाएं उत्पन्न होने लगती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष अश्विन मास के कृष्ण पक्ष से शुरू होता है। इस तिथि के अनुसार पितृ पक्ष इस बार 2 सितंबर से शुरू हुआ है और इसकी समाप्ति 17 सितंबर को होगी।

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निगम की राजस्व समिति प्रस्तावित स्थानों का दाैरा कर तय करेगी जगह

नगर निगम अब उदयपुर शहर को नयी सोगात देने की तैयारी कर रहा है।  शहर में बच्चाें के मनाेरंजन के लिए गेम जाेन विकसित करेगा। गुलाबबाग या गोवर्धन सागर पार्क में यह सुविधा विकसित हाे सकती है। निगम की कमेटी माैका देखकर अंतिम निर्णय लेगी। बच्चाें के मनाेरंजन के लिए एक या दाे जगह छाेटे एम्यूजमेंट पार्क भी तैयार किए जाएंगे।निगम की राजस्व समिति की साेमवार काे बैठक में ये फैसले लिए गए। समिति अध्यक्ष अरविंद जाराेली ने बताया कि गेम जाेन में बच्चाें काे मामूली शुल्क में मनोरंजन के साधन उपलब्ध हाेंगे। पहला प्रयास रहेगा कि गुलाबबाग या गाेवर्धन सागर पार्क में गेम जाेन विकसित किया जाएं।हालांकि कमेटी शहर के अन्य जगहाें का भी दाैरा करेगी, उसके बाद स्थान तय हाेगा। डिप्टी मेयर पारस सिंघवी ने कहा कि यह प्रस्ताव समय रहते आगे भी बढ़ जाए, समिति उस हिसाब से तैयारी करें। बैठक में गणगाैर घाट, मांझी का मंदिर घाट और दीनदयाल उपाध्याय पार्क में फोटोग्राफी के लाइसेंस देने का भी निर्णय लिया गया है। इसके लिए जल्द ही शर्तों को अंतिम रूप दिया जाएगा। जल मंदिर को जनसहयोग से वापस बनाया जाएगा उपयोगी शहर में कई जलमंदिर का रखरखाव नहीं हाेने से लाेगाें काे पीने के पानी की सुविधा नहीं मिलने पर समिति सदस्याें ने चिंता जताई। वहीं तय किया कि सबसे पहले एमबी अस्पताल परिसर और देहलीगेट चाैराहेे पर बने जलमंदिर काे जनसहयाेग से फिर से उपयाेगी बनाया जाएगा।लोकेश कोठारी ने राडाजी चौराहा स्थित जल मंदिर काे सुधरवाने का प्रस्ताव दिया और कहा कि इस पर जाे भी खर्चा आएगा वाे वह वहन करेंगे। डिप्टी मेयर ने राजस्व शाखा में विभिन्न प्रकार के लाइसेंस बनाने और नवीनीकरण काम काे सरल बनाने का सुझाव दिया।

 

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जावर क्षेत्र में ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी तारा और कमला हिंदुस्तार जिंक की सखी परियोजना से जुड़कर परिवार के लिए बनी सबला

जावर क्षेत्र में ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी तारा और कमला
हिंदुस्तार जिं़क की सखी परियोजना से जुड़कर परिवार के लिए बनी सबला

उदयपुर जिले से मात्र 40 किलोमीटर दूर स्थित जावर ग्रामीण क्षेत्र में आता है जहा संचालित हिन्दुस्तान जिं़क की जावर माइंस अपने क्षेत्र के आस पास ग्रामीण विकास कार्यक्रमों से स्थानीय समुदाय को लाभान्वित कर रहा है। समाजिक विकास के कार्यक्रमों के तहत् हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा संचालित की जा रही सखी परियोजना से जुड़कर परिवार का आर्थिक संबंल बनी तारा देवी और कमला मीणा महिला सशक्तिकरण की मिसाल है। हिन्दुस्तान जिंक के सखी अभियान से जुडकर स्वावलम्बी और आत्मनिर्भर बन चुकी सखी महिलायें कोराना महामारी के बीच परिवार की आर्थिक स्थिति में कंधे से कंधा मिला कर सहयोग कर रही है। सिलाईं के प्रशिक्षण के बाद वर्तमान समय में मास्क का उत्पादन हो या स्वरोजगार के लिए स्वयं का किराना या चाय की हाॅटल का व्यवसाय जावर के ग्रामीण क्षेत्र में ये ये महिलाएं कही पिछे नहीं है। इन्हें गर्व है कि वे अपने कौशल के बलबूते पर परिवार की समृद्ध आर्थिक ईकाई के रूप में अलग पहचान बना रही है।

तारा देवी अब आत्मनिर्भर स्वर में आत्मसम्मान के साथ बताती है कि सखी परियोजना से जुड़ने से पहले परिवार की मासिक आय से परिवार के पालन पोषण और बच्चों की पढाई में बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। कई बार पति द्वारा अर्जित की गयी मजदूरी और कर्ज पर निर्भर रहना मजबूरी थी। लेकिन आज वे किसी अन्य पर आश्रित नही है। वर्ष 2016 मंे हिन्दुस्तान जिंक द्वारा मंजरी फाण्डेषन के सहयोग से संचालित सखी परियोजना में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बचत का महत्व समझ आया। समूह से ऋण लेकर घर के समीप ही चाय की दुकान शुरू की। इस स्वरोजगार से ना सिर्फ जल्द ही समूह का ऋण चुकता किया बल्कि अब तो घर की आवश्यकता की वस्तुएं भी खरीदी जा सकी है।
चाय की दुकान के सफल संचालन के साथ उसमें अन्य बिक्री योग्य सामग्री प्रसाद, नारियल अगरबत्ती भी रखना शुरू कर दिया जिससे परिवार की आवश्कता के लिए पर्याप्त आय प्रारंभ होने लगी है। अब तारा देवी गर्व से कहती है कि मैं अपने परिवार की आर्थिक रूप से सबला होने के साथ ही जरूरी मामलों में राय और फैसलों से खुश हूं।

इसी तरह कभी घर से बाहर के कार्यो के प्रति संकोच रखने वाली कमला मीणा हिन्दुस्तान ंिजं़क के सखी समूह से जुड़ने से पूर्व बचत और स्वरोजगार से अनभिज्ञ थी। किसी भी कार्य को करने के लिए स्वंतत्र रूप से निर्णय लेना संभव नही था। समूह से जुड़कर 20 रूपयों से शुरूआत करने वाली कमला मीणा की बचत बढ़ने के बाद उन्होंने समूह से ऋण लेकर स्वयं की कराने की दुकान की शुरूआत की साथ ही सिलाई मशीन भी खरीदी। कमला देवी वर्तमान में उत्साह के साथ अपनी बात साझा करते हुए कहती है कि जिंक के सखी अभियान से जुडकर आज वे सुखी और समृद्ध जीवन जीने के बुंलद हौसंले के साथ परिवार का सहयोग कर रही है।
सखी अभियान ने महिलाओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ा
जावर माइंस क्षेत्र में सखी परियोजना विगत 4 वर्षो से हिन्दुस्तान ज़िंक द्वारा मंजरी फाउण्डेषन के सहयोग से क्रियान्वित की जा रही है। वर्तमान में सखी परियोजना जावर माइंस क्षेत्र के आस पास के 12 ग्राम पंचायत के 26 गाॅवों में संचालित है। जिसमंे कुल 394 स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 5071 ग्रामीण महिलाएॅ सम्मिलित है। जो आज परिपक्व हो कर 30 ग्राम संगठनों से जुड गयी है, फलस्वरूप एक नये स्तर पर इन ग्राम संगठनों को सखी फेडरेषन के रूप में नई पहचान मिली है। अब तक सखी महिलाओं द्वारा 1.35 करोड रूपये की बचत सुनिश्चित हुई है महिलाओं द्वारा ऋण के रूप में 5.19 करोड़ रूपयों का लेनदेन किया जा चुका है जिसका समय पर पुर्नभुगतान इनके आर्थिक अनुशासन का परिचायक है जिसका मूल उद्धेश्य आजीविका सृजन है।
हिन्दुस्तान जिंक ने सखी अभियान से महिलाओं को समाज की मुख्य धारा से जोडने का अनुकरणीय कार्य किया है। हिन्दुस्तान जिंक अपने सामाजिक सरोकार के तहत महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के लिए विगत 14 वर्षों से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं का स्वंय सहायता समूह बनाकर उनक रूचि एवं आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण देकर समाज में अपनी अलग ही पहचान दिलाने का अनुठा प्रयास कर रहा है। फलस्वरूप इस अभियान से जुडी महिलाओं में अदम्य विश्वास मुखरित हुआ है। आज वे आत्मनिर्भर बनकर परिवार की आर्थिक समृद्धि को निरंतर गति दे रही है।

गाँव में संचालित हो रहे मिनी बैंक की शाखा पर प्रश्नचिन्ह

उदयपुर पोस्ट.आप सालो साल अपनी मेहनत की कमाई किसी बैंक में जमा करे,एक अच्छी खासी रकम जमा हो जाने के बाद या मच्योरिटी के समय और अचानक आपको पता चले की न तो यहाँ बैंक है ना हीं वो बैंक मेनेजर साहब के कोई अते पते हैं तो आप क्या करेंगे ?चोक गए न आप लेकिन आजकल छोटे गावो कस्बो ,ढानियों में बैंक की सुविधा के अभाव में मिनी बैंक संचालित हो रहे हैं इन बैंक्स में भोले भले गरीब और मजदूर वर्ग के लोग अपनी म्हणत का पैसा ये सोचकर जमा कर देते है की आगे चलकर उनके या उनके बच्चों के काम आएगा। काया बारापाल और आस पास के गावो के कुछ लोगो के साथ मिनी बैंक के नाम पर धोखा हुआ है यहाँ कई सालो से अरुण मीना नाम के व्यक्ति ने मिनी बैंक संचालित कर लोगो से पैसे लेकर जमा किये हैं परन्तु अब जब ये लोग अपने पैसे वापस मांग रहे हैं तो न तो बैंक खुल रहा है और न ही मेनेजर साहब का कही कोई पता मिल रहा है। पहले तो उन्हें ये आश्वासन भी मिल गया था की बैंक खोल रहे हैं परन्तु बात वही की वही ,उनसे संपर्क करने पर मोबाइल नंबर स्विच ऑफ आता है। अब इन ग्रामवासियों को समझ नहीं आता की ये जाये तो कहा जाये। गोवेर्धन विलास थाने में शिकायत करने पहुचे तो शिकायत दर्ज नहीं की ऐसा ग्रामवासियों का कहना है। थक हार कर इन्होने सीबीसी न्यूज़ को अपनी पीड़ा बताई एवं सोमवार को करीब ३० लोगो ने मिलकर सारे कागज़ और खातो की कॉपी लेकर एस पी कैलाश चन्द्र विश्नोई के सामने अपनी समस्या रख दी है। समस्या को लेकर एस पी कैलाश चन्द्र विश्नोई ने पूर्ण अनुसन्धान के बाद ही कुछ कहने की बात कही। सम्बंधित ठाणे को अग्रिम अनुसन्धान के लिए कहा जायेगा उसके बाद ही पता चलेगा की इन ग्रामीणों को न्याय मिलेगा या इनकी जुटाई हुई पाई पाई इन्हें वापस मिलेगी या नहीं। ये लोग शहरी लोगो की तरह स्मार्ट और टेक्निकली नहीं होते ये नहीं जानते की ऐसे बैंक, किस विभाग या किसके अधीन ये मिनी बैंक संचालित हो रहे है या इनकी प्रमाणिकता क्या है। क्या गारंटी है इनमे जमा करवाए गए पैसो की और अगर उनको ये पैसा नहीं मिला तो वे लोग कहा जायेंगे न्याय के लिए किसका दरवाजा खात्खातेंगे या किसके सामने गुहार लगायेंगे। कोरोना ने वैसे भी सबकी हालत खराब कर रखी है। हर कोई आर्थिक समस्याओ से जूझ रहा है ऐसे में जमापुंजी भी अगर नहीं मिले तो ये गरीब लोग कहा जायेंगे।