भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय खनन और टनल निर्माण में सुरक्षा उत्पादों को उपलब्ध कराने के उद्धेश्य से प्रदेश का पहला प्लांट भीलवाड़ा में स्थापित होगा। बेहतरीन तकनीक और अंर्तराष्ट्रीय पहचान के साथ इस प्लांट को रूनाया मेट्सोर्स और मिनोवा इंटरनेशनल मिल कर शुरू करेगें। इस ज्वाइंट वेंचर से पूरे विश्व में खनन, इंफ्रास्ट्रक्चर और टनल निर्माण में सुरक्षा मानकों में आवश्यक उत्पादों की आपूर्ति करेगा।
एमआरपीएल वर्तमान में राजस्थान के रिको ग्रोथ सेंटर हमीरगढ़ भीलवाड़ा में प्लांट का निर्माण कर रहा है जो रॉक बोल्ट, रेसिन कैप्सूल, इंजेक्शन केमिकल, वायर मेश और उच्च गुणवत्ता वाले वेंटिलेशन सिस्टम सहित उत्पादों का निर्माण करेगा। जनवरी 2021 से इस संयत्र में उत्पादन शुरू होगा जो कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार प्रबंधन में सक्षम होगा। इससे 450 करोड़ रूपयों के राजस्व के साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लगभग 2000 से अधिक रोजगार के अवसर प्रदान करेगा।
रूनाया तेजी से विकसित होने वाला उत्पादक स्टार्ट-अप है जो देश में अग्रणी उपक्रमों के लिए विश्व स्तर पर पहचान रखने वाले उद्योगपतियों संबंध रखते है। वेदांता की अगली पीढ़ी युवा उद्यमियों के नेतृत्व में यह प्रारंभ किया जा रहा है जिन्हें अनुभवी उद्यम दिग्गजों का मार्गदर्शन प्राप्त है। रूनाया द्वारा स्थापित इस संयंत्र में अत्याधुनिक प्रक्रियाओं और तकनीक पर आधारित प्रोजेक्ट शामिल होगें।
मिनोवा ओरीका की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है जो कि 6 बिलियन आस्टेªेलियन डाॅलर के साथ खनन सहायता प्रणाली और एक्सप्लोजिव में विश्व स्तर पर प्रतिनिधित्व करती है।
एमआरपीएल के चैयरमेन एवं रुनाया मेट्ससोर्स के सीईओ नैवेद्य अग्रवाल ने कहा कि ंरूनाया की योजना अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जुडकर मुख्य रूप से तकनीकी सामग्री और निर्माण उत्पादों को उच्च तकनीक के माध्यम से उपलब्ध कराने की है। हमें उम्मीद है कि इससे हम सुरक्षा मानकों और परिचालन दक्षता में बढ़ोतरी और बदलाव लााने में सक्षम होगें।
अग्रवाल ने कहा कि “भीलवाड़ा में इस प्रकार का पहला संयंत्र सरकार के मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के साथ वें उत्पाद और सुविधा उपलब्ध कराएगा जो अब तक आयात किए जाते है।
मिनोवा इंटरनेशनल लिमिटेड के अध्यक्ष, ह्यूग पेलहम, ने कहा, कि “मिनोवा के लिए, यह संयुक्त उद्यम हमारी वैश्विक विकास नीति के निष्पादन में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारा उद्देश्य यह है कि यह संयंत्र न केवल स्थानीय रूप से निर्मित उत्पादों के साथ भारतीय मांग को पूरा करेगा, बल्कि हमें इस नए स्थापित स्थान से अपने प्रमुख उत्पादों को अन्य प्रमुख वैश्विक बाजारों में आपूर्ति करने में सहायता करेगा। हम रूनाया के साथ हमारें अग्रणी उत्पादों की मजबूत मांग को पूरा करने के लिए साझेदारी से खुश है। हमारी विश्व स्तरीय तकनीक से उपलब्ध कराए गये उत्पादन ग्राहकों को संरचनाओं को गिरने से रोकने, स्थिर करने और मरम्मत करने में मदद करेगा।
भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय खनन और टनल निर्माण में सुरक्षा उत्पादों को उपलब्ध कराने के उद्धेश्य से प्रदेश का पहला प्लांट भीलवाड़ा में स्थापित होगा। बेहतरीन तकनीक और अंर्तराष्ट्रीय पहचान के साथ इस प्लांट को रूनाया मेट्सोर्स और मिनोवा इंटरनेशनल मिल कर शुरू करेगें। इस ज्वाइंट वेंचर से पूरे विश्व में खनन, इंफ्रास्ट्रक्चर और टनल निर्माण में सुरक्षा मानकों में आवश्यक उत्पादों की आपूर्ति करेगा।
एमआरपीएल वर्तमान में राजस्थान के रिको ग्रोथ सेंटर हमीरगढ़ भीलवाड़ा में प्लांट का निर्माण कर रहा है जो रॉक बोल्ट, रेसिन कैप्सूल, इंजेक्शन केमिकल, वायर मेश और उच्च गुणवत्ता वाले वेंटिलेशन सिस्टम सहित उत्पादों का निर्माण करेगा। जनवरी 2021 से इस संयत्र में उत्पादन शुरू होगा जो कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार प्रबंधन में सक्षम होगा। इससे 450 करोड़ रूपयों के राजस्व के साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लगभग 2000 से अधिक रोजगार के अवसर प्रदान करेगा। रूनाया तेजी से विकसित होने वाला उत्पादक स्टार्ट-अप है जो देश में अग्रणी उपक्रमों के लिए विश्व स्तर पर पहचान रखने वाले उद्योगपतियों संबंध रखते है। वेदांता की अगली पीढ़ी युवा उद्यमियों के नेतृत्व में यह प्रारंभ किया जा रहा है जिन्हें अनुभवी उद्यम दिग्गजों का मार्गदर्शन प्राप्त है। रूनाया द्वारा स्थापित इस संयंत्र में अत्याधुनिक प्रक्रियाओं और तकनीक पर आधारित प्रोजेक्ट शामिल होगें।
मिनोवा ओरीका की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है जो कि 6 बिलियन आस्टेªेलियन डाॅलर के साथ खनन सहायता प्रणाली और एक्सप्लोजिव में विश्व स्तर पर प्रतिनिधित्व करती है।
एमआरपीएल के चैयरमेन एवं रुनाया मेट्ससोर्स के सीईओ नैवेद्य अग्रवाल ने कहा कि ंरूनाया की योजना अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जुडकर मुख्य रूप से तकनीकी सामग्री और निर्माण उत्पादों को उच्च तकनीक के माध्यम से उपलब्ध कराने की है। हमें उम्मीद है कि इससे हम सुरक्षा मानकों और परिचालन दक्षता में बढ़ोतरी और बदलाव लााने में सक्षम होगें।
अग्रवाल ने कहा कि “भीलवाड़ा में इस प्रकार का पहला संयंत्र सरकार के मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के साथ वें उत्पाद और सुविधा उपलब्ध कराएगा जो अब तक आयात किए जाते है।
मिनोवा इंटरनेशनल लिमिटेड के अध्यक्ष, ह्यूग पेलहम, ने कहा, कि “मिनोवा के लिए, यह संयुक्त उद्यम हमारी वैश्विक विकास नीति के निष्पादन में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारा उद्देश्य यह है कि यह संयंत्र न केवल स्थानीय रूप से निर्मित उत्पादों के साथ भारतीय मांग को पूरा करेगा, बल्कि हमें इस नए स्थापित स्थान से अपने प्रमुख उत्पादों को अन्य प्रमुख वैश्विक बाजारों में आपूर्ति करने में सहायता करेगा। हम रूनाया के साथ हमारें अग्रणी उत्पादों की मजबूत मांग को पूरा करने के लिए साझेदारी से खुश है। हमारी विश्व स्तरीय तकनीक से उपलब्ध कराए गये उत्पादन ग्राहकों को संरचनाओं को गिरने से रोकने, स्थिर करने और मरम्मत करने में मदद करेगा।
महिलाएं, किसान और स्वयं सहायता समूह का 30 गांवों में 7500 से ज्यादा पौधे लगाने का लक्ष्य
वन-महोत्सव को कुछ अलग ढंग से मनाने के लिए हिन्दुस्तान जिं़क की इकाई ज़िंक स्मेल्टर देबारी (र्ैक्) ने आसपास के गांवों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान शुरु किया है। इस अभियान के तहत गांवांं की महिलाएं, किसान और स्वयं सहायता समूह द्वारा 7500 से ज्यादा पौधे लगाने का क्ष्य है।
वनमहोत्सव’ के अंतर्गत देबारी के आसपास 30 गांवों में 5000 से अधिक महिलाओं व 100 से ज्यादा किसानों ने इस अभियान में षिरकत करने और अपने घरों व खेतों के नजदीक कम से कम 1-2 पौधे लगाने का वादा किया है। इस वृक्षारोपण अभियान को विषिष्ट और सतत् बनाने के लिए ज़िंक स्मेल्टर देबारी की सीएसआर टीम-सामाजिक वानिकी विभाग, हनुमान वन विकास समिति और बीएआईएफ के साथ मिलकर पूरे जोषोखरोष से काम कर रही है।
ग्रामीण महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और किसानों से प्रणालीगत प्रतिक्रिया संग्रह के आधार पर विभिन्न प्रकार के पौधे सरकारी विभाग से प्राप्त कर लिए गए हैं। इस अभियान की विषिष्टता इस बात में है कि इस पहल के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं और किसान न सिर्फ अपने वर्तमान फलों के बागों को नया जीवन दे सकेंगे बल्कि अपनी जमीन के उपजाऊपन में भी नए प्राण फूंक पाएंगे, इसके अलावा उनकी परम्परागत फसलों की खेती के लिए भी सहयोग मिलेगा।
इस अभियान के आरंभ पर ज़िंक स्मेल्टर देबारी के पर्यावरण प्रमुख सुश्री साधना वर्मा और श्री दिगम्बर पाटिल एक वृक्षारोपण स्थल पर मौजूद रहे।
जैव विविधता हिन्दुस्तान ज़िंक के लिए हमेषा से एक अहम क्षेत्र रही है। कंपनी की सभी लोकेषनों पर जैव विविधता के विकास एवं बेहतरी के लिए निरंतर प्रयास किए जाते हैं। कंपनी ने हाल ही में विष्व पर्यावरण दिवस मनाया था जिसके तहत कंपनी की सारी लोकेषनों पर वर्चुअल प्लांटेशन ड्राइव आयोजित किया गया। इस दौरान सोषल डिस्टेंसिंग का ख्याल भी रखा गया और पर्यावरण में योगदान के लिए कोई समझौता भी नहीं किया गया।
Zinc and Silver mining major, Hindustan Zinc Ltd, a subsidiary of India’s largest diversified natural resources company Vedanta Ltd, announced the appointment of Anjani K Agarwal, a former senior partner of EY and Akhilesh Joshi, former CEO of HZL as Directors on its Board effective August 1, 2020.
The Udaipur-headquartered HZL is the largest producer of zinc, lead and silver in India and has ambitious growth plans.
Anjani Agrawal retired from EY in June 2019 after a 40 year long professional career, 26 of which were spent as Partner at the global consulting firm. He has worked with the Union Government and NITI Aayog on several policy matters and has been guest faculty at the Indian School of Business and SDA Bocconi.
Said Agrawal on his appointment, “Hindustan Zinc is amongst the most successful value-creation stories post privatization and has made significant progress over the years. I look forward to working with the Board of Directors, Management team and its young talent pool for sustainable development of the business for the benefit of all stakeholders.”
Akhilesh Joshi is a first-class mine manager, who began his career at HZL in 1976 and was appointed as COO and whole-time director in the period between 2008-2012. Further, he took over as the company’s CEO and whole-time director in the period between 2012-2015. He was designated as President of Vedanta’s Global Zinc Business during 2015-2016. He is the recipient of National Mineral Award 2006, by Govt. of India for his outstanding contribution in Mining Technology and Business Today Best CEO Award (Core Sector) 2013.
Said Joshi, “Hindustan Zinc has a great legacy, it has been in the forefront in leveraging best in class technology and innovation. It is my privilege to be part of this great company again and contribute to its growth vision.”
ज़िंक-सीसा और चांदी की भारत की एकमात्र एकीकृत उत्पादक तथा इस कारोबार में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक हिन्दुस्तान ज़िंक ने आज अरुण मिश्रा को कंपनी का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बनाने की घोषणा की, वह नवंबर 2019 से कंपनी के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद संभाल रहे थे, अब बतौर सीईओ उनका कार्यकाल 1 अगस्त 2020 से आरंभ होगा। वह सुनील दुग्गल का स्थान ले रहे हैं जो कि अब ग्रुप कंपनी वेदांता लिमिटेड के सीईओ का पदभार संभाल रहे हैं। बतौर सीईओ अपनी नई भूमिका में श्री मिश्रा व्यापारिक परिचालन की रणनीति बनाने और कंपनी के विस्तार में अहम भूमिका निभाएंगे।
इस अवसर पर वेदांता के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सुनील दुग्गल ने कहा, ’’इस नई भूमिका में अरुण का स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुषी है। उनके शानदार लीडरषिप ट्रैक रिकाॅर्ड, गहरी रणनीतिक विषेषज्ञता और परिवर्तन को मुमकिन बनाने के उनके अनुभव को देखते हुए मैं कह सकता हूं कि वृद्धि की अगली अवस्था में कंपनी के नेतृत्व हेतु वह बिल्कुल तैयार हैं।’’
अपनी नियुक्ति पर हिन्दुस्तान ज़िंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा, ’’हमारी कंपनी की विरासत शानदार है, इतने वर्षों के दौरान टीम के प्रत्येक सदस्य ने इसका निर्माण किया है। यह मेरे लिए गौरव की बात है कि मैं एक बेहतरीन काॅर्पोरेट लीडर का स्थान ले रहा हूं जिन्होंने कंपनी का मार्गदर्षन करते हुए उसे इस मुकाम तक पहुंचाया। उसी नज़रिए को आगे बढ़ाने के लिए मैं काम करुंगा।’’
श्री मिश्रा को 31 वर्षों का अनुभव है और अपने कॅरिअर में उन्होंने कई अहम दायित्व संभाले हैं। हिन्दुस्तान ज़िंक में आने से पहले टाटा स्टील में वाईस प्रेसिडेंट-राॅ मैटेरियल्स के पद पर काम कर चुके हैं। वह इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ मिनरल इंजीनियर्स के वाइस प्रेसिडेंट भी हैं तथा राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित कई पत्रिकाओं में उनके कई लेख प्रकाषित हो चुके हैं।
श्री मिश्रा ने आईआईटी-खड़गपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की, फिर न्यू साउथ वेल्स सिडनी से माइनिंग व बेनिफिसिएशन में डिप्लोमा लिया तथा सीईडीईपी, फ्रांस से जनरल मैनेजमेंट में डिप्लोमा भी हासिल किया।
हिन्दुस्तान ज़िंक लिमिटेड के बारे में
वेदांता ग्रुप की कंपनी हिन्दुस्तान ज़िंक भारत की एकमात्र ज़िंक-लैड व सिल्वर उत्पादक कंपनी है, इसका शुमार इस सैगमेंट की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में होता है। कंपनी का मुख्यालय उदयपुर, राजस्थान में है, यहां इनकी ज़िंक-लैड खदानें और स्मैल्टिंग काॅम्पलेक्स हैं। कैप्टिव थर्मल पावर प्लांट के साथ हिन्दुस्तान ज़िंक पावर के मामले में आत्मनिर्भर है। इस कपंनी ने पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित करके हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी कदम रख दिया है। डाउ जोन्स सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स 2019 में खनन व धातु कंपनियों की सूची में हिन्दुस्तान ज़िंक को एषिया-प्रषांत क्षेत्र में पहला स्थान तथा विष्व स्तर पर 5वां स्थान दिया गया है। हिन्दुस्तान ज़िंक एक प्रमाणित वाटर पाॅज़िटिव कंपनी है।
सामाजिक रूप से जिम्मेदार एक काॅर्पोरेट समूह के तौर पर हिन्दुस्तान ज़िंक अपने कारोबारी स्थलों के आसपास बसे ग्रामीण व आदिवासी लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए निरंतर काम करती है। काॅर्पोरेट सामाजिक दायित्व हेतु पैसा खर्च करने वाली भारत की शीर्ष 15 कंपनियों में हिन्दुस्तान ज़िंक का शुमार होता है। यह कंपनी राजस्थान के 184 गांवों एवं उत्तराखंड के 5 गांवों में 5,00,000 लोगों तक पहुंच कर उनके कल्याण हेतु काम कर रही है। हिन्दुस्तान ज़िंक मार्केट लीडर है; भारत में ज़िंक बाजार का 79 प्रतिषत तथा सिल्वर बाजार का 95 प्रतिषत हिस्सा इसी के पास है, गौरतलब है कि ये दोनों ही बाजार लगातार बढ़ रहे हैं।
हिन्दुस्तान जिंक अपने संयंत्र के आसपास सामाजिक उत्तरदायित्व के कार्य प्रभावी रूप से करता रहा है। इसी क्रम में देबारी स्मेल्टर के आस-पास के समुदाय के कल्याण एवं षिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मेड़ता गांव के उच्च माध्यमिक विद्यालय में निर्मित कक्षा-कक्ष का उद्घाटन सासंद सीपी जोषी एवं मावली विधायक धर्मनारायण जोषी द्वारा किया गया। इस अवसर पर सरपंच खेमसिंह देवड़ा, विद्यालय प्रधानाचार्य नारायणलाल जोशी उपस्थित थे। इस विद्यालय में हिन्दुस्तान जिं़क के षिक्षा संबल कार्यक्रम के तहत् कक्षा 9 से 12वी तक के विद्यार्थियों को अतिरिक्त विषय अध्यापक एवं षिक्षण सामग्री भी उपलब्ध काराई जा रही है। हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी, आजीविका, महिला सशक्तीकरण हेतु विभिन्न परियोजनाओं में कार्य कर लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान जिंक स्मेल्टर देबारी की सीएसआर टीम उपस्थित थी। हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा पिछले वर्ष मेड़ता में आरओ प्लांट स्थापित किया गया जिससे 700 से अधिक ग्रामीण लाभान्वित हो रहे हंै।
4 विद्यार्थियों ने गणित में पूरे 100 अंक प्राप्त किए 100 डिसटिंक्षन हासिल कींः 19 हिंदी में, 25 अंग्रेज़ी में, 13 फिज़िक्स में, 21 कैमिस्ट्री में और 22 गणित में 9 विद्यार्थियों ने सभी 5 विषयों में डिसटिंक्षन प्राप्त की 4 विद्यार्थियों ने कुल 90 प्रतिषत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं
अब भी ये विद्यार्थी हिन्दुस्तान ज़िंक की ’’ऊंची उड़ान’’ प्रोजेक्ट के तहत आईआईटी-जेईई के लिए कोचिंग में तैयारी कर रहे हैं
वेदांता ग्रुप की कंपनी हिन्दुस्तान ज़िंक ने वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए शुरु की गए ’ऊंची उड़ान’ प्रोजेक्ट के दूसरे समूह के बच्चों ने 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 100 प्रतिषत परिणाम दर्ज किया है तथा उन्होंने हिंदी, अंग्रेज़ी, फिज़िक्स, कैमिस्ट्री व गणित विषयों में कुल 100 डिस्टिंक्षन हासिल की हैं। राजस्थान के सुदूर ग्रामीण इलाकों से आने वाले इन प्रतिभावान विद्यार्थियों का लक्ष्य अब आईआईटी- जेईई की परीक्षा उत्तीर्ण करना है, जिसके लिए ये विद्यार्थी हिन्दुस्तान ज़िंक के सहयोग से उदयपुर जिले में कोचिंग प्राप्त कर रहे हैं।
विद्यार्थियों को बधाई देते हुए हिन्दुस्तान ज़िंक के डिप्टी सीईओ श्री अरुण मिश्रा ने कहा, ’’इन विद्यार्थियों की सफलता हमेषा बहुत खास रही है क्योंकि इन्होंने हर विपरीत स्थिति से मुकाबला करते हुए शानदार प्रदर्षन किया है। इनकी कामयाबी हमारे इस विष्वास को पुख्ता करती है कि उत्तम षिक्षा तक पहुंच सुनिष्चित करके ग्रामीण भारत में बदलाव लाए जा सकते हैं। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए मैं इन विद्यार्थियों को बधाई देता हूं और समाज के लोगों को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने हमारे कार्यक्रमों को निरंतर समर्थन दिया। मैं षिक्षकों का भी शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जो इन विद्यार्थियों को प्रषिक्षित करने में बहुत ही बढ़िया काम कर रहे हैं ताकि वे भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक आईआईटी-जेईई में उत्तीण हो सकें। ये सम्माननीय षिक्षणगण इन बच्चों के सपनों व उनके लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।’’
हिन्दुस्तान जिं़क का ’ऊंची उड़ान’ एक शैक्षणिक उत्कृष्टता कार्यक्रम है जिसका लक्ष्य है कंपनी के परिचालन क्षेत्र में आने वाले सरकारी स्कूलों के प्रतिभावान विद्यार्थियों की पहचान करना और उन्हें आईआईटी व अन्य प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेष हेतु संरक्षण देना। कंपनी हर वर्ष ग्रामीण इलाकों से कड़ी चयन प्रक्रिया द्वारा 25-30 विद्यार्थियों का चयन करती है। यह चयन राजस्थान के 6 जिलों-उदयपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद व अजमेर तथा उत्तराखंड के पंतनगर से किया जाता है। इन बच्चों को आईआईटी और अन्य प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग काॅलेजों में प्रवेष पाने के लिए निषुल्क कोचिंग दी जाती है। वर्तमान में इस प्रोजेक्ट में कक्षा 9 से 12 के 123 बच्चे (समूह 2 से समूह 5) शामिल हैं। हर साल एक समूह जेईई परीक्षा में बैठता है। 9वीं कक्षा से ही बच्चों की शुरुआत करा देने पर उन्हें कड़े प्रषिक्षण के लिए चार वर्ष मिल जाते हैं।
इस प्रोजेक्ट के तहत विद्यार्थियों के चयनित समूह को रिहाइषी और गैर-रिहाइषी स्कूलिंग व कोचिंग सपोर्ट दिया जाता है। कंपनी रेसोनेंस ऐजुवेंचर्स प्रा.लि. और विद्या भवन, उदयपुर के सहयोग से यह कार्य कर रही है। रेजोनेंस ऐजुवेंचर्स प्रा.लि. इन विद्यार्थियों को आईआईटी प्रवेष परीक्षा के लिए कोचिंग देती है और विद्या भवन द्वारा स्कूलिंग, बोर्डिंग व लाॅजिंग सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
हिन्दुस्तान ज़िंक लिमिटेड के बारे में
वेदांता ग्रुप की कंपनी हिन्दुस्तान ज़िंक भारत की एकमात्र जस्ता-सीसा एवं चांदी उत्पादक कंपनी है, इसका शुमार इस सैगमेंट की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में होता है। कंपनी का मुख्यालय उदयपुर, राजस्थान में है, यहां इनकी ज़िंक-लैड खदानें और स्मैल्टिंग काॅम्पलेक्स हैं। कैप्टिव थर्मल पावर प्लांट के साथ हिन्दुस्तान ज़िंक पावर के मामले में आत्मनिर्भर है। इस कपंनी ने पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित करके हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी कदम रख दिया है। डाउ जोन्स सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स 2019 में खनन व धातु कंपनियों की सूची में हिन्दुस्तान ज़िंक को एषिया-प्रषांत क्षेत्र में पहला स्थान तथा विष्व स्तर पर 5वां स्थान दिया गया है। हिन्दुस्तान ज़िंक एक प्रमाणित वाटर पाॅज़िटिव कंपनी है।
सामाजिक रूप से जिम्मेदार एक काॅर्पोरेट समूह के तौर पर हिन्दुस्तान ज़िंक अपने कारोबारी स्थलों के आसपास बसे ग्रामीण व आदिवासी लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए निरंतर काम करती है। काॅर्पोरेट सामाजिक दायित्व हेतु पैसा खर्च करने वाली भारत की शीर्ष 15 कंपनियों में हिन्दुस्तान ज़िंक का शुमार होता है। यह कंपनी राजस्थान के 184 गांवों एवं उत्तराखंड के 5 गांवों में 5,00,000 लोगों तक पहुंच कर उनके कल्याण हेतु काम कर रही है। हिन्दुस्तान ज़िंक मार्केट लीडर है; भारत में ज़िंक बाजार का 79 प्रतिषत तथा सिल्वर बाजार का 95 प्रतिषत हिस्सा इसी के पास है, गौरतलब है कि ये दोनों ही बाजार लगातार बढ़ रहे हैं।
सवाल उठ रहा है कि (Rajasthan)राजस्थान के रण में अशोक गहलोत के किले पर हमला हुआ था या शतरंज की गोटियां उन्होंने खुद सजाई थीं?
POST – रविवार को राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ( D CM Sachin Pilot ) के खेमे से खबर आई कि करीब 30 विधायक उनके साथ हैं और अशोक गहलोत ( Ashok Gahlot ) सरकार अल्पमत में है. इसके अगले ही दिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायकों के साथ विक्ट्री साइन दिखा दिया. गहलोत के मीडिया एडवाइजर ने न्यूज एजेंसी एएनआई ( ANI ) को बताया कि जयपुर में सोमवार को मुख्यमंत्री के आवास पर हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में 107 विधायक शामिल हुए. बता दें कि 200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 101 का है.
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि (Rajasthan)राजस्थान के रण में अशोक गहलोत के किले पर हमला हुआ था या शतरंज की गोटियां उन्होंने खुद सजाई थीं?
गजेंद्र सिंह शेखावत,( Gajendra Singh Shekhawat ) बीजेपी नेता कहते है
’राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी फिल्म के एक्टर, विलेन और स्क्रिप्ट राइटर हैं‘’
बीजेपी के नेता ये बात कह रहे हैं तो इसकी एक वजह ये हो सकती है कि दरअसल गहलोत राज्यसभा चुनाव के बाद से ही पूरी तरह सचेत थे. इससे पहले भीतर और बाहर के विरोधी हमला बोलते उन्होंने एक्शन ले लिया था. उसका असर अब देखिए, एक तो उनके साथ बहुमत लायक विधायक दिख रहे हैं, दूसरा केंद्रीय नेतृत्व ने पायलट को दो टूक कह दिया है कि घर न तोड़िए, नाराजगी है तो बात कीजिए.
इस मामले पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सोमवार को कहा
कभी-कभी वैचारिक मतभेद पैदा हो जाता है, जो प्रजातांत्रित प्रणाली में स्वाभाविक है. मगर वैचारिक मतभेद पैदा होने से चुनी हुई अपनी ही पार्टी की सरकार को कमजोर करना या बीजेपी को खरीद-फरोख्त का मौका देना अनुचित है.
बगावत रोकने के लिए गहलोत के ‘एक तीर से दो निशाने’
राजस्थान में मौजूदा सियासी उठापठक के तार काफी हद तक जून में हुए राज्यसभा चुनाव से जुड़े हुए हैं. तीन सीटों पर हुए इस चुनाव से पहले कांग्रेस ने कुछ विधायकों को प्रलोभन दिए जाने का आरोप लगाया था. पार्टी की तरफ से इसकी शिकायत राजस्थान पुलिस के विशेष कार्यबल (एसओजी) से की गई थी. उस वक्त मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि राज्य में विधायकों को प्रलोभन दिया जा रहा है और करोड़ों रुपये की नकदी जयपुर स्थानांतरित हो रही है.
उस वक्त तमाम अटकलों के बीच गहलोत के सामने विधायकों को टूटने से बचाने और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती थी. ऐसे में एसओजी से शिकायत के साथ ही विधायकों को होटल में शिफ्ट कर दिया गया. गहलोत को इस चुनाव में सफलता भी मिली, जब कांग्रेस 3 में से 2 सीटें जीतने में कामयाब हो गई.
इसके बाद हाल ही में राजस्थान में सियासी हलचल तब अचानक तेज हो गई, जब एसओजी ने राज्य में विधायकों की खरीद फरोख्त और निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने के आरोपों में शुक्रवार को एक मामला दर्ज किया. बताया जा रहा है कि एसओजी ने दो मोबाइल नंबरों की निगरानी से सामने आई जानकारी के आधार पर यह मामला दर्ज किया था.
अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, यह मामला आईपीसी की धारा 124 ए (राजद्रोह) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज किया गया.
एसओजी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और चीफ व्हिप को इस मामले में बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजकर उनका समय मांगा था.
इस बीच मीडिया में सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट्स सामने आईं कि एसओजी के लेटर ने पायलट को नाखुश कर दिया और इसे उन्होंने अपमान के तौर पर देखा.
यहीं से सरकार की स्थिरता को लेकर गहलोत की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गईं. ऐसे में गहलोत ने इस मामले पर रविवार को ट्वीट कर कहा, ”एसओजी को जो कांग्रेस विधायक दल ने बीजेपी नेताओं द्वारा खरीद-फरोख्त की शिकायत की थी उस संदर्भ में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, चीफ व्हिप, अन्य कुछ मंत्री और विधायकों को सामान्य बयान देने के लिए नोटिस आए हैं. कुछ मीडिया द्वारा उसको अलग ढंग से प्रस्तुत करना उचित नहीं है.”
हालांकि, गहलोत का भी बयान दर्ज करने के लिए उन्हें नोटिस जारी किए जाने के बारे में कई मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि मुख्यमंत्री को नोटिस सिर्फ एक ‘‘छलावा’’ है, ताकि उपमुख्यमंत्री को एसओजी द्वारा तलब और अपमानित किया जा सके.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एक वरिष्ठ हाई कमान नेता ने कहा, ‘’गहलोत ने एक पत्थर से दो से तीन पक्षियों को मारने की कोशिश की. उस में, वह बहुत थोड़े से आगे चले गए. उन्होंने बीजेपी को यह कहते हुए किनारे कर दिया कि आप पार्टी तोड़ने वाले हैं… लेकिन एक जांच भी आगे कर दी…राजद्रोह लगाते हुए, वह यह समझे बिना ही काफी दूर चले गए कि पायलट प्रतिक्रिया देंगे. गहलोत ने जो अनुमान लगाया होगा उसकी तुलना में पायलट ने काफी मजबूती से प्रतिक्रिया दी है.’’
शनिवार तक गहलोत तेज हुई सियासी हलचल के बीच काफी मजबूत दिख रहे थे. उन्होंने बीजेपी को किनारे करने की अपनी रणनीति भी बरकरार रखी.
गहलोत ने शनिवार को बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा था,‘‘कोरोना वायरस संक्रमण के वक्त में बीजेपी के नेताओं ने मानवता और इंसानियत को ताक पर रख दिया है… ये लोग सरकार गिराने में लगे हैं. ये लोग सरकार कैसे गिरे, किस प्रकार से तोड़-फोड़ करें … खरीद फरोख्त कैसे करें … इन तमाम काम में लगे हैं.’’
उधर, गहलोत सरकार को अस्थिर करने की कोशिशों के तहत विधायकों को प्रलोभन दिए जाने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने शनिवार को ही तीन निर्दलीय विधायकों के खिलाफ प्राथमिक जांच (पीई) भी दर्ज की. इस तरह गहलोत सरकार बगावत को टालने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ ही रही थी, मगर पायलट की नाखुशी ने पूरे मामले की दिशा ही बदलकर रख दी. हालांकि, माना जा रहा है कि पायलट की नाखुशी से पैदा हुए सियासी संकट के बाद गहलोत का कद और मजबूत हुआ है.
बीजेपी बोली- पूरा मामला कांग्रेस के भीतर कलह का, हम तो बस दर्शक
राजस्थान की कांग्रेस सरकार को अस्थिर किए जाने की कोशिश के आरोपों पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने शनिवार को कहा था, ‘‘यह कांग्रेस की अंतरकलह है, आंतरिक झगड़ा है. हम तो कांग्रेस के इस खेल में दर्शकभर हैं.’’
इसके अलावा उन्होंने कहा था,‘‘पिछले पौने दो साल में सरकार की विफलता को, कोरोना प्रबंधन में विफलता को ढकने के लिए यह सारा खेल रचा गया है राज्यसभा चुनाव से लेकर अब तक.’’
वहीं उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के विधायकों और बाकी जनप्रतिनिधियों के फोन टैप करवा रही है.
गहलोत के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, ”राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी फिल्म के एक्टर, विलेन और स्क्रिप्ट राइटर हैं. वह अपनी पार्टी के (प्रदेश) अध्यक्ष को किनारे करने के लिए बीजेपी के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हैं. मैं मांग करता हूं कि वह इस बात को सार्वजनिक करें कि उनके हिसाब से, कितने कांग्रेस विधायक बिकने के लिए तैयार हैं.”
– 4 विद्यार्थियों ने गणित में पूरे 100 अंक प्राप्त किए – 100 डिसटिंक्षन हासिल कींः 19 हिंदी में, 25 अंग्रेज़ी में, 13 फिज़िक्स में, 21 कैमिस्ट्री में और 22 गणित में – 9 विद्यार्थियों ने सभी 5 विषयों में डिसटिंक्षन प्राप्त की – 4 विद्यार्थियों ने कुल 90 प्रतिषत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं – अब भी ये विद्यार्थी हिन्दुस्तान ज़िंक की ’’ऊंची उड़ान’’ प्रोजेक्ट के तहत आईआईटी-जेईई के लिए कोचिंग में तैयारी कर रहे हैं
वेदांता ग्रुप की कंपनी हिन्दुस्तान ज़िंक ने वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए शुरु की गए ’ऊंची उड़ान’ प्रोजेक्ट के दूसरे समूह के बच्चों ने 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 100 प्रतिषत परिणाम दर्ज किया है तथा उन्होंने हिंदी, अंग्रेज़ी, फिज़िक्स, कैमिस्ट्री व गणित विषयों में कुल 100 डिस्टिंक्षन हासिल की हैं। राजस्थान के सुदूर ग्रामीण इलाकों से आने वाले इन प्रतिभावान विद्यार्थियों का लक्ष्य अब आईआईटी- जेईई की परीक्षा उत्तीर्ण करना है, जिसके लिए ये विद्यार्थी हिन्दुस्तान ज़िंक के सहयोग से उदयपुर जिले में कोचिंग प्राप्त कर रहे हैं।
विद्यार्थियों को बधाई देते हुए हिन्दुस्तान ज़िंक के डिप्टी सीईओ श्री अरुण मिश्रा ने कहा, ’’इन विद्यार्थियों की सफलता हमेषा बहुत खास रही है क्योंकि इन्होंने हर विपरीत स्थिति से मुकाबला करते हुए शानदार प्रदर्षन किया है। इनकी कामयाबी हमारे इस विष्वास को पुख्ता करती है कि उत्तम षिक्षा तक पहुंच सुनिष्चित करके ग्रामीण भारत में बदलाव लाए जा सकते हैं। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए मैं इन विद्यार्थियों को बधाई देता हूं और समाज के लोगों को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने हमारे कार्यक्रमों को निरंतर समर्थन दिया। मैं षिक्षकों का भी शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जो इन विद्यार्थियों को प्रषिक्षित करने में बहुत ही बढ़िया काम कर रहे हैं ताकि वे भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक आईआईटी-जेईई में उत्तीण हो सकें। ये सम्माननीय षिक्षणगण इन बच्चों के सपनों व उनके लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।’’
हिन्दुस्तान जिं़क का ’ऊंची उड़ान’ एक शैक्षणिक उत्कृष्टता कार्यक्रम है जिसका लक्ष्य है कंपनी के परिचालन क्षेत्र में आने वाले सरकारी स्कूलों के प्रतिभावान विद्यार्थियों की पहचान करना और उन्हें आईआईटी व अन्य प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेष हेतु संरक्षण देना। कंपनी हर वर्ष ग्रामीण इलाकों से कड़ी चयन प्रक्रिया द्वारा 25-30 विद्यार्थियों का चयन करती है। यह चयन राजस्थान के 6 जिलों-उदयपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद व अजमेर तथा उत्तराखंड के पंतनगर से किया जाता है। इन बच्चों को आईआईटी और अन्य प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग काॅलेजों में प्रवेष पाने के लिए निषुल्क कोचिंग दी जाती है। वर्तमान में इस प्रोजेक्ट में कक्षा 9 से 12 के 123 बच्चे (समूह 2 से समूह 5) शामिल हैं। हर साल एक समूह जेईई परीक्षा में बैठता है। 9वीं कक्षा से ही बच्चों की शुरुआत करा देने पर उन्हें कड़े प्रषिक्षण के लिए चार वर्ष मिल जाते हैं।
इस प्रोजेक्ट के तहत विद्यार्थियों के चयनित समूह को रिहाइषी और गैर-रिहाइषी स्कूलिंग व कोचिंग सपोर्ट दिया जाता है। कंपनी रेसोनेंस ऐजुवेंचर्स प्रा.लि. और विद्या भवन, उदयपुर के सहयोग से यह कार्य कर रही है। रेजोनेंस ऐजुवेंचर्स प्रा.लि. इन विद्यार्थियों को आईआईटी प्रवेष परीक्षा के लिए कोचिंग देती है और विद्या भवन द्वारा स्कूलिंग, बोर्डिंग व लाॅजिंग सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
पोस्ट, रविवार को राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट के खेमे से खबर आई कि करीब 30 विधायक उनके साथ हैं और अशोक गहलोत सरकार अल्पमत में है. इसके अगले ही दिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायकों के साथ विक्ट्री साइन दिखा दिया. गहलोत के मीडिया एडवाइजर ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि जयपुर में सोमवार को मुख्यमंत्री के आवास पर हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में 107 विधायक शामिल हुए. बता दें कि 200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 101 का है.
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि राजस्थान के रण में अशोक गहलोत के किले पर हमला हुआ था या शतरंज की गोटियां उन्होंने खुद सजाई थीं?
गजेंद्र सिंह शेखावत, बीजेपी नेता कहते है
’राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी फिल्म के एक्टर, विलेन और स्क्रिप्ट राइटर हैं‘’
बीजेपी के नेता ये बात कह रहे हैं तो इसकी एक वजह ये हो सकती है कि दरअसल गहलोत राज्यसभा चुनाव के बाद से ही पूरी तरह सचेत थे. इससे पहले भीतर और बाहर के विरोधी हमला बोलते उन्होंने एक्शन ले लिया था. उसका असर अब देखिए, एक तो उनके साथ बहुमत लायक विधायक दिख रहे हैं, दूसरा केंद्रीय नेतृत्व ने पायलट को दो टूक कह दिया है कि घर न तोड़िए, नाराजगी है तो बात कीजिए.
इस मामले पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सोमवार को कहा
कभी-कभी वैचारिक मतभेद पैदा हो जाता है, जो प्रजातांत्रित प्रणाली में स्वाभाविक है. मगर वैचारिक मतभेद पैदा होने से चुनी हुई अपनी ही पार्टी की सरकार को कमजोर करना या बीजेपी को खरीद-फरोख्त का मौका देना अनुचित है.
बगावत रोकने के लिए गहलोत के ‘एक तीर से दो निशाने’
राजस्थान में मौजूदा सियासी उठापठक के तार काफी हद तक जून में हुए राज्यसभा चुनाव से जुड़े हुए हैं. तीन सीटों पर हुए इस चुनाव से पहले कांग्रेस ने कुछ विधायकों को प्रलोभन दिए जाने का आरोप लगाया था. पार्टी की तरफ से इसकी शिकायत राजस्थान पुलिस के विशेष कार्यबल (एसओजी) से की गई थी. उस वक्त मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि राज्य में विधायकों को प्रलोभन दिया जा रहा है और करोड़ों रुपये की नकदी जयपुर स्थानांतरित हो रही है.
उस वक्त तमाम अटकलों के बीच गहलोत के सामने विधायकों को टूटने से बचाने और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती थी. ऐसे में एसओजी से शिकायत के साथ ही विधायकों को होटल में शिफ्ट कर दिया गया. गहलोत को इस चुनाव में सफलता भी मिली, जब कांग्रेस 3 में से 2 सीटें जीतने में कामयाब हो गई.
इसके बाद हाल ही में राजस्थान में सियासी हलचल तब अचानक तेज हो गई, जब एसओजी ने राज्य में विधायकों की खरीद फरोख्त और निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने के आरोपों में शुक्रवार को एक मामला दर्ज किया. बताया जा रहा है कि एसओजी ने दो मोबाइल नंबरों की निगरानी से सामने आई जानकारी के आधार पर यह मामला दर्ज किया था.
अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, यह मामला आईपीसी की धारा 124 ए (राजद्रोह) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज किया गया.
एसओजी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और चीफ व्हिप को इस मामले में बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजकर उनका समय मांगा था.
इस बीच मीडिया में सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट्स सामने आईं कि एसओजी के लेटर ने पायलट को नाखुश कर दिया और इसे उन्होंने अपमान के तौर पर देखा.
यहीं से सरकार की स्थिरता को लेकर गहलोत की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गईं. ऐसे में गहलोत ने इस मामले पर रविवार को ट्वीट कर कहा, ”एसओजी को जो कांग्रेस विधायक दल ने बीजेपी नेताओं द्वारा खरीद-फरोख्त की शिकायत की थी उस संदर्भ में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, चीफ व्हिप, अन्य कुछ मंत्री और विधायकों को सामान्य बयान देने के लिए नोटिस आए हैं. कुछ मीडिया द्वारा उसको अलग ढंग से प्रस्तुत करना उचित नहीं है.”
हालांकि, गहलोत का भी बयान दर्ज करने के लिए उन्हें नोटिस जारी किए जाने के बारे में कई मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि मुख्यमंत्री को नोटिस सिर्फ एक ‘‘छलावा’’ है, ताकि उपमुख्यमंत्री को एसओजी द्वारा तलब और अपमानित किया जा सके.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एक वरिष्ठ हाई कमान नेता ने कहा, ‘’गहलोत ने एक पत्थर से दो से तीन पक्षियों को मारने की कोशिश की. उस में, वह बहुत थोड़े से आगे चले गए. उन्होंने बीजेपी को यह कहते हुए किनारे कर दिया कि आप पार्टी तोड़ने वाले हैं… लेकिन एक जांच भी आगे कर दी…राजद्रोह लगाते हुए, वह यह समझे बिना ही काफी दूर चले गए कि पायलट प्रतिक्रिया देंगे. गहलोत ने जो अनुमान लगाया होगा उसकी तुलना में पायलट ने काफी मजबूती से प्रतिक्रिया दी है.’’
शनिवार तक गहलोत तेज हुई सियासी हलचल के बीच काफी मजबूत दिख रहे थे. उन्होंने बीजेपी को किनारे करने की अपनी रणनीति भी बरकरार रखी.
गहलोत ने शनिवार को बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा था,‘‘कोरोना वायरस संक्रमण के वक्त में बीजेपी के नेताओं ने मानवता और इंसानियत को ताक पर रख दिया है… ये लोग सरकार गिराने में लगे हैं. ये लोग सरकार कैसे गिरे, किस प्रकार से तोड़-फोड़ करें … खरीद फरोख्त कैसे करें … इन तमाम काम में लगे हैं.’’
उधर, गहलोत सरकार को अस्थिर करने की कोशिशों के तहत विधायकों को प्रलोभन दिए जाने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने शनिवार को ही तीन निर्दलीय विधायकों के खिलाफ प्राथमिक जांच (पीई) भी दर्ज की. इस तरह गहलोत सरकार बगावत को टालने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ ही रही थी, मगर पायलट की नाखुशी ने पूरे मामले की दिशा ही बदलकर रख दी. हालांकि, माना जा रहा है कि पायलट की नाखुशी से पैदा हुए सियासी संकट के बाद गहलोत का कद और मजबूत हुआ है.
बीजेपी बोली- पूरा मामला कांग्रेस के भीतर कलह का, हम तो बस दर्शक
राजस्थान की कांग्रेस सरकार को अस्थिर किए जाने की कोशिश के आरोपों पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने शनिवार को कहा था, ‘‘यह कांग्रेस की अंतरकलह है, आंतरिक झगड़ा है. हम तो कांग्रेस के इस खेल में दर्शकभर हैं.’’
इसके अलावा उन्होंने कहा था,‘‘पिछले पौने दो साल में सरकार की विफलता को, कोरोना प्रबंधन में विफलता को ढकने के लिए यह सारा खेल रचा गया है राज्यसभा चुनाव से लेकर अब तक.’’
वहीं उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के विधायकों और बाकी जनप्रतिनिधियों के फोन टैप करवा रही है.
गहलोत के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, ”राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी फिल्म के एक्टर, विलेन और स्क्रिप्ट राइटर हैं. वह अपनी पार्टी के (प्रदेश) अध्यक्ष को किनारे करने के लिए बीजेपी के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हैं. मैं मांग करता हूं कि वह इस बात को सार्वजनिक करें कि उनके हिसाब से, कितने कांग्रेस विधायक बिकने के लिए तैयार हैं.”