राजस्थान में बिछी राजनैतिक बिसात का खिलाड़ी कौन है ? क्या सच में गहलोत के किले पर हुआ है हमला या खुद बिछाई थी शतरंज की बिसात?

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सवाल उठ रहा है कि (Rajasthan)राजस्थान के रण में अशोक गहलोत के किले पर हमला हुआ था या शतरंज की गोटियां उन्होंने खुद सजाई थीं?

POST – रविवार को राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ( D CM Sachin Pilot ) के खेमे से खबर आई कि करीब 30 विधायक उनके साथ हैं और अशोक गहलोत ( Ashok Gahlot ) सरकार अल्पमत में है. इसके अगले ही दिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायकों के साथ विक्ट्री साइन दिखा दिया. गहलोत के मीडिया एडवाइजर ने न्यूज एजेंसी एएनआई ( ANI ) को बताया कि जयपुर में सोमवार को मुख्यमंत्री के आवास पर हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में 107 विधायक शामिल हुए. बता दें कि 200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 101 का है.

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि (Rajasthan)राजस्थान के रण में अशोक गहलोत के किले पर हमला हुआ था या शतरंज की गोटियां उन्होंने खुद सजाई थीं?

गजेंद्र सिंह शेखावत,( Gajendra Singh Shekhawat ) बीजेपी नेता कहते है

’राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी फिल्म के एक्टर, विलेन और स्क्रिप्ट राइटर हैं‘’

बीजेपी के नेता ये बात कह रहे हैं तो इसकी एक वजह ये हो सकती है कि दरअसल गहलोत राज्यसभा चुनाव के बाद से ही पूरी तरह सचेत थे. इससे पहले भीतर और बाहर के विरोधी हमला बोलते उन्होंने एक्शन ले लिया था. उसका असर अब देखिए, एक तो उनके साथ बहुमत लायक विधायक दिख रहे हैं, दूसरा केंद्रीय नेतृत्व ने पायलट को दो टूक कह दिया है कि घर न तोड़िए, नाराजगी है तो बात कीजिए.

इस मामले पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सोमवार को कहा

कभी-कभी वैचारिक मतभेद पैदा हो जाता है, जो प्रजातांत्रित प्रणाली में स्वाभाविक है. मगर वैचारिक मतभेद पैदा होने से चुनी हुई अपनी ही पार्टी की सरकार को कमजोर करना या बीजेपी को खरीद-फरोख्त का मौका देना अनुचित है.

बगावत रोकने के लिए गहलोत के ‘एक तीर से दो निशाने’

राजस्थान में मौजूदा सियासी उठापठक के तार काफी हद तक जून में हुए राज्यसभा चुनाव से जुड़े हुए हैं. तीन सीटों पर हुए इस चुनाव से पहले कांग्रेस ने कुछ विधायकों को प्रलोभन दिए जाने का आरोप लगाया था. पार्टी की तरफ से इसकी शिकायत राजस्थान पुलिस के विशेष कार्यबल (एसओजी) से की गई थी. उस वक्त मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि राज्य में विधायकों को प्रलोभन दिया जा रहा है और करोड़ों रुपये की नकदी जयपुर स्थानांतरित हो रही है.

उस वक्त तमाम अटकलों के बीच गहलोत के सामने विधायकों को टूटने से बचाने और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती थी. ऐसे में एसओजी से शिकायत के साथ ही विधायकों को होटल में शिफ्ट कर दिया गया. गहलोत को इस चुनाव में सफलता भी मिली, जब कांग्रेस 3 में से 2 सीटें जीतने में कामयाब हो गई.

इसके बाद हाल ही में राजस्थान में सियासी हलचल तब अचानक तेज हो गई, जब एसओजी ने राज्य में विधायकों की खरीद फरोख्त और निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने के आरोपों में शुक्रवार को एक मामला दर्ज किया. बताया जा रहा है कि एसओजी ने दो मोबाइल नंबरों की निगरानी से सामने आई जानकारी के आधार पर यह मामला दर्ज किया था.

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, यह मामला आईपीसी की धारा 124 ए (राजद्रोह) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज किया गया.

एसओजी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और चीफ व्हिप को इस मामले में बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजकर उनका समय मांगा था.

इस बीच मीडिया में सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट्स सामने आईं कि एसओजी के लेटर ने पायलट को नाखुश कर दिया और इसे उन्होंने अपमान के तौर पर देखा.

यहीं से सरकार की स्थिरता को लेकर गहलोत की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गईं. ऐसे में गहलोत ने इस मामले पर रविवार को ट्वीट कर कहा, ”एसओजी को जो कांग्रेस विधायक दल ने बीजेपी नेताओं द्वारा खरीद-फरोख्त की शिकायत की थी उस संदर्भ में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, चीफ व्हिप, अन्य कुछ मंत्री और विधायकों को सामान्य बयान देने के लिए नोटिस आए हैं. कुछ मीडिया द्वारा उसको अलग ढंग से प्रस्तुत करना उचित नहीं है.”

हालांकि, गहलोत का भी बयान दर्ज करने के लिए उन्हें नोटिस जारी किए जाने के बारे में कई मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि मुख्यमंत्री को नोटिस सिर्फ एक ‘‘छलावा’’ है, ताकि उपमुख्यमंत्री को एसओजी द्वारा तलब और अपमानित किया जा सके.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एक वरिष्ठ हाई कमान नेता ने कहा, ‘’गहलोत ने एक पत्थर से दो से तीन पक्षियों को मारने की कोशिश की. उस में, वह बहुत थोड़े से आगे चले गए. उन्होंने बीजेपी को यह कहते हुए किनारे कर दिया कि आप पार्टी तोड़ने वाले हैं… लेकिन एक जांच भी आगे कर दी…राजद्रोह लगाते हुए, वह यह समझे बिना ही काफी दूर चले गए कि पायलट प्रतिक्रिया देंगे. गहलोत ने जो अनुमान लगाया होगा उसकी तुलना में पायलट ने काफी मजबूती से प्रतिक्रिया दी है.’’

शनिवार तक गहलोत तेज हुई सियासी हलचल के बीच काफी मजबूत दिख रहे थे. उन्होंने बीजेपी को किनारे करने की अपनी रणनीति भी बरकरार रखी.

गहलोत ने शनिवार को बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा था,‘‘कोरोना वायरस संक्रमण के वक्त में बीजेपी के नेताओं ने मानवता और इंसानियत को ताक पर रख दिया है… ये लोग सरकार गिराने में लगे हैं. ये लोग सरकार कैसे गिरे, किस प्रकार से तोड़-फोड़ करें … खरीद फरोख्त कैसे करें … इन तमाम काम में लगे हैं.’’

उधर, गहलोत सरकार को अस्थिर करने की कोशिशों के तहत विधायकों को प्रलोभन दिए जाने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने शनिवार को ही तीन निर्दलीय विधायकों के खिलाफ प्राथमिक जांच (पीई) भी दर्ज की. इस तरह गहलोत सरकार बगावत को टालने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ ही रही थी, मगर पायलट की नाखुशी ने पूरे मामले की दिशा ही बदलकर रख दी. हालांकि, माना जा रहा है कि पायलट की नाखुशी से पैदा हुए सियासी संकट के बाद गहलोत का कद और मजबूत हुआ है.

बीजेपी बोली- पूरा मामला कांग्रेस के भीतर कलह का, हम तो बस दर्शक

राजस्थान की कांग्रेस सरकार को अस्थिर किए जाने की कोशिश के आरोपों पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने शनिवार को कहा था, ‘‘यह कांग्रेस की अंतरकलह है, आंतरिक झगड़ा है. हम तो कांग्रेस के इस खेल में दर्शकभर हैं.’’

इसके अलावा उन्होंने कहा था,‘‘पिछले पौने दो साल में सरकार की विफलता को, कोरोना प्रबंधन में विफलता को ढकने के लिए यह सारा खेल रचा गया है राज्यसभा चुनाव से लेकर अब तक.’’

वहीं उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के विधायकों और बाकी जनप्रतिनिधियों के फोन टैप करवा रही है.

गहलोत के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, ”राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी फिल्म के एक्टर, विलेन और स्क्रिप्ट राइटर हैं. वह अपनी पार्टी के (प्रदेश) अध्यक्ष को किनारे करने के लिए बीजेपी के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हैं. मैं मांग करता हूं कि वह इस बात को सार्वजनिक करें कि उनके हिसाब से, कितने कांग्रेस विधायक बिकने के लिए तैयार हैं.”

हिन्दुस्तान ज़िंक के सहयोग से वंचित वर्ग के 26 बच्चों के दूसरे समूह ने कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 100 प्रतिषत नतीजे प्राप्त किए।

– 4 विद्यार्थियों ने गणित में पूरे 100 अंक प्राप्त किए
– 100 डिसटिंक्षन हासिल कींः 19 हिंदी में, 25 अंग्रेज़ी में, 13 फिज़िक्स में, 21 कैमिस्ट्री में और 22 गणित में
– 9 विद्यार्थियों ने सभी 5 विषयों में डिसटिंक्षन प्राप्त की
– 4 विद्यार्थियों ने कुल 90 प्रतिषत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं
– अब भी ये विद्यार्थी हिन्दुस्तान ज़िंक की ’’ऊंची उड़ान’’ प्रोजेक्ट के तहत आईआईटी-जेईई के लिए कोचिंग में तैयारी कर रहे हैं

वेदांता ग्रुप की कंपनी हिन्दुस्तान ज़िंक ने वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए शुरु की गए ’ऊंची उड़ान’ प्रोजेक्ट के दूसरे समूह के बच्चों ने 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 100 प्रतिषत परिणाम दर्ज किया है तथा उन्होंने हिंदी, अंग्रेज़ी, फिज़िक्स, कैमिस्ट्री व गणित विषयों में कुल 100 डिस्टिंक्षन हासिल की हैं। राजस्थान के सुदूर ग्रामीण इलाकों से आने वाले इन प्रतिभावान विद्यार्थियों का लक्ष्य अब आईआईटी- जेईई की परीक्षा उत्तीर्ण करना है, जिसके लिए ये विद्यार्थी हिन्दुस्तान ज़िंक के सहयोग से उदयपुर जिले में कोचिंग प्राप्त कर रहे हैं।

विद्यार्थियों को बधाई देते हुए हिन्दुस्तान ज़िंक के डिप्टी सीईओ श्री अरुण मिश्रा ने कहा, ’’इन विद्यार्थियों की सफलता हमेषा बहुत खास रही है क्योंकि इन्होंने हर विपरीत स्थिति से मुकाबला करते हुए शानदार प्रदर्षन किया है। इनकी कामयाबी हमारे इस विष्वास को पुख्ता करती है कि उत्तम षिक्षा तक पहुंच सुनिष्चित करके ग्रामीण भारत में बदलाव लाए जा सकते हैं। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए मैं इन विद्यार्थियों को बधाई देता हूं और समाज के लोगों को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने हमारे कार्यक्रमों को निरंतर समर्थन दिया। मैं षिक्षकों का भी शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जो इन विद्यार्थियों को प्रषिक्षित करने में बहुत ही बढ़िया काम कर रहे हैं ताकि वे भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक आईआईटी-जेईई में उत्तीण हो सकें। ये सम्माननीय षिक्षणगण इन बच्चों के सपनों व उनके लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।’’

हिन्दुस्तान जिं़क का ’ऊंची उड़ान’ एक शैक्षणिक उत्कृष्टता कार्यक्रम है जिसका लक्ष्य है कंपनी के परिचालन क्षेत्र में आने वाले सरकारी स्कूलों के प्रतिभावान विद्यार्थियों की पहचान करना और उन्हें आईआईटी व अन्य प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेष हेतु संरक्षण देना। कंपनी हर वर्ष ग्रामीण इलाकों से कड़ी चयन प्रक्रिया द्वारा 25-30 विद्यार्थियों का चयन करती है। यह चयन राजस्थान के 6 जिलों-उदयपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद व अजमेर तथा उत्तराखंड के पंतनगर से किया जाता है। इन बच्चों को आईआईटी और अन्य प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग काॅलेजों में प्रवेष पाने के लिए निषुल्क कोचिंग दी जाती है। वर्तमान में इस प्रोजेक्ट में कक्षा 9 से 12 के 123 बच्चे (समूह 2 से समूह 5) शामिल हैं। हर साल एक समूह जेईई परीक्षा में बैठता है। 9वीं कक्षा से ही बच्चों की शुरुआत करा देने पर उन्हें कड़े प्रषिक्षण के लिए चार वर्ष मिल जाते हैं।

इस प्रोजेक्ट के तहत विद्यार्थियों के चयनित समूह को रिहाइषी और गैर-रिहाइषी स्कूलिंग व कोचिंग सपोर्ट दिया जाता है। कंपनी रेसोनेंस ऐजुवेंचर्स प्रा.लि. और विद्या भवन, उदयपुर के सहयोग से यह कार्य कर रही है। रेजोनेंस ऐजुवेंचर्स प्रा.लि. इन विद्यार्थियों को आईआईटी प्रवेष परीक्षा के लिए कोचिंग देती है और विद्या भवन द्वारा स्कूलिंग, बोर्डिंग व लाॅजिंग सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।

राजस्थान की इस बिसात का खिलाड़ी कौन, कहीं गहलोत खुद तो ?

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पोस्ट, रविवार को राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट के खेमे से खबर आई कि करीब 30 विधायक उनके साथ हैं और अशोक गहलोत सरकार अल्पमत में है. इसके अगले ही दिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायकों के साथ विक्ट्री साइन दिखा दिया. गहलोत के मीडिया एडवाइजर ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि जयपुर में सोमवार को मुख्यमंत्री के आवास पर हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में 107 विधायक शामिल हुए. बता दें कि 200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 101 का है.

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि राजस्थान के रण में अशोक गहलोत के किले पर हमला हुआ था या शतरंज की गोटियां उन्होंने खुद सजाई थीं?

गजेंद्र सिंह शेखावत, बीजेपी नेता कहते है

’राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी फिल्म के एक्टर, विलेन और स्क्रिप्ट राइटर हैं‘’

बीजेपी के नेता ये बात कह रहे हैं तो इसकी एक वजह ये हो सकती है कि दरअसल गहलोत राज्यसभा चुनाव के बाद से ही पूरी तरह सचेत थे. इससे पहले भीतर और बाहर के विरोधी हमला बोलते उन्होंने एक्शन ले लिया था. उसका असर अब देखिए, एक तो उनके साथ बहुमत लायक विधायक दिख रहे हैं, दूसरा केंद्रीय नेतृत्व ने पायलट को दो टूक कह दिया है कि घर न तोड़िए, नाराजगी है तो बात कीजिए.

इस मामले पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सोमवार को कहा

कभी-कभी वैचारिक मतभेद पैदा हो जाता है, जो प्रजातांत्रित प्रणाली में स्वाभाविक है. मगर वैचारिक मतभेद पैदा होने से चुनी हुई अपनी ही पार्टी की सरकार को कमजोर करना या बीजेपी को खरीद-फरोख्त का मौका देना अनुचित है.

बगावत रोकने के लिए गहलोत के ‘एक तीर से दो निशाने’

राजस्थान में मौजूदा सियासी उठापठक के तार काफी हद तक जून में हुए राज्यसभा चुनाव से जुड़े हुए हैं. तीन सीटों पर हुए इस चुनाव से पहले कांग्रेस ने कुछ विधायकों को प्रलोभन दिए जाने का आरोप लगाया था. पार्टी की तरफ से इसकी शिकायत राजस्थान पुलिस के विशेष कार्यबल (एसओजी) से की गई थी. उस वक्त मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि राज्य में विधायकों को प्रलोभन दिया जा रहा है और करोड़ों रुपये की नकदी जयपुर स्थानांतरित हो रही है.

उस वक्त तमाम अटकलों के बीच गहलोत के सामने विधायकों को टूटने से बचाने और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती थी. ऐसे में एसओजी से शिकायत के साथ ही विधायकों को होटल में शिफ्ट कर दिया गया. गहलोत को इस चुनाव में सफलता भी मिली, जब कांग्रेस 3 में से 2 सीटें जीतने में कामयाब हो गई.

इसके बाद हाल ही में राजस्थान में सियासी हलचल तब अचानक तेज हो गई, जब एसओजी ने राज्य में विधायकों की खरीद फरोख्त और निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने के आरोपों में शुक्रवार को एक मामला दर्ज किया. बताया जा रहा है कि एसओजी ने दो मोबाइल नंबरों की निगरानी से सामने आई जानकारी के आधार पर यह मामला दर्ज किया था.

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, यह मामला आईपीसी की धारा 124 ए (राजद्रोह) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज किया गया.

एसओजी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और चीफ व्हिप को इस मामले में बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजकर उनका समय मांगा था.

इस बीच मीडिया में सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट्स सामने आईं कि एसओजी के लेटर ने पायलट को नाखुश कर दिया और इसे उन्होंने अपमान के तौर पर देखा.

यहीं से सरकार की स्थिरता को लेकर गहलोत की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गईं. ऐसे में गहलोत ने इस मामले पर रविवार को ट्वीट कर कहा, ”एसओजी को जो कांग्रेस विधायक दल ने बीजेपी नेताओं द्वारा खरीद-फरोख्त की शिकायत की थी उस संदर्भ में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, चीफ व्हिप, अन्य कुछ मंत्री और विधायकों को सामान्य बयान देने के लिए नोटिस आए हैं. कुछ मीडिया द्वारा उसको अलग ढंग से प्रस्तुत करना उचित नहीं है.”

हालांकि, गहलोत का भी बयान दर्ज करने के लिए उन्हें नोटिस जारी किए जाने के बारे में कई मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि मुख्यमंत्री को नोटिस सिर्फ एक ‘‘छलावा’’ है, ताकि उपमुख्यमंत्री को एसओजी द्वारा तलब और अपमानित किया जा सके.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एक वरिष्ठ हाई कमान नेता ने कहा, ‘’गहलोत ने एक पत्थर से दो से तीन पक्षियों को मारने की कोशिश की. उस में, वह बहुत थोड़े से आगे चले गए. उन्होंने बीजेपी को यह कहते हुए किनारे कर दिया कि आप पार्टी तोड़ने वाले हैं… लेकिन एक जांच भी आगे कर दी…राजद्रोह लगाते हुए, वह यह समझे बिना ही काफी दूर चले गए कि पायलट प्रतिक्रिया देंगे. गहलोत ने जो अनुमान लगाया होगा उसकी तुलना में पायलट ने काफी मजबूती से प्रतिक्रिया दी है.’’

शनिवार तक गहलोत तेज हुई सियासी हलचल के बीच काफी मजबूत दिख रहे थे. उन्होंने बीजेपी को किनारे करने की अपनी रणनीति भी बरकरार रखी.

गहलोत ने शनिवार को बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा था,‘‘कोरोना वायरस संक्रमण के वक्त में बीजेपी के नेताओं ने मानवता और इंसानियत को ताक पर रख दिया है… ये लोग सरकार गिराने में लगे हैं. ये लोग सरकार कैसे गिरे, किस प्रकार से तोड़-फोड़ करें … खरीद फरोख्त कैसे करें … इन तमाम काम में लगे हैं.’’

उधर, गहलोत सरकार को अस्थिर करने की कोशिशों के तहत विधायकों को प्रलोभन दिए जाने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने शनिवार को ही तीन निर्दलीय विधायकों के खिलाफ प्राथमिक जांच (पीई) भी दर्ज की. इस तरह गहलोत सरकार बगावत को टालने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ ही रही थी, मगर पायलट की नाखुशी ने पूरे मामले की दिशा ही बदलकर रख दी. हालांकि, माना जा रहा है कि पायलट की नाखुशी से पैदा हुए सियासी संकट के बाद गहलोत का कद और मजबूत हुआ है.

बीजेपी बोली- पूरा मामला कांग्रेस के भीतर कलह का, हम तो बस दर्शक

राजस्थान की कांग्रेस सरकार को अस्थिर किए जाने की कोशिश के आरोपों पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने शनिवार को कहा था, ‘‘यह कांग्रेस की अंतरकलह है, आंतरिक झगड़ा है. हम तो कांग्रेस के इस खेल में दर्शकभर हैं.’’

इसके अलावा उन्होंने कहा था,‘‘पिछले पौने दो साल में सरकार की विफलता को, कोरोना प्रबंधन में विफलता को ढकने के लिए यह सारा खेल रचा गया है राज्यसभा चुनाव से लेकर अब तक.’’

वहीं उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के विधायकों और बाकी जनप्रतिनिधियों के फोन टैप करवा रही है.

गहलोत के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, ”राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी फिल्म के एक्टर, विलेन और स्क्रिप्ट राइटर हैं. वह अपनी पार्टी के (प्रदेश) अध्यक्ष को किनारे करने के लिए बीजेपी के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हैं. मैं मांग करता हूं कि वह इस बात को सार्वजनिक करें कि उनके हिसाब से, कितने कांग्रेस विधायक बिकने के लिए तैयार हैं.”

कोविड के बाद आर्थिक रिकवरी के लिए वेदांता की तैयारी – भारत सरकार में पूर्व सचिव और गेल के पूर्व प्रमुख को परामर्शक बोर्ड में नियुक्त किया

विश्व स्तर पर काम करने वाली भारत की सबसे बड़ी डायवर्सिफाइड प्राकृतिक संसाधन कंपनी वेदांता ने वरिष्ठ स्तर पर दो नियुक्तियों की घोषणा की है। ये नियुक्तियां कोविड के बाद अगले चरण की वृद्धि हेतु तैयारियों का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री द्वारा किए गए आत्मनिर्भर भारत के आह्वान पर अपनी प्रतिबद्धता प्रकट करते हुए कंपनी ने यह कदम उठाया है। गौरतलब है कि भारत के कुल आयात का 50 प्रतिशत से अधिक प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र में होता है।

जितेन्द्र कुमार दादू जो दिसंबर 2017 में भारत सरकार से सचिव की रैंक पर रिटायर हुए हैं, उन्हें वरिष्ठ सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया गया है। दादू ने सेंट स्टीफंस काॅलेज, दिल्ली से अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई की है और आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए किया है, वह 1983 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। अपने लंबे और शानदार करिअर में उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया है जिनमें दिल्ली सिविल सप्लाईज़ काॅर्पोरेशन के चेयरमेन तथा भारत सरकार के वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव एवं संयुक्त सचिव का दायित्व भी शामिल है। वह काॅर्पोरेट रणनीति टीम तथा हिन्दुस्तान ज़िंक की प्रबंधन समिति के साथ काम करते हुए अहम कारोबारी कदमों को आगे बढ़ाएंगे। श्री दादू ने अपनी नियुक्ति पर कहा, ’’बीते वर्षों में वेदांता ने उद्योग जगत एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं। मैं ऐसे वक्त पर वेदांता के साथ जुड़ कर बहुत प्रसन्न हूं जब वह आत्मनिर्भर भारत के निर्माण पर ध्यान केन्द्रित कर रही है।’’

श्री दादू वेदांता के जिस परामर्शक बोर्ड में शामिल हुए हैं उसमें पूर्व विदेश सचिव रंजन मथाई, पूर्व आर्थिक मामले सचिव आर गोपालन और पूर्व पैट्रोलियम व प्राकृतिक गैस सचिव सौरभ चंद्रा शामिल हैं।

स्टील अथाॅरिटी आॅफ इंडिया लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन व प्रबंध निदेशक प्रकाश कुमार सिंह वेदांता की इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स लिमिटेड (ईएसएल) के प्रेसिडेंट-ग्रोथ प्रोजेक्ट्स के पद पर नियुक्त हुए हैं। आईआईटी रुड़की से मेटालर्जिकल इंजीनियर श्री सिंह ईएसएल प्रबंधन समिति का अभिन्न हिस्सा हैं तथा वह कंपनी की मार्केटिंग, नीति और वृद्धि में अहम भूमिका निभाएंगे। श्री सिंह ने अपनी नियुक्ति पर कहा, ’’वेदांता ईएसएल की कायापलट की कहानी बहुत प्रेरणादायी है। इतने कम वक्त में कंपनी वृद्धि की अवस्था में पहुंच गई है और इस सफर में कंपनी से जुड़ने पर मैं बहुत उत्साहित हूं।’’

इन दोनों नियुक्तियों पर वेदांता के सीईओ सुनील दुग्गल ने कहा, ’’श्री दादू और श्री सिंह के हमारे प्रतिष्ठित परामर्शक बोर्ड में शामिल होने पर हम बेहद खुश हैं। उनके व्यापक अनुभव और ज्ञान से हमें जो लाभ मिलेगा उसके लिए हम शुक्रगुज़ार रहेंगे।

राजस्थान के 100 किसानों को डीएस ग्रुप के पहल’ प्रोजेक्ट से 25.38 लाख रूपयों की अतिरिक्त आय

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कोरोना महामारी और लॉक डाउन में एक तरफ जहाँ करोड़ों लोगों की र्तोज़ी रोटी पर असर पडा है वहीँ राजस्थान के मेवाड़ में स्थित डूंगरपुर जिले के 100 किसानों ने बम्पर फसल का उत्पादन किया है . इस बम्पर फसल के उत्पादन में सहयोगी की भूमिका निभाई डीएस ग्रुप के पहल प्रोजेक्ट ने . पिछले तकरीबन एक वर्ष में डुंगरपुर के इन किसानों ने डीएस ग्रुप के ‘पहल’ प्रोजेक्ट से लाभ उठा कर 1,03,580 किलो सब्जियों का उत्पादन किया। ये किसान अब तक 70,350 किलो सब्जियों का विक्रय कर चुके है तथा इन किसानों को इससे 25.38 लाख रूपयों की अतिरिक्त आय हुई है। डीएस गुप द्वारा सामाजिक उत्थान के लिए शुरू किए गये ‘पहल’ प्रोजेक्ट में इन 100 किसानों को वाड़ी विकसित करने हेतु प्रशिक्षित किया गया जो कि आदिवासी ग्रामीण अंचल के लिए वरदान साबित हो रहा है। ‘पहल’ प्रोजक्ट किसानों को कम जमीन से कई प्रकार की फसल जैसे जमीन के अंदर एवं उपर उगने वाली सब्जियां, बेल वाली सब्जिया एवं सीजनल फल आदि उगाने हेतु प्रेरित कर रहा है। इस मोनोकल्चर विधि द्वारा कम जमीन में अधिक उपज ली जा सकती है। ‘पहल’ प्रोजेक्ट से आजीविका के स्तर में सुधार लाया जा रहा है जिससे स्थानीय मांग पूरी होने के साथ ही उन्हें अतिरिक्त आय मिल रही है। ‘पहल’ प्रोजक्ट छोटे और सीमांत किसानों को खेती के लिए पानी की दक्षता को बढ़ावा देने के साथ ही कृषि और खाद्य सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए है। इसका उद्देश्य स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए लाभप्रद सब्जी की खेती शुरू करना है और साथ ही किसानों के लिए अतिरिक्त आय उत्पन्न करना और उनकी आजीविका को सुरक्षित करना है। गरीब आदिवासी परिवारों के लिए कुपोषण और कई अन्य सामाजिक और आर्थिक समस्या के समाधान में भी ‘पहल’ प्रोजेक्ट सहायक है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से पर्यावरण को संरक्षित करने और क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के कार्य को भी सुनिश्चित किया जा रहा है। आजीविका सुधार कार्यक्रम डीएस ग्रुप द्वारा सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रमुख कार्य में से एक है। डूंगरपुर जिले का सुराता क़स्बा इससे पहले सब्जियों की आपुर्ति के लिए गुजरात के मोडासा पर निर्भर था। अब 60 से 70 प्रतिशत ताजा सब्जियों की जरूरत डीएस ग्रुप के पहल’ प्रोजेक्ट के कारण पुरी हो रही है। ‘पहल’ प्रोजेक्ट से जुड़े किसान कांतिलाल का कहना है कि इससे पहले परिवार को पालने के लिए पड़ोसी राज्यों में काम की तलाश मजबूरी थी, लेकिन अब वह इस नई तकनीक से पर्याप्त आय अर्जित करने में सक्षम हैं। उसके बच्चों को भी पर्याप्त भोजन और अच्छी शिक्षा मिल पा रही है और वह अपने सुरक्षित भविष्य के प्रति वह आश्वस्त नजर आ रहा है।

डोल कुंजेला गांव की निवासी परी के पति दैनिक मजदूरी के लिए गुजरात जाते थे। वर्ष में 4 माह से अधिक समय गुजरात में कार्य करना उनकी मजबूरी थी, लेकिन डीएस ग्रुप के पहल प्रोजेक्ट से जुड़ने के बाद अब पूरा परिवार साथ रह कर सुरक्षित भविष्य की ओर अग्रसर है। अब तक 100 किसान वाड़ी से जुड़ चुके हैं और आस पास की ग्राम पंचायत के 200 से अधिक आदिवासी किसान इससे जुड़ने के लिए नामाकंन करा चुके हैं।

डीएस ग्रुप द्वारा इस परियोजना से जोड़ने के लिए चयन प्रक्रिया को अपनाते हुए वाड़ी हेतु उपयुक्त भूमि, खेत में पूर्व में प्राप्त फसल, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता, खेती की नई तकनीक के साथ ही सब्जी को बेचने के लिए रूचि जैसी मुख्य बातों का ध्यान रखा जाता है। डीएस ग्रुप द्वारा किसानों को सरकार की योजनाओं जैसे सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई). प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, राजस्थान सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना और राजश्री योजना से जोड़कर भी सहायता दी जा रही है। धरमपाल सत्यपाल फाउंडेशन, डूंगरपुर की सुराता ग्राम पंचायत में वर्ष 2015 से कार्य कर रही है। राजस्थान का डूंगरपुर जिला, कम भूमि उत्पादकता के साथ, राज्य के सबसे छोटे जिलों में से एक है। जिले की जलवायु शुष्क है। सुराता और पास की ग्राम पंचायत में अधिकांश समुदाय के सदस्य आदिवासी हैं, और उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत या तो कृषि है या दैनिक मजदूरी। ऐसे में डीएस ग्रुप की पहल प्रोजेक्ट ने इन आदिवासी किसानों की दिनचर्या और जीवन को बदलने में अपनी अहम भूमिका निभाई है जिससे आने वाले दिनों में और बेहतर परिणाम सामने आयेंगे।

हिन्दुस्तान ज़िंक राजपुरा दरीबा को राज्य स्तरीय भामाशाह समारोह में पहला पुरस्कार

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हिन्दुस्तान जिंक की 5 इकाईयां राज्य स्तरीय भामाशाह पुरस्कार से सम्मानित

हिन्दुस्तान जिंक की पांच इकाईयों राजपुरा दरीबा काॅम्प्लेक्स, चंदेरिया लेड जिं़क स्मेल्टर, जावर माइंस, रामपुरा आगुचा खान और कायड़ माइन को वर्ष 2019-20 में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए राज्य स्तरीय 26वें भामाशाह सम्मान समारोह में पुरस्कृत किया गया। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के मुख्य अतिथ्य में विडियों काॅफें्रसिंग के माध्यम से आॅनलाइन भामाशाह सम्मान समारोह में राजस्थान के प्रमुख 50 भामाशाहों से संवाद कर राजस्थान स्कूल शिक्षा मंे दिए गए सहयोग के लिए प्रोत्साहित किया गया। समारोह में हिन्दुस्तान जिं़क राजपुरा दरीबा काॅम्प्लेक्स को राज्य में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
समारोह में हिन्दुस्तान जिं़क की हेड सीएसआर अनुपम निधि ने सुझाव दिया कि विद्यार्थियों को सीखने में तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है साथ ही भाषा से जोडने के लिए अधिक से अधिक अंग्रेजी को शामिल करने के प्रयास करने होंगें। हिन्दुस्तान जिं़क के डायरेक्टर माइंस सुजल शाह, हेड कायड माइन कस्तुर मीणा, सीएसआर हेड विशाल अग्रवाल, दलपत सिंह चैहान, अभय गौतम, आनंद चक्रवर्ती, रूचिका चावला, ने इस अवसर पर अपने क्षेत्रो में हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यो की जानकारी एवं सुझाव दिए।
इस वर्ष हिन्दुस्तान जिं़क की इकाईयों द्वारा करीब 32.59 करोड की राशि व्यय की गयी। राजपुरा दरीबा काॅम्प्लेक्स ने राज्य में शिक्षा उन्नयन हेतु सर्वाधिक 8.95 करोड़ की राशि व्यय कर राज्य में प्रथम, चंदेरिया लेड जिं़क स्मेल्टर ने 7.01 करोड़, जावर माइंस ने 7.59 करोड़, रामपुरा आगुचा ने 6.70 एवं कायड माइन द्वारा 2.34 करोड व्यय किया गया।
इन कार्यो में राजकीय माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में गणित, अंगे्रजी, व विज्ञान विषयाध्यापकों की अतिरिक्त व्यवस्था, विद्यालयों का जीर्णोद्धार, उंची उडान कार्यक्रम में आईआईटी हेतु कोचिंग, माइंडस्पार्क कार्यक्रम के तहत् पहली से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को कम्यूटर के माध्यम से हिन्दी, अगंे्रजी और गणित का अध्ययन, छात्राओं को रिंगस महाविद्यालय में उच्च शिक्षा हेतु सहयोग, पुस्तकालय व प्रयोगशाला हेतु फर्नीचर एवं सुरक्षा उपकरण, अध्यापको के अध्ययन हेतु पुस्तकें एवं अध्ययन सामग्री, राजकीय अध्यापको हेतु कार्यशाला, ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविर, शिक्षा संबंल के अन्तर्गत नियुक्त किये गये अध्यापकों का आमुखीकरण प्रशिक्षण, बाल कल्याण केन्द्र के छात्र छात्राओं को शुद्ध पेयजल, गणवेश वितरण, ब्लाॅक स्तरीय खेलकुद प्रतियोगिताओं में सहयोग, ब्लाॅक स्तरीय विज्ञान मेले में आर्थिक सहयोग, अलग-अलग राजकीय विद्यालयों में कक्षा-कक्षांे का निर्माण, बालिकाओं एवं बालकों के लिए शौचालय का निर्माण, ट्युबवेल लगवाने का कार्य, ग्रिन बोर्ड उपलब्ध कराना, विद्यालयों की छतों पर वाटर प्रुफींग का कार्य, भुमीगत टेंक का निर्माण, जिलों के 3089 आंगनवाडी केन्द्रो पर शालापुर्व शिक्षा, स्वास्थ्य परिक्षण किया जा कर शैक्षिक उन्नयन हेतु खुशी कार्यक्रम द्वारा सहयोग किया गया है।

हिन्दुस्तान ज़िंक ने सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्रों की क्षमता बढ़ाकर 55 एमएलडी की

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उदयपुर,  हिन्दुस्तान ज़िंक ने शहर में अपने नए 10 मीलियन लीटर्स प्रतिदिन (एमएलडी) सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को चालू कर दिया है। इस नए संयंत्र से हिन्दुस्तान जिं़क के सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्रों की कुल क्षमता 55 एमएलडी हो गई है। इसके अलावा कंपनी एक 5 एमएलडी क्षमता वाली इकाई का काम भी पूरा करने वाली है, जिससे कुल क्षमता 60 एमएलडी हो जाएगी। सिक्वेंशियल बैच रिऐक्टर टेक्नोलाॅजी के परिणास्वरूप रसायन मुक्त और जैविक प्रक्रियाएं होती हैं। नया 10 एमएलडी प्लांट ट्रीटेड पानी उत्पादित करता है जिसका 50 प्रतिशत आयड़ नदी में भेजा जाता है।झीलों का शहर उदयपुर में रोजाना 70 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होता है। हिन्दुस्तान जिं़क एक अतिरिक्त 5 एमएलडी प्लांट की कमिशनिंग के अंतिम चरण में है, जिसके बाद सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कुल क्षमता 60 एमएलडी हो जाएगी। यानी इसके बाद उदयपुर शहर के लगभग पूरे सीवेज का ट्रीटमेंट हो पाएगा।इस बारे में हिन्दुस्तान ज़िंक और वेदांता लिमिटेड के सीईओ श्री सुनील दुग्गल ने कहा, ’’हिन्दुस्तान ज़िंक में हमने हमेशा विचारों, संसाधनों व प्रयासों से समुदायों को सशक्त बनाने में विश्वास किया है। 2014 में हमने उदयपुर का पहला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया था। सरकारी-निजी भागीदारी माॅडल के तहत 20 एमएलडी क्षमता का यह संयंत्र लगाया गया। बीते 6 वर्षों के दौरान हम इस क्षमता को तिगुना करने की दिशा में आगे बढ़ते आए हैं। यह अत्याधुनिक 10 एमएलडी प्लांट हमारी कोशिशों को और बढ़ावा देगा जिनके द्वारा हम एक स्वच्छता एवं वाटर पाॅजिटिव शहर बनाने के सपने को हकीकत में बदलना चाहते हैं।’’

उदयपुर म्यूनिसिपल काॅर्पोरेशन के कमिश्नर श्री अंकित कुमार सिंह, आईएएस ने कहा, ’’हिन्दुस्तान जिं़ ने अनुबंध के मुताबिक तय समय में 10 एमएलडी क्षमता वाले प्लांट समेत उदयपुर शहर में कुल 55 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य पूरा कर दिखाया है, इसके लिए हम कंपनी प्रबंधन की सराहना करते हैं।’’

कमिश्नर महोदय ने यह भी कहा कि, ’’सभी सामाजिक विकास परियोजनाओं के लिए वेदांता की हिन्दुस्तान ज़िंक हमेशा से उदयपुर म्यूनिसिपल काॅर्पोरेशन की प्रमुख सहयोगी रही है और उन्होंने जो भी प्रयास किए हैं उनके लिए हम धन्यवाद करते हैं।’’

एसबीआर टेक्नोलाॅजी में ऊर्जा संरक्षण की दर बेहतर है साथ ही इससे रसायन मुक्त ट्रीटेड पानी भी मिलता है। हाइड्रोलिक्स मैकेनिज़्म पर इस पूरी तरह स्वचालित प्लांट में ऊर्जा की खपत घट गई है। इसकी ट्रीटमेंट प्रक्रिया में कोई भी हानिकारक उत्सर्जन नहीं होता इसलिए यह पर्यावरण के अनुकूल है। हिन्दुस्तान ज़िंक की ओर से हरित एवं नवीकरणीय ऊर्जा के पहलू पर यह अतिरिक्त योगदान है। गौरतलब है कि कंपनी ने इन एसटीपी को विकसित करते समय पास ही में सोलर पैनल भी लगाए हैं।

उदयपुर उन शहरों में है जिन्हें भारत सरकार ने स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत चुना है। उदयपुर की झीलों में सीवेज का प्रवाह बहुत बड़ी समस्या बन गया था, इससे प्रदूषण बहुत ज्यादा बढ़ गया था। उपयोग के लायक पानी हेतु वैकल्पिक स्त्रोत विकसित करने व उसे संरक्षित करने की जरूरत थी। हिन्दुस्तान जिं़क की इकाईयां ’ज़ीरो डिस्चार्ज’ के सिद्धांत पर काम करती हैं और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने का मतलब है कि जल संरक्षण तथा झीलों में गंदगी का प्रवाह घटाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस क्षमता वृद्धि से कंपनी को उम्मीद है कि उदयपुर का अधिकतम घरेलू सीवेज का ट्रीटमेंट हो सकेगा और इस तरह ताज़े पानी पर निर्भरताएं कम होंगी।

Hindustan Zinc launches “Koi Bacha Rahe Na Bhookha” campaign

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Udaipur Post. Hindustan Zinc Limited (HZL), in association with Government’s Integrated Child Development Services (ICDS), has launched “Koi Bacha Rahe Na Bhookha” campaign – aimed at improving the health and well-being of the children in the age group of 0-6 years across 3089+ Anganwadis in Rajasthan. Through this campaign, HZL aims to break the chain of malnutrition and provide good health for children, lactating women and families, who have been severely impacted by the aftermath of Covid-19 pandemic.

In the wake of this unprecedented pandemic, vulnerable communities continue to struggle for food and ration. This has impacted lactating mothers, new born and young children the most. HZL’s KBNRB program till date has touched lives of more than 17,000 Severe Acute Malnutrition (SAM) and Moderate Acute Malnutrition (MAM) children. About 263 Khushi workers participated in the effort voluntarily, by assisting in supplying dry ration and Take-Home Ration (THR) for 2,372 SAM & MAM children, with support from Anganwadi and ASHA team of volunteers. Another set of 9,500 vulnerable families have also been ensured with supply of dry ration. Furthermore, the Company’s partners mobilized community and as a result more than 2,500 families received dry ration support from ~300 local donors.

The project is being implemented in partnership with reputed NGOs like Gramin Avam Samajik Vikas Sanstha (Ajmer), CARE India (Bhilwara & Chittorgarh), Jatan Sansthan (Rajsamand) and Seva Mandir (Udaipur) and would cover five districts of Rajasthan.  The campaign has been launched under Khushi Anganwadi programme which is a unique tri-partite Public-People initiative.

About Hindustan Zinc Limited

Hindustan Zinc, a Vedanta Group Company, is one of the world’s largest and India’s only integrated producer of Zinc-Lead and Silver. The Company has its Headquarter at Udaipur in the State of Rajasthan where it has its Zinc-Lead mines and smelting complexes. Hindustan Zinc is self-sufficient in power with captive thermal power plants and also has ventured into green energy by setting up wind power plants. The Company is ranked 1st in Asia-Pacific and globally 5th in Dow Jones Sustainability Index in 2019 amongst Mining & Metal companies. Hindustan Zinc is a certified Water Positive Company.

As a socially responsible corporate, Hindustan Zinc has been relentlessly working to improve the lives of rural and tribal people residing near its business locations. The company is amongst the Top 15 CSR Spenders in India and are currently reaching out to 500,000 people in 184 core villages of Rajasthan and 5 in Uttarakhand. As a market leader, Hindustan Zinc governs about 79% of growing Zinc market and 95% of growing Silver market in India.

इतिहास में फेर बदल पर मेवाड़ परिवार ने जताई आपत्ति, महाराणा उदयसिंह को बताया बनवीर का हत्यारा

लगता है की इतिहास  राजनीती की भेंट चढ़ रहा है। अब इतिहास भी बदलती सरकारों के साथ साथ बदलने लगा है। जो सरकार आई वो अपने हिसाब से पाठ्यक्रम में  फेरबदल कर देते है। और सरकार बदली तो फिर से इतिहास भी बदल जायेगा। इस सब में उस इतिहास से जुड़े लोगो की भावनाये तो आहत होती ही  है,विद्यार्थी भी असमंजस में है की उन्हें आखिर क्या पढ़ना है और क्या नहीं।मेवाड़ के पूर्व राज परिवार के वशंजों ने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की किताबों में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ पर कड़ी आपत्ति जताई है।भास्कर में छपी गौरव द्विवेदी की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्वराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि स्कूली किताबों में इतिहास को बेतुके ढंग से पढ़ाना पाठ्यक्रम निर्धारकों की भूमिका में बैठे लोगों की अज्ञानता और कमजोर मानसिकता का प्रदर्शन है।स्वार्थ के लिए इतिहास को विकृत करने वालों को इतिहास माफ नहीं करेगा। लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का कहना है कि स्वतंत्रता और स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप ने सबको एकसूत्र में बांधा था। महाराणा उदयसिंह ने भी मेवाड़ को सशक्त रखने के साथ नई दिशा दी थी। पाठ्यक्रम में सही जानकारियां नहीं दी गईं तो बच्चे अपने गौरवशाली इतिहास काे कैसे जान पाएंगे।

इतिहास के जानकार डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने दैनिक भास्कर की खबर का हवाला देते हुए पुस्तक समीक्षा समिति पर ही सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि ‘महाराणा प्रताप में धैर्य, संयम और योग्यता का अभाव था…’, ऐसी तथ्यहीन जानकारी बच्चों को पढ़ाना शर्मनाक है। यह देश के गौरवपूर्ण इतिहास को विकृत करने का प्रयास है। हल्दीघाटी से लेकर दिवेर के युद्ध तक और उससे भी आगे महाराणा प्रताप ने पूरे जीवन धीरज, संयम और योग्यता का परिचय दिया था। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में इतिहास के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल भादानी ने हल्दीघाटी के नामकरण के तर्क को काल्पनिक और हास्यास्पद बताया। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने एक साहित्यकार का हवाला दिया है, लेकिन साहित्यकार तो कल्पना का अधिकारी होता है, इतिहास का नहीं। इतिहासकार राजेंद्रनाथ पुरोहित का कहना है कि निजामुद्दीन अहमद, बांकीदास और कर्नल जेम्स टॉड ने भी हल्दीघाटी नाम का कारण पीली मिट्टी वाली पहाड़ी को ही बताया है। प्रताप पर शोध कर चुके प्रो. चंद्रशेखर शर्मा हल्दू के वृक्ष बहुतायत में होने के कारण हल्दीघाटी नाम पड़ना बता चुके है। हल्दीघाटी युद्ध में एक भी महिला के युद्ध करने का कोई प्रमाण नहीं मिलता। यदि महाराणा प्रताप की पत्नी लड़ी भी होतीं तो फारसी स्रोतों में प्रमुखता से जिक्र जरूर होता।

आरबीएसई इस बार 10वीं कक्षा में नई किताब ‘राजस्थान का इतिहास और संस्कृति’ पढ़ाने जा रहा है। इसमें महाराणा उदयसिंह को बनवीर का हत्यारा बताया गया है। अध्याय-1 में राजस्थान के प्रमुख राजपूत वंशों का परिचय है। पेज नंबर 11 पर छापा है- 1537 ई. में उदयसिंह का राज्याभिषेक हुआ। 1540 ई. में मावली के युद्ध में उदयसिंह ने मालदेव के सहयोग से बनवीर की हत्या कर मेवाड़ की पैतृक सत्ता प्राप्त की थी। 1559 में उदयपुर में नगर बसाकर राजधानी बनाया। यही नहीं, हल्दीघाटी के नामकरण में डॉ. महेंद्र भाणावत की किताब ‘अजूबा भारत का’ के हवाले से लिखा है कि हल्दीघाटी नाम हल्दिया रंग की मिट्टी के कारण नहीं पड़ा। ऐसी मिट्टी यहां है भी कहां? लाल, पीली और काली मिट्टी है।

हल्दी चढ़ी कई नव विवाहिताएं पुरुष वेश में इस युद्ध में लड़ मरीं। यही नहीं, हकीम खां सूर के सामने मुगल सेना का नेतृत्वकर्ता जगन्नाथ कच्छवाहा काे बताया है, जबकि इतिहासकार कहते हैं कि मुगल सेना का नेतृत्व मानसिंह ने किया था। कच्छवाहा 1576 में लड़े इस युद्ध के आठ साल बाद पहली बार मेवाड़ आया था।

जिंक का ‘‘कोई बच्चा रहें ना भूखां‘‘ अभियान साबित हो रहा वरदान

कोविड 19 महामारी से लड़ने के लिए वैसे तो हर व्यक्ति ने अपनी ओर से हरसंभव मदद के लिए कोराना वारियर बन कर एकदूसरें की तरफ मदद के लिए हाथ बढ़ाएं लेकिन देश के भविष्य कहें जाने वाले नौनिहालों के लिए वेदांता हिन्दुस्तान जिंक के ‘कोई बच्चा रहें ना भूखा‘ अभियान वरदान साबित हो रहा है। महामारी की विषम परिस्थिति में खुशी परियोजना से जुडे़ कोरोना वारियर्स द्वारा आईसीडीएस विभाग के साथ मिलकर खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में पोषण की कमी से जुझं रहे आंगनवाडी के बच्चों और माताओं तक आहार पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। सामान्य दिनों में आंगनवाडी केन्द्रों में आने वाले बच्चों की शालापूर्व शिक्षा, उनके स्वास्थ्य और पोषण के लिए कार्य करने के साथ साथ स्वास्थ्य सर्वे से बच्चों की जानकारी जुटाने के कारण उन बच्चों तक पहुंच संभव हो सकी जो कि अतिकुपोषित और कुपोषित हैं। इस संकट के समय में उन तक पहुंच संभव हो कर उन्हें आहार उपलब्ध कराया जा रहा है जो कि वरदान साबित हो रहा है। इस अभियान की खास बात यह भी है कि इसमें क्षेत्र के दानदाता भी बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे है।

हिन्दुस्तान जिंक का यह अभियान खासतौर पर कमजोर वर्ग के उन लोगो के बच्चों तक मददगार साबित हुआ है जो कि एक वक्त के भोजन के लिए भी संघर्षरत हैं। खुशी आंगनवाडी कार्यक्रम के माध्यम से हिन्दुस्तान जिं़क ने सरकार के समेकित बाल विकास सेवाओं के साथ जुड़कर राजस्थान की 3089 आंगनवाडियों में 0 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के स्वास्थ्य एवं नियमित स्वास्थ्य सुधार पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। कोविड 19 महामारी के चुनौतिपूर्ण समय में हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा यह अभियान अजमेंर में ग्रामीण एवं सामाजिक विकास संस्था, भीलवाडा में एवं चित्तौडगढ़ में केयर इण्डिया , राजसमंद में जतन संस्थान एवं उदयपुर में सेवा मंदिर के सहयोग से प्रारंभ किया।

इस अभियान का उद्धेश्य लोगों को कोराना वायरस से बचाव के लिए जागरूक करना भी था जिससे कि अधिक से अधिक लोगों को इसकी जानकारी दी जा सकें।  17 हजा़र कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के परिवारों तक कोई बच्चा रहें ना भूखा अभियान के माध्यम से पहुंचने में 263 खुशी कार्यकर्ताओं ने स्वैच्छिक सेवा दे कर सुखा राशन एवं टेक होम राशन को 2460 अतिकुपोषित और कुपोषित परिवारों तक आंगनवाडी एवं आशा सहयोगिनी के सहयोग से उपलब्ध कराया। 9500 से अधिक जरूरतमंद परिवारों को सुखा राशन उपलब्ध कराया गया वहीं स्थानिय दानदाताओं के सहयोग से 5061 परिवारों को खाद्यान्न की आपूर्ति की गयी जो कि अभी भी जारी है। इस अभियान के तहत् 3080 फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स को पीपीई और 9490 परिवारों को मास्क उपलब्ध कराये गये।

विश्व में किसी भी देश की तुलना में भारत में बच्चों में कुपोषण से वेस्टिंग का प्रतिशत अधिक हैं। देश में 69 प्रतिशत बच्चों की मृत्यु का कारण कुपोषण है। वहीं कोविड-19 महामारी इस प्रतिशत को कम करने में बडी चुनौती के रूप में सामने आया है ऐसे में हिन्दुस्तान जिं़क का अभियान ‘‘कोई बच्चा रहें ना भूखा ‘‘ प्रदेश के कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के लिए वरदान साबित हो रहा है। देश मंे 10 में से 4 बच्चें वेस्टिंग अर्थात बच्चें का वजन उसकी आयु के अनुपात में कम होना और  स्टंटींग का आर्थात आयु के अनुपात में कद कम रहने की वजह से मानवीय क्षमता तक नहीं पहुंच पाते हैं। भारत में 30 राज्यों में से राजस्थान इसमें 13वें स्थान पर है। दैनिक मजदूरी कर एक वक्त का भोजन मुश्किल से जुटा पाने वालें परिवारों को महामारी कोविड-19 के समय में बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन जुटा पाना बहुत ही मुश्किल था, लेकिन जिं़क के कोई भी बच्चा भूखा ना रहें अभियान के तहत् 5 जिलों में कुपोषित बच्चों तक पोषण पहुंचाना संभव हो पाया है।

जीरो हंगर और गुड हेल्थ सुनिश्चित करने का प्रयास  ‘कोई बच्चा रहे ना भूखा‘ अभियान को टेक्नाॅलोजी से संभव किया गया। यह अभियान विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है,  जिससे कुपोषण के शिकार बच्चों और परिवारों को राजस्थान में इन 5 जिलों में पोषण के लिए आवश्यक बुनियादी खाद्य आपूर्ति के साथ स्वास्थ्य का पता लगाने के साथ ही महामारी की स्थिति में भी भोजन की आपूर्ति को संभव किया जा सका है। इस अभियान के तहत् बच्चों, स्तनपान कराने वाली महिलाओं और परिवारों के लिए अच्छा स्वास्थ्य प्रदान कराने के लिए आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के साथ नियमित स्वास्थ्य जांच और कुपोषित बच्चों और गर्भवती-स्तनपान कराने वाली महिलाओं का टीकाकरण किया जा रहा है और आईसीडीएस के माध्यम से, टीएचआर की उपलब्धता को सुनिश्चित किया गया है।