विश्व स्तर पर काम करने वाली भारत की सबसे बड़ी डायवर्सिफाइड प्राकृतिक संसाधन कंपनी वेदांता ने वरिष्ठ स्तर पर दो नियुक्तियों की घोषणा की है। ये नियुक्तियां कोविड के बाद अगले चरण की वृद्धि हेतु तैयारियों का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री द्वारा किए गए आत्मनिर्भर भारत के आह्वान पर अपनी प्रतिबद्धता प्रकट करते हुए कंपनी ने यह कदम उठाया है। गौरतलब है कि भारत के कुल आयात का 50 प्रतिशत से अधिक प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र में होता है।
जितेन्द्र कुमार दादू जो दिसंबर 2017 में भारत सरकार से सचिव की रैंक पर रिटायर हुए हैं, उन्हें वरिष्ठ सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया गया है। दादू ने सेंट स्टीफंस काॅलेज, दिल्ली से अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई की है और आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए किया है, वह 1983 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। अपने लंबे और शानदार करिअर में उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया है जिनमें दिल्ली सिविल सप्लाईज़ काॅर्पोरेशन के चेयरमेन तथा भारत सरकार के वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव एवं संयुक्त सचिव का दायित्व भी शामिल है। वह काॅर्पोरेट रणनीति टीम तथा हिन्दुस्तान ज़िंक की प्रबंधन समिति के साथ काम करते हुए अहम कारोबारी कदमों को आगे बढ़ाएंगे। श्री दादू ने अपनी नियुक्ति पर कहा, ’’बीते वर्षों में वेदांता ने उद्योग जगत एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं। मैं ऐसे वक्त पर वेदांता के साथ जुड़ कर बहुत प्रसन्न हूं जब वह आत्मनिर्भर भारत के निर्माण पर ध्यान केन्द्रित कर रही है।’’
श्री दादू वेदांता के जिस परामर्शक बोर्ड में शामिल हुए हैं उसमें पूर्व विदेश सचिव रंजन मथाई, पूर्व आर्थिक मामले सचिव आर गोपालन और पूर्व पैट्रोलियम व प्राकृतिक गैस सचिव सौरभ चंद्रा शामिल हैं।
स्टील अथाॅरिटी आॅफ इंडिया लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन व प्रबंध निदेशक प्रकाश कुमार सिंह वेदांता की इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स लिमिटेड (ईएसएल) के प्रेसिडेंट-ग्रोथ प्रोजेक्ट्स के पद पर नियुक्त हुए हैं। आईआईटी रुड़की से मेटालर्जिकल इंजीनियर श्री सिंह ईएसएल प्रबंधन समिति का अभिन्न हिस्सा हैं तथा वह कंपनी की मार्केटिंग, नीति और वृद्धि में अहम भूमिका निभाएंगे। श्री सिंह ने अपनी नियुक्ति पर कहा, ’’वेदांता ईएसएल की कायापलट की कहानी बहुत प्रेरणादायी है। इतने कम वक्त में कंपनी वृद्धि की अवस्था में पहुंच गई है और इस सफर में कंपनी से जुड़ने पर मैं बहुत उत्साहित हूं।’’
इन दोनों नियुक्तियों पर वेदांता के सीईओ सुनील दुग्गल ने कहा, ’’श्री दादू और श्री सिंह के हमारे प्रतिष्ठित परामर्शक बोर्ड में शामिल होने पर हम बेहद खुश हैं। उनके व्यापक अनुभव और ज्ञान से हमें जो लाभ मिलेगा उसके लिए हम शुक्रगुज़ार रहेंगे।
कोरोना महामारी और लॉक डाउन में एक तरफ जहाँ करोड़ों लोगों की र्तोज़ी रोटी पर असर पडा है वहीँ राजस्थान के मेवाड़ में स्थित डूंगरपुर जिले के 100 किसानों ने बम्पर फसल का उत्पादन किया है . इस बम्पर फसल के उत्पादन में सहयोगी की भूमिका निभाई डीएस ग्रुप के पहल प्रोजेक्ट ने . पिछले तकरीबन एक वर्ष में डुंगरपुर के इन किसानों ने डीएस ग्रुप के ‘पहल’ प्रोजेक्ट से लाभ उठा कर 1,03,580 किलो सब्जियों का उत्पादन किया। ये किसान अब तक 70,350 किलो सब्जियों का विक्रय कर चुके है तथा इन किसानों को इससे 25.38 लाख रूपयों की अतिरिक्त आय हुई है। डीएस गुप द्वारा सामाजिक उत्थान के लिए शुरू किए गये ‘पहल’ प्रोजेक्ट में इन 100 किसानों को वाड़ी विकसित करने हेतु प्रशिक्षित किया गया जो कि आदिवासी ग्रामीण अंचल के लिए वरदान साबित हो रहा है। ‘पहल’ प्रोजक्ट किसानों को कम जमीन से कई प्रकार की फसल जैसे जमीन के अंदर एवं उपर उगने वाली सब्जियां, बेल वाली सब्जिया एवं सीजनल फल आदि उगाने हेतु प्रेरित कर रहा है। इस मोनोकल्चर विधि द्वारा कम जमीन में अधिक उपज ली जा सकती है। ‘पहल’ प्रोजेक्ट से आजीविका के स्तर में सुधार लाया जा रहा है जिससे स्थानीय मांग पूरी होने के साथ ही उन्हें अतिरिक्त आय मिल रही है। ‘पहल’ प्रोजक्ट छोटे और सीमांत किसानों को खेती के लिए पानी की दक्षता को बढ़ावा देने के साथ ही कृषि और खाद्य सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए है। इसका उद्देश्य स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए लाभप्रद सब्जी की खेती शुरू करना है और साथ ही किसानों के लिए अतिरिक्त आय उत्पन्न करना और उनकी आजीविका को सुरक्षित करना है। गरीब आदिवासी परिवारों के लिए कुपोषण और कई अन्य सामाजिक और आर्थिक समस्या के समाधान में भी ‘पहल’ प्रोजेक्ट सहायक है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से पर्यावरण को संरक्षित करने और क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के कार्य को भी सुनिश्चित किया जा रहा है। आजीविका सुधार कार्यक्रम डीएस ग्रुप द्वारा सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रमुख कार्य में से एक है। डूंगरपुर जिले का सुराता क़स्बा इससे पहले सब्जियों की आपुर्ति के लिए गुजरात के मोडासा पर निर्भर था। अब 60 से 70 प्रतिशत ताजा सब्जियों की जरूरत डीएस ग्रुप के पहल’ प्रोजेक्ट के कारण पुरी हो रही है। ‘पहल’ प्रोजेक्ट से जुड़े किसान कांतिलाल का कहना है कि इससे पहले परिवार को पालने के लिए पड़ोसी राज्यों में काम की तलाश मजबूरी थी, लेकिन अब वह इस नई तकनीक से पर्याप्त आय अर्जित करने में सक्षम हैं। उसके बच्चों को भी पर्याप्त भोजन और अच्छी शिक्षा मिल पा रही है और वह अपने सुरक्षित भविष्य के प्रति वह आश्वस्त नजर आ रहा है।
डोल कुंजेला गांव की निवासी परी के पति दैनिक मजदूरी के लिए गुजरात जाते थे। वर्ष में 4 माह से अधिक समय गुजरात में कार्य करना उनकी मजबूरी थी, लेकिन डीएस ग्रुप के पहल प्रोजेक्ट से जुड़ने के बाद अब पूरा परिवार साथ रह कर सुरक्षित भविष्य की ओर अग्रसर है। अब तक 100 किसान वाड़ी से जुड़ चुके हैं और आस पास की ग्राम पंचायत के 200 से अधिक आदिवासी किसान इससे जुड़ने के लिए नामाकंन करा चुके हैं।
डीएस ग्रुप द्वारा इस परियोजना से जोड़ने के लिए चयन प्रक्रिया को अपनाते हुए वाड़ी हेतु उपयुक्त भूमि, खेत में पूर्व में प्राप्त फसल, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता, खेती की नई तकनीक के साथ ही सब्जी को बेचने के लिए रूचि जैसी मुख्य बातों का ध्यान रखा जाता है। डीएस ग्रुप द्वारा किसानों को सरकार की योजनाओं जैसे सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई). प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, राजस्थान सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना और राजश्री योजना से जोड़कर भी सहायता दी जा रही है। धरमपाल सत्यपाल फाउंडेशन, डूंगरपुर की सुराता ग्राम पंचायत में वर्ष 2015 से कार्य कर रही है। राजस्थान का डूंगरपुर जिला, कम भूमि उत्पादकता के साथ, राज्य के सबसे छोटे जिलों में से एक है। जिले की जलवायु शुष्क है। सुराता और पास की ग्राम पंचायत में अधिकांश समुदाय के सदस्य आदिवासी हैं, और उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत या तो कृषि है या दैनिक मजदूरी। ऐसे में डीएस ग्रुप की पहल प्रोजेक्ट ने इन आदिवासी किसानों की दिनचर्या और जीवन को बदलने में अपनी अहम भूमिका निभाई है जिससे आने वाले दिनों में और बेहतर परिणाम सामने आयेंगे।
हिन्दुस्तान जिंक की 5 इकाईयां राज्य स्तरीय भामाशाह पुरस्कार से सम्मानित
हिन्दुस्तान जिंक की पांच इकाईयों राजपुरा दरीबा काॅम्प्लेक्स, चंदेरिया लेड जिं़क स्मेल्टर, जावर माइंस, रामपुरा आगुचा खान और कायड़ माइन को वर्ष 2019-20 में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए राज्य स्तरीय 26वें भामाशाह सम्मान समारोह में पुरस्कृत किया गया। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के मुख्य अतिथ्य में विडियों काॅफें्रसिंग के माध्यम से आॅनलाइन भामाशाह सम्मान समारोह में राजस्थान के प्रमुख 50 भामाशाहों से संवाद कर राजस्थान स्कूल शिक्षा मंे दिए गए सहयोग के लिए प्रोत्साहित किया गया। समारोह में हिन्दुस्तान जिं़क राजपुरा दरीबा काॅम्प्लेक्स को राज्य में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
समारोह में हिन्दुस्तान जिं़क की हेड सीएसआर अनुपम निधि ने सुझाव दिया कि विद्यार्थियों को सीखने में तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है साथ ही भाषा से जोडने के लिए अधिक से अधिक अंग्रेजी को शामिल करने के प्रयास करने होंगें। हिन्दुस्तान जिं़क के डायरेक्टर माइंस सुजल शाह, हेड कायड माइन कस्तुर मीणा, सीएसआर हेड विशाल अग्रवाल, दलपत सिंह चैहान, अभय गौतम, आनंद चक्रवर्ती, रूचिका चावला, ने इस अवसर पर अपने क्षेत्रो में हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यो की जानकारी एवं सुझाव दिए।
इस वर्ष हिन्दुस्तान जिं़क की इकाईयों द्वारा करीब 32.59 करोड की राशि व्यय की गयी। राजपुरा दरीबा काॅम्प्लेक्स ने राज्य में शिक्षा उन्नयन हेतु सर्वाधिक 8.95 करोड़ की राशि व्यय कर राज्य में प्रथम, चंदेरिया लेड जिं़क स्मेल्टर ने 7.01 करोड़, जावर माइंस ने 7.59 करोड़, रामपुरा आगुचा ने 6.70 एवं कायड माइन द्वारा 2.34 करोड व्यय किया गया।
इन कार्यो में राजकीय माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में गणित, अंगे्रजी, व विज्ञान विषयाध्यापकों की अतिरिक्त व्यवस्था, विद्यालयों का जीर्णोद्धार, उंची उडान कार्यक्रम में आईआईटी हेतु कोचिंग, माइंडस्पार्क कार्यक्रम के तहत् पहली से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को कम्यूटर के माध्यम से हिन्दी, अगंे्रजी और गणित का अध्ययन, छात्राओं को रिंगस महाविद्यालय में उच्च शिक्षा हेतु सहयोग, पुस्तकालय व प्रयोगशाला हेतु फर्नीचर एवं सुरक्षा उपकरण, अध्यापको के अध्ययन हेतु पुस्तकें एवं अध्ययन सामग्री, राजकीय अध्यापको हेतु कार्यशाला, ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविर, शिक्षा संबंल के अन्तर्गत नियुक्त किये गये अध्यापकों का आमुखीकरण प्रशिक्षण, बाल कल्याण केन्द्र के छात्र छात्राओं को शुद्ध पेयजल, गणवेश वितरण, ब्लाॅक स्तरीय खेलकुद प्रतियोगिताओं में सहयोग, ब्लाॅक स्तरीय विज्ञान मेले में आर्थिक सहयोग, अलग-अलग राजकीय विद्यालयों में कक्षा-कक्षांे का निर्माण, बालिकाओं एवं बालकों के लिए शौचालय का निर्माण, ट्युबवेल लगवाने का कार्य, ग्रिन बोर्ड उपलब्ध कराना, विद्यालयों की छतों पर वाटर प्रुफींग का कार्य, भुमीगत टेंक का निर्माण, जिलों के 3089 आंगनवाडी केन्द्रो पर शालापुर्व शिक्षा, स्वास्थ्य परिक्षण किया जा कर शैक्षिक उन्नयन हेतु खुशी कार्यक्रम द्वारा सहयोग किया गया है।
उदयपुर, हिन्दुस्तान ज़िंक ने शहर में अपने नए 10 मीलियन लीटर्स प्रतिदिन (एमएलडी) सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को चालू कर दिया है। इस नए संयंत्र से हिन्दुस्तान जिं़क के सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्रों की कुल क्षमता 55 एमएलडी हो गई है। इसके अलावा कंपनी एक 5 एमएलडी क्षमता वाली इकाई का काम भी पूरा करने वाली है, जिससे कुल क्षमता 60 एमएलडी हो जाएगी। सिक्वेंशियल बैच रिऐक्टर टेक्नोलाॅजी के परिणास्वरूप रसायन मुक्त और जैविक प्रक्रियाएं होती हैं। नया 10 एमएलडी प्लांट ट्रीटेड पानी उत्पादित करता है जिसका 50 प्रतिशत आयड़ नदी में भेजा जाता है।झीलों का शहर उदयपुर में रोजाना 70 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होता है। हिन्दुस्तान जिं़क एक अतिरिक्त 5 एमएलडी प्लांट की कमिशनिंग के अंतिम चरण में है, जिसके बाद सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कुल क्षमता 60 एमएलडी हो जाएगी। यानी इसके बाद उदयपुर शहर के लगभग पूरे सीवेज का ट्रीटमेंट हो पाएगा।इस बारे में हिन्दुस्तान ज़िंक और वेदांता लिमिटेड के सीईओ श्री सुनील दुग्गल ने कहा, ’’हिन्दुस्तान ज़िंक में हमने हमेशा विचारों, संसाधनों व प्रयासों से समुदायों को सशक्त बनाने में विश्वास किया है। 2014 में हमने उदयपुर का पहला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया था। सरकारी-निजी भागीदारी माॅडल के तहत 20 एमएलडी क्षमता का यह संयंत्र लगाया गया। बीते 6 वर्षों के दौरान हम इस क्षमता को तिगुना करने की दिशा में आगे बढ़ते आए हैं। यह अत्याधुनिक 10 एमएलडी प्लांट हमारी कोशिशों को और बढ़ावा देगा जिनके द्वारा हम एक स्वच्छता एवं वाटर पाॅजिटिव शहर बनाने के सपने को हकीकत में बदलना चाहते हैं।’’
उदयपुर म्यूनिसिपल काॅर्पोरेशन के कमिश्नर श्री अंकित कुमार सिंह, आईएएस ने कहा, ’’हिन्दुस्तान जिं़ ने अनुबंध के मुताबिक तय समय में 10 एमएलडी क्षमता वाले प्लांट समेत उदयपुर शहर में कुल 55 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य पूरा कर दिखाया है, इसके लिए हम कंपनी प्रबंधन की सराहना करते हैं।’’
कमिश्नर महोदय ने यह भी कहा कि, ’’सभी सामाजिक विकास परियोजनाओं के लिए वेदांता की हिन्दुस्तान ज़िंक हमेशा से उदयपुर म्यूनिसिपल काॅर्पोरेशन की प्रमुख सहयोगी रही है और उन्होंने जो भी प्रयास किए हैं उनके लिए हम धन्यवाद करते हैं।’’
एसबीआर टेक्नोलाॅजी में ऊर्जा संरक्षण की दर बेहतर है साथ ही इससे रसायन मुक्त ट्रीटेड पानी भी मिलता है। हाइड्रोलिक्स मैकेनिज़्म पर इस पूरी तरह स्वचालित प्लांट में ऊर्जा की खपत घट गई है। इसकी ट्रीटमेंट प्रक्रिया में कोई भी हानिकारक उत्सर्जन नहीं होता इसलिए यह पर्यावरण के अनुकूल है। हिन्दुस्तान ज़िंक की ओर से हरित एवं नवीकरणीय ऊर्जा के पहलू पर यह अतिरिक्त योगदान है। गौरतलब है कि कंपनी ने इन एसटीपी को विकसित करते समय पास ही में सोलर पैनल भी लगाए हैं।
उदयपुर उन शहरों में है जिन्हें भारत सरकार ने स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत चुना है। उदयपुर की झीलों में सीवेज का प्रवाह बहुत बड़ी समस्या बन गया था, इससे प्रदूषण बहुत ज्यादा बढ़ गया था। उपयोग के लायक पानी हेतु वैकल्पिक स्त्रोत विकसित करने व उसे संरक्षित करने की जरूरत थी। हिन्दुस्तान जिं़क की इकाईयां ’ज़ीरो डिस्चार्ज’ के सिद्धांत पर काम करती हैं और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने का मतलब है कि जल संरक्षण तथा झीलों में गंदगी का प्रवाह घटाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस क्षमता वृद्धि से कंपनी को उम्मीद है कि उदयपुर का अधिकतम घरेलू सीवेज का ट्रीटमेंट हो सकेगा और इस तरह ताज़े पानी पर निर्भरताएं कम होंगी।
Udaipur Post. Hindustan Zinc Limited (HZL), in association with Government’s Integrated Child Development Services (ICDS), has launched “Koi Bacha Rahe Na Bhookha” campaign – aimed at improving the health and well-being of the children in the age group of 0-6 years across 3089+ Anganwadis in Rajasthan. Through this campaign, HZL aims to break the chain of malnutrition and provide good health for children, lactating women and families, who have been severely impacted by the aftermath of Covid-19 pandemic.
In the wake of this unprecedented pandemic, vulnerable communities continue to struggle for food and ration. This has impacted lactating mothers, new born and young children the most. HZL’s KBNRB program till date has touched lives of more than 17,000 Severe Acute Malnutrition (SAM) and Moderate Acute Malnutrition (MAM) children. About 263 Khushi workers participated in the effort voluntarily, by assisting in supplying dry ration and Take-Home Ration (THR) for 2,372 SAM & MAM children, with support from Anganwadi and ASHA team of volunteers. Another set of 9,500 vulnerable families have also been ensured with supply of dry ration. Furthermore, the Company’s partners mobilized community and as a result more than 2,500 families received dry ration support from ~300 local donors.
The project is being implemented in partnership with reputed NGOs like Gramin Avam Samajik Vikas Sanstha (Ajmer), CARE India (Bhilwara & Chittorgarh), Jatan Sansthan (Rajsamand) and Seva Mandir (Udaipur) and would cover five districts of Rajasthan. The campaign has been launched under Khushi Anganwadi programme which is a unique tri-partite Public-People initiative.
About Hindustan Zinc Limited
Hindustan Zinc, a Vedanta Group Company, is one of the world’s largest and India’s only integrated producer of Zinc-Lead and Silver. The Company has its Headquarter at Udaipur in the State of Rajasthan where it has its Zinc-Lead mines and smelting complexes. Hindustan Zinc is self-sufficient in power with captive thermal power plants and also has ventured into green energy by setting up wind power plants. The Company is ranked 1st in Asia-Pacific and globally 5th in Dow Jones Sustainability Index in 2019 amongst Mining & Metal companies. Hindustan Zinc is a certified Water Positive Company.
As a socially responsible corporate, Hindustan Zinc has been relentlessly working to improve the lives of rural and tribal people residing near its business locations. The company is amongst the Top 15 CSR Spenders in India and are currently reaching out to 500,000 people in 184 core villages of Rajasthan and 5 in Uttarakhand. As a market leader, Hindustan Zinc governs about 79% of growing Zinc market and 95% of growing Silver market in India.
लगता है की इतिहास राजनीती की भेंट चढ़ रहा है। अब इतिहास भी बदलती सरकारों के साथ साथ बदलने लगा है। जो सरकार आई वो अपने हिसाब से पाठ्यक्रम में फेरबदल कर देते है। और सरकार बदली तो फिर से इतिहास भी बदल जायेगा। इस सब में उस इतिहास से जुड़े लोगो की भावनाये तो आहत होती ही है,विद्यार्थी भी असमंजस में है की उन्हें आखिर क्या पढ़ना है और क्या नहीं।मेवाड़ के पूर्व राज परिवार के वशंजों ने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की किताबों में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ पर कड़ी आपत्ति जताई है।भास्कर में छपी गौरव द्विवेदी की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्वराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि स्कूली किताबों में इतिहास को बेतुके ढंग से पढ़ाना पाठ्यक्रम निर्धारकों की भूमिका में बैठे लोगों की अज्ञानता और कमजोर मानसिकता का प्रदर्शन है।स्वार्थ के लिए इतिहास को विकृत करने वालों को इतिहास माफ नहीं करेगा। लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का कहना है कि स्वतंत्रता और स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप ने सबको एकसूत्र में बांधा था। महाराणा उदयसिंह ने भी मेवाड़ को सशक्त रखने के साथ नई दिशा दी थी। पाठ्यक्रम में सही जानकारियां नहीं दी गईं तो बच्चे अपने गौरवशाली इतिहास काे कैसे जान पाएंगे।
इतिहास के जानकार डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने दैनिक भास्कर की खबर का हवाला देते हुए पुस्तक समीक्षा समिति पर ही सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि ‘महाराणा प्रताप में धैर्य, संयम और योग्यता का अभाव था…’, ऐसी तथ्यहीन जानकारी बच्चों को पढ़ाना शर्मनाक है। यह देश के गौरवपूर्ण इतिहास को विकृत करने का प्रयास है। हल्दीघाटी से लेकर दिवेर के युद्ध तक और उससे भी आगे महाराणा प्रताप ने पूरे जीवन धीरज, संयम और योग्यता का परिचय दिया था। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में इतिहास के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल भादानी ने हल्दीघाटी के नामकरण के तर्क को काल्पनिक और हास्यास्पद बताया। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने एक साहित्यकार का हवाला दिया है, लेकिन साहित्यकार तो कल्पना का अधिकारी होता है, इतिहास का नहीं। इतिहासकार राजेंद्रनाथ पुरोहित का कहना है कि निजामुद्दीन अहमद, बांकीदास और कर्नल जेम्स टॉड ने भी हल्दीघाटी नाम का कारण पीली मिट्टी वाली पहाड़ी को ही बताया है। प्रताप पर शोध कर चुके प्रो. चंद्रशेखर शर्मा हल्दू के वृक्ष बहुतायत में होने के कारण हल्दीघाटी नाम पड़ना बता चुके है। हल्दीघाटी युद्ध में एक भी महिला के युद्ध करने का कोई प्रमाण नहीं मिलता। यदि महाराणा प्रताप की पत्नी लड़ी भी होतीं तो फारसी स्रोतों में प्रमुखता से जिक्र जरूर होता।
आरबीएसई इस बार 10वीं कक्षा में नई किताब ‘राजस्थान का इतिहास और संस्कृति’ पढ़ाने जा रहा है। इसमें महाराणा उदयसिंह को बनवीर का हत्यारा बताया गया है। अध्याय-1 में राजस्थान के प्रमुख राजपूत वंशों का परिचय है। पेज नंबर 11 पर छापा है- 1537 ई. में उदयसिंह का राज्याभिषेक हुआ। 1540 ई. में मावली के युद्ध में उदयसिंह ने मालदेव के सहयोग से बनवीर की हत्या कर मेवाड़ की पैतृक सत्ता प्राप्त की थी। 1559 में उदयपुर में नगर बसाकर राजधानी बनाया। यही नहीं, हल्दीघाटी के नामकरण में डॉ. महेंद्र भाणावत की किताब ‘अजूबा भारत का’ के हवाले से लिखा है कि हल्दीघाटी नाम हल्दिया रंग की मिट्टी के कारण नहीं पड़ा। ऐसी मिट्टी यहां है भी कहां? लाल, पीली और काली मिट्टी है।
हल्दी चढ़ी कई नव विवाहिताएं पुरुष वेश में इस युद्ध में लड़ मरीं। यही नहीं, हकीम खां सूर के सामने मुगल सेना का नेतृत्वकर्ता जगन्नाथ कच्छवाहा काे बताया है, जबकि इतिहासकार कहते हैं कि मुगल सेना का नेतृत्व मानसिंह ने किया था। कच्छवाहा 1576 में लड़े इस युद्ध के आठ साल बाद पहली बार मेवाड़ आया था।
कोविड 19 महामारी से लड़ने के लिए वैसे तो हर व्यक्ति ने अपनी ओर से हरसंभव मदद के लिए कोराना वारियर बन कर एकदूसरें की तरफ मदद के लिए हाथ बढ़ाएं लेकिन देश के भविष्य कहें जाने वाले नौनिहालों के लिए वेदांता हिन्दुस्तान जिंक के ‘कोई बच्चा रहें ना भूखा‘ अभियान वरदान साबित हो रहा है। महामारी की विषम परिस्थिति में खुशी परियोजना से जुडे़ कोरोना वारियर्स द्वारा आईसीडीएस विभाग के साथ मिलकर खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में पोषण की कमी से जुझं रहे आंगनवाडी के बच्चों और माताओं तक आहार पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। सामान्य दिनों में आंगनवाडी केन्द्रों में आने वाले बच्चों की शालापूर्व शिक्षा, उनके स्वास्थ्य और पोषण के लिए कार्य करने के साथ साथ स्वास्थ्य सर्वे से बच्चों की जानकारी जुटाने के कारण उन बच्चों तक पहुंच संभव हो सकी जो कि अतिकुपोषित और कुपोषित हैं। इस संकट के समय में उन तक पहुंच संभव हो कर उन्हें आहार उपलब्ध कराया जा रहा है जो कि वरदान साबित हो रहा है। इस अभियान की खास बात यह भी है कि इसमें क्षेत्र के दानदाता भी बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे है।
हिन्दुस्तान जिंक का यह अभियान खासतौर पर कमजोर वर्ग के उन लोगो के बच्चों तक मददगार साबित हुआ है जो कि एक वक्त के भोजन के लिए भी संघर्षरत हैं। खुशी आंगनवाडी कार्यक्रम के माध्यम से हिन्दुस्तान जिं़क ने सरकार के समेकित बाल विकास सेवाओं के साथ जुड़कर राजस्थान की 3089 आंगनवाडियों में 0 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के स्वास्थ्य एवं नियमित स्वास्थ्य सुधार पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। कोविड 19 महामारी के चुनौतिपूर्ण समय में हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा यह अभियान अजमेंर में ग्रामीण एवं सामाजिक विकास संस्था, भीलवाडा में एवं चित्तौडगढ़ में केयर इण्डिया , राजसमंद में जतन संस्थान एवं उदयपुर में सेवा मंदिर के सहयोग से प्रारंभ किया।
इस अभियान का उद्धेश्य लोगों को कोराना वायरस से बचाव के लिए जागरूक करना भी था जिससे कि अधिक से अधिक लोगों को इसकी जानकारी दी जा सकें। 17 हजा़र कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के परिवारों तक कोई बच्चा रहें ना भूखा अभियान के माध्यम से पहुंचने में 263 खुशी कार्यकर्ताओं ने स्वैच्छिक सेवा दे कर सुखा राशन एवं टेक होम राशन को 2460 अतिकुपोषित और कुपोषित परिवारों तक आंगनवाडी एवं आशा सहयोगिनी के सहयोग से उपलब्ध कराया। 9500 से अधिक जरूरतमंद परिवारों को सुखा राशन उपलब्ध कराया गया वहीं स्थानिय दानदाताओं के सहयोग से 5061 परिवारों को खाद्यान्न की आपूर्ति की गयी जो कि अभी भी जारी है। इस अभियान के तहत् 3080 फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स को पीपीई और 9490 परिवारों को मास्क उपलब्ध कराये गये।
विश्व में किसी भी देश की तुलना में भारत में बच्चों में कुपोषण से वेस्टिंग का प्रतिशत अधिक हैं। देश में 69 प्रतिशत बच्चों की मृत्यु का कारण कुपोषण है। वहीं कोविड-19 महामारी इस प्रतिशत को कम करने में बडी चुनौती के रूप में सामने आया है ऐसे में हिन्दुस्तान जिं़क का अभियान ‘‘कोई बच्चा रहें ना भूखा ‘‘ प्रदेश के कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के लिए वरदान साबित हो रहा है। देश मंे 10 में से 4 बच्चें वेस्टिंग अर्थात बच्चें का वजन उसकी आयु के अनुपात में कम होना और स्टंटींग का आर्थात आयु के अनुपात में कद कम रहने की वजह से मानवीय क्षमता तक नहीं पहुंच पाते हैं। भारत में 30 राज्यों में से राजस्थान इसमें 13वें स्थान पर है। दैनिक मजदूरी कर एक वक्त का भोजन मुश्किल से जुटा पाने वालें परिवारों को महामारी कोविड-19 के समय में बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन जुटा पाना बहुत ही मुश्किल था, लेकिन जिं़क के कोई भी बच्चा भूखा ना रहें अभियान के तहत् 5 जिलों में कुपोषित बच्चों तक पोषण पहुंचाना संभव हो पाया है।
जीरो हंगर और गुड हेल्थ सुनिश्चित करने का प्रयास ‘कोई बच्चा रहे ना भूखा‘ अभियान को टेक्नाॅलोजी से संभव किया गया। यह अभियान विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है, जिससे कुपोषण के शिकार बच्चों और परिवारों को राजस्थान में इन 5 जिलों में पोषण के लिए आवश्यक बुनियादी खाद्य आपूर्ति के साथ स्वास्थ्य का पता लगाने के साथ ही महामारी की स्थिति में भी भोजन की आपूर्ति को संभव किया जा सका है। इस अभियान के तहत् बच्चों, स्तनपान कराने वाली महिलाओं और परिवारों के लिए अच्छा स्वास्थ्य प्रदान कराने के लिए आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के साथ नियमित स्वास्थ्य जांच और कुपोषित बच्चों और गर्भवती-स्तनपान कराने वाली महिलाओं का टीकाकरण किया जा रहा है और आईसीडीएस के माध्यम से, टीएचआर की उपलब्धता को सुनिश्चित किया गया है।
I can’t cop out behind a smokescreen of powerlessness. We admitted we were powerless over alcohol—that our lives had become unmanageable. “We admitted we were powerless over alcohol—that our lives had become unmanageable. We came to believe that a power greater than ourselves could restore us to sanity.”
Recovery Coaching
Get the help you need from a therapist near you–a FREE service from Psychology Today. In this article, we’ll explain the language in greater detail and in simpler terms. And with the help of well-known recovery author Jeff Jay, we’ll also figure out how to actually work the Step and what it’s trying to teach us.
Once sober, if I decide to pick up a drink or drug, that’s on me too.
It’s not easy to admit this, but if we don’t accept that we are powerless, then we won’t be able to move forward.
The accountability and encouragement in meetings and therapy break the power of secrecy where addiction thrives.
Having had a spiritual awakening as a result of these Steps, we tried to carry this message to alcoholics, and to practice these principles in all our affairs.
In the one-year period after day one of going “dry” (this probably includes entering detox for several weeks or months at the outset) 40 % of those who report high levels of helping other alcoholics (top half) are still sober.
Narcotics Anonymous (NA)
He is the medical director at Alcohol Recovery Medicine. For over 20 years Dr. Umhau was a senior clinical investigator at the National Institute on Alcohol Abuse and Alcoholism of the National Institutes of Health (NIH). Recovery presents its own challenge, mostly because there is no obvious finish line. ‘” Dr. Heinzerling says, adding that it requires a lot of small choices https://ecosoberhouse.com/ every day that add up for the rest of your life. Alcoholics Anonymous is a fellowship of men and women who share their experience, strength and hope with each other that they may solve their common problem and help others to recover from alcoholism. Our family therapy program is second to none.Learn how we can help your family by calling a Treatment Advisor now.
Step 1 in AA – Why You Aren’t Powerless
This could mean God, a general belief system or the recovery community itself.
We admitted we were powerless over alcohol — that our lives had become unmanageable.
First, such a Higher Power functions to create an absolute quality to abstinence, which becomes more than a mere human contrivance or a matter of “relative” value.
Others come in no longer spiritual or religious, but having been so earlier in life.
I know it says it in the opening of the Big Book but the idea of saying I’m recovered is a bit scary. Our primary purpose is to provide a forum for discussing the A.A. Fellowship, its 12-step program of recovery, and related topics. AA members will usually emphasize to newcomers that only problem drinkers examples of powerlessness over alcohol themselves, individually, can determine whether or not they are in fact alcoholics. Unfortunately, there was an entire self-help industry out there waiting to enable us in denial. Their sales pitch is that 12 Step programs, whether AA or NA, make us weak by brainwashing us into thinking we are powerless.
Using the Right Words to Support a Recovering Alcoholic
As we abandoned responsibilities, our problems began to mount. Ashamed to admit failure, we began hiding our use from the same people who tried to help us, and then we pushed them away. We started doing things to support our habits that we never would have dreamed of doing before, sometimes taking risks with our health or crossing the law. We lost jobs, homes, and businesses, not to mention our self-respect. We beat ourselves up inside with guilt and shame because our best efforts just weren’t good enough, and we didn’t understand why. A cloud of doom and foreboding hung over us, as did depression and, for some of us, thoughts of suicide.
“recovered alcoholics”
It wasn’t until I had a full understanding of this word that my spiritual journey really was able to begin. It also made me realize that I’m not a bad person or a weak person. I finally understood what an alcoholic and addict really is.
Understanding Powerlessness
We live in a society that tells us we should be able to figure out our problems and overcome challenges on our own; that if we can’t, we’re weak.
However, AA still holds this idea for a reason and, in fact, the idea of powerlessness fits in many ways with the current scientific understanding of addiction.
To acknowledge the way these substances have impacted your life is to admit that alcohol and drugs have made your life unmanageable and you can’t fix it on your own.
We offer peer-led recovery programs that are rooted in the 12-Step program of recovery from Alcoholics Anonymous.
Why Don’t Other Peer Support Groups Identify With the Idea of Powerlessness?
हिन्दुस्तान जिंक द्वारा बायफ संस्थान के सहयोग से संचालित समाधान परीयोजना के तहत क्षेत्र के जुडें किसानों ने अनूठी पहल करते हुए निर्धन एवं गरीब परीवारों तक गेंहू पहुचा कर मदद की। कोरोना वैश्विक महामारी के दौरे में केन्द्र व राज्य सरकारों सहित भामाशाहों द्वारा किए जा रहे विभिन्न प्रयासों में समाधान परियोजना से जुडें किसान भी पिछे नही हैं। जावर माइंस संकुल के किसानो ने इसमें अपनी महती भूमिका निभाते हुए गत दिनों आपस में चर्चा की और अपनी मेहनत से कमाए गए अनाज में से कुछ हिस्सा निर्धन एवं गरीब परीवारों तक पहुंचाने का निर्णय लिया। संकुल क्षेत्र के 7 गांवों के काश्तकारों ने 760 किलो ग्राम गेहूं एकत्रित किया। किसानों ने गेंहु समाधान परीयोजना के माध्यम से निर्धन एवं गरीब परीवारों तक पहुंचाने का आहृन किया। इस पहल से 76 निर्धन एवं गरीब परीवारों तक गेहुं पहुचाया गया। किसानों की इस तरह की अनूठी पहल को देखकर क्षैत्र के अन्य किसानों में भी जागरूकता आई है। इस कार्यक्रम में हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड, जावर माइन्स के सीएस आर हेड आनन्द चक्रवर्ती, अधिकारी शुभम गुप्ता, सुश्री नेरूति साधंवी ,फील्ड कोर्डिनेटर मोहन मीणा, बद्री मीणा, प्रेम मीणा, एवं बायफ समाधान परीयोजना टीम से संकुल प्रभारी महिपाल सिंह, राजकुमार मीणा, कपिल मोर्दिया आदि उपस्थित थे।
वेदांता का बड़ा उद्देश्य हमारे समाज, समुदाय और देश को पुनः लौटाना है। राष्ट्रीय समृद्धि और सतत विकास की दिशा में ‘द ग्रेटर गुड‘ के लिए कार्य करना हमारे डीएनए में है। यह बात वेदांता के चैयरमेन अनिल अग्रवाल ने वेदंात केयर्स की शुरू की गयी अनूठी पहल के बाद ई टाउनहाॅल में कही। इसका आयोजन वेदांता द्वारा 7 अलग अलग स्थानों पर कोविड 19 में राहत कार्यो के लिए किए गये सहयोग हेतु प्रोत्साहन और सम्मानित करने के लिए किया गया। इस अवसर पर अग्रवाल ने हिन्दुस्तान जिं़क से संबद्ध 7 फं्रटलाइन लीडर्स को चैयरमेन अवार्ड की घोषणा की। अग्रवाल ने वेदांता द्वारा कोविड 19 महामारी में राहत कार्यो के तहत दैनिक मजदूरी, जरूरतमंद और घूमंतु पशुओं और प्रभावितों तक मदद पहंुचानें वाले सहयोगियों को सम्मानित करने हेतु इस ईटाउनहाॅल में 150 से अधिक लोगो से बातचीत कर उनका उत्साहवर्धन किया, जिसमें एनजीओ,व्यापारिक भागीदारों, अनुबंध कंपनियों और कर्मचारी सम्मिलित है।
इस अवसर पर हिन्दुस्तान जिं़क की सखी परियोजना के संचालन हेतु एनजीओ पार्टनर मंजरी फाउण्डेशन द्वारा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा गे्रन बेंक की स्थापना कर 10 टन से अधिक खाद्यान्न इकट्ठा कर जरूरतमंदों तक पहुंचाने और 1 लाख से अधिक मास्क बना कर कोरोना योद्धाओं और ग्रामीणों को उपलब्ध कराने के लिए सम्मानित किया। साथ ही श्रीनाथ ट्रावेल एजेंसी, टेक्नोमिन कंस्ट्रक्शन लिमिटेड एवं हिन्दुस्तान जिं़क के कर्मचारी देबांशु चटर्जी, विनय कुमार, अनागत आशीष एवं ऋषिराज शेखावत को उनके द्वारा कोराना महामारी से राहत कार्यो और जरूरतमंदो तक सहायता प्रदान करने में योगदान हेतु चैयरमेन अवार्ड की घोषणा की।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए, वेदांता के चैयरमेन अनिल अग्रवाल ने कहा, “हम राष्ट्र के साथ मिलकर इस संकट से लड़ रहे हैं। हमने उन समुदायों की सेवा करने में अपना योगदान देकर वेदांता के सिद्धांत समाज को पुनः लौटाने को प्रतिपादित किया। हमारी टीम ने दिन रात कार्य करते हुए, समुदायों का सहयोग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। मैं इस सहयोग के लिए हमारे सहयोगियों, संगठनों और वेदांता टीम के प्रत्येक सदस्य आभारी हूं जिन्होने परिवार की तरह इस संकट का मुकाबला किया है। हम समुदायों और प्रशासन के साथ कार्य करना जारी रखेंगे, इससे सेवारत समुदायों में दूसरों को प्रेरणा मिलेगी और उम्मीद है कि हम इस स्थिति से उबरेगें। ”
मंजरी फाउंडेशन के एक्जीक्यूटीव डायरेक्टर संजय शर्मा ने कहा कि हिन्दुस्तान ंिजं़क के नेतृत्व में, सखी एसएचजी महिलाओं ने मजबूत सामुदायिक प्रतिनिधि के रूप में वृद्धि की है। सखी परियोजना द्वारा गांवों में कोई भी भूखा ना सोये के उद्धेश्य को सुनिश्चित करने के लिए ग्रेन बैंक की स्थापना कर 10 हजार किलो खाद्यान्न इकट्ठा किया जिससे समुदायों को माहामारी से लड़ने में सहायता मिली। हम इस प्रकार किसी भी समय में समुदाय की मदद के लिए त्वरित सहायता के लिए प्रतिबद्ध है।
उल्लेखनीय है कि वेदांता ने पीएम केआरईएस फंड, स्टेट फंड्स, और देश भर में राहत प्रदान करने के लिए 201 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। सरकार के प्रयासों के सहयोग करते हुए वेदांता के कर्मचारियों ने एक दिन के वेतन को पीएम केयर्स फंड में योगदान किया है। अपने मिल फाॅर आॅल कार्यक्रम के तहत 13 लाख से अधिक लोगो को भोजन प्रदान किया। साथ ही वेदांता प्रतिदिन 50हजार से अधिक घुमंतु जानवरों को आहार का बीड़ा उठाया । इस पहल के तहत, वेदांता ने अब तक दिल्ली, मुंबई, जयपुर और पुणे में 12.70 लाख से अधिक जानवरों को आहार उपलब्ध कराया है।
महामारी से बचाव हेतु स्वास्थ्य सेवा को बढ़ाने के वेदांता के प्रयास में, 7 लाख मास्क और 1 लाख साबुन और सैनिटाइजर हिन्दुस्तान जिं़क के 5 जिलों एवं पंतनगर सहित पूरे भारत में निर्मित और वितरित किए गए। कपड़ा मंत्रालय के सहयोग से 23 पीपीई मशीनों का आयात किया गया, जिससे प्रति सप्ताह 40,000़ पीपीई का उत्पादन हो सके। अपोलो अस्पताल के सहयोग से, कर्मचारियों और परिवारों को चिकित्सा सलाह के लिए एक समर्पित चैबिसो घंटे हेल्पलाइन स्थापित की गई।