मस्जिदों पर हुई परचम कुशाई, जुलूसे मोहम्मदी 4 को

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उदयपुर । मुस्लिम माह के रब्बीउल अव्वल का चांद दिखाई देन पर मस्जिदों पर परचम कुशाई की रस्म अदा की गई। वहीं विभिन्न मुस्लिम मौहल्लों में युवाओं ने जुलूस भी निकाले।
’’दुनिया की हर फ़िज़ा है उजाला रसूल का,
ये सारी कायनात है सदका रसूल का,
खुशबू गुलाब की है पसीना रसूल का,
आपको हो मुबारक महीना रसूल का।।’’

इस्लाम की शान पैगम्बर हजरत मोहम्मद (स.अ.) का माहे मुबारक रब्बीउल अव्वल का चांद दिखाई देने पर शहर की अंजुमन तालिमुल इस्लाम , आयड स्थित छीपा मस्जिद, मदीना मस्जिद, रहमान कॉलोनी, सवीना, पहाडा, ठोकर चौराहा सहित शहर की सभी मस्जिदों पर परचम कुशाई की रस्म अदा की गई। बाद नमाज मगरीब रबीउल अव्वल का चांद दिखाई देने के पर मुस्लिम बस्तियों में लोगों ने एक-दूसरे को मुबारकबाद दी। कई घरों पर भी परचम कुशाई भी की गई। परचम कुशाई की रस्म के बाद ’सरकार की आमद-मरहबा, आका की आमद-मरहबा’ ’देखो मेरे नबी की शान-बच्चा-बच्चा है कुरबान’ के नारे बुलंद करते हुए मुस्लिम मौहल्लों में जुलूस निकाले गए। इस माह की (१२वीं तारीख) हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिन पर 4 जनवरी को शहर में बडी शानों शौकत के साथ जुलूसे मोहम्मदी निकाला जाएगा। कई मस्जिदों में हजरत मोहम्मद (स.अ.) की शान में सलातो-सलाम पढा गया। इसके बाद फातेहा ख्वानी हुई जिसमें इस्लाम की अहकाम पर चलने एवं मुल्क में अमनो-चैन की दुआएं मांगी गई एवं तबर्रूक बांटा गया। दुआ के दौरान पेशावर की हुई आतंकी हमले में मारे गए मासूम बच्चों के लिए दुआएं मगफिरत की गई।
अन्जुमन तालीमुल इस्लाम के सैक्रेट्री मोहम्मद रिज़वान खान ने बताया है कि आज मगलवार को चान्द दिखाई देने के साथ ही अन्जुमन बिल्डिंग पर झण्डे की रस्म अदा कीे गई। इस मौके पर सभी मुस्लिम मुहल्लों के मोतबिर एवं अन्जुमन मेम्बर ,औलमाऐ किराम,ने झण्डा चढ़ाने के बाद सलातो सलाम पढ़कर कौम व देश में अमन चेन की दुआऐं मांगी। मिठाई बांटकर गले मिलकर मुबारकबाद दी।इस मौके पर सदर मोहम्मद खलील,नायबसदर मुनव्वर अशरफ,जोईन्ट सैेक्रेट्री वकार अहमद शैख,काबिना मेम्बर हाजी जंगदाद खान,ज़हीरूददीन सक्का नज़र मोहम्मद अकीलुददीन,मुस्तफा,डा नूर अहमद, जाकिर घाटी वाला फिरोज मेवाफरोष,रियाज राही,मौलाना जुलकरनैन,मोलाना शरफददीन,मौलाना आस मोहम्मद मोलाना मुतीउर्रहमान आदि समाजजन मोजूद थे।
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सदर मोहम्मद खलील ने बताया कि 2 व 3 जनवरी को जश्ने मीलादुन्नबी व 4 जनवरी एतवार को जुलुसे मुहम्मदी निकाला जायेगा।

कद्दावर कटारिया के हाथ में पंचायत चुनाव की कमान

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gulabchand katariyaउदयपुर |भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता गुलाबचंद कटारिया को निकाय चुनाव में मिली अपार सफलता के बाद आज दूसरी बड़ी जिम्मेदारी (प्रदेश में पंचायत चुनाव की कमान) सौंपी गई है। बैठक क ही दौरान राज्य के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया की तबियत बिगड़ गयी और उनका बैठक के दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ गया, जिस कारण उन्हें एसएमएस अस्पताल में पार्टी कार्यालय से एम्बुलेंस में लेजाया गया, जहां डॉक्टरी चेकअप कर उपचार किया गया।
पंचायती राज चुनाव को लेकर आज सुबह पार्टी कार्यालय में बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया जिसमें प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया को पंचायतराज चुनाव की कमान सौंपी। अब होने वाले पंचायती राज चुनाव पूरी तरह से कटारिया के नेतृत्व मेंं लड़ा जाएगा और उन्हीं नेताओं को टिकट दिया जाएगा, जो पार्टी में सक्रिय सदस्य के रूप में काम कर रहे हैं।
बैठक दौरान कटारिया का ब्लड प्रेशर बढ़ गया। इस पर एसएमएस हॉस्पीटल के अधीक्षक डॉ. मान प्रकाश और डॉ. दीपक माहेश्वरी भाजपा मुख्यालय पहुंचे, जहां कटारिया का चेकअप किया गया। डॉ. मान प्रकाश ने बताया कि श्री कटारिया को आज सुबह से ही हल्का बुखार था और ब्लड पे्रशर भी बढ़ गया था। कटारिया का ब्लड प्रेशर १७७ बताया गया। प्रवक्ता चंचल अग्रवाल ने बताया कि एसएमएस के डॉक्टरों ने चेकअप करने के बाद छुट्टी देदी थी लेकिन भाईसाहब को आराम करने की सलाह दी गयी थी, लेकिन भाई साबह चेकअप के बाद स्वास्थ ठीक होते ही फिर पार्टी कार्यालय जा कर बैठक में हिस्सा लेने पहुंच गए थे |

गर नेताओं का झूठ पकड़ने वाला ऐप होता तो?

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भारत मीडिया में पिछले दिनों में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के विभिन्न नेताओं के बयान छाए रहे हैं.
लेकिन कई बार अपने बयानों के कारण विवादों में आ जाने वाले नेता अपने ही किसी पुराने बायन के उलट बात कर रहे होते हैं.
क्या यह संभव है कि ऐसा कोई ऐप बनाया जाए जो ख़ुद ब ख़ुद किसी नेता के नए बयान और पुराने बयान को आमने-सामने रख कर जनता के सामने पेश कर दे?

अगर राजनेताओं के बयान न हों तो अखबारों के पन्ने, न्यूज़ चैनलों की स्क्रीन, वेबसाइटों के पेज, सोशल मीडिया के स्टेटस की खाली जगहें और टॉक शो की खाली कुर्सियां कैसे भरी जाएंगी !
कोई नेता अगर एक हफ्ते में छह जगहों पर वही बयान देता है तो उसका हर बार एक ही बात रटना ऊब पैदा करता है.
यही बात उन वरिष्ठ पत्रकारों में सघन रूप में पाई जाती है जिन्हें इन नेताओं के कार्यक्रमों को कवर करना पड़ता है. ऐसे पत्रकार अक्सर कहते पाए जाते हैं कि इस धंधे में ‘उन्होंने कहा, उन्होंने आगे कहा, उन्होंने जोर देकर कहा’ के सिवा और कुछ ज्यादा बचा नहीं है.
हर पार्टी और राजनेता का आपस में घुलामिला एजेंडा है जिसे वह मीडिया के जरिए ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहता है.

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मीडिया प्रबंधकों की वर्कशॉप :
नरेंद्र मोदी, भाजपा, भारत, प्रधानमंत्री
चुनावों से पहले हर बड़ी पार्टी के मीडिया प्रबंधकों की वर्कशॉप में विशेषज्ञ यही बताते हैं कि वे कैसे तकनीकी, मीडिया हाउसों की आपसी स्पर्धा, राजनीतिक आग्रहों और सीमाओं का अपने पक्ष में इस्तेमाल करें.
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी मीडिया के परंपरागत इस्तेमाल से संतुष्ट नहीं थे. उनके लिए काम करने वाले आईटी पेशेवरों और कॉरपोरेट के छवि प्रबंधकों ने ‘चाय पर चर्चा’ जैसे कार्यक्रमों के ज़रिए एक समांतर मीडिया खड़ा कर विकास पुरुष और भारत के उद्धारक की छवि आम लोगों तक पहुंचाने का सफल प्रयोग किया.
इस ऊब के बीच अचानक कोई विवाद खड़ा करने की क्षमता वाला बयान आ जाता है तो पत्रकारों को अचानक अपने पेशे की सार्थकता नज़र आने लगती है. इसके सबूत के रूप में न्यूज़ चैनलों में ब्रेकिंग न्यूज़ की चिप्पी नज़र आने लगती है.
ज़्यादातर पत्रकार अपने होने का अर्थ उस मौके का साक्षी होने और विवाद को लोगों तक पहुंचाने में अपनी भूमिका के बोध में तलाशते हैं.

विवादों का मौसम:
भारतीय राजनीति में फिर ऐसे ही विवादित बयानों का मौसम आ गया है जिसका असर चौराहों से लेकर सोशल मीडिया तक में दिखाई दे रहा है.
भाजपा सांसद साक्षी महाराज गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त होने का सर्टिफिकेट दे रहे हैं, भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ और यूपी भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ताजमहल को शिवमंदिर बता रहे हैं, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की वकालत कर रही हैं, एक मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति अपने ‘रामज़ादे…..’ वाले बयान से समाज को दो फिरकों में बांट कर देख रही हैं.

बयान के उलट बयान :
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) धर्मांतरण के प्रायोजित अभियानों को ‘घर वापसी’ बता रहा है, संघ के प्रमुख मोहन भागवत कह रहे हैं कि भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है, भाजपा के सांसद गिरिराज सिंह मोदी विरोधियों को देश छोड़ देने का फतवा जारी कर चुके हैं और यूपी के राज्यपाल रामनाइक अब अयोध्या में राममंदिर बनवाना चाहते हैं. सबसे ऊपर यह कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इनमें से ज़्यादातर बयानों से नाराज़ हैं, कुछ के लिए माफी मांग और मंगवा चुके हैं.
आप याद्दाश्त पर ज़ोर डालेंगे तो पाएंगे कि इन बयानों के पीछे न कोई वैचारिक प्रतिबद्धता है और न व्यक्तिगत आग्रह, ये अवसरवादिता के बेहतरीन नमूने हैं क्योंकि यही नेता ठीक इसके उलट बयान पहले दे चुके हैं.
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हिन्दुत्व की व्याख्याएँ :
साक्षी महाराज ने किसी और पार्टी में रहते हुए फर्रूख़ाबाद की एक सभा में भाजपा को गोडसे जैसे हत्यारों की पार्टी कहा था, भाजपा कई बार राममंदिर को अपने एजेंडे से बाहर कर चुकी है और आरएसएस के पास हिंदुत्व की कई व्याख्याएं हैं.
भाजपा और आरएसएस लगातार गोडसे से अपने संबंधों को छिपाते रहे हैं. लेकिन नाथूराम के भाई गोपाल गोडसे ने नाराज़गी जताते हुए 1994 में एक इंटरव्यू में कहा था कि नाथूराम ने आरएसएस के नेताओं को सज़ा से बचाने के लिए अपना संबंध उजागर नहीं किया था.

चेतना का स्तर:
ऐसे में इन बयानों पर विवाद का क्या मतलब है. नेता जानते हैं कि अभी जनता की चेतना का स्तर उतना नहीं है कि वह उनके अवसरवाद पर तंज से मुस्करा कर आगे बढ़ जाए. होता यह है कि ये मुद्दे लोगों के व्यक्तिगत आग्रहों और कुंठाओं के साथ मिलकर बहुत जल्दी बहसों और झड़पों में बदल जाते हैं और मक़सद पूरा हो जाता है.
यहां गौरतलब है कि ये बयान सरकार और अपने लेफ्टिनेंट अमित शाह के ज़रिए पार्टी और संगठन दोनों को अपनी मुट्ठी में रखने वाले आरएसएस के दुलारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नाराज़गी के बावजूद धड़ाधड़ एक के बाद एक आ रहे हैं जिन्होंने विकास के मुद्दे पर चुनाव जीता था.

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विकास का मुद्दा ?
हवा का रूख देखकर राजनीति करने वाले अवसरवादी नेताओं के लिए नेतृत्व की मर्ज़ी ही कुतुबनुमा की डिबिया होती है, वे जानते हैं कि पार्टी लाइन के खिलाफ कुछ बोले तो तुरंत पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा.
जाहिर है पूर्ण बहुमत की सरकार बना लेने के छह महीनों में ही विकास के मुद्दे को कोने में सरकाया जा रहा है, अब जनता का ध्यान भटकाने के लिए हर मुद्दे में राष्ट्रवाद की छौंक के साथ धार्मिक ध्रुवीकरण की संभावनाओं को टटोला जा रहा है.
अगर इनमें से कोई मुद्दा लोगों द्वारा लपक लिया जाता है तो चुनाव में किए गए लगभग असंभव किस्म के वादों को लोग भूल जाएंगे और पांच साल सरकार चलाना आसान हो जाएगा.

एक दिलचस्प प्रयोग
अमरीका में 2012 के चुनाव के समय दो राजनीति विज्ञानियों, डार्टमाउथ के ब्रैंडन नेहान और एक्सेटर यूनिवर्सिटी के रीफलर ने यह जानने के लिए एक प्रयोग किया कि क्या राजनेता वाकई झूठ बोलने और बयानों से पलटी मारने की कोई चिंता करते हैं.
उन्होंने नेताओं की कथनी-करनी की पड़ताल करने वाली एक वेबसाइट पॉलिटीफैक्ट से सक्रिय रूप से जुड़े राज्यों के 1200 विधायकों में से एक तिहाई को चिट्ठियां भेजीं कि उनके बयानों और आचरण की निगरानी की जा रही है जिसका असर उनके करियर पर पड़ सकता है.
रैंडम आधार पर चुने गए एक तिहाई विधायकों को चिट्ठियां भेज कर कहा गया कि वे राजनीति विज्ञान के एक प्रयोग का हिस्सा हैं जिसके तहत उनके बयानों की सच्चाई का अध्ययन किया जा रहा है.
लेकिन उन्हें यह नहीं बताया गया कि इसका मक़सद क्या है और क्या नतीजे होंगे. बाकी एक तिहाई को कोई चिट्ठी नहीं भेजी गई.
चुनाव के अंत में नतीजा यह रहा कि जिन्हें कोई चिट्ठी नहीं भेजी गई उन्होंने खूब झूठ बोला, जिन्हें सिर्फ प्रयोग की सूचना दी गई थी उनमें से 2.7 प्रतिशत ने और जिन्हें नतीजों की चेतावनी दी गई थी उनमें से सिर्फ एक प्रतिशत ने झूठ बोला. इस प्रकार निगरानी और पकड़े जाने के डर से झूठ बोलने की दर में पहले की तुलना में कमी पाई गई.

भारत का मुद्दा :
भारत में कहा जाता है कि यहां चुनाव मुद्दों पर नहीं जाति, धर्म और व्यक्तित्वों से जुड़ी भावनाओं के आधार पर लड़े जाते हैं, ऐसे में नेताओं का अवसरवाद भुला दिया जाता है.
यह बात पूरी तौर पर सही नहीं है क्योंकि दूसरे मसले भी प्रतिनिधियों के चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं. अब चुनाव प्रचार और सरकार की उपलब्धियों के बारे में सूचना देने का काम अधिकांश आबादी के हाथ में पहुंच चुके मोबाइल फोनों के ज़रिए किया जाना लगा है.
यदि कोई ऐसी ऐसा मोबाइल ऐप लोगों को सुलभ करा दिया जाए जिसके ज़रिए वे जान सकें कि किसी विवादित मुद्दे पर किसी नेता का पहले क्या रुख रहा है और वह उसके प्रति कितना गंभीर है तो लोग अधिक जागरूक होंगे, बहसें और झड़पें भावनात्मक के बजाय तथ्यात्मक और परिणामदायक हो सकती हैं.

मासूमों पर आतंकियों के कायराना हमले इस्लाम के मौलिक सिद्धांतों के खिलाफ है – असरार अहमद खान

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asrar ahmad khanउदयपुर। हिन्दुस्तान में मुसलमानों के सबसे बड़े धर्म स्थल सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के अध्यक्ष असरार अहमद खान ने तहरीक – ए- तालिबान जैसे आतंकी संगठनों के प्रति गुस्सा ज़ाहिर करते हुए कहा कि ऐसे आतंकी संगठनों का इस्लाम ही नहीं किसी धर्म से कोई लेना देना नहीं | असरार अहमद ने कहा इस्लाम में ऐसे घिनोने कृत्यों के लिए कोई जगह नहीं है | इस्लाम मुहब्बत का पैगाम देता है, आतंकियों के लिए हर मुसलमान के दिल में सिर्फ नफरत है, और भारतीय मुसलमान ऐसे किसी शख्श को इस्लाम धर्म का मानाने वाला कुबूल नहीं करेगा | असरार अहमद ने पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तानी सेना पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन्ही तालिबानियों को एक समय में पाकिस्तानी सेना और सरकार का सहयोग मिला हुआ था |
असरार अहमद खान ने पाकिस्तान के पेशावर में आर्मी स्कूल पर हुए तालिबानी आतंकी हमले की घोर निंदा करते हुए इसे मानवता के खिलाफ घिनौना अपराध बताया है उन्होने साफ शब्दों में कहा कि जिहाद और इस्लाम के नाम पर इस प्रकार की आतंकी घटनाओं को अंजाम देना गैर शरई होते हुऐ इस्लाम के मौलिक सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होने कहा कि स्कूली छात्रों के साथ मंगलवार को आतंकियों ने खून की जो होली खेली है उसे दुनिया कभी नहीं भुला पाऐगी।
उन्होने एक ब्यान जारी कर पेशावर हमले को कायराना बताते हुए कहा कि आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान का यह घर्णात्मक एवं कायरतापूर्ण कृत इस्लाम विरोधी होते हूऐ ईन्सानियत के खिलाफ हैं ऐसे गैर इस्लामी काम को अंजाम देने के लिये आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान को इस्लाम से खारिज कर दुनिया के मुसलमानो को अपने दामन से आतंकवाद के दाग को साफ करने के लिये साकारात्मता से एक जुट होना होगा।
स्कूल में छात्रों और अन्य निर्दोष लोगों की जान लेने वाला यह एक ऐसा विवेकहीन बर्बरतापूर्ण कृत्य है जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। इस हमले में ना केवल मासूम बच्चों का कत्ल.ए.आम किया गया है बल्कि मानवीयता की मूल धारणा को ही मारा गया है। दुख की इस घड़ी में हमारी प्रार्थनाएं उन लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपनों को खोया है। आतंकवाद ना कभी सही था ना कभी इसे सही ठहराया जा सकता है। उन्होने कहा कि तालिबान आतंकियों ने दिल दहला देने वाली यह घटना एक ऐसे समय अंजाम दी है जब शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद मलाला युसुफजई बच्चों की शिक्षा के लिए कहीं जोरदारी से अलख जगा रही थी।
ये बच्चे पाकिस्तान ही नहीं इंसानियत की अमानत थे। इनकी हिफाजत करना पाकिस्तानी फौजों की जिम्मेदारी थी मगर पाकिस्तानी फौज से इस जिम्मेदारी को निभाने में भारी चूक हुई है। पाकिस्तान के शासक और वहां के सैन्य अधिकारी यह समझें कि आतंकियों को पालने पोसने के कितने भयावह दुष्परिणाम होते हैं। वर्तमान में जो तालिबान आतंकी पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा संकट बन गए हैं उन्हें एक समय पाकिस्तान सरकार का भी सहयोग मिला और सेना का भी। पाकिस्तान को आतंकी संगठनों के मामले में अपनी रीति.नीति के साथ सोच विचार में भी व्यापक परिवर्तन लाने की जरूरत है।

कमजर्फ़ों ने खुद को इस्लाम से जोडक़र मुसलमानों को किया बदनाम – आतंकवादियों के खिलाफ मुस्लिम धर्म गुरुओं में गुस्सा

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उदयपुर। देश और दुनिया में होने वाली आतंकी घटनाओं पर उदयपुर के ओलेमाओं-मौलानाओं ने आक्रोश जताते हुए इसको इस्लाम के खिलाफ बताया है। इस्लाम को मोहब्बत और भाईचारे का धर्म बताते हुए कहा कि इस्लाम में दहशतगर्दी और खौफ फैलाने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। मासूमों का क़त्ल करने वाले इस्लाम तो दूर वो इंसान कहलाने के लायक नहीं है। पाकिस्तान के पेशावर में मासूम बच्चों के कत्ले-आम पर दु:ख जाहिर करते हुए सभी ओलेमाओं ने तहरीके-ए-तालिबान जैसे आतंकी संगठनों को इस्लाम मानने वाला ही नहीं बताया। ओलेमाओं ने कहा कि ये लोग इस्लाम तो क्या किसी धर्म के नहीं हो सकते, क्योंकि आतंक जैसे कृत्य के लिए किसी धर्म में कोई जगह नहीं है।
ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती दरगाह कमिटी के सदर असरार अहमद खान ने कहा ……..
आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान का यह घर्णात्मक एवं कायरतापूर्ण कृत इस्लाम विरोधी होते हुए इंसानियत के खिलाफ हैं। ऐसे गैर इस्लामी काम को अंजाम देने के लिए आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान को इस्लाम से खारिज कर दुनिया के मुसलमानों को अपने दामन से आतंकवाद के दाग को साफ करने के लिये साकारात्मता से एक जुट होना होगा। आतंकी घटनाओं को अंजाम देना गैर शरई होते हुऐ इस्लाम के मौलिक सिद्धांतों के खिलाफ है। आतंकवाद जैसे कोई घटना के लिए इस्लाम में कोई जगह नहीं है।
-असरार अहमद खान, सदर ख्वाजा मोइनीद्दीन चिश्ती दरगाह कमेटी, अजमेर

मुस्लिम धर्मगुरुओं ने बोला
कुरआन में फरमाया गया है कि जमीन पर फसाद मत करो। अपनी बोली भी ऐसी रखो जिससे किसी को दु:ख नहीं पहुंचे और जिस तरह से ये आतंकी मासूम लोगों का क़त्ल करते हैं, वो न तो इस्लाम में है और ना ही कुरआन में है, न ही किसी हदीस में और ना ही अल्लाह इसकी इजाजत देता है। हुजूर मोहम्मद साहब ने फरमाया है कि परिंदों के घोसलों को भी मत तोड़ो और ये कमजर्फ़ लोग तो मासूम बच्चों और बेगुनाह लोगों को मारते हैं, जाने किस इस्लाम की बात कर रहे हैं ये लोग। अल्लाह को मानने वाले नहीं है ये शैतानी लोग। इनको इनके किए कि कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
-मौलाना मुर्तज़ा, पल्टन मस्जिद
मासूमों और बेगुनाहों को कत्ल करना शैतानी काम है, जिसकी इस्लाम में कोई गुंजाइश नहीं। ऐसे कत्लों गारत की इस्लाम में कोई जगह नहीं, जिस मजहब में बच्चों, बूढ़ों और औरतों चाहे जिस भी मजहब की हो, उनके लिए ख़ास हक़ दे रखे हैं। उन पर जुल्म तो दूर जऱा सी तकलीफ भी इस्लाम के खिलाफ हो जाती है, तो फिर बेगुनाहों के क़त्ल की तो कही बात ही नहीं है। हुजूर का फरमान है मजलूमों, बच्चों, औरतों की हिफाज़त करना हर मुसलमान का फज़ऱ् है। किसी भी इंसान पर जुल्म करना हराम करार दिया है। कुरआन ने हर जगह मोहब्बत का पैगाम दिया है। इस्लाम में नफरत के लिए कोई जगह नहीं। मासूमों का क़त्ल करने वाले इस्लाम को मानने वाले हो ही नहीं सकते।
-मौलाना शकीरूल कादरी, धोलीबावड़ी मस्जिद
ज़ालिम है वो लोग, गुनाहे अज़ीम के हक़दार है, जिनकी जगह दोजख में है और जिन पर खुदा की लानत है। ऐसे लोगों को सूली पर चढ़ा देना चाहिए। मजहबे इस्लाम में ऐसे लोगों के लिए कोई जगह नहीं है। ऐसे लोग अपने आप को इस्लाम का मानने वाला कहते है। ये लोग तो इंसान कहलाने के लायक नहीं। फिर इस्लाम के लायक कैसे हो सकते हैं। हुज़ूर ने फरमाया है कि अगर तुम्हारा पडोसी चाहे जिस मज़हब को मानने वाला हो अगर वो भूखा सो गया तो तुम से खुदा भी नाराज़ हो जाएगा। इस्लाम में मसलमानों के लिए फरमान है कि जितनी खैर और इज़्ज़त तुम अपनी बेटी की करते हो उतनी ही खैर और इज़्ज़त एक ब्राह्मण की बेटी या दूसरे धर्म की बेटी की भी करो। फिर ये कायर और घटिया लोग कैसे इस्लाम को मानने वाले हो सकते हैं। ऐसे आतंकियों का कोई मजहब नहीं है। ये लोग तो खंजिर (सूअर) की जात के है। ऐसे कमजर्फ़ लोगों ने खुद को इस्लाम के साथ जोडक़र पूरी दुनिया में मुसलामानों और इस्लाम को बदनाम कर रखा है। आज हम इन पिल्लों की वजह से बदनामी झेल रहे हंै। जिस तरह से मासूम बच्चों को इन्होंने मारा खुदा इन्हें जन्नत तो दूर दोजख में भी जगह नहीं देगा। इस्लाम का पहला कलमा पहला पाठ मुहब्बत का है। फिर ये कैसे इस्लाम की बात करते हंै, जिसमें बंदूकों और मासूमों के क़त्ल की बात करते हैं। इनको इस जमीन पर कहीं नहीं रहने देना चाहिए।
-कारी अब्दुल क़ाज़ी अजमेरी

अपना वजूद दिखाने के लिए इंसानियत को,… मासूमों के वजूद को मार दिया… तालिबान तुम कायर हो

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उदयपुर, जब पेशावर के आर्मी स्कूल पर हमले की ख़बर सुनी तो सबसे पहले उन बच्चों की फिक्र हुई, जो उस स्कूल में थे और उन मां-बाप की, जिन के जिगर के टुकड़ों पर अचानक यह मुसीबत आ गई। और जब न्यूज़ में तस्वीरें देखीं तो आंखें भर आईं…”यार बस करो अब…. खुदा का वास्ता है”। “20-20 साल मां-बाप ने मेहनत कर बच्चों को पाला और उनको मारने में इन्हें 20 सेकेंड भी नहीं लगा”… ये अल्फ़ाज़ उस लाचार पिता के थे, जो सुबह अपने बच्चों को स्कूल छोड़कर गया था। जैसे ही पता चला पेशावर के आर्मी स्कूल पर हमला हुआ है, स्कूल पहुंचे तो जिन्हें सुबह हंसता-मुस्कुराता छोड़ गए थे… उनकी लाशें मिलीं… यूं तो आए दिन पाकिस्तान से इस तरह की ख़बरें आती रहती हैं, लेकिन इस ख़बर ने हिला दिया। लगा तालिबानी अपने वजूद को लेकर इतने डरे हुए हैं कि अपना आपा मनवाने के लिए उन्हें इन मासूम बच्चों की जान का सहारा लेना पड़ा, जो अपनी हिफ़ाज़त के लिए हर वक़्त एके 47 हाथों में लिए घूमते हैं, आज वो अपना खौफ़ पैदा करने के लिए इतनी बुज़दिली पर उतर आए हैं कि मासूमों का खून बहाने से भी नहीं चूके।

इस हमले से यह बात साफ़ हो जाती है कि आज तालिबान खुद अपने वजूद को ख़तरे में मान रहा है। बच्चों पर हुए इस हमले की हर ओर से निंदा हो रही है, लेकिन तहरीक-ए-तालिबान अपनी इस बुज़दिली का श्रेय ले रहा है कि हां, ये क़ायराना हरकत हमने की है। जो दर्द हमें दिया गया, हमने उसका बदला लिया है।

लेकिन उन मासूम बच्चों और उनके घरवालों के दर्द का क्या… वे मासूम जिनकी आंखों में अपने आने वाले कल के लिए हज़ारों सपने थे। उन सपनों का दर्द जो सारी ज़िंदगी उनके घरवालों को सताता रहेगा, जो बच्चे इस हमले में बच भी गए हैं, क्या वे इस हादसे को कभी भूल पाएगें। भूल पाएंगे कि उनके दोस्तों को सिर्फ इसलिए मार दिया गया कि कुछ लोगों का खौफ़ देश और दुनिया में बना रहे। तालिबान कह रहा है कि अपने दर्द का बदला लिया है। तो क्या यह मान लेना चाहिए कि पाकिस्तानी फ़ौज सचमुच अब आंतकवाद के सफ़ाए में लगी है। मतलब की जिस पौधे को उसने खाद पानी देकर सींचा, अब उसे काटने की कोशिश की जा रही है। क्या सचमुच तालिबानी इतने डरे हुए हैं कि स्कूल पर हमला करके दुनिया को बताना चाहते है कि वे कितने ख़तरनाक हैं।

क्या सचमुच तालिबानी इतने घबराए हुए हैं कि स्कूल को हमले के लिए चुना, जहां बंदूक देखते ही बच्चे डर गए होंगे….वहां चार आंतकियों ने खुद को उड़ा लिया, कार को आग लगा दी गई, तालिबान की यह कैसी ताक़त है, जो मासूम और कमज़ोरों पर हमला कर के तालिबान को खौफनाक बनाती है। क्या सचमुच तालिबान अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है या ये तालिबान के ख़ात्मे की शुरुआत है?

हिन्दुस्तान जिंक मानव संसाधन क्षेत्र में पुरस्कृत

सीआईआई ने मानव संसाधन क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए
हिन्दुस्तान जिंक को किया पुरस्कृत

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उदयपुर | हिन्दुस्तान जिंक को मानव संसाधन उत्कृष्टता में महत्वपूर्ण उपलब्धियों के लिए सीआईआइ ने राष्ट्रीय मानव संसाधन उत्कृष्टता अवार्ड 2014 (लेवल-2) से पुरस्कृत किया। यह पुरस्कार हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में प्रदान किया।
हिन्दुस्तान ज़िंक को वर्ष 2012-13 में भी ‘‘मानव संसाधन उत्कृष्टता में स्ट्रॉंग प्रतिबद्धता’’ से सम्मानित होने का गौरव हासिल हो चुका है। इस वर्ष भी हिन्दुस्तान जिंक अपने सभी सर्वश्रेष्ठ प्रयासों से अगले स्तर को पार किया है।
सीआईआई मानव संसाधन उत्कृष्टता पुरस्कार मूल्यांकन प्रक्रिया में (परिणाम, दृष्टिकोण, विकास निर्धारण और समीक्षा) रडार पर आधारित आवेदन दस्तावेज के डेटा आदान-प्रदान शामिल है। इसके लिए ऑनसाइट आंकलन में सीईओ, विभागीय प्रमुख, अनुबंध कर्मचारियों की संख्या, संघ और सदस्यों का साक्षात्कार भी शामिल है, जो चार वरिष्ठ प्रशिक्षित मूल्यांकनकर्ताओं की एक पैनल द्वारा किया गया है।
यह पुरस्कार एक स्वस्थ कार्य वातावरण बनाने के लिए अपने कर्मचारियों और कंपनी के निरंतर प्रयास को सशक्त बनाने की दिशा में हिंदुस्तान जिंक का पुख्ता प्रमाण है। कंपनी उत्क्ष्टता की दिषा में प्रक्रियाओं और प्रणालियों में सुधार के लिए सदैव प्रतिबद्ध हैं।

हिन्दुस्तान जिंक द्वारा प्राथमिक चिकित्सा कार्यशाला

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उदयपुर | हिन्दुस्तान जिंक की डॉ. करूणा भण्डारी ने 55 अध्यापकों एवं प्रधानाचार्यों की प्राथमिक चिकित्सा क्षेत्र में एक कार्यषाला का महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल में आयोजन किया।
डॉ. करूणा भण्डारी ने प्राथमिक चिकित्सा के साथ-साथ अस्थमा, नाक से खून बहना, सांस में तकलीफ, कीडे़ काटने एवं मिर्गी का दौरा आदि परिस्थितियों में किस प्रकार रोगी का उपचार करना चाहिए, इस बारे में बताया ।
डॉ. करूणा भण्डारी ने कहा कि इस तरह की कार्यषालाएं नियमिततैार पर आयोजित करनी चाहिए ताकि आम जनता को प्राथमिक चिकित्सा के बारे में जानकारी मिल सके। स्कूलों के अध्यापकों प्रधानाचार्यों को इस विषय में सम्बोधित करने से इसका प्रभाव विद्यार्थियों पर अवष्य पडे़गा तथा ऐसी परिस्थितियों में युवा शक्ति सामने आकर मदद करेगी।

देहली गेट से अतिक्रमण हटाया

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उदयपुर | नगर निगम ने अतिक्रमण अवैध निर्माण के विरुद्ध अभियान के पांचवे दिन भी कार्रवाई जारी रखी और इसके तहत शुक्रवार को देहली गेट पर मंदिर परिसर में ही अवैध रूप से लगी दुकानों को तोड़ा गया | इधर यूआईटी ने भी कार्रवाई करते हुए राज्य की हाउसिंग योजना अफोर्डेबल हाउस से स्टे हटाने के बाद कब्जे हटाये गए |
जानकारी के अनुसार आज सुबह छह बजे से नगर निगम के अधिकारी और अतिक्रमण रोधी दस्ता देहली गेट पर पहुंच गया और देहली गेट पर हनुमानजी मंदिर के पास ही दो दुकाने जिसमे एक में मोबाइल शॉप और दूसरी में चाय का केबिन लगा हुआ था उसको तोड़ा गया और सारा सामान जब्त कर मंदिर के पुजारी को पाबन्द किया | राजस्व निरीक्षक नितीश भटनागर ने बताया की पिछले कई समय से मंदिर परिसर में ही रोड की तरफ दो दुकाने निकाल कर मंदिर के पुजारी ऋषि चौबे ने बेच दी थी जब कि पुजारी को सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर बेचने का कोई अधिकार ही नहीं है | पूर्व में दो तीन बार इनको नगर निगम ने नोटिस दे कर अतिक्रमण हटाने के के निर्देश दिए थे लेकिन ऋषि चौबे ने दुकाने नहीं हटाई जिस पर निगम ने आज सुबह ही कार्रवाई शुरू की और दोनों दुकानों को तोड़ कर हटाया | गौर तलब है की पूर्व में भी पुजारी द्वारा ही मंदिर के पास और ऊपर अवैध निर्माण करवाया जारहा था जिसको रातों रात निगम ने कार्रवाई कर हटवाया था | इस जगह बार बार अतिक्रमण की कोशिश की जाती है जिसको हर बार पाबन्द किया जाता है |
यूआईटी की कार्रवाई : बेडवास स्थित राजयसरकार की महत्वपूर्ण हाउसिंग योजना अफोर्डेबल हाउसिंग पर कुछ लोगों के कब्जे थे तथा उन्होंने कोर्ट का स्टे लगा रखा था इस वजह से यह योजना काफी समय से अटकी पड़ी थी | कोर्ट का स्टे हटते ही आज यूआईटी दिन में माय जाब्ते के स्केरेटरी आर एन मेहता, तहसीलदार बाबुराम मीणा पटवारी व् अन्य अधिकारी पहुंचे तथा वहां अवैध कब्जों को व् करीब १५ से अधिक झोपड़ों को हटाया |
देहली गेट पर पार्किंग का अतिक्रमण :
यही देहली गेट पर पुलिस कंट्रोल रूम के सामने पार्किंग का जबरदस्त अतिक्रमण है कण्ट्रोल रूम के सामने मुख्य रूप से बावर्ची रेस्टोरेंट, होटल दया और होटल मीरा खाने के रेस्टोरेंट है जहाँ पर दिन और रात में खाने के लिए आने वाले पर्यटकों की गाड़ियां आधे से अधिक रोड को घेरे रहती है | इन तीनों रेस्टोरेंटों मालिकों के बीच पार्किंग की बात को लेकर ही कई बार झगड़े तलवार बाजी और चाकूबाजी तक हो चुकी है | निगम को चाहिए की इनको पाबन्द कर यहाँ पर ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए की गाड़ियां पार्किं नहीं हो और पार्किंग होने पर भारी जुर्माना हो |

दूध तलाई से बरसों पुराने अवैध कब्जे को हटाया यूआईटी ने

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उदयपुर | अवैध कब्जे और अतिक्रमण के खिलाफ आज यूआईटी अधिकारियों ने दूध तलाई स्थित मुष्टिक हनुमान के आसपास किये गए बरसों पुराने कब्जे को मुक्त करवाया और वहां किये गए निर्माण को तोड़ा गया | मोके पर कुछ युवकों व् कब्जा धारी द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया |
जानकारी के अनुसार दूधतलाई स्थित मुष्टिक हनुमान मंदिर के बाहर यूआईटी की बेशकीमती जमीन पर मंदिर के नाम पर और अखाड़े के नाम पर विष्णु जोशी द्वारा वर्षो कब्जा कर रखा था और जोशी कुछ बच्चों के साथ ही मंदिर के बाहर जुडो कराते की प्रेक्टिस करवाता था बाद में उसने धीरे धीरे मंदिर के बाहर की सरकारी भूमि पर कब्जा करना शुरू करदिया था | मंदिर के बाहर हॉल बना लिया साथ में दो कमरे और बना लिए गए थे तथा बीच में बॉक्सिंग रिंग बना कर उस जमीन के मालिक बन बैठा था, जिसको आज यु आईटी सेक्रेटरी आर एन मेहता ने पटवारी और तहसीलदार की मोजिदगी पुलिस और जाब्ते के प्रबंध के साथ कब्जा हटाया | दिन में यूआईटी सेक्रेटरी आरएन मेहता तहसीलदार बाबू राम मीणा व् यूआईटी के अन्य अधिकारियों सहित जाब्ता दूध तलाई पहुंचा और कार्रवाई शुरू की जिसके दौरान परिसर में बना बॉक्सिंग रिंग व् दो बने हुए कमरे तथा एक बड़ा केबिन को हटाया | आर एन मेहता ने बताया कि यूआईटी की जमीन पर पिछले कई सालों से अवैध कब्जा था जिसको नोटिस देने के बावजूद भी कब्जा नहीं हटाया | आज यूआईटी ने कब्जे को मुक्त करवाया और अब यहाँ पर मंदिर के बाहर पूरी जमीन पर गार्डन विकसित किया जाएगा |
विरोध : कार्रवाई के दौरान विष्णु जोशी व् उनके परिवार तथा कुछ युवकों द्वारा विरोध किया गया जिसको वहां मौजूद पुलिस ने शांत करवाया हालाँकि इस सारे घटना क्रम के दौरान जोशी कुछ अधिक बोल नहीं पाये युवक भी आये कुछ देर विरोध किया लेकिन यूआईटी सेक्रेटरी द्वारा कह दिया गया कि सिर्फ अवैध कब्जा तोड़ा जारहा है ना कि मंदिर इस पर युवक शांत हुए और वहां से चलते बने |
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गृहमंत्री के आदेश थे : तीन पहले गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया दूध तलाई पर किसी कार्यक्रम में जाने के लिए निकले थे कि उन्होंने मुष्टिक हनुमान के बाहर बॉक्सिंग रिंग और इससे पहले हुए किसी निजी कार्यक्रम के बंधे टेंट देखे थे | जानकारी के अनुसार कटारिया को पहले ही किसी ने शिकायत की थी कि यहाँ पर सरकारी जमीन पर विष्णु जोशी द्वारा बच्चों को बॉक्सिंग सिखाने के बहाने बरसों से कब्जा जमा रखा है और अब तो वहां पर निजी कार्यक्रम भी होने लगे है | यही नहीं शिकायर् यह भी थी कि यहाँ पर मंदिर और बॉक्सिंग की आड़ में नशेड़ियों व् असामाजिक तत्वों का अड्डा बना हुआ है | गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने तीन दिन पहले मोके को देख कर जिला कलेक्टर आशुतोष पेढणेकर को निर्देश दिए थे कि इस कब्जे को जल्दी से जल्दी हटाया जाए |