एमडब्ल्यूएल को नकारना एक साजिश

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-वेटलैंड संरक्षण कानून के तहत हो झीलों-तालाबों का संरक्षण
उदयपुर। सभी झीलें व तालाब वेटलैंड की श्रेणी में आते है। वेटलैंड संरक्षण क़ानून के तहत झीलों-तालाबों का अधिकतम भराव तल (एमडब्लूएल) तक सुरक्षित रखना आवश्यक है। ऐसे में मदार, बड़ी, पीछोला, फतहसागर, उदयसागर सहित राजस्थान के सभी छोटे-बड़े तालाबों के अधिकतम भराव तल तक के सबमर्जेन्स को सुरक्षित व यथावत रखा जाए। उक्त विचार डॉ. मोहनसिंह मेहता मेमोरियल, झील संरक्षण समिति एवं चांदपोल नागरिक समिति द्वारा आयोजित पीछोला तालाब पर रविवारीय श्रमदान पश्चात हुए संवाद में व्यक्त किए गए।
झील संरक्षण समिति के सहसचिव एवं वेटलैंड टास्क फोर्स के सदस्य रहे अनिल मेहता ने कहा कि १२ वर्ष पूर्व झील संरक्षण समिति ने उदयपुर की झीलों को वेटलैंड सिद्धांतों के तहत संरक्षित करने की राय दी थी। इस पर प्रशासन ने वेटलैंड टास्क फोर्स का गठन भी किया, लेकिन टास्क फोर्स में कुछ ऐसे सदस्य थे, जो वेटलैंड सिद्धांतों का विरोध रखने वाले थे। ऐसे सदस्यों ने एक मुहीम के तहत वेटलैंड विचार का विरोध किया। यह एक षड्यंत्र था, ताकि झीलों के सबमर्जेन्स की भूमि को भू-माफियाओं के हवाले किया जा सके।
चांदपोल नागरिक समिति के तेजशंकर पालीवाल ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार के वेटलैंड संरक्षण निर्णय का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन यह अफसोस का विषय है कि उदयसागर को वेटलैंड सिद्धांतों व कानूनों के तहत सुरक्षित करने के निर्णय के साथ ही उसके एमडब्ल्यूएल को घटाने की कोशिशें भी प्रारंभ हो गई है। उदयसागर के ओवरफ्लो को चौड़ा कर पानी निकासी करने के पीछे उस टापू को बहार करना है, जिस पर होटल का निर्माण हो रहा है।
मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट के सचिव नंदकिशोर शर्मा ने कहा कि उदयपुर की झीले न्यायालय के निर्देशों से एमडब्ल्यूएल पर नोटिफाइड है, लेकिन भू माफियाओं के लालच व दबाव में न्यायालय की सीधी अवमानना हो रही है। एक तरफ जल भराव बढ़ाने के मकसद से नर्वदा बांध की ऊंचाई बढ़ाने का निर्णय केंद्र सरकार ले रही है, वही उदयसागर सहित राजस्थान की झीलों के जलभराव को छोटा करने के हुए प्रयासों पर राज्य सरकार को विराम लगाना चाहिए ।
संवाद से पूर्व पीछोला के अमरकुंड क्षेत्र में रविवारीय श्रमदान के तहत झील से शराब की बोतलें, खाद्य अखाद्य वस्तुए, पोलिथिन, फाटे पुराने कपड़े, जलीय घास, पूजन हवन सामग्री निकली गई। श्रमदान में कुल दीपक पालीवाल, तेज शंकर पालीवाल, इंदूशेखर व्यास, नितिन सोनी, अनिल मेहता, मोहनसिंह चौहान, रामलाल गहलोत, नंदकिशोर शर्मा, प्रतापसिंह राठौड़, स्वामी सागरानंद, कैलाश कुमावत, दुर्गाशंकर पुरोहित, भंवरलाल शर्मा, पुरुषोत्तम पालीवाल सहित कई नागरिकों ने भाग लिया।

37 साल में राजस्थान से सिर्फ एक मुस्लिम आईएएस

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जयपुर। राजस्थान में मुस्लिमों की करीब 12 प्रतिशत आबादी (70-80 लाख) है, लेकिन पिछले करीब 37 साल में सिर्फ एक मुस्लिम युवा आईएएस बन पाया है। हाल ही सिविल सेवा-2014 के तहत आईएएस का नतीजा जारी हुआ है और संभवत: इस बार भी किसी मुस्लिम अभ्यर्थी का चयन होना सामने नहीं आया है। जानकारों का कहना है कि आईएएस बनने में किसी धर्म-समुदाय से होने-न होने का महत्व नहीं है, लेकिन देश की शीर्ष सेवा में इतने बड़े समुदाय में से बीते 38 वर्षो में सिर्फ एक का ही चयन होना इसकी शैक्षणिक और सामाजिक स्थिति के बेहद चिंताजनक होने का सबब तो है ही।

वर्ष 2013 में जाफर मलिक (सवाई माधोपुर) का आईएएस में चयन हो सका है, जो फिलहाल मसूरी में ट्रेनिंग ले रहे हैं। राजस्थान में मौजूदा आईएएस काडर में अभी करीब 221 अधिकारी हैं, इनमें भी कोई मुस्लिम आईएएस नहीं है। न तो राजस्थान मूल से, न बाहरी राज्यों से और न ही आरएएस या अन्य सेवाओं से पदोन्नत होकर आईएएस बनने वालों में कोई मुस्लिम शामिल हैं।

प्रदेश में सीधे चयन वाले आखिरी मुस्लिम आईएएस अधिकारी वर्ष 1975 बैच के सलाउद्दीन अहमद (मूलत: उत्तरप्रदेश से) थे, जो फरवरी-2012 में राज्य के मुख्य सचिव पद से रिटायर हो गए। वे फिलहाल आंध्रप्रदेश के राजभवन में राज्यपाल के सलाहकार पद पर कार्यरत हैं। गौरतलब है कि राज्य में जैन, सिख, ईसाई जैसे अन्य अल्पसंख्यक समुदायों से भी आईएएस बन चुके हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के युवाओं का भी बड़ी संख्या में चयन होता रहा है।

अन्य राज्यों से लगातार हो रहा चयन
उत्तरप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, तमिलनाडू, जम्मू और कश्मीर, आंध्रप्रदेश, केरल, कर्नाटक, असम आदि प्रदेशों से लगभग हर वर्ष मुस्लिम युवाओं का चयन आईएएस में होता रहा है। यहां तक कि पंजाब, गुजरात, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, पूर्वोत्तर से भी दो से पांच साल के बीच मुस्लिम अभ्यर्थियों का चयन होता रहा है।

आरएएस से मुख्यमंत्री तक
राज्य में यूं तो आरएएस, इंजीनियर, डॉक्टर, कुलपति, मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री जैसे पदों पर मुस्लिम रह चुके हैं, लेकिन आईएएस का ख्वाब अब भी बेहद मुश्किल है। (1975-76 से 2013 तक के आंकड़े केन्द्र-राज्य कार्मिक विभाग की वेबसाइट व सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार)

क्या कहते हैं जानकार
आईएएस कॉम्पीटिशन का मामला है। कॉम्पीट करेंगे तो ही चयन संभव है। युवाओं को पढ़ने-लिखने पर ध्यान देना चाहिए। प्रतियोगिता को फोकस कर तैयारी करनी चाहिए। चयन का यही एक रास्ता है।
एस. अहमद, पूर्व मुख्य सचिव राजस्थान

मुस्लिम युवाओं को घरों में आम तौर पर पढ़ने का माहौल नहीं मिल पाता है। समाज में कई स्तरों पर हो रहे भेदभाव से भी इनकार नहीं किया जा सकता। सरकारों और समाज को मिलकर इस विषय में कुछ करना चाहिए।
डॉ. इकबाल सिद्दिकी व इंजीनियर मोहम्मद सलीम, जमाते इस्लामी हिन्द

मेल ने किया बेमेल

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रिसर्च: सोशल मीडिया के कारण पोस्टकार्ड और अंतरदेशी पत्र को भूले युवा
उदयपुर। लेकसिटी के युवाओं पर जयपुर में पढऩे वाले तीन युवकों के गु्रप ने जब सर्वे किया, तो पता चला कि केवल तीन प्रतिशत युवा ही जानते है पोस्टकार्ड का सही मूल्य क्या है? ९७ प्रतिशत युवाओं ने आज तक पोस्टकार्ड का उपयोग नहीं किया और कुछ टीन एजर्स को तो पता ही नहीं हैं कि पोस्टकार्ड क्या है? उन्हें ये भी जानकारी नहीं कि पोस्टकार्ड आखिर मिलता कहां है? 98 प्रतिशत युवाओं को अंतरदेशी पत्र क्या होता है? इसकी जानकारी भी नहीं और इसका उपयोग करने वाले तो महज एक प्रतिशत भी नहीं है।
जयपुर के कॉलेज में पढऩे वाले शहर के तीन युवा आशीष शर्मा, विक्रम दुबे और महावीर कोटिया ने अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट के लिए उदयपुर शहर का सर्वे किया, जिसमें यह तथ्य सामने आया वॉट्सएप्प और फेसबुक आदि सोशल साइट पर धड़ाधड़ मैसेज करने वाले युवा को डाकघर में मिलने वाले मैसेंजर पत्रों के बारे में कुछ जानकारी नहीं है।
एक समय था जब डाकघर में मिलाने वाले पोस्ट कार्ड, अंतरदेशी पत्र, पोस्ट लिफाफा आदि संदेश और अभिव्यक्ति के लिए बेहरत विकल्प थे, लेकिन बदलते दौर के साथ माध्यम में बदलाव आया और इनकी जगह वॉट्सएप्प ई -मेल, यहां तक की विशेष दिनों में भेजे जाने वाले ग्रीटिंग की जगह अब ई-ग्रीटिंग ने ले ली है। युवाओं को लगता है कि व्हाट्सप्प और फेसबुक बेहतर विकल्प है। सर्वे में यह बात सामने आई कि डाकघर का उपयोग युवा अब सिर्फ रक्षा बंधन में भेजी जाने वाली राखी, सरकारी नौकरी में काटे जाने वाले चालान के लिए ही करते हैं।
अब ई-राखी का दौर : अब तो राखी भी ई-राखी हो गई है। कुछ वर्ष पहले बहनें अपने भाई को राखी भेजने के लिए कई दिन पहले डाकघर के चक्कर लगाती थी, लेकिन अब तो कई वेब साइट ऐसी हो गई है, जहां पसंदीदा राखी चुन लो, वो लोग वो ही राखी भाई तक पहुंचा देंगे। पेमेंट ऑनलाइन हो जाएगा।

प्रेम पत्र के जमाने भी लद गए : कुछ समय पहले तक युवा प्रेम में लव लेटर लिखा करते थे, लेकिन सर्वे में सामने आया की 25 वर्ष तक के युवाओं ने अपनी प्रेमिकाओं को कभी लव लेटर लिखा ही नहीं। अभी सिर्फ व्हाट्सप्प पर मैसेज या चैट कर लेते हैं, बात हो जाती है। लव लेटर की जरूरत ही नहीं पड़ती। हालांकि कुछ युवा मानते हैं कि जो भावनाएं कागज पर उतारी जा सकती है, वह व्हाट्सप्प पर बयां नहीं हो सकती।
टेलीग्राम बंद अब टेलीग्राम एप्प : कुछ समय पूर्व ही टेलीग्राम सेवा को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया, लेकिन टेलीग्राम एप्प अब बाजार में हैं, जो व्हाट्सप्प की तरह ही काम करती है। सभी फीचर ज्यादा सुरक्षित है। इसको दो भाई निकोलाई और पावेल दुरोव ने मिलकर 2013 में लांच किया था।
व्हाट्सप्प और फेसबुक से परेशान : सर्वे में यह बात भी सामने आई कि कई समझदार युवा कहते हैं कि यह सिर्फ वेस्ट ऑफ टाइम है। व्हाट्सप्प और फेसबुक पर चैट के चक्कर में बहुत सारा टाइम खर्च होता है और अति हर चीज की बुरी होती है। कई युवाओं को यह भी पसंद नहीं क्योंकि यदि दिनभर इसमें लगे रहे तो कोई भी रचनात्मक कार्य नहीं कर पाते।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट को डरा रहे हैं चूहे!

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तुलसी प्रजापति फर्जी मुठभेड़ के आरोपी मंबई की तलोजा जेल जाने को तैयार नहीं
अहमदाबाद। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से मशहूर जिन पुलिस अफसरों के नाम से खूंखार गुनाहगार कांप उठते थे, उन्हें मुंबई की तलोजा जेल के उत्पाती चूहे डरा रहे हैं। यही वजह है कि तुलसी प्रजापति एनकाउंटर केस के आरोपी पुलिस अधिकारी मुंबई जाने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। सोहराबुद्दीन शेख और तुलसी प्रजापति केस में वे मुंबई कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। उन्हें डर है कि मुंबई में हाजिर होने के बाद उन्हें तलोजा जेल जाना पड़ सकता है।
सूत्र बताते हैं कि उन्हें डर लग रहा है कि तलोजा जेल में चूहे उन्हें काट लेंगे। उल्लेखनीय है कि स्वयं डीजी वंजारा समेत अन्य अधिकारियों ने जेल में चूहे की धमाचौकड़ी के बारे में पहले भी अर्जी लगाई है। दूसरी तरफ, कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों को 16 जून तक हर हाल में कोर्ट में हाजिर होने के लिए ताकीद कर दी है। सोहराब केस मुंबई ट्रांसफर होने के बाद वंजारा, पांडियन, चुडासमा, अमीन, दिनेश एमएन सहित नौ आरोपियों को मुंबई जेल में ट्रांसफर कर दिया गया था। इसके कुछ ही दिनों बाद उन्होंने कोर्ट में अर्जी दी थी, ‘हमें छोटी सी कोठरी में रखा गया है, जहां कॉमन टॉइलेट और बाथरूम हैं। यहां इतने ज्यादा मच्छर और चूहे हैं कि हम परेशान हो गए हैं। हमारी नींद हराम हो गई है।Ó उसके बाद एक-एक कर आरोपियों को छोड़ा गया। अभी चार ही जेल में हैं, जिनमें स्वयं डीजी वंजारा साबरमती जेल और बाकी राजस्थान के तीन अधिकारी तलोजा जेल में हैं।
तुलसी-सोहराब केस की सुनवाई एक साथ करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट से आने पर तुलसी प्रजापति केस को भी मुंबई ले जाया गया है। सोहराब केस के आरोपी अधिकारियों के चूहे से संबंधित अर्जी कोर्ट में करने से तुलसी केस के 11 आरोपी अधिकारी भी चिंतित हैं। उन्हें चूहों का खौ‌फ सता रहा है और वे पालनपुर जेल से जाना नहीं चाहते हैं। वे चाहते हैं, मुंबई जाने से पहले चूहे से बचाव के पूरे इंतजाम हो जाएं।
गौरतलब है कि सोहराबुद्दीन शेख और उनकी पत्नी कौसर बी को गुजारत के ऐंटि टेररिजम स्क्वॉयड ने हैदराबाद से उठाया था और नवंबर 2005 में फर्जी एनकाउंटर में दोनों की हत्या हुई थी। तुलसी प्रजापति इस केस का इकलौते गवाह था, जिनका एनकाउंटर 2006 में कर दिया गया था।

रेल के एसी कोच में छूट रहे हैं पसीने

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उदयपुर। भरी गर्मी में एसी कोच में यात्रा करने वालों को राहत मिलना तो दूर, उलटे पसीने छूट रहे हैं। पिछले दिनों में ट्रेनों के एसी कोच में ठंडक नहीं होने से यात्री परेशान हो गए। इसकी शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। कायदे से ट्रेन जब प्लेटफॉर्म पर पहुंचे, तो उसके एसी ऑन होने चाहिए, लेकिन उदयपुर में ऐसा हो नहीं रहा। ग्वालियर एक्सप्रेस में कल भी यही हालत थी, जिससे उदयपुर से जयपुर जाने वाले कुछ यात्रिओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इससे पूर्व भी क्रमददगारञ्ज को बांद्रा से उदयपुर चलने वाली ट्रेन के ऐसी कोच के एसी बंद होने की शिकायत मिली थी। इधर, शिकायत पर क्षेत्रीय रेलवे अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हंै।
उदयपुर के मुकेश मनवानी, अपने परिवार के आठ सदस्यों के साथ मंगलवार को जयपुर थर्ड एसी में सफर कर रहे थे। उन्होंने क्रमददगारञ्ज को कॉल कर बताया की, जब वह कोच में गए, तो अंदर एसी चालू नहीं होने की वजह से घुटन हो रही थी। पसीने छूट रहे थे, जब उन्होंने इसकी शिकायत की, तब एसी ओन किया गया। मावली से भी आगे निकलने के बाद करीब एक घंटे बाद कुछ राहत मिली। यही शिकायत दो दिन पूर्व मुंबई से उदयपुर आ रहे अखिलेश सक्सेना ने की। रास्ते में एसी बंद हो गया, जो करीब तीन घंटे बाद चालू किया गया। इतने टाइम में सारे यात्रियों का हाल बुरा हो गया। जानकारी के अनुसार उदयपुर से चलने वाली अधिकतर ट्रेनों का यही हाल है। ट्रेन शुरू होने के एक घंटे बाद कुछ कुलिंग का अहसास हुआ।
नियम एक घंटे पहले चलने चाहिए एसी : रेलवे बोर्ड ने ट्रेन चलने से एक घंटे पहले एसी कोच को प्री-कूल्ड करने का प्रावधान तय किया हुआ है। इस मामले में यात्रियों की बढ़ती शिकायतों पर अक्टूबर,1985 व नवंबर,1998 में यह भी तय किया गया था कि जब यात्री कोच में चढ़े, तो उसे शीतलता का अहसास होना चाहिए। दूसरी ओर जब ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आती है, तब एसी ऑन किया जाता है। ऐसे में जब यात्री कोच में बैठते हैं तो उन्हें घुटन का अहसास होता है। ट्रेन चलने के एक घंटे तक कोच ठंडा नहीं होता। ट्रेन के कोचिंग डिपो में जाने के बाद उसका रखरखाव व साफ-सफाई की जाती है। वहीं पर बैट्री चार्जिंग के प्वाइंट भी लगे हैं। रेलवे बोर्ड के मैन्युअल में साफ लिखा है कि ट्रेन को प्लेटफॉर्म पर लाने से पहले उसे प्री-कूल्ड किया जाए। स्थिति यह है कि डिपो में बैट्री को सही ढंग से चार्ज नहीं किया जाता। यात्रियों के चढऩे के बाद सिर्फ ब्लोअर चलाया जाता है। ट्रेन 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर दौडऩे लगती है, तब एसी ऑन किया जाता है। एसी को बैट्री से चलाना चाहिए, लेकिन रेलवे कर्मचारी ट्रेन चलने के बाद उसे बैट्री से कनेक्ट करते हैं ताकि रास्ते में बैटरी खत्म होने की दिक्कत नहीं हो।

वर्जन…
ट्रेन में एसी नहीं चले, बंद हो या देर से चले इसकी जिम्मेदारी मेरी नहीं है। यह इलेक्ट्रिक विभाग की जिम्मेदारी है। आप उनसे बात कीजिए कि क्यों एसी नहीं चलता है।
-हरफूल सिंह चौधरी, क्षेत्रीय रेलवे अधिकारी

अब जेल में शूरू होगी गेंगवार!

-दोनों गेंग के कई आरोपी जेल में बंद, नरेश हरिजन के बाद अजय पूर्बिया चला रहा था गेंग,
-पुलिस अब तक कोर्ट में नहीं पेश कर पाई पूर्व में हुई दो गेंगवार की चार्जशीट

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उदयपुर। हिस्ट्रीशीटर नरेश हरिजन और मृतक प्रवीण पालीवाल गिरोह के कई लोग जेल में बंद हैं, जिनके बीच अब जेल में गेंगवार हो सकती है। ऐसा अंदेशा इसलिए जताया जा रहा है कि पिछले दिनों नरेश हरिजन को मारने के लिए जेल में माउजर भिजवाई गई थी, लेकिन वह जांच के दौरान पकड़ी गई। यह मामला जेल अधिकारियों ने दबा दिया और उसकी कोई रिपोर्ट भी दर्ज नहीं हुई। इधर, पुलिस नरेश हरिजन पर ईसवाल में हुए हमले और प्रवीण पालीवाल की हत्या के मामले में अब तक कोर्ट में चार्जशीट भी पेश नहीं कर पाई है।
ईसवाल में नरेश हरिजन पर हुए हमले के आरोपी गोगुंदा निवासी शंभूलाल, सुनील और सुखेर निवासी लक्ष्मणसिंह राठौड़ जेल में बंद है। इसी प्रकार प्रवीण पालीवाल की हत्या के आरोपी नरेश हरिजन, चंचल महाराज, साहिल हरिजन, दलपतसिंह, भरतनाथ और करणसिंह भी जेल में बंद है। इधर, नरेश हरिजन के राइट हैंड अजय पूर्बिया की कल हुई हत्या के आरोपी प्रवीण वसीटा भी गिरफ्तारी के बाद जेल जाने वाला है। इन सभी के बीच खूनी रंजिश हैं, जो जेल में गेंगवार की शक्ल में बदल सकती है। पता चला है कि प्रवीण पालीवाल के अंतिम संस्कार के वक्त प्रवीण वसीटा ने कसम खाई थी कि वह नरेश हरिजन के गिरोह के सदस्यों को जान से मार डालेगा, जिसको उसने कल अजय पूर्बिया की हत्या करके पूरा कर लिया है। इधर, गोवर्धनविलास क्षेत्र मेें टेक्नोवा मोटर्स के पास हुई हत्या के मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने इस मामले में प्रवीण वसीटा सहित दो युवकों के खिलाफ मामला दर्ज कर है। इस मामले में पुलिस विभाग ने चार टीमों का गठन किया है, जो आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न स्थानों पर दबिश दे रही है। बताया जा रहा है कि मृतक नरेश हरिजन के जेल में जाने के बाद से ही सारा कारोबार मृतक अजय पूर्बिया ही संभाल रहा था।

ठंडे प्रदेशों के पौधे झुलसे

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उदयपुर। गर्मी का टेम्परेचर लगातार बढ़ता जा रहा है। तापमान ४४ डिग्री के करीब पहुंच रहा है। इसका सबसे बड़ा असर ठंडे प्रदेशों से लाकर यूआईटी द्वारा यहां चौराहों पर लगाए गए बड़े-बड़े पौधों पर पड़ रहा है, जो इस गर्मी में बूरी तरह से झुलस गए हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ रजा तहसीन का कहना है कि ये जो पेड़-पौधे लगाए गए हैं, वो ठंडे प्रदेशों से लाए गए हैं, जबकि यूआईटी को यहां के वातावरण में जिंदा रहने वाले पेड़-पौधे लगाने चाहिए थे। इसके साथ ही प्लास्टिक के गमलों में कभी कोई प्लांटेशन नहीं होता, जबकि इन पौधों को प्लास्टिक के गमलों में लगाया गया हैं, जो गलत है।

मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रही हैं बेअसर दवाएं

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-अधिक टेम्परेचर में रखने से कम हो रहा है दवाओं का असर
उदयपुर। शहर के हजारों मरीज ऐसी दवाएं ले रहे हैं, जिनमें असर करने की क्षमता काफी कम हो चुकी है। कारण यह है कि इन दवाओं को अधिकतम 20-25 डिग्री सेल्सियस में ही रखा जा सकता है, लेकिन ये दवाएं 35-45 डिग्री सेल्सियस के बीच रखी हुई हैं। शहर के 800 से अधिक मेडिकल स्टोर में करोड़ों रुपए की सैकड़ों दवाएं इतने ही अधिक तापमान में रखी हैं और मरीजों को दी जा रही हैं। एमबी हॉस्पीटल सहित शहरभर मेें लगी मेडिकल स्टोर्स का जायजा लिया, तो लगभग सभी जगह यही स्थिति थी। मेडिकल स्टोरों में करोड़ों रुपए की दवाएं आवश्यक तापमान से 15 से 20 डिग्री अधिक तापमान में रखी हुई हैं।
जीवनरक्षक दवाओं की भी किसी को परवाह नहीं : सिस्प्लेटिन इंजेक्शन और डोक्सोरयूबिसिन हाइड्रो-क्लोराइड कैंसर में काम आने वाले महत्वपूर्ण एंटीबायटिक इंजेक्शन हैं और इन्हें 15-25 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच ही रखा जाना चाहिए। एंडीनलिन बिट्राटेट इंजेक्शन हार्ट पेशेंट को लगाया जाता है। इसको भी 35 से 45 डिग्री के बीच रखा जा रहा है, जबकि इसको 15 से 25 डिग्री के बीच रखा जाना चाहिए।
दवा, जो पांच में से तीन मरीजों को दी जाती हैं : एमोक्सीलिन एंड पोटेशियम क्लेवनेट और सेफट्राइजोन, ये एंटीबायटिक इंजेक्शन है और लगभग हर मरीज को लगाए जाते हैं। इन इंजेक्शन को 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच ही रखा जाना होता है, लेकिन जिन आईपीडी में ये रखे गए हैं। वहां का तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस था। इसी प्रकार फ्लूड को 35 डिग्री सेल्सियस तापमान में रखा जाना चाहिए, जबकि दुकानों में ये कार्टनों में 35 से अधिक डिग्री में रखे जाते हैं। डायबिटीज में काम आने वाली मेटफोरमिन टेबलेट को अधिकतम 25 डिग्री सेल्सियस तापमान में रखा जाना होता है। यह भी 35-42 डिग्री सेल्सियस के बीच रखी हैं।
फ्रीज में भी नहीं रख सकते दवा : इन दवाओं को न्यूनतम तापमान के चलते फ्रीज में भी नहीं रखा जा सकता है। इसलिए दवा स्टोर को ही कूलिंग सिस्टम से जोड़ा जाना चाहिए। अभी अधिकांश स्टोर में कूलर ही लगे हैं और दवा स्टोर्स में ये बेअसर हैं।
अधिकतर दुकानों में तापमान का कोई कंट्रोल नहीं : अस्पताल में लगी सरकारी उपभोक्ता की दुकानें हो या बाहर लगे मेडिकल स्टोर वहां पर इस भीषण गर्मी में तापमान कंट्रोल की कोई व्यवस्था नहीं है। इक्का-दुक्का दुकानों में ऐसी लगा हुआ है। बाकी स्टोर वालों का कहना है हम कूलर से तापमान मेंटेन कर लेते हैं।

क्या होता है, अधिक तापमान से : विशेषज्ञों के अनुसार जहां पर दवा रखी हुई होती है, वहां पर तापमान 25 से 30 डिग्री ही होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं है, तो 48 घंटे तक तय तापमान से अधिक में रहने पर दवाएं अपना असर करने की शक्ति को 25 फीसदी तक खो देती है। 4 से 5 दिन में 50 प्रतिशत और इंजेक्शन और 7 से 8 दिन रहने पर दवाएं अपना असर पूरी तरह खो देती है। लिक्विड वेक्सीन के खराब होने का सबसे अधिक दर रहता है। इसके लिए ऐसी जरूरी है।
वर्जन…
दवाओं को तय तापमान में रखने के निर्देश दिए हुए हैं और मेडिकल स्टोरों पर अक्सर इनकी जांच की जाती है। अभी यदि किसी स्टोरों में ऐसा है, तो ड्रग इंस्पेक्टर को बोल कर जांच कर वाली जाएगी।
-डॉ. आरएन बैरवा, सीएमएचओ

गेंगवार में दो युवकों को मारी गोली

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उदयपुर। गोवर्धनविलास क्षेत्र मेें टेक्नोवा मोटर्स के पास बाइक सवार दो नकाबपोश बदमाशों ने दो युवकों पर फायर किए। एक युवक के सीने और दूसरे के हाथ में गोली लगी है। दोनों को यहां अमेरिकन हॉस्पीटल में भर्ती कराया गया है, जहां एक युवक की हालत चिंताजनक बताई जा रही है। यह हमला प्रवीण पालीवाल की हत्या से जुड़ा बताया जा रहा है। नरेश हरिजन और प्रवीण पालीवाल गु्रप के बदमाशों के बीच रंजिश के चलते यह गेंगवार चल रही है।
सूत्रों के अनुसार आज दोपहर मदार निवासी अजय पूर्बिया और उदयपुर निवासी विनोद जैन गोवर्धनविलास स्थित टेक्नोवा मोटर्स पर कार सर्विस के लिए देने गए थे, वहां से जब ये दोनों लौट रहे थे, तभी बाइक पर सवार होकर दो नकाबपोश आए। बाइक पर पीछे बैठे युवक ने फायर किए। एक गोली अजय पूर्बिया के सीने में लगी, जबकि दूसरी गोली विनोद जैन के हाथ पर लगी। फायरिंग के बाद नकाबपोश युवक वहां से फरार हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों को अमेरिकन हॉस्पीटल पहुंचाया। प्रारंभिक पूछताछ में अजय पूर्बिया ने बताया कि उस पर फायरिंग करने वाले युवक का नाम प्रवीण वसीटा है। बताया जा रहा है कि अजय पूर्बिया और विनोद जैन, नरेश हरिजन गिरोह से ताल्लुक रखते हैं, जबकि फायरिंग करने वाले युवक प्रवीण पालीवाल गु्रप से है।
बदला लेने की नीयत से किया हमला : होली की शाम को नरेश हरिजन के गिरोह के युवकों ने प्रवीण पालीवाल की यहां शास्त्री सर्कल स्थित एक रेडिमेड गारमेंट्स के शो रूम में गोली मार कर हत्या कर दी थी। उसके बाद से ही प्रवीण पालीवाल का ग्रुप बदला लेने की फिराक में था, जिसने आज इस वारदात को अंजाम दिया है। प्रवीण पालीवाल की हत्या से पूर्व पालीवाल ग्रुप के बदमाशों ने नरेश हरिजन पर ईसवाल में जानलेवा हमला किया था, जिसमें वह बच गया। नरेश हरिजन और उसके साथी प्रवीण पालीवाल की हत्या के आरोप में अभी जेल में विचाराधीन है।

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॥ यह वारदात नरेश हरिजन और मृतक प्रवीण पालीवाल ग्रुप के बीच गेंगवार के चलते हुई है। अभी मामले की जांच चल रही है। फरार अभियुक्तों की तलाश की जा रही है।
-हनुमान प्रसाद, कार्यवाहक एसपी

सदर असरार अहमद खान का अजमेर दौरा

दरगाह विकास कार्यो पर हुई चर्चा
दरगाह कमेटी कर्मचारियों, सराए चिश्ती चमन व्यापारी और मीडिया से हुए रूबरू

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उदयपुर । नवनिर्वाचित सदर असरार अहमद खान दरगाह कमेटी दरगाह ख्वाजा साहब अजमेर के वर्तमान कमेटी के अध्यक्ष चुने जाने के बाद पहली बार दो दिवसीय प्रवास पर अजमेर रहे।
इस प्रवास के दौरान श्री खान ने दरगाह कमेटी के कर्मचारियों से मुलाकात की, जायरीन के सुविधाए व दरगाह के विकास को अपनी प्रथम प्राथमिकता से अंजाम देने के निर्देष दिए, साथ ही इस अवसर पर दरगाह कर्मचारियों ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष का स्वागत किया और फूलों की मालाओं से श्री खान का इस्तकबाल किया।
सराए चिश्ती चमन व्यापारीगण ने किया श्री असरार अहमद का स्वागत
दरगाह कमेटी सदर असरार अहमद खान का सराय चिश्ती चमन के व्यापारीगण ने स्वागत किया। इस अवसर पर व्यापारियों ने सदर खान की गुलपोशी की और शाल भेंट की। स्वागत के बाद चर्चा के दौरान व्यापारीयों ने अपनी परेशानियों के बारे में सदर श्री खान को अवगत कराया। खान ने व्यापारीयों को भरोसा दिलाया की कमेटी पूरी तरह उनकी हमदर्द है और बारिश के मद्देनजर जो परेशानियां व्यापारियों की दुकानों और गोदामोें होती है उसे जल्द सही करवाने की इजाजत कमेटी द्वारा दी जाएगी। व्यापारीगण ने भी सदर श्री खान को भरोसा दिलाया की वे पूरी तरह से उनके साथ ही और वे कमेटी का सम्मान करते है। इस अवसर पर सरदार जोगेन्द्र सिंह, पदम् चंद जैन, पुनम चंद मारोठिया, श्याम सुंदर नागरानी, भगवान दास, तौला राम इत्यादी व्यापारी शामिल रहे।
सदर श्री असरार अहमद हुए मीडिया से रूबरू
DSC_8908मीडिया से रूबरू होते हुए सदर श्री असरार अहमद खान ने दरगाह के आगामी विकास कार्यो की जानकारी दी। श्री खान ने मीडिया को बताया की दरगाह कमेटी का उद्देश्य जायरीनों को अधिक से अधिक सुविधा मुहय्या करवाना है। कमेटी की कोशिश रहेगी की वह पहली प्राथमिकता पर दरगाह विकास के छोटे-छोटे कार्यो को अंजाम दे। इसी के साथ श्री खान ने निम्न लिखित विकास कार्यो के बारे में अवगत करायाः-
1. दालान सैयद हमीद, दालान मोतीवाला पर का दरगाह कमेटी ओर से वॉटर प्रुफिंग करवाई जाएगी। वॉटर पु्रुफिंग के लिए 4 लाख 82 हजार रूप्ये की एनआईटी जारी की जा चुकी है।
2. माननीय मंत्री महोदया श्रीमती नजम हेपतुल्लाह को पत्र लिखकर उनके केंद्रीय मंत्री बनने पर मुबारकबाद दी गई है व उनसे कमेटी ने मुलाकात करने के लिए समय मांगा है।
3. प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी 100 दिवसीय कार्य योजना में अजमेर में मौलाना आजाद एज्यूकेशनल फाउंडेशन द्वारा ख्वाजा गरीब नवाज सीनीयर सैकंडरी स्कूल शुरू करने का प्रस्ताव शामिल किया है। जिसे दरगाह कमेटी द्वारा पूर्ण किया जाएगा।
4. कायड़ विश्रामस्थली पर जल्द ही क्रिकेट और फुटबाल का मैदान तैयार किया जायगा। इसके साथ ही ख्वाजा मॉडल स्कूल में बास्केटबाल का अंतराष्ट्रीय स्तर का मैदान तैयार है।
5. इस सत्र से ख्वाजा मॉडल स्कूल को दो पारियों में किया जाएगा साथ ही प्रत्येक कक्षा में एक सेक्शन को बढाया जाएगा।
6. ख्वाजा मॉडल स्कूल की शैक्षणीक व्यवस्था को बढाने के लिए ख्वाजा मॉडल स्कूल पर एक मंजिल का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।
7. सराए चिश्ती चमन में खाली, 4 गोदामों को जल्द वर्तमान डीएलसी दर पर दिये जाने हेतू टेंडर जारी किए जाएगे।