चाक़ू से पहले किया पत्नी पर ताबड़तोड़ वार – फिर खुद के पेट में घोंपा चाक़ू .

Udaipur Post. बीकानेर में मंगलवार को एक व्यक्ति ने अपनी ससुराल में पत्नी पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर उसे गंभीर घायल कर दिया। बाद में उसने खुद के पेट में भी चाकू घोंप कर आत्महत्या करने की कोशिश की। यह वारदात बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ के कालूबास में मंगलवार शाम करीब साढ़े चार बजे घटी। अचानक हुए घटनाक्रम से घर के लोग कुछ समझ ही नहीं पाए। बाद में परिजन दोनों घायलों को स्थानीय चिकित्सालय लेकर गए, जहां उन्हें पीबीएम के ट्रोमा सेंटर रेफर कर दिया। श्रीडूंगरगढ़ सीआइ प्रदीपङ्क्षसह चारण ने बताया कि बीकानेर के गोगागेट निवासी संतोष पुत्र शंकर गिरी मंगलवार को श्रीडूंगरगढ़ के कालू बास अपनी ससुराल पत्नी संतोष देवी को लेने आया था। इस दौरान दोनों में कहासुनी हो गई और झगड़ा बढ़ गया। तभी संतोष ने घर में सब्जी काटने वाले चाकू से पत्नी पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। बाद में खुद भी घटना से घबरा गया और खुद को भी चाकू मार लिया।
पहले सरकारी अस्पताल
सीआइ ने कहा कि महिला की हालत गंभीर है। वारदात की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर गई, लेकिन तब तक परिजन दोनों को श्रीडंंूगरगढ़ के सरकारी अस्पताल ले गए। हालत नाजुक होने पर दोनों को पीबीएम के ट्रोमा सेंटर रेफर कर दिया। तब श्रीडूंगरगढ़ थाने से एएसआई यहां पहुंचे। उन्होंने महिला के बयान लेने की कोशिश की, लेकिन वह बयान नहीं दे पाई।
बेटी व मां के रोने पर पहुंचे लोग
पुलिस के मुताबिक घटना के समय संतोष देवी की १५ वर्षीय बेटी और उसकी मां मौजूद थी। चाकू के वार जब संतोष निढाल होकर आंगन में गिर पड़ी तो वे बुरी तरह घबरा गई और जोर-जोर से रोने लगी। शोर-शराबा सुनकर आस-पास के लोग वहां पहुचे। पड़ोसियों की सहायता से दोनों को अस्पताल ले गए और घर के पुरुषों व पुलिस को वारदात की सूचना दी।
बच्चे, महिलाएं थी घर पर
सीआइ चारण ने बताया कि संतोष देवी एक-डेढ़ महीने से पीहर में रह रही थी। दोनों के बीच काफी समय से मनमुटाव चल रहा था। दोनों की शादी को १९ साल हो गए हैं। उनके चार बच्चे हैं। वारदात के समय बच्चे और महिलाएं ही घर पर थी। संतोष ने पत्नी पर चाकू से वार किए तो घर में कोहराम मच गया।

कांग्रेस के फ्लॉप जिलाध्यक्षों पर गिर सकती है गाज – बदले जायेगें इन जिलों के जिलाध्यक्ष .

0


उदयपुर पोस्ट .विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के आशा अनुरूप प्रदर्शन नहीं होने से नाखुश कांग्रेस आलाकमान ने अब लोकसभा चुनावों को देखते हुए जिलाध्यक्षों पर नकेल कसना शुरू कर दी है। आलाकमान ने प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे और चारों ओर से प्रभारियों को यह जिम्मा सौंपा है कि वह सभी जिला कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों के तीन साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड तैयार करें और जहां बदलाव संभव हो वहां तुरंत फैसले लें ।
जानकारों की माने सह प्रभारी जिलाध्यक्षों के कामकाज की रिपोर्ट का आंकलन कर रिपोर्ट कांग्रेस आलाकमान को भेजेंगे। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आलाकमान को भेजने के बाद कई जिलों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
कई जिलाध्यक्षों को बदला जा सकता है या फिर जिला संगठन को मजबूती देने के लिए कार्यकारी जिलाध्यक्षों की नियुक्तियां की जा सकती हैं। वहीं विधानसभा चुनाव में पार्टी के पक्ष में लहर होने के बावजूद अपने प्रत्याशियों को जिताने में असफल रहे कुछ जिलाध्यक्षों पर गाज गिर सकती है। उनसे प्रत्याशियों की हार की वजह के कारण भी पूछे जा सकते हैं।इधर आलाकमान के इस निर्णय से प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

चुनावी प्रदर्शन पर भी नजर
वहीं कांग्रेस आलाकमान की विधानसभा चुनाव में जिलाध्यक्षों के रहे प्रदर्शन पर भी नजर है। दरअसल प्रदेश में कई जिले ऐसे हैं जहां पार्टी का प्रदर्शन विधानसभा चुनाव में कमजोर रहा है, इनमें बीकानेर, अजमेर, कोटा, उदयपुर जैसे अहम जिले भी शामिल हैं ।
इन दिनों में कांग्रेस की शहर व देहात इकाइयों अलग-अलग हैं। इन जिलों में कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं को हार का सामना करना पड़ा है। ,जिनमें नेता प्रतिपक्ष रहे रामेश्वर डूडी, पूर्व सांसद रघुवीर मीणा, पूर्व मंत्री नसीम अख्तर इंसाफ, वीरेंद्र बेनीवाल, मांगीलाल गरासिया जैसे दिग्गज भी शामिल हैं।
ऐसे में इन जिलों के अध्यक्षों से प्रत्याशियों की हार को लेकर सवाल करने के साथ ही उनसे विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए कार्यों का विवरण भी मांगा जाएगा।
इन जिलों में हो सकता है बदलाव
वहीं जिन जिला इकाइयों में बदलाव होने की बात कही जा रही है उनमें जयपुर शहर, जयपुर देहात और अलवर शहर भी शामिल हैं। दअरसल जयपुर शहर अध्यक्ष प्रताप सिंह खाचरियावास, जयपुर देहात अध्यक्ष राजेंद्र यादव और अलवर जिलाध्यक्ष टीकाराम जूली गहलोत सरकार में मंत्री बने हैं। ऐसे में व्यस्ता के चलते इन जिलों में अध्यक्षों को बदला जा सकता है।

स्वाइन फ्लू का कहर बरकरार दो मरीजों की मौत, तीन और पॉजिटिव मिले

राजस्थान के कई जिलों सहित उदयपुर संभाग में भी स्वाइन फ्लू का कहर बना हुआ है। रविवार को एमबी अस्पताल के स्वाइन फ्लू वार्ड में अंबामाता निवासी 45 वर्षीय किशन और छोटी सादड़ी (प्रतापगढ़) निवासी 45 वर्षीय तखतमल की मौत हो गई।
चार दिन में तीन रोगियों की मौत हो चुकी है।एमबी अस्पताल अधीक्षक डॉ. लाखन पोसवाल ने बताया कि तखतमल को परिजन काफी देर बाद शनिवार को लेकर आए थे। उसके फेफड़े निमोनिया से पूरी तरह संक्रमित हो गए थे। इससे एक दिन पहले किशन को भर्ती कराया गया था। वह किडनी रोगी था। इस बीच तीन मरीजों में फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें शहर के मोती मगरी निवासी 13 वर्षीय किशोर, झाड़ोल निवासी 27 वर्षीय युवती और प्रतापगढ़ की 28 वर्षीय महिला शामिल हैं। तखतमल की मृत्यु के बाद पॉजिटिव रिपोर्ट आई। बता दें कि इससे पहले प्रतापगढ़ में छोटीसादड़ी के सुबी निवासी 69 वर्षीय रोगी गरवर सिंह, चित्तौड़गढ़ की 23 वर्षीय असीरा, 40 साल की ललिता, चित्तौड़ के 42 वर्षीय खेमराज, उदयपुर के मल्लातलाई निवासी 65 साल के प्रकाश और 27 सितंबर को अंबामाता निवासी 50 वर्षीय प्रकाश, उदयपुर में टेकरी निवासी 45 वर्षीय भुवनेश सहित नौ मरीजों की स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है।

Homoeopathy Can prevent and cure swine flu – Dr. Kajal Verma

Technically, the term “swine flu” refers to influenza in pigs. Occasionally, pigs transmit influenza viruses to people, mainly to hog farmers and veterinarians. Less often, someone infected with swine flu passes the infection to others.

The human respiratory infection caused by a particular influenza virus H1N1

डॉ. काजल वर्मा

strain — popularly known as swine flu — was first recognized in spring 2009. A few months after the first swine flu cases were reported, rates of confirmed H1N1-related illness were increasing in much of the world. And nao also constantly cases are being diagnosed again in 2019.

Causes-Influenza viruses infect the cells lining your nose, throat and lungs. The virus enters your body when you inhale contaminated droplets or transfer live virus from a contaminated surface to your eyes, nose or mouth.

You can’t catch swine flu from eating pork.

Symptoms
H1N1 flu signs and symptoms in humans are similar to those of other flu strains:

· Fever (but not always)

· Cough

· Sore throat

· Runny or stuffy nose

· Watery, red eyes

· Body aches

· Headache

· Fatigue

· Diarrhea

· Nausea and vomiting

H1N1 flu symptoms develop about one to three days after you’re exposed to the virus.

Risk factors
If you’ve traveled to an area where many people are affected by swine flu (H1N1 flu), you may have been exposed to the virus, particularly if you spent time in large crowds.

Swine farmers and veterinarians have the highest risk of true swine flu because of their exposure to pigs.

Complications

Influenza complications include:

· Worsening of chronic conditions, such as heart disease and asthma

· Pneumonia

· Neurological signs and symptoms, ranging from confusion to seizures

· Respiratory failure

HOMOEOPATHIC REMEDIES

In Homoeopathy there is a concept called Genus Epidemicus . This means is there is an epidemic and you take the symptoms of say 15 ailing people of an area , you will notice a common trend, based on that you give medication…. for the symptoms this medication then, if given to people of that area, can act as preventive medicine.

Some of the important remedies are given below-

Arsenic alb ,influenzinum ,
Rhus tox , bryonia ,merc sol , Eupatorium perf, gelsemium etc

The following measures also help prevent swine flu (H1N1 flu) and limit its spread:

Stay home if you’re sick  If you have swine flu (H1N1 flu), you can give it to others. Stay home for at least 24 hours after your fever is gone.

Wash your hands thoroughly and frequently Use soap and water, or if they’re unavailable, use an alcohol-based hand sanitizer.

Contain your coughs and sneezes Cover your mouth and nose when you sneeze or cough. To avoid contaminating your hands, cough or sneeze into a tissue or the inner crook of your elbow.

Avoid contact Stay away from crowds if possible. And if you’re at high risk of complications from the flu — for example, you’re younger than 5 or you’re 65 or older, you’re pregnant, or you have a chronic medical condition such as asthma — consider avoiding swine barns at seasonal fairs and elsewhere.

Reduce exposure within your household If a member of your household has swine flu, designate only one household member to be responsible for the ill person’s personal care

Smt. Maneka Sanjay Gandhi confers National Awards to Anganwadi Workers for Exceptional Achievements under ICDS Scheme

Hindustan Zinc Nand Ghar Anganwadi workers received the Award for their service in the field of child development and related areas…

 We are pleased to inform that Hon’ble Union Minister for Women & Child Development – Smt. Maneka Sanjay Gandhi has conferred two anganwadi workers  – Ms. Rukmani Bhoi from Tilakheda Nand Ghar, Udaipur and Ms. Vimla Kunwar from Nayakheda Khushi Anganwadi Centre with ‘National Awards for Exceptional Achievements for the year 2017-18’ on 7th January, 2019 in New Delhi.

This award has been presented to 97 Anganwadi Workers (AWWs) for Exceptional Achievements for the year 2017-18 in the presence of Minister of State for Ministry of Women & Child Development – Dr. Virendra Kumar and Secretary, Ministry of Women & Child Development – Mr. Rakesh Srivastava. This annual award is given to motivate the Anganwadi Workers and to recognize their exemplary service in the field of child development and related areas under the ICDS Scheme. The Award at the National Level comprises of a cash prize of Rs. 50,000 and a citation and state Level award comprises of a cash prize of Rs. 10,000 and a citation.

As per guidelines, National Level awards to AWWs are given to the awardees nominated by States/UTs out of the State/UT Level awardees. The number of nominations of AWWs at National Level depends on the size of the State/UT and operational ICDS Projects. The number of awards has also been doubled. The nominations received from the States/UTs were screened and recommended by a Screening Committee headed by Secretary, MWCD. The selection of awardees was made by the Selection Committee headed by Hon’ble Minister for Women & Child Development.

With focus on Child Care – Nand Ghar & Khushi, Education – Shiksha Sambal, Unchi Udaan & Jeevan Tarang, Sustainable Livelihoods – Hindustan Zinc Mining Academy & Samadhan, Women Empowerment – Sakhi, Sports – Zinc Football Academy, Health – Vedanta Hindustan Zinc Heart Hospital & Health Camps, water & sanitation, culture, environment and community development including community assets creation, the company is touching the lives of over 500,000 rural communities in Rajasthan.

सोहराबुद्दीन “फर्जी एंकाउन्टर” मामले में, अमित शाह की मुश्किलें फिर बढ़ सकती है .


उदयपुर पोस्ट । भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह गुजरात में 2005 में सोहराबुद्दीन शेख की फर्जी मुठभेड़ में हुई हत्या के मामले में एक बार फिर परेशानी में फंस सकते हैं। हालांकि उन्हें 2014 में बरी कर दिया गया था और मुम्बई की एक अदालत ने पिछले माह इस केस के सभी 22 आरोपियों को भी दोषमुक्त कर दिया था, लेकिन शाह का नाम सुप्रीम कोर्ट द्वारा सार्वजनिक की गई रिपोर्ट में आया है। यह जांच रिपोर्ट पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एच.एस. बेदी ने तैयार की है।
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एच.एस. बेदी की अध्यक्षता वाली मॉनिटरिंग अथॉरिटी की गत वर्ष 26 फरवरी को एक बन्द लिफाफे में प्राप्त हुई रिपोर्ट को जारी करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में जस्टिस बेदी की अध्यक्षता में मॉनिटरिंग अथॉरिटी का गठन कर उसे गुजरात में 2002 से 2006 के बीच हुई सभी 22 फर्जी मुठभेड़ों की जांच करने के लिए कहा था और जिसमें सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ हत्याकांड भी शामिल था।
हालांकि शाह को फिलहाल कोई परेशानी होने वाली नहीं है लेकिन चार सप्ताह बाद कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। क्योंकि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बैंचने यह उपलब्ध लगाते हुए कहा कि उसने अब तक बेदी रिपोर्ट स्वीकार नहीं की है और वह सभी संबंधित पक्षों को आपत्तियां दर्ज कराने का समय दे रहा है। कोर्ट ने रिपोर्ट स्वीकार करने या इसे अंतिम रिपोर्ट मानने के प्रश्न पर अगली सुनवाई चार हफ्तों बाद तय की है। चीफ जस्टिस के अतिरिक्त जस्टिसएल. नागेश्वर राव और जस्टिस संजय किशन कौल की बैंच ने गुजरात सरकार के रिपोर्ट को सार्वजनिक ना करने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और आदेश दिया कि फर्जी मुठभेड़ों की जांच की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं के साथ साथ मीडिया को भी रिपोर्ट उपलब्ध करायी जाए।

बैंच ने राज्य सरकार के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ताओं से रिपोर्ट साझा करने से पूर्वाग्रह पैदा हो जाएगा। चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट ने जस्टिस बेदी से 8 पृष्ठ का नोट प्राप्त किया है तथा उन्होंने मॉनिटरिंग अथॉरिटी के सभी सदस्यों से विचार-विमर्श किया है। उनकी प्रतिक्रिया जानने के बाद चीफ जस्टिस ने कहा: यदि जस्टिस बेदी रिपोर्ट देने के लिए अधिकृत हैं, जो कि हम समझते हैं। कि वे हैं, तो राज्य इस पर कैसे आपत्ति कर सकता है। शीर्ष अदालत ने स्वर्गीय वयोवृद्ध पत्रकार बी.जी. वर्गीस, जिनका दिसम्बर 2014 में निधन हो गया था, जाने-माने गीतकार जावेद अख्तर और दिल्ली की सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी द्वारा 2007 में दायर की गई याचिका के मद्देनजर उक्त अथॉरिटी का गठन किया था और यह जांच करने को कहा था कि क्या मुठभेड़ों के तरीके से ऐसा लगता है कि इसमें अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को आतंकवादी मानकर निशाना बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज बेदी की अध्यक्षता वाले पैनल ने गुजरात में 2002 और 2006 के बीच विभिन्न स्थानों पर हुई गोलीबारी से संबंधित साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन किया था।
बैंच ने गुजरात सरकार के वकील सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता के रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करने के दखल को निरस्त कर दिया। मेहता ने कहा था कि रिपोर्ट पर जिम्मेदारी की भावना से काम करने की आवश्यकता है। कोर्ट ने केस में लगातार स्थगन मांगने के लिए गुजरात सरकार की आलोचना करते हुए नोटिंग की कि किस प्रकार उसके वकील ने यह तर्क देकर अदालत से मामले में स्थगन लिए कि सॉलीसिटर जनरल कोर्ट में व्यस्त हैं। जस्टिस गोगोई ने कहा

“गुजरात राज्य मामले में बार-बार और बार-बार स्थगन नहीं मांग सकता। यदि सॉलीसिटर जनरल कोर्ट नम्बर एक में (चीफ जस्टिस कोर्ट) प्राथमिकता नहीं देते और किसी अन्य कोर्ट में जाना चाहते हैं तो यह उनका अपना निर्णय है, लेकिन उन्हें यहां के लिए कोई ना कोई प्रबंध करना होगा।”

रिपोर्ट की एक प्रति गुजरात सरकार को भी प्रत्युत्तर के लिए दी गई और उसका यह अनुरोध खारिज कर दिया गया कि रिपोर्ट को मीडिया की दृष्टि से बचाकर गोपनीय रखा जाए। गत सुनवाई में गुजरात सरकार ने यह कहकर रिपोर्ट पर आपत्ति उठाई थी कि जस्टिस बेदी ने मॉनिटरिंग अथॉरिटी के सदस्यों से विचार-विमर्श किए बिना रिपोर्ट प्रस्तुत की है। जस्टिस बेदी ने बैंच को दिए गए नोट में इस आरोप को नकारा यह स्पष्ट करते हुए कि वे रिपोर्ट को अंतिम नहीं मान रहे हैं और यदि कोई आपत्तियां हों तो उन्हें उठाने के लिएइसे केस के दोनों पक्षों से साक्षा कर रहे हैं, चीफ जस्टिस ने रिपोर्ट को साझा ना करने का गुजरात सरकार का अनुरोध निरस्त कर दिया और कहा कि इसने अपना काम शुरू कर दिया है।
कोर्ट ने हालांकि यह स्पष्टकिया कि “हमारे द्वारा स्वीकार करने के बाद ही रिपोर्ट प्रभावी मानी जाएगी।
। कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी द्वारा रिपोर्ट जारी करने के संबंध में उठाई गई इस आपत्ति को भी अस्वीकार कर दिया कि ऐसा करने से उस संभावित आरोपी के केस में पूर्वाग्रह की स्थिति बन जाएगी जिसकी वे पैरवी कर रहे हैं।

रिपोर्ट – जाल खंबाता-राष्ट्रदूत दिल्ली ब्यूरो

बाप ने मासूम बच्चों की इतनी पिटाई की कि बच्चों की म्रत्यु हो गयी।

उदयपुर पोस्ट। जाने लोगों को क्या होता जारहा है, दिल में डर या रहम तो मानो जैसे मर गया हो। लोगों की जान तो मानो इतनी सस्ती हो गयी है की कोई भी कही भी किसी की भी जान लेलेता है। कोई पराया नहीं अब तो अपने ही अपनों की जान के दुश्मन बन गए है।
राजस्थान के उदयपुर जिले में झाडोल गाँव की घटना दिल दाह;ला देने वाली है जिसमे एक पिटा ने अपने दो मासूम बच्चों को इतना पिटा की उनकी जान चली गयी। जानकारी के अनुसार झाड़ोल पुलिस थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत ओगणा के चोकलाबारा गांव में पिता द्वारा अपने दो बच्चों की पिटाई के बाद उनकी मृत्यु होने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार देर रात्रि को पिता ने अपने दो मासूम बेटा और बेटी की पिटाई की। पिटाई में बच्चों के गंभीर घायल होने पर उन्हें गुरुवार सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओगणा लाया गया, जहां पर इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद आरोपि पिता फरार है। पुलिस थाना में मामला दर्ज किया गया है।

पत्नी चाहे तो पति को थप्पड़ मार सकती है क्यूँ कि कोर्ट ने कहा है – पत्नी अगर पति को थप्पड़ मारे तो यह आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं।

0

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कोई महिला अगर दूसरों के सामने पति को थप्पड़ मारे, तो सिर्फ इस एक घटना को आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं मान सकते। पति को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से महिला को बरी करते हुए हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की।
जस्टिस संजीव सचदेवा ने कहा, सामान्य हालात में दूसरों के सामने थप्पड़ मारे जाने से कोई व्यक्ति आत्महत्या की नहीं सोचेगा। अगर थप्पड़ मारने को उकसावा मानते हैं तो ध्यान रखें कि यह आचरण ऐसा होना चाहिए जो किसी सामान्य विवेकशील इंसान को आत्महत्या की ओर ले जाए।’

कोर्ट ने कहा कि महिला के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने का कोई आधार नहीं है। उसके खिलाफ शुरू केस का कोई परिणाम नहीं निकलेगा। सिर्फ प्रताड़ित करना होगा। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा आईपीसी की धारा 396 के तहत महिला के खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत मौजूद होने की बात कहना पूरी तरह गलत है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार 2 अगस्त, 2015 को महिला के पति ने आत्महत्या का प्रयास किया और उसके अगले दिन अस्पताल में मौत हो गई। सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने पत्नी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया था। ट्रायल कोर्ट ने पाया कि महिला ने 31 जुलाई, 2015 को पति को सबके सामने थप्पड़ मारा था और 2 अगस्त को उसने आत्महत्या का प्रयास किया।

महिला के ससुर ने आरोप लगाया था कि बेटे ने पत्नी की वजह से आत्महत्या की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि सुसाइड नोट में थप्पड़ मारने की घटना का जिक्र नहीं था।

सदी की सबसे शर्मनाक घटना – प्रसव के दौरान बच्चे को इतनी जोर से खींचा कि दो हिस्से हो गए, सिर कोख में ही रह गया

Udaipur Post. सदी की सबसे शर्मनाक और घोर लापरवाही की घटना . लापरवाह चिकित्साकर्मियों ने प्रसव के दौरान नवजात बच्चे के पैरों को पकड़कर इतना जोर से खिंचा कि बच्चे के दो तुकडे हो गए . नवजात बच्चे का सर कोख में रह गया और धड अलग हो गया . इस घटना के बारे में सोच कर दिल दहल उठाता है .

दैनिक भास्कर में छापी खबर के अनुसार राजस्थान में जैसलमेर के रामगढ़ के सरकारी अस्पताल में चिकित्साकर्मियों ने प्रसव के दौरान बच्चे के पैर इतनी जोर से खींचे कि उसके दो हिस्से हो गए। बच्चे का धड़ तक का हिस्सा तो बाहर आ गया, लेकिन सिर अंदर ही रह गया। चिकित्साकर्मियों ने परिजनों को कुछ नहीं बताया और महिला को जैसलमेर के लिए रेफर कर दिया। जैसलमेर से जोधपुर भेज दिया गया, जहां पूरे मामले का पता चला।

आखिर हुआ क्या था?

तीन दिन पहले दीक्षा कंवर को प्रसव पीड़ा के बाद उसके परिजन रामगढ़ अस्पताल ले गए। यहां भर्ती करने के बाद चिकित्साकर्मी ने कहा कि मरीज को जैसलमेर ले जाओ, लेकिन परिवार वालों को यह नहीं बताया गया कि प्रसव कराने के दौरान बच्चे का सिर अंदर रह गया है।
रामगढ़ अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डाॅ. निखिल शर्मा ने बताया कि प्रसूता को जब अस्पताल लाया गया था, उस दौरान वहां मौजूद चिकित्साकर्मी उसे प्रसव के लिए प्रसव कक्ष में ले गए। वहां, देखा कि नवजात के पैर बाहर नजर आ रहे थे और वो मृत अवस्था में था। यहां पूरी सुविधा नहीं होने के कारण प्रसूता काे जैसलमेर रेफर किया गया।

जैसलमेर के डॉक्टर ने कहा- मुझे बताया गया डिलीवरी हो गई है

जैसलमेर के जवाहर अस्पताल में चिकित्सक डॉ. रविंद्र सांखला को रामगढ़ के अस्पताल से बताया गया कि महिला की डिलीवरी हो गई है, लेकिन आंवल (गर्भनाल या प्लेसेंटा) अंदर रह गई है। रात एक बजे डॉ. सांखला ने गर्भनाल निकालने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कुछ समझ में नहीं आया तो उन्होंने महिला की तबीयत को स्थिर किया और अगले दिन सुबह फिर से प्रयास किया, लेकिन फिर कुछ समझ नहीं आया। बाद में महिला को जोधपुर रेफर किया। जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में चिकित्सकों ने महिला के प्रसव किया तो बच्चे का सिर ही निकला।
जवाहर अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ और पीएमओ डॉ. उषा दुग्गड़ ने कहा कि मेरे करियर में कभी भी ऐसा नहीं हुआ। बच्चे के दो हिस्से कैसे हुए, यह जांच का विषय है। रामगढ़ पुलिस जब यहां आई तब मुझे इस घटना की जानकारी मिली। बड़ी बात तो यह है कि रामगढ़ अस्पताल में इतना कुछ होने के बावजूद महिला के परिजनों को कुछ नहीं बताया गया और जैसलमेर रेफर कर दिया गया।

परिजन सिर लेकर पहुंचे थाने

जोधपुर में डॉक्टर्स ने परिवार वालों को बच्चे का सिर सौंप दिया। इसके बाद वे बच्चे का सिर लेकर एफआईआर दर्ज कराने के लिए रामगढ़ पुलिस थाना पहुंच गए। पुलिस ने वहां के चिकित्साकर्मियों से पूछताछ की तो उन्होंने बच्चे का धड़ लाकर दिया। इसके बाद मामला दर्ज किया गया है। उपनिरीक्षक जालमसिंह ने बताया कि बच्चे के दोनों हिस्सों का अलग-अलग पोस्टमाॅर्टम करवाया गया।

कटारिया के मूंह से निकले नफरत भरे बोल – कहते है हर जिले में पाकिस्तान बनेगा, बेटियां पंचर वाले के साथ भागेगीं, हम जैसे लोग मर गए तो भगवान् तुझे कौन बचाएगा .

उदयपुर. मेवाड़ में भाजपा के कद्दावर कहलाये जाने वाले नेता श्री गुलाबचंद कटारिया विधानसभा में लगातार चोथी जीत तो हासिल कर ली लेकिन सत्ता में नहीं आने की खीज अब वह अपने नफरत भरे बोल से निकाल रहे है और अब खुलेआम मुसलामानों के खिलाफ बोलने से भी गुरेज़ नहीं कर रहे है. शायद उन्हें लगता है कि मंदिर मस्जिद, लव जिहाद, पकिस्तान की दुहाई दे कर वह जन समर्थन हासिल कर सकते है. मुसलामानों के खिलाफ अपने बेढंगे बोल बोल कर  हिन्दुओं का समर्थन हासिल कर लेंगे. और तो और कमाल यह है कि जिसने पूरी श्रश्ठी का निर्माण किया उस भगवान् को बचाने की बात कर रहे है .
पूर्व गृहमंत्री और उदयपुर शहर के वर्तमान विधायक गुलाबचंद कटारिया  वल्लभनगर में पाष्र्वनाथ मंदिर में भाजपा के स्नेह मिलन समारोह में अपना भाषण दे रहे थे और इस भाषण में उन्होंने धर्म और जाती का जो ज़हर उगला उसको सुन कर काफी आश्चर्य होता है कि वो नेता जो मेवाड़ में भाजपा का सबसे कद्दावर नेता माना जाता है वह किसी विशेष समाज के लिए इस तरह की भाषा का इस्तमाल कर सकता है .
इन कद्दावर नेता जो पूर्व भाजपा की सरकार में गृहमंत्री भी रहे उनका कहना है कि
“50 साला यही गन्दगी चली ना तो पहले पाकिस्तान रो कर आये अब हर शहर में पाकिस्तान बन जाएगा , और जो मोहल्ला बन गया तो कभी जयपुर देख आना पुराना जयपुर तुम्हारे मंदिर में भगवन रो रहे है पूजा नहीं होती मंदिर की सेवा नहीं हो सकती क्यूँ की वह बस्ती मेंघिर गया है . कभी वो हड्डी के फेकते है . कभी वो मांस के टुकडे डालते है .रोज़ कौन लडेगा लोग खाली कर कर के आगये अपने बाल बच्चों को बचाने के लिए अपनी जवाब बेटी को बचाने के लिए . अभी देखा लव जिहाद क्या है , समझ नहीं आता है क्या यह लव जिहाद . तुम्हारी बेटियां पंचर वाले के साथ भाग रही है अब अगर गलती की तो कोई रास्ता नहीं बचेगा समय निकल गया हाथ से  तो फिर कुछ नही बचेगा “
और आगे सुनिए भगवान से कहते है कि “हम जैसे अच्छे लोग मर गए तो भगवान् तू कहाँ जाएगा ये बता ,.. अगर तुझे बचाना है तो हमारी ताक़त बढ़ा “
यह विचार है इस महान नेता के जो लगातार उदयपुर शहर से 4 बार जीते है . जिन्हें हर धर्म में सम्मान मिला है इसके बावजूद ये कद्दावर नेता मुस्लिम समाज के खिलाफ ज़हर उगल रहे है . शायद इन्हें लगता है कि यह इस तरह की नफरत फैलाएगें और इन्हें वोट मिलेगें वाह वाही मिलेगी. लेकिन उदयपुर की जनता ने इस तरह की नफरत भरे ढकोसलो को हमेशा नकारा है . चाहे यह कद्दावर नेता चुनाव जित गए लेकिन इस तरह यह जनता के प्रतिनिधि कभी नहीं बन सकते .