गृहसेवक गुलाब चंद कटारिया अपने घर मे घिरने के बाद चल पड़े है मेवाड़ की 28 सीटों पर प्रचार के लिए!

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रिपोर्ट – गौरव कुमार 

पिछले 15 साल से विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले नेता जो मुख्यमंत्री बनने की ख्वाहिश रखते है , वह इस बार अपने ही घर मे घिरते नजर आ रहै है। एक बात जो उदयपुर के विधानसभा क्षेत्र में अक्सर सुनने को मिलती थी कि भाईसाहब व्यवहार की राजनीति को बड़े अच्छे ढंग से समझते है और उसे 5वे साल भुना भी लेते है जिसके चलते हर बार उनके खिलाफ बहती हवा उनके पक्ष में हो चलती है। पर लगता है इस बार ये हवा उनसे बेरुखी हो चली है। कांग्रेस पार्टी की सूची आने से पहले ही कटारिया को चक्रव्यूह में फंसने में उनके अपने ही लोग कामयाब नज़र आ रहे है। ये बात तब ओर भी चिंता बढ़ाने वाली है जब कांग्रेस की तरफ से कद्दावर महिला नेता गिरिजा व्यास का नाम लगभग तय माना जा रहा हो।
गृहमंत्री के लिए चक्रव्यूह तैयार करने वालो में कई नाम शामिल है जैसे दलपत सुराणा, भरत कुमावत और प्रवीण रतलिया।

बात करे दलपत सुराणा की तो जनसंघ के स्तम्भो में से एक दलपत सुराणा को आगे किया है भैरोंसिंह शेखावत के मंच ने जो जनता सेना के बैनर तले ताल ठोकेंगे। भैरोसिंह शेखावत मंच लम्बे समय से कोशिशें करता रहा है मगर प्रत्याशी को लेकर हर बार चूकता रहा है। लेकिन इस बार जनता सेना के प्रमुख और वल्लभनगर विधानसभा के विधायक रणधीर सिंह भींडर का साथ मिलने से गृहसेवक कटारिया की मुश्किलें बढती नज़र आ रही है। मंच ने इसी साल मेवाड़ में हाइकोर्ट की मांग को लेकर भी जबरदस्त प्रदर्शन किया था जिसका खामियाजा इस चुनाव में भाजपा को भुगतना पड़ सकता है। ये कटारिया जैसे नेता के लिए इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि मंच से जुड़े सभी लोग जनसंघ के दौर में मेवाड़ में जुड़े थे जिन्हें आज की भाजपा में हाशिये पर धकेल दिया गया। अब ये देखने वाली बात होगी कि दलपत सुराणा कांग्रेस से कैसे टक्कर लेते है क्योंकि वह कह चुके है कि उनकी लड़ाई भाजपा से नही बल्कि कांग्रेस से है।

इसी सूची में दूसरा नाम है भरत कुमावत का। कुमावत समाज भाजपा का पारम्परिक वोट माना जाता रहा है, हालांकि राज्य भर में कुमावत समाज ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर अपनी मांग तेज कर दी है जिसका एक दृश्य मंत्री सुरेंद्र गोयल के टिकट कटने के बाद दिखा। गोयल ने निर्दलीय नामांकन भरने की बात कहते हुए समाज को एकजूट किया। इतना ही नही भरत कुमावत का ये भले ही पहला चुनाव हो लेकिन राजनीतिक पृष्ठभूमि के मामले में वह नए नही दिखते। उनके चाचा युधिष्ठिर कुमावत भाजपा का बहुत बड़ा चेहरा माने जाते रहे है और नगर निकाय के सभापति भी रह चुके है। भरत कुमावत ने 2012 के अन्ना आंदोलन से जुड़ने के बाद आम आदमी पार्टी को उदयपुर में लाने में काफी मेहनत की, जिसका परिणाम रहा कि राजस्थान के संगठन ने उन्हें राज्य प्रवक्ता और विधानसभा प्रत्याशी बना दिया। अपने चुनाव प्रचार के दौरान एक बेहद दिलचस्प मुहिम को लाते हुए भरत कुमावत जनता से चंदा लेने घर घर तो जा ही रहे है साथ ही इस चंदे के बदले श्रमदान भी कर रहे है। देखने वाली बात यह होगी गुलाबचंद कटारिया के वोट कितना काट पाते है और मुख्य मुकाबले में खुद को कैसे स्थापित करते है, कययक़ी उनका और उनकी पार्टी का राजस्थान में यह पहला चुनाव है।

अंतिम और बेहद दिलचस्प नाम है प्रवीण रतलिया का, जो नाटकीय ढंग से गुलाबचंद कटारिया को टक्कर दे रहे है। सबसे युवा समाजसेवक का दावा करने वाले और अवार्ड पाने वाले रतलिया नरेंद्र मोदी विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष है। पिछले 2 साल से कई बड़े कार्यक्रम कर चुके रतलिया शायद बीजपी से टिकट मिलने को लेकर ऐसा आश्वस्त थे कि अब जब उन्हें बीजेपी ने टिकट नही दिया और उदयपुर इकाई के संगठन ने उनके बीजेपी से ही किसी तरह के सम्बंध को नकार दिया है तो वह प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कटारिया पर सीधा हमला बोल रहे है। कभी उनको हत्यारा बता रहे है तो कभी उनके विदेशों में सम्पत्ति अर्जित करने का दावा कर रहे है। इन दिनों में वे जिस चीज को लेकर चर्चा में है उसका कारण है उनकी बदजुबानी जिसमे उन्होंने गुलाबचन्द कटारिया को हार्ट अटैक देने की बात की जिसके बाद उनकी बुरी खिल्ली उड़ी। मगर वह युवाओ में अपनी लोकप्रियता का दावा करते हुए जीत की बात कर रहे है। युवा वर्ग बेशक महत्वपूर्ण हो, लेकिन राजस्थान में बीजेपी के खिलाफ बहती सत्ता विरोधी लहर में वह कैसे खुद को साबित कर पाएंगे जबकि वह अब तक भाजपा सरकार की नीतियों का समर्थन करते रहे है और अब जब टिकट कट गया है तो वह भाजपा सरकार के गृहमंत्री के संहार तक की बात कर रहे है। प्रोफेशनल तरीके अपनाकर लोकप्रियता हासिल करने वाले रतलिया कही ना कही राजनीतिक समझ के मामले में रणनीतिक चूक करते नज़र आ रहे है, जिसे सोशल मीडिया पर उनकी महत्वकांक्षा या अपरिपक्वता भी कहा जा रहा है। पर जो भी हो एक बात तो तय है कि जो भी वोट प्रवीण रतलिया के खाते में जायेगा उसका खामियाजा गृहसेवक को भुगतना पड़ेगा।

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https://www.youtube.com/watch?v=rhwR4qnr8es

 

भाजपा ने 31 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की, 3 मंत्रियों समेत 16 विधायकों के टिकट कटे

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मंत्री राजकुमार रिणवा की जगह दो दिन पहले बसपा से आए अभिनेष महर्षि को टिकट
– राजस्थान में नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 19 नवंबर, मतदान 7 दिसंबर को
– भाजपा ने पहली सूची में 131 प्रत्याशी घोषित किए थे, उसके अब तक 162 प्रत्याशी तय
भाजपा ने राजस्थान में 31 उम्मीदवारों की दूसरी सूची बुधवार को जारी कर दी। इस लिस्ट में पार्टी ने 3 मंत्रियों समेत 16 मौजूदा विधयाकों के टिकट काट दिए हैं। रतनगढ़ से विधायक और कैबिनेट मंत्री राजकुमार रिणवा का टिकट काटकर दो दिन पहले बसपा से भाजपा में आए अभिनेष महर्षि को मौका दिया गया है। वहीं, केशवराय पाटन से विधायक मंत्री बाबूलाल वर्मा का टिकट भी काट दिया गया है। बांसवाड़ा से विधायक और मंत्री धनसिंह रावत की जगह अखड़ू महीरा चुनाव लड़ेंगे।

भाजपा ने पहली लिस्ट में 131 प्रत्याशी घोषित किए गए थे। राज्य में 200 विधानसभा सीटें हैं। बची हुई 38 सीटों पर भाजपा की तरफ से नाम तय होने बाकी हैं। उधर, कांग्रेस बुधवार शाम तक अपने उम्मीदवारों की एक भी सूची जारी नहीं कर सकी। राजस्थान में नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 19 नवंबर है। मतदान 7 दिसंबर को हैं। नतीजे 11 दिसंबर को आएंगे।

  1. सीट भाजपा             उम्मीदवार का नाम
    1 श्रीगंगानगर         विनीता आहूजा (नया चेहरा)
    2 अनूपगढ़ (एससी)   संतोष बावरी (नया चेहरा, विधायक शिमला बावरी का टिकट कटा)
    3 संगरिया             गुरदीप सिंह शाहपीणी (नया चेहरा, कृष्णा कड़वा का टिकट कटा)
    4 बीकानेर (पश्चिम)   गोपाल जोशी (मौजूदा विधायक)
    5 श्रीडूंगरगढ़           ताराचंद सारस्वत (नया चेहरा, कृष्णा राम का टिकट कटा)
    6 नोखा                 बिहारलाल बिश्नोई (नया चेहरा)
    7 रतनगढ़             अभिनेष महर्षि (कैबिनेट मंत्री राजकुमार रिणवा का टिकट कटा)
    8 सीकर               रतन जलधारी (मौजूदा विधायक)
    9 दूदू                  प्रेमचंद बैरवा (मौजूदा विधायक)
    10 झोटवाड़ा         राजपाल सिंह शेखावत (मौजूदा विधायक, वसुंधरा सरकार में मंत्री)
    11 मालवीय नगर   कालीचरण सराफ (मौजूदा विधायक, वसुंधरा सरकार में मंत्री)
    12 बगरू (एससी)    कैलाश वर्मा (मौजूदा विधायक, मंत्री)
    13 बस्सी (एसटी)    कन्हैयालाल मीणा (2013 में चौथे नंबर पर रहे थे। दोबारा मौका)
    14 चाकसू (एससी)  रामोतार बैरवा (लक्ष्मीनारायण का टिकट कटा)
    15 रामगढ़            सुखवंत सिंह (ज्ञानदेव आहूजा का टिकट कटा)
    16 कठूमर            बाबूलाल मैनेजर (मंगलराम का टिकट कटा)
    17 बसेड़ी (एससी)    छितरिया जाटव ( रानी सिलोटिया का टिकट कटा)
    18 राजाखेड़ा         अशोक शर्मा (नया चेहरा)
    19 हिण्डौन (एससी)  मंजू खैरवाल (राजकुमारी जाटव का टिकट कटा)
    20 सिकराय (एससी)  विक्रम बंसीवाल(नया चेहरा)
    21 जैसलमेर           सांगसिंह भाटी(छोटू सिंह भाटी का टिकट कटा)
    22 पोकरण           प्रताप पुरी (शैतान सिंह का टिकट कटा)
    23 शिव               खुमाण सिंह (कांग्रेस में गए मानवेंद्र सिंह की जगह मौका मिला)
    24 चौहटन            आदूराम मेघवाल (तरुण राय कागा का टिकट कटा)
    25 गढ़ी (एसटी)       कैलाश मीणा (जीतमल खांट का टिकट कटा)
    26 बांसवाड़ा (एसटी) अखड़ू महीरा(मंत्री, धनसिंह रावत का टिकट कटा)
    27 कपासन         अर्जुन जीनगर (मौजूदा विधायक)
    28 नाथद्वारा         महेश प्रताप सिंह (नया चेहरा)
    29 जहाजपुर        गोपीचंद मीणा (नया चेहरा)
    30 केशवराय       पाटन चंद्रकांता मेघवाल (मंत्री बाबूलाल वर्मा का टिकट कटा)
    31 डग              कालूलाल मेघवाल (रामंचद्र का टिकट कटा)

 

देखिये विडियो 

https://www.youtube.com/watch?v=fI1AhAbTLuc

जब टिकिट नहीं मिला तो समाज सेवा का दावा करने वाला गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को अगले 20 दिनों में हार्ट अटैक से मारने का दावा कर रहे है .

उदयपुर . राजनीति स्वार्थ और कुर्सी की चाह जाने क्या क्या करवा देती है , चुनाव का दौर है और जो लोग जनता की सेवा करने का दावा कर विधायक बनाने के सपने पाले हुए है वो अपने विरोधियों का यूँ कहिये अपने प्रतिद्वंदियों को जी भर कर गालिया दे रहे है, बात अगर हम  उदयपुर शहर विधानसभा करें तो यहाँ गाली और अमर्यादित भाषा का पूरा बाज़ार सज चुका है, एक तरफ भाजपा के प्रत्याशी और मोजुदा विधायक गुलाबचंद कटारिया कांग्रेस की जड़ों में तेज़ाब डालने जैसे फ़िल्मी डायलोग मार रहे है तो दूसरी तरफ उन्ही की पार्टी का दम भरने वाले उनको हार्ट अटैक से मारने की बात कह रहे है,.. जी हाँ अगर इन हार्ट अटैक से मारने वाले साहब की बात माने तो अगले २० दिनों में राजस्थान के गृहमंत्री  हार्ट अटैक से मर जायेगें,

https://www.youtube.com/watch?v=rhwR4qnr8es

प्रवीन रतालिया नाम के इस एक शख्स का कहना है कि वे अगक्ले 20 दिनों में कटारिया की इतनी हालत खराब कर देंगे कि वह हार्ट अटैक से मर जायेगें .
 ये दावा करने वाले साहब है समाज की सेवा करने का दावा करने वाले प्रवीण रतालिया दावा तो यह समाज की सेवा करने का करते है लेकिन फिलहाल हार्ट अटैक से मारने में  एक्क्स्पर्ट लग रहे है .
आखिर बैर क्या है इनका गुलाबचंद कटारिया से, चलिए कम शब्दों में आपको बता देते है, श्री प्रवीन रतालिया अपने चंद समाज सेवा के घोड़े पर सवार हो कर सत्ता की कुर्सी पर खुद को बैठे देखने का सपना पाले हुए थे . इस सपने को साकार करने करने के लिए इन्होने काफी जुगत भी लगाईं भाजपा के आला कमान को खुश करने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से नमो विचार मंच भी बनाया अमित शाह के शान में कार्यक्रम भी किये और आखिर जिस काम के लिए ये सारी उठापटक की यानी शहर का विधायक बनने के लिए तो उसका केम्पेन भी सोशल मीडिया और शहर में पोस्टर लगा के चलाया खेर फायनली बात बनी नहीं और भाजपा से टिकिट मिला ,.. साहब को गुस्सा आगया और मंगलवार को प्रेस कोंफ्रेस बुला कर निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर दिया साथ ही गुलाबचंद कटारिया को हार्ट अटैक से मारने का दावा भी ठोक दिया इनका कहना है कि. इनके पास कटारिया जो पाक साफ़ होने का दावा करते है उनकी कर्तुत्प्म का कच्चा चिटठा है जो एक एक कर खोलेगें और कटारिया उन्हें देख हार्ट अटैक से ,……….
सोचिये सिर्फ टिकिट नहीं मिला उसमे इन समाज की सेवा करने वाले के तेवर इसे है अगर यह टिकिट ले कर जीत गए होते तो जिस जनता को यह समाज सेवा की नोटंकी के नाम पर चप्पल और स्वेटर बाँटते  है उस जनता की खाल भी उतरवा लेते ,.. खेर ,.. फिलहाल हम यह देखेगे की अगले २० दिनों में ये कौनसे  ऐसे काम करते है कि जिससे गुलाबचंद कटारिया को हार्ट अटैक आजायेगा ,.. फिलहाल इन्होने किसी जमीं के कागज़ दिखाए है जो गुलाबचंद कटारिया की पत्नी के नाम है ,…. बाकी और कुछ खुलासे करने का दावा कर रहे है जिसका जनता को और खुद कटारिया को भी इंतज़ार है क्यूँ कि भाई हार्ट अटैक भी तो आना है .
https://www.youtube.com/watch?v=rhwR4qnr8es

कांग्रेस की लिस्ट तो जारी नहीं हुई लेकिन गहलोत और पायलट दोनों लड़ेगें चुनाव – सस्पेंस बरकरार रहेगा

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राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2018 की सरगर्मियां उफान पर हैं। ताज़ा खबर कांग्रेस खेमे से आई है जहां पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पीसीसी चीफ सचिन पायलट दोनों ने ही चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। नई दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय में हुई एक प्रेस कांफ्रेंस में गहलोत-पायलट ने विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर चल रही अटकलों को विराम देते हुए ये घोषणा की। पर अब इस घोषणा के बाद राजस्थान में कांग्रेस के सीएम चहरे को लेकर बना सस्पेंस बरकरार ही है।

पहले गहलोत बोले फिर पायलट ने भी दिया साथ

दोपहर 12 बजे प्रतावित प्रेस कांफ्रेंस को पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सम्बोधित किया। गहलोत ने पहले दौसा से भाजपा सांसद हरीश मीणा के कांग्रेस में ज्वाइन करने की औपचारिक घोषणा की। इसके बाद बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि मैं भी चुनाव लडूंगा , पायलट भी चुनाव लड़ेंगें, सभी चुनाव लड़ेंगें। इसके बाद सचिन पायलट ने भी प्रेस को सम्बोधित करते हुए साफ़ कर दिया कि गहलोत के साथ ही वो भी विधानसभा चुनाव लड़ेंगें।

लिस्ट जारी नहीं, पर दो कैंडिडेट पक्के

राजस्थान कांग्रेस में अभी चुनाव मैदान में उतारे जाने वाले प्रत्याशियों की पहली सूची का इंतज़ार है। लेकिन इस बीच गहलोत और पायलट के चुनाव लड़ने की घोषणा होने के साथ दो प्रत्याशी तो पहले ही डिक्लेयर हो गए। ऐसे में अब सभी को बाकी सीटों पर घोषित नामों का इंतज़ार है।

एकजुट है कांग्रेस: गहलोत

प्रेस के सामने एक बार फिर गहलोत को ये कहना पड़ गया कि कांग्रेस पार्टी में कोई अंदरूनी फुट नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी में सभी एकजुट हैं और मीडिया में फूट जैसी तमाम खबरें निराधार हैं। उन्होंने इस बार के चुनाव में ज़बरदस्त जीत का दावा किया
गहलोत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की स्थिति पांचों राज्यों में मजबूत है। उन्होंने भाजपा और संघ की कार्यशैली को कटघरे में रखते हुए कहा, ”भाजपा को तो अचानक राममंदिर मुद्दा याद आ जाता है। संघ ने तो देश के लिए अंगुली तक नहीं कटाई’

जानिये कौन दावा कर रहा है गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को 20 दिन में हार्ट अटैक से मारने का 

https://youtu.be/_dutZVaUf9k

राजस्थान कांग्रेस का सूची जारी करने से पहले ज़ोरदार ‘धमाका’, भाजपा सांसद हरीश मीणा ने थामा ‘हाथ’

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राजस्थान कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करने से पहले बड़ा ‘धमाका’ कर दिया है। ‘धमाका’ ऐसा जिसने भाजपा सहित तमाम सियासी दलों में हड़कंप मचा दिया। दरअसल, सूबे की सियासत में जारी ‘आयाराम-गयाराम’ के तहत कांग्रेस पार्टी में एक और दिग्गज नेता शामिल हो गए। कांग्रेस का दामन थामने वालों में भाजपा से दौसा सांसद हरीश मीणा भी शामिल हैं। मीणा राजस्थान पुलिस के पूर्व डीजीपी हैं। मीणा ने कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की मौजूदगी में कांग्रेस ज्वाइन की। चुनाव की तारीख से ऐन पहले दौसा सांसद हरीश मीणा कांग्रेस से नाता जोड़ने के बाद भाजपा के साथ ही इसे अन्य दलों के लिए भी तगड़ा झटका माना जा रहा है।

पहले ही इस बात की संभावना थी कि एआईसीसी मुख्यालय पर दोपहर 12 बजे बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में दौसा सांसद हरीश मीणा शामिल हो सकते हैं। प्रेस कांफ्रेंस में औपचारिक पुष्टि और ऐलान के बाद इन सम्भावनाओं पर मुहर लग गई। नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने का सस्पेंस ख़त्म होने के बाद कांग्रेस के साथ ही भाजपा और अन्य दलों में भी चर्चाओं का दौर उफान पर है।

इन नेताओं के आने की भी थी अटकलें

दोपहर 12 बजे बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में जिन अन्य नामों के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें लगाईं जा रहीं थीं उनमें भाजपा से विधायक रहे हबीबुर्रहमान का नाम सबसे ऊपर था । रहमान पांच बार भाजपा से विधायक रह चुके हैं लेकिन इस बार जारी बीजेपी प्रत्यशी सूची में उनका नाम नदारद रहा।
वहीं दूसरा नाम कन्हैयालाल झंवर का बताया जा रहा है। बीकानेर जिले के नोखा विधानसभा के निर्दलीय कन्हैयालाल झंवर को लेकर कांग्रेस और भाजपा में आंतरिक खींचतान मची हुई है। नोखा में उनकी अच्छी पकड़ को देखते हुए कांग्रेस में उनके शामिल अटकलें लगाई जा रही हैं।

सभी को चौंका गया मीणा का नाम
मीणा का नाम सबसे चौंकाने वाला है। हालांकि अब तक उनके कांग्रेस में शामिल होने की वास्तविक वजह सामने नहीं आई है। लेकिन उनका नाम भी उन संभावित नेताओं की फहरिस्त में शुमार हुआ है जो कांग्रेस पार्टी में शामिल हो रहे हैं।

इधर, कांग्रेस-भाजपा के बागियों पर तीसरे मोर्चे की नजर

राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस बार निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकत्रांतिक पार्टी और घनश्याम तिवाड़ी की भारत वाहिनी पार्टी ने गठबंधन कर प्रदेश के मतदाताओं को नया विकल्प देने के लिए ताल ठोक दी है। इन दोनों की पार्टियों को अपने प्रत्याशी मैदान में उतारने के लिए कांग्रेस और बीजेपी प्रत्याशियों की सूची का इंतजार है। माना जा रहा है दोनों राजनीतिक पार्टियों से जिनके टिकट कटेंगे, वो बेनीवाल और तिवाड़ी की पार्टी का हाथ थाम सकते हैं।
बीजेपी ने 131 सीट पर प्रत्याशी उतार दिए हैं और प्रत्याशियों की घोषणा के साथ ही यहां बगावत के सुर शुरू हो गए है। वहीं अभी कांग्रेस की सूची का इंतजार है। ऐसे में तिवाड़ी और बेनीवाल ने अभी तक इन बगावत करने वालों को अपने साथ शामिल करने के लिए प्रदेश की विधानसभा सीटों से अपने प्रत्याशी नहीं उतारे हैं। हालांकि घनश्याम तिवाड़ी खुद सांगानेर से मैदान में उतर चुके हैं। वहीं हनुमान बेनीवाल आज खींवसर से नामांकन दाखिल करेंगे। इसके साथ ही बसपा, आप सहित अन्य पार्टियां अपने प्रत्याशी मैदान में उतार चुकी है।

आप आज जारी करेगी सूची

आप भी राजस्थान के 200 सीट पर चुनाव लडऩे का एलान कर चुकी है। वह अब तक 103 सीट पर अपने प्रत्याशी उतार चुकी है। वहीं करीब 55 से 60 सीट पर आज शाम अपने प्रत्याशियों की घोषणा करेगी। इसके साथ ही बसपा भी मैदान में है। बसपा ने अब तक कुल 61 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। वहीं आमेर से नवीन पिलानियां भी बसपा में शामिल हो चुनाव लडऩे का एलान कर चुके हैं।

 

रानी की बग़ावत के आगे “शाह” हुए चारों खाने चित ( विडियो )

https://youtu.be/fI1AhAbTLuc

 

राजस्थान में भाजपा की पहली सूची में अमित शाह की पसंद पर भारी पड़ा वसुंधरा राजे का हठ .

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राजस्थान में सात दिसंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 131 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. पार्टी ने 85 मौजूदा विधायकों को फिर से मौका दिया है जबकि दो मंत्रियों सहित 23 का टिकट कट गया है.
हालांकि जिन 23 मौजूदा विधायकोंं के टिकट पर कैंची चली है, उनमें से पांच का नाम उम्र आड़े आने की वजह से सूची में नहीं है. पार्टी ने इनकी जगह इनके परिजनों को मैदान में उतारा है.
मंत्री नंद लाल मीणा के बेटे हेमंत मीणा, विधायक सुंदर लाल काका के बेटे कैलाश मेघवाल, गुरजंट सिंह के पोते गुरमीत सिंह बराड़, कुंजी लाल मीणा के बेटे राजेंद्र मीणा व कैलाश भंसाली के भतीजे अतुल भंसाली को टिकट मिला है.
यानी ऐसे विधायकों की संख्या महज़ 18 है जिनका टिकट ख़राब प्रदर्शन के आधार पर कटा है. जबकि पहले यह माना जा रहा है कि एंटीइनकम्बेंसी से निपटने के लिए भाजपा आधे से ज्यादा विधायकों की जगह नए चेहरों को उम्मीदवार बनाएगी.
सियासी गलियारों में चली इस चर्चा को उस समय और बल मिला जब अमित शाह ने मुख्यमंत्री वसुंधरा की सूची को नकार दिया.
गौरतलब है कि राजे बीते 31 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवारों के नाम तय करने के लिए अमित शाह से मिली थीं. इस दौरान पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी और पंचायतीराज मंत्री राजेंद्र राठौड़ भी उनके साथ थे. सूत्रों के अनुसार वे जो सूची अपने साथ ले गई थीं उसमें 90 नाम थे.
इस सूची में सबसे पहले श्रीगंगानगर ज़िले की सीटों पर चर्चा शुरू हुई. यहां की सादुलशहर सीट पर वसुंधरा मौजूदा उम्रदराज़ विधायक गुरजंट सिंह की जगह उनके पोते गुरमीत सिंह बराड़ का नाम तय कर ले गई थीं.
जानकारी के मुताबिक इसे देखते ही अमित शाह की त्योरियां चढ़ गईं. उन्होंने कहा कि जब विधायक जीतने की स्थिति में नहीं है तो उनका पोता कैसे जीत दर्ज करेगा.
भाजपा से जुड़े सूत्रों के अनुसार अमित शाह ने अपनी ओर से कराए गए सर्वे और संघ एवं विस्तारकों की ग्राउंड रिपोर्ट का हवाला देते हुए कड़े लहज़े में कहा कि पार्टी उसे ही टिकट देगी जो जीतने की स्थिति में होगा. सिर्फ इस आधार पर किसी को टिकट नहीं दिया जाएगा कि वो मंत्री, विधायक, बड़ा नेता या किसी का चहेता है. चुनाव राजस्थान में फिर से सरकार बनाने के लिए लड़ा जा रहा है न कि किसी पर मेहरबानी करने के लिए.
शाह के तल्ख़ तेवर पर वसुंधरा राजे ने तर्क दिया कि जो लोग पार्टी और उनसे लंबे समय से जुड़े हुए हैं उनकी अनदेखी करना ठीक नहीं होगा. इन लोगों को साथ लेकर नहीं चलेंगे तो चुनाव में नुकसान होगा, लेकिन राजे की इस दलील से अमित शाह सहमत नहीं हुए. उन्होंने प्रदेश नेतृत्व को सभी सीटों पर कम से कम तीन दावेदारों का पैनल बनाकर लाने के लिए कहा.

विडियो देखें 

https://youtu.be/fI1AhAbTLuc

शाह के निर्देश के बाद गुलाब चंद कटारिया, राजेंद्र राठौड़, अविनाश राय खन्ना, वी. सतीश, चंद्रशेखर, ओमप्रकाश माथुर, अर्जुनराम मेघवाल, गजेंद्र सिंह शेखावत, नारायण पंचारिया, ओम बिड़ला, राजेंद्र गहलोत, हरिओम सिंह, सीपी जोशी, किरण माहेश्वरी व भजन लाल ने प्रदेश के सभी ज़िलों का दौरा कर दावेदारों का पैनल तैयार किया.
माना जा रहा था कि नए सिरे से तैयार पैनल और अमित शाह के पास मौजूद सूची के मिलान के बाद उम्मीदवारों का ऐलान होगा, लेकिन वसुंधरा राजे की ज़िद के सामने यह पूरी कवायद कोरी साबित हुई. टिकट तय करने में मुख्यमंत्री की तूती किस क़दर बोली है इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि श्रीगंगानगर ज़िले की सादुलशहर सीट पर जिस नाम को देखकर अमित शाह भन्ना गए थे, पार्टी ने उन्हें ही प्रत्याशी घोषित किया है.
131 उम्मीदवारों की सूची में शामिल ज़्यादातर नाम मुख्यमंत्री की पसंद के हैं. जिन विधायकों के टिकट काटे गए हैं, उनके प्रदर्शन से वसुंधरा भी नाखुश थीं. हालांकि पार्टी ने संघनिष्ठ माने जाने वाले दो दर्जन से ज़्यादा नामों को चुनावी रण में उतारा है, लेकिन इनमें से एकाध को छोड़कर सभी के राजे से भी अच्छे संबंध हैं.
सूची की ख़ास बात यह है कि वसुंधरा खेमे के किसी बड़े नेता का टिकट नहीं कटा है. उनके चहेते माने जाने वाले मंत्री यूनुस ख़ान का टिकट ज़रूर अटक गया है.
गौरतलब है कि ख़ान के पास सार्वजनिक निर्माण विभाग और परिवहन विभाग के कैबिनेट मंत्री थे. आमतौर पर इन दोनों विभागों के अलग-अलग मंत्री होते हैं, लेकिन यूनुस ने अकेले ही इन्हें संभाला.
यूनुस ख़ान वर्तमान में नागौर ज़िले की डीडवाना सीट से विधायक हैं. चर्चा है कि उनकी उम्मीदवारी एक भी मुस्लिम को मौका नहीं देने की नीति के चपेट में आ सकती है. इस चर्चा को इसलिए बल मिला है, क्योंकि पार्टी ने नागौर विधायक हबीबुर्रहमान का टिकट काट दिया है. उल्लेखनीय है कि भाजपा में यूनुस ख़ान के अलावा वे ही मुस्लिम विधायक थे.
यूनुस ख़ान के अलावा वसुधंरा सरकार के सात मंत्रियों- कालीचरण सराफ, राजपाल सिंह शेखावत, जसवंत यादव, धन सिंह रावत, हेम सिंह भड़ाना, राजकुमार रिणवां व सुरेंद्र पाल सिंह टीटी के टिकट पर फैसला पहली सूची में नहीं हुआ है. इनमें कालीचरण सराफ का टिकट कटना तय माना जा रहा है.
भाजपा की ओर से जारी पहली सूची गौर करें तो इस पर वसुंधरा का अक्स साफतौर पर दिखाई देता है. राजनीतिक प्रेक्षकों के मुताबिक यह पूरी तरह से राजे की सूची है. इसमें अमित शाह का असर सिर्फ़ इतना सा है कि किसी भी मौजूदा विधायक को सीट बदलने का मौका नहीं मिला है. अब यह तय माना जा रहा है कि बाकी बचे 69 उम्मीदवार भी वसुंधरा की पसंद के होंगे.
यह लगातार दूसरा मौका है जब अमित शाह को वसुंधरा राजे की हठ के सामने सरेंडर करना पड़ा है. इससे पहले प्रदेशाध्यक्ष के मामले में उन्हें सूबे की मुख्यमंत्री के आगे झुकना पड़ा था.
गौरतलब है कि इसी साल फरवरी में दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में भाजपा की क़रारी हार के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने वसुंधरा के ‘यस मैन’ माने जाने वाले अशोक परनामी से 16 अप्रैल को इस्तीफ़ा लिया था.
अमित शाह राजस्थान में पार्टी की कमान केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के हाथों में सौंपना चाहते थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी शेखावत को प्रदेशाध्यक्ष बनाना चाहते थे, लेकिन वुसंधरा राजे ने इस पर सहमति व्यक्त नहीं की. पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने राजे को राज़ी करने के लिए सभी जतन किए, लेकिन मुख्यमंत्री टस से मस नहीं हुईं.
आख़िरकार मोदी-शाह की पसंद पर वसुंधरा का वीटो भारी पड़ा और मदन लाल सैनी प्रदेशाध्यक्ष बने. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री और अमित शाह के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला मौका था जब इन दोनों को पार्टी के किसी क्षेत्रीय क्षत्रप ने न केवल सीधी चुनौती दी, बल्कि घुटने टेकने पर भी मजबूर कर दिया. जबकि माना यह जाता है कि मोदी-शाह की मर्ज़ी के बिना भाजपा में पत्ता भी नहीं हिलता.
अमित शाह के इस आत्मसमर्पण को उनके खेमे के एक नेता दूसरी नज़र से देखते हैं. नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर वे कहते हैं, ‘राजस्थान में भाजपा हारी हुई लड़ाई लड़ रही है. अमित शाह ने जी यहां पार्टी को मुक़ाबले में लाने के लिए ख़ूब मशक्कत की, लेकिन बात बनती हुई दिखाई नहीं दे रही. मुख्यमंत्री का अड़ियल रवैया भी इसके लिए ज़िम्मेदार है.’
वे आगे कहते हैं, ‘पार्टी ने राजस्थान को हाथ से निकला हुआ मान लिया है. ऐसे में वसुंधरा का कहा न मानने का मतलब है उन्हें यह बहाना पकड़ा देना कि केंद्रीय नेतृत्व की दख़ल की वजह से पार्टी सत्ता में आने से रह गई. इसलिए पार्टी ने उन्हें पूरी तरह से फ्रीहैंड दे दिया है. पार्टी हारती है तो इसके लिए मुख्यमंत्री ज़िम्मेदार होंगी न कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व.’
वहीं, वसुंधरा खेमे के एक बड़े नेता उम्मीदवारों की पहली सूची को मुख्यमंत्री की जीत के तौर पर देखते हैं. ‘आॅफ द रिकॉर्ड’ बातचीत में वे कहते हैं, ‘एक बार फिर साबित हो गया कि राजस्थान में वसुंधरा ही भाजपा है. पार्टी के पास उनका दूसरा विकल्प नहीं है. उनकी बात मानना पार्टी की मजबूरी है. उन्हें फ्रीहैंड दिए बिना पार्टी चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकती.’
वे आगे कहते हैं, ‘पहले यह कहा जा रहा था कि अमित शाह ने अविनाश राय खन्ना, वी. सतीश, चंद्रशेखर, मदन लाल सैनी, प्रकाश जावड़ेकर और गजेंद्र सिंह शेखावत के ज़रिये ऐसा चक्रव्यूह बनाया है कि वसुंधरा राजे को आख़िरकार हाथ खड़े करने ही पड़ेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और न कभी होगा. राजस्थान में भाजपा की कमान वसुंधरा के हाथों में ही रहेगी.’

भाजपा में बगावत जारी उदयपुर ग्रामीण मेंफूल सिंह मीणा का विरोध हरीश मीणा लड़ सकते है निर्दलीय।

उदयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए 131 उम्मीदवारों की पहली सूचि जारी करने के
बाद असंतोष का सामना कर रही सतारूढ़ पार्टी बीजेपी की मुसीबते उदयपुर में कम होती हुई नजर नहीं आ रही है। एक ओर जहां प्रदेश के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के खिलाफ सभी विरोधी लामबंद हो रहे है, तो दूसरी ओर ग्रामीण विधानसभा सीट के लिए घोषित किये गए प्रत्याक्षी फुल सिंह मीणा की भी जोरदार खिलाफत हो रही है। उदयपुर ग्रामीण विधानसभा से भाजपा के असंतुष्ठों ने अनुसूचित जनजाति मोर्चा के हरीश मीणा को निर्दलीय चुनाव लड़ाने का एलान किया है।
लगातार हो रहे इस विरोध की श्रंखला में ग्रामीण विधानसभा के असंतुष्टो ने गोवर्धन विलास इलाके में स्थित बडबडेश्वर महादेव मंदिर परिसर में इक्कठा होकर निर्दलीय के रूप में अपना प्रत्याक्षी उतारने का ऐलान कर दिया है। ग्रामीण भाजपा के सभी असंतुष्ट कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने हुंकार भरते हुए अनुसूचित जनजाति मोर्चे के जिलाध्यक्ष हरीश मीणा को चुनाव लड़ाने की बात कही है। इस दौरान सभी लोगों ने एक बैठक का आयोजन कर आने वाले चुनाव में जीतने के लिए रणनीति भी बनाई है। बीजेपी झामेश्वर मंडल के उपाध्यक्ष राजेन्द्र टांक ने साफ किया की ग्रामीण विधायक फुल सिंह मीणा को लेकर क्षेत्र में खासा आक्रोश है। यही नहीं पहले भी सभी कार्यकर्ताओं ने अपनी भावनाओ से ग्रहसेवक कटारिया को अवगत करवा दिया गया था। लेकिन फिर भी फुलसिंह मीणा को पार्टी ने वापस प्रत्याक्षी बना दिया है। ऐसे में मंगलवार को सभी कार्यकर्ताओं ने मंदिर परिसर में इकठ्ठा होकर बैठक कि है कि हरीश मीणा को निर्दलीय चुनाव लड़ना चाहिए या जनता सेना से। टांक ने कहा की अभी सिर्फ मुख्य – मुख्य लोगों की बैठक ही आयोजित की गयी है आगे की रणनीति और बनाई जायेगी।

मेवाड़ की 28 सीटो पर जीतेगी भाजपा। इस बार पूूरी तरह कांग्रेस की जड़ो में तैजाब डालकर ही बनाउगा भाजपा की सरकार – कटारिया

उदयपुर। नगर विधायक एवं भाजपा प्रत्याषी गुलाब कटारिया के नई दिल्ली से उदयपुर पहुंचने पर एयरपोर्ट पर कार्यकर्ताओं की ओर से भव्य स्वागत किया गया। रास्तों में जगह जगह कटारिया का उपरणा, माला व पगड़ी पहना कर स्वागत किया। कटारिया डबोक होते हुए सबसे पहले बोहरा गणेष मंदिर पहुंचे और गणपति का आषीर्वाद लिया, जहाॅ बडी संख्या में कार्यकर्ता पहले से ही मौजूद थे जिन्होने जमकर नारेबाजी की। पार्टी कार्यालय पर आयोजित समारोह में कटारिया ने कहा कि आज मैं आभारी हॅू भारतीय जनता पार्टी केन्द्रीय एवं राज्य के नेतृत्व का कि उन्होने मुझे एक बार फिर जनता के बीच में जाकर आषीर्वाद लेने के लिए भेजा है। उन्होने आव्हान किया कि मेरे 40 साल के राजनीति में कोई एक काला दाग लगा कर बता दे। कार्यकर्ताओं का आव्हान किया कि हम किसी व्यक्ति के लिए कार्य नहीं करते है, हमने पार्टी के लिए कार्य नहीं किया, हमने हमेषा देश को ध्यान में रखते हुए अपने कदमों को आगे बढाया है। कार्यकर्ताओं का आव्हान किया कि चुनाव में कोई कुछ भी बोले बोलने दे, उनका काम है बोलने का हमारा काम है काम करने का। हम जो कार्य कर रहे है वो गुलाब कटारिया के लिए नही कर रहे है, हम किसी की चाकरी करने के लिए पैदा नही हुए है, हम देष सेवा का संकल्प लेकर राजनीति में आये है, लुटने , खसोटने के लिए नही आए है, हम लोगो को सही न्याय मिले व जो पिछडा है उसे आगे केसे लाये उसके लिए आये है। इसलिए पूरी ताकत के साथ चुनाव मे लग जाए, यो समझो बिमार हो गया, यो समझो खाट पर पडा, भगवान ने तुम्हे बिमार ही नही किया यो समझो, और अपने समस्त निजी कार्यो को भूल पार्टी का कार्य करे। उन्होने कहा चुनाव में गुलाब कटारिया या फुलसिंह मीणा को टिकिट मिल गया है इसलिए उनका कार्य करना है ऐसा नहीं हमें पार्टी के लिए कार्य करना है और जीत हार की चिंता मुझ पर छोड दे और मुझे उदयपुर से मुक्त रखे और मेरा कार्य आप कार्यकर्ता करेगे। इस बार मैं पूरे संभाग में घूमुंगा और कांग्रेस की जड़ो मे ऐसा तैजाब डालूंगा कि 28 में से 28 सीटे भाजपा की झोली में जायेगी, कांग्रेस ने पूरे देश को तबाह कर डाला.
बैठक को ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, जिलाध्यक्ष दिनेष भटट्, प्रमोद सामर, किरण जैन, प्रेमसिंह शक्तावत ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर जिला प्रमुख शांतिलाल मेघवाल, डेरी अध्यक्ष गीता पटेल, गिर्वा प्रधान तख्तसिंह , चंचल अग्रवाल, मनोहर चैधरी, शभू जैन, देवनारायण धाबाई, अमृत लाल मनारिया, गिरिष शर्मा,, राजेन्द्र बोर्दिया, ललित मेनारिया ,गजपाल सिंह , नारायण सिंह चदाना, डायालाल लबाना, युवा मोर्चा के गजेन्द्र भण्डारी, मोहन गूर्जर, किरण तातेड, ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष कृष्णकांत कुमावत, हेमलता जैन, पिकी मांडावत ,पारस जैन, सहित कार्यकर्ता उपस्थित थे।

सांप नेलवे हुए इकट्ठे:

कटारिय ने कार्यकर्ताओं का आव्हान किया कि ये चुनाव कोई सामान्य चुनाव नहीं है आज हमारे सामने सभी सांप नेवले इकटठ्े हो गए है, और आज देष की सभी देषद्रोहियो ताकतो ने कांग्रेस के साथ मिलकर हम से मुकाबला कर रहे है। हमारी पेदाईष ही राष्ट्र के लिए हुई है, हम किसी व्यक्ति के लिए पैदा नहीं हुए, न पार्टी के लिए पैदा हुए। हमसे मुकाबला करने का मतलब देषद्रोही ताकतो को आगे बढाने के लिए राज को झपट करके और राज के माध्यम से देषद्रोही ताकतो को यहा पनाह देना चाहते हो, वो मरे ही किसी किमत पर होने नही देगे। इस बार का चुनाव हमारी प्रतिष्ठा का चुनाव है, जीवन के संकल्प का चुनाव है

खेरवाडा विधायक का टिकिट कटने पर पार्टी कार्यालय पर किया विरोध प्रदर्शन।

उदयपुर। राजस्थान विधान सभा चुनाव के लिए भाजपा ने पहली लिस्ट जारी कर दी लेकिन लिस्ट के साथ ही अपनों के ही बगावती तेवर तो कार्यकर्ताओं का विरोध सहना पढ़ रहा है। खेरवाड़ा के वर्तमान विधायक नाना लाल अहारी का टिकिट काटने के बाद सोमवार को उनके कई समर्थक पार्टी कार्यालय पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन किया। खेरवाड़ा से भाजपा ने शंकरलाल खराड़ी को टिकिट दिया है।
सोमवार को पार्टी कार्यालय पर जहाँ एक तरफ गुलाबचंद कटारिया और फूलसिंह मीना को टिकिट मिले का जश्न मनाया जा रहा था वही दूसरी तरफ खेरवाडा से वर्तमान विधायक नानालाल अहारी को टिकट नहीं मिलने से उनके समर्थकों ने पार्टी कार्यालय के बाहर अपना जमावड़ा जमा दिया और अपना विरोध दर्ज कराया। पार्टी कार्यालय पहुचे नाना लाल अहारी के समर्थक सहित सभी आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने गृहमंत्री से वार्ताकर इस नारजगी को आलाकमान तक पहुंचाने की बात कही। हालाकि वर्तमान विधायक नानालाल अहारी खुद तो इस विरोध में शामिल नहीं हुए। लेकिन जिस तरह से उनके समर्थक और क्षेत्र के लोग विरोध करने के लिए पहुंचे थे उससे यह साफ हो रहा गया है कि कहीं ना कहीं इस विरोध में विधायक की भी मौन स्वीकृति है। इस विरोध के चलते नाना लाल अहारी के समर्थक करीब 1 घंटे तक पार्टी कार्यालय के बाहर जमे रहे और विधायक नानालाल के समर्थन में नारेबाजी करते रहे । गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा पहली सूची जारी करने के साथ ही उदयपुर जिले से खेरवाड़ा और मावली विधानसभा के वर्तमान विधायकों के टिकट काटे गए हैं जिसमें नानालाल अहारी और दली चंद डांगी शामिल है इस समय नानालाल अहारी का टिकट कटने के बाद खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में उनके समर्थकों में खासा आक्रोश देखा जा रहा है और यही वजह है कि सभी समर्थकों ने पार्टी कार्यालय पर इकट्ठा होकर अपना विरोध प्रकट किया।

मावली में भाजपा के खेमे में बगावत, कुलदीप सिंह ने बताई अपनी शक्ति , सकल राजपूत महासभा ने दिया समर्थन – धर्म नारायण की मुश्किलें बढ़ेगी।

उदयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने जैसे ही अपनी पहली सूचि जारी की वैसे ही बगावत के सूर भी उठ गए। बात कर रहे है हम उदयपुर जिले के मावली विधानसभा की यहाँ से धर्मनारायण जोशी को टिकिट दिया गया है। रात को धर्म नारायण जोशी को भाजपा ने मावली से अपना घोषित किया और सुबह होते होते मावली के युवा कुलदीप सिंह चुण्डावत ने अपने बगावती तेवर दिखा दिए। यही नहीं उन्होंने मावली डबोक स्थित धुनी माता के मंदिर में कार्यकर्ताओं का सम्मलेन आयोजित कर हज़ारों कार्यकर्ताओं के बिच अपना शक्ति प्रदर्शन कर यह बता दिया कि बाहरी व्यक्ति को भाजपा ने टिकिट जरूर देदिया है लेकिन जीत आसान नहीं होगी। हालाँकि धर्म नारायण जोशी पूर्व में मावली से चुनाव लद चुके है और हार का सामना करना पड़ा है। लेकिन इस बार उनके बाहरी होने का काफी विरोध है।
गौरतलब है कि धर्मनारायण जोशी उदयपुर शहर में रहते हैं और मावली में बाहरी स्वीकार नहीं, पैराशूट स्वीकार नहीं का नारा लग रहा है, जबकि धर्मनारायण जोशी 2008 के विधानसभा चुनाव में भी मावली से चुनाव लड़ चुके हैं. हालांकि उन्हें उस वक्त हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन हार का अंतर ज्यादा नहीं रहा था. इस बार मौजूदा विधायक दलीचंद डांगी का टिकट कटा है और जोशी को फिर मौका दिया गया है, लेकिन पिछले दो साल से चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे कुलदीप सिंह ने टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय लडऩे का ऐलान कर दिया है.
हालांकि, राजनीति के जानकारों का कहना है कि भाजपा को यहां भितरघात से ज्यादा खतरा नहीं है, बल्कि कांग्रेस की ओर से मिलने वाले टिकट पर हार-जीत तय होगी. क्योंकि कांग्रेस का उम्मीदवार मजबूत हुआ तो भाजपा को यहां कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा.
इधर दिन होते होते सकल राजपूत महासभा ने भी अपना समर्थन कुलदीप सिंह चुण्डावत को देदिया है।
सकल राजपूत महासभा मेवाड़ की सोमवार को संस्थापक तनवीर सिंह कृष्णावत की अध्यक्षता में हरिदास स्थित कार्यालय पर बैठक हुई जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी विधानसभा चुनाव में मावली सीट से निर्दलीय प्रत्याशी कुलदीप सिंह साकरिया खेड़ी का पूर्ण रूप से तन-मन-धन से समर्थन करेगा। तनवीर सिंह कृष्णावत ने कहा कि दलगत राजनीति से उपर उठकर समाज हित में वोट देने की अपील की है।, देहात अध्यक्ष गोपाल सिंह तितरडी, महामंत्री डाॅ. दिलिप सिंह चैहान,महेन्द्र सिंह, देवेन्द्र सिंह, डाॅ. घनश्यात सिंह रविन्द्र सिंह चैहान, लक्ष्मणसिंह चैहान सहित कार्यकर्ताओं ने बैठक में हिस्सा लिया।